आज का राशिफल 25 मई : कुछ राशियों के लिए खुशखबरी, कुछ को रहना होगा सतर्क

नई दिल्ली । 25 मई 2026, सोमवार का दिन ज्योतिषीय दृष्टि से कई राशियों के लिए महत्वपूर्ण बदलाव लेकर आने वाला है। ग्रहों की विशेष स्थिति के कारण कुछ राशियों के जीवन में तरक्की और खुशहाली के योग बन रहे हैं, जबकि कुछ को सतर्क रहकर दिन बिताने की सलाह दी जा रही है। मेष राशि के जातकों के लिए दिन चुनौतियों पर विजय और आत्मविश्वास बढ़ाने वाला रहेगा। करियर में नए अवसर मिल सकते हैं और आर्थिक स्थिति मजबूत होने के संकेत हैं। वृषभ राशि के लोगों के लिए रचनात्मकता और स्थिरता का समय है, जहां निवेश और योजनाएं लाभ दे सकती हैं। मिथुन राशि वालों के लिए यह दिन सुख-सुविधाओं और तरक्की का संकेत दे रहा है, वहीं कर्क राशि के जातकों के लिए पराक्रम और नई जिम्मेदारियों का समय रहेगा। सिंह राशि के लोगों के लिए आर्थिक लाभ और पारिवारिक सुख के योग बन रहे हैं। कन्या राशि के जातकों के लिए यह दिन नई ऊर्जा और सफलता लेकर आएगा, जबकि तुला राशि वालों को खर्च और मानसिक तनाव पर नियंत्रण रखने की जरूरत होगी। वृश्चिक राशि के लिए यह दिन लाभ और पदोन्नति के अवसर ला सकता है। धनु राशि के जातकों को करियर में सफलता और सामाजिक प्रतिष्ठा मिलेगी, वहीं मकर राशि वालों के लिए भाग्य का पूरा साथ रहेगा और धार्मिक कार्यों में रुचि बढ़ेगी। कुंभ राशि के लिए दिन कुछ चुनौतियों भरा हो सकता है, इसलिए सावधानी और संयम जरूरी रहेगा। मीन राशि के जातकों के लिए साझेदारी और प्रेम संबंधों में मधुरता बढ़ेगी और व्यापार में विस्तार के योग बनेंगे। कुल मिलाकर यह दिन कुछ राशियों के लिए बेहद शुभ साबित होगा, जबकि कुछ को धैर्य और समझदारी के साथ आगे बढ़ने की जरूरत होगी।
होर्मुज स्ट्रेट खुलने के संकेत, अमेरिका-ईरान समझौते की बढ़ी उम्मीद; दुनिया को मिल सकती है राहत

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में महीनों से जारी तनाव अब कम होता दिखाई दे रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम और व्यापक समझौते को लेकर कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक दोनों देश एक संभावित डील के काफी करीब पहुंच चुके हैं। इसी बीच ईरान ने बड़ा संकेत देते हुए कहा है कि अगर समझौता अंतिम रूप लेता है तो रणनीतिक रूप से बेहद अहम होर्मुज स्ट्रेट में अगले 30 दिनों के भीतर जहाजों की आवाजाही फिर से सामान्य हो सकती है। दरअसल 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान पर हमलों के बाद पूरे पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर पहुंच गया था। इसके बाद ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर निगरानी और नियंत्रण सख्त कर दिया था, जिससे इस समुद्री मार्ग से गुजरने वाले जहाजों की संख्या में भारी गिरावट आ गई। दुनिया की करीब 20 प्रतिशत तेल और गैस सप्लाई इसी समुद्री रास्ते से गुजरती है, इसलिए इस क्षेत्र में तनाव बढ़ने से वैश्विक ऊर्जा बाजार में भी उथल-पुथल मच गई थी। ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार संभावित समझौते में युद्ध को खत्म करने, क्षेत्र में तनाव कम करने और समुद्री यातायात बहाल करने जैसे मुद्दों पर सहमति बनने की कोशिश हो रही है। ईरान ने संकेत दिए हैं कि यदि सभी पक्ष सहमत होते हैं तो एक महीने के भीतर जहाजों की आवाजाही युद्ध-पूर्व स्थिति में लौट सकती है। उधर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी हाल के दिनों में दावा कर चुके हैं कि ईरान के साथ समझौते को लेकर सकारात्मक प्रगति हुई है। हालांकि परमाणु कार्यक्रम और हाईली एनरिच्ड यूरेनियम जैसे मुद्दों पर अभी दोनों देशों के बीच मतभेद बने हुए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर होर्मुज स्ट्रेट पूरी तरह सामान्य होता है तो इसका सबसे बड़ा असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर पड़ेगा। इससे कच्चे तेल की कीमतों में राहत मिल सकती है और भारत समेत कई देशों को ऊर्जा संकट से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
बलूचिस्तान में फिर दहला पाकिस्तान, फौजियों से भरी ट्रेन पर आत्मघाती हमला; BLA ने ली जिम्मेदारी

नई दिल्ली। पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में एक बार फिर बड़ा आतंकी हमला हुआ है। क्वेटा के चमन फाटक इलाके के पास सैन्य कर्मियों को लेकर जा रही ट्रेन को आत्मघाती हमलावर ने निशाना बनाया। धमाका इतना भीषण था कि ट्रेन के कई डिब्बे पटरी से उतर गए और मौके पर आग लग गई। शुरुआती रिपोर्ट्स के मुताबिक हमले में 23 से ज्यादा सुरक्षाकर्मियों की मौत हुई है, जबकि करीब 47 लोग घायल बताए जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि हमला उस समय हुआ जब पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर ईरान दौरे से लौटे थे। इसी वजह से इस घटना को पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल माना जा रहा है। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार ट्रेन क्वेटा कैंट की ओर जा रही थी और उसमें पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियों के जवान सवार थे। धमाके के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई। चश्मदीदों के मुताबिक विस्फोट के तुरंत बाद फायरिंग की आवाजें भी सुनाई दीं। सुरक्षा बलों ने पूरे इलाके को घेर लिया है और जांच एजेंसियां हमले की पड़ताल में जुट गई हैं। इस हमले की जिम्मेदारी बलोच लिबरेशन आर्मी (BLA) ने ली है। संगठन के प्रवक्ता जीयंद बलोच ने बयान जारी कर कहा कि BLA की फिदायीन यूनिट ‘मजीद ब्रिगेड’ ने इस ऑपरेशन को अंजाम दिया। संगठन का दावा है कि ट्रेन में पाकिस्तानी सेना और सुरक्षा एजेंसियों के जवान सफर कर रहे थे, जिन्हें निशाना बनाया गया। विशेषज्ञ इस हमले को ‘जाफर एक्सप्रेस 2.0’ बता रहे हैं। दरअसल मार्च 2025 में भी बलोचिस्तान में जाफर एक्सप्रेस को IED ब्लास्ट कर हाईजैक किया गया था, जिसमें बड़ी संख्या में पाकिस्तानी सैनिक फंसे थे। उस घटना ने पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी थी। हाल के दिनों में पाकिस्तानी सेना बलोचिस्तान में BLA के खिलाफ लगातार ऑपरेशन चला रही थी। माना जा रहा है कि यह हमला उसी कार्रवाई का बदला हो सकता है। घटना के बाद पूरे इलाके में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है और रेलवे रूट पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है।
ट्रंप का बड़ा दावा: ईरान से डील लगभग तय, खुल सकता है होर्मुज़ स्ट्रेट; मिडिल ईस्ट में शांति की उम्मीद बढ़ी

नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ संभावित शांति समझौते को लेकर बड़ा दावा करते हुए कहा है कि दोनों देशों के बीच डील “काफी हद तक तय” हो चुकी है और जल्द ही इसे अंतिम रूप दिया जा सकता है। ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर कहा कि अमेरिका, ईरान और मध्य-पूर्व के कई सहयोगी देशों के बीच शांति को लेकर महत्वपूर्ण बातचीत हुई है। उन्होंने बताया कि इस प्रस्तावित समझौते में होर्मुज़ स्ट्रेट को दोबारा पूरी तरह खोलने का मुद्दा भी शामिल है, जिससे वैश्विक तेल और गैस सप्लाई पर पड़ा दबाव कम हो सकता है। ट्रंप ने यह भी कहा कि उनकी इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से फोन पर सकारात्मक बातचीत हुई है। हालांकि ट्रंप ने समझौते की पूरी डिटेल साझा नहीं की, लेकिन साफ कहा कि किसी भी डील के तहत ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से पूरी तरह रोका जाएगा। दूसरी ओर ईरान ने संकेत दिए हैं कि बातचीत में कुछ नरमी जरूर आई है, लेकिन अभी मुख्य मुद्दों पर सहमति नहीं बनी है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmail Baghaei ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच 14 बिंदुओं वाले एक ढांचे पर चर्चा चल रही है, जिसे अगले 30 से 60 दिनों में अंतिम समझौते की दिशा में आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होंने अमेरिका पर विरोधाभासी बयान देने का आरोप भी लगाया। गौरतलब है कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर बड़े हमलों के बाद पूरे मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ गया था, जिसके जवाब में ईरान ने इजराइल और अमेरिकी सहयोगी देशों को निशाना बनाया था। अप्रैल की शुरुआत में युद्धविराम के बाद से दोनों देशों के बीच बैकडोर बातचीत जारी है और अब ट्रंप के ताजा बयान ने संभावित डील और होर्मुज़ स्ट्रेट खुलने की अटकलों को और तेज कर दिया है।
ईरान ने अमेरिका को दिखाए तेवर, बोला- ‘एनरिच्ड यूरेनियम नहीं देंगे’; ट्रम्प के दावे पर बढ़ा नया विवाद

नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते की चर्चाओं के बीच नया विवाद खड़ा हो गया है। ईरान ने साफ कर दिया है कि वह अपना हाईली एनरिच्ड यूरेनियम अमेरिका को नहीं सौंपेगा। एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने कहा कि मौजूदा शुरुआती डील में परमाणु कार्यक्रम शामिल ही नहीं है और इस मुद्दे पर अंतिम बातचीत बाद में होगी। इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया था कि ईरान को संवर्धित यूरेनियम रखने नहीं दिया जाएगा और अमेरिका इसे अपने नियंत्रण में लेगा। ट्रम्प के बयान के बाद अमेरिकी मीडिया में खबरें आई थीं कि तेहरान यूरेनियम भंडार छोड़ने पर राजी हो गया है, लेकिन अब ईरान ने इन दावों को खारिज कर दिया है। एक रिपोर्ट के मुताबिक ईरानी सूत्रों ने कहा कि अभी जो समझौते की रूपरेखा तैयार हो रही है, उसका मुख्य फोकस युद्धविराम, क्षेत्रीय तनाव कम करना और होर्मुज जलडमरूमध्य में सामान्य आवाजाही बहाल करना है। परमाणु कार्यक्रम पर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। ईरान का कहना है कि उसका परमाणु अधिकार राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा है और उस पर किसी दबाव में समझौता नहीं किया जाएगा। इस बीच ईरानी न्यूज एजेंसियों ने दावा किया है कि संभावित समझौते में अमेरिका और इजराइल की ओर से ईरान या उसके समर्थक संगठनों पर हमला नहीं करने की शर्त शामिल हो सकती है। बदले में ईरान भी पहले हमला नहीं करने का भरोसा देगा। वहीं इजराइल और हिजबुल्लाह के बीच जारी तनाव को कम करने की कोशिशें भी समझौते का हिस्सा बताई जा रही हैं। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने संकेत दिए हैं कि अगले कुछ घंटों में ईरान को लेकर बड़ा ऐलान हो सकता है। नई दिल्ली में विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस में रूबियो ने कहा कि अमेरिका की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि ईरान कभी परमाणु हथियार हासिल न कर सके। उन्होंने होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों को निशाना बनाने की ईरानी धमकियों को अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ बताया। उधर ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने स्पष्ट कर दिया कि देश की सुरक्षा और परमाणु नीति से जुड़े बड़े फैसले सुप्रीम लीडर की मंजूरी के बिना नहीं लिए जाएंगे। वहीं रूस ने भी अमेरिका पर वार्ता को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने का आरोप लगाया है। रूसी अधिकारी मिखाइल उल्यानोव ने कहा कि बातचीत की असली स्थिति उतनी सकारात्मक नहीं है, जितनी दिखाई जा रही है। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव का असर दुनियाभर की अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई देने लगा है। कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के चलते भारत में पेट्रोल-डीजल फिर महंगे हो गए हैं। वहीं होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही सामान्य होने की उम्मीद के बीच दुनिया की नजर अब अमेरिका-ईरान वार्ता पर टिकी हुई है
होर्मुज स्ट्रेट खुलने के संकेत, दुनिया को मिल सकती है राहत; 30 दिन में सामान्य हो सकती है जहाजों की आवाजाही

नई दिल्ली। मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच दुनिया के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। ईरान ने संकेत दिए हैं कि रणनीतिक रूप से बेहद अहम होर्मुज जलडमरूमध्य जल्द फिर से सामान्य रूप से खुल सकता है। ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अगले 30 दिनों के भीतर होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही युद्ध से पहले के स्तर पर लौट सकती है। इससे वैश्विक तेल और गैस संकट कम होने की उम्मीद बढ़ गई है। ईरान की समाचार एजेंसी तस्नीम ने वरिष्ठ अधिकारियों के हवाले से बताया कि अमेरिका और ईरान के बीच चल रही वार्ताओं में सकारात्मक प्रगति हुई है। यदि बातचीत सफल रहती है तो होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल टैंकर और कारोबारी जहाज पहले की तरह गुजरने लगेंगे। यही समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा रूट्स में से एक माना जाता है, जहां से खाड़ी देशों का बड़ा हिस्सा तेल और गैस दुनिया तक पहुंचाता है। 28 फरवरी को ईरान पर इजरायल और अमेरिका के हमलों के बाद इस क्षेत्र में तनाव बढ़ गया था। इसके बाद ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही पर कड़ी निगरानी और कई स्तरों पर रोक लगा दी थी। अमेरिकी नौसेना की गतिविधियों और क्षेत्रीय सैन्य तनाव के कारण इस समुद्री रूट पर ट्रैफिक लगभग ठप हो गया था। युद्ध से पहले यहां से रोजाना 125 से 140 जहाज गुजरते थे, लेकिन संघर्ष के बाद संख्या में भारी गिरावट आ गई। इसका असर दुनिया के कई देशों, खासकर भारत और एशियाई देशों पर पड़ा, जो खाड़ी देशों से तेल और गैस आयात पर निर्भर हैं। ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल देखने को मिला और कई देशों में ईंधन संकट की आशंका बढ़ गई। भारत दौरे पर आए अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने भी संकेत दिए कि ईरान के साथ बातचीत में बड़ी सफलता मिल सकती है। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने दावा किया कि अमेरिका और ईरान समझौते के बेहद करीब हैं। उनके मुताबिक, यदि यह डील फाइनल होती है तो युद्ध खत्म होने के साथ होर्मुज स्ट्रेट भी पूरी तरह खुल जाएगा। रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान इस पूरे समझौते में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। हाल के दिनों में पाकिस्तान के सैन्य और राजनीतिक प्रतिनिधिमंडल लगातार ईरान के दौरे कर रहे हैं। पाकिस्तानी सेना प्रमुख असीम मुनीर की तेहरान यात्रा के बाद पाकिस्तान ने कहा कि वार्ता में “उत्साहजनक प्रगति” हुई है और अंतिम सहमति की दिशा में तेजी से काम चल रहा है। हालांकि ईरान ने अभी तक अपने परमाणु कार्यक्रम पर किसी भी तरह की रियायत देने की पुष्टि नहीं की है। लेकिन संकेत मिल रहे हैं कि संभावित समझौते में युद्धविराम, समुद्री व्यापार की बहाली और ईरानी तेल पर लगे प्रतिबंधों में राहत जैसे मुद्दे शामिल हो सकते हैं। अगर ऐसा होता है तो इसका सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ेगा और दुनिया को लंबे समय से चले आ रहे तेल-गैस संकट से बड़ी राहत मिल सकती है।
रूस-यूक्रेन युद्ध: ओरेश्निक हाइपरसोनिक मिसाइल समेत बड़े हमले में 4 की मौत, कीव में भारी तबाही; जेलेंस्की बोले- रूस पागल हो चुका है
नई दिल्ली। रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच रविवार को एक बार फिर बड़ा सैन्य तनाव देखने को मिला जब रूस ने यूक्रेन पर मिसाइलों और ड्रोनों से भीषण हमला किया। इस हमले में कम से कम 4 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई दर्जन लोग घायल हुए हैं। हमलों का मुख्य निशाना राजधानी कीव और उसके आसपास के इलाके रहे। रूसी रक्षा मंत्रालय के अनुसार यह हमला यूक्रेन की ओर से किए गए हमलों के जवाब में किया गया है। इस दौरान रूस ने ओरेश्निक हाइपरसोनिक मिसाइल का भी इस्तेमाल किया, जिसे परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम बताया जाता है। यह मिसाइल अपनी तेज गति और आधुनिक तकनीक के कारण मौजूदा एयर डिफेंस सिस्टम के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण मानी जाती है। यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने रूस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि हमलों में जानबूझकर नागरिक इलाकों को निशाना बनाया गया है। उन्होंने बताया कि पानी आपूर्ति की एक सुविधा, एक बाजार, कई घर और स्कूल इस हमले में क्षतिग्रस्त हुए हैं। जेलेंस्की ने टेलीग्राम पर कहा कि रूसी मिसाइल बिला त्सेरक्वा शहर के पास गिरी और रूस “पागल हो चुका है।” यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्री सिबिहा ने दावा किया कि ओरेश्निक मिसाइल में डमी वारहेड लगाया गया था। उन्होंने कहा कि रूस द्वारा यह मिसाइल सिर्फ डर पैदा करने और शक्ति प्रदर्शन के लिए इस्तेमाल की जा रही है। यूक्रेनी वायुसेना के मुताबिक रूस ने रातभर में लगभग 600 ड्रोन और 90 मिसाइलें दागीं, जिनमें से 604 को एयर डिफेंस सिस्टम ने मार गिराया। अधिकारियों ने इसे राजधानी पर हुए सबसे बड़े हमलों में से एक बताया है। इस बीच रूस ने आरोप लगाया कि यूक्रेन की ओर से उसके नियंत्रण वाले क्षेत्रों पर हमले किए गए थे, जिनके जवाब में यह कार्रवाई की गई। रूसी रक्षा मंत्रालय ने कहा कि यूक्रेन के “आतंकी हमलों” के जवाब में ओरेश्निक और अन्य बैलिस्टिक मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया। अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया भी सामने आई है। यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख काजा कैलस ने ओरेश्निक मिसाइल के इस्तेमाल को बेहद खतरनाक परमाणु शक्ति प्रदर्शन बताया। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और जर्मनी के चांसलर फ्रीडरिष मर्ज ने भी इस हमले की निंदा करते हुए इसे युद्ध में गंभीर बढ़ोतरी बताया है। यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध पहले से ही चरम पर है और दोनों देश लगातार एक-दूसरे पर हमले कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की कार्रवाइयां संघर्ष को और अधिक खतरनाक दिशा में ले जा सकती हैं।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो बोले- नस्लीय टिप्पणियां अमेरिका की पहचान नहीं, भारतीय समुदाय की जमकर की तारीफ

नई दिल्ली। नई दिल्ली दौरे पर पहुंचे अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने अमेरिका में भारतीयों के खिलाफ हो रही नस्लीय टिप्पणियों और भेदभाव की घटनाओं पर निराशा जताई है। विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में रूबियो ने साफ कहा कि कुछ लोगों की आपत्तिजनक टिप्पणियों को पूरे अमेरिका की सोच नहीं माना जा सकता। उन्होंने कहा कि “हर देश में कुछ बेवकूफ लोग होते हैं, जो ऑनलाइन या सार्वजनिक तौर पर गलत बातें करते हैं, लेकिन वे पूरे देश का प्रतिनिधित्व नहीं करते।” रूबियो ने अमेरिका को दुनिया के सबसे स्वागत करने वाले देशों में से एक बताते हुए कहा कि भारतीय मूल के लोगों ने अमेरिका की तरक्की में बड़ी भूमिका निभाई है। उन्होंने भारतीय समुदाय की जमकर सराहना करते हुए कहा कि टेक्नोलॉजी, हेल्थकेयर, बिजनेस और पब्लिक सर्विस जैसे कई अहम क्षेत्रों में भारतीय-अमेरिकियों का योगदान बेहद महत्वपूर्ण रहा है। उनके मुताबिक भारतीय समुदाय ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था में 20 अरब डॉलर से ज्यादा का योगदान दिया है और अमेरिका चाहता है कि यह साझेदारी आगे और मजबूत हो। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब रूबियो से अमेरिका में भारतीयों के खिलाफ नस्लवाद को लेकर सवाल पूछा गया, तब विदेश मंत्री एस जयशंकर हल्की मुस्कान के साथ नजर आए। हालांकि भारतीय प्रतिनिधिमंडल की ओर से इस मुद्दे पर अलग से कोई बयान नहीं दिया गया। रूबियो ने भारत-अमेरिका रिश्तों को दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदारियों में से एक बताते हुए कहा कि दोनों देश सिर्फ सहयोगी नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर मजबूत साझेदार हैं। उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतंत्र हैं और दोनों देशों के बीच रक्षा, व्यापार, ऊर्जा, रणनीतिक तकनीक और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर गहरा सहयोग लगातार बढ़ रहा है। वहीं विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी भारत-अमेरिका संबंधों को व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी करार दिया। उन्होंने कहा कि कई अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर दोनों देशों के हित एक-दूसरे से मेल खाते हैं और भविष्य में यह संबंध और मजबूत होंगे। मार्को रूबियो इस समय भारत के बहु-दिवसीय दौरे पर हैं। अपने दौरे के दौरान वह क्वाड देशों की विदेश मंत्रियों की बैठक में भी हिस्सा लेंगे। इस समूह में भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं। माना जा रहा है कि इस बैठक में इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की सुरक्षा, चीन की गतिविधियों और वैश्विक रणनीतिक सहयोग जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा होगी।
छतरपुर में दर्दनाक हादसा: तेंदूपत्ता तोड़ते समय पेड़ से गिरा युवक, रास्ते में मौत

छतरपुर । छतरपुर जिले के बमीठा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम सूरजपुरा में एक दर्दनाक हादसे ने पूरे इलाके को शोक में डुबो दिया। यहां तेंदूपत्ता तोड़ने के दौरान एक 36 वर्षीय युवक की पेड़ से गिरकर मौत हो गई। यह घटना शनिवार को उस समय हुई जब युवक पेड़ पर चढ़कर तेंदू के पत्ते तोड़ रहा था, तभी अचानक उसका संतुलन बिगड़ गया और वह नीचे गिर पड़ा। गिरने के बाद युवक को गंभीर अंदरूनी चोटें आईं, जिससे उसकी हालत बेहद नाजुक हो गई। परिजनों ने तुरंत उसे बचाने की कोशिश की और खेत से चारपाई के सहारे घर लाया गया। इसके बाद उसे किराए की टैक्सी से जिला अस्पताल छतरपुर ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार शुरू किया। अस्पताल में जांच के बाद डॉक्टरों ने स्थिति गंभीर देखते हुए उसे ग्वालियर रेफर कर दिया। परिजन उसे बेहतर इलाज के लिए ग्वालियर ले जा रहे थे, लेकिन रास्ते में ही युवक ने दम तोड़ दिया। घटना के बाद परिजनों में कोहराम मच गया और पूरे गांव में मातम पसर गया। मृतक की पहचान सूरजपुरा निवासी 36 वर्षीय संतोष प्रजापति के रूप में हुई है। परिजनों के अनुसार, घटना के समय वह रोज की तरह तेंदूपत्ता तोड़ने के लिए जंगल की ओर गया था। अचानक हुए इस हादसे ने परिवार की खुशियों को गहरे सदमे में बदल दिया। ग्वालियर से वापस लाए जाने के बाद शव को छतरपुर जिला अस्पताल में रखा गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। रविवार को शव का पोस्टमार्टम कराया गया और पुलिस ने मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है यह घटना ग्रामीण क्षेत्रों में तेंदूपत्ता संग्रहण के दौरान होने वाले जोखिमों और सुरक्षा उपायों की कमी को भी उजागर करती है।
फिल्मों के नाम में ‘के’ था सफलता का फॉर्मूला, लेकिन एक कहानी ने तोड़ दिया करण जौहर का भ्रम

नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा की दुनिया में जब सफल फिल्म निर्माताओं का जिक्र होता है तो निर्देशक और निर्माता Karan Johar का नाम प्रमुखता से सामने आता है। बीते कई वर्षों में उन्होंने अपनी फिल्मों के जरिए दर्शकों के बीच अलग पहचान बनाई है। बड़े सेट, भावनात्मक कहानियां, रिश्तों की गहराई और पारिवारिक मूल्यों को पर्दे पर भव्य तरीके से दिखाने की उनकी शैली ने उन्हें फिल्म जगत का एक बड़ा नाम बना दिया। हालांकि फिल्मों के अलावा करण अपनी निजी सोच और मान्यताओं को लेकर भी कई बार चर्चा में रहे हैं। एक समय ऐसा था जब करण जौहर न्यूमरोलॉजी यानी अंकों और अक्षरों के प्रभाव पर काफी विश्वास करते थे। उनका मानना था कि अंग्रेजी का ‘K’ अक्षर उनके लिए बेहद शुभ है और इसी वजह से उनकी फिल्मों को सफलता मिलती है। यही कारण था कि उन्होंने लगातार अपनी फिल्मों के नाम ऐसे चुने जिनकी शुरुआत इसी अक्षर से होती थी। उनकी कई चर्चित और सफल फिल्मों के नाम इसी पैटर्न पर आधारित रहे। उस दौर में फिल्म इंडस्ट्री में भी न्यूमरोलॉजी को लेकर खास आकर्षण देखा जाता था और कई लोग नामों की स्पेलिंग तक बदलते नजर आते थे। करण जौहर की फिल्मी यात्रा भी काफी दिलचस्प रही है। फिल्मी माहौल में बड़े होने के कारण उनका झुकाव बचपन से सिनेमा की ओर था। उन्होंने शुरुआत पर्दे के पीछे काम करते हुए की और बाद में निर्देशन के क्षेत्र में कदम रखा। उनकी पहली निर्देशित फिल्म ने उन्हें बड़ी पहचान दिलाई और उसके बाद उन्होंने कई यादगार फिल्मों का निर्माण किया। उनकी फिल्मों ने केवल बॉक्स ऑफिस पर सफलता हासिल नहीं की बल्कि दर्शकों के दिलों में भी खास जगह बनाई। लेकिन समय के साथ करण की सोच में बदलाव आया। उन्होंने एक बातचीत के दौरान बताया था कि निर्देशक Rajkumar Hirani की फिल्म Lage Raho Munna Bhai देखने के बाद उनकी सोच बदल गई। फिल्म में अंधविश्वास और न्यूमरोलॉजी जैसे विषयों को हल्के अंदाज में दिखाया गया था, जिसने उन्हें सोचने पर मजबूर कर दिया। उन्हें महसूस हुआ कि किसी फिल्म की सफलता उसके नाम के पहले अक्षर से नहीं बल्कि उसकी कहानी, मेहनत और दर्शकों से जुड़ाव से तय होती है। इसके बाद उन्होंने फिल्मों के नाम को लेकर अपनी पुरानी मान्यता छोड़ दी और नए विचारों के साथ आगे बढ़ना शुरू किया। आने वाले वर्षों में उन्होंने कई अलग-अलग शीर्षकों वाली सफल फिल्में दीं और निर्माता के रूप में नए कलाकारों को भी मौका दिया। आज करण जौहर केवल एक सफल निर्देशक नहीं बल्कि हिंदी सिनेमा की बदलती सोच और आधुनिक फिल्म निर्माण शैली की एक बड़ी पहचान बन चुके हैं। उनकी यात्रा यह भी दिखाती है कि समय के साथ विचार बदलना और नई सोच अपनाना सफलता का अहम हिस्सा हो सकता है।