कटनी में सड़क हादसा और बवाल: ट्रक की टक्कर से 4 घायल, ग्रामीणों का चक्का जाम

कटनी। कटनी जिले के बड़वारा थाना क्षेत्र अंतर्गत गणेशपुर-विलायत कला मार्ग पर रविवार को एक बड़ा सड़क हादसा हो गया। सलैया गांव के पास तेज रफ्तार ट्रक ने सामने से आ रही कार को जोरदार टक्कर मार दी, जिससे कार में सवार दो महिलाओं सहित चार लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और स्थानीय लोग तुरंत राहत कार्य में जुट गए। बताया गया कि कार सवार सभी लोग इमिलिया गांव के निवासी हैं और अपने रिश्तेदारों से मिलकर वापस लौट रहे थे। टक्कर इतनी भीषण थी कि कार पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। आसपास मौजूद ग्रामीणों ने काफी मशक्कत के बाद वाहन में फंसे लोगों को बाहर निकाला और निजी वाहनों की मदद से अस्पताल पहुंचाया, जहां उनका इलाज जारी है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि हादसे के बाद 108 एम्बुलेंस समय पर नहीं पहुंची, जिसके कारण घायलों को निजी साधनों से अस्पताल ले जाना पड़ा। इस घटना के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखने को मिला। घटना के विरोध में ग्रामीणों ने सड़क पर उतरकर कुछ समय के लिए चक्काजाम कर दिया। ग्रामीणों का कहना है कि इस मार्ग पर लंबे समय से ओवरलोड और तेज रफ्तार भारी वाहन धड़ल्ले से दौड़ रहे हैं, जिससे आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं। साथ ही, इन वाहनों के कारण सड़क की हालत भी लगातार खराब हो रही है। ग्रामीणों ने अवैध रेत उत्खनन और परिवहन के गंभीर आरोप भी लगाए हैं। स्थानीय निवासी विजय कुमार के अनुसार खरहटा-देवरी महानदी रेत खदान से बड़े पैमाने पर नियमों के खिलाफ रेत का परिवहन किया जा रहा है। भारी वाहन बिना किसी रोक-टोक के गांवों के संपर्क मार्गों से गुजरते हैं, जिससे लोगों की जान खतरे में पड़ गई है। हंगामे की सूचना मिलते ही बड़वारा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को संभाला। पुलिस ने ग्रामीणों को समझाइश दी और ओवरलोड वाहनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया, जिसके बाद ग्रामीणों ने चक्काजाम समाप्त कर दिया। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और घायलों के उपचार पर नजर रखी जा रही है।
फालता उपचुनाव में बदले राजनीतिक समीकरण, BJP जीत के बेहद करीब, TMC को बड़ा झटका

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की फालता विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव की मतगणना ने राज्य की राजनीति में नया संदेश देने का काम किया है। शुरुआती रुझानों से लेकर लगातार सामने आ रहे आंकड़ों तक भारतीय जनता पार्टी ने जिस तरह बड़ी बढ़त बनाई, उसने चुनावी तस्वीर लगभग साफ कर दी है। भाजपा उम्मीदवार ने एक लाख से अधिक वोटों की बढ़त हासिल कर जीत की ओर मजबूत कदम बढ़ा दिए हैं। दूसरी ओर तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार जहांगीर खान, जो कुछ समय पहले तक चर्चा के केंद्र में थे, चुनावी मुकाबले में चौथे स्थान पर पहुंचते दिखाई दे रहे हैं। फालता सीट पर हुए पुनर्मतदान के बाद यह मुकाबला पहले से ही राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा था। मतदान से ठीक पहले तृणमूल कांग्रेस उम्मीदवार जहांगीर खान द्वारा चुनाव से पीछे हटने की घोषणा ने पूरे चुनावी समीकरण को बदल दिया था। हालांकि तकनीकी रूप से उनका नाम और चुनाव चिन्ह मतपत्र प्रक्रिया में मौजूद रहा, लेकिन उनके इस फैसले ने राजनीतिक माहौल को पूरी तरह प्रभावित किया। इसका असर मतगणना के दौरान भी साफ दिखाई दिया, जहां अपेक्षा से बिल्कुल अलग तस्वीर सामने आती नजर आई। मतगणना के कई चरण पूरे होने के बाद भाजपा उम्मीदवार ने लगातार अपनी बढ़त मजबूत रखी। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार उन्हें भारी संख्या में मतदाताओं का समर्थन मिलता दिखाई दिया। वहीं दूसरे स्थान के लिए भी मुकाबला बना रहा, लेकिन तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार उम्मीद के अनुसार प्रदर्शन नहीं कर सके। चुनावी विश्लेषकों का मानना है कि इस उपचुनाव में परिस्थितियों ने सामान्य राजनीतिक समीकरणों को बदल दिया और इसका सीधा लाभ भाजपा को मिला। फालता विधानसभा सीट दक्षिण 24 परगना जिले के अंतर्गत आती है और राज्य की महत्वपूर्ण राजनीतिक सीटों में गिनी जाती है। वर्षों तक यह क्षेत्र अलग-अलग राजनीतिक दलों के प्रभाव का केंद्र रहा है। पहले इसे वामपंथी राजनीति का मजबूत गढ़ माना जाता था, लेकिन बाद के वर्षों में तृणमूल कांग्रेस ने यहां अपनी पकड़ मजबूत की और लगातार चुनावी सफलता हासिल की। हालांकि इस बार के चुनावी रुझान नए बदलाव की ओर संकेत करते दिखाई दे रहे हैं। राजनीतिक जानकारों की नजर अब अंतिम परिणामों पर टिकी हुई है, लेकिन मौजूदा स्थिति ने इतना स्पष्ट कर दिया है कि फालता का यह चुनाव सिर्फ एक सीट का मुकाबला नहीं रहा। इसने बंगाल की बदलती राजनीतिक दिशा और मतदाताओं के बदलते रुझानों पर भी नई बहस शुरू कर दी है। अगर अंतिम नतीजों में यही रुझान कायम रहता है तो यह भाजपा के लिए एक बड़ी राजनीतिक उपलब्धि और तृणमूल कांग्रेस के लिए गंभीर आत्ममंथन का विषय बन सकता है।
जल संकट से हाहाकार: इंदौर में विरोध, रतलाम में भी सड़क पर प्रदर्शन

इंदौर। इंदौर में भीषण गर्मी के बीच गहराते जल संकट ने लोगों का गुस्सा सड़क पर उतार दिया। रविवार को शहर के अलग-अलग हिस्सों में “पानी दो-पानी दो” के नारे गूंजते रहे, जब कांग्रेस पार्षदों के नेतृत्व में रहवासियों ने चक्काजाम और उग्र प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के चलते शहर की यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई और कई प्रमुख मार्गों पर घंटों तक जाम की स्थिति बनी रही। सुबह से ही पालदा चौराहा और दीनदयाल उपाध्याय चौराहा (सुखलिया जोन-5) पर बड़ी संख्या में लोग एकत्र हो गए। वार्ड-75 और वार्ड-64 के रहवासी पार्षद कुणाल सोलंकी के नेतृत्व में सड़क पर बैठ गए, वहीं वार्ड-27 में पार्षद राजू भदौरिया के साथ स्थानीय लोग भी विरोध में उतर आए। प्रदर्शनकारियों ने नगर निगम और महापौर के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। स्थिति तब और बिगड़ गई जब चक्काजाम के कारण सिटी बसें और अन्य वाहन बीच रास्ते में फंस गए। तपती धूप में सैकड़ों यात्री, बुजुर्ग और बच्चे घंटों परेशान होते रहे। कई मार्गों पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और शहर की रफ्तार पूरी तरह थम गई। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि कई इलाकों में पहले जो निःशुल्क पानी वितरण व्यवस्था थी, उसे बंद कर दिया गया है, जिससे आम जनता की परेशानी और बढ़ गई है। महिलाओं और पुरुषों ने खाली बर्तन लेकर विरोध जताया और नगर निगम प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। स्थानीय जनप्रतिनिधियों के अनुसार, इंदौर में जल संकट के पीछे कई कारण हैं। कई नई कॉलोनियों में नर्मदा जल की पाइपलाइन नहीं पहुंची है, टैंकरों की कमी के कारण नियमित आपूर्ति बाधित है और भीषण गर्मी के चलते भूजल स्तर भी लगातार गिर रहा है। इन सभी कारणों ने मिलकर हालात को और गंभीर बना दिया है। लंबे समय तक चले विरोध के बाद नगर निगम और पुलिस प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे और स्थिति को संभालने की कोशिश की। अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि प्रभावित इलाकों में अतिरिक्त टैंकर भेजे जाएंगे और जल आपूर्ति व्यवस्था को जल्द दुरुस्त किया जाएगा। प्रशासन के आश्वासन के बाद प्रदर्शन समाप्त कर दिया गया, लेकिन कांग्रेस नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ तो शहरव्यापी उग्र आंदोलन किया जाएगा।
माथा टेका, पूजा की और फिर दिखाया असली चेहरा, मंदिर में अनोखे अंदाज में हुई चोरी ने सबको किया हैरान

नई दिल्ली। महाराष्ट्र से एक ऐसी हैरान करने वाली घटना सामने आई है जिसने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि अपराधी अब वारदात को अंजाम देने के लिए किस हद तक नई तरकीबें अपनाने लगे हैं। धार्मिक आस्था और श्रद्धा से जुड़े स्थान को निशाना बनाकर अंजाम दी गई इस घटना ने लोगों को चौंका दिया है। सबसे अधिक चर्चा इस बात की हो रही है कि आरोपी ने घटना को जिस तरीके से अंजाम दिया, उसने पूरी वारदात को बेहद असामान्य बना दिया। घटना के बाद अब यह मामला लोगों के बीच चर्चा और हैरानी दोनों का विषय बना हुआ है। बताया जा रहा है कि आरोपी किसी सामान्य श्रद्धालु की तरह मंदिर परिसर में पहुंचा था। उसके व्यवहार और गतिविधियों को देखकर किसी को भी उस पर संदेह नहीं हुआ। मंदिर में प्रवेश करने के बाद उसने बेहद शांत और श्रद्धापूर्ण अंदाज में पूजा-अर्चना की। उसने पूरे विश्वास के साथ ऐसा व्यवहार किया मानो वह केवल दर्शन के उद्देश्य से वहां आया हो। उसके इस आचरण ने आसपास मौजूद लोगों और मंदिर से जुड़े लोगों का भरोसा पूरी तरह जीत लिया। घटना का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह बताया जा रहा है कि आरोपी ने वारदात को अंजाम देने से पहले पूरी श्रद्धा के साथ पूजा की प्रक्रिया पूरी की। उसने देवी के सामने हाथ जोड़कर प्रार्थना की और कुछ समय तक वहीं रुका भी। इस दौरान किसी को भी इस बात का अंदाजा नहीं हुआ कि कुछ ही क्षणों बाद एक बड़ी चोरी की घटना सामने आने वाली है। आरोपी के व्यवहार ने इस पूरी घटना को और अधिक रहस्यमय और चर्चा का विषय बना दिया। मौका मिलते ही आरोपी ने अपनी असली योजना को अंजाम दिया। बड़ी फुर्ती और चालाकी के साथ उसने मंदिर में रखी मूल्यवान वस्तु को अपने कब्जे में लिया और बेहद तेजी से वहां से निकल गया। पूरी घटना इतनी तेजी से हुई कि किसी को तत्काल कुछ समझ ही नहीं आया। जब तक लोगों को मामले की जानकारी हुई, तब तक आरोपी वहां से जा चुका था। घटना के बाद जब सुरक्षा कैमरों की रिकॉर्डिंग देखी गई तो पूरी कहानी सामने आई। रिकॉर्डिंग में आरोपी की गतिविधियां स्पष्ट रूप से दिखाई देने की बात कही जा रही है। हालांकि आरोपी ने अपनी पहचान छिपाने के लिए चेहरे को ढक रखा था, जिसके कारण उसकी पहचान करना जांच एजेंसियों के लिए चुनौती बना हुआ है। अब जांच अधिकारी तकनीकी और अन्य माध्यमों से आरोपी तक पहुंचने का प्रयास कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि धार्मिक स्थलों पर आने वाले लोगों के प्रति विश्वास का माहौल होता है और अपराधी कई बार इसी भरोसे का फायदा उठाने की कोशिश करते हैं। ऐसी घटनाएं सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की जरूरत की ओर भी संकेत करती हैं। फिलहाल इस घटना ने स्थानीय लोगों को हैरान कर दिया है और लोग आरोपी के इस अनोखे तरीके को लेकर लगातार चर्चा कर रहे हैं। जांच एजेंसियां मामले की पड़ताल में जुटी हैं और उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही इस घटना से जुड़े और तथ्य सामने आ सकते हैं।
बहन की शादी से पहले टूटा परिवार: भोपाल में 16 साल के किशोर ने की आत्महत्या

भोपाल । भोपाल के गोविंदपुरा थाना क्षेत्र के अन्ना नगर, बीएचईएल इलाके में रविवार को एक दर्दनाक घटना सामने आई, जहां 16 वर्षीय किशोर ने अपने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। इस घटना से पूरे इलाके में शोक और स्तब्धता का माहौल है। परिजन इस घटना के बाद गहरे सदमे में हैं। मृतक की पहचान करण (16) के रूप में हुई है, जो 9वीं कक्षा तक पढ़ा था और सुबह के समय दूध बांटने वाली गाड़ी पर काम करता था। परिजनों के अनुसार, 18 जून को उसकी बहन की शादी होने वाली थी, जिसकी तैयारियां परिवार में चल रही थीं। लेकिन इस खुशी के माहौल के बीच अचानक आई इस घटना ने पूरे परिवार को तोड़ दिया। परिजनों ने बताया कि घटना से कुछ घंटे पहले करण ने अपने पिता और बहन से फोन पर बातचीत की थी। पिता मौहर सिंह के अनुसार, सुबह करण ने फोन कर कहा था—“सॉरी, मैं शादी में शामिल नहीं हो पाऊंगा।” इस बात को उस समय सामान्य बातचीत समझा गया, लेकिन कुछ देर बाद जब दोबारा फोन लगाया गया तो उसने कॉल रिसीव नहीं किया। इसके बाद परिवार को छोटे बेटे के माध्यम से घटना की जानकारी मिली। जब परिजन घर पहुंचे तो देखा कि करण कमरे में फंदे से लटका हुआ था। इस दृश्य को देखकर पूरा परिवार टूट गया और घर में चीख-पुकार मच गई। सूचना मिलने पर गोविंदपुरा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा। बाद में पोस्टमॉर्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। पुलिस ने घटनास्थल की जांच के दौरान किशोर का मोबाइल फोन भी बरामद किया, जो डिस्चार्ज हालत में मिला। थाना प्रभारी अवधेश सिंह तौमर ने बताया कि फिलहाल आत्महत्या के कारणों का स्पष्ट खुलासा नहीं हो सका है। पुलिस ने मोबाइल फोन को जब्त कर लिया है और उसे फॉरेंसिक जांच के लिए भेजने की तैयारी की जा रही है ताकि किसी भी संभावित कारण का पता लगाया जा सके। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की हर एंगल से जांच कर रही है, वहीं परिवार इस असामयिक और दर्दनाक घटना से गहरे सदमे में है।
12 दिन बाद मिला एक्ट्रेस ट्विशा को अंतिम विदाई, भोपाल में हुआ अंतिम संस्कार

भोपाल। भोपाल में एक्ट्रेस ट्विशा का अंतिम संस्कार रविवार को भदभदा श्मशान घाट पर 12 दिन बाद संपन्न हुआ। इस दौरान पूरा माहौल गमगीन और भावुक था। परिवार के सदस्यों की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। अंतिम संस्कार में सबसे भावुक क्षण वह रहा जब ट्विशा के भाई मेजर हर्षित ने उन्हें मुखाग्नि दी। इस दौरान मौजूद परिजन और करीबी लगातार रोते-बिलखते नजर आए। ट्विशा के अंतिम दर्शन और अंतिम यात्रा के दौरान भारी पुलिस बल तैनात रहा ताकि किसी भी प्रकार की अव्यवस्था न हो। अंतिम यात्रा भोपाल AIIMS से शुरू होकर भदभदा विश्राम घाट तक पहुंची, जहां पूरे विधि-विधान से अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की गई। इससे पहले दिन में एक महत्वपूर्ण मेडिकल प्रक्रिया के तहत दिल्ली AIIMS की विशेष टीम ने भोपाल AIIMS परिसर में ट्विशा के शव का दोबारा पोस्टमॉर्टम किया। यह प्रक्रिया करीब तीन घंटे तक चली, जिसमें विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने सभी आवश्यक जांचें कीं। पोस्टमॉर्टम के दौरान लिए गए सैंपल और विसरा को सुरक्षित रूप से भोपाल AIIMS में सील कर रखा गया है। टीम अब अपनी विस्तृत रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में सौंपेगी, जिसे जांच प्रक्रिया में अहम माना जा रहा है। यह मामला 12 मई की रात का है, जब भोपाल के कटारा हिल्स क्षेत्र में ट्विशा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई थी। शुरुआती जांच के बाद मामला आत्महत्या और हत्या के आरोपों के बीच उलझ गया है। ससुराल पक्ष ने इसे आत्महत्या बताया है, जबकि मायके पक्ष ने गंभीर आरोप लगाते हुए पति और ससुराल वालों पर हत्या का आरोप लगाया है। इस विरोधाभास ने पूरे मामले को और जटिल बना दिया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच एजेंसियां लगातार सक्रिय हैं। कोर्ट की कार्रवाई के तहत ट्विशा के पति समर्थ को पहले ही गिरफ्तार कर 7 दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा जा चुका है। साथ ही अदालत ने उसका पासपोर्ट भी जब्त करने के आदेश दिए हैं, जिससे विदेश भागने की संभावना को रोका जा सके। वहीं सास की जमानत रद्द करने की मांग को लेकर भी अदालत में आवेदन दायर किया गया है, जिस पर सोमवार को सुनवाई प्रस्तावित है। इसी बीच, इस हाई-प्रोफाइल मामले ने राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित किया है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए सोमवार को चीफ जस्टिस की बेंच में सुनवाई तय की है। माना जा रहा है कि शीर्ष अदालत इस मामले में जांच की दिशा और प्रक्रिया को लेकर महत्वपूर्ण निर्देश दे सकती है। इसके अलावा, मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी इस मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच को सीबीआई को सौंपने पर सहमति जता दी है, जिससे जांच और तेज होने की उम्मीद है। अंतिम संस्कार के दौरान भदभदा घाट पर भारी भीड़ और पुलिस सुरक्षा के बीच पूरी प्रक्रिया संपन्न हुई। परिवार और रिश्तेदारों ने नम आंखों से ट्विशा को अंतिम विदाई दी। माहौल इतना भावुक था कि वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं। फिलहाल, पूरे मामले की जांच अलग-अलग स्तरों पर जारी है और आने वाले दिनों में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और सीबीआई जांच की दिशा इस केस को और स्पष्ट कर सकती है।
आस्था के आगे मौसम भी बेबस: सुमेरपुर में 45 डिग्री गर्मी के बीच चल रही 41 दिनों की अग्नि तपस्या, श्रद्धा में डूबे भक्त

नई दिल्ली। पाली जिले के सुमेरपुर में इन दिनों आस्था और साधना का एक अनोखा दृश्य देखने को मिल रहा है, जहां बाल योगी गुलाब नाथ जी महाराज भीषण गर्मी और धधकती अग्नि धूणी के बीच 41 दिनों की दिव्य अग्नि तपस्या कर रहे हैं। तपते मौसम में जब तापमान 45 डिग्री तक पहुंच रहा है, तब भी संत अपनी साधना में पूरी तरह लीन हैं। इस तपस्या को लोक कल्याण, गौ-सेवा और धर्म रक्षा के उद्देश्य से किया जा रहा एक विशेष अनुष्ठान बताया जा रहा है। चारों ओर जलती अग्नि धूणी और बीच में शांत मुद्रा में बैठे बाल योगी का यह दृश्य हर किसी को हैरान कर रहा है। यह साधना न केवल कठिन मानी जा रही है, बल्कि इसे आध्यात्मिक शक्ति और आत्मसंयम का अद्भुत उदाहरण भी माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि यह दिव्य तपस्या लगातार 41 दिनों तक बिना किसी रुकावट के जारी रहेगी। लोक कल्याण और धर्म रक्षा के लिए साधनाइस अग्नि तपस्या का मुख्य उद्देश्य गौ माता की सेवा, सनातन धर्म की रक्षा और समाज में सुख-शांति एवं समृद्धि की कामना बताया जा रहा है। साधक के अनुयायियों का मानना है कि यह तपस्या केवल व्यक्तिगत साधना नहीं बल्कि पूरे विश्व के कल्याण के लिए की जा रही है। अग्नि के बीच बैठकर की जा रही यह साधना लोगों के बीच गहरी आस्था का केंद्र बन गई है। सात परिक्रमा के लिए उमड़ रहे श्रद्धालुइस पावन स्थल पर दूर-दूर से श्रद्धालुओं की भारी भीड़ पहुंच रही है। भक्तजन अग्नि धूणी के चारों ओर सात परिक्रमा (फेरे) लगाकर अपनी मनोकामनाएं पूरी होने की प्रार्थना कर रहे हैं। स्थानीय मान्यता के अनुसार, इस पवित्र स्थान पर परिक्रमा करने से जीवन के दुख-दर्द, मानसिक तनाव और कष्टों से मुक्ति मिलती है। भीषण गर्मी और तपती जमीन के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हो रहा है। लोग आस्था के इस संगम को देखने और उसमें शामिल होने के लिए लगातार सुमेरपुर पहुंच रहे हैं। आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र बना क्षेत्रजिस स्थान पर यह तपस्या चल रही है, वह श्री डूंगलाई मामाधणी उज्जेनी वीर मंदिर क्षेत्र से जुड़ा हुआ है, जो पहले से ही श्रद्धालुओं के लिए गहरी आस्था का केंद्र माना जाता है। अब इस 41 दिनों की अग्नि साधना के कारण इस पूरे परिसर की आध्यात्मिक ऊर्जा और महत्व और भी बढ़ गया है। भक्तों का कहना है कि यहां आने वाला हर व्यक्ति एक अलग ही शांति और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव करता है। यही वजह है कि यह स्थान अब केवल धार्मिक ही नहीं बल्कि आध्यात्मिक पर्यटन का भी प्रमुख केंद्र बनता जा रहा है। आस्था और साधना का अनोखा संगम45 डिग्री की झुलसा देने वाली गर्मी में भी साधक की अडिग तपस्या और श्रद्धालुओं की अटूट आस्था इस स्थान को विशेष बना रही है। यह दृश्य आस्था, विश्वास और समर्पण का ऐसा उदाहरण प्रस्तुत करता है, जो हर किसी को प्रभावित कर रहा है। सुमेरपुर की यह अग्नि तपस्या आज पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है और लोग इसे एक दिव्य और अलौकिक अनुभव के रूप में देख रहे हैं।
जमीन विवाद में गोलियों की गूंज, पिता-बेटे को दी जान से मारने की धमकी

शिवपुरी । शिवपुरी जिले के सीहोर थाना क्षेत्र में पुरानी रंजिश के चलते फायरिंग की गंभीर घटना सामने आई है। यह पूरा विवाद खेत के रास्ते और रेत खदान के संचालन से जुड़ा बताया जा रहा है, जिसमें एक ही परिवार के दो पक्ष आमने-सामने आ गए। ग्राम सीहोर निवासी जितेंद्र गुर्जर ने बताया कि करीब दो महीने पहले खेत के रास्ते को लेकर परिवार के ही प्रशांत गुर्जर से विवाद हुआ था। इसी बात को लेकर दोनों पक्षों के बीच तनाव लगातार बढ़ता गया और रंजिश गहरी होती चली गई। घटना 23 मई 2026 की रात करीब 10 बजे की बताई जा रही है, जब जितेंद्र अपने पिता औतार सिंह गुर्जर के साथ घर के बाहर बैठे हुए थे। उसी दौरान प्रशांत गुर्जर अपने कुछ साथियों के साथ वहां पहुंचा और गाली-गलौज करने लगा। विरोध करने पर आरोपी ने कट्टे से कई हवाई फायर कर दहशत फैला दी। फायरिंग की आवाज सुनकर परिवार के अन्य सदस्य भी मौके पर पहुंच गए। परिजनों को आता देख आरोपी पक्ष ने जान से मारने की धमकी दी और मौके से फरार हो गया। ग्रामीणों के अनुसार, दोनों पक्षों के बीच रेत खदान के संचालन को लेकर भी लंबे समय से विवाद चल रहा था, जिससे तनाव लगातार बढ़ता जा रहा था। घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल है। ग्रामीणों ने पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। सीहोर थाना पुलिस ने मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 296(ए), 125, 351(3) और 3(5) के तहत प्रकरण दर्ज कर लिया है। पुलिस आरोपियों की तलाश में जुट गई है और मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है।
सेंसेक्स की शीर्ष कंपनियों ने जोड़ी हजारों करोड़ की ताकत, कई दिग्गज पीछे भी फिसले

नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार में बीते सप्ताह सकारात्मक माहौल देखने को मिला, जिसका सीधा असर देश की शीर्ष कंपनियों के बाजार मूल्यांकन पर भी दिखाई दिया। सेंसेक्स की सबसे मूल्यवान कंपनियों में शामिल कई बड़े नामों ने मजबूत प्रदर्शन करते हुए अपने बाजार पूंजीकरण में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की। सप्ताह भर की कारोबारी गतिविधियों के दौरान निवेशकों के भरोसे और बाजार की मजबूती ने दिग्गज कंपनियों को नई ऊर्जा दी, जिसके परिणामस्वरूप शीर्ष 10 कंपनियों में से छह कंपनियों की कुल बाजार हैसियत में 74 हजार करोड़ रुपये से अधिक का इजाफा दर्ज किया गया। बीते सप्ताह बाजार की चाल अपेक्षाकृत संतुलित और सकारात्मक रही। प्रमुख शेयर सूचकांक में बढ़त का असर बड़ी कंपनियों के प्रदर्शन पर भी स्पष्ट दिखाई दिया। निवेशकों ने वित्तीय, टेक्नोलॉजी और इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्रों में भरोसा जताया, जिससे कई प्रमुख कंपनियों के शेयरों में मजबूती देखने को मिली। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि स्थिर आर्थिक संकेतकों और निवेशकों की सकारात्मक धारणा ने इस बढ़त में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस दौरान सबसे अधिक लाभ हासिल करने वाली कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज रही। कंपनी के बाजार पूंजीकरण में सबसे बड़ा उछाल देखने को मिला, जिससे वह सप्ताह की सबसे बड़ी लाभार्थी बनकर उभरी। इसके अलावा बैंकिंग और आईटी सेक्टर से जुड़ी प्रमुख कंपनियों ने भी बाजार में मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई। बड़े निवेशकों के साथ-साथ खुदरा निवेशकों का भरोसा भी इन कंपनियों के पक्ष में दिखाई दिया, जिसका सीधा असर उनके बाजार मूल्यांकन पर पड़ा। आईटी और बैंकिंग क्षेत्र में मजबूती ने भी बाजार को सहारा दिया। टेक्नोलॉजी और वित्तीय सेवाओं से जुड़ी बड़ी कंपनियों ने निवेशकों को आकर्षित किया और उनके शेयरों में तेजी का माहौल बना रहा। इसके साथ ही वित्तीय क्षेत्र की कुछ कंपनियों ने भी अपनी बाजार स्थिति को और मजबूत किया। लगातार बेहतर कारोबारी संभावनाओं और निवेशकों के भरोसे ने इन कंपनियों को बाजार में मजबूती प्रदान की। हालांकि दूसरी ओर कुछ प्रमुख कंपनियों को इस दौरान नुकसान का सामना भी करना पड़ा। कुछ दिग्गज कंपनियों की बाजार हैसियत में गिरावट दर्ज की गई, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि बाजार में प्रतिस्पर्धा और उतार-चढ़ाव अभी भी बना हुआ है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि अलग-अलग सेक्टरों में निवेशकों की रणनीति और बदलती प्राथमिकताएं कंपनियों के प्रदर्शन को प्रभावित कर रही हैं। पूरे सप्ताह के आंकड़े यह संकेत देते हैं कि भारतीय शेयर बाजार में निवेशकों का भरोसा अभी भी कायम है। बाजार में बढ़ती गतिविधियां और बड़े समूहों की मजबूती आने वाले समय में निवेश के माहौल को और बेहतर बना सकती हैं। हालांकि बाजार की दिशा वैश्विक परिस्थितियों, आर्थिक संकेतकों और निवेशकों की रणनीति पर भी निर्भर करेगी, लेकिन फिलहाल बाजार में सकारात्मक रुझान ने निवेशकों के उत्साह को जरूर बढ़ाया है।
बिजली संकट पर सड़क पर उतरे लोग, डीसी ऑफिस के बाहर जोरदार विरोध

सीहोर। सीहोर जिले के अमलाहा क्षेत्र में पिछले 15 दिनों से जारी रात्रिकालीन बिजली कटौती के विरोध में ग्रामीणों का गुस्सा सोमवार को सड़कों पर फूट पड़ा। बड़ी संख्या में ग्रामीण एकत्र होकर अमलाहा डीसी कार्यालय पहुंचे और चक्का जाम कर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया।प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने विद्युत विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर तत्काल बिजली आपूर्ति व्यवस्था में सुधार करने की मांग उठाई। ग्रामीणों का कहना है कि रात के समय बार-बार बिजली गुल होने से आमजन का जीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।लोगों ने बताया कि लगातार अंधेरे के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, वहीं किसानों को सिंचाई और अन्य कृषि कार्यों में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा छोटे व्यापारी भी बिजली कटौती से परेशान हैं और उनका कामकाज ठप पड़ रहा है।प्रदर्शन के चलते कुछ समय के लिए यातायात भी प्रभावित हुआ, हालांकि प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और स्थिति को संभालते हुए ग्रामीणों को समझाइश देकर सड़क से हटाया। अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि समस्या के समाधान के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।ग्रामीणों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि अगले 72 घंटे के भीतर बिजली आपूर्ति व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया, तो वे बड़े और उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। उन्होंने कहा कि इसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। फिलहाल क्षेत्र में तनाव की स्थिति को देखते हुए प्रशासन सतर्क है और बिजली विभाग से रिपोर्ट तलब की जा रही है।