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भिंड में अटेर पुल निर्माण पर विधायक नाराज: हेमंत कटारे ने शीघ्र चालू करने और सिंचाई परियोजना की समय-सीमा तय करने के दिए निर्देश

नई दिल्ली। अटेर विधायक हेमंत सत्यदेव कटारे ने चंबल नदी पर निर्माणाधीन अटेर पुल में हो रही देरी पर नाराजगी जताई है। उन्होंने सेतु निर्माण विभाग को पुल का कार्य जल्द पूरा कर आम जनता के लिए चालू कराने के स्पष्ट निर्देश दिए। साथ ही उन्होंने कनेरा उद्वहन सिंचाई योजना की प्रगति पर सवाल उठाते हुए अधिकारियों से परियोजना की समय-सीमा तय करने को कहा। विधायक कटारे की अध्यक्षता में आईटीआई परिसर में आयोजित विधानसभा स्तरीय समीक्षा बैठक में विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने भाग लिया। बैठक में पुल निर्माण और सिंचाई परियोजना के अलावा राजस्व विभाग, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, ग्रामीण यांत्रिकी सेवा, ऊर्जा विभाग, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, महिला एवं बाल विकास, स्कूल शिक्षा, कृषि, खाद्य नागरिक आपूर्ति, सहकारिता विभाग और नगर परिषद सहित अन्य विकास कार्यों की समीक्षा भी की गई। मुख्य निर्देश और मांगें:विधायक ने अधिकारियों को सभी जनसंबंधी कार्य समय-सीमा में पूरे करने और लंबित राजस्व मामलों का शीघ्र निपटारा करने के निर्देश दिए।उन्होंने कहा कि जनता की शिकायतें मिलने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ उच्च स्तर पर शिकायत दर्ज की जाएगी।महिला एवं बाल विकास विभाग को टीएचआर वितरण में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और मुख्यमंत्री बाल आरोग्य संवर्धन योजना के तहत पात्र बच्चों को आर्थिक सहायता शीघ्र उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए। खाद्य नागरिक आपूर्ति विभाग को ग्रामीण क्षेत्रों में पीडीएस राशन वितरण में किसी भी गड़बड़ी से बचने की चेतावनी दी गई। अटेर विधायक ने अधिकारियों से कहा कि यदि जनता से जुड़ी समस्याएं हैं, तो उन्हें नियमित रूप से सुनकर समाधान किया जाए। उन्होंने सभी विभागों को निर्देशित किया कि वे अटेर मुख्यालय में उपस्थित रहकर क्षेत्र की जनता की समस्याओं का तुरंत निवारण करें। बैठक में जनपद अध्यक्ष अटेर प्रतिनिधि विकास शर्मा, एसडीएम अटेर शिवांगी अग्रवाल, तहसीलदार राकेश इमले और नायब तहसीलदार जगन कुशवाह सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।

Fridge Vastu Tips: फ्रिज के ऊपर भूलकर भी न रखें ये चीजें, वरना घर में बढ़ सकता है वास्तु दोष

नई दिल्ली । वास्तु शास्त्र में घर की हर वस्तु के स्थान दिशा और उसके उपयोग को विशेष महत्व दिया गया है। मान्यता है कि यदि घर में चीजें सही स्थान और संतुलन के साथ रखी जाएं तो सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बना रहता है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। खासतौर पर रसोईघर को घर का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है क्योंकि यह स्वास्थ्य और समृद्धि से जुड़ा होता है। रसोई में रखे फ्रिज का भी वास्तु के अनुसार विशेष महत्व बताया गया है। कई लोग जगह की कमी या सुविधा के कारण फ्रिज के ऊपर विभिन्न प्रकार की वस्तुएं रख देते हैं लेकिन वास्तु शास्त्र के अनुसार कुछ चीजें ऐसी हैं जिन्हें फ्रिज के ऊपर रखना अशुभ माना जाता है। सबसे पहले बात करें भारी सामान की। अक्सर देखा जाता है कि लोग फ्रिज के ऊपर बड़े बर्तन डिब्बे या अन्य भारी सामान रख देते हैं। वास्तु शास्त्र के अनुसार ऐसा करना ठीक नहीं माना जाता। फ्रिज पहले से ही एक भारी और स्थिर ऊर्जा वाला उपकरण होता है ऐसे में उसके ऊपर अतिरिक्त वजन रखने से घर की ऊर्जा का संतुलन बिगड़ सकता है। इससे परिवार के सदस्यों के बीच तनाव या असहजता का माहौल बन सकता है। इसलिए बेहतर माना जाता है कि फ्रिज के ऊपर ज्यादा भारी सामान न रखा जाए और उस स्थान को हल्का रखा जाए। दूसरी महत्वपूर्ण चीज है दवाइयां। कई घरों में दवाइयों का डिब्बा ऐसी जगह रखा जाता है जहां वह आसानी से मिल सके। इसी कारण लोग उसे फ्रिज के ऊपर रख देते हैं। हालांकि वास्तु शास्त्र के अनुसार ऐसा करना उचित नहीं माना जाता। फ्रिज ठंडक और स्थिर ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है जबकि दवाइयां बीमारी और नकारात्मक ऊर्जा से जुड़ी मानी जाती हैं। ऐसे में दोनों को एक साथ रखने से घर में स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ने की संभावना मानी जाती है। इसके अलावा फ्रिज के ऊपर इलेक्ट्रॉनिक सामान रखना भी सही नहीं माना जाता। कई लोग चार्जर एक्सटेंशन बोर्ड एडेप्टर या छोटी इलेक्ट्रॉनिक लाइट्स फ्रिज के ऊपर रख देते हैं। लेकिन फ्रिज स्वयं एक शक्तिशाली इलेक्ट्रॉनिक उपकरण है जो इलेक्ट्रोमैग्नेटिक ऊर्जा उत्पन्न करता है। ऐसे में उसके ऊपर अतिरिक्त इलेक्ट्रॉनिक सामान रखने से ऊर्जा का असंतुलन बढ़ सकता है। वास्तु के अनुसार इससे घर में चिड़चिड़ापन तनाव और आपसी मतभेद बढ़ने की संभावना रहती है। धार्मिक वस्तुओं को भी फ्रिज के ऊपर रखना वास्तु के अनुसार उचित नहीं माना गया है। कई लोग भगवान की तस्वीर पूजा से जुड़ी सामग्री या धार्मिक पुस्तकें फ्रिज के ऊपर रख देते हैं लेकिन ऐसा करना धार्मिक दृष्टि से भी सही नहीं माना जाता। फ्रिज एक सामान्य घरेलू उपकरण है इसलिए इसके ऊपर धार्मिक वस्तुएं रखने से उनका सम्मान कम माना जाता है। पूजा से संबंधित वस्तुओं को हमेशा घर के मंदिर या किसी पवित्र स्थान पर ही रखना चाहिए। इसी तरह कुछ लोग सजावट के लिए फ्रिज के ऊपर छोटा पौधा या पानी से भरा बर्तन भी रख देते हैं। वास्तु के अनुसार यह भी उचित नहीं माना जाता। फ्रिज बिजली से चलने वाला उपकरण है और उसके ऊपर पानी या पौधा रखने से ऊर्जा का संतुलन प्रभावित हो सकता है। इसलिए बेहतर माना जाता है कि फ्रिज के ऊपर का स्थान साफ हल्का और लगभग खाली रखा जाए ताकि घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहे।

मासूम से दरिंदगी की कोशिश! खेल रही बच्ची को बहाने से घर ले गया 45 साल का अधेड़; चीखने पर आरोपी फरार, पॉक्सो एक्ट में केस दर्ज

नई दिल्ली। भिंड जिले के लहार थाना क्षेत्र से एक विचलित कर देने वाली खबर सामने आई है, जहाँ मासूमियत को तार-तार करने की कोशिश की गई। सुंदरपुरा खोड़ गांव में एक 45 साल के व्यक्ति ने खेल रही नाबालिग को अपना शिकार बनाने का प्रयास किया, लेकिन बच्ची की बहादुरी और चीख-पुकार ने उसे बचा लिया। लहार थाना क्षेत्र के सुंदरपुरा खोड़ गांव में शुक्रवार देर शाम एक मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म के प्रयास की सनसनीखेज वारदात हुई है। गांव के ही एक अधेड़ सुदामा उर्फ कल्लू बघेल (45) ने खेल रही नाबालिग बच्ची को हवस का शिकार बनाने की कोशिश की। हालांकि, बच्ची की चीख सुनकर आरोपी घबरा गया और उसे मौके पर ही छोड़कर भाग खड़ा हुआ। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ पॉक्सो एक्ट और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संगीन धाराओं में मामला दर्ज कर तलाश तेज कर दी है। वारदात: खेल रही बच्ची को बनाया निशानाघटनाक्रम के अनुसार, नाबालिग बच्ची गांव में अपने साथियों के साथ खेल रही थी, तभी आरोपी ने उसे अकेला देख जाल में फंसा लिया: गलत इरादे: आरोपी सुदामा उसे बहला-फुसलाकर अपने घर ले गया और वहां उसके साथ अभद्रता व गलत काम करने का प्रयास किया। जैसे ही आरोपी ने दरिंदगी की कोशिश की, मासूम बच्ची जोर-जोर से चीखने लगी। बच्ची की आवाज सुन आरोपी के हाथ-पांव फूल गए और वह पकड़े जाने के डर से भाग निकला। डरी-सहमी बच्ची तुरंत अपने घर पहुंची और पूरी आपबीती परिजनों को बताई, जिसके बाद देर रात परिजन उसे लेकर थाने पहुंचे। पुलिस कार्रवाई: ‘BNS’ और पॉक्सो एक्ट के तहत शिकंजालहार थाना प्रभारी शिव सिंह यादव ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल प्राथमिकी दर्ज करने के निर्देश दिए। सख्त धाराएं: पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 137(2), 74, 75 और पॉक्सो (POCSO) एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज किया है।पुलिस की टीमें आरोपी सुदामा बघेल के संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं। पुलिस का दावा है कि आरोपी को जल्द ही सलाखों के पीछे भेजा जाएगा। लहार की इस घटना ने एक बार फिर गांवों में मासूमों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 45 साल के व्यक्ति द्वारा एक अबोध बच्ची को निशाना बनाना मानसिक विकृति की पराकाष्ठा है। अब देखना यह है कि कानून कितनी जल्दी इस दरिंदे को उसके अंजाम तक पहुँचाता है।

भिंड: लोक अदालत में सालों से अलग रहे पति-पत्नी हुए फिर से एक, जज ने पौधा भेंट कर दी जीवन संवारने की सीख

नई दिल्ली।  कुटुंब न्यायालय में शनिवार को आयोजित लोक अदालत में कई वर्षों से अलग रह रहे पति-पत्नी आपसी समझौते के बाद फिर से एक हो गए। न्यायालय की पहल और काउंसलिंग के बाद दंपतियों ने एक-दूसरे को माला पहनाकर साथ जीवन बिताने का संकल्प लिया। भावनाओं से भरी अदालत:समझौते के बाद न्यायालय परिसर में दंपतियों की आंखों में खुशी के आंसू दिखाई दिए। एक पत्नी ने कहा, “अगर अब ठीक से व्यवहार करेंगे तो हम साथ रहने को तैयार हैं।” वहीं पति ने भी अपनी गलतियों को सुधारने और परिवार को फिर से जोड़ने का भरोसा दिलाया। जज ने पौधा देकर दी जीवन की सीख:प्रधान न्यायाधीश दिलीप गुप्ता ने दंपतियों को एक-एक पौधा भेंट किया। उन्होंने कहा कि पौधा नए जीवन की शुरुआत का प्रतीक है और जैसे पौधे को प्यार, धैर्य और देखभाल की जरूरत होती है, वैसे ही दांपत्य जीवन को भी सहानुभूति, समझ और धैर्य की आवश्यकता होती है। आपसी बातचीत की अहमियत:जज ने सलाह दी कि किसी भी मतभेद को अदालत तक ले जाने से पहले आपसी बातचीत और समझौते की कोशिश करनी चाहिए। लोक अदालत में लंबित कई मामले इसी प्रक्रिया से बिना हार-जीत के सुलझाए गए। सफलता और सहयोग:कार्यवाही पूरी होने के बाद दंपति मुस्कुराते हुए घर के लिए रवाना हुए। इस दौरान परिवार के अन्य सदस्य भी उनके साथ मौजूद थे। न्यायालय के अन्य जज, अधिवक्ता और पैरालीगल वॉलंटियर्स ने काउंसलिंग कर समझौते की राह तैयार करने में सहयोग किया।

भिंड: ‘नो रोड-नो टोल’ आंदोलन 16 मार्च को मालनपुर टोल पर; संतों में मतभेद, मंत्री की समझाइश से दो धड़े

नई दिल्ली। नेशनल हाईवे-719 को फोरलेन बनाने की मांग को लेकर संत समाज 16 मार्च को मालनपुर टोल प्लाजा पर ‘नो रोड-नो टोल’ आंदोलन करने जा रहा है। सरकार की ओर से नवकरणीय ऊर्जा मंत्री राकेश शुक्ला आंदोलन को रोकने का प्रयास कर रहे हैं। इसके चलते संत समाज में दो धड़े बन गए हैं। कालीदास महाराज का रुख:संत समिति के अध्यक्ष कालीदास महाराज अपने रुख पर अड़े हैं। उन्होंने कहा कि उन्होंने बरैठा टोल प्लाजा पर धर्मध्वजा स्थापित कर दी है और धर्मध्वजा के सम्मान में आंदोलन अवश्य होगा। 16 मार्च को सभी लोग आंदोलन स्थल पर अपनी बात रख सकते हैं। मंत्री और एनएचएआई अधिकारी भी वहां चर्चा कर सकते हैं। कालीदास महाराज ने आरोप लगाया कि पिछले एक साल में हाईवे पर 200 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। जनप्रतिनिधि पीड़ित परिवारों के घर तक शोक व्यक्त करने नहीं पहुंचे। उन्होंने स्पष्ट किया कि हाईवे चौड़ीकरण तक टोल वसूली नहीं होने दी जाएगी। मंत्री राकेश शुक्ला की कोशिश:मंत्री राकेश शुक्ला ने दंदरौआ धाम के महंत महामंडलेश्वर रामदास महाराज से मुलाकात कर आंदोलन स्थगित करने की अपील की। मंत्री के प्रयास से संत समाज में दो धड़े बन गए हैं, हालांकि कालीदास महाराज आंदोलन रोकने के लिए किसी दबाव में नहीं हैं। सड़क चौड़ीकरण और समय सीमा:जिला पंचायत कार्यालय में मंत्री, एनएचएआई अधिकारियों और समाजसेवियों की बैठक में बताया गया कि हाईवे को फोरलेन बनाने से पहले डीपीआर तैयार होगी। इसके बाद भूमि अधिग्रहण और दावे-आपत्तियों की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। अधिकारियों के अनुसार, यह पूरा काम करीब एक वर्ष लेगा और संभवतः फरवरी 2027 के बाद ही सड़क विकास कार्य शुरू होगा। समाजसेवियों की तीन प्रमुख मांगें:टोल वसूली बंद करना। सड़क हादसों पर रोक की गारंटी। हाईवे चौड़ीकरण जल्द शुरू करना। रामदास महाराज का बयान:बैठक में कालीदास महाराज की गैरमौजूदगी पर सवाल उठने पर दंदरौआ धाम के महंत रामदास महाराज ने कहा कि संत समिति के प्रदेश अध्यक्ष कालीदास महाराज ही हैं। उनका कहना है कि जो भी निर्णय लिया जाएगा, वह उन्हें मान्य होगा।

रहस्यमयी बुढ़िया माई मंदिर: अनहोनी से पहले मिलती है चेतावनी, कुसम्ही जंगल में आस्था का अद्भुत केंद्र

नई दिल्ली । चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व 19 मार्च से शुरू होने जा रहा है। इस दौरान देशभर के शक्तिपीठों और सिद्धपीठ मंदिरों में मां दुर्गा की विशेष पूजा अर्चना व्रत हवन और कन्या पूजन के आयोजन किए जाते हैं। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में स्थित कुसम्ही जंगल का बुढ़िया माई मंदिर भी इन दिनों विशेष चर्चा में रहता है। घने जंगल के बीच स्थित यह मंदिर अपनी रहस्यमयी मान्यताओं और चमत्कारी कथाओं के कारण श्रद्धालुओं के बीच खास पहचान रखता है। स्थानीय लोगों के अनुसार यह मंदिर भक्तों को होने वाली अनहोनी से पहले चेतावनी देता है इसलिए इसे काल से जुड़ा मंदिर भी माना जाता है। बुढ़िया माई मंदिर गोरखपुर शहर से लगभग 12 से 15 किलोमीटर की दूरी पर कुसम्ही जंगल के भीतर स्थित है। जंगल के बीच होने के बावजूद नवरात्रि के समय यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। दूर दराज से भक्त यहां मां के दर्शन करने और आशीर्वाद प्राप्त करने पहुंचते हैं। मान्यता है कि यहां सच्चे मन से पूजा करने पर मां भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करती हैं और संकटों से रक्षा करती हैं। कई श्रद्धालु यह भी मानते हैं कि मां की कृपा से अकाल मृत्यु जैसे बड़े संकट भी टल सकते हैं इसलिए इस मंदिर को सिद्धपीठ के रूप में पूजा जाता है। मंदिर से जुड़ी एक प्रचलित लोककथा भी इसकी रहस्यमयी पहचान को और मजबूत करती है। बताया जाता है कि बहुत समय पहले इस स्थान पर एक बड़ा नाला हुआ करता था जिस पर लकड़ी का एक पुल बनाया गया था। एक दिन एक बारात इसी रास्ते से गुजर रही थी। जब बारात पुल के पास पहुंची तो वहां खड़ी एक बुजुर्ग महिला ने बारातियों को पुल पर जाने से मना करते हुए चेतावनी दी। हालांकि बारातियों ने उसकी बात को गंभीरता से नहीं लिया और पुल पार करने लगे। जैसे ही बारात पुल के बीच पहुंची वह अचानक टूट गया और अधिकांश बाराती नाले में गिर गए। इस दर्दनाक घटना के बाद लोगों को एहसास हुआ कि वह बुजुर्ग महिला साधारण इंसान नहीं बल्कि देवी का रूप थीं जिन्होंने पहले ही खतरे की चेतावनी दी थी। इस घटना के बाद स्थानीय लोगों ने उस स्थान को पवित्र मानते हुए वहां पूजा अर्चना शुरू कर दी। धीरे धीरे यह स्थान बुढ़िया माई मंदिर के नाम से प्रसिद्ध हो गया और समय के साथ यहां श्रद्धालुओं की आस्था और भी गहरी होती चली गई। आज भी कई लोग मानते हैं कि मां अपने भक्तों को संकट आने से पहले संकेत देती हैं और उन्हें बड़े हादसों से बचाती हैं। नवरात्रि के दौरान यहां विशेष पूजा भंडारा और धार्मिक आयोजनों का भी आयोजन किया जाता है। जंगल के बीच स्थित यह मंदिर भले ही रहस्यमयी कथाओं से जुड़ा हो लेकिन भक्तों के लिए यह आस्था विश्वास और शक्ति का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है।

मुरैना: तेज रफ्तार ट्रक ने चरवाहे को 25 किलोमीटर तक घसीटा, सिर कुचलने से युवक की मौके पर मौत

नई दिल्ली। मुरैना जिले में शनिवार सुबह एक भयंकर सड़क हादसे ने इलाके में सनसनी मचा दी। शिवपुरी की ओर से आ रहे एक तेज रफ्तार ट्रक (MP31 HA 1220) ने पहले एक बकरी को कुचल दिया और फिर चरवाहा सोनू धोबी (25) को टक्कर मार दी। हादसे के बाद युवक ट्रक के नीचे फंस गया, लेकिन चालक ने बेपरवाही दिखाई और ट्रक को चलते रहने दिया।सोनू धोबी, जो पहाड़गढ़ थाना क्षेत्र का रहने वाला था, सुबह बकरियां चराने रोड के पास गया था।करीब 10 बजे ट्रक ने पहले उसकी बकरी को कुचला।सोनू ने ट्रक रोकने की कोशिश की, लेकिन चालक ने उसे भी टक्कर मार दी ट्रक के नीचे फंसे रहने के कारण युवक का सिर कुचल गया और मौके पर ही सोनू की मौत हो गई। ग्रामीण और पुलिस की कार्रवाई:आसपास के ग्रामीणों ने घटना देखी और तुरंत पुलिस को सूचना दी। पहाड़गढ़ थाना पुलिस ने ग्रामीणों के सहयोग से ट्रक का पीछा किया। किसारोली गांव के पास ट्रक और चालक को पकड़ लिया गया। थाना प्रभारी राजेंद्र परिहार ने बताया कि चालक को पकड़ने में काफी मशक्कत लगी। एडीशनल एसपी सुरेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि ट्रक चालक ने पहले बकरी को कुचला और जब सोनू ने रोकने का प्रयास किया तो उसका पैर ट्रक में फंस गया। परिजनों को सूचना:मृतक सोनू धोबी के परिजनों को घटना की जानकारी दे दी गई है। पुलिस ने कहा कि चालक के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।यह हादसा तेज रफ्तार और सड़क सुरक्षा की अनदेखी का परिणाम है। आसपास के ग्रामीणों की सतर्कता ने ट्रक चालक को पकड़ने में मदद की। घटना ने पूरे इलाके में सड़क सुरक्षा और ट्रक चालक की जिम्मेदारी पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

सूर्यकुमार यादव और गौतम गंभीर टी-20 वर्ल्ड कप ट्रॉफी लेकर मंदिर पहुंचे; अभिषेक शर्मा ने वैष्णो देवी के दर्शन किए

नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम ने टी-20 वर्ल्ड कप 2026 में तीसरी बार खिताब जीतकर इतिहास रचा। जीत के जश्न में कप्तान सूर्यकुमार यादव और हेड कोच गौतम गंभीर शनिवार को टी-20 वर्ल्ड कप की ट्रॉफी लेकर मुंबई के प्रसिद्ध श्री सिद्धिविनायक मंदिर पहुंचे। यहां उन्होंने भगवान गणेश के दर्शन कर टीम की सफलता और देशवासियों के लिए आशीर्वाद मांगा। हनुमान मंदिर दर्शन और कीर्ति आजाद की प्रतिक्रिया:वहीं, चैंपियन बनने के बाद 8 मार्च की रात सूर्यकुमार यादव और टीम के कुछ सदस्य अहमदाबाद के हनुमान मंदिर भी गए। इस पर पूर्व क्रिकेटर और TMC सांसद कीर्ति आजाद ने सवाल उठाते हुए कहा कि टीम को शर्म आनी चाहिए, क्योंकि विजेता टीम में सभी धर्मों के खिलाड़ी शामिल थे और ट्रॉफी को मंदिर में ले जाना उचित नहीं था। इस पर हेड कोच गौतम गंभीर ने जवाब दिया कि यह पूरे देश के लिए गर्व का पल है और ऐसी बातों को उठाने का कोई मतलब नहीं। गंभीर ने कहा कि अगर हर बयान को गंभीरता से लिया जाएगा तो इससे टीम के 15 खिलाड़ियों की मेहनत और उपलब्धियों का सम्मान कम हो जाएगा। अभिषेक शर्मा ने वैष्णो देवी में मांगी आशीर्वाद:टीम इंडिया के ओपनर अभिषेक शर्मा ने 13 मार्च को जम्मू-कश्मीर के कटरा स्थित प्रसिद्ध वैष्णो देवी मंदिर में माता रानी के दर्शन किए। उन्होंने अपनी यात्रा की तस्वीरें इंस्टाग्राम पर साझा कीं और कैप्शन में लिखा “जय माता दी।” फोटोज में अभिषेक सफेद कुर्ता-पायजामा पहनकर माथे पर तिलक लगाए हाथ जोड़कर दर्शन करते नजर आए। अभिषेक की फाइनल में शानदार पारी:टी-20 वर्ल्ड कप फाइनल में अभिषेक ने अहम भूमिका निभाई। टूर्नामेंट के पहले मैचों में उनका प्रदर्शन कमजोर रहा और लगातार तीन बार शून्य पर आउट हुए। लेकिन फाइनल में उन्होंने अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में महज 21 गेंदों में 52 रन की पारी खेलकर भारत को जीत दिलाई। टीम इंडिया तीसरी बार चैंपियन बनी:8 मार्च को हुए फाइनल मैच में भारत ने न्यूजीलैंड को 96 रन से हराया और टी-20 वर्ल्ड कप का तीसरा खिताब अपने नाम किया। टीम के अन्य सदस्य भी बोले:ईशान किशन ने कीर्ति आजाद के बयान पर कहा, इतना अच्छा वर्ल्ड कप जीतें, तो अच्छे सवाल पूछिए। कीर्ति आजाद क्या बोले, इस पर मैं क्या कहूं? कुछ अच्छा सवाल करिए।

खरमास 2026: 15 मार्च से 14 अप्रैल तक मांगलिक कार्यों पर विराम, जानिए धार्मिक मान्यता, महत्व और क्या करना माना जाता है शुभ

नई दिल्ली । हिंदू धर्म और ज्योतिष में समय और ग्रहों की स्थिति को विशेष महत्व दिया गया है। इन्हीं ज्योतिषीय गणनाओं के आधार पर वर्ष में दो बार आने वाले खरमास को धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। वर्ष 2026 में खरमास की शुरुआत 15 मार्च से होने जा रही है और यह अवधि 14 अप्रैल तक रहेगी। इस दौरान विवाह गृह प्रवेश मुंडन कर्ण छेदन जैसे कई मांगलिक कार्यों पर परंपरागत रूप से विराम लग जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस समय किए गए शुभ कार्य अपेक्षित फल नहीं देते इसलिए लोगों को इन्हें टालने की सलाह दी जाती है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार 14 मार्च की रात 1 बजकर 8 मिनट के बाद सूर्य देव कुंभ राशि से निकलकर मीन राशि में प्रवेश करेंगे। जब सूर्य देव बृहस्पति की राशि यानी धनु या मीन में प्रवेश करते हैं तो उनकी स्थिति अपेक्षाकृत कमजोर मानी जाती है। इसी कारण इस अवधि को खरमास कहा जाता है और इस दौरान मांगलिक कार्यों को शुभ नहीं माना जाता। इस बार मीन संक्रांति के साथ शुरू होने वाला खरमास 14 अप्रैल को समाप्त होगा जब सूर्य देव सुबह 9 बजकर 31 मिनट पर मेष राशि में प्रवेश करेंगे। इसके साथ ही मांगलिक कार्यों पर लगा विराम भी समाप्त हो जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार खरमास में विवाह गृह प्रवेश नए घर के निर्माण की शुरुआत मुंडन संस्कार और कर्ण छेदन जैसे शुभ कार्य नहीं किए जाते। मान्यता है कि इस समय शुरू किए गए दीर्घकालिक कार्यों में बाधाएं आ सकती हैं या अपेक्षित सुख समृद्धि नहीं मिलती। यही कारण है कि लोग इस अवधि में नया व्यवसाय शुरू करने या बड़े निवेश करने से भी बचते हैं। हालांकि यह समय पूरी तरह निष्क्रिय रहने का नहीं माना जाता बल्कि इसे आध्यात्मिक साधना के लिए अत्यंत श्रेष्ठ बताया गया है। खरमास के दौरान दान पुण्य जप तप पूजा पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों का विशेष महत्व माना गया है। मान्यता है कि इस अवधि में किए गए दान का फल कई गुना अधिक मिलता है। ब्राह्मणों गुरुजनों गायों और साधु संतों की सेवा करना भी पुण्यदायी माना गया है। इसके अलावा तीर्थ यात्रा करना धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन करना और भगवान के नाम का स्मरण करना भी अत्यंत शुभ माना जाता है। खरमास से जुड़ी एक प्रचलित कथा भी बताई जाती है। कथा के अनुसार सूर्य देव अपने सात घोड़ों के रथ पर सवार होकर पूरे ब्रह्मांड की परिक्रमा करते हैं। लगातार चलते रहने से उनके घोड़े थक जाते हैं और प्यास से व्याकुल हो जाते हैं। ऐसे में सूर्य देव उन्हें विश्राम देने के लिए रथ को एक तालाब के पास रोकते हैं और घोड़ों को पानी पिलाते हैं। इस दौरान रथ को चलाने के लिए वे दो ‘खर’ यानी गधों को रथ में जोड़ देते हैं। गधों की गति धीमी होने के कारण रथ की चाल भी धीमी हो जाती है लेकिन इस बीच सूर्य के घोड़े आराम कर लेते हैं। इसी कारण इस अवधि को खरमास कहा जाता है और मान्यता है कि इस समय सूर्य के घोड़े विश्राम करते हैं। इस प्रकार धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से खरमास का समय भले ही मांगलिक कार्यों के लिए उपयुक्त न माना जाता हो लेकिन इसे आध्यात्मिक साधना दान पुण्य और भगवान की भक्ति के लिए अत्यंत पवित्र और फलदायी समय माना गया है।

उज्जैन: किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर की नृत्य प्रस्तुति, सोशल मीडिया रील पर जताई आपत्ति

नई दिल्ली। सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के सिलसिले में आयोजित बैठक में इंटरनेशनल किन्नर अखाड़ा के महामंडलेश्वर और महंत शामिल हुए। शिवांजलि गार्डन में आयोजित कार्यक्रम के दूसरे दिन धार्मिक प्रस्तुतियों का आयोजन हुआ और सिंहस्थ से जुड़े आयोजन, व्यवस्थाओं और भागीदारी पर विस्तृत चर्चा हुई। महामंडलेश्वर की नृत्य प्रस्तुति:बैठक के दूसरे दिन भोजन प्रसादी के बाद ब्रज धाम से आई किन्नर अखाड़ा की महामंडलेश्वर डॉ. वैष्णवी जगदम्बा गिरी ने “ॐ नमः शिवाय” भजन पर नृत्य प्रस्तुति दी। इसके बाद अन्य किन्नर संतों ने भी अपनी धार्मिक प्रस्तुतियां साझा की। सिंहस्थ 2028 की व्यवस्थाओं पर चर्चा:कार्यक्रम में देश के अलग-अलग राज्यों से आए किन्नर संत, महंत और श्रद्धालु शामिल हुए। बैठक में किन्नर अखाड़ा की सिंहस्थ 2028 में भागीदारी, व्यवस्थाएं और धार्मिक आयोजनों को लेकर विशेष चर्चा हुई। नए महामंडलेश्वर और श्री महंतों की घोषणा:आचार्य महामंडलेश्वर डॉ. लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने गुजरात के सूरत से दिलीपनंद गिरी, तेलंगाना से महाकालीनंद गिरी, राजस्थान से कामाख्यानंद गिरी सीतारमण, उत्तर प्रदेश के गड़ी मानिकपुर प्रतापगढ़ से रेखनंद गिरी को महामंडलेश्वर नियुक्त किया। श्री महंतों में शामिल हैं: गुजरात की नंदिनीनंद गिरी, महाराष्ट्र के अकोला की गणेशानंद गिरी, इंदौर की सुनहरी नंद गिरी, आकांक्षा नंद गिरी, गुंजन नंद गिरी, खुशीनंद गिरी। शिप्रा में पर्व स्नान:समापन अवसर पर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने बताया कि सिंहस्थ 2028 में किन्नर अखाड़ा जूना अखाड़े के साथ शिप्रा नदी में पर्व स्नान करेगा। सोशल मीडिया रील पर आपत्ति:महामंडलेश्वर त्रिपाठी ने किन्नर संतों को सोशल मीडिया रील बनाने से बचने की हिदायत दी। उन्होंने कहा कि यदि रील बनानी है तो केवल भगवान के भजन पर बनाएं, फिल्मी गीतों पर नृत्य करना उचित नहीं है। सभी को मर्यादा का ध्यान रखना अनिवार्य होगा। अन्य महत्वपूर्ण घोषणाएं:इंटरनेशनल किन्नर अखाड़ा जल्द ही अपनी वेबसाइट लॉन्च करेगा। महामंडलेश्वर, श्री महंत और महंतों के लिए पहचान पत्र बनाए जाएंगे। सभी को एक समान तिलक लगाने की व्यवस्था की जाएगी।बैठक के समापन के बाद देशभर से आए किन्नर संत अपने-अपने शहरों के लिए रवाना हो गए।