फार्मा सेक्टर में दिख रही तेज रफ्तार, एक्सपर्ट्स ने बताए 4 ऐसे शेयर जो लंबी अवधि में बन सकते हैं कमाई के बड़े खिलाड़ी

नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार में फार्मा सेक्टर एक बार फिर मजबूत चर्चा का विषय बन गया है। लंबे समय तक इस सेक्टर को केवल सुरक्षित और स्थिर निवेश का विकल्प माना जाता रहा, जहां निवेशक बाजार की अनिश्चित परिस्थितियों में अपने निवेश को सुरक्षित रखने के लिए रुख करते थे। लेकिन अब परिस्थितियां तेजी से बदलती दिखाई दे रही हैं। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि फार्मा सेक्टर की पारंपरिक छवि बदल रही है और यह क्षेत्र अब केवल डिफेंसिव नहीं बल्कि एक मजबूत ग्रोथ इंजन के रूप में उभरता नजर आ रहा है। बीते कुछ वर्षों में भारतीय फार्मा उद्योग ने घरेलू और वैश्विक दोनों स्तरों पर अपनी मजबूत पहचान बनाई है। देश में स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती जरूरत, दवाओं की लगातार बढ़ती मांग और चिकित्सा क्षेत्र में बढ़ते निवेश ने इस उद्योग को नई दिशा दी है। इसके साथ ही भारतीय दवा कंपनियों ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी अपनी उपस्थिति को मजबूत किया है। यही वजह है कि निवेशकों का भरोसा इस सेक्टर पर लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है। बाजार जानकारों का मानना है कि फार्मा कंपनियां अब केवल पारंपरिक दवा कारोबार तक सीमित नहीं हैं। नई तकनीकों, आधुनिक उपचार पद्धतियों और अनुसंधान आधारित उत्पादों पर लगातार काम हो रहा है। कई कंपनियां रिसर्च और डेवलपमेंट पर पहले से अधिक निवेश कर रही हैं, जिससे आने वाले वर्षों में इनके कारोबार के विस्तार की संभावनाएं मजबूत होती दिखाई दे रही हैं। यही कारण है कि अब इस सेक्टर को लंबे समय की ग्रोथ कहानी के रूप में देखा जाने लगा है। विशेषज्ञों द्वारा कुछ चुनिंदा फार्मा कंपनियों पर खास भरोसा जताया गया है। माना जा रहा है कि इन कंपनियों की कारोबारी रणनीति, उत्पाद पोर्टफोलियो और भविष्य की योजनाएं इन्हें अन्य कंपनियों से अलग बना सकती हैं। निवेशकों के बीच ऐसे शेयरों को लेकर उत्साह इसलिए भी देखा जा रहा है क्योंकि स्वास्थ्य क्षेत्र की मांग लगातार बनी रहती है और यह उद्योग आर्थिक परिस्थितियों से अपेक्षाकृत कम प्रभावित होता है। दूसरी ओर वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और चिकित्सा जरूरतों में बढ़ोतरी ने भी भारतीय फार्मा उद्योग के लिए नए अवसर तैयार किए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय कंपनियां लागत, गुणवत्ता और उत्पादन क्षमता के मामले में वैश्विक प्रतिस्पर्धा में बेहतर स्थिति में हैं। इसका लाभ आने वाले वर्षों में कारोबार और निवेश दोनों स्तरों पर देखने को मिल सकता है। हालांकि विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि शेयर बाजार में निवेश करते समय केवल किसी सेक्टर की लोकप्रियता के आधार पर निर्णय लेना उचित नहीं माना जा सकता। निवेशकों को कंपनी की वित्तीय स्थिति, बाजार में उसकी स्थिति और भविष्य की विकास योजनाओं का मूल्यांकन करना चाहिए। किसी भी निवेश से पहले जोखिम और अवसर दोनों पक्षों को समझना आवश्यक माना जाता है। फिलहाल संकेत यही हैं कि फार्मा सेक्टर अब बदलाव के नए दौर में प्रवेश कर चुका है। जिस क्षेत्र को कभी केवल सुरक्षित निवेश का विकल्प माना जाता था, वही अब तेज विकास, तकनीकी विस्तार और भविष्य की संभावनाओं के कारण निवेशकों के लिए नए अवसरों का केंद्र बनता दिखाई दे रहा है। आने वाले समय में यह सेक्टर बाजार की दिशा तय करने वाले प्रमुख क्षेत्रों में शामिल हो सकता है।
भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी को नई रफ्तार: दिल्ली में रूबियो-जयशंकर वार्ता, क्वाड बैठक से पहले बड़ा कूटनीतिक संदेश

नई दिल्ली(New Delhi)। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो इन दिनों चार दिवसीय भारत दौरे पर हैं, जहां उनकी यात्रा को भारत-अमेरिका संबंधों को नई दिशा देने वाला महत्वपूर्ण कूटनीतिक कदम माना जा रहा है। इस दौरे के दौरान उन्होंने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से नई दिल्ली में मुलाकात की, जिसके बाद रविवार को विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ द्विपक्षीय वार्ता की गई। बैठक के बाद दोनों नेताओं ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की, जिसमें दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी, वैश्विक सहयोग और आपसी हितों पर विस्तार से चर्चा हुई। मार्को रूबियो ने भारत को अमेरिका का एक अत्यंत महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार बताया और कहा कि दोनों देश दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र हैं, जिनके हित कई वैश्विक मुद्दों पर एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। रूबियो ने कहा कि भारत और अमेरिका केवल पारंपरिक साझेदार नहीं हैं, बल्कि एक व्यापक रणनीतिक सहयोग में जुड़े हुए देश हैं, जो वैश्विक चुनौतियों का मिलकर समाधान करने की क्षमता रखते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देशों के नेतृत्व के बीच नियमित संवाद इस साझेदारी को और मजबूत बनाता है। वहीं विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच लगातार संपर्क और संवाद ने द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत किया है। उन्होंने बताया कि दोनों देशों के बीच रक्षा, व्यापार, तकनीक और वैश्विक सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग तेजी से बढ़ रहा है। रूबियो ने अपने बयान में यह भी कहा कि यह उनका भारत का पहला आधिकारिक दौरा है और वे इस संबंध को और गहराई से समझना चाहते हैं। उन्होंने भारत-अमेरिका साझेदारी को वैश्विक स्तर पर सहयोग का एक मजबूत उदाहरण बताया, जो किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है बल्कि पूरी दुनिया में प्रभाव डालता है। इसके बाद दोनों देशों के बीच औपचारिक द्विपक्षीय वार्ता शुरू हुई, जिसमें विभिन्न रणनीतिक और आर्थिक मुद्दों पर चर्चा जारी रही। रूबियो सोमवार को आगरा और जयपुर का दौरा करेंगे, जबकि मंगलवार को वे नई दिल्ली में होने वाली क्वाड देशों की विदेश मंत्रियों की बैठक में शामिल होंगे, जिसमें भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान भाग लेंगे। यह दौरा भारत-अमेरिका संबंधों को नई मजबूती देने और वैश्विक कूटनीति में दोनों देशों की भूमिका को और प्रभावशाली बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
शेयर बाजार से हुई बड़ी कमाई पर सही निवेश रणनीति अपनाने से टैक्स बोझ काफी कम या शून्य तक किया जा सकता है।

नई दिल्ली। शेयर बाजार में लंबी अवधि तक धैर्य और समझदारी के साथ किया गया निवेश कई लोगों को बड़ी आर्थिक सफलता दिलाता है। वर्षों तक निवेश बनाए रखने के बाद जब निवेशक अपने शेयर बेचकर करोड़ों रुपये का लाभ कमाते हैं, तब उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती टैक्स की होती है। आमतौर पर बड़ी कमाई के साथ भारी टैक्स देनदारी भी जुड़ जाती है, लेकिन आयकर नियमों में ऐसे प्रावधान मौजूद हैं जिनका सही तरीके से उपयोग करके इस टैक्स बोझ को काफी कम किया जा सकता है। यही वजह है कि अब बड़ी संख्या में निवेशक टैक्स प्लानिंग के कानूनी विकल्पों की ओर ध्यान दे रहे हैं। हाल के समय में एक ऐसी व्यवस्था चर्चा का विषय बनी हुई है जिसके तहत शेयर बाजार से हुई लंबी अवधि की कमाई पर लगने वाले टैक्स को कम करने या कुछ परिस्थितियों में शून्य तक लाने का अवसर मिल सकता है। यह व्यवस्था खास तौर पर उन निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है जिन्होंने लंबे समय तक शेयरों या इक्विटी आधारित निवेश को होल्ड करने के बाद बड़ा लाभ अर्जित किया है। हालांकि इस लाभ का फायदा सभी लोगों को स्वतः नहीं मिलता, बल्कि इसके लिए कुछ निर्धारित शर्तों का पालन करना जरूरी होता है। नियमों के अनुसार यदि कोई निवेशक अपनी शेयर बिक्री से प्राप्त राशि को निर्धारित समय सीमा के भीतर एक रिहायशी संपत्ति में निवेश करता है, तो उसे टैक्स में राहत मिलने की संभावना बनती है। इस व्यवस्था का उद्देश्य निवेशकों को केवल टैक्स छूट देना नहीं बल्कि पूंजी को उत्पादक और दीर्घकालिक परिसंपत्तियों की ओर बढ़ावा देना भी माना जाता है। यही कारण है कि निवेश और संपत्ति निर्माण को एक साथ जोड़कर देखने की प्रवृत्ति तेजी से बढ़ रही है। हालांकि यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना भी जरूरी है कि केवल करोड़ों रुपये की कमाई होने भर से टैक्स स्वतः समाप्त नहीं हो जाता। इसके लिए निवेशक को समय सीमा, निवेश राशि और पात्रता से जुड़े नियमों का पूरी तरह पालन करना पड़ता है। यदि कोई व्यक्ति निर्धारित शर्तों को पूरा नहीं करता या प्रक्रिया में चूक करता है, तो उसे टैक्स राहत का लाभ नहीं मिल सकता। कुछ मामलों में छूट वापस भी ली जा सकती है और अतिरिक्त देनदारी का सामना करना पड़ सकता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि बड़े निवेश निर्णय केवल लाभ कमाने तक सीमित नहीं होने चाहिए, बल्कि टैक्स प्रबंधन को भी निवेश रणनीति का हिस्सा बनाना चाहिए। कई निवेशक केवल रिटर्न पर ध्यान देते हैं और टैक्स प्रभावों को नजरअंदाज कर देते हैं, जिसके कारण अंतिम लाभ उम्मीद से काफी कम हो सकता है। इसलिए निवेश के साथ कानूनी और वित्तीय प्रावधानों की जानकारी रखना भी उतना ही आवश्यक माना जाता है। बदलते निवेश माहौल में अब केवल पैसा कमाना ही पर्याप्त नहीं रह गया है, बल्कि उसे समझदारी से संरक्षित करना भी उतना ही महत्वपूर्ण हो गया है। सही योजना, समय पर निर्णय और नियमों की स्पष्ट जानकारी के साथ निवेशक अपनी मेहनत की कमाई को अधिक सुरक्षित और प्रभावी तरीके से बढ़ा सकते हैं। यही कारण है कि अब निवेश जगत में टैक्स प्लानिंग को आर्थिक सफलता का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।
ढाका में US डिफेंस डील पर मंथन, ACSA और GSOMIA समझौते फिर सुर्खियों में

नई दिल्ली(New Delhi)। बांग्लादेश में अमेरिका के साथ दो अहम रक्षा समझौतों को लेकर राजनीतिक और रणनीतिक हलकों में बड़ी चर्चा तेज हो गई है। ये दोनों समझौते ACSA (Acquisition and Cross-Servicing Agreement) और GSOMIA (General Security of Military Information Agreement) कई वर्षों से लंबित हैं, जिन्हें लेकर अब एक बार फिर ढाका में गंभीर मंथन शुरू हो गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार ने अमेरिका के साथ इन डिफेंस डील्स को आगे बढ़ाने से परहेज किया था। माना जाता है कि उस समय सरकार ने भारत और चीन के साथ संतुलन बनाए रखने की नीति अपनाई थी, जिसके चलते इन समझौतों पर अंतिम सहमति नहीं बन सकी। हालांकि, अब राजनीतिक बदलाव और नई परिस्थितियों के बीच इन समझौतों के फिर से सक्रिय होने की संभावना जताई जा रही है। ACSA समझौता के तहत अमेरिका और बांग्लादेश के बीच सैन्य लॉजिस्टिक्स सहयोग को मजबूत किया जाता है, जिसमें ईंधन आपूर्ति, उपकरणों की मरम्मत और सैन्य सहायता जैसी सुविधाएं शामिल होती हैं। वहीं GSOMIA के तहत दोनों देशों के बीच संवेदनशील सैन्य सूचनाओं के सुरक्षित आदान-प्रदान की व्यवस्था बनाई जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ये दोनों समझौते लागू होते हैं, तो इससे अमेरिका की बांग्लादेश में सैन्य और रणनीतिक पहुंच और मजबूत हो सकती है। यह कदम बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी उपस्थिति को बढ़ाने के रूप में भी देखा जा रहा है, जिससे पूरे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शक्ति संतुलन पर असर पड़ सकता है। हालांकि, यह स्पष्ट किया जा रहा है कि इन समझौतों का अर्थ किसी सैन्य बेस की स्थापना नहीं है, बल्कि यह मुख्य रूप से सहयोग, लॉजिस्टिक्स और सूचना साझाकरण तक सीमित ढांचा है। फिर भी, इस पहल को लेकर क्षेत्रीय भू-राजनीति में नई हलचल देखी जा रही है।
नेपाल का बड़ा दांव: भारतीय इन्फ्लुएंसर्स को बुलाकर टूरिज्म बढ़ाने की तैयारी, मोदी की अपील के बाद तेज हुई हलचल

नई दिल्ली(New Delhi)। नेपाल की बालेन शाह सरकार ने देश के पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए एक नई और आक्रामक रणनीति शुरू की है, जिसमें भारतीय सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को सीधे नेपाल आने का न्योता दिया गया है। यह कदम ऐसे समय पर सामने आया है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में भारतीय नागरिकों से गैर-जरूरी विदेश यात्राओं से बचने की अपील की थी। इस अपील के बाद क्षेत्रीय पर्यटन और यात्रा उद्योग में हलचल देखी जा रही है। नेपाल सरकार की इस नई पब्लिक डिप्लोमेसी रणनीति के तहत भारतीय यूट्यूबर्स, व्लॉगर्स, पॉडकास्ट क्रिएटर्स और डिजिटल कंटेंट निर्माताओं को नेपाल यात्रा के लिए आमंत्रित किया गया है। नेपाली दूतावास (नई दिल्ली) की ओर से 30 मई तक आवेदन मांगे गए हैं और इस पहल को भारतीय क्रिएटर्स से तेजी से प्रतिक्रिया मिल रही है। रिपोर्ट के अनुसार, यह पहली बार है जब नेपाल सरकार ने इस तरह सीधे भारतीय सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को पर्यटन प्रचार के लिए शामिल किया है। काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, सिर्फ कुछ ही दिनों में 200 से अधिक आवेदन प्राप्त हो चुके हैं और यह संख्या लगातार बढ़ रही है। अनुमान है कि अंतिम तिथि तक यह आंकड़ा 1000 से ज्यादा पहुंच सकता है। नेपाल एयरलाइंस और होटल इंडस्ट्री ने भी इस अभियान को समर्थन दिया है। काठमांडू के कई फाइव स्टार होटलों ने चयनित इन्फ्लुएंसर्स के लिए विशेष पैकेज तैयार किए हैं। योजना के तहत चुने गए पांच इन्फ्लुएंसर्स को नेपाल के प्रमुख पर्यटन स्थलों जैसे काठमांडू, पोखरा और चितवन का दौरा कराया जाएगा, जहां वे देश की प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक धरोहर का अनुभव करेंगे। नेपाल पर्यटन बोर्ड के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की पर्यटन छवि को मजबूत करना है और भारतीय युवाओं तक सीधा संदेश पहुंचाना है।
65 इंजेक्शन, 7 IVF असफलताएं और लंबा इंतजार: 45 की उम्र में मां बनने जा रहीं एक्ट्रेस संभावना सेठ की प्रेरक कहानी

नई दिल्ली । मनोरंजन जगत की चर्चित अभिनेत्री और मॉडल संभावना सेठ इन दिनों अपनी निजी जिंदगी की एक बड़ी खुशखबरी को लेकर सुर्खियों में हैं। लंबे संघर्ष और भावनात्मक उतार-चढ़ाव के बाद अब वह मां बनने की राह पर हैं। हाल ही में उन्होंने अपने बेबी शावर की खूबसूरत तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा कीं, जिनमें उनकी खुशी और भावनाएं साफ झलक रही हैं। 45 वर्ष की उम्र में यह उनके जीवन का एक बेहद महत्वपूर्ण और भावुक मोड़ माना जा रहा है। संभावना सेठ पिछले कई वर्षों से मातृत्व की कोशिशों में लगी हुई थीं। करीब दस साल तक चले इस सफर में उन्होंने कई कठिन परिस्थितियों का सामना किया। लगातार असफलताओं के बावजूद उन्होंने उम्मीद नहीं छोड़ी और अपने सपने को पूरा करने की कोशिश जारी रखी। इस दौरान उन्होंने कई बार IVF प्रक्रिया से गुजरना पड़ा, जिसमें कई प्रयास सफल नहीं हो सके। बताया जाता है कि इस पूरे उपचार और प्रयासों के दौरान उन्हें भारी शारीरिक और मानसिक तनाव से गुजरना पड़ा, जिसमें कई इंजेक्शन और चिकित्सकीय प्रक्रियाएं शामिल थीं। इन कठिन परिस्थितियों ने उनके जीवन को बेहद चुनौतीपूर्ण बना दिया था। लगातार असफलताओं और एक गर्भपात के बाद संभावना और उनके पति ने अंततः सरोगेसी का सहारा लेने का निर्णय लिया। यह निर्णय उनके जीवन का एक नया मोड़ साबित हुआ, जिसने उनकी वर्षों की उम्मीदों को फिर से जीवित कर दिया। सरोगेसी के माध्यम से अब वह अपने जीवन में मातृत्व का अनुभव करने के बेहद करीब पहुंच चुकी हैं। इस पूरी यात्रा में उनके पति ने हमेशा उनका साथ दिया और किसी भी प्रकार का दबाव न बनाते हुए उन्हें भावनात्मक सहयोग प्रदान किया। हाल ही में उन्होंने अपनी प्रेग्नेंसी की घोषणा करते हुए कहा था कि यह उनके जीवन की सबसे खूबसूरत कहानी है, जो अब प्यार, उम्मीद और नए सफर के साथ आगे बढ़ रही है। बेबी शावर की तस्वीरों में उनकी मुस्कान और उत्साह इस बात को दर्शाता है कि लंबे इंतजार के बाद अब उनके जीवन में खुशी का नया अध्याय शुरू होने जा रहा है। संभावना सेठ मनोरंजन जगत में अपने अभिनय और रियलिटी शो में मजबूत उपस्थिति के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने कई प्रोजेक्ट्स और फिल्मों में काम किया है और अपने अलग अंदाज के लिए दर्शकों के बीच पहचान बनाई है। करियर के साथ-साथ उनका यह व्यक्तिगत संघर्ष भी उन्हें एक प्रेरणादायक व्यक्तित्व बनाता है, जो कठिन परिस्थितियों में भी उम्मीद बनाए रखने का संदेश देता है। अब जब वह अपने जीवन के इस नए पड़ाव पर पहुंच चुकी हैं, तो उनके चाहने वाले भी इस खुशी में शामिल हो रहे हैं। लंबी और चुनौतीपूर्ण यात्रा के बाद मिली यह सफलता उनके लिए किसी नए जीवन की शुरुआत से कम नहीं है।
5G Router: बिना तारों के इंटरनेट की नई क्रांति, जानिए कैसे मोबाइल टावर से सीधे मिलती है हाई-स्पीड कनेक्टिविटी

नई दिल्ली(New Delhi)। इंटरनेट की दुनिया में तेजी से बदलाव हो रहा है और अब पारंपरिक वाई-फाई राउटर की जगह 5G राउटर जैसी नई तकनीक सामने आ गई है। यह डिवाइस बिना किसी तार के सीधे मोबाइल टावर से 5G सिग्नल लेकर उसे Wi-Fi नेटवर्क में बदल देता है, जिससे यूजर्स को हाई स्पीड इंटरनेट मिल सकता है। खास बात यह है कि इसमें फाइबर केबल या DSL लाइन की जरूरत नहीं होती, जिससे सेटअप भी साफ-सुथरा और आसान हो जाता है। 5G राउटर असल में एक ऐसा डिवाइस होता है जिसमें 5G मॉडेम और वाई-फाई राउटर दोनों एक साथ मौजूद रहते हैं। यह मोबाइल की तरह सीधे 5G नेटवर्क से जुड़कर इंटरनेट प्राप्त करता है और उसे आसपास के उपकरणों तक वाई-फाई के रूप में पहुंचाता है। अगर 5G नेटवर्क उपलब्ध नहीं होता, तो यह अपने आप 4G नेटवर्क पर स्विच कर जाता है, जिससे इंटरनेट कनेक्टिविटी बनी रहती है। इस तकनीक का सबसे बड़ा फायदा इसकी स्पीड और पोर्टेबिलिटी है। अगर आपके इलाके में मजबूत 5G नेटवर्क उपलब्ध है, तो यह पारंपरिक ब्रॉडबैंड कनेक्शन की तुलना में बेहतर परफॉर्मेंस दे सकता है। खासकर उन लोगों के लिए यह उपयोगी है जो ऑनलाइन गेमिंग, 4K वीडियो स्ट्रीमिंग या बड़े फाइल डाउनलोड जैसे हाई डेटा काम करते हैं। इसके अलावा 5G राउटर का एक और बड़ा फायदा यह है कि यह पोर्टेबल होता है। इसमें इन-बिल्ट बैटरी होती है, जिससे इसे कहीं भी आसानी से इस्तेमाल किया जा सकता है। यात्रा के दौरान या अलग-अलग स्थानों पर काम करने वाले लोगों के लिए यह एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकता है। हालांकि, इसके इस्तेमाल से पहले कुछ बातों पर ध्यान देना जरूरी है। अगर आपके क्षेत्र में 5G नेटवर्क स्थिर नहीं है या बार-बार 4G और 5G के बीच स्विच करता है, तो पारंपरिक फाइबर इंटरनेट ज्यादा बेहतर विकल्प हो सकता है। वहीं, अगर आपको स्थिर घरेलू या ऑफिस कनेक्शन चाहिए तो ब्रॉडबैंड अब भी भरोसेमंद माना जाता है। कुल मिलाकर, 5G राउटर इंटरनेट तकनीक में एक नया कदम है जो बिना तारों के तेज और लचीला कनेक्शन उपलब्ध कराता है, लेकिन इसका सही फायदा तभी मिलेगा जब क्षेत्र में मजबूत 5G नेटवर्क मौजूद हो।
फिल्मी दुनिया में हलचल: ‘डॉन 3’ छोड़ने पर रणवीर सिंह पर शिकायत, फरहान अख्तर ने उठाया बड़ा कदम

नई दिल्ली । बॉलीवुड में बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘डॉन 3’ को लेकर शुरू हुआ विवाद अब बड़ा रूप ले चुका है। फिल्म से रणवीर सिंह के बाहर होने के बाद निर्माता और अभिनेता के बीच तनाव बढ़ गया है। स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि मामला फिल्मी संगठनों तक पहुंच गया है और इस पर औपचारिक शिकायत दर्ज होने की खबरें सामने आई हैं। चर्चा यह भी है कि प्रोजेक्ट के दौरान हुए कथित नुकसान को लेकर करोड़ों रुपये के मुआवजे की मांग पर विचार किया जा रहा है, जिससे फिल्म इंडस्ट्री में हलचल बढ़ गई है। जानकारी के अनुसार रणवीर सिंह को इस बड़े प्रोजेक्ट के लिए पहले ही साइन किया गया था और फिल्म का प्रारंभिक प्रचार भी शुरू हो चुका था। लेकिन बाद में उन्होंने प्रोजेक्ट से हटने का फैसला लिया, जिससे पूरी योजना पर असर पड़ा। बताया जा रहा है कि उनकी अन्य फिल्मों की प्रतिबद्धताओं के चलते यह निर्णय लिया गया, जिसके बाद निर्माण पक्ष को आर्थिक और समय संबंधी नुकसान का सामना करना पड़ा। इसी कारण अब यह विवाद कानूनी और औपचारिक स्तर पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। फिल्मी गलियारों में यह भी चर्चा है कि इस पूरे मामले को लेकर आगे की स्थिति का फैसला एक आगामी बैठक में सामने आ सकता है। उद्योग से जुड़े लोग मानते हैं कि बड़े बजट की फिल्मों में इस तरह के बदलाव का सीधा असर उत्पादन लागत और रिलीज शेड्यूल पर पड़ता है, जिससे विवाद स्वाभाविक रूप से बढ़ जाते हैं। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि आने वाले दिनों में यह मामला किस दिशा में आगे बढ़ता है और क्या दोनों पक्षों के बीच कोई समाधान निकल पाता है या नहीं। इसी बीच बॉलीवुड से जुड़ी एक और पुरानी लेकिन चर्चित टिप्पणी फिर से सुर्खियों में आ गई है, जिसमें एक प्रसिद्ध अभिनेता ने वर्ष 1993 में रिलीज हुई एक लोकप्रिय कॉमेडी फिल्म को अपने व्यक्तिगत दृष्टिकोण से अत्यधिक बोल्ड और कुछ दृश्यों के कारण असहज बताया था। यह फिल्म अपने समय में बड़ी व्यावसायिक सफलता हासिल करने में कामयाब रही थी और दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय रही थी। हालांकि उस अभिनेता ने स्पष्ट रूप से कहा था कि उनकी व्यक्तिगत पसंद उस फिल्म से मेल नहीं खाती, लेकिन दर्शकों की स्वीकार्यता ने इसे बड़ी हिट बना दिया। फिल्मी दुनिया में अक्सर ऐसा देखा जाता है कि किसी फिल्म की सफलता और कलाकारों की व्यक्तिगत राय अलग-अलग हो सकती है। यही कारण है कि सिनेमा के प्रति दर्शकों का नजरिया हमेशा विविध और बहुआयामी रहता है।
आमिर खान का बड़ा बयान: गोविंदा-डेविड धवन की ब्लॉकबस्टर फिल्म को बताया था ‘वल्गर’, 25 करोड़ के कलेक्शन से बनी थी सुपरहिट

नई दिल्ली । बॉलीवुड में कई बार ऐसी फिल्में सामने आई हैं जिन्हें दर्शकों ने भरपूर प्यार दिया, लेकिन आलोचकों और कलाकारों की राय उनसे बिल्कुल अलग रही। ऐसी ही एक चर्चा में आई थी 1993 में रिलीज हुई गोविंदा और चंकी पांडे स्टारर सुपरहिट फिल्म ‘आंखें’, जिसे लेकर बॉलीवुड के मिस्टर परफेक्शनिस्ट आमिर खान ने एक बार बेहद स्पष्ट और सख्त राय दी थी। आमिर खान ने एक पुराने इंटरव्यू में इस फिल्म पर बात करते हुए कहा था कि उन्हें यह फिल्म व्यक्तिगत रूप से पसंद नहीं आई। उन्होंने फिल्म के कुछ दृश्यों को लेकर टिप्पणी करते हुए इसे “वल्गर” और “अश्लीलता के करीब” बताया था। आमिर का कहना था कि फिल्म के कुछ कॉमेडी सीन उनकी समझ और पसंद से मेल नहीं खाते थे, हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि दर्शकों की पसंद अलग हो सकती है और किसी फिल्म की सफलता का पैमाना केवल व्यक्तिगत राय नहीं होता। ‘आंखें’ एक कॉमेडी-ड्रामा फिल्म थी, जिसका निर्देशन डेविड धवन ने किया था और कहानी अनीस बज्मी ने लिखी थी। गोविंदा इस फिल्म में डबल रोल में नजर आए थे, जिसने दर्शकों को खूब हंसाया और मनोरंजन का नया अंदाज दिया। फिल्म में चंकी पांडे, राज बब्बर, कादर खान और शक्ति कपूर जैसे कलाकारों ने भी महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाईं। अपनी रिलीज के साथ ही यह फिल्म उस समय की सबसे बड़ी हिट फिल्मों में शामिल हो गई थी। कम बजट में बनी इस फिल्म की सबसे बड़ी खासियत इसकी कॉमिक टाइमिंग और मनोरंजन से भरपूर कहानी थी। लगभग ढाई करोड़ रुपये के बजट में तैयार हुई इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर लगभग 25 करोड़ रुपये का शानदार कलेक्शन किया था, जो उस दौर में एक बड़ी उपलब्धि मानी जाती है। इस सफलता ने गोविंदा को कॉमेडी फिल्मों के सुपरस्टार के रूप में और मजबूत पहचान दिलाई। आमिर खान के बयान ने फिल्म इंडस्ट्री में चर्चा जरूर पैदा की, क्योंकि जहां एक तरफ यह फिल्म जनता के बीच बेहद लोकप्रिय रही, वहीं दूसरी तरफ एक स्थापित अभिनेता द्वारा इसे लेकर इतनी सख्त राय सामने आई। हालांकि आमिर ने यह भी स्पष्ट किया था कि उनका उद्देश्य किसी फिल्म को छोटा दिखाना नहीं था, बल्कि वह सिर्फ अपनी व्यक्तिगत प्रतिक्रिया साझा कर रहे थे। बाद के वर्षों में भी ‘आंखें’ को हिंदी सिनेमा की उन फिल्मों में गिना जाता है, जिन्होंने कम लागत में बड़ी कमाई कर इंडस्ट्री को चौंका दिया। इस फिल्म की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसे बाद में अन्य भाषाओं में भी रीमेक किया गया। आज भी जब 90 के दशक की कॉमेडी फिल्मों की चर्चा होती है, तो ‘आंखें’ का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। आमिर खान की टिप्पणी और फिल्म की ऐतिहासिक सफलता मिलकर इसे बॉलीवुड इतिहास की उन फिल्मों में शामिल कर देती है, जो अपनी लोकप्रियता और विवाद दोनों के कारण याद की जाती हैं।
ऐश्वर्या राय का स्टाइलिश कमबैक, कान्स के क्लोजिंग डे पर व्हाइट पैंटसूट ने खींची पूरी लाइमलाइट

नई दिल्ली । फ्रांस में आयोजित कान फिल्म फेस्टिवल 2026 के समापन दिवस पर भारतीय अभिनेत्री ऐश्वर्या राय बच्चन ने एक बार फिर अपने आकर्षक और स्टाइलिश अंदाज से पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। रेड कारपेट पर उनकी मौजूदगी ने इस आयोजन को खास बना दिया, जहां उन्होंने ऑल-व्हाइट पैंटसूट में ऐसा ग्लैमरस अवतार पेश किया कि फैंस उन्हें एक बार फिर “कान्स की क्वीन” कहने लगे। उनकी यह एंट्री न केवल फैशन जगत में चर्चा का विषय बनी, बल्कि सोशल मीडिया पर भी उनका लुक तेजी से वायरल हो गया और लोगों ने उनकी तारीफों के पुल बांध दिए। इस खास मौके के लिए ऐश्वर्या राय ने इंटरनेशनल डिजाइनर द्वारा तैयार किया गया एक शानदार व्हाइट सीक्विन पैंटसूट चुना, जिसमें क्लासिक एलिगेंस और मॉडर्न स्टाइल का बेहतरीन मेल देखने को मिला। उनके ब्लेजर में स्ट्रॉन्ग शोल्डर डिजाइन और सूक्ष्म लेस डिटेलिंग ने उनके लुक को और भी प्रभावशाली बना दिया। इसके साथ उन्होंने मैचिंग बस्टियर और फ्लेयर्ड ट्राउजर पहना, जिस पर सिल्वर टोन की हल्की चमक ने उनके पूरे व्यक्तित्व को और अधिक आकर्षक बना दिया। यह पूरा आउटफिट उन्हें एक पावरफुल और कॉन्फिडेंट फैशन स्टेटमेंट के रूप में पेश कर रहा था। उनके लुक का सबसे खास आकर्षण उनका फेदर और लेस से सजा हुआ स्टाइलिश स्कार्फ रहा, जिसने उनके पूरे आउटफिट में एक ड्रामेटिक और रॉयल टच जोड़ दिया। इसके साथ उन्होंने डायमंड ज्वेलरी और व्हाइट हील्स को चुना, जिसने उनके लुक को पूरी तरह से कंप्लीट किया। उनका मेकअप भी बेहद सॉफ्ट और एलिगेंट रखा गया, जिसमें ग्लॉसी फिनिश, विंग्ड आईलाइनर और नैचुरल टोन ने उनके चेहरे की खूबसूरती को और निखार दिया। सॉफ्ट वेवी हेयरस्टाइल ने उनके समग्र लुक में एक क्लासिक हॉलीवुड टच जोड़ दिया। रेड कारपेट पर उनकी एंट्री के साथ ही कैमरों की फ्लैश लाइट्स लगातार उन पर केंद्रित हो गईं और वहां मौजूद दर्शकों ने भी उनके अंदाज की जमकर सराहना की। फैंस ने उन्हें ग्लोबल फैशन आइकन बताते हुए कहा कि वे हर बार अपनी मौजूदगी से फेस्टिवल का आकर्षण बढ़ा देती हैं। सोशल मीडिया पर उनके इस लुक की तस्वीरें और वीडियो तेजी से फैल गए और कुछ ही समय में यह ट्रेंड करने लगा। कान फिल्म फेस्टिवल में इस बार कई देशों की फिल्मों का प्रदर्शन हुआ, लेकिन भारतीय सिनेमा की भागीदारी के बावजूद अवॉर्ड्स के मामले में सफलता नहीं मिल सकी। हालांकि, इसके बावजूद रेड कारपेट पर भारतीय प्रतिनिधित्व और ऐश्वर्या राय का प्रभावशाली अंदाज चर्चा का मुख्य केंद्र बना रहा। उनकी उपस्थिति ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय सिनेमा की सबसे बड़ी फैशन और ग्लैमर आइकन में से एक हैं। फेस्टिवल के समापन पर ऐश्वर्या राय की यह शानदार उपस्थिति इस बात का प्रतीक रही कि फैशन और सिनेमा की दुनिया में उनका प्रभाव अब भी उतना ही मजबूत है जितना पहले था। उनकी यह एंट्री न केवल एक फैशन मोमेंट थी, बल्कि एक ग्लोबल स्टाइल स्टेटमेंट भी बन गई, जिसने कान्स 2026 के अंतिम दिन को यादगार बना दिया।