भारत विभाजन पर RSS के सुनील आंबेकर का बयान, संगठन की भूमिका को लेकर किया अहम दावा

नई दिल्ली । देश के ऐतिहासिक विभाजन को लेकर एक बार फिर राजनीतिक और वैचारिक बहस तेज हो गई है, जब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के राष्ट्रीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने एक कार्यक्रम के दौरान यह टिप्पणी की कि यदि उस समय संगठन अधिक मजबूत होता, तो भारत का विभाजन संभवतः नहीं होता। यह बयान दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान सामने आया, जहां एक डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग के बाद उन्होंने 1942 से 1947 के दौर की घटनाओं और उस समय की परिस्थितियों पर अपने विचार साझा किए। सुनील आंबेकर ने अपने संबोधन में कहा कि विभाजन का वह दौर भारतीय इतिहास का अत्यंत संवेदनशील और दर्दनाक अध्याय रहा है, जिसे राष्ट्रवादी दृष्टिकोण से हमेशा गहरी पीड़ा के साथ याद किया जाता है। उन्होंने कहा कि उस समय संगठन का विस्तार दिल्ली और अविभाजित पंजाब जैसे क्षेत्रों में तेजी से हो रहा था, लेकिन उसकी संगठनात्मक क्षमता अभी सीमित थी। उनके अनुसार, यदि उस समय संगठन और अधिक सशक्त होता, तो परिस्थितियां कुछ और दिशा ले सकती थीं और विभाजन को रोका जा सकता था। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि विभाजन के दौरान संगठन से जुड़े स्वयंसेवकों ने उन क्षेत्रों में लोगों की सुरक्षा और सहायता के लिए काम किया, जो बाद में पाकिस्तान का हिस्सा बने। उन्होंने दावा किया कि स्वयंसेवक तब तक सक्रिय रहे जब तक प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया नहीं गया। इस दौरान राहत शिविरों के संचालन और विस्थापित लोगों की सहायता में भी योगदान का उल्लेख किया गया। अपने संबोधन में सुनील आंबेकर ने यह भी कहा कि संगठन की स्थापना के.बी. हेडगेवार ने किसी राजनीतिक उद्देश्य के लिए नहीं बल्कि समाज में सांस्कृतिक जागरण और राष्ट्रीय आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए की थी। उन्होंने यह भी कहा कि संगठन का उद्देश्य समाज को संगठित करना था, न कि राजनीतिक सत्ता प्राप्त करना। इस बयान के बाद ऐतिहासिक घटनाओं की व्याख्या को लेकर एक नई बहस शुरू हो गई है, जिसमें अलग-अलग दृष्टिकोण सामने आ रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, भारत का विभाजन एक जटिल ऐतिहासिक प्रक्रिया थी, जिसमें कई राजनीतिक, सामाजिक और अंतरराष्ट्रीय कारण शामिल थे, जिन्हें केवल एक कारक से जोड़कर देखना पर्याप्त नहीं माना जा सकता। यह मुद्दा अब एक बार फिर इतिहास, राजनीति और विचारधारा के बीच चर्चा का केंद्र बन गया है, जहां विभिन्न समूह अपने-अपने दृष्टिकोण से उस दौर की घटनाओं को समझने और व्याख्यायित करने की कोशिश कर रहे हैं।
टीएमसी में सियासी हलचल तेज, दिल्ली मुलाकात के बाद ऋतब्रत बनर्जी और शुभेंदु अधिकारी पर उठे सवाल

नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल की राजनीति एक बार फिर सुर्खियों में है, जहां तृणमूल कांग्रेस के भीतर कथित असंतोष और बदलते राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है। दिल्ली में हुई एक अचानक मुलाकात ने राजनीतिक हलकों में नई हलचल पैदा कर दी है, जिसके बाद बंगाल की सियासत में कई तरह के सवाल खड़े हो गए हैं। दिल्ली के पुराने बंग भवन में शुक्रवार को तृणमूल कांग्रेस के विधायक ऋतब्रत बनर्जी और भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी के बीच हुई मुलाकात को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। हालांकि इसे एक सामान्य शिष्टाचार भेंट बताया गया है, लेकिन जिस तरह यह मुलाकात अचानक और सार्वजनिक स्थान पर हुई, उसने राजनीतिक विश्लेषकों का ध्यान खींच लिया है। मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं के बीच संक्षिप्त बातचीत भी हुई और माहौल को पूरी तरह सौहार्दपूर्ण बताया गया। मौके पर मौजूद कुछ लोगों के अनुसार, बातचीत औपचारिक थी लेकिन राजनीतिक संदर्भों में इसे अलग-अलग नजरिए से देखा जा रहा है। ऋतब्रत बनर्जी ने बाद में इस पूरे मामले पर सफाई देते हुए कहा कि उनका दिल्ली दौरा पूरी तरह प्रशासनिक और व्यक्तिगत कार्यों से जुड़ा था। उन्होंने बताया कि वह पहले राज्यसभा सांसद रह चुके हैं, जिसके चलते उनके पास डिप्लोमैटिक पासपोर्ट था, जिसे अब नियमों के अनुसार नियमित पासपोर्ट में बदलने की प्रक्रिया पूरी करनी थी। उन्होंने यह भी बताया कि विधायक बनने के बाद सरकारी आवास और उससे जुड़े किराए के निपटान जैसे औपचारिक कार्य भी पूरे करने थे। इसी सिलसिले में वह दिल्ली आए थे और पुराने बंग भवन में लंच के दौरान यह मुलाकात हो गई। उनके अनुसार, इस घटना को राजनीतिक रंग देना उचित नहीं है क्योंकि यह पूरी तरह आकस्मिक थी। इसके बावजूद पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस मुलाकात को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। राज्य में पहले से ही कुछ नेताओं के असंतोष और पार्टी लाइन से अलग बयानबाजी की खबरें आती रही हैं, जिसके चलते इस मुलाकात को लेकर अटकलों का दौर शुरू हो गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि किसी भी दल के भीतर नेताओं की गतिविधियां अक्सर व्यापक राजनीतिक संकेत देती हैं, खासकर तब जब राज्य में चुनावी माहौल या राजनीतिक पुनर्गठन की चर्चाएं चल रही हों। ऐसे में इस मुलाकात को लेकर भी अलग-अलग अर्थ निकाले जा रहे हैं। फिलहाल तृणमूल कांग्रेस की ओर से इस पूरे मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन दिल्ली में हुई इस बैठक ने बंगाल की राजनीति में एक नई बहस को जरूर जन्म दे दिया है।
पाकिस्तान-तुर्की डिफेंस डील से बढ़ी हलचल, 65 KAAN फाइटर जेट खरीद की खबर

नई दिल्ली । पाकिस्तान और तुर्की के बीच कथित रूप से एक बड़ी रक्षा डील की खबर ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल बढ़ा दी है। रिपोर्ट्स के अनुसार पाकिस्तान तुर्की के स्वदेशी 5वीं पीढ़ी के स्टेल्थ फाइटर जेट KAAN के करीब 65 विमानों की खरीद कर सकता है। यदि यह सौदा आधिकारिक रूप से तय होता है, तो यह पाकिस्तान की वायुसेना के इतिहास की सबसे बड़ी रक्षा डील्स में से एक मानी जाएगी। KAAN, जिसे पहले TF-X कार्यक्रम के नाम से जाना जाता था, तुर्की का अत्याधुनिक पांचवीं पीढ़ी का स्टेल्थ फाइटर जेट है। इसे एयर सुपीरियोरिटी मिशनों के लिए डिजाइन किया गया है और इसमें आधुनिक स्टेल्थ तकनीक, एडवांस एवियोनिक्स और शक्तिशाली इंजन जैसे फीचर्स शामिल हैं। यह विमान दुश्मन की रडार प्रणाली से बचकर लंबी दूरी तक मिशन को अंजाम देने में सक्षम माना जाता है। रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि इस संभावित डील की कुल कीमत करीब 15 अरब डॉलर हो सकती है। हालांकि अभी तक पाकिस्तान या तुर्की की सरकार, रक्षा मंत्रालय या संबंधित एजेंसियों की ओर से इस पर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। Turkish Aerospace Industries (TAI) और ISPR ने भी इस मामले पर चुप्पी साध रखी है। यदि यह सौदा आगे बढ़ता है, तो पाकिस्तान की एयरफोर्स क्षमता में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक स्टेल्थ फाइटर जेट्स से पाकिस्तान की रणनीतिक शक्ति और क्षेत्रीय सैन्य संतुलन पर प्रभाव पड़ सकता है। इससे उसकी एयर डिफेंस और आक्रामक क्षमताएं दोनों मजबूत हो सकती हैं। तुर्की के लिए भी यह डील बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। KAAN प्रोजेक्ट को तुर्की अपने डिफेंस इंडस्ट्री के लिए एक बड़ा मील का पत्थर मानता है, जिसका उद्देश्य विदेशी तकनीक पर निर्भरता कम करना और स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देना है। अगर पाकिस्तान इस प्रोजेक्ट का हिस्सा बनता है, तो इससे तकनीकी सहयोग और उत्पादन साझेदारी को भी बढ़ावा मिल सकता है। पाकिस्तान पहले से ही तुर्की के साथ JF-17 फाइटर जेट जैसे कई रक्षा प्रोजेक्ट्स में सहयोग कर चुका है। ऐसे में KAAN डील दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत कर सकती है। हालांकि रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इस स्तर की बड़ी डील्स आमतौर पर लंबी बातचीत, तकनीकी परीक्षण और वित्तीय मंजूरी के बाद ही अंतिम रूप लेती हैं। इसलिए जब तक आधिकारिक बयान नहीं आता, तब तक इस खबर को “संभावित” समझकर ही देखा जाना चाहिए। इस बीच, इस कथित डील ने वैश्विक रक्षा बाजार और खासकर एशिया के रणनीतिक समीकरणों में नई चर्चा जरूर शुरू कर दी है।
‘फ्री में सभ्यता का क्रैश कोर्स मिलेगा’ -भारत यात्रा पर ईरान ने साधा अमेरिका पर निशाना

नई दिल्ली । अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो शनिवार को चार दिवसीय भारत दौरे पर कोलकाता पहुंचे। यह दौरा वैश्विक कूटनीति के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि इस समय मध्य पूर्व में तनाव और बदलते अंतरराष्ट्रीय समीकरणों के बीच कई बड़े मुद्दों पर चर्चा होनी है। रूबियो ने भारत पहुंचने के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट साझा की, जिसमें उन्होंने लिखा कि वह भारत में एक “शानदार दौरे” की उम्मीद कर रहे हैं। इस पोस्ट के साथ उन्होंने अपनी एक तस्वीर भी साझा की, जिसमें वे विमान से उतरते नजर आए। इसी पोस्ट को लेकर ईरान के मुंबई स्थित दूतावास कार्यालय ने सोशल मीडिया पर अप्रत्याशित टिप्पणी कर दी, जिसने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी। ईरान की तरफ से पोस्ट पर तंज कसते हुए लिखा गया कि “थोड़ा सीख लो यार, सभ्यता का क्रैश कोर्स फ्री में मिल जाएगा।” इस टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई और इसे भारत-अमेरिका कूटनीतिक संबंधों के बीच एक असामान्य डिजिटल टकराव के रूप में देखा जा रहा है। इधर, अमेरिकी विदेश मंत्री की यह यात्रा केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह क्वाड देशों की बैठक से भी जुड़ी है। भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्री हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने और चीन के बढ़ते प्रभाव को लेकर रणनीति पर चर्चा कर रहे हैं। इस दौरे में ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा सहयोग, व्यापार और तकनीकी साझेदारी जैसे अहम मुद्दों पर बातचीत होने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि रूबियो की यह यात्रा भारत-अमेरिका संबंधों को नई दिशा दे सकती है, जबकि ईरान की टिप्पणी ने इस पूरे घटनाक्रम को सोशल मीडिया और कूटनीतिक दोनों स्तर पर और दिलचस्प बना दिया है। Tags:Marco Rubio India, Iran Embassy, India US relations, Quad meeting, international news, diplomatic tension, world news
Royal Enfield का बड़ा प्लान: 2028 तक हर साल 20 लाख बाइक उत्पादन का लक्ष्य

नई दिल्ली । भारतीय बाजार में Royal Enfield की बाइक्स की डिमांड लगातार तेजी से बढ़ रही है। Classic 350, Hunter 350 और Electra जैसे मॉडल्स युवाओं से लेकर लंबी दूरी के राइडर्स तक की पहली पसंद बने हुए हैं। बढ़ती लोकप्रियता के चलते कई बार ग्राहकों को लंबा वेटिंग पीरियड भी झेलना पड़ता है, जिससे डिलीवरी में देरी होती है। इसी समस्या को देखते हुए कंपनी ने बड़ा कदम उठाने की तैयारी की है। रिपोर्ट्स के अनुसार Royal Enfield का लक्ष्य है कि 2028 तक हर साल 20 लाख बाइक का उत्पादन किया जाए। इसके लिए कंपनी अपनी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता और सप्लाई चेन को तेजी से मजबूत कर रही है। कंपनी का मानना है कि उत्पादन बढ़ने से न सिर्फ ग्राहकों को समय पर डिलीवरी मिलेगी, बल्कि बाजार में उसकी पकड़ और मजबूत होगी। वर्तमान में 350cc सेगमेंट में Royal Enfield का दबदबा लगातार बढ़ रहा है, और इसी सेगमेंट की बाइक्स सबसे ज्यादा डिमांड में हैं। बढ़ती डिमांड के कारण कई लोकप्रिय मॉडल्स पर महीनों का वेटिंग पीरियड देखने को मिलता है, जिससे कई ग्राहक अन्य ब्रांड्स की ओर भी रुख कर लेते हैं। ऐसे में प्रोडक्शन बढ़ाना कंपनी के लिए बेहद जरूरी कदम माना जा रहा है। रिपोर्ट्स यह भी बताती हैं कि Royal Enfield सिर्फ मौजूदा बाइक्स तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि आने वाले समय में एडवेंचर और इलेक्ट्रिक बाइक सेगमेंट पर भी जोर दे रही है। इससे नए मॉडल्स की उपलब्धता भी बेहतर होगी और ग्राहकों को ज्यादा विकल्प मिलेंगे। ऑटो एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर कंपनी अपने इस लक्ष्य को हासिल करने में सफल रहती है, तो न सिर्फ वेटिंग पीरियड खत्म होगा बल्कि Royal Enfield की बाजार हिस्सेदारी और ब्रांड वैल्यू दोनों में बड़ा उछाल देखने को मिलेगा। कुल मिलाकर 2028 तक 20 लाख बाइक उत्पादन का लक्ष्य Royal Enfield के लिए गेमचेंजर साबित हो सकता है, जिससे ग्राहकों को तेज डिलीवरी और बेहतर अनुभव मिलने की उम्मीद है।
कान्स 2026 रेड कार्पेट पर ऐश्वर्या राय का फेयरीटेल अवतार, पिंक गाउन में छाईं, आराध्या का रेड लुक वायरल

नई दिल्ली। कान्स फिल्म फेस्टिवल 2026 में इस बार भी भारतीय सिनेमा की प्रतिष्ठित अभिनेत्री Aishwarya Rai Bachchan ने अपने ग्लैमरस और रॉयल अंदाज से अंतरराष्ट्रीय रेड कार्पेट पर खास पहचान दर्ज कराई। फैशन और एलिगेंस का बेहतरीन संगम पेश करते हुए उन्होंने पेस्टल पिंक कॉर्सेट स्टाइल गाउन में ऐसा आकर्षण बिखेरा कि हर कैमरा उनकी ओर ही ठहर गया। यह खास लुक न सिर्फ उनकी पर्सनैलिटी को फेयरीटेल टच दे रहा था, बल्कि रेड कार्पेट पर उनकी मौजूदगी को और भी प्रभावशाली बना रहा था। इस प्रतिष्ठित आयोजन Cannes Film Festival 2026 के दौरान उनका यह दूसरा प्रमुख अवतार था, जिसने फैशन प्रेमियों के बीच खास चर्चा बटोरी। ऐश्वर्या राय बच्चन ने इस अवसर पर सॉफ्ट पिंक टोन वाला स्ट्रैपलेस कॉर्सेट गाउन पहना, जिसमें फ्लोइंग सिल्हूट और केप स्टाइल डिजाइन ने उनके लुक को बेहद शाही बना दिया। गाउन पर बारीकी से जड़े फ्लोरल क्रिस्टल डिटेलिंग ने पूरे आउटफिट में चमक और गहराई जोड़ दी, जिससे उनका लुक और भी प्रभावशाली दिखाई दिया। उनका मेकअप बेहद सॉफ्ट और नेचुरल रखा गया था, जिसमें हल्की चमकदार त्वचा, हल्के आई मेकअप और ग्लॉसी लिप्स शामिल थे। बालों को हल्की वेव्स में स्टाइल किया गया था, जो पूरे लुक को संतुलित और एलिगेंट बना रहा था। इस खास मौके पर उनकी बेटी Aaradhya Bachchan भी उनके साथ नजर आईं। आराध्या ने रेड कलर का आकर्षक गाउन पहना था, जिसमें मैचिंग केप ने उनके लुक को और भी स्टाइलिश बना दिया। कम उम्र में ही उनके इस आत्मविश्वासी और सलीकेदार अंदाज ने लोगों का ध्यान खींचा और मां-बेटी की यह जोड़ी रेड कार्पेट पर खास आकर्षण का केंद्र बन गई। दोनों की मौजूदगी ने इस ग्लैमरस शाम को और भी यादगार बना दिया, जहां फैशन और फैमिली बॉन्डिंग का खूबसूरत संगम देखने को मिला। दिन की शुरुआत में भी ऐश्वर्या राय बच्चन ने एक अलग और फ्यूचरिस्टिक ब्लू आउटफिट में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई थी, जिसने उनके फैशन एक्सपेरिमेंट को एक नया आयाम दिया। लेकिन शाम के इस पेस्टल पिंक लुक ने उन्हें एक बिल्कुल अलग और रोमांटिक अवतार में पेश किया, जिसे दर्शकों ने बेहद पसंद किया। उनकी हर उपस्थिति में आत्मविश्वास और ग्रेस साफ झलकता रहा, जिसने एक बार फिर साबित किया कि वे अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारतीय सिनेमा और फैशन की मजबूत पहचान हैं। कान्स के इस संस्करण में उनका यह अवतार न केवल मीडिया और फैशन समीक्षकों के लिए चर्चा का विषय बना, बल्कि सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो गया। लोगों ने मां-बेटी की इस जोड़ी की तारीफ करते हुए इसे इस साल के सबसे खूबसूरत रेड कार्पेट मोमेंट्स में से एक बताया। इस तरह ऐश्वर्या राय बच्चन ने एक बार फिर साबित कर दिया कि उनका स्टाइल और शालीनता समय के साथ और भी निखरती जा रही है।
रवि किशन के एक बयान में हुई जुबानी गलती सोशल मीडिया पर वायरल हो गई, जिस पर उन्होंने हंसते हुए प्रतिक्रिया दी और खुद का मजाक उड़ाया।

नई दिल्ली: भोजपुरी सिनेमा के लोकप्रिय अभिनेता और सांसद Ravi Kishan एक बार फिर सोशल मीडिया पर चर्चा के केंद्र में हैं। हाल ही में उनके एक सार्वजनिक बयान के दौरान हुई जुबानी चूक ने इंटरनेट पर खूब सुर्खियां बटोरीं और देखते ही देखते यह मामला मीम्स का विषय बन गया। “होम फ्रॉम वर्क” और “जल्दी द लेट” जैसे शब्दों की गलत प्रस्तुति ने सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं को मनोरंजन का नया कारण दे दिया, जिसके बाद हर तरफ मजेदार प्रतिक्रियाओं और व्यंग्यात्मक पोस्ट्स की बाढ़ आ गई। यह पूरा मामला तब शुरू हुआ जब रवि किशन एक सार्वजनिक कार्यक्रम में ईंधन बचत और सार्वजनिक परिवहन के उपयोग को लेकर अपनी बात रख रहे थे। इसी दौरान बोलचाल में उनसे “वर्क फ्रॉम होम” की जगह “होम फ्रॉम वर्क” निकल गया, जो तुरंत ही लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया। इसके बाद “जल्दी द लेट” जैसे शब्दों ने भी लोगों का ध्यान खींचा और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर यह क्लिप तेजी से वायरल हो गई। देखते ही देखते इस पर आधारित मीम्स की एक लंबी श्रृंखला बन गई, जिसमें लोगों ने मजाकिया अंदाज में इस बयान को अलग-अलग तरीकों से प्रस्तुत किया। अब इस पूरे मामले पर रवि किशन ने खुद आगे आकर प्रतिक्रिया दी है। एक फिल्म के ट्रेलर लॉन्च इवेंट के दौरान उन्होंने इस वायरल ट्रेंड पर हल्के-फुल्के अंदाज में अपनी बात रखी। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि उन्हें खुद समझ नहीं आता कि वह अक्सर ऐसे मामलों में क्यों वायरल हो जाते हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि बोलचाल के दौरान कभी-कभी जुबान फिसल जाती है और ऐसे में अनजाने में शब्दों का क्रम बदल जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि वह कोई मशीन नहीं हैं, बल्कि एक सामान्य इंसान हैं, जिससे गलती होना स्वाभाविक है। रवि किशन ने मजाकिया लहजे में यह भी कहा कि कभी उन्हें “वर्क फ्रॉम होम” बोलना था, लेकिन गलती से “होम फ्रॉम वर्क” निकल गया और इसी तरह “जल्दी द लेट” जैसे शब्द भी जुबान से निकल गए। उन्होंने इस पूरे मामले को गंभीरता से न लेते हुए इसे मनोरंजन का हिस्सा बताया और लोगों से अपील की कि हर छोटी गलती को बड़े मुद्दे की तरह न देखा जाए। इस दौरान उन्होंने यह भी साझा किया कि कई बार उनके राजनीतिक सहयोगी भी उनसे यह सवाल करते हैं कि वह हमेशा चर्चा में कैसे आ जाते हैं, जिस पर उन्होंने हंसते हुए जवाब दिया कि शायद यह उनकी किस्मत है या फिर उनकी बेबाक शैली का परिणाम है। उनके इस आत्म-हास्य वाले अंदाज ने एक बार फिर दर्शकों का दिल जीत लिया और सोशल मीडिया पर उनकी यह प्रतिक्रिया भी तेजी से वायरल हो गई। कुल मिलाकर यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि डिजिटल युग में किसी भी सार्वजनिक बयान की छोटी-सी चूक भी कितनी तेजी से वायरल हो सकती है। हालांकि रवि किशन ने जिस सहजता और हास्य के साथ इस स्थिति को स्वीकार किया, उसने इस पूरे विवाद को हल्का और मनोरंजक बना दिया।
रोमांस और कॉमेडी का तड़का लेकर आया ‘है जवानी तो इश्क होना है’ ट्रेलर -वरुण धवन की दोहरी लव स्टोरी ने मचाई सोशल मीडिया पर हलचल

नई दिल्ली: 23 मई 2026। बॉलीवुड में एक बार फिर से रोमांस और कॉमेडी का तगड़ा मिश्रण लेकर निर्देशक डेविड धवन की नई फिल्म ‘है जवानी तो इश्क होना है’ का ट्रेलर रिलीज हो गया है। ट्रेलर सामने आते ही सोशल मीडिया पर फिल्म को लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। फिल्म में Varun Dhawan, Mrunal Thakur और Pooja Hegde मुख्य भूमिकाओं में नजर आ रहे हैं, जबकि फिल्म का निर्देशन अनुभवी फिल्मकार David Dhawan ने किया है। ट्रेलर की शुरुआत एक कोर्टरूम सीन से होती है, जहां वरुण धवन और मृणाल ठाकुर तलाक की प्रक्रिया के लिए अदालत में पेश होते हैं। जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, दर्शकों को पता चलता है कि दोनों के बीच अलग होने की वजह कोई सामान्य विवाद नहीं बल्कि एक बेहद अजीब और हास्यपूर्ण स्थिति है। मृणाल का किरदार यह आरोप लगाता है कि वरुण हर समय रोमांस और रिश्ते को लेकर ज्यादा ही जुनूनी रहते हैं, जबकि वरुण अपनी ओर से सफाई देते हुए कहते हैं कि वह केवल परिवार और बच्चे की चाह रखते हैं। कहानी में असली मोड़ तब आता है जब वरुण की मुलाकात एक क्लब में पूजा हेगड़े के किरदार से होती है। यहां से एक नया रिश्ता शुरू होता है और वरुण अपनी असल जिंदगी को छिपाते हुए एक नई प्रेम कहानी में उलझ जाते हैं। लेकिन हालात तब पूरी तरह बेकाबू हो जाते हैं जब अचानक मृणाल ठाकुर अपने प्रेग्नेंट होने की खबर देती हैं। वरुण अभी इस झटके से उबर भी नहीं पाते कि पूजा हेगड़े का किरदार भी अपनी प्रेग्नेंसी की घोषणा कर देता है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि दोनों ही मामलों में बच्चे के पिता वरुण धवन ही बताए जाते हैं। इस पूरे घटनाक्रम के बाद ट्रेलर में कन्फ्यूजन, भागदौड़ और हास्य से भरे हालात देखने को मिलते हैं, जो दर्शकों को लगातार हंसाने के साथ-साथ कहानी के अगले मोड़ को लेकर उत्सुक भी रखते हैं। फिल्म में रिश्तों की उलझन, आधुनिक प्रेम जीवन की जटिलताएं और हास्य का ओवरडोज साफ तौर पर देखने को मिलता है। ट्रेलर में पुराने बॉलीवुड म्यूजिक की झलक भी दिखाई देती है, जिसमें लोकप्रिय गाने के नए वर्जन का इस्तेमाल किया गया है, जिससे दर्शकों में नॉस्टैल्जिया भी देखने को मिला है। फिल्म में चंकी पांडे, जिमी शेरगिल, मनीष पॉल और राकेश बेदी जैसे कलाकार भी अहम भूमिकाओं में नजर आएंगे, जो कहानी में कॉमिक टाइमिंग को और मजबूत बनाते हैं। फिल्म का कुल स्वरूप एक पारिवारिक मनोरंजन के रूप में सामने आता है, जिसमें रिश्तों की गलतफहमियों को हास्य के अंदाज में पेश किया गया है। ट्रेलर के अंत में कहानी और भी उलझती हुई नजर आती है, जिससे यह संकेत मिलता है कि फिल्म में दर्शकों को कई अप्रत्याशित मोड़ देखने को मिल सकते हैं। फिल्म की रिलीज को लेकर दर्शकों की उत्सुकता अब तेजी से बढ़ रही है, और इसे एक बड़े कॉमेडी एंटरटेनर के रूप में देखा जा रहा है।
एआई से बनी फर्जी तस्वीरों पर भड़कीं रुक्मिणी वसंत, बोलीं- ‘यह निजता का गंभीर उल्लंघन है

नई दिल्ली । आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल ने जहां डिजिटल दुनिया को नई रफ्तार दी है, वहीं इसके दुरुपयोग के मामले भी लगातार सामने आ रहे हैं। सोशल मीडिया पर हाल के समय में कई फिल्मी हस्तियों की फर्जी और छेड़छाड़ की गई तस्वीरें वायरल होने की घटनाएं चिंता का विषय बनती जा रही हैं। इसी कड़ी में अब अभिनेत्री रुक्मिणी वसंत का नाम भी सामने आया है, जिन्होंने अपनी कथित फर्जी तस्वीरों को लेकर कड़ा विरोध जताया है। रुक्मिणी वसंत ने सोशल मीडिया पर अपने नाम और चेहरे का उपयोग कर बनाई गई एआई-जनित तस्वीरों पर नाराजगी व्यक्त की है। उन्होंने साफ कहा है कि ये तस्वीरें पूरी तरह नकली हैं और इनका वास्तविकता से कोई लेना-देना नहीं है। अभिनेत्री ने कहा कि किसी भी व्यक्ति की पहचान के साथ इस तरह की छेड़छाड़ न केवल गलत है, बल्कि यह उसकी निजता का गंभीर उल्लंघन भी है। उन्होंने इंस्टाग्राम पर जारी अपने बयान में कहा कि उनकी टीम ने इंटरनेट पर कुछ ऐसी तस्वीरें देखीं, जिन्हें गलत तरीके से उनके नाम और चेहरे के साथ साझा किया जा रहा है। रुक्मिणी के अनुसार, सोशल मीडिया पर बिना सत्यापन के ऐसे कंटेंट का तेजी से फैलना बेहद चिंताजनक है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे किसी भी अनधिकृत या संदिग्ध तस्वीर पर भरोसा न करें और न ही उसे आगे साझा करें। अभिनेत्री ने कहा कि एआई तकनीक का उद्देश्य रचनात्मकता और विकास को बढ़ावा देना होना चाहिए, न कि किसी व्यक्ति की छवि को नुकसान पहुंचाना या भ्रामक जानकारी फैलाना। उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह की घटनाएं मानसिक रूप से परेशान करने वाली होती हैं और इससे किसी की निजी और पेशेवर जिंदगी पर असर पड़ सकता है। रुक्मिणी वसंत ने स्पष्ट किया कि वह और उनकी टीम इस मामले को गंभीरता से ले रहे हैं और इसके खिलाफ आवश्यक कानूनी और साइबर अपराध से जुड़ी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। उन्होंने कहा कि जो लोग इस तरह की फर्जी तस्वीरों के निर्माण और प्रसार में शामिल हैं, उनके खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि केवल फर्जी कंटेंट बनाना ही नहीं, बल्कि उसे बिना जांच के आगे बढ़ाना भी जिम्मेदारी की कमी को दर्शाता है। ऐसे मामलों में समाज को भी जागरूक होने की जरूरत है ताकि गलत जानकारी को फैलने से रोका जा सके। अगर रुक्मिणी वसंत के करियर की बात करें तो उन्होंने साउथ फिल्म इंडस्ट्री में अपनी खास पहचान बनाई है। उनकी फिल्म ‘कांतारा’ के बाद उनकी लोकप्रियता में तेजी से इजाफा हुआ और दर्शकों के बीच उनकी अभिनय क्षमता को सराहा गया। अपनी सादगी और मजबूत परफॉर्मेंस के चलते उन्होंने एक अलग पहचान स्थापित की है। यह मामला एक बार फिर इस बात को रेखांकित करता है कि डिजिटल युग में तकनीक जितनी उपयोगी है, उतनी ही संवेदनशील भी हो गई है। एआई और सोशल मीडिया के जिम्मेदार उपयोग की जरूरत अब पहले से कहीं ज्यादा महसूस की जा रही है, ताकि किसी भी व्यक्ति की निजता और गरिमा सुरक्षित रह सके।
भारत-अमेरिका रिश्तों को नई मजबूती: पीएम मोदी और मार्को रुबियो की 60 मिनट की अहम बैठक, व्हाइट हाउस आने का मिला विशेष न्योता

नई दिल्ली । भारत और अमेरिका के बीच बढ़ती रणनीतिक साझेदारी को नई मजबूती उस समय मिली जब अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से राजधानी दिल्ली में मुलाकात की। करीब 60 मिनट तक चली इस महत्वपूर्ण बैठक में दोनों देशों के बीच व्यापार, रक्षा, ऊर्जा, आधुनिक तकनीक और वैश्विक सुरक्षा जैसे कई बड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। यह मुलाकात ऐसे समय पर हुई है जब दुनिया कई बड़े भू-राजनीतिक बदलावों और आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे में भारत और अमेरिका के बीच बढ़ता सहयोग अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मार्को रुबियो अपने चार दिवसीय भारत दौरे पर पहले कोलकाता पहुंचे, जहां उन्होंने सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। इसके बाद वह दिल्ली पहुंचे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने भारत-अमेरिका व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर जोर दिया। बातचीत में हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा, वैश्विक शांति, आर्थिक सहयोग और नई तकनीकों में संयुक्त भागीदारी जैसे विषय प्रमुख रूप से शामिल रहे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बैठक के बाद कहा कि भारत और अमेरिका आने वाले समय में वैश्विक भलाई और स्थिरता के लिए मिलकर काम करते रहेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देशों के बीच लगातार बढ़ता विश्वास दुनिया में नई संभावनाओं को जन्म दे रहा है। वहीं अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने प्रधानमंत्री मोदी को व्हाइट हाउस आने का निमंत्रण भी दिया, जिसे इस मुलाकात का सबसे महत्वपूर्ण संदेश माना जा रहा है। इस न्योते को दोनों देशों के मजबूत होते रिश्तों और बढ़ते राजनीतिक विश्वास का संकेत माना जा रहा है। बैठक में विदेश मंत्री एस जयशंकर, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। सूत्रों के अनुसार बातचीत में ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा सहयोग, निवेश बढ़ाने और अत्याधुनिक तकनीकों में साझेदारी जैसे मुद्दों पर विशेष ध्यान दिया गया। इसके साथ ही पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर भी विचार-विमर्श हुआ। मार्को रुबियो की यह यात्रा इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि आने वाले दिनों में नई दिल्ली में क्वाड देशों की विदेश मंत्रियों की बैठक होने वाली है। माना जा रहा है कि इस बैठक में हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती गतिविधियों, समुद्री सुरक्षा और आर्थिक सहयोग को लेकर महत्वपूर्ण रणनीति तैयार की जा सकती है। भारत और अमेरिका दोनों ही इस क्षेत्र में स्थिरता और संतुलन बनाए रखने के पक्षधर माने जाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि पीएम मोदी और मार्को रुबियो की यह मुलाकात केवल एक औपचारिक बैठक नहीं बल्कि आने वाले समय में भारत-अमेरिका संबंधों की नई रूपरेखा तय करने वाला बड़ा कूटनीतिक संकेत है। दोनों देशों के बीच बढ़ता सहयोग वैश्विक राजनीति और आर्थिक संतुलन में भी अहम भूमिका निभा सकता है। यही वजह है कि इस मुलाकात पर दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं।