घुसपैठ और जनसांख्यिकीय बदलाव पर सख्त होगी सरकार, पीएम मोदी जल्द लॉन्च करेंगे ‘हाई-पावर्ड डेमोग्राफी मिशन’

नई दिल्ली । देश की सीमा सुरक्षा और जनसांख्यिकीय संतुलन को लेकर केंद्र सरकार अब एक बड़े और निर्णायक कदम की तैयारी में है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जल्द ही ‘हाई-पावर्ड डेमोग्राफी मिशन’ की औपचारिक घोषणा कर सकते हैं। इस मिशन का मुख्य उद्देश्य सीमावर्ती राज्यों में अवैध घुसपैठ को रोकना और देश में कृत्रिम जनसांख्यिकीय बदलाव की चुनौतियों से निपटना बताया जा रहा है। सरकार इसे राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक संतुलन से जुड़ा एक महत्वपूर्ण अभियान मान रही है। हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संकेत दिए कि नक्सलवाद के खिलाफ बड़ी सफलता हासिल करने के बाद अब सरकार का अगला फोकस अवैध घुसपैठ को पूरी तरह रोकने पर है। उन्होंने कहा कि वर्षों से सीमावर्ती इलाकों में चल रही घुसपैठ अब राष्ट्रीय चिंता का विषय बन चुकी है और इसे रोकने के लिए कठोर और व्यापक रणनीति तैयार की जा रही है। उनके अनुसार देश अब नक्सलवाद से लगभग मुक्त हो चुका है और अब सुरक्षा एजेंसियों को उसी दृढ़ता के साथ सीमा सुरक्षा पर ध्यान देना होगा। सरकार का मानना है कि सीमावर्ती इलाकों में अवैध प्रवासन के कारण कई क्षेत्रों की जनसंख्या संरचना में तेजी से बदलाव आया है। इसे देखते हुए ‘हाई-पावर्ड डेमोग्राफी मिशन’ के तहत सुरक्षा एजेंसियों, राज्य सरकारों और प्रशासनिक तंत्र के बीच बेहतर तालमेल स्थापित किया जाएगा। इस मिशन में सीमा सुरक्षा बल की भूमिका बेहद अहम मानी जा रही है। सुरक्षा एजेंसियों को घुसपैठ के संभावित क्षेत्रों की विशेष जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी ताकि निगरानी और कार्रवाई को और मजबूत बनाया जा सके। बताया जा रहा है कि इस मिशन के तहत सीमाओं पर आधुनिक तकनीक आधारित सुरक्षा व्यवस्था विकसित की जाएगी। सीमा पर स्मार्ट निगरानी, मजबूत बाड़बंदी और संदिग्ध गतिविधियों पर रियल टाइम नजर रखने जैसी व्यवस्थाओं को प्राथमिकता दी जाएगी। साथ ही विदेशी नागरिकों से जुड़े मामलों के त्वरित निपटारे के लिए विशेष तंत्र को भी मजबूत किया जाएगा। सरकार की योजना पड़ोसी देशों के साथ वापसी समझौतों को और प्रभावी बनाने की भी है ताकि अवैध रूप से रह रहे लोगों की पहचान और वापसी की प्रक्रिया तेज हो सके। गृह मंत्री अमित शाह ने यह भी स्पष्ट किया कि इस मिशन में केवल सीमा सुरक्षा एजेंसियां ही नहीं बल्कि जिला प्रशासन, पुलिस और स्थानीय अधिकारियों की भी सक्रिय भागीदारी होगी। उन्होंने कहा कि जिला कलेक्टर से लेकर पुलिस थाना स्तर तक सभी विभागों को मिलकर काम करना होगा ताकि घुसपैठियों की पहचान और कार्रवाई में किसी प्रकार की ढिलाई न रहे। सरकार जल्द ही त्रिपुरा, असम और पश्चिम बंगाल जैसे प्रभावित राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक भी करने जा रही है। इस बैठक में एक संयुक्त सुरक्षा रणनीति तैयार की जाएगी ताकि सीमावर्ती क्षेत्रों में घुसपैठ को प्रभावी तरीके से रोका जा सके। केंद्र सरकार का मानना है कि राज्यों और केंद्र के बीच बेहतर समन्वय के बिना इस चुनौती से पूरी तरह नहीं निपटा जा सकता। इसके अलावा सरकार अगले साल ‘स्मार्ट बॉर्डर’ परियोजना शुरू करने की तैयारी में है। इस परियोजना के तहत पाकिस्तान और बांग्लादेश से लगने वाली लगभग 6,000 किलोमीटर लंबी सीमा को अत्याधुनिक सुरक्षा तकनीक से लैस किया जाएगा। सरकार का दावा है कि यह कदम देश की सुरक्षा को नई मजबूती देगा और सीमावर्ती क्षेत्रों में किसी भी प्रकार के अवैध जनसांख्यिकीय बदलाव की कोशिशों को विफल करने में मदद करेगा।
राज बब्बर जैसा स्टार बनने का सपना अधूरा रह गया, आर्य बब्बर को बॉलीवुड में नहीं मिला बड़ा मुकाम

नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा में कई ऐसे स्टार किड्स आए जिन्होंने बड़े सपने लेकर फिल्मी दुनिया में कदम रखा, लेकिन हर किसी को वैसी सफलता नहीं मिल पाई जिसकी उम्मीद की जाती है। अभिनेता आर्य बब्बर भी उन्हीं कलाकारों में शामिल हैं जिन्होंने बॉलीवुड में अपनी अलग पहचान बनाने की पूरी कोशिश की, लेकिन उन्हें वह मुकाम हासिल नहीं हो सका जो उनके पिता राज बब्बर को मिला था। फिल्मी परिवार से आने के बावजूद उनका सफर संघर्षों और उतार-चढ़ाव से भरा रहा। आर्य बब्बर का जन्म मुंबई के एक प्रतिष्ठित फिल्मी परिवार में हुआ। उनके पिता राज बब्बर हिंदी सिनेमा के चर्चित और सफल अभिनेता रहे हैं, जबकि उनकी मां नादिरा बब्बर थिएटर जगत का बड़ा नाम मानी जाती हैं। घर में अभिनय और कला का माहौल होने की वजह से आर्य का झुकाव भी बचपन से फिल्मों की तरफ हो गया था। उन्होंने हमेशा अपने पिता की तरह लंबा और मजबूत करियर बनाने का सपना देखा, लेकिन फिल्म इंडस्ट्री में सफलता का रास्ता उनके लिए आसान नहीं रहा। आर्य बब्बर ने अपने करियर की शुरुआत साल 2002 में फिल्म ‘अब के बरस’ से की थी। इस फिल्म से उन्हें बड़ी उम्मीदें थीं और दर्शकों को भी लगा था कि वह बॉलीवुड में लंबी पारी खेलेंगे। फिल्म में उनके साथ अमृता राव नजर आई थीं, लेकिन यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर खास कमाल नहीं दिखा सकी। पहली फिल्म के असफल होने का असर उनके करियर पर भी पड़ा। हालांकि इसके बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार फिल्मों में काम करते रहे। आर्य बब्बर कई फिल्मों में नजर आए जिनमें ‘गुरु’, ‘रेडी’ और ‘मटरू की बिजली का मंडोला’ जैसी फिल्में शामिल हैं। उन्होंने बड़े कलाकारों के साथ स्क्रीन साझा की, लेकिन फिर भी उन्हें इंडस्ट्री में वह पहचान नहीं मिल सकी जिसकी उन्हें तलाश थी। धीरे-धीरे बॉलीवुड में उनका करियर कमजोर पड़ने लगा और उन्हें मुख्य अभिनेता के बजाय सहायक भूमिकाओं तक सीमित होना पड़ा। बॉलीवुड में उम्मीद के मुताबिक सफलता नहीं मिलने के बाद आर्य ने पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री की ओर रुख किया। यहां उनके अभिनय को सराहना मिली और दर्शकों ने उन्हें पसंद भी किया। उनकी फिल्म ‘यार अन्मुल्ले’ ने उन्हें पंजाबी सिनेमा में एक नई पहचान दिलाई। इससे यह साबित हुआ कि उनमें अभिनय की क्षमता थी, लेकिन शायद हिंदी फिल्मों में उन्हें सही मौके नहीं मिल पाए। फिल्मों के अलावा आर्य बब्बर ने टीवी की दुनिया में भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। वह रियलिटी शो ‘बिग बॉस 8’ का हिस्सा बने, जहां उनके अलग अंदाज और बेबाक बयान काफी चर्चा में रहे। हालांकि शो में उनका सफर ज्यादा लंबा नहीं चला, लेकिन उन्होंने दर्शकों का ध्यान जरूर खींचा। इसके अलावा उन्होंने पौराणिक टीवी शो में रावण का किरदार निभाकर भी लोगों की सराहना हासिल की। आर्य बब्बर केवल अभिनय तक सीमित नहीं रहे। उन्हें लेखन का भी शौक है और उन्होंने कॉमिक बुक भी लिखी। यह दिखाता है कि वह खुद को लगातार नए क्षेत्रों में आजमाने की कोशिश करते रहे। भले ही उन्हें बॉलीवुड में पिता जैसी सफलता नहीं मिली, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी और अपने हुनर के दम पर अलग-अलग मंचों पर खुद को साबित करने की कोशिश जारी रखी।
‘कॉकरोच जनता पार्टी’ पर बड़ा बयान, रतलाम में केंद्रीय मंत्री ने साधा निशाना

मध्यप्रदेश । रतलाम में आयोजित 19वें रोजगार मेले के दौरान केंद्रीय महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री Savitra Thakur ने एक विवादित बयान देते हुए सोशल मीडिया पर सक्रिय “कॉकरोच जनता पार्टी” को निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि इस तरह की ताकतों के पीछे “विदेशी अदृश्य शक्तियां” काम कर रही हैं और ये लोग भारत की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। कार्यक्रम सैलाना रोड स्थित रुद्र पैलेस में आयोजित किया गया था, जहां 134 चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र वितरित किए गए। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री चेतन्य काश्यप सहित कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी मौजूद रहे। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण का लाइव प्रसारण भी किया गया। अपने संबोधन में मंत्री ठाकुर ने कहा कि भारत तेजी से प्रगति कर रहा है और कोविड-19 जैसी वैश्विक महामारी के दौरान देश ने न केवल अपने नागरिकों की रक्षा की, बल्कि अन्य देशों को वैक्सीन भी उपलब्ध कराई। उन्होंने दावा किया कि कुछ छोटे राजनीतिक समूह भारत के विकास को नकारात्मक रूप में पेश करने की कोशिश करते हैं, लेकिन उनका प्रभाव लंबे समय तक नहीं रहता। इसी कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री चेतन्य काश्यप ने भी रोजगार मेले को लेकर संबोधन दिया और कहा कि चयनित अभ्यर्थी अब “कर्मयोगी” के रूप में राष्ट्र निर्माण में योगदान देंगे। उन्होंने कहा कि ऐसे युवाओं को सरकारी सेवाओं में अवसर मिलना देश के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। कार्यक्रम के दौरान कुल 51 हजार से अधिक अभ्यर्थियों को देश के विभिन्न शहरों में नियुक्ति पत्र दिए गए, जबकि रतलाम में 134 युवाओं को रोजगार मिला। इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं और इसे लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आने की संभावना है।
पीएम मोदी की गिफ्ट डिप्लोमेसी में सबसे खास बनी ‘भगवद गीता’, कई राष्ट्राध्यक्षों को उनकी भाषा में दी सौगात

नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश यात्राएं अक्सर राजनीतिक और कूटनीतिक चर्चाओं के साथ-साथ उनकी अनोखी ‘गिफ्ट डिप्लोमेसी’ को लेकर भी सुर्खियों में रहती हैं। हाल ही में इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को दिया गया खास उपहार चर्चा का विषय बना, लेकिन इसके पीछे एक और ऐसी सांस्कृतिक सोच है जिसे प्रधानमंत्री मोदी वर्षों से वैश्विक मंच पर मजबूती से प्रस्तुत करते आए हैं। यह सोच भारतीय संस्कृति, परंपरा और आध्यात्मिक विरासत को दुनिया तक पहुंचाने की है, जिसमें ‘श्रीमद्भगवद्गीता’ सबसे अहम भूमिका निभाती रही है।प्रधानमंत्री मोदी ने 2014 में देश की कमान संभालने के बाद से कई अंतरराष्ट्रीय दौरों पर विदेशी नेताओं को भारतीय संस्कृति से जुड़े विशेष उपहार भेंट किए हैं। इनमें ‘भगवद गीता’ सबसे ज्यादा खास रही। खास बात यह रही कि उन्होंने जिस भी देश के राष्ट्राध्यक्ष को गीता भेंट की, वह उसी देश की भाषा में प्रकाशित प्रति थी। इससे न केवल भारतीय संस्कृति का सम्मान बढ़ा, बल्कि दूसरे देशों के नेताओं के साथ भावनात्मक और सांस्कृतिक जुड़ाव भी मजबूत हुआ।प्रधानमंत्री मोदी जब अपने पहले अमेरिकी दौरे पर गए थे, तब उन्होंने तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा को ‘भगवद गीता’ की एक विशेष प्रति भेंट की थी। यह उपहार केवल एक धार्मिक पुस्तक नहीं बल्कि भारत की आध्यात्मिक विरासत और दर्शन का प्रतीक माना गया। उस दौरान यह संदेश भी स्पष्ट हुआ कि भारत अपनी सांस्कृतिक पहचान को दुनिया के सामने गर्व के साथ प्रस्तुत करना चाहता है।इसके बाद जापान यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने जापान के सम्राट अकिहितो और तत्कालीन प्रधानमंत्री शिंजो आबे को जापानी भाषा में लिखी ‘भगवद गीता’ भेंट की थी। इस कदम को भारत और जापान के बीच सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में बेहद खास माना गया। प्रधानमंत्री मोदी की यह पहल दिखाती है कि वे केवल राजनीतिक रिश्तों तक सीमित नहीं रहना चाहते, बल्कि संस्कृति और विचारों के जरिए भी देशों के बीच गहरे संबंध बनाना चाहते हैं।रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को भी प्रधानमंत्री मोदी रूसी भाषा में लिखी ‘भगवद गीता’ की प्रति भेंट कर चुके हैं। उस दौरान उन्होंने कहा था कि गीता के विचार और संदेश पूरी दुनिया के लाखों लोगों को प्रेरित करते हैं। प्रधानमंत्री मोदी कई मंचों से यह बात दोहरा चुके हैं कि गीता केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं बल्कि जीवन प्रबंधन, कर्तव्य और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देने वाला ग्रंथ है।प्रधानमंत्री मोदी का मानना है कि ‘भगवद गीता’ के संदेश केवल व्यक्ति के जीवन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह राष्ट्र निर्माण और नीतियों की दिशा तय करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने कई मौकों पर गीता के श्लोकों और विचारों का उल्लेख करते हुए कहा है कि अन्याय और असत्य के खिलाफ खड़े होना ही सच्चे धर्म का मार्ग है।विशेषज्ञ मानते हैं कि प्रधानमंत्री मोदी की यह सांस्कृतिक कूटनीति भारत की सॉफ्ट पावर को दुनिया में मजबूत करने का प्रभावशाली माध्यम बन चुकी है। गिफ्ट डिप्लोमेसी के जरिए भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पहचान को जिस तरह वैश्विक मंच पर प्रस्तुत किया गया है, उसने भारत की छवि को नई मजबूती दी है।
शांतिलाल पारगी हत्याकांड में परिजनों का प्रदर्शन, गिरफ्तारी की मांग तेज

मध्यप्रदेश । झाबुआ जिले के करवड़ पुलिस चौकी क्षेत्र में शांतिलाल पारगी की हत्या के मामले ने तूल पकड़ लिया है। मामले में परिजनों और ग्रामीणों ने शनिवार को चौकी परिसर पहुंचकर जोरदार प्रदर्शन किया और आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की। मृतक शांतिलाल पारगी का शव 18 मई को जीवरी नाका मोर के पास मिला था। उनके चेहरे पर गंभीर चोटों के निशान पाए गए थे, जिससे यह मामला हत्या का प्रतीत होता है। शांतिलाल 17 मई की रात से लापता थे और बाद में उनका शव बरामद हुआ। मामले में मृतक की पत्नी रामुडी बाई और परिजनों ने पेटलावद टीआई Nirbhay Singh Bhuriya को ज्ञापन सौंपकर चंवरापाड़ा निवासी मानसिंह, दिनेश, मड़िया और सुखराम पर हत्या का आरोप लगाया है। परिजनों का कहना है कि आरोपियों द्वारा लंबे समय से परिवार को जान से मारने की धमकियां दी जा रही थीं। परिवार ने यह भी गंभीर आरोप लगाया है कि शांतिलाल ने पहले ही 29 मार्च 2026 को करवड़ चौकी में लिखित आवेदन देकर अपनी जान को खतरा बताया था, लेकिन उस समय पुलिस ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। परिजनों का कहना है कि अगर समय रहते कार्रवाई होती, तो यह हत्या नहीं होती। इसके अलावा परिजनों ने दावा किया कि जांच के दौरान खोजी कुत्तों की टीम का सुराग मुख्य आरोपी के घर तक पहुंचा था, लेकिन अब तक केवल एक आरोपी की गिरफ्तारी हुई है, जिससे लोगों में नाराजगी बढ़ गई है। पुलिस प्रशासन की ओर से बताया गया है कि मामले में एक आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच जारी है और यदि अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है, तो उनके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस घटना के बाद क्षेत्र में तनाव का माहौल है और ग्रामीण लगातार न्याय की मांग कर रहे हैं।
बाजार की अस्थिरता के बीच निवेशकों ने दिखाई समझदारी, अप्रैल में शेयर बाजार में आया भारी निवेश

नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार में अप्रैल महीने के दौरान निवेशकों का भरोसा एक बार फिर मजबूत होता दिखाई दिया। हाल ही में जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल में बाजार में निवेश का स्तर मार्च की तुलना में काफी बेहतर रहा। खास बात यह रही कि निवेशकों ने इस दौरान एसआईपी के जरिए सबसे अधिक भरोसा लार्ज कैप कंपनियों पर जताया। बाजार में जारी उतार-चढ़ाव और वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद निवेशकों ने अनुशासित निवेश रणनीति अपनाते हुए बड़े और मजबूत शेयरों की ओर रुख किया। रिपोर्ट के मुताबिक अप्रैल महीने में भारतीय शेयर बाजार में कुल 73,639 करोड़ रुपए का निवेश दर्ज किया गया। यह आंकड़ा मार्च के मुकाबले काफी अधिक माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशकों का झुकाव अब जोखिम कम करने और स्थिर रिटर्न पाने की दिशा में बढ़ रहा है। यही वजह है कि लार्ज कैप कंपनियों में निवेश लगातार बना हुआ है। हालांकि इन फंड्स के प्रदर्शन में गिरावट देखी गई, लेकिन फिर भी निवेशकों का भरोसा इन पर कायम रहा। निवेशकों ने इस दौरान खासतौर पर पीएसयू और बीएफएसआई सेक्टर के वैल्यू स्टॉक्स में दिलचस्पी दिखाई। बैंकिंग, फाइनेंस और सरकारी कंपनियों से जुड़े शेयरों में निवेश बढ़ने से यह साफ संकेत मिला कि निवेशक अब सुरक्षित और स्थिर सेक्टरों को प्राथमिकता दे रहे हैं। दूसरी ओर टेक्नोलॉजी सेक्टर के शेयरों से निवेशकों ने दूरी बनाए रखी। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि टेक शेयरों में उतार-चढ़ाव और वैश्विक दबाव के कारण निवेशकों ने फिलहाल सावधानी बरतना बेहतर समझा। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि भारतीय निवेशकों की एसआईपी संस्कृति पहले से अधिक परिपक्व होती जा रही है। बाजार में कमजोरी और गिरावट के बावजूद निवेशकों ने नियमित निवेश जारी रखा। यह संकेत देता है कि अब लोग अल्पकालिक उतार-चढ़ाव से घबराने के बजाय लंबी अवधि की रणनीति पर अधिक भरोसा कर रहे हैं। यही कारण है कि कमजोर प्रदर्शन वाले फंड्स में भी एसआईपी निवेश जारी रहा। अप्रैल महीने में इक्विटी निवेश रणनीतियों में भी बड़ा बदलाव देखने को मिला। जहां पहले भारी निकासी हो रही थी, वहीं अब निवेश दोबारा तेजी से लौटता दिखाई दिया। विशेष रूप से आर्बिट्राज फंड्स में निवेश का स्तर काफी बढ़ा। माना जा रहा है कि संस्थागत निवेशकों ने अपनी रणनीति में बदलाव करते हुए इन फंड्स में अधिक रुचि दिखाई। इसके अलावा फैक्टर आधारित निवेश श्रेणियों में ‘ग्रोथ’ कैटेगरी ने सबसे बेहतर प्रदर्शन किया। इस श्रेणी में सकारात्मक रिटर्न दर्ज किए गए और नए निवेशकों की भागीदारी भी बढ़ी। वहीं फोकस्ड फंड्स में निवेशकों की रुचि घटती नजर आई और इस श्रेणी में निकासी दर्ज की गई। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक व्यापक बाजार पूरी तरह मजबूत स्थिति में नहीं लौटता, तब तक निवेशक आक्रामक निवेश की बजाय संतुलित और अनुशासित रणनीति अपनाते रहेंगे। अप्रैल के आंकड़े यह संकेत देते हैं कि भारतीय निवेशक अब पहले की तुलना में ज्यादा जागरूक और धैर्यवान हो चुके हैं। यही परिपक्वता आने वाले समय में भारतीय शेयर बाजार को और अधिक स्थिरता प्रदान कर सकती है।
निवाली के खेड़ी में कृषक संगोष्ठी: प्राकृतिक खेती अपनाने पर जोर

मध्यप्रदेश । बड़वानी जिले की निवाली तहसील के ग्राम खेड़ी में “कृषक कल्याण वर्ष 2026” के तहत रात्रि चौपाल सह कृषक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़कर उनकी आय बढ़ाना और खेती को अधिक लाभदायक बनाना रहा। कार्यक्रम में पानसेमल विधायक Shyam Barde और कलेक्टर Jayati Singh सहित कई जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे। कलेक्टर ने किसानों से सीधा संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं और खेती से जुड़े सुझाव साझा किए। कलेक्टर ने अपने संबोधन में कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए कई आधुनिक तकनीकों पर जोर दिया। उन्होंने हाई डेंसिटी प्लांटिंग सिस्टम (HDPS), उन्नत बीजों का उपयोग, मृदा परीक्षण और सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की जानकारी दी। साथ ही उन्होंने प्राकृतिक खेती और जैविक कृषि अपनाने की अपील की, जिससे रासायनिक खादों पर निर्भरता कम हो सके और मिट्टी की गुणवत्ता बनी रहे। कार्यक्रम के दौरान किसानों को कृषि यंत्र और उन्नत मूंगफली बीज भी वितरित किए गए। अधिकारियों ने केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न कृषि योजनाओं की जानकारी भी दी, ताकि अधिक से अधिक किसान इनका लाभ उठा सकें। विधायक ने कहा कि सरकार लगातार किसानों की आय बढ़ाने और कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए काम कर रही है। इस तरह के आयोजनों से किसानों को नई तकनीकों की जानकारी मिलती है और वे बेहतर उत्पादन की दिशा में आगे बढ़ते हैं। इस कृषक संगोष्ठी को ग्रामीण कृषि विकास और जागरूकता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे किसानों को सीधे प्रशासन और विशेषज्ञों से जुड़ने का अवसर मिला।
धर्मेंद्र की याद में भावुक हुए बॉबी देओल, बोले- पापा के बिना जिंदगी में एक ऐसा खालीपन है जो कभी नहीं भर सकता

नई दिल्ली । बॉलीवुड अभिनेता बॉबी देओल हाल ही में एक बातचीत के दौरान अपने पिता धर्मेंद्र को याद करते हुए बेहद भावुक नजर आए। बातचीत के दौरान उन्होंने खुलकर बताया कि पिता के जाने के बाद जिंदगी पहले जैसी नहीं रही और उनके बिना हर दिन एक गहरा खालीपन महसूस होता है। बॉबी की आंखों में अपने पिता की याद में आंसू साफ दिखाई दिए। उनका यह भावुक अंदाज देखकर वहां मौजूद लोग भी भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि धर्मेंद्र सिर्फ उनके पिता ही नहीं थे, बल्कि पूरे परिवार की ताकत और सबसे मजबूत सहारा थे। बॉबी देओल ने कहा कि उनके पिता एक ऐसे इंसान थे जिन्हें सिर्फ परिवार ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया प्यार करती थी। उन्होंने बताया कि बचपन से ही उन्होंने लोगों के दिलों में अपने पिता के लिए खास सम्मान और अपनापन देखा था। आज भी जब वे कहीं जाते हैं तो लोग धर्मेंद्र को याद कर भावुक हो जाते हैं। बॉबी ने कहा कि उनके पिता की सादगी, प्यार और इंसानियत ही उनकी सबसे बड़ी पहचान थी। उन्होंने माना कि जिंदगी में कई रिश्ते बनते हैं, लेकिन पिता जैसी जगह कोई नहीं ले सकता। बातचीत के दौरान परिवार और रिश्तों की अहमियत पर भी चर्चा हुई। बॉबी ने कहा कि पिता के जाने के बाद परिवार के सभी सदस्य एक-दूसरे का सहारा बनने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन फिर भी हर पल उनकी कमी महसूस होती है। उन्होंने बताया कि धर्मेंद्र परिवार को हमेशा एकजुट रखने वाले इंसान थे और हर सदस्य से बेहद प्यार करते थे। उनके जाने के बाद घर का माहौल बदल गया है और कई बार छोटी-छोटी बातें भी उनकी याद दिला देती हैं। बॉबी देओल ने अपने पिता की सादगी को याद करते हुए कहा कि धर्मेंद्र को जिंदगी की छोटी-छोटी चीजों में खुशी मिलती थी। उन्हें परिवार के साथ समय बिताना, साधारण खाना खाना और लोगों से प्यार से बात करना बेहद पसंद था। यही वजह थी कि उनसे मिलने वाला हर व्यक्ति उन्हें दिल से सम्मान देता था। बॉबी ने कहा कि उनके पिता ने उन्हें सिर्फ अभिनय ही नहीं बल्कि इंसानियत और रिश्तों की अहमियत भी सिखाई। उन्होंने यह भी कहा कि एक पिता का जाना सिर्फ परिवार के लिए ही नहीं बल्कि उन सभी लोगों के लिए बड़ा नुकसान होता है जो उनसे जुड़े होते हैं। बॉबी ने स्वीकार किया कि समय के साथ इंसान खुद को संभालना सीख जाता है, लेकिन कुछ जख्म ऐसे होते हैं जो जिंदगीभर साथ रहते हैं। उनके मुताबिक, पिता की यादें हमेशा उनके दिल में जिंदा रहेंगी और वही यादें उन्हें आगे बढ़ने की ताकत देती रहेंगी। बॉबी देओल का यह भावुक बयान सोशल मीडिया पर भी लोगों का ध्यान खींच रहा है। फैंस लगातार धर्मेंद्र को याद कर रहे हैं और बॉबी के प्रति अपना समर्थन जता रहे हैं। इस बातचीत ने एक बार फिर यह दिखा दिया कि परिवार का रिश्ता कितना गहरा और अनमोल होता है, खासकर एक पिता और बेटे के बीच का संबंध जिंदगीभर इंसान के दिल में जिंदा रहता है।
भटके हुए जैन मुनि के मिलने पर भावुक हुए श्रद्धालु, आंसू छलक पड़े

मध्यप्रदेश । बड़वानी जिले में भीषण गर्मी के बीच एक दिगंबर जैन मुनि के 30 घंटे तक भटकने का मामला सामने आया। आगरा मुंबई राष्ट्रीय राजमार्ग पर 45 डिग्री सेल्सियस तापमान में दिगंबर जैन मुनि Vidambar Sagar Maharaj बिना आहार और जल के भटकते रहे, जिसके बाद पुलिस और समाजजनों की मदद से उन्हें सुरक्षित खोज लिया गया। मिली जानकारी के अनुसार मुनि महाराज 20 मई को महाराष्ट्र के शिरपुर से मध्य प्रदेश में प्रवेश कर बड़वानी जिले के गवाड़ी पहुंचे थे। इसके बाद वे सेंधवा और जुलवानिया क्षेत्र की ओर विहार करते हुए आगे बढ़े। इसी दौरान मार्ग की गलत जानकारी और व्यवस्था में कमी के कारण वे दिशा भटक गए। रात के समय सुरक्षित स्थान न मिलने पर उन्होंने एक ढाबे के पास बगीचे में विश्राम किया, लेकिन अगले दिन सुबह से ही तेज धूप और लू में उनका कठिन विहार जारी रहा। लगातार बढ़ती गर्मी और जल–आहार की अनुपलब्धता ने स्थिति को और गंभीर बना दिया। स्थानीय लोगों और जैन समाज के सदस्यों ने जब मुनि महाराज के लापता होने की सूचना पाई तो तलाश शुरू की। इसके बाद पुलिस भी सक्रिय हुई और जुलवानिया व आसपास के थाना क्षेत्रों में सर्च अभियान चलाया गया। करीब 6 घंटे की तलाश के बाद मुनि महाराज ठान फाटे के पास एक पुल के नीचे बैठे मिले। मुनि महाराज के मिलने पर उपस्थित समाजजनों और पुलिस टीम ने राहत की सांस ली। उन्हें तुरंत पेड़ की छांव में बैठाकर जल और आहार कराया गया। इस दृश्य को देखकर कई श्रद्धालु भावुक हो गए और उनकी आंखों से आंसू निकल पड़े। स्थानीय समाजजनों ने कहा कि रास्तों की सही जानकारी और विहार व्यवस्था की कमी के कारण यह स्थिति बनी। अब जैन समाज की ओर से इस तरह के मामलों के लिए बेहतर व्यवस्था तैयार करने की बात कही जा रही है, ताकि राष्ट्रीय राजमार्गों पर विहार करने वाले मुनियों को भविष्य में किसी कठिनाई का सामना न करना पड़े।
फिटनेस चिंता के बीच भी ब्राजील की सबसे बड़ी उम्मीद बने नेमार

नई दिल्ली । ब्राजील के स्टार फुटबॉलर Neymar एक बार फिर सुर्खियों में हैं। लंबे समय से चोटों से जूझ रहे नेमार को फीफा विश्व कप 2026 के लिए ब्राजील की टीम में शामिल किया गया है। यह उनका चौथा विश्व कप होगा और संभवत: आखिरी भी। ऐसे में पूरी दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या नेमार अपनी फिटनेस समस्याओं को पीछे छोड़कर ब्राजील को 24 साल बाद फिर विश्व चैंपियन बना पाएंगे। महज 18 साल की उम्र में 2010 में ब्राजील की राष्ट्रीय टीम से डेब्यू करने वाले नेमार ने बहुत कम समय में खुद को दुनिया के सबसे खतरनाक और प्रतिभाशाली खिलाड़ियों में शामिल कर लिया था। उनकी तुलना फुटबॉल के दिग्गज Lionel Messi और Cristiano Ronaldo से होने लगी। शानदार ड्रिब्लिंग, तेज रफ्तार, बेहतरीन फिनिशिंग और आक्रामक खेल शैली ने उन्हें करोड़ों फैंस का पसंदीदा बना दिया। नेमार ने ब्राजील के लिए अब तक 128 मैचों में 79 गोल दागे हैं और वह टीम के सर्वाधिक गोल करने वाले खिलाड़ी हैं। 2016 ओलंपिक में उन्होंने ब्राजील को पहला फुटबॉल गोल्ड मेडल दिलाकर इतिहास रचा था। इसके अलावा वे 2014, 2018 और 2022 फीफा विश्व कप में भी ब्राजील का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। क्लब फुटबॉल में भी नेमार का करियर बेहद शानदार रहा। 2013 से 2017 तक वे FC Barcelona के लिए खेले, जहां उन्होंने कई बड़े खिताब जीते। इसके बाद 2017 में वे रिकॉर्ड ट्रांसफर फीस के साथ Paris Saint-Germain F.C. में शामिल हुए और फुटबॉल इतिहास के सबसे महंगे खिलाड़ी बने। 2023 में वे Al Hilal SFC पहुंचे, लेकिन चोटों के कारण वहां ज्यादा मैच नहीं खेल सके। फिलहाल वे अपने पुराने क्लब Santos FC के लिए खेल रहे हैं। हालांकि 2018 के बाद से चोटें नेमार के करियर की सबसे बड़ी दुश्मन बन गईं। अक्टूबर 2023 के बाद वे ब्राजील के लिए कोई अंतरराष्ट्रीय मैच नहीं खेल पाए थे। यही वजह थी कि विश्व कप 2026 की टीम में उनकी जगह को लेकर लगातार सवाल उठ रहे थे। लेकिन चयनकर्ताओं ने अनुभव और मैच विनिंग क्षमता को देखते हुए उन पर भरोसा जताया। ब्राजील अब तक रिकॉर्ड 5 बार फीफा विश्व कप जीत चुका है, लेकिन टीम ने आखिरी बार 2002 में खिताब अपने नाम किया था। ऐसे में 2026 विश्व कप में नेमार के पास इतिहास रचने और अपने करियर को यादगार अंत देने का सुनहरा मौका होगा।