Vivo S60 5G लॉन्च से पहले चर्चा में: 7,200mAh बैटरी, 90W फास्ट चार्जिंग और तीन आकर्षक कलर ऑप्शन के साथ आ सकता है नया स्मार्टफोन

नई दिल्ली। Vivo जल्द ही अपनी S सीरीज का नया स्मार्टफोन Vivo S60 5G लॉन्च करने जा रहा है। कंपनी इस डिवाइस को 29 मई को चीन में पेश करेगी। यह फोन पिछले साल लॉन्च हुए Vivo S50 का अपग्रेड वर्जन होगा और इसे एक नए डिजाइन और बड़ी बैटरी के साथ लाया जा रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार Vivo S60 5G की सबसे बड़ी खासियत इसकी 7,200mAh की दमदार बैटरी होगी, जो लंबे बैकअप के लिए डिजाइन की गई है। इसके साथ 90W फास्ट चार्जिंग सपोर्ट भी मिलेगा, जिससे फोन तेजी से चार्ज हो सकेगा। कंपनी का दावा है कि इसमें दिया गया पावर मैनेजमेंट सिस्टम चार्जिंग के दौरान डिवाइस के तापमान को कंट्रोल करने में मदद करेगा। फोन को लेकर यह भी बताया गया है कि इसमें Global Direct Drive Power Supply 2.0 टेक्नोलॉजी दी जाएगी, जो बैटरी परफॉर्मेंस को बेहतर बनाएगी। साथ ही इसमें Micro Electric Wizard 2.0 फीचर भी होगा, जो अचानक बैटरी खत्म होने की स्थिति में चल रहे काम को सेव करने में मदद करेगा। डिजाइन की बात करें तो Vivo S60 5G को तीन नए कलर ऑप्शन में पेश किया जाएगा—Early Summer Green, Midsummer Night’s Dream और Sea of Stars। इनमें से Sea of Stars वेरिएंट में खास स्टार-लाइक पैटर्न और वाइट-ब्लू फिनिश देखने को मिल सकता है। कैमरा सेटअप के तौर पर इसमें पीछे की तरफ ट्रिपल कैमरा सिस्टम दिया जाएगा, जो एक रेक्टेंगुलर मॉड्यूल में फिट होगा। हालांकि कैमरा सेंसर की पूरी जानकारी लॉन्च के समय सामने आएगी। फोन का लॉन्च 29 मई को चीन में लोकल समय अनुसार शाम 7:30 बजे (भारत में 5:00 बजे) होगा। कंपनी इस इवेंट में Vivo TWS 5e ईयरबड्स भी पेश कर सकती है। अगर लीक और रिपोर्ट्स सही साबित होती हैं, तो Vivo S60 5G अपने बड़े बैटरी बैकअप और फास्ट चार्जिंग के कारण मिड-रेंज सेगमेंट में एक मजबूत विकल्प बन सकता है।
यूपी पंचायतों में बड़ा बदलाव या राजनीतिक रणनीति? कार्यकाल खत्म होने के बाद प्रधानों को प्रशासक बनाने की तैयारी से सियासी हलचल तेज

नई दिल्ली /उत्तर प्रदेश में ग्राम पंचायतों के कार्यकाल समाप्त होने के बाद प्रशासनिक ढांचे को लेकर एक नए संभावित प्रयोग ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में गहरी बहस छेड़ दी है। राज्य सरकार इस विकल्प पर विचार कर रही है कि कार्यकाल खत्म होने के बाद मौजूदा ग्राम प्रधानों को ही प्रशासक के रूप में जिम्मेदारी दी जा सकती है। अगर यह फैसला लागू होता है तो यह प्रदेश के पंचायत इतिहास में एक अभूतपूर्व कदम माना जाएगा, क्योंकि अब तक इस तरह की व्यवस्था कभी नहीं अपनाई गई है। परंपरागत रूप से पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने और नए चुनाव होने तक की अवधि में प्रशासनिक जिम्मेदारी सरकारी अधिकारियों के पास रहती रही है, लेकिन इस बार तस्वीर बदलती नजर आ रही है। प्रस्ताव के तहत पंचायतों का कामकाज उन्हीं चुने हुए प्रतिनिधियों के हाथ में रहने की संभावना है, जिनका कार्यकाल पूरा हो चुका होगा। इस संभावित बदलाव को लेकर जहां एक ओर इसे प्रशासनिक निरंतरता का कदम बताया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर इसे ग्रामीण राजनीति में सत्ता संतुलन से जोड़कर भी देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम केवल प्रशासनिक सुविधा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे ग्रामीण स्तर पर संगठनात्मक मजबूती बनाए रखने की रणनीति भी हो सकती है। उत्तर प्रदेश में हजारों की संख्या में ग्राम प्रधान होते हैं, जो स्थानीय स्तर पर जनता और शासन के बीच सबसे अहम कड़ी माने जाते हैं। गांवों में विकास कार्यों से लेकर जनकल्याण योजनाओं के क्रियान्वयन तक में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में इनका प्रशासनिक रूप से सक्रिय रहना ग्रामीण राजनीति की दिशा को भी प्रभावित कर सकता है। इस पूरे मुद्दे के केंद्र में पंचायत चुनावों की संभावित देरी भी एक बड़ा कारण माना जा रहा है। ओबीसी आरक्षण से जुड़ी प्रक्रियाओं और आयोग की रिपोर्ट के चलते पंचायत चुनावों के समय पर होने को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। इसी वजह से यह संभावना जताई जा रही है कि मौजूदा व्यवस्था को कुछ समय तक जारी रखने के लिए प्रशासनिक विकल्प तलाशे जा रहे हैं। वहीं विपक्ष इस संभावित फैसले पर सवाल उठा रहा है। विपक्षी दलों का कहना है कि चुनाव टालकर लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कमजोर किया जा रहा है और इससे ग्रामीण स्तर पर सत्ता का संतुलन प्रभावित हो सकता है। उनका तर्क है कि अगर चुने हुए प्रतिनिधियों को ही प्रशासक बना दिया गया तो निष्पक्ष प्रशासन की अवधारणा पर असर पड़ सकता है और यह राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार मौजूदा कानून में सरकार को असाधारण परिस्थितियों में प्रशासक नियुक्त करने का अधिकार जरूर दिया गया है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि यह जिम्मेदारी निर्वाचित प्रतिनिधियों को दी जा सकती है या नहीं। इसी कारण इस प्रस्ताव को लेकर भविष्य में कानूनी चुनौती की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा रहा है। प्रशासनिक स्तर पर यह भी चर्चा है कि अगर ग्राम पंचायतों में यह मॉडल लागू होता है तो इसका असर क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत स्तर तक भी जा सकता है, जहां पहले से ही सरकारी अधिकारियों को प्रशासक बनाया जाता रहा है। ऐसे में पूरे पंचायत ढांचे में एक नया प्रशासनिक और राजनीतिक मॉडल आकार ले सकता है। इस पूरे घटनाक्रम को केवल एक प्रशासनिक निर्णय के रूप में नहीं देखा जा रहा है, बल्कि इसे 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले ग्रामीण राजनीति की दिशा तय करने वाले संभावित कदम के रूप में भी समझा जा रहा है। गांवों में राजनीतिक पकड़ और विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में पंचायत प्रतिनिधियों की भूमिका को देखते हुए यह मुद्दा आने वाले समय में और अधिक चर्चा में रहने की संभावना है।
वैभव लक्ष्मी व्रत कथा: जानें शुक्रवार के दिन क्यों माना जाता है खास

नई दिल्ली। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शुक्रवार का दिन मां लक्ष्मी की आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इसी दिन विशेष रूप से मां वैभव लक्ष्मी का व्रत करने का भी विधान है, जिसे करने से भक्तों के जीवन में सुख, समृद्धि, वैभव और शांति का संचार होता है। मान्यता है कि यह व्रत न केवल आर्थिक समस्याओं को दूर करता है, बल्कि दांपत्य जीवन में भी खुशहाली लाता है। इस व्रत की शुरुआत संकल्प लेकर की जाती है, जिसमें श्रद्धालु 11, 21 या अपनी इच्छा अनुसार जितने शुक्रवार तक व्रत रखने का निर्णय लेते हैं। हर शुक्रवार को पूरे नियम और श्रद्धा के साथ पूजा-अर्चना की जाती है और वैभव लक्ष्मी व्रत कथा का पाठ किया जाता है। व्रत के दौरान भक्त मां लक्ष्मी को लाल फूल, मिठाई और विशेष रूप से खीर का भोग अर्पित करते हैं। व्रत कथा के अनुसार, एक समय एक शहर में लोग भक्ति और धर्म से दूर होकर भोग-विलास में डूब गए थे। उसी शहर में शीला नाम की एक धार्मिक और संतोषी स्त्री अपने पति के साथ रहती थी। समय के साथ उसका पति बुरी संगत में पड़कर अपना सारा धन गंवा बैठा और जीवन संघर्षों से भर गया। शीला ने कठिन परिस्थितियों के बावजूद भगवान पर आस्था बनाए रखी। एक दिन उसके घर एक दिव्य तेज से युक्त वृद्ध महिला आई, जिन्होंने शीला को मां लक्ष्मी का व्रत करने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि यह व्रत सरल है और श्रद्धा से करने पर सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। उनके मार्गदर्शन पर शीला ने पूरे विश्वास के साथ यह व्रत प्रारंभ किया। हर शुक्रवार वह पूरी विधि से पूजा करती और कथा सुनती। धीरे-धीरे उसके जीवन में परिवर्तन आने लगा। उसके पति का स्वभाव सुधरने लगा और वह मेहनत करके व्यापार करने लगा। कुछ समय बाद घर में फिर से धन-समृद्धि लौट आई और सुख-शांति स्थापित हो गई। कथा के अनुसार, व्रत के अंतिम चरण में उद्यापन किया जाता है, जिसमें सात सुहागिन महिलाओं को पूजा सामग्री या व्रत कथा की पुस्तक भेंट की जाती है। यह प्रक्रिया व्रत को पूर्ण करने के लिए आवश्यक मानी जाती है। धार्मिक विद्वानों के अनुसार, मां लक्ष्मी की आराधना से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और घर में सकारात्मकता का संचार होता है। विशेष रूप से मां वैभव लक्ष्मी का व्रत करने से आर्थिक परेशानियां कम होती हैं और जीवन में स्थिरता आती है। आज के समय में भी हजारों श्रद्धालु इस व्रत को पूर्ण श्रद्धा के साथ करते हैं और इसे अपने जीवन में सुख-समृद्धि का माध्यम मानते हैं। मान्यता है कि सच्चे मन से की गई पूजा कभी निष्फल नहीं जाती और मां लक्ष्मी अपने भक्तों पर सदैव कृपा बनाए रखती हैं।
बाजार के स्क्रब छोड़िए, ये फल देंगे नैचुरल ग्लो और स्मूद स्किन

नई दिल्ली। त्वचा की देखभाल में नेचुरल उपाय हमेशा से प्रभावी माने गए हैं। खासकर फल (fruits) से बने स्क्रब स्किन को बिना नुकसान पहुंचाए साफ और चमकदार बनाने में मदद करते हैं। बाजार के केमिकल स्क्रब की तुलना में प्राकृतिक फलों से बने स्क्रब ज्यादा सुरक्षित और लाभकारी माने जाते हैं। त्वचा विशेषज्ञों के अनुसार पपीता एक बेहतरीन प्राकृतिक स्क्रब माना जाता है। इसमें मौजूद एंजाइम (papain) त्वचा की मृत कोशिकाओं (dead skin cells) को हटाने में मदद करता है और स्किन को मुलायम बनाता है। यह मुंहासों और दाग-धब्बों को कम करने में भी सहायक होता है। स्ट्रॉबेरी भी स्क्रब के लिए बहुत उपयोगी मानी जाती है। इसमें प्राकृतिक एसिड और एंटीऑक्सीडेंट होते हैं जो त्वचा को साफ करने के साथ-साथ पोर्स को टाइट करते हैं। यह स्किन को फ्रेश और ग्लोइंग बनाती है। केला भी एक अच्छा विकल्प है, खासकर ड्राय स्किन वालों के लिए। इसमें मौजूद विटामिन और मिनरल्स त्वचा को नमी प्रदान करते हैं और स्किन को सॉफ्ट बनाते हैं। इसे शहद के साथ मिलाकर स्क्रब की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है। संतरे का छिलका या उसका पाउडर भी एक प्राकृतिक स्क्रब की तरह काम करता है। यह त्वचा से अतिरिक्त तेल हटाने और टैनिंग कम करने में मदद करता है। इसमें विटामिन C होता है जो स्किन को ब्राइट बनाने में सहायक होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि फलों से बने स्क्रब का नियमित लेकिन सीमित उपयोग ही करना चाहिए। हफ्ते में 2 बार स्क्रब करना पर्याप्त होता है। अधिक स्क्रबिंग से त्वचा में जलन या सूखापन हो सकता है। हालांकि, हर व्यक्ति की त्वचा अलग होती है, इसलिए किसी भी नए फल से बने स्क्रब को इस्तेमाल करने से पहले पैच टेस्ट करना जरूरी है। अगर त्वचा संवेदनशील है तो हल्के और सौम्य फलों का ही उपयोग करना चाहिए। कुल मिलाकर कहा जाए तो पपीता, स्ट्रॉबेरी, केला और संतरा जैसे फल त्वचा के लिए प्राकृतिक और सुरक्षित स्क्रब के रूप में बेहतरीन विकल्प हैं। सही तरीके से इस्तेमाल करने पर ये स्किन को साफ, स्वस्थ और प्राकृतिक रूप से चमकदार बना सकते हैं।
मटके का पानी रहेगा घंटों बर्फ जैसा ठंडा: गर्मी में अपनाएं ये देसी और आसान उपाय

नई दिल्ली । भीषण गर्मी और लगातार बढ़ते तापमान के बीच ठंडा पानी हर किसी की जरूरत बन चुका है। कई इलाकों में तापमान 45 डिग्री के पार पहुंचने के कारण घरों में रखा पानी भी जल्दी गर्म हो जाता है। ऐसे में फ्रिज का पानी भले ही तुरंत राहत देता है, लेकिन सेहत की दृष्टि से लोग अब फिर से मटके के पानी की ओर लौटने लगे हैं। मटके का पानी प्राकृतिक रूप से ठंडा और ताजगी देने वाला माना जाता है, लेकिन अत्यधिक गर्मी में यह भी जल्दी सामान्य तापमान पकड़ लेता है। इसी समस्या के समाधान के लिए पुराने समय से अपनाए जा रहे देसी तरीके एक बार फिर चर्चा में हैं। जानकारों के अनुसार, मटके के पानी को लंबे समय तक ठंडा रखने का सबसे सरल तरीका उसे सूती कपड़े से ढंकना है। कपड़े को गीला करके मटके के चारों ओर लपेटने से उसमें मौजूद नमी धीरे-धीरे वाष्पित होती रहती है, जिससे मटके की सतह ठंडी बनी रहती है और अंदर का पानी भी अपेक्षाकृत ठंडा रहता है। कई जगहों पर लोग सूती कपड़े की जगह टाट या जूट के बोरे का उपयोग भी करते हैं, जो गर्मी में बेहतर कूलिंग प्रभाव देते हैं। इसके अलावा मटके को रखने का स्थान भी पानी की ठंडक पर बड़ा असर डालता है। यदि मटका सीधे धूप या गर्म सतह पर रखा जाए तो पानी तेजी से गर्म हो जाता है। ऐसे में ग्रामीण इलाकों में एक पुराना तरीका अपनाया जाता है, जिसमें मटके को गीली रेत या मिट्टी के बीच रखा जाता है। रेत में मौजूद नमी और ठंडक मटके को बाहर से ठंडा रखती है, जिससे पानी लंबे समय तक ताजा और ठंडा बना रहता है। कुछ घरेलू उपायों में नया मटका इस्तेमाल करने से पहले उसमें सेंधा नमक डालकर कुछ समय तक पानी भरकर रखने की परंपरा भी शामिल है। माना जाता है कि इससे मटके की प्राकृतिक ठंडक बनाए रखने की क्षमता बढ़ जाती है। बाद में उस पानी को निकालकर ताजा पानी भरने पर मटका अधिक प्रभावी ढंग से पानी को ठंडा रखता है। विशेषज्ञों का मानना है कि मटके का पानी न केवल प्राकृतिक रूप से ठंडा होता है बल्कि यह स्वास्थ्य के लिए भी बेहतर विकल्प है। अत्यधिक ठंडा फ्रिज का पानी कई बार गले और पाचन पर असर डाल सकता है, जबकि मटके का पानी शरीर को संतुलित तरीके से ठंडक प्रदान करता है। इसी कारण अब शहरों में भी लोग पारंपरिक तरीकों की ओर लौटते दिखाई दे रहे हैं और इन देसी जुगाड़ों को फिर से अपनाया जा रहा है, ताकि गर्मी के मौसम में बिना बिजली के भी ठंडे पानी का आनंद लिया जा सके।
मध्यप्रदेश में गर्मी का कहर, 44 डिग्री के पार पहुंच सकता है पारा

मध्यप्रदेश । मध्यप्रदेश में गर्मी का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। 22 मई 2026 को भी प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में भीषण गर्मी और लू का असर देखने को मिलेगा। राजधानी भोपाल सहित कई जिलों में तापमान 41 से 44 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग के अनुसार अगले कुछ दिनों तक राहत मिलने के आसार बेहद कम हैं और प्रदेश के कई हिस्सों में हीटवेव की स्थिति बनी रह सकती है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि उत्तर और मध्य भारत में चल रही गर्म और शुष्क हवाओं का असर मध्यप्रदेश पर भी साफ दिखाई दे रहा है। प्रदेश के ग्वालियर, चंबल, बुंदेलखंड, रीवा, सागर और उज्जैन संभाग में गर्म हवाओं का असर अधिक रहेगा। दोपहर के समय सड़कों और बाजारों में लोगों की आवाजाही कम देखने को मिल सकती है। राजधानी भोपाल में दिन का तापमान 41 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है, जबकि ग्वालियर, खजुराहो, नौगांव और दतिया जैसे इलाकों में पारा 44 डिग्री तक पहुंच सकता है। रात के तापमान में भी बढ़ोतरी होने से लोगों को गर्मी से राहत नहीं मिल पा रही है। मौसम विभाग ने ‘वार्म नाइट’ की स्थिति को लेकर भी सतर्क रहने की सलाह दी है। भीषण गर्मी का असर जनजीवन पर साफ दिखाई देने लगा है। दोपहर के समय बाजारों में सन्नाटा पसरा रहता है और लोग जरूरी काम होने पर ही घरों से बाहर निकल रहे हैं। सड़क किनारे ठंडे पेय पदार्थ, गन्ने का रस, छाछ और लस्सी की दुकानों पर लोगों की भीड़ बढ़ गई है। वहीं अस्पतालों में डिहाइड्रेशन, सिरदर्द और लू से संबंधित मरीजों की संख्या भी बढ़ने लगी है। मौसम विभाग और स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी की है। लोगों को दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक धूप में निकलने से बचने की सलाह दी गई है। बाहर निकलते समय सिर को ढंकने, हल्के रंग के सूती कपड़े पहनने और लगातार पानी पीते रहने की अपील की गई है। बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को विशेष सावधानी बरतने के लिए कहा गया है। विशेषज्ञों के मुताबिक, पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता फिलहाल कमजोर है, जिसके कारण प्रदेश में बारिश की संभावना बेहद कम बनी हुई है। आने वाले तीन-चार दिनों तक तापमान में और बढ़ोतरी हो सकती है। कुछ क्षेत्रों में 45 डिग्री के करीब तापमान पहुंचने की आशंका भी जताई जा रही है। गर्मी के इस तीखे दौर ने बिजली की मांग भी बढ़ा दी है। एसी, कूलर और पंखों के लगातार इस्तेमाल से कई शहरों में बिजली व्यवस्था पर दबाव बढ़ रहा है। ऐसे में प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और जरूरी सावधानियां अपनाने की अपील की है।
शुक्रवार के ये वास्तु उपाय बदल देंगे घर की किस्मत, आएगी बरकत

नई दिल्ली। शुक्रवार का दिन हिंदू धर्म में धन, समृद्धि और सौभाग्य की देवी मां लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए विशेष माना जाता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार यदि इस दिन कुछ सरल उपाय अपनाए जाएं तो घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और आर्थिक समस्याएं धीरे-धीरे कम होने लगती हैं। वास्तु विशेषज्ञों का मानना है कि शुक्रवार के दिन घर की साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देना चाहिए। मुख्य द्वार को हमेशा साफ और आकर्षक रखना चाहिए क्योंकि इसे ऊर्जा प्रवेश का प्रमुख स्थान माना जाता है। दरवाजे पर हल्दी या कुमकुम से स्वस्तिक और लक्ष्मी चरण चिह्न बनाना शुभ माना जाता है। इससे घर में शुभ ऊर्जा का प्रवेश होता है और नकारात्मकता दूर होती है। शुक्रवार के दिन घर में घी का दीपक जलाना अत्यंत शुभ माना गया है। विशेष रूप से पूजा स्थल और मुख्य द्वार पर दीपक जलाने से वातावरण शुद्ध होता है और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है। साथ ही, घर में सुगंधित अगरबत्ती या धूप का प्रयोग करने से मानसिक शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा बनी रहती है। वास्तु के अनुसार शुक्रवार को घर में सफेद या गुलाबी रंग के फूलों का उपयोग करना चाहिए। यह रंग शांति और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। साथ ही, घर के उत्तर-पूर्व दिशा (ईशान कोण) को हमेशा साफ और व्यवस्थित रखना चाहिए क्योंकि यह दिशा धन और ज्ञान की मानी जाती है। शुक्रवार को घर में तुलसी के पौधे की पूजा करना भी अत्यंत शुभ माना जाता है। तुलसी में जल अर्पित कर दीपक जलाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है और आर्थिक बाधाएं दूर होती हैं। इसे घर की समृद्धि के लिए अत्यंत प्रभावी उपाय माना गया है। वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में टूटे-फूटे सामान या अनावश्यक कबाड़ को शुक्रवार से पहले ही हटा देना चाहिए। इससे नकारात्मक ऊर्जा कम होती है और नए अवसरों के मार्ग खुलते हैं। इसके अलावा, शुक्रवार के दिन दान का विशेष महत्व बताया गया है। सफेद वस्त्र, मिठाई, या जरूरतमंदों को भोजन कराने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और घर में स्थायी सुख-समृद्धि का वास होता है। कुल मिलाकर, शुक्रवार के ये सरल वास्तु उपाय न केवल घर के वातावरण को सकारात्मक बनाते हैं, बल्कि आर्थिक स्थिति को भी मजबूत करने में सहायक माने जाते हैं। श्रद्धा और विश्वास के साथ अपनाए गए ये उपाय जीवन में स्थिरता और खुशहाली ला सकते हैं।
नौतपा में तपेगा मौसम ही नहीं, बदल सकती है जीवन की दिशा

नई दिल्ली। साल 2026 में Nautapa की शुरुआत 25 मई से होने जा रही है। इस अवधि को हिंदू पंचांग और ज्योतिष में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है, जब सूर्य देव रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करते हैं और पृथ्वी पर उनकी ऊर्जा का प्रभाव बढ़ जाता है। मान्यता है कि इन नौ दिनों के दौरान भीषण गर्मी अपने चरम पर होती है और लू चलने की संभावना अधिक रहती है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार नौतपा केवल मौसम का बदलाव नहीं बल्कि आध्यात्मिक ऊर्जा का विशेष समय भी होता है। सूर्य के रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करने से तापमान में वृद्धि होती है और यह समय साधना, दान और आत्मशुद्धि के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस अवधि में किए गए दान और धार्मिक कार्य सूर्य देव को प्रसन्न करते हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं। नौतपा के दौरान सबसे अधिक महत्व जल दान को दिया गया है। इस समय राहगीरों को पानी पिलाना, प्याऊ लगवाना और मिट्टी के घड़े में ठंडा पानी वितरित करना अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है। इसके साथ ही शरबत, छाछ, तरबूज और अन्य शीतल पेय पदार्थों का दान भी विशेष फलदायी बताया गया है। मान्यता है कि ऐसे कार्य न केवल लोगों को गर्मी से राहत देते हैं बल्कि आध्यात्मिक रूप से भी शुभ परिणाम देते हैं। इसके अलावा अन्न दान को भी इस अवधि में अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। गेहूं, चावल, दाल और गुड़ जैसे खाद्य पदार्थों का दान करने से व्यक्ति के जीवन में स्थिरता आती है और कुंडली में सूर्य की स्थिति मजबूत होती है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इससे आत्मविश्वास बढ़ता है और आर्थिक समस्याओं में धीरे-धीरे कमी आती है। नौतपा के दौरान वस्त्र दान का भी विशेष महत्व बताया गया है। सूती कपड़े, चप्पल, छाता और तौलिया जैसी आवश्यक वस्तुएं जरूरतमंदों को देने से सेवा भाव बढ़ता है और समाज में मान-सम्मान प्राप्त होता है। इसे पुण्य और कल्याणकारी कार्य माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस समय सुबह सूर्य को जल अर्पित करना और “ॐ सूर्याय नमः” मंत्र का जाप करना अत्यंत शुभ होता है। कई लोग इस अवधि में उपवास भी रखते हैं, जिससे मानसिक और शारीरिक शुद्धि होती है। ऐसा माना जाता है कि सूर्य मजबूत होने से व्यक्ति के नेतृत्व क्षमता और निर्णय लेने की शक्ति में वृद्धि होती है। कुल मिलाकर नौतपा 2026 केवल भीषण गर्मी का संकेत नहीं, बल्कि एक ऐसा समय है जिसे सही दिशा में उपयोग करके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन, स्वास्थ्य लाभ और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त की जा सकती है।
22 मई 2026: तुला राशि वालों की चमक सकती है किस्मत, सैलरी बढ़ने के योग

नई दिल्ली। तुला राशि वालों के लिए कल का दिन काफी सकारात्मक और लाभदायक रहने के संकेत दे रहा है। नौकरीपेशा लोगों को कार्यस्थल पर उनकी मेहनत का अच्छा परिणाम मिल सकता है। लंबे समय से जिस वेतन वृद्धि या प्रमोशन का इंतजार था, उससे जुड़ी कोई अच्छी खबर मिल सकती है। ऑफिस में वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग मिलेगा और आपकी कार्यशैली की सराहना हो सकती है। नए प्रोजेक्ट या जिम्मेदारियां मिलने के भी योग हैं, जो भविष्य में करियर ग्रोथ का रास्ता खोल सकती हैं। व्यापार से जुड़े लोगों के लिए भी समय अनुकूल रहेगा। रुके हुए काम पूरे होने की संभावना है और आर्थिक स्थिति मजबूत हो सकती है। निवेश से जुड़े मामलों में लाभ मिलने के संकेत हैं। पारिवारिक जीवन में खुशियों का माहौल बना रहेगा। परिवार के साथ अच्छा समय बिताने का मौका मिलेगा। किसी करीबी से शुभ समाचार मिलने की संभावना है। स्वास्थ्य सामान्य रहेगा, लेकिन गर्मी के मौसम को देखते हुए खानपान और पानी का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी जाती है। मानसिक रूप से भी आप आत्मविश्वास और ऊर्जा से भरपूर महसूस करेंगे। प्रेम संबंधों में मधुरता बनी रहेगी और रिश्तों में मजबूती आएगी। छात्रों के लिए भी दिन अच्छा रहेगा और पढ़ाई में मन लगेगा।
रेड कार्पेट पर छाईं मौनी रॉय, नया लुक सोशल मीडिया पर वायरल

नई दिल्ली। कान्स फिल्म फेस्टिवल 2026 में इस बार बॉलीवुड सितारों का ग्लैमर लगातार चर्चा में बना हुआ है और इसी बीच मौनी रॉय का नया लुक सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। अपने स्टाइलिश अंदाज और खूबसूरती के लिए मशहूर मौनी ने कान्स के रेड कार्पेट पर एक बार फिर ऐसा फैशन स्टेटमेंट दिया, जिसने फैंस को दीवाना बना दिया। हाल ही में अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर सुर्खियों में रहीं मौनी रॉय अब अपने ग्लैमरस अंदाज को लेकर चर्चा बटोर रही हैं। कान्स 2026 से सामने आई उनकी तस्वीरों में उनका ट्रेडिशनल और मॉडर्न फ्यूजन लुक हर किसी का ध्यान खींच रहा है। सोशल मीडिया पर फैंस लगातार उनके इस नए अवतार की तारीफ कर रहे हैं। मौनी ने इस खास मौके पर बेहद क्लासिक लेकिन एलिगेंट आउटफिट चुना। उनका यह ड्रेस डिजाइन गुजरात की प्रसिद्ध पाटन पटोला कला से प्रेरित बताया जा रहा है। नीले बेस कलर पर बने मल्टीकलर प्रिंट्स पूरे आउटफिट को बेहद आकर्षक बना रहे थे। पारंपरिक डिजाइनों और मॉडर्न सिल्हूट का यह मिश्रण उनके लुक को अलग पहचान दे रहा था। उनकी ड्रेस की सबसे खास बात पीछे लगी लंबी चमकदार नीली ट्रेल रही, जिसने पूरे लुक में रॉयल टच जोड़ दिया। रेड कार्पेट पर चलते समय यह ट्रेल बेहद शानदार दिखाई दे रही थी और कैमरों की नजरें लगातार उन्हीं पर टिकी रहीं। मौनी रॉय ने अपने इस लुक को बहुत ही सटल और मिनिमल तरीके से स्टाइल किया। उन्होंने बेहद हल्का मेकअप रखा और खुले बालों के साथ सिंपल लेकिन क्लासी अंदाज अपनाया। खास बात यह रही कि उन्होंने ‘नो ज्वेलरी’ ट्रेंड को फॉलो किया, जिससे पूरा फोकस उनके आउटफिट और नैचुरल ब्यूटी पर बना रहा। सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीरों पर फैंस लगातार कमेंट कर रहे हैं। कोई उन्हें “क्वीन ऑफ एलिगेंस” बता रहा है तो कोई उनके लुक को कान्स के सबसे खूबसूरत फैशन मोमेंट्स में शामिल कर रहा है। फैशन एक्सपर्ट्स भी उनके इस फ्यूजन स्टाइल की तारीफ कर रहे हैं। कान्स फिल्म फेस्टिवल हमेशा से ही इंटरनेशनल फैशन और ग्लैमर का सबसे बड़ा मंच माना जाता है, जहां दुनियाभर के सितारे अपने खास अंदाज से लोगों का ध्यान खींचते हैं। ऐसे में मौनी रॉय का यह रॉयल और स्टाइलिश लुक भारतीय फैशन की खूबसूरती को भी शानदार तरीके से पेश करता नजर आया।