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आज आर्द्र नक्षत्र में प्रवेश करेंगे शुक्र, इन 4 राशियों की चमकेगी किस्‍मत, बरसेगी धन-समृद्धि

नई दिल्ली। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सुख, वैभव, प्रेम और ऐश्वर्य के कारक ग्रह शुक्र आज 20 मई को राहु के स्वामित्व वाले आर्द्र नक्षत्र में प्रवेश करने जा रहे हैं। शुक्र के इस नक्षत्र परिवर्तन का असर सभी 12 राशियों पर देखने को मिलेगा, लेकिन कुछ राशियों के लिए यह गोचर बेहद शुभ और लाभकारी साबित हो सकता है। ज्योतिष मान्यताओं के मुताबिक राहु और शुक्र के बीच मित्रता का संबंध माना जाता है। ऐसे में शुक्र का आर्द्र नक्षत्र में प्रवेश कई लोगों के जीवन में अचानक सकारात्मक बदलाव ला सकता है। आइए जानते हैं किन राशियों की किस्मत चमकने वाली है। वृषभ राशि वालों को मिलेगा आर्थिक लाभवृषभ राशि के जातकों के लिए शुक्र का यह गोचर काफी शुभ संकेत लेकर आया है। लंबे समय से रुका हुआ धन वापस मिलने की संभावना बन रही है। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और निवेश से लाभ मिल सकता है। कार्यस्थल पर आपकी लोकप्रियता बढ़ेगी और वरिष्ठ अधिकारी आपके काम की सराहना कर सकते हैं। पारिवारिक जीवन में भी खुशियां बढ़ेंगी। जीवनसाथी के साथ रिश्ते मजबूत होंगे और घूमने-फिरने का प्लान बन सकता है।कन्या राशि के व्यक्तित्व में आएगा निखारकन्या राशि वालों के लिए यह समय आत्मविश्वास और आकर्षण बढ़ाने वाला रहेगा। आपकी बातचीत और व्यवहार से लोग प्रभावित होंगे, जिससे कई रुके हुए काम पूरे हो सकते हैं। जो लोग पार्टनरशिप में कारोबार कर रहे हैं, उन्हें बड़ा फायदा मिलने के संकेत हैं। प्रेम संबंधों में मधुरता आएगी और पार्टनर के साथ अच्छा समय बिताने का अवसर मिलेगा। तुला राशि वालों की बढ़ेगी आमदनीतुला राशि के जातकों के लिए शुक्र का यह गोचर सुख-सुविधाओं में बढ़ोतरी कराने वाला माना जा रहा है। आय के नए स्रोत बन सकते हैं और आर्थिक स्थिति पहले से बेहतर होगी। इस दौरान वाहन, इलेक्ट्रॉनिक गैजेट या घर से जुड़ी कोई बड़ी खरीदारी संभव है। समाज में मान-सम्मान बढ़ेगा और प्रभावशाली लोगों से संपर्क मजबूत होंगे। मीन राशि को मिलेगा भाग्य का साथमीन राशि के लिए यह गोचर विशेष लाभदायक माना जा रहा है। नौकरीपेशा लोगों को प्रमोशन या वेतन वृद्धि की खुशखबरी मिल सकती है। नई नौकरी के अवसर भी सामने आ सकते हैं। जो लोग विदेश जाने की योजना बना रहे हैं, उनके लिए भी समय अनुकूल रहेगा। इसके अलावा आध्यात्मिक कार्यों में रुचि बढ़ेगी और मानसिक शांति का अनुभव होगा।कई राशियों के लिए खुल सकते हैं सफलता के नए रास्तेज्योतिषाचार्यों के अनुसार शुक्र का आर्द्र नक्षत्र में प्रवेश प्रेम, धन, करियर और सामाजिक जीवन पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। हालांकि हर राशि पर इसका असर अलग-अलग होगा, लेकिन विशेष रूप से वृषभ, कन्या, तुला और मीन राशि के लोगों को इस दौरान अच्छे परिणाम मिलने की संभावना है।

रोम से स्वदेश रवाना हुए PM मोदी…. अंतरराष्ट्रीय संबंधों को मजबूत करेगा 5 देशों का दौरा

रोम (इटली)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने अपने पांच देशों के आधिकारिक दौरे को पूरा करते हुए बुधवार को इटली (Italy) के रोम (Rome) से भारत के लिए प्रस्थान किया। यह दौरा भारत की वैश्विक कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों को मजबूत करने की दिशा में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इटली यात्रा में रिश्तों को मिली नई मजबूतीप्रधानमंत्री मोदी ने अपनी इटली यात्रा को बेहद सफल बताते हुए कहा कि उनकी चर्चा इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के साथ कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर केंद्रित रही। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि भारत और इटली ने अपने संबंधों को स्पेशल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप तक पहुंचाने का निर्णय लिया है, जिससे आने वाले समय में दोनों देशों के सहयोग को नई गति मिलेगी। पीएम मोदी ने इटली के राष्ट्रपति सर्जियो मटेरेला से मुलाकात कर व्यापार, निवेश, संस्कृति, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, महत्वपूर्ण खनिज, अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा जैसे अहम क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर विस्तृत चर्चा की। आतंक के वित्तपोषण के खिलाफ भारत इटली की पहल वैश्विक नजीर: मोदीपीएम मोदी ने कहा कि आतंकवाद मानवता के लिए एक गंभीर चुनौती है और भारत-इटली दोनों इस बात पर एकमत हैं। आतंकवाद के वित्तपोषण के खिलाफ हमारी पहल ने पूरी दुनिया के लिए एक महत्वपूर्ण उदाहरण प्रस्तुत किया है। पीएम मोदी ने कहा, भारत और इटली ने स्पष्ट संदेश दिया है कि जिम्मेदार लोकतंत्र न केवल आतंकवाद की निंदा करते हैं, बल्कि इसके वित्तीय नेटवर्क को बाधित करने के लिए ठोस कदम भी उठाते हैं। पीएम ने यूक्रेन और पश्चिम एशिया संकट के बारे में कहा कि हम यूक्रेन, पश्चिम एशिया और अन्य तनावों के संबंध में लगातार एक-दूसरे के संपर्क में हैं। भारत का दृष्टिकोण स्पष्ट है कि सभी समस्याओं का समाधान संवाद और कूटनीति से होना चाहिए। इटली की पीएम जियोर्जिया मेलनी के साथ वार्ता के बाद साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस में मोदी ने कहा, दोनों देशों के रक्षा उद्योगों के साथ-साथ हमारी सेनाओं में भी सहयोग बढ़ रहा है। इटली दौरे की बड़ी उपलब्धियां– दोनों देशों के संबंध को विशेष रणनीतिक साझेदारी में बदलने से द्विपक्षीय संबंध तेजी से आगे बढ़ेगा।– भारत-इटली रक्षा औद्योगिक रोडमैप: रक्षा सहयोग और रक्षा उत्पादन तंत्र मजबूत होगा।– दुर्लभ खजिनों के क्षेत्र में सहयोग का एमओयू से खोज-खनन-उत्पादन में तेजी। आधुनिक तकनीक और निवेश में सहयोग बढ़ेगा।– ईडी-इटली के वित्तीय निगरानी विभाग में सहयोग से टैक्स संबंधी अपराधों, धनशोधन और आतंकवाद के खिलाफ फंडिंग पर मिलकर काम होगा।– भारत-इटली में 2027 को संस्कृति और पर्यटन वर्ष के रूप में मनाने का समझौता: दोनों देशों में सांस्कृतिक आदान-प्रदान और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।– भारतीय नर्सों को काम के लिए इटली भेजने का समझौता: इससे भारतीय स्वास्थ्य क्षेत्र में रोजगार बढ़ेगा। दुनिया में भारतीय कार्यबल की गुणवत्ता को मान्यता।– गुजरात के लोथल में नेशनल मेरीटाइम हेरिटेज कॉम्प्लेक्स निर्माण के एमओयू से भारतीय सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण होगा।– उच्च शिक्षा और शोध में सहयोग का रोडमैप: शोध की गुणवत्ता, औद्योगिक संपर्क और आधुनिक शिक्षण का तंत्र विकसित होगा। क्षमता निर्माण होगा।– समुद्री परिवहन क्षेत्र में सहयोग के लिए एमओयू से समुद्री बुनियादी ढांचा मजबूत होगा। रणनीतिक साझेदारी को मिला नया आयामदोनों देशों ने संयुक्त रणनीतिक कार्य योजना 2025-29 की प्रगति की समीक्षा की और व्यापार, निवेश, तकनीक, रक्षा, ब्लू इकोनॉमी, कनेक्टिविटी, शिक्षा और जन-से-जन संबंधों जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति जताई। इटली सरकार ने भी इस यात्रा को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि भारत और इटली के संबंध अब अपने सबसे उच्च स्तर पर पहुंच चुके हैं। MEA ने बताया यात्रा को सफलविदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भी इस दौरे को बेहद सफल बताया। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी की 5 देशों की यात्रा के अंतिम चरण में इटली में कई महत्वपूर्ण परिणाम सामने आए हैं। पीएम मोदी ने 15 से 20 मई तक संयुक्त अरब अमीरात, नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली का दौरा किया। इस दौरान भारत ने कई देशों के साथ अपने आर्थिक, रणनीतिक और तकनीकी संबंधों को मजबूत किया। भारत और इटली के बीच का द्विपक्षीय व्यापारप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इससे पहले जून 2024 में ग्रुप ऑफ सेवन (G7) शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए इटली गए थे। अब उनका यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है, जब भारत और इटली के बीच द्विपक्षीय संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं। विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों देश संयुक्त रणनीतिक कार्य योजना 2025-2029 को सक्रिय रूप से लागू कर रहे हैं। इस व्यापक रोडमैप के तहत व्यापार, निवेश, रक्षा और सुरक्षा, स्वच्छ ऊर्जा, नवाचार, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और लोगों के बीच संपर्क जैसे कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाया जा रहा है। मंत्रालय ने बताया कि वर्ष 2025 में भारत-इटली द्विपक्षीय व्यापार 16.77 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया है। वहीं अप्रैल 2000 से सितंबर 2025 के बीच इटली से भारत में 3.66 अरब अमेरिकी डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) दर्ज किया गया। दोनों देश रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। यात्रा के दौरान मिले कई सम्मानइसी यात्रा क्रम में नॉर्वे दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘ग्रैंड क्रॉस ऑफ द रॉयल ऑर्डर ऑफ मेरिट’ से सम्मानित किया गया, जो उनका 32वां अंतरराष्ट्रीय सम्मान है। नॉर्वे में उन्होंने भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में भी भाग लिया। इसके अलावा स्वीडन में उन्हें ‘रॉयल ऑर्डर ऑफ द पोलर स्टार’ से सम्मानित किया गया और दोनों देशों ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करते हुए रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देने पर सहमति जताई।

‘कॉकरोच जनता पार्टी’ की एंट्री से सियासत गरम, 2029 चुनाव और केजरीवाल संग गठजोड़ पर अभिजीत ने दिया बयान

नई दिल्ली। सोशल मीडिया पर अचानक उभरी ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ इन दिनों राजनीतिक और डिजिटल दोनों मंचों पर चर्चा का विषय बनी हुई है। इस आंदोलन के पीछे 30 वर्षीय अभिजीत दीपके हैं, जिन्होंने हाल ही में बॉस्टन यूनिवर्सिटी से पब्लिक रिलेशंस में मास्टर्स किया है। उनका दावा है कि यह सिर्फ एक पार्टी नहीं, बल्कि देश के युवाओं की नाराजगी और हताशा की आवाज है। अभिजीत ने बताया कि कुछ दिन पहले तक वह अमेरिका में नौकरी के लिए आवेदन कर रहे थे, लेकिन चीफ जस्टिस की उस टिप्पणी ने उन्हें झकझोर दिया जिसमें सोशल मीडिया पर सक्रिय युवाओं की तुलना ‘कॉकरोच’ और ‘परजीवी’ से की गई थी। इसी के बाद उन्होंने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि अगर यही बयान किसी राजनीतिक नेता ने दिया होता तो शायद इतना असर नहीं होता, लेकिन जब संविधान की रक्षा करने वाले पद पर बैठा व्यक्ति ऐसी टिप्पणी करे तो युवाओं को चोट पहुंचना स्वाभाविक है। अभिजीत के मुताबिक, पार्टी को शुरू हुए महज कुछ ही दिनों में लाखों लोग इससे जुड़ गए। इंस्टाग्राम पर पार्टी के 33 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स हो चुके हैं, जबकि वेबसाइट पर लाखों युवाओं ने रजिस्ट्रेशन कराया है। उनका कहना है कि यह किसी प्रायोजित अभियान का नतीजा नहीं, बल्कि युवाओं के भीतर जमा गुस्से का विस्फोट है। अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी से रिश्तों को लेकर भी अभिजीत ने खुलकर बात की। उन्होंने माना कि वह 2020 से 2023 के बीच आम आदमी पार्टी के कम्युनिकेशन विभाग से जुड़े थे और शिक्षा-स्वास्थ्य मॉडल से प्रभावित होकर काम किया था। हालांकि उन्होंने साफ किया कि फिलहाल उनकी नई मुहिम किसी भी पारंपरिक राजनीतिक दल से दूरी बनाए रखना चाहती है। केजरीवाल के समर्थन को लेकर उन्होंने कहा कि कोई भी समर्थन दे सकता है, लेकिन ‘जेन-जी’ के युवा नहीं चाहते कि इस आंदोलन पर किसी स्थापित पार्टी की छाया पड़े। 2029 के चुनाव लड़ने के सवाल पर अभिजीत ने कहा कि अभी इस पर फैसला लेना जल्दबाजी होगी। पहले युवाओं की राय ली जाएगी और उसी आधार पर आगे की रणनीति तय होगी। उनका कहना है कि मौजूदा राजनीति युवाओं की असली समस्याओं से दूर हो चुकी है और अब राजनीतिक विमर्श बदलने की जरूरत है। कॉकरोच जनता पार्टी ने अपनी वेबसाइट पर पांच सूत्रीय एजेंडा भी जारी किया है। इसमें न्यायपालिका और चुनाव आयोग की स्वतंत्रता, महिलाओं को 50 प्रतिशत प्रतिनिधित्व, मीडिया स्वामित्व पर सवाल और राजनीतिक जवाबदेही जैसे मुद्दे शामिल हैं। अभिजीत का कहना है कि यह एक आदर्श लोकतांत्रिक व्यवस्था की दिशा में सोच है। उन्होंने मौजूदा राजनीति पर निशाना साधते हुए कहा कि देश में वर्षों से हिंदू-मुस्लिम जैसे मुद्दों पर राजनीति हो रही है, जबकि युवाओं के सामने रोजगार, शिक्षा, तकनीक और भविष्य जैसे बड़े सवाल खड़े हैं। उन्होंने ‘नीट पेपर लीक’ मामले का जिक्र करते हुए कहा कि सिस्टम की विफलता ने कई युवाओं का भविष्य प्रभावित किया है। अभिजीत ने दावा किया कि यह आंदोलन केवल सोशल मीडिया तक सीमित नहीं रहेगा। उनका कहना है कि देश के युवा अब अपनी आवाज लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से उठाने के लिए तैयार हैं। फंडिंग और संगठनात्मक ढांचे को लेकर उन्होंने कहा कि फिलहाल टीम रणनीति तैयार कर रही है और जल्दबाजी में कोई कदम नहीं उठाया जाएगा। उनका उद्देश्य एक स्वतंत्र और लंबे समय तक चलने वाला युवा आंदोलन खड़ा करना है।

MP: कॉल रिकॉर्ड खोलेंगे ट्विशा शर्मा की मौत का राज? 46 मोबाइल नंबर जांच के घेरे में

भोपाल। भोपाल की ट्विशा शर्मा (Twisha Sharma) की मौत से जुड़े मामले में बुधवार को कई अहम घटनाएं सामने आईं. एक तरफ अदालत ने दोबारा पोस्टमार्टम (Post mortem) कराने की याचिका स्वीकार करने से इनकार कर दिया, वहीं दूसरी ओर मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के मुख्यमंत्री मोहन यादव (Chief Minister Mohan Yadav) ने पीड़ित परिवार को आश्वासन दिया कि राज्य सरकार इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपने के लिए औपचारिक पत्र भेजेगी. 33 वर्षीय ट्विशा शर्मा मॉडलिंग और एक्टिंग से जुड़ी थीं, 12 मई को भोपाल के कटारा हिल्स इलाके में स्थित अपने ससुराल में संदिग्ध परिस्थितियों में मृत पाई गई थीं. परिजनों ने आरोप लगाया है कि विवाह के बाद से उन्हें दहेज को लेकर प्रताड़ित किया जा रहा था और मानसिक व शारीरिक रूप से परेशान किया जाता था. 46 मोबाइल नंबरों के कॉल डिटेल सुरक्षित रखने की मांगइस बीच परिवार ने 46 मोबाइल नंबरों के कॉल डिटेल रिकॉर्ड, लोकेशन डाटा, व्हाट्सऐप और डिजिटल मेटाडाटा सुरक्षित रखने की भी मांग की है. इसमें परिवार, घरेलू कर्मचारी, ड्राइवर, करीबी सहयोगी और घटना से पहले व बाद में जुड़े लोगों के नंबर शामिल हैं. परिवार ने जांच पर उठाए सवालट्विशा के परिवार ने स्थानीय पुलिस जांच पर सवाल उठाते हुए कहा कि बिना वजह प्रशासनिक देरी से शव खराब हो सकता है और अहम फॉरेंसिक साक्ष्य नष्ट होने का खतरा है. परिवार ने आरोप लगाया कि जमानत पर बाहर मौजूद मुख्य आरोपी गिरिबाला सिंह ने न्यायिक कार्यालय परिसर का उपयोग कर मीडिया से बातचीत की और मृतका के खिलाफ बयान दिए. इस पर मृतका के पिता नवनीधि शर्मा ने मध्य प्रदेश के राज्यपाल मंगूभाई सी पटेल को संवैधानिक ज्ञापन सौंपकर गिरिबाला सिंह की अर्ध-न्यायिक पद पर भूमिका की समीक्षा की मांग की है. FIR और मेडिकल रिपोर्ट में क्या?परिवार ने कहा कि एफआईआर और प्रारंभिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट में ‘एंटीमॉर्टम हैंगिंग’ के साथ शरीर के अन्य हिस्सों पर कई चोटों का भी उल्लेख है. उनका कहना है कि इन तथ्यों ने परिवार के मन में मौत की वास्तविक परिस्थितियों को लेकर गंभीर संदेह पैदा कर दिया है. पूर्व सैनिकों का प्रदर्शनइसी बीच भोपाल में 50 से अधिक पूर्व सैनिक मोटरसाइकिल रैली निकालकर ट्विशा शर्मा को न्याय दिलाने और मामले की जांच मध्य प्रदेश से बाहर कराने की मांग करते नजर आए. उल्लेखनीय है कि ट्विशा शर्मा के भाई भारतीय सेना में मेजर हैं।

PM मोदी आज लेंगे कैबिनेट मीटिंग, फेरबदल की अटकलों के बीच लिए जा सकते हैं बड़े फैसले

नई दिल्ली। पांच देशों के दौरे से वापस आने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) गुरुवार को कैबिनेट बैठक (Cabinet Meeting) करेंगे। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, बैठक में विभिन्न मंत्रालयों के कामकाज, लिए गए प्रमुख निर्णयों और उनके नतीजों तथा भविष्य की योजनाओं सहित अन्य विषयों पर चर्चा होगी। पीएम मोदी की अध्यक्षता में होने वाली बैठक में सभी कैबिनेट मंत्री, स्वतंत्र प्रभार वाले राज्य मंत्री और अन्य राज्य मंत्रियों को शामिल होने के निर्देश दिए गए हैं। कैबिनेट में फेरबदल की अटकलों के बीच, यह इस वर्ष कैबिनेट की पहली पूर्ण बैठक होगी। सूत्रों ने बताया कि बैठक में विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के कामकाज, हाल के दिनों में लिए गए प्रमुख निर्णयों और उनके परिणामों, तथा भविष्य की योजनाओं पर चर्चा की जाएगी। विभिन्न सरकारी योजनाओं और कार्यक्रमों के अलग-अलग पहलुओं, उन्हें अधिकतम सफलता के लिए कैसे लागू किया जाए और अन्य विषयों की भी समीक्षा किए जाने की उम्मीद है। क्या होगा बैठक का एजेंडा?पीएम मोदी के पश्चिम एशिया में जारी संकट और उसके आर्थिक प्रभावों का जिक्र करने की संभावना है और वह मंत्रालयों तथा विभागों को निर्देश दे सकते हैं कि नागरिकों को कम से कम असुविधा हो, इसके लिए किस तरह से आगे बढ़ा जाए। सूत्रों ने बताया कि बैठक में ऊर्जा, कृषि, उर्वरक, विमानन, शिपिंग और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जा सकता है। पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के कुछ ही समय बाद, मोदी ने सभी संबंधित पक्षों को निर्देश दिया था कि वे नागरिकों और इससे प्रभावित क्षेत्रों की समस्याओं को कम करने के लिए हर संभव कदम उठाएं। आमजन को फायदा पहुंचाने पर होगी चर्चाबैठक में आम लोगों के फायदे के लिए सभी क्षेत्रों में सुधार लाने की सरकार की प्राथमिकता पर भी चर्चा होने की संभावना है। प्रधानमंत्री ने इससे पहले अगले 10 वर्षों के लिए सुधार की प्राथमिकताओं की रूपरेखा पेश करते हुए कहा था कि उनकी सरकार की रिफॉर्म एक्सप्रेस ने व्यवस्थागत बदलाव लाए हैं और आम नागरिकों को काफी हद तक लाभ पहुंचाया है। यह बैठक प.बंगाल, असम और पुडुचेरी में भाजपा की जबर्दस्त जीत के बाद हो रही है।

ट्रंप बोले… इजराइल में मेरी लोकप्रियता की रेटिंग 99%…. दो साल बाद वहां जाकर लडूंगा PM चुनाव

वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने मंगलवार को फिर एक ऐसा दावा किया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय जगत में हलचल पैदा हो गई है। पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने दावा किया कि इज़रायल (Israel) में उनकी लोकप्रियता 99 प्रतिशत है और मजाकिया अंदाज में कहा कि अमेरिका में राष्ट्रपति पद का कार्यकाल पूरा होने के बाद (2028 में) वह वहां प्रधानमंत्री पद का चुनाव (Prime Minister’s post, election) लड़ सकते हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि उन्हें एक ताज़ा सर्वेक्षण में बेहद ऊंची रेटिंग मिली है। उन्होंने कहा, “तो शायद यह काम पूरा करने के बाद, मैं इज़रायल जाऊंगा और प्रधानमंत्री पद का चुनाव (Prime Minister’s post, election) लड़ूंगा। आज सुबह ही एक जनमत सर्वेक्षण आया है, जिसमें मेरी रेटिंग 99% है।” जब पत्रकारों ने उनसे ईरान पर संभावित हमले के बारे में पूछा, तो ट्रंप ने कहा कि इस्लामिक गणराज्य के साथ किसी समझौते पर पहुंचने की उन्हें “कोई जल्दी नहीं है।” उन्होंने कहा, “हमें होर्मुज समुद्री मार्ग को खोलना होगा, वह तुरंत खुल जाएगा, इसलिए हम इसे एक मौका देंगे। मुझे कोई जल्दी नहीं है। हर कोई कह रहा है, ‘ओह, मध्यावधि चुनाव आ रहे हैं।’ आदर्श रूप से, मैं चाहूंगा कि कम से कम लोग मारे जाएं, न कि बहुत ज़्यादा।” नेतन्याहू बहुत अच्छे इंसानपत्रकार लगातार ट्रंप से पूछते रहे कि उन्होंने इज़रायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से इस हमले के बारे में क्या कहा है? इस पर रिपब्लिकन नेता ने जवाब दिया, “वह बहुत अच्छे इंसान हैं; वह वही करेंगे जो मैं उनसे करवाना चाहूंगा। और वह एक बेहतरीन व्यक्ति हैं… यह मत भूलिए कि वह युद्धकालीन प्रधानमंत्री रह चुके हैं।” उन्होंने यह दावा भी किया कि इज़रायल में नेतन्याहू के साथ “सही बर्ताव नहीं किया जाता है। ट्रंप ने कल ही ईरान को एक नई चेतावनी जारी करते हुए कहा था कि “एक और बड़ा हमला” हो सकता है, क्योंकि दोनों देश एक स्थायी शांति समझौते की शर्तों को लेकर एक गंभीर गतिरोध पर पहुंच गए हैं। ट्रंप और नेतन्याहू पर 58 मिलियन डॉलर का इनाम?इस बीच, खबरों के अनुसार ईरान, ट्रंप और नेतन्याहू पर 58 मिलियन डॉलर का इनाम रखने पर विचार-विमर्श कर रहा है। ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति समिति के अध्यक्ष इब्राहिम अज़ीज़ी ने घोषणा की है कि यह समिति “इस्लामिक गणराज्य के सैन्य और सुरक्षा बलों द्वारा जवाबी कार्रवाई” नामक एक विधेयक तैयार कर रही है। ईरान वायर और द टेलीग्राफ यूके की रिपोर्टों के अनुसार, इस विधेयक के माध्यम से किसी भी ऐसे व्यक्ति या संस्था को 50 मिलियन यूरो (लगभग 58.23 मिलियन डॉलर) की राशि का भुगतान औपचारिक रूप से सुनिश्चित किया जाएगा, जो अमेरिका और इज़रायल के इन नेताओं की हत्या करेगा। ईरानी संसद 28 फरवरी को तेहरान पर हुए हमलों के लिए,जिनमें तत्कालीन सर्वोच्च नेता अली खामेनेई मारे गए थे,ट्रंप और नेतन्याहू की हत्या के लिए इनाम देने वाले एक बिल पर मतदान करने वाली है।

NEET UG: री-एग्जाम से पहले अलर्ट मोड पर सरकार…. अफवाहों पर नकेल कसने की तैयारी

नई दिल्ली। मेडिकल (Medical) की सबसे बड़ी प्रवेश परीक्षा (NEET-UG) के री-एग्जाम से पहले केंद्र सरकार (Central government) पूरी तरह से अलर्ट मोड में आ गई है। 3 मई को हुई परीक्षा में पेपर लीक (Paper leak) और ग्रेस मार्क्स जैसे विवादों के बाद, अब सरकार सोशल मीडिया पर फैलने वाली झूठी अफवाहों और पैनिक फैलाने वाले पोस्ट्स पर सख्त नकेल कसने की तैयारी में है। छात्रों का भरोसा फिर से बहाल करने के लिए शिक्षा मंत्रालय ने टेक जगत के दिग्गजों- गूगल (Google), मेटा (Meta) और टेलीग्राम (Telegram) को भी अपने साथ जोड़ लिया है, ताकि किसी भी तरह की भ्रामक जानकारी को इंटरनेट पर फैलने से पहले ही रोका जा सके। बता दें कि आज 21 जून को NEET-UG का दोबारा एग्जाम हो रहा है। शिक्षा मंत्री ने लिया मोर्चा, दिए ‘फोकस्ड क्रैकडाउन’ के निर्देशकेंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने बुधवार को एक हाई-लेवल मीटिंग की अध्यक्षता की। इस महत्वपूर्ण बैठक में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के प्रतिनिधियों के अलावा केंद्रीय खुफिया और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के अधिकारी भी मौजूद रहे। शिक्षा मंत्री ने सख्त हिदायत दी है कि परीक्षा से पहले ऑनलाइन एक्टिव होने वाले उन नेटवर्क्स पर सीधा और ‘फोकस्ड क्रैकडाउन’ किया जाए, जो एक सोची-समझी साजिश के तहत गलत जानकारी फैलाते हैं। टेलीग्राम और सीक्रेट ग्रुप्स पर खुफिया एजेंसियों की पैनी नजरशिक्षा मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि सबसे बड़ी चिंता टेलीग्राम चैनल्स, अनजान ग्रुप्स और बॉट्स को लेकर है, जो बड़े एग्जाम्स से ठीक पहले अचानक बहुत एक्टिव हो जाते हैं। ये ग्रुप्स व्यूज और पैसों के लालच में ‘पेपर लीक’ के झूठे दावे, क्लिकबेट मैसेज और बिना सिर-पैर की जानकारी सर्कुलेट करते हैं। इससे छात्रों और उनके अभिभावकों के बीच दहशत का माहौल बन जाता है। खुफिया इनपुट्स से यह भी खुलासा हुआ है कि कुछ चुनिंदा फोन नंबर्स का इस्तेमाल करके दर्जनों संदिग्ध चैनल ऑपरेट किए जा रहे हैं, जो इनकी संगठित गतिविधि की ओर इशारा करता है। इसके बाद एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स पर डिजिटल सर्विलांस और कड़ी कर दी गई है। उन ग्रुप्स पर खास नजर है जो छात्रों को एग्जाम से पहले “अंदर की जानकारी” या एडवांस में पेपर देने का दावा करते हैं। टेक कंपनियों ने दिया पूरा सहयोग का भरोसाराहत की बात यह है कि सरकार की इस सख्ती पर मेटा, गूगल और टेलीग्राम जैसी कंपनियों ने सकारात्मक रुख दिखाया है। उन्होंने भरोसा दिलाया है कि परीक्षा से जुड़ी किसी भी भ्रामक या फेक जानकारी की पहचान करके उसे तेजी से ब्लॉक और रिमूव किया जाएगा। शिक्षा मंत्री ने कंपनियों से कहा है कि वे नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) और पुलिस एजेंसियों के साथ मिलकर काम करें, ताकि प्रोपेगेंडा और खौफ फैलाने वाले चैनल्स को तुरंत बंद किया जा सके। अधिकारियों ने बताया कि सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों को भी परीक्षा से पहले डिजिटल सर्विलांस मजबूत करने को कहा गया है। उन एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स और तेजी से बढ़ रहे ग्रुप्स पर खास नजर रखी जा रही है, जो परीक्षार्थियों को परीक्षा से जुड़ी सामग्री एडवांस में देने या ‘इनसाइड इंफॉर्मेशन’ मुहैया कराने का दावा करते हैं। एग्जाम सेंटर पर कैसी होगी व्यवस्था?मंगलवार को री-एग्जाम की तैयारियों की समीक्षा करते हुए शिक्षा मंत्री ने साफ कर दिया था कि पिछली परीक्षा की सभी खामियों को पूरी तरह दूर किया जाना चाहिए। सभी राज्यों के जिलाधिकारियों (DM) और पुलिस अधीक्षकों (SP) के साथ को-ऑर्डिनेशन मीटिंग करने के निर्देश दिए गए हैं। इसका मकसद परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा और मॉनिटरिंग के प्रोटोकॉल को सख्ती से लागू करना है। इसके साथ ही, अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया गया है कि री-एग्जाम के दिन छात्रों के लिए ट्रांसपोर्टेशन (आवाजाही), पीने के पानी और अन्य जरूरी सुविधाओं का खास ख्याल रखा जाए ताकि उन्हें किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। क्यों हो रहा है नीट री-एग्जाम?आपको बता दें कि 3 मई को आयोजित की गई नीट-यूजी परीक्षा को पेपर लीक के आरोपों के बाद रद्द कर दिया गया था। इसके बाद ही री-एग्जाम की घोषणा की गई थी। इस पूरे विवाद (पेपर लीक के आरोप, ग्रेस मार्क्स विवाद और संगठित नकल) ने परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा और विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे, जिसके बाद सरकार अब हर स्तर पर सख्ती बरत रही है।

US में हजारों H-1B वीजा धारक मुश्किल में…. 60 दिन में दूसरी नौकरी नहीं मिली तो छोड़ना पड़ेगा अमेरिका

वॉशिंगटन। अमेरिका (America) की दिग्गज टेक कंपनियों मेटा (Meta), अमेज़न (Amazon) और ओरेकल (Oracle) में हाल ही में बड़े पैमाने पर हुई छंटनी ने हजारों भारतीय टेक पेशेवरों (Indian Tech Professionals) को मुश्किल में डाल दिया है। नौकरी जाने के बाद अब H-1B वीज़ा धारक भारतीयों (H-1B Visa holding Indians.) के सामने केवल 60 दिनों का समय बचा है। इसी दौरान उन्हें नई नौकरी खोजनी होगी वरना उन्हें अमेरिका छोड़ना पड़ सकता है। दरअसल, अमेरिकी इमिग्रेशन नियमों के अनुसार, H-1B वीजा पर काम कर रहे किसी विदेशी कर्मचारी की नौकरी जाने के बाद उसे 60 दिनों का “ग्रेस पीरियड” मिलता है। इस दौरान अगर उसे कोई नया नियोक्ता नहीं मिलता जो उसके वीज़ा को स्पॉन्सर करे, तो उसे अमेरिका छोड़ना पड़ सकता है। अब इस संकट की वजह से वर्षों से अमेरिका में बसे कई भारतीय परिवारों के लिए स्थिति बेहद तनावपूर्ण हो गई है। उनके सामने अब नौकरी ढूंढ़ने से लेकर अपना घर बचाने, बच्चों की शिक्षा और अमेरिका में रहने के अधिकार पर भी खतरा मंडरा रहा है। कई भारतीयों के लिए, जिन्होंने वहाँ अपनी ज़िंदगी बनाने में सालों बिताए हैं, यह स्थिति बहुत भारी टेंशन लेकर आया है। अतिरिक्त कागजात की माँगइस बीच, कई छंटनीशुदा कर्मचारी अब कथित तौर पर अस्थायी रूप से B-2 विजिटर वीजा पर जाने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे उन्हें अमेरिका में छह महीने तक रहने की अनुमति मिल सकती है। लेकिन इमिग्रेशन विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका में मौजूदा इमिग्रेशन माहौल को देखते हुए, यह रास्ता भी अब और ज़्यादा मुश्किल होता जा रहा है। इकॉनमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इमिग्रेशन अधिकारी अब B-2 विजिटर वीजा ची चाहत रखने वालों से अतिरिक्त कागज़ात की माँग कर रहे हैं और छंटनीशुदा H-1B कर्मचारियों के वीज़ा आवेदन ज़्यादा संख्या में खारिज कर रहे हैं। भारतीयों पर सबसे बड़ा असरअमेरिका स्थित इमिग्रेशन वकील राजीव खन्ना के मुताबिक, हाल के महीनों में B-1/B-2 स्टेटस परिवर्तन से जुड़े मामलों में अतिरिक्त दस्तावेजों की मांग और अस्वीकृति नोटिस तेजी से बढ़े हैं। उन्होंने कहा कि उनके करियर में पहली बार इतनी बड़ी संख्या में ऐसे मामले सामने आ रहे हैं। H-1B वीजा कार्यक्रम में भारतीयों की भागीदारी सबसे अधिक है। आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025 में मंजूर की गई 4,06,348 H-1B याचिकाओं में से 2,83,772 केवल भारतीयों की थीं। 2026 में अब तक 144 टेक कंपनियों में 1,10,000 से अधिक कर्मचारी अपनी नौकरी खो चुके हैं, जिनमें बड़ी संख्या भारतीयों की है। मुश्किलें और बढ़ती चुनौतियांपारिवारिक और आर्थिक संकट: कई भारतीय पिछले एक दशक से अमेरिका में रह रहे हैं और ग्रीन कार्ड के लंबे इंतजार (backlog) में फंसे हैं। उनके बच्चे वहां पैदा हुए हैं और उनके ऊपर होम लोन जैसी बड़ी वित्तीय जिम्मेदारियां हैं। वीजा नियमों में सख्ती: समय बढ़ाने के लिए कई कर्मचारी अस्थायी रूप से B-2 (विजिटर) वीजा में स्विच करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन अब प्रशासन इसमें भी अधिक कागजी कार्रवाई और ‘सबूतों की मांग’ (RFE) कर रहा है। विकल्प की तलाशइमिग्रेशन विशेषज्ञों का कहना है कि अब वीजा मंजूरी मिलना पहले से कहीं अधिक कठिन हो गया है। ऐसे में अब नए विकल्पों की तलाश हो रही है। कई भारतीय अब कनाडा और यूरोप को एक विकल्प के रूप में देख रहे हैं। इसके अलावा, कुछ लोग F-1 (छात्र वीजा) या O-1 (असाधारण क्षमता वाले व्यक्तियों के लिए वीजा) जैसे अन्य मार्गों पर भी विचार कर रहे हैं। बता दें कि मेटा जैसी कंपनियां अब अपनी संरचना को ‘फ्लैट’ करने और AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) पर ध्यान केंद्रित करने के लिए छंटनी का सहारा ले रही हैं, जिससे आने वाले दिनों में टेक सेक्टर में काम करने वाले भारतीयों की चिंताएं और बढ़ सकती हैं।

राष्ट्रीय आतंकवाद विरोधी दिवस 2026: आतंकवाद के खिलाफ एकजुटता और शांति का संकल्प

राष्ट्रीय आतंकवाद विरोधी दिवस हर साल 21 मई को पूरे भारत में मनाया जाता है। इस दिवस को मनाने का उद्देश्य देश के लोगों को आतंकवाद और हिंसा के खिलाफ जागरूक करना तथा समाज में शांति, एकता और सौहार्द का संदेश फैलाना है। यह दिन हमें यह याद दिलाता है कि आतंकवाद किसी भी रूप में मानवता के लिए खतरा है और इससे निपटने के लिए सभी नागरिकों को मिलकर काम करना चाहिए। इस दिन की शुरुआत 1991 में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के बाद की गई थी, ताकि आतंकवाद के खिलाफ देश को एकजुट किया जा सके। तब से हर वर्ष 21 मई को यह दिवस मनाया जाता है। इस मौके पर स्कूलों, कॉलेजों, सरकारी कार्यालयों और विभिन्न संस्थानों में शपथ ग्रहण समारोह और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। राष्ट्रीय आतंकवाद विरोधी दिवस पर लोगों को यह शपथ दिलाई जाती है कि वे किसी भी प्रकार की हिंसा और आतंकवाद का समर्थन नहीं करेंगे और देश की अखंडता और एकता को बनाए रखने में अपना योगदान देंगे। यह दिन समाज में भाईचारे और शांति को मजबूत करने का संदेश देता है। आज के समय में जब दुनिया के कई हिस्सों में आतंकवाद और हिंसा की घटनाएं सामने आती हैं, ऐसे में यह दिवस और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। यह हमें याद दिलाता है कि शांति ही विकास की पहली शर्त है और बिना शांति के कोई भी देश प्रगति नहीं कर सकता। राष्ट्रीय आतंकवाद विरोधी दिवस केवल एक औपचारिक दिन नहीं है, बल्कि यह एक संकल्प है कि हम सभी मिलकर आतंकवाद के खिलाफ खड़े होंगे और एक सुरक्षित, शांतिपूर्ण और मजबूत भारत के निर्माण में योगदान देंगे। -राष्ट्रीय आतंकवाद विरोधी दिवस

आज बाजार में क्या रहेगा रुख? मुनाफे के मौके की तलाश में निवेशक सतर्क

नई दिल्ली ।  भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत वैश्विक संकेतों और घरेलू आर्थिक आंकड़ों पर निर्भर रहने वाली है। विशेषज्ञों के अनुसार बाजार में आज मिश्रित रुख (Mixed Trend) देखने को मिल सकता है, जहां कुछ सेक्टरों में खरीदारी रहेगी तो कुछ में मुनाफावसूली का दबाव बना रह सकता है। गिफ्ट निफ्टी के संकेतों से यह अनुमान लगाया जा रहा है कि बाजार की ओपनिंग फ्लैट से हल्की तेजी के साथ हो सकती है। हालांकि, निवेशक किसी भी बड़े दांव से पहले ग्लोबल मार्केट्स के ट्रेंड और डॉलर इंडेक्स की चाल पर नजर बनाए रखेंगे। निफ्टी-सेंसेक्स पर दबाव और सपोर्ट लेवलमार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक निफ्टी के लिए आज का प्रमुख सपोर्ट लेवल 22,200–22,100 के आसपास रह सकता है, जबकि ऊपर की ओर 22,450–22,600 का स्तर मजबूत रेजिस्टेंस के रूप में काम कर सकता है। सेंसेक्स में भी आज सीमित दायरे में कारोबार होने की संभावना है। बैंकिंग और आईटी सेक्टर बाजार को दिशा देने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। कौन से सेक्टर रह सकते हैं फोकस में?आज के ट्रेडिंग सत्र में कुछ सेक्टर निवेशकों का ध्यान खींच सकते हैं-बैंकिंग सेक्टर: लोन ग्रोथ और Q4 नतीजों के बाद हलचल संभवआईटी सेक्टर: ग्लोबल टेक संकेतों से प्रभावितऑटो सेक्टर: डिमांड डेटा के चलते तेजी की उम्मीदफार्मा सेक्टर: सुरक्षित निवेश के रूप में खरीदारी संभव ग्लोबल मार्केट और FII का असरअमेरिकी बाजारों में मिले-जुले संकेत और एशियाई बाजारों की सुस्ती का असर भारतीय बाजार पर दिख सकता है। इसके साथ ही विदेशी निवेशकों (FII) की गतिविधियां भी बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। अगर FII लगातार खरीदारी करते हैं तो बाजार में मजबूती लौट सकती है, लेकिन बिकवाली बढ़ने पर दबाव देखने को मिल सकता है। निवेशकों के लिए जरूरी संकेतविशेषज्ञ सलाह देते हैं कि आज के बाजार में निवेशक सावधानी के साथ ट्रेडिंग करें। अचानक आने वाले उतार-चढ़ाव से बचने के लिए स्टॉप लॉस का उपयोग जरूरी रहेगा। शॉर्ट टर्म ट्रेडर्स के लिए यह दिन अवसर और जोखिम दोनों लेकर आ सकता है। लॉन्ग टर्म निवेशक मजबूत फंडामेंटल वाले स्टॉक्स में धीरे-धीरे निवेश बढ़ा सकते हैं। 21 मई का शेयर बाजार पूरी तरह से ग्लोबल संकेतों, डॉलर मूवमेंट और घरेलू निवेश भावना पर निर्भर रहेगा। बाजार में बड़ा ट्रेंड फिलहाल नहीं दिख रहा है, लेकिन सेक्टर आधारित तेजी निवेशकों को मौके दे सकती है।