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दीपिका नागर मौत मामला: दहेज प्रताड़ना के आरोपों से हड़कंप, बहन की “एनकाउंटर” की मांग से बढ़ा विवाद

नोएडा। जलपुरा गांव में 17 मई को हुई 25 वर्षीय दीपिका नागर की संदिग्ध मौत ने अब एक बड़े दहेज प्रताड़ना और हत्या के आरोपों का रूप ले लिया है। प्रारंभिक जानकारी में पुलिस और ससुराल पक्ष ने इसे छत से गिरने की घटना बताया था, लेकिन पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट सामने आने के बाद मामले ने नया मोड़ ले लिया है। परिवार का दावा है कि दीपिका नागर के शरीर पर कई गंभीर चोटों के निशान मिले हैं, जो सामान्य गिरने से मेल नहीं खाते। रिपोर्ट में ब्रेन हेमेटोमा, अंदरूनी रक्तस्राव और शरीर पर गहरे चोट के निशान जैसी गंभीर चोटों का उल्लेख सामने आया है। इसी आधार पर परिवार ने आरोप लगाया है कि दीपिका की पहले बेरहमी से पिटाई की गई और फिर घटना को आत्महत्या या दुर्घटना का रूप देने की कोशिश की गई। दीपिका के परिवार का कहना है कि उसकी शादी दिसंबर 2024 में ऋतिक नामक युवक से हुई थी और शादी के बाद से ही उसे लगातार दहेज के लिए प्रताड़ित किया जा रहा था। परिवार के अनुसार, ससुराल पक्ष द्वारा फॉर्च्यूनर कार और 50 लाख रुपये की मांग की जा रही थी। घटना के बाद दीपिका की बहन सारिका नागर ने भावुक होकर आरोपियों पर बेहद गंभीर आरोप लगाए। उसने कहा कि उसकी बहन के साथ अमानवीय व्यवहार हुआ और उसे “नोंचकर मार डाला गया।” आक्रोश में सारिका ने यहां तक मांग कर दी कि आरोपियों का “एनकाउंटर” किया जाए, जिससे मामला और संवेदनशील हो गया है। परिवार के अन्य सदस्यों का कहना है कि दीपिका ने मौत से कुछ घंटे पहले फोन पर दहेज प्रताड़ना और मारपीट की बात भी बताई थी। इसके बाद अचानक सूचना मिली कि वह छत से गिर गई है, लेकिन जब परिवार अस्पताल पहुंचा तो दीपिका की मौत हो चुकी थी। फिलहाल यह मामला दहेज हत्या और घरेलू हिंसा के गंभीर आरोपों के बीच जांच के दायरे में है। पुलिस की ओर से आधिकारिक जांच जारी है, जबकि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की उम्मीद जताई जा रही है।

ट्रांसफर पॉलिसी को मंजूरी की तैयारी: कल कैबिनेट में होगा अहम फैसला

मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों के तबादलों को लेकर लंबे समय से प्रतीक्षित नई तबादला नीति 2026 को अब अंतिम रूप देने की प्रक्रिया तेज हो गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में होने वाली कैबिनेट बैठक में इस नीति को मंजूरी मिलने की पूरी संभावना जताई जा रही है। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने इसका ड्राफ्ट तैयार कर मुख्यमंत्री सचिवालय को भेज दिया है, जिसके बाद इसे कैबिनेट के सामने रखा जाएगा। प्रस्तावित नीति में सबसे बड़ा बदलाव स्वैच्छिक और प्रशासनिक तबादलों को अलग-अलग श्रेणी में रखने का है। अब तक दोनों प्रकार के तबादले एक ही कोटे के अंतर्गत आते थे, जिसके कारण प्रशासनिक जरूरतों के अनुसार फेरबदल में बाधा आती थी। नई व्यवस्था में प्रशासनिक तबादलों के लिए अधिक स्वतंत्रता मिलने की संभावना है। सूत्रों के अनुसार, कैबिनेट में इस बात पर भी चर्चा होगी कि तबादलों की सीमा तय की जाए या नहीं। पहले कुल कार्यरत कर्मचारियों के 10 से 15 प्रतिशत तक ही तबादलों की अनुमति दी जाती थी, लेकिन नई नीति में इस सीमा को लेकर लचीलापन अपनाया जा सकता है। 11 मई की पिछली कैबिनेट बैठक में मंत्री विजय शाह ने स्वैच्छिक तबादलों पर किसी तरह की सीमा न रखने का सुझाव दिया था, जिस पर मुख्यमंत्री ने विचार का आश्वासन दिया था। अब इसी सुझाव के आधार पर नीति में संशोधन की संभावना है। नई तबादला नीति में यह भी प्रस्ताव है कि सभी विभाग ऑनलाइन प्रक्रिया के माध्यम से ट्रांसफर आवेदन स्वीकार करेंगे। इसके साथ ही स्कूल शिक्षा विभाग की नीति हर साल की तरह अलग रहेगी, जबकि राजस्व, ऊर्जा और जनजातीय कार्य जैसे विभाग अपनी अलग नीति जारी कर सकते हैं, लेकिन वे सामान्य प्रशासन विभाग के मूल नियमों से बाहर नहीं जा सकेंगे। प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि नई व्यवस्था में जिलों के भीतर तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के तबादलों का अधिकार प्रभारी मंत्री और कलेक्टर को दिया जा सकता है। वहीं, उच्च स्तर के अधिकारियों के ट्रांसफर के लिए मुख्यमंत्री की मंजूरी अनिवार्य रहेगी। यह भी प्रस्तावित है कि किसी कर्मचारी का एक बार तबादला होने के बाद उसे कम से कम एक वर्ष तक दोबारा ट्रांसफर नहीं किया जाएगा, जिससे स्थिरता बनी रहे। कैबिनेट बैठक में तबादला नीति के अलावा राज्यमंत्री स्वेच्छानुदान बढ़ाने के फैसले पर भी औपचारिक आदेश जारी होने की संभावना है। इसे 16 हजार रुपये से बढ़ाकर 25 हजार रुपये कर दिया गया है। कुल मिलाकर, बुधवार की कैबिनेट बैठक मध्य प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था के लिए बेहद अहम मानी जा रही है। तबादला नीति में बदलाव से न केवल कर्मचारियों की कार्यप्रणाली प्रभावित होगी, बल्कि प्रशासनिक संतुलन पर भी इसका व्यापक असर देखने को मिलेगा।

डेडबॉडी पर मल्टीपल चोटों का दावा: परिवार ने रिपोर्ट पर जताई आपत्ति

मध्य प्रदेश। भोपाल की एक्ट्रेस ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। अब AIIMS भोपाल की शॉर्ट पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में शरीर पर कई चोटों के निशान मिलने का उल्लेख सामने आया है, जिसके बाद यह मामला और भी संवेदनशील हो गया है। परिजन पहले से ही इसे हत्या का मामला बता रहे हैं, जबकि ससुराल पक्ष ने पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ट्विशा के ससुराल पक्ष की ओर से पूर्व जज गिरीबाला सिंह और उनके वकील ने आरोप लगाया है कि रिपोर्ट में चोटों का उल्लेख तो है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया गया कि चोटें कहां और कितनी गंभीर थीं। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट को सनसनी फैलाने के उद्देश्य से पेश किया गया प्रतीत होता है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि दोबारा पोस्टमॉर्टम या किसी स्वतंत्र एजेंसी से जांच होती है तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं है और वे जांच में पूरा सहयोग करेंगे। इस मामले में एक और बड़ा विवाद उस समय सामने आया जब यह खुलासा हुआ कि कथित फांसी में इस्तेमाल की गई बेल्ट को पोस्टमॉर्टम के समय जांच के लिए उपलब्ध नहीं कराया गया था। बाद में बेल्ट जांच के लिए दी गई, लेकिन तब तक वैज्ञानिक परीक्षण नहीं हो सका। इसी कारण गर्दन पर मिले निशानों का सही विश्लेषण अधूरा रह गया, जिससे जांच प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे हैं। परिजनों का आरोप है कि जांच में गंभीर लापरवाही हुई है और उन्होंने मामले को मध्य प्रदेश से बाहर किसी स्वतंत्र एजेंसी या दिल्ली AIIMS में दोबारा पोस्टमॉर्टम कराने की मांग की है। परिजन यह भी दावा कर रहे हैं कि देरी से FIR दर्ज हुई और कई अहम सबूतों को ठीक से सुरक्षित नहीं किया गया। वहीं दूसरी ओर ससुराल पक्ष का कहना है कि आरोप पूरी तरह से एकतरफा हैं। उनका दावा है कि ट्विशा मानसिक तनाव में थीं और कई व्यक्तिगत कारणों से परेशान थीं। सास गिरीबाला सिंह ने मीडिया से बातचीत में कहा कि ट्विशा ने स्वयं गर्भपात कराया था, जिसके बाद वह डिप्रेशन में चली गई थीं। उन्होंने यह भी कहा कि परिवार ने हमेशा उसे संभालने की कोशिश की। इस पूरे मामले में पुलिस ने बताया है कि आरोपी समर्थ सिंह की तलाश के लिए 6 टीमें बनाई गई हैं और उस पर 10 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया है। पुलिस का कहना है कि जल्द ही आरोपी को गिरफ्तार कर पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट की जाएगी। इस बीच राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी मामला गर्मा गया है। भोपाल में सीएम हाउस के बाहर परिजनों ने प्रदर्शन कर न्याय की मांग की। दूसरी ओर ससुराल पक्ष ने भी खुद को निर्दोष बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। फिलहाल ट्विशा की मौत का रहस्य और गहराता जा रहा है। एक तरफ परिजन इसे सुनियोजित हत्या बता रहे हैं, तो दूसरी तरफ ससुराल पक्ष इसे मानसिक तनाव और व्यक्तिगत परिस्थितियों का परिणाम बता रहा है। जांच एजेंसियों के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती सच को सामने लाने की है।

हेपेटाइटिस C इलाज पर भारत का सख्त रुख, पेटेंट विवाद में अमेरिकी कंपनी को झटका

नई दिल्ली । भारत ने दवाओं की उपलब्धता और सार्वजनिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है। भारतीय पेटेंट कार्यालय ने अमेरिकी दवा कंपनी AbbVie को हेपेटाइटिस C के इलाज में इस्तेमाल होने वाली कॉम्बो थेरेपी पर पेटेंट देने से इनकार कर दिया है। इस फैसले को स्वास्थ्य क्षेत्र में एक बड़े कदम के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि इससे भविष्य में सस्ती जेनेरिक दवाओं की उपलब्धता बनाए रखने में मदद मिल सकती है। जिस थेरेपी को लेकर विवाद सामने आया, उसमें glecaprevir और pibrentasvir नामक दवाओं का संयोजन शामिल है। इसे हेपेटाइटिस C जैसी गंभीर बीमारी के इलाज के लिए प्रभावी माना जाता है। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार यह थेरेपी कई मरीजों के लिए महत्वपूर्ण विकल्प है, खासकर उन लोगों के लिए जिन्हें लंबे समय तक उपचार की आवश्यकता होती है। ऐसे में इस दवा के जेनेरिक संस्करण की उपलब्धता मरीजों के लिए राहत का माध्यम बन सकती है। भारतीय पेटेंट प्रणाली लंबे समय से इस बात पर जोर देती रही है कि किसी भी दवा या चिकित्सा तकनीक को केवल तभी पेटेंट सुरक्षा मिले जब उसमें वास्तविक और महत्वपूर्ण नवाचार हो। इसी नीति के तहत पेटेंट कार्यालय ने कंपनी के आवेदन की समीक्षा की और अंततः पेटेंट देने से इनकार कर दिया। माना जा रहा है कि इस फैसले से बाजार में प्रतिस्पर्धा बनी रहेगी और दवाओं की कीमतें नियंत्रित रखने में मदद मिलेगी। सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़े कई संगठनों ने इस निर्णय का स्वागत किया है। उनका कहना है कि यदि इस तरह के पेटेंट आसानी से दिए जाने लगें, तो आवश्यक दवाओं की कीमतें बढ़ सकती हैं और मरीजों की पहुंच सीमित हो सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार भारत की पेटेंट व्यवस्था में मौजूद सुरक्षा उपाय स्वास्थ्य अधिकारों और दवा पहुंच के बीच संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। भारत दुनिया के उन प्रमुख देशों में शामिल है जो बड़े स्तर पर जेनेरिक दवाओं का उत्पादन करते हैं। कई विकासशील देशों में भारतीय दवाओं पर बड़ी आबादी निर्भर करती है। ऐसे में किसी महत्वपूर्ण इलाज पर एकाधिकार आधारित पेटेंट का असर केवल भारत तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी महसूस किया जा सकता है। यही कारण है कि इस फैसले को अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति के नजरिए से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हेपेटाइटिस C एक गंभीर वायरल संक्रमण है, जो मुख्य रूप से लिवर को प्रभावित करता है। समय पर इलाज न मिलने की स्थिति में यह बीमारी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकती है। पिछले कुछ वर्षों में इसके उपचार में आधुनिक दवाओं ने बड़ी भूमिका निभाई है, लेकिन इनकी कीमतें कई देशों में चिंता का विषय रही हैं। ऐसे में जेनेरिक दवाओं की उपलब्धता उपचार को अधिक सुलभ और किफायती बनाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत का यह फैसला भविष्य में भी दवा उद्योग और सार्वजनिक स्वास्थ्य के बीच संतुलन बनाए रखने के उदाहरण के रूप में देखा जाएगा। यह निर्णय इस बात का संकेत है कि देश की नीतियां केवल व्यावसायिक हितों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि आम मरीजों की पहुंच और स्वास्थ्य सुरक्षा को भी प्राथमिकता देती हैं।

दवा की ऑनलाइन बिक्री के विरोध में हड़ताल: कल बंद रहेंगे मेडिकल स्टोर्स

मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल सहित पूरे राज्य में मंगलवार, 20 मई को मेडिकल स्टोर्स बंद रहने वाले हैं। ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) के आह्वान पर यह राज्यव्यापी हड़ताल की जा रही है। इस बंद का सीधा असर भोपाल के करीब 3 हजार से अधिक मेडिकल स्टोर्स पर पड़ेगा, जो एक दिन के लिए पूरी तरह से बंद रहेंगे। इस हड़ताल का मुख्य कारण ऑनलाइन दवा बिक्री का बढ़ता विस्तार है। केमिस्ट एसोसिएशन का कहना है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के जरिए दवाओं की बिक्री पर पर्याप्त निगरानी और नियंत्रण व्यवस्था नहीं है, जिससे नकली, एक्सपायरी या गलत दवाओं के मरीजों तक पहुंचने का खतरा बढ़ जाता है। संगठन का आरोप है कि इससे आम लोगों की सेहत सीधे तौर पर जोखिम में पड़ रही है। भोपाल केमिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष जितेंद्र धाकड़ ने बताया कि जिले के सभी रिटेल और थोक दवा व्यवसायी इस बंद का समर्थन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा केवल व्यापार का नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर विषय है। एसोसिएशन ने सरकार से मांग की है कि ऑनलाइन दवा बिक्री पर सख्त नियंत्रण लगाया जाए और एक मजबूत निगरानी तंत्र तैयार किया जाए। हालांकि इस बंद से मरीजों की परेशानी बढ़ सकती है, खासकर उन लोगों के लिए जो रोजाना दवाओं पर निर्भर हैं। इसे देखते हुए एसोसिएशन ने नागरिकों से अपील की है कि वे 19 मई तक ही अपनी आवश्यक दवाएं खरीद लें ताकि 20 मई को किसी प्रकार की परेशानी न हो। विशेष रूप से बुजुर्गों, हृदय रोगियों, डायबिटीज और ब्लड प्रेशर के मरीजों को पहले से दवाओं का स्टॉक रखने की सलाह दी गई है। एसोसिएशन ने यह भी स्पष्ट किया है कि अस्पतालों के अंदर संचालित मेडिकल स्टोर्स इस हड़ताल से बाहर रहेंगे, ताकि गंभीर मरीजों को जरूरी दवाएं मिलती रहें। हड़ताल के दौरान कॉरपोरेट कंपनियों द्वारा दी जा रही भारी छूट, बिना निगरानी दवा वितरण और ऑनलाइन बिक्री पर नियंत्रण की कमी को लेकर विरोध जताया जाएगा। संगठन का कहना है कि जब तक सरकार ठोस नियम लागू नहीं करती, तब तक विरोध जारी रह सकता है। कुल मिलाकर, 20 मई का दिन मध्य प्रदेश में दवा व्यवस्था के लिहाज से महत्वपूर्ण रहने वाला है। जहां एक ओर केमिस्ट संगठन अपने अधिकारों और नियमों की मांग को लेकर एकजुट है, वहीं दूसरी ओर आम जनता को अस्थायी असुविधा का सामना करना पड़ सकता है।

राजनाथ सिंह वियतनाम दौरे पर, रक्षा सहयोग को नई दिशा; भारत-वियतनाम रिश्तों में बढ़ी रणनीतिक गहराई

नई दिल्ली। रक्षा मंत्री Rajnath Singh के वियतनाम दौरे ने भारत-वियतनाम संबंधों को एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में ला दिया है। दोनों देशों ने रक्षा सहयोग, समुद्री सुरक्षा और इंडो-पैसिफिक स्थिरता पर अपनी रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई है।हनोई/नई दिल्ली। भारत और वियतनाम के बीच रणनीतिक संबंधों को नई मजबूती देने के उद्देश्य से रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अपने वियतनाम दौरे के दौरान वहां के शीर्ष नेतृत्व से अहम बातचीत की। इस बैठक में रक्षा सहयोग, सुरक्षा साझेदारी और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। दोनों देशों ने इस बात पर सहमति जताई कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति और संतुलन बनाए रखने में भारत और वियतनाम की साझेदारी बेहद अहम भूमिका निभा सकती है। राजनाथ सिंह ने इस दौरान भारत की ओर से वियतनाम के साथ रक्षा सहयोग को और गहरा करने की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच साझेदारी केवल रक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आपसी विश्वास, तकनीकी सहयोग और सामरिक समझ पर आधारित एक व्यापक संबंध है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से भी शुभकामनाएं वियतनाम नेतृत्व को दीं। इसी बीच भारत के ऐतिहासिक विदेश नीति दृष्टिकोण की चर्चा भी एक बार फिर सामने आई है। कहा जाता है कि भारत के पहले प्रधानमंत्री Jawaharlal Nehru ने 1960 के दशक में अमेरिका के वियतनाम युद्ध में गहराई से शामिल होने पर सावधानी बरतने की सलाह दी थी। हालांकि ऐतिहासिक दस्तावेजों में उनके विचार सीधे और औपचारिक रूप में स्पष्ट रूप से दर्ज नहीं हैं, लेकिन कई समकालीन लेखों और स्मृतियों में उनके इस रुख का उल्लेख मिलता है कि वियतनाम में सैन्य हस्तक्षेप से बचना चाहिए। आगे चलकर वियतनाम युद्ध ने वैश्विक राजनीति पर गहरा असर डाला, जिसमें भारी जनहानि और लंबे संघर्ष के बाद अंततः अमेरिका को पीछे हटना पड़ा। युद्ध के बाद वियतनाम एकीकृत राष्ट्र के रूप में उभरा। भारत और वियतनाम के संबंध केवल रणनीतिक ही नहीं बल्कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से भी गहरे हैं। 1959 में तत्कालीन राष्ट्रपति Rajendra Prasad ने हो ची मिन्ह को बोधि वृक्ष भेंट किया था, जो आज भी दोनों देशों की मित्रता का प्रतीक माना जाता है। यह प्रतीक समय-समय पर भारत-वियतनाम रिश्तों की मजबूती को दर्शाता रहा है।

पाकिस्तान का नया दावा फिर बेनकाब: “फतह-1 से उड़ाए भारत के एयरबेस”, जिनका अस्तित्व ही नहीं!

नई दिल्ली। पाकिस्तान की सेना एक बार फिर अपने दावों को लेकर सवालों के घेरे में आ गई है। हाल ही में पाकिस्तानी सेना के एक अधिकारी ने दावा किया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उनकी फतह-1 मिसाइलों ने भारत के दो सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया था, लेकिन जिन एयरबेसों का नाम लिया गया, वे वास्तव में अस्तित्व में ही नहीं हैं। पाकिस्तानी अधिकारी कैप्टन मुनीब जमाल ने एक इंटरव्यू में दावा किया कि फतह-1 मिसाइलों ने “राजौरी एयरबेस” और “मामून एयरबेस” को सफलतापूर्वक तबाह कर दिया। हालांकि हकीकत यह है कि राजौरी में कोई वायुसेना एयरबेस मौजूद नहीं है और मामून केवल पठानकोट के पास एक सैन्य कैंटोनमेंट क्षेत्र है, न कि कोई एयरबेस। भारत-पाकिस्तान के बीच “ऑपरेशन सिंदूर” को लेकर पहले से ही तनाव और दावे-प्रतिदावे जारी हैं। इसी बीच पाकिस्तान का यह नया बयान एक बार फिर उसके दावों की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर रहा है। भारत की ओर से पहले भी कई बार ऐसे हमलों को नाकाम किए जाने की पुष्टि की जा चुकी है। सोशल मीडिया पर भी पाकिस्तानी दावे को लेकर जमकर मजाक उड़ाया जा रहा है, जहां यूजर्स “काल्पनिक एयरबेस” का उल्लेख कर इस बयान को हास्यास्पद बता रहे हैं।

असीम मुनीर का भारत पर बिना नाम हमला, बोले- आतंकवाद, दुष्प्रचार और बाहरी ताकतें पाकिस्तान की तरक्की नहीं रोक सकतीं

नई दिल्ली। पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर ने बलूचिस्तान की धरती से एक बार फिर भारत का नाम लिए बिना कड़ा बयान दिया है। अपने संबोधन में उन्होंने बाहरी ताकतों पर पाकिस्तान में आतंकवाद फैलाने और दुष्प्रचार चलाने का आरोप लगाया और कहा कि ऐसी कोशिशें देश की तरक्की और स्थिरता को रोक नहीं सकतीं। मुनीर ने कमांड एंड स्टाफ कॉलेज, क्वेटा में अधिकारियों और सैनिकों को संबोधित करते हुए कहा कि पाकिस्तान का “निश्चित उदय” किसी भी प्रकार के प्रॉक्सी वॉर, गलत सूचना अभियान या आतंकवाद से प्रभावित नहीं होगा। उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तानी सेना और जनता मिलकर देश से आतंकवाद का पूरी तरह सफाया करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। अपने भाषण में उन्होंने बलूचिस्तान में तैनात सैन्य अधिकारियों की ट्रेनिंग और पेशेवर क्षमता की भी सराहना की। मुनीर ने कहा कि आधुनिक युद्ध तेजी से बदल रहा है और ऐसे में सेना को मल्टी-डोमेन ऑपरेशन, नई तकनीक और तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल पर लगातार काम करना होगा। उन्होंने जवानों को संबोधित करते हुए कहा कि बदलते सुरक्षा हालात में निरंतर प्रशिक्षण और उच्च स्तर की परिचालन तैयारी बेहद जरूरी है, ताकि किसी भी चुनौती का प्रभावी जवाब दिया जा सके। मुनीर ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ “शत्रु ताकतें” पाकिस्तान के खिलाफ फर्जी खबरों और दुष्प्रचार के जरिए देश को अस्थिर करने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन सेना और जनता की एकता के आगे ये प्रयास सफल नहीं होंगे। बलूचिस्तान में स्थायी शांति और विकास पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि क्षेत्र की प्रगति सुरक्षा, समावेशी विकास और बेहतर शासन पर निर्भर करती है।

Google I/O 2026: सुंदर पिचाई के ऐलानों पर टिकी दुनिया की नजर, AI और Android में बड़े बदलाव की उम्मीद

नई दिल्ली। गूगल की सालाना डेवलपर कॉन्फ्रेंस Google I/O 2026 को लेकर टेक दुनिया में जबरदस्त उत्साह है। यह इवेंट 19 और 20 मई 2026 को आयोजित किया जा रहा है, जिसकी शुरुआत भारतीय समयानुसार रात 10 बजकर 30 मिनट पर होगी। पहले दिन की कीनोट स्पीच कैलिफोर्निया के माउंटेन व्यू स्थित Shoreline Amphitheatre में होगी, जिसे गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई संबोधित करेंगे। इस इवेंट में कंपनी अपने आने वाले सॉफ्टवेयर, AI और हार्डवेयर से जुड़े कई बड़े अपडेट्स पेश कर सकती है। इस बार सबसे ज्यादा फोकस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और Android इकोसिस्टम पर रहने की उम्मीद है। माना जा रहा है कि गूगल अपने AI मॉडल Gemini को और ज्यादा एडवांस बनाकर नए फीचर्स के साथ पेश कर सकता है। यह भी चर्चा है कि कंपनी Gemini को सिर्फ एक AI टूल नहीं बल्कि पूरे Google इकोसिस्टम जैसे Android, Chrome, Gmail और Workspace में गहराई से इंटीग्रेट कर सकती है, जिससे यूजर्स का स्मार्टफोन और कंप्यूटर इस्तेमाल करने का तरीका पूरी तरह बदल सकता है। Google के इस इवेंट में Android 17 को लेकर भी बड़े अपडेट्स की उम्मीद जताई जा रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह अब तक का सबसे AI-सेंट्रिक Android वर्जन हो सकता है, जिसमें सिस्टम लेवल पर Gemini AI का गहरा इंटीग्रेशन देखने को मिल सकता है। इससे फोन सिर्फ कमांड फॉलो करने वाला डिवाइस नहीं रहेगा, बल्कि यूजर की आदतों को समझकर खुद भी काम करने में सक्षम हो सकता है। इसके साथ ही ChromeOS और Android के बीच बेहतर इंटीग्रेशन पर भी गूगल काम कर रहा है, ताकि लैपटॉप, टैबलेट और स्मार्टफोन के बीच एक स्मूद और यूनिफाइड एक्सपीरियंस मिल सके। माना जा रहा है कि अगले-जेनरेशन हाइब्रिड डिवाइसेज के लिए नए सॉफ्टवेयर टूल्स भी इस इवेंट में पेश किए जा सकते हैं। हार्डवेयर सेगमेंट में भी कुछ सरप्राइज देखने को मिल सकते हैं। चर्चा है कि गूगल XR स्मार्ट ग्लासेस पर काम कर रहा है, जिन्हें Samsung और Xreal जैसी कंपनियों के साथ मिलकर तैयार किया जा रहा है। इन डिवाइसेज में Gemini AI का सपोर्ट होने से रियल-टाइम जानकारी, नेविगेशन और ऑगमेंटेड रियलिटी एक्सपीरियंस और भी एडवांस हो सकता है। पिछले साल के Google I/O में AI Overviews और कई नए AI टूल्स ने सर्च और इंटरनेट इस्तेमाल करने के तरीके को बदल दिया था। इस बार उम्मीद है कि गूगल AI को एक कदम आगे ले जाकर “एजेंटिक AI सिस्टम” पेश कर सकता है, जो मल्टी-स्टेप टास्क खुद पूरा करने में सक्षम होगा। हालांकि यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि Google I/O मुख्य रूप से एक प्रेजेंटेशन इवेंट होता है, जिसमें दिखाए गए कई फीचर्स बाद में धीरे-धीरे या पूरी तरह प्रोडक्ट्स में शामिल किए जाते हैं। ऐसे में इस बार के बड़े ऐलान भी आने वाले महीनों या सालों में ही यूजर्स तक पहुंच सकते हैं। कुल मिलाकर Google I/O 2026 टेक दुनिया के लिए एक बड़ा इवेंट साबित हो सकता है, जहां AI, Android और भविष्य की कंप्यूटिंग टेक्नोलॉजी की दिशा तय होती दिखेगी

UIDAI का बड़ा फैसला: अब आधार अपडेट कराने पर नहीं लगेगा कोई शुल्क, बढ़ी अंतिम तारीख

नई दिल्ली । देशभर के करोड़ों आधार धारकों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण ने आधार से जुड़े दस्तावेजों को ऑनलाइन अपडेट करने की मुफ्त सुविधा की समय सीमा को बढ़ा दिया है। अब लोग जून 2027 तक बिना किसी शुल्क के अपने आधार में नाम, पता और अन्य जरूरी दस्तावेज ऑनलाइन अपडेट कर सकेंगे। इस फैसले के बाद उन लोगों को विशेष राहत मिलेगी जो आधार केंद्रों पर लंबी कतारों और अतिरिक्त शुल्क से बचना चाहते हैं। प्राधिकरण के अनुसार, लोगों की बढ़ती डिजिटल भागीदारी और ऑनलाइन अपडेट सेवा को मिल रही सकारात्मक प्रतिक्रिया को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है। बड़ी संख्या में लोग अब डिजिटल माध्यम से अपने पहचान और पते से जुड़े दस्तावेज अपडेट कर रहे हैं, जिससे प्रक्रिया पहले के मुकाबले अधिक आसान और तेज हो गई है। यही कारण है कि इस सुविधा को आगे भी जारी रखने का फैसला लिया गया ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इसका लाभ उठा सकें। यह सुविधा खास तौर पर उन लोगों के लिए फायदेमंद मानी जा रही है जिनके आधार में पुराना पता, गलत नाम या अन्य जानकारियां दर्ज हैं। ऑनलाइन प्रक्रिया के जरिए अब उपयोगकर्ता घर बैठे दस्तावेज अपलोड कर अपने विवरण अपडेट कर सकते हैं। इसके लिए केवल आधार नंबर और ओटीपी आधारित सत्यापन की जरूरत होती है। इसके बाद पहचान और पते से जुड़े आवश्यक दस्तावेजों की स्कैन कॉपी अपलोड करके आवेदन जमा किया जा सकता है। आधार केंद्रों पर दस्तावेज अपडेट कराने के लिए आमतौर पर शुल्क देना पड़ता है, लेकिन ऑनलाइन सेवा के तहत यह प्रक्रिया पूरी तरह मुफ्त रखी गई है। इससे डिजिटल सेवाओं को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ लोगों का समय और पैसा दोनों बच रहे हैं। माना जा रहा है कि आने वाले समय में और अधिक लोग इस सुविधा का इस्तेमाल करेंगे, जिससे आधार रिकॉर्ड अधिक सटीक और अपडेटेड बनाए रखने में मदद मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि आधार अब केवल पहचान पत्र तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि बैंकिंग, सरकारी योजनाओं, मोबाइल सेवाओं और कई जरूरी कामों में इसकी अहम भूमिका है। ऐसे में आधार की जानकारी सही और अपडेटेड होना बेहद जरूरी हो गया है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए ऑनलाइन अपडेट प्रक्रिया को लगातार सरल और सुलभ बनाया जा रहा है। इस फैसले के बाद लोगों के लिए यह अच्छा अवसर माना जा रहा है कि वे समय रहते अपने आधार की जानकारी को अपडेट कर लें। डिजिटल माध्यम से होने वाली यह प्रक्रिया न केवल सुविधाजनक है, बल्कि इससे सरकारी सेवाओं तक पहुंच भी अधिक आसान और पारदर्शी बन रही है।