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Amazon Fire TV Stick HD लॉन्च: पुराने टीवी को बनाएगा स्मार्ट, 30 गुना फास्ट स्पीड और नए फीचर्स के साथ आया नया डिवाइस

नई दिल्ली। Amazon ने भारत में अपनी नई Fire TV Stick HD लॉन्च कर दी है, जिसे कंपनी अब तक की सबसे स्लिम और फास्ट स्ट्रीमिंग स्टिक बता रही है। यह डिवाइस पुराने नॉन-स्मार्ट टीवी को स्मार्ट टीवी में बदलने के लिए डिजाइन की गई है और इसे सीधे टीवी के HDMI पोर्ट में लगाकर इस्तेमाल किया जा सकता है। कंपनी का दावा है कि यह पिछली जेनरेशन की तुलना में 30 गुना तेज है, जिससे ऐप्स तेजी से ओपन होते हैं और वीडियो स्ट्रीमिंग स्मूद रहती है। इस नए मॉडल की कीमत भारत में 4,999 रुपये रखी गई है। इसे Amazon.in के अलावा Blinkit, Swiggy Instamart, Zepto और Flipkart जैसे क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म से भी खरीदा जा सकता है। जल्द ही यह ऑफलाइन रिटेल स्टोर्स पर भी उपलब्ध होगी। फीचर्स की बात करें तो Fire TV Stick HD में Wi-Fi 6 सपोर्ट और Full HD स्ट्रीमिंग की सुविधा दी गई है। इससे कमजोर इंटरनेट कनेक्शन में भी वीडियो कम रुकावट के साथ चलने का दावा किया गया है। इसका डिजाइन पहले से ज्यादा पतला और पोर्टेबल बताया गया है, जो पिछले मॉडल की तुलना में लगभग 30% स्लिम है। यह स्टिक बिना अलग पावर एडॉप्टर के भी काम कर सकती है, क्योंकि इसे सीधे टीवी के USB पोर्ट से पावर मिल सकती है। इसके नए सॉफ्टवेयर इंटरफेस को और ज्यादा आसान और व्यवस्थित बनाया गया है, जिसमें फिल्में, टीवी शो, लाइव और फ्री कंटेंट के लिए अलग-अलग सेक्शन दिए गए हैं। इसके अलावा इसमें Alexa सपोर्ट भी मिलता है, जिससे यूजर्स टीवी के साथ-साथ स्मार्ट होम डिवाइसेज जैसे AC, गीजर, पंखे और लाइट्स को भी वॉयस कमांड से कंट्रोल कर सकते हैं। कंपनी ने इसमें पहली बार क्लाउड गेमिंग का सपोर्ट भी जोड़ा है, जिससे यूजर्स गेमिंग का अनुभव भी ले सकते हैं। यह डिवाइस खास तौर पर उन लोगों के लिए फायदेमंद है जिनके पास अभी नॉन-स्मार्ट टीवी है या जो कम बजट में अपने पुराने टीवी को अपग्रेड करना चाहते हैं। इसके जरिए बिना नया स्मार्ट टीवी खरीदे स्ट्रीमिंग और स्मार्ट फीचर्स का अनुभव लिया जा सकता है।

इवेंट में मचा हंगामा: गोविंदा के सामने बाउंसर और पैपराजी भिड़े, एक्टर ने संभाला मोर्चा..

नई दिल्ली । बॉलीवुड अभिनेता गोविंदा एक बार फिर सुर्खियों में हैं, लेकिन इस बार वजह उनकी कोई फिल्म या परफॉर्मेंस नहीं बल्कि एक इवेंट के दौरान हुआ अचानक विवाद है। हाल ही में एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान जब गोविंदा इवेंट से बाहर निकल रहे थे, तभी वहां मौजूद भारी भीड़ और मीडिया कवरेज के बीच माहौल अचानक तनावपूर्ण हो गया। फैंस, फोटोग्राफर्स और मीडिया की भीड़ के बीच रास्ता बनाने की कोशिश में उनके सुरक्षा कर्मियों और पैपराजी के बीच तीखी बहस शुरू हो गई, जिसने कुछ ही पलों में स्थिति को और गर्म कर दिया। बताया जा रहा है कि भीड़ को नियंत्रित करने के दौरान धक्का-मुक्की जैसी स्थिति बन गई, जिसमें एक पैपराजी को असहज अनुभव हुआ। इसके बाद मौके पर मौजूद कुछ मीडियाकर्मियों ने इस पर आपत्ति जताई और देखते ही देखते दोनों पक्षों के बीच बहस तेज हो गई। माहौल इतना तनावपूर्ण हो गया कि इवेंट स्थल पर कुछ देर के लिए अफरा-तफरी जैसी स्थिति बन गई। यह पूरा घटनाक्रम कैमरे में कैद हो गया और बाद में सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, जिससे यह मामला और चर्चा में आ गया। स्थिति बिगड़ती देख गोविंदा खुद आगे आए और उन्होंने दोनों पक्षों को शांत करने की कोशिश की। उन्होंने हाथ जोड़कर सभी से शांति बनाए रखने की अपील की और माहौल को नियंत्रित करने का प्रयास किया। उनका शांत और संयमित व्यवहार देखकर वहां मौजूद लोग भी धीरे-धीरे शांत हो गए और स्थिति सामान्य होने लगी। बताया जा रहा है कि उन्होंने मौके पर ही अपील करते हुए कहा कि विवाद को आगे न बढ़ाया जाए और कार्यक्रम को शांतिपूर्ण तरीके से समाप्त किया जाए। इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर भी इस पूरे मामले को लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कुछ लोगों ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए, तो कुछ ने पैपराजी और सुरक्षा कर्मियों के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत बताई। वहीं कई लोगों ने गोविंदा के शांत रवैये की सराहना की और कहा कि उन्होंने स्थिति को बिगड़ने से बचा लिया। वर्कफ्रंट की बात करें तो गोविंदा जल्द ही एक नए टेलीविजन प्रोजेक्ट में नजर आने वाले हैं, जिसमें वह एक लोकप्रिय शो का हिस्सा बनकर अपनी मौजूदगी दर्ज कराएंगे। इस शो में उनका पारिवारिक जुड़ाव भी देखने को मिलेगा, जहां वह अपनी बेटी के समर्थन में नजर आ सकते हैं। हालांकि, इवेंट में हुआ यह विवाद अब उनके हालिया सार्वजनिक उपस्थितियों के साथ चर्चा में जुड़ गया है और लोगों के बीच यह घटना काफी तेजी से वायरल हो रही हैनई दिल्ली ।

चेहरे पर चोट के निशान से सनसनी: झाबुआ में युवक की मौत की जांच शुरू

मध्य प्रदेश। झाबुआ जिले के पेटलावद क्षेत्र में सोमवार को उस समय सनसनी फैल गई जब करवड़ थाना इलाके के चवरापाड़ा के पास बामन जीरी क्षेत्र में एक युवक का शव पगडंडी मार्ग पर पड़ा मिला। शव की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण कर जांच शुरू की। मृतक की पहचान चंवरापाड़ा मोर पंचायत निवासी शांतिलाल पिता वेलजी पारगी के रूप में हुई है। युवक का शव सुनसान पगडंडी पर पड़ा मिलने से आसपास के ग्रामीणों में दहशत का माहौल बन गया। पुलिस जांच में सामने आया है कि मृतक के चेहरे पर गंभीर चोटों के निशान पाए गए हैं, जिससे शुरुआती तौर पर हत्या की आशंका जताई जा रही है। पुलिस का मानना है कि युवक पर किसी धारदार हथियार या भारी पत्थर से हमला किया गया हो सकता है। हालांकि, घटना के वास्तविक कारणों की पुष्टि अभी नहीं हो सकी है। घटना की जानकारी मिलते ही करवड़ थाना पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव का पंचनामा तैयार किया और उसे पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भेज दिया। पुलिस ने मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है और सभी संभावित पहलुओं को ध्यान में रखते हुए छानबीन की जा रही है। थाना प्रभारी के अनुसार, मौत के सही कारणों का खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगा। इसके बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि युवक की हत्या की गई है या फिर कोई अन्य कारण सामने आता है। फिलहाल पुलिस आसपास के लोगों से पूछताछ कर सुराग जुटाने में लगी हुई है। घटना के बाद क्षेत्र में भय और चर्चा का माहौल है, जबकि परिजन सदमे में हैं। पुलिस का कहना है कि जल्द ही मामले की सच्चाई सामने लाई जाएगी और यदि हत्या की पुष्टि होती है तो आरोपियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

पीएम मोदी से सवाल पर विवाद: नॉर्वे की पत्रकार हेले लिंग ने कहा- मैं विदेशी जासूस नहीं, पत्रकारिता करना अपराध नहीं

नई दिल्ली। नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पूछे गए एक सवाल को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। इस घटना के बाद नॉर्वे की पत्रकार हेले लिंग सोशल मीडिया पर आलोचना और आरोपों के घेरे में आ गईं, जिसके बाद उन्होंने सार्वजनिक रूप से सफाई दी है। हेले लिंग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कई पोस्ट करते हुए स्पष्ट किया कि वह किसी भी तरह की “विदेशी जासूस” नहीं हैं और उनका काम केवल पत्रकारिता करना है। उन्होंने कहा कि पत्रकार का दायित्व सत्ता में बैठे लोगों से सीधे सवाल पूछना होता है, चाहे वह सवाल टकराव पैदा करने वाले ही क्यों न हों। उनके अनुसार, पत्रकारों को पहले से तैयार जवाबों को बिना सवाल किए स्वीकार नहीं करना चाहिए, बल्कि सच्चाई सामने लाने के लिए कठिन सवाल पूछना उनका अधिकार और जिम्मेदारी दोनों है। यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब ओस्लो में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोर की संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान हेले लिंग ने पीएम मोदी से कुछ सवाल पूछे। सवालों की प्रकृति और पूछने के तरीके को लेकर वहां मौजूद कुछ लोगों और बाद में सोशल मीडिया पर उनकी आलोचना शुरू हो गई। इसके बाद भारतीय विदेश मंत्रालय की ओर से भी प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्थिति स्पष्ट की गई और भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था, मीडिया की स्वतंत्रता और संवैधानिक अधिकारों पर जोर दिया गया। Tried to ask PM Modi a question on the way to the elevator to, but the closing doors stopped me. What I was wondering was whether he thinks he deserves the trust of the Nordic countries given his human rights violations and his restrictions on press freedom. pic.twitter.com/W2HFFNcCKh — Helle Lyng (@HelleLyngSvends) May 18, 2026 विवाद बढ़ने के बाद हेले लिंग ने एक पोस्ट में लिखा कि उन्हें कभी नहीं लगा था कि उन्हें यह स्पष्ट करना पड़ेगा कि वह किसी विदेशी सरकार की एजेंट या जासूस नहीं हैं। उन्होंने कहा कि वह मुख्य रूप से नॉर्वे में पत्रकारिता करती हैं और उनका उद्देश्य केवल मानवाधिकार, लोकतंत्र और शासन व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर सवाल उठाना है। उन्होंने यह भी बताया कि प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उनसे जुड़े वीडियो पर कुछ समय बाद कमेंट्स बंद कर दिए गए, लेकिन इससे पहले ही उनके सवालों को लेकर ऑनलाइन बहस तेज हो चुकी थी। पत्रकार का कहना है कि अगर सार्वजनिक मंच पर नेताओं से सवाल पूछने का अवसर मिलता है तो पत्रकारों को अपनी भूमिका निभाने से रोका नहीं जाना चाहिए। I never thought I would have to write this, but I am not a foreign spy of any sort, sent out by any foreign government. My work is journalism, primarily in Norway now. — Helle Lyng (@HelleLyngSvends) May 18, 2026 इस पूरे मामले पर भारतीय पक्ष की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आई। प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद भारतीय राजनयिक ने कहा कि भारत एक बड़ा लोकतांत्रिक देश है जहां संवैधानिक अधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की मजबूत व्यवस्था है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत में विविध भाषाओं और क्षेत्रों में सैकड़ों मीडिया संस्थान सक्रिय हैं, जो देश के लोकतांत्रिक ढांचे को और मजबूत बनाते हैं। Primeminister of India, Narendra Modi, would not take my question, I was not expecting him to. Norway has the number one spot on the World Press Freedom Index, India is at 157th, competing with Palestine, Emirates & Cuba. It is our job to question the powers we cooperate… pic.twitter.com/vZHYZnAvev — Helle Lyng (@HelleLyngSvends) May 18, 2026 इस घटना ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पत्रकारिता की स्वतंत्रता, सवाल पूछने के अधिकार और राजनयिक संवाद की मर्यादाओं पर बहस छेड़ दी है।

तलाक के सालों बाद Harsh Chhaya का दर्द छलका, बोले- रिश्ता टूटने के बाद खुद को संभालने में लगा वक्त

नई दिल्ली । अभिनेता हर्ष छाया ने अपनी निजी जिंदगी को लेकर लंबे समय बाद खुलकर बात की है, जिसमें उन्होंने अपने और अभिनेत्री शेफाली शाह के बीच रिश्ते के टूटने के बाद के अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि समय के साथ उन्हें यह एहसास होने लगा था कि उनका वैवाहिक जीवन अब उस दिशा में नहीं जा रहा, जिसकी उन्होंने कभी उम्मीद की थी, और इसी वजह से उन्होंने मानसिक रूप से खुद को अलगाव के लिए तैयार करना शुरू कर दिया था। हर्ष छाया के अनुसार, रिश्ते के खत्म होने का फैसला आसान नहीं था, लेकिन परिस्थितियां ऐसी बनती गईं कि दोनों को अलग रास्ते चुनने पड़े। उन्होंने कहा कि समाज में तलाक को लेकर कई तरह की धारणाएं बनी हुई हैं, जबकि वास्तविकता यह है कि हर रिश्ता अलग परिस्थितियों और अनुभवों से गुजरता है। जब दो लोगों के बीच तालमेल खत्म हो जाता है, तो अलग होना भी एक स्वाभाविक निर्णय बन सकता है। अभिनेता ने यह भी स्वीकार किया कि तलाक के बाद उनके जीवन में भावनात्मक उतार-चढ़ाव का दौर आया। कभी उन्हें गहरा दुख महसूस हुआ, तो कभी गुस्सा और पछतावा भी सामने आया। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में भावनाओं को दबाने के बजाय उन्हें स्वीकार करना जरूरी होता है, क्योंकि इससे व्यक्ति धीरे-धीरे खुद को समझने और संभालने की दिशा में आगे बढ़ता है। इस कठिन दौर में उन्होंने खुद को व्यस्त रखने और नए लोगों से मिलने का रास्ता अपनाया। हर्ष छाया ने बताया कि उन्होंने डेटिंग को भी एक सामान्य प्रक्रिया की तरह लिया, जिससे उन्हें अपने जीवन में आगे बढ़ने और नए अनुभव हासिल करने का मौका मिला। उनके अनुसार, लोगों से बातचीत और सामाजिक जुड़ाव कठिन समय में मानसिक संतुलन बनाए रखने में मदद करता है। उन्होंने यह भी कहा कि उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण बात उनका काम रहा, जिसने उन्हें स्थिर रहने और आगे बढ़ने की ताकत दी। अभिनय और अपने करियर पर ध्यान केंद्रित करके उन्होंने निजी जीवन की परेशानियों को खुद पर हावी नहीं होने दिया। उनका मानना है कि जीवन में मुश्किल समय आता है, लेकिन उसे कैसे संभाला जाए, यह व्यक्ति की सोच और दृष्टिकोण पर निर्भर करता है। हर्ष छाया और शेफाली शाह की मुलाकात एक टेलीविजन प्रोजेक्ट के दौरान हुई थी, जहां दोनों के बीच दोस्ती की शुरुआत हुई और धीरे-धीरे यह रिश्ता शादी तक पहुंचा। हालांकि समय के साथ परिस्थितियां बदलीं और दोनों ने अलग होने का फैसला किया। अलगाव के बाद दोनों ने अपने-अपने जीवन में आगे बढ़ने का रास्ता चुना और आज दोनों अपने-अपने करियर और निजी जीवन में सक्रिय हैं।

सलमान खान ने ‘अकेलेपन’ वाली पोस्ट पर तोड़ी चुप्पी, बोले— “मम्मी भी पूछने लगीं क्या हुआ बेटा?”

नई दिल्ली । बॉलीवुड के सुपरस्टार Salman Khan एक बार फिर सोशल मीडिया पर चर्चा के केंद्र में आ गए हैं। हाल ही में उनकी एक पोस्ट ने फैंस के बीच हलचल मचा दी थी, जिसमें उन्होंने अकेलेपन और तन्हाई जैसे भावों का जिक्र किया था। इस पोस्ट के बाद इंटरनेट पर तरह-तरह की अटकलें लगाई जाने लगीं और कई लोगों ने उनकी मानसिक स्थिति को लेकर चिंता जताई। हालांकि अब सलमान खान ने खुद सामने आकर इस पूरे मामले पर स्थिति स्पष्ट कर दी है और बताया है कि उनकी बात को गलत तरीके से समझा गया। सलमान खान ने अपनी सफाई में कहा कि उनकी पोस्ट का उद्देश्य खुद के बारे में कुछ कहना नहीं था, बल्कि यह एक सामान्य विचार था जिसे लोगों ने व्यक्तिगत मान लिया। उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज में यह भी कहा कि उनके पास बड़ा परिवार और मजबूत दोस्ती का दायरा है, इसलिए उनके अकेले होने का सवाल ही नहीं उठता। उनकी इस प्रतिक्रिया ने सोशल मीडिया पर फैली अफवाहों को शांत करने का काम किया है और फैंस ने भी राहत की सांस ली है। अभिनेता ने यह भी साझा किया कि उनकी हालिया पोस्ट के बाद उनकी मां Salma Khan भी चिंतित हो गई थीं। उन्होंने मजाकिया अंदाज में बताया कि उनकी मां ने उनसे पूछा कि सब कुछ ठीक तो है न, जिससे यह साफ हो गया कि पोस्ट ने परिवार के भीतर भी हल्की चिंता पैदा कर दी थी। सलमान ने इस पूरे मामले को मुस्कुराते हुए संभाला और लोगों से अपील की कि वे बिना वजह किसी भी पोस्ट का गलत अर्थ न निकालें। यह पूरा घटनाक्रम तब शुरू हुआ जब सलमान खान ने अपनी एक तस्वीर के साथ एक भावनात्मक कैप्शन साझा किया था, जिसमें उन्होंने अकेलेपन और तन्हाई के बीच अंतर को समझाने की कोशिश की थी। पोस्ट सामने आते ही सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई और फैंस ने तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं देनी शुरू कर दीं। कई लोगों ने इसे गंभीर संकेत मान लिया, जबकि कुछ ने इसे एक विचारात्मक अभिव्यक्ति के रूप में देखा। वर्कफ्रंट की बात करें तो सलमान खान लगातार कई बड़े प्रोजेक्ट्स में व्यस्त हैं। वे आने वाले समय में एक्शन और ड्रामा से भरपूर फिल्मों में नजर आने वाले हैं, जिनमें उनके नए किरदारों को लेकर काफी उत्साह देखने को मिल रहा है। फिल्मी करियर के साथ-साथ उनकी सोशल मीडिया मौजूदगी भी अक्सर सुर्खियां बटोरती रहती है, जहां उनके हर पोस्ट को लेकर फैंस में खासा उत्साह देखने को मिलता है। इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह दिखाया है कि सेलिब्रिटी की छोटी-सी पोस्ट भी किस तरह बड़ी चर्चा का विषय बन सकती है। सलमान खान की सफाई के बाद अब यह मामला शांत होता दिख रहा है, लेकिन सोशल मीडिया पर उनकी इस पोस्ट और जवाब को लेकर चर्चा अभी भी जारी है।

भारत-नॉर्डिक समिट 2026: ओस्लो में PM मोदी की मौजूदगी से रणनीतिक साझेदारी को नई रफ्तार, 5 देशों के साथ बढ़ेगा सहयोग

नई दिल्ली। भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन का तीसरा संस्करण मंगलवार 19 मई 2026 को नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में आयोजित किया जा रहा है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भाग ले रहे हैं। इस उच्चस्तरीय बैठक में भारत के साथ पांच नॉर्डिक देश नॉर्वे, स्वीडन, डेनमार्क, फिनलैंड और आइसलैंड के शीर्ष नेता शामिल हो रहे हैं। इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य दोनों पक्षों के बीच व्यापार, तकनीक, ऊर्जा, जलवायु परिवर्तन, रक्षा सहयोग और सतत विकास जैसे क्षेत्रों में रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करना है। प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा कई मायनों में ऐतिहासिक मानी जा रही है, क्योंकि लगभग 43 साल बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री का नॉर्वे दौरा हुआ है। इससे पहले 1983 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने नॉर्वे का दौरा किया था। यह समिट पहले 2018 में स्टॉकहोम और 2022 में कोपेनहेगन में हो चुकी बैठकों की अगली कड़ी है, जिसमें लगातार भारत और नॉर्डिक देशों के बीच सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया है। यह सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है जब वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव, ऊर्जा संकट और आर्थिक अनिश्चितताएं बढ़ी हुई हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया में तनाव और वैश्विक व्यापार में बदलावों ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक रणनीति पर भी असर डाला है। ऐसे हालात में नॉर्डिक देशों के साथ भारत की साझेदारी को और महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बैठक में मुख्य रूप से ग्रीन एनर्जी, रिन्यूएबल एनर्जी, डिजिटल इनोवेशन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्लीन टेक्नोलॉजी और औद्योगिक सहयोग पर चर्चा होने की उम्मीद है। इसके साथ ही व्यापार बढ़ाने, निवेश को आसान बनाने और सप्लाई चेन को मजबूत करने जैसे मुद्दे भी एजेंडे में शामिल हैं। भारत और नॉर्डिक देशों के बीच वर्तमान में लगभग 19 अरब डॉलर का व्यापार होता है, जो भविष्य में और बढ़ने की संभावना है। नॉर्डिक क्षेत्र की कंपनियों की भारत में मजबूत उपस्थिति है, जिनमें नोकिया, वॉल्वो और IKEA जैसी बड़ी वैश्विक कंपनियां शामिल हैं। वहीं भारत की ओर से फार्मास्यूटिकल्स, टेक्सटाइल, आईटी सेवाएं और मशीनरी जैसे क्षेत्रों में निर्यात बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, नॉर्डिक देश अपने तकनीकी नवाचार, ग्रीन ट्रांजिशन और सस्टेनेबल डेवलपमेंट मॉडल के लिए दुनिया में अग्रणी हैं, जो भारत की विकास नीतियों के साथ मेल खाता है। कुल मिलाकर यह समिट भारत और नॉर्डिक देशों के बीच न केवल आर्थिक साझेदारी को नई दिशा देगा, बल्कि वैश्विक चुनौतियों के बीच एक स्थिर और टिकाऊ सहयोग मॉडल को भी मजबूत करेगा।

बकरीद से पहले बाजार गर्म: बकरों की कीमत 8 हजार से 1 लाख तक पहुंची

मध्य प्रदेश। बड़वानी जिले के पलसूद में ईद-उल-अजहा से पहले बकरा बाजार में रौनक बढ़ गई है। 28 मई को मनाए जाने वाले बकरीद पर्व को देखते हुए पशु बाजार में खरीदारों और व्यापारियों की भीड़ लगातार बढ़ रही है। कृषि उपज मंडी में लगे इस विशेष पशु बाजार में मंगलवार को बड़ी संख्या में लोग बकरों की खरीद-फरोख्त के लिए पहुंचे, जिससे पूरा माहौल उत्सव जैसा नजर आया। हालांकि बाजार में बढ़ती रौनक के बीच खरीदारों की चिंता भी साफ दिखाई दी, क्योंकि इस बार बकरों की कीमतों में पिछले साल की तुलना में भारी उछाल दर्ज किया गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जो बकरा पिछले वर्ष 10 से 15 हजार रुपए में आसानी से मिल जाता था, उसकी कीमत अब 20 से 30 हजार रुपए तक पहुंच गई है। वहीं अच्छी नस्ल और अधिक वजन वाले बकरों के दाम कई गुना बढ़कर आम लोगों की पहुंच से बाहर होते जा रहे हैं। बाजार में इस बार अलवरी, तोतापरी, सिरोही और अजमेरा नस्ल के बकरे बिक्री के लिए लाए गए हैं। इनकी कीमत 15 हजार रुपए से लेकर 1 लाख रुपए तक बताई जा रही है। व्यापारियों के अनुसार बकरों की कीमत उनके वजन, नस्ल और स्वास्थ्य पर निर्भर करती है, जिसके चलते अच्छी क्वालिटी वाले पशुओं की मांग काफी बढ़ गई है। पलसूद, सेंधवा और बड़वानी के पशु बाजारों में त्योहार नजदीक आने के साथ खरीदारी तेज हो गई है। स्थानीय व्यापारियों के अलावा महाराष्ट्र सहित आसपास के राज्यों से भी खरीदार यहां पहुंच रहे हैं। बाजार में बड़े और भारी भरकम बकरे लोगों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं, जहां हर कोई अपनी जरूरत और बजट के अनुसार पशु खरीदने की कोशिश कर रहा है। खरीदारों का कहना है कि इस बार दाम पिछले साल की तुलना में लगभग दोगुने हो गए हैं, जिससे आम लोगों के बजट पर असर पड़ा है। इसके बावजूद बकरीद को लेकर उत्साह कम नहीं हुआ है और लोग अपनी क्षमता के अनुसार पशुओं की खरीदारी में जुटे हैं।

खतरों के खिलाड़ी में एंट्री से पहले ओरी का मजेदार खुलासा, बोले- यही मेरा पहला और आखिरी रियलिटी शो है

नई दिल्ली । सोशल मीडिया पर अपनी अलग पहचान बनाने वाले ओरी अब रियलिटी टेलीविजन की दुनिया में कदम रखने जा रहे हैं। वह जल्द ही स्टंट बेस्ड लोकप्रिय शो में नजर आएंगे, जिसे लेकर उन्होंने अपने अंदाज में एक ऐसा बयान दिया है जिसने दर्शकों का ध्यान खींच लिया है। ओरी का कहना है कि यह शो उनके लिए सिर्फ एक शुरुआत नहीं बल्कि एक तरह का अंतिम अनुभव भी हो सकता है। एक बातचीत के दौरान ओरी ने खुद को मजाकिया अंदाज में ‘रियलिटी शो वर्जिन’ बताया और कहा कि यह उनका पहला वास्तविक रियलिटी शो अनुभव होगा। उन्होंने यह भी जोड़ा कि इससे पहले वह केवल एक दिन के लिए एक अन्य रियलिटी शो का हिस्सा बने थे, इसलिए वह उसे वास्तविक अनुभव नहीं मानते। इस बार वह पूरी तरह से एक नए माहौल और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों का सामना करने के लिए तैयार हैं। ओरी ने अपने आने वाले शो को लेकर उत्साह जताते हुए कहा कि वह इस अनुभव को लेकर काफी उत्साहित हैं। उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज में यह भी बताया कि उन्होंने शो की तैयारी के तौर पर कई व्यक्तिगत तैयारियां की हैं, जिससे यह साफ झलकता है कि वह इस चुनौती को हल्के में नहीं ले रहे। उनका कहना था कि यह अनुभव उन्हें यह समझने का मौका देगा कि वह असल में कितने डर का सामना कर सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि रियलिटी शो में अक्सर लोग अपने डर पर काबू पाने के लिए आते हैं, लेकिन उनके लिए यह एक अलग तरह की यात्रा होगी। उनके अनुसार यह शो उन्हें खुद को और बेहतर तरीके से जानने का अवसर देगा। उनका मानना है कि असली परीक्षा शो के दौरान ही सामने आएगी, जब उन्हें अलग-अलग परिस्थितियों और टास्क का सामना करना होगा। ओरी का यह बयान सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है, क्योंकि उनके अंदाज में हमेशा हल्का-फुल्का और मनोरंजक टच देखने को मिलता है। इस बार भी उन्होंने अपने स्टाइल में इसे एक मजेदार अनुभव के रूप में पेश किया है, जिसमें आत्मविश्वास और उत्साह दोनों साफ दिखाई देते हैं।

बड़वानी में कृषि संकट: फसल की कीमत कम, पशुओं को खिलाने को मजबूर किसान

मध्य प्रदेश। बड़वानी जिले में इस बार बैगन उत्पादक किसानों की हालत बेहद खराब हो गई है। जिसे कभी नकदी फसल माना जाता था, वही बैगन आज किसानों के लिए घाटे का सौदा बन चुका है। हालात ऐसे हैं कि कई किसानों को अपनी मेहनत से उगाई गई फसल खेतों में छोड़नी पड़ रही है या फिर ट्रैक्टरों में भरकर गौशालाओं में पशुओं को खिलाना पड़ रहा है। कीमतों में भारी गिरावट के चलते किसानों की लागत भी पूरी नहीं हो पा रही है। जिले में बैगन की बंपर पैदावार हुई है, लेकिन यही अधिक उत्पादन किसानों के लिए मुसीबत बन गया है। पिछले लगभग 20 दिनों से मंडियों में बैगन के दाम लगातार गिरते जा रहे हैं। शुरुआती उम्मीद 10 से 12 रुपए प्रति किलो की थी, लेकिन अब हालात यह हैं कि व्यापारी 1 रुपए प्रति किलो पर भी खरीदने को तैयार नहीं हैं। कई जगह तो खरीददार ही नहीं मिल रहे। ग्राम करी के किसान दीपक गेहलोद ने चार एकड़ में बैगन की खेती की थी। उन्होंने बताया कि प्रति एकड़ लगभग 35 से 40 हजार रुपए की लागत आई थी। कुल मिलाकर 1.5 लाख रुपए से अधिक का खर्च बीज, खाद, दवा और मजदूरी में हो गया। लेकिन बाजार में गिरते भाव के कारण अब हालत यह है कि फसल तोड़ने और मंडी तक ले जाने का खर्च भी नहीं निकल रहा। स्थिति इतनी खराब हो गई है कि कई किसान बैगन की तुड़ाई ही बंद कर चुके हैं। कुछ किसान खेतों में सड़ती फसल देखकर उसे पशुओं के चारे के रूप में इस्तेमाल करने को मजबूर हैं। ग्रामीण इलाकों में ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से बैगन गौशालाओं तक पहुंचाए जा रहे हैं, जहां उन्हें गायों के लिए चारा बनाया जा रहा है। स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि इस बार लोकल उत्पादन ज्यादा होने और बाहरी मंडियों में भी सप्लाई बढ़ने के कारण कीमतें गिर गई हैं। कई सौदे पहले ही खड़ी फसल में तय हो जाते हैं, जिससे आगे बाजार में मांग कम रह जाती है और रेट और नीचे चले जाते हैं। कृषि विभाग के अनुसार, इस वर्ष मौसम अनुकूल रहने के कारण बैगन का उत्पादन पिछले साल की तुलना में लगभग 30 प्रतिशत अधिक हुआ है। लेकिन मांग के मुकाबले सप्लाई बढ़ने से बाजार पूरी तरह असंतुलित हो गया है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि किसानों को एक ही फसल पर निर्भर रहने के बजाय विविधीकरण अपनाना चाहिए। साथ ही एफपीओ और प्रोसेसिंग यूनिट्स से सीधे जुड़कर बिक्री करनी चाहिए, ताकि बिचौलियों पर निर्भरता कम हो और उचित दाम मिल सकें। फिलहाल बड़वानी के किसान सरकार से हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं। उनकी मांग है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य तय किया जाए या फिर निर्यात को बढ़ावा देकर बाजार में संतुलन बनाया जाए। यदि ऐसा नहीं हुआ तो आने वाले सीजन में बैगन की खेती से किसान और दूर हो सकते हैं।