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Vat Savitri Vrat 2026: पूजा में बांस के पंखे का धार्मिक महत्व जानिए

नई दिल्ली। ज्येष्ठ अमावस्या के दिन मनाया जाने वाला वट सावित्री व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है। इस दिन महिलाएं पति की लंबी आयु और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना से व्रत रखती हैं और वट वृक्ष की पूजा करती हैं। इस पूजा में कई प्रकार की सामग्री का उपयोग किया जाता है, लेकिन बांस से बना पारंपरिक हाथ पंखा, जिसे कई जगह ‘बेना’ कहा जाता है, विशेष महत्व रखता है। सत्यवान-सावित्री कथा से जुड़ा है संबंधधार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जब सावित्री अपने पति सत्यवान के प्राण वापस लाने के लिए यमराज के पीछे-पीछे जा रही थीं, तब ज्येष्ठ महीने की भीषण गर्मी में सत्यवान का शरीर निढाल हो गया था। कथा के अनुसार, सावित्री ने बांस के हाथ पंखे से उन्हें हवा देकर राहत पहुंचाई थी। तभी से वट सावित्री व्रत में बांस के पंखे का उपयोग परंपरा का हिस्सा बन गया। पूजा में क्यों खरीदे जाते हैं दो पंखे?मान्यता है कि वट सावित्री व्रत के दौरान महिलाएं दो बांस के पंखे खरीदती हैं। पूजा के बाद इन पंखों को दान किया जाता है। धार्मिक विश्वास है कि इससे अखंड सौभाग्य, सुख-समृद्धि और परिवार में खुशहाली बनी रहती है। पूजा के दौरान पंखे को सेवा, समर्पण और पति-पत्नी के अटूट प्रेम का प्रतीक भी माना जाता है। पंखा दान को माना गया है महादानशास्त्रों में ज्येष्ठ माह की तपती गर्मी में पंखा दान करना बेहद पुण्यकारी बताया गया है। विशेष रूप से बांस का पंखा दान करने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है और जरूरतमंदों को राहत मिलती है। इसी वजह से वट सावित्री व्रत की पूजा के बाद महिलाएं पंखा दान करने की परंपरा निभाती हैं। बांस को माना जाता है वंश वृद्धि का प्रतीकहिंदू धर्म में बांस को शुभ और वंश वृद्धि का प्रतीक माना जाता है। इसलिए बांस से बने पंखे का उपयोग केवल धार्मिक परंपरा नहीं बल्कि परिवार की खुशहाली, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा से भी जुड़ा माना जाता है।

Vat Savitri Vrat 2026: घर के पास वट वृक्ष नहीं? जानिए आसान पूजा विधि

नई दिल्ली। वट सावित्री व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता है कि देवी सावित्री ने अपने पति सत्यवान के प्राण वट वृक्ष के नीचे ही यमराज से वापस प्राप्त किए थे। इसी कारण ज्येष्ठ अमावस्या के दिन बरगद यानी वट वृक्ष की पूजा विशेष रूप से की जाती है। इस वर्ष वट सावित्री व्रत 16 मई 2026 को मनाया जा रहा है। इस दिन महिलाएं पति की लंबी आयु और सुख-समृद्धि की कामना से व्रत रखती हैं। घर के पास बरगद का पेड़ न हो तो क्या करें?आजकल शहरों और हाईराइज सोसायटियों में बरगद के पेड़ आसानी से नहीं मिलते। ऐसे में महिलाएं पूजा को लेकर परेशान हो जाती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यदि आसपास वट वृक्ष न हो तो व्रत से एक दिन पहले बरगद की छोटी टहनी लाकर उसे गमले में स्थापित किया जा सकता है। इसके बाद उसी टहनी के पास देवी सावित्री, सत्यवान और यमराज की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित कर विधिपूर्वक पूजा की जा सकती है। मान्यता है कि श्रद्धा और नियमपूर्वक की गई पूजा का पूरा फल प्राप्त होता है। ऐसे करें वट सावित्री पूजापूजा के दौरान सबसे पहले वट वृक्ष या उसकी टहनी को जल और दूध अर्पित करें। इसके बाद रोली, हल्दी, अक्षत और फूल चढ़ाएं। फिर कच्चा सूत लेकर वट वृक्ष की सात बार परिक्रमा करें और पति की लंबी आयु की कामना करें। पूजा के बाद वट सावित्री व्रत कथा सुनना भी शुभ माना जाता है। पूजा के समय जरूर बोलें यह मंत्रबरगद की पूजा करते समय इस मंत्र का जाप करना शुभ माना गया है-“मम सौभाग्यं देहि, आयुष्यम् आरोग्यं देहि मे।पतिसुखं च देहि त्वं, वटवृक्ष नमोऽस्तु ते॥” मान्यता है कि इस मंत्र के जाप से वैवाहिक जीवन में सुख-शांति बनी रहती है और अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

सेबी की बड़ी राहत: ज्यादा लीवरेज वाले InvITs के उधारी नियम आसान

नई दिल्ली। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट्स (इनविट्स) के लिए उधारी नियमों में महत्वपूर्ण राहत देने का फैसला किया है। नए नियमों के तहत अब ऐसे इनविट्स भी अतिरिक्त कर्ज ले सकेंगे, जिनका लीवरेज उनकी कुल एसेट वैल्यू के 49 प्रतिशत से अधिक है। सेबी का यह कदम इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में वित्तीय लचीलापन बढ़ाने और परियोजनाओं के लिए पूंजी उपलब्धता को मजबूत करने के उद्देश्य से उठाया गया है। माना जा रहा है कि इससे सड़क, परिवहन और अन्य बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को गति मिलेगी। पूंजीगत खर्च और क्षमता विस्तार के लिए मिलेगी मदसेबी द्वारा जारी सर्कुलर के अनुसार, अतिरिक्त उधारी का उपयोग पूंजीगत खर्चों के लिए किया जा सकेगा। इन खर्चों में परिसंपत्तियों के प्रदर्शन को बेहतर बनाना, क्षमता विस्तार करना और इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को मजबूत करना शामिल है। नियामक ने सड़क इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के लिए बड़े रखरखाव कार्यों पर होने वाले खर्चों को भी इस राहत के दायरे में शामिल किया है। ऐसे रखरखाव कार्य, जो सामान्य मरम्मत से अलग और कंसेशन एग्रीमेंट के तहत जरूरी होते हैं, अब अतिरिक्त कर्ज के जरिए पूरे किए जा सकेंगे। सड़क परियोजनाओं को होगा सबसे ज्यादा फायदाविशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से सड़क क्षेत्र से जुड़े इनविट्स को सबसे अधिक लाभ मिलेगा। इन परियोजनाओं में समय-समय पर बड़े स्तर पर मरम्मत और रखरखाव की जरूरत होती है, जिसके लिए भारी फंडिंग की आवश्यकता पड़ती है। सेबी ने स्पष्ट किया है कि बड़े रखरखाव खर्च में केवल वही कार्य शामिल होंगे, जो सामान्य संचालन और नियमित रखरखाव से अलग हों और अनुबंध के तहत अनिवार्य हों। रीफाइनेंसिंग को भी मिली मंजूरीसेबी ने इनविट्स, स्पेशल पर्पस व्हीकल्स (SPVs) और होल्डिंग कंपनियों को कुछ शर्तों के तहत मौजूदा कर्ज की रीफाइनेंसिंग की अनुमति भी दी है। हालांकि यह सुविधा केवल मूल कर्ज राशि तक सीमित रहेगी। नियामक ने साफ किया कि जमा ब्याज, जुर्माना, फीस या अन्य शुल्कों को रीफाइनेंसिंग में शामिल नहीं किया जाएगा। यानी केवल मूल कर्ज की राशि को ही नए कर्ज से बदला जा सकेगा। तुरंत लागू हुए नए नियमसेबी ने बताया कि यह संशोधित ढांचा 17 अप्रैल 2026 को इनविट नियमों में किए गए बदलावों के बाद लागू किया गया है और नए नियम तत्काल प्रभाव से प्रभावी हो गए हैं। माना जा रहा है कि इस फैसले से इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर को नई गति मिलेगी और इनविट्स को अपनी परिसंपत्तियों के विस्तार व रखरखाव में अधिक परिचालन स्वतंत्रता प्राप्त होगी।

इंस्टाग्राम पर एलन मस्क के बयान से विवाद, बोले- Instagram लड़कियों के लिए पुरुषों के प्रोफाइल पर टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर बवाल

नई दिल्ली। एलन मस्क एक बार फिर अपने सोशल मीडिया बयान को लेकर विवादों में घिर गए हैं। मस्क ने इंस्टाग्राम को लेकर टिप्पणी करते हुए कहा कि “Instagram लड़कियों के लिए है”, जिसके बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं शुरू हो गईं। मस्क ने एक वायरल ऑनलाइन चर्चा पर प्रतिक्रिया देते हुए यह टिप्पणी की। बाद में उन्होंने एक और पोस्ट में लिखा कि जब कोई “बड़ा आदमी” उन्हें अपना इंस्टाग्राम प्रोफाइल भेजता है, तो वह मजाक में सोचते हैं कि “क्या वह अपना जेंडर बदल रहा है?” इस बयान को लेकर कई यूजर्स ने आपत्ति जताई और इसे अपमानजनक बताया। सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में लोगों ने मस्क की टिप्पणी की आलोचना की, जबकि कुछ समर्थकों ने इसे उनके “हास्य” या “व्यंग्य” का हिस्सा बताया। कई यूजर्स ने यह भी कहा कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म किसी एक जेंडर तक सीमित नहीं होते। Obviously. Sometimes grown men send me their Instagram profiles and I’m like are you transitioning or what? — Elon Musk (@elonmusk) May 15, 2026 मस्क और मार्क जुकरबर्ग के बीच पहले से ही सार्वजनिक मतभेद रहे हैं। मस्क इससे पहले भी Meta के प्लेटफॉर्म्स, खासकर WhatsApp और Instagram, पर सवाल उठाते रहे हैं। And X is for the autists! We love the autists — Raq (@raqisright) May 15, 2026 फिलहाल मस्क की इस टिप्पणी पर Meta की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन सोशल मीडिया पर यह मुद्दा तेजी से ट्रेंड कर रहा है।एलन मस्क के “Instagram लड़कियों के लिए है” वाले बयान ने सोशल मीडिया पर नया विवाद खड़ा कर दिया है।पुरुषों के इंस्टाग्राम प्रोफाइल को लेकर की गई उनकी टिप्पणी पर कई यूजर्स ने नाराजगी जताई है।

अमेरिका में पेट्रोल पंपों के फ्यूल सिस्टम पर साइबर हमला, जांच एजेंसियों को ईरान समर्थित हैकर्स पर शक; ऊर्जा सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता

नई दिल्ली। अमेरिका के कई राज्यों में पेट्रोल पंपों के ऑटोमैटिक टैंक गेज (ATG) सिस्टम को निशाना बनाकर साइबर हमले किए जाने का मामला सामने आया है। जांच एजेंसियों को आशंका है कि इसके पीछे ईरान समर्थित हैकर समूह हो सकते हैं, हालांकि अब तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, हैकर्स ने उन डिजिटल सिस्टम्स में सेंध लगाई जो पेट्रोल पंपों में फ्यूल की मात्रा मापने और मॉनिटर करने के लिए इस्तेमाल होते हैं। शुरुआती जांच में पता चला है कि कई सिस्टम इंटरनेट से जुड़े थे और उनमें पर्याप्त पासवर्ड सुरक्षा मौजूद नहीं थी, जिससे हैकर्स को घुसपैठ का मौका मिला। अधिकारियों के अनुसार, कुछ मामलों में डिस्प्ले स्क्रीन पर दिखने वाले डेटा से छेड़छाड़ की गई, लेकिन फ्यूल की वास्तविक मात्रा या सप्लाई सिस्टम को प्रभावित नहीं किया जा सका। फिलहाल किसी बड़े हादसे या नुकसान की सूचना नहीं है। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि ऐसे सिस्टम पर पूरी तरह नियंत्रण हासिल कर लिया जाए तो गैस लीक, आग या बड़े औद्योगिक हादसों जैसी गंभीर स्थितियां पैदा हो सकती हैं। इसी वजह से इस घटना को अमेरिकी ऊर्जा ढांचे की सुरक्षा के लिहाज से बेहद गंभीर माना जा रहा है। जांच एजेंसियां इस मामले को अमेरिका-ईरान तनाव के मौजूदा दौर से भी जोड़कर देख रही हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान समर्थित साइबर समूह पहले भी तेल, गैस, पानी और मेडिकल सिस्टम जैसे महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को निशाना बनाते रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि हाल के वर्षों में ईरानी साइबर नेटवर्क की तकनीकी क्षमता काफी बढ़ी है और वे अब पारंपरिक युद्ध के बजाय साइबर हमलों को रणनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। अमेरिका के कई पेट्रोल पंपों के फ्यूल मॉनिटरिंग सिस्टम में साइबर घुसपैठ का मामला सामने आया है, जिसमें जांच एजेंसियों को ईरान समर्थित हैकर्स पर शक है।हालांकि कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ, लेकिन इस घटना ने अमेरिका की ऊर्जा और साइबर सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

मां बनने के बाद एक्ट्रेसेस को लेकर इंडस्ट्री की सोच पर बोलीं रुबीना दिलैक, कहा- मेकर्स मान लेते हैं कि अब जुनून और स्टैमिना कम हो गया

नई दिल्ली। टीवी अभिनेत्री रुबीना दिलैक ने मां बनने के बाद महिलाओं को एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में मिलने वाले व्यवहार को लेकर खुलकर बात की है। उन्होंने कहा कि आज भी इंडस्ट्री में ऐसी सोच मौजूद है, जहां नई मां बनी अभिनेत्रियों को कम सक्षम समझा जाता है। रुबीना के मुताबिक, कई मेकर्स यह मान लेते हैं कि बच्चे को जन्म देने के बाद एक्ट्रेस में पहले जैसा स्टैमिना, मेहनत करने की क्षमता और करियर को लेकर जुनून नहीं बचता। इसी वजह से कई महिलाओं को बड़े प्रोजेक्ट्स से दूर रखा जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि कई स्टडीज बताती हैं कि बड़ी संख्या में महिलाएं प्रेग्नेंसी के बाद दोबारा काम पर नहीं लौट पातीं, क्योंकि समाज और इंडस्ट्री दोनों ही उन्हें अलग नजर से देखने लगते हैं। रुबीना ने माना कि महिलाओं पर लगातार खुद को साबित करने का दबाव रहता है, लेकिन उन्होंने खुद को खुशकिस्मत बताया कि मां बनने के बाद भी उन्हें काम जारी रखने का मौका मिला। उन्होंने कहा कि वह अपनी यात्रा के जरिए दूसरी महिलाओं को यह संदेश देना चाहती हैं कि मातृत्व के बाद करियर खत्म नहीं होता।रुबीना दिलैक जल्द ही खतरों के खिलाड़ी के 15वें सीजन में नजर आने वाली हैं।

चीन-अमेरिका शक्ति संतुलन पर नई बहस, ट्रंप-शी मुलाकात के बाद बदले वैश्विक समीकरण; भारत की रणनीति पर बढ़ी चर्चा

नई दिल्ली। अमेरिका और चीन के बीच बढ़ती रणनीतिक प्रतिस्पर्धा को लेकर वैश्विक राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है। हालिया ट्रंप-शी जिनपिंग मुलाकात के बाद कई विश्लेषकों का मानना है कि दुनिया तेजी से बहुध्रुवीय व्यवस्था (Multipolar World) की ओर बढ़ रही है, जहां चीन अब अमेरिका को खुली चुनौती देता दिखाई दे रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बीजिंग यात्रा से यह संकेत मिला कि व्यापार, तकनीक और रणनीतिक मुद्दों पर अमेरिका चीन पर निर्णायक दबाव बनाने में अभी तक पूरी तरह सफल नहीं हो पाया है। वहीं शी जिनपिंग ने “थ्यूसीडाइड्स ट्रैप” का जिक्र कर यह संकेत देने की कोशिश की कि चीन खुद को अब उभरती वैश्विक शक्ति के रूप में देखता है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार यह भी मानते हैं कि अमेरिका का प्रभाव तुरंत खत्म होने वाला नहीं है। अमेरिका अब भी सैन्य, तकनीकी और वित्तीय रूप से दुनिया की सबसे प्रभावशाली शक्तियों में बना हुआ है, जबकि चीन को भी आर्थिक सुस्ती, सप्लाई चेन और जनसंख्या गिरावट जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। इस पूरे बदलते समीकरण में भारत की भूमिका को बेहद अहम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत आने वाले दशकों में अमेरिका और चीन के बीच संतुलन साधने वाली बड़ी शक्ति बन सकता है। यूरोप, रूस और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के साथ भारत के संबंध भी आने वाले समय में उसकी रणनीतिक स्थिति तय करेंगे। विदेश नीति विश्लेषकों के अनुसार, भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि वह अमेरिका और चीन दोनों के साथ अपने हितों का संतुलन बनाए रखते हुए आर्थिक और सामरिक रूप से खुद को मजबूत करे।

सोने-चांदी में जबरदस्त उछाल, एक हफ्ते में सोना ₹8 हजार से ज्यादा महंगा

नई दिल्ली। देश में सोने और चांदी की कीमतों में इस सप्ताह जबरदस्त उछाल देखने को मिला है। लगातार बढ़ती कीमतों ने निवेशकों और आम खरीदारों दोनों का ध्यान खींचा है। इंडिया बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन (आईबीजेए) के आंकड़ों के अनुसार, बीते एक हफ्ते में सोने की कीमत में 8 हजार रुपए से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जबकि चांदी भी रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुंच गई है। 24 कैरेट सोना 1.58 लाख रुपए के पारआईबीजेए के मुताबिक, 24 कैरेट सोने की कीमत बढ़कर 1,58,210 रुपए प्रति 10 ग्राम पहुंच गई है। पिछले सप्ताह इसी अवधि में इसकी कीमत 1,51,078 रुपए प्रति 10 ग्राम थी। यानी सिर्फ एक हफ्ते में सोना 8,132 रुपए प्रति 10 ग्राम महंगा हो गया। इसी तरह 22 कैरेट सोने का दाम बढ़कर 1,44,920 रुपए प्रति 10 ग्राम पहुंच गया, जो पहले 1,38,387 रुपए था। वहीं 18 कैरेट सोने की कीमत भी 1,13,309 रुपए से बढ़कर 1,18,658 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गई। चांदी ने भी दिखाई तेज चमकसोने के साथ-साथ चांदी की कीमतों में भी बड़ी तेजी दर्ज की गई है। एक हफ्ते में चांदी 12,900 रुपए प्रति किलो महंगी होकर 2,68,500 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गई। पिछले सप्ताह इसकी कीमत 2,55,600 रुपए प्रति किलो थी। हाजिर बाजार में चांदी ने 14 मई को सुबह के सत्र में 2,87,350 रुपए प्रति किलो का उच्चतम स्तर छुआ, जबकि सप्ताह का न्यूनतम भाव 11 मई को 2,55,300 रुपए प्रति किलो दर्ज किया गया। आयात शुल्क बढ़ने से बढ़े दामविशेषज्ञों के अनुसार, इस सप्ताह सोने और चांदी की कीमतों में आई तेज बढ़ोतरी की बड़ी वजह केंद्र सरकार द्वारा कीमती धातुओं पर आयात शुल्क बढ़ाना है। सरकार ने सेस सहित आयात शुल्क को 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया है, जिसका सीधा असर घरेलू बाजार पर दिखाई दे रहा है। आईबीजेए दिन में दो बार सुबह और शाम सोने और चांदी के दाम जारी करता है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि वैश्विक परिस्थितियों और आयात नीति के असर से आने वाले दिनों में कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।

ग्वादर पोर्ट को INSTC से जोड़ने पर रूस सहमत, पाकिस्तान-चीन को मिल सकती है रणनीतिक बढ़त; भारत की बढ़ी चिंता

नई दिल्ली। रूस ने पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट को इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) से जोड़ने की संभावना पर सकारात्मक रुख दिखाया है। रूस के उप प्रधानमंत्री एलेक्सी ओवरचुक ने कहा है कि मॉस्को और इस्लामाबाद लंबे समय से इस कनेक्टिविटी पर चर्चा कर रहे हैं, जिसमें रेलवे और व्यापारिक नेटवर्क भी शामिल हैं। ग्वादर पोर्ट, जिसे चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) के तहत विकसित किया गया है, अरब सागर और होर्मुज जलडमरूमध्य के करीब रणनीतिक रूप से बेहद अहम माना जाता है। यदि यह INSTC नेटवर्क से जुड़ता है, तो रूस, मध्य एशिया, पाकिस्तान और चीन के बीच व्यापारिक पहुंच और मजबूत हो सकती है। INSTC मूल रूप से भारत, रूस और ईरान की पहल है, जिसका उद्देश्य यूरोप और एशिया के बीच तेज और कम लागत वाला व्यापार मार्ग तैयार करना है। अब पाकिस्तान की संभावित एंट्री को क्षेत्रीय भू-राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव और CPEC को अतिरिक्त रणनीतिक मजबूती मिल सकती है। वहीं भारत के लिए यह चिंता का विषय इसलिए माना जा रहा है क्योंकि ग्वादर पोर्ट पहले से ही हिंद महासागर क्षेत्र में चीन-पाकिस्तान की बढ़ती मौजूदगी का प्रतीक माना जाता है। हालांकि, अभी इस परियोजना पर अंतिम समझौते या औपचारिक शामिल किए जाने की घोषणा नहीं हुई है, लेकिन रूस की सहमति को क्षेत्रीय शक्ति संतुलन के लिहाज से अहम संकेत माना जा रहा है।रूस ने पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट को INSTC कॉरिडोर से जोड़ने पर सकारात्मक रुख दिखाया है, जिससे चीन-पाकिस्तान की रणनीतिक स्थिति मजबूत हो सकती है।इस घटनाक्रम को भारत के लिए क्षेत्रीय प्रभाव और व्यापारिक हितों के लिहाज से नई चुनौती के तौर पर देखा जा रहा है।

टाटा ट्रस्ट्स की बोर्ड बैठक पर रोक, महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर का निर्देश

नई दिल्ली। टाटा समूह से जुड़े सर रतन टाटा ट्रस्ट के प्रशासनिक मामलों में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। महाराष्ट्र के चैरिटी कमिश्नर ने ट्रस्ट की प्रस्तावित अहम बोर्ड बैठक को स्थगित करने का निर्देश जारी किया है। यह फैसला ट्रस्ट की बोर्ड संरचना को लेकर मिली कथित नियम उल्लंघन संबंधी शिकायतों के बाद लिया गया है। इस निर्देश के बाद टाटा ट्रस्ट्स की ओर से बयान जारी कर कहा गया है कि आदेश एकतरफा (एक्स-पार्टी) तरीके से दिया गया है और केवल सर रतन टाटा ट्रस्ट पर लागू होता है। ट्रस्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि आदेश की समीक्षा की जा रही है और कानूनी पहलुओं को समझा जा रहा है। महत्वपूर्ण बैठक पर लगी रोकयह बैठक इसलिए भी बेहद अहम मानी जा रही थी क्योंकि इसमें टाटा संस से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा प्रस्तावित थी। इनमें कंपनी की संभावित लिस्टिंग, चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति और अन्य नॉमिनी डायरेक्टर्स से जुड़े मुद्दे शामिल थे। बैठक पहले 8 मई को होनी थी, जिसे बाद में 16 मई तक स्थगित किया गया था, लेकिन अब इसे फिर से टाल दिया गया है। जांच के घेरे में ट्रस्ट की संरचनामहाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर अमोघ एस. कालोटी के अनुसार, सर रतन टाटा ट्रस्ट के ट्रस्टी बोर्ड की संरचना को लेकर प्राप्त शिकायतों की जांच जारी है। आदेश में कहा गया है कि जब तक इंस्पेक्टर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं करता, तब तक किसी भी प्रकार की बोर्ड बैठक आयोजित नहीं की जा सकती। वकील कात्यायनी अग्रवाल द्वारा दायर शिकायत में भी इस मामले को उठाया गया है। उन्होंने 18 अप्रैल को चैरिटी कमिश्नर से हस्तक्षेप की मांग की थी और जांच पूरी होने तक सभी आगामी बैठकों पर रोक लगाने का अनुरोध किया था। ट्रस्टी संरचना पर उठे सवालजानकारी के अनुसार, सितंबर 2025 में लागू संशोधित नियमों के तहत किसी भी ट्रस्ट में स्थायी या आजीवन ट्रस्टियों की संख्या कुल बोर्ड के 25 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए। शिकायत में कहा गया है कि वर्तमान में ट्रस्ट में छह ट्रस्टी हैं, जिनमें जिमी नवल टाटा, जहांगीर एचसी जहांगीर और नोएल नवल टाटा जैसे आजीवन ट्रस्टी शामिल हैं, जिससे अनुपात नियमों के उल्लंघन का सवाल उठता है। सर रतन टाटा ट्रस्ट के पास टाटा संस में 23.6 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जो 180 अरब डॉलर से अधिक मूल्य वाले टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी है। ऐसे में यह मामला कॉरपोरेट और कानूनी दोनों स्तरों पर बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।