मंडला में स्वास्थ्य सिस्टम की पोल खुली, हाईकोर्ट में पहुंचा मामला-प्रसूति वार्ड में फर्श पर लेटती महिलाएं

नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के Jabalpur स्थित हाईकोर्ट में मंडला जिला अस्पताल की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर एक जनहित याचिका दायर की गई है, जिसने पूरे स्वास्थ्य तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। याचिका में आरोप लगाया गया है कि आदिवासी बहुल जिले में चिकित्सा सुविधाएं बेहद कमजोर हैं और मरीजों को बुनियादी इलाज तक नहीं मिल पा रहा है। याचिकाकर्ता के अनुसार मंडला जिले की आबादी करीब 10 लाख है, जिसमें अधिकांश लोग ग्रामीण और आदिवासी समुदाय से आते हैं, लेकिन जिला अस्पताल में डॉक्टरों की भारी कमी बनी हुई है। 42 स्वीकृत पदों के मुकाबले केवल 17 डॉक्टर ही वर्तमान में तैनात हैं। याचिका में यह भी बताया गया है कि कई अहम विशेषज्ञ पद वर्षों से खाली पड़े हैं। कार्डियोलॉजिस्ट, न्यूरोलॉजिस्ट, गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट, यूरोलॉजिस्ट और रेडियोलॉजिस्ट जैसे विशेषज्ञ डॉक्टरों की अनुपस्थिति के कारण गंभीर मरीजों को इलाज के लिए जबलपुर या नागपुर रेफर करना पड़ता है। रेडियोलॉजिस्ट न होने से सोनोग्राफी जैसी महत्वपूर्ण सेवाएं भी बाधित हैं, जिससे मरीजों को निजी केंद्रों पर महंगे परीक्षण कराने पड़ते हैं। सबसे चिंताजनक स्थिति प्रसूति वार्ड की बताई गई है, जहां बिस्तरों की कमी के कारण गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं को फर्श पर लेटने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। इसे याचिका में संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत गरिमापूर्ण जीवन के अधिकार का उल्लंघन बताया गया है। मामले की सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश Sanjeev Sachdeva और न्यायमूर्ति विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार, स्वास्थ्य विभाग और मंडला सीएमएचओ को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब देने का आदेश दिया है। अगली सुनवाई जून में होगी। याचिकाकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि स्थिति सुधारने के लिए कई बार प्रदर्शन और ज्ञापन दिए गए, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। कोर्ट में दायर याचिका में मांग की गई है कि प्रसूति वार्ड में तत्काल अतिरिक्त बिस्तरों की व्यवस्था की जाए, विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति समयबद्ध तरीके से हो और स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए। फिलहाल यह मामला न सिर्फ मंडला की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़ा कर रहा है, बल्कि पूरे राज्य की ग्रामीण स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति को भी उजागर कर रहा है।
NEET UG 2026 पेपर लीक: जांच में बड़ा खुलासा, 150 से ज्यादा छात्रों के नाम आए सामने

नई दिल्ली । देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET UG 2026 एक बड़े विवाद के केंद्र में आ गई है। पेपर लीक से जुड़े मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे नए और चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। ताजा जानकारी के अनुसार जांच एजेंसियों को अब तक 150 से अधिक अभ्यर्थियों की पहचान मिली है, जिन्हें कथित रूप से लीक हुआ प्रश्नपत्र उपलब्ध कराया गया था। जांच में यह संकेत मिले हैं कि यह पूरा मामला किसी एक जगह तक सीमित नहीं था, बल्कि एक सुनियोजित और संगठित नेटवर्क के माध्यम से इसे कई राज्यों में फैलाया गया। शुरुआती कड़ी महाराष्ट्र से जुड़ती नजर आई, जहां से प्रश्नपत्र के बाहर आने की बात सामने आई, जिसके बाद यह हरियाणा और अन्य राज्यों तक पहुंचा। सूत्रों के अनुसार, इस पूरे नेटवर्क में कई बिचौलियों की भूमिका भी सामने आई है, जिन्होंने प्रश्नपत्र को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने का काम किया। आरोप है कि डिजिटल माध्यमों और कुछ एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग सिस्टम के जरिए प्रश्नपत्र साझा किया गया, जिससे इसकी पहचान और ट्रैकिंग कठिन हो गई। जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ स्थानों पर छात्रों को परीक्षा की तैयारी के नाम पर ऐसे प्रश्न दिए गए, जो असली प्रश्नपत्र से काफी हद तक मेल खाते थे। कई मामलों में प्रश्नों की संरचना, भाषा और पैटर्न लगभग समान पाए गए, जिससे यह संदेह और मजबूत हुआ कि पेपर पहले से ही लीक हो चुका था। इसके अलावा, कुछ एजेंटों और मध्यस्थों की भूमिका भी जांच के घेरे में है, जो कथित रूप से छात्रों तक प्रश्नपत्र पहुंचाने और आर्थिक लेन-देन में शामिल थे। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह नेटवर्क कई स्तरों पर काम कर रहा था, जिसमें अलग-अलग राज्यों के लोग जुड़े हुए थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए परीक्षा को रद्द कर दिया गया है। इस निर्णय के बाद देशभर के लाखों छात्रों पर बड़ा असर पड़ा है, जिन्होंने महीनों तक इस परीक्षा की तैयारी की थी। परीक्षा रद्द होने से छात्रों में निराशा और नाराजगी दोनों देखने को मिल रही है। इसी बीच, मामला अब न्यायिक प्रक्रिया तक पहुंच गया है। परीक्षा को दोबारा कराने और पूरी प्रक्रिया की निगरानी किसी स्वतंत्र व्यवस्था के तहत करने की मांग की जा रही है। इसके साथ ही परीक्षा आयोजित करने वाली व्यवस्था की संरचना और कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। जांच एजेंसियां अब पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हैं और यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि पेपर सबसे पहले कैसे बाहर आया और किन-किन स्तरों पर इसे आगे बढ़ाया गया। कई स्थानों पर पूछताछ और कार्रवाई भी जारी है। यह पूरा मामला न केवल परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा पर सवाल खड़ा कर रहा है, बल्कि यह भी दिखा रहा है कि आधुनिक तकनीक के दौर में पेपर लीक जैसे मामलों को रोकना कितना चुनौतीपूर्ण हो गया है। अब सभी की नजरें आगे की जांच और अंतिम निष्कर्ष पर टिकी हुई हैं।
ग्वालियर मौसम बदला-बदला: रात में ठंडक, सुबह निकलते ही धूप और उमस ने बढ़ाई परेशानी

नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के Gwalior में मौसम ने एक बार फिर अचानक करवट ले ली है। कभी तेज बारिश और आंधी तो कभी चिलचिलाती धूप ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। बीते कुछ दिनों से शहर में मौसम का मिजाज लगातार बदल रहा है, जिसका सीधा असर आम जनजीवन और स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। मंगलवार शाम अचानक आई आंधी और बारिश के बाद रात के समय लोगों को हल्की राहत जरूर मिली, जब तापमान में गिरावट दर्ज की गई। न्यूनतम तापमान 26.8 डिग्री से घटकर 25.3 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। लेकिन यह राहत ज्यादा देर तक टिक नहीं सकी। बुधवार सुबह होते ही तेज धूप ने फिर से शहर को गर्मी की चपेट में ले लिया। हवा में लगभग 60 प्रतिशत नमी के कारण उमस और बढ़ गई, जिससे लोगों को भारी असहजता महसूस हुई। मौसम में इस बदलाव के चलते दिनभर बेचैनी का माहौल बना रहा। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि सुबह के कुछ ही घंटों में तापमान में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई। सुबह 5:30 बजे जहां तापमान 25.6 डिग्री था, वहीं 8:30 बजे तक यह बढ़कर 31.4 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। यह लगभग 5.8 डिग्री का उछाल दर्शाता है, जो मौसम में अस्थिरता का संकेत है।दिन के समय बढ़ती गर्मी का असर शहर की रफ्तार पर भी साफ दिखाई दे रहा है। दोपहर होते ही बाजारों और सड़कों पर सन्नाटा पसरने लगा है। लोग तेज धूप से बचने के लिए छाते, गमछे और पानी की बोतलों का सहारा ले रहे हैं। चिकित्सकों ने भी सलाह दी है कि दोपहर 12 बजे से 4 बजे के बीच अनावश्यक बाहर निकलने से बचें। मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दो दिनों तक मौसम शुष्क बना रह सकता है और तापमान में और वृद्धि होने की संभावना है। साथ ही लू जैसे हालात बनने की आशंका भी जताई गई है, जिससे लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है। फिलहाल मौसम का यह बदलता मिजाज लोगों के लिए राहत और परेशानी दोनों लेकर आ रहा है, जहां रात की ठंडक के बाद दिन की गर्मी चुनौती बनती जा रही है।
स्विमिंग पूल में डूबने से मासूम की मौत, ग्वालियर में दफनाने के बाद पोस्टमॉर्टम की उठी मांग

नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के Gwalior में एक दर्दनाक हादसे ने सभी को झकझोर दिया है, जहां एक होटल के स्विमिंग पूल में डूबने से 7 वर्षीय बच्चे वेद पाल की मौत हो गई। घटना गिरवाई थाना क्षेत्र स्थित एबी रोड के एक होटल में सोमवार रात हुई, जब परिवार डिनर और पूल पार्टी के लिए वहां पहुंचा था। जानकारी के अनुसार, बच्चा पहले बच्चों के पूल में खेल रहा था, लेकिन कुछ समय बाद वह अचानक वहां से गायब हो गया। तलाश के दौरान वह बड़े स्विमिंग पूल की गहराई में मिला, जिसके बाद परिजन उसे अस्पताल लेकर पहुंचे। डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। हादसे के बाद परिवार पूरी तरह सदमे में था और देर रात लगभग 1 बजे बच्चे का अंतिम संस्कार कर दिया गया। लेकिन अगले दिन मामला तब पलटा जब लोगों ने परिजनों को होटल प्रबंधन की संभावित लापरवाही के बारे में बताया। इसके बाद परिवार ने दोबारा मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस से संपर्क किया। परिजनों का आरोप है कि होटल में सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे और न ही लाइफगार्ड मौजूद था, जिसके कारण यह हादसा हुआ। इसी आधार पर उन्होंने शव को बाहर निकालकर पोस्टमॉर्टम कराने की मांग की है, ताकि घटना की वास्तविक वजह सामने आ सके। पुलिस ने मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। अब प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत दफनाए गए शव को कब्र से निकालकर पोस्टमॉर्टम कराया जाएगा, जो कि इस तरह का एक दुर्लभ मामला माना जा रहा है। घटना के बाद होटल की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। यह जांच का विषय है कि क्या स्विमिंग पूल के पास पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम, चेतावनी संकेत और निगरानी व्यवस्था मौजूद थी या नहीं। पुलिस का कहना है कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी और यदि लापरवाही साबित होती है तो संबंधित लोगों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।फिलहाल यह पूरा मामला जांच के दायरे में है और एक मासूम की मौत ने पूरे क्षेत्र को गम और सवालों से भर दिया है।
इंदौर में बड़ा मामला: पुलिस पर मारपीट का आरोप, शादी और तलाक विवाद में फंसा परिवार

नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के Indore में एक पारिवारिक विवाद अब पुलिस और एक डॉक्टर के बीच गंभीर टकराव में बदल गया है। हीरानगर थाना क्षेत्र में दहेज प्रताड़ना के एक मामले के बाद डॉक्टर अभिषेक ने पुलिसकर्मियों पर मारपीट के गंभीर आरोप लगाए हैं, जबकि पुलिस ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है। पूरा मामला एक महिला की शिकायत से शुरू हुआ, जिसमें उसने अपने पति और ससुराल पक्ष पर दहेज प्रताड़ना का आरोप लगाया था। महिला का कहना है कि उसकी शादी 29 नवंबर 2025 को हुई थी और शादी के कुछ ही दिनों बाद उसका पति नोएडा चला गया था। महिला ने आरोप लगाया कि ससुराल पक्ष उसे कार और पैसों के लिए प्रताड़ित करता था। महिला की शिकायत पर पुलिस ने उसके पति, जेठ (डॉक्टर अभिषेक), सास-ससुर सहित पूरे परिवार के खिलाफ दहेज प्रताड़ना का केस दर्ज कर लिया। इसके बाद पुलिस ने सभी पक्षों को पूछताछ के लिए थाने बुलाया था। इसी दौरान मामला तब और बढ़ गया जब डॉक्टर अभिषेक ने पुलिस पर ही मारपीट और दुर्व्यवहार के आरोप लगा दिए। उनका कहना है कि उन्हें थाने में बुलाकर उनके साथ गलत व्यवहार किया गया, जबकि पुलिस ने इन आरोपों को सिरे से नकार दिया है। थाना प्रभारी के अनुसार, पुलिस ने केवल कानूनी कार्रवाई के तहत पूछताछ की थी और आरोपों से बचने के लिए डॉक्टर झूठे आरोप लगा रहे हैं। पुलिस का कहना है कि सभी कार्रवाई नियमों के तहत की गई है और दहेज प्रताड़ना के मामले में पर्याप्त सबूतों के आधार पर FIR दर्ज हुई है। इस पूरे विवाद में एक और चौंकाने वाला पहलू सामने आया है, जिसमें महिला ने आरोप लगाया है कि उसका पति नोएडा में किसी अन्य युवक के साथ रह रहा है और वह उससे तलाक लेना चाहता है। वहीं, पूछताछ के दौरान डॉक्टर अभिषेक ने सीने में दर्द की शिकायत की, जिसके बाद पुलिस उन्हें अस्पताल भी ले गई, लेकिन जांच में उनकी स्थिति सामान्य पाई गई। फिलहाल दोनों पक्षों के आरोपों के बीच मामला और जटिल होता जा रहा है। पुलिस का कहना है कि सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और सच्चाई सामने आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
गोल्ड बना और महंगा, एक तोला खरीदने की लागत पहुंची नए रिकॉर्ड स्तर पर

नई दिल्ली । सोने की कीमतों में अचानक आई तेज बढ़ोतरी ने बाजार को एक बार फिर चौंका दिया है और आम खरीदारों की चिंता को बढ़ा दिया है। हाल ही में आयात शुल्क बढ़ाकर 15 प्रतिशत किए जाने के बाद घरेलू बाजार में सोने की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया है। इस फैसले के बाद शुरुआती कारोबार में ही दामों में लगभग 10 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम तक की तेजी देखी गई, जिसने पूरे ज्वैलरी बाजार की दिशा बदल दी। बाजार में यह तेजी ऐसे समय आई है जब शादी और त्योहारी सीजन की तैयारी जोरों पर है, और ऐसे में Gold की बढ़ती कीमतें आम लोगों के बजट पर सीधा असर डाल रही हैं। निवेशकों के साथ-साथ खुदरा खरीदार भी अब खरीदारी को लेकर अधिक सतर्क हो गए हैं क्योंकि दाम लगातार नए रिकॉर्ड स्तर की ओर बढ़ रहे हैं। कीमतों में इस तेजी का असर हर कैरेट के सोने पर देखने को मिल रहा है। 24 कैरेट सोना अब ऐतिहासिक स्तरों के करीब पहुंच चुका है, जबकि 22 कैरेट और 18 कैरेट ज्वैलरी की कीमतों में भी समान रूप से बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इससे साफ है कि केवल निवेश ही नहीं बल्कि आभूषण बाजार भी इस तेजी से प्रभावित हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस वृद्धि के पीछे केवल घरेलू नीतिगत बदलाव ही नहीं बल्कि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां भी जिम्मेदार हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनिश्चितता बढ़ने से निवेशक सुरक्षित विकल्प के रूप में सोने की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे मांग में तेजी आई है। इसके अलावा मुद्रा बाजार में उतार-चढ़ाव ने भी कीमतों को और ऊपर धकेल दिया है। सबसे बड़ा असर आम उपभोक्ताओं पर देखने को मिल रहा है, जहां अब एक तोला सोना खरीदना पहले की तुलना में कहीं अधिक महंगा हो गया है। भारतीय बाजार में एक तोला लगभग 11.66 ग्राम के बराबर माना जाता है और मौजूदा कीमतों के अनुसार इसका मूल्य करीब 1.90 लाख रुपये तक पहुंच गया है। इस स्तर पर पहुंचने के बाद कई लोग अपनी खरीदारी योजनाओं को टालने पर मजबूर हो रहे हैं। बाजार में यह स्थिति केवल कीमतों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर मांग पर भी पड़ सकता है। जैसे-जैसे कीमतें बढ़ती जा रही हैं, वैसे-वैसे ग्राहकों की खरीद क्षमता पर दबाव बढ़ रहा है। ज्वैलर्स का मानना है कि अगर यही रुझान जारी रहा तो आने वाले समय में आभूषणों की बिक्री में गिरावट देखने को मिल सकती है। हालांकि कुछ विश्लेषक यह भी मानते हैं कि इतनी तेज बढ़ोतरी के बाद बाजार में स्थिरता या हल्की गिरावट की संभावना भी बनी रहती है, लेकिन फिलहाल का माहौल पूरी तरह तेजी का संकेत दे रहा है। निवेशकों के लिए यह स्थिति अवसर और जोखिम दोनों साथ लेकर आई है।
डॉग फीडिंग के दौरान युवक पर हमला, इंदौर की घटना CCTV में रिकॉर्ड-पुलिस ने शुरू की कार्रवाई

नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के Indore के द्वारकापुरी इलाके में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहां बेसहारा कुत्तों को खाना खिला रहे एक वॉलंटियर अमन तोमर पर आधा दर्जन से अधिक लोगों ने हमला कर दिया। यह पूरी वारदात पास लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई है। जानकारी के अनुसार, पीड़ित अमन तोमर लंबे समय से इलाके में आवारा कुत्तों को भोजन कराने का काम कर रहे हैं। घटना उस समय हुई जब उन्होंने एक व्यक्ति को कुत्ते के साथ मारपीट करते हुए देखा और उसे रोकने की कोशिश की। इसी बात पर विवाद बढ़ गया और मामला हिंसक हो गया।आरोप है कि कुछ ही देर बाद कई लोग मौके पर पहुंचे और उन्होंने अमन तोमर पर हमला कर दिया। हमलावरों ने मिलकर युवक के साथ बेरहमी से मारपीट की, जिससे वह घायल हो गया। घटना के बाद स्थानीय पशु प्रेमियों ने पुलिस पर शुरुआती कार्रवाई में लापरवाही का आरोप लगाया और मामला पुलिस कमिश्नर कार्यालय तक पहुंचाया। इसके बाद People For Animals की इंदौर इकाई के प्रतिनिधियों सहित अन्य कार्यकर्ता भी शिकायत लेकर पहुंचे और उन्होंने पूरे मामले का सीसीटीवी फुटेज अधिकारियों को सौंपा। शिकायत के बाद पुलिस ने द्वारकापुरी थाने में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मारपीट का मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस का कहना है कि सीसीटीवी फुटेज के आधार पर हमलावरों की पहचान की जा रही है और जल्द ही कार्रवाई की जाएगी। पीड़ित का मेडिकल परीक्षण कराया गया है और उनकी हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है। वहीं, इस घटना ने इलाके में पशु सुरक्षा और नागरिकों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पहली बड़ी परीक्षा में सफल हुए थलापति विजय, TVK ने गठबंधन के दम पर हासिल किया बहुमत

नई दिल्ली ।तमिलनाडु की राजनीति में एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है, जहां फिल्मी दुनिया के सुपरस्टार से राजनेता बने थलापति विजय की पार्टी तमिलगा वेट्री कझगम यानी TVK ने अपनी पहली बड़ी परीक्षा सफलतापूर्वक पास कर ली है। लंबे समय से जिस फ्लोर टेस्ट को लेकर राजनीतिक हलचल बनी हुई थी, उसका परिणाम अब सामने आ चुका है और TVK ने 144 विधायकों के समर्थन के साथ बहुमत हासिल कर लिया है। यह पूरा घटनाक्रम राज्य की सत्ता समीकरणों में एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों में TVK ने 234 सदस्यीय सदन में 108 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनने का दर्जा हासिल किया था, लेकिन पूर्ण बहुमत से थोड़ी दूरी पर रह गई थी। इसके बाद गठबंधन की राजनीति ने अहम भूमिका निभाई और कई सहयोगी दलों के समर्थन से सरकार गठन की स्थिति बनी। फ्लोर टेस्ट के दौरान विधानसभा में राजनीतिक माहौल काफी तनावपूर्ण रहा। सत्ता पक्ष ने अपने समर्थन को मजबूत करते हुए सदन में संख्या बल साबित करने की कोशिश की, वहीं विपक्ष ने सरकार की स्थिरता पर सवाल उठाए। मतदान प्रक्रिया के दौरान कई अहम मोड़ देखने को मिले, जहां कुछ विधायकों के समर्थन ने समीकरण बदल दिए और TVK को स्पष्ट बढ़त मिल गई। वोटिंग के अंत में TVK को कुल 144 विधायकों का समर्थन प्राप्त हुआ, जो बहुमत के आंकड़े से काफी अधिक था। इस समर्थन में विभिन्न दलों की भूमिका महत्वपूर्ण रही, जिसने सरकार की स्थिति को मजबूत किया। दूसरी ओर विपक्षी दलों ने मतदान से दूरी बनाने का निर्णय लिया, जिससे राजनीतिक स्थिति और भी दिलचस्प बन गई। मुख्यमंत्री थलापति विजय ने सदन में अपने संबोधन में सहयोगी दलों का आभार जताया और कहा कि उनकी सरकार जनता से किए गए वादों को पूरा करने की दिशा में तेजी से काम करेगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार की प्राथमिकता विकास कार्यों और प्रशासनिक स्थिरता को बनाए रखना है। इस परिणाम के साथ थलापति विजय ने राजनीति में अपनी स्थिति को और मजबूत कर लिया है। फिल्मी पर्दे पर सफलता के बाद अब राजनीतिक मंच पर उनकी यह जीत उनके करियर का एक नया अध्याय मानी जा रही है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि TVK सरकार इस समर्थन को कितनी मजबूती से बनाए रखती है और राज्य की राजनीति में कितना प्रभाव डालती है।
चीन दौरे से पहले ट्रंप का बड़ा बयान, कहा- ईरान संकट सुलझाने में शी जिनपिंग की जरूरत नहीं

नई दिल्ली । अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप आज तीन दिवसीय चीन दौरे पर रवाना हो रहे हैं। इस यात्रा के दौरान उनकी चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ कई अहम वैश्विक मुद्दों पर द्विपक्षीय बातचीत होगी। हालांकि बीजिंग रवाना होने से पहले ट्रंप ने ईरान को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि ईरान संकट को हल करने के लिए उन्हें शी जिनपिंग की किसी मदद की जरूरत नहीं है। ट्रंप ने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि ईरान को अब सही रास्ता चुनना होगा, नहीं तो गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। चीन दौरे पर हाई-प्रोफाइल डेलिगेशन13 से 15 मई तक चलने वाले इस दौरे में ट्रंप के साथ अमेरिका का एक बड़ा प्रतिनिधिमंडल भी चीन जा रहा है। इसमें उनके परिवार के सदस्य एरिक ट्रंप और लारा ट्रंप के अलावा कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। डेलिगेशन में विदेश मंत्री मार्को रुबियो, रक्षा से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी पीट हेगसेथ, और अन्य कूटनीतिक व सुरक्षा सलाहकार जैसे जेमीसन ग्रीर, स्टीफन मिलर, स्टीवन चेउंग, जेम्स ब्लेयर और अन्य प्रमुख नाम शामिल हैं। ईरान मुद्दा प्राथमिकता में नहींरॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि चीन में शी जिनपिंग के साथ उनकी बातचीत का मुख्य फोकस ईरान मुद्दा नहीं होगा, हालांकि इस पर चर्चा जरूर होगी। ट्रंप ने दावा किया कि ईरान की सैन्य क्षमता कमजोर हो चुकी है और किसी भी समझौते का उद्देश्य अमेरिका और ईरान दोनों देशों के हित में होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि “हम सिर्फ अच्छी डील करेंगे।” रूस-यूक्रेन युद्ध पर दावाट्रंप ने यह भी दावा किया कि रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध जल्द ही समाप्त होने की दिशा में है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में वैश्विक हालात में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि चीन दौरे के दौरान ट्रंप और शी जिनपिंग की मुलाकात से वैश्विक राजनीति और खासकर ईरान संकट पर क्या नई दिशा निकलती है।
केरल का 1000 साल पुराना शिव मंदिर, जहां ‘घी’ आज भी नहीं पिघलता, न खराब होता

नई दिल्ली: केरल के त्रिशूर शहर में स्थित वडक्कुनाथन मंदिर भगवान शिव को समर्पित एक प्राचीन और प्रसिद्ध तीर्थस्थल है। यह मंदिर अपनी ऐतिहासिकता, अनोखी वास्तुकला और गहरी धार्मिक आस्थाओं के लिए दुनिया भर में जाना जाता है। एक छोटी पहाड़ी पर स्थित यह मंदिर हरियाली और शांत वातावरण से घिरा हुआ है, जहां पहुंचते ही श्रद्धालुओं को विशेष आध्यात्मिक शांति का अनुभव होता है। हर साल यहां लाखों भक्त और पर्यटक दर्शन के लिए पहुंचते हैं। प्रसिद्ध त्रिशूर पूरम उत्सव का केंद्र भी यही मंदिर माना जाता है। भगवान परशुराम से जुड़ी मान्यतापौराणिक कथाओं के अनुसार इस मंदिर की स्थापना भगवान परशुराम ने की थी। मान्यता है कि केरल भूमि के निर्माण के बाद उन्होंने यहां भगवान शिव की आराधना की परंपरा शुरू करवाई थी। इतिहासकारों के अनुसार यह मंदिर 1000 साल से भी अधिक पुराना है, हालांकि समय-समय पर इसका पुनर्निर्माण और मरम्मत भी होती रही है। मंदिर की बनावट पारंपरिक केरल शैली में है, जिसमें लकड़ी की नक्काशी और तांबे की छत इसकी खास पहचान है। सदियों पुरानी परंपरा: शिवलिंग पर घी अर्पणवडक्कुनाथन मंदिर की सबसे चर्चित मान्यता यहां स्थापित शिवलिंग से जुड़ी है। कहा जाता है कि सदियों से यहां प्रतिदिन घी चढ़ाया जाता है और वह कभी खराब नहीं होता। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि लंबे समय तक घी चढ़ाए जाने के बावजूद यह न तो पिघलता है और न ही उसमें कोई दुर्गंध आती है। श्रद्धालु इसे भगवान शिव का चमत्कार मानते हैं और आस्था के साथ पूजा-अर्चना करते हैं। धार्मिक और सांस्कृतिक महत्वयह मंदिर सिर्फ धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि केरल की सांस्कृतिक विरासत का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। सुबह और शाम की आरती के दौरान यहां का वातावरण मंत्रोच्चार, ढोल-नगाड़ों और भक्तिमय माहौल से गूंज उठता है। त्रिशूर पूरम के दौरान मंदिर परिसर भव्य सजावट और हाथियों की शोभायात्रा से और भी आकर्षक बन जाता है। कैसे पहुंचेवडक्कुनाथन मंदिर पहुंचने के लिए केरल के त्रिशूर शहर जाना होता है, जहां यह मंदिर शहर के केंद्र में स्थित है। नजदीकी रेलवे स्टेशन त्रिशूर रेलवे स्टेशन है और सबसे निकटतम हवाई अड्डा कोच्चि इंटरनेशनल एयरपोर्ट है। वहां से टैक्सी और बस की सुविधा आसानी से उपलब्ध है। अक्टूबर से मार्च के बीच का समय यहां यात्रा के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है।