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IPL 2026: महंगे अनकैप्ड खिलाड़ियों का फ्लॉप शो, करोड़ों की उम्मीदें हुईं ध्वस्त

नई दिल्ली  IPL 2026 में कई युवा खिलाड़ियों ने दम दिखाया, लेकिन 5 अनकैप्ड भारतीय खिलाड़ी बड़े दाम के बावजूद प्रदर्शन में फेल साबित हुए। फ्रेंचाइजी की उम्मीदों पर पानी फिर गया। IPL 2026 में कई युवा खिलाड़ियों ने दम दिखाया, लेकिन 5 अनकैप्ड भारतीय खिलाड़ी बड़े दाम के बावजूद प्रदर्शन में फेल साबित हुए। फ्रेंचाइजी की उम्मीदों पर पानी फिर गया। IPL 2026 के इस सीजन में जहां कई युवा सितारे चमके, वहीं करोड़ों में खरीदे गए कुछ अनकैप्ड भारतीय खिलाड़ी अपनी छाप छोड़ने में नाकाम रहे। आइए जानते हैं ऐसे ही 5 बड़े नामों के बारे में। इंडियन प्रीमियर लीग (Indian Premier League) 2026 अब अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच चुका है। यह सीजन युवा खिलाड़ियों के उभार के लिए याद किया जाएगा, लेकिन इसी बीच कुछ ऐसे अनकैप्ड भारतीय खिलाड़ी भी चर्चा में रहे, जिन पर फ्रेंचाइजी ने करोड़ों रुपये खर्च किए थे, लेकिन उनका प्रदर्शन उम्मीदों के मुताबिक नहीं रहा। सबसे पहले बात करते हैं प्रशांत वीर की, जिन्हें चेन्नई सुपर किंग्स (Chennai Super Kings) ने 14.20 करोड़ रुपये में खरीदा था। बाएं हाथ के बल्लेबाज और स्पिनर प्रशांत ने 4 मैचों में सिर्फ 66 रन बनाए और गेंदबाजी में कोई विकेट नहीं लिया। यह प्रदर्शन फ्रेंचाइजी के लिए बड़ा झटका साबित हुआ। दूसरे खिलाड़ी कार्तिक शर्मा भी CSK का ही हिस्सा हैं, जिन्हें इतने ही बड़े दाम में खरीदा गया था। घरेलू क्रिकेट में छक्कों के लिए मशहूर कार्तिक ने 8 मैचों में 173 रन बनाए। हालांकि मुंबई इंडियंस (Mumbai Indians) के खिलाफ उनकी नाबाद 54 रनों की पारी ने थोड़ी उम्मीद जरूर जगाई, लेकिन निरंतरता की कमी साफ नजर आई। तीसरे नाम आकिब नबी डार का है, जिन्हें दिल्ली कैपिटल्स (Delhi Capitals) ने 8.4 करोड़ में खरीदा था। जम्मू-कश्मीर के इस तेज गेंदबाज ने घरेलू क्रिकेट में 60 विकेट लेकर सनसनी मचाई थी, लेकिन IPL में 4 मैचों में वह एक भी विकेट नहीं ले सके, जिससे टीम की रणनीति पर सवाल उठे। चौथे खिलाड़ी अंगकृष रघुवंशी को कोलकाता नाइट राइडर्स (Kolkata Knight Riders) ने रिटेन किया था। उन्होंने 10 मैचों में 269 रन बनाए और 3 अर्धशतक लगाए, लेकिन बड़े मौकों पर उनकी अस्थिरता टीम के लिए चिंता का विषय बनी रही। पांचवें नाम समीर रिज़वी का है, जिन्हें दिल्ली कैपिटल्स ने 95 लाख में रिटेन किया था। उन्होंने सीजन की शुरुआत धमाकेदार अंदाज में की थी और 90 रनों की पारी खेली थी, लेकिन बाद में उनका प्रदर्शन गिरता चला गया। 11 मैचों में 252 रन ही उनके नाम रहे। कुल मिलाकर IPL 2026 में इन पांच खिलाड़ियों से बड़ी उम्मीदें थीं, लेकिन ये खिलाड़ी लगातार प्रदर्शन नहीं कर पाए और फ्रेंचाइजी की निवेश रणनीति पर सवाल खड़े हो गए।

एकादशी व्रत के नियम क्या हैं? जानिए सही पूजा विधि और धार्मिक महत्व

नई दिल्ली । हिंदू धर्म में एकादशी तिथि का विशेष धार्मिक महत्व बताया गया है। हर माह कृष्ण और शुक्ल पक्ष में एक-एक एकादशी आती है, यानी सालभर में कुल 24 एकादशी व्रत रखे जाते हैं। यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति के पापों का नाश होता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। किसकी पूजा होती है?एकादशी के दिन मुख्य रूप से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है। इस दिन भगवान विष्णु के विभिन्न स्वरूपों की आराधना का विशेष महत्व माना गया है। कई भक्त भगवान कृष्ण की पूजा भी करते हैं, क्योंकि उन्हें विष्णु का अवतार माना जाता है। भगवान विष्णु का यह मंत्र अत्यंत शुभ माना जाता है: ॐ नमो भगवते वासुदेवायmathrm{ॐ नमो भगवते वासुदेवाय}ॐ नमो भगवते वासुदेवाय एकादशी व्रत के नियव्रत रखने वाले व्यक्ति को सुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए।घर और पूजा स्थल की साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें।इस दिन सात्विक भोजन करें और कई लोग निर्जला व्रत भी रखते हैं।लहसुन, प्याज, चावल और तामसिक भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए।क्रोध, झूठ और नकारात्मक विचारों से दूर रहने की सलाह दी जाती है।भगवान विष्णु के मंत्रों और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना शुभ माना जाता है।जरूरतमंदों को दान करना पुण्यदायी माना गया है। एकादशी व्रत की पूजा विधिएकादशी के दिन सुबह स्नान के बाद साफ वस्त्र पहनें। इसके बाद पूजा स्थान पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। भगवान को पीले फूल, तुलसी दल, धूप, दीप, फल और मिठाई अर्पित करें।पूजा के दौरान विष्णु चालीसा या विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें और मंत्र जाप करें। तुलसी पूजा का भी विशेष महत्व माना जाता है। अंत में भगवान की आरती करें और परिवार में प्रसाद बांटें। एकादशी व्रत का महत्वधार्मिक मान्यताओं के अनुसार एकादशी व्रत मन और शरीर को शुद्ध करने वाला माना जाता है। यह व्रत आत्मिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने का माध्यम माना जाता है। कहा जाता है कि श्रद्धा और नियमपूर्वक किया गया एकादशी व्रत व्यक्ति को मोक्ष और पुण्य फल प्रदान करता है।

रात में करें ये देसी उपाय, सुबह तक कम हो सकते हैं कील-मुंहासे घर के नुस्खों से मिल सकती है राहत

कील-मुंहासे (acne) आजकल गलत खानपान, तनाव और ऑयली स्किन की वजह से बहुत आम हो गए हैं। हालांकि कोई भी उपाय “रातों-रात पूरी तरह खत्म” करने का दावा नहीं कर सकता, लेकिन कुछ देसी नुस्खे सूजन कम करने और पिंपल्स को शांत करने में मदद कर सकते हैं। 1. नीम का पेस्टनीम में एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं, जो पिंपल्स पैदा करने वाले बैक्टीरिया को कम करने में मदद कर सकते हैं। नीम की पत्तियों को पीसकर पेस्ट बनाएं पिंपल्स पर हल्का लगाकर 20–30 मिनट बाद धो लें 2. शहद (Honey)शहद स्किन को सूद करता है और इंफेक्शन कम करने में मदद कर सकता है। थोड़ी मात्रा में शहद पिंपल पर लगाएं 15–20 मिनट बाद साफ पानी से धो लें 3. आइस क्यूब (बर्फ)बर्फ लगाने से सूजन और लालिमा कम हो सकती है। बर्फ को कपड़े में लपेटकर पिंपल पर हल्के से लगाएं 1–2 मिनट से ज्यादा न रखें 4. एलोवेरा जेल एलोवेरा स्किन को ठंडक देता है और जलन कम करता है। ताजा एलोवेरा जेल लगाकर रातभर छोड़ सकते हैं सुबह चेहरा धो लें 5. हल्दी का हल्का इस्तेमाल हल्दी में एंटीसेप्टिक गुण होते हैं। बहुत कम मात्रा में हल्दी + शहद मिलाकर लगाएं 15 मिनट बाद धो लें जरूरी सावधानियां पिंपल्स को बार-बार न छेड़ें या दबाएं नहीं बहुत ज्यादा घरेलू नुस्खे एक साथ न लगाएं अगर एक्ने गंभीर हों तो डॉक्टर से सलाह लें साफ तकिया कवर और तौलिया इस्तेमाल करें ध्यान रखेंये उपाय पिंपल्स की सूजन और रेडनेस कम करने में मदद कर सकते हैं, लेकिन पूरी तरह एक रात में खत्म होना संभव नहीं होता। लगातार स्किन केयर और सही लाइफस्टाइल से ही स्थायी सुधार मिलता है।

MP : मालवा-निमाड़ में भीषण गर्मी का कहर, 11 जिलों में लू का अलर्ट, रतलाम सबसे गर्म शहर

भोपाल । मध्य प्रदेश में एक बार फिर गर्मी ने तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। मालवा-निमाड़ क्षेत्र समेत इंदौर और उज्जैन संभाग के कई जिले अगले चार दिनों तक लू की चपेट में रहेंगे। मौसम विभाग ने 11 जिलों में हीट वेव का अलर्ट जारी किया है। वहीं राजधानी भोपाल में सुबह से बादल छाए रहने के बावजूद उमस और गर्मी बनी हुई है। मंगलवार को प्रदेश के कई हिस्सों में मौसम ने दोहरे रंग दिखाए। कहीं तेज लू चली तो कहीं आंधी, बारिश और ओलावृष्टि हुई। निमाड़ क्षेत्र में तेज हवाओं के साथ बारिश दर्ज की गई, जबकि रतलाम में तापमान 46.5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जो प्रदेश में सबसे ज्यादा रहा।चक्रवात और टर्फ से बदला मौसमIMD के मुताबिक प्रदेश में साइक्लोनिक सर्कुलेशन और टर्फ सिस्टम सक्रिय होने से कई जिलों में मौसम बदला। बालाघाट, सिवनी, दतिया, टीकमगढ़, धार, इंदौर, देवास, सीहोर, सागर, छिंदवाड़ा और रायसेन में दिनभर तेज गर्मी रही, लेकिन शाम होते-होते कई जगहों पर बारिश और आंधी का असर देखने को मिला। निवाड़ी और बालाघाट में ओलावृष्टि भी हुई। भोपाल में दिन के समय बादल और धूप का मिला-जुला असर रहा, जबकि रात में कुछ इलाकों में हल्की बूंदाबांदी दर्ज की गई।रतलाम में लगातार तीसरे दिन रिकॉर्ड गर्मीमंगलवार को रतलाम लगातार तीसरे दिन प्रदेश का सबसे गर्म शहर रहा। यहां अधिकतम तापमान 46.5 डिग्री दर्ज किया गया। इसके अलावा धार में 44.5 डिग्री, श्योपुर और शाजापुर में 44 डिग्री तापमान रिकॉर्ड हुआ। खरगोन में 43.6 डिग्री, गुना में 43.3 डिग्री और सागर में 43.2 डिग्री तापमान रहा। वहीं प्रदेश के बड़े शहरों में उज्जैन सबसे गर्म रहा, जहां पारा 44.4 डिग्री तक पहुंच गया। इंदौर में 43.6 डिग्री, भोपाल में 42.6 डिग्री, जबलपुर में 42 डिग्री और ग्वालियर में 41.5 डिग्री तापमान दर्ज किया गया।आज इन जिलों में लू का अलर्टबुधवार को इंदौर, उज्जैन, रतलाम, राजगढ़, शाजापुर, झाबुआ, अलीराजपुर, धार, देवास, खरगोन, खंडवा और बुरहानपुर में लू चलने की संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार इन जिलों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। इसके अलावा भोपाल, रायसेन, सीहोर, विदिशा, मंदसौर, नर्मदापुरम, हरदा, ग्वालियर, शिवपुरी, दतिया, भिंड, मुरैना, जबलपुर, छिंदवाड़ा, बालाघाट, रीवा, सतना, शहडोल और सागर समेत कई जिलों में तेज गर्मी का असर बना रहेगा। मई में 11 दिन तक बदला रहा मौसमप्रदेश में 30 अप्रैल से शुरू हुआ आंधी-बारिश का दौर 10 मई तक जारी रहा। कभी पश्चिमी विक्षोभ तो कभी चक्रवात और टर्फ सिस्टम के असर से प्रदेश में लगातार मौसम बदला। मई के 12 दिनों में से 11 दिन कहीं न कहीं बारिश, आंधी या ओलावृष्टि दर्ज की गई। हालांकि बुधवार के लिए मौसम विभाग ने बारिश का कोई अलर्ट जारी नहीं किया है।

चेहरे के ओपन पोर्स से छुटकारा पाना है? अपनाएं ये 5 घरेलू उपाय, मिलेगी साफ और ग्लोइंग ग्लास स्किन

नई दिल्ली ।आजकल धूल, प्रदूषण, ऑयली स्किन और गलत स्किन केयर रूटीन की वजह से चेहरे पर ओपन पोर्स यानी छोटे-छोटे गड्ढों की समस्या तेजी से बढ़ रही है। ये पोर्स चेहरे की खूबसूरती कम कर देते हैं और स्किन को अनइवन दिखाते हैं। कई लोग महंगे प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन कुछ घरेलू उपाय भी इस समस्या में काफी असरदार माने जाते हैं। अगर आप भी साफ, स्मूद और ग्लास जैसी चमकदार स्किन पाना चाहते हैं, तो कुछ आसान घरेलू उपाय आपकी मदद कर सकते हैं। सबसे पहला उपाय बर्फ का इस्तेमाल माना जाता है। चेहरे पर हल्के हाथों से बर्फ रगड़ने से स्किन टाइट होती है और पोर्स छोटे दिखाई देने लगते हैं। यह स्किन को तुरंत फ्रेश लुक देने में भी मदद करता है। दूसरा उपाय मुल्तानी मिट्टी का फेस पैक है। मुल्तानी मिट्टी अतिरिक्त ऑयल को हटाकर स्किन को गहराई से साफ करती है। इसमें गुलाब जल मिलाकर लगाने से त्वचा को ठंडक मिलती है और पोर्स कम नजर आने लगते हैं। टमाटर का रस भी ओपन पोर्स की समस्या में फायदेमंद माना जाता है। इसमें मौजूद नैचुरल एसिड स्किन को टाइट करने में मदद करते हैं। नियमित रूप से टमाटर का रस लगाने से चेहरा साफ और चमकदार दिख सकता है। एलोवेरा जेल भी स्किन के लिए बेहद लाभकारी माना जाता है। यह त्वचा को हाइड्रेट रखने के साथ पोर्स को साफ करने में मदद करता है। रात में सोने से पहले एलोवेरा जेल लगाने से त्वचा को राहत मिल सकती है। इसके अलावा बेसन और दही का फेस पैक भी स्किन टाइट करने में असरदार माना जाता है। यह त्वचा से गंदगी हटाकर चेहरे को नेचुरल ग्लो देने में मदद करता है। विशेषज्ञों के अनुसार, ओपन पोर्स की समस्या से बचने के लिए चेहरे को साफ रखना, पर्याप्त पानी पीना और ज्यादा केमिकल वाले प्रोडक्ट्स से दूरी बनाना भी जरूरी है। नियमित स्किन केयर और सही खानपान से त्वचा लंबे समय तक स्वस्थ और चमकदार बनी रह सकती है।

BJP शासित राज्यों ने अपनायी PM मोदी की ईंधन बचाने की अपील, कई बड़े फैसले लागू

नई दिल्ली । देश में बढ़ते ऊर्जा संकट और मिडिल-ईस्ट में जारी तनाव के बीच पेट्रोल-डीजल बचाने को लेकर केंद्र और राज्य सरकारें सक्रिय हो गई हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईंधन बचत की अपील के बाद बीजेपी शासित कई राज्यों ने इस दिशा में ठोस कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश और गुजरात में सरकारें अलग-अलग स्तर पर नए निर्देश जारी कर रही हैं। कहीं सरकारी काफिलों में गाड़ियों की संख्या घटाई जा रही है, तो कहीं अधिकारियों को सार्वजनिक परिवहन और कारपूलिंग अपनाने के निर्देश दिए गए हैं। दिल्ली में वाहनों के इस्तेमाल पर नियंत्रण दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने विभागीय कामकाज में वाहनों के सीमित उपयोग के निर्देश दिए हैं। अब मंत्री, विधायक और अधिकारी जरूरत के अनुसार कम से कम वाहनों का इस्तेमाल करेंगे। साथ ही कारपूलिंग और सार्वजनिक परिवहन को प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया है। राजस्थान में फिजूलखर्ची पर रोक राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने अपने काफिले में गाड़ियों की संख्या कम करने का आदेश दिया है। उन्होंने अनावश्यक वाहनों के उपयोग पर रोक लगाने और सरकारी कामकाज में सादगी अपनाने की बात कही है। अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को भी जरूरत के हिसाब से ही वाहन उपयोग करने की सलाह दी गई है। उत्तर प्रदेश में 50% तक कटौती उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मुख्यमंत्री और मंत्रियों के काफिलों में 50 प्रतिशत तक वाहन कम करने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा मेट्रो, बस, सीएनजी, इलेक्ट्रिक वाहन, कारपूलिंग और साइकिल के इस्तेमाल को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है। सरकारी बैठकों को ऑनलाइन करने और कुछ संस्थानों में सप्ताह में दो दिन वर्क फ्रॉम होम लागू करने की भी सलाह दी गई है, ताकि यात्रा और ईंधन खर्च कम किया जा सके। मध्य प्रदेश में CM ने घटाए वाहन मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अपने काफिले में वाहनों की संख्या 13 से घटाकर 8 कर दी है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रहित में ईंधन बचाना जरूरी है। साथ ही मंत्रियों और निगम-मंडल पदाधिकारियों से सादगी अपनाने की अपील की गई है। प्रदेशवासियों को भी सार्वजनिक परिवहन का अधिक उपयोग करने की सलाह दी गई है। गुजरात में विदेश दौरा रद्द गुजरात में डिप्टी सीएम हर्ष सांघवी ने प्रधानमंत्री की अपील के बाद अपना अमेरिका दौरा रद्द कर दिया। इसे ईंधन बचत अभियान के प्रति सरकार की गंभीरता के तौर पर देखा जा रहा है। ‘नो व्हीकल डे’ जैसे सुझाव भी चर्चा में कई राज्यों में अब ‘नो व्हीकल डे’ लागू करने पर भी विचार किया जा रहा है। इसके अलावा सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने, स्कूल बसों के बेहतर उपयोग और बिजली बचत जैसे उपायों पर भी जोर दिया जा रहा है। दफ्तरों के समय में बदलाव और अलग-अलग शिफ्ट में काम शुरू करने जैसे सुझाव भी सामने आए हैं, ताकि पीक आवर्स में ट्रैफिक और ईंधन खपत कम की जा सके।

राष्ट्रीय मेंढक कूद दिवस: एक अनोखा उत्सव जो मनोरंजन के साथ देता है प्रकृति का संदेश

हर साल मनाया जाने वाला राष्ट्रीय मेंढक कूद दिवस (National Frog Jumping Day) एक ऐसा अनोखा और दिलचस्प दिन है जो पहली नजर में मज़ाकिया लगता है, लेकिन इसके पीछे साहित्य, परंपरा और प्रकृति से जुड़ा गहरा संदेश छिपा है। यह दिवस न केवल लोगों को मनोरंजन का अवसर देता है, बल्कि जीव-जंतुओं और पर्यावरण के महत्व को भी उजागर करता है। कब मनाया जाता है यह दिवस?राष्ट्रीय मेंढक कूद दिवस हर साल 13 मई को मनाया जाता है। हालांकि कुछ स्थानों पर इसे 18 मई के आसपास भी मनाने का उल्लेख मिलता है, लेकिन अधिकतर स्रोतों में 13 मई को ही इसकी मान्यता दी गई है। इस दिन लोग मेंढक कूद प्रतियोगिताओं, कार्यक्रमों और जागरूकता गतिविधियों में हिस्सा लेते हैं। कैसे हुई इसकी शुरुआत?इस अनोखे दिवस की प्रेरणा प्रसिद्ध अमेरिकी लेखक मार्क ट्वेन (Mark Twain) की वर्ष 1865 में प्रकाशित लघु कहानी “The Celebrated Jumping Frog of Calaveras County” से मिली। इस कहानी में एक ऐसे मेंढक की प्रतियोगिता का वर्णन है जो सबसे लंबी छलांग लगाने के लिए जाना जाता है। कहानी की हास्य शैली और अनोखी घटना ने लोगों को इतना प्रभावित किया कि धीरे-धीरे यह एक सांस्कृतिक और मनोरंजक परंपरा बन गई। बाद में इसे “Frog Jumping Day” के रूप में पहचान मिली। क्यों मनाया जाता है यह दिवस?इस दिवस को मनाने का उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं है, बल्कि इसके पीछे कई महत्वपूर्ण कारण हैंलोगों को प्रकृति और जीव-जंतुओं के प्रति जागरूक करनाजैव विविधता (Biodiversity) के महत्व को समझानाबच्चों और युवाओं में पर्यावरण के प्रति रुचि बढ़ानापरंपराओं और साहित्यिक कहानियों को जीवित रखना मेंढक का पर्यावरण में महत्वमेंढक छोटे दिखते हैं, लेकिन पर्यावरण के लिए बहुत महत्वपूर्ण जीव हैं।ये मच्छरों और कीड़ों की संख्या को नियंत्रित करते हैंपारिस्थितिकी तंत्र (इकोसिस्टम) का संतुलन बनाए रखते हैंजल और भूमि दोनों वातावरण के स्वास्थ्य का संकेत देते हैंपर्यावरण प्रदूषण के प्राकृतिक संकेतक माने जाते हैं कैसे मनाया जाता है राष्ट्रीय मेंढक कूद दिवस?इस दिन कई जगहों पर मेंढक कूद प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती हैं, खासकर अमेरिका के कैलावेरास काउंटी जैसे क्षेत्रों में।लोग अपने पालतू या स्थानीय मेंढकों के साथ कूद प्रतियोगिता में भाग लेते हैं और सबसे लंबी छलांग लगाने वाले मेंढक को विजेता घोषित किया जाता है।इसके अलावा स्कूलों और पर्यावरण संगठनों में बच्चों को मेंढकों और जैव विविधता के महत्व के बारे में बताया जाता है। आधुनिक समय में इसका महत्वआज जब पर्यावरण संकट, जलवायु परिवर्तन और जैव विविधता में गिरावट जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं, तब यह दिवस हमें यह याद दिलाता है कि हर छोटा जीव प्रकृति के संतुलन में अहम भूमिका निभाता है।यह केवल एक मनोरंजन दिवस नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी का संदेश भी देता है। राष्ट्रीय मेंढक कूद दिवस एक अनोखा उदाहरण है कि कैसे एक साहित्यिक कहानी एक वैश्विक परंपरा में बदल सकती है। यह दिन हमें हंसाता भी है और सोचने पर मजबूर भी करता है कि प्रकृति के हर जीव का सम्मान और संरक्षण कितना जरूरी है।इसकी शुरुआत किसी एक व्यक्ति ने आधिकारिक रूप से नहीं की थी, बल्कि यह परंपरा अमेरिका के कैलावेरास काउंटी (Calaveras County) से जुड़ी हुई है। इसे लोकप्रिय बनाने में अमेरिकी लेखक मार्क ट्वेन (Mark Twain) की कहानी “The Celebrated Jumping Frog of Calaveras County” का बड़ा योगदान माना जाता है।इस कहानी के बाद लोगों में मेंढक कूद प्रतियोगिताओं को लेकर उत्साह बढ़ा और धीरे-धीरे इसे हर साल एक मज़ेदार और अनोखे उत्सव के रूप में मनाया जाने लगा। -राष्ट्रीय मेंढक कूद दिवस विशेष

13 मई को शेयर बाजार में रह सकती है बड़ी हलचल, निफ्टी-सेंसेक्स पर रहेगा दबाव

नई दिल्ली ।भारतीय शेयर बाजार में आज 13 मई को उतार-चढ़ाव भरा कारोबार देखने को मिल सकता है। मंगलवार को बाजार में आई तेज गिरावट के बाद निवेशकों की नजर आज के कारोबार पर टिकी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि ग्लोबल मार्केट के कमजोर संकेत, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और विदेशी निवेशकों की बिकवाली का असर आज भी निफ्टी और सेंसेक्स पर दिखाई दे सकता है। मंगलवार को बाजार में बिकवाली का दबाव साफ नजर आया था। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही कमजोर होकर बंद हुए थे। आज बाजार की शुरुआत भी दबाव के साथ हो सकती है। अमेरिका-ईरान तनाव और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अनिश्चितता ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। इसका असर भारतीय बाजार पर भी पड़ सकता है। निफ्टी के लिए 23,600 अहम स्तर मार्केट एक्सपर्ट्स के अनुसार निफ्टी के लिए 23,600 का स्तर काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अगर निफ्टी इस स्तर से नीचे जाता है तो बाजार में और कमजोरी देखने को मिल सकती है। वहीं 24,000 का स्तर फिलहाल मजबूत रेजिस्टेंस बना हुआ है। बैंक निफ्टी अपेक्षाकृत मजबूत नजर आ सकता है और बैंकिंग शेयर बाजार को सहारा दे सकते हैं।इन सेक्टरों में दिख सकती है हलचल आज आईटी सेक्टर दबाव में रह सकता है। ग्लोबल मांग में कमजोरी का असर टेक कंपनियों पर दिखाई दे सकता है। दूसरी तरफ ऑयल एंड गैस सेक्टर में तेजी देखने को मिल सकती है, क्योंकि कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का फायदा इस सेक्टर को मिल सकता है। फार्मा सेक्टर में भी कंपनियों के तिमाही नतीजों के चलते हलचल बनी रह सकती है।इन शेयरों पर निवेशकों की नजर आज के कारोबार में रिलायंस इंडस्ट्रीज, ओएनजीसी, भारती एयरटेल, डॉ. रेड्डीज और टाटा कंज्यूमर जैसे शेयरों पर निवेशकों की खास नजर रहने वाली है। इन शेयरों में खबरों और रिजल्ट के आधार पर अच्छी मूवमेंट देखने को मिल सकती है।निवेशकों को क्या करना चाहिए? विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल बाजार में सतर्कता के साथ निवेश करना जरूरी है। जल्दबाजी में खरीदारी से बचना चाहिए और ट्रेडिंग करते समय स्टॉप लॉस जरूर लगाना चाहिए। बाजार में किसी भी ग्लोबल खबर का असर तेजी से देखने को मिल सकता है, इसलिए सोच-समझकर निवेश करना ही बेहतर रणनीति होगी।

विश्व कॉकटेल दिवस 2026: स्वाद, कला और संस्कृति का अनोखा उत्सव

हर साल 13 मई को दुनियाभर में विश्व कॉकटेल दिवस मनाया जाता है। यह दिन सिर्फ एक पेय पदार्थ का उत्सव नहीं, बल्कि स्वाद, रचनात्मकता और आधुनिक खानपान संस्कृति का प्रतीक माना जाता है। कॉकटेल आज होटल, रेस्टोरेंट और पार्टी कल्चर का अहम हिस्सा बन चुका है, जिसे लोग अलग-अलग फ्लेवर और स्टाइल में पसंद करते हैं। क्यों मनाया जाता है विश्व कॉकटेल दिवस?विश्व कॉकटेल दिवस मनाने की शुरुआत उस ऐतिहासिक दिन की याद में की जाती है जब पहली बार कॉकटेल शब्द की आधिकारिक परिभाषा प्रकाशित हुई थी। 13 मई 1806 को अमेरिकी अखबार द बैलेंस एंड कोलंबियन रिपॉजिटरी में कॉकटेल को “स्पिरिट, शुगर, पानी और बिटर्स से बना पेय” बताया गया था। इसी वजह से हर साल इस दिन को विश्व कॉकटेल दिवस के रूप में मनाया जाता है। क्या है कॉकटेल?कॉकटेल एक ऐसा पेय है जिसमें अलग-अलग ड्रिंक्स, जूस, सिरप, फल या अन्य फ्लेवर मिलाकर नया स्वाद तैयार किया जाता है। समय के साथ इसमें कई बदलाव आए और आज हजारों प्रकार के कॉकटेल दुनियाभर में लोकप्रिय हैं।मॉकटेल यानी बिना अल्कोहल वाले पेय भी आज युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय हो चुके हैं। कॉकटेल की दुनिया क्यों है खास?कॉकटेल सिर्फ स्वाद तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक कला भी मानी जाती है। अच्छे बारटेंडर अलग-अलग फ्लेवर और प्रस्तुति के जरिए साधारण पेय को खास अनुभव में बदल देते हैं।आजकल होटल और रेस्टोरेंट इंडस्ट्री में कॉकटेल मेकिंग एक प्रोफेशनल स्किल बन चुकी है। कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताएं भी आयोजित होती हैं, जहां बारटेंडर अपनी रचनात्मकता दिखाते हैं। दुनियाभर में कैसे मनाया जाता है यह दिन?विश्व कॉकटेल दिवस पर कई देशों में विशेष आयोजन किए जाते हैं। होटल, कैफे और रेस्टोरेंट्स में नई ड्रिंक रेसिपी पेश की जाती हैं। सोशल मीडिया पर लोग अपनी पसंदीदा कॉकटेल और मॉकटेल की तस्वीरें साझा करते हैं।इसके अलावा कई जगहों पर लाइव मिक्सोलॉजी शो और टेस्टिंग इवेंट भी आयोजित किए जाते हैं। भारत में बढ़ता कॉकटेल कल्चरभारत में भी पिछले कुछ वर्षों में कॉकटेल और मॉकटेल का चलन तेजी से बढ़ा है। बड़े शहरों में थीम बेस्ड कैफे, रूफटॉप रेस्टोरेंट और लाउंज में नए फ्लेवर के ड्रिंक्स युवाओं को आकर्षित कर रहे हैं।अब पारंपरिक भारतीय स्वादों को भी कॉकटेल में शामिल किया जा रहा है, जैसे आम, इमली, पुदीना और मसाला फ्लेवर आधारित ड्रिंक्स। जिम्मेदारी के साथ उत्सव का संदेशविश्व कॉकटेल दिवस लोगों को स्वाद और रचनात्मकता का आनंद लेने का मौका देता है, लेकिन इसके साथ जिम्मेदार व्यवहार का संदेश भी जुड़ा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ संतुलित और जिम्मेदारीपूर्ण सेवन की सलाह देते हैं। विश्व कॉकटेल दिवस स्वाद, संस्कृति और रचनात्मकता का अनोखा संगम है। यह दिन हमें बताता है कि खानपान केवल जरूरत नहीं, बल्कि एक कला और अनुभव भी है। बदलती लाइफस्टाइल के दौर में कॉकटेल कल्चर तेजी से लोकप्रिय हो रहा है और 13 मई का यह दिन उसी आधुनिक फूड और बेवरेज संस्कृति का खास उत्सव बन चुका है। -विश्व कॉकटेल दिवस विशेष 

अंतर्राष्ट्रीय हम्मस दिवस 2026: स्वाद, सेहत और संस्कृति का अनोखा संगम

हर साल 13 मई को मनाया जाने वाला अंतर्राष्ट्रीय हम्मस दिवस दुनिया भर में स्वाद, सेहत और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक बन चुका है। यह खास दिन मिडिल ईस्ट की लोकप्रिय डिश हम्मस को समर्पित है, जिसे आज दुनियाभर में हेल्दी फूड के रूप में पसंद किया जाता है। कब और कैसे हुई शुरुआत?अंतर्राष्ट्रीय हम्मस दिवस की शुरुआत साल 2012 में हुई थी। इसे इजरायल के उद्यमी बेन लैंग ने शुरू किया था। उनका उद्देश्य लोगों को एक ऐसे भोजन के जरिए जोड़ना था जो स्वादिष्ट होने के साथ-साथ पौष्टिक भी हो। सोशल मीडिया और फूड कम्युनिटी की मदद से यह दिन धीरे-धीरे वैश्विक स्तर पर लोकप्रिय होता गया। आज कई देशों में इस दिन फूड फेस्टिवल, ऑनलाइन कैंपेन और खास कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। क्यों मनाया जाता है यह दिवस?इस दिवस को मनाने का मुख्य उद्देश्य लोगों को हेल्दी खानपान के प्रति जागरूक करना और मिडिल ईस्ट की पारंपरिक फूड संस्कृति को बढ़ावा देना है। हम्मस को “सुपरफूड” माना जाता है क्योंकि इसमें प्रोटीन, फाइबर, आयरन और हेल्दी फैट्स भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। यह स्वाद और सेहत दोनों का बेहतरीन मिश्रण है।इसके अलावा यह दिवस अलग-अलग संस्कृतियों के लोगों को भोजन के माध्यम से जोड़ने का संदेश भी देता है। क्या है हम्मस?हम्मस एक क्रीमी डिश है, जिसे उबले हुए चने, ताहिनी (तिल का पेस्ट), जैतून तेल, नींबू रस और लहसुन से तैयार किया जाता है। इसे ब्रेड, सलाद, स्नैक्स और सब्जियों के साथ खाया जाता है।आज के समय में क्लासिक हम्मस के अलावा बीटरूट, एवोकाडो, स्पाइसी और पेरि-पेरि फ्लेवर भी काफी लोकप्रिय हो चुके हैं। क्या है इसकी खासियत?यह प्रोटीन और फाइबर से भरपूर होता है। वजन नियंत्रित रखने में मदद करता है। दिल और पाचन स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना जाता है। कम तेल और हेल्दी फैट्स के कारण फिटनेस पसंद लोगों की पहली पसंद बन रहा है। इसे शाकाहारी और वीगन डाइट में भी आसानी से शामिल किया जा सकता है। भारत में बढ़ती लोकप्रियताभारत में भी अब हम्मस तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। बड़े शहरों के कैफे और रेस्टोरेंट्स में इसे हेल्दी स्नैक और डिप के रूप में परोसा जा रहा है। युवा पीढ़ी इसे मेयोनीज और अनहेल्दी डिप्स के बेहतर विकल्प के तौर पर देख रही है। अंतर्राष्ट्रीय हम्मस दिवस केवल एक डिश का उत्सव नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवनशैली, स्वाद और सांस्कृतिक मेलजोल का प्रतीक है। 13 मई का यह दिन लोगों को यह संदेश देता है कि हेल्दी खाना भी स्वादिष्ट हो सकता है और भोजन दुनियाभर के लोगों को एक साथ जोड़ने की ताकत रखता है।