उमरिया में अवैध रेत खनन पर बवाल, वनकर्मियों को ट्रैक्टर से कुचलने का प्रयास

नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के उमरिया जिले के चंदिया वन परिक्षेत्र में अवैध रेत खनन रोकने पहुंची वन विभाग की टीम पर खनन माफिया ने जानलेवा हमला कर दिया। मामला सलैया गांव के जंगल क्षेत्र का है, जहां सोमवार शाम यह खतरनाक घटना हुई। वन विभाग की उड़नदस्ता टीम को पनिया नाला क्षेत्र में अवैध रेत उत्खनन की सूचना मिली थी। सूचना के आधार पर जैसे ही टीम मौके पर पहुंची, वहां से अवैध रेत से भरे दो ट्रैक्टर-ट्रॉली निकलते दिखाई दिए।वनकर्मियों को कुचलने की कोशिश, ट्रैक्टर लेकर फरार हुए आरोपीवनकर्मियों ने जब ट्रैक्टरों को रोकने का प्रयास किया तो चालकों ने रफ्तार बढ़ा दी। आरोप है कि रेत माफिया ने वनकर्मियों की ओर ट्रैक्टर मोड़कर उन्हें कुचलने की कोशिश की। इस दौरान मौके पर अफरा-तफरी मच गई। वनकर्मी किसी तरह अपनी जान बचाने में सफल रहे, लेकिन आरोपी मौके से फरार हो गए। हालांकि, वन विभाग की टीम ने एक ट्रैक्टर-ट्रॉली को जब्त कर लिया है। पहले भी हुई है मारपीट की घटनाएंचंदिया परिक्षेत्र अधिकारी नीलेश द्विवेदी ने बताया कि फरार आरोपियों की पहचान की जा रही है और उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वनरक्षक रमाशंकर ने बताया कि यह गिरोह पहले भी वनकर्मियों पर हमला कर चुका है। कुछ समय पहले भी इसी क्षेत्र में वनरक्षक के साथ मारपीट कर जब्त ट्रैक्टर छुड़ा लिया गया था। वन विभाग में आक्रोश, बढ़ाई गई सख्तीघटना के बाद वन विभाग के कर्मचारियों में आक्रोश है। विभाग ने कहा है कि अवैध रेत खनन और माफियाओं की बढ़ती गुंडागर्दी को अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पूरे क्षेत्र में निगरानी और गश्त बढ़ा दी गई है। पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे हमलेयह पहला मामला नहीं है जब रेत माफिया ने प्रशासनिक टीमों पर हमला किया हो। इससे पहले भी प्रदेश के अलग-अलग जिलों में वनकर्मियों और अधिकारियों पर हमले हो चुके हैं- वनरक्षक से मारपीट, सिर में गंभीर चोट (उमरिया)ट्रैक्टर जब्ती के दौरान वनकर्मियों पर हमला (टीकमगढ़)लाठी-डंडों से वनकर्मियों की पिटाई (सिंगरौली)SDM की गाड़ी पर ट्रैक्टर चढ़ाने की कोशिश (भिंड) उमरिया की यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि अवैध रेत खनन पर रोक लगाना कितना चुनौतीपूर्ण हो गया है। वन विभाग की सख्ती के बावजूद माफियाओं के हौसले लगातार बढ़ते जा रहे हैं।
बांग्लादेश में बढ़ा सैन्य संपर्क: पाकिस्तान वायुसेना की ढाका में एंट्री, JF-17 डील और रणनीतिक चर्चा की अटकलें तेज

नई दिल्ली। पाकिस्तान एयरफोर्स के एयर वाइस मार्शल औरंगजेब अहमद के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल के बांग्लादेश दौरे को लेकर रिपोर्ट्स सामने आई हैं। बताया जा रहा है कि यह टीम ढाका में बांग्लादेश वायुसेना के साथ “एयर स्टाफ टॉक्स” (Air Staff Talks) में हिस्सा ले रही है। इस तरह की बातचीत का उद्देश्य आमतौर पर दोनों देशों की वायु सेनाओं के बीच सहयोग, प्रशिक्षण, तकनीकी आदान-प्रदान और रक्षा संबंधों को मजबूत करना होता है। रिपोर्ट्स के अनुसार यह बैठक 10 मई के आसपास शुरू हुई और इसमें पाकिस्तान वायुसेना के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। चर्चा का एक बड़ा हिस्सा प्रशिक्षण, तकनीकी सहयोग और सैन्य समन्वय से जुड़ा बताया जा रहा है। कुछ रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि भविष्य में बांग्लादेशी पायलटों और तकनीशियनों के लिए पाकिस्तान में ट्रेनिंग कार्यक्रम पर विचार हो सकता है। इसी बीच मीडिया रिपोर्ट्स में JF-17 थंडर लड़ाकू विमान को लेकर संभावित चर्चा का भी उल्लेख किया जा रहा है। JF-17 एक हल्का मल्टीरोल फाइटर जेट है, जिसे चीन और पाकिस्तान ने मिलकर विकसित किया है। हालांकि बांग्लादेश द्वारा इस विमान की खरीद या किसी सौदे को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, इसलिए इसे केवल संभावित चर्चा के रूप में ही देखा जा सकता है। इसके अलावा कुछ रिपोर्ट्स में बांग्लादेश में एयरफोर्स के कुछ अधिकारियों की गिरफ्तारी और सुरक्षा जांच का भी जिक्र किया गया है, लेकिन इन मामलों को लेकर भी विस्तृत और स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि सीमित है। साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि पाकिस्तान वायुसेना के अधिकारी बांग्लादेश में कुछ एयरबेस और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स का भी निरीक्षण कर सकते हैं, जिनमें रनवे विस्तार और एयर डिफेंस सिस्टम से जुड़े काम शामिल हैं। लेकिन इन सभी गतिविधियों को लेकर दोनों देशों की ओर से विस्तृत आधिकारिक बयान सार्वजनिक रूप से बहुत सीमित है। कुल मिलाकर, पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच सैन्य स्तर पर संपर्क और बातचीत बढ़ने की दिशा जरूर दिखाई दे रही है, लेकिन JF-17 सौदा, भारतीय सीमा के पास सैन्य रणनीति या किसी बड़े भू-राजनीतिक बदलाव जैसे दावे फिलहाल पूरी तरह पुष्टि किए बिना स्पष्ट रूप से नहीं कहे जा सकते।
उड़ान से पहले विमान में आग, चेन्नई एयरपोर्ट पर मची अफरा-तफरी, टला बड़ा हादसा

नई दिल्ली । चेन्नई एयरपोर्ट की सामान्य सी सुबह अचानक एक तनावपूर्ण और खतरनाक स्थिति में बदल गई, जब एक यात्री विमान के विंग में उड़ान से ठीक पहले आग लग गई। विमान में लगभग 280 यात्री सवार थे और सभी अपनी यात्रा के लिए तैयार थे, लेकिन कुछ ही पलों में स्थिति ने ऐसा मोड़ लिया कि पूरी व्यवस्था सतर्क हो गई। जैसे ही विमान रनवे के पास अंतिम तैयारी में था, तकनीकी टीम ने विमान के एक विंग से धुआं निकलते देखा। पहले तो यह सामान्य तकनीकी संकेत समझा गया, लेकिन कुछ ही सेकंड में लपटें दिखाई देने लगीं। स्थिति गंभीर होते ही पायलट ने तुरंत नियंत्रण कक्ष को सूचना दी और विमान को रोक दिया गया। इसके बाद एयरपोर्ट पर मौजूद आपातकालीन सुरक्षा तंत्र तुरंत सक्रिय हुआ। फायर ब्रिगेड की टीम तेजी से मौके पर पहुंची और बिना देर किए आग पर काबू पाने की कोशिश शुरू कर दी गई। कुछ ही समय में आग को पूरी तरह बुझा दिया गया, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया। यदि थोड़ी भी देर होती, तो यह घटना गंभीर विमान दुर्घटना में बदल सकती थी। विमान में बैठे यात्रियों के बीच इस दौरान घबराहट फैल गई थी। कई लोग अचानक हुए इस घटनाक्रम से सहम गए, लेकिन क्रू मेंबर्स ने स्थिति को संभालते हुए सभी को शांत रखा और सुरक्षित तरीके से विमान से बाहर निकालने की प्रक्रिया शुरू की। सभी यात्रियों को बिना किसी चोट के सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, जिससे बड़ी राहत की स्थिति बनी। घटना के बाद पूरे एयरपोर्ट क्षेत्र में कुछ समय के लिए संचालन प्रभावित हुआ और संबंधित हिस्से को सुरक्षा कारणों से अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया। तकनीकी टीम ने विमान की जांच शुरू कर दी है ताकि आग लगने के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके। शुरुआती अनुमान के अनुसार, यह समस्या किसी तकनीकी खराबी या सिस्टम में अचानक आई गड़बड़ी के कारण हो सकती है, लेकिन इसकी पुष्टि जांच के बाद ही होगी। इस घटना ने एक बार फिर विमानन सुरक्षा प्रणाली की तत्परता और महत्व को सामने रखा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक विमानों में सुरक्षा व्यवस्था काफी उन्नत होती है, लेकिन नियमित जांच और समय पर प्रतिक्रिया ही ऐसी घटनाओं को बड़े हादसे में बदलने से रोकती है। यात्रियों के लिए यह अनुभव डरावना जरूर था, लेकिन सभी सुरक्षित बच गए, जो सबसे बड़ी राहत की बात है। एयरपोर्ट प्रशासन ने भी त्वरित कार्रवाई की सराहना की है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए अतिरिक्त सावधानी बरतने की बात कही है।
उत्तर प्रदेश अब बदल चुका है, पीछे नहीं लौटेगा: सीएम योगी ने निवेश और विकास का नया विजन रखा सामने

नई दिल्ली । दिल्ली में आयोजित एक बड़े औद्योगिक और निवेश मंच पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य के भविष्य को लेकर एक नया और आत्मविश्वास से भरा विजन प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है जब उत्तर प्रदेश को केवल सुधार की प्रक्रिया में नहीं रखा जाएगा, बल्कि इसे बुलेट ट्रेन जैसी तेज रफ्तार के साथ आगे बढ़ाया जाएगा। उनके अनुसार, राज्य ने अब तक जिन कमजोरियों को पीछे छोड़ा है, उनके स्थान पर मजबूत विकास की नींव खड़ी कर दी गई है। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में यह स्पष्ट किया कि किसी भी राज्य की असली ताकत उसके उद्योग, निवेश और उत्पादन क्षमता में होती है। जब उद्योग मजबूत होते हैं तो रोजगार के अवसर अपने आप बढ़ते हैं और अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिलती है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत की ताकत केवल आर्थिक प्रगति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दुनिया को स्थिरता और विकास का नया मार्ग दिखाने की क्षमता भी रखता है। अपने भाषण में उन्होंने उत्तर प्रदेश के पुराने हालातों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि कुछ वर्ष पहले तक राज्य की स्थिति ऐसी थी कि विकास की रफ्तार धीमी थी और लोगों में सुरक्षा को लेकर चिंता बनी रहती थी। उन्होंने कहा कि उस समय सड़कों की स्थिति, कानून व्यवस्था की चुनौतियां और औद्योगिक माहौल की कमजोरी के कारण निवेश प्रभावित होता था और लोग राज्य से बाहर जाने को मजबूर होते थे। सीएम योगी ने कहा कि सरकार ने सबसे पहले प्रशासनिक व्यवस्था और सुरक्षा प्रणाली को मजबूत किया। उनका मानना है कि विकास की पहली शर्त एक सुरक्षित माहौल है। उन्होंने बताया कि कानून व्यवस्था को सख्ती से लागू किया गया और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को पारदर्शी बनाया गया। इसके साथ ही नीतिगत स्तर पर कई बड़े बदलाव किए गए ताकि निवेशकों का भरोसा बढ़ सके। उन्होंने यह भी बताया कि उनके नेतृत्व का तरीका अनुशासन और संगठनात्मक प्रबंधन पर आधारित रहा है, जिसे उन्होंने अपने पहले के अनुभवों से सीखा और शासन व्यवस्था में लागू किया। इसके परिणामस्वरूप सरकारी कामकाज में तेजी आई और निर्णय लेने की प्रक्रिया अधिक प्रभावी हुई। विकास की दिशा में उठाए गए कदमों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य में निवेश को आकर्षित करने के लिए मजबूत ढांचा तैयार किया गया है। स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए विशेष योजनाएं लागू की गई हैं, जिससे छोटे और मध्यम उद्योगों को नई पहचान मिली है। आज यह सेक्टर लाखों लोगों को रोजगार दे रहा है और राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश अब केवल सुधार की कहानी नहीं है, बल्कि यह बदलाव और प्रगति का उदाहरण बन रहा है। राज्य में पर्यटन और सांस्कृतिक धरोहरों को भी वैश्विक स्तर पर पहचान मिल रही है, जिससे आर्थिक गतिविधियों को और मजबूती मिल रही है। अपने संबोधन के अंत में मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश अब पीछे मुड़ने वाला नहीं है। राज्य को अब एक ऐसे रास्ते पर आगे बढ़ाया जा रहा है जहां गति, निवेश, सुरक्षा और विकास साथ-साथ चलेंगे। उनका मानना है कि आने वाले वर्षों में उत्तर प्रदेश देश की अर्थव्यवस्था में सबसे महत्वपूर्ण योगदान देने वाले राज्यों में शामिल होगा।
BTR में बाघ का हमला: तेंदूपत्ता तोड़ने गए युवक गंभीर घायल, शहडोल रेफर

नई दिल्ली । मध्य प्रदेश के उमरिया जिले स्थित बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व (BTR) के मानपुर बफर परिक्षेत्र में मंगलवार सुबह एक दर्दनाक घटना सामने आई। तेंदूपत्ता संग्रहण के लिए जंगल गए एक युवक पर बाघ ने अचानक हमला कर दिया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। यह घटना मानपुर बीट के कक्ष क्रमांक पीएफ 385 स्थित अमहाई नाला के पास हुई, जहां सुबह के समय ग्रामीण तेंदूपत्ता तोड़ने के लिए पहुंचे थे। युवक के सिर और शरीर पर गंभीर चोटेंघायल युवक की पहचान धर्मेंद्र के रूप में हुई है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जंगल में काम करते समय अचानक बाघ ने उस पर हमला कर दिया। हमले में धर्मेंद्र के सिर में गंभीर चोटें आईं, जबकि उसके शरीर पर बाघ के दांतों और पंजों के कई गहरे निशान पाए गए। हमले के बाद मौके पर मौजूद अन्य ग्रामीणों में अफरा-तफरी मच गई और लोग अपनी जान बचाकर जंगल से बाहर भागे। तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया, शहडोल रेफरघटना की जानकारी मिलते ही बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व की टीम मौके पर पहुंची और घायल युवक को तुरंत मानपुर अस्पताल ले जाया गया। प्राथमिक उपचार के बाद उसकी हालत गंभीर देखते हुए उसे मेडिकल कॉलेज शहडोल रेफर कर दिया गया। डॉक्टरों के अनुसार युवक की स्थिति गंभीर बनी हुई है और उसे विशेष निगरानी में रखा गया है। वन विभाग ने बढ़ाई निगरानीबांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के सहायक संचालक भरा गायकवाड़ ने बताया कि घटना के बाद वन विभाग की टीम लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है। घायल के इलाज में हर संभव मदद की जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि क्षेत्र में ग्रामीणों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए गश्त और निगरानी बढ़ा दी गई है ताकि ऐसे हादसों की पुनरावृत्ति न हो। यह घटना एक बार फिर जंगल क्षेत्रों में काम करने वाले ग्रामीणों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है। वन विभाग की सतर्कता के बावजूद मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं चिंता का विषय बनी हुई हैं।
तमिलनाडु में राजनीतिक हलचल: विजय की TVK को लेकर अंतरराष्ट्रीय चर्चा तेज, मलेशियाई पीएम ने बताया ऐतिहासिक बदलाव

नई दिल्ली। तमिलनाडु की राजनीति में अभिनेता से नेता बने थलापति विजय की पार्टी टीवीके (Tamilaga Vettri Kazhagam) के प्रदर्शन को लेकर सोशल मीडिया और कुछ रिपोर्ट्स में बड़ी चर्चा देखने को मिल रही है, हालांकि यह स्पष्ट करना जरूरी है कि इस तरह की चुनावी जीत और सरकार गठन से जुड़ी जानकारी की आधिकारिक पुष्टि निर्वाचन आयोग या अधिकृत नतीजों से ही मानी जाती है। फिलहाल उपलब्ध विश्वसनीय राजनीतिक परिदृश्य के अनुसार टीवीके का उदय राज्य की पारंपरिक DMK और AIADMK राजनीति के बीच एक नए विकल्प के रूप में देखा जा रहा है, लेकिन इसके सीटों और सरकार बनाने जैसे दावों पर अलग-अलग स्रोतों में स्पष्टता नहीं है। इसी बीच मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम का एक सोशल मीडिया बयान सामने आया है, जिसमें उन्होंने विजय को बधाई देते हुए तमिलनाडु की राजनीति में बदलाव की बात कही है। अपने संदेश में उन्होंने कहा कि तमिल समुदाय के साथ मलेशिया के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध गहरे रहे हैं और वह उम्मीद करते हैं कि नया नेतृत्व इस रिश्ते को और मजबूत करेगा। उन्होंने विजय के चुनावी नारे “ओरु विरल पुरची” (एक उंगली क्रांति) का उल्लेख करते हुए इसे बदलाव की भावना से जोड़ा। अनवर इब्राहिम ने अपने संदेश में यह भी कहा कि विजय लंबे समय तक फिल्मों में भ्रष्टाचार और अन्याय के खिलाफ लड़ते हुए दिखे हैं और अब जनता ने उन्हें वास्तविक जीवन में नेतृत्व की जिम्मेदारी दी है। उन्होंने इसे तमिलनाडु की राजनीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में वर्णित किया। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, तमिलनाडु की राजनीति लंबे समय से DMK और AIADMK के प्रभाव में रही है, और किसी नए राजनीतिक विकल्प का उभरना अपने आप में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। लेकिन वास्तविक राजनीतिक स्थिति, सीटों का बंटवारा और सत्ता परिवर्तन को लेकर अंतिम और आधिकारिक जानकारी चुनाव आयोग के प्रमाणित परिणामों पर ही निर्भर करती है। कुल मिलाकर यह मामला अभी राजनीतिक चर्चा और दावों के स्तर पर ज्यादा है, जबकि जमीनी राजनीतिक तस्वीर आधिकारिक नतीजों और पुष्टि के बाद ही पूरी तरह स्पष्ट हो पाएगी।
तपती धूप से जनजीवन प्रभावित: विदिशा की सड़कों पर दिखा वीरान नजारा

नई दिल्ली । मध्य प्रदेश के विदिशा जिले में नौतपा शुरू होने से पहले ही गर्मी ने अपना तीखा असर दिखाना शुरू कर दिया है। सोमवार को तेज धूप और गर्म हवाओं ने लोगों को बेहाल कर दिया। दोपहर 2 बजे तक अधिकतम तापमान 41 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि न्यूनतम तापमान भी 28 डिग्री के करीब पहुंच गया।लगातार बढ़ती गर्मी के कारण दिनभर जनजीवन प्रभावित रहा और लोग गर्म हवाओं से बचने के लिए घरों में रहने को मजबूर हो गए। दोपहर में बाजारों में पसरा सन्नाटाभीषण गर्मी का असर शहर की रफ्तार पर साफ दिखाई दिया। दोपहर होते-होते विदिशा की व्यस्त सड़कें लगभग खाली हो गईं। आम दिनों में जहां बाजारों में चहल-पहल रहती है, वहीं इस दिन सड़कों पर सन्नाटा नजर आया।तेज धूप और गर्म हवाओं के कारण लोग जरूरी काम होने पर ही बाहर निकल रहे हैं। हीट वेव की आशंका, और बढ़ सकता है तापमानमौसम विशेषज्ञों के अनुसार यह सिर्फ शुरुआत है। आने वाले दिनों में तापमान और बढ़ सकता है। खासकर मई के तीसरे सप्ताह में पारा और ऊपर चढ़ने की संभावना जताई जा रही है। उत्तर भारत से आने वाली गर्म हवाओं के कारण हीट वेव (लू) की स्थिति बनने की आशंका है। इससे लोगों की परेशानी और बढ़ सकती है। डॉक्टरों की सलाह: लू से बचाव जरूरीभीषण गर्मी को देखते हुए डॉक्टरों ने लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। विशेषज्ञों के अनुसार— शरीर को हाइड्रेटेड रखें, बार-बार पानी पीते रहेंनींबू पानी, ओआरएस और छाछ का सेवन बढ़ाएंदोपहर 12 बजे से 4 बजे के बीच बाहर निकलने से बचेंबाहर निकलते समय हल्के और सूती कपड़े पहनेंधूप से बचने के लिए छाता या टोपी का उपयोग करें विदिशा में बढ़ती गर्मी आने वाले दिनों में लोगों के लिए और मुश्किलें खड़ी कर सकती है। ऐसे में सावधानी और सतर्कता ही सुरक्षित रहने का सबसे बेहतर उपाय है।
विदिशा पुलिस की बड़ी सफलता, एक माह में 48 नाबालिग बालिकाएं सुरक्षित मिलीं, ऑपरेशन मुस्कान जारी

नई दिल्ली । मध्य प्रदेश के विदिशा जिले में पुलिस ने गुमशुदा नाबालिग बालिकाओं की तलाश के लिए चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन मुस्कान’ अभियान के तहत बड़ी सफलता हासिल की है। 1 अप्रैल से 30 अप्रैल 2026 तक चले विशेष अभियान में 48 नाबालिग बालिकाओं और किशोरियों को सुरक्षित बरामद कर उनके परिजनों को सौंप दिया गया। यह संख्या जिले से दर्ज गुमशुदगी के मामलों से भी अधिक बताई जा रही है, जिससे यह साफ होता है कि पुलिस ने पुराने लंबित मामलों को भी प्राथमिकता से हल किया। तीन साल में 827 किशोरियों को किया गया सुरक्षित बरामदविदिशा पुलिस के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में ‘ऑपरेशन मुस्कान’ के तहत कुल 827 गुमशुदा बालिकाओं और किशोरियों को खोजकर उनके परिवारों से मिलाया गया है। आंकड़ों के अनुसार-वर्ष 2023 में 226 में से 209 बालिकाएं बरामद की गईंवर्ष 2024 में 302 में से 282 बालिकाएं सुरक्षित मिलींवर्ष 2025 में 271 के मुकाबले 336 बालिकाएं खोजी गईंवर्ष 2026 (अप्रैल तक) 134 में से 125 बालिकाएं सुरक्षित वापस लाई गईंइन आंकड़ों से पुलिस की सक्रियता और खोजबीन की व्यापकता का अंदाजा लगाया जा सकता है। कई राज्यों तक चला सर्च ऑपरेशनइस अभियान के दौरान पुलिस ने सिर्फ मध्य प्रदेश तक ही सीमित नहीं रहकर राजस्थान, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश तक तलाशी अभियान चलाया। भोपाल, इंदौर, उज्जैन, नर्मदापुरम, ग्वालियर, रायसेन और देवास सहित कई जिलों में विशेष टीमों ने लगातार खोजबीन की। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, एसडीओपी, थाना और चौकी प्रभारियों सहित कई टीमों ने समन्वय के साथ यह अभियान चलाया। पाकिस्तान सीमा तक पहुंची पुलिस टीमएक मामले में पुलिस टीम एक गुमशुदा किशोरी की तलाश में राजस्थान होते हुए पाकिस्तान सीमा तक पहुंच गई थी। गहन खोजबीन के बाद किशोरी को सुरक्षित बरामद कर वापस लाया गया। यह मामला अभियान की गंभीरता और पुलिस की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। ऑपरेशन मुस्कान का उद्देश्यपुलिस अधिकारियों के अनुसार ‘ऑपरेशन मुस्कान’ का मुख्य उद्देश्य गुमशुदा बच्चों और किशोरियों को सुरक्षित ढूंढकर उनके परिजनों से मिलाना है। यह अभियान केवल खोजबीन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सामाजिक जागरूकता और सुरक्षा व्यवस्था को भी मजबूत किया जा रहा है। विदिशा पुलिस का यह अभियान लगातार प्रभावी साबित हो रहा है। बड़ी संख्या में बालिकाओं की सुरक्षित वापसी ने न केवल परिजनों को राहत दी है, बल्कि पुलिस की सक्रियता और संवेदनशीलता को भी उजागर किया है।
पाकिस्तान पर बड़ा आरोप: ईरानी विमानों को दी शरण, अमेरिका-ईरान तनाव के बीच उठे दोगलेपन पर सवाल

नई दिल्ली। अमेरिका-ईरान संघर्ष के बीच पाकिस्तान को लेकर एक बड़ा विवाद सामने आया है, जिसमें उस पर ईरानी सैन्य विमानों को अपने एयरबेस पर शरण देने के आरोप लगाए गए हैं। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट सीबीएस न्यूज के हवाले से दावा किया गया है कि संघर्ष के दौरान पाकिस्तान ने ईरान के कुछ सैन्य और निगरानी विमानों को रावलपिंडी के पास स्थित नूर खान एयरबेस पर अस्थायी रूप से रखने की अनुमति दी थी, ताकि वे संभावित हमलों से सुरक्षित रह सकें। रिपोर्ट के अनुसार इन विमानों में ईरानी वायुसेना का RC-130 टोही विमान भी शामिल बताया गया है, जो निगरानी और खुफिया जानकारी जुटाने में इस्तेमाल होता है। अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि यह कदम उस समय उठाया गया जब क्षेत्र में ईरान और अमेरिका के बीच तनाव चरम पर था और दोनों पक्षों के बीच संघर्ष विराम की स्थिति अस्थिर बनी हुई थी। हालांकि पाकिस्तान ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। पाकिस्तान विदेश मंत्रालय ने कहा है कि नूर खान एयरबेस पर मौजूद बताए गए विमान किसी सैन्य ऑपरेशन का हिस्सा नहीं थे, बल्कि संघर्ष विराम और कूटनीतिक वार्ताओं से जुड़े राजनयिक या प्रशासनिक विमानों की आवाजाही थी। इस्लामाबाद का कहना है कि रिपोर्ट में दिए गए दावे भ्रामक हैं और इसका उद्देश्य गलत धारणा फैलाना है। इस पूरे मामले ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी है, जहां एक तरफ अमेरिका और कुछ विश्लेषक पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं पाकिस्तान खुद को एक संतुलित और मध्यस्थ देश के रूप में पेश कर रहा है। इसी बीच क्षेत्रीय विशेषज्ञों का कहना है कि मध्य-पूर्व और दक्षिण एशिया में बदलते भू-राजनीतिक हालात के कारण देशों की रणनीतियां तेजी से बदल रही हैं, और ऐसे में हर गतिविधि को अलग-अलग नजरिए से देखा जा रहा है। कुल मिलाकर यह मामला अभी विवादों के घेरे में है और स्वतंत्र रूप से इसकी पुष्टि नहीं हो पाई है, लेकिन इसने अमेरिका, ईरान और पाकिस्तान के बीच कूटनीतिक रिश्तों पर नई बहस जरूर शुरू कर दी है।
नेतन्याहू का बड़ा आरोप: पाकिस्तान चला रहा है इजरायल-अमेरिका के खिलाफ डिजिटल युद्ध, भारत की खुलकर तारीफ

नई दिल्ली। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक अमेरिकी टीवी इंटरव्यू में पाकिस्तान को लेकर बड़ा और तीखा बयान दिया है। CBS के कार्यक्रम “60 Minutes” में बातचीत के दौरान उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तान सोशल मीडिया के जरिए एक संगठित डिजिटल अभियान चला रहा है, जिसका मकसद इजरायल और अमेरिका के रिश्तों को कमजोर करना है। नेतन्याहू के अनुसार यह अभियान फर्जी अकाउंट्स और बॉट नेटवर्क के जरिए चलाया जा रहा है, जिसमें इजरायल विरोधी नैरेटिव फैलाए जा रहे हैं। नेतन्याहू ने कहा कि कई देशों द्वारा सोशल मीडिया पर गलत जानकारी और फर्जी प्रचार के जरिए हेरफेर की कोशिशें की जा रही हैं और पाकिस्तान जैसे देशों से ऐसे डिजिटल ऑपरेशन सामने आ रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि इंटरनेट पर जो इजरायल विरोधी संदेश तेजी से फैलते हैं, उनकी शुरुआती गतिविधियां अक्सर पाकिस्तान से जुड़ी पाई जाती हैं। हालांकि इन आरोपों पर पाकिस्तान की ओर से अब तक कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। इसी इंटरव्यू में नेतन्याहू ने भारत की जमकर तारीफ की और भारत-इजरायल संबंधों को बेहद मजबूत और भरोसेमंद बताया। उन्होंने कहा कि जब वे अपनी पत्नी के साथ भारत यात्रा पर गए थे तो वहां उन्हें जिस तरह का सम्मान और गर्मजोशी मिली, वह उनके लिए “प्यार के उत्सव” जैसा अनुभव था। उन्होंने यह भी कहा कि भारत में इजरायल और उसके नागरिकों को काफी सम्मान मिलता है और दोनों देशों के रिश्ते लगातार मजबूत हो रहे हैं। नेतन्याहू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भी सराहना की और कहा कि दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी बहुत गहरी है। उन्होंने बताया कि भारत और इजरायल के बीच रक्षा, तकनीक और सुरक्षा के क्षेत्रों में लगातार सहयोग बढ़ रहा है। इसी बातचीत के दौरान ईरान मुद्दे पर बोलते हुए नेतन्याहू ने दावा किया कि अगर हालिया सैन्य कार्रवाई नहीं की जाती तो ईरान बहुत जल्दी परमाणु हथियार विकसित कर सकता था। उन्होंने कहा कि ईरान लंबे समय से परमाणु कार्यक्रम और बैलिस्टिक मिसाइल क्षमताओं को मजबूत करने में लगा हुआ है, जो क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है। नेतन्याहू ने यह भी दावा किया कि ईरान के भीतर राजनीतिक अस्थिरता बढ़ रही है और शासन के अंदर दरारें सामने आ रही हैं। उनके अनुसार देश में हाल की घटनाओं के बाद विरोध प्रदर्शन और असंतोष बढ़ा है, जिससे वहां की सरकार कमजोर स्थिति में दिखाई दे रही है। कुल मिलाकर इस इंटरव्यू में नेतन्याहू ने एक तरफ पाकिस्तान पर डिजिटल युद्ध और दुष्प्रचार के गंभीर आरोप लगाए, वहीं दूसरी तरफ भारत के साथ रिश्तों को मजबूत और भावनात्मक रूप से महत्वपूर्ण बताया, जिससे यह बयान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है।