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पाकिस्तान पर बड़ा आरोप: ईरानी विमानों को दी शरण, अमेरिका-ईरान तनाव के बीच उठे दोगलेपन पर सवाल



नई दिल्ली। अमेरिका-ईरान संघर्ष के बीच पाकिस्तान को लेकर एक बड़ा विवाद सामने आया है, जिसमें उस पर ईरानी सैन्य विमानों को अपने एयरबेस पर शरण देने के आरोप लगाए गए हैं। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट सीबीएस न्यूज के हवाले से दावा किया गया है कि संघर्ष के दौरान पाकिस्तान ने ईरान के कुछ सैन्य और निगरानी विमानों को रावलपिंडी के पास स्थित नूर खान एयरबेस पर अस्थायी रूप से रखने की अनुमति दी थी, ताकि वे संभावित हमलों से सुरक्षित रह सकें।

रिपोर्ट के अनुसार इन विमानों में ईरानी वायुसेना का RC-130 टोही विमान भी शामिल बताया गया है, जो निगरानी और खुफिया जानकारी जुटाने में इस्तेमाल होता है। अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि यह कदम उस समय उठाया गया जब क्षेत्र में ईरान और अमेरिका के बीच तनाव चरम पर था और दोनों पक्षों के बीच संघर्ष विराम की स्थिति अस्थिर बनी हुई थी।

हालांकि पाकिस्तान ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। पाकिस्तान विदेश मंत्रालय ने कहा है कि नूर खान एयरबेस पर मौजूद बताए गए विमान किसी सैन्य ऑपरेशन का हिस्सा नहीं थे, बल्कि संघर्ष विराम और कूटनीतिक वार्ताओं से जुड़े राजनयिक या प्रशासनिक विमानों की आवाजाही थी। इस्लामाबाद का कहना है कि रिपोर्ट में दिए गए दावे भ्रामक हैं और इसका उद्देश्य गलत धारणा फैलाना है।

इस पूरे मामले ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी है, जहां एक तरफ अमेरिका और कुछ विश्लेषक पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं पाकिस्तान खुद को एक संतुलित और मध्यस्थ देश के रूप में पेश कर रहा है।

इसी बीच क्षेत्रीय विशेषज्ञों का कहना है कि मध्य-पूर्व और दक्षिण एशिया में बदलते भू-राजनीतिक हालात के कारण देशों की रणनीतियां तेजी से बदल रही हैं, और ऐसे में हर गतिविधि को अलग-अलग नजरिए से देखा जा रहा है।

कुल मिलाकर यह मामला अभी विवादों के घेरे में है और स्वतंत्र रूप से इसकी पुष्टि नहीं हो पाई है, लेकिन इसने अमेरिका, ईरान और पाकिस्तान के बीच कूटनीतिक रिश्तों पर नई बहस जरूर शुरू कर दी है।

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