Zepto से खरीदी Apple Watch को लेकर विवाद, वीर दास ने नकली उत्पाद मिलने का किया दावा; ग्राहकों को सतर्क रहने की सलाह

नई दिल्ली । ऑनलाइन और क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म के बढ़ते प्रभाव के बीच महंगे इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों की प्रामाणिकता को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। प्रसिद्ध कॉमेडियन और अभिनेता वीर दास ने दावा किया है कि उन्होंने एक क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म से जो Apple Watch खरीदी थी, वह नकली निकली। इस दावे के बाद सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा शुरू हो गई है और डिजिटल खरीदारी में ग्राहकों की सुरक्षा तथा भरोसे को लेकर नए सवाल उठने लगे हैं। वीर दास ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा करते हुए अपनी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने बताया कि एक पेशेवर आवश्यकता के चलते उन्हें तत्काल Apple Watch की जरूरत थी, जिसके बाद उन्होंने ऑनलाइन ऑर्डर देकर उत्पाद मंगाया। हालांकि डिलीवरी मिलने के बाद उन्हें उत्पाद की गुणवत्ता और उसकी प्रामाणिकता पर संदेह हुआ। इसके बाद उन्होंने ग्राहक सेवा विभाग से संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन उनकी अपेक्षाओं के अनुरूप समाधान नहीं मिल सका। मामले के सार्वजनिक होने के बाद यह चर्चा तेज हो गई कि तेजी से बढ़ रहे क्विक कॉमर्स सेक्टर में महंगे इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों की गुणवत्ता नियंत्रण व्यवस्था कितनी मजबूत है। कई उपभोक्ताओं ने भी सोशल मीडिया पर अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि ऑनलाइन खरीदारी के दौरान उत्पादों की जांच और सत्यापन को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरतने की आवश्यकता होती है। विवाद बढ़ने के बाद संबंधित कंपनी की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आई। कंपनी ने कहा कि मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है और उत्पाद की जांच के लिए आवश्यक प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसके तहत उत्पाद को वापस मंगाने और संबंधित आपूर्ति श्रृंखला की समीक्षा करने की बात कही गई है। कंपनी का कहना है कि ग्राहक संतुष्टि और उत्पाद की गुणवत्ता उसकी प्राथमिकताओं में शामिल हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, आज बाजार में कई ऐसे नकली इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद उपलब्ध हैं जो पहली नजर में असली जैसे दिखाई देते हैं। विशेष रूप से प्रीमियम ब्रांडों के उत्पादों की कॉपी इतनी सटीक बनाई जाती है कि सामान्य उपभोक्ता के लिए अंतर समझना आसान नहीं होता। यही कारण है कि किसी भी महंगे गैजेट की खरीदारी के दौरान तकनीकी सत्यापन आवश्यक माना जाता है। उपभोक्ता विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि किसी भी ब्रांडेड इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद को प्राप्त करने के बाद उसके सीरियल नंबर और मॉडल विवरण की आधिकारिक रिकॉर्ड से जांच करनी चाहिए। यदि उत्पाद पर अंकित जानकारी और वास्तविक डिवाइस के विवरण में अंतर दिखाई दे तो तुरंत संबंधित विक्रेता या प्लेटफॉर्म से संपर्क करना चाहिए। इसके अलावा पैकेजिंग, डिस्प्ले क्वालिटी, निर्माण फिनिश और सॉफ्टवेयर अनुभव जैसे पहलुओं पर भी ध्यान देना चाहिए। तकनीकी जानकारों का कहना है कि असली और नकली स्मार्टवॉच के बीच सबसे बड़ा अंतर प्रदर्शन और उपयोग अनुभव में दिखाई देता है। असली डिवाइस में इंटरफेस अधिक स्मूद, सेंसर अधिक सटीक और हैप्टिक फीडबैक बेहतर होता है, जबकि नकली उत्पादों में अक्सर इन पहलुओं की गुणवत्ता कमजोर होती है। यह मामला केवल एक ग्राहक की शिकायत तक सीमित नहीं है, बल्कि तेजी से विकसित हो रहे ई-कॉमर्स और क्विक कॉमर्स क्षेत्र में उपभोक्ता विश्वास की अहमियत को भी रेखांकित करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ग्राहकों को महंगे उत्पाद प्राप्त करते समय हर विवरण की सावधानीपूर्वक जांच करनी चाहिए और संतुष्ट होने के बाद ही डिलीवरी प्रक्रिया पूरी करनी चाहिए। डिजिटल खरीदारी के दौर में सतर्कता ही उपभोक्ताओं को संभावित नुकसान से बचाने का सबसे प्रभावी माध्यम मानी जा रही है।
₹1000 से कम में सुपरफास्ट इंटरनेट और OTT का डबल फायदा, Jio Fiber, Airtel Xstream और BSNL के प्लान्स में कौन है सबसे आगे?

नई दिल्ली । डिजिटल दौर में घरों की इंटरनेट जरूरतें पहले के मुकाबले काफी बढ़ चुकी हैं। ऑनलाइन पढ़ाई, वर्क फ्रॉम होम, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, क्लाउड गेमिंग और 4K वीडियो स्ट्रीमिंग जैसी गतिविधियों ने हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड कनेक्शन को लगभग अनिवार्य बना दिया है। ऐसे में उपभोक्ता कम कीमत में बेहतर स्पीड, अनलिमिटेड डेटा और अतिरिक्त मनोरंजन सुविधाओं वाले प्लान की तलाश करते हैं। अच्छी बात यह है कि देश की प्रमुख टेलीकॉम और ब्रॉडबैंड कंपनियां 1000 रुपये से कम कीमत में कई आकर्षक विकल्प उपलब्ध करा रही हैं। रिलायंस जियो का जियोफाइबर इस श्रेणी में लोकप्रिय विकल्पों में शामिल है। कंपनी का 399 रुपये वाला प्लान 30 Mbps स्पीड के साथ आता है, जबकि 699 रुपये के प्लान में 100 Mbps तक की स्पीड उपलब्ध कराई जाती है। जिन परिवारों में एक साथ कई डिवाइस इंटरनेट का उपयोग करते हैं, उनके लिए 100 Mbps वाला प्लान बेहतर माना जा सकता है। जियोफाइबर के प्लान घरेलू उपयोगकर्ताओं के बीच स्थिर कनेक्टिविटी और व्यापक उपलब्धता के कारण लोकप्रिय बने हुए हैं। एयरटेल एक्सस्ट्रीम फाइबर भी इस सेगमेंट में मजबूत दावेदार है। कंपनी के 599 रुपये, 699 रुपये और 899 रुपये के प्लान में क्रमशः 30 Mbps, 40 Mbps और 100 Mbps तक की स्पीड मिलती है। इन प्लान्स की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इनमें कई OTT सुविधाएं और टीवी कंटेंट एक्सेस भी शामिल किए जाते हैं। जिन यूजर्स की प्राथमिकता इंटरनेट के साथ मनोरंजन है, उनके लिए एयरटेल के ये पैकेज काफी आकर्षक साबित हो सकते हैं। सरकारी टेलीकॉम कंपनी बीएसएनएल भी कम बजट वाले ग्राहकों के लिए कई प्रतिस्पर्धी विकल्प उपलब्ध करा रही है। 399 रुपये, 499 रुपये, 599 रुपये और 799 रुपये की श्रेणी में कंपनी विभिन्न स्पीड और डेटा क्षमता वाले फाइबर प्लान प्रदान करती है। कुछ प्लान में 60 Mbps से लेकर 100 Mbps और 150 Mbps तक की स्पीड भी उपलब्ध है। ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में जहां निजी कंपनियों की पहुंच सीमित है, वहां बीएसएनएल का नेटवर्क कई उपभोक्ताओं के लिए उपयोगी विकल्प बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि सही प्लान का चयन केवल कीमत देखकर नहीं किया जाना चाहिए। उपभोक्ताओं को अपने मासिक डेटा उपयोग, परिवार में इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की संख्या, उपलब्ध नेटवर्क गुणवत्ता और OTT जरूरतों को भी ध्यान में रखना चाहिए। यदि प्राथमिकता केवल इंटरनेट स्पीड है तो जियोफाइबर और बीएसएनएल के कुछ प्लान बेहतर मूल्य प्रदान कर सकते हैं, जबकि मनोरंजन और OTT कंटेंट पसंद करने वाले ग्राहकों के लिए एयरटेल एक्सस्ट्रीम फाइबर अधिक आकर्षक विकल्प बन सकता है। ब्रॉडबैंड बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा का सबसे बड़ा लाभ उपभोक्ताओं को मिल रहा है। पहले जहां हाई-स्पीड इंटरनेट के लिए अधिक खर्च करना पड़ता था, वहीं अब 1000 रुपये से कम कीमत में अनलिमिटेड डेटा, अच्छी स्पीड और डिजिटल एंटरटेनमेंट सुविधाएं उपलब्ध हो रही हैं। यही कारण है कि घरेलू इंटरनेट उपयोगकर्ताओं के बीच फाइबर ब्रॉडबैंड की मांग लगातार बढ़ रही है और कंपनियां भी ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए नए ऑफर्स पेश कर रही हैं।
Madhya Pradesh weather: सीहोर में 61 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से चली आंधी, इछावर में झमाझम बारिश से मौसम हुआ सुहाना

Madhya Pradesh weather: मध्यप्रदेश । सीहोर जिले में सोमवार दोपहर अचानक बदले मौसम ने लोगों को भीषण गर्मी और उमस से बड़ी राहत दिलाई। सुबह से तेज धूप और उमस के कारण लोग परेशान थे, लेकिन दोपहर बाद मौसम ने अचानक करवट ली। देखते ही देखते आसमान में घने काले बादल छा गए और दिन के समय ही अंधेरा जैसा माहौल बन गया। इसके बाद तेज हवाओं के साथ आंधी का दौर शुरू हुआ, जिसने पूरे जिले में धूल का गुबार उड़ा दिया। मौसम विभाग के अनुसार जिले में करीब 61 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज आंधी चली। तेज हवाओं के चलते कई स्थानों पर लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा, वहीं सड़कों पर दृश्यता भी कुछ समय के लिए प्रभावित हुई। हालांकि आंधी के बाद शुरू हुई बारिश ने मौसम को पूरी तरह बदल दिया और वातावरण में ठंडक घुल गई। जिले के विभिन्न हिस्सों में बारिश का असर अलग-अलग देखने को मिला। सबसे अधिक वर्षा इछावर क्षेत्र में दर्ज की गई, जहां 0.91 इंच बारिश हुई। इसके अलावा श्यामपुर में 0.18 इंच, भैरूंदा में 0.16 इंच और सीहोर मुख्यालय पर 0.09 इंच वर्षा रिकॉर्ड की गई। जिला मुख्यालय पर बारिश का दौर अपेक्षाकृत कम रहा और अधिकांश क्षेत्रों में बूंदाबांदी देखने को मिली, लेकिन इससे भी लोगों को राहत महसूस हुई। तेज बारिश और हवाओं के कारण तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। पिछले कुछ दिनों से लगातार बढ़ रही गर्मी और उमस से लोग परेशान थे। दोपहर बाद मौसम में आए इस बदलाव ने न केवल तापमान कम किया, बल्कि वातावरण को भी काफी हद तक शीतल बना दिया। बाजारों, कार्यालयों और सार्वजनिक स्थानों पर लोगों ने मौसम के इस बदलाव का स्वागत किया। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि दोपहर बाद वायुमंडल में अचानक हुए बदलाव और नमी की उपलब्धता के कारण घने बादलों का निर्माण हुआ, जिससे तेज आंधी और बारिश की स्थिति बनी। विशेषज्ञों के अनुसार मालवा और मध्य प्रदेश के मध्य क्षेत्र में इस तरह की गतिविधियां आगामी दिनों में भी जारी रह सकती हैं। मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों के दौरान जिले के कुछ हिस्सों में गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना जताई है। साथ ही कुछ क्षेत्रों में तेज हवाएं भी चल सकती हैं। ऐसे में किसानों और आम नागरिकों को मौसम संबंधी अपडेट पर नजर बनाए रखने की सलाह दी गई है। बारिश के बाद जहां लोगों को गर्मी से राहत मिली है, वहीं किसानों को भी इससे लाभ मिलने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर हो रही प्री-मानसून गतिविधियां खरीफ फसलों की तैयारी के लिए अनुकूल परिस्थितियां तैयार कर सकती हैं।
30 जून को भारत में लॉन्च होगा OnePlus N6, नई N सीरीज के साथ बजट स्मार्टफोन बाजार में कंपनी का बड़ा दांव

नई दिल्ली । स्मार्टफोन निर्माता कंपनी वनप्लस भारतीय बाजार में अपने उत्पाद पोर्टफोलियो का विस्तार करने जा रही है। कंपनी ने आधिकारिक तौर पर घोषणा कर दी है कि उसकी नई N सीरीज का पहला स्मार्टफोन OnePlus N6 आगामी 30 जून को लॉन्च किया जाएगा। इस लॉन्च के साथ कंपनी पहली बार बजट स्मार्टफोन श्रेणी में बड़े स्तर पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराने की तैयारी कर रही है। भारतीय स्मार्टफोन बाजार में वनप्लस की पहचान अब तक मुख्य रूप से प्रीमियम और मिड-रेंज डिवाइसों के लिए रही है। हालांकि हाल के वर्षों में बजट सेगमेंट में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और ग्राहकों की मांग को देखते हुए कंपनी ने अब एक नई रणनीति अपनाई है। N सीरीज को इसी रणनीतिक विस्तार का हिस्सा माना जा रहा है, जिसका उद्देश्य अधिक से अधिक ग्राहकों तक वनप्लस का अनुभव पहुंचाना है। कंपनी द्वारा जारी जानकारी के अनुसार OnePlus N6 को 30 जून को दोपहर 12 बजे लॉन्च किया जाएगा। लॉन्च से पहले कंपनी ने फोन की डिजाइन और कुछ प्रमुख जानकारियों का खुलासा भी किया है। स्मार्टफोन का डिजाइन काफी हद तक वनप्लस की लोकप्रिय Nord सीरीज से प्रेरित दिखाई देता है, जिससे यह प्रीमियम लुक और आधुनिक डिजाइन का संतुलित मिश्रण पेश करता है। फोन के पिछले हिस्से में चौकोर आकार का कैमरा मॉड्यूल दिया गया है, जिसमें दो कैमरा सेंसर और एलईडी फ्लैश मौजूद हैं। फ्लैट बैक पैनल के बीच में वनप्लस की ब्रांडिंग दिखाई देगी। डिवाइस के दाईं ओर पावर और वॉल्यूम बटन दिए गए हैं, जबकि नीचे की तरफ यूएसबी टाइप-सी पोर्ट, स्पीकर ग्रिल और सिम ट्रे की सुविधा उपलब्ध होगी। फ्रंट में सेंटर पंच-होल डिस्प्ले दिया गया है, जो आधुनिक स्मार्टफोन डिजाइन ट्रेंड के अनुरूप माना जाता है। सबसे अधिक चर्चा इसकी संभावित कीमत को लेकर हो रही है। कंपनी ने संकेत दिया है कि N सीरीज के स्मार्टफोन 18 हजार से 25 हजार रुपये की मूल्य श्रेणी में पेश किए जाएंगे। इससे स्पष्ट है कि यह सीरीज मौजूदा Nord लाइनअप की तुलना में अधिक किफायती होगी। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि कुछ मॉडल 20 हजार रुपये से कम कीमत में भी उपलब्ध हो सकते हैं, जिससे यह सीरीज सीधे तौर पर बजट और अपर मिड-रेंज सेगमेंट में प्रतिस्पर्धा करेगी। OnePlus N6 को ब्लैक और ग्रीन रंग विकल्पों में पेश किया जाएगा। इसकी बिक्री प्रमुख ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से की जाएगी। कंपनी का लक्ष्य उन उपभोक्ताओं को आकर्षित करना है जो सीमित बजट में विश्वसनीय ब्रांड, बेहतर सॉफ्टवेयर अनुभव और आकर्षक डिजाइन वाले स्मार्टफोन की तलाश करते हैं। हालांकि कंपनी ने अभी तक प्रोसेसर, कैमरा क्षमताओं, बैटरी क्षमता और चार्जिंग तकनीक जैसी तकनीकी जानकारियों का खुलासा नहीं किया है। माना जा रहा है कि लॉन्च इवेंट के दौरान इन सभी फीचर्स की आधिकारिक घोषणा की जाएगी। इसी वजह से टेक्नोलॉजी जगत और स्मार्टफोन उपभोक्ताओं के बीच इस डिवाइस को लेकर उत्सुकता बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि OnePlus N6 प्रतिस्पर्धी हार्डवेयर, लंबी बैटरी लाइफ और बेहतर सॉफ्टवेयर अनुभव के साथ आता है तो यह बजट स्मार्टफोन बाजार में मजबूत विकल्प बन सकता है। ऐसे में 30 जून का लॉन्च कार्यक्रम भारतीय स्मार्टफोन उद्योग के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जहां वनप्लस पहली बार इस मूल्य वर्ग में अपनी नई पहचान बनाने की कोशिश करेगा।
₹4500 से कम में बिजली बचाने वाले BLDC फैन की बढ़ी मांग, Atomberg से Havells तक कई कंपनियों ने पेश किए दमदार विकल्प

नई दिल्ली । देशभर में बढ़ती गर्मी और बिजली की लागत को देखते हुए ऊर्जा दक्ष घरेलू उपकरणों की मांग लगातार बढ़ रही है। इसी क्रम में BLDC तकनीक से लैस सीलिंग फैन उपभोक्ताओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। पारंपरिक पंखों की तुलना में कम बिजली खर्च करने वाले ये फैन अब किफायती कीमतों में भी उपलब्ध हैं, जिससे मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए इन्हें अपनाना आसान हो गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि घरों में सबसे अधिक समय तक चलने वाले उपकरणों में सीलिंग फैन प्रमुख हैं। कई घरों में पंखे दिन और रात दोनों समय लगातार संचालित होते हैं। ऐसे में बिजली की खपत को कम करने के लिए BLDC यानी ब्रशलेस डीसी मोटर तकनीक को एक प्रभावी विकल्प माना जा रहा है। यह तकनीक सामान्य मोटर की तुलना में कम ऊर्जा का उपयोग करती है और लंबे समय तक बेहतर प्रदर्शन देने में सक्षम होती है। बाजार में अब ऐसे कई मॉडल मौजूद हैं जिनकी कीमत 4500 रुपये से कम है, लेकिन इनमें प्रीमियम श्रेणी के फीचर्स उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इनमें रिमोट कंट्रोल, मल्टी स्पीड मोड, स्मार्ट ऑपरेशन, एलईडी डिस्प्ले और ऊर्जा बचत जैसी सुविधाएं शामिल हैं। यही वजह है कि उपभोक्ता पारंपरिक पंखों की जगह BLDC फैन को प्राथमिकता देने लगे हैं। इस श्रेणी में कुछ मॉडल अपनी संतुलित परफॉर्मेंस के कारण विशेष रूप से चर्चा में हैं। कम बिजली खपत के साथ शांत संचालन और बेहतर एयर डिलीवरी देने वाले फैन उन उपभोक्ताओं को आकर्षित कर रहे हैं जो कम खर्च में अधिक उपयोगिता चाहते हैं। इसके अलावा स्मार्ट होम तकनीक के बढ़ते चलन ने भी इस श्रेणी की मांग को मजबूत किया है। स्मार्ट फीचर्स वाले मॉडल अब मोबाइल एप्लीकेशन और वॉयस कमांड के माध्यम से भी संचालित किए जा सकते हैं। इससे उपयोगकर्ताओं को सुविधा के साथ-साथ आधुनिक तकनीक का अनुभव भी मिलता है। कई फैन मॉडल ऐसे हैं जिन्हें रिमोट के जरिए नियंत्रित किया जा सकता है और इनमें टाइमर, स्लीप मोड तथा ऑटो सेटिंग जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध हैं। एयरफ्लो के मामले में भी कई कंपनियों ने विशेष ध्यान दिया है। बड़े कमरों और ड्रॉइंग रूम के लिए तैयार किए गए कुछ मॉडल अधिक हवा देने की क्षमता रखते हैं। इनमें अलग-अलग मोड उपलब्ध कराए गए हैं, जिससे उपयोगकर्ता अपनी आवश्यकता के अनुसार फैन की गति और प्रदर्शन को नियंत्रित कर सकते हैं। इससे आरामदायक वातावरण बनाए रखने में मदद मिलती है। डिजाइन के स्तर पर भी इस श्रेणी में उल्लेखनीय बदलाव देखने को मिल रहे हैं। आधुनिक घरों की सजावट को ध्यान में रखते हुए कई कंपनियां आकर्षक फिनिश, एलईडी डिस्प्ले और प्रीमियम लुक वाले मॉडल पेश कर रही हैं। कुछ फैन पारंपरिक डिजाइन से अलग लकड़ी जैसी फिनिश और मल्टी-ब्लेड संरचना के साथ भी उपलब्ध हैं, जो इंटीरियर की सुंदरता को बढ़ाते हैं। ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार BLDC फैन पारंपरिक सीलिंग फैन की तुलना में 50 से 65 प्रतिशत तक बिजली की बचत कर सकते हैं। लंबे समय तक उपयोग करने पर यह बचत बिजली बिल में स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। यही कारण है कि ऊर्जा दक्ष उपकरणों की ओर बढ़ते रुझान के बीच BLDC तकनीक वाले फैन घरेलू बाजार में तेजी से अपनी जगह बना रहे हैं। बाजार विश्लेषकों का कहना है कि आने वाले वर्षों में ऊर्जा बचत और स्मार्ट तकनीक की मांग बढ़ने के साथ BLDC फैन की बिक्री में और वृद्धि हो सकती है। कम कीमत, बेहतर प्रदर्शन और आधुनिक सुविधाओं का संयोजन इन्हें घरेलू उपभोक्ताओं के लिए एक व्यावहारिक और आर्थिक विकल्प बना रहा है।
मोहनिया टनल में युवक का खतरनाक स्टंट वायरल: चलती बाइक पर खड़ा होकर दौड़ाया वाहन, पुलिस जांच में जुटी

मध्यप्रदेश । रीवा जिले के रीवा-सीधी मार्ग पर स्थित Mohaniya Tunnel में एक बाइक सवार युवक का खतरनाक स्टंट चर्चा का विषय बन गया है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में युवक चलती बाइक पर खड़ा होकर तेज रफ्तार से वाहन चलाता नजर आ रहा है। यह स्टंट प्रदेश की सबसे लंबी टनलों में से एक मानी जाने वाली मोहनिया टनल के भीतर किया गया, जहां भारी वाहनों की लगातार आवाजाही रहती है। सामने आए वीडियो में देखा जा सकता है कि युवक बाइक की सीट से उठकर वाहन पर खड़ा हो जाता है और संतुलन बनाते हुए तेज गति से आगे बढ़ता है। इसी दौरान वह टनल के भीतर चल रहे ट्रकों और अन्य बड़े वाहनों के नजदीक से गुजरता दिखाई देता है। सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार इस तरह की हरकतें न केवल स्टंट करने वाले व्यक्ति के लिए बल्कि अन्य वाहन चालकों और यात्रियों के लिए भी गंभीर खतरा पैदा कर सकती हैं। टनल जैसे सीमित और नियंत्रित यातायात वाले मार्ग में किसी भी प्रकार की लापरवाही बड़े हादसे का कारण बन सकती है। वीडियो में दिखाई दे रही गतिविधि को लेकर स्थानीय लोगों ने चिंता जताई है। उनका कहना है कि इस प्रकार की स्टंटबाजी से सड़क सुरक्षा नियमों की खुलेआम अनदेखी होती है और दुर्घटनाओं की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। स्थानीय नागरिकों का दावा है कि रीवा-सीधी मार्ग और आसपास के क्षेत्रों में पहले भी इस तरह के स्टंट के मामले सामने आते रहे हैं। लोगों का कहना है कि सोशल मीडिया पर लोकप्रियता हासिल करने के लिए कुछ युवक अपनी और दूसरों की जान जोखिम में डाल रहे हैं। उन्होंने प्रशासन से ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई करने की मांग की है। वीडियो सामने आने के बाद पुलिस विभाग भी सक्रिय हो गया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार वायरल वीडियो की जांच की जा रही है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि वीडियो कब और किस परिस्थिति में बनाया गया। साथ ही बाइक सवार युवक की पहचान के लिए तकनीकी और अन्य माध्यमों का उपयोग किया जा रहा है। पुलिस का कहना है कि यदि वीडियो की पुष्टि होती है और संबंधित युवक की पहचान हो जाती है तो उसके खिलाफ मोटर वाहन अधिनियम और अन्य लागू प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि सड़क पर स्टंट करना कानून का उल्लंघन है और इससे सार्वजनिक सुरक्षा को खतरा पहुंचता है। यातायात विशेषज्ञों का मानना है कि सड़कों और हाईवे पर बढ़ती स्टंटबाजी को रोकने के लिए नियमित निगरानी, जागरूकता अभियान और कड़ी कानूनी कार्रवाई आवश्यक है। प्रशासन ने भी वाहन चालकों से यातायात नियमों का पालन करने और सोशल मीडिया के लिए खतरनाक स्टंट से बचने की अपील की है।
ईवी आधारित राइड-हेलिंग बाजार में बढ़ेगी प्रतिस्पर्धा, ग्रीन एसएम ने एयरपोर्ट ट्रांसफर और कॉर्पोरेट मोबिलिटी पर लगाया दांव

नई दिल्ली । भारत के तेजी से विकसित हो रहे इलेक्ट्रिक मोबिलिटी बाजार में प्रतिस्पर्धा और तेज होने जा रही है। हाल ही में परिचालन शुरू करने वाली ग्रीन एसएम ने देश में अपनी मौजूदगी मजबूत करने के लिए विस्तार की नई रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। कंपनी का लक्ष्य केवल पारंपरिक राइड-हेलिंग सेवा तक सीमित नहीं है, बल्कि वह एयरपोर्ट ट्रांसफर, कॉर्पोरेट मोबिलिटी और सब्सक्रिप्शन आधारित परिवहन सेवाओं के क्षेत्र में भी अपनी पहुंच बढ़ाना चाहती है। इलेक्ट्रिक वाहनों पर आधारित यह प्लेटफॉर्म ऐसे समय बाजार में उतरा है जब शहरी परिवहन क्षेत्र में पर्यावरण अनुकूल विकल्पों की मांग लगातार बढ़ रही है। कंपनी का मानना है कि पूरी तरह इलेक्ट्रिक बेड़े के साथ परिचालन करने से उसे प्रतिस्पर्धी कंपनियों की तुलना में अलग पहचान बनाने में मदद मिलेगी। यही वजह है कि शुरुआती चरण से ही कंपनी अपनी सेवाओं को व्यापक स्तर पर विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। वर्तमान में कंपनी गुरुग्राम, दक्षिण दिल्ली, मध्य दिल्ली और नोएडा के कुछ क्षेत्रों में परिचालन कर रही है। इसके लिए लगभग एक हजार इलेक्ट्रिक कारों का बेड़ा तैनात किया गया है। कंपनी का दावा है कि उसके परिचालन मॉडल का केंद्र केवल यात्रियों और ड्राइवरों को जोड़ना नहीं है, बल्कि संपूर्ण सेवा गुणवत्ता, चालक प्रशिक्षण, सुरक्षा मानकों और वाहन प्रबंधन को सीधे नियंत्रित करना है। कंपनी की आगामी रणनीति में एयरपोर्ट ट्रांसफर सेवा महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली है। यह सेवा उन यात्रियों को लक्षित करेगी जो नियमित रूप से हवाई यात्रा करते हैं और समयबद्ध, सुरक्षित तथा प्रीमियम परिवहन सुविधा चाहते हैं। इसके अलावा कॉर्पोरेट मोबिलिटी सेगमेंट पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जहां कंपनियां अपने कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए संगठित परिवहन सेवाओं की मांग करती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि कॉर्पोरेट मोबिलिटी भारत के शहरी परिवहन क्षेत्र का सबसे तेजी से बढ़ता हुआ खंड बनकर उभर रहा है। आईटी, वित्तीय सेवाओं और बहुराष्ट्रीय कंपनियों के विस्तार के साथ कर्मचारियों के सुरक्षित और नियमित आवागमन की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में इलेक्ट्रिक वाहनों पर आधारित संगठित परिवहन सेवा प्रदाताओं के लिए बड़े अवसर मौजूद हैं। ग्रीन एसएम अपनी प्रीमियम सेवाओं को बढ़ावा देने के लिए शुरुआती चरण में विशेष छूट भी उपलब्ध करा रही है। इसके जरिए कंपनी उन ग्राहकों को आकर्षित करने का प्रयास कर रही है जो पारंपरिक टैक्सी सेवाओं के साथ-साथ बेहतर यात्रा अनुभव की तलाश में रहते हैं। इससे बाजार में पहले से मौजूद प्रमुख राइड-हेलिंग कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा और तेज होने की संभावना है। भविष्य की योजनाओं में इलेक्ट्रिक दोपहिया परिवहन सेवाओं को भी शामिल किए जाने की संभावना जताई जा रही है। यदि ऐसा होता है तो कंपनी शहरी क्षेत्रों में कम दूरी की यात्रा के लिए एक नया विकल्प पेश कर सकती है। यह मॉडल पहले से कुछ एशियाई बाजारों में सफल माना जाता है और भारत में भी इसकी संभावनाएं देखी जा रही हैं। विशेषज्ञों के अनुसार भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को लेकर बढ़ती जागरूकता, सरकारी प्रोत्साहन और चार्जिंग नेटवर्क के विस्तार से ऐसे प्लेटफॉर्मों को लाभ मिल सकता है। आने वाले वर्षों में यह क्षेत्र केवल परिवहन सेवा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि शहरी गतिशीलता के व्यापक समाधान का हिस्सा बन सकता है। ग्रीन एसएम की नई रणनीति इसी बदलते बाजार परिदृश्य में अपनी मजबूत पहचान बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
रीवा सड़क हादसे में 10 वर्षीय बच्ची की मौत: बस की टक्कर से ऑटो सवार 15 लोग हुए थे घायल

मध्यप्रदेश । रीवा जिले के लौआ क्षेत्र में रविवार शाम हुए सड़क हादसे ने एक परिवार की खुशियां छीन लीं। बस और ऑटो की टक्कर में गंभीर रूप से घायल हुई 10 वर्षीय बच्ची की सोमवार को इलाज के दौरान मौत हो गई। इस दुर्घटना में कुल 15 लोग घायल हुए थे, जिनमें से अधिकांश का उपचार अभी भी अस्पताल में जारी है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और दुर्घटना के कारणों का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है। पुलिस के अनुसार, रविवार शाम करीब 4:30 बजे एक ऑटो यात्रियों को लेकर अपने गंतव्य की ओर जा रहा था। इसी दौरान लौआ क्षेत्र में पीछे से आ रही पूजा बस सर्विस की बस ने ऑटो को टक्कर मार दी। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक बस की रफ्तार तेज थी और टक्कर इतनी जोरदार थी कि ऑटो बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। ऑटो में सवार यात्री गंभीर रूप से घायल हो गए और चारों ओर चीख-पुकार मच गई। स्थानीय लोगों ने तत्काल राहत कार्य शुरू किया और घायलों को वाहन से बाहर निकालने में मदद की। घटना के समय अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) Sandeep Mishra उसी मार्ग से गुजर रहे थे। दुर्घटना की जानकारी मिलते ही उन्होंने अपना वाहन रुकवाया और स्थानीय लोगों तथा पुलिस कर्मियों के सहयोग से राहत एवं बचाव कार्य में हिस्सा लिया। उनकी पहल पर घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था की गई। हादसे में गंभीर रूप से घायल नवागांव-सगरा निवासी 10 वर्षीय दीपाली शर्मा (दीपांजलि) को उपचार के लिए रीवा स्थित Sanjay Gandhi Memorial Hospital में भर्ती कराया गया था। चिकित्सकों के प्रयासों के बावजूद सिर और शरीर में आई गंभीर चोटों के कारण बच्ची ने सोमवार को दम तोड़ दिया। बच्ची की मौत के बाद परिवार और गांव में शोक का माहौल है। पुलिस का कहना है कि बस चालक की भूमिका और दुर्घटना के कारणों की जांच की जा रही है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि बस ने ऑटो को पीछे से टक्कर मारी थी, हालांकि दुर्घटना की वास्तविक परिस्थितियों का पता लगाने के लिए सभी पहलुओं की जांच जारी है। इस हादसे में घायल अन्य 14 लोगों का उपचार विभिन्न अस्पतालों में चल रहा है। घायलों में बच्चे, महिलाएं और पुरुष शामिल हैं। चिकित्सकों के अनुसार कुछ घायलों की हालत में सुधार है, जबकि कुछ का उपचार अभी जारी है। लगातार बढ़ते सड़क हादसों को देखते हुए स्थानीय लोगों ने क्षेत्र में यातायात नियमों के सख्ती से पालन और तेज रफ्तार वाहनों पर नियंत्रण की मांग की है। पुलिस ने भी लोगों से सावधानीपूर्वक वाहन चलाने और यातायात नियमों का पालन करने की अपील की है।
झाबुआ में ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों पर पुलिस का शिकंजा, 14 बाइक चालकों पर कार्रवाई; 5 वाहन जब्त

मध्यप्रदेश । झाबुआ शहर में यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों के खिलाफ रविवार देर शाम पुलिस ने सख्त अभियान चलाया। सड़क सुरक्षा को लेकर चलाए गए इस विशेष अभियान में तेज रफ्तार से वाहन चलाने, तीन सवारी बैठाने, बिना नंबर प्लेट के वाहन चलाने तथा नियमों के विपरीत नंबर प्लेट का उपयोग करने वाले बाइक चालकों पर कार्रवाई की गई। पुलिस अधीक्षक Devendra Patidar के निर्देश पर यातायात विभाग ने शहर के विभिन्न क्षेत्रों में सघन चेकिंग अभियान संचालित किया। यातायात सूबेदार धर्मेंद्र पटेल के नेतृत्व में पुलिस टीम ने प्रमुख मार्गों के साथ-साथ शहर की आंतरिक गलियों में भी निगरानी रखी, ताकि नियम तोड़ने वाले वाहन चालकों को चिन्हित किया जा सके। अभियान के दौरान पुलिस ने ऐसे वाहन चालकों को रोका जो बिना नंबर प्लेट के वाहन चला रहे थे या जिनकी नंबर प्लेट पर निर्धारित मानकों के विपरीत शब्द और प्रतीक अंकित थे। इसके अलावा तेज गति से बाइक चलाने और एक ही वाहन पर तीन लोगों के सवार होने जैसी यातायात नियमों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई की गई। यातायात विभाग के अनुसार अभियान के दौरान कुल 14 बाइकों को पकड़ा गया। इनमें से 5 वाहनों को गंभीर नियम उल्लंघन के कारण जब्त कर लिया गया है। पुलिस का कहना है कि इन वाहनों को न्यायालयीन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही छोड़ा जाएगा। शेष वाहन चालकों के खिलाफ मोटर वाहन अधिनियम के तहत चालानी कार्रवाई की गई। पुलिस ने विभिन्न मामलों में जुर्माना लगाते हुए कुल 5 हजार रुपए की राशि वसूल की। अधिकारियों का कहना है कि सड़क दुर्घटनाओं को रोकने और लोगों में यातायात नियमों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से यह अभियान चलाया गया। यातायात विभाग ने वाहन चालकों से अपील की है कि वे हेलमेट का उपयोग करें, निर्धारित गति सीमा का पालन करें और वाहन से संबंधित सभी दस्तावेज अपने साथ रखें। साथ ही नंबर प्लेट को निर्धारित मानकों के अनुरूप रखने और यातायात नियमों का पालन करने की भी सलाह दी गई है। पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि शहर में ऐसे अभियान आगे भी लगातार जारी रहेंगे। नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी ताकि सड़क सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और दुर्घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण रखा जा सके। इस अभियान में यातायात विभाग के कई पुलिसकर्मियों ने भाग लिया और नियम तोड़ने वाले वाहन चालकों के विरुद्ध कार्रवाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
सोमवती अमावस्या पर श्रृंगेश्वर महादेव में उमड़ी आस्था की भीड़, जोखिम भरे नौका विहार ने बढ़ाई चिंता

मध्यप्रदेश । झाबुआ जिले के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल Shringeshwar Mahadev Temple में सोमवती अमावस्या के अवसर पर श्रद्धा और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। धार्मिक मान्यता के अनुसार सोमवती अमावस्या का विशेष महत्व माना जाता है, जिसके चलते सुबह से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर परिसर और माही नदी तट पर पहुंचने लगे। प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार दिन के पहले पहर में ही 30 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने माही नदी में स्नान कर भगवान भोलेनाथ के दर्शन किए। सुबह करीब 4 बजे से मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगनी शुरू हो गई थीं। पुरुषोत्तम मास में आई सोमवती अमावस्या के कारण श्रद्धालुओं का उत्साह और भी अधिक दिखाई दिया। नदी तट पर धार्मिक अनुष्ठान, पूजा-अर्चना और स्नान का क्रम लगातार चलता रहा। दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों के अलावा पड़ोसी जिलों और राज्यों से भी श्रद्धालु यहां पहुंचे। हालांकि श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के बीच सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कुछ चिंताजनक दृश्य भी सामने आए। माही नदी में नौका विहार के दौरान कई नावों में निर्धारित क्षमता से अधिक लोगों के बैठने की शिकायतें सामने आईं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कई श्रद्धालु बिना लाइफ जैकेट के ही नावों में यात्रा करते नजर आए। इससे स्थानीय ग्रामीणों और श्रद्धालुओं ने संभावित हादसे की आशंका जताई। मौके पर मौजूद लोगों का कहना था कि धार्मिक उत्साह के बीच कई श्रद्धालु सुरक्षा मानकों की अनदेखी कर रहे थे। प्रशासन द्वारा समय-समय पर सावधानी बरतने की अपील की गई, लेकिन भीड़ अधिक होने के कारण नियमों का पालन सुनिश्चित करना चुनौतीपूर्ण बना रहा। श्रद्धालुओं की सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस और प्रशासनिक अमला तड़के से ही सक्रिय था। झकनावदा चौकी प्रभारी सुरेंद्र सिंह सिसोदिया के नेतृत्व में पुलिस बल और विशेष सुरक्षा दल के जवान विभिन्न स्थानों पर तैनात रहे। इसके अलावा राजस्व विभाग, ग्राम पंचायत और स्थानीय प्रशासन के कर्मचारी भी व्यवस्था संभालने में जुटे रहे। प्रशासन का मुख्य फोकस भीड़ नियंत्रण, सुगम दर्शन और किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना को रोकने पर था। हालांकि, कुछ स्थानों पर बैरिकेडिंग की कमी और अत्यधिक भीड़ के कारण व्यवस्था बनाए रखना चुनौतीपूर्ण रहा। इसके बावजूद श्रद्धालुओं के आवागमन और दर्शन व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने का प्रयास लगातार जारी रहा। चौकी प्रभारी सुरेंद्र सिंह सिसोदिया ने बताया कि पुलिस और प्रशासन की टीम सुबह से ही सुरक्षा व्यवस्था में लगी हुई है। उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील की कि वे नौका विहार और अन्य गतिविधियों के दौरान सुरक्षा नियमों का पालन करें तथा प्रशासन के निर्देशों का सहयोग करें। श्रद्धालुओं ने धार्मिक आयोजन और प्रशासनिक प्रयासों की सराहना की, लेकिन साथ ही नावों में क्षमता से अधिक लोगों के बैठने और सुरक्षा उपकरणों की कमी को लेकर चिंता भी व्यक्त की। स्थानीय लोगों का मानना है कि भविष्य में ऐसे बड़े आयोजनों के दौरान नौका संचालन और घाट सुरक्षा के लिए अतिरिक्त व्यवस्थाएं की जानी चाहिए, ताकि किसी भी प्रकार की दुर्घटना की संभावना को कम किया जा सके।