गर्मी में नींबू पानी से राहत या परेशानी? जानें क्यों कुछ लोगों को होती है पेट फूलने की समस्या

नई दिल्ली । गर्मी के मौसम में नींबू पानी को एक प्राकृतिक और ताजगी देने वाला पेय माना जाता है। यह शरीर को हाइड्रेट रखने के साथ-साथ विटामिन C की पूर्ति भी करता है। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि हर व्यक्ति के शरीर पर इसका प्रभाव एक जैसा नहीं होता और कुछ लोगों को इसके सेवन के बाद सूजन या पेट फूलने जैसी समस्या का अनुभव हो सकता है। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, नींबू पानी में मौजूद साइट्रिक एसिड कुछ संवेदनशील लोगों के पाचन तंत्र को प्रभावित कर सकता है। जिन लोगों को पहले से गैस, एसिडिटी या इरिटेबल बाउल सिंड्रोम जैसी समस्या होती है, उनमें नींबू पानी के सेवन से पेट में भारीपन, गैस और ब्लोटिंग यानी सूजन की शिकायत बढ़ सकती है। हालांकि, सामान्य परिस्थितियों में नींबू पानी शरीर के लिए काफी लाभकारी माना जाता है। यह शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने, पाचन सुधारने और गर्मी में थकान कम करने में मदद करता है। लेकिन इसका अत्यधिक या गलत समय पर सेवन नुकसान भी पहुंचा सकता है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि नींबू पानी हमेशा संतुलित मात्रा में और हल्के गुनगुने या सामान्य तापमान के पानी में लिया जाना चाहिए। बहुत अधिक खट्टा या चीनी युक्त नींबू पानी भी शरीर में असंतुलन पैदा कर सकता है, जिससे सूजन जैसी समस्या उत्पन्न हो सकती है। इसके अलावा, खाली पेट अत्यधिक नींबू पानी का सेवन कुछ लोगों में एसिडिटी को बढ़ा सकता है, जो आगे चलकर पेट में सूजन और असहजता का कारण बनता है। इसलिए इसे हमेशा समझदारी और संतुलन के साथ लेना चाहिए। डॉक्टरों का मानना है कि यदि किसी व्यक्ति को नींबू पानी पीने के बाद बार-बार सूजन या पेट दर्द की समस्या हो रही है, तो उसे इसका सेवन कम कर देना चाहिए या चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए। कुल मिलाकर, नींबू पानी गर्मी में एक बेहतरीन पेय है, लेकिन इसका असर व्यक्ति की शारीरिक स्थिति पर निर्भर करता है। सही मात्रा और सही तरीके से सेवन करने पर यह लाभकारी है, जबकि असंतुलित सेवन सूजन जैसी परेशानी का कारण बन सकता है।
शिवपुरी में बड़ा घोटाला: 71 लाख की मशीन बनी 4.32 करोड़ का बोझ, EOW की सर्जिकल स्ट्राइक जारी

नई दिल्ली। शिवपुरी नगर पालिका में वर्ष 2015 के दौरान की गई स्वच्छता मशीनों की खरीद अब गंभीर सवालों के घेरे में आ गई है। उस समय लगभग 71.69 लाख रुपये की मशीनें खरीदी गई थीं लेकिन नियमों को दरकिनार कर पूरी प्रक्रिया को अंजाम दिया गया। आरोप है कि ऑनलाइन निविदा प्रक्रिया को अनदेखा करते हुए एक ही दिन में सभी कार्यादेश जारी कर दिए गए और भुगतान भी तत्काल कर दिया गया। इस पूरे मामले में एक निजी फर्म को अनुचित लाभ पहुंचाने की बात सामने आई है। जांच में यह भी पता चला है कि जिन आठ मशीनों का भुगतान किया गया उनमें से चार मशीनें नगर पालिका को कभी प्राप्त ही नहीं हुईं। दूसरा भाग करोड़ों की रिकवरी और कानूनी पेचमामला आगे बढ़ते हुए एमएसएमई काउंसिल तक पहुंचा जहां मूल राशि पर भारी ब्याज जोड़ते हुए कुल 4.32 करोड़ रुपये की रिकवरी तय की गई है। यह राशि मूल खरीद से कई गुना अधिक हो चुकी है जिससे नगर पालिका पर बड़ा वित्तीय बोझ खड़ा हो गया है। दूसरी ओर संबंधित कंपनी ने हाई कोर्ट में नगर पालिका के खिलाफ अवमानना याचिकाएं दायर कर दी हैं जिससे मामला और उलझ गया है। आगामी 11 मई 2026 को इस प्रकरण की महत्वपूर्ण सुनवाई तय की गई है। नगर पालिका प्रशासन का कहना है कि यह पूरा मामला फर्जी दस्तावेजों और गलत आदेशों के आधार पर किया गया भुगतान है जिससे संस्था को भारी नुकसान हुआ है। तीसरा भाग ईओडब्ल्यू की जांच और संभावित एफआईआरइस पूरे प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ ग्वालियर ने जांच शुरू कर दी है। ईओडब्ल्यू ने नगर पालिका से संबंधित सभी दस्तावेज तलब कर लिए हैं और अधिकारियों की भूमिका की गहन जांच की जा रही है। प्रारंभिक जांच में तत्कालीन मुख्य नगर पालिका अधिकारी सहित स्वास्थ्य विभाग और स्टोर शाखा से जुड़े अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठे हैं। एजेंसी जल्द ही एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया आगे बढ़ा सकती है। वर्तमान प्रशासन का मानना है कि यह एक सुनियोजित वित्तीय अनियमितता का मामला है जिसमें जनता के धन का दुरुपयोग हुआ है। अब यह पूरा मामला न केवल प्रशासनिक स्तर पर बल्कि कानूनी रूप से भी बड़ा रूप ले चुका है और आने वाले समय में कई और खुलासे संभव हैं। तीसरा भाग ईओडब्ल्यू की जांच और संभावित एफआईआर इस पूरे प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ ग्वालियर ने जांच शुरू कर दी है। ईओडब्ल्यू ने नगर पालिका से संबंधित सभी दस्तावेज तलब कर लिए हैं और अधिकारियों की भूमिका की गहन जांच की जा रही है। प्रारंभिक जांच में तत्कालीन मुख्य नगर पालिका अधिकारी सहित स्वास्थ्य विभाग और स्टोर शाखा से जुड़े अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठे हैं। एजेंसी जल्द ही एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया आगे बढ़ा सकती है। वर्तमान प्रशासन का मानना है कि यह एक सुनियोजित वित्तीय अनियमितता का मामला है जिसमें जनता के धन का दुरुपयोग हुआ है। अब यह पूरा मामला न केवल प्रशासनिक स्तर पर बल्कि कानूनी रूप से भी बड़ा रूप ले चुका है और आने वाले समय में कई और खुलासे संभव हैं।
गिरते Smallcap बाजार में भी चमक रही हैं ये 15 मजबूत कंपनियां, VST, Medicare और UNO Minda में दिख रहा 38% तक का अपसाइड, निवेशकों के लिए बड़ा संकेत

नई दिल्ली । बाजार में लगातार उतार-चढ़ाव का माहौल बना हुआ है और ऐसे समय में छोटे शेयरों यानी Smallcap सेगमेंट पर सबसे ज्यादा दबाव देखने को मिलता है। जब भी बाजार में गिरावट आती है, निवेशकों के बीच यह डर बढ़ जाता है कि छोटे शेयर कमजोर हो सकते हैं या उनका बिजनेस प्रभावित हो सकता है। लेकिन हर गिरता हुआ स्टॉक कमजोर कंपनी का संकेत नहीं होता। कई बार पूरा सेक्टर या बाजार का सेंटीमेंट दबाव में आ जाता है, जबकि कंपनी का असली बिजनेस और उसकी बुनियाद पहले जैसी मजबूत बनी रहती है। यही वजह है कि निवेशकों के लिए सिर्फ कीमत नहीं, बल्कि कंपनी की क्वालिटी और मैनेजमेंट को समझना ज्यादा जरूरी हो जाता है। वर्तमान स्थिति में कुछ Smallcap और Midcap कंपनियां ऐसी हैं जो गिरते बाजार के बावजूद अपने मजबूत प्रदर्शन और स्थिर मैनेजमेंट के कारण चर्चा में बनी हुई हैं। इनमें कई ऐसी कंपनियां शामिल हैं जिनका बिजनेस मॉडल मजबूत है और जिनके भविष्य में बेहतर प्रदर्शन की संभावना मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार में मौजूदा दबाव का असर इन कंपनियों की लंबी अवधि की ग्रोथ पर नहीं पड़ता, बल्कि यह निवेश के नए अवसर भी पैदा कर सकता है। VST Industries, Rainbow Children’s Medicare और UNO Minda जैसी कंपनियों को बाजार में मजबूत स्थिति वाली कंपनियों के रूप में देखा जा रहा है। इन कंपनियों के बिजनेस मॉडल स्थिर हैं और इनके मैनेजमेंट को भी अनुभवी माना जाता है। इसी वजह से इन पर निवेशकों की नजर बनी हुई है। अनुमान लगाया जा रहा है कि आने वाले समय में इनमें करीब 38 प्रतिशत तक की तेजी देखने को मिल सकती है, हालांकि यह पूरी तरह बाजार की स्थिति और कंपनी के प्रदर्शन पर निर्भर करेगा। पिछले कुछ समय से बाजार लगातार उतार-चढ़ाव के दौर से गुजर रहा है। वैश्विक अनिश्चितता, कच्चे तेल की कीमतों में बदलाव और अंतरराष्ट्रीय तनाव जैसे कारणों ने निवेशकों की चिंता को और बढ़ा दिया है। इसका सीधा असर शेयर बाजार के छोटे और मध्यम वर्ग के शेयरों पर देखने को मिला है, जहां अक्सर तेज गिरावट दर्ज की जाती है। इसके बावजूद कुछ कंपनियां ऐसी हैं जो अपने मजबूत बिजनेस स्ट्रक्चर के कारण बाजार के दबाव को बेहतर तरीके से संभाल रही हैं। JSW Infra और APL Apollo Tubes जैसी कंपनियां भी इसी श्रेणी में आती हैं, जो अपने सेक्टर में मजबूत पकड़ बनाए हुए हैं। इन कंपनियों की खासियत यह है कि इनके पास लंबे समय का विजन और स्थिर मैनेजमेंट टीम मौजूद है, जो कठिन परिस्थितियों में भी बिजनेस को संभालने की क्षमता रखती है। निवेश विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे समय में निवेशकों को केवल गिरते शेयर देखकर घबराना नहीं चाहिए, बल्कि कंपनी के फंडामेंटल्स को समझकर निर्णय लेना चाहिए। बाजार में अस्थिरता हमेशा अवसर भी लेकर आती है, और जो निवेशक सही कंपनियों की पहचान कर लेते हैं, उन्हें लंबे समय में बेहतर रिटर्न मिलने की संभावना रहती है। कुल मिलाकर, मौजूदा बाजार स्थिति यह संकेत देती है कि हर गिरता हुआ Smallcap कमजोर नहीं होता। कुछ कंपनियां ऐसी होती हैं जो गिरावट के बावजूद अपनी मजबूती बनाए रखती हैं और भविष्य में बेहतर प्रदर्शन करने की क्षमता रखती हैं। ऐसे में निवेशकों के लिए जरूरी है कि वे सतर्कता के साथ सही कंपनियों का चयन करें और केवल डर के आधार पर निर्णय न लें।
महिलाओं के लिए राहतकारी उपाय: पीरियड्स क्रैम्प्स में फायदेमंद सौंफ की चाय

नई दिल्ली । पीरियड्स के दौरान ज्यादातर महिलाओं को पेट में ऐंठन, सूजन, गैस और भारीपन जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। यह स्थिति कई बार इतनी असहज हो जाती है कि रोजमर्रा के काम भी प्रभावित होने लगते हैं। ऐसे समय में दवाओं के बजाय कुछ प्राकृतिक और घरेलू उपाय शरीर को आराम देने में मदद कर सकते हैं। इन्हीं में एक सरल और प्रभावी उपाय है सौंफ की चाय। सौंफ की चाय क्यों है इतनी फायदेमंद?सौंफ को आयुर्वेद में एक प्राकृतिक पाचन सहायक माना गया है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट, एंटीबैक्टीरियल और दर्द निवारक गुण शरीर को कई तरह से राहत देते हैं। सौंफ की चाय पीरियड्स के दौरान होने वाली पेट की ऐंठन, ब्लोटिंग और गैस को कम करने में मदद करती है। यह पाचन तंत्र को शांत करती है और शरीर में जमा अतिरिक्त पानी को बाहर निकालने में सहायक होती है, जिससे सूजन में राहत मिलती है। पीरियड्स के दर्द में कैसे काम करती है सौंफ?सौंफ की चाय शरीर के पाचन तंत्र को संतुलित करती है और आंतों की मांसपेशियों को रिलैक्स करती है। इससे पेट की ऐंठन धीरे-धीरे कम होने लगती है। इसके नियमित सेवन से न सिर्फ पीरियड्स का दर्द कम होता है, बल्कि थकान और भारीपन भी दूर होता है, जिससे शरीर हल्का और आरामदायक महसूस करता है। सिर्फ दर्द ही नहीं, कई और फायदे भीसौंफ की चाय केवल पीरियड्स दर्द में ही नहीं, बल्कि कई अन्य समस्याओं में भी लाभकारी है- पाचन तंत्र को मजबूत बनाती हैगैस और कब्ज की समस्या कम करती हैशरीर को डिटॉक्स करने में मदद करती हैहार्मोन बैलेंस को सपोर्ट करती हैत्वचा को हेल्दी और ग्लोइंग बनाती है सौंफ की चाय बनाने का आसान तरीकइस घरेलू चाय को बनाना बेहद आसान है-एक कप पानी में एक चम्मच सौंफ डालें और इसे 5–10 मिनट तक उबालें। इसके बाद इसे छानकर गर्मागर्म पिएं। स्वाद बढ़ाने के लिए चाहें तो थोड़ा शहद भी मिला सकते हैं। इसे भोजन के बाद या जब भी पेट में असहजता महसूस हो, तब पीना अधिक फायदेमंद होता है। सावधानियां भी जरूरी हैंहालांकि सौंफ की चाय सामान्य मात्रा में सुरक्षित मानी जाती है, लेकिन इसका अत्यधिक सेवन नहीं करना चाहिए। गर्भवती महिलाओं को इसका उपयोग करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए। किसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या की स्थिति में भी विशेषज्ञ से परामर्श लेना जरूरी है। छोटा उपाय, बड़ा आरामसौंफ की चाय एक सरल, सस्ता और प्राकृतिक घरेलू उपाय है जो पीरियड्स के दौरान होने वाली पेट की ऐंठन और सूजन में काफी राहत देता है। इसे अपनी दिनचर्या में शामिल करके महिलाएं बिना दवाओं के भी अपने शरीर को आराम दे सकती हैं।
SBI स्टॉक में लगातार दबाव, Q4 नतीजों के बाद 10% की गिरावट, ब्रोकरेज ने घटाए अनुमान और बढ़ाए रिस्क संकेत

नई दिल्ली । देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक के शेयरों में हाल के दिनों में तेज गिरावट देखने को मिली है। यह दबाव खास तौर पर कंपनी के तिमाही नतीजों के बाद बढ़ा है, जहां प्रदर्शन बाजार की उम्मीदों के अनुरूप नहीं माना गया। नतीजों के बाद निवेशकों की धारणा कमजोर हुई और इसका सीधा असर शेयर की कीमत पर दिखाई दिया। लगातार दो कारोबारी सत्रों में स्टॉक करीब दस प्रतिशत तक गिर चुका है, जिससे बाजार में इस बैंकिंग दिग्गज को लेकर चिंता का माहौल बन गया है। शेयर में आई इस गिरावट के बीच कई प्रमुख संस्थागत विश्लेषकों ने अपने अनुमान में बदलाव किया है। कुछ ने स्टॉक की रेटिंग को घटाते हुए इसे लेकर अधिक सतर्क रुख अपनाया है। उनका मानना है कि आने वाले समय में बैंक के रिटर्न प्रोफाइल पर दबाव देखा जा सकता है, खासकर तब जब क्रेडिट कॉस्ट में बढ़ोतरी की संभावना बनी हुई है। इसके अलावा, नए अकाउंटिंग नियमों के प्रभाव से भी बैंक के मुनाफे पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। एक प्रमुख वैश्विक विश्लेषण संस्था ने अपने पहले के सकारात्मक रुख को बदलते हुए अब इसे स्थिर दृष्टिकोण में रखा है। साथ ही शेयर के लिए तय किए गए मूल्य लक्ष्य को भी घटा दिया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा स्तरों पर वैल्यूएशन में बड़े सुधार की गुंजाइश सीमित दिख रही है। अनुमान यह भी लगाया गया है कि बैंक की संपत्ति पर रिटर्न भविष्य में कुछ दबाव में रह सकता है, जिससे निवेशकों की उम्मीदें थोड़ी कम हो सकती हैं। वहीं दूसरी ओर, कुछ अन्य विश्लेषक अभी भी इस स्टॉक को लेकर सकारात्मक दृष्टिकोण बनाए हुए हैं। उनका मानना है कि बैंक की मजबूत लोन ग्रोथ आगे चलकर स्थिति को संतुलित कर सकती है। हालांकि, वे यह भी स्वीकार करते हैं कि निकट भविष्य में मार्जिन और क्रेडिट कॉस्ट जैसे कारक चुनौती पेश कर सकते हैं। उनके अनुसार, बैंक की एसेट क्वालिटी फिलहाल स्थिर बनी हुई है, जो एक सकारात्मक संकेत माना जा सकता है। कुल मिलाकर देखा जाए तो ताजा नतीजों के बाद इस बैंकिंग शेयर में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। एक तरफ जहां कुछ विशेषज्ञ आगे दबाव की आशंका जता रहे हैं, वहीं कुछ इसे लंबी अवधि के नजरिए से स्थिर निवेश मान रहे हैं। फिलहाल बाजार की नजर आने वाले तिमाही प्रदर्शन और आर्थिक संकेतकों पर टिकी हुई है, जो इस स्टॉक की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
11 मई परमाणु ऊर्जा दिवस: इतिहास, उद्देश्य और भारत की वैज्ञानिक उपलब्धियों की कहानी

हर साल 11 मई को भारत में परमाणु ऊर्जा दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह दिन देश की वैज्ञानिक क्षमता, तकनीकी आत्मनिर्भरता और ऊर्जा क्षेत्र में भारत की प्रगति का प्रतीक माना जाता है। यह केवल एक स्मृति दिवस नहीं है, बल्कि भारत के उस ऐतिहासिक पल की याद दिलाता है जब देश ने दुनिया को अपनी वैज्ञानिक शक्ति का एहसास कराया था। इस दिन को मनाने की शुरुआत भारत के ऐतिहासिक Pokhran-II nuclear tests से जुड़ी हुई है, जो 11 मई 1998 को राजस्थान के पोखरण में किए गए थे। इन सफल परमाणु परीक्षणों के माध्यम से भारत ने वैश्विक स्तर पर यह साबित किया कि वह परमाणु तकनीक में आत्मनिर्भर और सक्षम देश है। इसी उपलब्धि की स्मृति में 11 मई को परमाणु ऊर्जा दिवस के रूप में मनाने की परंपरा शुरू हुई। क्यों मनाया जाता है परमाणु ऊर्जा दिवस?इस दिवस को मनाने का मुख्य उद्देश्य भारत की वैज्ञानिक उपलब्धियों को याद करना और परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। यह दिन हमें यह भी याद दिलाता है कि परमाणु ऊर्जा केवल रक्षा क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उपयोग देश के विकास में भी किया जा सकता है। परमाणु ऊर्जा का उपयोग बिजली उत्पादन, चिकित्सा उपचार, कृषि अनुसंधान और औद्योगिक विकास में किया जाता है। यह एक स्वच्छ और दीर्घकालिक ऊर्जा स्रोत माना जाता है, जो देश को ऊर्जा आत्मनिर्भरता की ओर ले जाने में मदद करता है। इसकी शुरुआत कब और कैसे हुई?भारत के परमाणु कार्यक्रम की नींव स्वतंत्रता के बाद ही रखी गई थी, लेकिन इसे मजबूती Bhabha Atomic Research Centre (BARC) जैसे संस्थानों के माध्यम से मिली। वैज्ञानिक होमी जे. भाभा को भारत के परमाणु कार्यक्रम का जनक माना जाता है, जिन्होंने इस क्षेत्र में मजबूत आधार तैयार किया। 1998 में जब भारत ने पोखरण-II परीक्षण सफलतापूर्वक पूरे किए, तो यह देश के इतिहास में एक बड़ा मोड़ साबित हुआ। इसके बाद भारत ने न केवल अपनी रक्षा क्षमता को मजबूत किया, बल्कि परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग को भी बढ़ावा दिया। आज के समय में इसका महत्वआज भारत परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। देश में कई परमाणु ऊर्जा संयंत्र काम कर रहे हैं, जो स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन में अहम भूमिका निभा रहे हैं। इसके साथ ही, वैज्ञानिक लगातार नई तकनीकों पर काम कर रहे हैं ताकि ऊर्जा उत्पादन को सुरक्षित और अधिक प्रभावी बनाया जा सके। परमाणु ऊर्जा दिवस युवाओं को विज्ञान और शोध के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है। यह दिन यह संदेश देता है कि अगर विज्ञान का उपयोग सही दिशा में किया जाए, तो यह देश को विकास की नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकता है। 11 मई परमाणु ऊर्जा दिवस भारत की वैज्ञानिक यात्रा का एक महत्वपूर्ण अध्याय है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि मेहनत, शोध और आत्मविश्वास के बल पर कोई भी देश वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना सकता है। यह केवल इतिहास नहीं, बल्कि भविष्य की ऊर्जा सुरक्षा और तकनीकी विकास की दिशा में एक मजबूत प्रेरणा है। -11 मई परमाणु ऊर्जा दिवस विशेष
शनि जयंती से पहले शुक्र-बुध का बड़ा राशि परिवर्तन, इन राशियों पर बरसेगी धन और तरक्की की कृपा

नई दिल्ली । इस बार शनि जयंती और शनैश्चरी अमावस्या से पहले ग्रहों की चाल खास संयोग बना रही है। 14 मई को शुक्र ग्रह वृषभ राशि में प्रवेश करेंगे, जबकि 15 मई को बुध ग्रह भी वृषभ राशि में गोचर करेंगे। 16 मई को मनाई जाने वाली शनि जयंती पर इन दोनों ग्रहों का प्रभाव कई राशियों के लिए शुभ परिणाम लेकर आ सकता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शुक्र को सुख-सुविधा, वैभव, प्रेम और ऐश्वर्य का कारक माना जाता है, जबकि बुध बुद्धिमत्ता, व्यापार, वाणी और निर्णय क्षमता से जुड़ा ग्रह है। ऐसे में दोनों ग्रहों का एक ही राशि में आना कई लोगों के करियर, आर्थिक स्थिति और रिश्तों पर सकारात्मक असर डाल सकता है। वृषभ राशवृषभ राशि वालों के लिए यह समय बेहद लाभकारी माना जा रहा है। शुक्र अपनी ही राशि में रहेंगे और बुध के साथ उनका संयोग आर्थिक उन्नति, करियर में सफलता और आकर्षण बढ़ाने वाला साबित हो सकता है। नौकरी में प्रमोशन और नए अवसर मिलने के योग हैं। मिथुन राशिमिथुन राशि के जातकों को अचानक लाभ मिल सकता है। विदेश से जुड़े कार्यों में सफलता मिलने की संभावना है। नई योजनाएं शुरू करने के लिए भी समय अनुकूल रहेगा। कर्क राशिकर्क राशि वालों की आय में वृद्धि के संकेत हैं। मित्रों और संपर्कों से फायदा मिल सकता है। निवेश से भी अच्छा लाभ मिलने की संभावना जताई जा रही है। सिंह राशिसिंह राशि के लोगों को करियर में प्रगति मिल सकती है। कार्यक्षेत्र में मेहनत की सराहना होगी और नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं। सामाजिक मान-सम्मान भी बढ़ेगा। कन्या राशकन्या राशि वालों के लिए भाग्य मजबूत रहेगा। लंबे समय से अटके काम पूरे हो सकते हैं। शिक्षा, यात्रा और नई शुरुआत के मामलों में भी सफलता मिलने के संकेत हैं।
IPL 2026: चेन्नई सुपर किंग्स ने लखनऊ सुपर जायंट्स को 5 विकेट से हराया, LSG प्लेऑफ की दौड़ से लगभग बाहर

नई दिल्ली । इंडियन प्रीमियर लीग (IPL 2026) के 53वें मुकाबले में रविवार (10 मई) को चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) ने लखनऊ सुपर जायंट्स (LSG) को रोमांचक मैच में 5 विकेट से हरा दिया। चेन्नई के एमए चिदंबरम स्टेडियम में खेले गए इस मुकाबले में लखनऊ ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 204 रनों का बड़ा लक्ष्य रखा, जिसे चेन्नई ने चार गेंद शेष रहते हासिल कर लिया। इस हार के साथ लखनऊ की प्लेऑफ की उम्मीदें लगभग खत्म हो गईं। लखनऊ की दमदार शुरुआत, इंग्लिस का तूफानटॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करते हुए लखनऊ सुपर जायंट्स की शुरुआत शानदार रही। जोश इंग्लिस और मिचेल मार्श ने पहले विकेट के लिए 77 रनों की तेज साझेदारी की। मिचेल मार्श 10 रन बनाकर आउट हुए, जबकि निकोलस पूरन सिर्फ 1 रन ही बना सके। जोश इंग्लिस ने 33 गेंदों पर 85 रनों की तूफानी पारी खेली, जिसमें 10 चौके और 6 छक्के शामिल थे। कप्तान ऋषभ पंत भी 15 रन बनाकर पवेलियन लौट गए। अंत में शाहबाज अहमद (43* रन) की नाबाद पारी की बदौलत लखनऊ ने 203/8 का स्कोर खड़ा किया। सीएसके की ओर से जेमी ओवर्टन ने शानदार गेंदबाजी करते हुए 3 विकेट लिए। चेन्नई की जवाबी पारी, उर्विल पटेल का धमाका204 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी चेन्नई सुपर किंग्स की शुरुआत तेज रही। संजू सैमसन और ऋतुराज गायकवाड़ ने 22 गेंदों में 45 रन जोड़े। इसके बाद उर्विल पटेल ने मैदान पर आते ही आक्रामक बल्लेबाजी की और सिर्फ 13 गेंदों में फिफ्टी पूरी कर ली। उन्होंने कुल 23 गेंदों में 63 रन बनाए, जिसमें 8 छक्के शामिल थे। हालांकि वह शाहबाज अहमद की गेंद पर आउट हो गए। ऋतुराज गायकवाड़ ने 42 रनों की पारी खेली, लेकिन उनके आउट होते ही सीएसके ने कुछ विकेट जल्दी गंवा दिए। अंत में दुबे और वीर ने दिलाई जीतआखिरी ओवरों में शिवम दुबे (15*) और प्रशांत वीर (18*) ने संयम से खेलते हुए टीम को जीत दिलाई। चेन्नई ने 19.2 ओवर में लक्ष्य हासिल कर लिया। पॉइंट्स टेबल पर असरइस जीत के साथ चेन्नई सुपर किंग्स ने 11 मैचों में 12 अंक हासिल कर लिए हैं, जबकि लखनऊ सुपर जायंट्स 11 मैचों में सिर्फ 3 जीत के साथ 6 अंकों पर ही सिमट गई है और प्लेऑफ की दौड़ से लगभग बाहर हो गई है। हेड-टू-हेड रिकॉर्डदोनों टीमों के बीच अब तक 7 मुकाबले हुए हैं, जिनमें चेन्नई और लखनऊ ने 3-3 मैच जीते हैं, जबकि 1 मैच बेनतीजा रहा है।
CM बनते ही रिलीज होगी विजय की फिल्म ‘जना नायकन’? 2 हफ्तों में सिनेमाघरों देगी दस्तक! प्रोड्यूसर के बयान से बढ़ी हलचल

नई दिल्ली। तमिल सुपरस्टार और राजनीतिक पारी की ओर बढ़ रहे विजय की फिल्म ‘जन नायकन’ को लेकर फैंस लंबे समय से इंतजार कर रहे हैं। अब इस इंतजार पर जल्द ही विराम लग सकता है।फिल्म के प्रोड्यूसर वेंकट के नारायण ने संकेत दिया है कि अगर सभी प्रक्रियाएं समय पर पूरी हो जाती हैं, तो फिल्म अगले 14 दिनों के भीतर सिनेमाघरों में रिलीज हो सकती है। CBFC प्रक्रिया में अंतिम चरण, तेजी से हो रहा कामप्रोड्यूसर के अनुसार फिल्म फिलहाल सेंसर सर्टिफिकेशन (CBFC) की अंतिम प्रक्रिया में है।टीम लगातार बोर्ड के संपर्क में है ताकि सभी औपचारिकताएं जल्द पूरी की जा सकें। निर्माताओं का कहना है कि वे फिल्म को जल्द से जल्द दर्शकों तक पहुंचाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। विजय की राजनीतिक पारी और फिल्म का खास कनेक्शफिल्म ‘जन नायकन’ सिर्फ एक एंटरटेनमेंट प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि विजय के राजनीतिक सफर से भी जुड़ी मानी जा रही है। प्रोड्यूसर के मुताबिक, फिल्म का टाइटल “जनता का नायक” उनके वास्तविक जीवन और तमिलनाडु की राजनीति में उनकी नई भूमिका से मेल खाता है। इसी वजह से इसे उनकी राजनीति में सक्रिय होने से पहले आखिरी फिल्म भी माना जा रहा है। सेट पर विजय की अनुशासन की तारीफप्रोड्यूसर वेंकट के नारायण ने विजय के साथ काम करने के अनुभव को साझा करते हुए उनकी जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि विजय बेहद अनुशासित और कमिटेड अभिनेता हैं, जो अपने हर वादे को पूरी जिम्मेदारी से निभाते हैं। फिल्म की शूटिंग के दौरान उनका प्रोफेशनल रवैया टीम के लिए प्रेरणादायक रहा। लीक विवाद और चुनौतियों के बावजूद मजबूत टीमफिल्म का सफर आसान नहीं रहा। पिछले समय में इसे ऑनलाइन लीक होने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा। इस मामले में कई लोगों की गिरफ्तारी भी हुई थी। इसके बावजूद फिल्म की टीम ने हार नहीं मानी और अब पूरी फोकस ग्रैंड थिएट्रिकल रिलीज पर है। ‘जन नायकन’ को लेकर बनी हलचल साफ दिखाती है कि यह फिल्म सिर्फ एक रिलीज नहीं, बल्कि विजय के करियर और राजनीतिक सफर का अहम मोड़ मानी जा रही है। अगर सब कुछ तय योजना के अनुसार रहा तो अगले 2 हफ्तों में यह फिल्म बड़े पर्दे पर धमाका कर सकती है।
पहाड़ों के बीच बसा रहस्य: अफगानिस्तान में मौजूद प्राचीन हिंदू मंदिर बना टूरिस्ट्स का आकर्षण

नई दिल्ली। अफगानिस्तान की राजधानी काबुल के ऊंचे पहाड़ी इलाके में स्थित आसामाई मंदिर सदियों पुराना धार्मिक स्थल माना जाता है। यह मंदिर मां दुर्गा के स्वरूप को समर्पित है और कहा जाता है कि यह लगभग 2000 साल पुराना है। पहाड़ों के बीच स्थित यह मंदिर न सिर्फ धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि अफगानिस्तान के प्राचीन सांस्कृतिक इतिहास की भी झलक दिखाता है। 2. कुषाण काल से जुड़ता इतिहास, कई बार हुआ पुनर्निर्माणइतिहासकारों के अनुसार इस मंदिर की जड़ें संभवतः कुषाण काल तक जाती हैं। माना जाता है कि प्राचीन समय में भारत और अफगानिस्तान के बीच मजबूत सांस्कृतिक और व्यापारिक संबंध थे, जिनका प्रभाव इस मंदिर के निर्माण में भी दिखता है। समय-समय पर युद्ध और हमलों में मंदिर को नुकसान पहुंचा, लेकिन हर बार इसका पुनर्निर्माण कर इसे संरक्षित किया गया। 3. युद्ध और बदलाव के बीच भी कायम रही पहचानअफगानिस्तान में दशकों से चले संघर्षों और खासकर तालिबान शासन के बाद वहां हिंदू और सिख समुदाय की संख्या बेहद कम हो गई। कई परिवारों को देश छोड़ना पड़ा, लेकिन आसामाई मंदिर आज भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराता है। यह मंदिर उन गिने-चुने स्थानों में से है जहां हिंदू परंपरा की झलक अब भी जीवित है। 4. रहस्यमयी पहाड़ और आध्यात्मिक मान्यताएंस्थानीय मान्यताओं के अनुसार मंदिर जिस पहाड़ पर स्थित है, वह रहस्यमयी ऊर्जा से जुड़ा हुआ माना जाता है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यहां सच्चे मन से की गई प्रार्थनाएं पूरी होती हैं। नवरात्रि के समय यहां विशेष पूजा का आयोजन भी किया जाता था, हालांकि अब भक्तों की संख्या काफी कम हो गई है। 5. अफगानिस्तान की ऐतिहासिक धरोहर और विदेशी आकर्षणआसामाई मंदिर काबुल शहर का एक ऊंचाई से दिखने वाला महत्वपूर्ण स्थल है, जहां से पूरा शहर नजर आता है। यह मंदिर विदेशी पर्यटकों और इतिहास में रुचि रखने वालों के लिए भी आकर्षण का केंद्र रहा है। यह भारत और अफगानिस्तान के पुराने सांस्कृतिक संबंधों का प्रतीक माना जाता है। 6. यात्रा और वर्तमान स्थितिजो लोग इस मंदिर को देखना चाहते हैं उन्हें काबुल पहुंचना होता है। वहां से स्थानीय वाहन के जरिए मंदिर तक जाया जा सकता है। हालांकि मौजूदा सुरक्षा परिस्थितियों को देखते हुए यात्रा से पहले सरकारी एडवाइजरी और सुरक्षा जानकारी लेना बेहद जरूरी है। आसामाई मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि इतिहास, आस्था और संघर्ष की कहानी है। हजारों साल पुराना यह मंदिर आज भी अफगानिस्तान की पहाड़ियों में खड़ा होकर बीते युग की याद दिलाता है और यह साबित करता है कि संस्कृति और आस्था समय के साथ मिटती नहीं, बल्कि बदलते हालात में भी जीवित रहती है।