प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में पूरे देश में हुआ है खादी पुनर्जागरण का सूत्रपात : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि खादी केवल वस्त्र नहीं, बल्कि राष्ट्र की गौरवशाली पहचान है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में खादी को “नए भारत की नई खादी” के रूप में नई पहचान मिली है, जिससे पूरे देश में खादी पुनर्जागरण का सूत्रपात हुआ है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रविवार को एक बयान में कहा कि आत्मनिर्भर मध्य प्रदेश, युवाओं का सशक्तिकरण और ग्रामीण विकास उनकी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में है। मप्र खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के माध्यम से खादी और ग्रामोद्योग राज्य की प्रगति का सशक्त स्तंभ बन रहे हैं। बुनकर मुद्रा योजना के तहत पिछले तीन वर्षों 2023-24 से 2025-26 में कुल 194 बुनकरों को 268.50 लाख रुपये का ऋण वितरित किया गया है। वर्ष 2023-24 में 44 बुनकरों को 21.40 लाख, 2024-25 में 147 बुनकरों को 231.80 लाख और 2025-26 में 3 बुनकरों को 15.30 लाख रुपये का ऋण दिया गया। उन्होंने कहा कि गांधीजी के ‘ग्राम स्वराज’ और ‘गाँव की ओर जाओ’ संदेश को साकार करते हुए बोर्ड ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन, परंपरागत कारीगरी को आधुनिक नवाचार से जोड़ने और सांस्कृतिक गौरव को बढ़ाने का कार्य कर रहा है। प्रदेश के कुटीर एवं ग्रामोद्योग राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिलीप जायसवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के “आत्मनिर्भर भारत, भारत में बनाओ, स्वदेशी के लिए मुखर, स्टार्टअप इंडिया” जैसे अभियानों और “सबका साथ, सबका विकास” मंत्र ने खादी एवं ग्रामोद्योग को वैश्विक पहचान दिलाई है। “स्थानीय से वैश्विक” का दृष्टिकोण कारीगरों और ग्रामीण उद्यमियों को मुख्यधारा की अर्थव्यवस्था से जोड़ रहा है। राज्यमंत्री जायसवाल ने कहा कि भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय द्वारा 50 हजार से 5 लाख तक की ऋण सुविधा व्यक्तिगत बुनकर, उद्यमी, स्व-सहायता समूह, हथकरघा संगठन और सहकारी समितियों को दी जा रही है। बुनकरों की सामाजिक सुरक्षा के लिए प्रधानमंत्री जीवन बीमा योजना में तीन वर्षों में 616 बुनकर और प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना में 840 बुनकर बीमित किए गए। प्रधानमंत्री जीवन बीमा योजना में 436 रुपये वार्षिक शुल्क पर 2 लाख का जीवन बीमा और प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना में मात्र 20 रुपये वार्षिक शुल्क पर 2 लाख का दुर्घटना बीमा मिल रहा है। राज्यमंत्री जायसवाल ने कहा कि म.प्र. खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड सूती, ऊनी, रेशमी एवं पॉलीवस्त्र खादी के साथ मसाले, साबुन, जड़ी-बूटी उत्पाद एवं हस्तनिर्मित वस्तुओं को बढ़ावा दे रहा है। विपणन के लिए “विन्ध्या वैली” और “कबीरा” जैसे नाम स्थापित किए गए हैं जो गुणवत्ता और परंपरा के प्रतीक हैं। “अपना हाथ – अपना साथ” के मार्गदर्शन में महिला स्व-सहायता समूहों, कारीगरों और उद्यमियों को तकनीकी एवं वित्तीय सहयोग दिया जा रहा है। प्रबंध संचालक माल सिंह भयड़िया ने बताया कि महात्मा गांधी जी के “गाँव की ओर चलो” आह्वान से प्रेरित होकर मंडल ने ग्रामोद्योग को आर्थिक एवं सामाजिक परिवर्तन का सशक्त साधन बनाया है। सुव्यवस्थित योजनाओं से ग्रामीण कारीगरों के उत्पादों को उचित बाजार मिल रहा है। बोर्ड की नई अंतरजाल साइट कारीगरों, उद्यमियों एवं समाज के बीच मजबूत सेतु का कार्य करेगी। प्रशिक्षण कार्यक्रम और प्रदर्शनियाँ प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर को भी संरक्षित कर रही हैं।तीन वर्षों की प्रगति एक नजर में– बुनकर मुद्रा योजना: 194 बुनकरों को 268.50 लाख रुपये का ऋण वितरित– प्रधानमंत्री जीवन बीमा योजना: 616 बुनकर बीमित– प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना: 840 बुनकर बीमित
हीटवेव और बाढ़ से निपटने के लिए अमित शाह ने बुलाई हाई लेवल मीटिंग… दिए ये निर्देश

नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने रविवार को दिल्ली में एक हाई लेवल मीटिंग (High Level Meeting.) में देश में संभावित बाढ़ और हीट वेव (Floods and Heat Waves) से निपटने की तैयारियों की समीक्षा की. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में हमें ‘जीरो कैजुअल्टी डिजास्टर मैनेजमेंट’ के लिए काम करना होगा. मीटिंग में देश के हर राज्य में बाढ़ संकट प्रबंधन टीमों (FCMT) के गठन, हीटवेव से कृषि क्षेत्र को होने वाले नुकसान को न्यूनतम रखने और मौसम संबंधी योजनाओं को जमीनी स्तर तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने पर फोकस किया गया। इसके साथ ही भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) और सेंट्रल वाटर कमीशन के मौसम और बाढ़ संबंधी पूर्वानुमान के समय को 3 दिन से बढ़ाकर 7 दिन करने की बात भी कही गई। एनडीएमए के दिशानिर्देशों का पालनगृह मंत्रालय की ओर से कहा गया कि आपदाओं को लेकर नेशनल डिज़ास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDMA) द्वारा जारी दिशानिर्देशों के पालन की राज्य, जिला और नगरपालिका स्तर पर नियमित समीक्षा की जानी चाहिए। जल संचय और चेक डैम परियोजनाओं के जरिए जलस्तर सुधारने और जल संरक्षण की संभावनाओं को बढ़ाने पर जोर दिया गया. इसके अलावा कैम्पा फंड का इस्तेमाल पर्यावरण संतुलन के लिए किए जा रहे प्रयासों को और प्रभावी बनाने के लिए कहा गया है. साथ ही, कम से कम 60 जोखिम वाली झीलों के लिए पूर्व चेतावनी प्रणाली विकसित करने की योजना पर काम करने के निर्देश दिए हैं. सभी राज्यों में स्टेट-लेवल इंटीग्रेटेड रिज़र्वॉयर ऑपरेशंस लागू करने पर भी जोर दिया गया. मौसम संबंधी पूर्वानुमानों और चेतावनियों का व्यापक और प्रभावी प्रचार-प्रसार की बात भी कही गई.
फैमिली ट्रिप के लिए परफेक्ट डेस्टिनेशन, अहमदाबाद की ये 6 जगहें बना देंगी सफर यादगार

नई दिल्ली । अहमदाबाद, गुजरात का एक प्रमुख और ऐतिहासिक शहर, अपनी समृद्ध संस्कृति, विरासत और आधुनिक जीवनशैली के कारण देशभर के यात्रियों के बीच खास पहचान रखता है। यह शहर केवल व्यापार और उद्योग के लिए ही नहीं, बल्कि घूमने-फिरने और फैमिली ट्रिप के लिए भी एक बेहतरीन विकल्प माना जाता है। यहां की हर जगह अपने आप में एक अलग कहानी और अनुभव समेटे हुए है, जो किसी भी यात्रा को यादगार बना देती है। परिवार के साथ घूमने के लिए अहमदाबाद में कई ऐसी जगहें हैं, जहां इतिहास, अध्यात्म और मनोरंजन का शानदार मिश्रण देखने को मिलता है। यह शहर हर उम्र के लोगों के लिए कुछ न कुछ खास लेकर आता है, जिससे यात्रा का अनुभव और भी समृद्ध हो जाता है। साबरमती नदी के किनारे स्थित साबरमती आश्रम शहर की सबसे शांत और ऐतिहासिक जगहों में से एक है। यह स्थान महात्मा गांधी के जीवन और उनके विचारों से गहराई से जुड़ा हुआ है। यहां का वातावरण बेहद शांत और प्रेरणादायक होता है, जो यात्रियों को एक अलग ही अनुभव देता है। परिवार के साथ यहां समय बिताना न केवल सुकून देता है बल्कि इतिहास से जुड़ने का अवसर भी प्रदान करता है। इसके बाद कांकड़िया लेक एक ऐसा स्थान है जो बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी के लिए आकर्षण का केंद्र है। यह एक लोकप्रिय पिकनिक स्पॉट है जहां बोटिंग, टॉय ट्रेन और मनोरंजन की कई सुविधाएं उपलब्ध हैं। शाम के समय यहां का दृश्य बेहद खूबसूरत हो जाता है और यह जगह परिवार के साथ समय बिताने के लिए आदर्श मानी जाती है। अहमदाबाद का अक्षरधाम मंदिर अपनी भव्यता और आध्यात्मिक वातावरण के लिए प्रसिद्ध है। मंदिर की वास्तुकला देखने योग्य है और यहां का शांत माहौल मन को सुकून प्रदान करता है। लाइट और साउंड शो इस स्थान को और भी आकर्षक बना देता है, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं। इतिहास में रुचि रखने वाले लोगों के लिए अडालज बावड़ी एक अनोखी जगह है। यह बावड़ी अपनी जटिल नक्काशी और वास्तुकला के लिए जानी जाती है। यह स्थान पुराने समय की कला और निर्माण शैली को बेहद सुंदर तरीके से प्रस्तुत करता है। फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए भी यह जगह काफी खास मानी जाती है। विज्ञान और तकनीक में रुचि रखने वाले लोगों के लिए साइंस सिटी एक शानदार विकल्प है। यहां विज्ञान से जुड़ी कई रोचक प्रदर्शनी और गतिविधियां देखने को मिलती हैं, जो बच्चों और युवाओं के लिए ज्ञानवर्धक और मनोरंजक दोनों होती हैं। यह जगह सीखने और समझने का एक बेहतरीन माध्यम बन जाती है। इसके अलावा लॉ गार्डन नाइट मार्केट शॉपिंग और खाने-पीने के शौकीनों के लिए एक खास स्थान है। यहां गुजराती हस्तशिल्प, पारंपरिक वस्तुएं और स्वादिष्ट स्ट्रीट फूड का आनंद लिया जा सकता है। रात के समय यहां की रौनक और भी बढ़ जाती है, जो पर्यटकों को आकर्षित करती है। कुल मिलाकर अहमदाबाद एक ऐसा शहर है जहां हर कोना कुछ नया अनुभव कराता है। यह शहर इतिहास, संस्कृति और आधुनिकता का ऐसा संगम है, जो इसे फैमिली ट्रिप के लिए एक परफेक्ट डेस्टिनेशन बनाता है। यहां की यात्रा न केवल मनोरंजक होती है बल्कि यादों में हमेशा के लिए बस जाने वाली भी बन जाती है।
आज का धार्मिक योग: 11 मई को भगवान शिव की आराधना का खास महत्व

नई दिल्ली । हिंदू धर्म में सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित माना जाता है और इस दिन शिव आराधना का विशेष महत्व होता है। 11 मई, सोमवार को ऐसा ही एक अत्यंत शुभ और पावन संयोग बन रहा है, जिसे धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से बेहद फलदायी बताया जा रहा है। इस दिन श्रद्धालुओं द्वारा की जाने वाली शिव पूजा जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने वाली मानी जा रही है। मान्यता है कि भगवान शिव अत्यंत भोले और शीघ्र प्रसन्न होने वाले देव हैं। सोमवार के दिन यदि सच्चे मन से उनकी आराधना की जाए तो सभी प्रकार के दुख, रोग और बाधाओं का नाश होता है। 11 मई का यह विशेष दिन भक्तों के लिए और भी अधिक महत्वपूर्ण इसलिए माना जा रहा है क्योंकि इस दिन ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति भी शिव भक्ति के अनुकूल मानी जा रही है, जिससे पूजा का फल कई गुना बढ़ सकता है। शिव मंदिरों में इस दिन सुबह से ही भक्तों की भीड़ उमड़ने की संभावना है। लोग जलाभिषेक, बेलपत्र, धतूरा, भस्म और पुष्प अर्पित कर भगवान शिव को प्रसन्न करने का प्रयास करेंगे। “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप इस दिन विशेष रूप से लाभकारी बताया जा रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो भक्त इस दिन व्रत रखते हैं और पूरी श्रद्धा के साथ शिवलिंग का अभिषेक करते हैं, उनके जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है। साथ ही विवाह, नौकरी, व्यापार और स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं में भी राहत मिलने के योग बनते हैं। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, सोमवार और शिव आराधना का यह संयोग मानसिक शांति और आत्मिक बल को बढ़ाने वाला होता है। यह दिन विशेष रूप से उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है जो लंबे समय से किसी परेशानी या बाधा से जूझ रहे हैं। भक्तों को सलाह दी जाती है कि वे इस दिन प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और शिवलिंग पर जल, दूध एवं पंचामृत अर्पित करें। इसके बाद ध्यान और मंत्र जाप के माध्यम से भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने का प्रयास करें। कुल मिलाकर 11 मई का यह सोमवार धार्मिक दृष्टि से अत्यंत शुभ अवसर लेकर आ रहा है, जो भक्तों के जीवन में नई ऊर्जा और सकारात्मकता का संचार करने वाला माना जा रहा है।
चीता माताओं के संघर्ष कहानी…. विदेशी धरती से आकर कूनो में बढाया वंश…. मदर्स डे पर शॉर्ट फिल्म रिलीज

श्योपुर। मदर्स-डे (Mother’s Day) के मौके पर कूनो नेशनल पार्क प्रबंधन (Kuno National Park Management) ने चीता माताओं (Cheetah Mothers) के संघर्ष और मातृत्व को समर्पित एक शॉर्ट फिल्म जारी की, जो भारतीय जंगलों में चीतों की नई पीढ़ी को बसाने में उनकी भूमिका को दर्शाती है. इसमें बताया गया कि प्रोजेक्ट चीता के तहत पिछले साढ़े तीन सालों में भारत में चीतों का कुनबा बढ़कर अब 57 हो गया है. इस प्रोजेक्ट की सफलता में मादा चीतों का योगदान सबसे अहम रहा है। नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से आईं 6 मादा चीतों में से 5 ने शावकों को जन्म दिया है. भारत में जन्मी 2 मादा चीतों ने भी सफलतापूर्वक प्रजनन कर शावकों को जन्म दिया है. पिछले साढ़े तीन वर्षों में कुल 49 शावकों का जन्म हुआ, जिनमें से 37 पूरी तरह स्वस्थ और सुरक्षित हैं। कूनो पार्क की इन माताओं ने न सिर्फ खुद को भारत के माहौल में ढाला, बल्कि अपने शावकों को भी शिकार और सुरक्षा के उपाय सिखाए. वर्तमान में चीते कूनो और उसके आसपास के करीब 5 हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुके हैं। फिल्म में चीता मदर्स और उनके शावकों के संघर्ष की दिखी झलक.अलग-अलग देशों से लाए गए चीतों के कारण आनुवंशिक विविधता मजबूत हुई है, जिससे इनब्रीडिंग का खतरा टल गया है. दूसरी पीढ़ी (एफ-2 जेनरेशन) के शावकों का आना इस बात का सबूत है कि भारत में चीतों की आबादी अब धीरे-धीरे आत्मनिर्भर बन रही है। कूनो प्रबंधन अब नए क्षेत्रों में भी चीतों को बसाने की तैयारी कर रहा है,जहां दक्षिण अफ्रीका, नामीबिया और भारत में जन्मे चीतों का एक मिला-जुला समूह रखा जाएगा. इस विशेष मौके पर कूनो के फील्ड स्टाफ, डॉक्टरों और वन अधिकारियों की मेहनत को भी सराहा गया, जिनकी दिन-रात की निगरानी की वजह से यह अभियान आज इस मुकाम पर पहुंचा है। प्रोजेक्ट चीता के डायरेक्टर उत्तम कुमार शर्मा ने बताया कि कूनो पार्क में चीता प्रोजेक्ट सफलता के नए आयाम गढ़ रहा है. विदेशी धरती से चीते लाकर बसाए गए जिन्होंने यहां नई पीढ़ी को जन्म देकर चीता प्रोजेक्ट को सफल बनाया है. 10 मई को मदर्स-डे है, लिहाजा हमने मां के रूप में मादा चीताओं और उनके शावकों की ममत्वमयी तस्वीर पेश करने का प्रयास किया है।
PM मोदी की देशवासियों से अपील… बोले- एक साल तक सोना खरीदने से बचें….

नई दिल्ली। पीएम नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने रविवार को देशवासियों से 1 साल तक सोना ना खरीदने का आग्रह किया। साथ ही उन्होंने लोगों से विदेश यात्रा (Foreign travel) को आगे बढ़ाने की भी बात कही। प्रधानमंत्री ने यह अपील ऐसे समय में की है जब युद्ध की वजह से दुनिया भर में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। पीएम मोदी की इस अपील के पीछे की वजह फॉरेन एक्सचेंज (foreign exchange) की बचत को माना जा रहा है। ईरान-अमेरिका युद्ध (Iran-US war) की वजह से दुनिया भर में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। कच्चे तेल की कीमतें सातवें आसमान पर हैं। साथ पूरी सप्लाई चेन तहस-नहस हो गई है। जिससे भारत जैसे आयात करने वाले देश अधिक प्रभावित हुए हैं। बता दें, पीएम मोदी अपनी अपील के जरिए फॉरेन एक्सचेंज आउटफ्लो को कम करना चाहते हैं। पीएम नरेंद्र मोदी ने अपनी अपील को देशभक्ति के साथ जोड़ा है। उन्होंने तेल की बचत करने का भी आग्रह किया है। पीएम ने लोगों को पब्लिक ट्रांसपोर्ट, वर्क फ्रॉम होम सिस्टम, नेचुरल फार्मिंग और स्वदेशी प्रोडक्ट्स का उपयोग करने की सलाह दी है। क्यों है गोल्ड का आयात इतना महत्वपूर्ण? (Why Gold matters)भारत दुनिया का सबसे अधिक गोल्ड आयात करने वाले देशों में से एक है। भारत का घरेलू मांग विदेशी आयात पर निर्भर करता है। क्योंकि भारत से खरीदे गए गोल्ड के लिए डॉलर में भुगतान करना होता है इसलिए यह भारत जैसे देशों पर अतिरिक्त दबाव बनाता है। इससे इंपोर्ट बिल बढ़ता है। फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व लगातार घटता है। यह चिंता मौजूदा परिस्थितियों में और बढ़ जाती है। भारत अपनी जरूरत का 85 प्रतिशत तेल इंपोर्ट करता है। ऐसे में कच्चे तेल का बढ़ता रेट भी अतिरिक्त दबाव बना रहा है। बता दें, तेल और खाद के खर्च की वजह से डॉलर की निकासी पर दबाव बढ़ रहा है। ऐसे में अगर देश कम सोना खरीदता है तो वह रुपये की सेहत के लिए भी अच्छा रहेगा। वहीं, इससे ट्रेड बैलेंस भी बेहतर होगा। भारत का फॉरेक्स रिजर्व मजबूत (India forex reserves)फॉरेक्स रिजर्व के मोर्चे पर अभी घबराने की कोई जरूरत नहीं है। मार्च 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार भारत का फॉरेक्स रिजर्व 691.11 अरब डॉलर है। जोकि 11 महीने के इंपोर्ट के लिए काफी है। रिपोर्ट के अनुसार भारत का फॉरेक्स रिजर्व में गोल्ड का शेयर मार्च 2026 तक बढ़कर 16.70 प्रतिशत हो गया है। सितंबर 2025 तक यह 13.92 प्रतिशत था।
ईरान के यूरेनियम भंडार पर US की नजर…. ट्रंप बोले- उसके पास गए तो उड़ा दिए जाओगे

वाशिंगटन। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने रविवार को कहा कि अमेरिका (America) ईरान (Iran) के संवर्धित यूरेनियम भंडार (Enriched Uranium Reserves) पर सख्त नजर रखे हुए है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि यदि कोई भी उस स्थान के पास पहुंचने की कोशिश करता है तो वाशिंगटन को तुरंत पता चल जाएगा और उसे उड़ा दिया जाएगा। ट्रंप ने कहा कि हमें वो किसी न किसी समय मिल ही जाएगा… हम उस पर नजर रख रहे हैं। मैंने ‘स्पेस फोर्स’ नाम की एक संस्था बनाई है और वे उस पर नजर रख रहे हैं। अगर कोई भी उस जगह के पास पहुंचा, तो हमें पता चल जाएगा और हम उसे उड़ा देंगे। शैरिल एटकिंसन के साथ बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि हमें वो किसी न किसी समय मिल ही जाएगा… हम उस पर नजर रख रहे हैं। मैंने ‘स्पेस फोर्स’ नाम की संस्था बनाई है और वे उस पर पूरी नजर रखे हुए हैं। अगर कोई भी उस जगह के पास पहुंचा तो हमें पता चल जाएगा और हम उसे उड़ा देंगे। उन्होंने आगे कहा कि स्पेस फोर्स इतना सक्षम है कि अगर कोई अंदर घुसा भी तो उसका नाम, पता और बैज नंबर तक बता सकता है। वहीं, ईरान के साथ चल रहे सैन्य संघर्ष पर बोलते हुए ट्रंप ने दावा किया कि ईरान पूरी तरह से सैन्य रूप से पराजित हो चुका है। उन्होंने कहा कि उनके पास न नौसेना बची है, न वायुसेना, न विमानरोधी हथियार और न ही कोई नेता। ट्रंप ने कहा कि ईरान लगातार समझौते करता और तोड़ता रहा, लेकिन अब सैन्य दृष्टि से वह पूरी तरह कमजोर हो गया है। इस दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने यह भी कहा कि अगर अमेरिका आज ईरान को अकेला छोड़ दे तो उसे अपने ढांचे को दोबारा खड़ा करने में करीब 20 साल लग जाएंगे। ईरान में जारी अमेरिकी सैन्य अभियान के बारे में पूछे जाने पर ट्रंप ने बताया कि अभियान अभी समाप्त नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि हम दो हफ्ते और अभियान जारी रख सकते हैं। साथ ही उन्होंने दावा किया कि अमेरिका ने 70 प्रतिशत लक्ष्यों को नष्ट कर दिया है। ट्रंप ने कहा कि यह तो बस अंतिम काम होगा… लेकिन अगर हम वह भी नहीं करते तो भी उन्हें पुनर्निर्माण में 20 साल लग जाएंगे। इस दौरान ट्रंप ने जोर देकर कहा कि वे ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने की कभी अनुमति नहीं देंगे और इसे ‘पागलपन’ करार दिया। उन्होंने ओबामा प्रशासन द्वारा 2015 में हस्ताक्षरित संयुक्त व्यापक कार्य योजना (JCPOA) का जिक्र करते हुए कहा कि अगर उन्होंने उस समझौते को समाप्त नहीं किया होता तो ईरान अब तक इजराइल और पूरे मध्य पूर्व पर परमाणु हथियारों का इस्तेमाल कर चुका होता।
सप्ताह में 4 दिन काम…. 3 दिन आराम का रास्ता साफ… सरकार ने नोटिफाई किया नया लेबर कोड

नई दिल्ली। सरकार (Government) ने चारों लेबर कोड (All four Labor Codes) के तहत नियमों को नोटिफाई कर दिया है। इन नए नियमों से कुछ चुनिंदा सेक्टरों में सप्ताह में चार दिन काम और 3 दिन की छुट्टी लागू करने का रास्ता साफ हो गया है। नए केंद्रीय कोड ऑन वेज के अनुसार, किसी भी कर्मचारी के लिए साप्ताहिक काम के घंटे 48 घंटे से अधिक नहीं होंगे। यानी अब कंपनी और कर्मचारी चाहें तो इन 48 घंटों को केवल 4 दिनों में बांट सकते हैं यानी प्रतिदिन 12 घंटे काम करके। बदले में उन्हें 3 दिन की छुट्टी यानी सप्ताह में तीन रेस्ट डे मिल सकती है। हालांकि, यह सुविधा सभी के लिए समान नहीं है। दिहाड़ी मजदूरों के लिए एक सामान्य कार्य दिवस 8 घंटे का ही रहेगा, इससे अधिक काम पर ओवरटाइम मिलेगा। साथ ही, ओवरटाइम की दर अब सामान्य दर की दोगुनी कर दी गई है। नए श्रम कानून कर्मचारियों को अधिक लचीलापन और बेहतर सामाजिक सुरक्षा देने की दिशा में एक बड़ा कदम हैं। हालांकि यह चार-दिवसीय कार्य सप्ताह अभी शुरुआती चरण में है और केवल चुनिंदा सेक्टरों में ही संभव है, फिर भी यह भारत में कामकाज के भविष्य का एक नया मॉडल पेश करता है। किन क्षेत्रों में 4 डे वर्क वीक की संभावना?बिजनेस स्टैंडर्ड की खबरे के अनुसार, जिन क्षेत्रों में शिफ्ट-बेस्ड या प्रोजेक्ट-ड्रिवन काम होता है, वहां इसे आसानी से लागू किया जा सकता है। जैसे, मैन्युफैक्चरिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर, IT और शेयर्ड सर्विसेज। हालांकि, जिन सेक्टरों में ग्राहकों की तत्काल जरूरतें और रियल-टाइम डिलीवरी की उम्मीद होती है, जैसे कुछ बैंकिंग, रिटेल या कस्टमर सपोर्ट, उनके लिए यह व्यावहारिक रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकता है। अंतिम नियमों में बड़े बदलावगौरतलब है कि सरकार ने शुक्रवार (10 मई, 2026) को सभी चार लेबर कोड के अंतिम नियम जारी किए। इनमें शामिल हैं। इनमें इंडस्ट्रियल रिलेशन कोड 2020, कोड ऑन वेज 2019, सोशल सिक्योरिटी कोड 2020 और ऑक्यूपेशन सेफ्टी, हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशन कोड 2020 शामिल हैं। संसद द्वारा ये कानून पारित किए लगभग 6 साल बाद, 30 से अधिक गजेट नोटिफिकेशन के जरिए इन नियमों को अंतिम रूप दिया गया। दिसंबर 2025 में जो ड्राफ्ट जारी किया गया था, उसमें न्यूनतम वेतन तय करने के लिए कैलोरी इनटेक, कपड़े, किराया, ईंधन खर्च आदि के मानदंड थे। लेकिन अंतिम नियमों में इन्हें हटा दिया गया है। अब सरकार बाद में अलग से आदेश जारी करेगी। कर्मचारियों पर क्या क्या होगा असर?कंपनी या संस्थान को अनिवार्य नियुक्ति पत्र हर कर्मचारी को देना होगा। ओवरटाइम भुगतान के स्पष्ट प्रावधान होगा। वर्कर रिस्किलिंग फंड में योगदान करना होगा। एक साल की सेवा के बाद ग्रेच्युटी देनी होगी। इस नए कोड में आश्रित माता-पिता के लिए मासिक आय सीमा ₹9,000 से बढ़ाकर ₹14,000 कर दी गई है। कंपनियों के लिए क्या हैं चुनौतियांकंपनियों को अब ओवरटाइम भुगतान और रिस्किलिंग योगदान के कारण लागत में बढ़ोतरी का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही, उन्हें एचआर प्रथाओं को औपचारिक रूप देना होगा, काम के घंटे ट्रैक करने होंगे और अनिवार्य स्वास्थ्य लाभ देने होंगे।
हंगरी में 16 साल बाद बदली सत्ता… नया PM के शपथ समारोह में सहयोगी सांसदों ने जमकर किया डांस

बुडापेस्ट। हंगरी (Hungary) के नए प्रधानमंत्री पीटर माग्यार (New Prime Minister Peter Magyar) ने शनिवार को पद की शपथ ली। नई संसद के उद्घाटन सत्र में हुए मतदान के बाद उन्होंने देश की व्यवस्था बदलने का संकल्प लिया। शपथ ग्रहण समारोह (Swearing Ceremony) के दौरान उनके सहयोगी सांसद और ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ ज्सोल्ट हेगेदुस ने अलग अंदाज में डांस कर सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया। अब यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। दरअसल, 45 वर्षीय पीटर माग्यार ने औपचारिक रूप से प्रधानमंत्री पद संभाल लिया, जिसके साथ ही विक्टर ओर्बन (Viktor Orban) का 16 साल लंबा शासन समाप्त हो गया। माग्यार की तिस्जा पार्टी ने 12 अप्रैल को हुए संसदीय चुनाव में भारी जीत दर्ज की थी और 199 सीटों वाली संसद में 141 सीटें हासिल की है। शपथ ग्रहण के बाद माग्यार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो शेयर करते हुए लिखा कि हंगरी की नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह। हंगेरियन होना इतना सुखद कभी नहीं रहा। समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि मैं हंगरी पर शासन नहीं करूंगा, बल्कि अपने देश की सेवा करूंगा। उन्होंने हंगरी के इतिहास में एक नया अध्याय शुरू करने और ऐसी सरकार बनाने का वादा किया जो न सिर्फ सत्ता बल्कि पूरी व्यवस्था को बदल दे। इस दौरान मग्यार ने कहा कि मैं यहां इसलिए नहीं खड़ा हूं क्योंकि मैं देश में किसी और से अलग हूं। मैं यहां इसलिए खड़ा हूं क्योंकि लाखों हंगरीवासियों ने बदलाव लाने का फैसला किया है। हमें जो विश्वास मिला है, वह हमारे लिए सम्मान और नैतिक दायित्व दोनों है, लेकिन साथ ही एक अद्भुत एहसास भी है। हालांकि माग्यार का भाषण पूरी तरह राजनीतिक था, लेकिन सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा चर्चा स्वास्थ्य मंत्री पद की दावेदारी रखने वाले ज्सोल्ट हेगेदुस के डांस की हो रही है। अप्रैल में तिस्जा पार्टी की चुनावी रैली में उनके जोशीले नृत्य का वीडियो पहले ही वायरल हो चुका था। शनिवार को उन्होंने संसद की सीढ़ियों पर और डेन्यूब नदी किनारे जमा हजारों समर्थकों के सामने फिर से अपना डांस दोहराया, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में माग्यार अन्य सांसदों के साथ तालियां बजाते नजर आ रहे हैं। दूसरी ओर जानकारों का कहना है कि हंगरी में मग्यार की सरकार आने से हंगरी के यूरोपीय संघ के साथ राजनीतिक समीकरणों में बदलाव आएगा। दरअसल, पूर्व प्रधानमंत्री ने महत्वपूर्ण निर्णयों पर बार-बार वीटो किया है, जिनमें हाल में पड़ोसी यूक्रेन को समर्थन देने से संबंधित निर्णय को वीटो करना शामिल है।
राष्ट्रीय महिला स्वास्थ्य जांच दिवस: महिलाओं के स्वास्थ्य, जागरूकता और समय पर जांच का महत्व

राष्ट्रीय महिला स्वास्थ्य जांच दिवस (National Women’s Health Check-up Day) महिलाओं के स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच की आदत को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण दिवस है। यह दिन इस बात पर जोर देता है कि महिलाओं को अपने स्वास्थ्य को लेकर लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए, बल्कि नियमित जांच और सही देखभाल को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाना चाहिए। आज के समय में महिलाएं परिवार और समाज की जिम्मेदारियों में इतनी व्यस्त हो जाती हैं कि अक्सर अपने स्वास्थ्य को नजरअंदाज कर देती हैं। इसी कारण कई बीमारियां शुरुआती अवस्था में पहचान में नहीं आतीं और बाद में गंभीर रूप ले लेती हैं। इस दिन का मुख्य संदेश यही है कि समय पर जांच कई गंभीर रोगों से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है। विशेषज्ञों के अनुसार महिलाओं को नियमित रूप से ब्लड प्रेशर, शुगर, एनीमिया, हार्मोनल असंतुलन और स्तन कैंसर जैसी बीमारियों की जांच करानी चाहिए। शुरुआती जांच से न केवल बीमारी का पता जल्दी चलता है, बल्कि उसका इलाज भी आसान और प्रभावी हो जाता है। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में इस दिन के अवसर पर स्वास्थ्य शिविर, जागरूकता कार्यक्रम और निःशुल्क जांच कैंप आयोजित किए जाते हैं। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य महिलाओं को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना और उन्हें नियमित जांच के लिए प्रेरित करना होता है। राष्ट्रीय महिला स्वास्थ्य जांच दिवस इस बात का भी संदेश देता है कि स्वस्थ महिला ही एक स्वस्थ परिवार और समाज की नींव होती है। जब महिलाएं शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ होती हैं, तो उनका प्रभाव पूरे परिवार और आने वाली पीढ़ियों पर सकारात्मक पड़ता है। आज के बदलते समय में तनाव, असंतुलित जीवनशैली और गलत खानपान महिलाओं के स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव डाल रहे हैं। ऐसे में यह दिन हमें याद दिलाता है कि स्वास्थ्य की उपेक्षा नहीं की जा सकती और समय पर जांच ही सुरक्षित जीवन की कुंजी है। कुल मिलाकर यह दिवस महिलाओं को अपने स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने, नियमित जांच कराने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करता है, ताकि वे एक मजबूत और स्वस्थ समाज के निर्माण में अपनी भूमिका और बेहतर तरीके से निभा सकें। -11 मई विशेष