डाइट में एकरूपता से खतरा: आंतों की सेहत बिगड़ने का बढ़ सकता है जोखिम

नई दिल्ली । आज की तेज रफ्तार जिंदगी में कई लोग सुविधा के चलते रोजाना एक ही तरह का भोजन करने लगते हैं। लेकिन हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह आदत लंबे समय में शरीर के लिए नुकसानदायक साबित हो सकत है, खासकर गट हेल्थ यानी आंतों की सेहत पर इसका सीधा असर पड़ता है। विशेषज्ञों के अनुसार, हमारे पाचन तंत्र में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया शरीर की इम्यूनिटी को मजबूत करने और भोजन को पचाने में अहम भूमिका निभाते हैं। जब डाइट में विविधता नहीं होती और लगातार एक ही तरह का खाना खाया जाता है, तो इन बैक्टीरिया की विविधता कम होने लगती है। इसका असर सीधे पाचन पर पड़ता है और गैस, कब्ज, ब्लोटिंग और थकान जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। हेल्थ एक्सपर्ट्स का यह भी कहना है कि ज्यादा समय तक ऑयली या प्रोसेस्ड फूड का सेवन करने से स्थिति और गंभीर हो सकती है। शरीर को संतुलित रूप से काम करने के लिए अलग-अलग पोषक तत्वों की जरूरत होती है, जो एक ही तरह के भोजन से पूरी नहीं हो पाती। डॉक्टरों की सलाह है कि गट हेल्थ को बेहतर बनाए रखने के लिए डाइट में विविधता बेहद जरूरी है। रोजाना भोजन में अलग-अलग तरह के फल, हरी सब्जियां, दालें, साबुत अनाज और फर्मेंटेड फूड शामिल करने चाहिए। इससे शरीर को आवश्यक विटामिन और मिनरल मिलते हैं और पाचन तंत्र मजबूत होता है। इसके अलावा पर्याप्त मात्रा में पानी पीना और हल्की शारीरिक गतिविधि करना भी आंतों के स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद माना जाता है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि हर सप्ताह डाइट में कुछ नई और हेल्दी चीजें जरूर शामिल करनी चाहिए, ताकि शरीर को सभी जरूरी पोषक तत्व मिलते रहें और स्वास्थ्य संतुलित बना रहे।
शिव भक्ति का महत्व: सोमवार को बेलपत्र चढ़ाने से दूर होते हैं सभी कष्ट, जानें धार्मिक फल

नई दिल्ली । हिंदू धर्म में सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित माना जाता है और इस दिन शिव मंदिर जाकर पूजा-अर्चना करने का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि सोमवार के दिन सच्चे मन से शिव दर्शन करने और उन्हें बेलपत्र अर्पित करने से जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आने लगते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव को बेलपत्र अत्यंत प्रिय है। कहा जाता है कि केवल एक बेलपत्र श्रद्धा और भक्ति के साथ अर्पित करने से भी शिवजी शीघ्र प्रसन्न हो जाते हैं। बेलपत्र अर्पण का अर्थ केवल एक पूजा सामग्री नहीं, बल्कि यह समर्पण और आस्था का प्रतीक माना जाता है। सोमवार व्रत के दिन शिवालय जाने वाले भक्त सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करते हैं और शिवलिंग पर जल, दूध, धतूरा और विशेष रूप से बेलपत्र अर्पित करते हैं। इस दौरान “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करने से पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है। मान्यता है कि बेलपत्र अर्पित करने से व्यक्ति के जीवन में चल रही बाधाएं दूर होती हैं। मानसिक तनाव, रोग, आर्थिक समस्याएं और पारिवारिक कलह जैसी परेशानियों से राहत मिलने के योग बनते हैं। साथ ही, भगवान शिव की कृपा से सुख-शांति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है। धार्मिक ग्रंथों और पुराणों में भी बेलपत्र के महत्व का उल्लेख मिलता है। कहा जाता है कि बेलपत्र में तीन पत्तियां त्रिदेवोंब्रह्मा, विष्णु और महेश का प्रतीक मानी जाती हैं, और इसे शिवलिंग पर अर्पित करना अत्यंत पुण्यकारी माना गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, सोमवार के दिन शिव मंदिर में जाना केवल धार्मिक परंपरा ही नहीं, बल्कि मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त करने का माध्यम भी है। मंदिर का शांत वातावरण और मंत्रोच्चारण व्यक्ति के मन को स्थिरता प्रदान करता है। भक्तों का विश्वास है कि यदि कोई व्यक्ति लगातार सोमवार व्रत रखकर शिवजी की सच्चे मन से पूजा करता है, तो उसके जीवन में धीरे-धीरे सभी कष्ट समाप्त होने लगते हैं और नई संभावनाओं के द्वार खुलते हैं। कुल मिलाकर, सोमवार के दिन शिव मंदिर जाना और भगवान शिव को बेलपत्र अर्पित करना केवल एक धार्मिक क्रिया नहीं, बल्कि आस्था, विश्वास और आत्मिक शांति का ऐसा माध्यम है, जो भक्त के जीवन में सुख, समृद्धि और संतुलन लाने में सहायक माना जाता है।
भीषण गर्मी से बचाव: हीट वेव में सुरक्षित रहने के आसान और असरदार तरीके

नई दिल्ली । देश के कई हिस्सों में तापमान लगातार बढ़ रहा है और हीट वेव की स्थिति लोगों की सेहत के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही है। तेज धूप और गर्म हवाओं के कारण डिहाइड्रेशन, लू लगना, चक्कर आना, कमजोरी और यहां तक कि गंभीर मामलों में हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, गर्मी के इस चरम मौसम में थोड़ी सी लापरवाही भी स्वास्थ्य पर भारी पड़ सकती है। इसलिए घर से बाहर निकलने से पहले कुछ जरूरी सावधानियां अपनाना बेहद महत्वपूर्ण है। शरीर को हाइड्रेट रखना सबसे जरूरी कदमगर्मी में सबसे पहले ध्यान रखने वाली बात है पर्याप्त पानी पीना। शरीर में पानी की कमी होने से डिहाइड्रेशन और लू लगने का खतरा बढ़ जाता है। घर से बाहर निकलने से पहले पानी जरूर पिएं और साथ में बोतल भी रखें। इसके अलावा नींबू पानी, छाछ या ओआरएस का सेवन भी शरीर को ठंडा और हाइड्रेटेड रखने में मदद करता है। हल्के और ढीले कपड़े पहनेंगर्मी में तंग और गहरे रंग के कपड़े शरीर की गर्मी बढ़ा सकते हैं। इसलिए सूती, हल्के और ढीले कपड़े पहनना बेहतर होता है। सफेद या हल्के रंग के कपड़े धूप को कम अवशोषित करते हैं और शरीर को ठंडा रखने में मदद करते हैं। धूप से बचाव के लिए जरूरी सुरक्षाघर से बाहर निकलते समय सिर को ढकना बेहद जरूरी है। इसके लिए छाता, टोपी या स्कार्फ का उपयोग करें। साथ ही सनग्लासेज पहनने से आंखों को तेज धूप से सुरक्षा मिलती है। सीधे सूरज की रोशनी में लंबे समय तक रहने से बचें, खासकर दोपहर 12 से 4 बजे के बीच। हल्का और ताजा खाना खाएंगर्मी में भारी और मसालेदार भोजन शरीर में गर्मी बढ़ा सकता है। इसलिए हल्का और ताजा भोजन करें।फल, सलाद, दही और तरल पदार्थों को डाइट में शामिल करें ताकि शरीर को जरूरी पोषण भी मिले और गर्मी से राहत भी। लू लगने के लक्षण पहचानना जरूरीअगर किसी व्यक्ति को तेज सिरदर्द, उल्टी, चक्कर, अत्यधिक पसीना या कमजोरी महसूस हो तो यह लू के संकेत हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में तुरंत ठंडी जगह पर जाएं, पानी पिएं और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से संपर्क करें। सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव हैहीट वेव के दौरान थोड़ी सी सावधानी आपको गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से बचा सकती है। पर्याप्त पानी पीना, सही कपड़े पहनना, धूप से बचाव और हल्का भोजन करना जैसी आदतें अपनाकर आप गर्मी के कहर से खुद को सुरक्षित रख सकते हैं।
मंगल का मेष राशि में महागोचर: इन राशियों की चमकेगी किस्मत, कुछ को रहना होगा बेहद सावधान

नई दिल्ली। मंगल ग्रह 11 मई 2026 को अपनी ही राशि मेष में प्रवेश करने जा रहे हैं, जिसे ज्योतिष शास्त्र में बेहद प्रभावशाली गोचर माना जाता है। ग्रहों के सेनापति मंगल के इस राशि परिवर्तन का असर सभी 12 राशियों पर पड़ेगा। किसी के करियर और धन में तरक्की होगी तो किसी को गुस्से, तनाव और रिश्तों में उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ सकता है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार जब कोई ग्रह अपनी स्वामित्व वाली राशि में आता है तो उसकी शक्ति कई गुना बढ़ जाती है। ऐसे में साहस, ऊर्जा, आत्मविश्वास और भूमि-संपत्ति के कारक मंगल का प्रभाव भी बेहद तेज रहने वाला है। इस दौरान फैसले लेने की क्षमता मजबूत होगी और कई लोगों के जीवन में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। मेष राशि वालों के लिए यह गोचर सबसे खास माना जा रहा है। आत्मविश्वास बढ़ेगा, रुके काम पूरे होंगे और करियर में नई सफलता मिलने के योग बन रहे हैं। व्यापार और धन लाभ के नए रास्ते भी खुल सकते हैं। वृषभ राशि वालों को इस दौरान रिश्तों और खर्चों को लेकर सावधानी बरतनी होगी। गुस्से और अहंकार से नुकसान हो सकता है, हालांकि पारिवारिक संबंधों में गहराई बढ़ने के संकेत हैं। मिथुन राशि के जातकों के लिए मंगल का यह गोचर लाभकारी साबित हो सकता है। आय के नए स्रोत बनेंगे और लंबे समय से अटके काम पूरे होने की संभावना है। दोस्तों और करीबी लोगों का सहयोग भी मिलेगा। कर्क राशि वालों के लिए यह समय करियर में बड़ी उपलब्धि दिला सकता है। नौकरी और कारोबार में मेहनत का शानदार परिणाम मिल सकता है और कार्यक्षेत्र में अलग पहचान बनने के योग हैं। सिंह राशि वालों को भाग्य का पूरा साथ मिलेगा। यात्रा, संपत्ति और धार्मिक कार्यों में लाभ के संकेत हैं। कई महत्वपूर्ण काम आसानी से पूरे हो सकते हैं। कन्या राशि वालों को स्वास्थ्य और मानसिक तनाव को लेकर सतर्क रहने की जरूरत होगी। आर्थिक मामलों में जल्दबाजी नुकसान पहुंचा सकती है, इसलिए सोच-समझकर फैसला लेना बेहतर रहेगा। तुला राशि वालों के लिए यह गोचर मिले-जुले परिणाम लेकर आएगा। दांपत्य जीवन और साझेदारी के मामलों में सावधानी जरूरी होगी, हालांकि व्यापार में नए अवसर मिल सकते हैं। वृश्चिक राशि वालों को शत्रुओं पर विजय और आत्मबल में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। स्वास्थ्य में सुधार होगा और नई योजनाएं सफल हो सकती हैं। धनु राशि वालों के लिए शिक्षा, प्रेम संबंध और संतान पक्ष से जुड़ी खुशखबरी मिलने की संभावना है। हालांकि बिना सोचे-समझे फैसले लेने से बचना होगा। मकर राशि वालों के जीवन में घर, वाहन और संपत्ति को लेकर हलचल बढ़ सकती है। परिवार में महत्वपूर्ण चर्चा हो सकती है और कार्यक्षेत्र में संतुलन बनाकर चलना जरूरी रहेगा। कुंभ राशि वालों का आत्मविश्वास बढ़ेगा और धन लाभ के योग बनेंगे। भाई-बहनों का सहयोग मिलेगा और नए काम शुरू करने के लिए समय अनुकूल रहेगा। मीन राशि वालों को आर्थिक मामलों में सुधार देखने को मिल सकता है, लेकिन वाणी पर नियंत्रण रखना बेहद जरूरी होगा। छोटी बातों पर विवाद रिश्तों में दूरी बढ़ा सकता है। ज्योतिष विशेषज्ञों का मानना है कि मंगल का यह गोचर ऊर्जा और परिवर्तन का बड़ा संकेत है। ऐसे में सकारात्मक सोच और संयम के साथ लिया गया फैसला कई राशियों के लिए जीवन बदलने वाला साबित हो सकता है।
आज का कुंभ राशिफल 11 मई: जानें कैसा रहेगा आपका दिन और क्या कहते हैं सितारे

नई दिल्ली । कुंभ राशि के जातकों के लिए 11 मई का दिन मिलाजुला लेकिन सकारात्मक संकेत देने वाला रहेगा। आज आपके विचारों में स्पष्टता आएगी और लंबे समय से रुके हुए कामों में धीरे-धीरे गति देखने को मिलेगी। किसी पुराने संपर्क या मित्र से लाभ मिलने की संभावना भी बन रही है। करियर और नौकरीकार्यस्थल पर आज आपको अपनी मेहनत का परिणाम मिल सकता है। सहकर्मियों का सहयोग मिलेगा और किसी नए प्रोजेक्ट पर काम शुरू होने के संकेत हैं। हालांकि जल्दबाजी में कोई निर्णय लेने से बचें, वरना छोटी गलती नुकसान दे सकती है। आर्थिक स्थितिपैसों के मामले में दिन सामान्य रहेगा। अचानक खर्च सामने आ सकते हैं, इसलिए बजट का ध्यान रखें। निवेश करने से पहले अच्छी तरह सोच-विचार करना जरूरी होगा। प्रेम और संबंधरिश्तों में आज थोड़ी भावनात्मक समझ की जरूरत रहेगी। जीवनसाथी या पार्टनर के साथ छोटी बातों को लेकर बहस से बचें। अविवाहित लोगों के लिए कोई नया प्रस्ताव आ सकता है। स्वास्थ्यसेहत के लिहाज से दिन ठीक रहेगा, लेकिन मानसिक तनाव से बचना जरूरी है। पर्याप्त पानी पिएं और आराम पर ध्यान दें। सिरदर्द या थकान महसूस हो सकती है। सलाहआज धैर्य और संयम आपके लिए सबसे बड़ा हथियार रहेगा। किसी भी काम में जल्दबाजी न करें और अपने निर्णय सोच-समझकर लें।
गर्मियों में मिलने वाला औषधीय फल, शरीर के लिए बेहद फायदेमंद

नई दिल्ली । प्रकृति ने इंसानों को स्वास्थ्य के लिए अनेक ऐसे फल और पौधे दिए हैं, जो बिना किसी दवा के शरीर को मजबूत बनाने में मदद करते हैं। इन्हीं में से एक है लसोड़ा, जिसे ‘इंडियन चेरी’ के नाम से भी जाना जाता है। यह एक जंगली फल है, जो पोषक तत्वों से भरपूर होने के कारण सेहत के लिए बेहद लाभकारी माना जाता है। लसोड़ा का वैज्ञानिक नाम कॉर्डिया डाइकोटोमा है। यह एक तेजी से बढ़ने वाला पर्णपाती वृक्ष होता है, जो आमतौर पर 10 से 20 मीटर तक ऊंचा हो सकता है। इसके फल, पत्ते और बीज सभी औषधीय गुणों से युक्त होते हैं और आयुर्वेद में इनका लंबे समय से उपयोग किया जाता रहा है। इस फल में प्रोटीन, फाइबर, कैल्शियम, फॉस्फोरस, जिंक और आयरन जैसे कई महत्वपूर्ण पोषक तत्व पाए जाते हैं। इन्हीं गुणों के कारण इसे प्राकृतिक रूप से शरीर को पोषण देने वाला फल माना जाता है। बिहार वन एवं पर्यावरण विभाग के अनुसार, यह न केवल स्वास्थ्य बल्कि पर्यावरण के लिए भी बेहद उपयोगी वृक्ष है, क्योंकि इसे आसानी से उगाया जा सकता है और यह प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने में मदद करता है। लसोड़े का स्वाद पकने पर मीठा होता है, जबकि कच्चे फल का उपयोग गोंद जैसी सामग्री के रूप में किया जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों में इसका उपयोग सब्जी, अचार और चटनी बनाने में भी किया जाता है, जो स्वाद के साथ-साथ सेहत के लिए भी फायदेमंद होता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, लसोड़े में मौजूद उच्च फाइबर पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है और कब्ज जैसी समस्याओं से राहत दिलाने में मदद करता है। इसमें मौजूद आयरन शरीर में खून की कमी यानी एनीमिया को दूर करने में सहायक है। वहीं कैल्शियम और फॉस्फोरस हड्डियों को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसके अलावा इसमें पाए जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट शरीर को हानिकारक फ्री रेडिकल्स से बचाते हैं और इम्युनिटी को मजबूत बनाते हैं। यही कारण है कि इसे एक प्राकृतिक स्वास्थ्य रक्षक फल माना जाता है। गर्मियों के मौसम में आसानी से मिलने वाला यह फल न केवल ताजे रूप में खाया जा सकता है, बल्कि अचार और सब्जी के रूप में भी इसका उपयोग किया जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसे नियमित आहार में शामिल करने से शरीर को प्राकृतिक रूप से बेहतर पोषण मिलता है और कई बीमारियों से बचाव संभव है।
आज का राशिफल 11 मई 2026: सिंह राशि को तरक्की के संकेत, मीन को मिल सकता है नया पद

नई दिल्ली । 11 मई 2026, सोमवार का दिन ज्योतिषीय दृष्टि से कई राशियों के लिए नए अवसर और प्रगति लेकर आ सकता है। पंचांग के अनुसार इस दिन नवमी तिथि दोपहर 03:25 तक रहेगी, इसके बाद दशमी तिथि शुरू होगी। पूरे दिन शतभिषा नक्षत्र का प्रभाव रहेगा। ज्योतिषाचार्य डॉ. अनीष व्यास के अनुसार इस दिन कई शुभ योग जैसे ऐन्द्र, बुधादित्य, मालव्य, रूचक, वाशि और सुनफा योग बन रहे हैं, जो कुछ राशियों के लिए विशेष रूप से लाभकारी रहेंगे। चंद्रमा पूरे दिन कुंभ राशि में रहेंगे और राहु के साथ ग्रहण दोष भी बना रहेगा, इसलिए कुछ समय सावधानी रखने की सलाह दी गई है। हालांकि सुबह 10:15 से 11:15 और शाम 04:00 से 06:00 का समय शुभ माना गया है। मेष राशिदिन अच्छा रहेगा। रुके हुए काम पूरे हो सकते हैं और नौकरी के नए अवसर मिलने के संकेत हैं। आत्मविश्वास बढ़ेगा। वृषभ राशिथोड़ी सावधानी जरूरी है। व्यापार और रिश्तों में गलतफहमी से बचें। खर्चों पर नियंत्रण रखें। मिथुन राशिमानसिक दबाव या काम में रुकावटें आ सकती हैं। वाणी और निर्णयों में संयम रखें। कर्क राशिबहुत शुभ दिन। कोई बड़ी इच्छा पूरी हो सकती है और समाज में मान-सम्मान बढ़ेगा। सिंह राशि दिन अनुकूल है। करियर में उन्नति के योग बन रहे हैं। मित्रों से आर्थिक लाभ और नई नौकरी के अवसर मिल सकते हैं। कन्या राशिउतार-चढ़ाव भरा दिन। स्वास्थ्य का ध्यान रखें और विवादों से दूर रहें। तुला राशिलाभ और यात्रा के योग बन रहे हैं। निवेश से फायदा हो सकता है। वृश्चिक राशिनए काम शुरू करने के लिए अच्छा समय है। सहयोग मिलेगा और प्रगति के अवसर बनेंगे। धनु राशिरुके हुए कार्य पूरे होंगे। परिवार में खुशी का माहौल रहेगा और धार्मिक कार्यों में रुचि बढ़ेगी। मकर राशिदिन भागदौड़ भरा रहेगा, लेकिन सहयोग से काम पूरे हो जाएंगे। कुंभ राशिसकारात्मक दिन। व्यापार में प्रगति और मांगलिक कार्यों के योग हैं। मीन राशि नया पद या जिम्मेदारी मिलने की संभावना है। कार्यक्षेत्र में सतर्कता जरूरी रहेगी।
रोग पंचक 2026: मौसम बदलते ही बढ़ी चिंता! 14 मई तक सेहत पर मंडरा सकता है खतरा, जानें क्या करें और क्या नहीं

नई दिल्ली। Rog Panchak 2026: मई की तेज गर्मी के बीच मौसम लगातार करवट बदल रहा है। कहीं बारिश तो कहीं उमस लोगों की परेशानी बढ़ा रही है। इसी बीच 10 मई 2026 से रोग पंचक की शुरुआत ने धार्मिक और ज्योतिष मान्यताओं को मानने वाले लोगों की चिंता और बढ़ा दी है। ज्योतिष शास्त्र में रोग पंचक को स्वास्थ्य के लिहाज से संवेदनशील समय माना जाता है। मान्यता है कि इस दौरान संक्रमण, मौसमी बीमारियां और शारीरिक कमजोरी तेजी से बढ़ सकती है। ऐसे में बदलते मौसम और रोग पंचक का यह संयोग लोगों को विशेष सावधानी बरतने का संकेत दे रहा है। ज्योतिष गणना के अनुसार रोग पंचक 10 मई 2026 को दोपहर 12 बजकर 8 मिनट से शुरू होकर 14 मई 2026 की रात 10 बजकर 34 मिनट तक रहेगा। पंचक तब बनता है जब चंद्रमा कुंभ और मीन राशि में भ्रमण करते हुए धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती नक्षत्रों से गुजरता है। वहीं रविवार के दिन शुरू होने वाले पंचक को रोग पंचक कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पंचक काल को ऊर्जा परिवर्तन का समय माना गया है। इस दौरान शरीर और मन दोनों को संतुलित रखना बेहद जरूरी बताया गया है। मान्यता है कि इस समय लापरवाही करने पर बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। खासकर जब मौसम तेजी से बदल रहा हो, तब सर्दी, वायरल, बुखार, एलर्जी और संक्रमण जैसी समस्याएं लोगों को अधिक परेशान कर सकती हैं। मौसम विभाग की ओर से कई राज्यों में बारिश और तेज हवाओं की चेतावनी भी जारी की गई है। दिन में तेज गर्मी और शाम को अचानक मौसम बदलने से लोगों की इम्यूनिटी पर असर पड़ सकता है। यही वजह है कि रोग पंचक के दौरान स्वास्थ्य को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरतने की सलाह दी जा रही है। ज्योतिषाचार्य अनीष व्यास के अनुसार रोग पंचक के समय बाहर का बासी और तला-भुना भोजन खाने से बचना चाहिए। नियमित रूप से हल्दी, तुलसी और गुनगुने पानी का सेवन लाभकारी माना गया है। साथ ही पूजा-पाठ, ध्यान और महामृत्युंजय मंत्र का जाप मानसिक तनाव कम करने और सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखने में मदद कर सकता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दौरान विवाह, गृह प्रवेश, नामकरण, सगाई, दक्षिण दिशा की यात्रा और घर निर्माण जैसे शुभ कार्यों से भी बचने की सलाह दी जाती है। हालांकि ज्योतिष और धार्मिक मान्यताएं आस्था का विषय हैं, इसलिए किसी भी स्वास्थ्य समस्या में डॉक्टर की सलाह लेना सबसे जरूरी माना जाता है।
शिव पूजा का महत्व: आखिर क्यों प्रिय हैं भगवान भोलेनाथ को जल और बेलपत्र

नई दिल्ली । भगवान शिव को देवों के देव महादेव कहा जाता है। मान्यता है कि शिवजी अपने भक्तों की सच्ची भक्ति से जल्दी प्रसन्न हो जाते हैं। उन्हें प्रसन्न करने के लिए कठिन तपस्या की जरूरत नहीं होती, बल्कि केवल जल और बेलपत्र अर्पित करने से भी भोलेनाथ कृपा बरसाते हैं। यही कारण है कि हर सोमवार और विशेष रूप से सावन माह में शिव मंदिरों में जलाभिषेक और बेलपत्र चढ़ाने की परंपरा निभाई जाती है।लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर भगवान शिव पर जल और बेलपत्र ही क्यों चढ़ाया जाता है? इसके पीछे एक बेहद रोचक और पौराणिक कथा जुड़ी हुई है। समुद्र मंथन से जुड़ी है यह पौराणिक कथापुराणों के अनुसार, एक समय देवताओं और दानवों के बीच समुद्र मंथन हुआ। इस मंथन से अमृत सहित कई दिव्य वस्तुएं निकलीं, लेकिन सबसे पहले एक भयंकर विष निकला, जिसे “हलाहल विष” कहा गया। यह विष इतना घातक था कि उसके प्रभाव से पूरा संसार संकट में पड़ गया। देवता और दानव दोनों ही उसके प्रभाव को रोकने में असमर्थ थे। तब सृष्टि को बचाने के लिए भगवान शिव ने उस विष का पान कर लिया। भगवान शिव ने विष को अपने कंठ में ही रोक लिया, जिससे उनका गला नीला पड़ गया और तभी से उन्हें “नीलकंठ” कहा जाने लगा। जल और बेलपत्र से शांत हुई महादेव की तपनहलाहल विष का प्रभाव इतना तीव्र था कि भगवान शिव का शरीर अत्यधिक गर्म हो गया। उनके शरीर की तपन से वातावरण भी प्रभावित होने लगा। मान्यता है कि उस समय देवताओं ने भगवान शिव को शीतलता प्रदान करने के लिए उन पर जल अर्पित किया। वहीं बेलपत्र को विषनाशक और शीतल माना जाता है, इसलिए शिवजी को बेलपत्र भी चढ़ाया गया। जल और बेलपत्र से भगवान शिव को राहत मिली और तभी से शिवलिंग पर जलाभिषेक और बेलपत्र अर्पित करने की परंपरा शुरू हो गई, जो आज भी श्रद्धा के साथ निभाई जाती है। जलाभिषेक करते समय रखें इन नियमों का ध्यानधार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शिवलिंग पर जल चढ़ाते समय कुछ विशेष नियमों का पालन करना जरूरी माना गया है- जलाभिषेक हमेशा शिवलिंग का ही करेंजल में तुलसी पत्र न डालें, क्योंकि शिव पूजा में तुलसी वर्जित मानी जाती हैशिवलिंग की पूरी परिक्रमा नहीं करनी चाहिएजलाभिषेक के दौरान शिवलिंग को बार-बार स्पर्श करने से बचेंपूजा के समय शांत और श्रद्धापूर्ण वातावरण बनाए रखेंमान्यता है कि उचित विधि और मंत्रोच्चार के साथ किया गया जलाभिषेक विशेष फलदायी होता है। बेलपत्र चढ़ाने का धार्मिक महत्वबेलपत्र को भगवान शिव का सबसे प्रिय पत्र माना गया है। इसकी तीन पत्तियों को ब्रह्मा, विष्णु और महेश का प्रतीक माना जाता है। बेलपत्र चढ़ाने से मन की शांति, सकारात्मक ऊर्जा और भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है। आस्था और श्रद्धा से जुड़ी सनातन परंपराभगवान शिव पर जल और बेलपत्र चढ़ाने की परंपरा केवल धार्मिक आस्था ही नहीं, बल्कि पौराणिक मान्यताओं और आध्यात्मिक भावनाओं से भी जुड़ी हुई है। यह परंपरा हमें त्याग, संरक्षण और श्रद्धा का संदेश देती है। मान्यता है कि सच्चे मन से किए गए जलाभिषेक से भगवान भोलेनाथ अपने भक्तों की हर मनोकामना पूरी करते हैं।
घर पर आसानी से बनने वाले नेचुरल और हाइड्रेटिंग समर बेवरेज रेसिपीज़

नई दिल्ली | जैसे-जैसे गर्मियों का पारा बढ़ता है, शरीर में पानी की कमी, थकान और डिहाइड्रेशन जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं। ऐसे में बाजार के कोल्ड ड्रिंक्स या शुगर-लोडेड पेय पदार्थों की बजाय घर पर बने नेचुरल ड्रिंक्स ज्यादा फायदेमंद होते हैं। ये न सिर्फ शरीर को ठंडक देते हैं बल्कि इम्युनिटी और पाचन को भी बेहतर बनाते हैं। खीरा-मिंट कूलर: ताजगी से भरपूर डिटॉक्स ड्रिंकखीरा और पुदीना गर्मियों के लिए किसी वरदान से कम नहीं हैं। खीरे का रस, पुदीने की पत्तियां, नींबू का रस और थोड़ा सा काला नमक मिलाकर एक बेहतरीन डिटॉक्स ड्रिंक तैयार किया जा सकता है। यह ड्रिंक शरीर से टॉक्सिन बाहर निकालने में मदद करता है और तुरंत ठंडक देता है। आम पन्ना: पारंपरिक स्वाद के साथ हेल्दी कूलिंगकच्चे आम से बनने वाला आम पन्ना भारतीय घरों में गर्मियों की शान माना जाता है। इसमें कच्चे आम को उबालकर उसका गूदा निकाला जाता है और फिर इसमें भुना जीरा, काला नमक, पुदीना और पानी मिलाया जाता है। यह न केवल लू से बचाता है बल्कि शरीर में इलेक्ट्रोलाइट बैलेंस भी बनाए रखता है। नारियल पानी स्पेशल मिक्स ड्रिंकनारियल पानी अपने आप में एक परफेक्ट हाइड्रेटिंग ड्रिंक है, लेकिन इसे और भी स्वादिष्ट बनाने के लिए इसमें नींबू का रस और कुछ मिंट लीव्स मिलाई जा सकती हैं। यह ड्रिंक तुरंत एनर्जी देती है और शरीर को लंबे समय तक हाइड्रेटेड रखती है। तरबूज कूलर: गर्मी का सबसे मीठा समाधानतरबूज में 90% से अधिक पानी होता है, जो इसे एक बेहतरीन समर फ्रूट बनाता है। इसका जूस बनाकर उसमें थोड़ा नींबू और मिंट मिलाने से यह एक रिफ्रेशिंग ड्रिंक बन जाता है। यह शरीर को ठंडा रखने के साथ-साथ स्किन के लिए भी फायदेमंद है। नींबू-पानी विद हनी: सिंपल लेकिन असरदार ड्रिंकनींबू पानी गर्मियों का सबसे आसान और प्रभावी पेय है। इसमें शहद मिलाने से यह और भी हेल्दी हो जाता है। यह शरीर को तुरंत ऊर्जा देता है और डिहाइड्रेशन से बचाता है। गर्मियों में शरीर को स्वस्थ और ऊर्जावान बनाए रखने के लिए नेचुरल और घर पर बने ड्रिंक्स सबसे अच्छा विकल्प हैं। ये न सिर्फ शरीर को ठंडक देते हैं बल्कि लंबे समय तक फिट और एक्टिव रहने में मदद करते हैं। इसलिए इस गर्मी में बाजार के ड्रिंक्स से दूरी बनाएं और इन हेल्दी विकल्पों को अपनी दिनचर्या में शामिल करें।