अरब सागर से शुरू हुई BJP की यात्रा गंगासागर तक पहुंची, अब दक्षिणी राज्यों पर नजर

नई दिल्ली। अरब सागर (Arabian Sea) के तट से वर्ष 1980 में शुरू हुई भाजपा (BJP) की राजनीतिक यात्रा 46 साल बाद गंगासागर (Gangasagar) तक पहुंच गई है। हालांकि, हिंद महासागर की सीमाई राज्यों तक पहुंचना अभी बाकी है। पार्टी का अगले एक दशक का लक्ष्य सारी समुद्री सीमाओं वाले प्रदेशों में भाजपा को सत्ता तक पहुंचाना है। इसके लिए अब पार्टी अपने मिशन दक्षिण के लिए बदली हुई रणनीति पर काम करेगी। भाजपा की पहुंच से दूर रहा तेलंगाना उसका पहला लक्ष्य है। उसके बाद केरल और तमिलनाडु (Kerala and Tamil Nadu) की व्यूह रचना पर काम होगा। कर्नाटक में उसे अगले ही चुनाव में वापसी की उम्मीद है। साल 2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के कुछ समय बाद ही अमित शाह ने भाजपा की कमान संभाली थी। उन्होंने अपने पहले ही भाषण में भाजपा के पू्र्वोत्तर विस्तार और कोरोमंडल में पहुंच का विशाल रोड मैप पेश किया था। पूर्वोत्तर से कांग्रेस को सत्ता से बाहर करने और प्रमुख पूर्वी राज्यों बिहार, ओडिशा एवं पश्चिम बंगाल में अपने मुख्यमंत्री बनाने के बाद अब वह अधूरे मिशन दक्षिण की ओर बढ़ने जा रही है। तमिलनाडु में तैयार भाजपा की जमीनदक्षिण के पांच राज्यों में भाजपा अभी आंध्र प्रदेश में तेलुगुदेशम के साथ गठबंधन सरकार में है। कर्नाटक में कई बार सरकार बना चुकी पार्टी को अगले चुनाव में फिर से सत्ता में आने का भरोसा है। बाकी तीन राज्यों तेलंगाना, तमिलनाडु एवं केरल उसके अगले लक्ष्य हैं। तेलंगाना में भाजपा की जमीन तैयार हो चुकी है। केरल और तमिलनाडु ही उसके लिए सबसे मुश्किल राज्यों में शामिल हैं। सूत्रों के अनुसार, भाजपा तमिलनाडु में पश्चिम बंगाल का फॉर्मूला अपनाएगी और अपनी पार्टी को मजबूत करने के लिए अन्नाद्रमुक के कई प्रमुख नेताओं को अपने साथ लाएगी। यहां हाल में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बने नागेंद्रन भी अन्नाद्रमुक से ही आए हैं। वाम दलों की जगह लेने की तैयारीकेरल भाजपा से ज्यादा आरएसएस की मजबूती के लिए जाना जाता है। इस बार के चुनाव में भाजपा ने बदलाव वाले चुनाव में अपने लिए तीन सीट जीतकर तथा पांच सीट पर दूसरे स्थान पर रहकर अपने भावी अभियान की शुरुआत कर दी है। सूत्रों के अनुसार, भाजपा वाम दलों की हार के बाद अब उसका स्थान खुद हासिल करने की तैयारी में है। राज्य में हिंदू समुदाय की सालों से पसंद रहे वाम दलों की जगह अब भाजपा लेने की तैयारी में है। ईसाई समुदाय में भी भाजपा ने अपनी पकड़ बनाई है।
तेज धूप में भी रहना है एक्टिव? जानिए गर्मी की थकान दूर करने के सरल और असरदार उपाय

नई दिल्ली ।गर्मी का मौसम अपने साथ कई तरह की शारीरिक चुनौतियां लेकर आता है, जिनमें सबसे आम समस्या दिनभर थकान और सुस्ती महसूस होना है। जैसे-जैसे तापमान बढ़ता है, शरीर तेजी से पानी और जरूरी मिनरल्स खोने लगता है, जिससे ऊर्जा में कमी महसूस होने लगती है। इस वजह से कई लोग दिनभर कमजोर, थके हुए और आलस भरे महसूस करते हैं, जिससे उनकी दिनचर्या भी प्रभावित होती है। यह समस्या खासकर उन लोगों में ज्यादा देखने को मिलती है जो पानी कम पीते हैं या अपने खानपान पर ध्यान नहीं देते। शरीर में पानी की कमी यानी डिहाइड्रेशन थकान का सबसे बड़ा कारण बनता है। हालांकि, कुछ आसान और रोजमर्रा की आदतों को अपनाकर इस समस्या से काफी हद तक राहत पाई जा सकती है। सबसे पहले शरीर को हाइड्रेट रखना बेहद जरूरी है। गर्मियों में नियमित अंतराल पर पानी पीते रहना चाहिए, ताकि शरीर में तरल पदार्थों का संतुलन बना रहे। इसके साथ ही नारियल पानी, छाछ और प्राकृतिक इलेक्ट्रोलाइट वाले पेय पदार्थ शरीर को अंदर से ठंडक देते हैं और ऊर्जा बनाए रखने में मदद करते हैं। खानपान का भी इस समस्या में बड़ा योगदान होता है। भारी और तैलीय भोजन शरीर को सुस्त बना देता है और पाचन तंत्र पर अतिरिक्त दबाव डालता है। इसलिए गर्मी के मौसम में हल्का और संतुलित भोजन लेना चाहिए। ताजे फल, हरी सब्जियां, सलाद और दही जैसे खाद्य पदार्थ शरीर को ठंडक देते हैं और लंबे समय तक ऊर्जा बनाए रखते हैं। नींद की कमी भी थकान का एक बड़ा कारण होती है। अगर शरीर को पर्याप्त आराम नहीं मिलता, तो अगले दिन कमजोरी और सुस्ती महसूस होना स्वाभाविक है। इसलिए रोजाना 7 से 8 घंटे की अच्छी नींद लेना बेहद जरूरी है, ताकि शरीर और दिमाग दोनों पूरी तरह से तरोताजा रह सकें। धूप में ज्यादा समय बिताना भी शरीर को जल्दी थका देता है। इसलिए कोशिश करनी चाहिए कि तेज धूप में बाहर निकलने से बचा जाए। अगर बाहर जाना जरूरी हो, तो हल्के और ढीले कपड़े पहनें और सिर को ढककर रखें। इससे शरीर का तापमान नियंत्रित रहता है और थकान कम महसूस होती है। हल्की शारीरिक गतिविधि भी शरीर को एक्टिव बनाए रखने में मदद करती है। सुबह या शाम के समय हल्की वॉक, योग या स्ट्रेचिंग करने से शरीर में रक्त संचार बेहतर होता है और एनर्जी लेवल बढ़ता है। इससे शरीर दिनभर ज्यादा सक्रिय और ताजगी भरा महसूस करता है। इन सरल आदतों को अपनाकर गर्मी के मौसम में भी शरीर को फिट और एनर्जेटिक रखा जा सकता है। थोड़ी सी सावधानी और सही दिनचर्या से न सिर्फ थकान कम होती है, बल्कि पूरा दिन अधिक सक्रिय और स्वस्थ महसूस होता है।
BEE स्टार रेटिंग के नए सख्त नियम लागू: 1 जनवरी 2026 से बदला सिस्टम, UPPCL ने बताया 1 से 5 स्टार का पूरा गणित

नई दिल्ली। ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी (BEE) ने 1 जनवरी 2026 से स्टार रेटिंग सिस्टम के नियमों को और सख्त कर दिया है। इसका सीधा असर उन उपभोक्ताओं पर पड़ेगा जो घर के लिए एसी, फ्रिज, वॉशिंग मशीन जैसे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण खरीदते हैं। उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) ने भी लोगों को जागरूक करते हुए बताया है कि 1 से 5 स्टार रेटिंग का सही मतलब समझना अब बेहद जरूरी हो गया है, ताकि बिजली बिल में अनावश्यक खर्च से बचा जा सके। स्टार रेटिंग का असली मतलब क्या है?BEE स्टार रेटिंग यह बताती है कि कोई भी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण कितनी ऊर्जा (बिजली) की खपत करता है। जितनी ज्यादा स्टार रेटिंग होगी, उतनी ही कम बिजली की खपत और बेहतर ऊर्जा दक्षता मानी जाती है। अक्सर लोग सस्ते ऑफर देखकर उपकरण खरीद लेते हैं, लेकिन लंबे समय में ज्यादा बिजली बिल का बोझ उठाना पड़ता है। 1 स्टार रेटिंग: सबसे कम ऊर्जा दक्षताUPPCL के अनुसार 1 स्टार रेटिंग वाले उपकरण सबसे कम बिजली बचत करते हैं। ये शुरुआती कीमत में सस्ते हो सकते हैं, लेकिन इस्तेमाल के दौरान बिजली बिल को काफी बढ़ा देते हैं। ऐसे उपकरण केवल कम उपयोग या सीमित जरूरत के लिए ही बेहतर माने जाते हैं। 2 और 3 स्टार रेटिंग: औसत श्रेणी के उपकरण2 स्टार रेटिंग वाले उपकरण ऊर्जा बचत के मामले में कमजोर माने जाते हैं, जबकि 3 स्टार रेटिंग सामान्य या औसत दक्षता को दर्शाती है। ये उपकरण प्रदर्शन और बिजली खपत के बीच संतुलन रखते हैं, लेकिन लंबी अवधि में ज्यादा बचत नहीं कर पाते। 4 स्टार रेटिंग: बेहतर और किफायती विकल्प4 स्टार रेटिंग वाले उपकरण उच्च ऊर्जा दक्षता की श्रेणी में आते हैं। ये कम बिजली में बेहतर प्रदर्शन देते हैं। शुरुआती कीमत थोड़ी अधिक हो सकती है, लेकिन समय के साथ बिजली बिल में होने वाली बचत इस खर्च को पूरा कर देती है। लगातार इस्तेमाल होने वाले उपकरणों के लिए यह एक अच्छा विकल्प माना जाता है। 5 स्टार रेटिंग: सबसे ज्यादा बचत वाला विकल्प5 स्टार रेटिंग को सर्वोच्च ऊर्जा दक्षता माना जाता है। ये उपकरण सबसे कम बिजली की खपत करते हैं और लंबे समय में सबसे ज्यादा बचत कराते हैं। UPPCL के अनुसार, बड़े और लगातार उपयोग होने वाले घरेलू उपकरणों में 5 स्टार रेटिंग लेना सबसे समझदारी भरा फैसला होता है। BEE स्टार रेटिंग सिस्टम उपभोक्ताओं को सही और किफायती उपकरण चुनने में मदद करता है। UPPCL की सलाह है कि खरीदारी करते समय सिर्फ कीमत नहीं, बल्कि स्टार रेटिंग को जरूर देखें, क्योंकि यही आगे चलकर आपके बिजली बिल को तय करती है। 2026 से लागू हुए नए नियमों के बाद यह और जरूरी हो गया है कि लोग ऊर्जा दक्षता को प्राथमिकता दें और समझदारी से खरीदारी करें।
OTT पर धमाका करने आ रही ‘धुरंधर 2’, भारत में दर्शकों को अभी इंतजार..

नई दिल्ली ।रणवीर सिंह की हालिया रिलीज और बेहद सफल फिल्म ‘धुरंधर 2’ एक बार फिर सुर्खियों में है, लेकिन इस बार वजह इसका थिएटर प्रदर्शन नहीं बल्कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आने की तैयारी है। सिनेमाघरों में जबरदस्त कमाई और दर्शकों की भारी प्रतिक्रिया के बाद अब यह फिल्म ओटीटी पर भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराने जा रही है। इस स्पाई थ्रिलर फिल्म को लेकर लंबे समय से दर्शकों के बीच उत्सुकता बनी हुई थी और अब इसके डिजिटल रिलीज की तारीख सामने आने के बाद यह चर्चा और तेज हो गई है। जानकारी के अनुसार, फिल्म का ओटीटी प्रीमियर सबसे पहले अंतरराष्ट्रीय दर्शकों के लिए किया जाएगा। विदेशों में इसे 14 मई 2026 से स्ट्रीम किए जाने की योजना है, जबकि कुछ क्षेत्रों में समय अंतर के कारण यह एक दिन बाद उपलब्ध हो सकती है। फिल्म के डिजिटल संस्करण को थिएटर रिलीज से अलग और विस्तृत रूप में तैयार किया गया है। इसमें कुछ अतिरिक्त दृश्य शामिल किए गए हैं, जिससे कहानी को और गहराई मिल सके। साथ ही कुछ ऐसे हिस्से भी जोड़े गए हैं जिन्हें पहले रिलीज के समय हटा दिया गया था। इस वजह से ओटीटी वर्जन दर्शकों को एक नया अनुभव देने वाला माना जा रहा है। हालांकि भारतीय दर्शकों के लिए फिलहाल स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। भारत में इस फिल्म की डिजिटल रिलीज को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन अनुमान लगाया जा रहा है कि यह जल्द ही किसी बड़े प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हो सकती है। इस अनिश्चितता के कारण देश में दर्शकों के बीच उत्सुकता और बढ़ गई है। फिल्म की स्टारकास्ट भी इसकी सफलता का बड़ा कारण रही है। इसमें रणवीर सिंह के साथ कई प्रमुख कलाकारों ने महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं, जिनमें सारा अर्जुन, अर्जुन रामपाल, आर. माधवन, संजय दत्त और राकेश बेदी शामिल हैं। सभी कलाकारों के अभिनय को दर्शकों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है, जिससे फिल्म की लोकप्रियता और बढ़ी है। बॉक्स ऑफिस पर इस फिल्म ने रिकॉर्ड स्तर की कमाई करते हुए इसे साल की सबसे बड़ी सफल फिल्मों में शामिल कर दिया है। इसकी कहानी, एक्शन सीक्वेंस और स्पाई थ्रिलर शैली ने दर्शकों को काफी प्रभावित किया है। अब ओटीटी रिलीज के साथ यह फिल्म एक नए दर्शक वर्ग तक पहुंचने की तैयारी में है। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आने के बाद फिल्म का विस्तारित संस्करण दर्शकों को अधिक गहराई और अतिरिक्त कहानी तत्वों के साथ देखने को मिलेगा। यह रणनीति दर्शकों को थिएटर से अलग एक नया अनुभव देने के उद्देश्य से अपनाई गई है, जिससे फिल्म की पहुंच और प्रभाव दोनों बढ़ सकें। फिलहाल सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि भारत में इस फिल्म की ओटीटी रिलीज कब और किस प्लेटफॉर्म पर होगी। जैसे-जैसे तारीख नजदीक आ रही है, दर्शकों की उत्सुकता लगातार बढ़ती जा रही है और फिल्म को लेकर चर्चा और तेज हो गई है।
लाल किताब के अनुसार शनि का रहस्यमयी प्रभाव: कुंडली के 12 भाव और जीवन बदलने वाले अचूक उपाय

नई दिल्ली। लाल किताब ज्योतिष में शनि ग्रह को अत्यंत प्रभावशाली और कर्मफलदाता माना गया है। कहा जाता है कि शनि व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार फल देते हैं और इनका प्रभाव जीवन के हर क्षेत्र करियर, स्वास्थ्य, धन और संबंधों पर गहराई से पड़ता है। शनि यदि कुंडली में शुभ स्थिति में हों तो व्यक्ति को रंक से राजा तक बना सकते हैं, वहीं अशुभ स्थिति में जीवन में संघर्ष, देरी और बाधाओं का कारण बनते हैं। लाल किताब के अनुसार शनि का प्रभाव कुंडली के बारहों भावों में अलग-अलग रूप में दिखाई देता है और हर स्थिति के अनुसार उसके उपाय भी बताए गए हैं। पहले भाव में शनि होने पर व्यक्ति मेहनती, जिम्मेदार और संपन्न हो सकता है, लेकिन स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी परेशान कर सकती हैं। दूसरे भाव में शनि आर्थिक स्थिति और वाणी को प्रभावित करता है, जिससे कई बार धन संचय में रुकावट आती है। तीसरे भाव में शनि भाई-बहनों और साहस से जुड़े मामलों को प्रभावित करता है, वहीं चौथे भाव में यह घर-परिवार और सुख-सुविधाओं पर असर डालता है। पांचवें भाव में शनि संतान और शिक्षा के क्षेत्र में बाधाएं ला सकता है, जबकि छठे भाव में यह शत्रुओं पर विजय और कानूनी मामलों में सफलता भी दे सकता है, लेकिन स्वास्थ्य का ध्यान रखना जरूरी होता है। सातवें भाव में शनि दांपत्य जीवन और साझेदारी को प्रभावित करता है, आठवें भाव में यह जीवन में अचानक परिवर्तन और स्वास्थ्य चुनौतियां ला सकता है। नौवें भाव में शनि भाग्य और धर्म से जुड़े मामलों को प्रभावित करता है, दसवें भाव में यह करियर और मान-सम्मान पर असर डालता है। ग्यारहवें भाव में शनि आय और लाभ में वृद्धि कर सकता है, जबकि बारहवें भाव में यह खर्च, विदेश यात्रा और आध्यात्मिकता से जुड़ा प्रभाव देता है। लाल किताब में शनि को मजबूत करने के लिए कई सरल उपाय बताए गए हैं। इनमें शनिवार के दिन गरीबों को दान देना, काले तिल, उड़द या तेल का दान करना, कुत्तों की सेवा करना, पीपल के पेड़ की पूजा करना और अनुशासित जीवन अपनाना प्रमुख माना गया है। मान्यता है कि इन उपायों से शनि के अशुभ प्रभाव कम होते हैं और जीवन में स्थिरता, सफलता और मानसिक शांति प्राप्त होती है। कुल मिलाकर शनि ग्रह व्यक्ति के जीवन को अनुशासन और कर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। लाल किताब के उपाय न केवल ज्योतिषीय दृष्टि से बल्कि मानसिक संतुलन और सकारात्मक जीवनशैली के रूप में भी महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
निर्जला एकादशी 2026: सबसे पवित्र व्रत का शुभ समय, पूजा विधि और भीमसेनी एकादशी का महत्व

नई दिल्ली। निर्जला एकादशी को हिंदू धर्म की सभी एकादशियों में सबसे कठिन और अत्यंत पुण्यदायी व्रत माना जाता है। इस दिन बिना जल और अन्न ग्रहण किए भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। मान्यता है कि इस एक व्रत को करने से पूरे वर्ष की 24 एकादशियों के बराबर पुण्य प्राप्त होता है, जिससे पापों का नाश और जीवन में सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। निर्जला एकादशी 2026 कब है?हिंदू पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 24 जून 2026 को शाम 6:13 बजे होगी और इसका समापन 25 जून 2026 को शाम 8:10 बजे होगा।उदयातिथि के आधार पर इस वर्ष निर्जला एकादशी का व्रत 25 जून 2026 (गुरुवार) को रखा जाएगा। पूजा और व्रत का महत्वनिर्जला एकादशी के दिन भक्त पूरे दिन बिना जल ग्रहण किए भगवान विष्णु की पूजा करते हैं। इस व्रत में तुलसी पत्र, पीले फूल, दीपक और विष्णु सहस्रनाम का पाठ विशेष फलदायी माना जाता है। यह व्रत आत्मसंयम, श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक है, जो जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग खोलता है। निर्जला एकादशी 2026 पारण समयएकादशी व्रत का पारण अगले दिन द्वादशी तिथि में किया जाता है।इस वर्ष व्रत का पारण 26 जून 2026 (शुक्रवार) को किया जाएगा।पारण का शुभ समय सुबह 5:41 बजे से 8:25 बजे तक रहेगा। इसे भीमसेनी एकादशी क्यों कहते हैं?पौराणिक मान्यता के अनुसार, पांडवों में भीमसेन अत्यधिक भूख के कारण अन्य एकादशियों का व्रत नहीं रख पाते थे। तब महर्षि वेद व्यास ने उन्हें वर्ष की सभी एकादशियों के बराबर पुण्य पाने के लिए निर्जला एकादशी का व्रत करने की सलाह दी। तभी से इसे भीमसेनी एकादशी कहा जाता है। निर्जला एकादशी न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह आत्मसंयम और भक्ति की सबसे बड़ी परीक्षा भी मानी जाती है। जो भक्त सच्चे मन से यह व्रत करते हैं, उन्हें भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख-शांति का आगमन होता है।
योग से मिलेगा बेहतर जीवन, ताड़ासन अभ्यास से शरीर और मन दोनों होंगे अधिक स्थिर

नई दिल्ली ।आज की आधुनिक जीवनशैली में गलत शरीर मुद्रा एक आम समस्या बनती जा रही है। लंबे समय तक बैठकर काम करना, मोबाइल और कंप्यूटर का लगातार उपयोग और शारीरिक गतिविधियों की कमी के कारण लोगों में पीठ दर्द, गर्दन में जकड़न और शरीर में थकान जैसी परेशानियां तेजी से बढ़ रही हैं। इसी समस्या के समाधान के रूप में योग अभ्यास को एक प्रभावी विकल्प माना जा रहा है, जिसमें ताड़ासन को विशेष रूप से लाभकारी बताया गया है। ताड़ासन एक ऐसा योगासन है जो देखने में बेहद सरल लगता है, लेकिन इसका प्रभाव शरीर और मन दोनों पर गहरा पड़ता है। इसे पर्वत मुद्रा भी कहा जाता है क्योंकि इसमें शरीर को एक स्थिर और सीधी स्थिति में रखा जाता है, जैसे एक पर्वत अडिग और मजबूत खड़ा हो। यह अभ्यास शरीर की मुद्रा को सुधारने, रीढ़ की हड्डी को सीधा रखने और संतुलन बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इस आसन के अभ्यास में व्यक्ति को सीधे खड़े होकर पैरों को एक साथ रखना होता है और शरीर का भार दोनों पैरों पर समान रूप से संतुलित करना होता है। इसके बाद घुटनों को सीधा रखते हुए शरीर को हल्का ऊपर की ओर खींचा जाता है, छाती को खुला रखा जाता है और कंधों को पीछे की ओर ले जाकर रीढ़ को सीधा किया जाता है। इस दौरान सांसों को सामान्य और गहरा बनाए रखना जरूरी होता है। यह स्थिति शरीर में जागरूकता और स्थिरता पैदा करती है। विशेषज्ञों के अनुसार, ताड़ासन का नियमित अभ्यास शरीर की गलत मुद्रा को सुधारने में मदद करता है। यह रीढ़ की हड्डी को मजबूत बनाता है और लंबे समय तक झुककर बैठने या खड़े रहने से होने वाले दर्द को कम करने में सहायक होता है। इसके अलावा यह कंधों और गर्दन की अकड़न को दूर करता है, जिससे शरीर अधिक लचीला और आरामदायक महसूस होता है। ताड़ासन केवल शारीरिक लाभ तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव मानसिक स्थिति पर भी देखा जाता है। यह एकाग्रता बढ़ाने, मन को शांत करने और आत्मविश्वास को मजबूत करने में मदद करता है। नियमित अभ्यास से शरीर में ऊर्जा का संचार होता है और व्यक्ति दिनभर अधिक सक्रिय और संतुलित महसूस करता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस योगासन को किसी भी उम्र के लोग आसानी से अपनी दिनचर्या में शामिल कर सकते हैं। इसे सुबह या शाम के समय कुछ मिनटों तक किया जा सकता है। शुरुआती लोगों के लिए दीवार का सहारा लेना भी उपयोगी हो सकता है, जिससे शरीर को सही संतुलन समझने में मदद मिलती है। नियमित अभ्यास के साथ शरीर की मुद्रा धीरे-धीरे बेहतर होने लगती है और व्यक्ति अपने खड़े होने, बैठने और चलने के तरीके में स्पष्ट सुधार महसूस करता है। यह न केवल शारीरिक स्वास्थ्य को सुधारता है, बल्कि दैनिक जीवन में आत्मविश्वास और स्थिरता भी बढ़ाता है। कुल मिलाकर, ताड़ासन एक सरल लेकिन अत्यंत प्रभावी योग अभ्यास है, जो शरीर को मजबूत, संतुलित और ऊर्जावान बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। आधुनिक जीवन की चुनौतियों के बीच यह एक सुरक्षित और प्राकृतिक उपाय के रूप में तेजी से अपनाया जा रहा है।
Surya Dev Puja: रविवार को इस तरह करें सूर्य देव की पूजा, मिलेगा सुख-समृद्धि का आशीर्वाद

नई दिल्ली। Surya Dev Puja: हिंदू धर्म में सूर्य को न केवल देवता माना जाता है बल्कि वे नौ ग्रहों के अधिपति भी माने जाते हैं। व्यक्ति पर सूर्य देव कृपा हो तो, व्यक्ति को सुख और समृद्धि की प्राप्ति होती है। कुंडली में सूर्य मजबूत होने पर जीवन में सुख, संपत्ति और यश की प्राप्ति होती है। सूर्य देव पूजा विधिसूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें। इसके बाद उगते हुए सूर्य का दर्शन करते हुए उन्हें जल अर्पित करें। जल अर्पित करते समय ॐ घृणि सूर्याय नम: मंत्र का जाप करें। सूर्य को दिए जाने वाले जल में लाल रोली, लाल फूल मिलाकर जल दें। ऐसा करने से भगवान सूर्यदेव का आशीर्वाद मिलता है, और आपके सभी कार्य संपन्न होने लगते हैं। सूर्य पूजन के लिए तांबे की थाली और तांबे के लोटे का उपयोग करना शुभ माना जाता है। पूजा में लाल चंदन और लाल फूल जरूर शामिल करें। इसके बाद लोटे में जल लेकर उसमें एक चुटकी लाल चंदन पाउडर और लाल फूल डालें। एक थाली में दीपक और लोटा रख लें। सूर्य देव को प्रणाम करें। ओम सूर्याय नमः मंत्र का जाप करते हुए लोटे से सूर्य देव को जल चढ़ाएं। इस तरह अर्पित करें जलअर्घ देते समय नजरे लोटे की जलधारा की ओर रखें। जल इस प्रकार अर्पित करें कि जल की धार में सूर्य का प्रतिबिंब एक बिंदु के रूप में दिखाई दे। इसके बाद हाथ जोड़कर सूर्य देव को प्रणाम करें। ये मिलते हैं लाभसूर्योदय के समय सूर्य देव का दर्शन करने से व्यक्ति के शरीर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इसलिए इसे अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना लेना चाहिए। ऐसा करने से कारोबार में सफलता प्राप्त होती है। सूर्य को जल चढ़ाने के साथ मंत्र का जाप करने से बल, बुद्धि और विद्या प्राप्त होगी।
आज का राशिफल (10 मई 2026): कुछ राशियों पर बरसेगा भाग्य, तो कुछ को रहना होगा थोड़ा सावधान

नई दिल्ली। 10 मई 2026, रविवार का दिन ज्योतिषीय दृष्टि से कई राशियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति का प्रभाव आज लोगों के जीवन में स्पष्ट रूप से दिखाई देगा। जहां कुछ जातकों को करियर और आर्थिक क्षेत्र में लाभ मिलेगा, वहीं कुछ को अपने स्वास्थ्य और व्यवहार पर ध्यान देने की आवश्यकता होगी। मेष राशि के जातकों के लिए दिन पारिवारिक रूप से शुभ रहेगा। मेहनत का पूरा फल मिलेगा और वैवाहिक जीवन में खुशियां बढ़ेंगी। व्यापार और नौकरी में भी सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेंगे। वृषभ राशि के लिए घर का माहौल सुखद रहेगा और अचानक धन लाभ के योग बन रहे हैं। किस्मत का साथ मिलेगा और रिश्तों में मधुरता बढ़ेगी। मिथुन राशि वालों को आज भागदौड़ करनी पड़ सकती है, लेकिन काम समय पर पूरे होंगे। स्वास्थ्य में सुधार के संकेत हैं, हालांकि बेवजह की बातों से बचना जरूरी होगा। कर्क राशि के जातक कार्यस्थल पर व्यस्त रहेंगे और आर्थिक स्थिति मजबूत बनी रहेगी। दोस्तों के साथ समय बिताने का मौका मिलेगा, जिससे मानसिक सुकून मिलेगा। सिंह राशि के लिए दिन बेहद शुभ है। किसी खास काम में सफलता मिलेगी और माता-पिता के साथ संबंध बेहतर होंगे। व्यापार और सामाजिक कार्यों में भी लाभ के योग हैं। कन्या राशि के लिए दिन सकारात्मक रहेगा। कार्यक्षेत्र में तालमेल अच्छा रहेगा और पुराने मित्रों से मुलाकात हो सकती है। कोई शुभ समाचार मिलने की संभावना है। तुला राशि के जातकों को स्वास्थ्य पर ध्यान देने की जरूरत होगी। हालांकि संपत्ति से जुड़े मामलों में लाभ मिल सकता है। सोच-समझकर निर्णय लेना जरूरी होगा।वृश्चिक राशि के लिए दिन खुशियों से भरा रहेगा। रुका हुआ धन मिलने के योग हैं और धार्मिक यात्रा का भी अवसर बन सकता है। धनु राशि वालों के लिए दिन प्रगति और सफलता लेकर आएगा। परिवार में खुशखबरी मिल सकती है और शिक्षा क्षेत्र में सफलता के संकेत हैं। मकर राशि के जातकों के लिए दिन लाभकारी रहेगा। नौकरी और व्यापार में सहयोग मिलेगा और जीवनसाथी के साथ संबंध मजबूत होंगे। कुंभ राशि के लिए दिन मिश्रित फल देने वाला रहेगा। कार्यभार अधिक रहेगा जिससे तनाव बढ़ सकता है, लेकिन परिवार के साथ समय बिताने से राहत मिलेगी। मीन राशि के लिए दिन थोड़ा चुनौतीपूर्ण रह सकता है। धन संबंधी समस्याएं हल होंगी लेकिन जल्दबाजी से बचना होगा। धैर्य रखना आज सबसे जरूरी है। कुल मिलाकर यह रविवार कई राशियों के लिए नई उम्मीदें और अवसर लेकर आ रहा है, वहीं कुछ को संयम और सावधानी के साथ आगे बढ़ने की सलाह दी जाती है।
आईपीएल 2026 में सुपर संडे का बड़ा मुकाबला, आरसीबी से पिछली हार का बदला लेने उतरेगी मुंबई इंडियंस

नई दिल्ली । आईपीएल 2026 के रोमांचक मुकाबलों के बीच अब क्रिकेट प्रशंसकों की नजरें उस मैच पर टिक गई हैं, जिसमें रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु और मुंबई इंडियंस आमने-सामने होंगी। रायपुर के शहीद वीर नारायण सिंह इंटरनेशनल स्टेडियम में होने वाला यह मुकाबला केवल दो टीमों के बीच की टक्कर नहीं, बल्कि सम्मान, वापसी और प्लेऑफ की उम्मीदों से जुड़ी बड़ी चुनौती भी माना जा रहा है। इस सीजन की पहली भिड़ंत में आरसीबी ने मुंबई इंडियंस को हराकर बढ़त हासिल की थी। अब मुंबई की टीम उसी हार का जवाब देने के इरादे से मैदान पर उतरेगी। टीम के लिए यह मुकाबला बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि लगातार मिली हारों के बाद अब हर मैच उसके लिए करो या मरो जैसी स्थिति बनता जा रहा है। वहीं दूसरी ओर आरसीबी अपनी शानदार लय को बरकरार रखते हुए अंक तालिका में मजबूत स्थिति बनाए रखना चाहेगी। आरसीबी इस सीजन काफी संतुलित और आत्मविश्वास से भरी टीम नजर आई है। कप्तान रजत पाटीदार ने टीम को अच्छे तरीके से संभाला है और कई मौकों पर जिम्मेदारी भरी पारियां खेली हैं। विराट कोहली ने अपनी अनुभवी बल्लेबाजी से टीम को मजबूत शुरुआत दी है, जबकि देवदत्त पडिक्कल ने भी शीर्ष क्रम में अहम योगदान दिया है। मध्यक्रम में टिम डेविड ने तेजी से रन बनाकर टीम को मुश्किल परिस्थितियों से बाहर निकाला है। गेंदबाजी विभाग में भी आरसीबी का प्रदर्शन प्रभावशाली रहा है। भुवनेश्वर कुमार और जोश हेजलवुड की जोड़ी ने नई गेंद से लगातार दबाव बनाया है। दोनों गेंदबाजों ने शुरुआती ओवरों में विकेट लेकर विपक्षी टीमों को बैकफुट पर धकेला है। हालांकि, टीम को कुछ खिलाड़ियों की फॉर्म और फिटनेस को लेकर चिंता जरूर बनी हुई है, लेकिन इसके बावजूद आरसीबी का प्रदर्शन संतुलित दिखाई दे रहा है। दूसरी ओर मुंबई इंडियंस इस सीजन लगातार संघर्ष करती नजर आई है। टीम के बल्लेबाजों ने कुछ मुकाबलों में अच्छी शुरुआत जरूर दिलाई, लेकिन उसे बड़े स्कोर में बदलने में सफलता नहीं मिल सकी। रोहित शर्मा और रयान रिकेल्टन ने पिछले मैच में शानदार बल्लेबाजी की थी, जिससे टीम को उम्मीदें मिली हैं। हालांकि, मध्यक्रम की अस्थिरता अब भी चिंता का विषय बनी हुई है। सूर्यकुमार यादव जैसे बड़े बल्लेबाज इस सीजन अपेक्षित लय में नजर नहीं आए हैं, जिससे टीम की बल्लेबाजी कमजोर दिखी है। वहीं गेंदबाजी में भी मुंबई को लगातार समस्याओं का सामना करना पड़ा है। जसप्रीत बुमराह सहित अन्य गेंदबाजों की साधारण फॉर्म ने टीम की मुश्किलें बढ़ाई हैं। ऐसे में आरसीबी जैसी मजबूत बल्लेबाजी लाइनअप के खिलाफ मुंबई को हर विभाग में बेहतर प्रदर्शन करना होगा। अगर दोनों टीमों के पिछले रिकॉर्ड पर नजर डालें तो मुकाबला हमेशा कांटे का रहा है। मुंबई इंडियंस को कुल जीत के आंकड़ों में हल्की बढ़त हासिल है, लेकिन हाल के वर्षों में आरसीबी ने कई महत्वपूर्ण मुकाबलों में शानदार प्रदर्शन किया है। रायपुर की पिच बल्लेबाजों के लिए मददगार मानी जाती है, इसलिए इस मैच में बड़े स्कोर और रोमांचक मुकाबले की उम्मीद की जा रही है। कुल मिलाकर, यह मुकाबला केवल अंक तालिका के लिए नहीं बल्कि प्रतिष्ठा और आत्मविश्वास की लड़ाई भी साबित हो सकता है। जहां आरसीबी जीत की लय जारी रखना चाहेगी, वहीं मुंबई इंडियंस हर हाल में वापसी कर अपने अभियान को नई दिशा देने की कोशिश करेगी।