BRICS 2026: कारोबारों को मजबूत बनाने पर जोर, वैश्विक व्यापार में बढ़ेगा भारत का असर..

BRICS 2026: नई दिल्ली । 2026 में ब्रिक्स समूह की अध्यक्षता संभालने की तैयारी के साथ भारत एक ऐसी रणनीति पर काम कर रहा है, जिसका सीधा असर छोटे और मध्यम उद्योगों पर देखने को मिलेगा। इस पूरी पहल का केंद्र MSME sector है, जिसे देश की आर्थिक रीढ़ माना जाता है। भारत का लक्ष्य है कि इस सेक्टर को सिर्फ घरेलू स्तर पर नहीं, बल्कि वैश्विक मंच पर भी मजबूत पहचान दिलाई जाए। इस योजना के तहत भारत ब्रिक्स के ढांचे में एमएसएमई सहयोग को एक नए स्तर पर ले जाने की तैयारी कर रहा है। इसमें खासतौर पर वित्तीय पहुंच को आसान बनाना, तकनीकी सहयोग बढ़ाना और छोटे कारोबारों को अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने जैसे कदम शामिल हैं। माना जा रहा है कि इससे छोटे उद्योगों को नई संभावनाएं मिलेंगी और वे वैश्विक सप्लाई चेन का हिस्सा बन सकेंगे। भारत की अध्यक्षता के दौरान कई महत्वपूर्ण बैठकों और एक बड़े एमएसएमई फोरम का आयोजन किया जाएगा। इन बैठकों का मुख्य फोकस छोटे उद्योगों की सबसे बड़ी समस्या यानी वित्तीय संसाधनों की कमी को दूर करना होगा। इसमें यह समझने की कोशिश की गई है कि कैसे आसान ऋण व्यवस्था, डिजिटल बैंकिंग और फिनटेक समाधान के जरिए छोटे व्यवसायों को मजबूती दी जा सकती है। चर्चाओं में यह बात भी सामने आई है कि छोटे और मध्यम उद्योग न केवल रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, बल्कि नवाचार और आर्थिक विकास को भी गति देते हैं। इसके बावजूद इन उद्योगों को अक्सर पर्याप्त वित्त और तकनीकी सहायता नहीं मिल पाती, जिससे उनकी ग्रोथ प्रभावित होती है। इसी अंतर को कम करने के लिए बहु-स्तरीय रणनीति तैयार की जा रही है। भारत इस दिशा में ब्रिक्स देशों के बीच सहयोग को और मजबूत करने पर भी जोर दे रहा है। इसका उद्देश्य है कि सभी सदस्य देश अपने अनुभव और नीतिगत मॉडल साझा करें, जिससे एक ऐसा इकोसिस्टम बन सके जो छोटे व्यवसायों के लिए अनुकूल हो और उन्हें वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने में मदद मिले। 12,000 KM अग्नि-6 से हिला रणनीतिक संतुलन! भारत की मिसाइल ताकत पर पाक प्रोफेसर की तीखी टिप्पणी इसके अलावा, डिजिटल भुगतान प्रणाली, वित्तीय साक्षरता और क्रेडिट क्षमता बढ़ाने जैसे पहलुओं पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। माना जा रहा है कि इन प्रयासों से छोटे कारोबारों को न केवल घरेलू बाजार में मजबूती मिलेगी, बल्कि वे अंतरराष्ट्रीय व्यापार में भी बेहतर प्रदर्शन कर सकेंगे। भारत पहले ही कुछ देशों के साथ साझेदारी कर चुका है, जिसका उद्देश्य एमएसएमई क्षेत्र में निवेश और व्यापार को बढ़ावा देना है। यह रणनीति भारत को वैश्विक आर्थिक मंच पर और मजबूत स्थिति में लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। कुल मिलाकर यह पूरी योजना छोटे उद्योगों को नई पहचान देने और उन्हें वैश्विक विकास की मुख्य धारा से जोड़ने की दिशा में एक बड़ा प्रयास है, जिससे आने वाले वर्षों में भारतीय अर्थव्यवस्था को नई गति मिलने की उम्मीद है।
Artificial Intelligence: टेक इंडस्ट्री में हलचल, Cloudflare ने एआई बदलाव के बीच बड़े पैमाने पर छंटनी की घोषणा

Artificial Intelligence: नई दिल्ली । तकनीक की दुनिया में तेजी से हो रहे बदलाव अब कंपनियों की कार्यशैली को पूरी तरह बदल रहे हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते प्रभाव ने जहां कामकाज को तेज और अधिक प्रभावी बनाया है, वहीं इसका असर रोजगार संरचना पर भी साफ दिखाई देने लगा है। इसी क्रम में Cloudflare ने बड़ा कदम उठाते हुए 1,100 से अधिक कर्मचारियों की छंटनी का फैसला किया है, जिसे कंपनी ने अपने व्यापक पुनर्गठन का हिस्सा बताया है। कंपनी के अनुसार पिछले कुछ समय में एआई आधारित सिस्टम और टूल्स के उपयोग में तेज वृद्धि हुई है। अब इंजीनियरिंग से लेकर वित्त, मानव संसाधन और मार्केटिंग तक कई विभागों में रोजमर्रा के कार्यों के लिए एआई एजेंट्स का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। इस बदलाव ने पारंपरिक कार्य प्रक्रियाओं को काफी हद तक बदल दिया है और कंपनी के संगठनात्मक ढांचे को नए सिरे से तैयार करने की जरूरत पैदा की है। Cloudflare ने स्पष्ट किया है कि यह निर्णय केवल लागत घटाने या प्रदर्शन आधारित छंटनी नहीं है। इसके पीछे मुख्य उद्देश्य कंपनी को एक नए तकनीकी युग के अनुसार ढालना है, जहां एआई आधारित कार्य प्रणाली प्रमुख भूमिका निभाएगी। कंपनी का कहना है कि वह अपने सभी विभागों और भूमिकाओं की समीक्षा कर रही है ताकि उन्हें भविष्य की जरूरतों के अनुसार अधिक प्रभावी बनाया जा सके। छंटनी से प्रभावित कर्मचारियों को लेकर कंपनी ने कहा है कि उन्हें व्यक्तिगत रूप से जानकारी दी जाएगी और पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी तरीके से पूरा किया जाएगा। इसके लिए आधिकारिक संचार के साथ-साथ व्यक्तिगत सूचनाएं भी भेजी जाएंगी। सीजफायर के बीच फिर भड़की जंग! अमेरिका की ईरान पर बमबारी, ट्रम्प की खुली धमकी से मचा हड़कंप कंपनी ने प्रभावित कर्मचारियों के लिए राहत पैकेज की भी घोषणा की है। इसके तहत उन्हें तय अवधि तक वेतन का भुगतान किया जाएगा और स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ भी कुछ समय तक जारी रहेगा। इसके अलावा कुछ कर्मचारियों को उनके सेवा काल के अनुसार अतिरिक्त लाभ भी दिए जाएंगे। Cloudflare ने यह भी निर्णय लिया है कि यह पूरा पुनर्गठन एक ही चरण में पूरा किया जाएगा, ताकि भविष्य में बार-बार बदलाव और अनिश्चितता की स्थिति न बने। कंपनी का मानना है कि तेज बदलते तकनीकी माहौल में स्पष्ट और स्थिर रणनीति बेहद जरूरी है। कंपनी ने यह भी स्वीकार किया है कि एआई अब केवल एक तकनीकी उपकरण नहीं रहा, बल्कि यह पूरे उद्योग के संचालन मॉडल को बदल रहा है। ऐसे में प्रतिस्पर्धा में बने रहने और भविष्य की जरूरतों को पूरा करने के लिए संगठनात्मक ढांचे में बदलाव आवश्यक हो गया था। इसके साथ ही कंपनी ने संकेत दिया है कि वह एआई आधारित सेवाओं और उत्पादों में अपने निवेश को और बढ़ाएगी। इसका उद्देश्य कंपनी को अधिक आधुनिक, तेज और नवाचार आधारित बनाना है, ताकि बदलते तकनीकी दौर में वह अपनी स्थिति मजबूत बनाए रख सके। इस फैसले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि एआई जहां एक ओर कार्यक्षमता और गति बढ़ा रहा है, वहीं दूसरी ओर यह पारंपरिक नौकरियों के ढांचे को भी तेजी से बदल रहा है।
Vijay Thalapathy: तमिलनाडु में विजय का सियासी विस्फोट! पाकिस्तान तक गूंजी TVK की जीत, दिग्गजों की हिली कुर्सी

Vijay Thalapathy: नई दिल्ली। तमिलनाडु की राजनीति में अभिनेता से नेता बने Vijay Thalapathy ने ऐसा राजनीतिक धमाका किया है, जिसकी चर्चा अब भारत ही नहीं बल्कि पाकिस्तान तक में हो रही है। हाल ही में आए तमिलनाडु विधानसभा चुनाव नतीजों में विजय की पार्टी ‘तमिलगा वेत्री कड़गम’ (TVK) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए राज्य की राजनीति के पुराने समीकरण हिला दिए। सिर्फ दो साल पहले राजनीति में उतरी पार्टी ने 234 में से 108 सीटें जीतकर खुद को राज्य की सबसे ताकतवर राजनीतिक ताकतों में शामिल कर लिया। हालांकि पार्टी बहुमत के आंकड़े से कुछ सीटें पीछे रह गई, लेकिन पहली बार चुनाव लड़कर इतना बड़ा प्रदर्शन करना अपने आप में ऐतिहासिक माना जा रहा है। विजय की इस सफलता ने पड़ोसी देश पाकिस्तान में भी सुर्खियां बटोरी हैं। पाकिस्तान के चर्चित पत्रकार Rauf Klasra ने एक टीवी चर्चा के दौरान विजय की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि फिल्मी दुनिया के सुपरस्टार विजय ने राजनीति में आकर उन नेताओं को चुनौती दे दी, जिनके परिवार दशकों से सत्ता में बने हुए थे। रऊफ कलासरा ने खास तौर पर यह कहा कि सिर्फ दो साल में इतना बड़ा जनसमर्थन हासिल करना बेहद बड़ी बात है। उन्होंने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री M. K. Stalin और उनके राजनीतिक परिवार का जिक्र करते हुए कहा कि विजय ने ऐसे नेताओं को कड़ी टक्कर दी जिनके पिता और दादा तक मुख्यमंत्री रह चुके हैं। पाकिस्तानी पत्रकार ने यह भी कहा कि विजय का नाम लोगों को तेजी से जोड़ता है और उनकी लोकप्रियता किसी बड़े राष्ट्रीय नेता जैसी बनती जा रही है। चुनाव परिणामों में TVK ने कई बड़े राजनीतिक दलों को झटका दिया। सत्तारूढ़ DMK को 59 सीटों पर संतोष करना पड़ा, जबकि AIADMK को 47 सीटें मिलीं। वहीं विजय खुद अपनी दोनों सीटों पर जीत दर्ज करने में सफल रहे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विजय की लोकप्रियता, युवा वोटरों का समर्थन और भ्रष्टाचार विरोधी छवि ने TVK को तेजी से मजबूत बनाया। फिल्मों में सुपरस्टार की पहचान रखने वाले विजय अब तमिलनाडु की राजनीति में भी बड़े चेहरे के तौर पर उभर चुके हैं। दक्षिण भारत की राजनीति में यह बदलाव आने वाले वर्षों में राष्ट्रीय राजनीति पर भी असर डाल सकता है।
WEST BWNGAL MSME: व्यापारिक माहौल सुधरने पर बंगाल में औद्योगिक विकास की वापसी की उम्मीद तेज

WEST BWNGAL MSME: नई दिल्ली ।पश्चिम बंगाल के आर्थिक भविष्य को लेकर एक बार फिर सकारात्मक उम्मीदें सामने आ रही हैं। व्यापार जगत से जुड़े प्रतिनिधियों का मानना है कि यदि राज्य में निवेश के लिए अनुकूल माहौल और स्थिर नीतिगत ढांचा तैयार किया जाए, तो बंगाल एक बार फिर देश के प्रमुख व्यापार और उद्योग केंद्रों में अपनी मजबूत स्थिति हासिल कर सकता है। व्यापारिक समुदाय का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में राज्य के औद्योगिक ढांचे को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। इनमें निवेश में गिरावट, छोटे उद्योगों पर दबाव, और कारोबारियों के पलायन जैसी स्थितियां प्रमुख रही हैं। इसके कारण राज्य के एमएसएमई सेक्टर और पारंपरिक उद्योगों पर सीधा असर पड़ा है। कई व्यापारिक प्रतिनिधियों का मानना है कि एक समय पश्चिम बंगाल देश के औद्योगिक विकास में अग्रणी राज्यों में शामिल था, लेकिन समय के साथ प्रतिस्पर्धा बढ़ने और नीतिगत स्थिरता की कमी के कारण यह गति धीमी हो गई। परिणामस्वरूप कई छोटे और मध्यम उद्योग या तो बंद हो गए या बेहतर अवसरों की तलाश में अन्य राज्यों में स्थानांतरित हो गए। अब व्यापारिक जगत को उम्मीद है कि यदि राज्य में उद्योगों के लिए सरल नियम, निवेशकों के लिए भरोसेमंद माहौल और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता लाई जाती है, तो स्थिति में तेजी से सुधार हो सकता है। खासकर यह माना जा रहा है कि छोटे और मध्यम उद्योगों को यदि उचित सहयोग दिया जाए तो वे फिर से राज्य की आर्थिक रीढ़ बन सकते हैं। Water Pipeline Dispute: शिवपुरी नगर पालिका में जल लाइन को लेकर विवाद; एई और पार्षद पति आमने-सामने पारंपरिक उद्योगों जैसे चाय, जूट, हथकरघा, चमड़ा और मिठाई व्यवसाय को बंगाल की पहचान माना जाता है। लेकिन बढ़ती लागत, जटिल नियमों और सीमित सहायता के कारण इन क्षेत्रों को भी दबाव का सामना करना पड़ा है। व्यापारिक वर्ग का कहना है कि यदि इन उद्योगों के लिए विशेष नीतिगत समर्थन दिया जाए, तो बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर दोबारा पैदा हो सकते हैं। इसके साथ ही यह भी सुझाव दिया जा रहा है कि राज्य में निवेश को आकर्षित करने के लिए बुनियादी ढांचे को मजबूत करना बेहद जरूरी है। बेहतर सड़क, परिवहन और लॉजिस्टिक्स सुविधाएं औद्योगिक विकास को नई गति दे सकती हैं। साथ ही औद्योगिक गलियारों के विस्तार से बड़े स्तर पर निवेश आकर्षित किया जा सकता है। व्यापार जगत यह भी मानता है कि यदि राज्य में केंद्र की विभिन्न विकास योजनाओं की भावना के अनुरूप नीतियां लागू की जाएं, तो बंगाल एक बार फिर निवेशकों की पसंदीदा जगह बन सकता है। इससे न केवल उद्योगों का विस्तार होगा, बल्कि युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। कुल मिलाकर, व्यापारिक प्रतिनिधियों का मानना है कि यदि सही दिशा में नीतिगत सुधार किए जाएं और निवेश के लिए स्थिर वातावरण बनाया जाए, तो पश्चिम बंगाल में एक नया औद्योगिक दौर शुरू हो सकता है, जिससे राज्य की आर्थिक स्थिति को मजबूती मिल सकती है।
Turkey-Indonesia Defense Deal: तुर्की के ड्रोन पावर पर भरोसा, इंडोनेशिया खरीदेगा दुनिया का पहला UCAV; एशिया में बदल सकते हैं सैन्य समीकरण

Turkey-Indonesia Defense Deal: नई दिल्ली। इंडोनेशिया और तुर्की के बीच बड़ा रक्षा समझौता हुआ है, जिसने एशिया की सुरक्षा राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। इस डील के तहत इंडोनेशिया तुर्की से अत्याधुनिक Kizilelma UCAV (मानवरहित लड़ाकू विमान) खरीदेगा। खास बात यह है कि इंडोनेशिया इस ड्रोन फाइटर जेट का पहला विदेशी ग्राहक बन गया है। रक्षा विशेषज्ञ इसे तुर्की की बढ़ती सैन्य ताकत और ASEAN क्षेत्र में उसके प्रभाव विस्तार की रणनीति के तौर पर देख रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, तुर्की की एयरोस्पेस कंपनी Baykar Technologies और इंडोनेशिया की रक्षा कंपनी Republicorp के बीच 12 Kizilelma UCAV की डील पर हस्ताक्षर हुए हैं। इस समझौते में भविष्य में 48 अतिरिक्त विमानों की खरीद का विकल्प भी शामिल है। तुर्की की योजना 2028 से इन विमानों की डिलीवरी शुरू करने की है। डील की सबसे अहम बात यह है कि इंडोनेशिया में इन UCAV के उत्पादन और रखरखाव से जुड़ी सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी। इससे इंडोनेशिया की घरेलू रक्षा क्षमता मजबूत होगी, वहीं तुर्की को दक्षिण-पूर्व एशिया के बड़े रक्षा बाजार में गहरी पकड़ बनाने का मौका मिलेगा। इंडोनेशिया पहले ही Baykar के TB2 और Akinci ड्रोन खरीद चुका है। इसके अलावा उसने TB3 कैरियर बेस्ड ड्रोन सिस्टम की 60 यूनिट खरीदने की योजना भी बनाई है। माना जा रहा है कि इन्हें इंडोनेशिया अपने विमानवाहक पोत पर तैनात कर सकता है। इससे पहले भी इंडोनेशिया तुर्की के पांचवीं पीढ़ी के KAAN स्टेल्थ फाइटर जेट खरीदने का समझौता कर चुका है। इसके साथ ही फ्रिगेट, मध्यम टैंक, एयर डिफेंस मिसाइल और बैलिस्टिक सिस्टम जैसे कई रक्षा सौदे दोनों देशों के बीच तेजी से बढ़ रहे हैं। Kizilelma को तुर्की का पहला स्वदेशी जेट-संचालित मानवरहित लड़ाकू विमान माना जाता है। इस UCAV ने 2022 में पहली उड़ान भरी थी। इसे एयर-टू-एयर कॉम्बैट, एयर-टू-ग्राउंड अटैक, निगरानी, टोही, मिसाइल स्ट्राइक और दुश्मन की एयर डिफेंस सिस्टम को नष्ट करने जैसे मिशनों के लिए तैयार किया गया है। कंपनी का दावा है कि यह AI आधारित सिस्टम से लैस है और इसे विमानवाहक पोत से भी ऑपरेट किया जा सकता है। इसकी अधिकतम गति करीब 800 किलोमीटर प्रति घंटा है, जबकि यह 1,500 किलोग्राम तक हथियार ले जाने में सक्षम है। विशेषज्ञ मानते हैं कि तुर्की और इंडोनेशिया की यह बढ़ती सैन्य साझेदारी हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शक्ति संतुलन को प्रभावित कर सकती है। खासकर ऐसे समय में जब तुर्की का झुकाव पाकिस्तान के पक्ष में माना जाता है, भारत भी अपने पड़ोस में हो रहे इन रक्षा समझौतों पर करीबी नजर बनाए हुए है।
Google Chrome Alert: बिना बताए 4GB की AI फाइल डाउनलोड कर रहा ब्राउजर? स्टोरेज और डेटा पर बड़ा खतरा!

Google Chrome Alert: नई दिल्ली। Google Chrome को लेकर सामने आई नई रिपोर्ट ने करोड़ों यूजर्स की चिंता बढ़ा दी है। दावा किया जा रहा है कि Chrome कुछ डिवाइसेज में बिना किसी स्पष्ट अनुमति के लगभग 4GB का AI मॉडल डाउनलोड कर रहा है। यह फाइल Chrome के नए ऑन-डिवाइस AI फीचर्स से जुड़ी बताई जा रही है। हालांकि कंपनी की तरफ से इस मामले पर अभी तक कोई विस्तृत आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन इस खुलासे ने प्राइवेसी, डेटा खपत और सिस्टम स्टोरेज को लेकर बड़ी बहस छेड़ दी है। सिक्योरिटी रिसर्चर Alexander Hanff ने दावा किया कि Chrome यूजर के सिस्टम हार्डवेयर की जांच करने के बाद अपने आप AI मॉडल डाउनलोड करना शुरू कर देता है। अगर कंप्यूटर या लैपटॉप इस मॉडल को रन करने में सक्षम होता है, तो ब्राउजर बैकग्राउंड में भारी फाइल डाउनलोड कर लेता है। कई यूजर्स को इसका पता तब चलता है, जब उनकी स्टोरेज अचानक कम होने लगती है या इंटरनेट डेटा तेजी से खत्म हो जाता है। रिपोर्ट के मुताबिक, रिसर्चर ने macOS सिस्टम पर टेस्टिंग के दौरान पाया कि Chrome ने बिना किसी नोटिफिकेशन के “OptGuideOnDeviceModel” नाम का फोल्डर बनाया और करीब 14 मिनट में लगभग 4GB डेटा डाउनलोड कर लिया। बताया जा रहा है कि यह फाइल Chrome के AI फीचर्स जैसे स्मार्ट राइटिंग असिस्टेंट और ऑन-डिवाइस सर्च प्रोसेसिंग के लिए इस्तेमाल की जाती है। दिलचस्प बात यह है कि Chrome के कई AI फीचर्स अब भी क्लाउड सर्वर पर निर्भर हैं। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह भारी AI मॉडल हर यूजर के लिए जरूरी भी है या नहीं। टेक एक्सपर्ट्स का मानना है कि सीमित स्टोरेज वाले सिस्टम में यह फाइल डिवाइस की परफॉर्मेंस को प्रभावित कर सकती है। Windows 11 यूजर्स अपने सिस्टम में इस फाइल को %LOCALAPPDATA%GoogleChromeUser DataOptGuideOnDeviceModel लोकेशन पर खोज सकते हैं। हालांकि केवल फोल्डर डिलीट करने से समस्या खत्म नहीं होगी, क्योंकि Chrome इसे दोबारा डाउनलोड कर सकता है। इससे बचने के लिए यूजर्स Chrome में chrome://flags खोलकर “optimization-related on-device AI” सेटिंग को Disable कर सकते हैं। कुछ साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स का कहना है कि पूरी तरह बचने का सबसे सख्त तरीका Chrome को अनइंस्टॉल करना हो सकता है। यह मामला खासतौर पर उन यूजर्स के लिए चिंता का विषय बन गया है, जो सीमित इंटरनेट डेटा प्लान या कम स्टोरेज वाले लैपटॉप इस्तेमाल करते हैं। बैकग्राउंड में होने वाला यह डाउनलोड न सिर्फ डेटा खत्म कर सकता है, बल्कि बैटरी और सिस्टम रिसोर्स पर भी अतिरिक्त दबाव डालता है। फिलहाल यूजर्स Google की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहे हैं।
Google Fitbit Air Launch: 5 मिनट चार्ज में दिनभर चलेगा ट्रैकर, 7 दिन की बैटरी और AI हेल्थ फीचर्स ने बढ़ाई हलचल

Google Fitbit Air Launch: नई दिल्ली। Google Fitbit ने ग्लोबल मार्केट में अपना नया फिटनेस ट्रैकर Fitbit Air लॉन्च कर दिया है। कंपनी का दावा है कि यह डिवाइस उन यूजर्स के लिए तैयार किया गया है, जो हल्का, आरामदायक और लंबे समय तक पहनने लायक स्मार्ट फिटनेस ट्रैकर चाहते हैं। शानदार बैटरी लाइफ, एडवांस स्लीप ट्रैकिंग और Google Health सपोर्ट जैसे फीचर्स इसे खास बनाते हैं। Fitbit Air को बेहद हल्के डिजाइन के साथ पेश किया गया है, ताकि यूजर्स इसे दिन और रात दोनों समय आराम से पहन सकें। खासतौर पर यह उन लोगों के लिए उपयोगी माना जा रहा है, जो दिन में स्मार्टवॉच और रात में स्लीप ट्रैकिंग के लिए अलग डिवाइस इस्तेमाल करना पसंद करते हैं। कंपनी के मुताबिक यह डिवाइस रनिंग, रिकवरी और हेल्थ डेटा को काफी सटीक तरीके से ट्रैक करता है। Google ने अपनी पुरानी Fitbit App को अब Google Health App के रूप में रीब्रांड किया है और नया Fitbit Air इसी प्लेटफॉर्म के साथ काम करेगा। बैटरी के मामले में भी यह डिवाइस काफी दमदार बताया जा रहा है। कंपनी के अनुसार, एक बार फुल चार्ज करने पर यह ट्रैकर लगभग 7 दिनों तक चलता है। वहीं इसकी फास्ट चार्जिंग तकनीक यूजर्स को सिर्फ 5 मिनट चार्ज में पूरे दिन का बैकअप देने का दावा करती है। यूजर्स की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कंपनी ने इसके साथ कई तरह के बैंड ऑप्शन भी पेश किए हैं। वर्कआउट और फिटनेस एक्टिविटी के लिए Performance Loop और Active Loop दिए गए हैं, जबकि रोजमर्रा के इस्तेमाल के लिए Elevated Loop बैंड उपलब्ध कराया गया है। कीमत की बात करें तो Fitbit Air को 99.99 डॉलर यानी करीब 8,300 रुपये में लॉन्च किया गया है। फिलहाल अमेरिका में इसकी प्री-बुकिंग शुरू हो चुकी है। यह डिवाइस Android और iOS दोनों प्लेटफॉर्म को सपोर्ट करता है। कंपनी यूजर्स को 3 महीने का Google Health Premium सब्सक्रिप्शन भी मुफ्त दे रही है, जिसके जरिए हेल्थ कोचिंग और एडवांस फिटनेस फीचर्स का फायदा उठाया जा सकेगा। फिटनेस और हेल्थ गैजेट्स के बढ़ते बाजार में Google का यह नया ट्रैकर सीधे तौर पर स्मार्ट फिटनेस बैंड सेगमेंट में बड़ी कंपनियों को चुनौती देने वाला माना जा रहा है।
रीवा अरोड़ा विवाद में: डिलीवरी एजेंट की कथित गाली-गलौज से बिगड़ा माहौल, परिवार ने बुलाई पुलिस

नई दिल्ली । अभिनेत्री रीवा अरोड़ा एक विवाद को लेकर सुर्खियों में आ गई हैं, जिसमें उनके घर के बाहर एक डिलीवरी एजेंट के साथ हुई बहस ने गंभीर रूप ले लिया। यह घटना कथित तौर पर उस समय हुई जब एक डिलीवरी व्यक्ति उनके आवास पर ऑर्डर लेकर पहुंचा था। शुरुआत में यह एक सामान्य प्रक्रिया थी, लेकिन कुछ ही देर में माहौल तनावपूर्ण हो गया। रीवा अरोड़ा के अनुसार, बातचीत की शुरुआत से ही उस व्यक्ति का व्यवहार असहज और अनुचित था। सामान्य संवाद की कोशिश के बावजूद स्थिति में सुधार नहीं हुआ और बात बढ़ती चली गई। परिवार का कहना है कि जब माहौल को शांत करने की कोशिश की गई, तब भी सामने वाले व्यक्ति के व्यवहार में कोई नरमी नहीं आई। स्थिति उस समय और बिगड़ गई जब कथित तौर पर लिफ्ट के पास भी विवाद जारी रहा। आरोप है कि वहां भी अपशब्दों का प्रयोग किया गया, जिससे पूरे परिवार को सुरक्षा को लेकर चिंता होने लगी। लगातार बढ़ते तनाव को देखते हुए मामला नियंत्रण से बाहर होने लगा। परिवार ने हालात बिगड़ते देख तुरंत संबंधित अधिकारियों से संपर्क किया। सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को संभाला गया। सुरक्षा कर्मियों की मदद से पूरे मामले को शांत कराया गया और किसी भी बड़े नुकसान या टकराव को टाल दिया गया। रीवा अरोड़ा ने इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनका उद्देश्य किसी एक व्यक्ति या किसी पूरे पेशे को गलत ठहराना नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह मामला केवल व्यक्तिगत अनुभव से जुड़ा है और इसे व्यापक रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उनका कहना है कि इस तरह की घटनाओं को सामने लाने का मकसद सिर्फ यह है कि सार्वजनिक व्यवहार और सम्मानजनक बातचीत के महत्व को समझा जा सके। इस पूरे मामले ने लोगों के बीच अलग-अलग प्रतिक्रियाएं पैदा कर दी हैं। कुछ लोग इसे एक दुर्भाग्यपूर्ण व्यक्तिगत अनुभव मान रहे हैं, जबकि कुछ इसे सेवा क्षेत्र में व्यवहार से जुड़ी संवेदनशीलता के रूप में देख रहे हैं। सोशल स्तर पर यह चर्चा भी शुरू हो गई है कि ग्राहकों और सेवा प्रदाताओं के बीच संवाद कितना महत्वपूर्ण होता है और किस तरह छोटी गलतफहमियां बड़े विवाद में बदल सकती हैं। फिलहाल इस मामले में किसी कानूनी कार्रवाई की विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। पुलिस हस्तक्षेप के बाद स्थिति सामान्य हो गई है और मामला शांत बताया जा रहा है। यह घटना एक बार फिर यह संकेत देती है कि किसी भी सार्वजनिक या निजी सेवा के दौरान आपसी सम्मान और संयम कितना जरूरी है, ताकि अनावश्यक विवादों से बचा जा सके।
Apple India Policy: भारत में iPhone खरीदते ही फंस जाते हैं ग्राहक! अमेरिका में 14 दिन तक मिलता है रिटर्न का अधिकार

Apple India Policy: नई दिल्ली। Apple की भारत और अमेरिका में अलग-अलग रिटर्न पॉलिसी को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। अगर आप भारत में iPhone, MacBook या कोई दूसरा Apple प्रोडक्ट खरीदने की तैयारी कर रहे हैं, तो कंपनी की रिटर्न और एक्सचेंज पॉलिसी जानना बेहद जरूरी है। भारत में Apple Store से खरीदे गए प्रोडक्ट्स पर कंपनी की नीति अमेरिका के मुकाबले काफी सख्त मानी जाती है। यही वजह है कि कई ग्राहक इसे लेकर सवाल उठा रहे हैं। भारत में Apple ने सबसे पहले अपने ऑनलाइन स्टोर के जरिए एंट्री की थी। इसके बाद कंपनी ने मुंबई, दिल्ली समेत कई बड़े शहरों में अपने आधिकारिक रिटेल स्टोर खोले। अब देश में Apple की मौजूदगी तेजी से बढ़ रही है, लेकिन ग्राहकों को यहां वह सुविधा नहीं मिलती जो अमेरिका में आम बात है। भारत में Apple Store से खरीदा गया कोई भी प्रोडक्ट सिर्फ पसंद न आने या मन बदलने की स्थिति में वापस नहीं किया जा सकता। कंपनी की स्पष्ट पॉलिसी है कि सामान्य परिस्थितियों में रिफंड और एक्सचेंज की सुविधा उपलब्ध नहीं होगी। Google Chrome Alert: बिना बताए 4GB की AI फाइल डाउनलोड कर रहा ब्राउजर? स्टोरेज और डेटा पर बड़ा खतरा! हालांकि, अगर खरीदा गया डिवाइस डिफेक्टिव निकलता है या वारंटी के दायरे में कोई तकनीकी खराबी आती है, तो ग्राहक को राहत मिल सकती है। ऐसे मामलों में Apple अधिकृत सर्विस सेंटर के जरिए रिपेयर या कुछ परिस्थितियों में रिप्लेसमेंट की सुविधा देता है। जिन ग्राहकों ने Apple Care+ लिया है, उन्हें अतिरिक्त सर्विस सपोर्ट भी मिलता है। दूसरी तरफ अमेरिका में Apple की नीति कहीं ज्यादा ग्राहक-अनुकूल मानी जाती है। वहां ग्राहक डिलीवरी मिलने के 14 दिनों के भीतर प्रोडक्ट को वापस कर सकते हैं या एक्सचेंज करा सकते हैं, बशर्ते उनके पास खरीद की रसीद और प्रोडक्ट सही स्थिति में हो। यही वजह है कि भारत और अमेरिका की नीतियों के बीच बड़ा अंतर लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है। कंपनी ने आधिकारिक तौर पर यह नहीं बताया कि दोनों देशों में अलग-अलग नियम क्यों लागू किए गए हैं, लेकिन माना जाता है कि बाजार की प्रकृति, ग्राहकों के व्यवहार, लॉजिस्टिक लागत और व्यापारिक रणनीति इसके पीछे बड़ी वजह हो सकती है। फिर भी भारतीय ग्राहक लंबे समय से मांग कर रहे हैं कि Apple को भारत में भी अमेरिका जैसी आसान रिटर्न और एक्सचेंज सुविधा शुरू करनी चाहिए, ताकि ग्राहकों का भरोसा और अनुभव दोनों बेहतर हो सकें।
रियलिटी शो के अंदर की सच्चाई पर बोलीं तनीषा, कहा- स्क्रीन टाइम के लिए लोग रिश्तों और नामों का इस्तेमाल करते हैं

नई दिल्ली । अभिनेत्री Tanisha Mukerji ने वर्षों बाद अपने रियलिटी शो अनुभव को लेकर कई ऐसे पहलुओं पर रोशनी डाली है, जिन पर अक्सर दर्शकों का ध्यान नहीं जाता। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि इस तरह के शो बाहर से जितने मनोरंजक दिखते हैं, अंदर से उतने ही मानसिक दबाव और भावनात्मक उथल-पुथल से भरे होते हैं। उनके अनुसार यह पूरा अनुभव उनके लिए आसान नहीं था और कई बार यह स्थिति मानसिक रूप से चुनौतीपूर्ण बन गई थी। तनीषा मुखर्जी ने बताया कि उन्होंने उस शो में हिस्सा लेने का निर्णय बहुत जल्दी में लिया था। उस समय उन्हें लगा था कि यह एक ऐसा मंच होगा जहां वे अपनी असली पहचान और व्यक्तित्व को लोगों के सामने रख पाएंगी। लेकिन जैसे-जैसे समय आगे बढ़ा, उन्हें यह समझ आने लगा कि वहां हर चीज़ कंट्रोल और एडिटिंग के जरिए दर्शकों तक पहुंचाई जाती है। उनके मुताबिक, असली व्यक्तित्व से ज्यादा महत्व ड्रामा और टकराव को दिया जाता है। उन्होंने यह भी बताया कि शो के दौरान कई प्रतिभागी अपनी उपस्थिति मजबूत करने के लिए किसी भी तरह की रणनीति अपनाते थे। तनीषा के अनुसार, कुछ लोग चर्चा में बने रहने के लिए उनके परिवार के नाम का भी इस्तेमाल करते थे। खासकर उनके परिवार से जुड़े बड़े नामों का बार-बार जिक्र किया जाता था ताकि कैमरे का ध्यान अपनी ओर खींचा जा सके। यह स्थिति उनके लिए कई बार असहज और अप्रत्याशित रही। एक्ट्रेस ने यह भी साझा किया कि वह शो में बहुत अधिक विवादों और झगड़ों से दूरी बनाए रखती थीं। उनका मानना था कि हर स्थिति पर प्रतिक्रिया देना जरूरी नहीं होता। भाषा की सहजता और व्यक्तिगत सीमाओं के कारण उन्होंने कई बार चुप रहना ही बेहतर समझा। उनका उद्देश्य यह भी था कि किसी भी तरह की अनावश्यक स्थिति उनके परिवार या निजी जीवन पर असर न डाले। तनीषा ने आगे कहा कि इस अनुभव ने उन्हें यह समझने में मदद की कि रियलिटी शो का वास्तविक स्वरूप क्या होता है। उनके अनुसार वहां कई बार रिश्ते वास्तविक भावनाओं से नहीं बल्कि परिस्थितियों और दबाव में बनते हैं, जिन्हें बाद में दर्शकों के सामने अलग तरीके से प्रस्तुत किया जाता है। इसी कारण उन्होंने इसे एक भावनात्मक रूप से कठिन अनुभव बताया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस अनुभव के बाद वह भविष्य में कभी भी ऐसे माहौल का हिस्सा नहीं बनना चाहेंगी जहां व्यक्तिगत जीवन और परिवार को लेकर अनावश्यक चर्चाएं या गलत व्याख्याएं की जाएं। उनके अनुसार मानसिक शांति किसी भी शो या लोकप्रियता से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। इस पूरे अनुभव के जरिए तनीषा मुखर्जी ने यह संकेत दिया कि मनोरंजन की दुनिया जितनी चमकदार दिखती है, उसके पीछे उतनी ही जटिल और दबाव भरी सच्चाई भी छिपी होती है, जिसे दर्शक अक्सर नहीं देख पाते।