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पंजाब में धमाकों से बढ़ी चिंता: सुरक्षा एजेंसियों के सामने नई चुनौती, सीमापार साजिश और आतंकी नेटवर्क की आशंका

नई दिल्ली। पंजाब में मंगलवार रात सैन्य परिसरों के बाहर हुए दो धमाकों ने राज्य की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कुछ घंटों के अंतराल में दो अलग-अलग शहरों में हुई इन घटनाओं ने न केवल प्रशासन की चिंता बढ़ाई है, बल्कि सीमावर्ती राज्य में पाकिस्तान समर्थित खालिस्तानी नेटवर्क की सक्रियता की आशंकाओं को भी मजबूत किया है। हालांकि इन धमाकों में किसी तरह के जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं है और जांच एजेंसियां मामले की पड़ताल में जुटी हैं, लेकिन घटनाओं ने सुरक्षा तंत्र की सतर्कता पर सवाल जरूर खड़े किए हैं। ऑपरेशन सिंदूर की बरसी की पूर्व संध्या पर सैन्य ठिकानों के आसपास हुए विस्फोट राज्य पुलिस की खुफिया व्यवस्था की कमजोरी की ओर इशारा करते हैं। पंजाब पुलिस के महानिदेशक ने इन घटनाओं के पीछे आईएसआई समर्थित साजिश की आशंका जताई है। इस दावे को इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि जालंधर धमाके की जिम्मेदारी खालिस्तान लिबरेशन आर्मी ने ली है। यह संगठन पहले भी आईएसआई और कनाडा से समर्थन मिलने के आरोपों में चर्चा में रहा है तथा केंद्रीय गृह मंत्रालय इसे आतंकवादी संगठन घोषित कर चुका है। बीते कुछ महीनों में पंजाब में सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती देने वाली कई घटनाएं सामने आई हैं। अप्रैल में पटियाला-राजपुरा रेलवे ट्रैक पर आईईडी विस्फोट हुआ था। इससे पहले चंडीगढ़ के सेक्टर-37 स्थित भाजपा कार्यालय के बाहर ग्रेनेड हमला किया गया। जनवरी 2026 में गणतंत्र दिवस से पहले सरहिंद रेलवे ट्रैक पर धमाका हुआ, जबकि नवंबर 2025 में मोगा के सीआईए कार्यालय पर ग्रेनेड फेंका गया था। मार्च 2025 में अमृतसर के खंदवाला इलाके में धार्मिक स्थल के बाहर भी विस्फोट की घटना सामने आई थी। लगातार हो रही इन घटनाओं से संकेत मिलते हैं कि सीमापार बैठे तत्व पंजाब में अस्थिरता फैलाने की कोशिशों में जुटे हैं। यदि समय रहते इन गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण नहीं किया गया तो आम लोगों के बीच भय का माहौल गहरा सकता है और राज्य एक बार फिर पुराने दौर की दर्दनाक यादों की ओर बढ़ सकता है। ऐसे संवेदनशील समय में सुरक्षा एजेंसियों की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। साथ ही राजनीतिक दलों और नेताओं को भी इस तरह के मामलों में बयानबाजी से बचते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा को प्राथमिकता देनी चाहिए। मौजूदा हालात पंजाब में कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बनकर उभरे हैं, जिससे निपटने के लिए सीमाओं के साथ-साथ राज्य के भीतर भी चौकसी बढ़ाना बेहद जरूरी हो गया है।

वट पूर्णिमा 2026: इस बार 60 दिन के ज्येष्ठ मास के कारण बदली तारीख, जानें व्रत कब और कैसे होगा

नई दिल्ली। वट पूर्णिमा का व्रत इस बार 2026 में खास परिस्थितियों में मनाया जाएगा क्योंकि ज्येष्ठ मास इस वर्ष अधिक मास के कारण लंबा यानी लगभग 60 दिन का हो गया है। इसी वजह से व्रत की तिथि को लेकर महिलाओं में उत्सुकता बनी हुई है। पंचांग के अनुसार, इस वर्ष वट पूर्णिमा का व्रत 29 जून 2026 को रखा जाएगा। पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 29 जून को सुबह 3 बजकर 7 मिनट पर होगी और यह 30 जून की सुबह 5 बजकर 27 मिनट पर समाप्त होगी। उदयातिथि के अनुसार व्रत 29 जून को ही मान्य रहेगा। वट पूर्णिमा का महत्वयह व्रत मुख्य रूप से महाराष्ट्र, गुजरात और उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और वैवाहिक जीवन की खुशहाली के लिए रखती हैं। मान्यता है कि इस दिन वट वृक्ष (बरगद का पेड़) की पूजा करने से दांपत्य जीवन में मजबूती आती है और वैवाहिक सुख बढ़ता है। महिलाएं इस दिन निर्जला व्रत रखकर पूजा करती हैं और वट वृक्ष को देवी-देवताओं का प्रतीक मानकर उसकी परिक्रमा करती हैं। पूजा विधिव्रत के दिन महिलाएं सुबह जल्दी उठकर स्नान करती हैं और लाल या पीले वस्त्र पहनती हैं। इसके बाद 16 श्रृंगार करने का विशेष महत्व माना जाता है। पूजा के लिए एक टोकरी में सात प्रकार के अनाज, फल, फूल, रोली, कुमकुम, कच्चा सूत और अन्य सामग्री रखी जाती है। वट वृक्ष के पास पहुंचकर दीपक जलाया जाता है और कच्चे सूत से वृक्ष की परिक्रमा की जाती है। इसके बाद वृक्ष पर कुमकुम और हल्दी से तिलक किया जाता है तथा चने और गुड़ का भोग लगाया जाता है। धार्मिक मान्यतामान्यता है कि इस व्रत को विधि-विधान से करने पर पति की आयु लंबी होती है और घर में सुख-समृद्धि आती है। यह व्रत भारतीय संस्कृति में स्त्री शक्ति, समर्पण और आस्था का प्रतीक माना जाता है। कुल मिलाकर वट पूर्णिमा 2026 में विशेष खगोलीय स्थिति के कारण अधिक महत्वपूर्ण हो गया है, जिससे इसकी धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यता और भी गहरी हो जाती है।

MP में आंधी-बारिश से बदला मौसम, कई शहरों में लुढ़का पारा, आज भी 21 जिलों में चेतावनी जारी

भोपाल। मध्य प्रदेश में मौसम ने मिजाज बदला हुआ है। आंधी और बारिश के चलते प्रदेश के कई इलाकों में तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। गुरुवार को रीवा का तापमान 34 डिग्री सेल्सियस से नीचे पहुंच गया, जबकि ग्वालियर, नौगांव, सीधी और सतना में भी मौसम अपेाकृत ठंडा बना रहा। कई जिलों में हल्की बारिश भी हुई। मौसम विभाग के अनुसार शुक्रवार को भी प्रदेश के 21 जिलों में आंधी और बारिश की संभावना बनी हुई है। ग्वालियर, भिंड, मुरैना, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मैहर, उमरिया, शहडोल, अनूपपुर, डिंडौरी, मंडला, सिवनी और बालाघाट जिलों में तेज हवाओं के साथ बारिश हो सकती है। दूसरी ओर भोपाल, इंदौर और उज्जैन समेत प्रदेश के 34 जिलों में गर्मी का असर जारी रहेगा। इन इलाकों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस या उसके आसपास बने रहने का अनुमान है। इन जिलों में हुई बारिशगुरुवार को नर्मदापुरम, टीकमगढ़ और श्योपुर में बारिश दर्ज की गई। वहीं ग्वालियर-चंबल, रीवा और शहडोल संभाग के कई हिस्सों में बादल छाने और आंधी चलने का सिलसिला जारी रहा। प्रदेश के अधिकांश शहरों में तापमान 40 डिग्री से नीचे रिकॉर्ड किया गया। मौसम बदलने की वजहमौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक मध्य प्रदेश में फिलहाल दो साइक्लोनिक सर्कुलेशन सक्रिय हैं। इनमें एक प्रदेश के मध्य भाग में और दूसरा ऊपरी हिस्से में बना हुआ है। साथ ही एक ट्रफ लाइन पूर्वी हिस्से से गुजर रही है। इसके प्रभाव से अगले दो दिनों तक कई जिलों में बारिश और आंधी की स्थिति बनी रह सकती है। हालांकि 10 और 11 मई से प्रदेश में फिर गर्मी बढ़ने के आसार हैं और तापमान में इजाफा देखने को मिल सकता है।

अगस्त से बदलेगी रेलवे की टिकट बुकिंग व्यवस्था, नई आरक्षण प्रणाली में शिफ्ट होंगी ट्रेनें

नई दिल्ली। भारतीय रेलवे जल्द ही यात्रियों को टिकट बुकिंग और यात्रा से जुड़ी सुविधाओं में बड़ा बदलाव देने जा रहा है। केंद्र सरकार ने घोषणा की है कि अगस्त 2026 से ट्रेनों को नई उन्नत यात्री आरक्षण प्रणाली में स्थानांतरित करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि यह बदलाव पूरी तरह सुचारु तरीके से किया जाए और यात्रियों को किसी प्रकार की परेशानी न हो। रेल भवन में आयोजित एक समीक्षा बैठक के दौरान रेलवे की मौजूदा आरक्षण व्यवस्था और नई तकनीक आधारित प्लेटफॉर्म की तैयारियों का जायजा लिया गया। मौजूदा यात्री आरक्षण प्रणाली की शुरुआत वर्ष 1986 में हुई थी। पिछले चार दशकों में इसमें कई छोटे बदलाव किए गए, लेकिन अब रेलवे इसे पूरी तरह आधुनिक तकनीक से लैस करने जा रहा है। रेल मंत्रालय के मुताबिक नई प्रणाली की क्षमता को अत्याधुनिक तकनीक के जरिए काफी बढ़ाया गया है, ताकि भविष्य में बढ़ती यात्री संख्या और टिकट बुकिंग के दबाव को आसानी से संभाला जा सके। मंत्रालय ने कहा कि भारतीय रेलवे लगातार डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन की दिशा में काम कर रहा है और इसका सबसे बड़ा उदाहरण ऑनलाइन टिकट बुकिंग सिस्टम है। वर्तमान में करीब 88 प्रतिशत रेलवे टिकट ऑनलाइन बुक किए जा रहे हैं। इसमें RailOne मोबाइल एप की अहम भूमिका रही है, जिसे पिछले साल जुलाई में लॉन्च किया गया था। यह ऐप अब तक 3.5 करोड़ से ज्यादा बार डाउनलोड किया जा चुका है। इस प्लेटफॉर्म पर टिकट बुकिंग, कैंसिलेशन, रिफंड और लाइव ट्रेन स्टेटस जैसी कई सुविधाएं एक ही जगह उपलब्ध हैं। नई आरक्षण प्रणाली की सबसे खास बात इसमें शामिल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI आधारित प्रेडिक्शन सिस्टम है। यह फीचर वेटिंग टिकट के कन्फर्म होने की संभावना का अनुमान लगाता है। रेलवे के अनुसार, इस सुविधा की सटीकता पहले 53 प्रतिशत थी, जो अब बढ़कर 94 प्रतिशत तक पहुंच गई है। इससे यात्रियों को यात्रा की बेहतर योजना बनाने में मदद मिल रही है। इसके अलावा RailOne ऐप के जरिए यात्रियों को लाइव ट्रेन ट्रैकिंग, प्लेटफॉर्म और कोच की जानकारी, रेल मदद शिकायत निवारण सेवा और सीट तक भोजन पहुंचाने जैसी सुविधाएं भी मिल रही हैं। फिलहाल इस प्लेटफॉर्म के जरिए रोजाना करीब 9.29 लाख टिकट बुक किए जा रहे हैं, जिनमें आरक्षित और अनारक्षित दोनों तरह के टिकट शामिल हैं। सरकार ने यह भी दोहराया कि भारतीय रेलवे देश के करोड़ों लोगों की जीवनरेखा बनी हुई है। वर्ष 2024-25 में रेलवे ने यात्री सब्सिडी पर 60,239 करोड़ रुपये खर्च किए, जिससे यात्रियों को औसतन 43 प्रतिशत तक किराए में राहत मिली। नई तकनीक आधारित आरक्षण प्रणाली से उम्मीद की जा रही है कि आने वाले समय में रेलवे यात्रा पहले से ज्यादा स्मार्ट, आसान और तेज हो जाएगी।

मीठी ड्रिंक्स बन रही लिवर की दुश्मन, फैटी लिवर से बचाव के लिए जरूरी हैं ये 3 आसान आदतें

नई दिल्ली। आज की बदलती जीवनशैली और अनहेल्दी खानपान की आदतें शरीर के कई महत्वपूर्ण अंगों पर असर डाल रही हैं, जिनमें लिवर सबसे अधिक प्रभावित होने वाले अंगों में से एक है। लिवर शरीर में डिटॉक्सिफिकेशन, पाचन और एनर्जी बैलेंस जैसे कई अहम कार्य करता है, लेकिन जब खानपान में अधिक मात्रा में चीनी और मीठी ड्रिंक्स शामिल हो जाती हैं, तो इसका सीधा असर लिवर की कार्यक्षमता पर पड़ने लगता है। विशेषज्ञों के अनुसार लंबे समय तक ज्यादा शुगर का सेवन फैटी लिवर जैसी गंभीर स्थिति को जन्म दे सकता है, जिसमें लिवर के अंदर फैट जमा होने लगता है और उसकी कार्यक्षमता धीरे-धीरे कम होने लगती है। शरीर में जब अधिक मात्रा में चीनी जाती है तो वह फ्रुक्टोज और ग्लूकोज में बदलकर लिवर तक पहुंचती है। सामान्य स्थिति में लिवर इन शुगर को ऊर्जा में बदलकर उपयोग करता है, लेकिन जब इनकी मात्रा जरूरत से अधिक हो जाती है तो शरीर इन्हें फैट के रूप में स्टोर करने लगता है। समय के साथ यह फैट लिवर में जमा होता जाता है और धीरे-धीरे फैटी लिवर की समस्या पैदा हो जाती है। यह स्थिति न केवल लिवर के कार्य को प्रभावित करती है बल्कि शरीर की ऊर्जा, पाचन और मेटाबॉलिज्म पर भी नकारात्मक असर डालती है। मीठी ड्रिंक्स इस समस्या को और भी तेजी से बढ़ा सकती हैं। इन पेयों में मौजूद हाई शुगर कंटेंट और आर्टिफिशियल तत्व शरीर में तेजी से अवशोषित होते हैं, जिससे लिवर पर अचानक दबाव बढ़ जाता है। लगातार इनका सेवन लिवर में फैट जमा होने की प्रक्रिया को तेज कर देता है। इसके अलावा इनमें मौजूद केमिकल्स और एडिटिव्स भी लिवर की सेहत को कमजोर करने का काम करते हैं। यही कारण है कि विशेषज्ञ मीठी ड्रिंक्स के सेवन को सीमित करने की सलाह देते हैं। फैटी लिवर जैसी समस्या से बचने के लिए संतुलित आहार को सबसे जरूरी माना जाता है। जब भोजन में पोषक तत्वों का सही संतुलन होता है तो लिवर पर अनावश्यक दबाव नहीं पड़ता और वह बेहतर तरीके से अपना काम करता है। इसके साथ ही ताजे फल और फाइबर युक्त आहार लिवर की सफाई प्रक्रिया को मजबूत करते हैं और शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने में मदद करते हैं। पर्याप्त मात्रा में पानी पीना भी लिवर के सही कामकाज के लिए बेहद जरूरी माना जाता है, क्योंकि यह शरीर की डिटॉक्स प्रक्रिया को बेहतर बनाता है। इसके अलावा नियमित शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त नींद और तनाव से दूरी भी लिवर को स्वस्थ रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। अनहेल्दी खानपान, अत्यधिक शुगर का सेवन और निष्क्रिय जीवनशैली धीरे-धीरे लिवर को कमजोर कर सकती है, जिससे आगे चलकर गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए छोटी-छोटी स्वस्थ आदतों को अपनाकर लिवर को लंबे समय तक स्वस्थ और सक्रिय रखा जा सकता है।

मदर्स डे पर भावुक हुईं दीपिका सिंह, बोलीं- “मां बनना जिंदगी का सबसे खूबसूरत अहसास”

नई दिल्ली। माताओं के सम्मान और प्रेम को समर्पित मदर्स डे (10 मई) को लेकर टीवी अभिनेत्री दीपिका सिंह बेहद उत्साहित नजर आईं। लोकप्रिय शो ‘मंगल लक्ष्मी’ में मंगल का किरदार निभा रहीं दीपिका ने इस खास मौके पर अपने मातृत्व के अनुभवों को खुलकर साझा किया। दीपिका सिंह ने कहा कि मां बनना उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा और खूबसूरत बदलाव रहा है। उनके अनुसार, यह एक ऐसा सफर है जो सिर्फ एक किरदार नहीं बल्कि जीवनभर निभाई जाने वाली जिम्मेदारी है। उन्होंने बताया कि उनका बेटा सोहम उनकी जिंदगी का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो हर दिन उन्हें जीवन के छोटे-छोटे पलों की अहमियत समझाता है। अभिनेत्री ने भावुक होते हुए कहा कि जब वह शूटिंग के दौरान बच्चों के साथ सीन करती हैं, तो अक्सर उन्हें अपने बेटे की याद आती है। उनके लिए यह अनुभव काफी भावनात्मक होता है, क्योंकि वह हर बच्चे में अपने बेटे की झलक महसूस करती हैं। दीपिका ने यह भी कहा कि मां होने के साथ-साथ वह एक कामकाजी महिला भी हैं और चाहती हैं कि उनका बेटा उन्हें इस रूप में भी देखे। उनके अनुसार, जब बच्चे अपनी मां को काम करते देखते हैं, तो उन्हें मेहनत और सपनों की अहमियत समझ आती है। उन्होंने कहा कि एक महिला की पहचान सिर्फ मां होने तक सीमित नहीं है, बल्कि वह कई भूमिकाएं एक साथ निभाती है। मदर्स डे पर उन्होंने सिर्फ अपनी नहीं, बल्कि सभी महिलाओं की सराहना की। दीपिका ने कहा कि हर महिला, जो परिवार की जिम्मेदारियों को प्यार और समर्पण के साथ निभाती है, वह सम्मान की हकदार है। उन्होंने सभी माताओं की मेहनत, त्याग और प्रेम को सलाम किया। 

शुक्र का गुरु नक्षत्र में गोचर: 4 राशियों की बदलेगी किस्मत, धन-करियर और प्रेम में मिलेगा बड़ा लाभ

नई दिल्ली। शुक्र ग्रह का शुक्र में पुनर्वसु नक्षत्र में गोचर मई 2026 के अंत में एक महत्वपूर्ण ज्योतिषीय घटना मानी जा रही है। ज्योतिष शास्त्र में शुक्र को सुख, प्रेम, वैभव, आकर्षण और भौतिक सुख-सुविधाओं का कारक ग्रह माना जाता है। जब यह ग्रह गुरु के नक्षत्र में प्रवेश करता है, तो इसका प्रभाव कई राशियों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन के रूप में देखा जाता है। इस गोचर की अवधि 31 मई से 11 जून 2026 तक मानी जा रही है। इस समय को विशेष रूप से शुभ इसलिए माना जाता है क्योंकि गुरु का प्रभाव शुक्र की ऊर्जा को संतुलित और सकारात्मक दिशा देता है। इसका असर जीवन के कई क्षेत्रों जैसे करियर, धन, प्रेम संबंध, विवाह और पारिवारिक जीवन पर दिखाई दे सकता है। मिथुन राशि पर प्रभावमिथुन राशि के जातकों के लिए यह समय अत्यंत लाभकारी माना जा रहा है। प्रेम संबंधों में चल रही दूरियां कम हो सकती हैं और रिश्तों में मधुरता बढ़ेगी। जो लोग लंबे समय से किसी भावनात्मक उलझन में थे, उन्हें राहत मिलने की संभावना है। नौकरीपेशा लोगों को कार्यस्थल पर नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं, जो भविष्य में पदोन्नति का मार्ग खोलेंगी। व्यापार से जुड़े लोगों को नए ग्राहक और लाभकारी अवसर प्राप्त हो सकते हैं। आर्थिक स्थिति मजबूत होने के साथ-साथ आय के नए स्रोत भी बन सकते हैं। कर्क राशि पर प्रभावकर्क राशि के लिए यह गोचर करियर में प्रगति का संकेत देता है। लंबे समय से रुके हुए कार्य पूरे हो सकते हैं और कार्यस्थल पर वरिष्ठों का सहयोग मिलेगा। व्यापारियों को लाभ और विस्तार के अवसर प्राप्त होंगे। पारिवारिक जीवन में खुशहाली बनी रहेगी और मानसिक तनाव में कमी आ सकती है। इस समय लिए गए निर्णय भविष्य के लिए लाभकारी सिद्ध हो सकते हैं। तुला राशि पर प्रभावतुला राशि के जातकों के लिए यह समय आत्मविश्वास और सामाजिक प्रतिष्ठा बढ़ाने वाला रहेगा। व्यक्तित्व में आकर्षण बढ़ेगा, जिससे लोग प्रभावित होंगे। नौकरी में प्रमोशन या नई नौकरी के अवसर बन सकते हैं। प्रेम जीवन में रोमांस और समझदारी बढ़ेगी, जबकि वैवाहिक जीवन भी संतुलित रहेगा। आर्थिक रूप से यह समय लाभकारी रहेगा और रुका हुआ धन वापस मिलने की संभावना है। धनु राशि पर प्रभावधनु राशि के लिए यह गोचर करियर और व्यापार में तेजी से प्रगति का संकेत देता है। नई योजनाएं सफल हो सकती हैं और मेहनत का अच्छा परिणाम मिलेगा। वरिष्ठों का सहयोग मिलेगा, जिससे कार्यक्षेत्र में उन्नति संभव है। प्रेम संबंधों में सकारात्मक बदलाव आएंगे और आत्मविश्वास बढ़ेगा। सामाजिक जीवन में मान-सम्मान में वृद्धि होगी और रुके हुए कार्य पूरे हो सकते हैं। समग्र प्रभावकुल मिलाकर यह गोचर कई राशियों के लिए आर्थिक, मानसिक और सामाजिक रूप से लाभकारी माना जा रहा है। शुक्र और Venus के इस नक्षत्र परिवर्तन से जीवन में संतुलन, आकर्षण और अवसरों में वृद्धि देखने को मिल सकती है। हालांकि ज्योतिषीय प्रभाव व्यक्तिगत कुंडली पर भी निर्भर करता है, इसलिए परिणाम हर व्यक्ति के लिए अलग हो सकते हैं।

ग्वालियर लॉ कॉलेज अपहरण केस में बड़ा मोड़, वायरल वीडियो से मचा हड़कंप

नई दिल्ली। ग्वालियर में लॉ कॉलेज गेट के बाहर से 17 वर्षीय छात्रा के कथित अपहरण मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। घटना के 24 घंटे बाद भी पुलिस न तो मुख्य आरोपी तक पहुंच सकी है और न ही छात्रा की स्पष्ट लोकेशन का पता चल पाया है। इसी बीच मामले में एक वीडियो सामने आने से स्थिति और उलझ गई है। वायरल वीडियो में आरोपी जीतू तोमर छात्रा के साथ नजर आ रहा है और दावा कर रहा है कि यह मामला अपहरण का नहीं बल्कि आपसी सहमति का है। वीडियो में उसने खुद को ग्वालियर निवासी बताया और कहा कि वह और छात्रा पिछले ढाई साल से रिश्ते में हैं। वीडियो में जीतू तोमर यह भी कहता दिखाई देता है कि पिछले एक महीने से दोनों के बीच कुछ गलतफहमी चल रही थी, जिसे दूर करने के लिए वह छात्रा से मिलने आया था। उसके अनुसार, दोनों अपनी मर्जी से साथ गए हैं और जल्द ही घर लौट आएंगे। उसने यह भी अपील की कि उसके परिवार को परेशान न किया जाए। यह पूरा मामला बुधवार दोपहर करीब 2:30 बजे कंपू थाना क्षेत्र के कैंसर पहाड़िया इलाके का है। जानकारी के अनुसार, लॉ छात्रा अपनी सहेली के साथ कॉलेज गेट के बाहर खड़ी थी, तभी बिना नंबर की बलेनो कार में सवार होकर जीतू तोमर अपने एक साथी के साथ वहां पहुंचा। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, दोनों आरोपियों ने अचानक छात्रा को जबरन कार में खींच लिया। जब उसकी सहेली ने विरोध किया तो उसे धक्का देकर गिरा दिया गया। इसके बाद आरोपी छात्रा को लेकर मौके से फरार हो गए। भागते समय उन्होंने छात्रा का मोबाइल फोन भी छीनकर सड़क पर फेंक दिया, ताकि किसी तरह का संपर्क न हो सके। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और पूरे शहर में नाकाबंदी कर दी गई। हाईवे, टोल प्लाजा और प्रमुख प्रवेश मार्गों पर सघन चेकिंग अभियान चलाया गया, लेकिन अब तक आरोपी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं। इस मामले में पुलिस का कहना है कि वीडियो की सत्यता और परिस्थितियों की जांच की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि छात्रा नाबालिग है या नहीं और उसका बयान क्या है, इसके आधार पर ही आगे की कानूनी कार्रवाई तय होगी। फिलहाल पुलिस दोनों आरोपियों की तलाश में लगातार दबिश दे रही है और सर्विलांस टीम की मदद भी ली जा रही है। वहीं वीडियो सामने आने के बाद मामला और संवेदनशील हो गया है, जिससे जांच एजेंसियों पर दबाव बढ़ गया है। पूरा मामला अब प्रेम संबंध और अपहरण के दावों के बीच उलझ गया है, और पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि सच्चाई को जल्द से जल्द सामने लाया जाए।

पंच केदार के दर्शन से मिलता है पुण्य फल, जानिए भगवान शिव के पांच पवित्र धामों की महिमा

नई दिल्ली। देवभूमि उत्तराखंड को भगवान शिव की भूमि माना जाता है। यहां स्थित चारधाम यात्रा जितनी प्रसिद्ध है, उतनी ही खास मानी जाती है पंच केदार यात्रा। पंच केदार भगवान शिव को समर्पित पांच पवित्र मंदिरों का समूह है, जिनका हिंदू धर्म में विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि इन मंदिरों के दर्शन करने से व्यक्ति को पापों से मुक्ति मिलती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु इन धामों की यात्रा कर भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। पौराणिक कथा के अनुसार, महाभारत युद्ध के बाद पांडव अपने पापों से मुक्ति पाने के लिए भगवान शिव की शरण में पहुंचे। लेकिन भगवान शिव पांडवों से नाराज थे और उनसे मिलने से बचने के लिए बैल का रूप धारण कर उत्तराखंड के हिमालयी क्षेत्रों में चले गए। जब पांडवों ने उनका पीछा किया, तब शिवजी बैल के रूप में धरती में समाने लगे। इसी दौरान उनके शरीर के अलग-अलग अंग पांच स्थानों पर प्रकट हुए। यही पांच स्थान आगे चलकर पंच केदार कहलाए। इनमें सबसे प्रमुख और प्रथम केदार केदारनाथ धाम है, जहां भगवान शिव के पृष्ठ भाग की पूजा की जाती है। रुद्रप्रयाग जिले में स्थित केदारनाथ 12 ज्योतिर्लिंगों में शामिल है और इसे अत्यंत पवित्र माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि यहां दर्शन करने से जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति मिलती है। दूसरा केदार मध्यमहेश्वर है, जहां भगवान शिव की नाभि की पूजा होती है। करीब 12 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित यह मंदिर चौखंबा पर्वत की गोद में बसा है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यहां के दर्शन से मानसिक शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त होती है। तीसरा केदार तुंगनाथ धाम है, जो दुनिया के सबसे ऊंचे शिव मंदिरों में गिना जाता है। यहां भगवान शिव की भुजाओं और हृदय स्थल की पूजा की जाती है। चोपता के पास स्थित यह धाम प्राकृतिक सुंदरता और धार्मिक आस्था का अद्भुत संगम माना जाता है। चौथा केदार रुद्रनाथ मंदिर है, जहां भगवान शिव के मुख की पूजा होती है। गुफा के भीतर स्थित यह मंदिर बेहद रहस्यमयी और आध्यात्मिक ऊर्जा से भरपूर माना जाता है। यहां शिवजी को नीलकंठ महादेव के रूप में पूजा जाता है। पंचम और अंतिम केदार कल्पेश्वर मंदिर है, जो चमोली जिले की उर्गम घाटी में स्थित है। यहां भगवान शिव की जटाओं की पूजा की जाती है। खास बात यह है कि कल्पेश्वर मंदिर के कपाट पूरे साल खुले रहते हैं, जिससे श्रद्धालु किसी भी समय यहां दर्शन कर सकते हैं। पंच केदार यात्रा केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि हिमालय की अद्भुत प्राकृतिक सुंदरता और आध्यात्मिक अनुभव का अनोखा संगम भी है। माना जाता है कि श्रद्धा और भक्ति के साथ इन पांचों धामों के दर्शन करने से व्यक्ति को पुण्य फल की प्राप्ति होती है।

CMF Watch 3 Pro भारत में लॉन्च: ChatGPT सपोर्ट, 13 दिन की बैटरी और दमदार GPS के साथ स्मार्टवॉच सेगमेंट में एंट्री

नई दिल्ली। सीएमएफ ने भारत में अपनी नई स्मार्टवॉच CMF Watch 3 Pro लॉन्च कर दी है, जो बजट सेगमेंट में प्रीमियम फीचर्स का कॉम्बिनेशन लेकर आई है। यह वॉच खास तौर पर उन यूजर्स के लिए डिजाइन की गई है जो AI फीचर्स, हेल्थ ट्रैकिंग और लंबी बैटरी लाइफ एक साथ चाहते हैं। इस स्मार्टवॉच में चैटGPT आधारित AI सपोर्ट, फाइव-बैंड जीपीएस, AMOLED डिस्प्ले और 13 दिन तक चलने वाली बैटरी जैसे फीचर्स दिए गए हैं, जिससे यह अपने सेगमेंट में एक मजबूत दावेदार बन गई है। कीमत और उपलब्धताकंपनी ने इसकी शुरुआती कीमत 7,999 रुपये रखी है, लेकिन लॉन्च ऑफर के तहत इसे 6,999 रुपये में खरीदा जा सकता है। फ्लिपकार्ट पर इसकी अर्ली एक्सेस सेल शुरू हो चुकी है, जबकि सामान्य बिक्री 8 मई से शुरू होगी।यह वॉच डार्क ग्रे, लाइट ग्रीन, लाइट ग्रे और ऑरेंज जैसे चार रंगों में उपलब्ध है। डिस्प्ले और डिजाइनCMF Watch 3 Pro में 1.43 इंच की AMOLED स्क्रीन दी गई है, जो तेज धूप में भी साफ दिखाई देती है। इसमें ऑलवेज-ऑन डिस्प्ले फीचर भी मौजूद है। मेटल बॉडी और प्रीमियम स्ट्रैप्स के साथ यह वॉच डिजाइन के मामले में भी आकर्षक है। इसमें 120 से ज्यादा वॉच फेस और AI जनरेटेड कस्टम वॉच फेस बनाने का विकल्प भी मिलता है। साथ ही इसे IP68 रेटिंग मिली है, जो इसे धूल और पानी से सुरक्षित बनाती है। AI और स्मार्ट फीचर्सइस वॉच की सबसे बड़ी खासियत इसका ChatGPT इंटीग्रेशन है। यूजर सीधे वॉइस कमांड देकर सवाल पूछ सकते हैं, रिमाइंडर सेट कर सकते हैं और नोट्स तैयार कर सकते हैं। वॉयस-टू-टेक्स्ट फीचर के जरिए बोले गए शब्द सीधे टेक्स्ट में बदल जाते हैं। इसके अलावा कॉलिंग, मैसेज रिप्लाई, म्यूजिक कंट्रोल और जेस्चर कंट्रोल जैसे स्मार्ट फीचर्स भी मौजूद हैं। हेल्थ और फिटनेस ट्रैकिंगCMF Watch 3 Pro में 131 से ज्यादा स्पोर्ट्स मोड दिए गए हैं। यह 7 एक्टिविटीज को ऑटो डिटेक्ट कर सकती है।इसमें हार्ट रेट, SpO2, स्ट्रेस और स्लीप ट्रैकिंग जैसे एडवांस हेल्थ सेंसर भी शामिल हैं। रनिंग के लिए इसमें AI रनिंग कोच और डुअल-बैंड GPS दिया गया है, जो लोकेशन ट्रैकिंग को ज्यादा सटीक बनाता है। बैटरी लाइफकंपनी के अनुसार यह स्मार्टवॉच एक बार चार्ज करने पर सामान्य उपयोग में 13 दिन तक चल सकती है।हेवी यूज में यह 10–11 दिन तक बैकअप देती है, जबकि पावर सेविंग मोड में इसका बैकअप 60 दिन तक पहुंच सकता है। फुल चार्ज होने में लगभग 1 घंटा 40 मिनट लगता है।CMF Watch 3 Pro भारतीय बाजार में एक ऐसी स्मार्टवॉच के रूप में आई है जो AI, हेल्थ और बैटरी लाइफ का संतुलन पेश करती है। कम कीमत में इतने एडवांस फीचर्स इसे बजट स्मार्टवॉच सेगमेंट में एक मजबूत विकल्प बनाते हैं।