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गर्मी में कूलर की गर्म हवा से परेशान? ये 2 आसान उपाय बना सकते हैं कमरे को AC जैसा ठंडा

नई दिल्ली। गर्मी के मौसम में जब तापमान लगातार बढ़ता है तो घरों में कूलर ही सबसे बड़ा सहारा बनता है। लेकिन कई बार लोगों को यह समस्या परेशान करती है कि कूलर ठंडी हवा देने के बजाय गर्म हवा फेंकने लगता है। ऐसे में लगता है कि अब राहत मिलना मुश्किल है, लेकिन कुछ आसान घरेलू उपायों की मदद से कूलर की कूलिंग को फिर से बेहतर किया जा सकता है और कमरे में ठंडक का असर बढ़ाया जा सकता है। कूलर की हवा को ठंडा बनाने के लिए सबसे सरल तरीका पानी में सेंधा नमक का उपयोग माना जाता है। जब कूलर के टैंक में पानी भरते समय उसमें थोड़ी मात्रा में सेंधा नमक मिलाया जाता है तो पानी जल्दी गर्म नहीं होता और लंबे समय तक ठंडा बना रहता है। इससे कूलर की हवा का असर बेहतर हो जाता है और कमरे में ठंडक महसूस होती है। यह तरीका खासकर उन लोगों के लिए उपयोगी है जिनके घर में लगातार गर्म हवा की समस्या आती रहती है। इसके अलावा फिटकरी का उपयोग भी कूलर की कूलिंग को सुधारने में मदद करता है। जब कूलर के पानी में फिटकरी डाली जाती है तो यह पानी को साफ रखने में मदद करती है और उसमें मौजूद गंदगी और बदबू को कम करती है। साफ और शुद्ध पानी के कारण कूलर की हवा ज्यादा ताजगी भरी और ठंडी महसूस होती है, जिससे कमरे का वातावरण काफी हद तक बेहतर हो जाता है। कूलर की कूलिंग को और बढ़ाने के लिए कुछ अन्य घरेलू उपाय भी अपनाए जा सकते हैं। जैसे टैंक में सामान्य पानी की जगह ठंडा पानी या बर्फ डालने से तुरंत ठंडक महसूस होती है और कमरे का तापमान तेजी से कम होता है। यह तरीका खासकर तब ज्यादा असरदार होता है जब बाहर का तापमान बहुत ज्यादा हो। इसके साथ ही कूलर की घास या कूलिंग पैड की स्थिति भी बहुत महत्वपूर्ण होती है। अगर यह पुराना या खराब हो जाए तो कूलर की हवा गर्म आने लगती है। इसलिए समय-समय पर इसकी सफाई या बदलाव जरूरी होता है ताकि हवा का फ्लो सही बना रहे और कूलिंग बेहतर मिले। कमरे में कूलर का असर बढ़ाने के लिए वेंटिलेशन का ध्यान रखना भी जरूरी है। अगर कमरे की खिड़कियां और दरवाजे सही तरीके से खुले रहें तो हवा का सही प्रवाह बना रहता है और कूलर की ठंडी हवा पूरे कमरे में फैल जाती है। इससे कमरा जल्दी ठंडा होता है और लंबे समय तक ठंडक बनी रहती है। इसके अलावा कूलर में जरूरत से ज्यादा पानी भरने से बचना चाहिए क्योंकि इससे हवा का प्रवाह प्रभावित हो सकता है। सही मात्रा में पानी और नियमित सफाई कूलर की परफॉर्मेंस को बेहतर बनाए रखती है और गर्मी में राहत दिलाने में मदद करती है।

मप्र में अब तक 9.09 लाख किसानों से 53.40 लाख मीट्रिक टन गेहूँ का हुआ उपार्जन

भोपाल। मध्य प्रदेश में अभी तक 9 लाख 9 हजार किसानों से 53 लाख 40 हजार मीट्रिक टन गेहूँ की खरीदी की जा चुकी है। गेहूँ का उपार्जन सप्ताह में 6 दिन सोमवार से शनिवार तक किया जा रहा है। तौल पर्ची बनाने का समय शाम 6 बजे से बढ़ाकर रात 10 बजे तक तथा देयक जारी करने का समय रात 12 तक कर दिया गया है। यह जानकारी गुरुवार को प्रदेश के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री गोविन्द सिंह राजपूत ने दी। उन्होंने बताया कि अभी तक 14 लाख 81 हजार किसानों द्वारा गेहूँ उपार्जन के लिए स्लॉट बुक कराए गए हैं। किसानों के हित में गेहूँ उपार्जन की अवधि 9 मई से बढ़ाकर 23 मई 2026 तक की गई। प्रत्येक उपार्जन केन्द्र पर तौल कांटों की संख्या 4 से बढ़ाकर 6 की गई तथा तौल कांटों की संख्या में वृद्धि का अधिकार जिलों को दिए जाने का निर्णय लिया गया। साथ ही एनआईसी सर्वर की क्षमता एवं संख्या में वृद्धि कराई गई। खाद्य विभाग द्वारा प्रति घंटा स्लॉट बुकिंग एवं उपार्जन की मॉनिटरिंग की जा रही है। मंत्री राजपूत ने बताया कि किसानों को 9525.70 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। उपार्जन केन्द्र पर किसानों की सुविधा के लिए पीने का पानी, बैठने के लिए छायादार स्थान, जन सुविधाए आदि की व्यवस्थाएँ की गई हैं। उन्होंने बताया कि किसानों के उपज की तौल समय पर हो सके, इस हेतु समस्त आवश्यक व्यवस्थाएँ की गई हैं। इसमें बारदाने, तौल कांटे, हम्माल तुलावटी, सिलाई मशीन, कम्प्यूटर, नेट कनेक्शन, गुणवत्ता परीक्षण उपकरण, उपज की साफ सफाई के लिए पंखा, छन्ना आदि की व्यवस्था की गई है। उपार्जन केन्द्र पर उपलब्ध सुविधाओं के फोटो ग्राफ्स भारत सरकार के PCSAP पोर्टल पर अपलोड करने की कार्यवाही की जा रही है। खाद्य मंत्री राजपूत ने बताया कि किसानों से 2585 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य एवं राज्य सरकार द्वारा 40 रुपये प्रति क्विंटल बोनस राशि सहित 2625 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूँ का उपार्जन किया जा रहा है। समर्थन मूल्य पर गेहूँ उपार्जन के लिये आवश्यक बारदानों की व्यवस्था की जा चुकी है। उपार्जित गेहूँ की भर्ती जूट बारदाने के साथ साथ PP/HDP बेग एवं जूट के एक भर्ती बारदाने का उपयोग किया जा रहा है। समर्थन मूल्य पर गेहूँ उपार्जन के लिये भण्डारण की पर्याप्त व्यवस्था की गई, जिससे उपार्जित गेहूँ का सुरक्षित भण्डारण किया जा सके।

बंगाल का नया CM कौन…. आज MLAs संग अमित शाह की बैठक पर सभी की नजरें

कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव (West Bengal Assembly Elections) के नतीजों के बाद अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि राज्य की कमान किसके हाथों में होगी। भारतीय जनता पार्टी के भीतर मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर सस्पेंस बरकरार है। इसी गुत्थी को सुलझाने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह आज कोलकाता में नवनिर्वाचित विधायकों के साथ एक हाई-प्रोफाइल बैठक करने वाले हैं। बैठक के बाद जल्द ही राज्य के अगले सीएम के नाम का आधिकारिक ऐलान कर दिया जाएगा। अमित शाह और मोहन चरण माझी को अहम जिम्मेदारीपार्टी आलाकमान ने विधायक दल के नेता के चुनाव की प्रक्रिया को सुचारू रूप से पूरा करने के लिए वरिष्ठ केंद्रीय नेताओं को पर्यवेक्षक नियुक्त किया है। पश्चिम बंगाल के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को मुख्य पर्यवेक्षक (ऑब्जर्वर) की जिम्मेदारी दी गई है। उनके साथ ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी सह-पर्यवेक्षक की भूमिका निभाएंगे। बैठक में कैसे तय होगा विधायक दल का नेता?आज होने वाली इस बैठक में दोनों पर्यवेक्षक सभी नवनिर्वाचित विधायकों के साथ विस्तार से चर्चा करेंगे। सूत्रों के अनुसार, शाह व्यक्तिगत स्तर पर और सामूहिक रूप से विधायकों से बात करेंगे ताकि मुख्यमंत्री के नाम पर आम सहमति बनाई जा सके। विधायकों की राय जानने के बाद विधायक दल के नेता और अगले मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम मुहर लगाई जाएगी। माना जा रहा है कि पार्टी के वरिष्ठ नेता शमिक भट्टाचार्य बैठक में नए मुख्यमंत्री के नाम का प्रस्ताव रख सकते हैं, जिसके बाद इस फैसले को आधिकारिक रूप दिया जाएगा। 9 मई को होगा भव्य शपथ ग्रहण समारोहनए मुख्यमंत्री के नाम की आधिकारिक घोषणा के बाद सरकार गठन की प्रक्रिया तुरंत शुरू कर दी जाएगी। इस बीच राजनीतिक हलचलें तेज हो गई हैं क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 9 मई को नई सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए कोलकाता पहुंच रहे हैं। पीएम मोदी की मौजूदगी पश्चिम बंगाल की राजनीति में होने जा रहे इस बड़े बदलाव को और भी खास बनाएगी। रेस में और कौन?नंदीग्राम के बाद भवानीपुर में भी जीत का परचम लहराने वाले विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रहे शुभेंदु अधिकारी का नाम इस रेस में सबसे आगे चल रहा है। हालांकि बीजेपी अक्सर अपने फैसलों से चौंकाती रही है। शुभेंदु के अलावा कुछ अन्य नामों पर भी चर्चा गर्म है। सुकांत मजूमदार: प्रदेश अध्यक्ष के रूप में उनके शांत स्वभाव और आरएसएस (RSS) के साथ उनके गहरे जुड़ाव को देखते हुए उन्हें एक ‘डार्क हॉर्स’ माना जा रहा है। दिलीप घोष: पार्टी को जमीनी स्तर पर खड़ा करने वाले दिलीप घोष का नाम भी चर्चा से बाहर नहीं है। उनका आक्रामक अंदाज कार्यकर्ताओं में जोश भरता है। महिला कार्ड या नया चेहरा: महिला वोटरों को साधने के लिए बीजेपी किसी महिला विधायक या फिर केंद्र से किसी अनुभवी चेहरे को भी बंगाल की कमान सौंप सकती है। पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा ने 207 सीटें जीतकर दो-तिहाई से अधिक बहुमत हासिल कर लिया, जिससे राज्य में टीएमसी के लगातार 15 वर्षों के शासन का अंत हो गया। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पार्टी ने 80 सीटों पर जीत दर्ज की।

47 रीटेक के बाद तैयार हुआ ऐसा जोशीला गीत, मोहम्मद रफी की आवाज सुनकर आज भी भर आते हैं आंखें

नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा में कुछ गाने ऐसे हैं जो समय के साथ और भी गहरे हो जाते हैं, और उनमें सबसे खास नाम है फिल्म गाइड का गीत “दिल ढल जाए”। इस गीत को अपनी आवाज से अमर बनाने वाले थे महान पार्श्वगायक मोहम्मद रफी, जिनकी गायकी ने दशकों से लोगों के दिलों को छुआ है। इस गीत की खासियत सिर्फ इसका संगीत या शब्द नहीं थे, बल्कि उसमें भरा हुआ भावनात्मक दर्द था, जिसे रफी साहब ने अपनी आवाज से जीवंत कर दिया। दिलचस्प बात यह है कि इस गाने को रिकॉर्ड करते समय रफी साहब पूरी तरह संतुष्ट नहीं थे और उन्होंने इसे परफेक्ट बनाने के लिए 47 रीटेक लिए थे। फिल्म गाइड के इस गीत के संगीतकार थे एस.डी. बर्मन और इसके बोल लिखे थे शैलेंद्र ने। यह गीत दिल टूटने और भावनात्मक संघर्ष को दर्शाता है, जिसे देव आनंद और वहीदा रहमान पर फिल्माया गया था। एस.डी. बर्मन ने पहले ही टेक में रफी की आवाज को पसंद कर लिया था, लेकिन रफी साहब को लगा कि वह अभी उस भावनात्मक गहराई तक नहीं पहुंचे हैं, जिसकी जरूरत इस गीत को थी। इसी वजह से उन्होंने बार-बार प्रयास किया और 47 बार गाने को दोहराया, ताकि हर शब्द में सही दर्द और भावना उतर सके। कहा जाता है कि जब अंतिम टेक पूरा हुआ, तब एस.डी. बर्मन ने रफी साहब को गले लगाकर कहा था कि उन्होंने हिंदी सिनेमा को एक अमर गीत दे दिया है। यह वही पल था जिसने इस गीत को इतिहास में हमेशा के लिए दर्ज कर दिया। फिल्म गाइड न सिर्फ एक कलात्मक फिल्म थी, बल्कि तकनीकी और संगीत के स्तर पर भी बेहद खास मानी जाती है। इस फिल्म का संगीत तैयार करना आसान नहीं था। कई रिपोर्ट्स के अनुसार, इसके संगीत निर्माण में देर रात तक काम चलता था और कई बार स्वास्थ्य समस्याओं के बावजूद टीम ने काम जारी रखा। इस फिल्म की एक और खास बात यह है कि यह हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में बनी थी, जो उस दौर में एक बड़ा प्रयोग था। हालांकि अंग्रेजी संस्करण को भारत में ज्यादा लोकप्रियता नहीं मिली, लेकिन बाद में इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली।देव आनंद की यह फिल्म उनके करियर की सबसे महत्वपूर्ण फिल्मों में से एक मानी जाती है, और इसका संगीत आज भी लोगों के दिलों में बसा हुआ है। मोहम्मद रफी ने अपने पूरे करियर में हजारों गीत गाए, लेकिन “दिल ढल जाए” जैसा भावनात्मक गाना उनकी कला की पराकाष्ठा माना जाता है। उनकी आवाज की खासियत यही थी कि वह हर भावना को इतनी गहराई से व्यक्त करती थी कि श्रोता खुद को उस स्थिति में महसूस करने लगते थे। आज भी जब यह गीत सुना जाता है, तो उसकी गहराई और दर्द लोगों की आंखों को नम कर देता है। यह सिर्फ एक गीत नहीं, बल्कि भारतीय संगीत इतिहास की एक अमर विरासत बन चुका है।

ईरान युद्ध से भड़के तेल के दाम… जानें दुनिया में कहां मिल रहा सबसे सस्ता पेट्रोल-डीजल?

नई दिल्ली। ईरान युद्ध (Iran war) से दुनिया भर में तेल के दाम (Oil prices) में उछाल देखने को मिल है। इस बीच पूरी दुनिया में 1 लीटर पेट्रोल की कीमत कहीं 2.25 रुपये है तो कहीं 394.95 रुपये। यानी पेट्रोल की कीमत कही भारत से 44 गुना सस्ता है तो कहीं करीब चार गुना महंगा। आइए जानें दुनिया में सबसे सस्ता और महंगा पेट्रोल और डीजल (Petrol Diesel Prices) कहां मिलता है? सबसे महंगा पेट्रोल बेचने वाले देशसबसे पहले बात दुनिया में सबसे महंगे पेट्रोल बेचने वाले टॉप-10 देशों की। इस लिस्ट में सबसे ऊपर हांगकांग का नाम है। यहां एक लीटर पेट्रोल की कीमत करीब 400 रुपये है। इसके बाद मलावी का नाम आता है। यहां पेट्रोल का रेट 364.27 रुपये प्रति लीटर है। इजरायल में पेट्रोल जहां, 269.19 रुपये लीटर है वहीं, डेनमार्क में 265.74 रुपये। नीदरलैंड में एक लीटर पेट्रोल की कीमत 260.15 रुपये है। ग्रीस में 231.57 और अल्बानिया में 231.49 रुपये लीटर है। स्विट्जरलैंड में पेट्रोल की कीमत 231.12 और सिंगापुर में 230.02 रुपये लीटर है। दुनिया में सबसे सस्ता पेट्रोल बेचने वाले टॉप-10 देशदुनिया में सबसे सस्ता पेट्रोल लीबिया में है। यहां एक लीटर पेट्रोल की कीमत 2.25 रुपये है। इसके बाद ईरान का नंबर है। यहां एक लीटर पेट्रोल की कीमत 3.32 रुपये है। इसके बाद अंगोला में 31.08, कुवैत में 32.41, अल्जीरिया में 33.75 और तुर्कमेनिस्तान में 40.78 रुपये लीटर है। आठवें नंबर इजिप्ट है। यहां पेट्रोल की कीमत 42.78 रुपये है। नौवें पर कतर है, जहां पेट्रोल की कीमत 54.62 रुपये लीटर है। 10वें नंबर पर सऊदी अरब है। यहां एक लीटर पेट्रोल की कीमत 59.62 रुपये है। किस देश में सबसे सस्ता डीजलसबसे सस्ता डीजल वेनेजुएला में मिलता है। यहां 1 लीटर डीजल की कीमत महज 39 पैसे है। इसके बाद ईरान में 54 पैसे और लीबिया में 2.25 रुपये लीटर। अल्जीरिया में एक लीटर डीजल की कीमत 22.26 रुपये है। तुर्कमेनिस्तान में डीजल 27.19 रुपये प्रति लीटर है तो कुवैत में 35.50 रुपये। इजिप्ट में डीजल का रेट 36.36 रुपये लीटर है तो अंगोला में 41.44 रुपये लीटर। सऊदी अरब में एक लीटर डीजल की कीमत 45.37 रुपये और कतर में 53.32 रुपये। हांगकांग में 446 रुपये लीटर है डीजलदुनिया में सबसे महंगा डीजल हांगकांग में 446 रुपये लीटर है। एक लीटर डीजल की कीमत मलावी में 365, सिंगापुर में 310.49, डेनमार्क में 273.16, स्विट्जरलैंड में 262.09, नीदरलैंड में 257 रुपये लीटर है। इजरायल में जहां एक लीटर डीजल 255.60 रुपये है तो फिनलैंड में 255.59 रुपये।

अमेरिकी अदालत से ट्रंप को फिर बड़ा झटका…. कोर्ट ने 10% टैरिफ को बताया अवैध

वाशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) को अमेरिकी अदालत (American Court) में एक बार फिर हार का सामना करना पड़ा है। गुरुवार को अमेरिकी व्यापार अदालत (American Trade Court) ने राष्ट्रपति द्वारा लगाए गए 10% वैश्विक आयात शुल्क को अवैध करार देते हुए रद्द कर दिया। अदालत ने कहा कि 1970 के दशक के व्यापार कानून का हवाला देकर लगाए गए ये शुल्क तर्कसंगत नहीं हैं। आपको बता दें कि ट्रंप प्रशासन ने 24 फरवरी को दुनिया भर से आने वाले सामानों पर 10% का नया आयात शुल्क लागू किया था। इसके खिलाफ 24 राज्यों और कई छोटे व्यापारियों ने मुकदमा दायर किया था। राज्यों का तर्क था कि ट्रंप ने यह कदम सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले से बचने के लिए उठाया है, जिसने 2025 में लगाए गए उनके पिछले भारी-भरकम टैरिफ को असंवैधानिक बताकर रद्द कर दिया था। अंतर्राष्ट्रीय व्यापार अदालत ने 2-1 के बहुमत से फैसला सुनाते हुए कहा कि राष्ट्रपति ने 1974 के व्यापार कानून की धारा 122 का गलत इस्तेमाल किया है। क्या है धारा 122?यह कानून राष्ट्रपति को केवल तब शुल्क लगाने की अनुमति देता है जब देश गंभीर भुगतान संतुलन घाटे का सामना कर रहा हो या डॉलर की कीमत में भारी गिरावट रोकने की जरूरत हो। अदालत ने सरकार को आदेश दिया है कि वह 5 दिनों के भीतर इस फैसले का पालन करे और उन आयातकों को पैसे वापस करे जिन्होंने यह टैक्स भरा था। इन क्षेत्रों पर असर नहींध्यान देने वाली बात यह है कि स्टील, एल्युमीनियम और ऑटोमोबाइल सेक्टर पर लगे टैरिफ फिलहाल जारी रहेंगे, क्योंकि वे इस कानूनी चुनौती या सुप्रीम कोर्ट के पिछले फैसले के दायरे में नहीं आते हैं। सरकार की दलील?ट्रंप प्रशासन ने इन शुल्कों का बचाव करते हुए कहा था कि अमेरिका का वार्षिक व्यापार घाटा 1.2 ट्रिलियन ड़लर तक पहुंच गया है और चालू खाता घाटा जीडीपी का 4% है। हालांकि अर्थशास्त्रियों और विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका किसी भुगतान संतुलन संकट से नहीं जूझ रहा है, इसलिए इन शुल्कों का कोई कानूनी आधार नहीं था। आगे क्या होगा?अमेरिकी न्याय विभाग इस फैसले को यूएस कोर्ट ऑफ अपील्स में चुनौती दे सकता है। वर्तमान में लगाए गए ये 10% वैश्विक टैरिफ 24 जुलाई को समाप्त होने वाले थे, लेकिन इस अदालती फैसले ने प्रशासन की व्यापारिक रणनीति को समय से पहले ही संकट में डाल दिया है।

MP: इंदौर में रोड पर लावारिश पड़े मिले 3 बैगों से 2.83 करोड़ रुपये कैश बरामद, जांच में जुटी पुलिस

इंदौर। मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) में इंदौर (Indore) के सांवेर-उज्जैन रोड (Sanwer-Ujjain Road) पर गुरुवार सुबह उस वक्त हड़कंप मच गया, जब सड़क किनारे पड़े तीन लावारिस बैगों (Unclaimed bags) से करोड़ों रुपये की संदिग्ध नकदी बरामद हुई. बैगों में 500 रुपये के नोटों की सैकड़ों गड्डियां मिलीं, लेकिन जांच में सामने आया कि कई गड्डियों में असली नोटों के साथ नकली नोट और रंगीन कागज भी रखे गए थे। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी. दरअसल इंदौर जिले के सांवेर-उज्जैन रोड स्थित भुट्टा चौराहे के पास गुरुवार सुबह एक संदिग्ध मामला सामने आया. सड़क किनारे पेड़ के नीचे रखे तीन लावारिस बैगों को देखकर स्थानीय किसान को शक हुआ, जिसके बाद उसने पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और बैगों को कब्जे में लेकर जांच शुरू की. जब बैग खोले गए तो उनके अंदर 500 रुपये के नोटों की बड़ी संख्या में गड्डियां मिलीं. शुरुआती अनुमान के मुताबिक कुल रकम करीब 2 करोड़ 83 लाख रुपये बताई जा रही है. हालांकि जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि गड्डियों के ऊपर रखे कुछ नोट असली दिखाई दे रहे थे, लेकिन अंदर नकली नोटों के साथ रंगीन सादे कागज भरे गए थे। आशंका जताई जा रही है कि किसी बड़ी ठगी या अवैध लेनदेन के लिए इन बैगों को तैयार किया गया होगा. मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने आसपास के इलाके की घेराबंदी कर जांच शुरू कर दी है. हाईवे और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले जा रहे हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि बैग वहां कौन छोड़कर गया और इसके पीछे क्या मकसद था. फिलहाल पुलिस ने संदिग्ध नोटों को जब्त कर लिया है और पूरे मामले की विस्तृत जांच जारी है।

MP: बड़वानी में सरकारी डॉक्टर मरीजों को प्राइवेट लेब भेजने के बदले लेते थे मोटा कमीशन… रंगेहाथों धराए

बड़वानी। मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के बड़वानी जिले (Barwani district) में लोकायुक्त पुलिस (Lokayukta Police) ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए 3 सरकारी डॉक्टरों (3 Government Doctors) को मरीजों से जुड़ी जांच के बदले निजी लैब से कमीशन लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा है. यह कार्रवाई राजपुर कस्बे के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में तैनात डॉक्टरों के खिलाफ की गई है, जो सरकारी अस्पताल में आने वाले मरीजों को निजी पैथोलॉजी लैब (Private Pathology Lab) में भेजने के बदले मोटा कमीशन वसूल रहे थे। DSP सुनील तालन ने राजपुर कस्बे के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में तैनात इन तीनों अधिकारियों की पहचान डॉ. अमित शाक्य, डॉ. दिव्या साई और डॉ. मनोहर गोदारा के रूप में की. उन्होंने बताया कि इन तीनों को उनके घरों पर ही कमीशन की रकम लेते हुए पकड़ा गया। पुलिस अधिकारी ने कहा, “यह कार्रवाई राजपुर स्थित एक निजी पैथोलॉजी लैब के मैनेजर अदनान अली की शिकायत पर बिछाए गए एक जाल के बाद की गई। शिकायतकर्ता ने दावा किया था कि ये तीनों डॉक्टर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में आने वाले मरीजों को जांच के लिए उसकी लैब में भेजने के बदले उससे 20 प्रतिशत कमीशन लेते थे। डीएसपी ने बताया कि शाक्य ने पिछले महीने के कमीशन के तौर पर 18 हजार रुपये, साई ने 8 हजार रुपये और गोदारा ने 21 हजार 800 रुपये की मांग की थी, लेकिन बाद में वे कम रकम लेने पर राजी हो गए. उन्होंने आगे बताया कि शाक्य को 8000 रुपये, साई को 5000 रुपये और गोदारा को 12000 रुपये लेते हुए पकड़ा गया। उन्होंने बताया कि लोकायुक्त पुलिस ने इन तीनों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता के तहत मामला दर्ज कर लिया है, हालांकि अभी तक इनकी गिरफ्तारी नहीं हुई है।

ऋषि कपूर-नीतू कपूर के बयान से चर्चा में परिवार, रिद्धिमा के करियर को लेकर पुरानी सोच फिर आई सामने

नई दिल्ली। कपूर परिवार लंबे समय से भारतीय फिल्म इंडस्ट्री का एक बड़ा नाम रहा है। इस परिवार ने कई पीढ़ियों तक बॉलीवुड को सुपरस्टार्स दिए हैं, लेकिन इसी परिवार की रिद्धिमा कपूर साहनी ने लंबे समय तक फिल्मी दुनिया से दूरी बनाए रखी। अब 45 वर्ष की उम्र में वह अभिनय की दुनिया में कदम रखने जा रही हैं। रिद्धिमा कपूर साहनी अपनी मां नीतू कपूर की अपकमिंग फिल्म ‘दादी की शादी’ से बॉलीवुड में डेब्यू करने जा रही हैं। इससे पहले वह नेटफ्लिक्स शो Fabulous Lives vs Bollywood Wives में नजर आ चुकी हैं, जहां उन्हें दर्शकों से काफी सराहना मिली थी। हाल ही में नीतू कपूर ने एक इंटरव्यू में खुलासा किया कि रिद्धिमा के पिता और दिवंगत अभिनेता ऋषि कपूर कभी नहीं चाहते थे कि उनकी बेटी फिल्मों में आए। उन्होंने कहा कि ऋषि कपूर स्टारडम के “डार्क साइड” को लेकर बहुत चिंतित रहते थे और नहीं चाहते थे कि उनकी बेटी इस दुनिया में फंसे। नीतू कपूर के अनुसार, रिद्धिमा बचपन से ही इस बात को समझती थीं कि अगर वह एक्ट्रेस बनने की इच्छा जतातीं, तो उनके पिता इस फैसले से बहुत परेशान हो जाते। इसलिए उन्होंने खुद ही अभिनय की राह न चुनने का निर्णय लिया। नीतू ने यह भी कहा कि ऋषि कपूर फिल्मों और ग्लैमर के प्रति नकारात्मक नहीं थे, लेकिन वे अपने परिवार को लेकर अत्यधिक प्रोटेक्टिव थे। रिद्धिमा कपूर साहनी दिल्ली में एक सफल फैशन और ज्वेलरी डिजाइनर और एंटरप्रेन्योर के रूप में काम कर रही हैं। वह अपने ब्रांड “R Jewellery” के जरिए ज्वेलरी डिजाइनिंग की दुनिया में अपनी पहचान बना चुकी हैं। सोशल मीडिया पर भी वह काफी सक्रिय रहती हैं और अपने डिजाइन और लाइफस्टाइल से जुड़े अपडेट साझा करती रहती हैं। फिल्म ‘दादी की शादी’ एक फैमिली एंटरटेनर है, जिसमें नीतू कपूर के साथ कपिल शर्मा, आर. सरथकुमार और सादिया खतीब जैसे कलाकार नजर आएंगे। इस फिल्म का निर्देशन आशीष आर. मोहन ने किया है और यह 8 मई 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। इस फिल्म की एक और खास बात यह है कि इसमें कपूर परिवार की अगली पीढ़ी से भी एंट्री हो रही है, क्योंकि रिद्धिमा की बेटी समायरा साहनी भी एक कैमियो रोल के जरिए पर्दे पर नजर आएंगी। रिद्धिमा का यह कदम कपूर परिवार की उस परंपरा को आगे बढ़ाता है, जिसने भारतीय सिनेमा को कई यादगार कलाकार दिए हैं। हालांकि, उनका यह डेब्यू काफी देर से हुआ है, लेकिन दर्शकों में उन्हें पर्दे पर देखने को लेकर उत्सुकता बढ़ गई है।

जम्मू-श्रीनगर हाइवे पर छह ब्लैक स्पॉट…. हल्की बारिश में भूस्खलन, अमरनाथ यात्रा को लेकर बढ़ी चिंता

जम्मू। जम्मू-कश्मीर हाईवे (Jammu Kashmir Highway) पर लगातार भूस्खलन (Frequent Landslides) ने अमरनाथ यात्रा (Amarnath Yatra) से पहले चिंता बढ़ा दी है। जम्मू से श्रीनगर के बीच करीब छह जगह ब्लैक स्पॉट (Black spot) चिह्नित किए गए हैं। हल्की बारिश के बाद यहां भारी भूस्खलन हो रहा है, जिससे हाल ही में कई बार हाईवे बाधित हो चुका है। अप्रैल में हुई बारिश के बाद रामबन-बनिहाल सेक्शन में बन रही लगभग तीन किलोमीटर लंबी सुरंग का काम भी फंस गया है। पहले मई में काम पूरा होने की संभावना थी, लेकिन अब कार्य आगे बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। इससे यात्रा के दौरान जाम से मुक्ति मिलने की संभावना प्रभावित हो सकती है। जम्मू से श्रीनगर के बीच यात्रा के दौरान सबसे संवेदनशील हिस्सा उधमपुर से बनिहाल तक है। पिछले साल अप्रैल में रामबन में बादल फटने के बाद आई बाढ़ ने हाईवे का बड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त कर दिया था। सितंबर में उधमपुर-रामबन के बीच करीब 200 मीटर हिस्सा दलदल में बदल गया, जिससे कश्मीर की सप्लाई चेन बाधित हुई। इस साल अप्रैल में हल्की बारिश के बाद सात अप्रैल को डिगडोल और खूनी नाला के बीच भारी भूस्खलन से तीन दिन तक यातायात बाधित रहा। अमरनाथ यात्रा तीन जुलाई से शुरू होगी और बारिश होने पर भूस्खलन की संभावना बनी रहेगी। हालांकि एनएचएआई ने संभावित जगहों पर विशेषज्ञों की मदद से सुरक्षा इंतजाम किए हैं और हाईवे की समीक्षा पूरी की है। हाईवे पर खतरे के ब्लैक स्पॉटरामबन, बनिहाल, नाशरी–चिनैनी, पंथियाल मेहर-कैफेटेरिया मोड़ और खूनी नाला शामिल हैं। अमरनाथ यात्रा के दौरान 2023 में रामबन के पास हाईवे पर भूस्खलन हुआ था। इससे यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा था। विशेषज्ञों की मदद से पूरे हो रहे सुधार कार्यहाईवे पर अमरनाथ यात्रा से पहले सुरक्षा इंतजाम किए जा रहे हैं। संभावित क्षेत्रों में विशेषज्ञों की मदद से सुधार कार्य पूरे किए जा रहे हैं। टनल निर्माण का कार्य जारी है। यात्रा प्रभावित न हो इसके लिए हर संभव कदम उठाए जा रहे हैं।-आरएस यादव, क्षेत्रीय अधिकारी, एनएचएआई जम्मू-श्रीनगर हाईवे पर कब-कब भूस्खलन– रामबन में 6 अप्रैल, 2026 को जम्मू-श्रीनगर हाईवे पर भूस्खलन से आवाजाही प्रभावित हुई।– रामबन में 20 अप्रैल 2025 को बादल फटा। जम्मू-श्रीनगर हाईवे बंद होने से सैकड़ों वाहन फंस गए। कश्मीर की सप्लाई चेन टूट गई।– 30 अगस्त 2025 को रामबन में फिर बादल फटसे भारी भूस्खलन हुआ। हाईवे बाधित होने से कश्मीर जा रहे सैकड़ों ट्रक हाईवे पर फंस गए।– सितंबर 2025 में उधमपुर-रामबन के बीच हाईवे का करीब 200 मीटर हिस्सा दलदल में बदल गया। यह हादसा सेब सीजन के दौरान हुआ और इससे कश्मीर की आर्थिकी पर असर पड़ा।– चिनैनी-नाशनी टनल के बाहर और उधमपुर क्षेत्र में अगस्त-सितंबर में भूस्खलन की छोटी-बड़ी कई घटनाएं हुईं। इससे आवाजाही प्रभावित हुई।