चीन में भ्रष्टाचार पर ‘ड्रैगन’ का बड़ा वार, दो पूर्व रक्षा मंत्रियों को मौत की सजा; रिश्वतखोरी ने छीनी सत्ता और सम्मान

नई दिल्ली। चीन में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रहे अभियान के तहत दो पूर्व रक्षा मंत्रियों को बड़ा झटका लगा है। चीनी सैन्य अदालत ने पूर्व रक्षा मंत्री वेई फेंगहे और ली शांगफू को भ्रष्टाचार के मामले में मौत की सजा सुनाई है। हालांकि दोनों को दो साल की मोहलत भी दी गई है। सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक वेई फेंगहे को रिश्वत लेने का दोषी पाया गया, जबकि ली शांगफू पर रिश्वत लेने और देने दोनों के आरोप साबित हुए। दोनों नेताओं को पहले ही 2024 में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी से निष्कासित किया जा चुका था। शी जिनपिंग के करीबी रहे दोनों नेतारिपोर्ट्स के अनुसार दोनों पूर्व मंत्री चीन की शक्तिशाली केंद्रीय सैन्य आयोग के सदस्य रह चुके हैं। वेई फेंगहे ने 2018 से 2023 तक रक्षा मंत्री के तौर पर काम किया था, जबकि ली शांगफू ने उनके बाद यह जिम्मेदारी संभाली थी। दोनों नेताओं का संबंध चीन की रणनीतिक पीपल्स लिबरेशन आर्मी रॉकेट फ़ोर्स से भी रहा है, जिसे राष्ट्रपति जिनपिंग के सैन्य सुधार कार्यक्रम के तहत मजबूत किया गया था। भ्रष्टाचार के खिलाफ लगातार कार्रवाई2012 में सत्ता संभालने के बाद से शी जिनपिंग लगातार भ्रष्टाचार विरोधी अभियान चला रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस अभियान के तहत अब तक लाखों अधिकारियों और कई वरिष्ठ सैन्य अफसरों पर कार्रवाई की जा चुकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि चीन की सेना और कम्युनिस्ट पार्टी में बढ़ते भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए यह कार्रवाई एक बड़ा संदेश माना जा रहा है।
मई में पार्टनर संग घूमने के लिए बेस्ट रोमांटिक डेस्टिनेशंस, जहां यादगार बन जाएगा हर पल

नई दिल्ली। गर्मियों की शुरुआत होते ही लोग छुट्टियों का प्लान बनाने लगते हैं। खासकर कपल्स ऐसी जगहों की तलाश में रहते हैं जहां सुकून भरा माहौल, खूबसूरत नजारे और रोमांटिक पल एक साथ मिल सकें। अगर आप भी मई के महीने में अपने पार्टनर के साथ किसी खास डेस्टिनेशन पर घूमने का सोच रहे हैं, तो देश की कुछ बेहद खूबसूरत जगहें आपके ट्रिप को यादगार बना सकती हैं। यहां आप प्रकृति के बीच क्वालिटी टाइम बिताने के साथ शानदार तस्वीरें भी कैमरे में कैद कर सकते हैं। केरल का अलेप्पी कपल्स के लिए सबसे पसंदीदा रोमांटिक डेस्टिनेशंस में गिना जाता है। समुद्र, बैकवॉटर और हाउस बोट का अनुभव यहां की सबसे बड़ी खासियत है। शांत पानी के बीच तैरती हाउस बोट में पार्टनर के साथ बिताया गया समय किसी फिल्मी सफर से कम नहीं लगता। नारियल के पेड़ों और ठंडी हवाओं के बीच यहां का माहौल बेहद सुकून देने वाला होता है। यही वजह है कि अलेप्पी को “पूरब का वेनिस” भी कहा जाता है।अगर आप पहाड़ों और प्रकृति के करीब समय बिताना चाहते हैं, तो उत्तराखंड का चोपता आपके लिए बेहतरीन विकल्प हो सकता है। बुरांश के फूलों से ढकी घाटियां और तुंगनाथ मंदिर तक का ट्रेक सफर को खास बना देता है। आसपास मौजूद औली की बर्फीली चोटियां और रोप-वे राइड रोमांच के साथ रोमांस का शानदार अनुभव देती हैं। मई के महीने में यहां का मौसम काफी सुहावना रहता है। हिमाचल प्रदेश का मनाली हमेशा से हनीमून और कपल ट्रिप्स के लिए मशहूर रहा है। मई-जून की गर्मियों में भी यहां हल्की ठंड का एहसास बना रहता है। रोहतांग पास की बर्फ, हरी-भरी वादियां और खूबसूरत कैफे कपल्स को बेहद आकर्षित करते हैं। मनाली के आसपास सोलंग वैली और अटल टनल जैसी जगहें भी घूमने लायक हैं, जहां आप एडवेंचर और रोमांस दोनों का मजा ले सकते हैं। भीड़-भाड़ से दूर शांत माहौल पसंद करने वाले कपल्स के लिए डलहौज़ी एक शानदार विकल्प है। देवदार के जंगल, झरने और ठंडी हवाएं यहां के माहौल को बेहद रोमांटिक बना देती हैं। खज्जियार, पंचपुला और सतधारा जैसी जगहें यहां आने वाले पर्यटकों को खूब पसंद आती हैं। मई में यहां का मौसम बेहद आरामदायक रहता है, जिससे यह कपल्स के लिए परफेक्ट समर डेस्टिनेशन बन जाता है। वहीं जम्मू-कश्मीर की खूबसूरत यूसमार्ग घाटी भी कपल्स के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है। हरे-भरे मैदान, बर्फ से ढकी चोटियां और शांत वातावरण इस जगह को खास बनाते हैं। यहां ट्रेकिंग और हाइकिंग जैसी एक्टिविटीज का मजा भी लिया जा सकता है। मई में यहां का मौसम काफी खुशनुमा रहता है, जो रोमांटिक ट्रिप के लिए बिल्कुल परफेक्ट माना जाता है। अगर आप इस गर्मी अपने पार्टनर के साथ कुछ खास और यादगार पल बिताना चाहते हैं, तो ये डेस्टिनेशंस आपके ट्रैवल प्लान को शानदार बना सकते हैं।
इंजीनियरिंग युवाओं के लिए बड़ा मौका, DRDO देगा 12,300 रुपये स्टाइपेंड

नई दिल्ली। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन यानी DRDO में नौकरी करने का सपना देख रहे युवाओं के लिए शानदार अवसर सामने आया है। डीआरडीओ की रक्षा जीव अभियांत्रिकी तथा चिकित्सा इलेक्ट्रॉनिकी प्रयोगशाला (DEBEL) ने ग्रेजुएट अप्रेंटिस के विभिन्न पदों पर भर्ती के लिए आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी किया है। यह भर्ती एक साल की अवधि के लिए संविदा आधार पर की जाएगी। इच्छुक और योग्य उम्मीदवार निर्धारित अंतिम तिथि से पहले ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। जारी अधिसूचना के अनुसार कुल 28 पदों पर भर्ती की जाएगी। इनमें मैकेनिकल इंजीनियरिंग के 7 पद, इलेक्ट्रॉनिक्स/ईसीई/ई एंड आई के 6 पद, कंप्यूटर साइंस और सूचना प्रौद्योगिकी के 3 पद, केमिकल इंजीनियरिंग और रसायन विज्ञान के 4 पद तथा बायो-मेडिकल इंजीनियरिंग के 4 पद शामिल हैं। इसके अलावा टेक्सटाइल इंजीनियरिंग, लाइब्रेरी साइंस, फिजिक्स और अकाउंट्स के लिए भी एक-एक पद निर्धारित किए गए हैं। इन पदों के लिए आवेदन प्रक्रिया 23 अप्रैल 2026 से शुरू हो चुकी है। उम्मीदवार 20 मई 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन करने के लिए अभ्यर्थियों के पास किसी मान्यता प्राप्त संस्थान या विश्वविद्यालय से संबंधित विषय में BE, BTech, BSc, BLib, BLISc या BCom की डिग्री होना जरूरी है। भर्ती प्रक्रिया में उम्मीदवारों का चयन मेरिट के आधार पर शॉर्टलिस्टिंग, इंटरव्यू और डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के जरिए किया जाएगा। चयनित उम्मीदवारों को हर महीने 12,300 रुपये का स्टाइपेंड दिया जाएगा। वहीं चयनित अभ्यर्थियों की संभावित ज्वाइनिंग डेट 1 जुलाई 2026 तय की गई है। ऑनलाइन आवेदन करने से पहले उम्मीदवारों को राष्ट्रीय शिक्षुता प्रशिक्षण योजना यानी NATS पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करना अनिवार्य होगा। इसके बाद उम्मीदवार आधिकारिक पोर्टल पर जाकर आवेदन प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। आवेदन फॉर्म भरते समय सभी जरूरी दस्तावेज सही फॉर्मेट और साइज में अपलोड करने होंगे। फाइनल सबमिशन से पहले आवेदन पत्र की जांच जरूर करें और भविष्य के लिए उसका प्रिंटआउट सुरक्षित रख लें। डीआरडीओ जैसी प्रतिष्ठित संस्था में काम करने का यह मौका युवाओं के लिए करियर की मजबूत शुरुआत साबित हो सकता है। खासकर इंजीनियरिंग और साइंस बैकग्राउंड के उम्मीदवारों के लिए यह भर्ती काफी अहम मानी जा रही है।
EPF और EPS में क्या है अंतर? रिटायरमेंट से पहले समझ लें पूरा गणित

नई दिल्ली। नौकरीपेशा लोगों की सैलरी स्लिप में हर महीने PF यानी प्रोविडेंट फंड की कटौती जरूर दिखाई देती है, लेकिन ज्यादातर कर्मचारियों को यह नहीं पता होता कि यह पैसा आखिर कहां जमा होता है और रिटायरमेंट के समय इससे कितना फायदा मिलता है। दरअसल, PF केवल एक सेविंग स्कीम नहीं, बल्कि भविष्य की आर्थिक सुरक्षा और पेंशन का मजबूत आधार है। यही वजह है कि लंबे समय तक नौकरी करने वालों के लिए EPF और EPS दोनों बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं। कर्मचारियों की बेसिक सैलरी और डीए का 12 प्रतिशत हिस्सा हर महीने PF के रूप में काटा जाता है। इतनी ही राशि कंपनी की ओर से भी जमा की जाती है। हालांकि, कंपनी का पूरा 12 प्रतिशत सीधे EPF खाते में नहीं जाता। यही वह हिस्सा है जिसे लेकर अधिकांश कर्मचारियों के मन में भ्रम रहता है। कर्मचारी के योगदान का पूरा 12 प्रतिशत Employees’ Provident Fund यानी EPF खाते में जमा होता है। वहीं कंपनी के 12 प्रतिशत योगदान में से केवल 3.67 प्रतिशत EPF में जाता है, जबकि 8.33 प्रतिशत हिस्सा Employees’ Pension Scheme यानी EPS में ट्रांसफर कर दिया जाता है। EPS का मकसद कर्मचारियों को रिटायरमेंट के बाद हर महीने पेंशन उपलब्ध कराना होता है। अगर किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी 25 हजार रुपये है, तो कर्मचारी की ओर से हर महीने 3 हजार रुपये EPF में जमा होंगे। कंपनी भी 3 हजार रुपये देगी, लेकिन इसमें से करीब 1,250 रुपये EPS में चले जाएंगे और बाकी राशि EPF खाते में जुड़ जाएगी। यानी कर्मचारी के EPF अकाउंट में हर महीने कर्मचारी और कंपनी दोनों के हिस्से मिलाकर रकम जमा होती रहती है, जिस पर सालाना ब्याज भी मिलता है। फिलहाल EPFO कर्मचारियों के EPF बैलेंस पर करीब 8.25 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दे रहा है। यही वजह है कि लंबे समय तक लगातार नौकरी करने पर PF का फंड लाखों से बढ़कर करोड़ों तक पहुंच सकता है। कंपाउंडिंग का फायदा इसमें सबसे बड़ा रोल निभाता है। वहीं EPS में जमा राशि पर ब्याज नहीं मिलता, क्योंकि यह पेंशन स्कीम के तहत संचालित होती है। हालांकि, 10 साल या उससे अधिक नौकरी करने वाले कर्मचारियों को 58 साल की उम्र के बाद मासिक पेंशन का लाभ मिलता है। पेंशन की राशि नौकरी की अवधि और सैलरी के आधार पर तय की जाती है। आजकल सोशल मीडिया और Reddit जैसे प्लेटफॉर्म्स पर भी लोग EPS को लेकर सवाल पूछते नजर आते हैं। कई कर्मचारियों को लगता है कि उनका EPS बैलेंस दिखाई क्यों नहीं देता। विशेषज्ञों के मुताबिक EPS राशि सीधे पेंशन फंड में मैनेज होती है, इसलिए यह सामान्य EPF बैलेंस की तरह अलग से नहीं दिखती। कुल मिलाकर, PF केवल सैलरी से होने वाली कटौती नहीं, बल्कि रिटायरमेंट के बाद आर्थिक मजबूती का बड़ा सहारा है। सही जानकारी और लंबी अवधि तक नियमित निवेश से यही छोटी कटौती भविष्य में बड़ी वित्तीय सुरक्षा में बदल सकती है।
इंदौर को बड़ी राहत, सरवटे–गंगवाल रोड प्रोजेक्ट फिर शुरू, अब 80 नहीं बल्कि 60 फीट चौड़ी बनेगी सड़क

इंदौर शहर में लंबे समय से अटकी पड़ी एक महत्वपूर्ण सड़क परियोजना अब फिर से शुरू होने जा रही है, जिससे स्थानीय लोगों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। सरवटे से गंगवाल बस स्टैंड के बीच बनने वाली यह सड़क पिछले कई महीनों से विवाद और तकनीकी कारणों के चलते अधूरी पड़ी थी, लेकिन अब इसे आगे बढ़ाने पर सहमति बन गई है। शुरुआत में इस सड़क को 80 फीट चौड़ा करने की योजना तैयार की गई थी, लेकिन स्थानीय निवासियों की आपत्तियों और लगातार चल रहे विरोध के बाद इसमें बदलाव किया गया है। अब यह सड़क 60 फीट चौड़ाई के साथ विकसित की जाएगी। इस निर्णय के बाद परियोजना को मंजूरी मिल गई है और निर्माण कार्य जल्द शुरू होने की संभावना है। यह सड़क निर्माण कार्य स्मार्ट सिटी योजना के तहत शुरू किया गया था, लेकिन बीच में फंडिंग और तकनीकी अड़चनों के कारण काम रुक गया। इसके अलावा बाधक निर्माणों को हटाने को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई थी, जिससे परियोजना लंबे समय तक अधर में लटकी रही। स्थानीय स्तर पर इस परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए कई प्रयास किए गए और बजट की व्यवस्था भी की गई, लेकिन निर्माण कार्य फिर भी शुरू नहीं हो सका। अब नए वर्क ऑर्डर और संशोधित चौड़ाई के साथ इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हो गया है। चौड़ाई कम करने के फैसले के बाद स्थानीय लोगों और प्रशासन के बीच सहमति बन गई है, जिससे अब विवाद की स्थिति समाप्त हो गई है। माना जा रहा है कि इस सड़क के बनने से क्षेत्र में यातायात व्यवस्था बेहतर होगी और रोजमर्रा की आवाजाही आसान हो जाएगी। यह परियोजना पूरी होने के बाद सरवटे से गंगवाल बस स्टैंड के बीच का इलाका अधिक व्यवस्थित और सुगम बन सकेगा। अब सभी की नजर इस बात पर है कि सालभर से रुकी यह योजना कितनी तेजी से पूरी होती है और लोगों को इसका वास्तविक लाभ कब तक मिलता है।
डेटा सुरक्षा और एआई विस्तार पर बड़ा कदम, भारत में तैयार होगा आईबीएम-योट्टा का नया क्लाउड प्लेटफॉर्म

नई दिल्ली। भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्लाउड टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में एक बड़ा कदम सामने आया है, जहां आईबीएम और योट्टा डेटा सर्विसेज ने मिलकर एक नए एजेंटिक एआई प्लेटफॉर्म को विकसित करने की योजना बनाई है। यह प्लेटफॉर्म पूरी तरह भारत स्थित क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर पर आधारित होगा और इसका उद्देश्य देश की कंपनियों और सरकारी संस्थानों को सुरक्षित, नियंत्रित और आधुनिक एआई समाधान उपलब्ध कराना है। इस पहल के तहत आईबीएम की उन्नत एआई तकनीक को योट्टा के स्वदेशी क्लाउड सिस्टम के साथ जोड़ा जाएगा। इससे एक ऐसा डिजिटल ढांचा तैयार होगा जो डेटा सुरक्षा, नियामकीय अनुपालन और स्थानीय डेटा स्टोरेज की जरूरतों को पूरा करेगा। इस प्लेटफॉर्म के जरिए संगठन अपने विभिन्न विभागों जैसे आईटी सेवाएं, मानव संसाधन, वित्त, खरीद और ग्राहक सेवा में एआई आधारित एजेंट्स का उपयोग कर सकेंगे। कंपनियों में अब एआई को केवल प्रयोग के स्तर से आगे बढ़ाकर वास्तविक संचालन में शामिल करने की मांग तेजी से बढ़ रही है। इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए यह प्लेटफॉर्म तैयार किया जा रहा है, जिससे कारोबारी प्रक्रियाएं अधिक तेज, सुरक्षित और व्यवस्थित हो सकें। इसके साथ ही यह प्रणाली कंपनियों को यह सुविधा भी देगी कि वे एआई का उपयोग अपने नियंत्रण और अनुपालन मानकों के अनुसार कर सकें। इस परियोजना के तहत आईबीएम का सॉवरेन कोर सिस्टम भी योट्टा के क्लाउड प्लेटफॉर्म पर होस्ट किया जाएगा, जिससे एक मजबूत और स्वदेशी डिजिटल वातावरण तैयार होगा। यह व्यवस्था कंपनियों को डेटा सुरक्षा, ऑडिट ट्रैकिंग और नियंत्रित एआई संचालन जैसी सुविधाएं प्रदान करेगी, जिससे नियामकीय आवश्यकताओं का पालन आसान हो जाएगा। इस साझेदारी का एक प्रमुख उद्देश्य भारतीय कंपनियों को आत्मनिर्भर एआई इकोसिस्टम प्रदान करना है, जहां वे बिना किसी बाहरी निर्भरता के अपने डेटा और तकनीकी प्रक्रियाओं को नियंत्रित कर सकें। योट्टा का क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर और आईबीएम की एआई क्षमताएं मिलकर एक ऐसा समाधान तैयार करेंगी, जो बड़े पैमाने पर एआई अपनाने को सरल और सुरक्षित बनाएगा। कुल मिलाकर यह पहल भारत में एआई और क्लाउड कंप्यूटिंग के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण बदलाव की ओर संकेत करती है, जो आने वाले समय में डिजिटल इनोवेशन को नई दिशा दे सकती है।
ममता बनर्जी से मुलाकात में अखिलेश यादव का बड़ा बयान, बोले-दीदी आप हारी नहीं हैं, आपको हराया गया है

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल चुनाव में टीएमसी की हार के बाद राज्य की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। इसी बीच समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव कोलकाता पहुंचे, जहां उन्होंने तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी और पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी से मुलाकात की। यह मुलाकात राजनीतिक तौर पर काफी अहम मानी जा रही है, क्योंकि इसे विपक्षी एकजुटता को फिर से मजबूत करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। मुलाकात के दौरान माहौल काफी भावनात्मक और सौहार्दपूर्ण बताया गया। सूत्रों के अनुसार, अखिलेश यादव ने ममता बनर्जी के प्रति सम्मान जताते हुए कहा कि यह चुनावी परिणाम उनकी हार नहीं है, बल्कि उन्हें हराया गया है। उनके इस बयान को विपक्षी राजनीति में एक बड़े समर्थन संदेश के तौर पर देखा जा रहा है। इसी मुलाकात में अखिलेश यादव और अभिषेक बनर्जी के बीच भी गर्मजोशी देखने को मिली, जहां दोनों नेताओं ने एक-दूसरे को गले लगाया। बताया जा रहा है कि बैठक के दौरान तीनों नेताओं के बीच चुनावी स्थिति, राजनीतिक हालात और आगे की रणनीति को लेकर चर्चा हुई। ममता बनर्जी ने हाल के चुनाव परिणामों और राज्य की राजनीतिक स्थिति को लेकर अपनी बात रखी, वहीं अखिलेश यादव ने टीएमसी के संघर्ष और चुनावी लड़ाई की सराहना की। इस मुलाकात के बाद अखिलेश यादव ने मीडिया से बातचीत में कहा कि जब भी चुनाव निष्पक्ष होते हैं, तब ममता बनर्जी को जनता का समर्थन मिलता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव प्रक्रिया को लेकर कई तरह की अनियमितताओं की बातें सामने आई हैं, जिसने परिणामों को प्रभावित किया है। उनके अनुसार, विपक्षी दलों को एकजुट होकर लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करनी होगी। सूत्रों के अनुसार, यह भी चर्चा हुई कि चुनाव के बाद की स्थिति और राजनीतिक दबावों को लेकर कानूनी और संगठनात्मक कदम उठाए जा सकते हैं। अभिषेक बनर्जी ने भी बैठक में पार्टी कार्यकर्ताओं को सतर्क रहने और जनता के बीच सक्रिय रहने की सलाह दी। इस पूरी राजनीतिक हलचल के बीच यह मुलाकात इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि हाल के समय में विपक्षी दलों के बीच संपर्क और संवाद बढ़ा है। इससे पहले भी कई विपक्षी नेता ममता बनर्जी से संपर्क कर चुके हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि चुनावी हार के बाद भी राजनीतिक समीकरणों को फिर से साधने की कोशिशें जारी हैं। कोलकाता में हुई यह मुलाकात केवल एक औपचारिक बैठक नहीं थी, बल्कि इसे आने वाले समय में विपक्षी राजनीति की दिशा तय करने वाले एक अहम कदम के रूप में देखा जा रहा है।
CM योगी समेत कई नेताओं ने बदली सोशल मीडिया DP, ऑपरेशन सिंदूर और ब्रह्मोस तस्वीरों से दिया खास संदेश

नई दिल्ली। ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ के मौके पर देश के राजनीतिक और डिजिटल माहौल में एक खास तरह की हलचल देखने को मिली। इस दिन को याद करते हुए कई वरिष्ठ नेताओं ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स की प्रोफाइल तस्वीरों और कवर इमेज में बदलाव किया। यह बदलाव केवल एक औपचारिक अपडेट नहीं था, बल्कि इसके पीछे भारतीय सेना के साहस और उस ऐतिहासिक सैन्य कार्रवाई को याद करने का संदेश भी जुड़ा था, जिसे देश की सुरक्षा के इतिहास में एक अहम मोड़ माना जाता है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी इस अवसर पर अपनी सोशल मीडिया प्रोफाइल में विशेष बदलाव किया। उनकी प्रोफाइल तस्वीर में ऑपरेशन सिंदूर से जुड़ी प्रतीकात्मक झलक दिखाई दी, जबकि कवर इमेज में ब्रह्मोस मिसाइल को प्रमुखता से दर्शाया गया। यह बदलाव सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में आ गया और लोगों के बीच इसे लेकर काफी प्रतिक्रिया देखने को मिली। ऑपरेशन सिंदूर को उस सैन्य कार्रवाई के रूप में देखा जाता है जिसमें भारतीय सुरक्षा बलों ने संयुक्त रूप से आतंकवादी ठिकानों पर निर्णायक कदम उठाया था। इस कार्रवाई को देश की सुरक्षा नीति में एक मजबूत संदेश के रूप में देखा जाता है, जिसमें यह स्पष्ट किया गया था कि राष्ट्रीय सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। इस वर्षगांठ पर कई नेताओं ने सोशल मीडिया के जरिए देश के प्रति अपनी भावनाएं व्यक्त कीं और भारतीय सेना के साहस को सलाम किया। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर किए गए ये बदलाव एक प्रतीकात्मक संदेश के रूप में सामने आए, जिसमें देश की रक्षा नीति और सैन्य ताकत को प्रमुखता से दर्शाया गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा ब्रह्मोस मिसाइल को कवर इमेज में शामिल करना भी विशेष रूप से चर्चा में रहा। ब्रह्मोस को भारत की आधुनिक और तेज सुपरसोनिक मिसाइलों में गिना जाता है, जिसे देश की रक्षा क्षमता का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। यह तस्वीर भारत की बढ़ती सैन्य तकनीक और आत्मनिर्भर रक्षा व्यवस्था का भी संकेत देती है। उत्तर प्रदेश में रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर पर भी तेजी से काम किया जा रहा है। लखनऊ में ब्रह्मोस से जुड़ी उत्पादन इकाई इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जाती है, जो राज्य को रक्षा क्षेत्र में नई पहचान दिला रही है। सोशल मीडिया पर इस पूरे घटनाक्रम को लेकर लोगों की भी बड़ी भागीदारी देखने को मिली। कई यूजर्स ने ऑपरेशन सिंदूर से जुड़ी तस्वीरें और संदेश साझा किए, जिससे यह विषय केवल एक औपचारिक वर्षगांठ न रहकर एक व्यापक चर्चा का हिस्सा बन गया। यह पूरा घटनाक्रम डिजिटल प्लेटफॉर्म पर देशभक्ति और सुरक्षा संदेश के एक नए रूप में सामने आया।
इंस्टाग्राम का महा-सफाई अभियान: सेलीब्रिटीज के अकाउंट से उड़ाए करोड़ों फॉलोवर्स, खुद Instagram भी अछूता नहीं

नई दिल्ली। इंस्टाग्राम बॉट सफ़ाई 2026 सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम ने 2026 में बड़े स्तर पर फेक और इनएक्टिव अकाउंट्स हटाने की कार्रवाई की है। इससे कई सेलिब्रिटीज और इन्फ्लुएंसर्स के फॉलोअर्स में अचानक से कमी आई है। मेटा के अनुसार यह नियमित प्रक्रिया का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य प्लेटफॉर्म पर ऑथेंटिसिटी बढ़ाना है। इस क्लीनअप के बाद यूजर्स इसे ‘2026 का महा-सफाई अभियान’ कह रहे हैं। इसने सोशल मीडिया पर काफी चर्चा पैदा कर दी है। मेटा के मशहूर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम ने 2026 में अपना एक बहुत बड़ा ‘सफाई अभियान’ चलाया है। इस सफाई अभियान के तहत कंपनी ने अपने प्लेटफॉर्म से लाखों बॉट और निष्क्रिय पड़ें अकाउंट्स को हटा दिया गया है। इस कदम से कई मशहूर हस्तियों, इन्फ्लुएंसर्स और बड़े ब्रांड्स के फॉलोअर्स की संख्या में अचानक से भारी गिरावट आई है। कार्रवाई की कुछ मुख्य बातें इंस्टाग्राम ने प्लेटफॉर्म पर फर्जी एंगेजमेंट और दिखावटी लोकप्रियता को रोकने के लिए एक बड़ा कदम उठाते हुए लाखों बॉट अकाउंट्स को डिलीट कर दिया है। इस कार्रवाई का सीधा असर दुनिया भर के बड़े सेलेब्स पर पड़ा है। इसमें मशहूर इन्फ्लुएंसर काइली जेनर को सबसे बड़ा झटका लगा और उन्होंने रातों-रात करीब 1.4 करोड़ फॉलोअर्स खो दिए। हैरानी की बात तो यह है कि इस कार्रवाई से खुद इंस्टाग्राम का अपना ऑफिशियल अकाउंट भी अछूता नहीं रहा, जिसके फॉलोअर्स की संख्या में लगभग 90 लाख की भारी गिरावट दर्ज की गई है। काइली जेनर समेत कई क्रिएटर्स को लगा झटकारिपोर्ट्स के मुताबिक, इस ‘अकाउंट क्लीनअप’ का असर अमेरिकी रियलिटी टीवी स्टार और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर काइली जेनर समेत कई हाई-प्रोफाइल यूजर्स पर पड़ा है। काइली जेनर के फॉलोअर्स की संख्या में 1.4 करोड़ तक की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। काइली के अलावा, दुनिया भर के कई अन्य मशहूर क्रिएटर्स और पब्लिक फिगर्स को भी रातों-रात अपने फॉलोअर्स कम होने का सामना करना पड़ा है। इंस्टाग्राम ने क्यों उठाया यह कदम?इंस्टाग्राम प्लेटफॉर्म पर असल यूजर्स को बढ़ावा देने के लिए समय-समय पर ऐसे क्लीनअप अभियान चलाता है। दरअसल, ऑटोमेटेड बॉट प्रोफाइल्स का इस्तेमाल अक्सर सोशल मीडिया पर नकली तरीके से लाइक्स, फॉलोअर्स, कमेंट्स और एंगेजमेंट बढ़ाने के लिए किया जाता है। इन्हीं फर्जी अकाउंट्स को साफ करने के लिए यह कार्रवाई की गई है। मेटा ने क्या कहा?इस मामले पर सफाई देते हुए मेटा के एक प्रवक्ता ने कहा कि यह कंपनी की एक सामान्य और रूटीन प्रक्रिया का हिस्सा है। उन्होंने साफ किया कि इसका असर प्लेटफॉर्म इस्तेमाल करने वाले असली और एक्टिव यूजर्स पर नहीं पड़ा है। प्रवक्ता ने कहा, निष्क्रिय अकाउंट्स को हटाने की हमारी रूटीन प्रक्रिया के कारण कुछ यूजर्स को अपने फॉलोअर्स की संख्या में बदलाव दिख सकता है। एक्टिव फॉलोअर्स पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ा है। इसके अलावा, अगर वेरिफिकेशन के बाद किसी सस्पेंड किए गए अकाउंट को वापस रिस्टोर किया जाता है, तो उसे दोबारा फॉलोअर काउंट में शामिल कर लिया जाएगा। सोशल मीडिया पर बना ‘The Great Purge of 2026’लाखों अकाउंट्स एक साथ डिलीट होने की इस घटना ने सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया है। यूजर्स इसे 2026 का महा-शुद्धिकरण (2026 का महा-सफाई अभियान) का नाम दे रहे हैं। लोग अपने घटे हुए फॉलोअर्स और एंगेजमेंट नंबर्स के स्क्रीनशॉट्स जमकर शेयर कर रहे हैं। माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म X पर एक यूजर ने मजे लेते हुए लिखा कि इस सफाई अभियान में खुद इंस्टाग्राम का अपना ऑफिशियल अकाउंट भी नहीं बच पाया। यूजर ने लिखा, इस क्लीनअप ड्राइव के दौरान खुद इंस्टाग्राम के ऑफिशियल अकाउंट ने 90 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स खो दिए। कोई भी सेफ नहीं था।
पश्चिम एशिया में फिर भड़की जंग की चिंगारी, बेरूत में हिजबुल्ला कमांडर ढेर; कुवैत एयरपोर्ट पर ड्रोन हमला

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। युद्धविराम और कूटनीतिक कोशिशों के बीच Israel ने दावा किया है कि बेरूत के दक्षिणी इलाके में किए गए हवाई हमले में हिजबुल्ला के कई शीर्ष कमांडर मारे गए हैं। वहीं कुवैत के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर ड्रोन हमले से नया संकट खड़ा हो गया है। बेरूत हमले में हिजबुल्ला कमांडर मारे जाने का दावाइज़राइल रक्षा बल ने दावा किया कि बेरूत के दक्षिणी उपनगरों में हुए हमले में हिजबुल्ला की रदवान यूनिट के कमांडर अहमद बलूत मारे गए। इसके अलावा नासेर यूनिट के इंटेलिजेंस प्रमुख मोहम्मद अली बाजी और एयर डिफेंस अधिकारी हुसैन हसन रोमानि के भी मारे जाने की बात कही गई है।रिपोर्ट्स के अनुसार गाज़ा शहर में अलग कार्रवाई के दौरान हमास नेता खलील अल-हय्या के बेटे अज्जाम अल-हय्या के मारे जाने का भी दावा किया गया है। कुवैत एयरपोर्ट पर ड्रोन हमलाकुवैत अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर ड्रोन हमले के बाद ईंधन टैंक में आग लग गई। अधिकारियों के मुताबिक शुरुआती जांच में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है, लेकिन संपत्ति को नुकसान पहुंचा है। दमकल और सुरक्षा एजेंसियां हालात पर काबू पाने में जुटी हैं। ईरान-इस्राइल तनाव जारीइस बीच ईरान और इस्राइल के बीच तनाव लगातार बना हुआ है। तेल अवीव के पास बनेई बराक में एक इमारत ईरानी मिसाइल हमले की चपेट में आने से ढह गई, जिसमें कई लोग घायल बताए जा रहे हैं। वहीं डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया है कि ईरान के साथ युद्ध खत्म करने को लेकर बातचीत जारी है और जल्द समझौता संभव है। दूसरी ओर ईरानी संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाक़िर ग़ालिबफ़ ने अमेरिकी रणनीति का मजाक उड़ाते हुए उसे “ऑपरेशन ट्रस्ट मी ब्रो” बताया। लेबनान और गाजा में बढ़ा संकटरिपोर्ट्स के मुताबिक पिछले 24 घंटों में लेबनान में इस्राइली हमलों में कई लोगों की मौत हुई है। वहीं लेबनान की ओर से दागे गए रॉकेट हमलों में उत्तरी इस्राइल में भी हताहत होने की खबरें हैं।विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में जारी यह संघर्ष फिलहाल थमता नहीं दिख रहा और आने वाले दिनों में क्षेत्रीय तनाव और बढ़ सकता है।