AI ने ओढ़ा भगवा चोला! साउथ कोरिया के मंदिर में रोबोट बना बौद्ध भिक्षु, VIDEO ने दुनिया को चौंकाया

नई दिल्ली। दक्षिण कोरिया में तकनीक और धर्म का अनोखा संगम देखने को मिला है। राजधानी सियोल के जोग्ये मंदिर में दुनिया के पहले ह्यूमनॉइड रोबोट भिक्षु ‘गाबी’ को औपचारिक रूप से बौद्ध धर्म का शिष्य बनाया गया। AI और अध्यात्म के इस अनोखे मेल का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। दीक्षा समारोह में रोबोट ‘गाबी’ पारंपरिक बौद्ध चोला पहनकर मंच पर पहुंचा। वरिष्ठ भिक्षुओं ने उसके गले में 108 मोतियों की माला पहनाई और उसने इंसानों की तरह हाथ जोड़कर सिर झुकाया। जब उससे पूछा गया कि क्या वह खुद को बौद्ध धर्म के लिए समर्पित करेगा, तो रोबोट ने जवाब दिया, “हां, मैं खुद को समर्पित करूंगा।” मंत्र पढ़ सकता है ‘गाबी’रिपोर्ट्स के मुताबिक ‘गाबी’ चीन के Unitree Robotics के G1 ह्यूमनॉइड प्लेटफॉर्म पर आधारित है। यह चल सकता है, इशारों में संवाद कर सकता है और मंत्रों का उच्चारण भी कर सकता है। साथ ही धार्मिक अनुष्ठानों के दौरान झुककर प्रणाम करने में भी सक्षम है। युवाओं को धर्म से जोड़ने की कोशिश‘गाबी’ को दक्षिण कोरिया के सबसे बड़े बौद्ध संप्रदाय Jogye Order ने विकसित किया है। इसका उद्देश्य डिजिटल युग में बौद्ध धर्म को आधुनिक स्वरूप देना और युवाओं को धर्म से जोड़ना बताया गया है। इंसानों जैसी रस्में, लेकिन अलग अंदाजआमतौर पर भिक्षु बनने की रस्म में सिर पर अगरबत्ती से निशान बनाया जाता है, लेकिन रोबोट होने की वजह से ‘गाबी’ पर प्रतीकात्मक स्टिकर लगाया गया। बताया गया कि ‘गाबी’ नाम गौतम बुद्ध के बचपन के नाम ‘सिद्धार्थ’ और कोरियाई भाषा के ‘दया’ शब्द को मिलाकर बनाया गया है। AI और इंसानों के तालमेल की तैयारीजोग्ये ऑर्डर के अधिकारियों का कहना है कि यह प्रयोग भविष्य में इंसानों और रोबोट्स के बीच तालमेल को समझने की दिशा में एक कदम है। ‘गाबी’ इस महीने होने वाले लालटेन महोत्सव में भी हिस्सा लेगा।विशेषज्ञ मानते हैं कि दुनिया भर में ह्यूमनॉइड रोबोट्स का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है और आने वाले समय में शिक्षा, धर्म, स्वास्थ्य और सेवा क्षेत्रों में AI आधारित रोबोट्स की भूमिका और बड़ी हो सकती है।
Flipkart SASA LELE Sale 2026: इस वीकेंड सस्ते स्मार्टफोन खरीदने का मौका, आईफोन से पिक्सल तक पर तगड़ा डिस्काउंट

नई दिल्ली। फ्लिपकार्ट की बहुप्रतिक्षित सासा लेले सेल 2026 की शुरुआत 9 मई से होने जा रही है। सेल शुरू होने से पहले ही कई बड़े ऑफर्स सामने आ चुके हैं। इस सेल में एप्पल, सैमसंग, मोटोरोला, गूगल पिक्सेल, ओप्पो और रियलमी के स्मार्टफोन्स पर भारी छूट मिलने वाली है। वहीं प्लस और ब्लैक मेंबर्स के लिए सेल 8 मई से ही शुरू हो जाएगी। आईफोन पर मिलेंगे बड़े ऑफर्ससेल के दौरान कई आईफोन मॉडल्स सस्ते दाम में खरीदने का मौका मिलेगा। Apple iPhone 16 — 58,900 रुपये Apple iPhone 17 — 71,900 रुपये Apple iPhone 16 Plus — 73,900 रुपये Apple iPhone 16e — 55,900 रुपये Apple iPhone 17e — 60,900 रुपये सैमसंग के लेटेस्ट फोन्स पर भी छूटSamsung Galaxy S25 को 53,999 रुपये में खरीदा जा सकेगा।वहीं Samsung Galaxy S26 Ultra की कीमत 1,30,999 रुपये होगी।इसके अलावा Samsung Galaxy A57 पर भी ऑफर मिलेगा और इसे 49,999 रुपये में खरीद पाएंगे। मोटोरोला फोन्स पर तगड़ी डीलMotorola Edge 60 Fusion — 19,999 रुपये Motorola Edge 60 Pro — 27,999 रुपये Motorola Edge 70 — 27,999 रुपये पिक्सल, ओप्पो और रियलमी पर भी ऑफरGoogle Pixel 10A — 44,999 रुपये Oppo Reno 14 5G — 36,999 रुपये Realme GT 7T — 29,499 रुपये कंपनी की ओर से बैंक ऑफर, एक्सचेंज बोनस और नो-कॉस्ट ईएमआई जैसी सुविधाएं भी दी जा सकती हैं। ऐसे में नया स्मार्टफोन खरीदने की प्लानिंग कर रहे यूजर्स के लिए यह सेल शानदार मौका साबित हो सकती है।
उतार-चढ़ाव के बाद सपाट बंद हुआ शेयर बाजार, सेंसेक्स में 114 अंकों की गिरावट..

नई दिल्ली। गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार में पूरे दिन उतार-चढ़ाव देखने को मिला। शुरुआती तेजी के बावजूद कारोबार के अंत तक बाजार लगभग सपाट बंद हुआ। निवेशकों की नजरें वैश्विक घटनाक्रम और अमेरिका-ईरान के बीच संभावित तनाव कम होने की खबरों पर बनी रहीं। कारोबार खत्म होने पर बीएसई सेंसेक्स 114 अंक गिरकर 77,844.52 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं एनएसई निफ्टी मामूली कमजोरी के साथ 24,326.65 पर बंद हुआ। दिन की शुरुआत दोनों प्रमुख सूचकांकों ने बढ़त के साथ की थी, लेकिन बाद में बाजार में मुनाफावसूली देखने को मिली। दिनभर के कारोबार में सेंसेक्स ने 78,384.70 का उच्च स्तर और 77,713.21 का निचला स्तर छुआ। वहीं निफ्टी 24,482.10 तक पहुंचा, जबकि दिन का निचला स्तर 24,284 रहा। हालांकि बड़े सूचकांकों में दबाव देखने को मिला, लेकिन मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों ने बेहतर प्रदर्शन किया। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स में 1 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी रही, जबकि स्मॉलकैप इंडेक्स भी बढ़त के साथ बंद हुआ। सेक्टर आधारित कारोबार में ऑटो, रियल्टी, मेटल, मीडिया और हेल्थकेयर शेयरों में खरीदारी देखने को मिली। दूसरी ओर आईटी, एफएमसीजी और कंज्यूमर ड्यूरेबल सेक्टर दबाव में रहे। बाजार में बजाज ऑटो, महिंद्रा एंड महिंद्रा, हिंडाल्को, ओएनजीसी, कोटक बैंक और एनटीपीसी जैसे शेयरों में अच्छी तेजी दर्ज की गई। वहीं एचयूएल, टीसीएस, टेक महिंद्रा, आईटीसी और सन फार्मा जैसे शेयर कमजोर रहे। बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद निवेशकों की संपत्ति में इजाफा हुआ। बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप बढ़कर करीब 475 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया, जिससे निवेशकों को लगभग 2 लाख करोड़ रुपये का फायदा हुआ। तकनीकी विश्लेषकों के मुताबिक, निफ्टी के लिए 24,400-24,500 का स्तर फिलहाल मजबूत रेजिस्टेंस बना हुआ है। अगर इंडेक्स इस दायरे के ऊपर टिकता है, तो बाजार में फिर तेजी लौट सकती है। वहीं 24,100-24,000 का स्तर मजबूत सपोर्ट माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में वैश्विक राजनीतिक घटनाएं और कच्चे तेल की कीमतें बाजार की दिशा तय करेंगी। खासतौर पर अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत को लेकर निवेशकों की नजर बनी हुई है। इस बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट देखने को मिली। ब्रेंट क्रूड करीब 2 प्रतिशत से ज्यादा टूटकर 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे कारोबार करता दिखा। वहीं डॉलर के मुकाबले रुपया भी मजबूत हुआ और हल्की बढ़त के साथ कारोबार करता नजर आया।
भारतीय नाविकों को बचाने में भी पाकिस्तान ने खेला ‘कश्मीर कार्ड’, समंदर में राहत मिशन के पीछे दिखी नई रणनीति

नई दिल्ली। पाकिस्तान एक बार फिर कश्मीर मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उछालने की कोशिशों को लेकर चर्चा में है। अरब सागर में फंसे एक भारतीय जहाज के बचाव अभियान के दौरान पाकिस्तान ने जिस जहाज को भेजा, उसका नाम ‘PMSS Kashmir’ था। इसे लेकर अब पाकिस्तान की रणनीति और प्रोपेगेंडा मॉडल पर सवाल उठने लगे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक भारतीय मालवाहक जहाज ‘MV गौतम’ ओमान से भारत लौटते समय तकनीकी खराबी के कारण अरब सागर में फंस गया था। इसके बाद मुंबई स्थित समुद्री बचाव समन्वय केंद्र ने पाकिस्तान से सहायता मांगी। जवाब में पाकिस्तानी नौसेना ने ‘PMSS कश्मीर’ नाम के जहाज को राहत मिशन के लिए रवाना किया। बचाव अभियान या कूटनीतिक संदेश?पाकिस्तान ने जहाज के चालक दल को भोजन, मेडिकल सहायता और जरूरी मदद पहुंचाई। जहाज में छह भारतीय और एक इंडोनेशियाई नागरिक सवार थे। हालांकि इस पूरे घटनाक्रम में सबसे ज्यादा चर्चा उस जहाज के नाम को लेकर हुई, जिसे पाकिस्तान ने जानबूझकर कश्मीर नाम दिया है। विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान मानवीय मदद के साथ-साथ कश्मीर शब्द को अंतरराष्ट्रीय मीडिया और वैश्विक चर्चा में बनाए रखने की रणनीति पर काम करता है। पाकिस्तान पहले भी अपने कई अभियानों और मंचों पर कश्मीर मुद्दे को प्रमुखता से उठाता रहा है। पहले भी सामने आ चुका है मामलारिपोर्ट्स के अनुसार फरवरी 2024 में भी इसी ‘PMSS Kashmir’ जहाज ने अरब सागर में फंसे भारतीय नागरिकों को बचाया था। पाकिस्तान ने उस समय भी इसे मानवीय मिशन के साथ अपने राजनीतिक संदेश से जोड़कर पेश किया था। In a remarkable act of maritime humanitarianism amid tense India-Pakistan relations, the Pakistan Maritime Security Agency ship PMSS Kashmir was deployed to rescue the crew of the distressed Indian offshore tug and supply vessel MV Gautam in the Arabian Sea after the Maritime… pic.twitter.com/iAXMJ2rnsw — brief. (@brief_pk) May 5, 2026 सोशल मीडिया और नैरेटिव वॉरविशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान लंबे समय से सोशल मीडिया, अंतरराष्ट्रीय मंचों और प्रचार अभियानों के जरिए कश्मीर मुद्दे को वैश्विक स्तर पर जिंदा रखने की कोशिश करता रहा है। यही वजह है कि समुद्री बचाव जैसे मानवीय अभियानों में भी प्रतीकात्मक संदेश देने की रणनीति अपनाई जाती है। हालांकि भारत की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन रणनीतिक हलकों में इसे पाकिस्तान की “नैरेटिव राजनीति” के हिस्से के तौर पर देखा जा रहा है।
धुंधली नजर को न समझें सामान्य, 40 की उम्र के बाद नियमित आंखों की जांच क्यों है बेहद जरूरी

नई दिल्ली। आजकल मोबाइल, लैपटॉप और टीवी स्क्रीन का इस्तेमाल तेजी से बढ़ गया है, जिसका सीधा असर आंखों की सेहत पर पड़ रहा है। खासकर 40 साल की उम्र पार करने के बाद आंखों से जुड़ी परेशानियां बढ़ने लगती हैं। ऐसे में विशेषज्ञ नियमित आई टेस्ट कराने की सलाह देते हैं ताकि आंखों की रोशनी लंबे समय तक सुरक्षित रह सके। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, आंखों की सुरक्षा का सबसे आसान और असरदार तरीका समय-समय पर नेत्र जांच कराना है। अक्सर लोग धुंधला दिखने या नजर कमजोर होने जैसी समस्याओं को उम्र का सामान्य असर मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यही लापरवाही आगे चलकर गंभीर बीमारी का रूप ले सकती है। 40 की उम्र के बाद आंखों में कई प्राकृतिक बदलाव शुरू हो जाते हैं। नजदीक की चीजें साफ न दिखना, ग्लूकोमा, मोतियाबिंद या डायबिटिक रेटिनोपैथी जैसी समस्याएं धीरे-धीरे विकसित हो सकती हैं। इन बीमारियों की शुरुआत में ज्यादा लक्षण दिखाई नहीं देते, इसलिए नियमित जांच बेहद जरूरी मानी जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि 40 साल के बाद हर व्यक्ति को साल में कम से कम एक बार पूरा आई चेकअप जरूर कराना चाहिए। वहीं जिन लोगों को डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर या परिवार में आंखों की बीमारी का इतिहास हो, उन्हें हर छह महीने में जांच करवानी चाहिए। समय पर बीमारी का पता चलने से इलाज आसान हो जाता है और आंखों की रोशनी को नुकसान से बचाया जा सकता है। आई टेस्ट सिर्फ आंखों की कमजोरी पहचानने के लिए ही नहीं बल्कि शरीर की दूसरी बीमारियों के शुरुआती संकेत पकड़ने में भी मदद करता है। कई बार डायबिटीज और ब्लड प्रेशर जैसी समस्याओं का असर सबसे पहले आंखों पर दिखाई देता है। आंखों को स्वस्थ रखने के लिए कुछ जरूरी आदतें अपनाना भी फायदेमंद माना जाता है। लंबे समय तक स्क्रीन देखने से बचें, अच्छी रोशनी में पढ़ाई करें और बीच-बीच में आंखों को आराम दें। इसके अलावा पौष्टिक भोजन भी आंखों की सेहत के लिए बेहद जरूरी है। डाइट में गाजर, पालक, ब्रोकली, संतरा, कीवी, बादाम और ब्लूबेरी जैसे खाद्य पदार्थ शामिल करने चाहिए। इनमें मौजूद विटामिन A, C, E, ओमेगा-3 फैटी एसिड और ल्यूटिन आंखों की रोशनी को बेहतर बनाए रखने में मदद करते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित आई टेस्ट और सही लाइफस्टाइल अपनाकर बढ़ती उम्र में भी आंखों को लंबे समय तक स्वस्थ रखा जा सकता है।
धमाकेदार एक्शन और गहरे इमोशंस के साथ वापसी करेगा ‘इंस्पेक्टर अविनाश’, नया सीजन होगा पहले से ज्यादा खतरनाक

नई दिल्ली। रणदीप हुड्डा एक बार फिर अपने चर्चित किरदार इंस्पेक्टर अविनाश के रूप में वापसी करने जा रहे हैं। क्राइम, एक्शन और इमोशंस से भरपूर ‘इंस्पेक्टर अविनाश सीजन 2’ को लेकर दर्शकों के बीच जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। इस बार कहानी पहले से ज्यादा गहरी और रोमांचक बताई जा रही है। नए सीजन में इंस्पेक्टर अविनाश सिर्फ अपराधियों से ही नहीं, बल्कि अपनी निजी जिंदगी के संघर्षों से भी जूझते नजर आएंगे। कहानी में भावनात्मक उतार-चढ़ाव के साथ हाई-वोल्टेज एक्शन और सस्पेंस का तड़का देखने को मिलेगा। रणदीप हुड्डा ने संकेत दिया है कि इस बार किरदार का सफर पहले से कहीं ज्यादा कठिन और चुनौतीपूर्ण होगा। सीरीज की कहानी 90 के दशक के उत्तर प्रदेश की पृष्ठभूमि पर आधारित है, जहां अपराध, राजनीति और व्यक्तिगत संघर्ष एक साथ टकराते दिखाई देंगे। इंस्पेक्टर अविनाश एक ऐसे दौर से गुजरते हैं जहां उनका परिवार, करियर और व्यक्तिगत जीवन सभी मुश्किलों में घिर जाता है। सीजन 2 में एक्शन सीक्वेंस को पहले से ज्यादा बड़ा और रियलिस्टिक बनाया गया है। साथ ही कहानी में इमोशनल एंगल को भी काफी मजबूत रखा गया है ताकि दर्शकों को हर मोड़ पर रोमांच और भावनात्मक जुड़ाव दोनों महसूस हो सके। इस सीजन में उर्वशी रौतेला भी अहम भूमिका में नजर आएंगी। उनके किरदार को लेकर भी काफी चर्चा हो रही है। इसके अलावा कई दमदार कलाकार कहानी को और मजबूत बनाते दिखाई देंगे। मेकर्स का दावा है कि नया सीजन दर्शकों को पहले से ज्यादा थ्रिल और ड्रामा देने वाला है। निर्देशन और लेखन में भी इस बार कहानी को अधिक परतों और संघर्षों के साथ पेश किया गया है। सीरीज में सिर्फ बाहरी लड़ाई ही नहीं बल्कि इंस्पेक्टर अविनाश की अंदरूनी जंग को भी प्रमुखता से दिखाया जाएगा। क्राइम थ्रिलर पसंद करने वाले दर्शकों के लिए यह सीजन खास होने वाला है। दमदार डायलॉग, तेज रफ्तार कहानी और इमोशनल ड्रामा इसे और ज्यादा दिलचस्प बनाने वाले हैं। जल्द रिलीज होने जा रही यह सीरीज दर्शकों के बीच पहले से ही काफी चर्चा में बनी हुई है।
भारत से दोस्ती, पाकिस्तान से नजदीकी! जानिए बांग्लादेशी पीएम तारिक रहमान की नई ‘बैलेंस’ रणनीति

नई दिल्ली। बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान की विदेश नीति इन दिनों चर्चा में है। बांग्लादेश की नई सरकार एक तरफ India के साथ रिश्ते सुधारने की कोशिश कर रही है, वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान के साथ भी नजदीकियां बनाए रखना चाहती है। अमेरिकी भू-राजनीतिक विश्लेषक माइकल कुगेलमैन ने इसे “बैलेंसिंग स्ट्रेटेजी” बताया है। विश्लेषकों के मुताबिक बांग्लादेश की लड़खड़ाती अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए भारत के साथ बेहतर संबंध बेहद जरूरी हैं। दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल भारत के साथ मजबूत व्यापारिक और रणनीतिक रिश्ते ढाका के लिए आर्थिक फायदे ला सकते हैं। साथ ही सीमा सुरक्षा, बिजली साझेदारी और साझा नदियों जैसे मुद्दों पर सहयोग भी बांग्लादेश के हित में माना जा रहा है। पाकिस्तान से दूरी भी नहीं चाहता ढाकारिपोर्ट के मुताबिक बांग्लादेश पाकिस्तान के साथ भी रिश्तों में गर्मजोशी बनाए रखना चाहता है। हाल के महीनों में दोनों देशों के बीच वीजा नियमों में ढील और यात्रा संपर्क बढ़ाने जैसे कदम उठाए गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि क्षेत्रीय सहयोग के लिए दक्षिण एशियाई संघ यानी सार्क को मजबूत करने, “ग्लोबल साउथ” के साथ जुड़ाव बढ़ाने और तुर्की जैसी मध्यम ताकतों के साथ तालमेल जैसे मुद्दों पर ढाका और इस्लामाबाद की सोच काफी हद तक मिलती है। भारत विरोधी भावना का भी असरविश्लेषक माइकल कुलेगमैन का कहना है कि बांग्लादेश की राजनीति में भारत विरोधी भावना रखने वाला एक बड़ा वर्ग मौजूद है। ऐसे में पाकिस्तान के साथ दोस्ताना रिश्ते बनाए रखना घरेलू राजनीति में भी तारिक रहमान सरकार को फायदा पहुंचा सकता है।हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अगर ढाका वास्तव में भारत के साथ रिश्ते सुधारना चाहता है तो पाकिस्तान के साथ रक्षा सहयोग बढ़ाना जोखिम भरा कदम हो सकता है। ‘दोनों से फायदा’ चाहती है बांग्लादेश सरकाररिपोर्ट के मुताबिक बांग्लादेश ऐसी विदेश नीति अपनाना चाहता है जिसमें भारत और पाकिस्तान दोनों के साथ संबंध बने रहें और किसी भी पक्ष को नाराज न किया जाए। ढाका का फोकस आर्थिक सहयोग, क्षेत्रीय संतुलन और रणनीतिक फायदे हासिल करने पर है।विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले समय में बांग्लादेश की यही संतुलन नीति दक्षिण एशिया की राजनीति में अहम भूमिका निभा सकती है।
भारत से परमाणु जंग की सोच भी पागलपन, ऑपरेशन सिंदूर की बरसी पर पाकिस्तान का बड़ा कबूलनामा

नई दिल्ली। Pakistan की सेना ने ऑपरेशन सिंदूर की पहली बरसी पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारत के खिलाफ तीखे बयान दिए। पाकिस्तानी सेना के मीडिया विंग Inter-Services Public Relations ने दावा किया कि उसने “मरका-ए-हक” अभियान के दौरान भारत को रणनीतिक रूप से मात दी थी। साथ ही पाकिस्तान ने यह भी कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच परमाणु युद्ध की संभावना को गंभीरता से लेना “पागलपन” होगा। प्रेस कॉन्फ्रेंस को आईएसपीआर के महानिदेशक Ahmed Sharif Chaudhry ने संबोधित किया। उनके साथ पाकिस्तानी नौसेना और वायुसेना के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। पाकिस्तानी सेना ने दावा किया कि उसने बहु-आयामी सैन्य अभियान चलाकर भारत के खिलाफ रणनीतिक बढ़त हासिल की। पाकिस्तान ने खुद को बताया विजेताआईएसपीआर ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के जवाब में पाकिस्तान ने “मरका-ए-हक” और बाद में बुनयानुम मरसूस नाम से अभियान चलाया था। पाकिस्तानी सेना का दावा है कि इस पूरे घटनाक्रम के बाद भारत का पाकिस्तान को आतंकवाद से जोड़ने वाला नैरेटिव कमजोर पड़ा है।पाकिस्तानी अधिकारियों ने पहलगाम हमले को लेकर भी भारत से सबूत मांगे और आरोप लगाया कि पाकिस्तान पर बिना प्रमाण के आरोप लगाए गए। परमाणु युद्ध पर क्या बोला पाकिस्तान?प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पाकिस्तानी सेना ने कहा कि दो परमाणु शक्ति संपन्न देशों के बीच पूर्ण युद्ध की बात करना गैरजिम्मेदाराना और “पागलपन” है। सेना ने दावा किया कि पाकिस्तान क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने की भूमिका निभा रहा है। फिर गरमाया भारत-पाकिस्तान मुद्दापाकिस्तानी सेना के इन बयानों को दक्षिण एशिया में जारी रणनीतिक तनाव और प्रचार युद्ध का हिस्सा माना जा रहा है। भारत की ओर से इस बयान पर फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि दोनों देशों के बीच बयानबाजी आने वाले समय में और तेज हो सकती है।
100 दिन तक नहीं होगी भारत-चीन यात्रा! बालेन शाह ने मोदी मुलाकात से पहले रखे बड़े एजेंडे, नेपाल की नई रणनीति से बढ़ी हलचल

नई दिल्ली। नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने सत्ता संभालने के बाद साफ संकेत दिए हैं कि उनकी सरकार शुरुआती 100 दिनों तक विदेश यात्राओं के बजाय घरेलू एजेंडे पर फोकस करेगी। इसी वजह से फिलहाल न तो भारत दौरे की कोई तारीख तय हुई है और न ही चीन यात्रा की तैयारी दिखाई दे रही है। नेपाल सरकार के इस रुख को दक्षिण एशिया की राजनीति में बड़ा संकेत माना जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत पिछले कुछ हफ्तों से नेपाली प्रधानमंत्री की दिल्ली यात्रा को लेकर उत्सुक है, लेकिन काठमांडू ने साफ कर दिया है कि जून से पहले ऐसी संभावना बेहद कम है। बालेन शाह 27 मार्च को प्रधानमंत्री बने थे और उसी दिन Narendra Modi ने उन्हें भारत आने का न्योता दिया था। हालांकि नेपाल सरकार फिलहाल घरेलू योजनाओं और राष्ट्रीय बजट पर ज्यादा ध्यान देना चाहती है। घरेलू मुद्दों को प्राथमिकताप्रधानमंत्री कार्यालय के सूत्रों के अनुसार बालेन शाह भूमिहीनों से जुड़े मामलों, आर्थिक योजनाओं और 29 मई को पेश होने वाले बजट की तैयारियों में व्यस्त हैं। सरकार का मानना है कि शुरुआती तीन महीनों में जनता को ठोस नतीजे दिखाना ज्यादा जरूरी है, इसलिए विदेश यात्राओं को अभी कम प्राथमिकता दी जा रही है। भारत दौरे से पहले नेपाल की तैयारीरिपोर्ट में दावा किया गया है कि नेपाल सरकार भारत के साथ होने वाली संभावित वार्ता के लिए लगभग 50 से 60 मुद्दों पर तैयारी कर रही है। इनमें Lipulekh Pass, लिम्पियाधुरा, कालापानी और नेपाल के संशोधित नक्शे से जुड़े विवाद प्रमुख हैं। नेपाल सरकार चाहती है कि पिछली सरकारों की तरह सिर्फ औपचारिक यात्रा न हो, बल्कि राष्ट्रीय हितों से जुड़े मुद्दों पर स्पष्ट चर्चा की जाए। यही वजह है कि विदेश मंत्रालय और अन्य विभाग पुराने समझौतों और लंबित मामलों की समीक्षा कर रहे हैं। भारत-नेपाल रिश्तों पर सबकी नजरविशेषज्ञों का मानना है कि बालेन शाह की विदेश नीति पर India और China दोनों की नजर है। नेपाल की नई सरकार फिलहाल संतुलन बनाकर चलना चाहती है ताकि किसी एक पक्ष के ज्यादा करीब जाने का संदेश न जाए। इसी बीच भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिसरी के काठमांडू दौरे की भी चर्चा है, जहां कई अहम द्विपक्षीय मुद्दों पर बातचीत हो सकती है। माना जा रहा है कि इसके बाद ही प्रधानमंत्री स्तर की यात्रा को अंतिम रूप दिया जाएगा। नेपाल की नई कूटनीतिक रणनीति?बालेन शाह सरकार का रुख यह संकेत दे रहा है कि नेपाल अब भारत और चीन दोनों के साथ रिश्तों में ज्यादा रणनीतिक और संतुलित नीति अपनाना चाहता है। आने वाले महीनों में यह साफ होगा कि काठमांडू की नई सरकार दक्षिण एशिया की राजनीति में किस दिशा में आगे बढ़ती है।
डिजिटल दुनिया में नया धमाका करने की तैयारी, सैटेलाइट इंटरनेट सेक्टर में उतर सकती है रिलायंस

नई दिल्ली। भारत में इंटरनेट सेवाओं के क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। टेलीकॉम सेक्टर में मजबूत पकड़ बनाने के बाद अब रिलायंस सैटेलाइट इंटरनेट की दुनिया में भी बड़ी तैयारी करती दिखाई दे रही है। माना जा रहा है कि कंपनी लो अर्थ ऑर्बिट यानी LEO सैटेलाइट तकनीक के जरिए देशभर में हाई-स्पीड इंटरनेट पहुंचाने की दिशा में काम कर रही है। सैटेलाइट इंटरनेट ऐसी तकनीक है जिसमें इंटरनेट सेवा के लिए मोबाइल टावर या फाइबर केबल की जरूरत नहीं पड़ती। इंटरनेट सीधे अंतरिक्ष में मौजूद सैटेलाइट्स के जरिए यूजर्स तक पहुंचाया जाता है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि जिन इलाकों में नेटवर्क पहुंचाना मुश्किल होता है, वहां भी आसानी से इंटरनेट सेवा उपलब्ध कराई जा सकती है। पहाड़ी क्षेत्रों, गांवों, जंगलों और दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए यह तकनीक काफी उपयोगी साबित हो सकती है। जहां आज भी कमजोर नेटवर्क या इंटरनेट की समस्या बनी रहती है, वहां हाई-स्पीड कनेक्टिविटी पहुंचने की संभावना बढ़ जाएगी। इससे ऑनलाइन शिक्षा, डिजिटल पेमेंट, वीडियो कॉलिंग और छोटे कारोबारों को भी मजबूती मिलेगी। LEO सैटेलाइट धरती के अपेक्षाकृत करीब रहते हैं, जिससे इंटरनेट सिग्नल तेजी से ट्रांसफर होता है और नेटवर्क में देरी काफी कम हो जाती है। यही कारण है कि इसे भविष्य की इंटरनेट तकनीक माना जा रहा है। वीडियो स्ट्रीमिंग, गेमिंग और लाइव कम्युनिकेशन जैसी सेवाएं भी इससे ज्यादा बेहतर तरीके से काम कर सकती हैं। बताया जा रहा है कि इस प्रोजेक्ट के लिए कई स्तरों पर तैयारियां शुरू हो चुकी हैं और कंपनी इसे अपने डिजिटल कारोबार के अगले बड़े कदम के रूप में देख रही है। आने वाले समय में यह तकनीक भारत के इंटरनेट सेक्टर में नई प्रतिस्पर्धा भी पैदा कर सकती है। फिलहाल सैटेलाइट इंटरनेट सेवाएं शुरुआती चरण में हैं और इससे जुड़े कई नियम व प्रक्रियाएं अभी पूरी की जानी बाकी हैं। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ने के बाद इसकी कीमतें धीरे-धीरे आम लोगों की पहुंच में आ सकती हैं।