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श्री मनकामनेश्वर महादेव मंदिर में श्रद्धा की मिसाल, चूल पार कर पूरी हुई पारंपरिक रस्म..

उज्जैन जिले के घोंसला गांव में इस बार धुलेंडी पर्व पर श्रद्धा और भक्ति का अनोखा नजारा देखने को मिला पूरे देश में रंगों का उत्सव मनाया जा रहा था, वहीं घोंसला गांव में श्रद्धालुओं ने दहकते अंगारों पर चलकर अपने विश्वास की मिसाल पेश की श्री मनकामनेश्वर महादेव मंदिर के सामने लगभग 30 से 35 फीट लंबा गड्ढा तैयार किया गया था वैदिक मंत्रोच्चार और पूजन के साथ मंदिर के अखंड दीप से प्रज्वलित अग्नि ने इस गड्ढे को अंगारों में बदल दिया मंदिर के पुजारी ने नंगे पांव इस अग्नि पर चलकर परंपरा का शुभारंभ किया और इसके बाद श्रद्धालुओं की लंबी कतार लगी श्रद्धालु अपनी मन्नतों के साथ अग्नि पर कदम रखते रहे घी का छिड़काव करने से आग की लपटें और तेज होती रहीं जिससे दृश्य और भी दिव्य हो गया सूरज की तपिश और अंगारों की गर्मी के बावजूद श्रद्धालुओं के चेहरों पर विश्वास की चमक दिखाई दी ग्रामीणों का कहना है कि बाबा श्री मनकामनेश्वर की कृपा से इस परंपरा में अब तक किसी बड़ी घटना की सूचना नहीं मिली है यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है और आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में लोग इसे देखने आए ताकि नई पीढ़ी भी इसे देख सके इस बार चंद्रग्रहण और सूतक के बीच भी यह परंपरा अपने निर्धारित समय पर संपन्न हुई और इसका श्रेय श्रद्धालुओं की अटूट भक्ति को दिया गया श्रद्धालु अग्नि पार करने के बाद मंदिर में जल अर्पित कर बाबा का आशीर्वाद लेते रहे और पूरा माहौल मेले जैसा बन गया आयोजन के दौरान प्रशासन और पुलिस बल की मौजूदगी रही, जिससे कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ और श्रद्धालुओं को कोई असुविधा नहीं हुई धुलेंडी, सूतक और चंद्रग्रहण के विशेष संयोग में यह चूल पार करने की परंपरा केवल रस्म नहीं, बल्कि विश्वास और भक्ति का प्रतीक बन गई इस अवसर पर हर तरफ “भक्ति और विश्वास” का गूंजता स्वर सुनाई दिया श्रद्धालु और ग्रामीण इस दृश्य को देखकर भावविभोर हो उठे यह परंपरा उज्जैन के सांस्कृतिक और धार्मिक जीवन में एक महत्वपूर्ण स्थान रखती है और आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी

नीतीश कुमार का राज्यसभा नामांकन: अमित शाह ने स्वागत किया, JDU कार्यकर्ताओं ने किया हंगामा

नई दिल्ली। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गुरुवार को विधानसभा पहुंचकर राज्यसभा सदस्य के लिए नामांकन दाखिल किया। उनके साथ बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन, रामनाथ ठाकुर, उपेन्द्र कुशवाहा और शिवेश कुमार भी मौजूद रहे। इस दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी कार्यक्रम में शिरकत की और नीतीश कुमार के लंबे और भ्रष्टाचार-मुक्त राजनीतिक सफर की सराहना की। शाह ने कहा कि नीतीश का कार्यकाल बिहार के इतिहास में स्वर्णिम पृष्ठ के रूप में लिखा जाएगा और उन्होंने बिहार को जंगलराज से मुक्त करने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने बिहार की सड़कों और ग्रामीण विकास में भी योगदान दिया और अपनी राजनीतिक यात्रा में किसी तरह के भ्रष्टाचार का आरोप कभी नहीं लगा। नामांकन के बाद नीतीश कुमार ने कहा कि राज्यसभा में जाने के बावजूद वे बिहार की नई सरकार को हर तरह से सहयोग देंगे। उन्होंने अपने संसदीय जीवन के महत्व और जनता के प्रति जिम्मेदारी पर जोर दिया। नीतीश के इस ऐलान के बाद तेजस्वी यादव ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि बिहार में महाराष्ट्र मॉडल लागू किया गया है और बीजेपी ने नीतीश को हाईजैक कर दिया। उनका कहना था कि सहयोगी पार्टी को ताकत से दबाकर नीतीश को राज्यसभा भेजा गया। नीतीश के राज्यसभा नामांकन की खबर मिलते ही सुबह से ही JDU कार्यकर्ता उनके मुख्यमंत्री आवास पर इकट्ठा होने लगे। कार्यकर्ताओं ने अपने नेता के प्रति समर्थन जताते हुए कहा कि वे नीतीश कुमार को कहीं नहीं जाने देंगे। इस दौरान CM हाउस के बाहर भावुक दृश्य देखने को मिले और कई कार्यकर्ता रोते हुए नजर आए। कार्यकर्ताओं ने बीजेपी कोटे के मंत्रियों सुरेंद्र मेहता, JDU MLC संजय गांधी और JDU विधायक प्रेम मुखिया को भी CM हाउस से बाहर निकाल दिया। JDU कार्यालय में भी नाराज कार्यकर्ताओं ने तोड़फोड़ की और हंगामा किया। कई जिलों जैसे बेगूसराय और नालंदा में नीतीश के राज्यसभा जाने का विरोध हुआ। कार्यकर्ताओं ने ललन सिंह, विजय चौधरी, संजय झा मुर्दाबाद के नारे लगाए, जिसके कारण JDU ऑफिस का गेट बंद कर दिया गया। जदयू प्रवक्ता राजीव रंजन ने कहा कि नीतीश कुमार के योगदान की चर्चा दशकों तक होती रहेगी और कार्यकर्ताओं के लिए यह फैसला सहज रूप से अपनाना मुश्किल है, लेकिन वे इसे स्वीकार करेंगे। अमित शाह ने इस अवसर पर कहा कि नीतीश कुमार 2005 से बिहार के मुख्यमंत्री रहे और अब लंबे अरसे के बाद राज्यसभा सांसद के रूप में राष्ट्रीय राजनीति में प्रवेश कर रहे हैं। शाह ने उनके प्रशासनिक कौशल, सादगी और बिहार में विकास कार्यों के लिए किए गए योगदान की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार ने बिहार के हर गांव और घर में बिजली पहुंचाई और पीएम मोदी के नेतृत्व में सभी योजनाओं को जन-जन तक पहुँचाया। नीतीश कुमार ने भी अपने पोस्ट में कहा कि संसदीय जीवन के लिए उनका सपना है कि वे दोनों सदनों का अनुभव लें और बिहार के विकास के लिए काम करें। उन्होंने कार्यकर्ताओं और जनता से अपील की कि वे बिहार की नई सरकार को सहयोग दें और पार्टी के प्रति अपनी निष्ठा बनाए रखें। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि राज्यसभा के लिए नीतीश का नामांकन और JDU कार्यकर्ताओं का गुस्सा बिहार में राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकता है। यह घटना न केवल राज्य की राजनीति में चर्चा का विषय बनी हुई है, बल्कि आगामी दिनों में बिहार की सियासत में हलचल और बढ़ सकती है। नीतीश कुमार का यह कदम उनके समर्थकों और आलोचकों दोनों के लिए महत्वपूर्ण है। राज्यसभा में जाने के साथ ही वे राष्ट्रीय स्तर पर फिर से सक्रिय भूमिका निभाएंगे, वहीं कार्यकर्ताओं का विरोध और नाराजगी बीजेपी और JDU के बीच संबंधों की जटिलता को भी दर्शाता है।

ग्वालियर सेंट्रल जेल में भाईदूज का उल्लास, एक हजार से अधिक बहनों ने बंदी भाइयों को किया मंगल तिलक

ग्वालियर। होली की दूज पर ग्वालियर सेंट्रल जेल में भाईदूज का विशेष पर्व बड़े धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर जेल में बंद अपने भाईयों से मिलने के लिए एक हजार से अधिक बहनें जेल पहुंचीं। जेल प्रशासन ने इस आयोजन को सफल और सुव्यवस्थित बनाने के लिए विशेष तैयारियां की थीं। जेल के बाहर सुबह से ही काउंटर लगाकर बहनों का पूरी तरह से सत्यापन (वैरिफिकेशन) किया गया। केवल सत्यापित बहनों को ही जेल के अंदर प्रवेश की अनुमति दी गई। जेल परिसर में बहनों ने परंपरागत रीति-रिवाजों का पालन करते हुए रंग, गुलाल, रोली, चावल और चंदन से भाइयों का तिलक किया और मिठाई खिलाकर उनके लंबी उम्र और खुशहाल जीवन की कामना की।जेल परिसर में बहनों ने परंपरागत रीति-रिवाजों का पालन करते हुए रंग, गुलाल, रोली, चावल और चंदन से भाइयों का तिलक किया और मिठाई खिलाकर उनके लंबी उम्र और खुशहाल जीवन की कामना की। हालांकि जेल प्रशासन ने स्पष्ट किया था कि बाहर से कोई भी पूजन सामग्री लाई नहीं जा सकती। इसके चलते बहनों ने जेल परिसर में ही शुल्क देकर लड्डू और अन्य पूजन सामग्री खरीदी। जेल प्रशासन ने सुरक्षा और सुव्यवस्था को ध्यान में रखते हुए कार्यक्रम की पूरी मॉनीटरिंग की। भाईदूज का यह पर्व उन कैदियों के लिए विशेष महत्व रखता है, जो संगीन मामलों में जेल में बंद हैं और लंबे समय से अपने परिवार से मिलने का इंतजार कर रहे हैं। इस अवसर ने जेल में बंद भाइयों के चेहरे पर मुस्कान और खुशी की लहर दौड़ा दी। जेल अधिकारियों ने बताया कि इस आयोजन से कैदियों और उनके परिवारों के बीच भावनात्मक जुड़ाव मजबूत होता है। यह न केवल भाई-बहन के रिश्तों को सशक्त बनाता है, बल्कि उनके मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी अत्यंत लाभकारी है। जेल के अधिकारियों के अनुसार, कार्यक्रम को व्यवस्थित करने के लिए सुबह से ही विशेष काउंटर लगाए गए थे। बहनों का नाम, पहचान पत्र और संबंध की पुष्टि करने के बाद ही उन्हें प्रवेश दिया गया। जेल प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया कि कोई भी अनुचित घटना न हो और कार्यक्रम पूरी तरह से शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो। जेल में तैनात सुरक्षा कर्मियों ने पूरे आयोजन पर नजर रखी और आवश्यकतानुसार बहनों और कैदियों की मदद भी की। कार्यक्रम में कई बहनों ने बताया कि यह उनके भाईयों से मिलने का एक दुर्लभ अवसर होता है। लॉकडाउन और अन्य सुरक्षा कारणों से पिछले साल या महीनों में कई बार मिलने का अवसर नहीं मिला। इसलिए आज का दिन उनके लिए बेहद खास और भावनात्मक रूप से महत्वपूर्ण था। बहनों ने अपने भाईयों के स्वास्थ्य, शिक्षा और भविष्य की कामना करते हुए उन्हें स्नेहपूर्वक तिलक किया। जेल प्रशासन ने बताया कि इस आयोजन में हिस्सा लेने वाली बहनों की संख्या पहली बार इतनी बड़ी रही है। इससे पहले के वर्षों में इस कार्यक्रम में कुछ सौ बहनें ही शामिल होती थीं। इस बार बड़ी संख्या में बहनों की भागीदारी ने भाईदूज के पर्व की गरिमा और उल्लास को और बढ़ा दिया। भाईदूज पर जेल में आयोजित इस प्रकार के कार्यक्रम से यह संदेश जाता है कि कठिन परिस्थितियों में भी परिवार का महत्व और पारंपरिक रीति-रिवाजों की गरिमा कायम रहनी चाहिए। जेल प्रशासन ने भी इस अवसर को शांति और अनुशासन के साथ सफल बनाने का प्रयास किया। इस आयोजन ने साबित कर दिया कि चाहे परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों, भाई-बहन का स्नेह और त्यौहारों का महत्व कभी कम नहीं होता। जेल में बंद कैदियों के लिए यह एक सुखद और यादगार अनुभव बन गया, जिसने उनके और उनके परिवार के बीच भावनात्मक दूरी को कम किया।

छिंदवाड़ा में भीषण सड़क हादसा: दो बाइक की आमने-सामने टक्कर में 4 युवकों की मौत, 1 गंभी

छिंदवाड़ा जिले के चौरई क्षेत्र से एक दर्दनाक खबर सामने आई है, जिसने सभी को हिला कर रख दिया। यहां दो बाइक आमने-सामने टकरा गईं, जिसमें चार युवकों की मौके पर ही मौत हो गई और एक युवक गंभीर रूप से घायल हो गया। यह हादसा सिहोरा-माचागोरा रोड पर धनोरा गोसाई पुलिया के पास हुआ। जानकारी के अनुसार, एक बाइक पर तीन युवक और दूसरी बाइक पर दो युवक सवार थे। दोनों बाइक तेज रफ्तार में विपरीत दिशा से आ रही थीं। पुलिया के पास जब वे आमने-सामने टकराए, तो टक्कर इतनी भीषण थी कि सभी युवक सड़क से दूर तक जा गिरे। आसपास के ग्रामीण तुरंत मौके पर पहुंचे और पुलिस तथा एंबुलेंस को सूचना दी। घायलों को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने चार युवकों को मृत घोषित कर दिया। जबकि एक युवक का इलाज जारी है और उसकी हालत गंभीर बताई जा रही है। अस्पताल में घायलों की आपातकालीन स्थिति देखी गई, जैसे किसी फिल्म का सीन हो। घायल को बाइक सहित इमरजेंसी वार्ड तक ले जाना पड़ा। प्रारंभिक जांच में पुलिस ने हादसे का मुख्य कारण तेज रफ्तार बताया। पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है और शवों का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है। यह हादसा इस बात का प्रमाण है कि सड़क पर तेज गति, सुरक्षा नियमों की अनदेखी और लापरवाही जीवन के लिए कितना बड़ा खतरा बन सकती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह पुलिया और रोड अक्सर दुर्घटनाग्रस्त होते रहते हैं। कुछ ग्रामीणों ने प्रशासन से रोड पर सुरक्षा उपायों और चेतावनी संकेत लगाने की मांग की है। परिवारों में मातम का माहौल है और मृतकों के परिजन हादसे की इस भयावहता से सदमे में हैं। हादसे ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सड़क सुरक्षा और वाहन की गति पर नियंत्रण न होने पर परिणाम हमेशा गंभीर होते हैं। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह घटना छिंदवाड़ा जिले और आसपास के इलाकों के लिए चेतावनी है कि सड़क पर सतर्कता, हेलमेट का उपयोग और निर्धारित गति सीमा का पालन जीवन बचाने में अहम भूमिका निभाता है।

शहडोल में ऑनलाइन गेम्स की वजह से परिवार हुआ तबाह, मासूम अनिकेत अकेला रह गया

शहडोल की पुरानी बस्ती में एक हंसता-खेलता परिवार ऑनलाइन गेमिंग की खतरनाक लत के चलते हमेशा के लिए उजड़ गया 24 फरवरी की रात हुई इस दर्दनाक घटना में पहले पिता शंकर लाल गुप्ता और बेटी स्वाति गुप्ता की मौत हो चुकी थी अब आठ दिन बाद मां राजकुमारी भी अपनी जिंदगी की लड़ाई हार गई जानकारी के अनुसार, शंकर लाल गुप्ता को BDG और AVIATOR नामक ऑनलाइन गेम की लत लग गई थी इस दौरान उन्होंने लाखों रुपये गंवा दिए और कर्ज के बोझ तले दबते चले गए लगातार बढ़ता आर्थिक तनाव और मानसिक दबाव उन्हें और उनके परिवार को असहनीय स्थिति में ले गया इसके चलते उन्होंने कथित तौर पर कोल्डड्रिंक में जहर मिलाकर पहले अपनी पत्नी और बेटी को पिलाया और फिर खुद भी पी लिया घटना के बाद परिवार के तीनों सदस्य गंभीर हालत में अस्पताल ले जाए गए जहां पिता और बेटी ने अगले ही दिन दम तोड़ दिया लेकिन मां राजकुमारी का इलाज मेडिकल कॉलेज शहडोल में जारी रहा आठ दिन की जिंदगी और मौत से जूझने के बाद राजकुमारी भी अपनी जान हार गई इस हृदय विदारक घटना के बाद परिवार में अब केवल 15 वर्षीय बेटा अनिकेत गुप्ता ही बचा है अनिकेत उस समय घर पर मौजूद नहीं था जिस वजह से वह जहरीला पेय पीने से बच गया और उसकी जान बच गई यह अकेला बच्चा अब पूरी तरह से अकेला रह गया है इस घटना ने शहर और आसपास के लोगों को झकझोर कर रख दिया इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर ऑनलाइन गेमिंग और सट्टा जैसे प्लेटफॉर्म्स की खतरनाक लत पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं आर्थिक नुकसान, मानसिक दबाव और परिवारिक तनाव जैसी स्थितियों में ऐसे गेम्स का प्रभाव कैसे विनाशकारी साबित हो सकता है यह घटना इसके लिए एक चेतावनी भी है विशेषज्ञों का मानना है कि ऑनलाइन गेमिंग और सट्टा जैसे प्लेटफॉर्म्स पर बच्चों और युवाओं की पहुंच को नियंत्रित करना बेहद जरूरी है और परिवार को समय-समय पर मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना चाहिए इस घटना ने यह भी स्पष्ट किया कि लत के चलते किए गए एक गलत निर्णय पूरे परिवार के जीवन को हमेशा के लिए बदल सकता है शहडोल की पुरानी बस्ती के लोग अब इस घटना को याद करते हुए केवल सन्नाटा महसूस कर रहे हैं और मासूम अनिकेत की स्थिति पर चिंता जताई जा रही है परिवार की खुशहाल जिंदगी अब केवल यादों में ही रह गई है यह घटना समाज और स्थानीय प्रशासन के लिए भी एक चेतावनी है कि ऑनलाइन गेमिंग और सट्टा जैसी लतों के खतरों को गंभीरता से लिया जाए और समय रहते बच्चों और युवाओं को इसके प्रभाव से बचाया जाए

भोपाल में होली के दिन युवक की चाकू मारकर हत्या, शव ऑटो से फेंककर बदमाश फरार

भोपाल । भोपाल के निशातपुरा थाना क्षेत्र में होली के दिन एक युवक की दर्दनाक हत्या ने पूरे इलाके को दहला दिया। 19 वर्षीय अरविंद मीणा, जो प्रताप नगर में रहता था और गारमेंट्स शॉप में सेल्समैन के रूप में काम करता था, बुधवार रात अपने दोस्तों के साथ होली खेलने के बाद घूमने निकला था। सूत्रों के अनुसार, वह अपने दोस्तों विशाल ठाकुर उर्फ भूरा और सचिन के साथ आखिरी बार देखा गया। रात के अज्ञात समय में अज्ञात बदमाशों ने उसे घेरकर चार चाकू वार किए और उसके बाद उसका शव बेस्ट प्राइस के पास 80 फीट रोड पर ऑटो से फेंककर फरार हो गए। शव अर्धनग्न हालत में मिला, जिसमें उसके ऊपरी हिस्से के कपड़े नहीं थे। घटना की जानकारी लगते ही मृतक के पिता हल्केराम मीणा मौके पर पहुंचे। उन्होंने बताया कि उन्होंने सड़क किनारे भीड़ देखकर रुके और पास जाकर अपने बेटे का शव देखा। इस दर्दनाक दृश्य ने पूरे मोहल्ले के लोगों को स्तब्ध कर दिया। निशातपुरा थाना प्रभारी मनोज पटवा ने बताया कि हत्या का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है और आरोपियों की पहचान के लिए तेजी से काम किया जा रहा है। पुलिस सीसीटीवी फुटेज और आसपास के लोगों से पूछताछ कर संदिग्धों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। मृतक के मोहल्ले के लोग और परिचितों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई तो वे सड़क पर शव रखकर विरोध प्रदर्शन करेंगे। उन्होंने कहा कि जांच में देरी से समुदाय में असंतोष और आक्रोश बढ़ रहा है। मोहल्ले के लोग बताते हैं कि अरविंद मीणा एक मेहनती और शांत स्वभाव का युवक था, जिसने अपने परिवार का सहारा बनने के लिए मेहनत की थी। घटना ने इलाके में सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं, खासकर होली जैसे बड़े त्योहार के मौके पर। पुलिस ने आसपास के इलाकों में अतिरिक्त गश्त बढ़ा दी है और युवाओं को अशांति फैलाने से रोकने के लिए सतर्क रहने का निर्देश दिया है। परिजन और मोहल्ले वाले पुलिस से लगातार संपर्क में हैं और दोषियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। पुलिस की प्राथमिक जांच से पता चला है कि हत्या की घटना व्यक्तिगत विवाद या आपराधिक मंशा के चलते हो सकती है, लेकिन सटीक कारण पोस्टमार्टम और जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। यह घटना न केवल भोपाल के निशातपुरा इलाके में तनाव बढ़ा रही है, बल्कि होली जैसे खुशियों के त्योहार पर सुरक्षा और कानून व्यवस्था की चुनौती को भी उजागर करती है। पुलिस ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है और आश्वासन दिया है कि जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार किया जाएगा।

शिवराज सिंह चौहान ने 66वें जन्मदिन पर परिवार संग किया पौधारोपण , मामा कोचिंग और मोबाइल अस्पताल से शिक्षा-स्वास्थ्य में नई पहल शुरू की

नई दिल्ली। केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने 66वें जन्मदिन पर भोपाल के स्मार्ट पार्क में परिवार के साथ पौधारोपण किया और आगामी योजनाओं के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने इस मौके पर पांच संकल्पों की घोषणा की, जिसमें पर्यावरण संरक्षण, शिक्षा, सेवा, सहायता और प्रतिभा प्रोत्साहन शामिल हैं। पर्यावरण संरक्षण के लिए उन्होंने जोर दिया कि पेड़ सिर्फ लकड़ी नहीं, बल्कि करोड़ों जीवों का घर और ऑक्सीजन की फैक्ट्री हैं, और धरती के तापमान को कम करने के लिए हर हाल में पेड़ लगाना जरूरी है। शिक्षा क्षेत्र में चौहान ने विदिशा, रायसेन और भैरुंदा में मुफ्त मामा कोचिंग क्लासेस शुरू करने की बात कही ताकि आर्थिक कठिनाइयों के कारण कोई बच्चा अपने सपनों से वंचित न रहे। इसके अलावा विदिशा संसदीय क्षेत्र के मेधावी बच्चों के लिए प्रेम-सुंदर प्रतिभा सम्मान की शुरुआत होगी, जिसमें टॉपर्स को सम्मान राशि दी जाएगी।शिवराज ने सामाजिक सेवा और स्वास्थ्य क्षेत्र में भी बड़े कदम उठाने की योजना बनाई है। उन्होंने बताया कि दिव्यांगों के लिए मोटराइज्ड ट्राई साइकिल उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे वे न केवल चल सकेंगे बल्कि अपना रोजगार भी कर सकेंगे। साथ ही ‘मामा चलित अस्पताल’ कार्यक्रम के तहत विदिशा की आठों विधानसभाओं के गांव-गांव में मोबाइल क्लिनिक चलाकर गरीबों को आधुनिक जांच और नि:शुल्क इलाज मुहैया कराया जाएगा। ये मेडिकल वैन स्थानीय लोगों को शुरुआती जांच, ब्लड टेस्ट, ईसीजी और दवाइयां उपलब्ध कराएंगी, और आवश्यकता पड़ने पर रेफरल की सुविधा भी देंगी। जन्मदिन के मौके पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ट्विटर पर शिवराज सिंह चौहान को बधाई दी और उनके दीर्घायु एवं स्वस्थ जीवन की कामना की। इसी अवसर पर स्वामी अवधेशानंद गिरि महाराज ने भी पौधारोपण कर चौहान को जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं और उनके सेवा-समर्पित नेतृत्व की सराहना की। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि ये जन्मदिन उनके लिए नए संकल्प और कार्यों की शुरुआत का प्रतीक है, और उनका उद्देश्य किसानों, ग्रामीणों और युवाओं के कल्याण के लिए हर संभव प्रयास करना है।

नीम हकीम खतरा-ए-जान साबित हुआ: पन्ना में जड़ी-बूटियों का सेवन कर परिवार हुआ गंभीर हालत में

पन्ना जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने यह साबित कर दिया कि बिना डॉक्टरी सलाह के जड़ी-बूटियों का सेवन कितना खतरनाक हो सकता है। पन्ना की निवासी सावित्री बाई उम्र 45 साल, जो लंबे समय से हाथ-पैर और कमर के दर्द से परेशान थीं, ने खुद और अपने बच्चों के लिए एक घरेलू इलाज अपनाया। किसी के सुझाव पर उन्होंने धतूरा और गरज जैसी जड़ी-बूटियों का काढ़ा तैयार किया। सावित्री बाई ने यह काढ़ा पहले खुद पीया और फिर अपने बेटे शिवम उम्र 22 साल और बेटी रेखा उम्र 24 साल को भी पिला दिया। जैसे ही तीनों ने यह काढ़ा लिया, उनकी तबीयत अचानक बिगड़ने लगी। तेज चक्कर आने लगे, लगातार उल्टियां होने लगीं और शरीर सुन्न पड़ गया। परिवार की यह हालत देख उनके परिजन तुरंत उन्हें पन्ना जिला अस्पताल ले गए। अस्पताल में डॉक्टरों ने इसे गंभीर फूड पॉइजनिंग का मामला बताया। तुरंत चिकित्सा मिलने के कारण बड़ा हादसा टल गया, लेकिन यह घटना इस बात का सबूत है कि जड़ी-बूटियों का बिना विशेषज्ञ सलाह के सेवन जानलेवा हो सकता है। डॉक्टरों ने कहा कि धतूरा जैसी जड़ी-बूटियां बेहद खतरनाक होती हैं। यदि उनका सेवन नियंत्रित मात्रा में और चिकित्सकीय निगरानी में न किया जाए, तो इससे गंभीर स्वास्थ्य समस्या हो सकती है। सावित्री बाई और उनके बच्चों को अस्पताल में इलाज दिया जा रहा है और अब धीरे-धीरे उनकी हालत स्थिर हो रही है। यह घटना न सिर्फ पन्ना के लोगों के लिए चेतावनी है, बल्कि पूरे देश में यह याद दिलाती है कि घरेलू नुस्खों और जड़ी-बूटियों के सेवन में अति सावधानी बरतना बेहद जरूरी है। नीम हकीम खतरा-ए-जान, का संदेश सच साबित हुआ। परिवार की यह गलती बस दर्द से राहत पाने की कोशिश थी, लेकिन इसका परिणाम अस्पताल की आपातकालीन व्यवस्था तक पहुंच गया। विशेषज्ञ कहते हैं कि किसी भी प्रकार की जड़ी-बूटियों या घरेलू औषधियों का सेवन करने से पहले हमेशा योग्य चिकित्सक से परामर्श करना चाहिए। यह मामला यह भी दर्शाता है कि पारंपरिक घरेलू नुस्खे अक्सर खतरनाक हो सकते हैं। खासकर धतूरा और गरज जैसी जड़ी-बूटियां, जो कि शरीर के लिए जहर साबित हो सकती हैं। समय पर इलाज और अस्पताल पहुंचना ही इस परिवार की जान बचाने वाला मुख्य कारण बना। पन्ना के लोगों के लिए यह घटना एक चेतावनी है कि स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का इलाज केवल प्रमाणित और चिकित्सकीय तरीके से ही किया जाना चाहिए। किसी भी तरह का जोखिम लेना जानलेवा साबित हो सकता है।

उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण को लेकर हंगामा, भीड़ ने भाजपा विधायक का दफ्तर घेरा; महिलाएं फूट-फूट कर रोईं

उज्जैन । उज्जैन के पिपलीनाका क्षेत्र में सड़क चौड़ीकरण को लेकर स्थानीय लोगों और विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा के बीच संघर्ष हुआ। मंगलवार को नगर निगम ने पिपलीनाका से गढ़कालिका और भैरवगढ़ मार्ग पर सड़क चौड़ीकरण के दायरे में आने वाले मकानों के मालिकों को नोटिस जारी किए थे, जिसमें उन्हें सात दिनों के भीतर प्रभावित हिस्से को खाली करने का निर्देश दिया गया। इसके बाद गुरुवार को करीब 400 से अधिक लोग विरोध प्रदर्शन के लिए विधायक के आगर रोड स्थित दफ्तर पहुंचे। भीड़ ने विधायक की गाड़ी को रोक लिया और उन्हें भाजपा कार्यालय तक ले गए। कार्यालय में महिलाएं रोते-बिलखते हुए घुस गईं और नारेबाजी की। प्रदर्शन में कई परिवारों ने अपने घर टूटने और रोजी-रोटी पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर चिंता जताई। महिलाओं ने कहा कि उन्होंने वोट देकर विधायक को चुना था, लेकिन अब उनके आशियानों को ही तोड़ा जा रहा है। विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा ने प्रभावित लोगों की बात सुनने के बाद कलेक्टर रोशन सिंह से चर्चा की और आश्वासन दिया कि समाधान निकाले जाने की कोशिश की जाएगी। स्थानीय रहवासियों ने सड़क चौड़ाई को 100 फीट रखने के प्रस्ताव के बजाय 80 फीट करने की मांग की है ताकि कई मकानों को टूटने से बचाया जा सके। पिपलीनाका से गढ़कालिका मंदिर, ओखलेश्वर श्मशान और भैरवगढ़ जेल चौराहा तक कई घर और दुकानों को नोटिस दिए गए हैं। कई परिवार आर्थिक तंगी और बीमारी के दोहरे बोझ में हैं। जैसे संगीता भारती ने बताया कि उन्होंने अपने पति और बेटे को खो दिया है और अब अकेले ही परिवार का गुजारा करती हैं। ममता सैनी ने कहा कि अगर उनका घर टूट गया, तो वे अपने बच्चों को लेकर दर-दर भटकने को मजबूर होंगी। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से अपील की है कि सड़क निर्माण के लिए जरूरत पड़ने पर केवल 10 फीट जमीन ली जाए, ताकि उनके पूरे घर को तोड़े जाने से बचाया जा सके। प्रशासन जल्द ही इस सड़क चौड़ीकरण कार्य को शुरू करने की तैयारी में है।

मूंदी में फिल्मी स्टाइल मदद, बाइक लेकर घायल को इमरजेंसी वार्ड तक पहुंचाया, समय पर उपचार से बची जान

 मूंदी  /खंडवा जिले के मूंदी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एक ऐसा मामला सामने आया जिसने किसी फिल्मी सीन को याद दिला दिया राजकुमार और भुरू नाम के दो युवक अपनी बाइक पर चरूवा मेला घूमने जा रहे थे तभी सड़क पर रेलवे फाटक के पास बने ऊंचे ब्रेकर पर उनकी बाइक अनियंत्रित होकर उछल गई संतुलन बिगड़ने के कारण दोनों सड़क पर गिर पड़े और गंभीर रूप से घायल हो गए हादसे के वक्त पीछे से आ रहे दो अन्य युवकों ने तुरंत स्थिति का आकलन किया और बिना किसी देरी के मदद के लिए आगे बढ़े उन्होंने घायलों को अलग-अलग बाइकों पर बैठाया और स्ट्रेचर बुलाने या अन्य औपचारिकताओं में समय खराब किए बिना सीधे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के इमरजेंसी वार्ड तक पहुंचाया यह दृश्य फिल्म ‘3 इडियट्स’ के एक सीन जैसा था जब तुरंत मदद और तेज कार्रवाई से घायलों को समय पर प्राथमिक उपचार मिल सका हादसे के दौरान घायलों को अस्पताल पहुंचाने में विशाल राजपूत की गाड़ी का भी योगदान रहा उन्होंने घायलों को अस्पताल तक ले जाने में मदद की और समय पर इलाज शुरू हो सका इसके कारण दोनों युवक गंभीर हालत में नहीं पहुंचे और जल्द ही ठीक होने लगे डॉक्टरों ने बताया कि यदि घायलों को समय पर इमरजेंसी वार्ड तक नहीं लाया जाता तो स्थिति गंभीर हो सकती थी इस घटना से यह स्पष्ट होता है कि समय पर और सही तरीके से की गई मदद कितनी महत्वपूर्ण होती है सड़क पर हुए हादसे में कई बार मिनटों का अंतर जीवन और मृत्यु के बीच फर्क कर सकता है यहाँ युवकों की तत्परता और साहस ने दोनों की जान बचाई राज्य और जिला स्तर पर सड़क सुरक्षा और समय पर इमरजेंसी मदद को लेकर जागरूकता बढ़ाने की जरूरत पर भी यह घटना प्रकाश डालती है हादसे की वजह से बाइक और सड़क की स्थिति को लेकर भी सवाल उठते हैं लेकिन सबसे बड़ी सीख यह है कि मौके पर मदद करने वाले युवकों का साहस और तत्परता ही घायलों के लिए जीवन रक्षक साबित हुई खंडवा जिले में इस तरह की घटनाओं से स्थानीय लोगों में भी सतर्कता बढ़ी है और यह मामला सोशल मीडिया पर भी चर्चा में आया है लोग इसे ‘फिल्मी स्टाइल’ मदद का उदाहरण बता रहे हैं जिससे समय पर प्राथमिक उपचार का महत्व समझ में आता है घायल युवकों का इलाज जारी है और दोनों अब खतरे से बाहर हैं इस घटना ने यह भी साबित किया कि सही समय पर की गई मदद और हिम्मत से किसी भी सड़क हादसे में जान बचाई जा सकती है