ग्रामीण योजनाओं को मजबूत बनाने की कवायद तेज, पंचायत विकास योजना पर बड़ा राष्ट्रीय मंथन

नई दिल्ली। ग्रामीण विकास और जमीनी स्तर पर शासन को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में केंद्र सरकार एक महत्वपूर्ण पहल करने जा रही है। इसके तहत पंचायत विकास योजनाओं को और अधिक सशक्त और परिणाम आधारित बनाने के उद्देश्य से एक दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा। यह आयोजन राजधानी में होगा, जहां देशभर से जुड़े विशेषज्ञ, अधिकारी और संबंधित हितधारक एक साथ मिलकर ग्रामीण योजनाओं की नई रूपरेखा पर चर्चा करेंगे। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य पंचायत स्तर पर योजना निर्माण की प्रक्रिया को अधिक डेटा आधारित और सहभागिता पर आधारित बनाना है, ताकि ग्रामीण विकास योजनाएं केवल कागजों तक सीमित न रहकर वास्तविक परिणाम दे सकें। सरकार का मानना है कि मजबूत पंचायत प्रणाली ही विकसित भारत की नींव है, इसलिए इस स्तर पर सुधार बेहद जरूरी हैं। कार्यशाला में आगामी वित्तीय वर्ष के लिए पंचायत विकास योजनाओं की तैयारियों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके साथ ही यह सुनिश्चित करने पर भी चर्चा होगी कि ये योजनाएं वित्तीय मानकों और आवश्यक शर्तों के अनुरूप हों, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों को सही दिशा मिल सके। इस आयोजन में विभिन्न मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारी और राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधि भाग लेंगे। तकनीकी सत्रों और समूह अभ्यासों के माध्यम से प्रतिभागियों को व्यावहारिक रूप से योजना निर्माण की प्रक्रिया समझाई जाएगी। इसमें शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता, पेयजल, आजीविका, महिला सशक्तिकरण और बुनियादी ढांचे जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर विशेष फोकस रहेगा। कार्यशाला के दौरान पंचायत स्तर पर डिजिटल प्रणाली को और मजबूत बनाने पर भी जोर दिया जाएगा, ताकि योजनाओं की निगरानी और क्रियान्वयन अधिक पारदर्शी और प्रभावी हो सके। इसके लिए नए पोर्टल और दिशानिर्देशों की भी जानकारी साझा की जाएगी, जिससे पंचायतें आधुनिक तकनीक के साथ अपने विकास कार्यों को बेहतर तरीके से आगे बढ़ा सकें।
AI से नौकरी छीनना गैरकानूनी! कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले से कर्मचारियों को बड़ी राहत

नई दिल्ली। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी Artificial Intelligence के बढ़ते दखल के बीच दुनिया भर में नौकरियों पर संकट गहराता जा रहा है, लेकिन अब इस ट्रेंड के बीच एक ऐसा फैसला सामने आया है जिसने कर्मचारियों के लिए नई उम्मीद जगा दी है। चीन की एक अदालत ने साफ कर दिया है कि केवल इस आधार पर किसी कर्मचारी को नौकरी से नहीं निकाला जा सकता कि उसका काम अब AI कर सकता है। यह मामला तब सुर्खियों में आया जब ‘Zhou’ सरनेम वाले एक कर्मचारी को एक AI कंपनी ने नौकरी से निकाल दिया। Zhou 2022 में क्वालिटी एश्योरेंस सुपरवाइजर के तौर पर काम कर रहे थे, जहां उनकी जिम्मेदारी AI मॉडल के आउटपुट की जांच करना, यूजर्स के सवालों का मिलान करना और गलत कंटेंट को फिल्टर करना था। कुछ समय बाद कंपनी ने दावा किया कि उनका ज्यादातर काम AI सिस्टम संभाल सकता है और उन्हें कम सैलरी पर काम करने का प्रस्ताव दिया गया। Zhou ने इसे अस्वीकार कर दिया, जिसके बाद कंपनी ने उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया। मामला Hangzhou Intermediate People’s Court पहुंचा, जहां सुनवाई के बाद अदालत ने कर्मचारी के पक्ष में फैसला सुनाया। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि AI के बढ़ते उपयोग को नौकरी से निकाले जाने का वैध आधार नहीं माना जा सकता। साथ ही, कंपनी यह साबित करने में भी नाकाम रही कि कर्मचारी की भूमिका पूरी तरह अप्रासंगिक या असंभव हो चुकी थी। अदालत ने कम वेतन पर काम करने का प्रस्ताव भी अनुचित माना और टर्मिनेशन को गलत करार दिया। यह फैसला ऐसे समय आया है जब Meta, Google, Amazon और Microsoft जैसी बड़ी टेक कंपनियां ऑटोमेशन और AI के कारण बड़े पैमाने पर छंटनी कर चुकी हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सिर्फ इस साल के शुरुआती महीनों में ही हजारों नौकरियां AI के चलते प्रभावित हुई हैं। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला एक महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है। इससे कंपनियों को यह संदेश गया है कि वे AI का इस्तेमाल तो कर सकती हैं, लेकिन कर्मचारियों के अधिकारों की अनदेखी नहीं कर सकतीं। यानी तकनीक आगे बढ़ेगी, लेकिन इंसानी नौकरियों की कीमत पर नहीं—कम से कम कानून अब इस संतुलन को बनाए रखने की कोशिश करता नजर आ रहा है।
बिक्री में जोरदार उछाल के साथ मारुति सुजुकी की पकड़ और मजबूत, SUV सेगमेंट ने बढ़ाया ग्रोथ

नई दिल्ली। नए वित्त वर्ष की शुरुआत देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनियों में से एक मारुति सुजुकी के लिए बेहद सकारात्मक रही है। कंपनी ने अप्रैल 2026 में बिक्री के मोर्चे पर मजबूत प्रदर्शन करते हुए यह संकेत दिया है कि ऑटोमोबाइल बाजार में मांग लगातार स्थिर और मजबूत बनी हुई है। इस दौरान कंपनी की बाजार हिस्सेदारी भी बढ़कर करीब 42 प्रतिशत के स्तर तक पहुंच गई, जो उसकी मजबूत पकड़ को दर्शाती है। अप्रैल महीने में कंपनी ने घरेलू बाजार में उल्लेखनीय बिक्री दर्ज की। इस दौरान बिक्री का आंकड़ा अपने अब तक के उच्चतम स्तर के करीब पहुंच गया, जिससे यह साफ हुआ कि ग्राहकों की मांग में लगातार सुधार हो रहा है। पिछले महीनों की तुलना में इस बार बिक्री में बेहतर वृद्धि देखने को मिली, जो कंपनी के लिए एक सकारात्मक संकेत है। घरेलू बिक्री के साथ-साथ कुल बिक्री में भी कंपनी ने मजबूत प्रदर्शन किया। घरेलू और निर्यात दोनों को मिलाकर बिक्री में अच्छी बढ़त दर्ज की गई, जिससे यह स्पष्ट होता है कि कंपनी की पकड़ केवल भारत तक सीमित नहीं है बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी इसकी मांग बनी हुई है। एसयूवी सेगमेंट में कंपनी का प्रदर्शन विशेष रूप से मजबूत रहा। इस श्रेणी में बिक्री लगातार बढ़ रही है, जो बदलते उपभोक्ता रुझानों को दर्शाती है। पहले जहां छोटी कारों का दबदबा अधिक था, वहीं अब एसयूवी की ओर ग्राहकों का रुझान तेजी से बढ़ रहा है। इस बदलाव का सीधा फायदा कंपनी को मिला है। इसके अलावा हैचबैक और छोटी कारों की बिक्री में भी सुधार देखा गया है। इससे यह पता चलता है कि कंपनी हर सेगमेंट में संतुलित प्रदर्शन कर रही है और अलग-अलग ग्राहकों की जरूरतों को पूरा करने में सफल हो रही है।
आधार-एआई स्कैम का बड़ा खुलासा: मोबाइल नंबर बदलकर खाते साफ, OTP से लेकर लोन तक पर ठगों का कब्जा

नई दिल्ली। देश में साइबर ठगी का खेल अब नए और ज्यादा खतरनाक स्तर पर पहुंच चुका है, जहां आधार और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का गलत इस्तेमाल कर लोगों को निशाना बनाया जा रहा है। गुजरात के अहमदाबाद में सामने आए एक मामले ने इस खतरे को साफ कर दिया है, जिसमें ठगों ने बिना जानकारी के आधार से जुड़ा मोबाइल नंबर बदलकर पूरे डिजिटल सिस्टम पर कब्जा जमा लिया। मामला तब खुला जब एक कारोबारी को पता चला कि उनके आधार से लिंक मोबाइल नंबर बदल चुका है। जांच में सामने आया कि यह कोई साधारण गड़बड़ी नहीं बल्कि एक सुनियोजित साइबर फ्रॉड था। आरोपियों ने पहले आधार रिकॉर्ड में छेड़छाड़ कर अपना नंबर जोड़ लिया, जिससे OTP सीधे उनके पास पहुंचने लगे। इसके बाद उन्होंने बैंकिंग ऐप्स और DigiLocker जैसे संवेदनशील प्लेटफॉर्म्स तक पहुंच बना ली और KYC डिटेल्स बदलकर पूरा कंट्रोल अपने हाथ में ले लिया। इस ठगी की सबसे खतरनाक कड़ी AI का इस्तेमाल है। ठगों ने पीड़ित की फोटो से छोटे-छोटे वीडियो क्लिप तैयार किए, जो बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन सिस्टम को धोखा देने के लिए इस्तेमाल हुए। यानी अब सिर्फ OTP ही नहीं, बल्कि फेस वेरिफिकेशन भी सुरक्षित नहीं रहा। यही वजह है कि इस तरह के फ्रॉड को बेहद एडवांस और खतरनाक माना जा रहा है। ठग यहीं नहीं रुके—उन्होंने e-KYC के जरिए कई बैंक अकाउंट खोलने की कोशिश की और Jio Payments Bank से पीड़ित के नाम पर लोन तक ले लिया। जांच में यह भी सामने आया कि आधार अपडेट किट, जो आमतौर पर कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) में इस्तेमाल होती है, उसका भी दुरुपयोग किया गया। ऐसे मामलों से साफ है कि साइबर अपराधी अब टेक्नोलॉजी का बेहद चालाकी से इस्तेमाल कर रहे हैं। अगर आपके मोबाइल पर OTP, KYC या आधार अपडेट से जुड़ा कोई संदिग्ध मैसेज आए या अचानक सेवाएं बंद हो जाएं, तो तुरंत सतर्क हो जाएं। ऐसी स्थिति में 1930 साइबर हेल्पलाइन पर कॉल करें, साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें और अपने बैंक से तुरंत संपर्क कर अकाउंट सुरक्षित करें। सावधानी ही इस नए AI स्कैम से बचने का सबसे मजबूत हथियार है।
सुनील पाल ने समय रैना को कहा 'आतंकवादी' और समय ने सरेआम कर दिया रोस्ट

नई दिल्ली। टेलीविजन के सबसे लोकप्रिय कॉमेडी शो ‘द ग्रेट इंडियन कपिल शो’ का ताजा एपिसोड हंसी के ठहाकों से ज्यादा तीखी नोकझोंक और पुरानी रंजिशों के सुलझने का गवाह बना। इस बार शो के मंच पर आधुनिक दौर के ‘रोस्ट किंग’ समय रैना और पुराने दौर के दिग्गज कॉमेडियन सुनील पाल का आमना-सामना हुआ। दोनों के बीच का विवाद जगजाहिर है, लेकिन कपिल शर्मा के शो पर जब ये दोनों आमने-सामने आए, तो माहौल में तनाव और हंसी का मिला-जुला तड़का देखने को मिला। समय रैना, जो रणवीर इलाहाबादिया के साथ पहुंचे थे, सुनील पाल की सरप्राइज एंट्री देखकर हैरान रह गए। विवाद की जड़ उस समय की है जब सुनील पाल ने समय रैना के ‘इंडियाज गॉट लेटेंट’ जैसे शो और उनकी कॉमेडी शैली की कड़ी आलोचना की थी। बात इतनी बढ़ गई थी कि सुनील पाल ने सार्वजनिक तौर पर समय रैना को ‘आतंकवादी’ तक कह दिया था। शो के दौरान जब कपिल शर्मा ने इस कड़वाहट पर सवाल किया और मजाकिया लहजे में पूछा कि समय ने कब मुंह से ग्रेनेड फेंके जो उन्हें ऐसा टैग दिया गया, तो सुनील पाल अपने स्टैंड पर अडिग दिखे। उन्होंने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि समय जो कंटेंट परोसते हैं, वह समाज की समझ से परे है और जो समाज की मुख्यधारा में फिट नहीं बैठता, वह उनके लिए किसी आतंकवादी से कम नहीं है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि समय अगर मुंह से ग्रेनेड मार देते तो शायद वह सह लिया जाता, लेकिन उनकी बातें असहनीय होती हैं। समय रैना ने भी इस वार का जवाब अपने ही अंदाज में दिया। उन्होंने सुनील पाल की बातों का बुरा मानते हुए कहा कि एक कलाकार के तौर पर उन्हें तब सबसे ज्यादा दुख होता है जब इंडस्ट्री के सीनियर लोग मुश्किल समय में साथ देने के बजाय विरोध में खड़े हो जाते हैं। हालांकि, माहौल को हल्का करने के लिए समय ने सुनील पाल को जबरदस्त रोस्ट भी किया। जब सुनील पाल ने गाली-गलौज वाली कॉमेडी पर तंज कसा, तो समय ने चुटकी लेते हुए कहा कि उन्होंने सारी गालियां सुनील पाल के वीडियो के कमेंट सेक्शन से सीखी हैं। इस दौरान अर्चना पूरन सिंह ने भी बीच-बचाव करने की कोशिश की, लेकिन दोनों कॉमेडियन्स के बीच की वैचारिक जंग पूरी तरह हावी रही। कपिल शर्मा ने पूरे एपिसोड के दौरान दोनों के बीच सुलह कराने की कोशिश की। समय ने अपनी शिकायतें सामने रखीं और बताया कि कैसे विवादों के समय उन्हें अपनों के साथ की कमी खली। अंत में, यह एपिसोड न केवल मनोरंजन से भरपूर रहा, बल्कि इसने कॉमेडी के दो अलग-अलग दौर के बीच की गहरी खाई और कंटेंट को लेकर बदलते नजरिए को भी बखूबी दिखाया। सुनील पाल की पुरानी परंपरा और समय रैना की मॉडर्न ‘डार्क कॉमेडी’ का यह टकराव लंबे समय तक चर्चा का विषय बना रहेगा।
सोशल मीडिया से कमाई का नया रास्ता: Instagram-YouTube के अलावा इन ऐप्स पर भी बरस रहा पैसा

नई दिल्ली। सोशल मीडिया की दुनिया अब सिर्फ Instagram और YouTube तक सीमित नहीं रही, बल्कि नए-नए प्लेटफॉर्म्स ने कमाई के दरवाजे और ज्यादा खोल दिए हैं। आज के डिजिटल दौर में शॉर्ट वीडियो यानी रील्स सिर्फ टाइमपास नहीं बल्कि एक मजबूत इनकम सोर्स बन चुके हैं। खास बात यह है कि अब Moj, Josh, Snapchat, Facebook और Chingari जैसे प्लेटफॉर्म्स पर भी क्रिएटर्स तेजी से उभर रहे हैं और मोटी कमाई कर रहे हैं। इन ऐप्स की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां कॉम्पिटिशन अपेक्षाकृत कम है, जिससे नए यूजर्स को जल्दी ग्रो करने का मौका मिलता है और उनके वीडियो ज्यादा लोगों तक पहुंचते हैं। कमाई का तरीका भी अब सिर्फ व्यूज तक सीमित नहीं रहा। क्रिएटर्स ब्रांड प्रमोशन, स्पॉन्सरशिप, एफिलिएट मार्केटिंग और लाइव स्ट्रीमिंग के जरिए कई सोर्स से पैसा कमा रहे हैं। जैसे-जैसे फॉलोअर्स बढ़ते हैं, ब्रांड्स खुद संपर्क करने लगते हैं और प्रमोशन के लिए अच्छी रकम ऑफर करते हैं। कुछ प्लेटफॉर्म्स तो बोनस और रिवॉर्ड सिस्टम भी देते हैं, जिससे इनकम और बढ़ जाती है। अगर तेजी से ग्रो करना है तो सिर्फ ट्रेंड फॉलो करना काफी नहीं, बल्कि कंटेंट में अपनी अलग पहचान बनानी होगी। नियमित पोस्टिंग, सही टाइमिंग, ट्रेंडिंग म्यूजिक और ऑडियंस से जुड़ाव—ये सभी फैक्टर मिलकर आपके वीडियो को वायरल बना सकते हैं। साथ ही, कॉपी या भ्रामक कंटेंट से बचना जरूरी है क्योंकि अब एल्गोरिदम ओरिजिनल और क्रिएटिव कंटेंट को ज्यादा प्रमोट करता है। दरअसल, यही वजह है कि अब क्रिएटर्स सिर्फ एक प्लेटफॉर्म पर निर्भर नहीं रहना चाहते, बल्कि कई ऐप्स पर एक साथ एक्टिव रहकर अपनी कमाई और पहचान दोनों बढ़ा रहे हैं। अगर सही रणनीति और लगातार मेहनत की जाए, तो आज का डिजिटल प्लेटफॉर्म किसी भी आम यूजर को बड़ा कंटेंट क्रिएटर बना सकता है
अब लंबे नाखून भी बनेंगे स्मार्ट: नई ‘टच पॉलिश’ से फोन चलाना होगा आसान

नई दिल्ली। टेक्नोलॉजी और ब्यूटी का दिलचस्प मेल अब एक नई क्रांति की ओर बढ़ता दिख रहा है। लंबे नाखून रखने वालों के लिए स्मार्टफोन चलाना अब परेशानी नहीं रहेगा, क्योंकि वैज्ञानिकों ने एक ऐसी खास नेल पॉलिश विकसित की है, जो नाखूनों को स्टाइलस की तरह काम करने में सक्षम बना सकती है। दरअसल, टचस्क्रीन डिवाइस आमतौर पर हमारी उंगलियों के जरिए काम करते हैं, क्योंकि उंगलियों में मौजूद नमी और कंडक्टिव गुण स्क्रीन के इलेक्ट्रिक फील्ड को प्रभावित करते हैं। लेकिन नाखून कंडक्टिव नहीं होते, इसलिए उनसे स्क्रीन पर कोई प्रतिक्रिया नहीं मिलती। यही वजह है कि लंबे नाखून रखने वालों को टाइपिंग और नेविगेशन में दिक्कत होती है। इस समस्या का समाधान Centenary College of Louisiana की रिसर्च टीम ने खोजा है। वैज्ञानिकों ने एक खास एडिटिव तैयार किया है, जिसे नेल पॉलिश में मिलाकर लगाया जा सकता है। इस मिश्रण में एथेनोलामाइन और टॉरिन जैसे तत्व शामिल हैं, जो टचस्क्रीन के इलेक्ट्रिक फील्ड को प्रभावित कर सकते हैं। जब इस पॉलिश को नाखूनों पर लगाया जाता है, तो नाखून भी स्क्रीन के साथ उसी तरह इंटरैक्ट करने लगते हैं जैसे उंगलियां या स्टाइलस करते हैं। यानी अब लंबे नाखून रखने वाले लोग भी बिना किसी परेशानी के स्मार्टफोन चला सकेंगे हे मैसेज टाइप करना हो या ऐप्स इस्तेमाल करना। हालांकि, यह तकनीक अभी शुरुआती चरण में है और इसे बाजार में आने से पहले और परीक्षणों की जरूरत है। लेकिन अगर यह सफल होती है, तो यह न केवल ब्यूटी इंडस्ट्री बल्कि मोबाइल टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल के तरीके को भी बदल सकती है।
जब दिग्गज गायक ने एक नए अभिनेता के लिए अपनी फीस से किया था बड़ा समझौता..

नई दिल्ली। अस्सी के दशक में जब बॉलीवुड की गलियों में एक नया लड़का अपनी थिरकन और मासूमियत से पहचान बनाने की कोशिश कर रहा था, तब किसी ने नहीं सोचा था कि संगीत की दुनिया का सबसे बड़ा सितारा उसके लिए अपनी शर्तें बदल देगा। यह कहानी है ‘चीची’ यानी गोविंदा और किशोर कुमार के उस अनकहे रिश्ते की, जिसने फिल्म इंडस्ट्री में सफलता के नए मायने लिखे। साल 1986 में जब गोविंदा ने फिल्म ‘लव 86’ और ‘इल्जाम’ के जरिए अपनी मौजूदगी दर्ज कराई, तब वह महज एक उभरते हुए कलाकार थे। उनके पास टैलेंट तो था, लेकिन उस समय के सबसे महंगे और दिग्गज गायक किशोर कुमार की आवाज पाना उनके लिए एक सुनहरे सपने जैसा था। फिल्म ‘ड्यूटी’ गोविंदा के शुरुआती करियर की एक ऐसी फिल्म थी, जिसका बजट बेहद सीमित था। फिल्म के निर्देशक रविकांत नगैच और संगीतकार बाबला शाह इस बात को लेकर बेहद चिंतित थे कि इतने कम बजट में फिल्म को बड़े स्तर पर कैसे प्रमोट किया जाए। इसी बीच गोविंदा ने एक ऐसी मांग रख दी जिसने मेकर्स के पसीने छुड़ा दिए। गोविंदा चाहते थे कि फिल्म के दो महत्वपूर्ण गानों को केवल किशोर कुमार ही अपनी आवाज दें। गोविंदा का मानना था कि यदि किशोर दा जैसा बड़ा नाम उनके साथ जुड़ जाएगा, तो न केवल फिल्म की वैल्यू बढ़ जाएगी, बल्कि एक नए अभिनेता के तौर पर उन्हें इंडस्ट्री में वह गंभीरता मिलेगी जिसकी उन्हें तलाश थी। चुनौती यह थी कि किशोर कुमार उस दौर के सबसे व्यस्त और महंगे गायक थे। फिल्म का बजट इतना कम था कि निर्माता एक बड़े विलेन तक को कास्ट नहीं कर पा रहे थे, ऐसे में किशोर कुमार की भारी-भरकम फीस चुकाना नामुमकिन लग रहा था। जब संगीत निर्देशक बाबला शाह ने यह बात कल्याणजी-आनंदजी को बताई, तो कहानी में एक नया मोड़ आया। दरअसल, बाबला शाह दिग्गज संगीतकार जोड़ी कल्याणजी-आनंदजी के छोटे भाई थे। अपने भाई के भविष्य और गोविंदा के जुनून को देखते हुए कल्याणजी-आनंदजी ने किशोर कुमार से खास सिफारिश की। किशोर दा के संबंध इस जोड़ी से बेहद मधुर थे, इसलिए उन्होंने मित्रता और सम्मान के खातिर अपनी फीस काफी कम कर दी और गानों के लिए हामी भर दी। किशोर कुमार ने इस फिल्म के लिए ‘जिस महफिल में आता हूं’ और ‘तुम जिसे चाहो’ जैसे दो शानदार गाने गाए। इन गानों के रिलीज होते ही संगीत प्रेमियों के बीच तहलका मच गया। किशोर दा की जादुई आवाज और पर्दे पर गोविंदा के बेहतरीन डांस मूव्स ने वह जादू पैदा किया, जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। इन गानों की सफलता ने गोविंदा को रातों-रात सुपरस्टार्स की कतार में खड़ा कर दिया। इसके बाद गोविंदा और किशोर कुमार की जोड़ी ने कई यादगार नगमे दिए, लेकिन फिल्म ‘ड्यूटी’ के वे दो गाने हमेशा इस बात के गवाह रहेंगे कि कैसे एक दिग्गज कलाकार ने अपनी दरियादिली से एक उभरते हुए सितारे की तकदीर बदल दी थी।
पाकिस्तान-अफगानिस्तान फिर आमने-सामने: ‘कोई सीजफायर नहीं’, सीमा पर बढ़ा युद्ध का खतरा

नई दिल्ली। पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच एक बार फिर हालात तेजी से बिगड़ते नजर आ रहे हैं। हालिया घटनाक्रम ने साफ कर दिया है कि दोनों देशों के बीच तनाव अभी थमा नहीं है, बल्कि किसी बड़े टकराव की आशंका फिर से गहराने लगी है। इस्लामाबाद ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि अफगानिस्तान के साथ फिलहाल कोई सीजफायर लागू नहीं है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने कहा कि ईद के दौरान जो युद्धविराम हुआ था, वह सिर्फ तीन दिन का अस्थायी समझौता था, जो अब समाप्त हो चुका है। इस बयान के बाद यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या पाकिस्तान फिर से सैन्य कार्रवाई की तैयारी कर रहा है। दरअसल, फरवरी और मार्च के दौरान दोनों देशों के बीच जबरदस्त सैन्य टकराव देखने को मिला था। तालिबान और पाकिस्तानी सेना के बीच सीमा पर कई दिनों तक भीषण झड़पें हुईं। यह संघर्ष तब भड़का, जब पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के भीतर एयर स्ट्राइक की, जिसके जवाब में तालिबान ने सीमा पार हमले किए। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे को भारी नुकसान पहुंचाने का दावा किया था। हालात को देखते हुए ईद से पहले अस्थायी युद्धविराम पर सहमति बनी थी, लेकिन अब पाकिस्तान के ताजा बयान ने उस समझौते को पूरी तरह खत्म मान लिया है। इस्लामाबाद का आरोप है कि अफगान जमीन का इस्तेमाल पाकिस्तान विरोधी आतंकी संगठनों, खासकर तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान, द्वारा किया जा रहा है। पाकिस्तान का कहना है कि इन हमलों में उसके नागरिकों को भारी नुकसान हुआ है। हालांकि, अफगानिस्तान की ओर से इन आरोपों को लगातार खारिज किया जाता रहा है। वहीं भारत पर लगाए गए आरोपों को भी नई दिल्ली ने सिरे से नकार दिया है। कुल मिलाकर, पाकिस्तान के ‘नो सीजफायर’ वाले बयान ने यह संकेत दे दिया है कि सीमा पर शांति फिलहाल दूर की बात है। अगर हालात ऐसे ही बने रहे, तो दोनों देशों के बीच फिर से बड़े सैन्य टकराव की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
हॉलीवुड के मंच पर अब भारतीय फिल्मों का होगा दबदबा? अकादमी के नए नियमों ने पलटी वैश्विक सिनेमा की बाजी

नई दिल्ली। अकादमी ऑफ मोशन पिक्चर आर्ट्स एंड साइंसेज ने 2027 में आयोजित होने वाले 99वें ऑस्कर अवॉर्ड समारोह के लिए जो नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं, वे वैश्विक फिल्म उद्योग की नींव हिलाने वाले साबित हो सकते हैं। इन नियमों में सबसे क्रांतिकारी बदलाव आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई के उपयोग को लेकर किया गया है। अब फिल्म निर्माताओं को यह अनिवार्य रूप से बताना होगा कि क्या उनकी फिल्म के लेखन, विजुअल इफेक्ट्स, वॉयस क्लोनिंग या किरदारों के चेहरे बदलने में एआई तकनीक का प्रयोग हुआ है। अकादमी का यह कदम रचनात्मकता के क्षेत्र में मानवीय संवेदनशीलता को प्राथमिकता देने के उद्देश्य से उठाया गया है। संस्था का मानना है कि सिनेमा की आत्मा मानवीय कल्पनाओं में बसती है, इसलिए तकनीक का प्रयोग केवल सहायक के रूप में होना चाहिए न कि वह कलाकार की जगह ले ले। हालांकि एआई पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं है, लेकिन पारदर्शिता की यह शर्त भविष्य की फिल्म मेकिंग को अधिक जवाबदेह बनाएगी। अभिनय की श्रेणी में किया गया बदलाव उन कलाकारों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है जो एक ही साल में कई उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हैं। अब एक ही अभिनेता या अभिनेत्री को एक ही श्रेणी में एक से अधिक फिल्मों के लिए नामांकित किया जा सकता है। पहले के नियमों में यह विकल्प बेहद सीमित था, जिससे कई बार बेहतरीन काम भी जूरी की नजरों से छूट जाता था। अब यदि किसी कलाकार का काम शीर्ष पांच मतों में शामिल होता है, तो वह एक ही साल में अपनी बहुमुखी प्रतिभा के दम पर कई नामांकन हासिल कर सकता है। यह न केवल कलाकारों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ाएगा बल्कि दर्शकों को भी एक ही कलाकार के विभिन्न पहलुओं को देखने और समझने का मौका देगा। यह बदलाव वैश्विक सिनेमा में अभिनय की परिभाषा को और अधिक व्यापक बनाने वाला है। भारतीय फिल्म उद्योग के लिए सबसे महत्वपूर्ण खबर अंतरराष्ट्रीय फीचर फिल्म श्रेणी से जुड़ी है। अब तक चली आ रही उस व्यवस्था को बदल दिया गया है जिसमें प्रत्येक देश से केवल एक ही फिल्म आधिकारिक तौर पर भेजी जा सकती थी। नए नियमों के मुताबिक, अब यदि कोई फिल्म प्रमुख अंतरराष्ट्रीय फिल्म उत्सवों जैसे कान्स, वेनिस, बर्लिन, टोरंटो, सनडांस या बुसान में बड़ा पुरस्कार जीतती है, तो वह सीधे ऑस्कर की इस श्रेणी में शामिल होने के योग्य होगी। इसका सीधा मतलब यह है कि अब भारत जैसे देश से एक ही साल में एक से अधिक फिल्में ऑस्कर की मुख्य प्रतियोगिता का हिस्सा बन सकती हैं। यह उन स्वतंत्र फिल्मकारों के लिए एक सुनहरा अवसर है जिनकी फिल्में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तो सराही जाती हैं, लेकिन अक्सर स्थानीय चयन समितियों की राजनीति या सीमित कोटे की वजह से मुख्य दौड़ से बाहर रह जाती थीं। इसके अलावा डिजिटल रिलीज और थिएट्रिकल प्रदर्शन के नियमों को भी वर्तमान समय की मांग के अनुरूप ढाला गया है। अब ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर रिलीज होने वाली फिल्मों के लिए अकादमी ने नियमों में थोड़ी नरमी बरती है, ताकि बेहतरीन कंटेंट को केवल इसलिए न नकारा जाए क्योंकि वह बड़े पर्दे पर लंबे समय तक नहीं रहा। इसके साथ ही संगीत और तकनीकी श्रेणियों में भी मूल्यांकन की प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी और सटीक बनाने के लिए नए मानक तय किए गए हैं। कुल मिलाकर ये बदलाव एक नए युग की शुरुआत हैं जहां सिनेमा की सीमाओं को विस्तार दिया जा रहा है। भारतीय फिल्मकारों के पास अब अपनी कहानियों को बिना किसी बाधा के विश्व मंच पर ले जाने का एक अभूतपूर्व रास्ता खुल गया है, जिससे आने वाले वर्षों में भारतीय तिरंगे की चमक ऑस्कर के मंच पर और अधिक बढ़ने की उम्मीद है।