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MP में मौसम का बड़ा बदलाव: 21 जिलों में आंधी-बारिश और ओले का अलर्ट, 5 मई तक रहेगा असर

नई दिल्ली। मध्य प्रदेश में भीषण गर्मी के बीच मौसम ने अचानक करवट ले ली है। राजधानी भोपाल सहित प्रदेश के कई हिस्सों में आंधी, बारिश और ओलावृष्टि का दौर जारी है। मौसम विभाग ने शनिवार को 21 जिलों में तेज हवाओं और बारिश का अलर्ट जारी किया है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार इन जिलों में 30 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। साथ ही कुछ स्थानों पर ओले गिरने की भी संभावना जताई गई है। यह मौसम परिवर्तन 5 मई तक जारी रहने का अनुमान है। जिन जिलों में अलर्ट जारी किया गया है उनमें ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना, मैहर, जबलपुर, सिवनी, मंडला, बालाघाट, डिंडौरी, अनूपपुर, गुना, अशोकनगर, नीमच और मंदसौर शामिल हैं। वहीं दूसरी ओर इंदौर, उज्जैन, सीहोर, विदिशा, रायसेन, धार, खंडवा, खरगोन, रतलाम, सागर, छिंदवाड़ा और अन्य जिलों में गर्मी का असर बना रहेगा, हालांकि कुछ स्थानों पर दोपहर बाद मौसम बदल सकता है। बीते दिनों भी प्रदेश के कई हिस्सों में मौसम खराब रहा। जबलपुर और दमोह में बारिश दर्ज की गई, जबकि खंडवा में तापमान 43.1 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। कई जिलों में तापमान 40 डिग्री के आसपास बना रहा। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार यह बदलाव साइक्लोनिक सर्कुलेशन और पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने के कारण हो रहा है। इसके चलते नमी बढ़ रही है और आंधी-बारिश का दौर बना हुआ है। इस अचानक बदले मौसम का असर जनजीवन पर भी दिख रहा है। कई जगहों पर तापमान में गिरावट आई है, जिससे लोगों को गर्मी से राहत तो मिली है, लेकिन तेज हवाओं और ओलावृष्टि से सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

MP बोर्ड की बड़ी राहत: द्वितीय परीक्षा के लिए फॉर्म भरने की डेट बढ़ी, फेल के साथ पास छात्र भी दे सकेंगे एग्जाम

नई दिल्ली। मध्य प्रदेश में छात्रों के लिए बड़ी राहत की खबर है। माध्यमिक शिक्षा मंडल ने हाईस्कूल और हायर सेकेंडरी की द्वितीय परीक्षा के लिए आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ा दी है। अब विद्यार्थी 4 मई 2026 तक आवेदन कर सकते हैं। पहले यह तारीख 26 अप्रैल तय थी। यह आवेदन प्रक्रिया माध्यमिक शिक्षा मंडल मध्य प्रदेश के तहत एमपी ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से पूरी की जा रही है। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि अन्य सभी नियम पहले की तरह ही लागू रहेंगे। इस साल बोर्ड ने बड़ा बदलाव करते हुए पुरानी पूरक परीक्षा प्रणाली को समाप्त कर दिया है और उसकी जगह ‘द्वितीय परीक्षा’ प्रणाली लागू की है। इस नई व्यवस्था में न सिर्फ फेल छात्र शामिल हो सकेंगे, बल्कि पास छात्र भी अपने अंक सुधारने के लिए परीक्षा दे सकेंगे। नई व्यवस्था के अनुसार, जो छात्र किसी विषय में फेल हैं, उन्हें उस विषय की परीक्षा देनी होगी। वहीं पास छात्र भी बेहतर अंक प्राप्त करने के लिए इच्छानुसार किसी भी विषय में शामिल हो सकते हैं। इससे छात्रों को अपने परिणाम सुधारने का एक अतिरिक्त अवसर मिलेगा। परीक्षा कार्यक्रम के अनुसार, 12वीं की द्वितीय परीक्षा 7 मई से 25 मई 2026 तक और 10वीं की परीक्षा 7 मई से 19 मई 2026 के बीच आयोजित की जाएगी। सभी परीक्षाएं निर्धारित केंद्रों पर ही होंगी। बोर्ड ने यह भी साफ किया है कि मुख्य परीक्षा और द्वितीय परीक्षा दोनों में से जो भी बेहतर अंक होंगे, वही अंतिम परिणाम में मान्य किए जाएंगे। इससे छात्रों पर दबाव कम होगा और उन्हें बेहतर प्रदर्शन का अवसर मिलेगा। आवेदन करने के लिए छात्रों को परिणाम जारी होने के बाद सात दिनों के भीतर फॉर्म भरना होगा। प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन होगी और इसके लिए निर्धारित शुल्क भी जमा करना होगा। अधिक जानकारी बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है।

MP में गेहूं खरीदी पर अफसर अलर्ट मोड में: 80 लाख टन के लिए स्लॉट बुक, कई केंद्रों पर किसान परेशान

नई दिल्ली। मध्य प्रदेश में इस साल गेहूं खरीदी प्रक्रिया तेज रफ्तार से चल रही है, लेकिन तकनीकी और व्यवस्थागत दिक्कतों ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। राजधानी भोपाल सहित कई जिलों में स्लॉट बुकिंग सिस्टम पर दबाव के कारण किसानों को लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार अब तक करीब 5 लाख किसानों से 22 लाख टन से अधिक गेहूं समर्थन मूल्य पर खरीदा जा चुका है। वहीं, सरकार का दावा है कि कुल 80 लाख टन गेहूं के लिए स्लॉट बुक हो चुके हैं। हालांकि, किसानों को स्लॉट बुकिंग कराने में सर्वर स्लो होने जैसी समस्याओं से जूझना पड़ रहा है। राज्य सरकार ने इस बार गेहूं उपार्जन का लक्ष्य बढ़ाकर 100 लाख टन रखा है। पिछले वर्ष यह आंकड़ा करीब 77 लाख टन था। किसानों की सुविधा के लिए उपार्जन केंद्रों की क्षमता भी बढ़ाई गई है, जहां प्रतिदिन स्लॉट सीमा को 1000 क्विंटल से बढ़ाकर 2250 क्विंटल कर दिया गया है। इसके बावजूद कई केंद्रों पर अव्यवस्था बनी हुई है। भोपाल, इंदौर, उज्जैन, सीहोर, जबलपुर, ग्वालियर, विदिशा और रायसेन जैसे जिलों में किसान स्लॉट बुकिंग और गेहूं बेचने के लिए घंटों इंतजार कर रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हाल ही में कई उपार्जन केंद्रों का औचक निरीक्षण किया था, जिसके बाद प्रशासन अलर्ट मोड में आ गया है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि खरीदी प्रक्रिया में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सरकार ने किसानों की सुविधा के लिए कई व्यवस्थाओं का दावा किया है, जैसे कि पेयजल, छायादार स्थान, बैठने की सुविधा और शौचालय आदि। साथ ही किसानों को यह सुविधा भी दी गई है कि वे अपने जिले के किसी भी उपार्जन केंद्र पर गेहूं बेच सकते हैं। इस बार गेहूं की खरीद 2585 रुपए प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य और 40 रुपए प्रति क्विंटल बोनस सहित कुल 2625 रुपए प्रति क्विंटल की दर से की जा रही है। हालांकि, जमीनी स्तर पर तकनीकी दिक्कतों और अव्यवस्थाओं के कारण किसान अब भी सिस्टम से पूरी तरह संतुष्ट नजर नहीं आ रहे हैं।

जबलपुर क्रूज हादसा: “मम्मी ने हाथ पकड़ा था, लेकिन छूट गया” – 9 की मौत, कई परिवार बिखरे

नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के जबलपुर में बरगी डैम पर हुए दर्दनाक क्रूज हादसे ने कई परिवारों की जिंदगी हमेशा के लिए बदल दी है। तेज आंधी और करीब 74 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चली हवाओं के बीच क्रूज पलट गया, जिसमें 9 लोगों की मौत हो चुकी है और 4 लोग अब भी लापता हैं। हादसे में बचे लोगों की कहानियां दिल दहला देने वाली हैं। 13 साल की तनिष्का ने रोते हुए बताया कि हादसे के वक्त उसकी मां ने उसका हाथ पकड़ा हुआ था, लेकिन अचानक क्रूज पलटने पर वह छूट गया। “मम्मी ने हमें पकड़ा था… फिर सब कुछ खत्म हो गया,” यह कहते हुए वह सदमे में है। एक अन्य परिवार के रोशन आनंद ने बताया कि क्रूज पलटते ही वे किसी तरह अपनी पत्नी और एक बच्चे के साथ बाहर निकल पाए, लेकिन बाकी लोग बिछड़ गए। उन्होंने बताया कि कई घंटों तक उन्होंने अपने बच्चे की तलाश की और बाद में वह सुरक्षित मिला, लेकिन उस भयावह अनुभव ने उन्हें अंदर तक हिला दिया। इसी हादसे में दिल्ली से आई 13 साल की सिया ने अपनी मां, छोटे भाई और नानी को खो दिया। सिया ने बताया कि शुरुआत में सब सामान्य था, लेकिन अचानक मौसम बदल गया और क्रूज में पानी भरने लगा। लोगों में अफरा-तफरी मच गई और कई लोग लाइफ जैकेट तक नहीं पहन पाए। परिजनों का आरोप है कि क्रूज पर मौजूद स्टाफ ने समय रहते मदद नहीं की और लाइफ बोट भी देर से पहुंची। उनका कहना है कि अगर बचाव दल समय पर पहुंचता तो कई जानें बचाई जा सकती थीं। कामराज नाम के एक यात्री का परिवार भी इस हादसे की चपेट में आ गया। उनकी पत्नी और भाभी की मौत हो चुकी है, जबकि बेटा और कुछ रिश्तेदार अब भी लापता हैं। किनारे खड़े परिजन लहरों में फंसे अपने अपनों को बचाने के लिए कुछ नहीं कर सके। हादसे के बाद पूरे इलाके में मातम का माहौल है। प्रशासन द्वारा सर्च ऑपरेशन जारी है, लेकिन खराब मौसम के कारण कई बार रेस्क्यू कार्य रोकना पड़ा है। यह हादसा न सिर्फ एक पर्यटन स्थल की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है, बल्कि कई परिवारों को गहरे सदमे में छोड़ गया है, जहां अब सिर्फ यादें और दर्द बाकी है।

ग्वालियर के सरकारी अस्पताल में कमाल: जटिल सर्जरी से महिला की बच्चेदानी बचाई, फाइब्रॉइड गांठ हटाकर दी नई जिंदगी

नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के ग्वालियर में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं ने एक बार फिर अपनी क्षमता और भरोसे को साबित किया है। सिविल अस्पताल हजीरा के डॉक्टरों ने एक जटिल सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम देकर 28 वर्षीय महिला की बच्चेदानी को सुरक्षित बचा लिया। यह मामला इटावा निवासी ज्योति सिंह का है, जो लंबे समय से बच्चेदानी में बड़ी फाइब्रॉइड गांठ की समस्या से जूझ रही थीं। अत्यधिक रक्तस्राव और गंभीर पेट दर्द के कारण उनकी दिनचर्या प्रभावित हो चुकी थी। कई निजी अस्पतालों में उन्हें बच्चेदानी निकालने की सलाह दी गई थी, लेकिन आर्थिक कारणों से वे उपचार नहीं करा पा रही थीं। इसके बाद उन्होंने सिविल अस्पताल हजीरा में संपर्क किया। यहां प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. प्रशांत नायक के मार्गदर्शन में विशेषज्ञ टीम ने विस्तृत जांच के बाद ऑपरेशन की योजना बनाई। सर्जरी के दौरान डॉक्टरों ने सावधानीपूर्वक बड़ी फाइब्रॉइड गांठ को सफलतापूर्वक हटा दिया और बच्चेदानी को सुरक्षित रखा। इस जटिल ऑपरेशन को सफल बनाने में डॉ. राहुल श्रीवास्तव और डॉ. अनुपम कुलश्रेष्ठ सहित पूरी टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही। पूरी प्रक्रिया विशेषज्ञ निगरानी में पूरी तरह सुरक्षित तरीके से संपन्न की गई। डॉक्टरों की इस उपलब्धि से न केवल मरीज को नई जिंदगी मिली, बल्कि सरकारी अस्पतालों की सेवाओं पर लोगों का भरोसा भी मजबूत हुआ है। मरीज और उनके परिजनों ने अस्पताल स्टाफ और डॉक्टरों का आभार जताते हुए कहा कि यहां बेहतर इलाज और समर्पित सेवाएं मिलना सराहनीय है। अस्पताल प्रशासन ने भी आम लोगों से अपील की है कि वे आधुनिक सुविधाओं और विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम का लाभ उठाएं, क्योंकि यहां कई जटिल ऑपरेशन सफलतापूर्वक किए जा रहे हैं।

बेसन फेस पैक का कमाल: हफ्ते में 2 बार लगाएं, महीने भर में निखरेगी त्वचा

नई दिल्ली । आज के समय में हर कोई साफ, चमकदार और हेल्दी त्वचा चाहता है, लेकिन महंगे ब्यूटी प्रोडक्ट्स हर किसी के लिए संभव नहीं होते। ऐसे में घरेलू नुस्खे एक बेहतरीन विकल्प बनकर सामने आते हैं। उन्हीं में से एक है बेसन, जो सदियों से स्किन केयर में इस्तेमाल होता आ रहा है। बेसन न सिर्फ आपकी त्वचा को गहराई से साफ करता है, बल्कि उसे प्राकृतिक चमक भी देता है। अगर इसे हफ्ते में दो बार सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए, तो एक महीने के अंदर ही त्वचा में साफ फर्क नजर आने लगता है। सबसे पहले बात करते हैं बेसन फेस पैक के फायदों की। यह त्वचा से अतिरिक्त तेल (ऑयल) को हटाने में मदद करता है, जिससे पिंपल्स और एक्ने की समस्या कम होती है। इसके अलावा, यह स्किन के डेड सेल्स को हटाकर त्वचा को मुलायम और साफ बनाता है। बेसन में मौजूद प्राकृतिक गुण त्वचा की रंगत निखारने में भी मदद करते हैं। नियमित इस्तेमाल से टैनिंग कम होती है और चेहरा फ्रेश और ग्लोइंग नजर आता है। यह स्किन पोर्स को साफ करता है और ब्लैकहेड्स व व्हाइटहेड्स की समस्या को भी कम करता है। अब जानिए इसे इस्तेमाल करने का सही तरीका। बेसन फेस पैक बनाने के लिए 2 चम्मच बेसन लें और उसमें गुलाब जल या दही मिलाएं। आप चाहें तो इसमें एक चुटकी हल्दी भी मिला सकते हैं, जो एंटीसेप्टिक का काम करती है। इन सभी चीजों को अच्छे से मिलाकर एक स्मूद पेस्ट तैयार करें। अब इस पेस्ट को चेहरे और गर्दन पर समान रूप से लगाएं और 15-20 मिनट तक सूखने दें। इसके बाद हल्के हाथों से मसाज करते हुए गुनगुने पानी से धो लें। इससे त्वचा की गहराई से सफाई होती है और ब्लड सर्कुलेशन भी बेहतर होता है। इस फेस पैक को हफ्ते में दो बार इस्तेमाल करने से त्वचा में धीरे-धीरे निखार आने लगता है। एक महीने के अंदर ही आप अपनी स्किन में साफ बदलाव महसूस कर सकते हैं। हालांकि, जिन लोगों की स्किन बहुत ज्यादा सेंसिटिव है, उन्हें पहले पैच टेस्ट जरूर करना चाहिए। साथ ही, फेस पैक को ज्यादा देर तक चेहरे पर न छोड़ें, क्योंकि इससे त्वचा सूखी हो सकती है। कुल मिलाकर, बेसन फेस पैक एक सस्ता, आसान और असरदार घरेलू उपाय है, जो आपकी त्वचा को प्राकृतिक रूप से खूबसूरत बना सकता है।

राज की जमानत खारिज, शिलॉन्ग कोर्ट का बड़ा फैसला: राजा रघुवंशी हत्याकांड में अन्य आरोपियों ने भी लगाई अर्जी

नई दिल्ली। चर्चित राजा रघुवंशी हत्याकांड में एक बार फिर कानूनी हलचल तेज हो गई है। मेघालय के शिलॉन्ग की अदालत ने आरोपी राज कुशवाहा की जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। यह मामला लंबे समय से चल रही जांच और कई आरोपियों की भूमिका को लेकर सुर्खियों में बना हुआ है। जानकारी के अनुसार, कोर्ट ने जमानत याचिका को “तकनीकी आधार” पर खारिज किया है। बताया गया कि आवेदन में पिछली जमानत याचिका का उल्लेख नहीं किया गया था, जिसे अदालत ने गंभीर त्रुटि माना। हालांकि, यह फैसला मामले के गुण-दोष (मेरिट) पर आधारित नहीं था। आरोपी के वकील के अनुसार, अब सोमवार को नई जमानत याचिका दायर की जाएगी। इस मामले की मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी को हाल ही में जमानत मिल चुकी है और वह फिलहाल शिलॉन्ग के एक होटल में ठहरी हुई है। जमानत मिलने के बाद अब अन्य आरोपी विशाल चौहान, आनंद कुर्मी और आकाश राजपूत ने भी अदालत में राहत के लिए अर्जी दाखिल कर दी है। सोनम के मामले में पुलिस ने मेघालय हाईकोर्ट में जमानत को चुनौती देने की तैयारी शुरू कर दी है। पुलिस का दावा है कि वह इस हत्याकांड की मास्टरमाइंड हो सकती है और उसकी रिहाई से जांच और गवाहों पर असर पड़ सकता है। शिलॉन्ग एसपी विवेक सियेम ने कहा है कि जांच प्रक्रिया कानून के अनुसार जारी रहेगी और आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। इधर, सोनम फिलहाल जमानत के बाद होटल में रह रही है और उसने शिलॉन्ग से बाहर जाने की अनुमति के लिए भी आवेदन करने की तैयारी की है। सुरक्षा कारणों का हवाला देकर यह अर्जी दाखिल की जा सकती है। इंदौर निवासी राजा रघुवंशी की हत्या के इस मामले में विशेष जांच दल (SIT) पिछले 10 महीनों से जांच कर रहा है। अदालत ने पहले जमानत देते समय जांच में कुछ खामियों और सही धाराएं न लगाए जाने जैसी बातों की ओर इशारा किया था। साथ ही, सभी गवाहों के बयान अभी तक पूरी तरह दर्ज नहीं किए जा सके हैं। इस हाई-प्रोफाइल मामले में आने वाले दिनों में कोर्ट की सुनवाई और जांच एजेंसियों की कार्रवाई और भी महत्वपूर्ण मोड़ ले सकती है।

मेथी दाने का सही सेवन जानिए, वरना गर्मियों में बढ़ सकती हैं समस्याएं.

नई दिल्ली। भारतीय रसोई में मौजूद मसालों को केवल स्वाद बढ़ाने के लिए ही नहीं, बल्कि सेहत सुधारने के लिए भी जाना जाता है। इन्हीं में से एक महत्वपूर्ण मसाला है मेथी दाना, जिसे आयुर्वेद में एक प्रभावशाली औषधि माना गया है। इसके नियमित सेवन से पाचन तंत्र मजबूत होता है, रक्त शर्करा नियंत्रित रहती है और शरीर को कई तरह के लाभ मिलते हैं। हालांकि, गर्मियों के मौसम में इसके सेवन को लेकर विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। आयुर्वेद के अनुसार मेथी दाना उष्ण प्रकृति का होता है, यानी इसकी तासीर गर्म होती है। यह सामान्य रूप से शरीर में वात और कफ को संतुलित करने में सहायक होता है, लेकिन गर्मियों के दौरान शरीर में पित्त का स्तर पहले से ही बढ़ा रहता है। ऐसे में यदि मेथी दाने का सेवन अधिक मात्रा में किया जाए, तो यह शरीर में असंतुलन पैदा कर सकता है। कई लोगों को इसके कारण पेट में जलन, एसिडिटी, गैस और कब्ज जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि गर्मियों में मेथी दाने का सेवन पूरी तरह बंद करने की जरूरत नहीं है, बल्कि इसके सेवन के तरीके में बदलाव करना ज्यादा महत्वपूर्ण है। सबसे अच्छा तरीका यह माना जाता है कि मेथी दानों को रातभर पानी में भिगो दिया जाए और सुबह उस पानी को छानकर पी लिया जाए। इस प्रक्रिया से इसकी गर्म तासीर कुछ हद तक कम हो जाती है और शरीर को इसके लाभ भी मिलते रहते हैं। इसके अलावा मेथी दाने का पाउडर बनाकर उसे दही या छाछ के साथ लेना भी एक बेहतर विकल्प माना जाता है। छाछ और दही की ठंडी तासीर मेथी के गर्म प्रभाव को संतुलित करती है, जिससे पाचन तंत्र को राहत मिलती है और शरीर में गर्मी नहीं बढ़ती। यह तरीका खासतौर पर उन लोगों के लिए फायदेमंद है, जिन्हें पेट से जुड़ी समस्याएं रहती हैं। गर्मियों में मेथी दाने की मात्रा को सीमित रखना भी बेहद जरूरी है। अधिक मात्रा में सेवन करने से शरीर पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। साथ ही, इसे खाली पेट लेने से बचने की सलाह दी जाती है, क्योंकि इससे गैस और एसिडिटी की समस्या बढ़ सकती है। भोजन के बाद इसका सेवन करना ज्यादा सुरक्षित और लाभकारी माना जाता है। कुछ विशेष परिस्थितियों में सावधानी बरतना और भी जरूरी हो जाता है। मधुमेह के मरीज, लो ब्लड प्रेशर से पीड़ित व्यक्ति, गर्भवती महिलाएं और स्तनपान कराने वाली माताएं मेथी दाने का सेवन करने से पहले चिकित्सकीय सलाह जरूर लें। ऐसा इसलिए क्योंकि यह शरीर के शुगर लेवल और ब्लड प्रेशर को प्रभावित कर सकता है।

इंदौर में दर्दनाक हादसा: ई-रिक्शा की टक्कर से 12 साल के बच्चे की मौत, महिला ड्राइवर अस्पताल से फरार

नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के इंदौर में एक दर्दनाक सड़क हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है। हीरानगर क्षेत्र में 12 साल के बच्चे की ई-रिक्शा की टक्कर से मौत हो गई। हादसे के बाद घायल बच्चे को अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। जानकारी के अनुसार, मृतक बच्चे की पहचान करण डामोर के रूप में हुई है। वह अपने घर के पास स्थित ग्लोवर गार्डन में खेलने के लिए जा रहा था। इसी दौरान सड़क पार करते समय एक ई-रिक्शा ने उसे जोरदार टक्कर मार दी। हादसा दोपहर करीब 4 बजे हुआ। स्थानीय लोगों ने तुरंत बच्चे को उठाकर एमवाय अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। चौंकाने वाली बात यह रही कि अस्पताल में मौत की सूचना मिलते ही ई-रिक्शा चला रही महिला वहां से फरार हो गई। पुलिस के अनुसार, ई-रिक्शा (MP09-AT5741) को एक महिला चला रही थी, जिसकी तलाश की जा रही है। मामले की जांच हीरानगर थाना क्षेत्र पुलिस कर रही है। परिजनों ने बताया कि करण मूल रूप से झाबुआ का रहने वाला था और उसका परिवार मजदूरी करता है। उसके परिवार में एक छोटा भाई भी है। हादसे के बाद इलाके में शोक का माहौल है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। पुलिस ने वाहन जब्त कर चालक की तलाश शुरू कर दी है। इसी बीच शहर में एक और दुखद घटना सामने आई है। इंदौर के तेजाजी नगर इलाके में स्थित एक यूनिवर्सिटी हॉस्टल में इंजीनियरिंग के छात्र ने आत्महत्या कर ली। शुरुआती जांच में पुलिस को डिप्रेशन की आशंका जताई जा रही है, हालांकि कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। पुलिस दोनों मामलों की जांच कर रही है और संबंधित परिवारों से संपर्क किया जा रहा है।

उज्जैन में महाकाल की भस्म आरती: पंचामृत से अभिषेक, भांग-चंदन से हुआ दिव्य श्रृंगार

नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में शनिवार तड़के परंपरा अनुसार भस्म आरती का आयोजन भव्य रूप से किया गया। सुबह लगभग 4 बजे मंदिर के कपाट खोले गए और विधिवत पूजा-अर्चना की शुरुआत हुई। सबसे पहले भगवान महाकाल का जल से अभिषेक किया गया। इसके बाद पंडे-पुजारियों ने दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से बने पंचामृत से भगवान का अभिषेक किया। साथ ही “हरि ओम” का जल अर्पित कर विशेष पूजा संपन्न कराई गई। कपूर आरती के बाद भगवान महाकाल का दिव्य श्रृंगार किया गया। इस दौरान उन्हें शेषनाग का रजत मुकुट, रजत मुंडमाल, रुद्राक्ष की माला और सुगंधित फूलों की मालाएं अर्पित की गईं। भांग और चंदन से किया गया श्रृंगार श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र रहा। भस्म अर्पण के बाद भगवान को ड्रायफ्रूट का भोग लगाया गया और पुनः कपूर आरती की गई। मोगरा और गुलाब के फूलों से सजे बाबा महाकाल का अलौकिक रूप देखकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। परंपरा के अनुसार महा निर्वाणी अखाड़ा की ओर से भगवान महाकाल को भस्म अर्पित की गई। भस्म आरती में बड़ी संख्या में भक्त शामिल हुए और उन्होंने बाबा महाकाल के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। यह आरती न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि उज्जैन की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान का भी महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है।