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SBI credit card: क्रेडिट कार्ड यूजर्स सावधान! नए नियमों से बदल जाएगी आपकी पेमेंट स्ट्रैटेजी..

SBI credit card: नई दिल्ली। एसबीआई क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करने वाले लाखों ग्राहकों के लिए एक अहम बदलाव आने वाला है। 1 मई से बैंक ने कार्ड से जुड़े कुछ नियमों में संशोधन किया है, जिसका सीधा असर ग्राहकों की खर्च करने की आदत और मासिक बजट पर पड़ सकता है। ये बदलाव मुख्य रूप से लेट पेमेंट चार्ज और वार्षिक शुल्क से जुड़े हैं, जिन्हें अब पहले से अधिक सख्त बनाया गया है। नए नियमों के तहत अब छोटे बकाया पर भी अधिक ध्यान देना होगा, क्योंकि लेट पेमेंट की सीमा और शुल्क संरचना में बदलाव किया गया है। पहले जहां छोटी राशि पर कुछ राहत मिलती थी, अब यह सुविधा सीमित कर दी गई है। इसका मतलब है कि समय पर भुगतान न करने पर ग्राहकों को अतिरिक्त शुल्क का सामना करना पड़ सकता है, चाहे बकाया राशि कम ही क्यों न हो। वार्षिक शुल्क को लेकर भी नई व्यवस्था लागू की गई है। अब कार्डधारकों को तभी फीस माफी का लाभ मिलेगा जब उनका वार्षिक खर्च एक तय सीमा तक पहुंचेगा। यदि खर्च उस सीमा से कम रहता है, तो उन्हें निर्धारित वार्षिक शुल्क देना होगा। इस बदलाव का उद्देश्य कार्ड के अधिक सक्रिय उपयोग को बढ़ावा देना बताया जा रहा है। Pakistan terrorism: पाकिस्तान में ‘टारगेट किलिंग’ से दहशत: भारत विरोधी आतंकियों का एक हफ्ते में खात्मा, खुफिया नेटवर्क पर उठे सवाल लेट पेमेंट चार्ज के स्लैब में भी संशोधन किया गया है। अब छोटे बकाया पर शुल्क बढ़ा दिया गया है, जिससे देरी से भुगतान करना पहले की तुलना में अधिक महंगा हो जाएगा। हालांकि बड़े बकाया पर लागू शुल्क संरचना में ज्यादा बदलाव नहीं किया गया है, लेकिन कुल मिलाकर सिस्टम को अधिक सख्त बनाया गया है। बैंकिंग क्षेत्र में इस तरह के बदलाव समय-समय पर किए जाते हैं ताकि वित्तीय अनुशासन को मजबूत किया जा सके और डिजिटल भुगतान प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाया जा सके। क्रेडिट कार्ड का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है, ऐसे में कंपनियां अपने नियमों को उपयोग पैटर्न के अनुसार अपडेट करती रहती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इन नए नियमों के बाद कार्डधारकों को अपने खर्च और भुगतान पर अधिक ध्यान देना होगा। समय पर बिल भुगतान न करने की स्थिति में अब अतिरिक्त बोझ बढ़ सकता है। साथ ही वार्षिक खर्च की सीमा को ध्यान में रखते हुए ही कार्ड का उपयोग करना बेहतर रहेगा। आज के समय में क्रेडिट कार्ड केवल सुविधा नहीं बल्कि वित्तीय जिम्मेदारी भी बन गया है। ऐसे में इन बदलावों को समझना और उसके अनुसार अपनी आर्थिक योजना बनाना बेहद जरूरी हो गया है। थोड़ी सी लापरवाही भी अब सीधे खर्च पर असर डाल सकती है।

Pakistan terrorism: पाकिस्तान में ‘टारगेट किलिंग’ से दहशत: भारत विरोधी आतंकियों का एक हफ्ते में खात्मा, खुफिया नेटवर्क पर उठे सवाल

Pakistan terrorism: नई दिल्ली।पाकिस्तान में भारत विरोधी आतंकी संगठनों से जुड़े कमांडरों और कार्यकर्ताओं की रहस्यमयी मौतों ने सुरक्षा तंत्र में हलचल मचा दी है। पिछले एक सप्ताह के भीतर हिजबुल, लश्कर और जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े कम से कम तीन आतंकियों की हत्या या संदिग्ध परिस्थितियों में मौत सामने आई है, जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है। सबसे ताजा मामला हिजबुल आतंकी सज्जाद अहमद का है, जिसे इस्लामाबाद में अज्ञात हमलावरों ने गोली मार दी। सज्जाद लंबे समय से भारत विरोधी गतिविधियों में सक्रिय माना जाता था और उसे हिजबुल का स्थानीय कमांडर बताया जा रहा था। उसकी मौत की पुष्टि उसके पड़ोसी द्वारा की गई, जबकि आधिकारिक स्तर पर अभी तक कोई विस्तृत बयान सामने नहीं आया है। लगातार निशाने पर आतंकी नेटवर्क इसके कुछ दिन पहले जैश-ए-मोहम्मद के टॉप कमांडर सलमान अजहर की मौत की खबर आई थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक उसकी मौत एक संदिग्ध सड़क हादसे में हुई, हालांकि कई सुरक्षा विशेषज्ञ इसे सामान्य घटना मानने से इनकार कर रहे हैं। सलमान को जैश प्रमुख मसूद अजहर का करीबी सहयोगी माना जाता था और संगठन की कई अहम गतिविधियों की जिम्मेदारी उसके पास थी। इसी तरह, लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े शेख यूसुफ अफरीदी की भी खैबर पख्तूनख्वा में अज्ञात बंदूकधारियों द्वारा हत्या कर दी गई थी। इसके अलावा मार्च में मसूद अजहर के भाई ताहिर अजहर की भी रहस्यमयी परिस्थितियों में मौत हो चुकी है। 20 से अधिक मौतों का पैटर्न सूत्रों के अनुसार 2019 के बाद से पाकिस्तान में इस तरह की टारगेट किलिंग की घटनाएं लगातार बढ़ी हैं। अब तक 20 से अधिक आतंकी या तो मारे जा चुके हैं या संदिग्ध परिस्थितियों में उनकी मौत हो चुकी है। खास बात यह है कि इन मामलों में पाकिस्तान सरकार या उसकी खुफिया एजेंसियां कोई स्पष्ट जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं करतीं। सुरक्षा तंत्र पर सवाल विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाएं पाकिस्तान के भीतर चल रहे गुप्त संघर्ष और आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था की कमजोरियों की ओर इशारा करती हैं। आतंकियों के खिलाफ हो रही इन लगातार घटनाओं ने एक अनदेखे नेटवर्क की मौजूदगी पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। पाकिस्तान में लश्कर और जैश जैसे संगठनों से जुड़े हजारों आतंकी सक्रिय बताए जाते हैं, जिनका इस्तेमाल भारत के खिलाफ आतंकी गतिविधियों के लिए किया जाता रहा है। ऐसे में इनकी अचानक हो रही मौतें क्षेत्रीय सुरक्षा संतुलन पर भी असर डाल सकती हैं। रहस्य बरकरार फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि इन लगातार हो रही हत्याओं के पीछे कौन है और क्या यह किसी संगठित रणनीति का हिस्सा है या आंतरिक संघर्ष का परिणाम। पाकिस्तान सरकार की चुप्पी ने इस रहस्य को और गहरा कर दिया है।

Dhaka gang war: ढाका में गैंगवार का खूनी खेल: 127 गैंगों के बीच राजधानी बनी ‘नया ल्यारी’, नाइन स्टार गैंग सबसे ताकतवर

 Dhaka gang war: नई दिल्ली। इलाके और वर्चस्व की जंग ने राजधानी को दहला दिया। बांग्लादेश की राजधानी ढाका एक बार फिर गंभीर आपराधिक हालात से गुजर रही है। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि शहर की तुलना पाकिस्तान के बदनाम ल्यारी इलाके से की जा रही है। राजधानी में गैंगवार ने सड़कों को युद्धक्षेत्र में बदल दिया है, जहां दिनदहाड़े हत्याएं और हिंसक झड़पें आम होती जा रही हैं। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार ढाका में इस समय लगभग 127 सक्रिय गैंग मौजूद हैं, जो वसूली, ड्रग्स तस्करी, जमीन कब्जाने और अवैध कारोबार में शामिल हैं। इन गिरोहों के बीच इलाके के नियंत्रण को लेकर खूनी संघर्ष तेज हो गया है। चार बड़े गैंगों के बीच सीधा टकराव हालिया हिंसा में कम से कम चार प्रमुख गैंग एक-दूसरे के खिलाफ खुलकर लड़ाई पर उतर आए हैं। शहर के कई इलाकों में कुल्हाड़ी, चाकू और अन्य धारदार हथियारों से हत्याएं की जा रही हैं। पुलिस का कहना है कि यह पूरा संघर्ष ‘टर्फ वॉर’ यानी इलाके पर कब्जे की लड़ाई का नतीजा है। ढाका पुलिस इन सभी गैंगों को नियंत्रित करने और स्थिति को काबू में लाने की कोशिश कर रही है, लेकिन लगातार बढ़ती हिंसा ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कैसे शुरू हुई गैंगवार की आग? रिपोर्ट्स के मुताबिक, गैंगवार की शुरुआत उस समय तेज हुई जब राजनीतिक बदलाव के बाद कई पुराने अपराधियों को जमानत पर रिहा किया गया। जेल से बाहर आने के बाद इन अपराधियों ने फिर से अपने-अपने इलाकों पर कब्जा जमाना शुरू कर दिया। सबसे पहला बड़ा मामला मामून की हत्या का था, जिसे मोबाइल चोरी के विवाद में मारा गया। इसके बाद टाइटन नामक गैंगस्टर की हत्या बीच चौराहे पर कुल्हाड़ी से कर दी गई, जिससे पूरे शहर में दहशत फैल गई।जनवरी से मार्च के बीच ढाका में लगभग 107 हत्याएं दर्ज की गई हैं, जो स्थिति की गंभीरता को दर्शाती हैं। पाकिस्तान में ‘टारगेट किलिंग’ से दहशत: भारत विरोधी आतंकियों का एक हफ्ते में खात्मा, खुफिया नेटवर्क पर उठे सवाल कौन-कौन से गैंग हैं सबसे प्रभावशाली? ढाका के अपराध जगत में कई गैंग सक्रिय हैं, लेकिन कुछ गिरोह सबसे ज्यादा प्रभावशाली माने जा रहे हैं।नाइन स्टार गैंग: इसे ढाका का सबसे ताकतवर गैंग माना जाता है। इसका प्रभाव मीरपुर और आसपास के क्षेत्रों में है। डॉन गैंग: यह मोहम्मदपुर इलाके में सक्रिय है और वसूली तथा ड्रग नेटवर्क में शामिल बताया जाता है। खान गैंग: हजारीबाग और जिगतोला क्षेत्र में इसका दबदबा है। इसके अलावा पिच्ची हेलाल और एमोन जैसे अपराधी भी शहर में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं, जो छोटे-छोटे गैंगों को नियंत्रित करते हैं। अपराध विशेषज्ञों की चेतावनी अपराध विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति कानून-व्यवस्था की कमजोरी का नतीजा है। जेल से रिहाई और कमजोर निगरानी ने गैंगस्टरों को फिर से संगठित होने का मौका दिया है। यही कारण है कि शहर में अपराध तेजी से बढ़ रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार अगर जल्द सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो ढाका में हालात और भी गंभीर हो सकते हैं। सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती ढाका पुलिस और खुफिया एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती इन 127 गैंगों को नियंत्रित करना है। शहर में पहले से मौजूद आतंकवाद के खतरे के बीच यह गैंगवार सुरक्षा व्यवस्था के लिए दोहरी चुनौती बन गया है।

Riteish Deshmukh film: ‘राजा शिवाजी’ का इमोशनल जादू दर्शकों पर भारी, रितेश-अभिषेक की परफॉर्मेंस की तारीफ

Riteish Deshmukh film: नई दिल्ली। सिनेमाघरों में रिलीज हुई ऐतिहासिक फिल्म ‘राजा शिवाजी’ ने दर्शकों के बीच एक अलग ही माहौल बना दिया है। छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन और उनके संघर्षों पर आधारित इस फिल्म को बड़े पैमाने पर तैयार किया गया है, जिसमें इतिहास को भव्य और भावनात्मक अंदाज में पेश करने की कोशिश की गई है। रिलीज के बाद से ही फिल्म को लेकर दर्शकों की प्रतिक्रियाएं लगातार सामने आ रही हैं। फिल्म देखने के बाद दर्शकों ने सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों पर अपने अनुभव साझा किए हैं। अधिकतर लोगों ने इसे एक भावनात्मक और प्रभावशाली प्रस्तुति बताया है। खासकर फिल्म के दृश्य, पृष्ठभूमि संगीत और मुख्य कलाकारों के अभिनय की काफी सराहना हो रही है। कई दर्शकों का कहना है कि फिल्म कुछ जगहों पर धीमी लगती है, लेकिन इसके बावजूद यह अपनी कहानी और भावनात्मक जुड़ाव के कारण ध्यान बनाए रखती है। रितेश देशमुख और अभिषेक बच्चन की परफॉर्मेंस को लेकर भी दर्शकों की मिली-जुली लेकिन सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिली है। दोनों कलाकारों ने अपने-अपने किरदारों में गहराई लाने की कोशिश की है, जिसे दर्शकों ने महसूस किया। कई लोगों ने कहा कि फिल्म का सबसे मजबूत पक्ष इसका भावनात्मक पहलू है, जो अंत तक दर्शकों को जोड़कर रखता है। फिल्म में एक बड़ा आकर्षण सलमान खान का विशेष कैमियो है, जिसने थिएटर में जबरदस्त प्रतिक्रिया हासिल की है। उनके किरदार की एंट्री को दर्शकों ने बेहद प्रभावशाली बताया है। पारंपरिक अंदाज में उनका रूप और स्क्रीन पर उनकी उपस्थिति ने दर्शकों में उत्साह बढ़ा दिया। कई जगहों पर उनकी एंट्री पर तालियां और सीटियां गूंज उठीं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि उनका कैमियो फिल्म का एक महत्वपूर्ण आकर्षण बन गया है। ‘राजा शिवाजी’ को दर्शकों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है। हालांकि कुछ लोगों ने इसके स्क्रीनप्ले को लेकर हल्की आलोचना भी की है, लेकिन फिल्म की भव्यता और भावनात्मक प्रस्तुति ने इसे एक मजबूत ऐतिहासिक ड्रामा के रूप में स्थापित किया है। फिल्म ने रिलीज से पहले ही बॉक्स ऑफिस पर अच्छी शुरुआत कर ली थी, जिससे इसकी लोकप्रियता का अंदाजा लगाया जा सकता है। अब सभी की नजरें इसके पहले दिन और आगे के प्रदर्शन पर टिकी हैं कि यह फिल्म दर्शकों की उम्मीदों पर कितनी खरी उतरती है। ‘राजा शिवाजी’ न केवल एक ऐतिहासिक कहानी को पर्दे पर लाने का प्रयास है, बल्कि यह दर्शकों को उस युग की वीरता और भावनाओं से भी जोड़ने की कोशिश करती है।

Dawood Ibrahim link: दुबई नेटवर्क से जुड़े ड्रग माफिया का खुलासा: तुर्किए में ‘हमजा’ बनकर छिपा था सलीम डोला, भारत लाकर NCB की बड़ी कार्रवाई

Dawood Ibrahim link: नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी रैकेट पर सुरक्षा एजेंसियों की सख्त कार्रवाई, अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी नेटवर्क के खिलाफ भारत को बड़ी सफलता मिली है। तुर्किये से प्रत्यर्पित कर भारत लाए गए कुख्यात तस्कर मोहम्मद सलीम डोला को लेकर चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं। जांच में पता चला है कि वह तुर्किये में ‘हमजा’ नाम से रह रहा था और उसने पहचान छुपाने के लिए कथित तौर पर बुल्गारियाई पासपोर्ट का इस्तेमाल किया था। मुंबई की एक स्थानीय अदालत ने शुक्रवार को उसे 8 मई तक नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) की हिरासत में भेज दिया है। अधिकारियों के अनुसार, डोला की गतिविधियां लंबे समय से जांच एजेंसियों की रडार पर थीं और उसे एक बड़े अंतरराष्ट्रीय ड्रग नेटवर्क का अहम हिस्सा माना जा रहा है। फर्जी पहचान और विदेशी पासपोर्ट का खेल प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि सलीम डोला तुर्किये में ‘हमजा’ नाम से रह रहा था और उसके पास बुल्गारियाई पासपोर्ट था। हालांकि, यह अभी स्पष्ट नहीं है कि यह पासपोर्ट वैध था या फर्जी। सुरक्षा एजेंसियां इस बात की गहन जांच कर रही हैं कि उसे यह दस्तावेज कैसे और किस नेटवर्क के जरिए मिला। इस खुलासे ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फर्जी पहचान और पासपोर्ट रैकेट के एक बड़े नेटवर्क की आशंका को भी मजबूत किया है। जांच एजेंसियों का मानना है कि ऐसे दस्तावेजों का इस्तेमाल अक्सर ड्रग तस्करी और अवैध कारोबार को छिपाने के लिए किया जाता है। दाऊद इब्राहीम कनेक्शन की जांच NCB ने मुंबई अदालत को बताया कि सलीम डोला का नाम कुख्यात अपराधी दाऊद इब्राहीम के नेटवर्क से जुड़ा हुआ पाया गया है। उसे अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी रैकेट में एक प्रमुख सप्लायर के रूप में देखा जा रहा है। जांच एजेंसियों के अनुसार, डोला का नाम पहली बार तब सामने आया जब जून 2023 में दक्षिण मुंबई से मेफेड्रोन की बड़ी खेप जब्त की गई थी। इस मामले में वह मुख्य आपूर्तिकर्ता माना जा रहा है। इसके बाद से ही उसकी गतिविधियों पर नजर रखी जा रही थी। भारत वापसी के बाद बढ़ी जांच की रफ्तार तुर्किये से भारत लाए जाने के बाद NCB ने उससे पूछताछ तेज कर दी है। एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि उसका नेटवर्क किन-किन देशों तक फैला हुआ है और इसमें कौन-कौन लोग शामिल हैं। साथ ही यह भी जांच का विषय है कि वह इतने लंबे समय तक विदेश में फर्जी पहचान के साथ कैसे छिपा रहा और उसे किस अंतरराष्ट्रीय मदद नेटवर्क का सहारा मिला। अंतरराष्ट्रीय ड्रग रैकेट पर बड़ा वार इस गिरफ्तारी को भारत की सुरक्षा एजेंसियों द्वारा अंतरराष्ट्रीय ड्रग नेटवर्क पर एक बड़ा प्रहार माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों से यह स्पष्ट होता है कि ड्रग तस्करी अब सीमाओं से परे एक वैश्विक संगठित अपराध बन चुकी है। आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासों की संभावना जताई जा रही है, जिससे कई देशों में फैले नेटवर्क का पर्दाफाश हो सकता है।

Donald Trump: ट्रंप का बड़ा आर्थिक दांव: ब्रिटेन को राहत, स्कॉच व्हिस्की पर टैरिफ हटाकर रिश्तों में नई गर्माहट

Donald Trump: नई दिल्ली। अमेरिकी राजनीति और वैश्विक कूटनीति में एक अहम कदम उठाते हुए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ब्रिटेन की मशहूर स्कॉच व्हिस्की पर लगाए गए टैरिफ को हटाने का ऐलान किया है। यह फैसला तब सामने आया जब ब्रिटेन के किंग चार्ल्स तृतीय और क्वीन कैमिला ने चार दिन का अमेरिका दौरा पूरा किया। इस दौरे को सिर्फ औपचारिक मुलाकात नहीं बल्कि ऐतिहासिक और रणनीतिक रिश्तों को फिर से मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। ट्रंप ने स्पष्ट रूप से कहा कि यह निर्णय किंग चार्ल्स और क्वीन कैमिला के सम्मान में लिया गया है। साथ ही उन्होंने यह भी संकेत दिया कि इस उच्चस्तरीय मुलाकात ने अमेरिका के व्यापारिक रुख को प्रभावित किया है। स्कॉच व्हिस्की पर टैरिफ हटाने का फैसला न केवल आर्थिक दृष्टि से अहम है, बल्कि यह अमेरिका और ब्रिटेन के बीच वर्षों से चले आ रहे व्यापारिक तनाव को कम करने की दिशा में भी एक बड़ा कदम माना जा रहा है। रिश्तों में सुधार की रणनीति विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले के पीछे केवल कूटनीतिक शिष्टाचार नहीं, बल्कि एक सुनियोजित रणनीति भी है। अमेरिका और ब्रिटेन के बीच हाल के वर्षों में व्यापारिक मुद्दों और टैरिफ विवादों को लेकर खटास देखी गई थी। ऐसे में स्कॉच व्हिस्की जैसे प्रतिष्ठित ब्रिटिश उत्पाद पर राहत देना एक सकारात्मक संदेश के रूप में देखा जा रहा है। ट्रंप प्रशासन के इस कदम को तीन प्रमुख कारणों से जोड़ा जा रहा है। पहला, ब्रिटेन के साथ बिगड़ते रिश्तों को सुधारना। दूसरा, लंबे समय से चल रहे व्यापारिक दबाव को कम करना। और तीसरा, अमेरिका की आजादी के 250 साल पूरे होने जैसे ऐतिहासिक अवसर पर एक प्रतीकात्मक संदेश देना। प्रतीकात्मक कूटनीति और आर्थिक संकेत किंग चार्ल्स और क्वीन कैमिला का यह दौरा केवल औपचारिक यात्रा नहीं था, बल्कि इसे अमेरिका-ब्रिटेन संबंधों में नई ऊर्जा भरने के प्रयास के रूप में देखा गया। ट्रंप का यह निर्णय इस बात का संकेत देता है कि अंतरराष्ट्रीय रिश्तों में प्रतीकात्मक घटनाएं भी बड़ी नीतिगत बदलावों को जन्म दे सकती हैं। स्कॉच व्हिस्की ब्रिटेन के सबसे महत्वपूर्ण निर्यात उत्पादों में से एक है, और इस पर टैरिफ हटने से ब्रिटिश अर्थव्यवस्था को भी राहत मिलने की उम्मीद है। वहीं अमेरिकी बाजार में भी इसकी उपलब्धता और व्यापारिक संतुलन पर सकारात्मक असर पड़ सकता है। वैश्विक राजनीति में संदेश यह कदम वैश्विक स्तर पर भी एक संदेश देता है कि अमेरिका अपने पारंपरिक सहयोगियों के साथ रिश्तों को फिर से मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में दोनों देशों के बीच व्यापार और रक्षा सहयोग में और मजबूती देखने को मिल सकती है। इस फैसले ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि कूटनीति केवल बैठकों और समझौतों तक सीमित नहीं होती, बल्कि प्रतीकात्मक निर्णय भी वैश्विक रिश्तों की दिशा बदल सकते हैं।

GST collection: आर्थिक मजबूती का संकेत, अप्रैल 2026 में रिकॉर्ड तोड़ GST कलेक्शन ₹2.43 लाख करोड़ तक पहुंचा, बाजार और व्यापार गतिविधियों में दिखी तेजी

GST collection: नई दिल्ली। April 2026 भारत की आर्थिक कहानी में एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में दर्ज हो गया है, जब वस्तु एवं सेवा कर यानी GST कलेक्शन ने अब तक के सभी रिकॉर्ड तोड़ते हुए ₹2.43 लाख करोड़ का ऐतिहासिक आंकड़ा छू लिया। यह उपलब्धि केवल एक वित्तीय आंकड़ा नहीं बल्कि देश की आर्थिक गतिविधियों में आई मजबूती और बाजार में बढ़ती रफ्तार का संकेत भी मानी जा रही है। इस भारी-भरकम कलेक्शन के पीछे घरेलू कारोबार की स्थिर गति के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय व्यापार में आए बदलावों का भी बड़ा योगदान देखा गया है। इस बार GST संग्रह में सबसे बड़ा प्रभाव आयात क्षेत्र से देखने को मिला है, जहां वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और अन्य कमोडिटी की कीमतों में आई तेज बढ़ोतरी ने टैक्स संग्रह को अप्रत्याशित रूप से ऊपर पहुंचा दिया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा कीमतों के बढ़ने से आयात बिल महंगा हुआ, जिसका सीधा असर कर संग्रह पर पड़ा और यह हिस्सेदारी पिछले साल की तुलना में काफी अधिक दर्ज की गई। इसके साथ ही घरेलू बाजार में मांग स्थिर बनी रहने से भी कुल राजस्व को मजबूती मिली, जिससे पूरे कर ढांचे में संतुलन बना रहा। सरकारी अनुमानों के अनुसार अप्रैल 2026 में नेट GST कलेक्शन भी उल्लेखनीय रूप से बढ़कर लगभग ₹2.11 लाख करोड़ तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में बेहतर प्रदर्शन को दर्शाता है। यह वृद्धि इस बात का संकेत है कि देश में आर्थिक गतिविधियां लगातार विस्तार की ओर बढ़ रही हैं और कर अनुपालन में भी सुधार देखा जा रहा है। घरेलू लेनदेन से प्राप्त राजस्व में भी हल्की लेकिन स्थिर बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिसने कुल संग्रह को मजबूत आधार प्रदान किया। Lexus India का बड़ा कदम: अब हर नई कार पर 8 साल या 2 लाख किमी वारंटी, लग्जरी सेगमेंट में बढ़ी ग्राहक सुरक्षा इस अवधि में एक और महत्वपूर्ण पहलू GST रिफंड से जुड़ा रहा, जहां कुल रिफंड राशि बढ़कर लगभग ₹31,793 करोड़ तक पहुंच गई। यह पिछले साल की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि को दर्शाता है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि कारोबारी लेनदेन में तेजी के साथ-साथ कर समायोजन की प्रक्रिया भी सक्रिय रही है। विशेष रूप से घरेलू रिफंड में तेज उछाल देखा गया, जो लगभग आधे से अधिक की वृद्धि को दर्शाता है। हालांकि निर्यात से जुड़े रिफंड में हल्की गिरावट दर्ज की गई, जो वैश्विक व्यापार परिस्थितियों में आए बदलावों का संकेत देती है। आर्थिक विश्लेषण में यह भी देखा जा रहा है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल और भू-राजनीतिक परिस्थितियों ने आयात लागत को प्रभावित किया, जिससे अप्रत्यक्ष रूप से कर संग्रह बढ़ा। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि वैश्विक बाजार की गतिविधियां भारत की कर प्रणाली पर सीधा प्रभाव डालती हैं। कुल मिलाकर अप्रैल 2026 का GST प्रदर्शन यह दर्शाता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था एक मजबूत और स्थिर विकास पथ पर आगे बढ़ रही है, जहां घरेलू मांग और अंतरराष्ट्रीय व्यापार दोनों मिलकर राजस्व वृद्धि को गति दे रहे हैं।

education policy: पाठ्यपुस्तकों में भारतीय इतिहास की अनदेखी पर बवाल: दक्षिण अफ्रीका में उठी प्रतिनिधित्व बढ़ाने की मांग

   education policy: नई दिल्ली। दक्षिण अफ्रीका में स्कूली शिक्षा को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है, जहां भारतीय समुदाय के इतिहास और योगदान को लेकर आवाज तेज होती नजर आ रही है। एक प्रमुख हिंदू संगठन ने मांग की है कि स्कूलों की पाठ्यपुस्तकों में भारतीयों के इतिहास को अधिक प्रमुखता दी जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियां इस समुदाय के योगदान से परिचित हो सकें। दक्षिण अफ्रीकी हिंदू धर्म सभा (SAHDS) के अध्यक्ष राम महाराज ने इस मुद्दे पर अधिकारियों को एक खुला पत्र लिखा है। उन्होंने कहा कि भले ही भारतीय समुदाय देश में अल्पसंख्यक है, लेकिन उसके ऐतिहासिक और सांस्कृतिक योगदान को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उनका स्पष्ट कहना है कि वर्तमान पाठ्यक्रम में भारतीय इतिहास को जितना स्थान दिया गया है, वह पर्याप्त नहीं है और इसे कम से कम दोगुना किया जाना चाहिए। राम महाराज ने अपने पत्र में 1981 में डरबन में आयोजित पहले राष्ट्रीय हिंदू सम्मेलन का भी उल्लेख किया, जिसमें सर्वसम्मति से यह प्रस्ताव पारित हुआ था कि स्कूली पाठ्यक्रम में भारतीय इतिहास को उचित स्थान मिलना चाहिए। उनका कहना है कि यह मांग कोई नई नहीं है, बल्कि दशकों से चली आ रही है, जिसे अब गंभीरता से लागू करने का समय आ गया है। दुबई नेटवर्क से जुड़े ड्रग माफिया का खुलासा: तुर्किए में ‘हमजा’ बनकर छिपा था सलीम डोला, भारत लाकर NCB की बड़ी कार्रवाई संगठन का तर्क है कि पाठ्यपुस्तकों में भारतीय समुदाय की विरासत को सीमित करना केवल एक समुदाय के साथ अन्याय नहीं, बल्कि इतिहास के साथ भी अन्याय है। उन्होंने कहा कि दक्षिण अफ्रीका के विकास, संस्कृति और सामाजिक संरचना में भारतीयों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है, जिसे नजरअंदाज करना सच्चाई को कमजोर करना है। इस मुद्दे ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या शिक्षा व्यवस्था में सभी समुदायों को समान और उचित प्रतिनिधित्व मिल रहा है। विशेषज्ञ मानते हैं कि बहुसांस्कृतिक समाज में इतिहास का संतुलित चित्रण जरूरी है, ताकि हर वर्ग को अपनी पहचान और योगदान पर गर्व महसूस हो सके।

Samaira Kapoor 21st Year: 21 की हुईं समायरा कपूर, पिता के जाने के बाद मां करिश्मा बनीं ताकत, भाई कियान संग है अटूट रिश्ता

   Samaira Kapoor 21st Year: नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा के स्वर्ण काल से जुड़े ‘कपूर खानदान’ की अगली पीढ़ी की सदस्य समायरा कपूर ने अपने जीवन के 21वें गौरवशाली वर्ष में प्रवेश कर लिया है। अभिनेत्री करिश्मा कपूर, जिन्हें फिल्म जगत में ‘लोलो’ के नाम से जाना जाता है, अपनी बेटी के इस खास मुकाम पर बेहद भावुक और गौरवान्वित महसूस कर रही हैं। करिश्मा कपूर का निजी जीवन भले ही उतार-चढ़ाव और संघर्षों से भरा रहा हो, लेकिन उन्होंने अपनी संतान की परवरिश में कभी कोई कमी नहीं आने दी। आज 21 साल की हो चुकीं समायरा कपूर में न केवल अपनी मां की खूबसूरती झलकती है, बल्कि उनमें वह परिपक्वता भी नजर आती है जो उन्होंने जीवन के कठिन अनुभवों से हासिल की है। समायरा का जीवन बचपन से ही मीडिया की सुर्खियों और पारिवारिक विवादों के बीच बीता है। साल 2003 में करिश्मा कपूर के विवाह के बाद शुरू हुआ यह सफर साल 2014 में एक चर्चित तलाक पर जाकर थमा था। इस अलगाव ने न केवल करिश्मा बल्कि उनके दोनों बच्चों के जीवन पर भी गहरा प्रभाव डाला। हालांकि, समायरा ने अपनी मां के साथ मिलकर हर मुश्किल का डटकर सामना किया। तलाक के बाद भी समायरा ने अपने पिता के साथ एक भावनात्मक जुड़ाव बनाए रखा था, लेकिन साल 2025 में पिता के आकस्मिक निधन ने उन्हें झकझोर कर रख दिया। उस दुखद घड़ी में समायरा का अपने पिता के अंतिम संस्कार में शामिल होना और उनके चेहरे पर छाई मायूसी ने हर किसी को भावुक कर दिया था। BHIND POLICE TRNASFER: भिंड में पुलिस विभाग में फेरबदल, तीन थाना प्रभारियों के तबादले हालिया समय में समायरा के लिए एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है। बच्चों के उज्ज्वल भविष्य और उनके हितों को ध्यान में रखते हुए अदालत द्वारा दिया गया एक महत्वपूर्ण फैसला परिवार के लिए सुकून लेकर आया है। यह कानूनी मोड़ न केवल समायरा बल्कि उनके छोटे भाई कियान राज कपूर के लिए भी भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित करता है। समायरा और उनके भाई कियान के बीच का रिश्ता भी बेहद खास है; अक्सर दोनों को एक-दूसरे का सहारा बनते और मां करिश्मा के साथ क्वालिटी टाइम बिताते देखा जाता है। करिश्मा ने एक सशक्त सिंगल मदर के रूप में यह साबित किया है कि सही दिशा और प्यार मिले तो बच्चे हर चुनौती को पार कर सकते हैं। आज 21 वर्ष की समायरा कपूर एक आत्मविश्वास से भरी युवा महिला के रूप में पहचानी जा रही हैं। भले ही वह खुद को चकाचौंध भरी फिल्मी पार्टियों से दूर रखना पसंद करती हों, लेकिन उनकी सादगी और शालीनता ने प्रशंसकों के बीच उनकी एक अलग छवि बनाई है। कपूर खानदान की महिलाओं ने हमेशा अपनी शर्तों पर जिंदगी जीने की मिसाल पेश की है और समायरा भी उसी स्वावलंबी राह पर बढ़ती दिख रही हैं। उनके शुभचिंतक न केवल उनके जन्मदिन की खुशियां मना रहे हैं, बल्कि इस बात की भी सराहना कर रहे हैं कि कैसे एक मां और बेटी की जोड़ी ने हर कठिन दौर को एक-दूसरे की ताकत बनकर पार किया है।

India-Bangladesh relations: सरमा के बयान से भड़का कूटनीतिक विवाद: बांग्लादेश ने भारत के उच्चायुक्त को तलब कर जताया कड़ा विरोध

India-Bangladesh relations: नई दिल्ली। भारत और बांग्लादेश के बीच कूटनीतिक रिश्तों में एक नया तनाव उभरकर सामने आया है, जब असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के बयान पर ढाका ने कड़ी आपत्ति जताई। गुरुवार को बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने भारतीय कार्यवाहक उच्चायुक्त पवन बाधे को तलब कर औपचारिक विरोध दर्ज कराया और इस तरह की टिप्पणियों को ‘काउंटरप्रोडक्टिव’ बताया। विवाद की जड़ 26 अप्रैल को दिया गया वह बयान है, जिसमें हिमंत बिस्वा सरमा ने दावा किया था कि असम में पकड़े गए 20 विदेशी नागरिकों को ‘पुश बैक’ कर बांग्लादेश भेज दिया गया। इस बयान के सामने आते ही बांग्लादेश की ओर से तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली। ढाका ने स्पष्ट किया कि ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर सार्वजनिक बयानबाजी से दोनों देशों के बीच भरोसे पर असर पड़ सकता है और द्विपक्षीय संबंधों में अनावश्यक तनाव पैदा होता है। बांग्लादेश के अधिकारियों ने भारतीय प्रतिनिधि के समक्ष यह भी कहा कि सीमा, प्रवासन और नागरिकता जैसे विषय बेहद संवेदनशील होते हैं, जिन पर दोनों देशों के बीच पहले से स्थापित कूटनीतिक तंत्र के जरिए ही बातचीत होनी चाहिए। सार्वजनिक मंचों पर दिए गए बयान न केवल गलतफहमी बढ़ाते हैं, बल्कि सहयोग की प्रक्रिया को भी प्रभावित कर सकते हैं। दुबई नेटवर्क से जुड़े ड्रग माफिया का खुलासा: तुर्किए में ‘हमजा’ बनकर छिपा था सलीम डोला, भारत लाकर NCB की बड़ी कार्रवाई यह घटनाक्रम ऐसे समय पर सामने आया है, जब भारत और बांग्लादेश के रिश्ते ऐतिहासिक रूप से मजबूत होने के बावजूद कुछ मुद्दों को लेकर संवेदनशील दौर से गुजर रहे हैं। 1971 के मुक्ति संग्राम से लेकर अब तक दोनों देशों ने सुरक्षा, व्यापार और कनेक्टिविटी जैसे क्षेत्रों में करीबी सहयोग बनाए रखा है। हालांकि अवैध प्रवासन, सीमा प्रबंधन और राजनीतिक बयानबाजी जैसे विषय समय-समय पर तनाव की वजह बनते रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि हालिया विवाद भले ही बयानबाजी तक सीमित हो, लेकिन इसका असर कूटनीतिक संवाद पर पड़ सकता है। ऐसे में दोनों देशों के लिए जरूरी है कि वे संवाद और संयम के जरिए इस तरह के मुद्दों को सुलझाएं, ताकि लंबे समय से बने भरोसे और साझेदारी को नुकसान न पहुंचे। फिलहाल, यह मामला इस बात का संकेत है कि पड़ोसी देशों के बीच रिश्तों को मजबूत बनाए रखने के लिए केवल नीतियां ही नहीं, बल्कि नेताओं की भाषा और सार्वजनिक बयान भी उतने ही अहम होते हैं