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बेटे का शव देखते ही थम गई मां की सांसें, इंदौर में कुछ ही मिनटों के अंतराल में मां-बेटे की मौत

मध्यप्रदेश । इंदौर के भंडारी मिल मार्ग स्थित श्रीनाथ विहार अपार्टमेंट में घटित एक मार्मिक घटना ने पूरे शहर को भावुक कर दिया। 55 वर्षीय राजुल शर्मा के निधन के कुछ ही मिनट बाद उनकी 75 वर्षीय मां किरण शर्मा ने भी दुनिया को अलविदा कह दिया। सोमवार को जब मां और बेटे की अर्थियां एक साथ घर से निकलीं तो वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं। परिवार, रिश्तेदार और पड़ोसी इस दर्दनाक दृश्य को देखकर खुद को संभाल नहीं सके। परिजनों के अनुसार, राजुल शर्मा पेशे से कंप्यूटर डिजाइनर थे। रविवार को उनकी अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद मृत्यु हो गई। परिवार इस दुखद घटना से उबर भी नहीं पाया था कि कुछ ही देर बाद एक और बड़ा सदमा सामने आ गया। परिवार के सदस्य राजेश शर्मा ने बताया कि राजुल और उनकी मां किरण शर्मा दोनों की पहले बायपास सर्जरी हो चुकी थी। परिवार के कई सदस्यों का भी हृदय संबंधी उपचार हो चुका है। उन्होंने कहा कि परिवार पर एक साथ आए इस दुख को शब्दों में बयां करना मुश्किल है। जानकारी के अनुसार, राजुल शर्मा के निधन के समय उनकी मां किरण शर्मा अपनी बेटी के घर एरोड्रम रोड क्षेत्र में थीं। परिजन उन्हें अचानक सदमा न लगे, इसलिए उन्हें पूरी जानकारी नहीं दी गई थी। बाद में उन्हें धीरे-धीरे घर लाया गया। लेकिन जैसे ही वे फ्लैट में पहुंचीं और बेटे का पार्थिव शरीर देखा, उनका धैर्य टूट गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, किरण शर्मा बेटे के शव के पास पहुंचीं, उसके सिर पर हाथ फेरा और फूट-फूटकर रोने लगीं। इसी दौरान उनकी तबीयत बिगड़ गई और वे अचानक बेसुध होकर गिर पड़ीं। परिजन तुरंत उन्हें अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। कुछ ही घंटों के भीतर मां और बेटे के निधन की खबर पूरे परिवार और परिचितों के लिए गहरे सदमे का कारण बन गई। सोमवार सुबह से ही रिश्तेदार और परिचित अंतिम दर्शन के लिए घर पहुंचने लगे। जब दोनों की अर्थियां एक साथ सजाई गईं और अंतिम यात्रा निकली तो माहौल बेहद भावुक हो गया। हर किसी की जुबान पर यही सवाल था कि मां और बेटे का रिश्ता कितना गहरा रहा होगा कि बेटे के जाने का दुख मां सहन ही नहीं कर सकीं। गहरे शोक के इस माहौल के बीच परिवार ने एक ऐसा निर्णय लिया, जिसने इस दुखद घटना को मानवता के संदेश में बदल दिया। परिजनों ने मां और बेटे दोनों का नेत्रदान करने का फैसला किया। सामाजिक संस्था मुस्कान ग्रुप के सहयोग से नेत्रदान की प्रक्रिया पूरी की गई। परिवार का मानना है कि भले ही दोनों अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनकी आंखों की रोशनी चार जरूरतमंद लोगों के जीवन को नया उजाला देगी। इसी क्रम में शहर में अन्य परिवारों ने भी नेत्रदान की प्रेरणादायक पहल की है। धनवंती देवी लालवानी, सरदारनी नरेंद्र कौर और नंदलाल पुरणानी के निधन के बाद उनके परिजनों ने भी नेत्रदान कर समाज के सामने एक सकारात्मक उदाहरण प्रस्तुत किया है। राजुल और किरण शर्मा की यह कहानी जहां एक ओर मां-बेटे के अटूट प्रेम को दर्शाती है, वहीं दूसरी ओर नेत्रदान के माध्यम से मानवता और सेवा का संदेश भी देती है।

क्रिप्टो और फॉरेक्स ट्रेडिंग के नाम पर करोड़ों की ठगी, इंदौर से चला नेटवर्क चंडीगढ़, बेंगलुरु और दिल्ली तक फैला

मध्यप्रदेश । इंदौर में क्रिप्टो करेंसी और फॉरेक्स ट्रेडिंग के नाम पर लोगों को निवेश का झांसा देकर करोड़ों रुपए की कथित ठगी करने वाले एक बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है। क्राइम ब्रांच की जांच में सामने आया है कि यह नेटवर्क केवल इंदौर तक सीमित नहीं था, बल्कि इसका संचालन चंडीगढ़, बेंगलुरु, दिल्ली और अन्य शहरों तक फैला हुआ था। आरोप है कि गिरोह लोगों को कम समय में भारी मुनाफे और रकम दोगुनी होने का लालच देकर निवेश करवाता था, लेकिन बाद में न तो मुनाफा देता था और न ही मूल राशि लौटाता था। पुलिस के अनुसार, मामले में हरप्रीत कौर उर्फ मोना, जसवंत सिंह उर्फ जस्सी, अनिरुद्ध दलवी, मुकेश तायडे और जोसेफ सहित अन्य लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी का प्रकरण दर्ज किया गया है। फिलहाल हरप्रीत कौर को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि अन्य आरोपी फरार बताए जा रहे हैं। क्राइम ब्रांच को जिया वाधवानी, गुरजीत, अभिषेक, जसरथ, अमरजीत, हन्नी, साहिल, रोहित, पंकज, गुरमीत कौर समेत कई लोगों ने शिकायत दी थी। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि आरोपियों ने उन्हें क्रिप्टो करेंसी और फॉरेक्स ट्रेडिंग में निवेश करने पर शुरुआत में 2 प्रतिशत तक रिटर्न और 100 दिनों में रकम दोगुनी होने का दावा किया था। इसी भरोसे में लोगों ने लाखों रुपए निवेश किए। जांच के दौरान पुलिस को जानकारी मिली कि आरोपियों ने मिलकर “ए स्क्वेयर वर्ल्ड ग्लोबल कंसल्टेंसी” नाम से एक कथित यूएस बेस्ड कंपनी का प्रचार किया था। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि कंपनी के नाम और विदेशी कारोबार के दावों का इस्तेमाल निवेशकों का विश्वास जीतने के लिए किया गया। पुलिस के अनुसार, निवेशकों से प्राप्त राशि हरप्रीत कौर और कंपनी से जुड़े बैंक खातों में जमा करवाई गई थी। प्रारंभिक जांच में करीब ढाई करोड़ रुपए के लेन-देन की जानकारी सामने आई है। पीड़िता जिया वाधवानी ने पुलिस को बताया कि उसकी पहचान हरप्रीत कौर से एक किटी पार्टी के दौरान हुई थी। वहीं से उसे निवेश योजना की जानकारी दी गई। बाद में उसे भंवरकुआ क्षेत्र स्थित एक होटल में आयोजित बैठक में ले जाया गया, जहां अन्य आरोपियों ने कथित निवेश योजना प्रस्तुत की। इसके बाद शहर के एक बड़े होटल में सेमिनार आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों को बुलाया गया। शिकायतकर्ताओं के मुताबिक, सेमिनार में महंगे उपहार, आकर्षक प्रस्तुतियां और बड़े मुनाफे के वादों के जरिए लोगों को निवेश के लिए प्रेरित किया गया। पीड़ितों का आरोप है कि मार्च 2025 के बाद किसी भी निवेशक को भुगतान नहीं किया गया। जब लोगों ने अपने पैसे वापस मांगने शुरू किए तो आरोपियों ने वेबसाइट अपडेट, तकनीकी समस्या और भुगतान प्रक्रिया में देरी जैसे कारण बताकर समय टालना शुरू कर दिया। बाद में ऑनलाइन बैठकों के माध्यम से भी निवेशकों को आश्वासन दिया गया, लेकिन भुगतान नहीं हुआ। शिकायतकर्ताओं के अनुसार, लगातार दबाव बढ़ने पर आरोपियों ने कथित तौर पर यह कह दिया कि कंपनी का कारोबार बंद हो चुका है और अब किसी को कोई पैसा नहीं मिलेगा। इसके बाद कई आरोपियों ने फोन उठाना और संपर्क करना भी बंद कर दिया। क्राइम ब्रांच का कहना है कि मामले की जांच जारी है। बैंक खातों, डिजिटल ट्रांजेक्शन, निवेश रिकॉर्ड और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है। पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस कथित निवेश योजना से कुल कितने लोग प्रभावित हुए और ठगी की वास्तविक राशि कितनी है।

भारत-फ्रांस रणनीतिक साझेदारी का नया अध्याय, सह-नवाचार और तकनीकी सहयोग से वैश्विक समाधान विकसित करने पर जोर

नई दिल्ली । भारत और फ्रांस के बीच रणनीतिक संबंध लगातार नए आयाम प्राप्त कर रहे हैं। दोनों देशों के बीच बढ़ता सहयोग अब पारंपरिक क्षेत्रों से आगे बढ़कर नवाचार, अनुसंधान, उभरती तकनीकों और औद्योगिक विकास जैसे भविष्य-केंद्रित क्षेत्रों तक पहुंच चुका है। इसी क्रम में भारत ने स्पष्ट किया है कि विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में फ्रांस के साथ साझेदारी नई संभावनाओं और अवसरों का मार्ग प्रशस्त कर रही है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने फ्रांस के नीस शहर में आयोजित विभिन्न बैठकों और संवाद कार्यक्रमों के बाद कहा कि भारत और फ्रांस के बीच सहयोग केवल आर्थिक या व्यापारिक संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सह-नवाचार और तकनीकी विकास के नए मॉडल तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उनका कहना था कि दोनों देशों की साझेदारी ऐसी तकनीकों और समाधानों को जन्म दे सकती है, जिनका लाभ वैश्विक स्तर पर विभिन्न समाजों और अर्थव्यवस्थाओं को मिल सके। नीस में आयोजित एक विशेष संवाद कार्यक्रम के दौरान सरकार, उद्योग, निवेश और नवाचार क्षेत्र से जुड़े प्रमुख प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस अवसर पर व्यापार, प्रौद्योगिकी, अनुसंधान और उभरते औद्योगिक क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने माना कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों में नवाचार आधारित साझेदारियां आर्थिक विकास और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को मजबूत करने का महत्वपूर्ण माध्यम बन रही हैं। भारत का ‘विकसित भारत 2047’ विजन और फ्रांस का ‘फ्रांस 2030’ मिशन दोनों देशों को साझा लक्ष्यों की दिशा में एक मजबूत आधार प्रदान कर रहे हैं। इन पहलों का उद्देश्य भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए नई तकनीकों, अनुसंधान और औद्योगिक क्षमताओं का विकास करना है। यही कारण है कि दोनों देश तकनीकी सहयोग को रणनीतिक प्राथमिकता के रूप में देख रहे हैं। इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए भारत और फ्रांस ने इंडिया-फ्रांस इनोवेशन रोडमैप 2030 को अपनाने का निर्णय लिया है। यह रोडमैप महत्वपूर्ण और उभरती तकनीकों के सह-विकास, अनुसंधान सहयोग, शिक्षा क्षेत्र में गतिशीलता और भरोसेमंद तकनीकी पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए दिशा-निर्देशक दस्तावेज के रूप में कार्य करेगा। इसके माध्यम से दोनों देश साझा विकास, पर्यावरणीय स्थिरता और सामाजिक प्रगति से जुड़े लक्ष्यों को भी आगे बढ़ाना चाहते हैं। दोनों देशों का मानना है कि नवाचार आर्थिक मजबूती, सतत विकास, रणनीतिक स्वायत्तता और तकनीकी संप्रभुता का महत्वपूर्ण आधार है। ऐसे समय में जब दुनिया कृत्रिम बुद्धिमत्ता, उन्नत विनिर्माण, हरित प्रौद्योगिकी और डिजिटल परिवर्तन जैसे क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ रही है, भारत और फ्रांस इन क्षेत्रों में संयुक्त प्रयासों को और मजबूत करने की दिशा में काम कर रहे हैं। इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फ्रांस यात्रा के दौरान भी दोनों देशों के बीच कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने रक्षा, अंतरिक्ष, सुरक्षा, आतंकवाद-रोधी सहयोग, प्रौद्योगिकी और नवाचार जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और गहरा करने पर सहमति व्यक्त की। वार्ताओं में भविष्य की चुनौतियों और अवसरों को ध्यान में रखते हुए दीर्घकालिक सहयोग के नए ढांचे पर भी विचार किया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और फ्रांस के बीच बढ़ती तकनीकी एवं नवाचार साझेदारी न केवल द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करेगी, बल्कि वैश्विक स्तर पर नई तकनीकों के विकास और साझा चुनौतियों के समाधान में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में यह सहयोग आने वाले वर्षों में और अधिक प्रभावशाली रूप में सामने आने की संभावना रखता है।

तेल बाजार में लौटी स्थिरता, अमेरिका-ईरान समझौते के संकेत से कच्चा तेल टूटा, एशियाई और भारतीय शेयर बाजारों में जोरदार उछाल

नई दिल्ली । अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती कूटनीतिक सहमति तथा होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की घोषणा ने वैश्विक ऊर्जा बाजारों को बड़ी राहत दी है। इस घटनाक्रम के बाद सोमवार को अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था और वित्तीय बाजारों में सकारात्मक संकेत देखने को मिले। विशेषज्ञों का मानना है कि तेल आपूर्ति को लेकर बनी अनिश्चितता कम होने से आने वाले समय में ऊर्जा बाजारों में स्थिरता बढ़ सकती है। सप्ताह के पहले कारोबारी दिन अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार दबाव में दिखाई दिए। ब्रेंट क्रूड की कीमतों में करीब पांच प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई और यह 83 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया। वहीं अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) क्रूड भी तेज गिरावट के साथ 80 डॉलर प्रति बैरल के स्तर के करीब कारोबार करता दिखाई दिया। बाजार विश्लेषकों का कहना है कि तेल की कीमतों में यह गिरावट मुख्य रूप से भू-राजनीतिक तनाव कम होने की उम्मीदों से प्रेरित रही। हाल के दिनों में पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंकाओं के कारण कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखा गया था। यह समुद्री मार्ग वैश्विक ऊर्जा व्यापार की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि दुनिया के बड़े हिस्से का तेल इसी रास्ते से विभिन्न देशों तक पहुंचता है। ऐसे में इसके संचालन को लेकर किसी भी प्रकार की अनिश्चितता का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर पड़ता है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के साथ समझौते की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति का संकेत दिए जाने के बाद निवेशकों के बीच भरोसा बढ़ा। इसके साथ ही होर्मुज जलडमरूमध्य को बिना किसी अतिरिक्त प्रतिबंध के खोलने की घोषणा ने ऊर्जा आपूर्ति को लेकर बनी चिंताओं को काफी हद तक कम कर दिया। बाजार ने इस खबर को सकारात्मक रूप से लिया और तेल की कीमतों में तत्काल प्रतिक्रिया देखने को मिली। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच प्रस्तावित समझौता औपचारिक रूप लेता है तो वैश्विक तेल आपूर्ति और अधिक सुचारु हो सकती है। इससे न केवल ऊर्जा बाजारों को राहत मिलेगी बल्कि कई देशों में महंगाई के दबाव को भी कम करने में मदद मिल सकती है। तेल की कीमतें कम होने से परिवहन, विनिर्माण और अन्य ऊर्जा-आधारित क्षेत्रों की लागत पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ने की संभावना है। इस घटनाक्रम का असर केवल तेल बाजार तक सीमित नहीं रहा। एशिया के प्रमुख शेयर बाजारों में भी उत्साह का माहौल दिखाई दिया। जापान, हांगकांग, दक्षिण कोरिया और इंडोनेशिया सहित कई बाजारों में निवेशकों ने खरीदारी बढ़ाई, जिससे प्रमुख सूचकांकों में मजबूत बढ़त दर्ज की गई। निवेशकों को उम्मीद है कि वैश्विक आर्थिक गतिविधियों पर दबाव कम होगा और व्यापारिक माहौल अधिक अनुकूल बनेगा। भारतीय शेयर बाजारों में भी इसका सकारात्मक असर देखने को मिला। सप्ताह की शुरुआत में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों मजबूती के साथ खुले। विश्लेषकों के अनुसार भारत जैसे तेल आयातक देशों के लिए कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट विशेष रूप से लाभकारी होती है क्योंकि इससे आयात लागत कम होती है और महंगाई पर नियंत्रण रखने में मदद मिलती है। वैश्विक स्तर पर अब निवेशकों और नीति निर्माताओं की नजर अमेरिका और ईरान के बीच संभावित औपचारिक समझौते पर टिकी हुई है। यदि वार्ताएं सफल रहती हैं तो ऊर्जा बाजारों में स्थिरता और वैश्विक आर्थिक विश्वास को अतिरिक्त मजबूती मिलने की संभावना जताई जा रही है।

इंस्टाग्राम से बोतल मंगाना पड़ा भारी, रिफंड के झांसे में फंसी छात्रा से 2.99 लाख की साइबर ठगी

मध्यप्रदेश । इंदौर के खजराना क्षेत्र में रहने वाली एक कॉलेज छात्रा ऑनलाइन ठगी और साइबर ब्लैकमेलिंग का शिकार हो गई। आरोप है कि इंस्टाग्राम के माध्यम से किए गए एक ऑनलाइन ऑर्डर के बाद ठगों ने पहले रिफंड का झांसा देकर छात्रा को अपने जाल में फंसाया और फिर कथित अश्लील तस्वीरें वायरल करने की धमकी देकर उससे पैसे वसूले। इसके बाद उसके बैंक खाते से करीब 2 लाख 99 हजार रुपए की राशि भी निकाल ली गई। पुलिस के अनुसार, छात्रा वरीदा ने इस मामले की शिकायत खजराना थाने और साइबर क्राइम शाखा में दर्ज कराई है। शिकायत में बताया गया है कि उसकी बहन अलीना ने 11 मई को इंस्टाग्राम पर संचालित एक पेज “सॉफ क्यूक इंडिया” से पानी की दो बोतलें ऑर्डर की थीं। इसके लिए ऑनलाइन भुगतान भी किया गया था। शिकायत के मुताबिक, ऑर्डर करने के कुछ समय बाद एक व्यक्ति का फोन आया। उसने स्वयं को कंपनी का प्रतिनिधि बताते हुए कहा कि ऑर्डर किसी कारणवश रद्द हो गया है और भुगतान की गई राशि वापस की जाएगी। इसके लिए उसने एक लिंक भेजी और रिफंड प्रक्रिया पूरी करने के लिए उस पर क्लिक करने को कहा। पुलिस को आशंका है कि इसी दौरान ठगों ने छात्रा की बैंकिंग और व्यक्तिगत जानकारी हासिल कर ली। मामला यहीं नहीं रुका। छात्रा का आरोप है कि 20 मई को उसे एक अन्य कॉल प्राप्त हुआ। कॉल करने वाले व्यक्ति ने दावा किया कि उसके पास छात्रा की अश्लील तस्वीरें हैं और यदि उसने पैसे नहीं दिए तो वे तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल कर दी जाएंगी। शिकायत के अनुसार, आरोपी ने 30 हजार रुपए की मांग की। बदनामी के डर से छात्रा ने बताए गए यूपीआई खाते में राशि ट्रांसफर कर दी। घटना का खुलासा तब हुआ जब 9 जून को छात्रा कॉलेज फीस जमा करने पहुंची। फीस भुगतान के दौरान उसे पता चला कि उसके बैंक खाते में पर्याप्त राशि नहीं बची है। इसके बाद जब उसने बैंक से संपर्क कर खाते की जानकारी ली तो सामने आया कि खाते से अलग-अलग ट्रांजेक्शन के माध्यम से करीब 2.99 लाख रुपए निकाले जा चुके हैं। पुलिस का कहना है कि प्रारंभिक जांच में यह मामला साइबर फ्रॉड और ऑनलाइन ब्लैकमेलिंग से जुड़ा प्रतीत हो रहा है। जिन बैंक खातों और यूपीआई आईडी में पैसे ट्रांसफर किए गए हैं, उनकी जानकारी जुटाई जा रही है। साइबर विशेषज्ञ भी ट्रांजेक्शन की तकनीकी जांच में जुटे हैं। पुलिस अधिकारियों ने नागरिकों से अपील की है कि सोशल मीडिया पर किसी भी अनजान विक्रेता से खरीदारी करते समय सावधानी बरतें। किसी भी रिफंड लिंक, संदिग्ध कॉल या ओटीपी साझा करने से बचें। यदि कोई व्यक्ति फोटो या वीडियो वायरल करने की धमकी देकर पैसे मांगता है तो तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 या निकटतम पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराएं।

भारत की विकास यात्रा मजबूत लेकिन चुनौतियां बरकरार, निर्मला सीतारमण बोलीं- सतत प्रगति के लिए सुधार, नवाचार और तैयारी जरूरी

नई दिल्ली । भारत की अर्थव्यवस्था वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच मजबूती के साथ आगे बढ़ रही है, लेकिन दीर्घकालिक और सतत विकास सुनिश्चित करने के लिए निरंतर प्रयासों की आवश्यकता बनी हुई है। केंद्रीय वित्त एवं कॉर्पोरेट मामलों की मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को कहा कि देश ने आर्थिक मोर्चे पर उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं, फिर भी विकास की इस गति को स्थायी बनाए रखने के लिए आत्मसंतोष की बजाय निरंतर सुधार, नवाचार और संस्थागत मजबूती पर ध्यान देना होगा। एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि किसी भी बड़ी और जटिल अर्थव्यवस्था के लिए केवल विकास दर हासिल करना पर्याप्त नहीं होता। वास्तविक सफलता तब मानी जाती है जब आर्थिक प्रगति का लाभ समाज के सभी वर्गों तक पहुंचे और विकास समावेशी तथा टिकाऊ स्वरूप ग्रहण करे। उन्होंने कहा कि मजबूत संस्थानों, प्रभावी नीतियों और सक्षम प्रशासनिक व्यवस्थाओं के बिना दीर्घकालिक आर्थिक विकास को बनाए रखना कठिन हो सकता है। सीतारमण ने कहा कि भारत वर्तमान में कई आर्थिक संकेतकों पर बेहतर प्रदर्शन कर रहा है, लेकिन यह स्थिति स्थायी रूप से सुनिश्चित नहीं मानी जा सकती। उनके अनुसार समय-समय पर नीतियों का मूल्यांकन करना और उन क्षेत्रों की पहचान करना आवश्यक है जहां सुधार की गुंजाइश अभी भी मौजूद है। उन्होंने कहा कि बदलती घरेलू और वैश्विक परिस्थितियों के अनुरूप नीतिगत ढांचे को लगातार अद्यतन करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। वित्त मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि विकास को गति देने के लिए देश की उत्पादन क्षमता, कार्यकुशलता और प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूत करना होगा। उन्होंने कहा कि कई क्षेत्रों ने उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है, लेकिन कुछ सेक्टर ऐसे भी हैं जिन्हें अतिरिक्त नीति समर्थन और संरचनात्मक सुधारों की आवश्यकता है। विशेष रूप से जटिल विनिर्माण, मध्यवर्ती उत्पादों और विशिष्ट सेवाओं से जुड़े क्षेत्रों में नई रणनीतियों की जरूरत महसूस की जा रही है। उन्होंने कहा कि लंबे समय से जिन चुनौतियों पर चर्चा होती रही है, अब उनके व्यावहारिक समाधान तलाशने का समय है। इसके लिए बेहतर क्रियान्वयन, संस्थागत क्षमता निर्माण और आवश्यकतानुसार नई नीतियों का निर्माण महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। सरकार लगातार इस दिशा में काम कर रही है ताकि भविष्य की आर्थिक चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना किया जा सके। वैश्विक आर्थिक परिदृश्य का उल्लेख करते हुए सीतारमण ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं। ऐसे में भारत को भी अपनी नीतियों को लचीला और परिस्थितियों के अनुरूप बनाए रखना होगा। उन्होंने कहा कि विकास की प्रक्रिया स्वतः संचालित नहीं होती, बल्कि इसके लिए निरंतर निगरानी, सुधार और दूरदर्शी योजना की आवश्यकता होती है। कोविड-19 महामारी के प्रभावों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि महामारी से जुड़े कुछ असर अब भी आर्थिक योजना और अपेक्षाओं को प्रभावित करते हैं। हालांकि वर्तमान समय में किसी बड़े व्यवधान की आशंका नहीं है, फिर भी सरकार संभावित जोखिमों पर नजर बनाए हुए है और आवश्यक तैयारियां कर रही है। वित्त मंत्री ने मौसम संबंधी चुनौतियों पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि एल नीनो प्रभाव के कारण सामान्य से कमजोर मानसून की संभावना को ध्यान में रखते हुए सरकार पहले से तैयारी कर रही है। कुछ क्षेत्रों में सूखे जैसी स्थिति और कुछ इलाकों में अत्यधिक वर्षा की आशंका को देखते हुए संबंधित विभागों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि उचित नीतियों, मजबूत संस्थागत ढांचे और निरंतर सुधारों के माध्यम से भारत अपनी दीर्घकालिक विकास संभावनाओं को और अधिक सशक्त बना सकेगा तथा वैश्विक अर्थव्यवस्था में अपनी स्थिति को और मजबूत करेगा।

इंदौर में सड़क चौड़ीकरण के लिए 80 से ज्यादा मकान ध्वस्त, प्रभावित परिवारों ने पुनर्वास और मुआवजे की उठाई मांग

मध्यप्रदेश । इंदौर में गुटकेश्वर मंदिर से सदर बाजार रोड तक प्रस्तावित सड़क चौड़ीकरण परियोजना के तहत सोमवार को नगर निगम ने बड़े पैमाने पर रिमूवल अभियान चलाया। सुबह करीब 8 बजे शुरू हुई कार्रवाई में भारी पुलिस बल, पोकलेन और जेसीबी मशीनों की मदद से सड़क निर्माण में बाधक बताए जा रहे मकानों और अन्य निर्माणों को हटाया गया। निगम अधिकारियों के अनुसार अब तक 80 से अधिक मकानों को तोड़ा जा चुका है, जबकि कुल करीब 85 मकानों को नोटिस जारी किए गए थे। नगर निगम के रिमूवल विभाग की ओर से की जा रही इस कार्रवाई में 9 पोकलेन मशीनें, 5 जेसीबी और 100 से अधिक कर्मचारी तैनात किए गए। निगम अधिकारियों का कहना है कि सड़क चौड़ीकरण और यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए यह कार्रवाई आवश्यक है तथा प्रभावित लोगों को पहले ही नोटिस जारी कर दिए गए थे। हालांकि कार्रवाई के दौरान कई प्रभावित परिवारों ने विरोध जताया और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। स्थानीय रहवासियों का कहना है कि वर्षों पुराने उनके मकानों को बिना उचित पुनर्वास और वैकल्पिक व्यवस्था के ध्वस्त किया जा रहा है। प्रभावित लोगों का दावा है कि उन्हें न तो रहने के लिए कोई प्लॉट या फ्लैट दिया गया और न ही पर्याप्त मुआवजे की जानकारी दी गई। 65 वर्षीय कृष्णा पाठक ने दावा किया कि उनका परिवार चार पीढ़ियों से इसी क्षेत्र में रह रहा था। उनका कहना है कि उनका जन्म भी इसी मकान में हुआ और अब जीवन के इस पड़ाव पर उनका आशियाना टूट गया। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके परिवार के कई सदस्य एक ही मकान में रहते थे और अब उनके पास रहने के लिए कोई दूसरा ठिकाना नहीं बचा है। कुछ अन्य प्रभावित लोगों ने भी प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर नाराजगी जताई। 47 वर्षीय राजकुमारी मिश्रा ने दावा किया कि वह और उनके पति निराश्रित हैं तथा उनके कोई संतान भी नहीं है। उनका कहना है कि नोटिस दिए जाने के बावजूद प्रशासन को पहले वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए थी। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके घर का बड़ा हिस्सा तोड़ दिया गया और अब बची हुई जगह में रहना भी मुश्किल हो गया है। रहवासियों का यह भी आरोप है कि कुछ स्थानों पर सरकारी जमीन खाली होने के बावजूद केवल आवासीय मकानों को निशाना बनाया गया। हालांकि इन आरोपों पर प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। दूसरी ओर नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि कार्रवाई नियमानुसार की जा रही है। अधिकारियों के मुताबिक प्रभावित लोगों को पहले नोटिस जारी किए गए थे और कई स्थानों पर मुनादी भी कराई गई थी। इसी कारण कुछ लोगों ने अपने निर्माणों के हिस्से स्वयं भी हटा लिए थे। निगम का दावा है कि सड़क चौड़ीकरण परियोजना शहर की यातायात व्यवस्था सुधारने और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर लागू की जा रही है। कार्रवाई के दौरान कई परिवार अपने मकानों को टूटते हुए देखते रहे। कुछ लोगों ने यह भी दावा किया कि निर्धारित सीमा से अधिक हिस्से को तोड़ा गया है, जबकि कुछ रहवासियों का कहना था कि उनके मकान के सामने पहले से पर्याप्त चौड़ाई वाली सड़क मौजूद थी, फिर भी उनका निर्माण हटाया गया। फिलहाल सड़क चौड़ीकरण को लेकर प्रशासन और प्रभावित परिवारों के बीच मतभेद बने हुए हैं। प्रभावित लोगों ने पुनर्वास, वैकल्पिक आवास और मुआवजे की मांग उठाते हुए प्रशासन से राहत देने की अपील की है।

अमेरिका-ईरान शांति समझौते के बाद कमोडिटी बाजार में जोरदार उछाल, सोना-चांदी की कीमतों ने छुए नए शिखर

नई दिल्ली । अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तनाव में कमी आने और शांति समझौते की पुष्टि के बाद वैश्विक वित्तीय बाजारों में सकारात्मक माहौल देखने को मिला है। इस घटनाक्रम का असर भारतीय कमोडिटी बाजार पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई दिया, जहां सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोना और चांदी की कीमतों में मजबूत तेजी दर्ज की गई। निवेशकों की बढ़ती सक्रियता और बाजार की बेहतर होती धारणा के बीच दोनों प्रमुख कीमती धातुओं ने शुरुआती कारोबार में उल्लेखनीय बढ़त हासिल की। कमोडिटी बाजार में कारोबारी गतिविधियों की शुरुआत के साथ ही सोने की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया। बाजार खुलते ही सोना अपने पिछले बंद स्तर की तुलना में हजारों रुपये की बढ़त के साथ कारोबार करता दिखाई दिया। शुरुआती सत्र में कीमतें लगातार मजबूत बनी रहीं और दिन के उच्च स्तर तक पहुंच गईं। निवेशकों ने इसे वैश्विक परिस्थितियों में आए बदलाव और बाजार की स्थिरता की दिशा में सकारात्मक संकेत के रूप में देखा। चांदी के बाजार में भी इसी तरह का रुझान देखने को मिला। कारोबार शुरू होते ही चांदी की कीमतों में जोरदार तेजी आई और शुरुआती घंटों में ही यह तीन प्रतिशत से अधिक की बढ़त दर्ज करने में सफल रही। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि औद्योगिक मांग और निवेशकों की नई खरीदारी ने चांदी को अतिरिक्त समर्थन प्रदान किया है। इसके चलते चांदी ने महत्वपूर्ण स्तरों को पार करते हुए नई मजबूती के संकेत दिए हैं। विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते की पुष्टि से वैश्विक निवेशकों में विश्वास बढ़ा है। लंबे समय से जारी भू-राजनीतिक अनिश्चितता कम होने से वित्तीय बाजारों में स्थिरता लौटने की उम्मीद जगी है। विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य के दोबारा खुलने की खबर को वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह समुद्री मार्ग अंतरराष्ट्रीय तेल और ऊर्जा व्यापार की दृष्टि से अत्यंत अहम माना जाता है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार सोना फिलहाल एक महत्वपूर्ण तकनीकी स्तर के करीब कारोबार कर रहा है। यदि कीमतें मौजूदा प्रतिरोध क्षेत्र के ऊपर स्थिर रहने में सफल होती हैं तो निकट अवधि में इसमें और तेजी देखने को मिल सकती है। दूसरी ओर, प्रमुख समर्थन स्तरों के नीचे फिसलने पर कीमतों में सीमित गिरावट की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। फिलहाल बाजार का रुख सकारात्मक बना हुआ है और निवेशक आगे के वैश्विक घटनाक्रमों पर नजर बनाए हुए हैं। चांदी के संबंध में भी विशेषज्ञों का दृष्टिकोण उत्साहजनक बना हुआ है। प्रमुख प्रतिरोध स्तरों को पार करने की स्थिति में इसमें और मजबूती देखने को मिल सकती है। हालांकि बाजार विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा तेजी को बनाए रखने के लिए कीमतों का ऊंचे स्तरों पर टिके रहना आवश्यक होगा। यदि ऐसा होता है तो निवेशकों का भरोसा और मजबूत हो सकता है। वित्तीय बाजारों के जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में वैश्विक आर्थिक संकेतक, ऊर्जा बाजार की स्थिति और अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक घटनाक्रम सोना एवं चांदी की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। फिलहाल शांति समझौते से पैदा हुए सकारात्मक माहौल ने निवेशकों को राहत दी है और कीमती धातुओं के बाजार में नई ऊर्जा का संचार किया है।

एमपी पुलिसकर्मियों के सैलरी पैकेज पर संकट, HDFC, Axis और Canara Bank के एग्रीमेंट खत्म; PHQ ने जारी किया अलर्ट

मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश पुलिस के अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक सूचना सामने आई है। पुलिस मुख्यालय (PHQ) ने प्रदेश की सभी पुलिस इकाइयों, पुलिस अधीक्षकों और यूनिट प्रभारी अधिकारियों को निर्देश जारी करते हुए कहा है कि वे उन पुलिसकर्मियों को तत्काल जानकारी दें, जिनके वेतन खाते एचडीएफसी बैंक, एक्सिस बैंक और केनरा बैंक में संचालित हैं। कारण यह है कि इन बैंकों के साथ पुलिस विभाग के सैलरी पैकेज संबंधी अनुबंध समाप्त हो चुके हैं। पुलिस मुख्यालय द्वारा जारी आदेश के अनुसार इन बैंकों के साथ हुए समझौतों के तहत पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को कई विशेष सुविधाएं प्रदान की जाती थीं। इनमें दुर्घटना बीमा, सामान्य मृत्यु पर आर्थिक सहायता, विशेष बैंकिंग लाभ, प्रीमियम सेवाएं और अन्य वित्तीय सुरक्षा सुविधाएं शामिल थीं। अनुबंध समाप्त होने के बाद इन सुविधाओं की निरंतरता प्रभावित हो सकती है। पुलिस मुख्यालय के कल्याण प्रकोष्ठ द्वारा जारी पत्र में स्पष्ट किया गया है कि संबंधित बैंक अब पूर्व अनुबंध के आधार पर सुविधाएं प्रदान करने के लिए बाध्य नहीं हैं। इसलिए कर्मचारियों को इस स्थिति से अवगत कराना जरूरी है ताकि वे भविष्य में किसी भी भ्रम या वित्तीय नुकसान से बच सकें। दस्तावेजों के अनुसार एक्सिस बैंक के साथ 23 अप्रैल 2021 को किया गया अनुबंध 22 अप्रैल 2023 को समाप्त हो गया था। इसी प्रकार एचडीएफसी बैंक के साथ 23 अप्रैल 2021 को हुआ समझौता 22 अप्रैल 2024 तक प्रभावी रहा और उसके बाद समाप्त हो गया। वहीं केनरा बैंक के साथ 19 फरवरी 2024 को हुआ अनुबंध 18 फरवरी 2025 को समाप्त हो चुका है। हालांकि पुलिस मुख्यालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि इन बैंकों के साथ समझौतों के नवीनीकरण के प्रयास लगातार जारी हैं। कल्याण शाखा की ओर से बैंक प्रबंधन के साथ संपर्क बनाए रखा गया है और अनुबंधों को दोबारा लागू कराने की दिशा में कार्रवाई की जा रही है। जब तक नए समझौते नहीं हो जाते, तब तक कर्मचारियों को सैलरी पैकेज के अंतर्गत मिलने वाले अतिरिक्त लाभों की उपलब्धता को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी गई है। पुलिस मुख्यालय का मानना है कि बड़ी संख्या में पुलिस अधिकारी और कर्मचारी इन बैंकों की सैलरी पैकेज योजनाओं से जुड़े हुए हैं। ऐसे में अनुबंध समाप्त होने की जानकारी समय पर उपलब्ध कराना आवश्यक है, ताकि कर्मचारी अपनी बैंकिंग और बीमा संबंधी योजनाओं की समीक्षा कर सकें। सूत्रों के अनुसार यदि भविष्य में नए सिरे से समझौते होते हैं तो कर्मचारियों को फिर से विशेष बैंकिंग सुविधाओं का लाभ मिल सकता है। फिलहाल पुलिस विभाग की सभी इकाइयों को निर्देशित किया गया है कि वे इस सूचना को संबंधित कर्मचारियों तक प्राथमिकता के आधार पर पहुंचाएं। यह आदेश पुलिस मुख्यालय भोपाल के कल्याण प्रकोष्ठ की ओर से जारी किया गया है और इसे पूरे प्रदेश की पुलिस इकाइयों में लागू किया जा रहा है।

भोपाल में लोकार्पित हुई सुरेश पटवा की 34वीं कृति ‘व्यंग्य-पच्चीसी’, साहित्यकारों ने बताया समकालीन विसंगतियों पर तीखा प्रहार

मध्यप्रदेश । राजधानी भोपाल के दुष्यंत संग्रहालय में वरिष्ठ साहित्यकार Suresh Patwa के नवीन व्यंग्य संग्रह ‘व्यंग्य-पच्चीसी’ का गरिमामय लोकार्पण समारोह आयोजित किया गया। यह कृति लेखक की 34वीं प्रकाशित पुस्तक है, जिसे साहित्य जगत में विशेष महत्व के साथ देखा जा रहा है। कार्यक्रम में साहित्य, संस्कृति और व्यंग्य लेखन से जुड़े अनेक विद्वानों, लेखकों और साहित्य प्रेमियों ने सहभागिता की। समारोह की अध्यक्षता साहित्यकार मुकेश वर्मा ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. संजय सक्सेना उपस्थित रहे। सारस्वत अतिथि के रूप में डॉ. मोहन तिवारी आनंद और विवेक रंजन श्रीवास्तव ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने सुरेश पटवा के साहित्यिक योगदान और उनकी नई कृति पर विस्तार से चर्चा की। अध्यक्षीय उद्बोधन में मुकेश वर्मा ने कहा कि सुरेश पटवा के व्यक्तित्व में खुलापन, निर्भीकता और प्रतिरोध की स्वाभाविक चेतना दिखाई देती है। यही विशेषताएं उनकी लेखनी को धार देती हैं और उन्हें एक सशक्त व्यंग्यकार के रूप में स्थापित करती हैं। उन्होंने कहा कि सामाजिक विसंगतियों के प्रति उनकी सजग दृष्टि उनकी रचनाओं को विशिष्ट बनाती है। मुख्य अतिथि डॉ. संजय सक्सेना ने कहा कि सुरेश पटवा की लेखनी मौलिकता, गहरी सामाजिक समझ और मानवीय संवेदनाओं से समृद्ध है। उनके अनुसार ‘व्यंग्य-पच्चीसी’ केवल व्यंग्य रचनाओं का संग्रह नहीं, बल्कि समकालीन समाज की विडंबनाओं का सजीव दस्तावेज है। उन्होंने इसे लेखक की रचनात्मक क्षमता का उत्कृष्ट उदाहरण बताया। अपने संबोधन में सुरेश पटवा ने प्रसिद्ध व्यंग्यकार Harishankar Parsai को अपना प्रेरणास्रोत बताया। उन्होंने कहा कि परसाई का साहित्य और उनकी अध्ययनशीलता ने उन्हें गहराई से प्रभावित किया। पटवा ने कहा कि बुंदेलखंड की व्यंग्यात्मक जीवन शैली, लोकभाषा और सामाजिक अनुभवों ने उनके लेखन को समृद्ध बनाया है। उन्होंने बताया कि उनकी रचनाओं में व्यंग्य किसी कृत्रिम प्रयास से नहीं, बल्कि स्वाभाविक रूप से अभिव्यक्ति का हिस्सा बनकर उभरता है। डॉ. मोहन तिवारी आनंद ने कहा कि सुरेश पटवा एक बहुआयामी रचनाकार हैं, जो विषय की पूरी तैयारी और अध्ययन के साथ लेखन करते हैं। उनकी बेलौस शैली और निर्भीक अभिव्यक्ति पाठकों को सोचने पर मजबूर करती है। वहीं विवेक रंजन श्रीवास्तव ने कहा कि बैंक सेवा से सेवानिवृत्त होने के बाद भी पटवा साहित्य के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं और 74 वर्ष की आयु में 34 पुस्तकों का लेखन उनकी रचनात्मक ऊर्जा का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि पटवा का साहित्य केवल कल्पना पर आधारित नहीं है, बल्कि जीवन के वास्तविक अनुभवों से उपजा है। लद्दाख और भूटान जैसी यात्राओं के अनुभव भी उनकी रचनाओं में यथार्थ और संवेदनशीलता का विस्तार करते हैं। कार्यक्रम में प्रस्तुत व्यंग्य पाठ विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। विभिन्न रचनाकारों ने अपनी व्यंग्य रचनाओं का पाठ कर श्रोताओं को हंसने के साथ-साथ सोचने पर भी मजबूर किया। व्यंग्यकारों की प्रस्तुतियों को दर्शकों ने खूब सराहा और सभागार देर तक तालियों की गूंज से भरता रहा। कार्यक्रम का संचालन डॉ. आदित्य हरि गुप्ता ने किया, जबकि शारदा दयाल श्रीवास्तव ने ‘व्यंग्य-पच्चीसी’ की समीक्षात्मक विवेचना प्रस्तुत करते हुए कहा कि यह कृति समकालीन सामाजिक और राजनीतिक विद्रूपताओं पर प्रभावशाली प्रहार करती है। उन्होंने इसे नई पीढ़ी के व्यंग्यकारों के लिए प्रेरणादायी पुस्तक बताया।