थोक महंगाई में तेज उछाल, मई में 9.68 प्रतिशत पहुंची डब्ल्यूपीआई दर; सरकार ने नई मूल्यांकन प्रणाली की शुरुआत की

नई दिल्ली । देश में महंगाई के आकलन और उत्पादक स्तर पर कीमतों की निगरानी को अधिक आधुनिक और वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाने की दिशा में सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने 2022-23 को नया आधार वर्ष मानते हुए संशोधित थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) सीरीज लागू कर दी है। इसके साथ ही मई माह के लिए जारी आंकड़ों में थोक महंगाई दर 9.68 प्रतिशत दर्ज की गई है, जो उत्पादन और आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े क्षेत्रों में लागत दबाव को दर्शाती है। नई सीरीज ने 2011-12 आधार वर्ष वाली पुरानी व्यवस्था का स्थान ले लिया है। सरकार का उद्देश्य बदलती आर्थिक संरचना, उत्पादन पैटर्न और ऊर्जा क्षेत्र में आए बदलावों को महंगाई मापन प्रणाली में बेहतर तरीके से शामिल करना है। संशोधित व्यवस्था के जरिए देश की वास्तविक आर्थिक गतिविधियों और बाजार स्थितियों को अधिक सटीक रूप से प्रतिबिंबित करने का प्रयास किया गया है। मई के आंकड़ों के अनुसार सभी वस्तुओं का समग्र थोक मूल्य सूचकांक बढ़कर 109.9 पर पहुंच गया। प्राथमिक वस्तुओं की श्रेणी में भी महंगाई बढ़कर 4.99 प्रतिशत दर्ज की गई। हालांकि सबसे अधिक प्रभाव ईंधन और ऊर्जा क्षेत्र में देखने को मिला, जहां महंगाई दर लगभग 30 प्रतिशत तक पहुंच गई। यह वृद्धि ऊर्जा लागत में बढ़ोतरी और उससे जुड़े उत्पादन व्यय के प्रभाव को दर्शाती है। विनिर्माण क्षेत्र भी लागत दबाव से अछूता नहीं रहा। मैन्यूफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स की महंगाई दर मई में 7.48 प्रतिशत दर्ज की गई। औद्योगिक उत्पादन से जुड़े कई क्षेत्रों में कच्चे माल और ऊर्जा लागत में बढ़ोतरी का असर कीमतों पर दिखाई दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह प्रवृत्ति लंबे समय तक बनी रहती है तो इसका असर उपभोक्ता स्तर की महंगाई पर भी पड़ सकता है। मंत्रालय के अनुसार खनिज तेल, कच्चा पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस, रसायन एवं रासायनिक उत्पाद तथा बेसिक मेटल्स जैसी श्रेणियां थोक महंगाई में वृद्धि के प्रमुख कारणों में शामिल रहीं। इन क्षेत्रों में लागत बढ़ने का प्रभाव उद्योगों की उत्पादन लागत पर सीधे तौर पर पड़ा है। खाद्य क्षेत्र में स्थिति अपेक्षाकृत नियंत्रित रही। डब्ल्यूपीआई फूड इंडेक्स के तहत खाद्य महंगाई दर 4.49 प्रतिशत दर्ज की गई। यह संकेत देता है कि खाद्य वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि हुई है, लेकिन अन्य प्रमुख श्रेणियों की तुलना में दबाव सीमित रहा। नई डब्ल्यूपीआई सीरीज की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता इसका विस्तारित दायरा है। पहले जहां बास्केट में 697 वस्तुएं शामिल थीं, वहीं अब उनकी संख्या बढ़ाकर 957 कर दी गई है। इससे विभिन्न क्षेत्रों की मूल्य स्थिति का अधिक व्यापक और यथार्थपरक आकलन संभव होगा। ऊर्जा क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। पहली बार सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और परमाणु ऊर्जा से उत्पादित बिजली को सूचकांक बास्केट में शामिल किया गया है। यह कदम देश के ऊर्जा क्षेत्र में हो रहे बदलावों और नवीकरणीय स्रोतों की बढ़ती भूमिका को प्रतिबिंबित करता है। इसके अलावा कच्चे पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस को प्राथमिक वस्तुओं की श्रेणी से हटाकर ईंधन और ऊर्जा वर्ग में शामिल किया गया है। नई पद्धति में वस्तुओं का वेटेज तय करने के लिए ग्रॉस वैल्यू ऑफ आउटपुट का उपयोग किया गया है, जिससे आर्थिक गतिविधियों का अधिक सटीक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हो सके। सरकार ने संशोधित डब्ल्यूपीआई के साथ आउटपुट प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स, ट्रायल इनपुट प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स तथा विभिन्न सेवा क्षेत्रों के लिए नई मूल्य सूचकांक श्रृंखलाएं भी जारी की हैं। इससे उत्पादक स्तर पर कीमतों की निगरानी और आर्थिक नीतियों के निर्माण में अधिक व्यापक और विश्वसनीय आंकड़े उपलब्ध हो सकेंगे।
राज्यसभा सांसद महेश केवट का दावा- मतदान होता तो कांग्रेस में टूट तय थी, हाईकोर्ट में भी नहीं टिकेगी चुनौती

मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश की तीसरी राज्यसभा सीट पर निर्विरोध निर्वाचित हुए भाजपा के नेता और नवनिर्वाचित सांसद Mahesh Kewat ने अपनी जीत को पार्टी नेतृत्व और संगठन के भरोसे की जीत बताया है। दैनिक भास्कर को दिए एक विशेष साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि भाजपा के पास पहले से ही पर्याप्त समर्थन मौजूद था और यदि मतदान की स्थिति बनती, तब भी पार्टी तीसरी सीट जीतने में सफल रहती। राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस की वरिष्ठ नेता और तेलंगाना प्रभारी Meenakshi Natarajan का नामांकन खारिज होने के बाद महेश केवट निर्विरोध राज्यसभा सदस्य चुने गए। कांग्रेस ने इस फैसले को चुनौती देते हुए चुनाव आयोग और बाद में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, लेकिन राहत नहीं मिली। अब कांग्रेस की ओर से हाईकोर्ट में चुनाव याचिका दायर करने की तैयारी की जा रही है। इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए महेश केवट ने दावा किया कि कांग्रेस की ओर से प्रस्तुत दस्तावेजों और शपथ पत्र को लेकर जो विवाद सामने आया, उसमें जांच और न्यायिक प्रक्रिया के दौरान भाजपा का पक्ष मजबूत साबित हुआ। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भी कांग्रेस परिणाम स्वीकार करने को तैयार नहीं है, जबकि लोकतांत्रिक व्यवस्था में न्यायालयों के निर्णयों का सम्मान किया जाना चाहिए। महेश केवट ने कहा कि यदि चुनाव मतदान तक पहुंचता तो भाजपा को और अधिक समर्थन मिलता। उनका दावा था कि कई विधायक विकास और प्रदेश हित के मुद्दों को प्राथमिकता देते हैं तथा मुख्यमंत्री Mohan Yadav के नेतृत्व में चल रहे विकास कार्यों के कारण भाजपा को अतिरिक्त समर्थन हासिल होता। हालांकि यह उनका राजनीतिक दावा है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। साक्षात्कार के दौरान उन्होंने अपने राजनीतिक सफर पर भी बात की। उन्होंने कहा कि वे लंबे समय से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा की विचारधारा से जुड़े रहे हैं तथा पार्टी द्वारा दिए गए विभिन्न दायित्वों का निर्वहन करते रहे हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा संगठन कार्यकर्ताओं की क्षमता और योगदान को ध्यान में रखकर जिम्मेदारियां देता है। हाल ही में उन्हें मछुआ कल्याण बोर्ड का अध्यक्ष बनाया गया था और उसके बाद राज्यसभा के लिए उम्मीदवार घोषित किया गया। महेश केवट ने यह भी कहा कि निषाद और केवट समाज से राज्यसभा पहुंचने का अवसर मिलना उनके लिए गर्व की बात है। उन्होंने इसे भाजपा नेतृत्व द्वारा समाज के विभिन्न वर्गों को प्रतिनिधित्व देने की नीति का हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि इससे समाज के लोगों में उत्साह का माहौल है और वे इसे सम्मान के रूप में देख रहे हैं। बुंदेलखंड क्षेत्र से आने वाले महेश केवट ने कहा कि राज्यसभा में पहुंचने के बाद उनकी प्राथमिकता क्षेत्रीय विकास, जल, रोजगार और आधारभूत सुविधाओं से जुड़े मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने की रहेगी। उन्होंने प्रधानमंत्री Narendra Modi के विकसित भारत 2047 के विजन और राज्य सरकार के विकसित मध्य प्रदेश के लक्ष्य को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता भी जताई। दूसरी ओर, कांग्रेस लगातार यह आरोप लगाती रही है कि राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया में अनियमितताएं हुई हैं और वह कानूनी लड़ाई जारी रखेगी। अब इस मामले पर सभी की नजरें संभावित हाईकोर्ट याचिका और उसके परिणाम पर टिकी हैं।
एमपी में मानसून से पहले मौसम का यू-टर्न, भोपाल-जबलपुर समेत 28 जिलों में बारिश; सीहोर में 61 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से चली आंधी

मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश में मानसून पूर्व गतिविधियां तेज हो गई हैं और प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में आंधी-बारिश का दौर जारी है। सोमवार को राजधानी भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर सहित 28 जिलों में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश दर्ज की गई। मौसम के इस बदले मिजाज ने लोगों को भीषण गर्मी से राहत दी है, वहीं कई इलाकों में तेज हवाओं के कारण जनजीवन प्रभावित भी हुआ। मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश के कई जिलों में बादल छाए रहे और बारिश के साथ तेज हवाएं चलीं। सीहोर में दोपहर बाद अचानक मौसम बदला और तेज आंधी के साथ बारिश हुई। यहां हवा की अधिकतम रफ्तार 61 किलोमीटर प्रतिघंटा रिकॉर्ड की गई, जो प्रदेश में सबसे अधिक रही। मौसम विभाग ने भोपाल और ग्वालियर संभाग के जिलों में अगले दो दिनों तक बारिश की संभावना जताई है। वहीं आगर-मालवा और राजगढ़ जिलों के लिए तेज आंधी का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। बीते 24 घंटों के दौरान भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, ग्वालियर, गुना, शिवपुरी, अशोकनगर, मुरैना, श्योपुर, नीमच, मंदसौर, खरगोन, देवास, हरदा, छिंदवाड़ा, सिवनी, बालाघाट, डिंडौरी, जबलपुर, सागर, दमोह, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर और आगर-मालवा सहित कुल 28 जिलों में बारिश दर्ज की गई। कई स्थानों पर बादलों की गरज और तेज हवाओं के साथ मौसम ने अचानक करवट ली। तेज हवाओं की बात करें तो सीहोर के अलावा सागर और गुना में 59 किमी प्रतिघंटा, भोपाल में 57 किमी प्रतिघंटा, जबलपुर में 50 किमी प्रतिघंटा तथा नर्मदापुरम में 48 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से हवाएं चलीं। इंदौर और अशोकनगर में 44 किमी, ग्वालियर में 43 किमी, राजगढ़ में 39 किमी तथा आगर-मालवा, रीवा, खंडवा और बड़वानी में 37 किमी प्रतिघंटा की गति से तेज आंधी दर्ज की गई। रविवार को भी प्रदेश के कई हिस्सों में मौसम खराब रहा। भोपाल में दिनभर रुक-रुक कर बारिश होती रही, जबकि सीहोर, इंदौर, रायसेन और खरगोन में भी अच्छी बारिश दर्ज की गई। रायसेन में तेज हवाओं के कारण कुछ मकानों के छप्पर उड़ गए, जबकि कई जिलों में बिजली आपूर्ति भी प्रभावित हुई। खरगोन और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों को निंदाई और बुआई के कार्यों में परेशानी का सामना करना पड़ा। बारिश और बादलों के कारण तापमान में भी उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। प्रदेश के पांच प्रमुख शहरों में अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से नीचे रहा। भोपाल में अधिकतम तापमान 35.4 डिग्री, इंदौर में 36.3 डिग्री, ग्वालियर में 39.2 डिग्री, उज्जैन में 36.5 डिग्री और जबलपुर में 38.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। प्रदेश में केवल खजुराहो, दतिया, नौगांव और मंडला ऐसे स्थान रहे जहां तापमान 40 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक रहा। वहीं शिवपुरी सबसे ठंडा शहर रहा, जहां अधिकतम तापमान 33.2 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। पचमढ़ी में 35 डिग्री, सिवनी में 36 डिग्री, राजगढ़ में 36.4 डिग्री तथा नर्मदापुरम और श्योपुर में 36.6 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से आ रही नमी के कारण प्रदेश में अगले कुछ दिनों तक आंधी-बारिश का दौर जारी रह सकता है। इससे तापमान में और गिरावट आने की संभावना है तथा मानसून की प्रगति को भी बल मिल सकता है।
एमपी में 2440 बसों का नियम विरुद्ध पंजीयन! बस ऑपरेटर्स ने अधिकारियों पर साधा निशाना, बर्खास्तगी और एफआईआर की मांग

मध्यप्रदेश । मध्यप्रदेश में परिवहन विभाग के कामकाज को लेकर एक बड़ा विवाद सामने आया है। राज्य में 1 सितंबर 2025 से लागू नए नियमों के बावजूद कथित रूप से 2440 बसों का पंजीयन बिना अनिवार्य टाइप अप्रूवल सर्टिफिकेट के किए जाने का मामला अब गंभीर प्रशासनिक और कानूनी बहस का विषय बन गया है। इस पूरे प्रकरण में मध्यप्रदेश बस ऑनर्स एसोसिएशन ने सीधे परिवहन अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई है। परिवहन आयुक्त उमेश जोगा द्वारा जारी पत्र में यह उल्लेख किया गया है कि 1 सितंबर 2025 से 5 जून 2026 के बीच प्रदेश के विभिन्न आरटीओ, डीटीओ और एआरटीओ कार्यालयों में कुल 2440 बसों का पंजीयन ऐसे दस्तावेजों के आधार पर किया गया जो नए नियमों के अनुरूप नहीं थे। इनमें 1487 यात्री बसें, 745 शैक्षणिक संस्थानों की बसें, 141 स्कूल बसें और 67 प्राइवेट सर्विस व्हीकल शामिल हैं। मध्यप्रदेश बस ऑनर्स एसोसिएशन के महामंत्री जय कुमार जैन ने मुख्यमंत्री, परिवहन मंत्री और विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को भेजे पत्र में कहा है कि बस मालिक वाहन खरीदते हैं और पंजीयन के लिए विभाग के समक्ष प्रस्तुत करते हैं। यदि वाहन नियमों के अनुरूप नहीं था तो उसका पंजीयन होना ही नहीं चाहिए था। ऐसे में जिम्मेदारी परिवहन अधिकारियों की बनती है, जिन्होंने नियमों के विपरीत पंजीयन की अनुमति दी। एसोसिएशन का आरोप है कि संबंधित अधिकारियों ने नए नियमों की जानकारी होने के बावजूद पुराने और निरस्त किए जा चुके दस्तावेजों के आधार पर बसों का पंजीयन किया। संगठन ने इसे गंभीर प्रशासनिक लापरवाही बताते हुए दोषी अधिकारियों को तत्काल निलंबित करने, सेवा से बर्खास्त करने तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज करने की मांग की है। दरअसल, केंद्र सरकार के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने 6 मार्च 2024 को अधिसूचना जारी कर 1 सितंबर 2025 से बस बॉडी निर्माण से जुड़े नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किए थे। इसके तहत फॉर्म 22B की व्यवस्था समाप्त कर दी गई थी और 13 या उससे अधिक यात्री क्षमता वाली बसों के लिए मान्यता प्राप्त एजेंसी से टाइप अप्रूवल सर्टिफिकेट लेना अनिवार्य कर दिया गया था। इसके बिना किसी बस का पंजीयन नहीं किया जाना था। परिवहन आयुक्त के पत्र के अनुसार नए नियम लागू होने के बाद भी कई कार्यालयों में पुराने फॉर्म 22B के आधार पर पंजीयन किए गए। इसी कारण अब इन पंजीयनों की वैधता पर सवाल खड़े हो गए हैं। मामले का एक चिंताजनक पहलू स्कूल बसों का पंजीयन भी है। विभागीय रिकॉर्ड के अनुसार 141 स्कूल बसों का भी कथित रूप से नियम विरुद्ध पंजीयन हुआ। इनमें सबसे अधिक 51 बसें भोपाल और 48 बसें इंदौर में दर्ज की गईं। बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मामलों में इस प्रकार की अनियमितता को गंभीर माना जा रहा है। यदि जिलावार आंकड़ों पर नजर डालें तो सबसे अधिक 387 बसों का पंजीयन इंदौर आरटीओ में हुआ। इसके बाद नीमच में 247, देवास में 220, उज्जैन में 192, आगर मालवा में 168 और भोपाल में 166 बसों का पंजीयन दर्ज किया गया। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि मामला केवल किसी एक जिले तक सीमित नहीं बल्कि प्रदेशव्यापी है। उधर परिवहन विभाग का कहना है कि परिवहन आयुक्त के निर्देशानुसार पूरे मामले की जांच जारी है। जिन वाहनों का पंजीयन नियमों के विपरीत पाया जाएगा, उनका पंजीयन निरस्त करने की कार्रवाई की जाएगी। साथ ही यदि जांच में किसी अधिकारी की भूमिका या लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। अब सभी की नजर विभागीय जांच रिपोर्ट पर टिकी है, क्योंकि इस मामले का असर हजारों बस संचालकों, यात्रियों और शैक्षणिक संस्थानों पर पड़ सकता है।
सीएम मोहन यादव का पूर्व पीएम पर तंज, बोले- अर्थशास्त्री भी नहीं समझ पाए जीरो बैलेंस खाते की ताकत; महू में बनेगा साइबर रिसर्च सेंटर

मध्यप्रदेश । भोपाल में आयोजित साइबर सिक्योरिटी और स्टेट डाटा सिक्योरिटी पर राज्य स्तरीय कंसल्टेटिव वर्कशॉप के दौरान मुख्यमंत्री Mohan Yadav ने साइबर सुरक्षा को वर्तमान समय की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बताते हुए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। इस दौरान उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री Manmohan Singh का नाम लिए बिना उन पर परोक्ष टिप्पणी भी की। मुख्यमंत्री ने कहा कि देश में पहले ऐसे प्रधानमंत्री रहे हैं जिन्हें अर्थशास्त्र का बड़ा जानकार माना जाता था, लेकिन जीरो बैलेंस खाते की उपयोगिता और उसके व्यापक सामाजिक प्रभाव को वे भी नहीं समझ पाए थे। उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री Narendra Modi ने जनधन योजना के माध्यम से करोड़ों लोगों के बैंक खाते खुलवाकर वित्तीय समावेशन को नई दिशा दी। साथ ही डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे पात्र लोगों तक पहुंचाने का रास्ता तैयार किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज डाटा सुरक्षा का महत्व लगातार बढ़ रहा है। पहले सीमाओं की सुरक्षा सबसे बड़ी चिंता मानी जाती थी, लेकिन डिजिटल युग में नागरिकों का डाटा और ऑनलाइन लेनदेन भी उतने ही संवेदनशील हो गए हैं। उन्होंने कहा कि साइबर अपराधियों द्वारा लोगों की जीवनभर की कमाई कुछ ही मिनटों में ठगी जा रही है, जो बेहद गंभीर विषय है। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने महू में अत्याधुनिक स्टेट डाटा साइबर सिक्योरिटी रिसर्च सेंटर स्थापित करने की घोषणा की। यह केंद्र राज्य सरकार और Military College of Telecommunication Engineering के सहयोग से विकसित किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में शोध और विशेषज्ञता विकसित करना समय की आवश्यकता है। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि साइबर सुरक्षा केवल चर्चा का विषय नहीं बल्कि जवाबदेही का मामला है। यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो संबंधित विभागों को इसकी जिम्मेदारी उठानी होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि नागरिकों के डाटा की सुरक्षा राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। कार्यशाला में एडीजी इंटेलिजेंस साई मनोहर ने साइबर अपराधों से जुड़े आंकड़े प्रस्तुत करते हुए बताया कि पिछले 14 वर्षों में साइबर अपराधों में 77 गुना वृद्धि दर्ज की गई है। वर्तमान में मध्यप्रदेश में हर वर्ष हजारों साइबर शिकायतें सामने आ रही हैं। उन्होंने कहा कि साइबर हेल्पलाइन की क्षमता बढ़ाए जाने के बाद अब तक जनता के 137 करोड़ रुपए साइबर ठगी से बचाए जा चुके हैं। उन्होंने बताया कि डिजिटल अरेस्ट, फर्जी कॉल, बैंकिंग फ्रॉड और ऑनलाइन निवेश के नाम पर ठगी के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। साइबर अपराधी खुद को सीबीआई, ईडी, पुलिस या सेना का अधिकारी बताकर लोगों को जाल में फंसा रहे हैं। ऐसे मामलों से निपटने के लिए विशेष अभियान भी चलाए जा रहे हैं। साइंस एंड टेक्नोलॉजी विभाग के प्रमुख सचिव एम. सेल्वेंद्रन ने कहा कि मध्यप्रदेश ई-गवर्नेंस के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। हालांकि डिजिटल सेवाओं के विस्तार के साथ साइबर सुरक्षा की चुनौतियां भी तेजी से बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि यदि किसी सरकारी सेवा या डाटा सिस्टम पर साइबर हमला होता है तो उसका सीधा असर आम जनता और शासन की विश्वसनीयता पर पड़ता है। कार्यशाला में देशभर के साइबर विशेषज्ञों, रक्षा संस्थानों के अधिकारियों और तकनीकी विशेषज्ञों ने भाग लिया। उनके सुझावों के आधार पर राज्य में साइबर सुरक्षा को और मजबूत बनाने की रणनीति तैयार की जाएगी।
कैंसर मरीजों पर बढ़ा दवा संकट, जीवनरक्षक कीमोथेरेपी इंजेक्शन की कमी; इलाज महंगा होने की आशंका

मध्यप्रदेश । देश में कैंसर मरीजों के लिए चिंता बढ़ाने वाली स्थिति सामने आई है। कैंसर उपचार में व्यापक रूप से उपयोग होने वाली महत्वपूर्ण कीमोथेरेपी दवाओं सिस्प्लैटिन (Cisplatin) और कार्बोप्लैटिन (Carboplatin) की कमी ने अस्पतालों और मरीजों दोनों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो कैंसर के इलाज की लागत बढ़ सकती है और हजारों मरीजों का उपचार प्रभावित हो सकता है। नई दिल्ली स्थित सर गंगाराम अस्पताल के मेडिकल ऑन्कोलॉजी विभाग के चेयरपर्सन डॉ. श्याम अग्रवाल के अनुसार पिछले दो से तीन सप्ताह से देशभर में इन दोनों दवाओं की उपलब्धता गंभीर रूप से प्रभावित हुई है। ये दवाएं कैंसर उपचार की फर्स्ट लाइन थेरेपी का अहम हिस्सा हैं और फेफड़ों, मुंह, गर्भाशय ग्रीवा (सर्वाइकल), ओवरी, गर्भाशय और अंडकोष सहित कई प्रकार के कैंसर के इलाज में इस्तेमाल की जाती हैं। भोपाल के जवाहरलाल नेहरू कैंसर अस्पताल की मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. हरमीत कौर के मुताबिक दवाओं की कमी का सीधा असर मरीजों के इलाज पर पड़ रहा है। कई मामलों में मरीजों को निर्धारित समय पर कीमोथेरेपी नहीं मिल पा रही है, जबकि कुछ मरीजों को दवा उपलब्ध न होने के कारण उपचार टालना पड़ रहा है। इससे इलाज की निरंतरता और सफलता दोनों प्रभावित हो सकती हैं। वरिष्ठ ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. टी.पी. साहू का कहना है कि कैंसर उपचार के क्षेत्र में यह बेहद चुनौतीपूर्ण दौर है। सिस्प्लैटिन जैसी दवा पिछले कई दशकों से कैंसर उपचार की सबसे भरोसेमंद और किफायती दवाओं में शामिल रही है। इसकी मदद से हजारों रुपए में उपचार संभव हो जाता है, जबकि कई आधुनिक विकल्पों पर लाखों रुपए तक खर्च करना पड़ सकता है। ऐसे में इसकी कमी मध्यम और निम्न आय वर्ग के मरीजों के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गई है। विशेषज्ञों के अनुसार सिस्प्लैटिन और कार्बोप्लैटिन केवल दवाएं नहीं, बल्कि कई कैंसर उपचार योजनाओं की रीढ़ मानी जाती हैं। गांधी मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्रोफेसर डॉ. ओ.पी. सिंह बताते हैं कि देश में लगभग 70 प्रतिशत कीमोथेरेपी उपचार योजनाओं में सिस्प्लैटिन का उपयोग किया जाता है। इसका अर्थ है कि हर दस में से लगभग सात मरीज किसी न किसी रूप में इस दवा पर निर्भर रहते हैं। मुंबई के कामा एवं एल्ब्लेस अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. तुषार पाल्वे के अनुसार प्लैटिनम आधारित कीमोथेरेपी दवाओं की कमी के कारण डॉक्टरों को उपचार की रणनीतियों में बदलाव करना पड़ रहा है। हालांकि अन्य कुछ कीमोथेरेपी दवाएं उपलब्ध हैं, लेकिन सभी मामलों में उनका उपयोग सिस्प्लैटिन या कार्बोप्लैटिन का विकल्प नहीं बन सकता। दवा उद्योग से जुड़े सूत्रों के अनुसार उत्पादन लागत में बढ़ोतरी, कच्चे माल की उपलब्धता पर असर और वैश्विक सप्लाई चेन में आई बाधाओं के कारण कंपनियों को उत्पादन में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। यही वजह है कि केंद्र सरकार ने इन दवाओं की कीमतों में बढ़ोतरी के प्रस्ताव पर सैद्धांतिक सहमति दी है। रिपोर्टों के मुताबिक सिस्प्लैटिन और कार्बोप्लैटिन की कीमतों में 10 से 50 प्रतिशत तक वृद्धि हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द ही सप्लाई सामान्य नहीं हुई तो आने वाले समय में कैंसर मरीजों को इलाज के लिए अधिक खर्च करना पड़ सकता है। साथ ही अस्पतालों पर भी उपचार की निरंतरता बनाए रखने का दबाव बढ़ेगा। फिलहाल डॉक्टरों और अस्पतालों की कोशिश है कि उपलब्ध संसाधनों के माध्यम से मरीजों का उपचार जारी रखा जाए और किसी भी मरीज की चिकित्सा प्रभावित न हो।
मुगल-ए-आजम के सेट से सामने आया इतिहास का अनसुना पन्ना: मधुबाला के हुस्न के दीवाने थे पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो

नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा के सुनहरे दौर में अपनी बेमिसाल खूबसूरती और जीवंत अभिनय से करोड़ों दिलों पर राज करने वाली अभिनेत्री मधुबाला का जादू सिर्फ देश की सीमाओं तक ही सीमित नहीं था। हाल ही में सामने आए ऐतिहासिक और सिनेमाई संस्मरणों के अनुसार, पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो भी इस कदर हुस्न की मल्लिका के दीवाने थे कि वे अक्सर उनसे मिलने के लिए भारत आया करते थे। यह उस दौर की बात है जब मधुबाला अपनी सर्वकालिक महान फिल्म ‘मुगल-ए-आजम’ की शूटिंग में व्यस्त थीं। उस समय जुल्फिकार अली भुट्टो पाकिस्तान की राजनीति में कोई बहुत बड़ा नाम नहीं थे, बल्कि एक बेहद पढ़े-लिखे, हैंडसम और उभरते हुए युवा राजनेता के तौर पर मुंबई के दौरों पर आते-जाते रहते थे। मध्य प्रदेश। इस ऐतिहासिक और दिलचस्प किस्से की पृष्ठभूमि साल 1950 के दशक के अंतिम वर्षों से जुड़ती है। यह वह दौर था जब एक तरफ मधुबाला और महानायक दिलीप कुमार के बीच के रिश्तों में गंभीर तल्खी आ चुकी थी और उनका सालों पुराना संबंध टूटने की कगार पर था। ठीक उसी समय जुल्फिकार अली भुट्टो की जिंदगी में मधुबाला की एंट्री हुई। भुट्टो अक्सर मुंबई प्रवास के दौरान ‘मुगल-ए-आजम’ के भव्य सेट पर पहुंच जाते थे, जहां वे घंटों बैठकर मधुबाला को अभिनय करते हुए निहारते थे। धीरे-धीरे दोनों के बीच मुलाकातों का सिलसिला बढ़ा और यह दोस्ती गहरी होती चली गई। ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार, दोनों अक्सर फिल्म के सेट पर ही एक साथ दोपहर का भोजन करते थे और भुट्टो हमेशा मधुबाला के करीब रहने का बहाना ढूंढते थे। इस रिश्ते का सबसे जटिल पहलू यह था कि जब जुल्फिकार अली भुट्टो मधुबाला के करीब आ रहे थे, तब वे पहले से ही शादीशुदा थे और उनकी शादी शिरीन नामक महिला से हो चुकी थी। इसके बावजूद मधुबाला की जादुई शख्सियत के आकर्षण में बंधकर भुट्टो ने अपनी शादीशुदा जिंदगी की परवाह नहीं की। मीडिया रिपोर्ट्स और उस दौर के राजनैतिक-सिनेमाई गलियारों के दावों के अनुसार, भुट्टो ने एक दिन अपने दिल की बात खुलकर मधुबाला के सामने रख दी थी और उनके समक्ष बकायदा विवाह का प्रस्ताव भी पेश किया था। वे हर हाल में मधुबाला को अपनी जीवनसंगिनी बनाना चाहते थे और इसके लिए कोई भी कीमत चुकाने को तैयार थे। मधुबाला उस दौर में जुल्फिकार भुट्टो की बुद्धिमत्ता और उनके व्यक्तित्व का सम्मान जरूर करती थीं और उनके साथ पर्याप्त समय भी बिताती थीं, लेकिन वे एक बेहद व्यावहारिक महिला भी थीं। उन्हें इस बात का पूरा संज्ञान था कि भुट्टो न सिर्फ शादीशुदा हैं बल्कि एक दूसरे देश की सक्रिय राजनीति का हिस्सा भी हैं। ऐसे किसी संवेदनशील मोड़ पर शादी जैसा बड़ा और गंभीर फैसला लेना उनके करियर और व्यक्तिगत जीवन के लिए सही नहीं था। यही कारण रहा कि मधुबाला ने भुट्टो के प्रेम प्रस्ताव को बेहद शालीनता से ठुकरा दिया और अपने रिश्ते को एक सीमित दायरे से आगे नहीं बढ़ने दिया। आखिरकार उन्होंने भुट्टो से अपनी दूरियां बना लीं और इस तरह राजनीति और कला का यह अध्याय हमेशा के लिए अधूरा रह गया। इस अधूरी प्रेम कहानी के अंत के बाद दोनों की राहें पूरी तरह जुदा हो गईं। जुल्फिकार अली भुट्टो से अलग होने के तुरंत बाद साल 1960 में मधुबाला ने मशहूर गायक और अभिनेता किशोर कुमार से शादी कर ली। इसके कुछ समय बाद ही वे गंभीर बीमारियों की चपेट में आ गईं और महज 36 वर्ष की अल्पायु में साल 1969 में उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया। दूसरी ओर, जुल्फिकार अली भुट्टो पाकिस्तान की राजनीति के शीर्ष पर पहुंचे और देश के विदेश मंत्री, राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री बने। हालांकि, नियति को कुछ और ही मंजूर था और साल 1979 में तख्तापलट के बाद महज 51 वर्ष की आयु में भुट्टो को पाकिस्तान में फांसी दे दी गई।
राजस्थान से ATS ने पकड़ा तीसरा आरोपी, भोपाल कनेक्शन की जांच तेज; युवाओं को जोड़ने और नेटवर्क फैलाने की साजिश का आरोप

मध्यप्रदेश । मध्यप्रदेश एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (ATS) ने कथित आतंकी साजिश से जुड़े मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए तीसरे आरोपी शाकिर मेव को राजस्थान के अलवर जिले के टप्पुकरा थाना क्षेत्र से गिरफ्तार किया है। एटीएस के अनुसार आरोपी संगठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा था और कथित नेटवर्क के संचालन में उसकी सक्रिय भागीदारी सामने आई है। अदालत में पेशी के बाद उसे 20 जून तक रिमांड पर भेज दिया गया है। इस मामले में पहले भोपाल के काजी कैंप क्षेत्र से मोहम्मद फराज उर्फ खालिद सैफुल्लाह और उसके सहयोगी नईम अब्दुल्ला को गिरफ्तार किया जा चुका है। जांच एजेंसियों का दावा है कि दोनों से पूछताछ के दौरान कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई हैं। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और मामले की जांच जारी है। जांच एजेंसियों के अनुसार फराज पर आरोप है कि वह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए युवाओं तक पहुंच बनाने का प्रयास कर रहा था। प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि टेलीग्राम और व्हाट्सएप जैसे माध्यमों का इस्तेमाल कर युवाओं को विभिन्न ग्रुपों से जोड़ने की कोशिश की जा रही थी। एटीएस का कहना है कि आरोपी कई वर्षों से डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सक्रिय था और उसके ऑनलाइन नेटवर्क की विस्तृत जांच की जा रही है। सूत्रों के अनुसार जांच में यह भी सामने आया है कि फराज को कथित तौर पर नई पहचान देकर सोशल मीडिया नेटवर्क बढ़ाने और युवाओं तक पहुंच बनाने का काम सौंपा गया था। एटीएस अब इस बात की पड़ताल कर रही है कि उसके संपर्क किन लोगों से थे और कथित नेटवर्क का विस्तार किन-किन क्षेत्रों तक था। फराज की निशानदेही पर उसके सहयोगी नईम अब्दुल्ला को उत्तर प्रदेश के देवबंद से गिरफ्तार किया गया था। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह गिरफ्तारी पूरे नेटवर्क को समझने में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। दोनों आरोपियों से अलग-अलग तथा आमने-सामने बैठाकर पूछताछ की जा रही है ताकि कथित साजिश की परतें खोली जा सकें। गौरतलब है कि एटीएस ने गुरुवार तड़के भोपाल के काजी कैंप इलाके में फराज के घर पर दबिश देकर उसे हिरासत में लिया था। कार्रवाई को पूरी तरह गोपनीय रखा गया था। जांच एजेंसियों के अनुसार फराज स्थानीय स्तर पर एक निजी क्लीनिक में काम करता था और उसने देवबंद में धार्मिक शिक्षा भी प्राप्त की थी। वहीं उसकी मुलाकात नईम अब्दुल्ला से हुई थी। जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू डिजिटल साक्ष्य हैं। फराज का मोबाइल फोन जब्त कर फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। उसके सोशल मीडिया अकाउंट्स, चैट रिकॉर्ड, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और अन्य डिजिटल गतिविधियों का विश्लेषण किया जा रहा है। एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि आरोपियों के संपर्क देश और विदेश में किन लोगों से थे। इसके अलावा कथित विदेशी फंडिंग की भी जांच की जा रही है। एटीएस बैंकिंग रिकॉर्ड, लेन-देन और अन्य वित्तीय दस्तावेजों की जांच कर रही है ताकि किसी संदिग्ध आर्थिक सहायता के स्रोत का पता लगाया जा सके। अधिकारियों का कहना है कि जांच अभी प्रारंभिक चरण में है और सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। मामले में एटीएस, केंद्रीय एजेंसियों और अन्य जांच इकाइयों के सहयोग से पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने का प्रयास कर रही है। अधिकारियों के अनुसार जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
एजबेस्टन में टूटा दुबई का ऐतिहासिक रिकॉर्ड: भारत-पाकिस्तान महामुकाबले को देखने उमड़ा दर्शकों का सैलाब, महिला क्रिकेट में रचा गया नया इतिहास

नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय महिला क्रिकेट के इतिहास में रविवार का दिन एक नया मील का पत्थर साबित हुआ, जब आईसीसी विमेंस टी20 वर्ल्ड कप 2026 के ग्रुप चरण में भारत और पाकिस्तान की पारंपरिक प्रतिद्वंद्विता को देखने के लिए स्टेडियम में फैंस का अभूतपूर्व सैलाब उमड़ पड़ा। इंग्लैंड के बर्मिंघम स्थित ऐतिहासिक एजबेस्टन मैदान पर खेले गए इस महामुकाबले ने दर्शकों की उपस्थिति के मामले में दो साल पुराना एक बड़ा वैश्विक रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिया। इस मैच को लाइव देखने के लिए कुल 18,814 दर्शक स्टेडियम पहुंचे थे, जो महिला टी20 विश्व कप के इतिहास में किसी भी ग्रुप या लीग स्टेज के मैच के लिए अब तक की सबसे बड़ी दर्शक संख्या दर्ज की गई है। इस ऐतिहासिक उपस्थिति ने सिद्ध कर दिया है कि महिला क्रिकेट में भी भारत और पाकिस्तान के बीच होने वाले मुकाबलों की लोकप्रियता का ग्राफ वैश्विक स्तर पर बेहद तेजी से बढ़ रहा है। क्रिकेट जगत में दर्शकों की इस संख्या को एक क्रांतिकारी बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। इससे पहले विमेंस टी20 वर्ल्ड कप के इतिहास में किसी लीग मैच में सबसे ज्यादा दर्शक जुटने का रिकॉर्ड संयुक्त अरब अमीरात के नाम दर्ज था। छह अक्टूबर 2024 को दुबई इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में खेले गए भारत-पाकिस्तान मुकाबले के दौरान 15,935 दर्शकों की उपस्थिति दर्ज की गई थी, जिसे तब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड माना जा रहा था। बर्मिंघम के मैदान पर ब्रिटिश धरती पर क्रिकेट प्रेमियों ने इस पुराने रिकॉर्ड को पूरी तरह से चकनाचूर कर दिया। यह आंकड़ा स्पष्ट करता है कि न सिर्फ उपमहाद्वीप बल्कि यूरोपीय देशों में भी दक्षिण एशियाई क्रिकेट के इस बड़े टकराव को लेकर खेल प्रेमियों में जबरदस्त दीवानगी और लालायित रहने का भाव मौजूद है। मैदान के भीतर के प्रदर्शन की बात करें तो दर्शकों के इस भारी जनसमर्थन के बीच भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने अपने खेल का स्तर बेहद ऊंचा रखा और पाकिस्तान को हर मोर्चे पर पस्त कर दिया। पहले बल्लेबाजी करते हुए भारतीय टीम ने स्कोर बोर्ड पर 170 रनों का चुनौतीपूर्ण और विशाल स्कोर खड़ा किया था। इसके जवाब में 171 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी पाकिस्तानी टीम भारतीय गेंदबाजों के सटीक और धारदार आक्रमण के सामने बेबस नजर आई और महज 106 रनों के मामूली स्कोर पर पूरी तरह सिमट गई। भारत ने यह मुकाबला 64 रनों के एक बहुत बड़े अंतर से अपने नाम कर टूर्नामेंट के पॉइंट्स टेबल में अपनी स्थिति को सुदृढ़ कर लिया है। महिला टी20 विश्व कप के इतिहास में दोनों टीमों के बीच खेले गए कुल 9 मुकाबलों में यह भारत की 7वीं शानदार जीत है। इस ऐतिहासिक मुकाबले की सबसे बड़ी स्टार और मैच की वास्तविक हीरो ऑलराउंडर दीप्ति शर्मा रहीं। उन्होंने मैदान पर चौतरफा प्रदर्शन करते हुए न सिर्फ बल्ले से महत्वपूर्ण योगदान दिया बल्कि फील्डिंग के दौरान एक शानदार रन आउट भी किया। इसके बाद अपनी घातक स्पिन गेंदबाजी के दम पर उन्होंने पांच पाकिस्तानी बल्लेबाजों को पवेलियन की राह दिखाई। इस शानदार स्पेल की बदौलत दीप्ति शर्मा ने अंतरराष्ट्रीय टी20 क्रिकेट के इतिहास में सबसे ज्यादा विकेट चटकाने वाली दुनिया की अग्रणी गेंदबाज बनने का गौरव भी हासिल कर लिया है। उनके इस ऐतिहासिक कीर्तिमान और टीम की प्रचंड जीत ने एजबेस्टन में मौजूद हजारों भारतीय समर्थकों के उत्साह को कई गुना बढ़ा दिया। भारतीय महिला टीम इस एकतरफा और रिकॉर्डतोड़ जीत से मिले आत्मविश्वास के साथ अब अपने अगले अभियान की तैयारियों में जुट गई है। टूर्नामेंट के ग्रुप चरण में भारत का अगला मुकाबला आगामी 17 जून को नीदरलैंड्स के खिलाफ होना तय है। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि इस मैच में बनी नई ऐतिहासिक दर्शक संख्या और दीप्ति शर्मा जैसे सीनियर खिलाड़ियों का यह विश्वस्तरीय प्रदर्शन पूरी टीम को पहली बार टी20 विश्व कप का खिताब जीतने के अपने मुख्य लक्ष्य की ओर तेजी से आगे बढ़ने में एक बड़ी मनोवैज्ञानिक ऊर्जा प्रदान करेगा।
क्या सचमुच धरती पर आते हैं एलियन? जानिए क्यों अब तक नहीं हो पाया दूसरे ग्रहों के जीवों से संपर्क

नई दिल्ली । क्या ब्रह्मांड में पृथ्वी के अलावा भी कहीं जीवन मौजूद है? यह सवाल विज्ञान की दुनिया के सबसे बड़े रहस्यों में से एक बना हुआ है। एलियन यानी पृथ्वी के बाहर रहने वाले संभावित जीवों को लेकर वर्षों से दावे और कहानियां सामने आती रही हैं, लेकिन अब तक ऐसा कोई ठोस वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिला है जो उनके अस्तित्व या पृथ्वी पर आने की पुष्टि कर सके। हाल के वर्षों में अमेरिका सहित कई देशों ने अनआइडेंटिफाइड एरियल फिनोमेना (UAP) से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक किए हैं। इसके बावजूद वैज्ञानिक समुदाय का मानना है कि अभी तक किसी भी घटना को एलियन गतिविधि से जोड़ने वाला पुख्ता सबूत सामने नहीं आया है। दूसरी ओर, सर्वेक्षणों में बड़ी संख्या में लोग यह मानते हैं कि ब्रह्मांड में कहीं न कहीं जीवन अवश्य मौजूद होगा। हमारी कल्पना से कहीं अधिक विशाल है ब्रह्मांडविशेषज्ञों के अनुसार ब्रह्मांड इतना विशाल है कि उसकी पूरी सीमा का अनुमान लगाना भी मुश्किल है। पृथ्वी के सबसे नजदीकी तारों में से एक Proxima Centauri लगभग 40 ट्रिलियन किलोमीटर दूर स्थित है। इतनी दूरी तय करने में प्रकाश को भी करीब 4.3 वर्ष लग जाते हैं। आज तक मानव द्वारा विकसित अंतरिक्ष यान प्रकाश की गति के बेहद छोटे हिस्से तक ही पहुंच पाए हैं। मौजूदा तकनीक के अनुसार किसी अंतरिक्ष यान को प्रॉक्सिमा सेंटॉरी तक पहुंचने में हजारों वर्ष लग सकते हैं। ऐसे में दूसरे ग्रहों तक यात्रा करना या वहां से किसी सभ्यता का पृथ्वी तक पहुंचना बेहद कठिन माना जाता है। अंतरिक्ष यात्रा की सबसे बड़ी चुनौती है ऊर्जावैज्ञानिकों का कहना है कि अंतरतारकीय यात्रा के लिए अकल्पनीय मात्रा में ऊर्जा की आवश्यकता होगी। यदि कोई यान प्रकाश की गति के करीब पहुंचना चाहता है, तो उसे ऊर्जा का ऐसा स्रोत चाहिए होगा जो वर्तमान विज्ञान की पहुंच से बहुत आगे है। इसके अलावा अंतरिक्ष पूरी तरह खाली नहीं है। वहां गैसों और सूक्ष्म कणों की मौजूदगी होती है। अत्यधिक गति से यात्रा करने पर इन कणों से टकराव भी विनाशकारी साबित हो सकता है। यही कारण है कि लंबी दूरी की अंतरिक्ष यात्राओं को लेकर अभी भी कई तकनीकी चुनौतियां बनी हुई हैं। क्या एलियन पृथ्वी पर आना चाहेंगे?कुछ वैज्ञानिक यह भी सवाल उठाते हैं कि यदि कोई सभ्यता इतनी उन्नत है कि वह तारों के बीच यात्रा कर सकती है, तो उसे पृथ्वी पर आने की आवश्यकता क्यों होगी? संभव है कि ऐसी सभ्यता अपनी जरूरत की लगभग हर चीज अपने ग्रह या तकनीक की मदद से हासिल कर सकती हो। इसी वजह से कई वैज्ञानिक मानते हैं कि एलियन सभ्यताओं के होने की संभावना और उनके पृथ्वी तक पहुंचने की संभावना दो अलग-अलग बातें हैं। पृथ्वी का वातावरण हर जीव के लिए उपयुक्त नहींपृथ्वी का जैवमंडल यहां मौजूद जीवन के लिए अनुकूल है, लेकिन जरूरी नहीं कि किसी दूसरे ग्रह के जीव भी इसी वातावरण में जीवित रह सकें। पृथ्वी पर जीवन के विकास में ऑक्सीजन की महत्वपूर्ण भूमिका रही है, लेकिन संभव है कि किसी अन्य ग्रह पर जीवन पूरी तरह अलग रासायनिक परिस्थितियों में विकसित हुआ हो। ऐसी स्थिति में यदि कोई बाहरी जीव पृथ्वी पर आए भी, तो उसे विशेष सुरक्षा उपकरणों या अलग वातावरण की आवश्यकता पड़ सकती है। अरबों ग्रहों में जीवन की तलाश जारीवैज्ञानिकों ने अब तक हजारों एक्सोप्लैनेट यानी सौरमंडल के बाहर मौजूद ग्रहों की खोज की है। केवल हमारी आकाशगंगा में ही अरबों तारे और उनसे जुड़े असंख्य ग्रह मौजूद होने का अनुमान है। ऐसे में यह मानना कठिन है कि पूरे ब्रह्मांड में पृथ्वी ही जीवन का एकमात्र केंद्र हो। फिर भी आज तक किसी एलियन सभ्यता या पृथ्वी पर उनके आगमन का प्रमाण नहीं मिला है। विज्ञान लगातार नए ग्रहों और संभावित जीवन की तलाश में जुटा है, लेकिन फिलहाल एलियन का अस्तित्व एक रोमांचक संभावना है, सिद्ध तथ्य नहीं।