Chambalkichugli.com

धार सड़क हादसे के बाद पसरा मातम: 16 मृतकों का हुआ अंतिम संस्कार, सरकार ने की आर्थिक मदद की घोषणा

भोपाल। मध्यप्रदेश के धार जिला में हुए भीषण सड़क हादसे के बाद गुरुवार को 16 मृतकों का उनके-अपने गांवों में अंतिम संस्कार कर दिया गया। इनमें 9 लोग नयापुरा, 5 सेमलीपुरा और 2 रामपुरा के निवासी थे। हादसे के बाद तीनों गांवों में शोक का माहौल है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। यह दर्दनाक हादसा इंदौर-अहमदाबाद राष्ट्रीय राजमार्ग पर चिकलिया फाटा के पास बुधवार रात हुआ। मजदूरों से भरा एक तेज रफ्तार पिकअप वाहन टायर फटने के कारण अनियंत्रित हो गया और कई बार पलटते हुए डिवाइडर पार कर सामने से आ रही स्कॉर्पियो से टकरा गया। इस दुर्घटना में 6 बच्चों सहित 16 लोगों की मौत हो गई। पुलिस के अनुसार, पिकअप में करीब 46 मजदूर सवार थे और वाहन लगभग 100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चल रहा था। हादसे के बाद स्थानीय लोगों और राहगीरों ने तुरंत राहत कार्य शुरू किया और घायलों को बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया। इंदौर संभागायुक्त सुदाम खाड़े के मुताबिक, घायलों के इलाज के लिए प्रशासन ने विशेष इंतजाम किए हैं। गंभीर रूप से घायल 7 लोगों को बेहतर उपचार के लिए इंदौर रेफर किया गया है, जबकि अन्य घायलों का इलाज जिला अस्पताल और निजी अस्पतालों में जारी है। धार के पुलिस अधीक्षक मयंक अवस्थी ने बताया कि तेज रफ्तार और टायर फटने के कारण चालक वाहन पर नियंत्रण खो बैठा, जिससे यह हादसा हुआ। गुरुवार सुबह सभी मृतकों का पोस्टमार्टम कर शव परिजनों को सौंप दिए गए। प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री ने जताया दुख, सहायता राशि का ऐलान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हादसे पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना जताई। उन्होंने प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपए और घायलों को 50-50 हजार रुपए की सहायता देने की घोषणा की। वहीं, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी घटना को हृदय विदारक बताते हुए मृतकों के परिजनों को 4-4 लाख रुपए, गंभीर घायलों को 1-1 लाख रुपए और अन्य घायलों को 50-50 हजार रुपए की आर्थिक सहायता देने के निर्देश दिए हैं। साथ ही सभी घायलों का नि:शुल्क इलाज कराने की बात कही गई है। प्रशासनिक अधिकारियों को मौके पर पहुंचकर राहत और उपचार व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

अशोक पंडित ने अभिनय की दुनिया में रखा कदम, वायरल हुआ नया रूप।

नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा के जाने-माने निर्माता, निर्देशक और सामाजिक मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखने वाले अशोक पंडित ने अपने प्रशंसकों को एक बड़ा सरप्राइज दिया है। दशकों तक कैमरे के पीछे रहकर सफल फिल्मों का निर्देशन और निर्माण करने वाले पंडित अब खुद कैमरे के सामने एक अभिनेता के रूप में अवतरित हुए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से अपने अभिनय करियर की पहली झलक साझा करते हुए इस नए सफर का ऐलान किया है। अशोक पंडित ने अपने प्रशंसकों से अपील की है कि वे उनके इस नए और अनदेखे रूप को देखें और बताएं कि वे एक कलाकार के तौर पर कितने प्रभावी नजर आ रहे हैं। अशोक पंडित के इस ‘एक्टर’ बनने की कहानी भी काफी दिलचस्प है। उन्होंने खुलासा किया कि इस भूमिका का बीज काफी समय पहले बोया गया था, जब उनके करीबी फिल्मकार मित्रों ने उन्हें एक विशेष किरदार के लिए तैयार किया। दरअसल, फिल्म की कास्टिंग टीम का मानना था कि एक विशिष्ट चरित्र के लिए अशोक पंडित से बेहतर कोई दूसरा विकल्प नहीं हो सकता। शुरुआत में अशोक पंडित ने इस प्रस्ताव को महज एक मजाक समझा और काफी समय तक वे इसे टालते रहे। लेकिन अपने दोस्तों के अटूट विश्वास और बार-बार किए गए आग्रह के सामने उन्होंने अंततः घुटने टेक दिए और पर्दे पर आने का फैसला कर लिया। अपने अनुभव को साझा करते हुए अशोक पंडित ने बताया कि अभिनय करना उनके लिए किसी रोमांच से कम नहीं था। उन्होंने स्वीकार किया कि शुरुआत में झिझक के बावजूद, जैसे-जैसे शूटिंग आगे बढ़ी, उन्हें कैमरे के सामने किरदार को जीने में बहुत आनंद आने लगा। उन्होंने निर्देशक और अपनी टीम का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके प्रोत्साहन की वजह से ही वे इस कठिन चुनौती को स्वीकार कर पाए। फिल्म जगत से जुड़े लोगों ने भी उनके इस नए अवतार की सराहना की है और इसे एक साहसी कदम बताया है। फिल्म के निर्देशक ने भी अशोक पंडित के साथ काम करने को एक सम्मान की बात बताते हुए उनकी ऊर्जा और समर्पण की प्रशंसा की है। अशोक पंडित हमेशा से ही अपनी सक्रियता के लिए जाने जाते रहे हैं, फिर चाहे वह फिल्म उद्योग के हित की बात हो या व्यक्तिगत विचार। उनके इस नए रचनात्मक कदम ने सोशल मीडिया पर काफी हलचल पैदा कर दी है। उनके फॉलोअर्स इस बात से हैरान और उत्साहित हैं कि एक गंभीर फिल्म निर्माता के भीतर एक मंझा हुआ अभिनेता भी छिपा हुआ था। अब देखना यह होगा कि दर्शकों को पर्दे पर उनका यह नया अंदाज़ कितना पसंद आता है और क्या वे भविष्य में और भी बड़े प्रोजेक्ट्स में अभिनय करते नजर आएंगे।

अक्षय कुमार की फिल्म ‘भूत बंगला’ ने रचा इतिहास, वर्ल्डवाइड 200 करोड़ का आंकड़ा पार

नई दिल्ली । बॉक्स ऑफिस पर इस समय अगर किसी फिल्म की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है, तो वह अक्षय कुमार की हॉरर-कॉमेडी ‘भूत बंगला’ है। रिलीज के कुछ ही दिनों में इस फिल्म ने अपनी मजबूत पकड़ बना ली थी और अब 13वें दिन तक पहुंचते-पहुंचते इसने वर्ल्डवाइड 200 करोड़ रुपये से अधिक की कमाई कर एक बड़ा मुकाम हासिल कर लिया है। फिल्म की कहानी और मनोरंजन शैली ने दर्शकों को सिनेमाघरों तक खींचने में अहम भूमिका निभाई है। हॉरर और कॉमेडी के अनोखे मिश्रण ने इसे एक फैमिली एंटरटेनर बना दिया है, जिसे अलग-अलग उम्र के दर्शक पसंद कर रहे हैं। यही वजह है कि शुरुआती दिनों से ही फिल्म की कमाई स्थिर बनी रही और किसी बड़े उतार-चढ़ाव के बिना आगे बढ़ती रही। भारत में फिल्म ने पहले वीकेंड में ही मजबूत शुरुआत की थी। दर्शकों की अच्छी प्रतिक्रिया के चलते इसकी कमाई लगातार बढ़ती गई और दूसरे हफ्ते में भी इसने अपनी पकड़ बनाए रखी। हालांकि कुछ दिनों में मामूली गिरावट देखने को मिली, लेकिन कुल मिलाकर फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर अपनी मजबूत स्थिति बनाए रखी। इस फिल्म की सफलता में अक्षय कुमार और वामिका गब्बी की नई जोड़ी भी एक बड़ा कारण मानी जा रही है। दोनों कलाकारों की ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री को दर्शकों ने काफी सराहा है, जिससे फिल्म को अतिरिक्त बढ़त मिली। साथ ही फिल्म में मौजूद अन्य कलाकारों के प्रदर्शन ने भी कहानी को और प्रभावशाली बनाया है। विदेशी बाजारों में भी फिल्म ने शुरुआती दिनों में अच्छी पकड़ बनाई। हालांकि बाद में वहां इसकी रफ्तार थोड़ी धीमी हो गई, लेकिन इसके बावजूद कुल कमाई में लगातार इजाफा होता रहा। इंटरनेशनल स्तर पर फिल्म की मौजूदगी ने इसे 200 करोड़ क्लब तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस उपलब्धि के साथ ‘भूत बंगला’ उन चुनिंदा फिल्मों में शामिल हो गई है जिन्होंने कम समय में वैश्विक स्तर पर बड़ी कमाई हासिल की है। हॉरर-कॉमेडी शैली में यह फिल्म अपनी अलग पहचान बनाने में सफल रही है और कई पिछली सफल फिल्मों को पीछे छोड़ चुकी है। फिल्म की लगातार बढ़ती कमाई यह संकेत देती है कि दर्शकों में इसका क्रेज अभी भी बना हुआ है। तीसरे हफ्ते में भी इसके प्रदर्शन पर नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि यह आगे और नए रिकॉर्ड अपने नाम कर सकती है।

भोपाल में ठेका और आउटसोर्स कर्मचारियों का प्रदर्शन, न्यूनतम वेतन बढ़ाने की उठाई मांग, निकाली रैली

भोपाल । राजधानी भोपाल में ठेका, अस्थायी और आउटसोर्स कर्मचारियों ने गुरुवार को अपने वेतन और नौकरी की स्थिति को लेकर जोरदार आंदोलन किया। बड़ी संख्या में कर्मचारियों ने नीलम पार्क क्षेत्र में रैली निकालकर विरोध प्रदर्शन किया और पार्क में धरना देते हुए जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने न्यूनतम वेतन बढ़ाने की मांग के साथ सांकेतिक सामूहिक आत्मदाह की चेतावनी भी दी है। कर्मचारियों का कहना है कि राज्य सरकार ने न्यूनतम मजदूरी 12,425 रुपए से बढ़ाकर 16,769 रुपए प्रतिमाह तय की है, लेकिन यह उनके लिए पर्याप्त नहीं है। उनका तर्क है कि न्यूनतम वेतन कम से कम 26,000 रुपए प्रतिमाह होना चाहिए। साथ ही उनका आरोप है कि केंद्र सरकार के मानकों के बावजूद राज्य के कई विभागों में मजदूरों से 3 से 5 हजार रुपए प्रतिमाह पर काम कराया जा रहा है, जिससे असंतोष लगातार बढ़ रहा है। कई विभागों में बेहद कम वेतन देने का आरोप प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि अलग-अलग विभागों में कार्यरत श्रमिकों को निर्धारित न्यूनतम वेतन भी नहीं दिया जा रहा है। औद्योगिक क्षेत्रों, पावर प्लांट और सीमेंट उद्योगों में भी ठेका श्रमिकों को पूरी मजदूरी नहीं मिलने की बात कही गई है। कर्मचारियों के अनुसार स्कूलों, छात्रावासों और आयुष विभाग के अंशकालीन कर्मियों को 4 से 5 हजार रुपए मिलते हैं। ग्राम पंचायतों में चौकीदार, पंप ऑपरेटर और सफाईकर्मियों को 3 से 4 हजार रुपए, स्वास्थ्य विभाग के आउटसोर्स कर्मियों को 7 से 8 हजार रुपए, राजस्व विभाग के लोक यूथ सर्वेयरों को करीब 1 हजार रुपए, मध्यान्ह भोजन कार्यकर्ताओं को लगभग 4 हजार रुपए और मनरेगा मेट श्रमिकों को 2 हजार रुपए से भी कम भुगतान किया जाता है। सरकार से स्थायी समाधान और वेतन गारंटी की मांग अस्थायी और आउटसोर्स कर्मचारी मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष वासुदेव शर्मा ने बताया कि अब तक 50 हजार से अधिक आवेदन सरकार को दिए जा चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि ये कर्मचारी सरकार की योजनाओं को जमीन पर लागू करने में अहम भूमिका निभाते हैं, लेकिन खुद ही न्यूनतम वेतन और स्थायी नौकरी से वंचित हैं। कर्मचारियों ने सरकार से न्यूनतम वेतन की गारंटी देने, इसे बढ़ाकर 26 हजार रुपए करने और आउटसोर्स व्यवस्था की समीक्षा कर स्थायी रोजगार देने की मांग की है।

बीजेपी विधायक पर गंभीर आरोप: महिला कांग्रेस पहुंची राज्यपाल के दरबार, विधायकी रद्द करने की मांग

भोपाल । भोपाल में सियासी हलचल उस वक्त तेज हो गई जब महिला कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल ने मंगूभाई पटेल से मुलाकात कर बीजेपी विधायक के खिलाफ गंभीर आरोपों को लेकर शिकायत दर्ज कराई। यह मामला चिंतामणि मालवीय से जुड़ा है, जिन पर एक बुजुर्ग महिला के घर पर कब्जा करने सहित अन्य गंभीर आरोप लगाए गए हैं। महिला प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रीना बौरासी सेतिया के नेतृत्व में पहुंचे प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल को ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि उज्जैन में एक वृद्ध महिला की संपत्ति पर कथित रूप से अवैध कब्जा किया गया है। इस संबंध में उन्होंने दस्तावेज और एफिडेविट भी राज्यपाल को सौंपे हैं, ताकि मामले की निष्पक्ष जांच हो सके और पीड़ित को न्याय मिल सके। प्रतिनिधिमंडल ने यह भी आरोप लगाया कि संबंधित विधायक के खिलाफ पहले से ही यौन शोषण जैसे गंभीर मामलों में शिकायतें दर्ज हैं। ऐसे में उन्होंने राज्यपाल से मांग की कि इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए विधायक की सदस्यता समाप्त की जाए। उनका कहना है कि जनप्रतिनिधियों पर इस तरह के आरोप लोकतांत्रिक व्यवस्था और समाज के विश्वास को आहत करते हैं, इसलिए कड़ी कार्रवाई जरूरी है। मुलाकात के दौरान महिला कांग्रेस ने केवल इस मामले को ही नहीं उठाया, बल्कि महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर भी अपनी मांग रखी। उन्होंने लोकसभा और मध्यप्रदेश विधानसभा में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने की मांग दोहराई। प्रतिनिधिमंडल का कहना था कि जब तक महिलाओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिलेगा, तब तक उनके मुद्दों को प्रभावी तरीके से उठाया नहीं जा सकेगा। इस पूरे घटनाक्रम के बाद प्रदेश की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। अब सभी की नजरें राज्यपाल के रुख और आगे होने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि आरोपों की पुष्टि होती है, तो यह मामला प्रदेश की राजनीति में बड़ा मोड़ ला सकता है।

सादगी और ताकत का मेल-नाना पाटेकर की फिटनेस ने सोशल मीडिया पर मचाई धूम..

नई दिल्ली । 76 साल की उम्र में जहां ज्यादातर लोग आराम और धीमी दिनचर्या को प्राथमिकता देते हैं, वहीं नाना पाटेकर अपनी फिटनेस और अनुशासन से एक अलग ही मिसाल पेश कर रहे हैं। उनका हाल ही में सामने आया जिम वीडियो लोगों के बीच तेजी से चर्चा का विषय बन गया है, जिसमें उनकी ऊर्जा और फिटनेस देखकर हर कोई हैरान है। इस वीडियो में नाना पाटेकर बेहद साधारण और सहज अंदाज में नजर आ रहे हैं। उन्होंने हल्के कपड़े पहने हैं और गले में एक गमछा डाला हुआ है। इस सादगी के बावजूद उनका फिटनेस लेवल देखकर यह साफ झलकता है कि वह अपनी सेहत को लेकर कितने गंभीर और अनुशासित हैं। वीडियो में वह जिम में ट्राइसेप डिप्स करते हुए दिखाई देते हैं। खास बात यह है कि वह बिना ज्यादा रुकावट के लगातार 15 डिप्स पूरे करते हैं। उनकी यह क्षमता और स्थिरता देखकर वहां मौजूद लोग भी प्रभावित हो जाते हैं। एक्सरसाइज के दौरान उनका आत्मविश्वास और सहजता यह दर्शाती है कि उन्होंने लंबे समय से फिटनेस को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाया हुआ है। जैसे ही यह वीडियो सामने आया, सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रियाएं तेज हो गईं। कई लोगों ने इसे प्रेरणादायक बताया और उनकी फिटनेस को सलाम किया। उनके इस जज्बे को देखकर युवा वर्ग भी खुद को फिट रखने के लिए प्रेरित होता नजर आया। नाना पाटेकर की यह फिटनेस कहानी यह साबित करती है कि उम्र चाहे कितनी भी हो, अगर अनुशासन और नियमित अभ्यास बना रहे तो शरीर को लंबे समय तक स्वस्थ और सक्रिय रखा जा सकता है।

पीलीभीत में कृषि इतिहास का नया अध्याय: देश का पहला बासमती और जैविक प्रशिक्षण केंद्र तैयार होगा

नई दिल्ली । पीलीभीत की धरती अब कृषि नवाचार के एक नए अध्याय की गवाह बनने जा रही है, जहां बासमती और जैविक खेती के लिए देश का पहला समर्पित प्रशिक्षण केंद्र विकसित किया जाएगा। यह पहल न केवल क्षेत्रीय किसानों के लिए एक बड़ी उपलब्धि है, बल्कि पूरे देश के कृषि क्षेत्र में आधुनिक और वैज्ञानिक खेती की दिशा में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन के रूप में देखी जा रही है। इस परियोजना के लिए लगभग 7 एकड़ भूमि का चयन किया गया है, जिसे लंबे समय के लिए उपयोग में लेने की अनुमति दी गई है। इस केंद्र को इस तरह डिजाइन किया जा रहा है कि यह केवल एक प्रशिक्षण स्थल न होकर कृषि ज्ञान, अनुसंधान और नवाचार का एक व्यापक केंद्र बन सके। यहां किसानों को बासमती धान की पारंपरिक खेती से लेकर जैविक और उन्नत तकनीकों तक का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस प्रस्तावित केंद्र में आधुनिक सुविधाओं का समावेश किया जाएगा, जिसमें प्रशिक्षण कक्ष, प्रयोगशालाएं, सम्मेलन स्थल, प्रदर्शन गैलरी और एक विशेष संग्रहालय शामिल होंगे। यहां बासमती की विभिन्न किस्मों और जैविक खेती के तरीकों को वैज्ञानिक तरीके से प्रदर्शित किया जाएगा, जिससे किसानों और विद्यार्थियों को वास्तविक अनुभव प्राप्त हो सकेगा। इस केंद्र की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह भारत का पहला ऐसा संस्थान होगा जहां पारंपरिक और जैविक दोनों प्रकार की बासमती खेती को एक साथ सिखाया और समझाया जाएगा। इससे किसानों को न केवल उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी, बल्कि वे पर्यावरण के अनुकूल खेती की ओर भी प्रेरित होंगे। इसके अलावा, इस केंद्र को राष्ट्रीय स्तर के अनुसंधान नेटवर्क से भी जोड़ा जा रहा है, जहां बासमती धान की नई किस्मों का परीक्षण और उनके प्रदर्शन का मूल्यांकन किया जाएगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विभिन्न कृषि क्षेत्रों के अनुसार सर्वोत्तम बीजों का विकास किया जा सके, जिससे किसानों की आय में वृद्धि हो और उत्पादन की गुणवत्ता बेहतर हो। कृषि क्षेत्र में तकनीक के बढ़ते उपयोग को ध्यान में रखते हुए एक और महत्वपूर्ण पहल के तहत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित बासमती धान सर्वे परियोजना भी शुरू की गई है। इस परियोजना के जरिए बड़े पैमाने पर कृषि भूमि का अध्ययन किया जाएगा और लाखों किसानों से जुड़े डेटा का विश्लेषण कर फसल की स्थिति और उत्पादन क्षमता का आकलन किया जाएगा। इससे कृषि योजना और निर्यात रणनीति को अधिक सटीक और प्रभावी बनाया जा सकेगा। यह पूरी योजना भारतीय बासमती को वैश्विक बाजार में और मजबूत स्थिति दिलाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। वर्तमान में बासमती चावल अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी खास पहचान रखता है और इसका निर्यात लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में यह प्रशिक्षण केंद्र किसानों को आधुनिक तकनीक से जोड़कर न केवल उत्पादन बढ़ाएगा, बल्कि भारत की कृषि अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती प्रदान करेगा।

किसानों के हित में बड़ा कदम: समर्थन मूल्य पर 2625 रुपए में खरीदी, तारीख बढ़ाकर 23 मई तक

भोपाल । भोपाल में किसानों को राहत देते हुए मोहन यादव ने गेहूं उपार्जन की अंतिम तिथि बढ़ाने का बड़ा फैसला लिया है। पहले जहां यह प्रक्रिया 9 मई तक निर्धारित थी, अब इसे बढ़ाकर 23 मई कर दिया गया है। इस फैसले से उन किसानों को राहत मिलेगी जो किसी कारणवश अब तक अपनी उपज नहीं बेच पाए थे। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि प्रदेश के सभी उपार्जन केंद्रों पर व्यवस्थाएं पूरी तरह दुरुस्त और किसानों के अनुकूल हों, ताकि उन्हें किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि उपार्जन प्रक्रिया में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने निर्देश दिए कि केंद्रों पर पीने के पानी, छायादार बैठने की व्यवस्था, स्वच्छता और अन्य आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं। साथ ही किसानों को यह सुविधा भी दी गई है कि वे अपने जिले के किसी भी उपार्जन केंद्र पर अपनी उपज बेच सकते हैं, जिससे उनकी सुविधा और विकल्प दोनों बढ़े हैं। गेहूं खरीदी को सुगम बनाने के लिए सरकार ने एफएक्यू मापदंडों में भी शिथिलता दी है, ताकि अधिक से अधिक किसानों की उपज खरीदी जा सके। इसके अलावा तौल प्रक्रिया को तेज और पारदर्शी बनाने के लिए बारदाने, तौल कांटे, हम्माल तुलावटी, सिलाई मशीन, कंप्यूटर, नेट कनेक्शन, कूपन और गुणवत्ता परीक्षण उपकरण जैसी व्यवस्थाएं भी केंद्रों पर उपलब्ध कराई गई हैं। उपज की साफ-सफाई के लिए पंखा और छन्ना जैसी सुविधाएं भी सुनिश्चित की गई हैं, जिससे किसानों को बेहतर अनुभव मिल सके। राज्य सरकार किसानों से 2585 रुपये प्रति क्विंटल के समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीद रही है, जिसमें 40 रुपये प्रति क्विंटल का बोनस जोड़कर कुल 2625 रुपये प्रति क्विंटल की दर से भुगतान किया जा रहा है। यह दर किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत करने और उन्हें उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के उद्देश्य से तय की गई है। मुख्यमंत्री ने यह भी संकेत दिए हैं कि वे स्वयं भी उपार्जन केंद्रों का आकस्मिक निरीक्षण कर सकते हैं, ताकि जमीनी स्तर पर व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति का आकलन किया जा सके। इस कदम से प्रशासनिक व्यवस्था में जवाबदेही बढ़ेगी और अधिकारियों पर बेहतर काम करने का दबाव भी रहेगा।सरकार का यह फैसला किसानों के हित में एक बड़ा कदम माना जा रहा है, जिससे उन्हें अपनी फसल बेचने के लिए पर्याप्त समय मिलेगा और उपार्जन प्रक्रिया अधिक पारदर्शी एवं सुचारू रूप से संचालित हो सकेगी।

आईसीएसई-आईएससी परिणाम 2026: छात्राओं ने फिर मारी बाजी, दोनों कक्षाओं में रिकॉर्ड पास प्रतिशत दर्ज

नई दिल्ली । देशभर के लाखों छात्रों के लिए इंतजार की घड़ी आखिरकार खत्म हो गई है, क्योंकि आईसीएसई और आईएससी बोर्ड के वर्ष 2026 के परिणाम घोषित कर दिए गए हैं। परिणाम जारी होते ही छात्रों और अभिभावकों के बीच उत्साह और राहत का माहौल देखने को मिला। इस बार के नतीजों में एक बार फिर छात्रों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए सफलता का नया स्तर स्थापित किया है। 10वीं और 12वीं दोनों कक्षाओं के परिणाम इस बार बेहद प्रभावशाली रहे हैं। 10वीं कक्षा में कुल 99.18 प्रतिशत छात्रों ने सफलता प्राप्त की, जबकि 12वीं कक्षा में 99.13 प्रतिशत छात्र उत्तीर्ण हुए हैं। यह आंकड़े इस बात को दर्शाते हैं कि इस वर्ष की परीक्षाओं में छात्रों ने पूरी मेहनत और तैयारी के साथ भाग लिया। लिंग आधारित प्रदर्शन की बात करें तो इस बार भी छात्राओं ने छात्रों की तुलना में बेहतर परिणाम हासिल किए हैं। 10वीं में छात्राओं का पास प्रतिशत 99.46 रहा, जबकि छात्रों का 98.93 प्रतिशत दर्ज किया गया। इसी तरह 12वीं में भी छात्राओं ने 99.48 प्रतिशत के साथ बेहतर प्रदर्शन किया, जबकि छात्रों का पास प्रतिशत 98.81 रहा। यह लगातार देखा जा रहा है कि शैक्षणिक प्रदर्शन में छात्राएं लगातार आगे निकल रही हैं। इस वर्ष दोनों कक्षाओं में मिलाकर चार लाख से अधिक छात्र परीक्षा में शामिल हुए थे। इनमें 10वीं कक्षा के लगभग डेढ़ लाख और 12वीं कक्षा के लगभग ढाई लाख से अधिक छात्र शामिल थे। परीक्षा का आयोजन निर्धारित केंद्रों पर सफलतापूर्वक संपन्न हुआ था, जिसमें छात्रों ने विभिन्न विषयों में अपनी योग्यता का प्रदर्शन किया। परीक्षा परिणाम जारी होने के बाद छात्रों को अपना स्कोरकार्ड प्राप्त करने की सुविधा भी दी गई है। छात्र अपने यूनिक आईडी और अन्य आवश्यक विवरणों की मदद से अपना परिणाम देख सकते हैं और उसे डाउनलोड भी कर सकते हैं। इसके लिए ऑनलाइन माध्यम के साथ-साथ अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है, जिससे छात्रों को किसी प्रकार की परेशानी न हो। इस बार के परिणामों ने एक बार फिर शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर सुधार और छात्रों की बढ़ती क्षमता को उजागर किया है। शिक्षकों और अभिभावकों ने भी छात्रों की इस उपलब्धि पर खुशी जताई है और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।

एक अलग खेल में भारत का नाम रोशन-संदीप कुमार की संघर्ष और सफलता की कहानी..

नई दिल्ली । भारतीय एथलेटिक्स में ऐसे कई खिलाड़ी हैं जिन्होंने अपनी मेहनत और समर्पण से देश को नई पहचान दिलाई है, और उन्हीं में एक नाम संदीप कुमार का भी है। हरियाणा के एक साधारण परिवार से आने वाले संदीप ने उस खेल को चुना, जो देश में उतना लोकप्रिय नहीं था, लेकिन अपनी लगन और अनुशासन के दम पर उन्होंने इसे नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। रेस वॉकिंग एक बेहद तकनीकी और चुनौतीपूर्ण खेल माना जाता है, जिसमें सिर्फ गति ही नहीं बल्कि सही तकनीक बनाए रखना भी जरूरी होता है। इस खेल में लगातार अभ्यास और मानसिक मजबूती की आवश्यकता होती है। संदीप कुमार ने इस चुनौती को स्वीकार किया और वर्षों तक कड़ी मेहनत कर खुद को इस स्तर तक तैयार किया कि वह अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व कर सके। उनका सफर धीरे-धीरे राष्ट्रीय स्तर से अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचा। लगातार बेहतर प्रदर्शन के दम पर उन्हें बड़े खेल आयोजनों में भारत का प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिला। इस दौरान उन्होंने एशियाई खेलों और अन्य अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेकर अनुभव हासिल किया और अपने खेल को और मजबूत बनाया। सबसे महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब उन्हें ओलंपिक जैसे बड़े मंच पर देश का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिला। वहां पहुंचना ही किसी भी खिलाड़ी के लिए बड़ी उपलब्धि माना जाता है, और संदीप ने इस अवसर पर अपने खेल से देश का नाम रोशन किया। हालांकि पदक हासिल करना आसान नहीं था, लेकिन उनका प्रदर्शन उनकी क्षमता और मेहनत को दर्शाता है। इसके बाद उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स जैसे बड़े मंच पर भी सफलता हासिल की और पदक जीतकर अपनी मेहनत का परिणाम साबित किया। यह उपलब्धि उनके करियर का एक अहम हिस्सा बनी और देश में रेस वॉकिंग को लेकर जागरूकता भी बढ़ी। संदीप कुमार की कहानी इस बात का उदाहरण है कि अगर मेहनत और अनुशासन के साथ किसी लक्ष्य पर लगातार काम किया जाए, तो कम लोकप्रिय खेलों में भी भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई जा सकती है।