नगरीय सुधार की नई दिशा भोपाल में कार्यशाला शुरू रोजगार और राजस्व बढ़ाने पर फोकस

भोपाल । मध्यप्रदेश में नगरीय विकास को नई दिशा देने के उद्देश्य से राजधानी भोपाल में सुंदरलाल पटवा राष्ट्रीय नगर प्रबंधन संस्थान में शहरी सुधार कार्यशाला का शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने अधिकारियों को संबोधित करते हुए स्पष्ट संदेश दिया कि प्रदेश के सभी नगरीय निकायों को अब स्वावलंबी और विकास केंद्र के रूप में स्थापित करना होगा। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ जिसके बाद मंत्री ने अधिकारियों से दूरदर्शी सोच और कर्मठता के साथ शहरों के समग्र विकास के लिए काम करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रशासन केवल नियमों से नहीं बल्कि व्यवहार और संवेदनशीलता से चलता है। जनसेवा को सर्वोपरि रखते हुए ही एक अधिकारी अपनी वास्तविक पहचान बना सकता है। कैलाश विजयवर्गीय ने अधिकारियों को प्रेरित करते हुए कहा कि उन्हें हमेशा विद्यार्थी भाव के साथ सीखते रहना चाहिए। यही दृष्टिकोण उन्हें व्यक्तिगत और प्रशासनिक दोनों स्तर पर उत्कृष्ट बनाएगा। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत के संकल्प का उल्लेख करते हुए कहा कि नगरीय निकायों को भी इसी दिशा में आगे बढ़ाना होगा ताकि शहर केवल प्रशासनिक इकाई न रहकर विकास के केंद्र बन सकें। मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि अब शहरी विकास को केवल सड़क और जल आपूर्ति तक सीमित नहीं रखा जा सकता। शहरों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए रोजगार सृजन और राजस्व वृद्धि पर विशेष ध्यान देना जरूरी है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे नवाचार अपनाएं और शहरों में नई संभावनाओं को तलाशें ताकि स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियां बढ़ सकें। नगरीय निकायों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के लिए भूमि मुद्रीकरण और संसाधनों के बेहतर प्रबंधन पर भी जोर दिया गया। मंत्री ने कहा कि पारदर्शिता और जनभागीदारी के साथ किए गए कार्यों में जनता का विश्वास बढ़ता है और ऐसे में कर वृद्धि जैसे निर्णयों में भी सहयोग मिलता है। उन्होंने अधिकारियों को जनप्रतिनिधियों के साथ बेहतर समन्वय बनाकर कार्य करने की सलाह दी ताकि विकास कार्यों में गति लाई जा सके। कार्यशाला में अपर मुख्य सचिव संजय दुबे ने इसके उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह प्रशिक्षण अधिकारियों को नई कार्ययोजना बनाने और शहरी विकास को सुव्यवस्थित करने में मदद करेगा। वहीं नगरीय प्रशासन एवं विकास आयुक्त संकेत भोंडवे ने कहा कि विभाग एक परिवार की तरह काम कर रहा है और इस कार्यशाला का उद्देश्य नागरिक संतुष्टि को केंद्र में रखकर कार्यप्रणाली को और बेहतर बनाना है। दो दिवसीय इस कार्यशाला में प्रदेश के सभी नगर निगमों और नगरीय निकायों के अधिकारी शामिल हुए हैं जहां सुधार समीक्षा और संवाद के माध्यम से शहरों को आधुनिक और सुविधायुक्त बनाने की दिशा में ठोस रणनीति तैयार की जाएगी। यह पहल प्रदेश के शहरी विकास को नई गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
डिजिटल जनगणना की शुरुआत, एमपी में 16 से 30 अप्रैल तक स्व गणना अभियान शुरू

भोपाल । मध्यप्रदेश में जनगणना 2027 की प्रक्रिया का औपचारिक शुभारंभ हो गया है जहां मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इसे राष्ट्र और प्रदेश के विकास की नींव बताते हुए नागरिकों से इसमें सक्रिय भागीदारी की अपील की है। राजधानी भोपाल स्थित मुख्यमंत्री निवास में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने ऑनलाइन स्व गणना प्रक्रिया की शुरुआत की और स्वयं पोर्टल पर पंजीकरण कर इस अभियान का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि जनगणना केवल आंकड़ों को इकट्ठा करने की प्रक्रिया नहीं है बल्कि यह देश के भविष्य को दिशा देने वाला एक महत्वपूर्ण आधार है। उन्होंने कहा कि किसी भी योजना की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि उसके पीछे उपलब्ध आंकड़े कितने सटीक और व्यापक हैं। ऐसे में जनगणना देश की रीढ़ के समान है जो विकास की पूरी संरचना को मजबूती प्रदान करती है। प्रदेश में 16 अप्रैल से 30 अप्रैल तक ऑनलाइन स्व गणना का कार्य किया जाएगा जिसमें नागरिक स्वयं अपनी जानकारी डिजिटल माध्यम से दर्ज कर सकेंगे। इसके बाद 1 मई से 30 मई तक मकान सूचीकरण की प्रक्रिया चलेगी जो पूरी तरह आधुनिक तकनीक के माध्यम से संचालित होगी। इस बार की जनगणना को विशेष रूप से डिजिटल और पारदर्शी बनाने पर जोर दिया गया है ताकि आंकड़ों की शुद्धता और विश्वसनीयता सुनिश्चित की जा सके। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि यह जनगणना आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित और बेहतर बनाने का आधार बनेगी। इसके जरिए यह समझा जा सकेगा कि विकास की योजनाएं समाज के अंतिम व्यक्ति तक कितनी प्रभावी तरीके से पहुंच रही हैं। उन्होंने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे इस प्रक्रिया में पूरी ईमानदारी और सटीकता के साथ अपनी जानकारी दर्ज करें ताकि सही आंकड़ों के आधार पर योजनाएं तैयार की जा सकें। उन्होंने जनगणना कार्य में लगे अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि वे राष्ट्र निर्माण का एक पवित्र दायित्व निभा रहे हैं। उनका परिश्रम और सटीक कार्य देश के विकास को नई दिशा देगा। कार्यक्रम में प्रशासनिक अधिकारियों की उपस्थिति भी रही जिन्होंने इस अभियान को सफल बनाने के लिए अपनी प्रतिबद्धता जताई। डिजिटल तकनीक के इस व्यापक उपयोग के साथ मध्यप्रदेश में जनगणना की यह प्रक्रिया न केवल प्रशासनिक दक्षता को बढ़ाएगी बल्कि नागरिकों की भागीदारी को भी आसान बनाएगी। अब यह देखना अहम होगा कि प्रदेश के लोग इस पहल में कितनी सक्रियता से हिस्सा लेते हैं और इसे कितना सफल बनाते हैं।
लोकसभा में बड़ा बदलाव प्रस्तावित, 850 सीटों और 426 बहुमत से बदलेगा सत्ता का गणित…

नई दिल्ली:भारतीय संसदीय राजनीति एक बड़े बदलाव के दौर में प्रवेश करती दिखाई दे रही है, जहां लोकसभा की संरचना, प्रतिनिधित्व और सत्ता संतुलन को व्यापक रूप से पुनर्परिभाषित करने की दिशा में महत्वपूर्ण विधायी पहल सामने आई है। संसद के विशेष सत्र में पेश किए गए प्रस्तावों के तहत लोकसभा की कुल सीटों को मौजूदा 543 से बढ़ाकर 850 करने की योजना पर चर्चा शुरू हुई है, जिससे देश की राजनीतिक संरचना में व्यापक परिवर्तन की संभावना बन गई है। इस प्रस्ताव के लागू होने के बाद सत्ता का गणित भी पूरी तरह बदल जाएगा। अभी तक सरकार बनाने के लिए 272 सीटों का बहुमत आवश्यक होता है, लेकिन यदि सीटों की संख्या बढ़कर 850 हो जाती है, तो बहुमत का नया आंकड़ा 426 हो जाएगा। यह बदलाव केवल संख्या का नहीं बल्कि राजनीतिक रणनीतियों और गठबंधनों के स्वरूप को भी प्रभावित करेगा। इस व्यापक बदलाव के पीछे तीन प्रमुख विधायी प्रस्ताव रखे गए हैं, जिनका उद्देश्य महिला प्रतिनिधित्व को बढ़ाना और निर्वाचन क्षेत्रों की नई संरचना तय करना है। पहले प्रस्ताव के तहत लोकसभा की अधिकतम सीट संख्या को बढ़ाने का प्रावधान है, जिसमें राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए अलग अलग सीटें निर्धारित की जाएंगी। दूसरे प्रस्ताव के तहत परिसीमन की प्रक्रिया को लागू किया जाएगा, जिसके माध्यम से जनसंख्या के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाएं और सीटों का बंटवारा तय होगा। तीसरे प्रस्ताव का संबंध केंद्र शासित प्रदेशों में सीटों के पुनर्गठन और महिला आरक्षण को लागू करने से जुड़ा है। महिला आरक्षण को लागू करने के लक्ष्य के साथ इस पहल को जोड़ा गया है, जिसके तहत लोकसभा में महिलाओं के लिए बड़ी संख्या में सीटें आरक्षित करने की योजना है। अनुमान है कि इस बदलाव के बाद संसद में महिलाओं की भागीदारी उल्लेखनीय रूप से बढ़ेगी, जिससे नीति निर्माण में उनकी भूमिका और प्रभाव मजबूत होगा। हालांकि इस प्रस्ताव को लेकर राजनीतिक स्तर पर तीखी प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। कुछ विपक्षी नेताओं ने इसे निर्वाचन क्षेत्रों में बदलाव के जरिए राजनीतिक संतुलन को प्रभावित करने की कोशिश बताया है। उनका तर्क है कि परिसीमन की प्रक्रिया यदि केवल जनसंख्या के आधार पर की जाती है, तो इससे कुछ राज्यों को अधिक प्रतिनिधित्व मिलेगा, जबकि अन्य राज्यों की हिस्सेदारी कम हो सकती है। विशेष रूप से दक्षिण भारत के कुछ राज्यों ने इस प्रस्ताव को लेकर चिंता जताई है। उनका मानना है कि जनसंख्या नियंत्रण में सफलता प्राप्त करने के बावजूद यदि सीटों का बंटवारा केवल जनसंख्या के आधार पर किया जाता है, तो इससे उनकी राजनीतिक स्थिति कमजोर हो सकती है। इस मुद्दे को लेकर क्षेत्रीय असंतुलन और संघीय ढांचे पर प्रभाव को लेकर बहस तेज हो गई है। संसद में इस विषय पर लंबी और विस्तृत चर्चा तय की गई है, जिसमें सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों अपनी अपनी दलीलें प्रस्तुत कर रहे हैं। जहां एक ओर इसे महिला सशक्तिकरण और लोकतांत्रिक विस्तार की दिशा में बड़ा कदम बताया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर इसे राजनीतिक समीकरणों को बदलने वाली पहल के रूप में देखा जा रहा है।
उत्तराखंड की वादियों में सादगी से संपन्न हुई शादी, मशहूर गायक जुबिन नौटियाल ने बचपन के प्यार को बनाया जीवनसाथी और निजी जीवन को रखा पूरी तरह गोपनीय

नई दिल्ली:भारतीय संगीत जगत के लोकप्रिय गायक जुबिन नौटियाल अपनी मधुर आवाज के साथ साथ अपनी सादगीपूर्ण जीवनशैली के लिए भी जाने जाते हैं। हाल ही में उनके जीवन से जुड़ी एक महत्वपूर्ण खबर सामने आई है, जिसके अनुसार उन्होंने अपने बचपन के प्यार के साथ विवाह कर लिया है। यह विवाह बेहद निजी और सादगीपूर्ण तरीके से उत्तराखंड में संपन्न हुआ, जहां केवल परिवार और कुछ करीबी लोग ही शामिल हुए। इस आयोजन को पूरी तरह गोपनीय रखा गया, जिससे उनकी निजी जिंदगी को सार्वजनिक चर्चा से दूर रखा जा सके। जुबिन नौटियाल ने हमेशा अपनी निजी जिंदगी को लाइमलाइट से दूर रखा है और यही वजह है कि उनकी शादी की खबर अचानक सामने आने पर उनके प्रशंसकों के बीच उत्सुकता बढ़ गई है। सामने आई सीमित तस्वीरों में वह पारंपरिक अंदाज में नजर आए, जबकि उनकी जीवनसाथी ने खुद को सार्वजनिक नजरों से दूर रखा। यह स्पष्ट करता है कि दोनों ने अपने इस खास दिन को बेहद निजी और व्यक्तिगत बनाए रखने का निर्णय लिया। बताया जा रहा है कि इस शादी में मनोरंजन जगत से जुड़े बड़े नामों को आमंत्रित नहीं किया गया था। यह समारोह केवल परिवार और करीबी मित्रों तक ही सीमित रहा, जिससे इसका माहौल पूरी तरह पारिवारिक और आत्मीय बना रहा। इस फैसले ने यह भी दिखाया कि जुबिन अपने जीवन के महत्वपूर्ण क्षणों को भव्यता के बजाय भावनात्मक रूप से अधिक महत्व देते हैं। अब तक जुबिन नौटियाल की ओर से इस विवाह को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की गई है। न ही उन्होंने अपनी जीवनसाथी की पहचान को सार्वजनिक किया है, जिससे इस विषय को लेकर रहस्य और भी गहरा हो गया है। हालांकि उनके प्रशंसक इस खबर को लेकर उत्साहित हैं और उनकी ओर से किसी आधिकारिक घोषणा का इंतजार कर रहे हैं। जुबिन नौटियाल उत्तराखंड के देहरादून से संबंध रखते हैं और उन्होंने अपने संगीत करियर की शुरुआत रियलिटी शो के मंच से की थी। इसके बाद उन्होंने हिंदी फिल्म संगीत में अपनी मजबूत पहचान बनाई और कई लोकप्रिय गीतों को अपनी आवाज दी। उनकी गायकी में भावनात्मक गहराई और सरलता उन्हें अन्य गायकों से अलग बनाती है। उनके द्वारा गाए गए कई गीत लंबे समय तक श्रोताओं के बीच लोकप्रिय रहे हैं और उन्होंने अपने करियर में निरंतर सफलता हासिल की है। उनकी आवाज ने उन्हें देशभर में एक खास स्थान दिलाया है, और अब उनकी निजी जिंदगी की यह नई शुरुआत भी उनके जीवन का महत्वपूर्ण अध्याय बन गई है।
पन्ना टाइगर रिजर्व से निकला बाघ गांव में घुसा, दो मवेशियों का किया शिकार

पन्ना । पन्ना टाइगर रिजर्व (PTR) से सटे विक्रमपुर गांव में गुरुवार सुबह उस समय दहशत फैल गई जब एक बाघ रिहायशी इलाके में घुस आया और बाड़े में बंधे दो मवेशियों का शिकार कर लिया। घटना के बाद पूरे गांव में अफरा-तफरी मच गई और लोग घरों में दुबक गए। सुबह-सुबह गांव में दिखा बाघ, मचा हड़कंपजानकारी के अनुसार, एक राहगीर ने सबसे पहले बाघ को गांव के पास देखा, जिसके बाद यह खबर तेजी से फैल गई। कुछ ही देर में ग्रामीणों ने वन विभाग और पन्ना टाइगर रिजर्व (PTR) की टीम को सूचना दी। बाघ की मौजूदगी से पूरे इलाके में दहशत का माहौल बन गया। दो मवेशियों का किया शिकारग्रामीणों के मुताबिक, बाघ ने गांव के किनारे स्थित एक बाड़े में घुसकर दो मवेशियों को अपना शिकार बना लिया। इस घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें बाघ की चहलकदमी देखी जा सकती है। रेस्क्यू के लिए उतरी PTR टीम, हाथियों की मदद ली गईसूचना मिलते ही PTR की टीम मौके पर पहुंची और रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया गया। बाघ को सुरक्षित रूप से जंगल की ओर वापस खदेड़ने के लिए हाथियों की भी मदद ली जा रही है। वन विभाग ने पूरे इलाके में अलर्ट जारी करते हुए ग्रामीणों को घरों में रहने और सतर्क रहने की सलाह दी है। बाघों की बढ़ती संख्या बनी चुनौतीपन्ना टाइगर रिजर्व में बाघों की बढ़ती संख्या अब आसपास के गांवों के लिए चुनौती बनती जा रही है। जंगल क्षेत्र में जगह कम पड़ने के कारण बाघ कई बार रिहायशी इलाकों की ओर रुख कर रहे हैं। इससे पहले भी आसपास के क्षेत्रों में बाघ की मौजूदगी देखी जा चुकी है। वन विभाग की अपीलPTR के डिप्टी डायरेक्टर बी.के. पटेल ने पुष्टि की है कि रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंच चुकी है और स्थिति पर नजर रखी जा रही है। वन विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे जंगल के आसपास न जाएं और किसी भी स्थिति में बाघ को परेशान न करें।
गोरखपुर का ऐतिहासिक रिकॉर्ड: AI फॉर ऑल अभियान ने डिजिटल शिक्षा में रचा नया अध्याय..

नई दिल्ली /गोरखपुर ने डिजिटल शिक्षा और तकनीकी जागरूकता के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान दर्ज कराई है। यहां शुरू किए गए ‘AI फॉर ऑल अवेयरनेस प्रोग्राम’ ने बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी के साथ एक विश्व रिकॉर्ड स्थापित किया है। इस पहल का उद्देश्य आम नागरिकों और विशेष रूप से युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी आधुनिक तकनीक से जोड़कर उन्हें भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करना है। इस अभियान के तहत रिकॉर्ड संख्या में ऑनलाइन पंजीकरण हुए, जिसने शुरुआती लक्ष्य को काफी पीछे छोड़ दिया। योजना के तहत लगभग पांच लाख प्रतिभागियों का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन लोगों की व्यापक भागीदारी के चलते यह संख्या बढ़कर सात लाख से अधिक पहुंच गई। यह उपलब्धि इस बात का संकेत है कि क्षेत्र में तकनीकी शिक्षा और डिजिटल कौशल के प्रति जागरूकता तेजी से बढ़ रही है। इस उपलब्धि को औपचारिक मान्यता मिलने के बाद आयोजित कार्यक्रम में इसे प्रमाणित किया गया और इस दौरान विभिन्न संस्थागत प्रतिनिधियों की मौजूदगी भी देखी गई। शैक्षणिक संस्थानों और तकनीकी संगठनों के सहयोग से इस कार्यक्रम को बड़े स्तर पर सफल बनाया गया, जिससे यह अभियान एक सामूहिक प्रयास का उदाहरण बन गया। यह कार्यक्रम पूरी तरह निःशुल्क रखा गया है, जिसका उद्देश्य अधिक से अधिक लोगों तक आधुनिक तकनीक की जानकारी पहुंचाना है। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मूलभूत समझ, साइबर सुरक्षा, ऑनलाइन धोखाधड़ी से बचाव और सुरक्षित डिजिटल व्यवहार जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं। बदलते समय में इन कौशलों को रोजगार और तकनीकी विकास के लिए अत्यंत आवश्यक माना जा रहा है। इसके साथ ही गोरखपुर में तकनीकी शिक्षा और कौशल विकास को बढ़ावा देने के लिए एक विशेष केंद्र की शुरुआत भी की गई है। इस केंद्र का उद्देश्य युवाओं को नई तकनीकों और उद्योग आधारित प्रशिक्षण से जोड़ना है, ताकि वे भविष्य की रोजगार आवश्यकताओं के अनुरूप खुद को तैयार कर सकें। इस पूरी पहल को केवल एक रिकॉर्ड के रूप में नहीं बल्कि डिजिटल इंडिया और तकनीकी सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है, जो आने वाले समय में अन्य क्षेत्रों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन सकता है।
महिला आरक्षण पर पीएम मोदी का बड़ा बयान, इसे बताया ऐतिहासिक और निर्णायक कदम..

नई दिल्ली:लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक पर चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का एक महत्वपूर्ण और निर्णायक क्षण बताया। उन्होंने कहा कि यह अवसर केवल एक विधायी प्रक्रिया नहीं है, बल्कि देश की आधी आबादी को नीति निर्माण में समान भागीदारी देने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। उनके अनुसार ऐसे मौके बार-बार नहीं आते और इन्हें देश के भविष्य को मजबूत करने के लिए पूरी गंभीरता से लेना चाहिए। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि भारत की लोकतांत्रिक परंपरा अत्यंत प्राचीन और समृद्ध रही है, और समय समय पर इसमें नए आयाम जुड़ते रहे हैं। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण जैसा निर्णय देश की शासन व्यवस्था को और अधिक संवेदनशील और समावेशी बनाने में मदद करेगा। उनके अनुसार जब निर्णय लेने की प्रक्रिया में समाज के सभी वर्गों की भागीदारी होती है, तो नीतियां अधिक संतुलित और प्रभावी बनती हैं। उन्होंने विकसित भारत के लक्ष्य का उल्लेख करते हुए कहा कि देश तेजी से आगे बढ़ रहा है और इस यात्रा में महिलाओं की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। प्रधानमंत्री ने कहा कि विकास केवल आर्थिक प्रगति या बुनियादी ढांचे तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सामाजिक भागीदारी और समान अवसर भी शामिल हैं। अपने संबोधन में उन्होंने यह भी कहा कि पिछले वर्षों में महिला आरक्षण को लेकर कई बार चर्चा हुई है और अलग अलग समय पर इसके विरोध के स्वर भी सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता अपने मत और निर्णय के माध्यम से जवाब देती है और समय के साथ समाज की सोच भी बदलती है। उनके अनुसार महिलाओं की भागीदारी को लेकर देश में लगातार सकारात्मक बदलाव देखने को मिला है। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह विधेयक केवल एक कानून नहीं बल्कि एक ऐसी शुरुआत है जो देश की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था में बड़ा परिवर्तन ला सकती है। उन्होंने कहा कि इससे आने वाले समय में महिलाओं की भूमिका और अधिक मजबूत होगी और शासन व्यवस्था में नई ऊर्जा का संचार होगा।
टीकमगढ़ में अवैध नलकूप खनन पर बड़ी कार्रवाई, बोरिंग मशीन जब्त

नई दिल्ली। टीकमगढ़ में भू-जल संरक्षण नियमों के उल्लंघन को लेकर प्रशासन ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाया है। बड़ागांव थाना क्षेत्र के हैदरपुर गांव में अवैध नलकूप खनन के खिलाफ एसडीएम संस्कृति लिटोरिया ने बुधवार देर रात छापेमारी कर बोरिंग मशीन जब्त कर ली। रात में चल रहा था अवैध खननजानकारी के अनुसार, प्रशासन को मुखबिर से सूचना मिली थी कि गांव में रात के अंधेरे में बिना अनुमति के नलकूप खनन किया जा रहा है। सूचना मिलते ही एसडीएम मौके पर पहुंचीं, जहां मशीन से बोरिंग का काम चलता पाया गया। जब टीम ने खनन की अनुमति मांगी तो मौके पर मौजूद लोगों के पास कोई वैध दस्तावेज नहीं मिले। इसके बाद प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए बोरिंग मशीन को जब्त कर बड़ागांव थाना परिसर में रखवा दिया। जिले में पहले से लागू है प्रतिबंधगौरतलब है कि जिले में गिरते भू-जल स्तर को देखते हुए कलेक्टर विवेक श्रोतिय ने नलकूप खनन पर पहले ही प्रतिबंध लगा दिया है, जो 15 जून तक लागू रहेगा। इसके बावजूद नियमों का उल्लंघन कर अवैध खनन किए जाने पर प्रशासन लगातार कार्रवाई कर रहा है। प्रशासन का सख्त संदेशएसडीएम संस्कृति लिटोरिया ने स्पष्ट कहा कि जल संकट को देखते हुए भू-जल संरक्षण बेहद जरूरी है। बिना अनुमति नलकूप खनन पूरी तरह प्रतिबंधित है और नियम तोड़ने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि केवल विशेष परिस्थितियों में ही एसडीएम और पीएचई विभाग की अनुमति से खनन की अनुमति दी जा सकती है।
ओम बिड़ला ने राहुल गांधी पर ली चुटकी, संसद में माइक टिप्पणी से बना हल्का-फुल्का माहौल

नई दिल्ली:संसद के विशेष सत्र के दौरान उस समय माहौल कुछ देर के लिए हल्का और अनौपचारिक हो गया जब लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला की एक टिप्पणी पर सदन में मौजूद सांसदों के बीच हंसी का माहौल बन गया। यह घटना उस समय हुई जब सदन में महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा चल रही थी और राजनीतिक बहस अपने चरम पर थी। चर्चा के दौरान विपक्ष की ओर से एक सांसद अपना वक्तव्य रख रहे थे, तभी यह बात उठी कि उनका माइक्रोफोन सही तरीके से काम नहीं कर रहा है। इसी दौरान विपक्षी बेंचों की ओर से भी माइक को लेकर प्रतिक्रिया दी गई और सदन में कुछ देर के लिए हल्की अफरा तफरी जैसी स्थिति बन गई। इसी मौके पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने मुस्कुराते हुए टिप्पणी की कि माइक चालू है, केवल कुछ लोगों का ही माइक बंद रहता है। उनकी इस बात पर सदन में मौजूद कई सांसदों ने हंसी और मेज थपथपाकर प्रतिक्रिया दी, जिससे कुछ क्षणों के लिए कार्यवाही का माहौल गंभीरता से हटकर हल्का हो गया। यह टिप्पणी राजनीतिक चर्चा में भी एक अलग विषय बन गई क्योंकि इससे पहले भी विपक्ष की ओर से समय समय पर यह आरोप लगाया जाता रहा है कि उन्हें संसद में पर्याप्त रूप से बोलने नहीं दिया जाता या उनकी आवाज को दबाया जाता है। इसी पृष्ठभूमि में यह घटना एक प्रतीकात्मक हल्के पल के रूप में देखी जा रही है। हालांकि इस हल्के क्षण के बाद सदन की कार्यवाही फिर से गंभीर मुद्दों पर केंद्रित हो गई। विशेष सत्र में महिला आरक्षण से जुड़े प्रावधान और परिसीमन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा जारी रही, जिन पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस भी देखने को मिली। परिसीमन से जुड़े प्रस्ताव को लेकर कुछ राज्यों के प्रतिनिधियों ने अपनी चिंताएं भी व्यक्त कीं, विशेष रूप से इस बात को लेकर कि जनसंख्या आधारित बदलाव से राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर असर पड़ सकता है। वहीं सरकार की ओर से इन विधेयकों को संवैधानिक और प्रशासनिक सुधारों के लिए आवश्यक बताया गया। सदन में दिन भर गंभीर बहसों के बीच यह छोटा सा हास्यपूर्ण क्षण भी चर्चा में रहा, जिसने कुछ समय के लिए माहौल को तनावपूर्ण राजनीति से हटाकर हल्केपन की ओर मोड़ दिया।
लोकसभा में बोले PM मोदी, 'परिसीमन में किसी राज्य के साथ भेदभाव नहीं, ये मेरी गारंटी', विपक्ष ने उठाए कई सवाल

नई दिल्ली। संसद के विशेष सत्र की शुरुआत गुरुवार को जोरदार हंगामे और तीखी बहस के साथ हुई। जैसे ही सरकार की ओर से संबंधित विधेयक सदन में पेश किए गए विपक्ष ने कड़ा विरोध दर्ज कराया। कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि सरकार संवैधानिक व्यवस्था के साथ छेड़छाड़ करने की कोशिश कर रही है। वहीं सत्ता पक्ष ने इन आरोपों को खारिज करते हुए इसे देश के भविष्य और महिलाओं की भागीदारी से जुड़ा ऐतिहासिक कदम बताया। महिला शक्ति को लेकर नीयत पर जोर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में अपने संबोधन के दौरान कहा कि इस मुद्दे को राजनीतिक नजरिए से देखने के बजाय राष्ट्रीय दृष्टिकोण से समझना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश की महिलाएं केवल फैसलों को ही नहीं बल्कि सरकार की नीयत को भी परखेंगी। अगर नीयत में खोट होगी तो देश की नारी शक्ति उसे कभी स्वीकार नहीं करेगी। प्रधानमंत्री ने सभी दलों से अपील की कि वे इस पहल का समर्थन करें और विकसित भारत के निर्माण में योगदान दें।विपक्ष को पीएम की चेतावनी प्रधानमंत्री ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि जो लोग इस मुद्दे में राजनीति तलाश रहे हैं उन्हें इतिहास से सबक लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब जब महिलाओं को अधिकार देने के प्रयासों का विरोध हुआ है उसका खामियाजा विरोध करने वालों को उठाना पड़ा है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर सभी दल मिलकर आगे बढ़ते हैं तो इसका लाभ पूरे लोकतंत्र को मिलेगा न कि किसी एक पार्टी को। प्रधानमंत्री मोदी ने साफ कहा कि परिसीमन प्रक्रिया में किसी भी राज्य के साथ भेदभाव नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा “यह मेरी गारंटी है मेरा वादा है कि हर राज्य को न्याय मिलेगा।” साथ ही उन्होंने विपक्ष से अपील की कि इस मुद्दे को राजनीतिक नजरिए से न देखें और देशहित में सहयोग करें। निर्णय प्रक्रिया में महिलाओं की भागीदारी जरूरी अपने भाषण में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि देश की आधी आबादी अब निर्णय लेने की प्रक्रिया में शामिल होने के लिए तैयार है। उन्होंने याद दिलाया कि पंचायत स्तर पर महिलाओं को आरक्षण पहले ही दिया जा चुका है और अब समय आ गया है कि उन्हें संसद और विधानसभाओं में भी पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिले। उन्होंने कहा कि लाखों महिलाएं जमीनी स्तर पर काम कर चुकी हैं और अब वे नीति निर्धारण में अपनी भूमिका चाहती हैं। विकसित भारत की परिभाषा में महिला भागीदारी अहम प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि विकसित भारत केवल बुनियादी ढांचे या आर्थिक आंकड़ों से नहीं बनेगा बल्कि इसमें महिलाओं की बराबर भागीदारी भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि देश इस दिशा में पहले ही काफी देर कर चुका है और अब और देरी करना उचित नहीं होगा। उन्होंने सांसदों से आग्रह किया कि वे इस अवसर को गंवाएं नहीं। देश की दिशा तय करने वाला कदम पीएम मोदी ने इस विधेयक को देश के भविष्य के लिए निर्णायक बताते हुए कहा कि यह केवल एक कानून नहीं बल्कि राष्ट्र निर्माण की दिशा तय करने वाला कदम है। उन्होंने कहा कि यह प्रयास शासन व्यवस्था को अधिक संवेदनशील बनाएगा और इससे निकला परिणाम देश की राजनीति को नई दिशा देगा। विपक्ष ने उठाए गंभीर सवाल समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनकी पार्टी महिला आरक्षण के पक्ष में है लेकिन इसे लागू करने के तरीके पर आपत्ति है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जानबूझकर जनगणना और परिसीमन को इससे जोड़कर इसे लागू करने में देरी कर रही है। उनका कहना था कि अगर जातीय जनगणना के आंकड़े सामने आएंगे तो आरक्षण की मांग और बढ़ेगी जिससे सरकार बचना चाहती है। महिला प्रतिनिधित्व पर भाजपा से जवाब मांग अखिलेश यादव ने भाजपा पर हमला करते हुए पूछा कि जिन राज्यों में उनकी सरकारें हैं वहां कितनी महिला मुख्यमंत्री हैं। उन्होंने यह भी कहा कि देश में महिलाओं की वास्तविक भागीदारी अभी भी सीमित है और भाजपा को पहले अपने संगठन में महिलाओं को पर्याप्त स्थान देना चाहिए। मुस्लिम महिलाओं के आरक्षण पर विवाद सदन में मुस्लिम महिलाओं के आरक्षण को लेकर भी तीखी बहस हुई। सपा सांसद धर्मेंद्र यादव ने कहा कि अगर मुस्लिम महिलाओं को आरक्षण नहीं दिया जाएगा तो यह अधूरा कदम होगा। इस पर गृह मंत्री अमित शाह ने स्पष्ट किया कि धर्म के आधार पर आरक्षण देना संविधान के खिलाफ है। उन्होंने विपक्ष को चुनौती देते हुए कहा कि वे अपनी पार्टी में मुस्लिम महिलाओं को टिकट दे सकते हैं सरकार को इससे कोई आपत्ति नहीं है। परिसीमन को लेकर भ्रम फैलाने का आरोप भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह परिसीमन को लेकर खासकर दक्षिण भारत में भ्रम फैला रहा है। उन्होंने कहा कि यह पूरी प्रक्रिया संविधान के तहत हो रही है और इससे किसी राज्य का नुकसान नहीं होगा। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि परिसीमन के बाद कुछ राज्यों में सीटों की संख्या बढ़ सकती है जिससे उनका प्रतिनिधित्व और मजबूत होगा। सरकार का दावा किसी राज्य को नुकसान नहीं केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने सदन को बताया कि प्रस्तावित बदलावों से लोकसभा की कुल सीटों में वृद्धि होगी और महिलाओं को एक तिहाई आरक्षण मिलेगा। उन्होंने आश्वासन दिया कि किसी भी राज्य की वर्तमान स्थिति को नुकसान नहीं होगा और सभी को समान रूप से लाभ मिलेगा। महिला आरक्षण को परिसीमन से अलग करने की मांग कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा कि उनकी पार्टी महिला आरक्षण का समर्थन करती है लेकिन इसे परिसीमन से जोड़ना सही नहीं है। उनका सुझाव था कि इस कानून को तुरंत लागू किया जाना चाहिए ताकि महिलाओं को जल्द से जल्द इसका लाभ मिल सके। तीनों विधेयकों पर आगे की प्रक्रिया लोकसभा में इन विधेयकों पर चर्चा शुरू हो चुकी है और मतदान 17 अप्रैल को शाम 4 बजे कराया जाएगा। सरकार ने इस पर विस्तृत चर्चा के लिए पर्याप्त समय निर्धारित किया है। शुरुआती वोटिंग में विधेयकों को पेश करने के पक्ष में बहुमत मिला जिससे आगे की प्रक्रिया का रास्ता साफ हो गया। हंगामे के बीच जारी रही कार्यवाही सदन में पूरे दिन हंगामे का माहौल बना रहा। विपक्ष ने जहां सरकार पर गंभीर आरोप लगाए