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कवि सम्मेलन हमारी समृद्ध काव्य परम्पराओं के हैं सजीव संवाहक : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि भारत की मिट्टी कवियों की उर्वर भूमि है। काव्य परम्पराओं से हमारी साहित्यिक विरासत हमेशा से ही समृद्ध रही है। कवि सम्मेलन हमारी इन्हीं समृद्ध काव्य परम्पराओं के सजीव संवाहक हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार की रात भोपाल के अटल पथ पर आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने दीप प्रज्ज्वलन कर कवि सम्मेलन का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में धार्मिक पर्यटन को प्रोत्साहन देना हमारा ध्येय है। श्रीराम की नगरी को राजधानी से सीधे जोड़ने के लिए हम बहुत जल्द भोपाल से ओरछा तक धार्मिक पर्यटन हेलीकॉप्टर सेवा शुरू करने जा रहे हैं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने सम्मेलन में आए सभी कवियों और विभिन्न सामाजिक सेवा समितियों का उनके सेवा प्रकल्पों में उल्लेखनीय प्रदर्शन के लिए सभी को पुष्पगुच्छ देकर स्वागत एवं सम्मान किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि देश में 7 हजार भाषाएं-बोलियां बोली जाती हैं। सबका समृद्ध साहित्य है। इतनी बड़ी भाषाई विविधता और समृद्धि किसी और देश में देखने को नहीं मिलती। मध्यप्रदेश की धरती पर बाणभट्ट, कालिदास, राजशेखर, पतंजलि, भर्तहरि, अनंगहर्ष, वत्सराज, केशवदास, पद्माकर, बिहारी जैसे रत्न हुए। आज जिस नगरी भोपाल पधारे हैं, वहां के शासक स्वयं सरस्वती पुत्र राजा भोज रहे। राजा भोज स्वयं एक कालजयी कवि, प्रकांड दार्शनिक और अद्वितीय विचारक थे। उनके शासनकाल में ज्ञान और कला का निरंतर अभिषेक होता था। राजा भोज के बारे में एक ऐतिहासिक किंवदंति बहुत प्रसिद्ध है कि उनके शासनकाल में ज्ञान और कला का इतना सम्मान था कि बुनकर भी संस्कृत कविताएं रचते थे। आज फिर से भोज नगरी में सरस्वती पुत्रों का समागम हुआ है, यहाँ सबका स्वागत है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कवियों की वाणी ने ही युवाओं में साहित्य के प्रति प्रेम बचाए रखा है। उन्होंने इस आयोजन के सूत्रधार विधायक श्री रामेश्वर शर्मा को बधाई देते हुए कहा कि कर्मश्री संस्था द्वारा आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन आज अपनी रजत जयंती मना रहा है। विगत 25 वर्षों से कवि सम्मेलन का आयोजन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि चैत्र प्रतिपदा, गुड़ी पड़वा, उगादि, चैती चांद, नवरेह के मौके पर होने वाला यह आयोजन अनेकता में एकता और ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ का सजीव उदाहरण है। भले ही हम ये सभी त्योहार विभिन्न नामों से मनाते हैं, लेकिन ये हमारे विविधता संपन्न राष्ट्र के अलग-अलग कोनों में पारंपरिक रूप से नए साल के शुभारंभ के प्रतीक हैं। ये हमें एकता, प्रेम, सद्भाव और समृद्धि का संदेश देते हैं। मुख्यमंत्री ने मंगलकामना करते हुए कहा कि नव संवत्सर सभी के लिए मंगलमय हो। कार्यक्रम को विधायक रामेश्वर शर्मा, प्रख्यात कवि डॉ. कुमार विश्वास ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम में विधायक भगवानदास सबनानी, महापौर मालती राय, कवि दिनेश बावरा, सुदीप भोला, अजय अंजान, कुशल कुशलेन्द्र, सान्या राय सहित रविन्द्र यति, तीरथ सिंह मीणा, राहुल कोठारी, सुमित पचौरी सहित जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में श्रोता उपस्थित थे। कार्यक्रम में कुमार विश्वास ने अपने संबोधन में सियासी तंज भी कसा। उन्होंने कहा कि पहले रामकाल था, जब अटल बिहारी वाजपेयी ने कहा था कि एक वोट खरीदकर भी सरकार बनती हो, तो ऐसी सरकार को मैं चिमटे से छूना भी पसंद नहीं करूंगा। वह रामकाल था, लेकिन अब मोहन काल और कृष्ण काल है। उन्होंने कांग्रेस पर कटाक्ष करते हुए कहा कि थोड़ी देर के लिए कांग्रेस की सरकार आई थी। कमलनाथ जी बड़े भले आदमी हैं। जैसे-तैसे इस उम्र में उनकी बारात निकली थी। आगे-आगे दिग्विजय सिंह चल रहे थे, लेकिन पीछे के बारातियों को भाजपा वाले अपने साथ ले गए। जब पीछे मुड़कर देखा, तो बारात में गिने-चुने लोग ही बचे थे। हास्य कवि और व्यंग्यकार कुशल कौशलेंद्र ने कवि सम्मेलन के दौरान एक कवि ने कविता पाठ करते-करते समसामयिक मुद्दों पर भी व्यंग्य किया। उन्होंने मोदी-ट्रंप फोन कॉल का जिक्र करते हुए चुटकी ली। उन्होंने कहा कि मोदी जी ने ट्रंप से शायद यही कहा होगा कि अगली बार उज्जैन में कुंभ लगने जा रहा है, जितना पाप करना है कर लो, यहां आकर दो डुबकी में सब धुल जाएंगे।” इस तंज पर श्रोताओं के बीच हंसी और तालियों का माहौल बन गया। कवि कुशल कुशलेंद्र ने भोपाल में काव्य पाठ के दौरान अपने व्यंग्य और सियासी तंज से माहौल को जीवंत कर दिया। “तालियों की ताल दीजिए” जैसी पंक्तियों के बीच उन्होंने केंद्र की नीतियों पर चुटकी लेते हुए कहा, “हमसे लोग पूछते हैं मोदी जी ने क्या किया, हम कहते हैं रुपयों का बैग छीनकर बोरा थमा दिया, बोरी की डोर तोड़कर डोरी थमा दिया।” उनकी इस टिप्पणी पर श्रोताओं के बीच ठहाके और तालियों की गूंज सुनाई दी। इसके बाद उन्होंने सिंधिया पर कटाक्ष करते हुए कविता सुनाई— “सच को दिखा सकूं मीडिया ही बना दो, रंग ऐसे भरो मुझको इंडिया बना दो, मैं जिस जगह रहूं उस जगह मौज में रहूं, भगवान मुझको आप सिंधिया ही बना दो।” उनकी प्रस्तुति में व्यंग्य, हास्य और राजनीति का मिश्रण नजर आया, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा। मुंबई से आए कवि दिनेश बावरा ने भोपाल में काव्य पाठ के दौरान अपने खास अंदाज में हास्य और व्यंग्य का तड़का लगाया। उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा, “घर वालों ने कहा था कि जब तक कुछ बन ना जाना, घर मत लौटना… मैं बेशर्म बन गया।” उनकी इस पंक्ति पर श्रोताओं के बीच ठहाके गूंज उठे और माहौल हल्का-फुल्का हो गया। इसके बाद उन्होंने समकालीन जीवन पर तंज कसते हुए कहा कि आज दुनिया को सबसे बड़ा खतरा किसी देश से नहीं, बल्कि मोबाइल से है। उन्होंने कहा, “इस दुनिया को खतरा न चीन, न अमेरिका, न पाकिस्तान और इजराइल से है… आज की तारीख में सबसे ज्यादा खतरा आपकी जेब में रखे मोबाइल से है।” उनकी इस टिप्पणी ने श्रोताओं को सोचने पर भी मजबूर कर दिया। उत्तर प्रदेश के औरैया से आए कवि अजय अंजाम ने मंच से देशभक्ति काव्य पाठ कर श्रोताओं में जोश भर दिया। उन्होंने अपनी ओजपूर्ण पंक्तियों में कहा, “कश्मीर का दर्रा-दर्रा वंदे मातरम बोलेगा, कारतूस का छर्रा-छर्रा वंदे मातरम बोलेगा। जिस दिन भोपाल के बेटे, जिस दिन भारत मां के बेटे अपनी पर आ जाएंगे, इस धरती का जर्रा-जर्रा वंदे मातरम बोलेगा।” उनकी इस प्रस्तुति

भोपालः हिंदू नववर्ष के स्वागत में प्रभात चौराहे पर लहराया विशाल भगवा झंडा, हुई भव्य आतिशबाजी

भोपाल। मध्य प्रदेश के खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने बुधवार को हिंदू नववर्ष की पूर्व संध्या पर भोपाल के नरेला विधानसभा के प्रभात चौराहे पर आयोजित भव्य आतिशबाजी और देशभक्ति गीतों की संगीतमय प्रस्तुति कार्यक्रम में सम्मिलित होकर विशाल भगवा झंडा लहराया और नागरिकों को हिंदू नववर्ष की शुभकामनाएं दी। मंत्री सारंग ने अपने संबोधन में कहा कि हिंदू नववर्ष केवल एक तिथि परिवर्तन नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति, परंपरा और नवचेतना का प्रतीक है। यह दिन हमें हमारी सनातन परंपराओं, ऋषि-मुनियों के ज्ञान और प्रकृति के साथ सामंजस्यपूर्ण जीवन जीने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि चैत्र मास से प्रारंभ होने वाला यह नववर्ष सृष्टि के नवसृजन का प्रतीक है, जब प्रकृति स्वयं नवीन रूप में सजती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है। सारंग ने कहा कि भारतीय पंचांग पर आधारित यह नववर्ष वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह ऋतु परिवर्तन, कृषि चक्र और जीवन के संतुलन से जुड़ा हुआ है। यह पर्व हमें अपने संस्कारों, संस्कृति और राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना को और अधिक प्रबल करने का अवसर प्रदान करता है। राष्ट्र निर्माण के संकल्प के साथ मनाएं नववर्षमंत्री सारंग ने सभी नागरिकों से आह्वान किया कि यह नववर्ष केवल उत्सव का अवसर न होकर, एक नई शुरुआत का प्रतीक बने। उन्होंने कहा कि हम सभी को इस पावन अवसर पर सामाजिक समरसता, स्वच्छता, सेवा और राष्ट्र निर्माण के संकल्प को अपने जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाना चाहिए। मंत्री सारंग ने आग्रह किया कि हर नागरिक अपने आसपास स्वच्छता बनाए रखने, जरूरतमंदों की सहायता करने, समाज में भाईचारे और एकता को मजबूत करने तथा सकारात्मक सोच के साथ कार्य करने का संकल्प ले। छोटे-छोटे प्रयास ही मिलकर बड़े परिवर्तन का आधार बनते हैं और यही प्रयास हमारे राष्ट्र को सशक्त, समृद्ध और आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। भव्य आतिशबाजी और देशभक्ति गीतों के साथ हिंदू नववर्ष का स्वागतनववर्ष की पूर्व संध्या पर प्रभात चौराहे पर आकर्षक आतिशबाजी के साथ देशभक्ति गीतों की संगीतमय प्रस्तुति से संपूर्ण वातावरण देशभक्ति और उत्साह से सराबोर हो उठा। रंग-बिरंगी रोशनी से सजा आकाश और देशभक्ति के जोश से भरे गीतों ने हर हृदय में गर्व, उत्साह और नई उमंग का संचार किया। कार्यक्रम में पार्षद सूर्यकांत गुप्ता, अशोक वाणी, राकेश यादव बाबा, विमलेश ठाकुर, प्रदीप शेखावत, मण्डल अध्यक्ष विक्की ठाकुर, नितिन पाठक, संदीप चौकसे सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि, कार्यकर्ता सहित बड़ी संख्या में युवा साथी उपस्थित रहे।

मप्र के मुख्यमंत्री से मिले नेशनल डिफेंस कॉलेज का 5 देशों के ऑफिसर्स का प्रशिक्षण दल

भोपाल। भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय के अधीन नेशनल डिफेंस कॉलेज में ट्रेनिंग ले रहे पांच देशों के ट्रेनी ऑफिसर्स ने मध्य प्रदेश के प्रवास के दौरान बुधवार देर शाम भोपाल में मुख्यमंत्री निवास पहुंचकर समत्व भवन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से सौजन्य भेंट की। इस अवसर पर बताया गया कि रक्षा मंत्रालय के मेजर जनरल पवनपाल सिंह एवं समकक्ष कुनाल सत्यार्थी के नेतृत्व में फ्रांस, यूएई, भूटान, नेपाल एवं म्यांमार (बर्मा) का 16 सदस्यीय प्रशिक्षण दल 15 से 20 मार्च तक मध्य प्रदेश प्रवास पर आया हुआ है। गुरुवार, 19 मार्च को यह प्रशिक्षण दल भोपाल जिले के होम स्टे ग्राम खारी सहित उज्जैन एवं इंदौर जिले के प्रवास पर रहेगा। बताया गया कि बीते तीन दिनों में इस दल ने राज्यपाल मंगुभाई पटेल एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ भेंट सहित भोजपुर मंदिर, वन विहार, भीमबैठका गुफाएं, राष्ट्रीय मानव संग्रहालय, जनजातीय संग्रहालय सहित अन्य स्थलों का अवलोकन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रशिक्षण दल का मध्य प्रदेश की धरती पर स्वागत करते हुए कहा कि आप सब देश के सबसे हरे-भरे एवं घने वन वाले प्रदेश और टाइगर स्टेट में हैं। भोपाल ऐसी जगह है, जहां प्राय: सड़कों पर बाघ घूमता दिखाई दे जाता है। यह मनुष्य और वन्य प्राणियों के साहचर्य जीवन का जीवंत उदाहरण है। उन्होंने कहा कि भोपाल के बड़े तालाब का निर्माण करीब 1000 साल पहले और श्रीमहाकालेश्वर मंदिर का निर्माण सैकड़ों साल पहले हुआ था। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारे वन, जंगली वन्य जीवों से भरे पड़े हैं। हमारे यहां 100 से ज्यादा हाथी हैं और 25 मार्च को ही असम से लाए हुए जंगली भैंसे बालाघाट जिले के जंगल में छोड़ने जा रहे हैं। इससे हमारे वन और भी समृद्ध होंगे। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में 250 से अधिक नदियां बहती हैं। जल की कोई कमी नहीं है और यही कारण है कि मध्य प्रदेश में बेरोजगारी दर देश में सबसे कम (2 प्रतिशत से भी कम) है। मुख्यमंत्री ने कहा कि विश्व के सबसे बड़े धार्मिक मेले सिंहस्थ : 2028 के आयोजन के लिए हमारी तैयारियां युद्ध स्तर पर जारी हैं। सिंहस्थ के दौरान एक दिन में पांच करोड़ से अधिक श्रद्धालु शिप्रा में स्नान कर पुण्य लाभ ले सकें, हम ऐसे प्रबंधन करने जा रहे हैं। उज्जैन भ्रमण के दौरान प्रशिक्षण दल इन तैयारियों का भी मुआयना करे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि देशों के बीच इस तरह से मिलने-जुलने का सिलसिला जारी रहना चाहिए। इससे एक-दूसरे के पर्यटन और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा मिलता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रशिक्षण दल के साथ समूह चित्र भी क्लिक करवाये। इस अवसर पर आरसीवीपी नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी, भोपाल के संचालक मुजीबुर्रहमान खान एवं प्रशिक्षण संचालक डॉ. अनुपमा रावत सहित ट्रेनी ऑफिसर्स उपस्थित थे।

मप्र में बॉयोमास एग्रीकल्चर वेस्ट से ऊर्जा उत्पादन के लिए 3200 करोड़ निवेश करेगी एसएईएल

भोपाल। नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन (ग्रीन एनर्जी प्रोडक्शन) के नामी कंपनी एसएईएल बॉयोमास एग्रीकल्चर वेस्ट से ऊर्जा उत्पादन के लिए मध्य प्रदेश में 3200 करोड़ रुपये का निवेश करने जा रही है। एसएईएल के पदाधिकारियों ने बुधवार देर शाम भोपाल पहुंचकर समत्व भवन (मुख्यमंत्री निवास) में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से सौजन्य भेंट की। कंपनी पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को प्रदेश में अपनी भावी निवेश योजना की जानकारी दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को एसएईएल इंडस्ट्रीज लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर सुखबीर सिंह आवला ने मध्य प्रदेश में बॉयोमास एग्रीकल्चर वेस्ट उर्जा उत्पादन के लिए 3200 करोड़ रुपये निवेश करने का प्रस्ताव दिया। कंपनी के एमडी ने इसके अतिरिक्त भी अन्य संभावनाओं पर खुलकर अपनी बात रखी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कंपनी द्वारा मप्र में निवेश करने की मंशा पर प्रसन्नता जताई और कहा कि मध्यप्रदेश की धरती पर निवेशकों का स्वागत और अभिनंदन है। राज्य सरकार निवेशकों को हर संभव मदद करने को तत्पर है। सौजन्य भेंट के दौरान मप्र के औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग के प्रमुख सचिव राघवेन्द्र कुमार सिंह, मप्र औद्योगिक विकास निगम लिमिटेड के प्रबंध संचालक चंद्रमौली शुक्ला, एसएईएल इंडस्ट्रीज लिमिटेड के पदाधिकारी इंदरदीप सिंह गिल एवं संदीप सिंह चढ्ढा भी उपस्थित थे।

सप्रीत बुमराह का आईपीएल सफर: 145 मैचों में 183 विकेट की कहानी

नई दिल्ली।  जसप्रीत बुमराह, मुंबई इंडियंस के दाएं हाथ के तेज गेंदबाज, आईपीएल के 13वें सीजन में भी टीम का अहम हिस्सा बनने जा रहे हैं। अब तक बुमराह ने 145 आईपीएल मुकाबले खेले हैं और शानदार प्रदर्शन करते हुए 183 विकेट हासिल किए हैं। उनका औसत 22.02 का रहा है और उन्होंने दो बार पारी में फाइव विकेट हॉल भी अपने नाम किया है। इसके अलावा, उन्होंने चार बार आईपीएल में एक ही सीजन में 20 या उससे अधिक विकेट लेने का कारनामा किया है। बुमराह का आईपीएल सफर साल 2013 में शुरू हुआ, जब उन्हें मुंबई इंडियंस की ओर से केवल दो मैच खेलने का मौका मिला। इन दो मुकाबलों में उन्होंने कुल 42 गेंदें फेंकी और तीन विकेट लिए। अगले साल यानी 2014 में बुमराह को 11 मुकाबलों में खेलने का मौका मिला, लेकिन केवल पांच सफलताएं ही हासिल कर पाए। आईपीएल 2015 में बुमराह ने चार मैच खेले और तीन विकेट हासिल किए। हालांकि, उनके करियर का स्वर्णिम दौर साल 2016 से शुरू हुआ। इस साल उन्होंने 14 मुकाबलों में 15 विकेट चटकाए और अपनी प्रतिभा का प्रमाण दिया। 2017 में बुमराह ने 16 मुकाबलों में शानदार प्रदर्शन करते हुए 20 विकेट लिए। साल 2018 में उन्होंने 14 मुकाबलों में 17 विकेट हासिल किए। आईपीएल 2019 में बुमराह ने 16 मैच खेले और 409 रन खर्च कर 19 विकेट निकाले। उनके प्रदर्शन में निरंतरता दिखी और 2020/21 के सीजन में उन्होंने 15 मैचों में 27 विकेट चटकाए। 2021 में भी बुमराह ने अपने काबिलियत का लोहा मनवाया और 14 मुकाबलों में 410 रन खर्च कर 21 विकेट हासिल किए। अगले साल, 2022 में उन्होंने 14 मैच खेले और 15 विकेट लिए, जिसमें सबसे खास उनका प्रदर्शन कोलकाता नाइट राइडर्स के खिलाफ रहा, जब उन्होंने एक मैच में केवल 10 रन खर्च कर पांच विकेट झटके। आईपीएल 2024 में बुमराह ने 13 मुकाबलों में 20 विकेट हासिल किए और इस दौरान रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के खिलाफ पारी में 21 रन खर्च कर पांच विकेट अपने नाम किए। आईपीएल 2025 में 12 मैच खेलते हुए बुमराह ने 17.55 की औसत के साथ 18 विकेट लिए। बुमराह का यह लगातार प्रदर्शन उन्हें ना केवल मुंबई इंडियंस के लिए बल्कि पूरे आईपीएल में सबसे प्रभावशाली तेज गेंदबाजों में गिनता है। बुमराह की खासियत उनके निरंतर और दबावपूर्ण परिस्थितियों में भी मैच बदलने की क्षमता है। चाहे आखिरी ओवर हो या शुरुआत की जल्दी विकेट लेने की जरूरत, बुमराह हमेशा अपनी टीम के लिए एक भरोसेमंद विकल्प साबित हुए हैं। उनका अनुभव और गेंदबाजी तकनीक उन्हें आईपीएल में हमेशा खतरनाक बनाती है। इस तरह, जसप्रीत बुमराह ने आईपीएल में अपने करियर के हर चरण में अलग-अलग रिकॉर्ड और उपलब्धियां बनाई हैं और अब उनका लक्ष्य नई ऊँचाइयों को छूना है। मुंबई इंडियंस और क्रिकेट प्रेमियों के लिए बुमराह का यह सफर हमेशा प्रेरणा का स्रोत रहा है।

समुद्र से आसमान तक एक्शन, अमेरिका ने ईरान के मिसाइल ठिकानों पर बरसाए भारी बम

नई दिल्ली। मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंचता नजर आ रहा है जब अमेरिका ने होर्मुज स्ट्रेट के पास ईरान के मिसाइल ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हमला किया है यह कार्रवाई ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के तहत की जा रही है जिसे अब और तेज कर दिया गया है अमेरिकी सेंट्रल कमांड यानी CENTCOM के अनुसार इन हमलों में भारी क्षमता वाले बमों का इस्तेमाल किया गया जो मजबूत और सुरक्षित ठिकानों को भी तबाह करने में सक्षम हैं ये मिसाइल ठिकाने ईरान के तटीय इलाके में स्थित थे और यहां तैनात एंटी शिप मिसाइलें अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए बड़ा खतरा बन रही थीं होर्मुज स्ट्रेट जिसे वैश्विक तेल आपूर्ति का सबसे अहम मार्ग माना जाता है इस समय अमेरिकी सैन्य गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बन गया है इस क्षेत्र में किसी भी तरह का सैन्य तनाव सीधे तौर पर वैश्विक व्यापार और तेल बाजार को प्रभावित कर सकता है रिपोर्ट्स के मुताबिक इस अभियान के दौरान अमेरिकी नौसेना और वायुसेना ने सैकड़ों लड़ाकू उड़ानें भरी हैं अब तक 28 फरवरी से शुरू हुए इस ऑपरेशन में 7000 से ज्यादा लक्ष्यों पर हमले किए जा चुके हैं और 6500 से अधिक लड़ाकू उड़ानें भरी जा चुकी हैं हमलों में कई महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया है जिनमें बैलिस्टिक मिसाइल साइट एंटी शिप मिसाइल ठिकाने IRGC के मुख्यालय एयर डिफेंस सिस्टम और सैन्य संचार नेटवर्क शामिल हैं अमेरिका ने इस अभियान में अपनी अत्याधुनिक सैन्य ताकत का व्यापक इस्तेमाल किया है जिसमें बी 1 बी 2 और बी 52 जैसे बमवर्षक विमान एफ 22 और एफ 35 जैसे फाइटर जेट ड्रोन और निगरानी विमान शामिल हैं इसके अलावा समुद्र में परमाणु ऊर्जा से चलने वाले विमानवाहक पोत पनडुब्बियां और मिसाइल से लैस युद्धपोत तैनात किए गए हैं जमीन पर भी पैट्रियट और थाड जैसे उन्नत मिसाइल रक्षा सिस्टम के साथ रॉकेट आर्टिलरी और एंटी ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है जिससे साफ है कि यह ऑपरेशन हवा जमीन और समुद्र तीनों स्तरों पर एक साथ चलाया जा रहा है इस पूरे घटनाक्रम ने वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा दी है क्योंकि होर्मुज स्ट्रेट में किसी भी तरह की अस्थिरता का असर पूरी दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति और अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है आने वाले दिनों में इस क्षेत्र की स्थिति और भी संवेदनशील बनी रह सकती है

नवरात्रि में व्रत क्यों है जरूरी? आयुर्वेद बताता है शरीर और मन का संतुलन

नई दिल्ली। नवरात्रि में व्रत रखना केवल धार्मिक आस्था का हिस्सा नहीं है बल्कि इसके पीछे गहरी आयुर्वेदिक सोच भी जुड़ी हुई है। अक्सर लोग इसे सिर्फ पूजा-पाठ और परंपरा से जोड़कर देखते हैं लेकिन आयुर्वेद के अनुसार यह शरीर को अंदर से रीसेट करने और संतुलित करने का एक प्राकृतिक तरीका है। दरअसल नवरात्रि ऐसे समय पर आती है जब मौसम बदल रहा होता है। यह संक्रमण काल शरीर के लिए संवेदनशील माना जाता है। आयुर्वेद के अनुसार इस दौरान शरीर में वात और पित्त दोष असंतुलित हो सकते हैं जिससे पाचन तंत्र कमजोर पड़ जाता है और बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में व्रत रखने से शरीर को आराम मिलता है और वह खुद को संतुलित करने की प्रक्रिया शुरू करता है। नवरात्रि के व्रत में लोग हल्का और सात्विक भोजन जैसे फल कुट्टू सिंघाड़ा दही और साबूदाना लेते हैं। यह भोजन पचने में आसान होता है और पाचन तंत्र पर ज्यादा दबाव नहीं डालता। रोजमर्रा के तले-भुने और मसालेदार खाने से जो अतिरिक्त बोझ शरीर पर पड़ता है वह इस दौरान कम हो जाता है। इससे शरीर को खुद को ठीक करने और ऊर्जा को पुनः संतुलित करने का समय मिलता है। आयुर्वेद में पाचन शक्ति जिसे अग्नि कहा जाता है को स्वास्थ्य का आधार माना गया है। जब अग्नि कमजोर होती है तो शरीर में अपच और विषैले तत्व यानी टॉक्सिन्स जमा होने लगते हैं। व्रत रखने से यह अग्नि दोबारा सक्रिय होती है और शरीर में जमा विषैले तत्व बाहर निकलने लगते हैं। यही कारण है कि व्रत के दौरान लोग खुद को हल्का ऊर्जावान और अधिक सक्रिय महसूस करते हैं। नवरात्रि का व्रत केवल शारीरिक ही नहीं बल्कि मानसिक रूप से भी फायदेमंद होता है। इस दौरान लोग ध्यान पूजा और संयम का पालन करते हैं जिससे मानसिक शांति मिलती है। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में यह एक तरह का मेंटल डिटॉक्स बन जाता है जहां व्यक्ति खुद को थोड़ा धीमा करके अंदर से संतुलित करता है। इसके अलावा व्रत में खाए जाने वाले सात्विक खाद्य पदार्थ शरीर को जरूरी पोषण देने के साथ-साथ इम्युनिटी बढ़ाने में भी मदद करते हैं। ये खाद्य पदार्थ न केवल हल्के होते हैं बल्कि मौसमी बीमारियों से बचाव में भी सहायक होते हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि नवरात्रि का व्रत शरीर और मन दोनों को संतुलित करने का एक प्राकृतिक और प्रभावी तरीका है। यह परंपरा हमें न सिर्फ आध्यात्मिक रूप से मजबूत बनाती है बल्कि स्वास्थ्य की दृष्टि से भी बेहद लाभकारी साबित होती है।

सस्ती यात्रा सुरक्षित सफर रेलवे का बड़ा बदलाव बढ़े नॉन एसी कोच और रिकॉर्ड सब्सिडी

नई दिल्ली। Indian Railways ने आम यात्रियों को किफायती यात्रा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बड़ा कदम उठाते हुए नॉन एसी कोचों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी की है। सरकार का फोकस इस बात पर है कि देश के करोड़ों लोग कम खर्च में आरामदायक और सुलभ यात्रा कर सकें। इसी दिशा में जनरल और स्लीपर श्रेणी के कोचों को प्राथमिकता दी जा रही है ताकि अधिक से अधिक यात्रियों को इसका लाभ मिल सके। रेल मंत्रालय के अनुसार वर्तमान में कुल कोचों का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा जनरल और स्लीपर क्लास का है जो इस बात को दर्शाता है कि रेलवे आम जनता की जरूरतों को केंद्र में रखकर काम कर रहा है। वर्ष 2024 25 में करीब 1250 नए जनरल कोच जोड़े गए हैं और 2025 26 में लगभग 860 और कोच जोड़ने की योजना है। इससे यात्रियों की भीड़ को कम करने और यात्रा को अधिक सुविधाजनक बनाने में मदद मिलेगी। सरकार यात्रियों को राहत देने के लिए किराए पर औसतन लगभग 45 प्रतिशत तक की सब्सिडी दे रही है। हर साल करीब 60000 करोड़ रुपये की सब्सिडी देकर रेलवे यह सुनिश्चित कर रहा है कि आम आदमी की यात्रा सस्ती बनी रहे। वहीं मुंबई जैसे उपनगरीय क्षेत्रों में अतिरिक्त 3000 करोड़ रुपये की सब्सिडी दी जा रही है जिससे रोजाना यात्रा करने वाले लाखों लोगों को सीधा लाभ मिलता है। रेल मंत्री Ashwini Vaishnaw ने बताया कि रेलवे केवल यात्री सेवाओं में ही नहीं बल्कि माल ढुलाई में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। फ्रेट परिवहन 2013 14 के 1055 मिलियन टन से बढ़कर अब लगभग 1650 मिलियन टन तक पहुंच गया है जिससे भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा फ्रेट कैरियर बन चुका है। रेलवे के आधुनिकीकरण पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। अब तक लगभग 47000 किलोमीटर ट्रैक का विद्युतीकरण हो चुका है जो कुल नेटवर्क का 99 प्रतिशत से अधिक है। इसके साथ ही ट्रैक निर्माण में भी बड़ी वृद्धि हुई है और यह 15000 किलोमीटर से बढ़कर लगभग 35000 किलोमीटर तक पहुंच गया है। सुरक्षा के क्षेत्र में भी रेलवे ने उल्लेखनीय प्रगति की है। रोड ओवर ब्रिज और रोड अंडर ब्रिज की संख्या 4000 से बढ़कर 14000 हो गई है जबकि ऑटोमैटिक सिग्नलिंग 1500 किलोमीटर से बढ़कर 4000 किलोमीटर से अधिक हो गई है। इसके अलावा एलएचबी कोचों की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है जो यात्रियों के लिए अधिक सुरक्षित माने जाते हैं। रेल मंत्री ने यह भी बताया कि डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर परियोजना में तेजी आई है और अब तक लगभग 2800 किलोमीटर कॉरिडोर तैयार हो चुका है जहां प्रतिदिन सैकड़ों मालगाड़ियां संचालित हो रही हैं। सरकार नीति आयोग और वित्त मंत्रालय के सहयोग से परियोजनाओं की निगरानी और पारदर्शिता को भी मजबूत कर रही है इस तरह भारतीय रेलवे सस्ती सुरक्षित और आधुनिक यात्रा की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है और आने वाले समय में यह बदलाव यात्रियों के अनुभव को और बेहतर बनाएगा।

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 33,660 करोड़ रुपये की ‘भव्य’ योजना को दी मंजूरी, बनेंगे 100 इंडस्ट्रियल पार्क

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को भारत औद्योगिक विकास योजना, जिसे ‘भव्य योजना’ कहा गया है, को मंजूरी दे दी। इस योजना के तहत 33,660 करोड़ रुपये की लागत से देशभर में 100 प्लग-इन-प्ले इंडस्ट्रियल पार्क बनाए जाएंगे। इन पार्कों का उद्देश्य औद्योगिक विकास को तेज करना और रोजगार के अवसर बढ़ाना है। विश्वस्तरीय औद्योगिक इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माणसरकार के आधिकारिक बयान के अनुसार, ‘भव्य’ योजना का उद्देश्य विश्वस्तरीय औद्योगिक इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना है। इसके जरिए देश की निर्माण क्षमता बढ़ेगी और आर्थिक वृद्धि को नई गति मिलेगी। यह योजना नेशनल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर डेवलपमेंट प्रोग्राम (NICDP) के तहत विकसित स्मार्ट इंडस्ट्रियल सिटी मॉडल की सफलता पर आधारित है और इसमें राज्यों और निजी क्षेत्र की भागीदारी शामिल होगी। व्यापार करने में आसानी और इंजीनियरों के लिए सुविधाएं‘भव्य’ योजना में सिंगल विंडो सिस्टम के जरिए से मंजूरी प्रक्रिया को आसानी से बनाया जाएगा। इंजीनियरों को पहले से तैयार जमीन, जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर और सभी सुविधाएं एक ही स्थान पर मिलेंगी, जिससे कंपनियां जल्दी काम शुरू कर सकेंगी। इन इंडस्ट्रियल पार्कों का आकार 100 से 1,000 एकड़ तक होगा। सरकार प्रति एकड़ 1 करोड़ रुपये तक वित्तीय सहायता देगी। इसमें शामिल हैं: सड़क, बिजली और पानी ड्रेनेज और आईटी सिस्टम फैक्ट्री शेड और वेयरहाउस टेस्टिंग लैब साथ ही, वर्कर्स के लिए आवास और सामाजिक सुविधाएं और बाहरी समझौतों के लिए परियोजना लागत का 25 प्रतिशत तक समर्थन प्रदान किया जाएगा। चयन प्रक्रिया और भविष्य की तैयारीइन पार्कों का चयन चुनौती मोड के माध्यम से किया जाएगा, ताकि केवल बेहतर और निवेश के लिए तैयार प्रस्ताव चुनें जाएं। पार्कों का डिजाइन पीएम गतिशक्ति के सिद्धांतों के अनुरूप होगा, जिसमें मल्टीमॉडल समझौते, लॉजिस्टिक्स सुविधा और ग्रीन एनर्जी पर जोर होगा।अंडरग्राउंड यूटिलिटी सिस्टम के माध्यम से बार-बार खुदाई की जरूरत नहीं पड़ेगी, जिससे उद्योग बिना काम कर सकेंगे। रोजगार और आर्थिक विकाससरकार का गठन है कि ‘भावी’ योजना से बड़े स्तर पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा होंगे। इसमें कंस्ट्रक्शन, लॉजिस्टिक्स और सर्विस सेक्टर के लाखों लोग शामिल होंगे। योजना देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू होगी, जिससे औद्योगिक विकास को समान रूप से गति मिलेगी। क्लस्टर-आधारित विकास के माध्यम से यह योजना उद्योग, सप्लायर और सर्विस प्रोवाइडर्स को एक साथ लाएगी, जिससे सेवाएं मजबूत होंगी और क्षेत्रीय औद्योगीकरण को बढ़ावा मिलेगा। लाभांश इस योजना का सीधा लाभ: निर्माण इकाइयाँ लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) स्थानीय अप्स वैश्विक निवेशक अप्रत्यक्ष लाभ: मजदूर लॉजिस्टिक्स कंपनियाँ सर्विस सेक्टर स्थानीय समुदाय केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 33,660 करोड़ रुपये की भव्य योजना को मंजूरी दी, जिसके तहत 100 प्लगइन-एंड-प्ले औद्योगिक पार्क बनेंगे। योजना से इंजीनियरों के लिए आसान सुविधाएं, बेहतर समन्वय, ग्रीन एनर्जी और रोजगार सृजन सुनिश्चित होगा। यह निर्माण, MSME, प्रदूषण और स्थानीय समुदाय के लिए लाभकारी और समावेशी औद्योगिक विकास की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगी।

किसानों के लिए बढ़ी उम्मीद: 1,718.56 करोड़ रुपये का MSP फंड अब CCI को मंजूर

नई दिल्ली। कृषि क्षेत्र में एक बड़ी राहत भरी खबर आई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति (CCEA) की बैठक में कॉटन कमीशन ऑफ इंडिया (CCI) को 1,718.56 करोड़ रुपये का फंड दिया गया। यह राशि कॉटन सीजन 2023-24 के लिए निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को लागू करने और किसानों को प्रत्यक्ष मूल्य समर्थन देने के उद्देश्य से दी जाएगी। 2023-24 कॉटन सीजन का आंकड़ाइस सीजन में गेहूं की खेती का क्षेत्रफल 114.47 लाख हेक्टेयर था और उत्पादन लगभग 325.22 लाख हेक्टेयर रहने का अनुमान है। यह वैश्विक कॉटन उत्पादन का लगभग 25 प्रतिशत है। ऐसे में किसानों को उचित मूल्य सुनिश्चित करना और बाजार में स्थिरता बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता है। केंद्र सरकार कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (CACP) की सिफारिशों के आधार पर कॉटन के लिए MSP निर्धारित करती है। इस प्रणाली का उद्देश्य विशेष रूप से उन समयों में किसानों की सुरक्षा करना है, जब बाजार मूल्य MSP से नीचे गिर जाते हैं। MSP से किसानों को क्या फ़ायदाCCI केंद्रीय नोडल एजेंसी के रूप में MSP ऑपरेशन सुनिश्चित करती है। बाज़ार में कीमत गिरने पर यह किसानों से सभी औसत क्वालिटी (FAQ) वाली कपास बिना किसी मात्रा सीमा के खरीदती है। इससे किसानों को सुरक्षित और लाभकारी मूल्य मिलता है। CCI ने तैयारियों के तहत पूरे भारत के 11 प्रमुख कपास उत्पादक राज्यों में 152 जिलों में 508 से ज़्यादा खरीद केंद्र स्थापित किए हैं। इससे किसानों के लिए खरीद प्रक्रिया सरल, सुलभ और सुनिश्चित बनती है। कपास भारत की सबसे महत्वपूर्ण कपास की खेती में से एक है। यह लगभग 6 लाख किसानों की खेती का आधार है। इसके अलावा कपास प्रसंस्करण, व्यापार और वस्त्र उद्योग सहित संबंधित गतिविधियों में 400-500 लाख लोगों को रोज़गार देता है। MSP के ऑपरेशन से न केवल कपास की खेती को स्थिर रखा जाता है, बल्कि किसानों को मजबूरी में बिक्री रोकने और लाभकारी प्रतिफल सुनिश्चित करने में भी मदद मिलती है। यह उपाय कृषि बाजारों में समावेशिता बढ़ाने और कपास उत्पादक समुदाय की आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में CCEA ने CCI को 1,718.56 करोड़ रुपये MSP फंड दिया। इससे कपास किसानों को मूल्य सुरक्षा, लाभकारी कीमतें और बाजार स्थिरता मिलेगी। सीजन 2023-24 में गेहूं उत्पादन 325.22 लाख किसान तक पहुंचने का अनुमान है। CCI के 508 से अधिक खरीद केंद्र किसानों को सुलभ और सुनिश्चित खरीद का लाभ देंगे। यह कदम कपास उत्पादक समुदाय की आर्थिक सुरक्षा और रोजगार सृजन के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा।