Chambalkichugli.com

जमीन मुक्त कराने के नाम पर खेल, एक महीने में दो बार भेजी गई नकली NOC

इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर में जमीन से जुड़े कामकाज को लेकर बड़ा घोटाला सामने आया है। इंदौर विकास प्राधिकरण (IDA) में फर्जी एनओसी (No Objection Certificate) का संगठित रैकेट सक्रिय होने का खुलासा हुआ है, जिसमें प्राधिकरण के अंदरूनी लोगों की संलिप्तता की आशंका जताई जा रही है। एक महीने में दो बार भेजी गई फर्जी NOCमामला योजना 97 पार्ट-4 बिजलपुर की करीब 20 हजार वर्गफुट जमीन से जुड़ा है। जमीन मालिक ने ले-आउट मंजूरी के लिए टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (TNCP) में आवेदन किया था। जांच के दौरान TNCP अधिकारियों को संदेह हुआ क्योंकि IDA से जारी NOC और उसके प्रारूप में साइन मेल नहीं खा रहे थे। जब पुष्टि के लिए IDA से संपर्क किया गया, तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ-ऐसी कोई NOC वहां से जारी ही नहीं हुई थी। हैरानी की बात यह है कि करीब डेढ़ महीने के भीतर दो बार फर्जी NOC भेजी गई।  अफसरों के साइन भी निकले नकलीभू-अर्जन अधिकारी सुदीप मीणा ने साफ कहा कि उनके नाम से फर्जी साइन कर NOC बनाई गई। इससे पहले कंट्री प्लानिंग विभाग के अधिकारी के भी सिग्नेचर फर्जी पाए गए। इससे साफ है कि रैकेट काफी सुनियोजित तरीके से काम कर रहा था और दस्तावेजों को असली जैसा दिखाने के लिए अधिकारियों के हस्ताक्षर तक कॉपी किए जा रहे थे।  IDA कर्मचारी पर शक, मोबाइल बंद कर गायबइस पूरे मामले में IDA के विधि विभाग के बाबू शुभम श्रीवास्तव पर संदेह गहराया है। खुलासे के बाद से वह बिना सूचना के गायब है, उसका मोबाइल भी बंद है और घर से भी लापता बताया जा रहा है। इससे जांच और गंभीर हो गई है। करोड़ों के घोटाले की आशंकासूत्रों के मुताबिक, यह रैकेट पिछले करीब एक साल से सक्रिय था और जमीन की कीमत के हिसाब से NOC जारी करने के रेट तय किए जाते थे। आशंका है कि इस तरह कई मामलों में शासन को करोड़ों रुपए के राजस्व का नुकसान पहुंचाया गया है। अब प्राधिकरण पुरानी NOC फाइलों की भी जांच कराने की तैयारी में है, जिससे इस घोटाले का दायरा और बढ़ सकता है।  अब पूरी प्रक्रिया होगी ऑनलाइनमामले की गंभीरता को देखते हुए IDA के सीईओ परीक्षित झाड़े ने NOC प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन करने का फैसला लिया है, ताकि भविष्य में इस तरह की फर्जीवाड़े की गुंजाइश खत्म हो सके। फिलहाल विभागीय जांच जारी है और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की बात कही जा रही है।

33 साल बाद मिला न्याय: सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर पूर्व वायुसेना अधिकारी को मिलेगी सम्मानजनक विदाई

नई दिल्ली। तीन दशक पहले नौकरी से बर्खास्त किए गए भारतीय वायुसेना (IAF) के एक पूर्व अधिकारी को आखिरकार न्याय मिल गया है। सुप्रीम कोर्ट ने 1993 की बर्खास्तगी को अवैध और अनुचित ठहराते हुए न सिर्फ उसे रद्द किया, बल्कि अधिकारी को सम्मानजनक विदाई देने का ऐतिहासिक आदेश भी दिया है। अदालत ने कहा कि किसी भी सैनिक के लिए उसका सम्मान सबसे बड़ी पूंजी होता है, और उसे बहाल करना न्याय का अहम हिस्सा है। कोर्ट का बड़ा फैसला जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की पीठ ने पूर्व स्क्वाड्रन लीडर आर. सूद की बर्खास्तगी को रद्द करते हुए कहा कि वायुसेना की कार्रवाई कानूनी रूप से कमजोर और त्रुटिपूर्ण थी। कोर्ट ने निर्देश दिया कि: वायुसेना प्रमुख द्वारा तय तारीख पर उन्हें औपचारिक विदाई दी जाए विदाई उसी सम्मान के साथ हो, जिसके वे नियमित सेवानिवृत्ति पर हकदार होते क्या था मामला? यह पूरा विवाद 1987 की एक घटना से जुड़ा है। आरोप था कि एक नागरिक ड्राइवर को रेगिस्तान में छोड़ दिया गया था, जहां बाद में उसके अवशेष मिले। इसी मामले में कार्रवाई करते हुए 22 सितंबर 1993 को वायुसेना अधिनियम की धारा 19 के तहत आर. सूद को सेवा से हटा दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने क्यों पलटा फैसला? पहले ही मिल चुकी थी क्लीन चिट एक आपराधिक अदालत ने सबूतों के अभाव में आर. सूद को पहले ही बरी कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब मुकदमा चलाने लायक सबूत ही नहीं थे, तो विभागीय कार्रवाई का आधार भी कमजोर हो जाता है। सजा में भेदभाव पर सख्त टिप्पणी कोर्ट ने पाया कि इस मामले में वरिष्ठ अधिकारी को मामूली सजा दी गई, जबकि आदेश का पालन करने वाले आर. सूद को बर्खास्त कर दिया गया—जो स्पष्ट रूप से असमानता है। वरिष्ठ के आदेश का पालन बना सजा का कारण अदालत ने कहा कि किसी अधीनस्थ अधिकारी को सिर्फ इसलिए कठोर सजा नहीं दी जा सकती कि उसने अपने वरिष्ठ के आदेशों का पालन किया। सम्मान की वापसी को प्राथमिकता चूंकि आर. सूद अब सेवानिवृत्ति की उम्र पार कर चुके हैं, उन्हें सेवा में बहाल करना संभव नहीं है। लेकिन कोर्ट ने आदेश दिया कि उन्हें सभी लाभ ऐसे दिए जाएं मानो वे कभी बर्खास्त ही नहीं हुए थे। सबसे अहम बात—अदालत ने आर्थिक मुआवजे से ज्यादा “सम्मान की बहाली” को प्राथमिकता दी। यह फैसला बताता है कि एक सैनिक के लिए उसकी प्रतिष्ठा ही सबसे बड़ी पहचान होती है, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने 33 साल बाद फिर से स्थापित कर दिया।

स्वीमिंग के दौरान अचानक गिरे बिजनेसमैन, साइलेंट हार्ट अटैक से मौत की आशंका

भोपाल । मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहां एक वरिष्ठ कारोबारी की स्वीमिंग करते समय संदिग्ध हालात में मौत हो गई। शुरुआती जांच में इसे ‘साइलेंट हार्ट अटैक’ से जोड़कर देखा जा रहा है, हालांकि अंतिम पुष्टि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के बाद ही होगी।  स्वीमिंग के दौरान अचानक बिगड़ी तबीयतयह घटना टीटी नगर क्षेत्र स्थित तरुण पुष्कर की है। जानकारी के मुताबिक, शाहपुरा की अमतलाश कॉलोनी निवासी 63 वर्षीय संजय त्यागी रोज की तरह बुधवार शाम भी स्वीमिंग के लिए पहुंचे थे। शाम करीब 6 बजे जब वह पूल में तैर रहे थे, तभी अचानक बेसुध होकर पानी में गिर पड़े। पूल में पानी की गहराई महज 4 फीट थी, जिससे डूबने की संभावना कम मानी जा रही है।  CPR देने के बावजूद नहीं बच पाई जानघटना के तुरंत बाद वहां मौजूद ट्रेनर और अन्य लोगों ने उन्हें बाहर निकाला और CPR देकर सांसें वापस लाने की कोशिश की, लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। इसके बाद उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।  साइलेंट हार्ट अटैक की आशंकापुलिस के अनुसार, प्रारंभिक तौर पर मामला साइलेंट हार्ट अटैक का लग रहा है। इस तरह के अटैक में अक्सर व्यक्ति को पहले कोई गंभीर लक्षण महसूस नहीं होते और अचानक स्थिति बिगड़ जाती है। फिलहाल शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है और शॉर्ट पीएम रिपोर्ट के बाद ही मौत के सही कारणों का खुलासा हो सकेगा। जांच जारी, रिपोर्ट का इंतजारपुलिस मामले की जांच कर रही है और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। यदि हार्ट अटैक की पुष्टि होती है, तो यह एक और उदाहरण होगा कि फिटनेस एक्टिविटी के दौरान भी स्वास्थ्य संबंधी जोखिम को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

नीरव मोदी का नया दांव: यूरोपियन कोर्ट पहुंचा मामला, ‘रूल 39’ से लटक सकता है प्रत्यर्पण

मुंबई। पंजाब नेशनल बैंक घोटाले के मुख्य आरोपी और भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी ने भारत प्रत्यर्पण टालने के लिए अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आखिरी कानूनी चाल चल दी है। उसने फ्रांस के स्ट्रासबर्ग स्थित यूरोपीय मानवाधिकार न्यायालय (ECtHR) में ‘रूल 39’ के तहत याचिका दायर कर अपने प्रत्यर्पण पर अस्थायी रोक लगाने की मांग की है। ब्रिटेन में खत्म हो चुके सभी रास्ते इससे पहले लंदन उच्च न्यायालय ने 25 मार्च को नीरव मोदी की अपील को खारिज कर दिया था, जिसमें उसने अपने प्रत्यर्पण केस को दोबारा खोलने की मांग की थी। इस फैसले के बाद ब्रिटेन में उसके पास कोई कानूनी विकल्प नहीं बचा था, जिसके चलते उसने यूरोपियन कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। नियमों के मुताबिक, केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) तय समयसीमा के भीतर उसे भारत ला सकती थी, लेकिन ‘रूल 39’ की अर्जी लंबित रहने तक प्रत्यर्पण पर रोक लग गई है। क्या है ‘रूल 39’? समझिए आसान भाषा में ‘रूल 39’ यूरोपीय मानवाधिकार न्यायालय का एक आपातकालीन प्रावधान है, जिसके तहत अदालत किसी व्यक्ति को “अपरिवर्तनीय नुकसान” से बचाने के लिए अंतरिम आदेश जारी कर सकती है। कोई खुली सुनवाई नहीं होती: पूरा मामला लिखित दलीलों के आधार पर तय होता है 48 घंटे में फैसला संभव: आमतौर पर जज जल्द निर्णय देते हैं अस्थायी राहत मिलती है: अंतिम फैसला नहीं, सिर्फ रोक लगाने का अंतरिम उपाय प्रत्यर्पण पर रोक: जब तक अर्जी पर फैसला नहीं, तब तक संबंधित देश व्यक्ति को नहीं भेजता विशेषज्ञों के मुताबिक, याचिकाकर्ता को यह साबित करना होता है कि उसे तुरंत और गंभीर नुकसान का खतरा है, और उसने अपने देश में सभी कानूनी विकल्प इस्तेमाल कर लिए हैं। लंबी खिंच सकती है कानूनी प्रक्रिया ‘रूल 39’ के तहत मिली राहत स्थायी नहीं होती, लेकिन इससे मामला वर्षों तक खिंच सकता है। जानकारों का मानना है कि पूरी प्रक्रिया 3 से 5 साल तक चल सकती है। क्या होगा आगे? फिलहाल क्राउन प्रॉसिक्यूशन सर्विस (CPS) ने भी पुष्टि की है कि नीरव मोदी के प्रत्यर्पण की प्रक्रिया तय थी, लेकिन अब यूरोपीय अदालत में दाखिल अर्जी के चलते इस पर अस्थायी ब्रेक लग गया है। कुल मिलाकर, नीरव मोदी ने एक ऐसा कानूनी रास्ता चुना है जो भले ही अंतिम तौर पर उसे राहत दिलाए या न दिलाए, लेकिन भारत लाए जाने की प्रक्रिया को फिलहाल टालने में जरूर असरदार साबित हो सकता है।

बिहार की कमान संभालते ही बड़ी परीक्षा: सम्राट चौधरी के सामने विकास की रफ्तार बढ़ाने की चुनौती

पटना। सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने के साथ ही बिहार की राजनीति में नया अध्याय शुरू हो गया है। लंबे समय तक राज्य की कमान संभालने वाले नीतीश कुमार ने विकास की मजबूत नींव रखी, अब उस पर “विकसित बिहार” की इमारत खड़ी करने की जिम्मेदारी नई सरकार पर आ गई है। नई सरकार ने “न्याय के साथ विकास” की अवधारणा को आगे बढ़ाते हुए “बदलता बिहार, बढ़ता बिहार” का नारा दिया है। लेकिन असली चुनौती अब इस बदलाव की गति को तेज करने की है। विकास की रफ्तार बढ़ाना सबसे बड़ी चुनौती नीतीश कुमार के कार्यकाल में बिहार की औसत विकास दर 10% से अधिक रही। हालांकि अर्थशास्त्रियों का मानना है कि विकसित राज्यों की श्रेणी में आने के लिए यह रफ्तार 20% के आसपास होनी चाहिए। ऐसे में सम्राट चौधरी के सामने कम समय में दोगुनी गति से विकास करने की बड़ी चुनौती है। शपथ लेने के तुरंत बाद ही उन्होंने अधिकारियों को साफ संकेत दे दिया कि काम की रफ्तार बढ़ानी होगी और लटकाने की प्रवृत्ति खत्म करनी होगी। डबल इंजन सरकार—ताकत या उम्मीद? राज्य में नई सरकार की एक बड़ी ताकत केंद्र में नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार का समर्थन है। “डबल इंजन” मॉडल के चलते केंद्र से सहयोग और संसाधनों की उम्मीद बढ़ जाती है। हालांकि, विशेष राज्य का दर्जा अभी तक नहीं मिल पाया है, लेकिन विशेष पैकेज के जरिए कुछ आर्थिक मदद जरूर मिली है। आर्थिक संसाधन बढ़ाना बड़ी चुनौती बिहार की सबसे बड़ी कमजोरी सीमित आंतरिक आय है। राज्य का आंतरिक राजस्व करीब 75 हजार करोड़ रुपये तक पहुंचा है, जिसे तेजी से बढ़ाने की जरूरत है। केंद्र से करों और अनुदान में बड़ी हिस्सेदारी मिलती है बजट में कर्ज का भी प्रावधान है लेकिन अपनी आय अभी भी जरूरत के मुकाबले कम है ऐसे में सरकार को नए राजस्व स्रोत तलाशने और कठोर आर्थिक फैसले लेने पड़ सकते हैं। रोजगार, पलायन और गरीबी—तीन बड़ी चिंताएं बिहार की जमीनी चुनौतियां अब भी गंभीर हैं: बेरोजगारी कम प्रति व्यक्ति आय बड़े पैमाने पर पलायन जातीय सर्वेक्षण में लाखों परिवार गरीब पाए गए हैं। सरकार ने उन्हें आर्थिक सहायता देने और महिलाओं को रोजगार से जोड़ने की योजनाएं शुरू की हैं, लेकिन इन पर भारी खर्च भी आएगा। अवसर भी कम नहीं नई सरकार के पास चुनौतियों के साथ अवसर भी हैं: प्रशासनिक ढांचा पहले से व्यवस्थित सुशासन की छवि केंद्र का समर्थन और नेतृत्व में नई ऊर्जा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी सम्राट चौधरी की कार्यक्षमता और जमीनी अनुभव पर भरोसा जताया है। बिहार आज एक अहम मोड़ पर खड़ा है। मजबूत नींव तैयार है, लेकिन ऊंची उड़ान के लिए तेज फैसले, बेहतर संसाधन प्रबंधन और रोजगार सृजन पर फोकस जरूरी होगा। अब देखना यह है कि सम्राट चौधरी इन चुनौतियों को अवसर में बदलकर “विकसित बिहार” के लक्ष्य को कितनी तेजी से हासिल कर पाते हैं।

सेल्समैन के बाल पकड़कर पीटा, विरोध करने पर युवक ने की मारपीट

नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां मामूली विवाद ने हिंसक रूप ले लिया। बदरवास क्षेत्र के एक पेट्रोल पंप पर काम कर रहे सेल्समैन के साथ दो युवकों ने सरेआम मारपीट कर दी। पूरी घटना सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई, जिसके बाद मामला पुलिस तक पहुंच गया है। जल्दी पेट्रोल डालने को लेकर बढ़ा विवादजानकारी के मुताबिक, बदरवास के वार्ड क्रमांक 07 निवासी 25 वर्षीय संजीव यादव स्थानीय पेट्रोल पंप पर सेल्समैन के रूप में कार्यरत हैं। 15 अप्रैल की शाम करीब 5 से 5:30 बजे के बीच वह अन्य ग्राहकों को ईंधन भर रहे थे। इसी दौरान दो युवक बाइक से पहुंचे और बिना लाइन में आए तुरंत पेट्रोल भरने का दबाव बनाने लगे। संजीव यादव ने भीड़ का हवाला देते हुए युवकों से वाहन को आगे लाने के लिए कहा, लेकिन यही बात आरोपियों को नागवार गुजर गई और उन्होंने गाली-गलौज शुरू कर दी। बाल पकड़कर की बेरहमी से पिटाईपीड़ित के अनुसार, जब वह विवाद से बचने के लिए पीछे हटे तो दोनों युवक और उग्र हो गए। आरोप है कि उन्होंने संजीव यादव का पीछा किया, उनके बाल पकड़ लिए और जमकर मारपीट की। इस दौरान आसपास मौजूद लोग भी सहम गए, लेकिन किसी ने बीच-बचाव नहीं किया।  CCTV में कैद हुई पूरी वारदातपेट्रोल पंप पर लगे सीसीटीवी कैमरों में यह पूरी घटना रिकॉर्ड हो गई है। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि किस तरह मामूली बात पर आरोपियों ने हिंसक रूप ले लिया। यह फुटेज अब पुलिस के पास अहम सबूत के रूप में मौजूद है। पुलिस ने शुरू की जांच, कार्रवाई की मांगपीड़ित संजीव यादव ने बदरवास थाने में शिकायत दर्ज कराते हुए आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपियों की पहचान कर आगे की कार्रवाई की जा रही है।

रजत पाटीदार ने 17 गेंदों में आईपीएल करियर का सबसे तेज कप्तानी अर्धशतक लगाकर एडम गिलक्रिस्ट के रिकॉर्ड की बराबरी की।

नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेट के क्षितिज पर एक ऐसा नाम उभरकर सामने आया है जिसने अपने बल्ले की धमक से चयनकर्ताओं के बंद दरवाजों पर जोरदार प्रहार किया है। रजत पाटीदार, जिन्होंने घरेलू क्रिकेट और आईपीएल के मंच पर अपनी एक अलग पहचान बनाई है, वर्तमान सीजन में जिस आक्रामक अंदाज में खेल रहे हैं, उसने उन्हें भारतीय टी20 अंतरराष्ट्रीय टीम में पदार्पण का सबसे प्रबल दावेदार बना दिया है। मैदान के चारों ओर शॉट खेलने की उनकी असाधारण क्षमता और दबाव के क्षणों में क्रीज पर अडिग रहने का उनका जज्बा उन्हें वर्तमान पीढ़ी के सबसे परिपक्व बल्लेबाजों की सूची में सबसे ऊपर रखता है। रिकॉर्डतोड़ बल्लेबाजी और कप्तानी का नया चेहरा आईपीएल के इस सत्र में रजत पाटीदार ने रॉयल चेलेंजर बेंगलुरु के नेतृत्व की जिम्मेदारी संभालते हुए न केवल अपनी टीम को नई दिशा दी है बल्कि अपनी बल्लेबाजी को भी एक नए शिखर पर पहुंचाया है। उन्होंने हालिया मुकाबलों में अपनी तूफानी बल्लेबाजी से कई दिग्गज खिलाड़ियों के रिकॉर्ड को खतरे में डाल दिया है। विशेष रूप से मुंबई के खिलाफ खेले गए मैच में उन्होंने मात्र 17 गेंदों पर अर्धशतक जड़कर क्रिकेट जगत को स्तब्ध कर दिया। यह पारी इसलिए भी खास थी क्योंकि उन्होंने आईपीएल के इतिहास में एक कप्तान के रूप में एडम गिलक्रिस्ट के सबसे तेज अर्धशतक के ऐतिहासिक रिकॉर्ड की बराबरी की। उनकी इस पारी ने साबित कर दिया कि नेतृत्व का बोझ उनकी नैसर्गिक बल्लेबाजी को कुचलने के बजाय और अधिक निखारने का काम कर रहा है। मध्य क्रम में विस्फोटक बल्लेबाजी का पर्याय पाटीदार की सबसे बड़ी ताकत उनका निडर दृष्टिकोण और तकनीकी कौशल है। वह स्पिनर्स के खिलाफ जितने सहज नजर आते हैं, तेज गेंदबाजों की गति का इस्तेमाल करने में भी उतने ही माहिर हैं। शुरुआती पांच मैचों में उनके आंकड़े किसी करिश्मे से कम नहीं हैं, जहां उन्होंने 213 से अधिक के स्ट्राइक रेट के साथ 222 रन बनाकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। टीम इंडिया को लंबे समय से एक ऐसे मध्य क्रम के बल्लेबाज की तलाश रही है जो मैच की स्थिति के अनुसार अपनी गति बदल सके। पाटीदार इस ढांचे में पूरी तरह फिट बैठते हैं। उनकी बल्लेबाजी में वह ‘एक्स फैक्टर’ मौजूद है जो खेल के किसी भी मोड़ पर मैच का पासा पलटने की क्षमता रखता है।घरेलू अनुभव और भविष्य की राह रजत पाटीदार की यह सफलता कोई रातों-रात मिली उपलब्धि नहीं है। इसके पीछे मध्य प्रदेश के लिए घरेलू क्रिकेट में बिताए गए सालों का कड़ा परिश्रम है। रणजी ट्रॉफी और विजय हजारे ट्रॉफी में लगातार रन बनाने का अनुभव अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनके काम आ रहा है। 2025 में अपनी कप्तानी में बेंगलुरु को पहला आईपीएल खिताब दिलाने के बाद, उनकी मानसिक दृढ़ता और खेल की समझ में जबरदस्त परिपक्वता आई है। क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि उनकी वर्तमान फॉर्म को देखते हुए चयनकर्ता उन्हें आगामी टी20 सीरीज से बाहर रखने का जोखिम नहीं उठा सकते। वह न केवल तकनीकी रूप से सक्षम हैं, बल्कि आधुनिक टी20 क्रिकेट की मांग के अनुरूप हर गेंद पर प्रहार करने का साहस भी रखते हैं। ब्लू जर्सी का बढ़ता इंतजार भारतीय टीम प्रबंधन वर्तमान में भविष्य की टीम तैयार करने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है, और पाटीदार इस योजना का एक अनिवार्य हिस्सा नजर आते हैं। उनके गगनचुंबी छक्के और गैप ढूंढने की कला उन्हें एक पूर्ण टी20 खिलाड़ी बनाती है। जिस तरह से उन्होंने आईपीएल के दबाव भरे माहौल में निरंतरता दिखाई है, वह यह सुनिश्चित करता है कि वह अंतरराष्ट्रीय मंच पर बड़ी चुनौतियों का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। अब यह केवल समय की बात है कि कब यह धाकड़ बल्लेबाज टीम इंडिया की जर्सी पहनकर मैदान पर उतरेगा। उनकी यह अविश्वसनीय यात्रा भारतीय क्रिकेट के प्रति उनके अटूट समर्पण और संघर्ष की एक प्रेरक कहानी है।

अमेरिका का बयान: ईरान से संघर्ष विराम बढ़ाने का कोई अनुरोध नहीं, पाक में हो सकती है अगली वार्ता

वॉशिंगटन। अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि उसने ईरान के साथ अस्थायी संघर्षविराम को आगे बढ़ाने के लिए कोई औपचारिक अनुरोध नहीं किया है। 7 अप्रैल को घोषित यह संघर्षविराम अगले मंगलवार को समाप्त होने जा रहा है। व्हाइट हाउस क्‍या बोला?व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा कि कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया कि अमेरिका ने संघर्षविराम बढ़ाने का अनुरोध किया है, जो सही नहीं है। उन्होंने कहा कि बातचीत अभी सक्रिय रूप से जारी है और दोनों पक्षों के बीच संवाद से सकारात्मक परिणाम की उम्मीद की जा रही है। प्रेस सचिव के अनुसार राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस दोनों ही वार्ताओं को लेकर लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। अमेरिका का कहना है कि ईरान के सामने उसकी शर्तें स्पष्ट कर दी गई हैं और आगे की दिशा बातचीत के नतीजों पर निर्भर करेगी। पाकिस्तान में हो सकती है अगली बैठक व्हाइट हाउस ने संकेत दिया है कि अगली वार्ता उसी स्थान पर हो सकती है जहां पिछली बैठक हुई थी, यानी पाकिस्तान में। अमेरिका के मुताबिक, पाकिस्तान इस पूरे संवाद में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है, जबकि अन्य देश भी मदद की पेशकश कर रहे हैं।

महिला आरक्षण और परिसीमन बिल को लेकर संसद में आज टकराव के आसार

नई दिल्ली। महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक को गुरुवार को संसद में पेश किया गया, जिसके साथ ही सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन गई। माना जा रहा है कि 16 से 18 अप्रैल तक चलने वाला यह विशेष सत्र राजनीतिक रूप से बेहद गरम रहेगा। विपक्ष ने बिल का समर्थन तो किया है, लेकिन परिसीमन से जुड़े प्रावधानों पर कड़ा विरोध जताया है। नंबर गेम में NDA के लिए चुनौतीसंविधान संशोधन विधेयक को पारित कराने के लिए संसद में दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है, जबकि NDA के पास फिलहाल यह संख्या पूरी नहीं है। ऐसे में सरकार को विपक्षी दलों के समर्थन की जरूरत पड़ सकती है। लोकसभा में सीटों की मौजूदा संख्या बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव भी इस विधेयक का हिस्सा है। पीएम मोदी ने बताया नारी सशक्तिकरण का ऐतिहासिक कदमप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद की विशेष बैठक को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि देश नारी सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम उठा रहा है। उन्होंने इसे माताओं और बहनों के सम्मान से जोड़ते हुए कहा कि यह राष्ट्र के सम्मान का विषय है। तमिलनाडु CM स्टालिन का विरोधतमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने केंद्र सरकार के परिसीमन प्रस्ताव को ‘काला कानून’ करार देते हुए कड़ा विरोध जताया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कदम दक्षिणी राज्यों के प्रतिनिधित्व को प्रभावित कर सकता है और वहां की जनता के अधिकारों को नुकसान पहुंचा सकता है। 2011 जनगणना पर आधारित होगा परिसीमनसूत्रों के अनुसार, परिसीमन प्रक्रिया 2011 की जनगणना के आधार पर की जा रही है क्योंकि 2026 की जनगणना के परिणाम देर से आने की संभावना है। सरकार का उद्देश्य 2029 तक महिला आरक्षण को लागू करना है, जिसके लिए समयबद्ध प्रक्रिया जरूरी बताई जा रही है। परिसीमन आयोग के गठन की भी तैयारीसरकार ‘संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026’ के साथ परिसीमन विधेयक और केंद्र शासित प्रदेश संशोधन विधेयक भी पेश कर रही है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने इन्हें सदन में रखा। प्रस्ताव के अनुसार परिसीमन आयोग का गठन सुप्रीम कोर्ट के पूर्व या वर्तमान न्यायाधीश की अध्यक्षता में किया जाएगा। विरोध के मूड में विपक्षINDIA गठबंधन ने महिला आरक्षण का समर्थन करते हुए परिसीमन प्रस्ताव का विरोध करने का फैसला लिया है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार इस प्रक्रिया के जरिए राजनीतिक संतुलन को प्रभावित करना चाहती है। इसे लेकर गठबंधन के भीतर रणनीति तैयार की जा रही है और संसद में तीखा विरोध देखने की संभावना है।

लखनऊ अग्निकांड: 1200 झोपड़ियां राख, 6 बच्चे अब भी लापता, CM योगी ने दिए जांच और राहत के निर्देश

लखनऊ। विकासनगर सेक्टर-12 में रिंग रोड किनारे स्थित अवैध बस्ती में बुधवार शाम भीषण आग लग गई। कुछ ही समय में आग ने विकराल रूप लेते हुए करीब 1200 झोपड़ियों को अपनी चपेट में ले लिया। झोपड़ियों में रखे लगभग 100 गैस सिलिंडर फटने से पूरे इलाके में जोरदार धमाके हुए और भगदड़ मच गई। घटना के बाद 22 दमकल गाड़ियों ने देर रात तक आग बुझाने का प्रयास किया। इस दौरान आग की तीव्रता इतनी अधिक थी कि इलाके में दहशत फैल गई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार लगभग 50 मवेशियों के जलने की आशंका जताई जा रही है, हालांकि प्रशासन ने इसकी पुष्टि नहीं की है। सूचना में देरी का आरोप, आग ने मिनटों में लिया विकराल रूपस्थानीय लोगों का आरोप है कि आग लगने के बाद समय पर पुलिस और दमकल विभाग को सूचना दी गई, लेकिन मदद देर से पहुंची। इस बीच आग तेजी से फैलती गई और एक के बाद एक झोपड़ियां जलने लगीं। बताया गया कि आग एक झोपड़ी से शुरू हुई और कुछ ही देर में पूरी बस्ती को अपनी चपेट में ले लिया। लोगों ने पुलिस कंट्रोल रूम पर कॉल लगाने में भी देरी और तकनीकी दिक्कतों की बात कही है। भगदड़ में 6 बच्चे लापता, सर्च ऑपरेशन जारीभीषण हादसे के दौरान मची अफरा-तफरी में दो परिवारों के छह बच्चे लापता हो गए हैं, जिनमें एक परिवार के चार और दूसरे के दो बच्चे शामिल हैं। पुलिस और प्रशासन की टीमें देर रात तक बच्चों की तलाश में जुटी रहीं और आसपास के इलाकों में सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है। पथराव और हंगामा, प्लॉट मालिक पर आग लगाने के आरोपघटना के बाद गुस्साए लोगों ने प्लॉट मालिक के घर का घेराव कर हंगामा किया और उस पर आग लगवाने का आरोप लगाया। इस दौरान कुछ लोगों ने पथराव भी किया, जिसे रोकने के लिए पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा। आरोप है कि प्लॉट मालिक कुछ दिन से झोपड़ियां हटाने के लिए दबाव बना रहा था। वीडियो बनाने और ट्रैफिक जाम से बिगड़े हालातघटना स्थल पर भीड़ द्वारा वीडियो बनाने और रास्ता बाधित करने से राहत कार्य प्रभावित हुआ। दमकल की गाड़ियां भी जाम में फंस गईं, जिसके बाद पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा। इसी दौरान कुछ लोगों ने पुलिस पर पथराव किया, जिसमें सिविल डिफेंस के वार्डन समेत कई लोग घायल हो गए। इसके कारण इलाके में करीब दो किलोमीटर लंबा जाम लग गया और यातायात पूरी तरह बाधित हो गया। आग पर काबू, राहत और पुनर्वास की तैयारीदमकल विभाग ने रात करीब 10 बजे तक आग पर आंशिक नियंत्रण पा लिया। प्रशासन ने आसपास के लगभग 30 घरों को खाली कराया और कई सिलिंडर सुरक्षित बाहर निकाले। घटना की गंभीरता को देखते हुए उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए गए हैं। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और पीड़ितों के लिए भोजन व आवास की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।