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महिला आरक्षण और परिसीमन बिल को लेकर संसद में आज टकराव के आसार

नई दिल्ली। महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक को गुरुवार को संसद में पेश किया गया, जिसके साथ ही सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन गई। माना जा रहा है कि 16 से 18 अप्रैल तक चलने वाला यह विशेष सत्र राजनीतिक रूप से बेहद गरम रहेगा। विपक्ष ने बिल का समर्थन तो किया है, लेकिन परिसीमन से जुड़े प्रावधानों पर कड़ा विरोध जताया है।

नंबर गेम में NDA के लिए चुनौती
संविधान संशोधन विधेयक को पारित कराने के लिए संसद में दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है, जबकि NDA के पास फिलहाल यह संख्या पूरी नहीं है। ऐसे में सरकार को विपक्षी दलों के समर्थन की जरूरत पड़ सकती है। लोकसभा में सीटों की मौजूदा संख्या बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव भी इस विधेयक का हिस्सा है।

पीएम मोदी ने बताया नारी सशक्तिकरण का ऐतिहासिक कदम
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद की विशेष बैठक को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि देश नारी सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम उठा रहा है। उन्होंने इसे माताओं और बहनों के सम्मान से जोड़ते हुए कहा कि यह राष्ट्र के सम्मान का विषय है।

तमिलनाडु CM स्टालिन का विरोध
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने केंद्र सरकार के परिसीमन प्रस्ताव को ‘काला कानून’ करार देते हुए कड़ा विरोध जताया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कदम दक्षिणी राज्यों के प्रतिनिधित्व को प्रभावित कर सकता है और वहां की जनता के अधिकारों को नुकसान पहुंचा सकता है।

2011 जनगणना पर आधारित होगा परिसीमन
सूत्रों के अनुसार, परिसीमन प्रक्रिया 2011 की जनगणना के आधार पर की जा रही है क्योंकि 2026 की जनगणना के परिणाम देर से आने की संभावना है। सरकार का उद्देश्य 2029 तक महिला आरक्षण को लागू करना है, जिसके लिए समयबद्ध प्रक्रिया जरूरी बताई जा रही है।

परिसीमन आयोग के गठन की भी तैयारी
सरकार ‘संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026’ के साथ परिसीमन विधेयक और केंद्र शासित प्रदेश संशोधन विधेयक भी पेश कर रही है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने इन्हें सदन में रखा। प्रस्ताव के अनुसार परिसीमन आयोग का गठन सुप्रीम कोर्ट के पूर्व या वर्तमान न्यायाधीश की अध्यक्षता में किया जाएगा।

विरोध के मूड में विपक्ष
INDIA गठबंधन ने महिला आरक्षण का समर्थन करते हुए परिसीमन प्रस्ताव का विरोध करने का फैसला लिया है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार इस प्रक्रिया के जरिए राजनीतिक संतुलन को प्रभावित करना चाहती है। इसे लेकर गठबंधन के भीतर रणनीति तैयार की जा रही है और संसद में तीखा विरोध देखने की संभावना है।

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