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जबलपुर में सुमित्रा वाल्मीकि का बयान: 16 अप्रैल को पास होगा महिला आरक्षण बिल

नई दिल्ली। जबलपुर के रानीताल स्थित भाजपा कार्यालय में भारतीय जनता पार्टी द्वारा ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2026’ को लेकर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई। इस दौरान राज्यसभा सांसद सुमित्रा वाल्मीकि ने महिला आरक्षण बिल को लेकर केंद्र सरकार के रुख और उसकी तैयारियों पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यह बिल महिलाओं के राजनीतिक सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम साबित होगा। विपक्ष पर साधा निशाना, पुराने विरोध की दिलाई यादसांसद सुमित्रा वाल्मीकि ने विपक्षी दलों पर हमला बोलते हुए कहा कि जो लोग पहले महिला आरक्षण बिल का विरोध कर रहे थे, वही अब इसके लागू होने की तारीख पूछ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष इस मुद्दे पर दोहरे रवैये के साथ जनता को भ्रमित करने का प्रयास कर रहा है, जबकि केंद्र सरकार ने इसे पूरी गंभीरता से आगे बढ़ाया है। 16 अप्रैल को बिल पारित होने का दावाप्रेस कॉन्फ्रेंस में सांसद वाल्मीकि ने दावा किया कि महिला आरक्षण बिल 16 अप्रैल को पारित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इसके बाद राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने पर यह विधेयक कानून का रूप ले लेगा। इस कानून के लागू होने से देश की संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण मिलेगा, जिससे उनकी भागीदारी और निर्णय लेने की क्षमता मजबूत होगी। महिला सशक्तिकरण और राजनीतिक भागीदारी पर जोरसांसद ने कहा कि यह बिल महिलाओं को राजनीति में समान अवसर देने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इससे न केवल महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी, बल्कि नीति निर्माण में भी उनकी भूमिका अधिक प्रभावी होगी। उन्होंने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लिए गए ऐतिहासिक निर्णयों में से एक बताया। बंगाल और विपक्ष पर भी टिप्पणीइस दौरान बंगाल चुनाव को लेकर पूछे गए सवाल पर सुमित्रा वाल्मीकि ने कहा कि वहां भी भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने जा रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा जनता के मुद्दों पर काम कर रही है और अत्याचारों के खिलाफ मजबूती से खड़ी है। कांग्रेस पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि पार्टी कई राज्यों में संघर्ष कर रही है और जनता अब भाजपा की नीतियों पर भरोसा जता रही है। राजनीतिक माहौल गरमायामहिला आरक्षण बिल को लेकर दिए गए इस बयान के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। एक ओर भाजपा इसे महिला सशक्तिकरण का बड़ा कदम बता रही है, वहीं विपक्ष के रुख और प्रतिक्रिया को लेकर सियासी बहस जारी है।

सर्वाइकल कैंसर से जंग में एमपी नंबर वन एचपीवी वैक्सीनेशन में बनाया बड़ा रिकॉर्ड

मध्यप्रदेश । सर्वाइकल कैंसर जैसी गंभीर और जानलेवा बीमारी से बचाव के लिए चलाए जा रहे एचपीवी वैक्सीनेशन अभियान में मध्यप्रदेश ने देशभर में एक मिसाल कायम कर दी है। किशोरियों के स्वास्थ्य और भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में राज्य ने उल्लेखनीय प्रगति करते हुए खुद को शीर्ष स्थान पर स्थापित किया है। आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में 7 लाख 51 हजार से अधिक किशोरियों को टीकाकरण के लिए चिन्हित किया गया था जिनमें से अब तक करीब 5 लाख बालिकाओं को एचपीवी वैक्सीन लगाई जा चुकी है। इस तरह राज्य ने अपने लक्ष्य का लगभग 66 प्रतिशत हासिल कर लिया है जो राष्ट्रीय स्तर पर सबसे बेहतर प्रदर्शन में गिना जा रहा है। अन्य राज्यों की तुलना में मध्यप्रदेश की यह उपलब्धि और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। जहां मिजोरम में लगभग 57 प्रतिशत गुजरात में 36 प्रतिशत और आंध्र प्रदेश में 33 प्रतिशत टीकाकरण ही हो सका है वहीं पश्चिम बंगाल में अब तक यह अभियान शुरू भी नहीं हो पाया है। उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में 21 लाख किशोरियों को टीका लगाने का लक्ष्य रखा गया है लेकिन अब तक केवल 6 हजार के आसपास ही वैक्सीनेशन हो सका है। ऐसे में मध्यप्रदेश का प्रदर्शन स्पष्ट रूप से आगे नजर आता है। राज्य के भीतर भी कई जिलों ने शानदार काम किया है। डिंडोरी और राजगढ़ जैसे जिलों ने 100 प्रतिशत लक्ष्य हासिल कर एक उदाहरण प्रस्तुत किया है। वहीं खंडवा और बालाघाट जैसे जिले 95 प्रतिशत से अधिक टीकाकरण के साथ लक्ष्य के बेहद करीब हैं। सागर और खरगोन में भी 90 प्रतिशत से अधिक उपलब्धि दर्ज की गई है जो इस अभियान की गति और प्रभावशीलता को दर्शाती है। खास बात यह है कि सागर जिले में महज एक सप्ताह के भीतर दस हजार से अधिक टीकाकरण कर तेजी का परिचय दिया गया है। हालांकि इस सफलता के बीच कुछ चिंताजनक तस्वीर भी सामने आई है। प्रदेश के कुछ जिले जैसे रीवा धार शिवपुरी और इंदौर टीकाकरण के मामले में काफी पीछे हैं जहां यह आंकड़ा 10 प्रतिशत से भी कम है। इन क्षेत्रों में जागरूकता की कमी सामाजिक हिचकिचाहट और अभियान की कमजोर मॉनिटरिंग को मुख्य कारण माना जा रहा है। यह अंतर इस बात की ओर संकेत करता है कि अभियान को समान रूप से प्रभावी बनाने के लिए अभी और प्रयासों की जरूरत है। सर्वाइकल कैंसर भारत में महिलाओं के लिए एक गंभीर खतरा बना हुआ है। हर साल लगभग सवा लाख महिलाएं इस बीमारी की चपेट में आती हैं और करीब 75 हजार महिलाओं की मौत हो जाती है। यह बीमारी धीरे धीरे विकसित होती है और शुरुआती चरण में इसके लक्षण सामने नहीं आते जिससे समय पर पहचान मुश्किल हो जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार किशोरावस्था में एचपीवी वैक्सीनेशन इस बीमारी से बचाव का सबसे प्रभावी और सुरक्षित तरीका है। सरकार ने टीकाकरण को आसान बनाने के लिए डिजिटल और ऑफलाइन दोनों विकल्प उपलब्ध कराए हैं। अभिभावक यू विन प्लेटफॉर्म के जरिए स्लॉट बुक कर सकते हैं या फिर नजदीकी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र पर जाकर भी टीकाकरण करवा सकते हैं। भोपाल सहित कई शहरों में यह सुविधा विभिन्न अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों पर उपलब्ध है जहां आवश्यक दस्तावेजों के साथ आसानी से टीका लगवाया जा सकता है। मध्यप्रदेश का यह अभियान न केवल स्वास्थ्य क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि है बल्कि यह समाज में जागरूकता और सकारात्मक बदलाव का भी संकेत है। यदि इसी तरह प्रयास जारी रहे तो आने वाले समय में सर्वाइकल कैंसर जैसी गंभीर बीमारी पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकता है।

1 घाटकोपर में डॉ. बीआर आंबेडकर जयंती पर भव्य आयोजन, हजारों लोगों की भागीदारी से गूंजा पूरा मैदान

नई दिल्ली : डॉ. बीआर आंबेडकर की 135वीं जयंती पर घाटकोपर में भव्य आयोजन, हजारों लोगों की भागीदारी से गूंजा पूरा मैदान घाटकोपर स्थित पुलिस ग्राउंड में डॉ. बीआर आंबेडकर की 135वीं जयंती के अवसर पर एक विशाल और भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें मुंबई के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। यह आयोजन सामाजिक एकता, सांस्कृतिक अभिव्यक्ति और सामूहिक सहभागिता का एक प्रभावशाली उदाहरण बनकर सामने आया। हजारों की संख्या में पहुंचे लोगों ने पूरे माहौल को उत्सवमय बना दिया और बाबासाहेब के विचारों को सम्मान देने के लिए एकजुटता का प्रदर्शन किया। कार्यक्रम का उद्देश्य डॉ. आंबेडकर के समानता, न्याय और सामाजिक सशक्तिकरण के संदेश को जन-जन तक पहुंचाना रहा। आयोजन को विभिन्न सामाजिक संगठनों और समितियों के सहयोग से संपन्न किया गया, जिसमें कई सामाजिक कार्यकर्ताओं की सक्रिय भूमिका रही। पूरे स्थल को विशेष रूप से सजाया गया था और हर ओर उत्साह और ऊर्जा का वातावरण दिखाई दे रहा था। इस अवसर पर सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने लोगों को विशेष रूप से आकर्षित किया। मंच पर प्रस्तुत गीतों और लोकनृत्यों ने माहौल को भावनात्मक और ऊर्जावान बना दिया। स्थानीय कलाकारों द्वारा प्रस्तुत कार्यक्रमों ने दर्शकों का मन मोह लिया और पूरे आयोजन को जीवंत बना दिया। इसके साथ ही विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन भी किया गया, जिसमें शतरंज और क्रिकेट जैसे खेल शामिल रहे और बड़ी संख्या में युवाओं ने भाग लिया। कार्यक्रम में तकनीक आधारित प्रस्तुतियों को भी शामिल किया गया, जिनके माध्यम से डॉ. आंबेडकर के जीवन और ऐतिहासिक घटनाओं को प्रभावशाली ढंग से दर्शाया गया। इन प्रस्तुतियों ने दर्शकों को उनके संघर्ष और सामाजिक योगदान से जोड़ने का कार्य किया और कार्यक्रम को एक आधुनिक दृष्टिकोण भी प्रदान किया। इस आयोजन में 135 किलोग्राम का विशाल केक भी आकर्षण का केंद्र रहा, जिसे जयंती के प्रतीक के रूप में काटा गया। इस अवसर पर कई विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति रही, जिन्होंने बाबासाहेब के विचारों और उनके सामाजिक योगदान पर अपने विचार व्यक्त किए। पूरे कार्यक्रम के दौरान अनुशासन और व्यवस्था का विशेष ध्यान रखा गया।पूरे परिसर को सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियों का केंद्र बना दिया गया था। यहां भोजन स्टॉल, पुस्तक प्रदर्शनी, सामाजिक जागरूकता केंद्र और उद्यमिता से जुड़े कियोस्क लगाए गए थे, जिससे लोगों को मनोरंजन के साथ-साथ ज्ञानवर्धन का अवसर भी मिला। इस आयोजन में युवाओं की भागीदारी विशेष रूप से उल्लेखनीय रही। उन्होंने न केवल कार्यक्रम में सक्रिय भूमिका निभाई बल्कि पूरे आयोजन को सफल बनाने में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। कार्यक्रम ने सामाजिक एकता और जागरूकता का मजबूत संदेश दिया और डॉ. आंबेडकर के विचारों को एक बार फिर व्यापक स्तर पर जीवंत किया।

नोएडा प्रदर्शन के बाद यूपी सरकार का बड़ा फैसला, पूरे राज्य में बढ़ी न्यूनतम मजदूरी, श्रमिकों को मिला सीधा फायदा

नई दिल्ली:उत्तर प्रदेश सरकार ने श्रमिक वर्ग के हित में एक महत्वपूर्ण और बड़ा निर्णय लेते हुए न्यूनतम मजदूरी दरों में संशोधन को लागू कर दिया है। नोएडा और ग्रेटर नोएडा जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में हाल ही में हुए श्रमिक प्रदर्शनों और लगातार बढ़ती महंगाई को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया है। सरकार का कहना है कि इस निर्णय का उद्देश्य श्रमिकों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करना और उन्हें महंगाई के दबाव से राहत प्रदान करना है। संशोधित वेतन दरें 1 अप्रैल 2026 से पूरे राज्य में प्रभावी हो गई हैं। इस निर्णय की पृष्ठभूमि में औद्योगिक क्षेत्रों में हुए श्रमिक आंदोलनों को एक प्रमुख कारण माना जा रहा है। मजदूरों की मांगों और मौजूदा परिस्थितियों का गहन अध्ययन करने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया था। समिति की सिफारिशों के आधार पर ही यह संशोधन लागू किया गया है। प्रशासन का मानना है कि यह कदम श्रमिकों और उद्योग जगत दोनों के बीच संतुलन बनाए रखने में मदद करेगा और आर्थिक स्थिरता पर भी सकारात्मक प्रभाव डालेगा। गौतमबुद्ध नगर और गाजियाबाद जैसे प्रमुख औद्योगिक जिलों में मजदूरी दरों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की गई है। यहां अकुशल श्रमिकों का वेतन बढ़ाकर 13690 रुपये कर दिया गया है, जबकि अर्धकुशल श्रमिकों को 15059 रुपये और कुशल श्रमिकों को 16868 रुपये प्रतिमाह वेतन मिलेगा। इस वृद्धि से श्रमिकों को लगभग 2000 से 3000 रुपये तक का प्रत्यक्ष लाभ मिलने की संभावना है, जिससे उनकी दैनिक जरूरतों को पूरा करने में काफी राहत मिलेगी। प्रदेश के अन्य नगर निगम क्षेत्रों में भी मजदूरी दरों में संशोधन किया गया है। इन क्षेत्रों में अकुशल श्रमिकों का वेतन अब 13006 रुपये, अर्धकुशल श्रमिकों का 14306 रुपये और कुशल श्रमिकों का 16025 रुपये निर्धारित किया गया है। सरकार का कहना है कि यह बदलाव संतुलित तरीके से लागू किया गया है ताकि सभी श्रेणियों के श्रमिकों को समान लाभ मिल सके और किसी भी वर्ग पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव न पड़े। इसके अलावा अन्य जिलों में भी न्यूनतम मजदूरी में बढ़ोतरी की गई है। इन जिलों में अकुशल श्रमिकों को 12356 रुपये, अर्धकुशल श्रमिकों को 13591 रुपये और कुशल श्रमिकों को 15224 रुपये प्रति माह दिए जाएंगे। यह संशोधन पूरे राज्य में समान रूप से लागू किया गया है, जिससे श्रमिक वर्ग को व्यापक राहत मिलने की उम्मीद है। सरकार ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया है कि उद्योग जगत पहले से ही बढ़ती उत्पादन लागत और कच्चे माल की कीमतों के दबाव का सामना कर रहा है, इसके बावजूद श्रमिकों की स्थिति को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है। प्रशासन का दावा है कि इस कदम से श्रमिकों को राहत मिलेगी और औद्योगिक गतिविधियों पर किसी बड़े नकारात्मक प्रभाव की संभावना नहीं है। हालांकि सरकार ने सोशल मीडिया पर फैल रही उन अफवाहों को भी खारिज कर दिया है, जिनमें न्यूनतम मजदूरी को 20000 रुपये तक बढ़ाने की बात कही जा रही थी। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि केवल आधिकारिक रूप से जारी आदेश ही मान्य होंगे और वर्तमान में घोषित संशोधित दरें ही लागू रहेंगी। आगे की योजना के तहत सरकार ने संकेत दिए हैं कि यह बढ़ोतरी फिलहाल एक अंतरिम कदम है। भविष्य में वेज बोर्ड के माध्यम से व्यापक समीक्षा कर एक स्थायी और संतुलित वेतन संरचना तैयार की जाएगी, जिससे श्रमिकों को दीर्घकालिक लाभ सुनिश्चित हो सके।

मध्यप्रदेश में हीटवेव का प्रकोप, अगले दिनों और बढ़ेगा तापमान का असर

नई दिल्ली। मध्य प्रदेश में अब मानसून पूर्व की हल्की बारिश और बादलों का दौर लगभग खत्म हो चुका है और सूरज ने अपना तीखा तेवर दिखाना शुरू कर दिया है। प्रदेश के कई हिस्सों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच गया है, जिससे गर्मी का असर तेज महसूस किया जा रहा है। रतलाम सबसे गर्म, कई शहरों में पारा 40 के पारसोमवार को रतलाम प्रदेश का सबसे गर्म जिला रहा, जहां अधिकतम तापमान 41.2°C दर्ज किया गया। वहीं धार, नर्मदापुरम और खरगोन में भी पारा 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच गया। जबलपुर में 39.2°C, उज्जैन में 39°C और भोपाल-इंदौर में 38.8°C तापमान दर्ज किया गया, जिससे दिनभर तेज गर्मी का असर रहा। 16 और 17 अप्रैल को लू का अलर्टमौसम विभाग (IMD) ने चेतावनी जारी की है कि 16 और 17 अप्रैल को प्रदेश के कई जिलों में भीषण लू चल सकती है। इनमें रतलाम, झाबुआ, अलीराजपुर, धार, खरगोन, खंडवा, सीधी, सिंगरौली, मंडला और बालाघाट शामिल हैं। इसके अलावा भोपाल, इंदौर और उज्जैन में भी गर्म हवाओं का असर महसूस किया जाएगा। 15 अप्रैल से कमजोर सिस्टम, राहत की उम्मीद कमहालांकि 15 अप्रैल से एक नया मौसम सिस्टम सक्रिय होने की संभावना है, लेकिन यह काफी कमजोर बताया जा रहा है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार इससे गर्मी में कोई खास राहत मिलने की उम्मीद नहीं है। अप्रैल का दूसरा पखवाड़ा आमतौर पर सबसे अधिक गर्म माना जाता है, जिसमें कई बार तापमान रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच जाता है। प्रदेश के प्रमुख शहरों में तापमान का ट्रेंडपिछले वर्षों के आंकड़ों के अनुसार भोपाल और इंदौर में तापमान 43 से 44 डिग्री तक पहुंच चुका है, जबकि जबलपुर में 44°C और ग्वालियर में 45°C तक पारा दर्ज हो चुका है। ग्वालियर को प्रदेश का सबसे गर्म शहर माना जाता है, जहां कई बार 45 डिग्री से अधिक तापमान दर्ज हुआ है। पुराने रिकॉर्ड बताते हैं भीषण गर्मी का इतिहासभोपाल में 29 अप्रैल 1996 को 44.4°C तापमान दर्ज किया गया था। इंदौर में 25 अप्रैल 1958 को 44.6°C और जबलपुर में 28 अप्रैल 1970 को 45.4°C तापमान दर्ज हो चुका है। वहीं ग्वालियर में 1958 में 46.2°C तक तापमान पहुंच चुका है, जो अब तक के सबसे उच्च रिकॉर्ड में शामिल है। बारिश के बावजूद गर्मी का असरइस बार अप्रैल की शुरुआत में कई जिलों में आंधी-बारिश और ओलावृष्टि देखने को मिली थी, लेकिन इसके बावजूद गर्मी का असर अब तेजी से बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि मौसम का यह उतार-चढ़ाव आने वाले दिनों में और ज्यादा गर्मी का संकेत है। सावधानी जरूरी, हीटवेव से बचाव की सलाहमौसम विभाग ने लोगों को दिन के समय अनावश्यक बाहर निकलने से बचने, पर्याप्त पानी पीने और लू से बचाव के उपाय अपनाने की सलाह दी है।

इलाज के नाम पर लापरवाही, सतना में ऑपरेशन के दौरान बड़ी चूक ,युवक की मौत से मचा हड़कंप

सतना । मध्यप्रदेश के सतना शहर से एक बेहद गंभीर और झकझोर देने वाला मामला सामने आया है जहां कथित तौर पर डॉक्टरों की लापरवाही ने एक युवक की जान ले ली। यह घटना न केवल चिकित्सा व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है बल्कि मरीजों की सुरक्षा को लेकर भी चिंताएं बढ़ा देती है। पन्ना जिले के देवेंद्रनगर निवासी रवि रजक को किडनी में पथरी की शिकायत के बाद इलाज के लिए सतना लाया गया था लेकिन जो इलाज जीवन बचाने के लिए होना था वही उसकी मौत का कारण बन गया। जानकारी के मुताबिक परिजन रवि को इलाज के लिए सतना के एक निजी अस्पताल लेकर पहुंचे जहां जांच के बाद डॉक्टरों ने एक किडनी में गंभीर समस्या बताते हुए ऑपरेशन की सलाह दी। 4 अप्रैल को ऑपरेशन किया गया जो करीब पांच घंटे तक चला। परिजनों का आरोप है कि इस दौरान डॉक्टरों ने गंभीर लापरवाही बरती और जिस किडनी का इलाज होना था उसके साथ साथ दूसरी स्वस्थ किडनी में भी कट लगा दिया गया। ऑपरेशन के बाद ही मरीज की हालत बिगड़ने लगी जिससे परिजनों की चिंता बढ़ गई। स्थिति को गंभीर होता देख अस्पताल प्रबंधन ने बिना समय गंवाए उसे रीवा के सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। हालांकि परिजनों का कहना है कि यह रेफरल भी जिम्मेदारी से बचने की कोशिश थी क्योंकि उस समय तक स्थिति काफी खराब हो चुकी थी। रीवा पहुंचने के बाद जब डॉक्टरों ने जांच की तो मामला और भी चौंकाने वाला निकला। दूसरी किडनी पर गहरा कट पाया गया था जिसे कथित तौर पर धागे से बांध दिया गया था। इससे लगातार खून का रिसाव होता रहा और किडनी ने काम करना बंद कर दिया। डॉक्टरों ने मरीज की जान बचाने के लिए इमरजेंसी में दूसरी किडनी को भी निकालना पड़ा लेकिन तब तक संक्रमण और आंतरिक क्षति इतनी बढ़ चुकी थी कि स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई। लगातार बिगड़ती हालत के बीच आखिरकार युवक ने दम तोड़ दिया जिससे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। जैसे ही मौत की खबर परिजनों को मिली उनका गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने अस्पताल में जमकर हंगामा किया। इसके बाद कोलगवां थाना क्षेत्र में भी विरोध प्रदर्शन हुआ और परिजनों ने दोषी डॉक्टरों और अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। इस पूरे मामले ने स्वास्थ्य सेवाओं की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि परिजनों के आरोप सही साबित होते हैं तो यह केवल एक चिकित्सकीय गलती नहीं बल्कि घोर लापरवाही का मामला बन सकता है। ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई बेहद जरूरी हो जाती है ताकि भविष्य में किसी और को इस तरह की त्रासदी का सामना न करना पड़े। फिलहाल प्रशासन की ओर से मामले की जांच की उम्मीद जताई जा रही है और सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि पीड़ित परिवार को न्याय कब और कैसे मिल पाता है।

क्राइम ब्रांच की बड़ी कार्रवाई: जबलपुर में अवैध स्क्रैपिंग गिरोह के 2 आरोपी गिरफ्तार

  जबलपुर । जबलपुर में क्राइम ब्रांच और अधारताल थाना पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए अवैध वाहन स्क्रैपिंग गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस को सूचना मिली थी कि खजरी खिरिया क्षेत्र में एक गैराज के अंदर बिना किसी वैध अनुमति के पुराने वाहनों को काटकर स्क्रैप तैयार किया जा रहा है। सूचना के आधार पर टीम ने तुरंत मौके पर दबिश दी और बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया। छापेमारी में मिली आधी कटी कार और भारी मात्रा में स्क्रैपछापेमारी के दौरान पुलिस को गैराज के अंदर कई चौंकाने वाले सबूत मिले। एक इंडिका विस्टा कार (MP 20 CC 7962) आधी कटी हालत में पाई गई, जिसका इंजन बाहर निकाला हुआ था। इसके अलावा मौके पर वाहन (DL-1 LR 9698) में स्क्रैप लोड मिला और तीन वाहनों का कटिंग मटेरियल भी बरामद किया गया। पुलिस ने सभी सामान को जब्त कर लिया है। दो आरोपी गिरफ्तार, अवैध मुनाफे का खुलासाइस मामले में पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया कि अरबाज (26) पुराने वाहनों की व्यवस्था करता था, जबकि आरिफ (37) उन्हें गैराज में काटकर स्क्रैप तैयार करता था। दोनों मिलकर बिना किसी वैध दस्तावेज और आरटीओ अनुमति के अवैध रूप से यह कारोबार कर रहे थे और इससे मोटा मुनाफा कमा रहे थे। वाहन नंबरों से जुड़े दस्तावेज भी सामने आएपुलिस पूछताछ में गैराज संचालक शेख आरिफ ने बताया कि उसने कई वाहनों MP 20 CA 6862, MP 20 FA 6828 और MP 20 F 6243 को काटकर स्क्रैप तैयार किया था। हालांकि जब पुलिस ने उनसे वैध दस्तावेज और अनुमति पत्र मांगे तो वह कोई भी कागजात प्रस्तुत नहीं कर सका, जिससे अवैध गतिविधियों की पुष्टि हो गई। कानूनी धाराओं में मामला दर्ज, जांच जारीपुलिस ने आरोपियों के खिलाफ बीएनएस की धारा 318(1), 61(2) और मध्यप्रदेश मोटर कराधान अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है। कार्रवाई थाना प्रभारी प्रवीण कुमरे और क्राइम ब्रांच थाना प्रभारी शैलेष मिश्रा के नेतृत्व में की गई। फिलहाल पुलिस यह भी जांच कर रही है कि इस गिरोह से और कौन-कौन जुड़े हुए हैं।

UAE ने मांगा अरबों का कर्ज, पाकिस्तान पर बढ़ा दबाव; सऊदी अरब से बढ़ी उम्मीदें

इस्लामाबाद। आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहे पाकिस्तान के लिए नया संकट खड़ा हो गया है। संयुक्त अरब अमीरात द्वारा अरबों डॉलर का कर्ज वापस मांगे जाने के बीच अब सऊदी अरब एक बार फिर उसके लिए ‘संकटमोचक’ के रूप में उभरता नजर आ रहा है। इसी कड़ी में सऊदी वित्त मंत्री मोहम्मद अल-जदान का इस्लामाबाद दौरा काफी अहम माना जा रहा है। इसे पाकिस्तान को संभावित आर्थिक राहत के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सऊदी नेतृत्व के प्रति आभार जताते हुए कहा कि सऊदी सहयोग ने देश की आर्थिक स्थिरता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। UAE का कर्ज लौटाने से बढ़ेगी मुश्किलें जानकारी के मुताबिक, पाकिस्तान 2018 में लिए गए 3 अरब डॉलर से अधिक के कर्ज को UAE को लौटाने की प्रक्रिया में है। यह राशि उसके विदेशी मुद्रा भंडार का करीब 18 प्रतिशत है। ऐसे में भुगतान से देश की आर्थिक स्थिति पर सीधा दबाव पड़ना तय माना जा रहा है। स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान के अनुसार, मार्च के अंत तक देश के पास करीब 16.4 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार था, जो लगभग तीन महीने के आयात के लिए पर्याप्त माना जाता है। खाड़ी देशों के बदलते समीकरण विशेषज्ञों का मानना है कि UAE द्वारा कर्ज रोलओवर से इनकार केवल आर्थिक नहीं, बल्कि बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों का भी संकेत हो सकता है। खासकर पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान से जुड़े हालात के बीच यह कदम अहम माना जा रहा है। हालांकि पाकिस्तान ने इसे सामान्य वित्तीय प्रक्रिया बताया है। सऊदी-पाकिस्तान रक्षा सहयोग भी मजबूत इस बीच सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच रणनीतिक साझेदारी भी गहरी होती दिख रही है। सऊदी रक्षा मंत्रालय के अनुसार, पाकिस्तानी वायुसेना का एक दल पूर्वी क्षेत्र स्थित किंग अब्दुलअजीज एयर बेस पर तैनात किया गया है। इसमें लड़ाकू और सहायक विमान शामिल हैं, जिनका उद्देश्य सैन्य समन्वय और ऑपरेशनल तैयारियों को मजबूत करना है। IMF और कर्ज भुगतान की दोहरी चुनौती पाकिस्तान पर इस महीने अंतरराष्ट्रीय निवेशकों को 1.3 अरब डॉलर के बॉन्ड का भुगतान भी करना है। साथ ही वह अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से 1.2 अरब डॉलर की अगली किस्त का इंतजार कर रहा है। आर्थिक जानकारों का कहना है कि UAE के अचानक रुख ने पाकिस्तान की वित्तीय योजना को झटका दिया है। अब देश को विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट से बचने और आर्थिक संतुलन बनाए रखने के लिए सऊदी अरब सहित अन्य सहयोगी देशों पर अधिक निर्भर रहना पड़ सकता है। कुल मिलाकर, मौजूदा हालात में पाकिस्तान के लिए आर्थिक मोर्चे पर चुनौतियां बढ़ती दिख रही हैं, और उसकी नजरें एक बार फिर सऊदी समर्थन पर टिकी हैं।

भारत से इतनी नफरत, पाकिस्तान में आशा भोसले के गाने चलाए तो चैनल को नोटिस भेजा

इस्‍लामाबाद। दिग्गज भारतीय गायिका आशा भोसले पर कंटेंट चलाने को लेकर पाकिस्तान में एक चैनल को कार्रवाई का सामना करना पड़ा है। पाकिस्तान में नियामक की तरफ से जारी पत्र में कहा गया है कि भारतीय कंटेंट का प्रसारण करना मना है। साथ ही चैनल से इस संबंध में जवाब भी तलब किया गया है। भोसले का रविवार को मुंबई के अस्पताल में निधन हो गया था। सोमवार को उनका अंतिम संस्कार किया गया। पाकिस्तान इलेक्ट्रॉनिक मीडिया नियामक प्राधिकरण (PEMRA) ने जियोन्यूज को कारण बताओ नोटिस जारी कर यह स्पष्टीकरण मांगा है कि उसने भोसले की मौत की खबर के साथ भारतीय सामग्री क्यों प्रसारित की। पाकिस्तान में भारतीय कंटेंट पर प्रतिबंध 2018 से लागू है। PEMRA ने कहा कि भोसले की मौत की खबर प्रसारित करते समय जियोन्यूज ने भारतीय गाने और भारतीय फिल्मों के दृश्य प्रसारित करना, पाकिस्तान के सर्वोच्च न्यायालय के उस फैसले का जानबूझकर उल्लंघन है। जिसमें भारतीय सामग्री के प्रसारण पर प्रतिबंध लगाया गया है। जियोन्यूज के प्रबंध निदेशक अजहर अब्बास ने एक पोस्ट में कहा, ‘प्रतिष्ठित कलाकारों के बारे में रिपोर्टिंग करते समय उनके कार्यों को याद करना और उनकी सराहना करना हमेशा से एक परंपरा रही है। वास्तव में, आशा भोसले जैसी कलाकार के लिए, हमें उनके कालजयी और यादगार गीतों को और भी अधिक साझा करना चाहिए था। फिर भी, पाकिस्तान के इलेक्ट्रॉनिक मीडिया नियामक, PEMRA ने इसे प्रतिबंधित करने का विकल्प चुना है।’ भोसले का मुंबई के शिवाजी पार्क श्मशान घाट पर सोमवार शाम हिंदू रीति-रिवाज और पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। संगीत जगत की जानी-मानी हस्ती को अंतिम विदाई देने के लिए शिवाजी पार्क के अंदर और बाहर काफी संख्या में लोग एकत्र थे। पृष्ठभूमि में आशा का गाया गीत, ‘अभी ना जाओ छोड़कर…’ बज रहा था। लता मंगेशकर की बहनों में से एक, आशा भोसले का रविवार को निधन हो गया था। वह 92 वर्ष की थीं। उनकी बड़ी बहन लता का भी फरवरी 2022 में 92 वर्ष की आयु में रविवार के ही दिन निधन हुआ था। भोसले के बेटे आनंद ने उन्हें मुखाग्नि दी। आशा भोसले ने महज 10 साल की उम्र में गाना शुरू किया था और वह आठ दशक लंबे अपने करियर में लगभग 12,000 गीत गाए। दिवंगत गायिका को अंतिम विदाई देने वालों में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और सुनेत्रा पवार तथा निर्देशक रमेश सिप्पी, अभिनेता आमिर खान और विक्की कौशल शामिल थे।

तेज रफ्तार का कहर: शिवपुरी में ट्रक खाई में पलटा, दूसरे वाहन सुरक्षित रहे

शिवपुरी। शिवपुरी जिले के लुकवासा चौकी क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्ग-46 पर सोमवार दोपहर एक बड़ा सड़क हादसा होते-होते टल गया। जानकारी के अनुसार, महाराष्ट्र के औरंगाबाद से अलीगढ़ की ओर जा रहा एक मालवाहक ट्रक दैहरदा ब्रिज से उतरते समय अचानक अनियंत्रित होकर खाई में जा गिरा। ब्रिज से उतरते ही बिगड़ा संतुलन, चालक ने खोया नियंत्रणप्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, ट्रक जैसे ही दैहरदा ब्रिज से नीचे उतरा, वह अचानक लहराने लगा और चालक वाहन पर नियंत्रण नहीं रख सका। इसके बाद ट्रक सीधे सड़क किनारे खाई में जा गिरा। ट्रक में बजाज ऑटोमोबाइल्स का सामान लदा हुआ था, जिससे दुर्घटना के समय स्थिति और भी गंभीर हो सकती थी। नींद की झपकी या तकनीकी कारण, जांच जारीट्रक चालक फरीद, जो मेवात का रहने वाला है, ने बताया कि हादसा अचानक हुआ और वह कारण स्पष्ट नहीं बता सका। शुरुआती आशंका यह जताई जा रही है कि चालक को नींद की झपकी आने के कारण वाहन पर नियंत्रण खो गया होगा, हालांकि वास्तविक कारणों की जांच की जा रही है। बड़ा हादसा टला, अन्य वाहन सुरक्षितइस घटना का सबसे राहत भरा पहलू यह रहा कि ट्रक किसी अन्य वाहन से नहीं टकराया। हादसे के समय सड़क पर मौजूद अन्य चारपहिया और दोपहिया वाहन इसकी चपेट में आने से बच गए, जिससे एक बड़ा और जानलेवा हादसा टल गया। प्रशासनिक जांच की संभावनाघटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और प्रशासनिक अमला मौके पर पहुंचा और स्थिति का जायजा लिया। सड़क सुरक्षा और दुर्घटना के कारणों की विस्तृत जांच की संभावना जताई जा रही है।