बॉर्डर पार भी बॉलीवुड का क्रेज मर्दानी 3 टॉप पर ,धुरंधर समेत ये फिल्में भी ट्रेंड में

नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा का जादू केवल देश तक सीमित नहीं है बल्कि सरहदों के पार भी इसका असर साफ दिखाई देता है। इसका ताजा उदाहरण पाकिस्तान में देखने को मिल रहा है जहां नेटफ्लिक्स पर कई भारतीय फिल्में जबरदस्त तरीके से ट्रेंड कर रही हैं। खास बात यह है कि इस लिस्ट में बड़े बजट और चर्चित फिल्मों को पीछे छोड़ते हुए एक सस्पेंस क्राइम थ्रिलर ने नंबर वन की कुर्सी पर कब्जा जमा लिया है। इस समय पाकिस्तान में जो भारतीय फिल्म सबसे ज्यादा देखी जा रही है वह है मर्दानी 3। रानी मुखर्जी की यह फिल्म दर्शकों को बेहद पसंद आ रही है और वह एक बार फिर पुलिस अधिकारी शिवानी शिवाजी रॉय के किरदार में मजबूत और दमदार अंदाज में नजर आ रही हैं। फिल्म की कहानी और उसका सस्पेंस दर्शकों को अंत तक बांधे रखने में कामयाब रहा है जिसकी वजह से यह टॉप पोजीशन पर बनी हुई है। दूसरे नंबर पर जगह बनाई है वध 2 ने जो अपनी गहरी कहानी और दमदार अभिनय के कारण चर्चा में है। संजय मिश्रा और नीना गुप्ता जैसे अनुभवी कलाकारों की मौजूदगी इस फिल्म को और खास बनाती है। यह फिल्म अपने इमोशनल और थ्रिलिंग कंटेंट के कारण दर्शकों से जुड़ने में सफल रही है। वहीं तीसरे स्थान पर ट्रेंड कर रही है धुरंधर जो पहले से ही चर्चा में रही है। रणवीर सिंह की इस फिल्म का ओटीटी पर भी शानदार प्रदर्शन जारी है। हालांकि बड़े पैमाने पर चर्चा में रहने के बावजूद यह मर्दानी 3 से पीछे रह गई है जो अपने आप में दिलचस्प बात है। इसके अलावा लिस्ट में हैप्पी पटेल खतरनाक जासूस भी शामिल है जिसका दर्शक लंबे समय से इंतजार कर रहे थे। फिल्म में कॉमेडी और जासूसी का मिश्रण दर्शकों को खूब एंटरटेन कर रहा है और यही वजह है कि यह भी ट्रेंडिंग लिस्ट में अपनी जगह बनाए हुए है। पुरानी फिल्मों का क्रेज भी कम नहीं हुआ है। मर्दानी 2 और मर्दानी भी पाकिस्तान में लगातार ट्रेंड कर रही हैं। यह दिखाता है कि मजबूत कहानी और दमदार किरदार वाली फिल्मों की लोकप्रियता समय के साथ कम नहीं होती बल्कि और बढ़ती जाती है। इस पूरी लिस्ट से एक बात साफ हो जाती है कि भारतीय फिल्मों की पहुंच अब वैश्विक हो चुकी है। कंटेंट अगर दमदार हो तो भाषा और सीमाएं मायने नहीं रखतीं। खासकर सस्पेंस और क्राइम थ्रिलर जैसी शैलियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी पसंद किया जा रहा है। पाकिस्तान में इन फिल्मों का ट्रेंड करना इस बात का संकेत है कि दर्शक अब केवल मसाला एंटरटेनमेंट ही नहीं बल्कि मजबूत कहानी और बेहतरीन अभिनय को भी महत्व दे रहे हैं। आने वाले समय में यह ट्रेंड और मजबूत हो सकता है जहां भारतीय फिल्में दुनिया के अलग अलग हिस्सों में अपनी पहचान और भी मजबूत करेंगी।
‘जय श्री राम’ बोलने पर 500 रुपये की छूट: कोलकाता के डॉक्टर के ऑफर पर सियासी बवाल

कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में एक हृदय रोग विशेषज्ञ (Cardiologist) के अनोखे ऑफर ने राजनीतिक गलियारों में विवाद खड़ा कर दिया है। डॉक्टर ने घोषणा की है कि जो भी मरीज उनके क्लिनिक में आकर ‘जय श्री राम’ कहेगा, उसे कंसल्टेशन फीस में 500 रुपये की भारी छूट दी जाएगी। डॉक्टर ने अपने इस कदम को राज्य में ‘राजनीतिक बदलाव’ की उम्मीद से जोड़ा है। इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. पी.के. हाजरा ने यह छूट केवल दक्षिण कोलकाता स्थित अपने निजी चेंबर पर लागू की है। वे एक प्राइवेट अस्पताल में इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी विभाग के निदेशक भी हैं, लेकिन वहां यह छूट लागू नहीं होगी। डॉ. हाजरा ने अपने क्लिनिक पर एक पोस्टर लगाया है, जिसमें वे भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दुपट्टा पहने नजर आ रहे हैं। उन्होंने यह जानकारी सोशल मीडिया पर भी शेयर की है। डॉक्टर के मुताबिक, यह पोस्टर उनके ही एक मरीज ने तैयार किया था। डॉ. हाजरा ने कहा कि यह पूरी तरह से उनके दिमाग की उपज है। उन्होंने अपनी मंशा स्पष्ट करते हुए कहा: पिछले कई वर्षों में एक डॉक्टर के तौर पर मैंने मरीजों के सवाल झेले हैं कि आखिर उन्हें इलाज के लिए दूसरे राज्यों में क्यों जाना पड़ता है। जब भी मैं बंगाल के मरीजों को इलाज के लिए असम, ओडिशा या दक्षिण भारत जाते देखता हूं, तो मुझे बहुत बुरा लगता है। इसके विपरीत दूसरे राज्यों से लोग यहां नहीं आते। मुझे लगता है कि इस चलन को बदलने की जरूरत है। डॉक्टर ने आगे कहा कि वह सीधे तौर पर भाजपा से नहीं जुड़े हैं, लेकिन वह भाजपा शासित अन्य राज्यों की प्रगति के प्रशंसक हैं। डॉ. हाजरा ने स्वीकार किया कि उन्हें अपने गृह जिले पश्चिम मेदिनीपुर के पिंगला से भाजपा का टिकट मिलने की उम्मीद थी। जब ऐसा नहीं हुआ, तो उन्होंने लोगों को राज्य में बदलाव के लिए वोट करने हेतु प्रेरित करने का यह अनोखा तरीका निकाला। उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के काम की तारीफ भी की, लेकिन कहा कि अन्य राज्यों की विकास गति को देखते हुए बंगाल पिछड़ रहा है। उनके अनुसार, केंद्र और टीएमसी सरकार के बीच चल रही “खींचतान” का सीधा असर राज्य की स्वास्थ्य प्रणाली पर पड़ा है। तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पेशे से चिकित्सक डॉ. निर्मल माझी ने इस कदम की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने आरोप लगाया: डॉ. हाजरा अपनी जुटाई गई अपार संपत्ति की रक्षा करने के लिए भाजपा का पक्ष लेने की कोशिश कर रहे हैं। वह खुद को बचाने के लिए भाजपा की ‘वाशिंग मशीन’ में घुसकर अपनी छवि साफ करना चाहते हैं। माझी ने यह भी दावा किया कि ऐसे कदमों से भाजपा को चुनाव जीतने में कोई मदद नहीं मिलेगी क्योंकि जनता का समर्थन टीएमसी के साथ है। भाजपा के राज्यसभा सांसद और बंगाल के पूर्व भाजपा अध्यक्ष राहुल सिन्हा ने डॉ. हाजरा के इस कदम की सराहना की। उन्होंने कहा: मुझे लगता है कि यह पहल अन्य डॉक्टरों को भी आगे आने और ऐसे फैसले लेने के लिए प्रेरित करेगी, ताकि राज्य के स्वास्थ्य ढांचे की बेहतरी के लिए बदलाव लाया जा सके। बता दें कि पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए 23 और 29 अप्रैल को मतदान होना है, और मतों की गिनती 4 मई को की जाएगी।
फर्जी न्यायिक अधिकारी बनकर घूम रहे दो आरोपी गिरफ्तार, दिल्ली पुलिस ने अवैध हथियार और जाली दस्तावेज किए बरामद

नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती देने वाला एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसमें दो व्यक्तियों को फर्जी पहचान और अवैध हथियारों के साथ गिरफ्तार किया गया है। आरोप है कि इनमें से एक व्यक्ति ने खुद को न्यायिक अधिकारी बताकर न केवल सरकारी पहचान का दुरुपयोग किया बल्कि फर्जी दस्तावेजों के जरिए सुरक्षा व्यवस्था को गुमराह करने की कोशिश भी की। यह कार्रवाई राजधानी में बढ़ती सुरक्षा सतर्कता के बीच की गई है, जहां संदिग्ध गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही थी। गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान झांसी जिले के रहने वाले 31 वर्षीय सूर्या अग्रवाल और 21 वर्षीय निखिल यादव के रूप में हुई है। दोनों पर आरोप है कि वे फर्जी पहचान और अवैध हथियारों के सहारे खुद को प्रभावशाली और आधिकारिक पदों से जुड़ा दिखाने की कोशिश कर रहे थे। पुलिस ने बताया कि यह कार्रवाई संसद मार्ग थाना क्षेत्र में उस समय की गई जब एक संदिग्ध वाहन की गतिविधियों पर शक हुआ और उसे रोककर जांच शुरू की गई। जानकारी के अनुसार, एक एसयूवी वाहन बिना पंजीकरण नंबर प्लेट के चल रही थी और उस पर काली फिल्म चढ़ी हुई थी, जो नियमों के खिलाफ है। वाहन पर न्यायिक अधिकारी से जुड़ा एक स्टिकर भी लगा हुआ था, जिससे संदेह और गहरा गया। इसी आधार पर पुलिस ने वाहन को रोककर तलाशी ली। जांच के दौरान जो तथ्य सामने आए, उन्होंने सुरक्षा एजेंसियों को भी सतर्क कर दिया। तलाशी में निखिल यादव के पास से एक पिस्तौल और चार जिंदा कारतूस बरामद किए गए, जबकि सूर्या अग्रवाल के पास से पांच जिंदा कारतूस मिले। इसके अलावा जांच में यह भी सामने आया कि अग्रवाल खुद को वकील और एक सिविल जज के रूप में पेश कर रहा था। उसने एक न्यायिक पहचान पत्र और दिल्ली में हथियार ले जाने की अनुमति से जुड़ा एक दस्तावेज भी दिखाया, जिसे बाद में फर्जी पाया गया। पुलिस की सत्यापन प्रक्रिया में यह स्पष्ट हुआ कि प्रस्तुत किए गए पहचान पत्र और अनुमति पत्र पूरी तरह से जाली और डिजिटल रूप से बदले गए थे। हालांकि अग्रवाल के पास उत्तर प्रदेश में जारी एक वैध हथियार लाइसेंस था, लेकिन यह केवल उसी राज्य तक सीमित था और उसे दिल्ली में हथियार ले जाने की कोई अनुमति नहीं देता था। इस गंभीर अनियमितता के बाद दोनों आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। इस पूरे प्रकरण में पुलिस ने न केवल अवैध हथियार बल्कि फर्जी दस्तावेज, संदिग्ध स्टिकर और संबंधित वाहन को भी जब्त कर लिया है। शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी लंबे समय से अपनी पहचान को लेकर भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे थे और खुद को प्रभावशाली पदों से जोड़कर पेश कर रहे थे। पुलिस अब इस बात की जांच में जुटी है कि इन फर्जी दस्तावेजों को तैयार करने में और कौन लोग शामिल हो सकते हैं और क्या यह किसी बड़े नेटवर्क का हिस्सा है। सुरक्षा एजेंसियां इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सभी पहलुओं की गहन जांच कर रही हैं ताकि इस तरह की घटनाओं को भविष्य में रोका जा सके। KeywordsFake Judicial Officer, Delhi Police Arrest, Illegal Weapons Case, Forged Documents, Security Breach India, Crime News Delhi, Weapon Seizure Case संक्षिप्त विवरण
किन्नर समाज की आस्था का अनोखा केंद्र: जहां माता करती हैं मुर्गे की सवारी

मेहसाणा। देश में एक से बढ़कर एक मंदिर हैं जिनके लिए भक्तों की आस्था गहरी है. कुछ मंदिर रहस्यों से भरे है तो कुछ मंदिर आश्चर्य का कारण बनते हैं. इस कड़ी में हम गुजरात के मेहसाणा जिले में स्थित देवी बहुचरा माता मंदिर के बारे में जानेंगे जहां से किन्नर समाज की गहरी आस्था जुड़ी है. देश के कोने-कोने से यहां किन्नर पहुंचते हैं और बहुचरा माता को अर्धनारीश्वर के रूप में पूजकर उनका आशीर्वाद प्राप्त करें. आइए बहुचरा माता मंदिर के बारे में विस्तार से जानते हैं. बहुचरा देवी मंदिर की मान्यता स्थानीय मान्यताओं के अनुसार बहुचरा माता ने एक साथ बहुत सारे राक्षसों का अंत किया था जिसके कारण देवी का नाम बहुचरा पड़ा. मंदिर में बहुत सारे मुर्गे घूमते है जिसके कारण मंदिर को मुर्गों वाली देवी के रूप में भी जाना जाता है. माता बहुचरा मुर्गे की सवारी करती है. यह मंदिर किन्नरों के लिए गहरी आस्था का केंद्र है. मंदिर को लेकर मान्यता है कि जो भी व्यक्ति इस मंदिर में पूजा कर माता का आशीर्वाद लेता है उसे अगले किसी भी जन्म में किन्नर के रूप में नहीं जन्म लेना पड़ता. वहीं, संतान प्राप्ति की इच्छा भी देवी बहुचरा पूरी करती है. मान्यता है कि जब माता के आशीर्वाद से संतान प्राप्ति हो जाती है तो बच्चे के केश मंदिर में छोड़े जाती है और मंदिर में मुर्गों के दान भी किया जाता है. ……………….
गोल्डन डक से बना काला अध्याय अभिषेक शर्मा ने तोड़ा रोहित शर्मा का अनचाहा रिकॉर्ड

नई दिल्ली । आईपीएल 2026 के रोमांचक सीजन के बीच एक ऐसा आंकड़ा सामने आया है जिसने क्रिकेट प्रेमियों को हैरान कर दिया है। सनराइजर्स हैदराबाद के युवा ओपनर अभिषेक शर्मा के नाम एक ऐसा रिकॉर्ड दर्ज हो गया है जिसे कोई भी बल्लेबाज अपने करियर से जोड़ना नहीं चाहेगा। राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ खेले गए मुकाबले में वह पहली ही गेंद पर आउट हो गए और इस गोल्डन डक के साथ उन्होंने साल 2026 में टी20 क्रिकेट में सातवीं बार शून्य पर आउट होने का अनचाहा आंकड़ा छू लिया। यह केवल एक खराब पारी नहीं थी बल्कि एक ऐसे सिलसिले की कड़ी थी जो अब चिंता का विषय बन चुका है। अभिषेक ने इस प्रदर्शन के साथ एक कैलेंडर वर्ष में किसी भारतीय बल्लेबाज द्वारा सबसे ज्यादा बार शून्य पर आउट होने का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है। इससे पहले यह रिकॉर्ड रोहित शर्मा और संजू सैमसन के नाम था जिन्होंने अलग अलग सालों में छह छह बार शून्य पर आउट होने का आंकड़ा छुआ था। लेकिन अभिषेक ने इस आंकड़े को पीछे छोड़ते हुए नया नकारात्मक रिकॉर्ड बना दिया है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जहां रोहित शर्मा और संजू सैमसन ने अपने रिकॉर्ड 32 पारियों में बनाए थे वहीं अभिषेक शर्मा ने मात्र 18 पारियों में ही सात बार शून्य पर आउट होकर यह आंकड़ा हासिल कर लिया। यह आंकड़ा उनकी आक्रामक शैली के साथ साथ उनकी अस्थिरता को भी उजागर करता है। हालांकि उनके बल्लेबाजी आंकड़ों पर नजर डालें तो तस्वीर पूरी तरह निराशाजनक नहीं है। आईपीएल 2026 में उन्होंने अब तक पांच पारियों में 25.80 की औसत और 215.80 के जबरदस्त स्ट्राइक रेट से 129 रन बनाए हैं जिसमें उनका सर्वश्रेष्ठ स्कोर 74 रन रहा है। आईपीएल से पहले खेले गए टी20 वर्ल्ड कप 2026 में भी उनका प्रदर्शन उतार चढ़ाव से भरा रहा। दुनिया के नंबर एक टी20 बल्लेबाज के रूप में मैदान पर उतरे अभिषेक अपेक्षाओं पर पूरी तरह खरे नहीं उतर सके और आठ पारियों में केवल 141 रन ही बना पाए। हालांकि न्यूजीलैंड के खिलाफ फाइनल मुकाबले में 52 रन की अहम पारी खेलकर उन्होंने अपनी क्षमता का परिचय जरूर दिया। अगर साल 2026 के कुल प्रदर्शन पर नजर डालें तो उन्होंने 18 टी20 मैचों में 26.58 की औसत और 203.60 के स्ट्राइक रेट से 452 रन बनाए हैं। इस दौरान उनके बल्ले से पांच अर्धशतक निकले हैं लेकिन सात बार शून्य पर आउट होना उनकी निरंतरता पर सवाल खड़े कर रहा है। राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ मुकाबले में अभिषेक की विफलता के बावजूद सनराइजर्स हैदराबाद की टीम ने शानदार प्रदर्शन किया। ईशान किशन ने जिम्मेदारी संभालते हुए 44 गेंदों में 91 रन की विस्फोटक पारी खेली और टीम को मजबूत स्कोर तक पहुंचाया। उनके साथ हेनरिच क्लासेन और ट्रेविस हेड ने भी अहम योगदान दिया जिससे टीम ने 20 ओवर में 216 रन बनाए। जवाब में राजस्थान रॉयल्स की शुरुआत बेहद खराब रही और टीम ने शुरुआती तीन ओवर में ही पांच विकेट गंवा दिए। सनराइजर्स के गेंदबाजों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए विपक्षी टीम को 159 रन पर समेट दिया और 57 रन से बड़ी जीत दर्ज की। इस पूरे मुकाबले में जहां एक तरफ हैदराबाद की जीत ने टीम को मजबूती दी वहीं दूसरी तरफ अभिषेक शर्मा का यह रिकॉर्ड चर्चा का केंद्र बन गया है। यह आंकड़ा उनके लिए एक चेतावनी की तरह है कि आक्रामकता के साथ निरंतरता भी उतनी ही जरूरी है। आने वाले मैचों में सभी की नजरें इस बात पर होंगी कि क्या वह इस दबाव से उबरकर अपने खेल को नई दिशा दे पाते हैं या नहीं।
नाबालिगों के साथ कथित अपराध का मामला: चाइल्ड होम में सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

शिवपुरी । मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले से सामने आया यह मामला पूरे प्रदेश को झकझोर देने वाला है। वर्ष 2016 में एक चाइल्ड केयर सेंटर से भागी दो नाबालिग लड़कियों ने पुलिस पूछताछ में जो खुलासे किए, उन्होंने बाल संरक्षण व्यवस्था की गंभीर खामियों को उजागर कर दिया। शुरुआत में गुमशुदगी के तौर पर दर्ज यह मामला तब सनसनीखेज मोड़ पर पहुंच गया जब लड़कियों ने बालगृह के अंदर कथित शोषण की बात बताई। सुरक्षित आश्रय बना डर का ठिकानाशहर के बीच स्थित माधव बाल आश्रम को अनाथ और बेसहारा लड़कियों के लिए सुरक्षित स्थान माना जाता था। यहां पुलिस द्वारा बरामद नाबालिग बच्चियों को भी रखा जाता था। 1997 से संचालित इस संस्था का संचालन समाजसेवी शैला अग्रवाल और उनके पिता केएन अग्रवाल द्वारा किया जाता था। बाहर से यह संस्था बेहद प्रतिष्ठित और विश्वसनीय मानी जाती थी, जहां प्रशासनिक अधिकारियों और नेताओं की भी भागीदारी रहती थी। काउंसलिंग में सामने आए चौंकाने वाले संकेतचाइल्ड काउंसलर द्वारा की गई शुरुआती काउंसलिंग के दौरान ही माहौल पर संदेह गहराने लगा। एक पीड़िता ने इशारों में बताया कि बालगृह में सब कुछ ठीक नहीं है और विरोध करने पर मारपीट की जाती है। जैसे ही संचालक वहां पहुंचीं, बच्ची चुप हो गई, जिससे संदेह और मजबूत हो गया। इसके बाद मामले की जानकारी बाल कल्याण समिति और वरिष्ठ अधिकारियों को दी गई। रात में नशीला खाना और कथित शोषण के आरोपकाउंसलिंग के दौरान सामने आए आरोपों में कहा गया कि रात के समय भोजन में नशीला पदार्थ मिलाया जाता था, जिसके बाद कई लड़कियां बेहोशी की स्थिति में चली जाती थीं। पीड़िताओं ने यह भी बताया कि सुबह उठने पर उन्हें दर्द और असहजता महसूस होती थी। कई बार विरोध करने पर मारपीट और धमकियों का भी सामना करना पड़ता था। मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना के गंभीर आरोपलड़कियों के अनुसार, आश्रम में डर और दहशत का माहौल था। किसी भी विरोध पर उन्हें अपमानित किया जाता और धमकाया जाता था। यहां तक कि उनके कपड़े फटे हुए या अस्त-व्यस्त हालत में पाए जाने की बातें भी सामने आईं। पीड़िताओं ने बताया कि वे लंबे समय तक डर के कारण कुछ भी बोल नहीं पाईं। प्रशासन में मचा हड़कंप, जांच के आदेशमामले के सामने आने के बाद जिला प्रशासन और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। तत्काल आश्रम में जांच शुरू की गई और अन्य बच्चियों की भी काउंसलिंग कराई गई ताकि पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सके। अधिकारियों ने इसे बेहद गंभीर मामला मानते हुए उच्च स्तरीय जांच की प्रक्रिया शुरू की। कई गंभीर सवाल खड़े हुएइस पूरे घटनाक्रम ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं क्या बालगृह में चल रहे इस कथित अपराध में अंदरूनी लोग शामिल थे या बाहरी लोग? कितनी बच्चियां इस शोषण का शिकार हुईं? और सबसे बड़ा सवाल, क्या वर्षों तक चल रही यह गतिविधि प्रशासन की नजर से छिपी रही?
भीषण गर्मी पर महाराष्ट्र सरकार का बड़ा प्रहार, दोपहर 12 से 4 बजे तक आउटडोर काम पर पूर्ण प्रतिबंध लागू

नई दिल्ली: महाराष्ट्र में बढ़ती गर्मी और लगातार तेज हो रही हीटवेव के खतरे को देखते हुए राज्य सरकार ने श्रमिकों और आम जनता की सुरक्षा के लिए बड़ा और निर्णायक कदम उठाया है। राज्य में तापमान लगातार सामान्य से अधिक दर्ज किया जा रहा है और कई क्षेत्रों में लू की स्थिति गंभीर रूप ले चुकी है। इसी को ध्यान में रखते हुए आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले आउटडोर श्रमिकों के लिए सख्त मानक संचालन प्रक्रिया यानी SOP लागू करने की घोषणा की गई है, ताकि गर्मी के सबसे खतरनाक समय में लोगों की जान और स्वास्थ्य की रक्षा की जा सके। नई व्यवस्था के अनुसार ऑरेंज और रेड अलर्ट के दौरान दोपहर 12 बजे से 4 बजे तक सभी बाहरी कार्य पूरी तरह प्रतिबंधित रहेंगे। यह समय दिन का सबसे अधिक गर्म हिस्सा माना जाता है, जब लू लगने और शरीर में पानी की कमी जैसी समस्याओं का खतरा सबसे अधिक होता है। इसके अलावा कामकाजी समय में भी बड़ा बदलाव किया गया है, जिसके तहत अब श्रमिक सुबह 6 बजे से 11 बजे तक और शाम 4 बजे से 8 बजे तक ही काम कर सकेंगे। इस निर्णय का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि श्रमिक अत्यधिक गर्मी के संपर्क में न आएं और सुरक्षित वातावरण में अपना काम पूरा कर सकें। सरकार ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि निर्माण स्थलों, औद्योगिक क्षेत्रों, बाजारों और ठेला वेंडिंग जोन में इन नियमों का सख्ती से पालन किया जाए। स्थानीय प्रशासन को निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं ताकि किसी भी स्तर पर नियमों का उल्लंघन न हो सके। प्रशासन का कहना है कि यह कदम केवल एक अस्थायी व्यवस्था नहीं बल्कि बदलते मौसम और जलवायु परिस्थितियों को देखते हुए जरूरी सुरक्षा उपाय है। राज्य के कई हिस्सों में हालात गंभीर होते जा रहे हैं। विशेष रूप से विदर्भ, मराठवाड़ा और खानदेश क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित बताए जा रहे हैं, जहां तापमान लगातार ऊंचा बना हुआ है। वहीं मुंबई, पुणे, नागपुर और नासिक जैसे बड़े शहरों में शहरी ताप द्वीप प्रभाव के कारण तापमान सामान्य से अधिक दर्ज किया जा रहा है। इस कारण शहरी क्षेत्रों में भी गर्मी का असर तेजी से बढ़ता जा रहा है। मौसम विभाग के अनुमान के अनुसार कुछ इलाकों में तापमान 47 से 49 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है, जो स्वास्थ्य के लिहाज से बेहद खतरनाक स्थिति मानी जाती है। ऐसे हालात में सरकार ने पहले से ही तैयारी तेज कर दी है ताकि किसी भी आपात स्थिति से समय रहते निपटा जा सके। राज्य सरकार ने 15 जिलों को हाई रिस्क जोन घोषित किया है, जिनमें लातूर, अमरावती, यवतमाल, वाशिम, अकोला, बुलढाणा, नागपुर, वर्धा, चंद्रपुर, गोंदिया, भंडारा, जलगांव, नंदुरबार, धुले और नांदेड़ शामिल हैं। इन जिलों में विशेष सतर्कता बरती जा रही है और जरूरत पड़ने पर इस SOP को अन्य क्षेत्रों में भी लागू किया जा सकता है। गर्मी से राहत देने के लिए प्रशासन ने कई स्तरों पर तैयारी शुरू की है। प्रमुख बाजारों, ट्रैफिक जंक्शनों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में पीने के पानी की व्यवस्था की जा रही है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के माध्यम से ओआरएस और इलेक्ट्रोलाइट्स उपलब्ध कराए जा रहे हैं ताकि लोगों को डिहाइड्रेशन से बचाया जा सके। इसके साथ ही श्रमिक क्षेत्रों में अस्थायी छाया, आराम स्थल और ठंडक की व्यवस्था पर भी जोर दिया जा रहा है। महिला कामगारों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं, वहीं स्वास्थ्य विभाग को अलर्ट मोड पर रखा गया है। आपातकालीन एंबुलेंस सेवाओं को संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात किया गया है ताकि किसी भी स्थिति में तुरंत सहायता उपलब्ध कराई जा सके। सरकार का मानना है कि यह SOP न केवल तत्काल राहत प्रदान करेगी बल्कि लंबे समय में हीटवेव से होने वाले जोखिमों को भी कम करने में मदद करेगी। बदलते मौसम के इस दौर में यह कदम श्रमिक वर्ग की सुरक्षा और जनस्वास्थ्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
ग्वालियर में पुलिस पर सवाल: रेप केस में आरोपी इंस्पेक्टर गायब, जांच में तेजी

ग्वालियर । ग्वालियर में एक फैशन डिजाइनर द्वारा लगाए गए दुष्कर्म के गंभीर आरोपों ने पुलिस महकमे में हलचल मचा दी है। 38 वर्षीय महिला की शिकायत पर झांसी रोड थाना पुलिस ने इंस्पेक्टर रूपेश शर्मा के खिलाफ मामला दर्ज किया है। आरोप है कि उन्होंने शादी का झांसा देकर महिला के साथ लंबे समय तक शारीरिक संबंध बनाए और बाद में सच सामने आने पर धमकियां भी दीं। FIR के बाद मोबाइल बंद कर हुआ फरार, पुलिस तलाश में जुटीमामला दर्ज होने के बाद आरोपी इंस्पेक्टर रूपेश शर्मा अचानक मोबाइल बंद कर फरार हो गए। पुलिस उनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दे रही है, लेकिन अब तक कोई सुराग नहीं मिल पाया है। पुलिस का कहना है कि आरोपी की लोकेशन ट्रेस करने की कोशिश जारी है और कई संभावित ठिकानों पर सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है। ट्रांसफर और रिलीविंग को लेकर भी उठे सवालजानकारी के अनुसार, डीजीपी के आदेश पर सोमवार सुबह आरोपी इंस्पेक्टर का पुलिस ट्रेनिंग स्कूल (पीटीएस) तिघरा से पुलिस मुख्यालय (पीएचक्यू) में ट्रांसफर किया गया था। इसके बाद उन्हें रिलीव भी कर दिया गया। हालांकि हैरानी की बात यह है कि पुलिस अभी भी उन्हें फरार मानकर तलाश कर रही है और यह स्पष्ट नहीं है कि उन्होंने पीएचक्यू में जॉइन किया या नहीं। भितरवार और शिवपुरी में पुलिस की दबिशपुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी इंस्पेक्टर रूपेश शर्मा भितरवार के श्रीराम कॉलोनी के निवासी हैं, जबकि उनकी ससुराल शिवपुरी में है। इसी आधार पर झांसी रोड थाना पुलिस की दो टीमें भितरवार और शिवपुरी भेजी गईं, जहां दबिश दी गई, लेकिन आरोपी का कोई पता नहीं चल सका। पीड़िता का मेडिकल और कोर्ट में बयान दर्जमामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने पीड़िता का ग्वालियर के कमलाराजा अस्पताल में मेडिकल परीक्षण कराया। इसके बाद धारा 164 के तहत कोर्ट में पीड़िता के बयान दर्ज किए गए, जिसमें उसने FIR में दिए गए अपने आरोपों को दोहराया और आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। सोशल मीडिया से शुरू हुई पहचान और रिश्ते में बदल गई कहानीपुलिस जांच में सामने आया कि पीड़िता एक फैशन डिजाइनर हैं, जिनके पति का 2018 में निधन हो चुका है और उनका एक 9 साल का बच्चा है। वर्ष 2024 में फेसबुक के जरिए उनकी पहचान इंस्पेक्टर रूपेश शर्मा से हुई थी। शुरुआत में बातचीत दोस्ती में बदली और फिर नजदीकियां बढ़ गईं। शादी का झांसा देकर संबंध बनाने का आरोपपीड़िता का आरोप है कि आरोपी ने अपनी शादीशुदा स्थिति छुपाकर उससे शादी का वादा किया और 16 अगस्त 2024 को बुटीक में आकर जबरन संबंध बनाए। इसके बाद वह लगातार संपर्क में रहा और शादी का आश्वासन देता रहा। बाद में जब सच्चाई सामने आई तो उसने महिला को धमकाना शुरू कर दिया। 9 महीने की गर्भवती पीड़िता, राजनीतिक दबाव के भी आरोपपीड़िता वर्तमान में 9 महीने की गर्भवती बताई जा रही है। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि वह एक भाजपा नेत्री की करीबी हैं, जिससे मामले को लेकर राजनीतिक चर्चा भी तेज हो गई है। हालांकि पुलिस का कहना है कि जांच निष्पक्ष रूप से आगे बढ़ रही है। पुलिस जांच जारी, गिरफ्तारी पर सबकी नजरफिलहाल पुलिस आरोपी इंस्पेक्टर की तलाश में लगातार जुटी हुई है और कई जगहों पर दबिश दी जा रही है। वहीं, मामला पुलिस विभाग के भीतर ही आरोपी होने के कारण और भी संवेदनशील हो गया है।
सीजफायर के ऐलान के बाद 20400 मीट्रिक टन LPG लेकर आज भारत पहुंचेगा पहला भारतीय जहाज जग विक्रम

नई दिल्ली। भारतीय झंडे वाला जहाज जग विक्रम (Indian-flagged ship Jag Vikram) 20,400 मीट्रिक टन एलपीजी लेकर 14 अप्रैल को गुजरात के कांडला बंदरगाह पर पहुंचने वाला है। पोर्ट्स, शिपिंग एंड वाटरवेज मंत्रालय ने सोमवार को यह जानकारी दी। एडिशनल सेक्रेटरी मुकेश मंगल ने बताया कि यह जहाज 11 अप्रैल को होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) को पार कर चुका है। इस यात्रा को नई दिल्ली के लिए एक अहम उपलब्धि माना जा रहा है, क्योंकि अमेरिका और ईरान के बीच 14 दिन के युद्धविराम की घोषणा के बाद यह पहला भारतीय जहाज (Indian ship) है जो इस समुद्री मार्ग से गुजरा है। जहाज पर कुल 24 भारतीय नाविक सवार हैं। एडिशनल सेक्रेटरी मुकेश मंगल ने कहा, ‘भारतीय झंडे वाला LPG वाहक जहाज जग विक्रम के 11 अप्रैल को होर्मुज स्ट्रेट पार करने के बाद 14 अप्रैल को कांडला पहुंचने की संभावना है। इस जहाज में 20,400 मीट्रिक टन एलपीजी लदा हुआ है और इसमें 24 नाविक सवार हैं।’ उन्होंने आगे बताया कि खाड़ी क्षेत्र में भारतीय जहाजों और नाविकों की स्थिति पूरी तरह सुरक्षित है। पिछले 24 घंटों में किसी भी भारतीय झंडे वाले जहाज से संबंधित कोई घटना रिपोर्ट नहीं हुई है। 2177 भारतीय नाविकों की सुरक्षित वापसीमंत्रालय ने अब तक 2177 से अधिक भारतीय नाविकों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित की है, जिसमें पिछले 24 घंटों में ही 93 नाविक शामिल हैं। इस प्रक्रिया में विदेश मंत्रालय, भारतीय मिशनों और समुद्री हितधारकों के साथ निरंतर तालमेल बनाए रखा जा रहा है। मंत्रालय ने भारतीय बंदरगाहों पर सामान्य परिचालन की पुष्टि की है। सभी भारतीय बंदरगाहों पर कामकाज बिना किसी बाधा के चल रहा है और किसी भी प्रकार की भीड़ या कंजेशन की रिपोर्ट नहीं आई है। समुद्री कर्मियों की भलाई सुनिश्चित करना मंत्रालय की प्राथमिकता है। क्षेत्रीय तनाव के बावजूद मंत्रालय निरंतर निगरानी और समन्वय के माध्यम से भारतीय जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित कर रहा है। जग विक्रम का सफलतापूर्वक आना इस बात का सबूत है कि युद्धविराम के बाद समुद्री मार्ग धीरे-धीरे सामान्य हो रहे हैं। भारत अपनी लगभग 90 प्रतिशत एलपीजी आयात खाड़ी क्षेत्र के देशों से करता है। ऐसे में होर्मुज स्ट्रेट जैसे अहम मार्ग की सुरक्षा और सुचारू परिचालन भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक है।
मिडिल ईस्ट तनाव का गोल्ड मार्केट पर असर… कीमत में गिरावट का सिलसिला जारी

नई दिल्ली। ग्लोबल मार्केट (Global Market) में सोने की कीमतों (Gold Prices) में हल्की गिरावट देखने को मिल रही है और इसकी बड़ी वजह मिडिल ईस्ट (Middle East) में बढ़ता तनाव बन रही है। हाल ही में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को ब्लॉक करने की योजना ने दुनिया भर में ऊर्जा सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ा दी है। यह स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऑयल रूट्स में से एक है, जहां से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी तरह का व्यवधान सीधे तौर पर तेल की कीमतों को प्रभावित करता है और यही असर अब सोने के बाजार पर भी दिखने लगा है। दरअसल, जब तेल महंगा होता है, तो महंगाई बढ़ने लगती है। इस समय कच्चे तेल की कीमतें करीब 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई हैं, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ रहा है। ऐसे माहौल में आमतौर पर सोना सुरक्षित निवेश (Safe Haven) माना जाता है, लेकिन इस बार तस्वीर थोड़ी अलग दिख रही है। बढ़ती महंगाई के कारण निवेशक अब ब्याज दरों पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं और यही वजह है कि सोने की कीमतों पर दबाव बना हुआ है। सोना एक ऐसा निवेश है, ज्यादातर मामलों में ब्याज नहीं देता, इसलिए जब ब्याज दरें बढ़ने की संभावना होती है, तो निवेशक इससे दूरी बनाने लगते हैं। फिलहाल, अमेरिका में महंगाई बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं, जिससे यह उम्मीद कम हो गई है कि जल्द ही ब्याज दरों में कटौती होगी। यही कारण है कि सोने की कीमतों में हाल ही में लगभग 2% तक की गिरावट देखने को मिली। हालांकि, पूरी तरह से तस्वीर नकारात्मक भी नहीं है। डॉलर में कमजोरी और बॉन्ड यील्ड में गिरावट जैसे फैक्टर सोने को कुछ हद तक सपोर्ट दे रहे हैं। इसके अलावा ग्लोबल स्तर पर आर्थिक सुस्ती और अनिश्चितता भी निवेशकों को सोने की ओर आकर्षित कर सकती है। यही वजह है कि शुरुआती गिरावट के बाद सोने ने कुछ रिकवरी भी दिखाई। एक और दिलचस्प बात यह है कि फरवरी से शुरू हुए इस जियो-पॉलिटिकल तनाव के दौरान सोना करीब 10% तक गिर चुका है, लेकिन अब धीरे-धीरे यह संभलने की कोशिश कर रहा है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले समय में अगर तनाव बढ़ता है या आर्थिक ग्रोथ धीमी होती है, तो सोना फिर से मजबूत हो सकता है। अभी सोने का बाजार कई फैक्टर्स के बीच फंसा हुआ है। इसमें एक तरफ बढ़ती महंगाई और ब्याज दरों का दबाव है, तो दूसरी तरफ वैश्विक अनिश्चितता का सपोर्ट है। ऐसे में निवेशकों के लिए जरूरी है कि वे जल्दबाजी में फैसला न लें, बल्कि बाजार के रुझान को समझकर ही निवेश करें।