Chambalkichugli.com

मप्र में 10वीं-12वीं बोर्ड परीक्षा का परिणाम 15 अप्रैल को होगा जारी

भोपाल। मध्य प्रदेश में माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा इस वर्ष आयोजित कक्षा दसवीं और बारहवीं बोर्ड परीक्षा का परिणाम 15 अप्रैल को सुबह 11 बजे जारी किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एक विशेष प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से दोनों कक्षाओं के परिणाम एक साथ घोषित करेंगे। स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने सोमवार को बताया कि परिणाम के साथ दोनों कक्षाओं की मेरिट लिस्ट (टॉपर्स सूची) भी जारी की जाएगी। राज्य स्तर पर टॉप करने वाले मेधावी छात्रों को सरकार द्वारा विशेष रूप से सम्मानित किया जाएगा। छात्रों को अपना परिणाम देखने के लिए केवल अपने रोल नंबर की आवश्यकता होगी। बोर्ड ने कॉपियों के मूल्यांकन और पोर्टल पर डेटा अपलोड करने का कार्य पहले ही पूर्ण कर लिया है। उन्होंने बताया कि परिणाम जारी करने से पहले क्रॉस चेकिंग और वैरिफिकेशन तेजी से पूरा किया गया। हर स्तर पर जांच की गई, ताकि कोई गलती न रहे। रिजल्ट “फुलप्रूफ” रखा गया है, जिससे छात्रों को परेशानी न हो। 10वीं में 9 लाख से ज्यादा छात्र शामिलप्रदेश में 10वीं और 12वीं की परीक्षाओं में 16 लाख से अधिक छात्र शामिल हुए। इनमें करीब 9 लाख 7 हजार छात्र 10वीं और लगभग 7 लाख छात्र 12वीं में बैठे। परीक्षा के लिए 3856 केंद्र बनाए गए थे। नकल रोकने के लिए फ्लाइंग स्क्वॉड, सीसीटीवी और प्रश्नपत्र वितरण की वीडियोग्राफी की व्यवस्था की गई थी। इसके बावजूद प्रदेश में करीब 100 नकल प्रकरण सामने आए। मुरैना में सबसे ज्यादा 41 और भोपाल में 20 मामले दर्ज हुए। डॉक्टरों और काउंसलर्स ने अभिभावकों से अपील की है कि वे बच्चों पर दबाव न डालें और मानसिक सहयोग दें। गांधी मेडिकल कॉलेज की डॉ. रुचि सोनी ने कहा कि हर बच्चा अच्छा रिजल्ट चाहता है, लेकिन ऐसा हमेशा संभव नहीं होता। एक परीक्षा जीवन तय नहीं करती। बच्चों के तनाव में होने पर उनसे बात करें और उनका साथ दें। शिक्षा विभाग का उद्देश्य समय पर रिजल्ट जारी करना है, ताकि छात्र बिना देरी अगली कक्षा या कोर्स में प्रवेश ले सकें। तय समय पर परिणाम आने से छात्रों और अभिभावकों को राहत मिलेगी।

आईपीएल 2026 में ऑरेंज और पर्पल कैप की रेस हुई बेहद रोमांचक, हर मैच के साथ बदल रहा है शीर्ष खिलाड़ियों का समीकरण

नई दिल्ली:   इंडियन प्रीमियर लीग २०२६ के मैदानों पर बल्ले और गेंद के बीच छिड़ी जंग अब एक रोमांचक मोड़ पर पहुंच चुकी है। टूर्नामेंट के आगे बढ़ने के साथ ही व्यक्तिगत प्रदर्शन के आधार पर मिलने वाले शीर्ष सम्मानों की होड़ तेज हो गई है। खिलाड़ियों के बीच मैदान पर जारी इस स्वस्थ प्रतिस्पर्धा ने न केवल मैचों के रोमांच को बढ़ाया है बल्कि दर्शकों की उत्सुकता को भी चरम पर पहुंचा दिया है। वर्तमान आंकड़ों के अनुसार कुछ अनुभवी और कुछ युवा खिलाड़ियों ने अपनी खेल प्रतिभा के दम पर सूची में अपनी जगह मजबूत कर ली है जिससे यह स्पष्ट है कि इस साल का खिताब जीतने के लिए खिलाड़ियों को अपने कौशल की सीमाओं को पार करना होगा। बल्लेबाजी के मोर्चे पर दक्षिण अफ्रीकी दिग्गज हेनरिक क्लासेन ने अपने बल्ले से कोहराम मचा रखा है। उन्होंने अपनी आक्रामक और बेखौफ बल्लेबाजी के जरिए विपक्षी गेंदबाजों की रणनीतियों को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया है। क्लासेन की सबसे बड़ी ताकत मैदान के हर कोने में रन बनाने की उनकी क्षमता और स्पिनरों के खिलाफ उनका दबदबा है। उनकी हालिया पारियों ने उन्हें वर्तमान में सबसे अधिक रन बनाने वाले बल्लेबाजों की फेहरिस्त में सबसे ऊपर लाकर खड़ा कर दिया है। कठिन परिस्थितियों में शांत रहकर बड़े शॉट खेलने की उनकी कला ने उन्हें इस सीजन का सबसे खतरनाक बल्लेबाज बना दिया है और वह ऑरेंज कैप की दौड़ में सबसे आगे चल रहे हैं। दूसरी ओर गेंदबाजी में भारतीय तेज गेंदबाज प्रसिद्ध कृष्णा अपनी आग उगलती गेंदों से कहर बरपा रहे हैं। उन्होंने अपनी गति और सटीक बाउंसरों का बेहतरीन इस्तेमाल करते हुए बल्लेबाजों को टिकने का कोई मौका नहीं दिया है। सर्वाधिक विकेट लेने वाले गेंदबाजों की श्रेणी में उन्होंने अपना दबदबा कायम किया है और वर्तमान में पर्पल कैप पर अपना अधिकार जमा रखा है। प्रसिद्ध कृष्णा ने न केवल शुरुआती ओवरों में विकेट चटकाए हैं बल्कि अंतिम ओवरों में भी अपनी यॉर्कर और धीमी गति की गेंदों से रनों की गति पर अंकुश लगाया है। उनकी यह शानदार फॉर्म उनकी टीम के लिए रक्षा कवच साबित हो रही है और विपक्षी बल्लेबाजी क्रम के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। टूर्नामेंट में कुछ खिलाड़ियों के लिए उतार चढ़ाव का दौर भी देखने को मिला है। वैभव अरोड़ा जैसे प्रतिभावान खिलाड़ियों ने जहां कुछ मैचों में अपनी चमक बिखेरी वहीं कुछ मौकों पर वह अपनी लय हासिल करने के लिए संघर्ष करते दिखे। हालांकि उनकी क्षमता पर किसी को संदेह नहीं है और आने वाले मैचों में उनके पास जोरदार वापसी करने का पूरा अवसर है। क्रिकेट के इस छोटे प्रारूप में एक स्पेल या एक पारी किसी भी खिलाड़ी की किस्मत बदल सकती है। खिलाड़ियों के बीच इस शीर्ष स्थान को हासिल करने की जद्दोजहद ने खेल के स्तर को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बना दिया है जहां हर गलती की सजा बड़ी कीमत चुकाकर भुगतनी पड़ती है। आने वाले हफ्तों में यह देखना बेहद रोमांचक होगा कि क्या क्लासेन और प्रसिद्ध कृष्णा अपने इस स्वर्णिम सफर को जारी रख पाते हैं या कोई अन्य खिलाड़ी इस दौड़ में उन्हें पीछे छोड़ देता है। सभी टीमों के कोच और कप्तान अब विशेष रूप से इन शीर्ष खिलाड़ियों के लिए अलग रणनीतियां तैयार कर रहे हैं। जैसे-जैसे नॉकआउट चरण करीब आएगा व्यक्तिगत उपलब्धियों के साथ-साथ टीम की सफलता का दबाव भी बढ़ेगा। फिलहाल क्रिकेट के इस महाकुंभ ने यह साबित कर दिया है कि यहां केवल वही टिक सकता है जिसके पास तकनीक के साथ-साथ धैर्य और मानसिक मजबूती का बेजोड़ संगम हो।

जबलपुर के श्रमोदय विद्यालय में सांप्रदायिक विवाद ने पकड़ा तूल प्राचार्य पर गंभीर आरोपों के बाद जांच के आदेश

जबलपुर । मध्यप्रदेश के जबलपुर जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। श्रमोदय विद्यालय जो शिक्षा का मंदिर माना जाता है वहां पर सांप्रदायिक भेदभाव और उत्पीड़न के आरोपों ने माहौल को पूरी तरह से तनावपूर्ण बना दिया है। स्कूल के प्रभारी प्राचार्य अब्दुल शाहिर शेख के खिलाफ हिंदू शिक्षकों और विद्यार्थियों के साथ भेदभाव करने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। मामला उजागर होने के बाद लोक शिक्षा विभाग के अपर संचालक ने जांच के आदेश जारी कर दिए हैं जिससे पूरे प्रशासनिक तंत्र में हलचल मच गई है। बताया जा रहा है कि यह विवाद उस समय और गहरा गया जब रामनवमी के अवसर पर छात्रावास में कुछ विद्यार्थियों ने जय श्रीराम के नारे लगाए। आरोप है कि इस पर प्राचार्य और उनके सहयोगियों ने नाराजगी जताई और छात्रों के साथ मारपीट की गई। इस घटना ने विद्यार्थियों और अभिभावकों के बीच आक्रोश को जन्म दिया। वहीं अतिथि शिक्षकों ने भी प्राचार्य पर लगातार प्रताड़ना और अपमान करने के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि स्कूल का माहौल डर और दबाव से भरा हुआ है जहां खुलकर अपनी बात रखना भी मुश्किल हो गया है। मामले को और गंभीर बनाता है स्टाफ रूम में लगाए गए कैमरों को लेकर उठे सवाल। शिक्षकों का आरोप है कि उनकी गतिविधियों की रिकॉर्डिंग की जाती है और उसका दुरुपयोग किया जाता है। इससे शिक्षकों में असुरक्षा की भावना बढ़ी है और कार्यस्थल का वातावरण प्रभावित हुआ है। इसके अलावा स्कूल में प्रशासनिक अनियमितताओं की भी शिकायतें सामने आई हैं जो जांच का विषय बन चुकी हैं। इन सभी घटनाओं का असर छात्रों पर भी साफ दिखाई दे रहा है। लगभग 120 से अधिक विद्यार्थियों ने स्कूल से अपना नाम कटवा लिया है और ट्रांसफर सर्टिफिकेट ले लिया है। यह संख्या अपने आप में इस बात का संकेत है कि स्थिति कितनी गंभीर हो चुकी है। छात्रों का आरोप है कि उन्होंने पहले भी शिकायत की थी लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई जिससे उनका भरोसा टूट गया। मामले ने राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर भी ध्यान खींचा है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास और श्रम विभाग से जुड़े विशेष सहायक मंत्री द्वारा भी इस संबंध में पत्र भेजा गया है। इसके बाद शिक्षा विभाग हरकत में आया और जांच के आदेश दिए गए। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि जांच में क्या सामने आता है और दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है। यह मामला केवल एक स्कूल का नहीं बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र के लिए एक चेतावनी है कि शिक्षा के स्थान पर किसी भी प्रकार का भेदभाव स्वीकार्य नहीं हो सकता। यदि आरोप सही साबित होते हैं तो यह जरूरी हो जाता है कि सख्त कार्रवाई के साथ ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। फिलहाल छात्र अभिभावक और शिक्षक सभी निष्पक्ष जांच और न्याय की उम्मीद कर रहे हैं।

आशा भोसले का खुलासा: हिमेश रेशमिया को थप्पड़ मारने की बात, आरडी बर्मन पर कही दिलचस्प बात

नई दिल्ली।भारतीय संगीत की महान गायिका आशा भोसले अपने पति और दिग्गज संगीतकार आर. डी. बर्मन की विरासत को लेकर बेहद संवेदनशील मानी जाती थीं। वे कभी भी उनके काम या योगदान पर किसी तरह की नकारात्मक टिप्पणी बर्दाश्त नहीं करती थीं।इसी सख्त रवैये के कारण साल 2006 में एक बड़ा विवाद सामने आया, जब उनका नाम मशहूर सिंगर और कंपोजर हिमेश रेशमिया से जुड़ा।  कैसे शुरू हुआ विवाद?उस समय हिमेश रेशमिया अपने “नाक से गाने” वाले स्टाइल को लेकर काफी चर्चा में थे। एक इंटरव्यू में उन्होंने अपने स्टाइल का बचाव करते हुए कुछ दिग्गज कलाकारों का उदाहरण दिया, जिसमें R.D. बर्मन का नाम भी शामिल था।यही बात आशा भोसले को बेहद आपत्तिजनक लगी। आशा भोसले का तीखा जवाबइस टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए आशा भोसले ने कड़ा रुख अपनाया और कहा कि अगर कोई आर.डी. बर्मन के बारे में गलत टिप्पणी करता है तो “उसे थप्पड़ मारना चाहिए।”उनका यह बयान उस समय मीडिया में काफी सुर्खियों में रहा और संगीत जगत में बहस छिड़ गई। बाद में कैसे सुलझा मामला?विवाद बढ़ने के बाद हिमेश रेशमिया ने अपनी बात पर स्पष्टीकरण दिया और माना कि उन्हें किसी महान कलाकार का उदाहरण देने से पहले सोच-समझकर बोलना चाहिए था।इसके बाद उन्होंने आशा भोसले से माफी मांगी, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया। रिश्ते फिर हुए सामान्यमाफी के बाद दोनों के बीच तनाव खत्म हो गया और बाद में आशा भोसले ने हिमेश रेशमिया के लिए गाने भी गाए। इससे साफ हुआ कि व्यक्तिगत नाराजगी के बावजूद वे प्रोफेशनल रिश्तों को आगे बढ़ाने में विश्वास रखती थीं।

डल स्किन से छुटकारा पाकर पाएं नेचुरल ग्लो, सेब, चुकंदर और गाजर का जूस बना सकता है त्वचा को अंदर से हेल्दी और चमकदार

नई दिल्ली:गर्मी के मौसम में धूल, प्रदूषण और तेज धूप का असर सबसे पहले हमारी त्वचा पर दिखाई देता है। धीरे-धीरे चेहरा अपनी प्राकृतिक चमक खोने लगता है और स्किन डल व थकी हुई नजर आने लगती है। ऐसे में विशेषज्ञ मानते हैं कि केवल बाहरी स्किन केयर ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि शरीर को अंदर से पोषण देना भी जरूरी होता है। इसी कारण सेब, चुकंदर और गाजर से बना प्राकृतिक जूस त्वचा के लिए एक सरल और प्रभावी उपाय माना जा रहा है, जो शरीर को जरूरी विटामिन, मिनरल्स और एंटीऑक्सीडेंट्स देकर स्किन को स्वस्थ बनाने में मदद कर सकता है। सेब इस जूस का अहम हिस्सा माना जाता है, जिसमें विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं। ये तत्व शरीर में कोलेजन के निर्माण को सपोर्ट करते हैं, जिससे त्वचा की कसावट बनी रहती है और उम्र बढ़ने के लक्षण धीरे-धीरे कम दिखाई देते हैं। सेब शरीर को हाइड्रेट रखने में भी मदद करता है, जिससे त्वचा में प्राकृतिक नमी और चमक बनी रहती है। चुकंदर को खून को शुद्ध करने वाला एक प्राकृतिक स्रोत माना जाता है। इसमें मौजूद तत्व शरीर में रक्त संचार को बेहतर बनाने में मदद करते हैं, जिससे त्वचा तक ऑक्सीजन और पोषण अधिक मात्रा में पहुंचता है। जब त्वचा को पर्याप्त पोषण मिलता है, तो वह अधिक साफ, चमकदार और स्वस्थ नजर आती है। चुकंदर शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने में भी सहायक माना जाता है, जिसका सीधा असर त्वचा की गुणवत्ता पर दिखाई देता है। गाजर इस जूस का एक महत्वपूर्ण घटक है, जिसमें बीटा कैरोटीन प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। यह शरीर में विटामिन ए में बदलकर त्वचा की कोशिकाओं की मरम्मत और नए सेल्स के निर्माण में मदद करता है। यह त्वचा को सूखने से बचाकर उसे मुलायम और हेल्दी बनाए रखने में सहायक होता है, जिससे चेहरे पर प्राकृतिक निखार आता है। इन तीनों सामग्रियों का मिश्रण शरीर को अंदर से पोषण देने के साथ-साथ डिटॉक्स करने में भी मदद कर सकता है। नियमित रूप से इस प्राकृतिक जूस का सेवन त्वचा की डलनेस को कम करने, उसे साफ रखने और धीरे-धीरे प्राकृतिक ग्लो बढ़ाने में सहायक माना जाता है।

एमपी में तेज गर्मी का दौर शुरू, तापमान बढ़ने की संभावना, 16-17 अप्रैल से कई जिलों में लू का अलर्ट

भोपाल। मध्य प्रदेश में अब मौसम पूरी तरह बदल चुका है। बादल और बारिश का दौर खत्म होते ही तेज धूप ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है। प्रदेश के कई इलाकों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया है, जिससे गर्मी तेजी से बढ़ रही है। मौसम विभाग (IMD) ने चेतावनी जारी करते हुए बताया है कि 16 और 17 अप्रैल से राज्य के कई जिलों में भीषण लू चलने की संभावना है। सोमवार को रतलाम सबसे गर्म जिला दर्ज किया गया, जहां तापमान 41.2°C तक पहुंच गया। इसके अलावा धार, नर्मदापुरम और खरगोन में भी पारा 40 डिग्री सेल्सियस के ऊपर दर्ज हुआ। मौसम विभाग के अनुसार 16 और 17 अप्रैल को रतलाम, झाबुआ, आलीराजपुर, धार, खरगोन, खंडवा, सीधी, सिंगरौली, मंडला और बालाघाट जिलों में लू का असर देखने को मिलेगा। वहीं भोपाल, इंदौर और उज्जैन में भी गर्म हवाएं लोगों को परेशान करेंगी। 15 अप्रैल से एक नया मौसम सिस्टम सक्रिय होने की संभावना है, लेकिन यह काफी कमजोर रहेगा। ऐसे में इससे गर्मी से राहत मिलने के आसार नहीं हैं। विभाग का कहना है कि अप्रैल का दूसरा पखवाड़ा आमतौर पर सबसे ज्यादा गर्म होता है। ग्वालियर में तापमान 45°C और भोपाल में 44°C तक पहुंचने का रिकॉर्ड भी रहा है। इससे पहले अप्रैल के शुरुआती दिनों में मौसम अलग ही रंग में नजर आया। 1 से 9 अप्रैल के बीच प्रदेश में लगातार आंधी, बारिश और ओलावृष्टि का दौर चला। 15 से ज्यादा जिलों में ओले गिरे, जबकि करीब 45 जिलों में बारिश दर्ज की गई। इस दौरान ग्वालियर में सबसे ज्यादा वर्षा हुई।

देश में इस साल सामान्य से कम होगी मॉनसूनी बारिश….IMD ने जताई कई क्षेत्रों में सूखे की आशंका

नई दिल्ली। भारत मौसम विज्ञान विभाग (India Meteorological Department- IMD) ने कहा है कि इस साल सामान्य से भी कम मॉनसूनी बारिश (Monsoon Rain) होगी। वर्ष 2026 के दक्षिण-पश्चिम मॉनसून (Southwest Monsoon) को लेकर लंबी अवधि का पूर्वानुमान जारी करते हुए मौसम विभाग ने कहा कि इस साल देश में मॉनसूनी बारिश सामान्य से कम रहने की आशंका है, जिससे खेतीबाड़ी, पशुपालन और जल संसाधनों पर बुरा असर पड़ सकता है। मौसम विभाग के मुताबिक, जून से सितंबर के बीच होने वाली कुल मॉनसूनी बारिश सामान्य से कम यानी 92% (±5%) रह सकती है। यह लंबी अवधि यानी 1971 से 2020 तक के औसत 87 सेंटीमीटर के अनुमान पर आधारित है। इसका मतलब है कि बारिश सामान्य से थोड़ी कम हो सकती है। मौसम विभाग ने पूर्वानुमानों में कहा है कि इस साल अल नीनो का प्रभाव रह सकता है, जिसकी वजह से न केवल प्रचंड गर्मी पड़ेगी बल्कि बारिश भी कम होगी। विभाग ने कहा है कि अप्रैल से जून 2026 के दौरान अल नीनो-दक्षिणी दोलन (ENSO) की तटस्थ स्थितियाँ रहने की सबसे अधिक संभावना है। इसके बाद, दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के मौसम के दौरान अल नीनो की मजबूत स्थिति बनने की बहुत अधिक संभावना है। इस वजह से मॉनसून कमजोर रह सकता है और सामान्य से कम बारिश हो सकती है। IMD के मुताबिक, अप्रैल से जून तक स्थिति सामान्य रहेगी लेकिन इसके बाद मॉनसून के दौरान अल-नीनो बनने की संभावना अधिक है। किन इलाकों में सामान्य से ज्यादा बारिशIMD ने देश भर के लिए जारी लंबी अवधि के पूर्वामुमानों में कहा है कि भौगोलिक रूप से, देश के कई हिस्सों में मौसमी वर्षा सामान्य से कम रहने की अधिक संभावना है। हालांकि, IMD ने पूर्वोत्तर, उत्तर-पश्चिम और दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत के कुछ क्षेत्रों में सामान्य से ज्यादा बारिश की संभावना जताई है। मौसम विभाग ने ये भी बताया कि फिलहाल हिंद महासागर में तटस्थ हिंद महासागर द्विध्रुव (IOD) की स्थितियाँ बनी हुई हैं। यानी दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनी हुई हैं और समयपर मॉनसून के दस्तक देने की संभावना है। कहां-कहां सूखे के आसार?IMD ने कहा कि जनवरी से मार्च 2026 के दौरान उत्तरी गोलार्ध का हिम आवरण (Snow Cover) और साथ ही यूरेशिया का हिम आवरण भी सामान्य से थोड़ा ही कम रहा है, जो दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के विकसित होने और मॉनसूनी मौसमी वर्षा के लिए अनुकूल है। IMD के दीर्घ अवधि वाले इस पूर्वानुमान के दस्तावेज में फिलहाल सूखा घोषित होने वाली जगहों की सूची नहीं दी गई है, लेकिन जिन क्षेत्रों में सामान्य से कम बारिश/सूखे जैसे हालात बनने की आशंका ज्यादा बताई गई है, उनमें उत्तर भारत के कई हिस्से, खासकर गंगा के मैदानी और आसपास के पठारी क्षेत्र शामिल हैं। कुछ इलाकों में बेहतर बारिश की उम्मीदइसके अलावा मध्य भारत के बड़े हिस्से के सूखा से प्रभावित रहने की आशंका जताई गई है। ये वैसे इलाके हैं, जहां सामान्य से कम बारिश के अनुमान जताए गए हैं। पश्चिम भारत के कुछ हिस्से और आंतरिक क्षेत्रों में भी कम बारिश के संकेत दिए गए हैं। IMD के मैप में दिखाया गया है कि देश के बड़े हिस्से में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है, जबकि पूर्वोत्तर, उत्तर-पश्चिम के कुछ हिस्से और दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत के कुछ हिस्से जैसे कुछ इलाकों में बारिश इनके मुकाबले बेहतर स्थिति में रह सकता हैं। सामान्य से कम बारिश का क्या असरमौसम विभाग का कहना है कि मॉनसून के कमजोर रहने और सामान्य से कम बारिश होने की दशा में खेती पर दबाव बढ़ सकता है क्योंकि कम बारिश से बुवाई, फसल उत्पादन प्रभावित हो सकता है खेती की बढ़ सकती है। मॉनसूनी बारिश का खेतीबाड़ी पर पड़ने वाले प्रभावों की चर्चा करते हुए IMD के वैज्ञानिकों ने बताया कि कम बारिश की मार आम आदमी तक को परेशान कर सकता है। इसकी वजह से सब्जी-दाल महंगी हो सकती है और कमजोर मॉनसून का असर फूड सप्लाई पर पड़ सकता है, जिससे खाने-पीने की चीजें महंगी हो सकती हैं। खेतीबाड़ी से लेकर ऑटो सेक्टर तक असरमौसम विज्ञानियों ने बताया कि खेतीबाड़ी बाधित होने की दशा में ग्रामीण आमदनी पर भी असर पड़ सकता है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, खेती कमजोर होने से गांवों में नकदी कम आएगी, जिसका असर ग्रामीण खर्च और अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। कम बारिश से ट्रैक्टर और टू-व्हीलर की बिक्री भी प्रभावित हो सकती है और ग्रामीण मांग कमजोर होने से ऑटो कंपनियों की बिक्री पर असर पड़ सकता है।

MP: मंडला में एक घर में 795 कुत्तों के रिप्रोडक्टिव ऑर्गन्स बरामद… नसबंदी के नाम पर घोटाले की आशंका

मंडला। मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के मंडला (Mandla) में एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां एक घर से सैकड़ों की संख्या में कुत्तों के रिप्रोडक्टिव ऑर्गन्स (Dogs Reproductive Organs) बरामद हुए हैं. इस पूरे मामले ने नसबंदी (Sterilization) के नाम पर बड़े घोटाले की आशंका को जन्म दे दिया है. पुलिस अब पूरे मामले की जांच में जुट गई है। दरअसल, नगर पालिका मंडला (Municipality Mandla) ने कुत्तों की नसबंदी के लिए टेंडर जारी किया गया था, जिसमें प्रति नसबंदी 679 रुपये तय किए गए थे. जबलपुर की एक प्राइवेट एनजीओ ‘मां अंबे एंटरप्राइजेज’ को यह ठेका दिया गया था, लेकिन आरोप है कि एजेंसी ने शहर में एक भी कुत्ते की नसबंदी नहीं की। तय समय में काम शुरू न करने पर 2 अप्रैल को टेंडर निरस्त कर दिया गया था. इसी बीच एक एनिमल एक्टिविस्ट निशा सिंह ने शिकायत दर्ज कराई कि जिस कमरे में एनजीओ के लोग ठहरे थे, वहां संदिग्ध गतिविधियां हो रही हैं। शिकायत के बाद नगर पालिका, पुलिस, तहसीलदार और पशु चिकित्सकों की संयुक्त टीम ने छापेमारी की. छापे के दौरान दो कंटेनरों में फॉर्मलीन में डूबे 795 कुत्तों के अंग बरामद किए गए, जिनमें 518 नर और 277 मादा कुत्तों के अंग शामिल हैं। शिकायतकर्ता निशा सिंह का आरोप है कि इन अंगों को बाहर से लाकर स्टॉक में रखा गया था, ताकि इन्हें दिखाकर नसबंदी के नाम पर फर्जी बिल पास कराए जा सकें। पशु चिकित्सकों ने भी जताई हैरानीपशु चिकित्सक सुमित पटेल ने बताया कि नसबंदी प्रक्रिया में नर कुत्तों के टेस्टिकल्स और मादा कुत्तों के ओवरी व यूट्रस निकाले जाते हैं, लेकिन इतने बड़े पैमाने पर अंगों का मिलना गंभीर सवाल खड़े करता है। नगर पालिका ने FIR के लिए दिया आवेदनइस मामले में मंडला के मुख्य नगर पालिका अधिकारी गजेंद्र नाफड़े ने बताया कि कुत्तों की नसबंदी के लिए टेंडर निकला था. जबलपुर की एजेंसी ने इसका टेंडर भरा था. उनका टेंडर सैंक्शन भी हुआ था, लेकिन एजेंसी लने कोई काम नहीं किया. उनको दो-तीन नोटिस भी दिए गए थे, तो काम नहीं करने से 2 अप्रैल को उनका टेंडर निरस्त कर दिया गया था. इसकी सूचना भी उन्हें दे दी गई थी। 7 अप्रैल को पशु प्रेमी ने शिकायत दर्ज कराई कि प्राइवेट कंपनी ने जहां रूम लिया था, वहां पर कुत्तों के कुछ संदेहास्पद अंग है. इस संबंध में कलेक्टर की ओर से जांच के निर्देश दिए गए थे, जिस पर तहसीलदार के मार्गदर्शन में नगर पालिका, कोतवाली थाने और वेटरनरी की टीम ने उस कमरे का निरीक्षण किया तो वहां कुछ अंग पाए गए। गजेंद्र नाफड़े ने बताया कि यह अंग कहां से ले गए, इसका क्या उद्देश्य था, यह तो जांच का विषय है. इस संबंध में हमने थाना प्रभारी को एफआईआर के लिए आवेदन दिया है. वो उसकी जांच कर रहे हैं और वह अंग कहां से आए थे. यह जांच के बाद ही पता चलेगा। सरकार अधिकारी के अनुसार, टेंडर के तहत एक नसबंदी के एवज में 679 रुपये की दर निर्धारित की गई थी. लेकिन एजेंसी ने कोई नसबंदी नहीं की. काम शुरू होने के पहले ही यह मामला सामने आ गया और इस मामले के सामने आने के पहले ही उनका ठेका निरस्त किया जा चुका था। नगर पालिका ने इस मामले में पुलिस को शिकायत सौंप दी है. मंडला एसपी का कहना है कि सभी पक्षों से पूछताछ और जांच के बाद वैधानिक कार्रवाई की जाएगी. फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर ये अंग कहां से आए और इसके पीछे किसका खेल है?

MP: भोपाल के हमीदिया अस्पताल में चौकाने वाला मामला… युवाओं को लगी खून लेने की लत

भोपाल। मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) की राजधानी भोपाल (Bhopal) के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल हमीदिया (Government Hospital Hamidia) के मनोरोग विभाग में एक ऐसा खुलासा हुआ है जिसने डॉक्टरों को भी सोच में डाल दिया है. यहां हमीदिया अस्पताल में पिछले एक साल में अब तक ऐसे 5 युवा इलाज के लिए पहुंचे हैं, जिन्हें ब्लड कंपोनेंट्स (Blood Components) लेने की आदत पड़ गई है. अब तक आपने शराब, सिगरेट और ड्रग्स जैसे नशों के बारे में सुना होगा. लेकिन यह मामला एक नए और खतरनाक ट्रेंड की ओर इशारा करता है. जहां कुछ युवा खून के तत्वों को ही ताकत बढ़ाने का जरिया मान रहे हैं। डॉक्टरों के अनुसार, इन सभी युवाओं की उम्र 18 से 25 साल के बीच है और इन मामलों में एक समान पैटर्न देखने को मिला है. जैसे ही परिवार को इसकी जानकारी मिली। उन्होंने युवाओं की गतिविधियों पर रोक लगा दी. कई दिनों तक समझाने की कोशिश की गई, लेकिन इसके बाद युवक चिड़चिड़े और आक्रामक हो गए. हालत बिगड़ने पर परिवार उन्हें मनोरोग विशेषज्ञों के पास काउंसलिंग के लिए लेकर पहुंचे। डॉक्टरों की प्रारंभिक जांच में तीन मुख्य वजहें सामने आई हैं जिज्ञासा, गलत जानकारी और अवैध माध्यमों की उपलब्धता. बताया जा रहा है कि सोशल मीडिया पर चल रहे कुछ वीडियो इस प्रवृत्ति को बढ़ा रहे हैं, जहां यह दावा किया जाता है कि प्लाज्मा या अन्य ब्लड कंपोनेंट्स लेने से ताकत बढ़ती है. तनाव कम होता है और शरीर में ऊर्जा आती है। हालांकि, विशेषज्ञ इन दावों को पूरी तरह गलत बताते हैं. डॉक्टरों का कहना है कि बिना किसी चिकित्सकीय जरूरत के ब्लड कंपोनेंट्स लेना बेहद जोखिम भरा हो सकता है. इससे इंफेक्शन, एलर्जी, सूजन और गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है यानी जिस फायदे की उम्मीद में यह कदम उठाया जा रहा है. वह सिर्फ एक भ्रम है, जबकि नुकसान बेहद गंभीर हो सकते हैं। विशेषज्ञों की चेतावनीहमीदिया अस्पताल के मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. जय प्रकाश अग्रवाल के अनुसार, युवा जिसे ताकत समझ रहे हैं, वह सिर्फ एक ‘हाइपोथेटिकल’ यानी काल्पनिक सुख है। इसके वास्तविक परिणाम बेहद खतरनाक हैं. इससे से गैंग्रीन का खतरा यानी गलत तरीके से इन्फ्यूजन लेने से अंग सड़ सकते हैं। इसके अलावा, डॉक्टर ने चेताया कि HIV और हेपेटाइटिस जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा होता है. वहीं, बिना डॉक्टरी सलाह के ब्लड कंपोनेंट लेना तत्काल ‘एनाफिलेक्टिक शॉक’ दे सकता है. यही नहीं, शरीर के अंदरूनी हिस्सों में गंभीर सूजन और अंग भी फेल हो सकते हैं।

मौसंबी के छिलके हैं कचरा नहीं खजाना, जानिए 4 आसान और असरदार उपयोग..

नई दिल्ली ।मौसंबी का जूस पीकर अक्सर लोग इसके छिलकों को बेकार समझकर फेंक देते हैं, लेकिन वास्तव में ये छिलके कई तरह से बेहद उपयोगी साबित हो सकते हैं। मौसंबी एक पौष्टिक फल है, और इसके छिलकों में भी प्राकृतिक तेल, विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट जैसे तत्व पाए जाते हैं, जो त्वचा, घर की सफाई और ताजगी बनाए रखने में मदद कर सकते हैं। सही तरीके से इनका उपयोग करने पर ये छिलके रोजमर्रा की कई समस्याओं का आसान और सस्ता समाधान बन सकते हैं। मौसंबी के छिलकों का सबसे लोकप्रिय उपयोग त्वचा की देखभाल में किया जाता है। इनमें मौजूद प्राकृतिक गुण त्वचा को साफ करने और उसे निखार देने में सहायक हो सकते हैं। छिलकों को धूप में सुखाकर उनका पाउडर तैयार किया जा सकता है, जिसे गुलाब जल या दही के साथ मिलाकर फेस पैक की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है। यह त्वचा को ताजगी देने के साथ-साथ दाग-धब्बों को हल्का करने में भी मदद कर सकता है। नियमित उपयोग से त्वचा में प्राकृतिक चमक बनी रहती है। इसके अलावा मौसंबी के छिलके घर की सफाई में भी काफी उपयोगी हैं। इनमें मौजूद प्राकृतिक ऑयल किचन की सतह, सिंक और अन्य जगहों पर जमी चिकनाई को हटाने में मदद करते हैं। छिलकों को रगड़कर इस्तेमाल करने से सतह साफ होने के साथ-साथ हल्की खुशबू भी फैलती है, जिससे घर अधिक स्वच्छ और ताजगी भरा महसूस होता है। यह एक प्राकृतिक क्लीनर के रूप में काम कर सकता है। मौसंबी के छिलकों का उपयोग घर में प्राकृतिक फ्रेशनर के रूप में भी किया जा सकता है। इन्हें सुखाकर अलमारी या कमरे के कोनों में रखने से नमी और बदबू को कम करने में मदद मिलती है। इससे वातावरण में ताजगी बनी रहती है और रासायनिक फ्रेशनर की जरूरत कम हो जाती है। इसके अलावा इन छिलकों का एक और उपयोग कीट नियंत्रण में भी देखा जाता है। इनकी तेज प्राकृतिक सुगंध कुछ हद तक मच्छरों और छोटे कीड़ों को दूर रखने में मदद कर सकती है, जिससे यह एक सरल और घरेलू उपाय बन जाता है। इस तरह मौसंबी के छिलके केवल कचरा नहीं बल्कि एक उपयोगी प्राकृतिक संसाधन हैं, जिन्हें अपनाकर हम न सिर्फ पैसे बचा सकते हैं बल्कि अपने घर को भी अधिक स्वच्छ, सुगंधित और स्वस्थ बना सकते हैं।