मिडिल ईस्ट तनाव का गोल्ड मार्केट पर असर… कीमत में गिरावट का सिलसिला जारी

नई दिल्ली। ग्लोबल मार्केट (Global Market) में सोने की कीमतों (Gold Prices) में हल्की गिरावट देखने को मिल रही है और इसकी बड़ी वजह मिडिल ईस्ट (Middle East) में बढ़ता तनाव बन रही है। हाल ही में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को ब्लॉक करने की योजना ने दुनिया भर में ऊर्जा सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ा दी है। यह स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऑयल रूट्स में से एक है, जहां से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी तरह का व्यवधान सीधे तौर पर तेल की कीमतों को प्रभावित करता है और यही असर अब सोने के बाजार पर भी दिखने लगा है। दरअसल, जब तेल महंगा होता है, तो महंगाई बढ़ने लगती है। इस समय कच्चे तेल की कीमतें करीब 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई हैं, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ रहा है। ऐसे माहौल में आमतौर पर सोना सुरक्षित निवेश (Safe Haven) माना जाता है, लेकिन इस बार तस्वीर थोड़ी अलग दिख रही है। बढ़ती महंगाई के कारण निवेशक अब ब्याज दरों पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं और यही वजह है कि सोने की कीमतों पर दबाव बना हुआ है। सोना एक ऐसा निवेश है, ज्यादातर मामलों में ब्याज नहीं देता, इसलिए जब ब्याज दरें बढ़ने की संभावना होती है, तो निवेशक इससे दूरी बनाने लगते हैं। फिलहाल, अमेरिका में महंगाई बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं, जिससे यह उम्मीद कम हो गई है कि जल्द ही ब्याज दरों में कटौती होगी। यही कारण है कि सोने की कीमतों में हाल ही में लगभग 2% तक की गिरावट देखने को मिली। हालांकि, पूरी तरह से तस्वीर नकारात्मक भी नहीं है। डॉलर में कमजोरी और बॉन्ड यील्ड में गिरावट जैसे फैक्टर सोने को कुछ हद तक सपोर्ट दे रहे हैं। इसके अलावा ग्लोबल स्तर पर आर्थिक सुस्ती और अनिश्चितता भी निवेशकों को सोने की ओर आकर्षित कर सकती है। यही वजह है कि शुरुआती गिरावट के बाद सोने ने कुछ रिकवरी भी दिखाई। एक और दिलचस्प बात यह है कि फरवरी से शुरू हुए इस जियो-पॉलिटिकल तनाव के दौरान सोना करीब 10% तक गिर चुका है, लेकिन अब धीरे-धीरे यह संभलने की कोशिश कर रहा है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले समय में अगर तनाव बढ़ता है या आर्थिक ग्रोथ धीमी होती है, तो सोना फिर से मजबूत हो सकता है। अभी सोने का बाजार कई फैक्टर्स के बीच फंसा हुआ है। इसमें एक तरफ बढ़ती महंगाई और ब्याज दरों का दबाव है, तो दूसरी तरफ वैश्विक अनिश्चितता का सपोर्ट है। ऐसे में निवेशकों के लिए जरूरी है कि वे जल्दबाजी में फैसला न लें, बल्कि बाजार के रुझान को समझकर ही निवेश करें।
शिवपुरी में रेस्क्यू ऑपरेशन: कुएं में गिरी गाय को ग्रामीणों और गो सेवा समिति ने बचाया

शिवपुरी । शिवपुरी जिले के बदरवास तहसील अंतर्गत श्रीपुर गांव में मंगलवार सुबह उस समय हड़कंप मच गया जब एक किसान के खेत में स्थित कुएं में एक गाय गिर गई। यह घटना घनश्याम परिहार के खेत की बताई जा रही है। अंधेरे और रात के समय अज्ञात कारणों से गाय कुएं में जा गिरी, जिसकी जानकारी सुबह ग्रामीणों को लगी तो तुरंत मौके पर भीड़ जुट गई। ग्रामीणों ने दिखाई तत्परता, समिति को दी सूचनाघटना की सूचना मिलते ही ग्रामीणों ने बिना देर किए सनातनी गो सेवा समिति को जानकारी दी। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए समिति के सदस्य तुरंत सक्रिय हो गए और राहत एवं बचाव कार्य के लिए टीम मौके पर पहुंची। इस दौरान गांव के कई लोग भी सहायता के लिए घटनास्थल पर एकत्र हो गए। रेस्क्यू ऑपरेशन में रस्सियों का सहारा, कुएं में उतरा स्वयंसेवकबचाव कार्य के दौरान सबसे बड़ी चुनौती गाय को सुरक्षित बाहर निकालने की थी। इसके लिए रस्सियों की मदद से एक साहसी स्वयंसेवक को कुएं में उतारा गया। समिति के सदस्यों ऋषि भारती, निखिल बैरागी, अमित यादव, कान्हा परिहार और गोलू क्षारी सहित अन्य ग्रामीणों ने मिलकर समन्वय के साथ रेस्क्यू अभियान चलाया। कुएं में उतरे सदस्य ने बड़ी सावधानी से गाय को रस्सियों से बांधा, जिसके बाद सभी ने मिलकर उसे धीरे-धीरे ऊपर खींचा। सफलता के बाद राहत की सांस, गाय सुरक्षित बाहर निकलीकड़ी मशक्कत और कुछ समय तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद गाय को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। राहत की सबसे बड़ी बात यह रही कि जांच के दौरान गाय पूरी तरह स्वस्थ पाई गई और उसे कोई गंभीर चोट नहीं आई। इस सफल बचाव अभियान के बाद ग्रामीणों और समिति सदस्यों ने राहत की सांस ली। ग्रामीण एकता और सेवा भावना की मिसालयह घटना एक बार फिर इस बात का उदाहरण बनी कि आपात स्थिति में ग्रामीण एकजुट होकर बड़ी से बड़ी मुश्किल को भी हल कर सकते हैं। गो सेवा समिति और स्थानीय ग्रामीणों की तत्परता ने न केवल एक बेजुबान जानवर की जान बचाई, बल्कि मानवता और सेवा भाव की मिसाल भी पेश की।
Rajya Sabha: हरिवंश फिर बनाए जा सकते हैं उपसभापति… सरकार कर रही विचार… विपक्ष ने जताई आपत्ति

नई दिल्ली। राज्यसभा (Rajya Sabha) के अपने पिछले कार्यकाल में उच्च सदन के उपसभापति (Deputy Speaker) रहे हरिवंश (Harivansh) को फिर से यह मौका मिल सकता है। सरकार की ओर से इस पर विचार चल रहा है। उनका पिछला कार्यकाल 9 अप्रैल को समाप्त हुआ था और 10 तारीख को उन्हें मनोनीत सांसद के तौर पर शपथ दिलाई गई थी। पहले वह जेडीयू (JDU) की ओर से लगातार दूसरी बार राज्यसभा के सांसद थे, लेकिन इस बार उन्हें मौका नहीं मिला था। वहीं सत्ता पक्ष की ओर से उन्हें मनोनीत सांसद के तौर पर सदन में भेजा गया है। अब उन्हें फिर से उपसभापति की भूमिका देने की तैयारी है और इस पर विपक्ष (Opposition) ने आपत्ति भी जाहिर कर दी है। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने राज्यसभा के उपसभापति के चुनाव के लिए विपक्षी नेताओं से बात की थी। उनकी ओर से कहा गया था कि हरिवंश को फिर से उपसभापति बनाया जाए। इसी को लेकर नड्डा ने विपक्षी दलों से बात की थी, लेकिन उनकी ओर से इसे लेकर असहमति जाहिर की गई है। सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस, टीएमसी और कुछ लेफ्ट दलों ने कहा है कि हम इस पर सहमत नहीं है। ऐसे में हरिवंश का सर्वसम्मति से सदन में पहुंचना मुश्किल दिख रहा है। विपक्षी दलों का कहना है कि लोकसभा में डिप्टी स्पीकर का पद लंबे समय से खाली है। सरकार उसे भरने पर विचार नहीं कर रही है। ऐसे में राज्यसभा के डिप्टी स्पीकर को लेकर इतनी जल्दी क्यों दिखा रही है। लोकसभा में डिप्टी स्पीकर का पद 2019 से ही रिक्त है। अब तक डिप्टी चेयरमैन का पद भरने के लिए कोई आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी नहीं किया गया है। सूत्रों का कहना है कि यह प्रक्रिया सदन में तीन दिनों के विशेष सत्र के दौरान की जा सकती है। तब दोनों सदनों की बैठक होगी। इस सत्र का मुख्य उद्देश्य महिला आरक्षण संशोधन विधेयक को पारित कराना है। इसी दौरान राज्यसभा के डिप्टी स्पीकर का फैसला हो सकता है। सर्वसम्मति ना बनने की स्थिति में चुनाव भी कराया जा सकता है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश का कहना है कि सरकार डिप्टी स्पीकर के पद के चुनाव को जबरदस्ती करना चाहती है। विपक्ष बोला- लोकसभा में तो यह पद 7 साल से खाली, यहां क्यों जल्दीउन्होंने कहा कि इस सरकार ने लोकसभा में डिप्टी स्पीकर के पद के लिए 7 सालों से कोई प्रयास नहीं किया है। यह पद खाली ही पड़ा है। लेकिन आखिर राज्यसभा में डिप्टी स्पीकर का पद 4 दिन के अंदर ही भरने की इतनी क्या जल्दी है। वहीं टीएमसी के नेता डेरेक ओ ब्रायन ने कहा कि सरकार चाहती है कि डिप्टी स्पीकर पद का चुनाव 17 अप्रैल को ही हो जाए। उन्होंने कहा कि यह तो संसद का मजाक बनाने की कोशिश है। डेरेक ने कहा कि लोकसभा में डिप्टी स्पीकर का पद 2019 से खाली है। फिर राज्यसभा को लेकर भाजपा इतनी जल्दबाजी में क्यों है।
बाबरी मस्जिद ट्रस्ट फंड में हेराफेरी, हुमायूं कबीर पर कैशियर ने लगाए गंभीर आरोप, दिया इस्तीफा

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की राजनीति में ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी से अलग होकर आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) बनाने वाले हुमायूं कबीर एक बार फिर विवादों में घिर गए हैं। पहले एक कथित स्टिंग वीडियो को लेकर उनके खिलाफ सवाल उठे थे, और अब इस्लामिक फाउंडेशन ऑफ इंडिया ट्रस्ट से जुड़े फंड मैनेजमेंट को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। बाबरी मस्जिद निर्माण से जुड़े इस ट्रस्ट के कैशियर मोइनुल हक उर्फ राना ने अपने पद से इस्तीफा देते हुए हुमायूं कबीर पर चंदे की रकम के कथित दुरुपयोग के आरोप लगाए हैं। उनके इस्तीफे के बाद यह मामला राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर चर्चा में आ गया है। बांग्ला मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मोइनुल हक राना ने दावा किया कि हुमायूं कबीर द्वारा चेक साइन कर लगातार पैसे निकाले जा रहे थे। उन्होंने यह भी कहा कि चंदे की राशि का उपयोग कहां किया गया, इसका कोई स्पष्ट हिसाब उपलब्ध नहीं है। राणा के मुताबिक, कैशियर होने के बावजूद जब उन्होंने खर्च का विवरण मांगा, तो उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला। मोइनुल हक ने यह भी आरोप लगाया कि बाबरी मस्जिद निर्माण के नाम पर एकत्र किया गया चंदा हुमायूं कबीर और उनके बेटे के पास गया। उनका कहना है कि चेक पर उनके हस्ताक्षर होने चाहिए थे, लेकिन फंड के उपयोग का कोई पारदर्शी लेखा-जोखा सामने नहीं आया। कुछ रिपोर्ट्स में QR कोड के जरिए फंड से जुड़े अनियमित लेनदेन के आरोपों का भी उल्लेख किया गया है। इस पूरे विवाद के बीच राजनीतिक असर भी देखने को मिल रहा है। जिस विधानसभा क्षेत्र में मस्जिद निर्माण का कार्य चल रहा है, उसे हुमायूं कबीर का प्रभाव क्षेत्र माना जाता रहा है। अब आरोप सामने आने के बाद उनकी पार्टी AJUP को लेकर भी राजनीतिक भविष्य पर सवाल उठने लगे हैं। उधर, कैशियर मोइनुल हक राणा ने कहा कि वे अब इस संगठन से जुड़े नहीं रह सकते क्योंकि उनके अनुसार जिस सेवा भाव से उन्होंने काम शुरू किया था, वह अब सवालों के घेरे में आ गया है। इससे पहले एक कथित स्टिंग वीडियो भी सामने आया था, जिसमें हुमायूं कबीर पर बीजेपी नेताओं के साथ 1000 करोड़ रुपये की डील पर चर्चा करने के आरोप लगे थे। हालांकि, हुमायूं कबीर ने इन आरोपों को खारिज करते हुए इसे एआई जनरेटेड वीडियो बताया है और इसे फैलाने वालों पर मानहानि का मुकदमा दर्ज कराने की बात कही है।
होर्मुज की नाकेबंदी….जहाजों की आवाजाही रोकने के लिए US ने तैनात किए 15 युद्धपोत

वाशिंगटन। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को लेकर अमेरिका और ईरान (America and Iran) के बीच गजब की तनातनी शुरू हो गई है। फारस की खाड़ी (Persian Gulf) में स्थित इस अहम समुद्री रास्ते पर ईरान के बाद अमेरिका ने पहरा लगा दिया है, जिसके बाद तनाव बढ़ता ही जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक अपनी धमकियों के बाद अमेरिका ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जहाजों की आवाजाही रोकने के लिए पूरा दम लगा दिया है। अमेरिका ने इस क्षेत्र में 15 से ज्यादा युद्धपोत तैनात किए गए हैं, जो ईरान के बंदरगाहों और तटीय इलाकों के आसपास नाकेबंदी लागू कर रहे हैं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड फोर्स ने बताया है कि अमेरिका बहुत सख्ती से नाकेबंदी लागू कर रहा है। ऑपरेशन में अमेरिका का खास युद्धपोत यूएसएस ट्रिपोली (LHA-7) भी शामिल है। यहां से एफ-35बी लाइटनिंग II स्टील्थ फाइटर जेट, एमवी-22 ओस्प्रे विमान और हेलिकॉप्टर लगातार होर्मुज की ओर भेजे जा रहे हैं। CENTCOM ने बताया कि यूएसएस ट्रिपोली खास तरह से डिजाइन किया गया है, जिसमें ज्यादा से ज्यादा फाइटर जेट तैनात किए जा सकते हैं। जरूरत पड़ने पर यह जहाज 20 से ज्यादा एफ-35बी जेट ऑपरेट कर सकता है। नाकेबंदी शुरूCENTCOM के मुताबिक, यह नाकेबंदी तय समय से शुरू कर दी गई है और इसे सख्ती से लागू किया जाएगा। इसका मतलब है कि ईरान के बंदरगाहों से आने-जाने वाले हर जहाज पर नजर रखी जाएगी। हालांकि, अमेरिका ने साफ किया है कि जो जहाज ईरान के अलावा दूसरे देशों के बंदरगाहों के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजर रहे हैं, उन्हें नहीं रोका जाएगा। CENTCOM ने एक बयान में कहा, “नाकेबंदी सभी देशों के उन पोतों के खिलाफ निष्पक्ष रूप से लागू की जाएगी, जो ईरान के बंदरगाहों और तटीय क्षेत्रों में प्रवेश कर रहे हैं या वहां से बाहर जा रहे हैं। गैर-ईरानी बंदरगाहों के बीच यात्रा करने वाले जहाजों को होर्मुज से गुजरने की इजाजत दी जाएगी।” वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान की कोई फास्ट अटैकर जहाज़ें नाकेबंदी के पास आईं, तो उन्हें तुरंत नष्ट कर दिया जाएगा। हालांकि विश्लेषकों का कहना कि अमेरिका के लिए केवल बल प्रयोग के जरिये जहाजों की सामान्य आवाजाही बहाल करना मुश्किल होगा। फिलहाल यह स्पष्ट भी नहीं है कि नाकेबंदी कैसे काम करेगी या ईरान जवाब में क्या कदम उठाएगा। नहीं हो पाया था युद्धविरामइससे पहले अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच 28 फरवरी को हुए सशर्त युद्ध-विराम समझौते को स्थायी शांति में बदलने के लिए पिछले शनिवार को पाकिस्तान में हुई बातचीत बेनतीजा रही थी, जिसके बाद अमेरिका ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को निशाना बनाया है। दोनों पक्षों के बीच बातचीत फिर से शुरू होगी या नहीं, इस संबंध में फिलहाल कोई जानकारी सामने नहीं आई है। ईरान ने दी बड़ी धमकीअमेरिकी एक्शन के जवाब में ईरान ने फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के सभी बंदरगाहों को निशाना बनाने की धमकी दी है। इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ब्रॉडकास्टिंग के मुताबिक, “फारस की खाड़ी और ओमान सागर में सुरक्षा या तो सभी के लिए होगी या किसी के लिए भी नहीं।” ईरानी सेना ने कहा, “इस क्षेत्र का कोई भी बंदरगाह सुरक्षित नहीं रहेगा।”
महिला ने तलाक के बाद पति से मांगा 170 करोड़ का सोना, भड़का SC…. बोला- ऐसे मामलों को तुरंत रोक देना चाहिए

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने हाल ही में एक मामले की सुनवाई के दौरान झूठे घरेलू हिंसा के मामलों पर चिंता जताई है। इस दौरान SC ने तलाक (Divorce) के बाद अपने पति से 170 करोड़ रुपये का सोना (Gold worth Rs 170 crore) मांगने वाली महिला को फटकार भी लगाई है। उच्चतम न्यायालय ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि जिन मामलों में यह साफ-साफ दिख रहा है कि कोई ठोस आरोप नहीं हैं, ऐसे घरेलू हिंसा के मामलों को शुरुआत में ही रोक देना चाहिए। एक रिपोर्ट के मुताबिक यह मामला उस समय सामने आया जब पति ने दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) के फैसले को SC में चुनौती दी। दोनों पक्षों के बीच समझौता पहले ही हो चुका था, लेकिन पत्नी की मांग पर हाईकोर्ट ने इस केस पर आगे की सुनवाई की इजाजत दी थी। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले को पलट दिया। 170 करोड़ का सोना!महिला का दावा था कि तलाक के समझौते के बदले उसे 120 करोड़ रुपये के सोने के गहने और 50 करोड़ रुपये के सोने के बिस्किट देने का वादा किया गया था, यानी कुल 170 करोड़ रुपये का सोना। लेकिन सुप्रीम कोर्ट को इस दावे का कोई पुख्ता सबूत नहीं मिला। SC ने पाया कि यह बात न तो लिखित समझौते में थी, न ही पहले के किसी कागज में इसका जिक्र था। यह दावा बाद में अचानक घरेलू हिंसा की शिकायत में सामने आया। सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील को भी खारिज कर दिया कि टैक्स से बचने के लिए इसे लिखित में नहीं डाला गया था और कहा कि यह कानून की अनदेखी दिखाता है। क्या था समझौता?दरअसल इस जोड़े की शादी साल 2000 में हुई थी। बाद में दोनों के बीच दूरियां आ गईं और वे 2022-23 से अलग रहने लगे। पति ने 2023 में तलाक की मांग की। इसके बाद मामला सुलह के लिए भेजा गया और 16 मई 2024 को समझौता हुआ, जिसमें 1.5 करोड़ रुपये का पूरा और अंतिम निपटारा तय हुआ। इस समझौते के बाद तलाक की पहली प्रक्रिया भी पूरी हो गई और दोनों पक्षों ने पैसे और गहनों का लेन-देन भी कर लिया। लेकिन बाद में महिला ने तलाक की दूसरी प्रक्रिया से पीछे हटकर घरेलू हिंसा का केस दर्ज कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?हालांकि उच्चतम न्यायालय को घरेलू हिंसा के कोई सबूत नहीं मिले। SC ने अपने फैसले में कहा कि हिंसा को लेकर कोई खास घटना या ठोस विवरण नहीं दिया गया है और बस सामान्य आरोप लगाए गए थे। यह नहीं बताया गया कि पति या उसके परिवार के किस सदस्य ने क्या किया। SC ने यह भी नोट किया कि शादी के इतने लंबे समय तक कभी ऐसे आरोप नहीं लगाए गए थे और शिकायत तब दर्ज की गई जब समझौते का बड़ा हिस्सा पूरा हो चुका था। ऐसे में कोर्ट ने इसे बाद में सोच समझकर उठाया गया कदम बताया। अनुच्छेद 142 का इस्तेमालसुप्रीम कोर्ट ने सख्त शब्दों में कहा कि शादी के विवाद भावनात्मक हो सकते हैं, लेकिन केवल भावनाओं के आधार पर आपराधिक केस नहीं चलाए जा सकते। अगर ऐसा होने दिया गया तो कानून का गलत इस्तेमाल होगा और लोगों को बेवजह परेशान किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब दोनों पक्ष अपनी मर्जी से समझौता करते हैं और उस पर अमल भी करते हैं, तो बिना ठोस कारण के बाद में उससे पीछे नहीं हट सकते। आखिर में अदालत ने संविधान के अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल करते हुए शादी को खत्म कर दिया और कहा कि यह रिश्ता पूरी तरह टूट चुका है और अब इसमें कोई उम्मीद नहीं बची है। साथ ही अदालत ने निर्देश दिया कि बाकी बची रकम तय समय में दी जाए, जमा पैसे वापस किए जाएं और दोनों के बीच चल रहे सभी केस खत्म माने जाएं।
नोएडा हिंसा में बड़ा खुलासा: साजिश के मिले संकेत, 300 लोग गिरफ्तार, 7 एफआईआर दर्ज

नोएडा। दिल्ली से सटे नोएडा, फरीदाबाद और बुलंदशहर के औद्योगिक इलाकों में श्रमिकों का विरोध प्रदर्शन अचानक हिंसक हो गया। कई जगह आगजनी, पथराव और तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आईं। फिलहाल हालात नियंत्रण में हैं, लेकिन घटनास्थलों पर जली गाड़ियां, टूटे कांच और बिखरे पत्थर हालात की गंभीरता बयां कर रहे हैं। 300 लोग गिरफ्तार पुलिस जांच में इस पूरे घटनाक्रम के पीछे साजिश के संकेत मिले हैं। अब तक करीब 300 लोगों को प्रिवेंटिव कार्रवाई में गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। वहीं 7 एफआईआर दर्ज की गई हैं और साइबर टीम 7 व्हाट्सएप ग्रुप्स की जांच कर रही है, जिन पर माहौल भड़काने का शक है। पुलिस का कहना है कि गिरफ्तार लोगों में कई बाहरी तत्व शामिल हैं, जो श्रमिकों के बीच घुसकर प्रदर्शन को उग्र बनाने की कोशिश कर रहे थे। नोएडा पुलिस कमिश्नर का बयाननोएडा पुलिस कमिश्नर ने बताया कि सोशल मीडिया पर फैली भ्रामक जानकारी ने भी हालात बिगाड़े। दो सोशल मीडिया अकाउंट्स की पहचान कर उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा रही है। एक फर्जी दावे में पुलिस फायरिंग में 14 लोगों की मौत की बात कही गई थी, जिसे पुलिस ने सिरे से खारिज कर दिया। अतिरिक्त बल तैनात स्थिति को देखते हुए नोएडा पुलिस के सभी कर्मियों की छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं और अतिरिक्त बल तैनात किया गया है। आसपास के जिलों में भी अलर्ट जारी है और लगातार फ्लैग मार्च व चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है। पुलिस के अनुसार 83 स्थानों पर करीब 42 हजार श्रमिकों ने प्रदर्शन किया, जबकि 78 स्थानों पर लोगों को समझाकर शांत कराया गया। श्रमिकों की पांच मांगों में से चार को मान लिया गया है और बाकी मुद्दों पर सरकार ने हाई लेवल कमेटी बनाई है। क्या बोले मुख्यमंत्री आदित्यनाथ?मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों के साथ बैठक कर हालात की समीक्षा की और श्रमिकों से अपील की कि वे किसी के बहकावे में न आएं। उन्होंने कहा कि सरकार श्रमिकों के हितों के लिए प्रतिबद्ध है और साजिश रचने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। जांच में हुआ ये खुलासापुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ संदिग्ध संगठनों और बाहरी तत्वों ने प्रदर्शन को हाईजैक कर हिंसा को बढ़ावा दिया। करीब 150 संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। इस बीच सेक्टर-63 और अन्य इलाकों में फिर से माहौल बिगाड़ने की कोशिश हुई, लेकिन पुलिस ने तुरंत कार्रवाई कर स्थिति संभाल ली। कई उपद्रवियों को हिरासत में लिया गया और संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी गई। घटना के दौरान एक आईटी कंपनी में तोड़फोड़ और कर्मचारियों के साथ अभद्रता का मामला भी सामने आया, जिसका सीसीटीवी फुटेज सामने आया है। वहीं एक स्कूल बस भी पथराव की चपेट में आ गई, जिसके बाद बच्चों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया। उद्योग जगत की ओर से भी प्रतिक्रिया आई है। मदरसन ग्रुप ने बयान जारी कर कहा कि यह विवाद वेतन से जुड़ी गलत सूचनाओं के कारण उत्पन्न हुआ है और कंपनी का संचालन सामान्य है। बुलंदशहर और गाजियाबाद में भी मजदूरों ने वेतन वृद्धि, PF-ESI और अन्य सुविधाओं की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। कुछ जगहों पर सड़क जाम से यातायात प्रभावित हुआ और लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। पूरे मामले में पुलिस और प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। डीजीपी ने स्पष्ट किया है कि हिंसा फैलाने, अफवाह फैलाने और कानून हाथ में लेने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
सिनेमाई उत्कृष्टता के लिए कलाकार का अटूट समर्पण और साहसी स्टंट बना चर्चा का विषय।

नई दिल्ली : भारतीय सिनेमा के इतिहास में साहसी स्टंट और जोखिम भरे एक्शन दृश्यों के लिए मशहूर कलाकारों ने समय-समय पर अपनी सीमाओं को चुनौती दी है। इसी कड़ी में एक रोंगटे खड़े कर देने वाला वाकया सामने आया है जहाँ एक बड़े बजट की फिल्म के फिल्मांकन के दौरान गहरे नीले समुद्र के भीतर खतरनाक शार्क मछलियों के बीच एक्शन दृश्य को अंजाम दिया गया। इस दृश्य की मांग इतनी चुनौतीपूर्ण थी कि कलाकार को बिना किसी सुरक्षा पिंजरे के पानी की गहराइयों में उतरना पड़ा। मनोरंजन जगत में वास्तविकता का पुट डालने के उद्देश्य से उठाए गए इस कदम ने न केवल तकनीकी टीम को हैरत में डाल दिया बल्कि कलाकार के जीवन पर भी एक बड़ा संकट खड़ा कर दिया था। समुद्र के भीतर फिल्माए गए इस सीक्वेंस के दौरान दर्जनों शिकारी शार्क मछलियां कलाकार के बेहद करीब तैर रही थीं। दृश्य को प्रभावी बनाने के लिए कलाकार को पानी के भीतर काफी समय तक अपनी सांसें रोककर और बिना किसी विशेष सुरक्षा उपकरण के अभिनय करना था। शूटिंग के दौरान एक समय ऐसा भी आया जब शार्क मछलियों का व्यवहार अप्रत्याशित हो गया और वहां मौजूद विशेषज्ञों के चेहरे पर चिंता की लकीरें खिंच गईं। पानी के भीतर ऑक्सीजन और दबाव के साथ तालमेल बिठाना पहले से ही कठिन था और ऊपर से इन हिंसक जीवों की मौजूदगी ने स्थिति को बेहद तनावपूर्ण बना दिया था। इस जानलेवा जोखिम के पीछे का मुख्य कारण पर्दे पर दर्शकों को एक वास्तविक और अविस्मरणीय अनुभव प्रदान करना था। वर्तमान दौर में जहाँ अधिकांश दृश्यों के लिए कंप्यूटर ग्राफिक्स और विशेष प्रभावों का सहारा लिया जाता है वहीं इस कलाकार ने प्राकृतिक और वास्तविक माहौल में काम करने को प्राथमिकता दी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के दृश्यों में जरा सी चूक भी प्राणघातक साबित हो सकती है। कलाकार ने इस जोखिम को स्वीकार करते हुए न केवल अपनी पेशेवर प्रतिबद्धता दिखाई बल्कि यह भी साबित किया कि एक उत्कृष्ट रचना के लिए वे किसी भी हद तक जा सकते हैं। फिल्मांकन के बाद जब इस घटना का विवरण साझा किया गया तो सिनेमा जगत में सुरक्षा मानकों को लेकर चर्चाएं तेज हो गईं। हालांकि टीम के साथ पेशेवर गोताखोर और चिकित्सा कर्मी तैनात थे लेकिन शार्क के हमले की स्थिति में बचाव की गुंजाइश बहुत कम होती है। यह अनुभव उस कलाकार के करियर के सबसे साहसी और चुनौतीपूर्ण क्षणों में से एक बन गया है। इस साहसिक कदम ने फिल्म निर्माण की कला के प्रति उनके समर्पण को एक नए शिखर पर पहुंचा दिया है और दर्शकों के बीच इस आगामी दृश्य को लेकर उत्सुकता कई गुना बढ़ गई है।
इंदौर के पाटनीपुरा में पूजा सामग्री की दुकान में लगी भीषण आग, लाखों का नुकसान

इंदौर। इंदौर शहर के पाटनीपुरा इलाके में सोमवार देर रात पूजा सामग्री की एक दुकान में भीषण आग लग गई, जिससे लाखों रुपए का सामान जलकर खाक हो गया। आग की तीव्रता को देखते हुए आसपास की दुकानों को एहतियातन खाली करा लिया गया। फायर ब्रिगेड के अनुसार, देर रात करीब 1:40 बजे आग लगने की सूचना मिली, जिसके बाद तुरंत दो दमकल वाहन मौके पर भेजे गए। आग पर काबू पाने के लिए करीब 17 हजार लीटर से अधिक पानी का इस्तेमाल किया गया। स्थानीय लोगों ने भी आग बुझाने में सहयोग किया। आग ‘विनायक पूजा पाठ सामग्री’ नामक दुकान में लगी। घटना के समय दुकान का शटर बंद था, जिससे अंदर तेजी से धुआं भर गया और आग ने विकराल रूप ले लिया। दमकल कर्मियों ने शटर तोड़कर अंदर प्रवेश किया और काफी मशक्कत के बाद आग पर नियंत्रण पाया। जनहानि नहीं, लेकिन भारी नुकसानपुलिस के अनुसार इस हादसे में कोई जनहानि नहीं हुई है, लेकिन दुकान में रखा लाखों रुपए का सामान पूरी तरह नष्ट हो गया। आग लगने के कारणों की जांच की जा रही है। दुकान मालिक सुधीर अग्रवाल के भाई दीपक अग्रवाल ने बताया कि प्रारंभिक तौर पर आग लगने की वजह शॉर्ट सर्किट मानी जा रही है। सूचना मिलते ही परिवार के सदस्य मौके पर पहुंच गए थे। घटना की सूचना मिलते ही एमआईजी थाना प्रभारी सीबी सिंह मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। प्रशासन ने आसपास की अन्य पूजा सामग्री दुकानों को तुरंत खाली कराकर बड़ा हादसा टाल दिया।
VFX, CGI और SFX में क्या फर्क है? जानिए फिल्मों का असली ‘जादू’ कैसे बनता है

नई दिल्ली। फिल्म निर्माण अब सिर्फ कैमरे और कलाकारों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह एक हाई-टेक आर्ट बन चुका है, जिसमें कल्पना को हकीकत जैसा दिखाने के लिए आधुनिक तकनीकों का सहारा लिया जाता है। ‘बाहुबली’ के विशाल किले हों या ‘एवेंजर्स’ की अंतरिक्ष जंग इन सबके पीछे मुख्य रूप से तीन तकनीकों का योगदान होता है: VFX, CGI और SFX। हाल ही में ‘रामायण’ जैसे बड़े प्रोजेक्ट की चर्चा के बीच एक बार फिर ये शब्द सुर्खियों में हैं। हालांकि आम दर्शक इन्हें एक ही समझ लेते हैं, लेकिन असल में इन तीनों का काम और तरीका बिल्कुल अलग होता है। SFX यानी स्पेशल इफेक्ट्स: जो कैमरे के सामने होता है असली जादूSFX यानी स्पेशल इफेक्ट्स वे प्रभाव होते हैं जिन्हें फिल्म की शूटिंग के दौरान ही सेट पर तैयार किया जाता है। इसे ‘प्रैक्टिकल इफेक्ट्स’ भी कहा जाता है क्योंकि इसमें कंप्यूटर का इस्तेमाल नहीं होता। उदाहरण के तौर पर अगर किसी सीन में विस्फोट दिखाना है, बारिश करवानी है, नकली खून दिखाना है या फिर टूटते हुए शीशे का दृश्य फिल्माना है, तो ये सब SFX के अंतर्गत आता है। पुराने जमाने की फिल्मों में रोबोट, मिनिएचर सेट या यांत्रिक उपकरणों से बनाए गए दृश्य भी इसी श्रेणी में आते हैं। इसकी खास बात यह है कि यह रियल टाइम में कैमरे के सामने शूट होता है, जिससे दृश्य अधिक वास्तविक महसूस होता है। CGI: जब कंप्यूटर बनाता है पूरी नई दुनियाCGI यानी Computer Generated Imagery वह तकनीक है जिसमें पूरी तरह डिजिटल दुनिया बनाई जाती है। इसमें कंप्यूटर की मदद से 3D मॉडल, एनिमेशन और ग्राफिक्स तैयार किए जाते हैं। यह उन चीजों को पर्दे पर दिखाने के लिए इस्तेमाल होता है जो असल दुनिया में मौजूद ही नहीं हैं या जिन्हें बनाना बेहद महंगा या असंभव है। जैसे किसी फिल्म में विशाल ड्रैगन, एलियन ग्रह या अवास्तविक पात्र ये सब CGI का कमाल होते हैं। इसमें शूटिंग के दौरान असली सेट की जरूरत नहीं होती, बल्कि पूरा दृश्य कंप्यूटर में तैयार किया जाता है और बाद में उसे फिल्म में जोड़ा जाता है। VFX: असली और डिजिटल दुनिया का परफेक्ट मेलVFX यानी Visual Effects सबसे व्यापक तकनीक है, जो असली शूट की गई फुटेज और CGI का संयोजन होती है। इसका उपयोग पोस्ट-प्रोडक्शन यानी शूटिंग के बाद किया जाता है। उदाहरण के लिए किसी अभिनेता को ग्रीन स्क्रीन के सामने शूट किया जाता है और बाद में उसके पीछे जलता हुआ शहर, पहाड़ या काल्पनिक दुनिया जोड़ दी जाती है। VFX का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि डिजिटल और असली फुटेज इतने सहज तरीके से मिल जाएं कि दर्शक को फर्क ही न दिखे। आज के समय में लगभग हर बड़ी फिल्म में VFX का भारी इस्तेमाल होता है। फिल्म देखते वक्त कैसे पहचानें फर्क?अगर आप ध्यान से देखें तो इन तकनीकों में फर्क पहचानना संभव है। जहां असली विस्फोट, बारिश या सेट पर बनी चीजें दिखें, वह SFX है। अगर कोई पूरी तरह काल्पनिक जीव या दुनिया दिखे जो असली लगने के बावजूद वास्तविक नहीं हो सकती, तो वह CGI है। वहीं जब असली शूटिंग के साथ डिजिटल बैकग्राउंड या बदलाव जोड़े गए हों, तो वह VFX होता है। हालांकि आधुनिक फिल्मों में इतनी सफाई से काम होता है कि कई बार इन्हें अलग पहचानना मुश्किल हो जाता है। कल्पना को हकीकत बनाने की कलाआज फिल्म इंडस्ट्री में ये तीनों तकनीकें मिलकर सिनेमा को एक नया आयाम दे रही हैं। दर्शकों को अब ऐसी दुनिया देखने को मिलती है जो पहले सिर्फ कल्पना में ही संभव थी। आने वाले समय में ‘रामायण’ जैसे प्रोजेक्ट्स इन तकनीकों के और भी उन्नत रूप को सामने लाएंगे, जिससे भारतीय सिनेमा का स्तर वैश्विक स्तर पर और ऊंचा होगा।