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नारी शिक्षा के अग्रदूत ज्योतिबा फुले

– मोहन मंगलमज्योतिबा फुले के संक्षिप्त नाम से ख्यात महात्मा ज्योतिराव गोविंदराव फुले महान समाजसेवी, समाज सुधारक, समाज प्रबोधक, विचारक, लेखक, दार्शनिक, विचारक, लेखक और क्रांतिकारी कार्यकर्ता थे। उनकी विचारधारा स्वतंत्रता, समतावाद और समाजवाद पर आधारित थी। महिलाओं तथा पिछड़ों व अछूतों के उत्थान के लिए उन्होंने अनेक कार्य किए। उनका जीवन असमानता, जातिगत भेदभाव और अंधश्रद्धा के विरोध में संघर्ष का प्रतीक है। वे समाज के सभी वर्गों को शिक्षा प्रदान करने के प्रबल समर्थक और भारतीय समाज में प्रचलित जाति आधारित विभाजन व भेदभाव के विरुद्ध थे। उनका मानना था कि सामाजिक बुराइयों का मुकाबला करने का एकमात्र जरिया है महिलाओं और दमित वर्ग के लोगों को शिक्षा देना। वे कुप्रथाओं और अंधश्रद्धा की जाल से समाज को मुक्त करना चाहते थे। नारी शिक्षा के अग्रदूत ज्योतिबा फुले ने अपना सम्पूर्ण जीवन स्त्रियों को शिक्षा प्रदान कराने में, स्त्रियों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने में समर्पित कर दिया। ज्योतिबा का जन्म 11 अप्रैल 1827 को पुणे में हुआ था। उनकी माता का नाम चिमणाबाई तथा पिता का नाम गोविन्दराव था। उनका परिवार कई पीढ़ी पहले माली का काम करता था। वे सतारा से पुणे फूल लाकर गजरे आदि बनाने का काम करते थे, इसलिए ये लोग ‘फुले’ के नाम से जाने जाते थे। ज्योतिबा ने कुछ समय मराठी में अध्ययन किया। परंतु लोगों द्वारा पिता को यह कहने पर कि पढ़ने से तुम्हारा पुत्र किसी काम का नहीं रह जाएगा, पिता गोविंद राम ने उनकी पढ़ाई छुड़वा दी। बाद में जब उदार विचार वाले लोगों ने पिता को समझाया तो तीव्र बुद्धि के बालक ज्योतिबा का दाखिला स्कॉटिश मिशनरी हाई स्कूल (पुणे) में हुआ, जहाँ से उन्होंने शिक्षा पूरी की। संत-महात्माओं की जीवनियाँ पढ़ने में ज्योतिबा की बड़ी रुचि थी। उन्हें ज्ञान हुआ कि जब भगवान के सामने सब नर-नारी समान हैं तो उनमें ऊँच-नीच का भेद क्यों होना चाहिए। 1848 में ही उन्होंने थॉमस पेन की पुस्तक ‘राइट्स ऑफ मैन’ पढ़ी। इसे पढ़ने के बाद उनके अंदर सामाजिक न्याय की गहरी समझ विकसित हुई। 1848 में 21 वर्ष की आयु में फुले ने अहमदनगर में ईसाई मिशनरी सिंथिया फैरर द्वारा संचालित एक बालिका विद्यालय का दौरा किया। उन्होंने महसूस किया कि भारतीय समाज में शोषित जातियाँ और महिलाएँ वंचित थीं, और इन वर्गों की शिक्षा उनकी मुक्ति के लिए अत्यंत आवश्यक थी। उन्होंने युवा विधवाओं को अपने सिर मुंडवाते और जीवन में किसी भी प्रकार की खुशी से वंचित होते देखा। असमानता को बढ़ावा देने वाली इन सभी सामाजिक बुराइयों को देखकर उन्होंने महिलाओं को शिक्षित करने का निर्णय लिया। उन्होंने अपनी पत्नी से शुरुआत की। ज्योतिराव हर दोपहर अपनी पत्नी सावित्रीबाई फुले के साथ बैठते और जब वह खेतों में उन्हें भोजन देने आती थीं, तो उन्हें शिक्षित करते थे। इसके बाद उन्होंने अपनी पत्नी को प्रशिक्षण के लिए एक स्कूल में भेजा। पति-पत्नी ने 1848 में पुणे के विश्रामबाग वाडा में बालिका विद्यालय खोला। लड़कियों के लिए यह देश में पहला विद्यालय था। कुछ लोगों ने इस काम में बाधा डालने की कोशिश भी की, किंतु जब फुले आगे बढ़ते ही गए तो उनके पिता पर दबाव डालकर पति-पत्नी को घर से निकलवा दिया। इससे कुछ समय के लिए उनका काम रुका अवश्य, पर शीघ्र ही उन्होंने एक के बाद एक बालिकाओं के तीन विद्यालय खोल दिए। निर्धन तथा निर्बल वर्ग को न्याय दिलाने के लिए फुले ने मानव कल्याण, सुख, एकता, समानता, सरल धार्मिक सिद्धांतों और अनुष्ठानों के आदर्शों के साथ 24 सितंबर 1873 को सत्यशोधक समाज की स्थापना की। इसके माध्यम से उन्होंने मूर्ति पूजा का विरोध किया और जाति व्यवस्था की निंदा की। ज्योतिबा बाल-विवाह विरोधी और विधवा-विवाह के समर्थक थे। उन्‍होंने विधवाओं और महिलाओं के कल्याण के लिए बहुत काम किया। किसानों की हालत सुधारने और उनके कल्याण के लिए भी काफी प्रयास किये। धर्म, समाज और परम्पराओं के सत्य को सामने लाने हेतु उन्होंने अनेक पुस्तकें भी लिखीं। इनमें प्रमुख हैं – गुलामगिरी, तृतीय रत्न, छत्रपति शिवाजी, राजा भोसला का पखड़ा, किसान का कोड़ा, अछूतों की कैफियत आदि। ‘गुलामगिरी’ में बताए गए विचारों के आधार पर पश्चिमी और दक्षिणी भारत में समाज सुधार के अनेक आंदोलन चले। स्त्रियों को शिक्षा प्रदान करने के महान कार्य के लिए 1883 में तत्कालीन ब्रिटिश भारत सरकार ने ज्योतिबा फुले को ‘स्त्री शिक्षण के आद्य जनक’ कहकर गौरव प्रदान किया। महात्मा ज्योतिबा व उनके संगठन के संघर्ष के कारण सरकार ने ‘एग्रीकल्चर एक्ट’ पास किया। ज्योतिबा फुले को 1876 में तत्कालीन पूना नगरपालिका में आयुक्त नियुक्त किया गया था और उन्होंने 1883 तक इस गैर-निर्वाचित पद पर कार्य किया। बॉम्बे के एक अन्य समाज सुधारक विट्ठलराव कृष्णाजी वांडेकर ने 11 मई 1888 को ज्योतिराव फुले को ‘महात्मा’ की उपाधि से सम्मानित किया था। ज्योतिबा फुले ने महाराष्ट्र में अस्पृश्यता और जाति व्यवस्था को समाप्त करने के लिए काम किया। उनके जन जागरुकता अभियान ने आगे चलकर डॉ. बी. आर. अंबेडकर और महात्मा गांधी की विचारधाराओं को प्रभावित किया, जिन्होंने बाद में जातिगत भेदभाव के खिलाफ बड़ी पहलें कीं। महान समाजसेवी ज्योतिबा फुले 28 नवंबर 1890 को इस संसार से सदा-सर्वदा के लिए विदा हो गए, लेकिन नारी जगत को अशिक्षा के अंधकार से निकालने तथा समाज को अंधविश्वास और कुरूढ़ियों से मुक्ति दिलाने वाले उनके कार्य सदैव समाज का मार्गदर्शन करते रहेंगे।

शनिवार 11 अप्रैल 2026 का राशिफल धन से लेकर सेहत तक क्या कहते हैं ग्रह

नई दिल्ली । 11 अप्रैल 2026 का दिन वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि के साथ प्रारंभ होगा. इस दिन सिद्ध योग साध्य योग सर्वार्थ सिद्धि योग आडल योग और विडाल योग का प्रभाव देखा जाएगा. बुध ग्रह के प्रभाव से संचार व्यापार और निर्णय क्षमता पर विशेष असर देखने को मिलेगा. कई राशियों के लिए यह दिन नए अवसरों का संकेत देगा लेकिन जल्दबाजी से नुकसान भी संभव है. पारिवारिक जीवन में संतुलन बनाए रखना जरूरी होगा. इस दिन का ग्रह गोचर सभी बारह राशियों पर अलग अलग प्रभाव डालेगा. कुछ लोगों के लिए यह समय धन लाभ और रिश्तों में सुधार लेकर आएगा जबकि कुछ को स्वास्थ्य और आर्थिक मामलों में सावधानी रखनी होगी. मेष राशि घर में मरम्मत कार्य तेजी से पूरा होगा. पुराने मित्र से मुलाकात खुशी देगी. मानसिक तनाव कम होगा. आर्थिक मामलों में छोटे लाभ के संकेत मिलेंगे और कार्यों में गति बनी रहेगी. वृषभ राशि प्रेम जीवन की परेशानियां कम होंगी. पड़ोसी से विवाद संभव है. संपत्ति से जुड़े निर्णय में लाभ मिल सकता है. निवेश को लेकर सोच समझकर कदम उठाना बेहतर रहेगा और वाणी पर संयम जरूरी होगा.मिथुन राशि पैरों में चोट की संभावना रहेगी इसलिए सावधानी रखें. जीवनसाथी को किसी सच्चाई का पता चल सकता है. आर्थिक स्थिति स्थिर रहेगी. स्वास्थ्य को लेकर लापरवाही नुकसान दे सकती है इसलिए सावधानी रखें.कर्क राशि संपत्ति से जुड़े बड़े निर्णय टालें. पैसों की कमी से कठिनाई बढ़ सकती है. घर में मेहमान आने से वातावरण खुशहाल होगा. पुराने रिश्ते फिर जुड़ सकते हैं. खर्च बढ़ेगा और भागदौड़ रहेगी. मानसिक दबाव बढ़ सकता है लेकिन धैर्य से स्थिति संभल जाएगी. सिंह राशि घर बदलने का निर्णय सही नहीं रहेगा. स्वास्थ्य पर ध्यान दें. कार्यस्थल पर कम बोलकर काम पर फोकस करें. अत्यधिक खर्च से बचना होगा और परिवार में तालमेल बनाए रखना होगा. कन्या राशि पैर में चोट की संभावना है. स्थान परिवर्तन का निर्णय टालें. काम में एकाग्रता रखें. कार्यस्थल पर जिम्मेदारियां बढ़ सकती हैं और धैर्य से काम लेना होगा. तुला राशि मांगलिक कार्यक्रम की योजना बनेगी. खरीदारी के लिए समय शुभ है. प्रेम संबंधों में नई शुरुआत संभव है. सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी और मित्रों का सहयोग मिलेगा. वृश्चिक राशि निवेश टालना बेहतर रहेगा. करीबी से धोखा मिल सकता है. सिर दर्द की समस्या रह सकती है. निर्णय लेने में जल्दबाजी नुकसानदेह होगी और मानसिक तनाव बढ़ सकता है. धनु राशि स्वास्थ्य में सुधार होगा. खर्च बढ़ेगा. शाम को सतर्क रहें और कम बोलें. यात्रा से लाभ संभव है लेकिन स्वास्थ्य पर ध्यान देना जरूरी होगा. मकर राशि प्रेम जीवन में जल्दबाजी से बचें. स्वास्थ्य और धन दोनों में उतार चढ़ाव रहेगा. संबंधों में गलतफहमी हो सकती है इसलिए संवाद स्पष्ट रखें. कुंभ राशि अहंकार छोड़ना जरूरी होगा. रिश्तों में सुधार की संभावना है. आर्थिक स्थिति सामान्य रहेगी. नए अवसर मिल सकते हैं और आत्मविश्वास बढ़ेगा. मीन राशि दांपत्य जीवन में निर्णय सावधानी से लें. अचानक धन लाभ संभव है. परिवार में सुख शांति बनी रहेगी और पुराने विवाद खत्म हो सकते हैं.

गर्मी में तुरंत राहत देगा यह सुपर ड्रिंक नारियल पानी और बीज का कमाल जानकर हैरान रह जाएंगे

नई दिल्ली । गर्मी के मौसम में बढ़ता तापमान और लगातार पसीना निकलने की वजह से शरीर में डिहाइड्रेशन और थकान की समस्या आम हो जाती है। ऐसे में शरीर को केवल पानी नहीं बल्कि ऐसे प्राकृतिक पेय की जरूरत होती है जो इलेक्ट्रोलाइट्स और पोषक तत्वों से भरपूर हो। इसी जरूरत को पूरा करने के लिए नारियल पानी और सब्जा सीड्स का संयोजन एक बेहद प्रभावी सुपरड्रिंक माना जा रहा है जो शरीर को तुरंत ठंडक और ऊर्जा प्रदान करता है। नारियल पानी अपने आप में एक प्राकृतिक एनर्जी ड्रिंक है जिसमें पोटैशियम मैग्नीशियम और सोडियम जैसे जरूरी मिनरल्स मौजूद होते हैं जो शरीर में इलेक्ट्रोलाइट बैलेंस बनाए रखने में मदद करते हैं। जब इसमें सब्जा सीड्स यानी तुलसी के बीज मिलाए जाते हैं तो इसका असर और भी बढ़ जाता है। सब्जा सीड्स पानी में फूलकर जेल जैसा रूप ले लेते हैं जिससे शरीर में पानी लंबे समय तक बना रहता है और व्यक्ति खुद को अधिक समय तक हाइड्रेटेड महसूस करता है। गर्मियों में अक्सर लोग पेट की समस्याओं जैसे गैस एसिडिटी और कब्ज से परेशान रहते हैं। ऐसे में यह ड्रिंक पाचन तंत्र के लिए भी बेहद लाभकारी माना जाता है। सब्जा सीड्स में मौजूद घुलनशील फाइबर आंतों की सफाई में मदद करता है जबकि नारियल पानी पेट की जलन को शांत करता है। दोनों का संयोजन पाचन को बेहतर बनाकर शरीर को हल्का और ऊर्जावान बनाए रखता है। थकान और कमजोरी भी गर्मियों में एक बड़ी समस्या होती है। नारियल पानी में प्राकृतिक शर्करा होती है जो तुरंत ऊर्जा प्रदान करती है जबकि सब्जा सीड्स धीरे धीरे ऊर्जा रिलीज करते हैं। इस वजह से यह ड्रिंक लंबे समय तक शरीर को एक्टिव रखता है और बार बार होने वाली थकान को कम करता है। वजन कम करने की कोशिश कर रहे लोगों के लिए भी यह मिश्रण बेहद उपयोगी माना जाता है। सब्जा सीड्स पेट में जाकर फूल जाते हैं जिससे पेट लंबे समय तक भरा हुआ महसूस होता है और अनावश्यक भूख कम लगती है। वहीं नारियल पानी लो कैलोरी होने के कारण मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाकर फैट बर्निंग प्रक्रिया में मदद करता है। इसके अलावा यह ड्रिंक त्वचा के लिए भी फायदेमंद है। नारियल पानी में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने में मदद करते हैं जिससे त्वचा साफ और चमकदार बनती है। सब्जा सीड्स के साथ नियमित सेवन करने से मुंहासों की समस्या कम हो सकती है और स्किन में प्राकृतिक निखार आता है। कुल मिलाकर यह प्राकृतिक सुपरड्रिंक गर्मियों में शरीर को ठंडा रखने डिहाइड्रेशन से बचाने और ऊर्जा बनाए रखने का एक आसान और प्रभावी उपाय है। महंगे एनर्जी ड्रिंक्स की तुलना में यह एक सस्ता और स्वास्थ्यवर्धक विकल्प साबित हो सकता है जिसे रोजमर्रा की दिनचर्या में शामिल किया जा सकता है।

एक बार फिर सड़कों पर राज करने को तैयार Bajaj Pulsar 180, 4 साल बाद नए अवतार में हुई लॉन्च, जानिए फीचर्स और कीमत

नई दिल्ली। भारतीय बाइक मार्केट में एक बार फिर हलचल मच गई है। Bajaj Auto ने अपनी पॉपुलर बाइक Pulsar 180 को करीब 4 साल बाद नए अवतार में लॉन्च कर दिया है। साल 2022 में बंद हुई यह बाइक अब 2026 में नए अपडेट्स और फीचर्स के साथ वापसी कर चुकी है। युवाओं के बीच हमेशा से फेमस रही यह बाइक अब और भी ज्यादा स्टाइलिश और मॉडर्न बन गई है। इसकी शुरुआती कीमत ₹1.22 लाख (एक्स-शोरूम) रखी गई है और फिलहाल इसे एक ही वेरिएंट में पेश किया गया है। डिजाइन में मिला क्लासिक के साथ नया टचनई Pulsar 180 का डिजाइन काफी हद तक पहले जैसा ही रखा गया है, ताकि इसकी पहचान बनी रहे। मस्क्यूलर फ्यूल टैंक, मजबूत और दमदार स्टांस, स्पोर्टी लुक इन सबके साथ कुछ छोटे लेकिन असरदार बदलाव भी किए गए हैं, जो इसे पहले से ज्यादा आकर्षक बनाते हैं। यह बाइक उन लोगों के लिए परफेक्ट है जो क्लासिक Pulsar स्टाइल के साथ थोड़ा नया लुक चाहते हैं। नए कलर और प्रीमियम लुकइस बार बाइक को खास ब्लैक कलर में लॉन्च किया गया है, जो इसे प्रीमियम फील देता है। कॉन्ट्रास्ट ग्राफिक्स कार्बन फाइबर जैसा फिनिश (फ्रंट मडगार्ड) ,ज्यादा स्पोर्टी अपील ये छोटे-छोटे अपडेट मिलकर बाइक के लुक को और ज्यादा मॉडर्न बना देते हैं। इंजन और परफॉर्मेंस, भरोसेमंद और दमदारनई Pulsar 180 में वही पुराना लेकिन भरोसेमंद इंजन दिया गया है 178.61cc इंजन 16.77 bhp पावर, 15 Nm टॉर्क यह इंजन शहर की सड़कों से लेकर हाईवे तक हर जगह शानदार परफॉर्मेंस देता है। डेली यूज के लिए भी यह बाइक काफी कंफर्टेबल और पावरफुल मानी जाती है। LED लाइट्स और नए फीचर्सइस बार सबसे बड़ा बदलाव लाइटिंग में किया गया है: LED हेडलाइट, LED इंडिकेटर LED डिस्प्ले पहले जहां हैलोजन लाइट मिलती थी, अब LED सेटअप से बेहतर रोशनी और विजिबिलिटी मिलती है। इससे रात में राइडिंग ज्यादा सुरक्षित और आसान हो जाती है। शुरुआती कीमत: ₹1.22 लाख (एक्स-शोरूम) वेरिएंट: फिलहाल एक ही लॉन्च: 2026 में नई अपडेट्स के साथ Bajaj Pulsar 180 की वापसी उन बाइक लवर्स के लिए बड़ी खुशखबरी है जो एक क्लासिक, दमदार और भरोसेमंद बाइक चाहते हैं। नए फीचर्स और मॉडर्न टच के साथ यह बाइक एक बार फिर भारतीय बाजार में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए तैयार है। अगर आप स्टाइल, परफॉर्मेंस और भरोसे का कॉम्बिनेशन चाहते हैं, तो यह बाइक आपके लिए एक अच्छा ऑप्शन साबित हो सकती है।

बांधवगढ़ में फिर टाइगर अटैक, महुआ बीनने गई महिला को बाघ ने बनाया शिकार

उमरिया। मध्यप्रदेश के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में एक बार फिर बाघ के हमले में महिला की मौत हो गई। पनपथा कोर क्षेत्र में हुई इस घटना के बाद आसपास के गांवों में डर का माहौल फैल गया है। महुआ बीनने गई महिला पर हमला जानकारी के मुताबिक, ग्राम झलवार निवासी कुसुम बाई गोड़ शुक्रवार को जंगल में महुआ बीनने गई थीं। इसी दौरान पनपथा कोर क्षेत्र के झिरिया जंगल में घात लगाए बैठे बाघ ने अचानक उन पर हमला कर दिया। बाघ महिला को पकड़कर झाड़ियों की ओर घसीट ले गया, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना जंगल के कक्ष क्रमांक आरएफ 460 के पास बी-2 कैंप क्षेत्र में हुई। दोपहर में ग्रामीणों ने घटना देखी और तुरंत पुलिस व वन विभाग को सूचना दी। मौके पर पहुंची टीम ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम कराया और आगे की कार्रवाई शुरू की। परिजनों को दी गई तत्काल सहायता वन विभाग के अधिकारियों ने मृतक महिला के परिजनों को सांत्वना देते हुए तत्काल 5 हजार रुपये की सहायता राशि दी है। शासन की ओर से निर्धारित 8 लाख रुपये की मुआवजा राशि भी नियमानुसार दी जाएगी। विशेषज्ञों का कहना है कि क्षेत्र में बाघों की बढ़ती गतिविधियों के चलते मानव-वन्यजीव संघर्ष के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। इससे ग्रामीणों में भय और असुरक्षा की भावना गहराती जा रही है।

भीषण गर्मी में राहत के तरीके, हीटवेव से बचने के लिए अपनाएं ये जरूरी टिप्स

नई दिल्ली । अप्रैल का महीना शुरू हो गया है ऐसे में धीरे-धीरे मौसम में बदलाव होगा और गर्मी शुरू हो जाएगी। गर्मी धीरे-धीरे इतनी तेज हो जाती है कि उसे सेहत पर काफी असर पड़ने लगता है। आगामी दिनों में जैसे-जैसे तापमान बढ़ेगा, हर उम्र वर्ग के लोगों के लिए कुछ शारीरिक चुनौतियां भी खड़ी होंगी। बढ़ती गर्मी से बचाव रखते हुए अच्छा स्वास्थ्य कैसे पाएं, खान-पान में क्या बदलाव करें और क्या सावधानियां जरूरी हैं। इन सभी बातों को जानने के लिए नीचे बताई गई जानकारी को जरूर पढ़ें। बच्चों के लिए रहे सावधानइस समय भले ही मौसम ठंडा हुआ है तापमान में गिरावट आई है लेकिन सेहत पर खतरा अभी भी है। बरसात से मौसम हल्का ठंडा हुआ है, लेकिन इससे सर्दी-जुकाम और बुखार का खतरा बढ़ जाता है। वहीं, आगामी दिनों में तापमान अधिक बढ़ेगा। इसलिए 12 वर्ष तक के बच्चों को धूप और तपिश के पिक टाइम में बचाना जरूरी रहता है। इस उम्र के बच्चों को सुबह 11 से शाम 5 बजे तक धूप से बचाए रखना जरूरी है” इसके साथ जब भी वह बाहर जाएं उन्हें टॉप और पानी की बोतल ये सब चीज देना बिल्कुल ना भूले। खान-पान का रखन होगा ध्यानखान-पान में भी कुछ बदलाव करना जरूरी है, जैसे की शुद्ध पेयजल (प्यूरीफाइड वॉटर) अधिक लें।साथ ही नींबू पानी और ओआरएस जरूर लें। इसके अलावा बच्चों की डाइट में फल (फ्रूट्स) की मात्रा बढ़ाना भी जरूरी है। इसके साथ ही आपको ज्यादा मसाले वाली चीज नहीं खानी चाहिए ज्यादा से ज्यादा पानी पीते रहना चाहिए पानी समय पर पीने से सेहतमंद रहेंगे। गर्भवती महिलाएं इन बातों का रखें ध्यानइस गर्मी से बचने के लिए गर्भवती महिलाएं अपने और गर्भ में पल रहे बच्चे के बेहतर स्वास्थ्य के लिए और हाइड्रेट रहने के लिए अधिक पानी पीएं। लस्सी और ओआरएस का सेवन अधिक करें।यदि मजबूरन धूप में निकलना पड़ रहा है तो ऐसे में सिर पर टोपी पहनें और सनग्लास का इस्तेमाल जरूर करें। साथ ही लू से अपना बचाव करें और कहीं खुले में कुछ देर रूकना जरूरी हो तो पेड़ की छांव का सहारा लें।

मध्यपूर्व में तनाव कम होने से भारतीय शेयर बाजार में तेजी, सेंसेक्स 918 अंक उछला

नई दिल्ली।मध्यपूर्व में तनाव कम होने के संकेतों के बीच शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त तेजी देखने को मिली। कारोबार के अंत में BSE Sensex 918.60 अंक यानी 1.20% उछलकर 77,550.25 पर बंद हुआ, जबकि Nifty 50 275.50 अंक यानी 1.10% की बढ़त के साथ 24,050.60 पर पहुंच गया। ऑटो और बैंकिंग शेयर बने बाजार के हीरोइस तेजी में सबसे बड़ा योगदान ऑटो और फाइनेंशियल सेक्टर का रहा। निफ्टी ऑटो: +2.85% (टॉप गेनर)निफ्टी रियल्टी: +2.08%निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज: +2.06%निफ्टी पीएसयू बैंक: +2.01%निफ्टी प्राइवेट बैंक: +1.98%इसके अलावा कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और कंजम्प्शन सेक्टर में भी अच्छी खरीदारी देखने को मिली। आईटी सेक्टर में रही कमजोरीजहां अधिकांश सेक्टर्स में तेजी रही, वहीं आईटी शेयरों पर दबाव बना रहा। निफ्टी आईटी 1.91% की गिरावट के साथ बंद हुआ। Infosys, TCS और HCLTech जैसे दिग्गज शेयरों में कमजोरी देखने को मिली। मिडकैप और स्मॉलकैप में भी शानदार तेजीबाजार की तेजी सिर्फ लार्जकैप तक सीमित नहीं रही, बल्कि व्यापक बाजार में भी खरीदारी का माहौल दिखा: निफ्टी मिडकैप 100: +1.52% (57,843.95)निफ्टी स्मॉलकैप 100: +1.65% (16,840.10)सेंसेक्स के टॉप गेनर्स इस तेजी में Asian Paints, ICICI Bank, Mahindra & Mahindra, State Bank of India, Axis Bank, HDFC Bank और Larsen & Toubro जैसे शेयरों में मजबूत खरीदारी रही। वहीं Sun Pharma, Infosys और Tech Mahindra गिरावट में रहे। एक्सपर्ट की राय: आगे क्या?Sudeep Shah (SBI सिक्योरिटीज) के अनुसार, बाजार ने गैप-अप ओपनिंग के बाद स्थिर रेंज में कारोबार किया और 24,000 के ऊपर मजबूती से बंद हुआ। रेजिस्टेंस: 24,200 – 24,250ब्रेकआउट पर लक्ष्य: 24,400 से 24,600सपोर्ट: 23,850 – 23,800 मध्यपूर्व में तनाव कम होने से निवेशकों का भरोसा लौटा है, जिससे बाजार में मजबूत तेजी देखने को मिली। अगर वैश्विक संकेत सकारात्मक बने रहते हैं, तो आने वाले समय में बाजार और ऊपर जा सकता है।

यूपीआई के 10 साल पूरे: लेनदेन की वॉल्यूम 12,000 गुना बढ़ी; वैल्यू में 4,000 गुना से अधिक की बढ़ोतरी

नई दिल्ली। भारत के डिजिटल पेमेंट सिस्टम UPI (Unified Payments Interface) ने 11 अप्रैल को अपने 10 साल पूरे कर लिए हैं। इस एक दशक में यूपीआई ने देश में लेनदेन के तरीके को पूरी तरह बदल दिया है। आंकड़ों के मुताबिक, इसकी लेनदेन वॉल्यूम में 12,000 गुना से ज्यादा और वैल्यू में 4,000 गुना से अधिक की बढ़ोतरी हुई है। 2017 से 2026 तक का सफर: जबरदस्त ग्रोथएनालिटिक्स फर्म Tracxn के अनुसार, वित्त वर्ष 2017: 1.786 करोड़ ट्रांजैक्शन, 6,952 करोड़ रुपए वैल्यूवित्त वर्ष 2026: 218.98 अरब ट्रांजैक्शन, 285 लाख करोड़ रुपए वैल्यू यह आंकड़े दिखाते हैं कि यूपीआई ने बेहद कम समय में अभूतपूर्व विस्तार किया है। महामारी के दौरान मिली सबसे बड़ी रफ्तार शुरुआती वर्षों में धीमी बढ़त के बाद कोविड-19 महामारी के दौरान यूपीआई ने तेजी से रफ्तार पकड़ी: FY21: 22.33 अरब ट्रांजैक्शनFY22: 45.97 अरबFY23: 83.75 अरब इसके बाद भी ग्रोथ जारी रही और FY24 में 130.13 अरब और FY25 में 185.87 अरब लेनदेन दर्ज किए गए। मार्च 2026 में बना नया रिकॉर्डNational Payments Corporation of India (NPCI) के अनुसार, मार्च 2026 में यूपीआई ने अब तक का सबसे बड़ा मासिक रिकॉर्ड बनाया: 22.64 अरब ट्रांजैक्शन (फरवरी: 20.39 अरब)सालाना आधार पर 24% की बढ़त इसने जनवरी 2026 के 21.70 अरब के पिछले रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ दिया। डिजिटल इकोसिस्टम का तेजी से विस्तारयूपीआई की सफलता का एक बड़ा कारण इसका तेजी से बढ़ता इंफ्रास्ट्रक्चर भी है: यूपीआई QR कोड: 73.13 करोड़ (15% वृद्धि)पॉइंट-ऑफ-सेल टर्मिनल: 1.148 करोड़ (15% वृद्धि) इससे छोटे व्यापारियों से लेकर बड़े कारोबारियों तक डिजिटल भुगतान को बढ़ावा मिला है। क्यों खास है यूपीआई?UPI (Unified Payments Interface) ने भारत में: कैशलेस इकोनॉमी को बढ़ावा दियाछोटे व्यापारियों को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ाआम लोगों के लिए आसान और तेज पेमेंट सिस्टम उपलब्ध करायानिष्कर्ष 10 साल में यूपीआई ने भारत को डिजिटल पेमेंट के क्षेत्र में वैश्विक लीडर बना दिया है। इसकी तेजी से बढ़ती पहुंच और उपयोग भविष्य में भी अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की क्षमता रखती है।

NITIN GADKARI STATEMENT : इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में सुधार पर जोर, गडकरी बोले- क्लीयरेंस में देरी से बढ़ती है लागत

  NITIN GADKARI STATEMENT : नई दिल्ली।भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 3 अप्रैल को समाप्त हुए सप्ताह में 9.063 अरब डॉलर बढ़कर 697.121 अरब डॉलर पर पहुंच गया है। Reserve Bank of India (आरबीआई) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों में यह जानकारी सामने आई है। इससे पहले के सप्ताह में भंडार में 10.288 अरब डॉलर की गिरावट दर्ज की गई थी। गोल्ड रिजर्व में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी विदेशी मुद्रा भंडार में इस बार सबसे बड़ा योगदान गोल्ड रिजर्व का रहा। गोल्ड रिजर्व: 7.221 अरब डॉलर बढ़कर 120.742 अरब डॉलर फॉरेन करेंसी एसेट्स (FCA): 1.784 अरब डॉलर बढ़कर 552.856 अरब डॉलर एफसीए में डॉलर के अलावा येन, यूरो और पाउंड जैसी प्रमुख वैश्विक मुद्राएं शामिल होती हैं, जिनकी वैल्यू डॉलर में आंकी जाती है। एसडीआर में हल्की बढ़त, आईएमएफ पोजीशन स्थिर Kaal Bhairav Puja : कालाष्टमी 2026 पर करें ये अचूक उपाय बच्चों को नजर दोष से मिलेगी तुरंत सुरक्षा आरबीआई के अनुसार, एसडीआर (Special Drawing Rights): 5.8 करोड़ डॉलर बढ़कर 18.707 अरब डॉलर आईएमएफ में भारत की रिजर्व पोजीशन: 4.816 अरब डॉलर (कोई बदलाव नहीं) क्यों अहम होता है विदेशी मुद्रा भंडार? किसी भी देश के लिए विदेशी मुद्रा भंडार उसकी आर्थिक ताकत का महत्वपूर्ण संकेतक होता है। यह मुद्रा विनिमय दर को स्थिर रखने में मदद करता है वैश्विक व्यापार को सुगम बनाता है आर्थिक संकट के समय सुरक्षा कवच का काम करता है जब रुपये पर दबाव बढ़ता है, तो केंद्रीय बैंक इसी भंडार का इस्तेमाल कर डॉलर की बिक्री कर मुद्रा को स्थिर करता है। मजबूत अर्थव्यवस्था का संकेत विशेषज्ञों के अनुसार, विदेशी मुद्रा भंडार में बढ़ोतरी इस बात का संकेत है कि देश में डॉलर की आवक मजबूत बनी हुई है। इससे भारत की वैश्विक व्यापार क्षमता बढ़ती है और निवेशकों का भरोसा भी मजबूत होता है। विदेशी मुद्रा भंडार में आई यह बढ़त भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत है, जो न केवल वित्तीय स्थिरता को मजबूत करेगी, बल्कि वैश्विक बाजार में भारत की स्थिति को भी और सुदृढ़ बनाएगी।

Kaal Bhairav Puja : कालाष्टमी 2026 पर करें ये अचूक उपाय बच्चों को नजर दोष से मिलेगी तुरंत सुरक्षा

   Kaal Bhairav Puja : नई दिल्ली । भारतीय परंपरा में बच्चों को नजर दोष से बचाने के लिए कई धार्मिक और ज्योतिषीय उपाय बताए गए हैं और इनमें कालाष्टमी का दिन विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। यह दिन भगवान काल भैरव को समर्पित होता है जिन्हें संकटों का नाश करने वाला और समय का स्वामी माना जाता है। मान्यता है कि कालाष्टमी के दिन किए गए उपाय नकारात्मक शक्तियों को दूर करते हैं और बच्चों को बुरी नजर से सुरक्षित रखते हैं। वर्ष 2026 में 10 अप्रैल को कालाष्टमी का व्रत मनाया जा रहा है और इस दिन किए गए सरल उपाय बेहद प्रभावी माने जाते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कालाष्टमी हर महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को आती है और इस दिन भगवान काल भैरव की पूजा विशेष फलदायी होती है। काशी में काल भैरव को कोतवाल कहा जाता है और उन्हें सुरक्षा और न्याय का देवता माना जाता है। इस दिन उनकी पूजा करने से भय संकट और नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति मिलती है। ज्योतिष शास्त्र में भी इस दिन को तंत्र मंत्र और रक्षा उपायों के लिए अत्यंत शक्तिशाली माना गया है। यदि आपके घर में छोटे बच्चे हैं और आपको लगता है कि उन्हें बार बार नजर लग जाती है तो कालाष्टमी के दिन कुछ आसान उपाय जरूर करने चाहिए। सबसे पहले घर के मुख्य द्वार पर सरसों के तेल का चौमुखी दीपक जलाएं। दीपक जलाने के बाद उसकी लौ से काजल तैयार करें और इस काजल को बच्चे के माथे या कान के पीछे हल्का सा लगा दें। ऐसा करने से नजर दोष से बचाव होता है और बच्चे के चारों ओर एक सकारात्मक ऊर्जा का घेरा बनता है। इसके अलावा आप मंदिर जाकर भगवान काल भैरव के चरणों में काला धागा अर्पित कर सकते हैं। इस धागे पर थोड़ा सा सिंदूर लगाकर इसे बच्चे के हाथ या गले में बांध दें। मान्यता है कि यह काला धागा एक सुरक्षा कवच की तरह काम करता है और बुरी नजर के प्रभाव को दूर करता है। इस दौरान “ॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं” मंत्र का जाप करना भी अत्यंत लाभकारी माना गया है। कालाष्टमी के दिन रात 9 बजे से 11 बजे के बीच पूजा करना सबसे शुभ माना जाता है। इस समय की गई पूजा जल्दी फल देती है और भगवान काल भैरव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। भक्त इस दौरान व्रत रखते हैं दीप जलाते हैं और भगवान से अपने परिवार विशेषकर बच्चों की रक्षा की प्रार्थना करते हैं। यह दिन केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है बल्कि यह विश्वास और आस्था का प्रतीक भी है। ऐसे उपाय लोगों को मानसिक शांति और सुरक्षा का एहसास देते हैं। हालांकि इन उपायों के साथ साथ बच्चों की देखभाल स्वच्छता और स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी उतना ही जरूरी है। कालाष्टमी पर किए गए ये सरल उपाय न केवल परंपरा का हिस्सा हैं बल्कि पीढ़ियों से चले आ रहे विश्वास का प्रतीक भी हैं जो आज भी लोगों के जीवन में उतने ही प्रभावी माने जाते हैं।