बारात लेकर पहुंचा दूल्हा, तभी आया रेप केस का फोन-उज्जैन में सनसनी!

नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के उज्जैन और रतलाम के बीच एक शादी समारोह उस वक्त अचानक थम गया, जब दूल्हे पर नाबालिग से दुष्कर्म का मामला सामने आया। बारात दरवाजे तक पहुंच चुकी थी और दूल्हा मंडप में एंट्री लेने ही वाला था, लेकिन पुलिस के एक फोन कॉल ने पूरे माहौल को बदल दिया। बारात के बीच पुलिस का फोन, मच गया हड़कंपजानकारी के मुताबिक, उज्जैन के पास बड़नगर की शिक्षक कॉलोनी निवासी अभिषेक सेन की शादी रतलाम की युवती से तय थी। शादी के कार्यक्रम दो दिन से चल रहे थे और बुधवार रात करीब 8 बजे बारात धूमधाम से निकली। लेकिन जैसे ही बारात दुल्हन के घर पहुंचने वाली थी, पुलिस ने दुल्हन पक्ष को फोन कर बताया कि दूल्हे के खिलाफ गंभीर आपराधिक मामला दर्ज होने जा रहा है। यह सुनते ही शादी वाले घर में अफरा-तफरी मच गई और तुरंत बातचीत के बाद शादी रोक दी गई। नाबालिग ने दर्ज कराया केस, पॉक्सो एक्ट में कार्रवाईपुलिस ने 15 वर्षीय नाबालिग की शिकायत पर आरोपी अभिषेक सेन के खिलाफ पॉक्सो एक्ट और दुष्कर्म की धाराओं में मामला दर्ज किया है। केस दर्ज होते ही दूल्हा फरार हो गया। पुलिस उसकी तलाश में जुटी है और जल्द गिरफ्तारी का दावा कर रही है। चार महीने पहले हुई वारदात, शादी वाले दिन खुला सचपीड़िता के अनुसार, यह घटना 5 जनवरी की है, जब आरोपी उसके घर पहुंचा और उसे डरा-धमकाकर दुष्कर्म किया। उसने किसी को बताने पर धमकी भी दी। लंबे समय तक चुप रहने के बाद, जब आरोपी की शादी तय हुई तो पीड़िता मानसिक रूप से टूट गई। गर्भवती होने का खुलासा, आत्महत्या की कोशिशशादी से तीन दिन पहले, 6 अप्रैल को नाबालिग ने एसिड पीकर आत्महत्या की कोशिश की। इलाज के दौरान 8 अप्रैल को डॉक्टरों को उसके गर्भवती होने का पता चला। इसके बाद उसने परिजनों को पूरी घटना बताई और मामला पुलिस तक पहुंचा। स्थानीय मदद से रुकी शादी, पुलिस ने की तत्पर कार्रवाईथाना प्रभारी अशोक पाटीदार के अनुसार, पीड़िता और आरोपी एक ही कॉलोनी में रहते थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तुरंत दुल्हन पक्ष से संपर्क किया। एक स्थानीय पार्षद की मदद से समय रहते शादी रुकवाई गई, जिससे एक बड़ा सामाजिक और कानूनी विवाद टल गया। फरार आरोपी की तलाश जारीघटना के बाद आरोपी रतलाम पहुंचने से पहले ही फरार हो गया। पुलिस लगातार उसकी तलाश कर रही है और जल्द गिरफ्तारी की बात कही जा रही है।
कांग्रेस में वंदे मातरम विवाद ने पकड़ा राजनीतिक तूफ़ान, केके मिश्रा ने दी खुली चेतावनी

इंदौर । इंदौर में वंदे मातरम को लेकर शुरू हुआ विवाद अब कांग्रेस के अंदर ही बड़ा राजनीतिक तूफ़ान बन गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता केके मिश्रा ने इस मामले पर अपनी पार्टी के भीतर खुले तौर पर विरोध दर्ज कराया है। उन्होंने अपने ट्वीट्स में न सिर्फ भाजपा पर हमला बोला बल्कि कांग्रेस की पार्षद रूबीना खान को भी आड़े हाथों लिया। मिश्रा ने बेहद सख्त शब्दों में कहा कि जो लोग राष्ट्रधर्म नहीं निभा सकते और वंदे मातरम नहीं बोल सकते वे भाड़ में जाएं और पाकिस्तान जाकर बसें। उनके इस बयान ने राजनीतिक माहौल को और गर्मा दिया है। रूबीना खान के बयान को मिश्रा ने राजनीतिक ब्लैकमेलिंग करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि पूरा मामला भारतीय जनता पार्टी के साथ मिलकर खेला गया है। मिश्रा ने यह भी कहा कि रूबीना खान के बयान से उन मुस्लिम स्वतंत्रता सेनानियों और सैनिकों का अपमान हुआ है जिन्होंने अपने प्राणों की आहुति देश के लिए दी। उनके अनुसार यह केवल एक व्यक्तिगत विवाद नहीं बल्कि राष्ट्रभक्ति के मूल्यों को चुनौती देने वाला मामला है। केके मिश्रा ने भाजपा पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि भाजपा को इस मुद्दे पर राजनीति करने का कोई अधिकार नहीं है क्योंकि उसने अपने ही मंत्री विजय शाह के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। मिश्रा ने भाजपा पर राष्ट्रधर्म के मुद्दे पर दोहरा चरित्र अपनाने का आरोप लगाया। उनके अनुसार केवल राजनीतिक लाभ के लिए मुद्दों को उछालना और अपने ही लोगों की अनदेखी करना लोकतंत्र और राष्ट्रीय भावना के लिए खतरनाक है। मिश्रा ने कांग्रेस नेतृत्व को भी खुली चुनौती दी। इंदौर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि सिर्फ नोटिस देने से काम नहीं चलेगा। उनके अनुसार रूबीना खान को पार्टी से बर्खास्त किया जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा जहां जाना चाहती हैं चली जाएं। मिश्रा ने पार्टी को चेतावनी दी कि ऐसे संदिग्ध निष्ठा वाले लोगों को शामिल करने से पहले गंभीरता से विचार करना चाहिए। उनके अनुसार यह केवल पार्टी का मामला नहीं बल्कि देश के प्रति प्रतिबद्धता का भी सवाल है। इस पूरे विवाद ने कांग्रेस के अंदरूनी मतभेद को खुलकर सामने ला दिया है। एक तरफ भाजपा इस मुद्दे को राजनीतिक लाभ उठाने के लिए भुनाने की कोशिश कर रही है तो वहीं कांग्रेस के भीतर नेताओं के बीच टकराव और तेज होता दिख रहा है। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि इस मामले में कांग्रेस की छवि और संगठनात्मक क्षमता दोनों चुनौतीपूर्ण स्थिति में हैं। इंदौर के यह विवाद केवल स्थानीय स्तर पर सीमित नहीं है बल्कि राष्ट्रीय राजनीति पर भी असर डाल सकता है। केके मिश्रा का यह कड़ा रुख और पार्टी नेतृत्व को खुली चुनौती देना इस बात का संकेत है कि कांग्रेस को अपने भीतर अनुशासन और संगठनात्मक मजबूती बनाए रखने की आवश्यकता है। इस विवाद का राजनीतिक भविष्य और असर आने वाले दिनों में साफ होगा लेकिन फिलहाल यह वंदे मातरम विवाद कांग्रेस के लिए सबसे बड़े अंदरूनी तूफानों में से एक बन चुका है।
19वीं सदी की वास्तविक घटनाओं पर आधारित ‘राणाबाली’ की भव्य प्रस्तुति…

नई दिल्ली:साल की सबसे प्रतीक्षित फिल्मों में से एक, ‘राणाबाली’, 19वीं सदी की वास्तविक घटनाओं पर आधारित एक पैन-इंडिया पीरियड ड्रामा के रूप में तैयार हो रही है। माइथ्री मूवी मेकर्स के बैनर तले बनी इस फिल्म का निर्देशन राहुल सांकृत्यायन कर रहे हैं, जबकि प्रोडक्शन टी-सीरीज के साथ य. रविशंकर और नवीन यरनेनी ने मिलकर किया है। फिल्म में विजय देवरकोंडा और रश्मिका मंदाना मुख्य भूमिकाओं में हैं, और हॉलीवुड स्टार अर्नोल्ड वोस्लू भी महत्वपूर्ण किरदार निभा रहे हैं। राहुल सांकृत्यायन ने बताया कि फिल्म की कहानी पूरी तरह से ऐतिहासिक सच्चाइयों और भूले-बिसरे रायलसीमा की घटनाओं पर आधारित है। इसके लिए उन्होंने कई इतिहासकारों, कवियों और पुराने अभिलेखागारों से गहन शोध किया। उनका कहना है कि इतिहास केवल किताबों में ही नहीं, बल्कि गांवों, रीति-रिवाजों और अनकही कहानियों में भी मौजूद है। फिल्म के क्लाइमेक्स के कुछ दृश्यों को भी गांवों में लंबे समय तक भूले हुए रीति-रिवाजों और स्थानीय अनुभवों से प्रेरित किया गया है। फिल्म में विजय देवरकोंडा एक निडर विद्रोही के रूप में नजर आएंगे, जो उस काल और क्षेत्र की कठोर सच्चाइयों में जी रहे लोगों की आक्रामकता और दबदबे का प्रतीक हैं। इस किरदार की तैयारी के लिए उन्होंने रायलसीमा की स्थानीय बोली सीखी और घुड़सवारी की ट्रेनिंग भी ली। फिल्म के लिए महाराष्ट्र से विशेष रूप से घोड़े मंगवाए गए और उन्हें भी प्रशिक्षित किया गया। राहुल सांकृत्यायन ने बताया कि घोड़ा फिल्म में केवल एक प्रॉप नहीं बल्कि कहानी का अहम हिस्सा है। रश्मिका मंदाना फिल्म में फीमेल लीड हैं और विजय देवरकोंडा के साथ उनकी जोड़ी पहले ही दर्शकों के बीच उत्साह पैदा कर चुकी है। अर्नोल्ड वोस्लू ने फिल्म में ब्रिटिश अधिकारी सर थियोडोर हेक्टर का किरदार निभाया है। दक्षिण अफ्रीका से आने वाले वोस्लू ने फिल्म की भावनाओं और औपनिवेशिक बैकड्रॉप के लिए भाषाई ट्रेनिंग ली और स्क्रिप्ट के साथ गहराई से जुड़ गए। राहुल सांकृत्यायन ने कहा कि आज के दर्शक इतिहास और बड़े पैमाने की काल्पनिक महागाथाओं की ओर अधिक आकर्षित हो रहे हैं। इसलिए फिल्म में भव्य दृश्य, ऐतिहासिक सच्चाइयों और व्यक्तिगत संघर्षों को बड़े पैमाने पर पेश किया गया है। उन्होंने जोर दिया कि यह फिल्म सिर्फ मनोरंजन नहीं बल्कि भारतीय इतिहास और प्रतिरोध, परंपरा और औपनिवेशिक चुनौतियों की कहानियों को जीवंत करने का प्रयास है। ‘राणाबाली’ 11 सितंबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है और इसे पैन-इंडिया स्तर पर बड़े पर्दे पर पेश किया जाएगा। फिल्म की स्टार कास्ट और ऐतिहासिक कथानक इसे एक बड़ा अनुभवात्मक और दर्शकप्रिय सिनेमाई अनुभव बनाने की दिशा में अग्रसर करता है।
लिलिमा मिंज: साधारण आदिवासी परिवार से निकलकर ओलंपिक तक का शानदार सफर!

नई दिल्ली। लिलिमा मिंज भारतीय महिला हॉकी टीम के उन खिलाड़ियों में शामिल हैं, जिनमें शामिल हैं, सीमित सहयोगी के बावजूद अपनी मेहनत और प्रतिभा से देश का नाम रोशन किया। 10 अप्रैल 1994 को ओडिशा के सुंदरगढ़ जिले में एक सामान्य जनजातीय परिवार में जन्मे लिलिमा ने बचपन से ही बचपन का सामना किया था, लेकिन उनका सपना बड़ा था- भारत के लिए हॉकी खेलना। हॉकी की धरती से मिलापओडिशा को भारतीय हॉकी का गढ़ माना जाता है, जहां से कई दिग्गज खिलाड़ी निकले हैं। दिलीप टिर्की जैसे महान खिलाड़ी से प्रेरित होकर लीलिमा ने भी अपना करियर बनाने का फैसला लिया। गाँव और स्थानीय मैदानों में प्रतिस्पर्धा करते हुए उन्होंने अपने खेल को नया और धीरे-धीरे पहचान बनाना शुरू किया। जूनियर टीम से सीनियर टीम तक का सफरलिलिमा जूनियर की मेहनत रंग लाई और 2011 में उन्हें भारतीय टीम में जगह मिली। उसी वर्ष बैंकॉक में आयोजित अंडर-18 एशिया कप में उन्होंने टीम के साथ कांस्य पदक जीता। प्रदर्शन के दम पर उन्हें जल्द ही सीनियर टीम में मौका मिला और शानदार प्रदर्शन से उनके अंतरराष्ट्रीय बल्लेबाजों की असली शुरुआत हुई। टीम इंडिया की शानदार मिडफील्डर2011 से 2022 तक अपने करियर में लिलिमा ने भारतीय टीम के लिए 150 से ज्यादा मैच खेले। मिडफील्डर पर विशेष रूप से वह अपने तेज गेंदबाज, स्ट्राइकर पासिंग और डिफेंस डिफेंस को तोड़ने की क्षमता के लिए जेन जाइस्ट करता है। मैदान पर उनकी खेल टीम के लिए बैलेंस और प्लॉट का प्रतीक बना हुआ है। ओल और एशियाई खेलों में चमक प्रदर्शनलिलिमा मिंज ने कई खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व किया। वह 2014 एशियाई खेलों में कांस्य पदक वाली टीम का हिस्सा बने। इसके अलावा 2016 के रियो ओलंपिक 2016 के लिए क्वालीफाई करने वाली भारतीय टीम में भी अपना अहम योगदान दे रही हैं। 2018 एशियन गेम्स में उन्होंने टीम के साथ सिल्वर मेडल जीता। कॉमनवेल्थ गेम्स, हॉकी वर्ल्ड लीग और एशिया कप जैसे बड़े मंचों पर भी उन्होंने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। भारतीय महिला हॉकी को नई पहचानने वाली पीढ़ीलिलिमा उस पीढ़ी का हिस्सा है, जिसने भारतीय महिला हॉकी को नई पहचान दी है। उनके दौर में टीम ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत टीम के रूप में पहचान बनाई। कम उम्र में संन्यास ले लिया, लेकिन प्रेरणा बनी रहीजनवरी 2022 में, मैक्सिम 27 साल की उम्र में लिलिमा मिंज ने अंतरराष्ट्रीय हॉकी से संन्यास ले लिया। हालाँकि उनकी यात्रा छोटी रही, लेकिन उनकी उपलब्धियाँ और संघर्ष आने वाली यात्रा के लिए प्रेरणा बन गए हैं।
जेसीबी का पंजा, फूटी पीएनजी लाइन, मुरैना में मची अफरातफरी

मुरैना । मुरैना में नेहरू पार्क के पास एक सप्ताह से फूटी पानी की पाइपलाइन को ठीक करने के लिए नगर निगम की जेसीबी मशीन ने खोदाई शुरू की थी तभी हादसा हुआ। पानी की लाइन के ऊपर से गुजर रही पीएनजी घरेलू गैस लाइन जेसीबी के पंजे से कट गई। गैस लाइन कटते ही आग की भयानक लपटें उठीं और 20 मीटर तक गुबार फैल गया। पास में नाश्ते की दुकान में जल रही भट्टी से आग और भड़क गई। आग इतनी तेजी से फैली कि दुकान के बाहर का छप्पर जलकर राख हो गया। कन्हैया मिष्ठान की दुकान के संचालक विमल गुप्ता और उनके बेटे पावश गुप्ता झुलस गए। आग की लपटें पास की मोटरवाइडिंग की दुकान तक पहुंचीं और अख्तर खान का पूरा चेहरा और बाल झुलस गए। सूचना मिलते ही पीएनजी लाइन के कर्मचारी और नगर निगम की फायर ब्रिगेड मौके पर पहुंचे। आग को तुरंत काबू किया गया। पीएनजी के कर्मचारियों ने बताया कि पाइपलाइन में फिलहाल सप्लाई बंद थी और केवल टेस्टिंग के लिए गैस रखी गई थी। अगर सप्लाई चालू होती तो बड़ा हादसा हो सकता था। यह घटना मुरैना में बिछाई गई पीएनजी लाइन की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। नगर निगम और पीएनजी विभाग के कर्मचारी तुरंत फूटी गैस और पानी की लाइन को ठीक करने में लग गए। पानी की पाइपलाइन निकालने के लिए सड़क पर खुदाई की गई और नेहरू पार्क के सामने एमएस रोड का एक साइड बंद कर दिया गया। बैरिकेड लगने के कारण हनुमान चौराहा की तरफ जाने वाले वाहन शिक्षा नगर और जीवाजीगंज की सड़कों से मोड़ दिए गए। इसके चलते एमएस रोड पर लगभग एक किलोमीटर लंबा जाम लग गया। वाहनों की भारी भीड़ के कारण मिल एरिया रोड, गर्ल्स रोड और शिक्षा नगर रोड पर भी जाम बढ़ गया। हादसे ने यह स्पष्ट कर दिया कि पाइपलाइन सुरक्षा के मानक पर्याप्त नहीं हैं। प्रशासन और पीएनजी विभाग की सतर्कता ही भविष्य में ऐसे बड़े हादसों को रोक सकती है।
आखिर कब तक बचाव कर पाएंगी ममता दीदी ?

– मृत्युंजय दीक्षित वर्ष 2026 के पश्चिम बंगाल विधनासभा चुनाव घोषित हो चुके हैं। जैसे -जैसे चुनाव नजदीक आ रहा है वैसे वैसे राज्य की राजनीति का पारा चढ़ रहा है। बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी लगातार चौथी बार मुख्यमंत्री बनने के लिए अपने प्रचार को आक्रामक बना चुकी हैं। उनके लिए इस बार राह उतनी आसान नहीं है। भारतीय जनता पार्टी भी इस बार हर हाल में बंगाल में अपनी सरकार बनाने को संकल्पबद्ध है। बिहार विधानसभा चुनाव परिणामों के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक सभा में कहा था कि गंगा नदी बिहार से ही बंगाल में जाती है और उसी दिन से बंगाल मे राजनीतिक तपिश का अनुभव होने लगा था। बंगाल में ममता दीदी के चौथी बार मुख्यमंत्री बनने की राह बहुत आसान नहीं है क्योकि कांग्रेस और वामपंथी दल भी पूरी ताकत से ममता दीदी को हराने के लिए काम कर रहे हैं। उनकी अपनी ही पार्टी के निष्कासित विधायक हुमायूं कबीर ने मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद के नाम पर मस्जिद की नींव रखने और फिर नयी पार्टी बनाकर विधानसभा चुनाव लड़ने का ऐलान कर राजनैतिक ध्रुवीकरण की समस्या पैदा कर दी है। मुर्शिदाबाद में हुमायूं कबीर के कदमों का ममता दीदी की सरकार ने कोई प्रतिवाद नहीं किया कि कहीं उनके मुस्लिम मतदाता नाराज न हो जाएं। बंगाल की कानून व्यवस्था भी ममता बनर्जी के लिए चौथी बार मुख्यमंत्री बनने के लिए समस्या पैदा कर सकती है। संदेशखाली में महिलाओं के साथ घटित वीभत्स घटना के आरोपी को बचाने से लेकर आर. जी कर में महिला डाक्टर के साथ बलात्कार और हत्या की भयंकर घटना में शामिल तृणमूल समर्थकों को बचाने के प्रयास चुनाव प्रचार के दौरान जमकर उछाले जायेंगे। इसके अलावा बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनकी सरकार अनेक घोटालों में बुरी तरह से फंसी हुई है और उन सभी घोटालो की जांच रही है। चुनाव आयोग की तरफ से मतदाता सूची के शुद्धीकरण के गहन अभियान को ममता बनर्जी ने जिस तरह बाधित करने का प्रयास किया उससे उनकी अपनी ही छवि ख़राब हुई है। मतदाता शुद्धीकरण अभियान के दौरान ममता बनर्जी व उनकी पार्टी ने पूरा दम लगा दिया कि किसी प्रकार इस कार्य को बाधित किया जाए या रोक दिया जाए। ममता की ओर से एसआईआर को लेकर भ्रम पैदा करने के पूरे प्रयास किए गए जिसमें उनकी ओर से पहले कहा गया कि वह एसआईआर फार्म नहीं भरेंगी और फिर उन्होंने भर भी दिया। आई पैक घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय की छापेमारी के दौरान ममता जी जिस तरह पुलिस लेकर पहुँच गयीं वह हास्यास्पद था लेकिन अब उनके लिए अत्यंत गंभीर समस्या बनने जा रहा है। अब आई पैक का प्रकरण हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। ममता दीदी ने कहा है कि बीजेपी ईडी के सहारे उनकी पार्टी की रणनीति चुराना चाहती है। आई- पैक प्रकरण को लेकर वह अत्यंत आक्रामक मुद्रा हैं। आई- पैक प्रकारण में ग्रीन फाइल को लेकर प्रश्न किया जा रहा है कि आखिर उन ग्रीन फाईल में ऐसा क्या था जिसे पाने के लिए ममता दीदी ने राज्य पुलिस की पूरी ताकत लगा दी। अब ईडी उन फाईल्स को तत्काल पाने के लिए हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक पहुँच गई है। अदालत में दोनों ही पक्षों ने अपनी-अपनी याचिकाएं लगा दी है। आई -पैक प्रकरण में ईडी की छापेमारी की खबर मीडिया में आग की तरह फैली और उसके बाद से ही कोलकाता से लेकर नई दिल्ली तक राजनीतिक हलचल तीव्र हो गई। टीवी चैनलों पर संविधान की किताब हाथ में लेकर घूमने वाले आ गए और कहा जाने लगा कि चुनाव से दो -तीन महीने पहले ही यह छापेमारी क्यों शुरू हो जाती है ? जबकि वास्तविकता यह है कि यह जांच काफी समय से चल रही है इस घोटाले की जांच रुकवाने के लिए तृणमूल नेता अभिषेक बनर्जी ने एक याचिका दायर की थी जो खारिज हो चुकी है। ईडी का यह छापा तृणमूल कांग्रेस आईटी सेल के हेड प्रतीक जैन के घर और कार्यालय पर पड़ा था और माना जा रहा है कि उनके रिश्ते चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर से भी हैं बिहार में अपनी सरकार बनने का सपना देखने वाले प्रशांत किशोर बंगाल में ममता दीदी के प्रमुख रणनीतिकारों में से एक हैं। यही कारण है कि जब ईडी का छापा पड़ा और ममता दीदी की पुलिस ने ईडी के कब्जे से ग्रीन फाइल अपने कब्जे में ली तभी से यह आरोप लगाया जाने लगा कि आखिर ममता दीदी की दाल में कुछ तो काला है । आखिर क्यों उन्हें ग्रीन फाइलों से इतना लगाव है? पहले ममता जी धमकी देते हुए कह रही थीं कि अगर वह बीजेपी के कार्यालाय में घुस गयीं तो क्या हो जाएगा और अब कह रही हैं कि जब बीजेपी को पता चला कि अबकी बार बीजेपी को पहले की तुलना में भी कम सीटें आ रही हैं तब उन्होंने हमारी रणनीति चुराने का प्रयास किया । जबकि प्रवर्तन निदेशालय ने अब सरकारी काम में बाधा डालने तथा कोयला घोटाले में ममता दीदी व तृणमूल सरकार को आरोपी बनाने का फैसला किया है। ममता दीदी के सामने अब वैसी गंभीर चुनौती है जैसी दिल्ली के मुख्यंमत्री अरविंद केजरीवाल और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के समक्ष आ गई थी। अगर ममता दीदी को कोर्ट से राहत नहीं मिलती या वे ग्रीन फाइल्स को लेकर जांच एजेंसियों के साथ टकराव का रास्ता अपनाती हैं तो केंद्र सरकार पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन लागू करने पर मजबूर हो सकती है। बंगाल में लंबे समय से कई अवसरों पर राष्ट्रपति शासन लागू करने की मांग भाजपा व अन्य संगठनों की ओर से लगातार की जा रही है किंतु अभी तक केंद्र की राजग सरकार ने ऐसा कोई कदम नहीं उठाया है जबकि राज्य में चुनावों के समय तृणमूल कांग्रेस के संगठित अपराधियों द्वारा चुनावी हिंसा का दौर प्रांरभ हो जाता है जिसके शिकार भाजपा व हिंदू संगठनो के कार्यकर्ता होते हैं। अभी आई -पैक प्रकरण के दौरान मची हलचल के बीच भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी की कार पर हमला बोला गया और वह आरोपियों पर कार्रवाई करने की मांग को लेकर धरने पर बैठ गए। ऐसा नहीं है कि ममता दीदी
राहुल की बल्लेबाजी नहीं, फैसलों पर उठे सवाल-रायुडू का तीखा विश्लेषण

नई दिल्ली। आईपीएल 2026 में अरुण जेटली स्टेडियम में खेले गए मुकाबले में दिल्ली कैपिटल्स के स्टार बल्लेबाज केएल राहुल ने गुजरात टाइटंस के खिलाफ शानदार बल्लेबाजी करते हुए 52 गेंदों पर 92 रन ठोक दिए। उनकी इस दमदार पारी में 11 चौके और 4 छक्के शामिल रहे। हालांकि टीम को 1 रन से हार का सामना करना पड़ा, लेकिन राहुल की बल्लेबाजी ने फैंस और क्रिकेट एक्सपर्ट्स को काफी प्रभावित किया। रायुडू ने की जमकर तारीफ, बताया ‘सोची-समझी पारी’पूर्व भारतीय क्रिकेटर अंबाती रायुडू ने राहुल की पारी की सराहना करते हुए कहा कि उनका अप्रोच पूरी तरह रणनीतिक था। उन्होंने ESPNcricinfo पर बातचीत में कहा कि राहुल ने शुरुआत में संयम बरता और फिर धीरे-धीरे अपनी पारी को गति दी। यह दिखाता है कि वह सिर्फ आक्रामक बल्लेबाज ही नहीं, बल्कि मैच की स्थिति को समझकर खेलने वाले खिलाड़ी भी हैं। एंकर रोल में दिखे राहुल, टीम को लक्ष्य के करीब पहुंचायारायुडू के मुताबिक, राहुल ने इस मैच में एंकर की भूमिका निभाई। दूसरे छोर से विकेट गिरते रहे, लेकिन उन्होंने धैर्य बनाए रखा और पारी को अंत तक लेकर जाने की कोशिश की। उनका मकसद साफ था आखिरी तक टिके रहकर मैच खत्म करना। इस दौरान उन्होंने शानदार शॉट्स लगाए और टीम को जीत के बेहद करीब पहुंचा दिया। ‘स्किल नहीं, माइंडसेट है असली चुनौती’रायुडू ने राहुल के खेल को लेकर अहम बात कही। उनका मानना है कि राहुल की सबसे बड़ी चुनौती उनकी बल्लेबाजी नहीं, बल्कि निर्णय लेने की क्षमता है। उन्होंने कहा कि राहुल के पास हर तरह की गेंदबाजी के खिलाफ खेलने की क्षमता है चाहे स्पिन हो या तेज गेंदबाजी। लेकिन असली सवाल यह है कि वह कब और कैसे आक्रामक खेल अपनाते हैं। यही उनका माइंडसेट उनके प्रदर्शन को तय करता है। खराब फॉर्म से दमदार वापसीइस मुकाबले से पहले राहुल लगातार दो मैचों में 0 और 1 रन पर आउट हुए थे। ऐसे में यह पारी उनके लिए आत्मविश्वास बढ़ाने वाली साबित हुई। उन्होंने न सिर्फ अपनी फॉर्म में वापसी की, बल्कि यह भी दिखाया कि वह दबाव में भी बड़ी पारी खेलने की क्षमता रखते हैं। सीजन की सबसे बड़ी पारी, लेकिन अधूरी रही कहानीकेएल राहुल की यह पारी दिल्ली कैपिटल्स के लिए इस सीजन की सबसे बड़ी व्यक्तिगत पारी रही, लेकिन टीम जीत हासिल करने से चूक गई। इसके बावजूद राहुल की बल्लेबाजी ने यह साबित कर दिया कि अगर वह सही निर्णय लें, तो किसी भी मैच का रुख पलट सकते हैं।
मोती सागर ने कहा, फिल्म और धारावाहिक की तुलना उचित नहीं, दोनों के प्रारूप अलग..

नई दिल्ली:90 के दशक के लोकप्रिय टीवी धारावाहिक “रामायण” और 4000 करोड़ की नितेश तिवारी निर्देशित फिल्म “रामायणम्” के बीच तुलना की चर्चाओं ने हाल ही में सुर्खियां बटोरी हैं। फिल्म का पहला टीज़र हनुमान जयंती पर जारी किया गया, जिसमें रणबीर कपूर भगवान राम की भूमिका में नजर आए। इस झलक ने दर्शकों के बीच उत्साह और सवालों का मिश्रण पैदा किया, खासकर जब 1987 में रामानंद सागर द्वारा बनाए गए टीवी धारावाहिक से तुलना की जाने लगी। रामानंद सागर के बेटे मोती सागर ने इस तुलना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि दोनों प्रारूप अलग हैं और तुलना करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि टीवी धारावाहिक में 78 एपिसोड थे, जिनकी लंबाई 30-40 मिनट प्रति एपिसोड थी, जबकि फिल्म सिर्फ तीन से चार घंटे की होगी। इसलिए कथानक और बारीकियों में अंतर स्वाभाविक है। मोती सागर ने कहा कि उनके पिता ने “रामायण” को पूरी भक्ति और ईमानदारी के साथ प्रस्तुत किया था, और फिल्म का उद्देश्य भी उसी भावना को आधुनिक रूप में पेश करना है। मोती सागर ने फिल्म के टीज़र के आधार पर ही नतीजा निकालने से इंकार किया और रणबीर कपूर की भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि रणबीर आज के समय के बेहतरीन अभिनेताओं में से एक हैं और उनके अभिनय में गहराई और परिपक्वता है। मोती सागर के मुताबिक, फिल्म और धारावाहिक के दृष्टिकोण अलग होने के कारण इसे किसी भी तरह की तुलना में सीमित नहीं किया जा सकता। “रामायणम्” में साई पल्लवी सीता के रूप में, यश रावण के रूप में, सनी देओल हनुमान के रूप में और रवि दुबे लक्ष्मण के रूप में नजर आएंगे। इसके अलावा, अरुण गोविल, कुणाल कपूर, आदिनाथ कोठारे और शीबा चड्ढा भी अहम भूमिका निभा रहे हैं। फिल्म का पहला भाग दिवाली 2026 में और दूसरा भाग दिवाली 2027 में रिलीज होगा। इस फिल्म का निर्माण नमित मल्होत्रा ने किया है और इसका उद्देश्य दर्शकों को आधुनिक तकनीक और विजुअल इफेक्ट्स के माध्यम से महाकाव्य की कहानी को प्रस्तुत करना है। टीज़र को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रियाओं के बीच कुछ लोग दृश्यों और अभिनय की प्रशंसा कर रहे हैं, जबकि कुछ लोग विशेष प्रभावों पर सवाल उठा रहे हैं। KeywordsRamayan, Ramayanam, Nitesh Tiwari, Motii Sagar, Ranbir Kapoor संक्षिप्त विवरणरामानंद सागर की रामायण और नितेश तिवारी की रामायणम् को तुलना से अलग रखते हुए मोती सागर ने फिल्म की सराहना की। दोनों के प्रारूप और प्रस्तुतिकरण में भिन्नता है, और फिल्म आधुनिक तकनीक और बड़े बजट के साथ महाकाव्य को नई पीढ़ी के दर्शकों तक पहुंचाएगी।
TET अनिवार्यता पर भड़के शिक्षक, बोले- 26 साल के अनुभवी से भी दोबारा परीक्षा लें

भोपाल । मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में टीईटी (Teacher Eligibility Test) अनिवार्यता को लेकर शिक्षकों का गुस्सा खुलकर सामने आ गया है। 20 से 25 साल तक सेवा दे चुके शिक्षक इस फैसले को अपने अनुभव और सम्मान के खिलाफ बता रहे हैं। प्रदर्शन के दौरान शिक्षकों ने सरकार से इस आदेश को तत्काल वापस लेने की मांग की और चेतावनी दी कि यदि जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन उग्र रूप ले सकता है। ‘अनुभव की अनदेखी, नियमों का अन्यायपूर्ण लागू होना’प्रदर्शन कर रहीं शिक्षिका शीबा खान ने कहा कि सरकार का यह फैसला पूरी तरह अव्यवहारिक है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या 26 साल के अनुभवी कलेक्टर से भी दोबारा परीक्षा देने को कहा जाएगा? वहीं शिक्षिका प्रियंका शर्मा ने इसे “तानाशाही निर्णय” बताते हुए कहा कि नियुक्ति के समय जो नियम लागू थे, उनका पालन किया गया था। अब पुराने शिक्षकों पर नए नियम लागू करना पूरी तरह गलत है। रिटायरमेंट के करीब शिक्षकों पर बढ़ा दबावशिक्षकों का कहना है कि जिनकी सेवा में केवल कुछ ही साल बचे हैं, उनसे दोबारा परीक्षा की मांग करना न केवल अनुचित है बल्कि मानसिक दबाव भी बढ़ा रहा है। उनका तर्क है कि इतने वर्षों का अनुभव किसी भी परीक्षा से अधिक महत्वपूर्ण होता है और इसे नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। सरकार को रिव्यू पिटीशन दाखिल करने की मांगप्रदर्शन में शामिल शिक्षिका संगीता कुशवाहा ने सरकार से सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन दाखिल करने की मांग की। उन्होंने कहा कि यह फैसला हजारों शिक्षकों के भविष्य को प्रभावित कर रहा है और इसे जल्द से जल्द संशोधित किया जाना चाहिए। 18 अप्रैल को परिवार सहित बड़ा प्रदर्शनअध्यापक-शिक्षक संयुक्त मोर्चा के पदाधिकारी उपेंद्र कौशल ने बताया कि 8 अप्रैल को जिला स्तर पर प्रदर्शन के बाद DPI भोपाल को ज्ञापन सौंपा गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि 11 अप्रैल तक सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो 18 अप्रैल को प्रदेशभर के शिक्षक परिवार सहित भोपाल में बड़ा प्रदर्शन करेंगे और मांगें पूरी होने तक डटे रहेंगे। DPI का आदेश और उसके प्रभावलोक शिक्षण संचालनालय (DPI) भोपाल के आदेश के अनुसार, जिन शिक्षकों की सेवानिवृत्ति में पांच वर्ष से अधिक समय शेष है, उन्हें दो साल के भीतर टीईटी पास करना अनिवार्य होगा, अन्यथा सेवा समाप्ति का खतरा रहेगा। विभाग का कहना है कि यह निर्णय सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के आधार पर लिया गया है। 1.5 लाख शिक्षक प्रभावित, 70 हजार सीधे दायरे मेंशिक्षक संगठनों के अनुसार इस आदेश से करीब 1.5 लाख शिक्षक प्रभावित होंगे, जिनमें से लगभग 70 हजार शिक्षक ऐसे हैं, जिनकी नियुक्ति 2011 से पहले हुई थी। उनका कहना है कि आरटीई एक्ट 2009 और टीईटी 2011 के बाद लागू हुआ था, इसलिए पुराने शिक्षकों पर यह नियम लागू करना “रेट्रोस्पेक्टिव” यानी पिछली तारीख से नियम लागू करने जैसा है। संयुक्त लड़ाई की तैयारी, आंदोलन होगा तेजशिक्षक संगठनों ने साफ कर दिया है कि अब वे एकजुट होकर इस फैसले के खिलाफ लड़ाई लड़ेंगे। 11 अप्रैल को ब्लॉक स्तर पर आंदोलन कर स्थानीय जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन सौंपा जाएगा। इसके बाद भी मांगें नहीं मानी गईं तो राजधानी में बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
‘सभ्यता खत्म’ के बयान पर घिरते अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प

-सुनील कुमार महलामध्य-पूर्व में जारी युद्ध को 40 दिन से अधिक समय हो चुका है तथा लगातार हमलों के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर दुनिया स्पष्ट रूप से दो धड़ों में बंटी हुई नजर आ रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में पेश एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव रूस और चीन के वीटो के कारण पारित नहीं हो सका। बहरीन द्वारा लाए गए इस प्रस्ताव में होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग की अपील की गई थी। पाठकों को बताता चलूं कि 15 सदस्यीय परिषद में इस प्रस्ताव के पक्ष में 11 वोट पड़े, जबकि रूस और चीन ने विरोध में मतदान किया। वहीं पर पाकिस्तान और कोलंबिया इस मतदान से दूर रहे।आवश्यक 09 मत मिलने के बावजूद, वीटो के चलते प्रस्ताव असफल हो गया। इसी बीच, डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान को समझौते के लिए दी गई समय-सीमा समाप्त होने से एक दिन पहले, 7 अप्रैल 2026 (मंगलवार) को अमेरिकी सेना ने खर्ग द्वीप पर हमला किया। इसके समानांतर, इजरायल की सेना ने ईरान के भीतर रेल पटरियों और पुलों को निशाना बनाते हुए बमबारी की। जवाब में ईरान ने इजरायल पर बैलिस्टिक मिसाइलें और रॉकेट दागे। हालांकि, व्हाइट हाउस ने स्पष्ट किया कि वह ईरान के खिलाफ परमाणु हथियारों के उपयोग पर विचार नहीं कर रहा है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए ईरान स्थित भारतीय दूतावास ने भारतीय नागरिकों के लिए नई एडवाइजरी जारी की, जिसमें अगले 48 घंटे तक अपने स्थान पर ही सुरक्षित रहने की सलाह दी गई। इस बीच डोनाल्ड ट्रंप ने कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि ‘आज रात एक पूरी सभ्यता समाप्त हो सकती है, जिसे फिर कभी वापस नहीं लाया जा सकेगा।’ दूसरी ओर, ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने दावा किया कि 1 करोड़ 40 लाख से अधिक ईरानी देश की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति देने को तैयार हैं। कहना ग़लत नहीं होगा कि मध्य-पूर्व के इस युद्ध के प्रभाव लगातार गंभीर होते जा रहे हैं और इजरायली हमलों में ईरान के आठ पुल नष्ट हो चुके हैं तथा कच्चे तेल की कीमतें बढ़कर 108 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं। जानकारी अनुसार इजरायल ने तेहरान, करज, काशान और कोम में सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया, जबकि ईरान ने इजरायल पर सात बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। इतना ही नहीं, कुवैत से दागे गए एक रॉकेट हमले में इराक में तीन लोगों की मृत्यु हुई। वहीं, ईरान द्वारा कतर पर दागी गई मिसाइलों को कतर ने नाकाम करने का दावा किया है। इस बीच ईरान की विशेष सैन्य इकाई इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने संभावित हमलों के लक्ष्यों की सूची भी जारी की है।सच तो यह है कि इस युद्ध का असर पूरे विश्व समेत भारत पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। दिल्ली-एनसीआर में इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड ने पाइप्ड नैचुरल गैस (पीएनजी) के दामों में 1.70 रुपये प्रति एससीएम की वृद्धि की है, जो 1 अप्रैल से लागू हो चुकी है। इसके अलावा, एयर इंडिया ने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर ईंधन शुल्क बढ़ा दिया है, जिसके तहत घरेलू उड़ानों में 299 रुपये से 899 रुपये तक की बढ़ोतरी की गई है। ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद शुरू हुआ यह युद्ध एक महीने से अधिक समय बीतने के बावजूद थमने का नाम नहीं ले रहा है। बीच-बीच में युद्धविराम की चर्चाएं जरूर होती हैं, लेकिन वे जल्द ही तीव्र हमलों के बीच दब जाती हैं। ताजा घटनाक्रम में जैसा कि ऊपर भी इस आलेख में चर्चा कर चुका हूं कि अमेरिका ने खर्ग द्वीप पर पुनः हमला किया, जबकि ईरान के अल्बोर्ज प्रांत में हुए हवाई हमले में कम से कम 18 लोगों की मौत हुई है। डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि ईरान निर्धारित समय तक होर्मुज जलमार्ग में जहाजों की आवाजाही पूरी तरह बहाल नहीं करता, तो उसके बिजली संयंत्रों और पुलों पर व्यापक बमबारी की जाएगी। इस संदर्भ में यह प्रश्न भी उठता है कि क्या नागरिक ढांचे पर हमले अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत युद्ध अपराध की श्रेणी में आते हैं। यहां यह गौरतलब है कि पहले ही एक स्कूल पर हुए हमले में बच्चियों की मौत को लेकर अमेरिका और इजरायल की आलोचना हो चुकी है। वास्तव में अब यह स्पष्ट होता जा रहा है कि इस युद्ध में मानवीय संवेदनाएं पीछे छूटती जा रही हैं। जहां अमेरिका और इजरायल ईरान पर लगातार हमले कर रहे हैं, वहीं ईरान भी इजरायल और मध्य-पूर्व में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बना रहा है। इसके परिणामस्वरूप पूरे क्षेत्र में कच्चे तेल के उत्पादन और आपूर्ति पर गंभीर प्रभाव पड़ा है, जिससे वैश्विक स्तर पर ऊर्जा और खाद्य संकट गहराता जा रहा है।इधर, युद्धविराम के प्रयास भी ठोस परिणाम नहीं दे पा रहे हैं। ईरान ने 45 दिनों के युद्धविराम प्रस्ताव को अस्वीकार करते हुए स्पष्ट किया है कि वह केवल स्थायी शांति और भविष्य में हमले न किए जाने की गारंटी चाहता है। यह मांग कूटनीतिक दृष्टि से तार्किक प्रतीत होती है, क्योंकि अस्थायी समाधान मूल समस्याओं का निवारण नहीं कर सकते। कहना ग़लत नहीं होगा कि वर्तमान स्थिति यह संकेत देती है कि सभी पक्ष अपनी-अपनी जिद पर अड़े हुए हैं, जिससे समाधान की संभावनाएं धूमिल होती जा रही हैं। ऐसे में यह बड़ा प्रश्न उभरता है कि जब व्यापक विनाश के बाद यह युद्ध समाप्त होगा, तब शांति की कीमत कितनी भारी होगी। इसी बीच, डोनाल्ड ट्रंप ने अप्रैल के पहले सप्ताह में ईरान के साथ दो सप्ताह के सीज़फायर की घोषणा की, जिसके तहत तत्काल बमबारी को टाल दिया गया। यह घोषणा संभावित हमले की तय समयसीमा से ठीक पहले की गई, जिससे क्षेत्र में बढ़ते तनाव को अस्थायी रूप से नियंत्रित करने का प्रयास हुआ। हालांकि, यह सीज़फायर कुछ शर्तों पर आधारित है, इसलिए हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं और मध्य-पूर्व में तनाव अभी भी बना हुआ है। अंत में यही कहूंगा कि , इस युद्ध को समाप्त करने के लिए सबसे पहले तत्काल और पूर्ण युद्धविराम आवश्यक है, जिसके लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की सक्रिय भूमिका अनिवार्य होगी। इसके बाद संयुक्त राष्ट्र या ओमान जैसे निष्पक्ष मध्यस्थों के माध्यम