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पलक झपकते ही उड़ाए पैसे, दो युवतियों की चालाकी का वीडियो वायरल

शिवपुरी। शिवपुरी जिले में बैंक के बाहर दिनदहाड़े हुई चोरी ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। करैरा थाना क्षेत्र में दो युवतियों ने मिलकर महज 15–20 सेकंड में एक युवक के बैग से 90 हजार रुपये उड़ा लिए। पूरी घटना CCTV कैमरे में कैद हो गई, जिसमें उनकी प्लानिंग और तरीका साफ नजर आ रहा है। बैंक से रकम निकालते ही बने निशानाजानकारी के मुताबिक, ग्राम डुमघना निवासी 26 वर्षीय आकाश श्रीवास्तव, जो एसबीआई कियोस्क संचालक हैं, मंगलवार सुबह करीब 11:40 बजे State Bank of India की गांधी रोड स्थित करैरा शाखा पहुंचे थे। उन्होंने अपने कियोस्क खाते से 1 लाख 60 हजार रुपये निकाले और बैग में रखकर बैंक से बाहर निकल गए। लेकिन जैसे ही वह बैंक के गेट तक पहुंचे, पहले से घात लगाए बैठी दो युवतियों ने उन्हें अपना निशाना बना लिया। एक ने रोका, दूसरी ने काटा बैगCCTV फुटेज के अनुसार, एक युवती अचानक आकाश के सामने आ गई और बातचीत में उलझा लिया। उसने रास्ता रोककर उनका ध्यान भटका दिया। इसी दौरान दूसरी युवती पीछे आकर खड़ी हो गई और ब्लेड से बैग को बेहद सफाई से काट दिया। कुछ ही सेकंड में बैग से 90 हजार रुपये निकाल लिए गए और दोनों युवतियां वहां से आराम से निकल गईं। यह पूरी वारदात इतनी तेजी से हुई कि युवक को भनक तक नहीं लगी। CCTV में दिखी पूरी साजिशफुटेज में साफ दिख रहा है कि दोनों युवतियां पहले से बैंक के बाहर मौजूद थीं और मौके का इंतजार कर रही थीं। एक युवती ने चप्पल ठीक करने जैसे बहाने से इशारे कर साथी को संकेत दिया, जबकि दूसरी ने चोरी को अंजाम दिया। वारदात के बाद दोनों पैदल वहां से निकल गईं। बताया जा रहा है कि वे ई-रिक्शा (टमटम) से बैंक तक पहुंची थीं, जिससे यह पूरी घटना सुनियोजित लग रही है। कियोस्क पहुंचने पर हुआ खुलासाआकाश को चोरी की जानकारी तब हुई जब वह अपने कियोस्क सेंटर पहुंचे और बैग चेक किया। पैसे गायब देख वह तुरंत बैंक लौटे और CCTV फुटेज की जांच कराई, जिसमें पूरी घटना सामने आ गई। पुलिस ने दर्ज किया केस, तलाश जारीकरैरा थाना प्रभारी के अनुसार, शिकायत मिलने के बाद दो अज्ञात युवतियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस CCTV फुटेज के आधार पर आरोपियों की पहचान करने और उन्हें पकड़ने की कोशिश कर रही है। सतर्कता जरूरी, ऐसे बचेंइस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया कि भीड़-भाड़ वाले इलाकों में सतर्क रहना बेहद जरूरी है। बैंक से पैसे निकालते समय बैग को सुरक्षित रखें और अनजान लोगों से दूरी बनाए रखें, ताकि इस तरह की वारदातों से बचा जा सके।

दिल्ली में IAS और दानिक्स अफसरों के ताबड़तोड़ ट्रांसफर, प्रशासनिक हलचल..

नई दिल्ली:दिल्ली में बुधवार देर रात बड़े पैमाने पर प्रशासनिक फेरबदल हुआ, जिसमें आईएएस और दानिक्स अफसरों के ताबड़तोड़ ट्रांसफर किए गए। राजधानी के विभिन्न विभागों में 20 से अधिक अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपी गईं, जिससे सरकारी गलियारों में हलचल मच गई। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की सरकार ने इसे प्रशासनिक कामकाज में सुधार के उद्देश्य से उठाया गया कदम बताया है। इस फेरबदल में सीनियर अफसरों को प्रमुख जिम्मेदारी दी गई। डॉ. नरेंद्र कुमार को फाइनेंस कमिश्नर नियुक्त किया गया, जबकि प्रशांत गोयल को फूड एंड सिविल सप्लाई विभाग में अतिरिक्त मुख्य सचिव बनाया गया। उनके पास डीएफसी और डीएससीएससी के सीएमडी की जिम्मेदारी भी होगी। उत्तर पश्चिम जिले के डीएम सौम्या सौरभ को उद्योग विभाग में तैनात किया गया है। नवलेंद्र कुमार सिंह को जीएसटी एडिशनल कमिश्नर और सोनिका सिंह को डीडीए में कमिश्नर बनाया गया है। संसदीय कार्यों में हर्षित जैन को संयुक्त सचिव की जिम्मेदारी दी गई है, जबकि मंगल सैनी केंद्रीय कारागार के सुपरिटेंडेंट बनाए गए। ओम प्रकाश सैनी को डीएसएसएसबी में उप सचिव के पद पर तैनात किया गया। इसके अलावा मुकेश कुमार, आशीष शौकीन, मनोज कुमार, भूप सिंह और अश्विनी कुमार को नई तैनाती मिली। कुछ नियुक्तियों में बदलाव किया गया, जैसे कि अमित कुमार की नियुक्ति का आदेश बाद में रद्द कर दिया गया। इस व्यापक ट्रांसफर ने प्रशासनिक स्तर पर नई दिशा और जिम्मेदारियों का वितरण स्पष्ट किया। अधिकारियों का कहना है कि इससे विभागों की कार्यक्षमता और जवाबदेही में सुधार की संभावना है। विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे बड़े पैमाने पर ट्रांसफर यह दर्शाते हैं कि सरकार अधिकारियों की क्षमता और प्रदर्शन के आधार पर नई तैनाती कर रही है। इस कदम का असर न केवल विभागीय कामकाज पर पड़ेगा, बल्कि जनता तक सरकारी सेवाओं की गुणवत्ता में भी सुधार आने की उम्मीद है। प्रशासनिक बदलाव के साथ, अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां मिलने से विभागों में नीतियों और योजनाओं के क्रियान्वयन में गति आने की संभावना है। इस तरह के फेरबदल से सरकारी कामकाज और उत्तरदायित्व के बीच संतुलन बनाए रखने का प्रयास किया जाता है।

2 हजार के विवाद में महिला पर हमला, सिर पर भगौनी मारकर किया घायल

शिवपुरी। शहर की खाटू श्याम कॉलोनी में महज 2000 रुपये के लेन-देन को लेकर हुआ विवाद हिंसक झड़प में बदल गया। पड़ोसियों के बीच शुरू हुई कहासुनी इतनी बढ़ गई कि एक महिला पर जानलेवा हमला कर दिया गया। आरोप है कि पड़ोसी युवक ने महिला के सिर पर भगौनी (रसोई का बर्तन) से वार कर दिया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गई। गाली-गलौज के बाद बढ़ा विवादघटना 8 अप्रैल की शाम की बताई जा रही है। कॉलोनी निवासी रचना (34) अपने घर के बाहर खड़ी थीं, तभी उनके पड़ोसी विकास धाकड़ अपनी मां के साथ वहां पहुंचे। दोनों के बीच पहले से ही पैसों के लेन-देन को लेकर तनाव चल रहा था। आरोप है कि आते ही मां-बेटे ने रचना को अपशब्द कहना शुरू कर दिया। रचना द्वारा विरोध जताने पर विवाद और बढ़ गया और बात हाथापाई तक पहुंच गई। देखते ही देखते माहौल तनावपूर्ण हो गया और आसपास के लोग भी इकट्ठा होने लगे। भगौनी से किया हमला, महिला लहूलुहानविवाद के दौरान आरोपी विकास धाकड़ घर के अंदर गया और वहां से भगौनी लेकर बाहर आया। इसके बाद उसने रचना के सिर पर जोरदार वार कर दिया। अचानक हुए इस हमले से रचना जमीन पर गिर गईं और उनके माथे से खून बहने लगा। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, महिला को पीठ में भी गंभीर चोटें आई हैं। घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और स्थानीय लोगों ने घायल महिला को संभाला।  पुलिस ने दर्ज किया मामला, जांच शुरूघटना के बाद रचना सीधे थाने पहुंचीं और पूरे मामले की शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने शिकायत के आधार पर आरोपी विकास धाकड़ और उसकी मां के खिलाफ विभिन्न धाराओं में केस दर्ज कर लिया है। पुलिस का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू कर दी गई है और जल्द ही आरोपियों के खिलाफ आगे की कार्रवाई की जाएगी। छोटी बात, बड़ा विवाद-सतर्क रहने की जरूरतयह घटना एक बार फिर यह बताती है कि छोटे-छोटे आर्थिक विवाद किस तरह बड़े अपराध का रूप ले सकते हैं। समाज में ऐसे मामलों को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने की जरूरत है, ताकि किसी की जान और सुरक्षा खतरे में न पड़े।

पुणे में ऑनलाइन ट्रेडिंग घोटाले में वरिष्ठ डॉक्टर ने गंवाई 12 करोड़ रुपये से अधिक की पूंजी

नई दिल्ली: पुणे में एक सनसनीखेज ऑनलाइन ट्रेडिंग घोटाले का मामला सामने आया है, जिसमें 75 वर्षीय एक वरिष्ठ डॉक्टर ने 12 करोड़ रुपये से अधिक की अपनी जमा पूंजी गंवा दी। मामला जनवरी के आखिरी सप्ताह से शुरू हुआ, जब डॉक्टर को एक अननोन नंबर से मैसेज आया, जिसमें कई शेयरों की सूची और निवेश पर भारी मुनाफे का दावा किया गया। लिंक पर क्लिक करते ही डॉक्टर को एक व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ा गया, जहां धोखेबाजों ने खुद को एक ग्लोबल फाइनेंसियल मैनेजमेंट फर्म के सीनियर अधिकारी के रूप में प्रस्तुत किया। ग्रुप में आरोपी सदस्य निवेश के दौरान होने वाले मुनाफे की झूठी जानकारी साझा करते थे, जिससे डॉक्टर का भरोसा जीतना आसान हो गया। डॉक्टर को एक फर्जी ट्रेडिंग एप्लिकेशन पर भेजा गया, जिसका नाम एक अंतरराष्ट्रीय कंपनी के नाम से मिलता जुलता था। इसके माध्यम से जालसाजों ने डॉक्टर से बैंक अकाउंट और अन्य संवेदनशील जानकारी हासिल की। इसके बाद उन्हें कई बैंक खातों में निवेश के नाम पर धन ट्रांसफर करने के लिए कहा गया। पीड़ित डॉक्टर ने 7 मार्च से 18 मार्च के बीच लगभग 12.3 करोड़ रुपये फर्जी प्लेटफॉर्म पर निवेश किए। इस दौरान निवेश पर मनगढ़ंत मुनाफे का प्रदर्शन कर डॉक्टर को और धन निवेश करने के लिए मजबूर किया गया। जब डॉक्टर ने और पैसा लगाने से इनकार किया, तो आरोपियों ने उनके खिलाफ संपत्ति जब्त करने की धमकी दी। इस प्रक्रिया के दौरान डॉक्टर की सभी जमा पूंजी को जालसाजों ने अपने नियंत्रण में ले लिया। घोटाले का यह तरीका अत्यंत सुनियोजित था, जिसमें व्हाट्सएप ग्रुप और फर्जी एप्लिकेशन का प्रयोग कर पीड़ित को लगातार प्रभावित किया गया। आरोपियों ने निवेश पर झूठे लाभ दिखाकर डॉक्टर को विश्वास में लिया और अपनी संपत्ति गंवाने के लिए मजबूर किया। यह मामला ऑनलाइन निवेश में बढ़ती धोखाधड़ी और साइबर अपराध की गंभीरता को उजागर करता है। पुलिस और साइबर क्राइम विभाग ने अब इस मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि ऐसे मामलों में सावधानी और विश्वसनीय प्लेटफॉर्म पर ही निवेश करना आवश्यक है। डॉक्टर की उम्र और अनुभव को देखते हुए यह घटना निवेशकों के लिए चेतावनी का विषय है।

आईपीएल 2026 के बीच BCCI का नया फरमान, सिर्फ 16 खिलाड़ियों को मिलेगी एंट्री

नई दिल्ली।इंडियन प्रीमियर लीग 2026 के बीच Board of Control for Cricket in India (BCCI) ने अनुशासन को लेकर बड़ा फैसला लिया है। नई रिपोर्ट के मुताबिक अब किसी भी मैच के दौरान मैदान पर केवल उन्हीं खिलाड़ियों को आने की अनुमति होगी, जिनका नाम टीम शीट में शामिल होगा और यह संख्या अधिकतम 16 तय कर दी गई है। इसमें 11 खिलाड़ी प्लेइंग इलेवन का हिस्सा होंगे, जबकि 1 इम्पैक्ट सब और 4 रिजर्व खिलाड़ी शामिल किए जा सकते हैं। यानी कुल मिलाकर 16 से ज्यादा खिलाड़ियों को मैदान या बाउंड्री लाइन के पास आने की अनुमति नहीं होगी। ड्रिंक्स और मैसेज लाने पर भी लगी रोकनए नियमों के तहत टीम शीट में शामिल न होने वाले खिलाड़ी अब मैदान पर ड्रिंक्स, बैट, ग्लव्स या कोई भी जरूरी सामान लेकर नहीं जा सकेंगे। इतना ही नहीं, वे खिलाड़ियों तक कोई रणनीतिक मैसेज भी नहीं पहुंचा पाएंगे। बाउंड्री लाइन के पास भी सख्ती बढ़ा दी गई है—यहां केवल 5 खिलाड़ी ही बिब पहनकर रह सकते हैं। बाकी सभी खिलाड़ियों को डगआउट में ही बैठना होगा। इससे पहले कई बार देखा गया था कि ज्यादा खिलाड़ी मैदान के आसपास मौजूद रहते थे, जिससे अव्यवस्था की स्थिति बनती थी। नियमों का मकसद: खेल की रफ्तार और अनुशासन बनाए रखनासूत्रों के अनुसार, BCCI का यह कदम मैच के दौरान अनुशासन बनाए रखने और अनावश्यक भीड़ को रोकने के लिए उठाया गया है। साथ ही इससे खेल की गति (game pace) को भी बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। दरअसल, कई मौकों पर सब्स्टीट्यूट खिलाड़ियों की बार-बार आवाजाही से मैच की लय प्रभावित होती थी। इसी को देखते हुए अब इस पर पूरी तरह लगाम लगाने की तैयारी की गई है। नियमों का आधार: MCC के क्लॉज को सख्ती से लागू करनाबताया जा रहा है कि यह फैसला एमसीसी (MCC) के नियमों—खासकर क्लॉज 11.5.2 और 24.1.4को सख्ती से लागू करने के लिए लिया गया है। इन नियमों के तहत बिना अंपायर की अनुमति के मैदान पर आना, ड्रिंक्स ले जाना या समय बर्बाद करना नियमों का उल्लंघन माना जाता है। अब Indian Premier League में इन प्रावधानों को और कड़ाई से लागू किया जाएगा, ताकि मैच के दौरान किसी भी तरह की अव्यवस्था या देरी से बचा जा सके। आगे और सख्त हो सकते हैं नियमरिपोर्ट्स के मुताबिक, BCCI आने वाले समय में इन नियमों को और सख्त करने पर भी विचार कर रही है। अगर टीमें इन निर्देशों का पालन नहीं करती हैं, तो खिलाड़ियों और टीम मैनेजमेंट पर जुर्माना या अन्य कार्रवाई हो सकती है। इस फैसले से साफ है कि IPL 2026 में अब सिर्फ प्रदर्शन ही नहीं, बल्कि अनुशासन भी उतना ही जरूरी होगा।

ग्वालियर केंद्रीय जेल में बड़ा खुलासा प्रहरी के आरोपों के बाद खुद ही हुआ निलंबित

ग्वालियर । मध्य प्रदेश के ग्वालियर स्थित केंद्रीय जेल एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गई है जहां जेल के भीतर कथित रूप से रुपए के लेनदेन और भ्रष्टाचार को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं इस बार आरोप किसी बाहरी व्यक्ति ने नहीं बल्कि जेल के भीतर कार्यरत एक प्रहरी ने ही लगाए हैं जिससे पूरे मामले ने तूल पकड़ लिया है जेल प्रहरी पवन शर्मा ने सहायक जेल अधीक्षक नीरज यादव पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि केंद्रीय जेल में बंद कैदियों से विभिन्न सुविधाओं के नाम पर अवैध वसूली की जाती है उन्होंने आरोप लगाया कि रुपए न देने पर कैदियों को प्रताड़ित भी किया जाता है जिससे जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं प्रहरी के मुताबिक जेल के अंदर प्रतिबंधित गतिविधियां भी पैसों के बल पर संचालित हो रही हैं उनका आरोप है कि कैदियों को रुपए लेकर गांजा और अन्य नशीले पदार्थ उपलब्ध कराए जाते हैं इतना ही नहीं बैरक बदलवाने के नाम पर कैदियों से 50 हजार रुपए तक वसूले जाते हैं वहीं फोन पर बात कराने के लिए 2 मिनट के 500 रुपए तक लिए जाने का भी आरोप लगाया गया है इसके अलावा कैदियों की मांग के अनुसार अन्य सामान भी पैसे लेकर उपलब्ध कराया जाता है इन गंभीर आरोपों के सामने आने के बाद जेल प्रशासन हरकत में आया लेकिन कार्रवाई का रुख कुछ अलग ही नजर आया जेल अधीक्षक विदित सिरवैया ने आरोप लगाने वाले प्रहरी पवन शर्मा को ही निलंबित कर दिया बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई झूठे और निराधार आरोप लगाने के आधार पर की गई है वहीं इस पूरे मामले में सहायक जेल अधीक्षक नीरज यादव पर लगे आरोपों को लेकर अभी तक आधिकारिक तौर पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है हालांकि इस घटनाक्रम ने जेल प्रशासन की पारदर्शिता और कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब पहले भी प्रदेश की जेलों में अवैध गतिविधियों और भ्रष्टाचार को लेकर चर्चाएं होती रही हैं ऐसे में ग्वालियर केंद्रीय जेल का यह मामला न केवल प्रशासन के लिए चुनौती बन गया है बल्कि जेल सुधार व्यवस्था पर भी बहस को तेज कर सकता है फिलहाल इस पूरे प्रकरण में आगे क्या जांच होती है और सच्चाई क्या निकलकर सामने आती है इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं लेकिन इतना जरूर है कि इन आरोपों ने जेल व्यवस्था की छवि पर एक बार फिर सवालिया निशान खड़ा कर दिया है

विजयवाड़ा और विशाखापत्तनम में चार ठिकानों पर छापेमारी, सोना-चांदी और फ्लैट जब्त..

नई दिल्ली:विजयवाड़ा/आंध्र प्रदेश में सरकारी अफसर की करोड़ों की संपत्ति का खुलासा होते ही प्रशासनिक और कानून व्यवस्था के हलकों में हड़कंप मच गया है। एंटी करप्शन ब्यूरो ने एंडोमेंट्स विभाग की सहायक आयुक्त कलिंगीरी शांति को आय से अधिक संपत्ति रखने के आरोप में गिरफ्तार किया। जांच में उनके खिलाफ स्पष्ट जानकारी मिलने के बाद 7 अप्रैल को विजयवाड़ा और विशाखापत्तनम में एक साथ छापेमारी की गई, जिसमें बड़ी संख्या में चल और अचल संपत्तियां जब्त की गईं। एसीबी की टीम ने अभियुक्त के आवास, उनकी मां की गारमेंट शॉप, बहन का घर और विशाखापत्तनम में स्थित अन्य संपत्ति पर छापा मारा। छापेमारी के दौरान अधिकारियों को कई अहम दस्तावेज और संपत्ति का ब्यौरा मिला। जांच में विशाखापत्तनम में एक रिहायशी फ्लैट, विजयवाड़ा में जी+2 इमारत, लगभग 770 ग्राम सोने के आभूषण, 3 किलो चांदी, 1.15 लाख रुपये नकद और करीब 3 लाख रुपये बैंक जमा में पाए गए। इसके अलावा एक वोल्क्सवैगन पोलो कार, मोटरसाइकिल, इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स और अन्य कीमती सामान भी जब्त किए गए। कलिंगीरी शांति को जुलाई 2024 से मार्च 2026 तक निलंबित रखा गया था। उन्होंने वर्ष 2020 में आंध्र प्रदेश लोक सेवा आयोग के माध्यम से भर्ती प्राप्त की थी और विशाखापत्तनम तथा विजयवाड़ा में अपनी सेवाएं दी थीं। छापेमारी के समय वह नई पोस्टिंग का इंतजार कर रही थीं। एसीबी ने कलिंगीरी शांति के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(2) सहपठित धारा 13(1)(b) के तहत मामला दर्ज किया है, जो लोक सेवकों के पास आय से अधिक संपत्ति पाए जाने से संबंधित है। गिरफ्तारी के बाद उन्हें विजयवाड़ा स्थित विशेष अदालत में पेश किया गया, जहां से 21 अप्रैल तक न्यायिक हिरासत में भेजा गया। बाद में उन्हें जिला जेल में स्थानांतरित किया गया। अधिकारियों ने बताया कि जब्त संपत्तियों का मूल्यांकन और तलाशी अभी जारी है और जांच बढ़ने के साथ संपत्तियों की कुल कीमत में वृद्धि की संभावना है। यह कार्रवाई राज्य में भ्रष्टाचार पर कड़ी निगरानी और प्रशासनिक जवाबदेही के संकेत के रूप में देखी जा रही है।

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को मिली जान से मारने की चेतावनी, कहा- "अतीक अहमद जैसा करेंगे हाल"

वाराणसी। वाराणसी में ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को जान से मारने की धमकी दी गई है। उनके मीडिया प्रभारी संजय पांडेय ने बताया कि ज्योतिर्मठ के आधिकारिक नंबर पर धमकी भरे मैसेज और ऑडियो भेजे गए हैं, जिससे उनके अनुयायियों में हड़कंप मच गया। गौ रक्षा अभियान के कारण धमकीसंजय पांडेय के अनुसार शंकराचार्य के नेतृत्व में ‘गौ माता-राष्ट्रमाता’ अभियान चलाया जा रहा है। इसका उद्देश्य भारत में गौ हत्या को रोकना है। इसी अभियान के तहत 3 मई से उत्तर प्रदेश के हर विधानसभा क्षेत्र में गविष्ठी यात्रा शुरू होगी, जिसमें शंकराचार्य लोगों को गौ रक्षा के लिए प्रेरित करेंगे और हर विस क्षेत्र में रामा गौ धाम निर्माण पर जोर देंगे। धमकी का सिलसिलापहली अप्रैल को ज्योतिर्मठ के नंबर पर लगातार मैसेज भेजकर धमकाया गया। नंबर ब्लॉक करने के बाद 6 अप्रैल को दो ऑडियो संदेश भेजे गए, जिनमें अतीक अहमद की तरह मारने की चेतावनी दी गई। मीडिया प्रभारी ने कहा कि इस मामले में जल्द ही विधिक कार्रवाई की जाएगी। इससे पहले श्री कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति निर्माण ट्रस्ट (मथुरा) के अध्यक्ष आशुतोष ब्रह्मचारी और उनके अधिवक्ता को बम से उड़ाने की धमकी मिली थी। पुलिस जांच में धमकी देने वाले मोबाइल नंबर को पाकिस्तान का पाया गया, जिससे इसे अंतरराष्ट्रीय साजिश माना गया। सुप्रीम कोर्ट में पैरवी के दौरान डराने की कोशिशयह मामला स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े कानूनी विवाद से जुड़ा है। आशुतोष ब्रह्मचारी ने उच्च न्यायालय द्वारा शंकराचार्य को दी गई अग्रिम जमानत के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दाखिल की थी। आशुतोष के अनुसार, 25 मार्च को कोर्ट में पैरवी शुरू होते ही उन्हें धमकाने का सिलसिला शुरू हो गया।

देर रात दंपति पर हमला भिंड में बदमाशों ने लूट की कोशिश में युवक को उतारा मौत के घाट

भिंड । मध्य प्रदेश के भिंड जिले से एक दिल दहला देने वाली सनसनीखेज वारदात सामने आई है जहां देर रात घर लौट रहे एक दंपति पर बदमाशों ने हमला कर दिया और लूट की कोशिश के दौरान पति की गोली मारकर हत्या कर दी गई इस पूरी घटना को उसकी पत्नी और छोटी बच्ची के सामने अंजाम दिया गया जिससे पूरे क्षेत्र में भय और आक्रोश का माहौल बन गया है जानकारी के अनुसार यह घटना अटेर थाना क्षेत्र की है जहां बुधवार देर रात नीलेश जाटव अपनी पत्नी और मासूम बच्ची के साथ बाइक से अपनी ससुराल जामना गांव से खरिका गांव लौट रहे थे रास्ते में रमटा गांव के पास अज्ञात बदमाशों ने उन्हें रोक लिया और नीलेश की पत्नी का पर्स छीनने का प्रयास किया जब नीलेश जाटव ने बदमाशों का विरोध किया तो आरोपियों ने बिना देर किए उस पर गोली चला दी गोली लगते ही वह सड़क पर गिर पड़ा और गंभीर रूप से घायल हो गया खून से लथपथ हालत में उसने मौके पर ही दम तोड़ दिया इस पूरी घटना को उसकी पत्नी और बच्ची के सामने अंजाम दिया गया जिससे पत्नी गहरे सदमे में चली गई गोली चलने की आवाज सुनकर आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंचे और तुरंत पुलिस को सूचना दी सूचना मिलते ही मध्य प्रदेश पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेजा गया वहीं घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण कर साक्ष्य जुटाए गए मृतक के छोटे भाई अविंद जाटव ने बताया कि नीलेश परिवार के साथ ससुराल से लौट रहे थे तभी दो अज्ञात बदमाशों ने उनकी पत्नी का पर्स छीनने की कोशिश की और विरोध करने पर उन्हें गोली मार दी उन्होंने बताया कि हमलावर दो युवक थे जो वारदात के बाद मौके से फरार हो गए फिलहाल पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है और आरोपियों की तलाश के लिए आसपास के इलाकों में सघन सर्च अभियान चलाया जा रहा है पुलिस हर पहलू से मामले की जांच कर रही है ताकि जल्द से जल्द आरोपियों को गिरफ्तार किया जा सके इस घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल है और लोग खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं स्थानीय लोगों ने पुलिस प्रशासन से आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी और क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है यह वारदात एक बार फिर कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े करती नजर आ रही है जहां आम नागरिक भी सुरक्षित नहीं हैं

डॉक्टर पति ने पत्नी की हत्या के लिए बनाई थी शातिर योजना, कोर्ट में पेश हुए डिजिटल सबूत..

नई दिल्ली:बेंगलुरु से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसमें एक डॉक्टर ने अपनी पत्नी, जो स्किन स्पेशलिस्ट थीं, को बेहोशी का इंजेक्शन देकर कथित तौर पर हत्या कर दी। आरोपी पति ने अपने मेडिकल ज्ञान का इस्तेमाल कर पूरी योजना तैयार की थी और सोचा कि वह पकड़ा नहीं जाएगा। लेकिन छोटी सी गलती ने उसके सारे राज खोल दिए। अदालत ने आरोपी की जमानत याचिका ठोस सबूतों को देखते हुए खारिज कर दी। मृतक डॉक्टर कृतिका रेड्डी की उम्र 29 वर्ष थी और उनकी मौत रहस्यमयी परिस्थितियों में हुई। आरोपी पति महेंद्र रेड्डी ने शुरू में दावा किया कि उनकी पत्नी की अचानक मौत पुरानी बीमारियों के कारण हुई। हालांकि जांच में यह स्पष्ट हुआ कि उसने ऑपरेशन थिएटर में इस्तेमाल होने वाली शक्तिशाली दवा प्रोपोफोल का ओवरडोज देकर अपनी पत्नी की जान ले ली। जांच अधिकारियों ने अदालत में बताया कि यह हत्या बेहद सोची-समझी और शातिर योजना के तहत की गई। आरोपी ने अपनी पत्नी को बेहोश करने और उसकी मौत तक पहुंचाने के लिए अपने मेडिकल ज्ञान का इस्तेमाल किया। पुलिस को महेंद्र के मैसेज भी मिले, जिसमें उसने इस हत्या पर पछतावा व्यक्त किया और अपनी गर्लफ्रेंड को मर्डर को छिपाने के निर्देश दिए। उसने संदेश में स्पष्ट किया कि अगर पुलिस उसकी और गर्लफ्रेंड की बातचीत के बारे में पूछे तो उन्हें सिर्फ दोस्त बताना, ताकि संबंध का खुलासा न हो। जांच के दौरान फोरेंसिक टीम ने आरोपी के कब्जे से 10 लाख से अधिक डिजिटल डेटा और मैसेज रिट्रीव किए। इसमें भुगतान एप और चैट रिकॉर्ड शामिल थे, जिनमें कई डिलीट किए गए संदेश भी बरामद हुए। इन डिजिटल सबूतों ने हत्या की गहन योजना और आरोपी के इरादों को स्पष्ट किया। महेंद्र को 14 अक्टूबर को गिरफ्तार किया गया। महेंद्र और कृतिका दोनों ही विक्टोरिया अस्पताल में कार्यरत थे। उनकी शादी 26 मई 2024 को हुई थी। शादी के एक साल से भी कम समय में, 23 अप्रैल 2025 को कृतिका अपने पिता के घर पर बेहोश पाई गईं। आरोपी पति ने ससुराल में उनके इलाज के बहाने इंजेक्शन देने का बहाना बनाया और परिवार को भरोसा दिलाया कि वह केवल उनकी देखभाल कर रहा है। कृतिका की बहन को अपने जीजा के हावभाव पर संदेह हुआ और उन्होंने गहन मेडिकल जांच की मांग की। फोरेंसिक रिपोर्ट में पाया गया कि उनके शरीर में प्रोपोफोल की मात्रा अधिक थी, जिससे उनकी मौत हुई। इसके बाद पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज किया और महेंद्र को मणिपाल से गिरफ्तार किया। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी के परिवार का आपराधिक इतिहास रहा है। उसके भाई पर धोखाधड़ी के मामले दर्ज हैं और महेंद्र तथा एक अन्य भाई को धमकी देने के आरोप में पहले भी शामिल किया गया था। कृतिका के परिवार का आरोप है कि शादी के समय इन जानकारियों को छिपाया गया था। KeywordsDoctor Murder, Proposfol Overdose, Bengaluru Crime, Forensic Evidence, Premeditated Killing संक्षिप्त विवरणबेंगलुरु में एक डॉक्टर ने अपनी पत्नी को प्रोपोफोल का ओवरडोज देकर हत्या कर दी। फोरेंसिक सबूत और डिजिटल मैसेज से हत्या की योजना उजागर हुई।