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MP: टीईटी आदेश के खिलाफ प्रदेशभर में उबाल, नौकरी पर संकट का डर, सड़कों पर उतरे शिक्षक

भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में टीईटी अनिवार्यता के नए आदेश के खिलाफ शिक्षकों का गुस्सा अब खुलकर सड़कों पर दिखाई देने लगा है। बुधवार को बड़ी संख्या में शिक्षक संगठनों ने लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) मुख्यालय का घेराव कर जोरदार प्रदर्शन किया और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। राजधानी ही नहीं, बल्कि पूरे मध्य प्रदेश में इस आदेश के विरोध में एक साथ आंदोलन हुआ। जिला कलेक्ट्रेट कार्यालयों में मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर शिक्षकों ने टीईटी आदेश को तत्काल निरस्त करने की मांग उठाई। डीपीआई आदेश बना विरोध की वजहहाल ही में डीपीआई द्वारा जारी आदेश के अनुसार, जिन शिक्षकों की सेवानिवृत्ति में पांच वर्ष से अधिक समय शेष है, उन्हें दो वर्ष के भीतर टीईटी परीक्षा पास करना अनिवार्य किया गया है। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि निर्धारित समय सीमा में परीक्षा उत्तीर्ण नहीं करने पर सेवा समाप्ति तक की कार्रवाई की जा सकती है। यही प्रावधान अब शिक्षकों के आक्रोश की सबसे बड़ी वजह बन गया है। “सुप्रीम कोर्ट के नाम पर अन्याय”प्रदर्शन कर रहे शिक्षकों का आरोप है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का हवाला देकर सरकार ऐसा फैसला थोप रही है, जिससे हजारों पुराने शिक्षकों की नौकरी खतरे में पड़ सकती है। अध्यापक-शिक्षक संयुक्त मोर्चा के सदस्य उपेंद्र कौशल ने बताया कि आसपास के जिलों से भी बड़ी संख्या में शिक्षक भोपाल पहुंचे और डीपीआई के बाहर प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि उनकी मुख्य मांग टीईटी परीक्षा को पूरी तरह रद्द करना है। पुराने शिक्षकों पर नई शर्त का विरोधशिक्षक संगठनों का कहना है कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 लागू होने के बाद 2011 से टीईटी अनिवार्य किया गया, जबकि हजारों शिक्षक इससे पहले नियुक्त हो चुके थे। ऐसे में अब उन पर यह नियम लागू करना “रेट्रोस्पेक्टिव” निर्णय है, जो अन्यायपूर्ण और कानूनी रूप से भी कमजोर है। 1.5 लाख शिक्षक प्रभावितसंगठनों के मुताबिक इस आदेश का असर करीब 1.5 लाख शिक्षकों पर पड़ सकता है। इनमें लगभग 70 हजार ऐसे हैं, जिनकी नियुक्ति 2011 से पहले हुई थी। इन शिक्षकों का कहना है कि उनकी नियुक्ति के समय यह शर्त लागू नहीं थी, इसलिए अब इसे आधार बनाकर उनकी नौकरी पर संकट खड़ा करना उचित नहीं है। संयुक्त मोर्चा की चेतावनीप्रदर्शन के दौरान एक प्रतिनिधिमंडल ने डीपीआई अधिकारियों से मुलाकात कर अपनी मांगें रखीं। बाहर मौजूद शिक्षकों को आश्वासन दिया गया कि उनकी बात शासन तक पहुंचाई जाएगी। वहीं, शिक्षक संगठनों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन और उग्र किया जाएगा। 11 अप्रैल को ब्लॉक स्तर पर प्रदर्शन और जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन सौंपे जाएंगे, जबकि 18 अप्रैल को प्रदेशव्यापी बड़े आंदोलन की तैयारी की जा रही है। शिक्षकों का कहना है कि यह सिर्फ एक परीक्षा का मुद्दा नहीं, बल्कि उनके भविष्य, सम्मान और वर्षों की सेवा का सवाल है और इसके लिए अब वे आर-पार की लड़ाई लड़ने को तैयार हैं।

इंदौर नगर निगम का 8,455 करोड़ रुपये का बजट पारित, ‘वंदे मातरम’ नहीं गाने पर मचा बवाल

इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर नगर निगम में बुधवार को 8,455 करोड़ रुपए का बजट शोर-शराबे के बीच बहुमत से पारित किया गया। बजट चर्चा के दौरान पार्षद फौजिया शेख अलीम ने ‘वंदे मातरम’ गाने से इनकार किया। इससे भाजपा पार्षद भड़क गए और सभापति के आसन के पास नारेबाजी करते हुए जमकर हंगामा किया। सदन में कुछ देर तक शोर-शराबा चलता रहा, जिससे कार्यवाही बाधित हुई। स्थिति संभालने के लिए सभापति मुन्नालाल यादव को हस्तक्षेप करना पड़ा। उन्होंने फौजिया शेख अलीम को सदन से बाहर जाने के निर्देश दिए। दरअसल, इंदौर शहर के विकास को लेकर मंगलवार को आठ हजार करोड़ के बजट पेश किया गया था, जिस पर बुधवार को चर्चा हुई। इस दौरान भाजपा और कांग्रेस की दो पार्षद वंदे मातरम बोलने के मुद्दे पर आमने-सामने हो गए। वंदे मातरम गीत में कांग्रेस पार्षद फौजिया शेख अलीम के शामिल नहीं होने पर भाजपा पार्षदों ने उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की। उनके समर्थन में एक अन्य कांग्रेस पार्षद रुबीना इकबाल खान भी बोलने लगीं और उन्होंने तैश में कहा कि अगर एक बाप की औलाद हो तो हमसे वंदे मातरम बुलवा कर दिखाएं। उन्होंने यह भी कहा कि तुम्हारे बाप में दम हो तो हमसे बुलवा कर दिखाएं। हालांकि, शोर-गुल में उनकी बातों पर भाजपा पार्षद ज्यादा ध्यान नहीं दे पाए। कुछ देर बाद सभापति ने पार्षद फौजिया शेख को सदन से बाहर जाने के लिए कहा। वे कुछ देर बैठी रहीं, तो भाजपा पार्षद नारेबाजी करते हुए उनका विरोध करने लगे। इसके बाद फौजिया शेख सदन से बाहर चली गईं। रुबीना ने कहा कि कुरान में वंदे मातरम की मनाही है। पार्षद रुबीना इकबाल ने कहा कि हम राष्ट्रगान गाते हैं। अब हमें कहा जाता है कि भारत में रहना है तो वंदे मातरम कहना होगा। क्या यह कोई दादागिरी है? उन्होंने कहा कि गलत बात हम अपने पिता की भी नहीं सुनते, तो इन भाजपा वालों की क्यों सुनें। कुरान में वंदे मातरम की मनाही है, क्योंकि इबादत के लिए अल्लाह ही योग्य है। वंदे मातरम का मतलब माता की इबादत करना है। हम अपनी मां की इबादत नहीं करते, तो फिर वंदे मातरम क्यों बोलें? मामले पर नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस पार्षद चिंटू चौकसे ने कहा कि ‘वंदे मातरम’ गाना व्यक्तिगत इच्छा हो सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस पार्टी राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत के सम्मान के लिए संकल्पित है। उन्होंने बताया कि घटनाक्रम की जानकारी प्रदेश अध्यक्ष को दे दी गई है। कांग्रेस पार्षद राजू भदौरिया ने आरोप लगाया कि अधिकारियों को कई मामलों की जानकारी नहीं होती और सवाल पर वे जिम्मेदारी दूसरे विभागों पर डाल देते हैं। महापौर ने कहा कि सभी सवालों के जवाब सात दिन में दे दिए जाएंगे। इसी दौरान विवाद बढ़ गया जब राजू भदौरिया ने केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को ‘गद्दार’ कहा। इस पर भाजपा पार्षदों ने विरोध जताया और फिर सदन में हंगामा हुआ। विरोध के बाद भदौरिया ने माफी मांगी, जिसके बाद कार्यवाही दोबारा शुरू हुई। माफी की मांग पर अड़े भाजपा पार्षद, सदन में गूंजे नारेभागीरथपुरा के लोगों को भी इस मुद्दे को लेकर सदन में लाया गया था। बताया गया कि कल दर्शक दीर्घा में मृतकों के फोटो वाले पोस्टर भी दिखाए गए थे। इस पर भाजपा पार्षदों ने आरोप लगाया कि नेता प्रतिपक्ष चिंटू चौकसे के इशारे पर हंगामा किया गया। घटना को लेकर भाजपा पार्षद चिंटू चौकसे से माफी की मांग पर अड़ गए। सदन में लगातार ‘माफी मांगो’ के नारे गूंजते रहे, जिससे माहौल और अधिक गरमा गया। हंगामे के बीच बहुमत से बजट पारितसभापति मुन्नालाल यादव ने कहा कि सदन में कई बार अमर्यादित बातें हो जाती हैं, लेकिन हंगामे की वजह से बजट पर ठीक से चर्चा नहीं हो पाई। उन्होंने बताया कि लगातार शोर-शराबे के बीच बहुमत के आधार पर बजट पारित किया गया। साथ ही उन्होंने कहा कि ‘वंदे मातरम’ के संबंध में अमर्यादित शब्दों का प्रयोग करना गलत है, इसी कारण कांग्रेस पार्षद को सदन से बाहर किया गया।

MP: इंदौर में MYH के डॉक्टरों का कमाल….1 साल के बच्चे के गले में फंसी जिंदा मछली, सर्जरी कर बचाई जान

इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर (Indore) के एमवाय अस्पताल (MY Hospital) में एक बेहद हैरान कर देने वाला मामला सामने आया, जहां खेलते-खेलते एक साल के मासूम (One Year old Innocent) की जिंदगी पर संकट आ गया। बच्चे के गले में जिंदा मछली फंस (Live Fish Stuck Child’s Throat) गई, जिससे उसकी हालत गंभीर हो गई। डॉक्टरों की तत्परता और जटिल सर्जरी के बाद आखिरकार बच्चे की जान बचाई जा सकी। सफाई के दौरान मछलियों को बाहर निकालकर रखापरिजनों के अनुसार, घर में एक्वेरियम की सफाई के दौरान मछलियों को बाहर निकालकर रखा गया था। इसी दौरान पास में खेल रहे बच्चों में से एक ने मछली को हाथ में उठा लिया। यह देख एक वर्षीय बच्चा जोर-जोर से हंसने लगा। तभी हाथ में छटपटा रही मछली फिसलकर सीधे बच्चे के मुंह में चली गई और गले के अंदर जाकर फंस गई। बच्चे को होने लगी सांस लेने में तकलीफघटना के बाद बच्चे को सांस लेने में तकलीफ होने लगी थी। वह बेचैनी और घबराहट से जूझने लगा। उसके मुंह से खून भी निकलने लगा, जिससे परिजन घबरा गए और तुरंत उसे एमवाय अस्पताल लेकर पहुंचे। डॉक्टरों ने जांच में पाया कि मछली गले के पिछले हिस्से में फंसी हुई है और जिंदा होने के कारण लगातार हलचल कर रही है, जिससे अंदरूनी अंगों को गंभीर नुकसान पहुंचने का खतरा था। सबसे बड़ी चुनौती, मछली जीवितईएनटी विभागाध्यक्ष डॉ. यामिनी गुप्ता के नेतृत्व में तुरंत आपातकालीन टीम गठित की गई और बिना देर किए सर्जरी का निर्णय लिया गया। ऑपरेशन के दौरान डॉक्टरों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि मछली जीवित थी और उसके पंख व गलफड़े हिल रहे थे, जिससे स्वर-यंत्र और भोजन नली को नुकसान पहुंचने का खतरा बना हुआ था। करीब तीन इंच लंबी और डेढ़ इंच चौड़ी गोरामी मछली को सावधानीपूर्वक बाहर निकाला गया। सर्जरी सफल रही और उपचार के बाद बच्चे की सांस सामान्य हो गई। फिलहाल उसकी हालत स्थिर बताई जा रही है। मामला बेहद दुर्लभविशेषज्ञों का कहना है कि इतनी कम उम्र में इस तरह का मामला बेहद दुर्लभ है और मध्य भारत में यह पहला मामला माना जा रहा है। समय पर इलाज मिलने से एक बड़ी अनहोनी टल गई। डॉक्टरों ने अभिभावकों से अपील की है कि छोटे बच्चों को हमेशा निगरानी में रखें और उन्हें छोटी या जीवित वस्तुओं से दूर रखें, क्योंकि इस तरह की लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है।

तू मस्त-ए-कैलाश…. युद्ध के बीच ईरानी भाषा में शिवजी का भवन हुआ वायरल…

तेहरान। मिडिल ईस्ट (Middle East) में वॉर के बीच ईरानी भाषा (Iranian language) के कुछ गाने चर्चा में है। यहां हम जिस गाने का जिक्र कर रहे हैं वो शंकरजी का भजन (Shankarji’s hymn) है। इसका टाइटल है, ‘मस्त-ए-कैलाश’। इस गाने में ईरान के कुछ लोग शिव मंदिर में पूजा करते दिख रहे हैं। कई पुरानी तस्वीरें दिख रही हैं। गायिका ने बहुत प्यारी आवाज में इसे गाया है। इसे यूट्यूब पर बियॉन्ड कॉन्शियस (Beyond Conscious on YouTube) पर देखा जा कता है। इसमें चैतन्य शर्मा को क्रेडिट दिया गया है। भजन ईरानी भाषा में है और इसमें शंकरजी की तारीफ की गई है। गाने में कई पुरानी तस्वीरेंगाने की शुरुआत में एक स्टिल इमेज दिखती है जिसमें एक परिवार एक मंदिर में शिवलिंग की पूजा कर रहा है। इसके बाद कई शिवलिंग, पुराने मंदिर, नंदी की आकृति दिखती है। गाने के बोल हैं, तू जोगी ये कैलाश, तू मस्त ए कैलाश, ऐ शंकरा, ऐ शंकरा। यहां देखें गाना गाने की लिरिक्सतू जोगी-ये कैलाश, तू मस्त-ए-कैलाशऐ शंकरा, ऐ शंकराआतिश-ए-हक, ऐ शंकरातू जोगी-ये कैलाश, तू मस्त-ए-कैलाशजहर-ए-जहां नुशीदी, फिदा-ये-जहांखाक-ए-भसम पुशीदी, ऐ जान-ए-जहांमाह-ए-शब बर सर-ए-तू मी-दरखशदसदा-ये डमरू दर आसमां मी-रक्सदऐ नीलकंठ, ऐ शंकराआतिश-ए-हक, ऐ शंकरातू जोगी-ए कैलाश, तू मस्त-ए-कैलाशमार-ए-सियाह दर गरदनात ख्वाबिदाचश्म-ए-सेव्वम, रोशन ओ बीदारिदाअज सिंधु ता पार्स, येक ही खुदाओम नमः शिवाय, या महादेवातू मस्त-ए-कैलाश…ऐ शंकरा…हक शिवा, हक शिवामस्त-ए-मस्त-ए-मस्त-ए-शिवाहक शिवा, हक शिवाआतिश दर जां, आतिश दर रूहतू कोह-ए-कैलाश, तू अजीम कोहरक्स-ए-तांडव, दर इन आलमभसम-ए-पाक, ऐ महादेवामऐ नीलकंठ, ऐ शंकराओम नमः शिवाय, या शंकरातू जोगी-ये कैलाश, तू मस्त-ए-कैलाशया महादेव… समझें गाने का हिंदी मतलबआप कैलाश के योगी हैं, आप कैलाश के मस्त प्रभु हैं।हे शंकर, हे शंकरसत्य की अग्नि हैं आप, हे शंकरआप कैलाश के योगी हैं, आप कैलाश के आनंदमय प्रभु हैं।आपने संसार के विष को पी लिया, संसार के लिए एक महान बलिदान।आपने पवित्र भस्म धारण की, हे जगत की आत्मा।रात का चांद आपके मस्तक पर चमकता है,डमरू की ध्वनि आकाश में नृत्य करती है।हे नीलकंठ! हे शंकर!सत्य की अग्नि हैं आप, हे शंकर!आप कैलाश के योगी हैं, आप कैलाश के आनंदमय प्रभु हैं।काला नाग आपकी गर्दन पर विश्राम करता है,तीसरी आंख जागृत और प्रकाशमान है।सिंध से लेकर पर्शिया (ईरान का पुराना नाम) तक एक ही दिव्यता है,ओम नमः शिवाय! हे महादेव!आप कैलाश के आनंदमय प्रभु हैं…हे शंकर…सत्य ही शिव है! सत्य ही शिव है!आनंदमय, आनंदमय, आनंदमय हैं शिव!सत्य ही शिव है! सत्य ही शिव है!आत्मा में अग्नि! चेतना में अग्नि!आप ही कैलाश हैं, आप ही महान पर्वत हैं!इस जगत में तांडव का नृत्य!हे मेरे महादेव, पवित्र भस्म के स्वामी!हे नीलकंठ! हे शंकर!ओम नमः शिवाय! हे शंकर!आप कैलाश के योगी हैं, आप कैलाश के आनंदमय प्रभु हैं।हे महादेव… यूट्यूब पर यह गाना Beyond Conscious चैनल पर है। इस पर शिवजी के कई और भी भजन हैं।

कुर्सी योग: बढ़ती उम्र में जोड़ों के दर्द और कमजोरी दूर करने का आसान तरीका

नई दिल्ली।बढ़ती उम्र के साथ शारीरिक गतिशीलता और संतुलन बनाए रखना मुश्किल हो जाता है। कई बुजुर्ग फर्श पर बैठने-उठने में असमर्थ हो जाते हैं और पारंपरिक योगासन करना चुनौतीपूर्ण लगता है। ऐसे में कुर्सी योग बुजुर्गों और जोड़ों में कमजोरी या दर्द से पीड़ित लोगों के लिए एक आसान, सुरक्षित और प्रभावी तरीका साबित हो रहा है। कुर्सी योग क्या है और क्यों जरूरीकुर्सी योग में योगासन, प्राणायाम और ध्यान का अभ्यास कुर्सी पर बैठकर या कुर्सी का सहारा लेकर किया जाता है। इसके लिए सिर्फ एक मजबूत और स्थिर कुर्सी की जरूरत पड़ती है। इसे घर पर, पार्क में या किसी सुरक्षित जगह पर आसानी से किया जा सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह उन लोगों के लिए सुलभ और जोखिम-मुक्त विकल्प है, जिन्हें पारंपरिक योग करना मुश्किल लगता है। नियमित अभ्यास से बुजुर्ग अपनी शारीरिक क्षमता बढ़ा सकते हैं और मानसिक रूप से भी स्वस्थ और प्रसन्न रह सकते हैं। कुर्सी योग के लाभकुर्सी योग में कंधे और गर्दन की स्ट्रेचिंग, पैरों की गतिविधियां और सहारे के साथ खड़े होकर किए जाने वाले आसन शामिल होते हैं। ये आसान अभ्यास पारंपरिक योग के जोखिम को कम करते हैं। नियमित अभ्यास के फायदे:जोड़ों की जकड़न कम होती है और मांसपेशियां मजबूत बनती हैं।शरीर में लचीलापन बढ़ता है।प्राणायाम की तकनीक से तनाव और चिंता कम होती है, मानसिक शांति मिलती है।हृदय स्वास्थ्य बेहतर होता है और ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहता है।नींद की गुणवत्ता बढ़ती है। इस प्रकार बुजुर्ग डर या चोट की चिंता किए बिना अपनी शारीरिक क्षमता और संतुलन बनाए रख सकते हैं। अभ्यास की शुरुआत और समयआयुष मंत्रालय के अनुसार कुर्सी योग की शुरुआत सरल आसनों से करनी चाहिए। विशेषज्ञों का सुझाव है कि प्रशिक्षित योग शिक्षक की देखरेख में इसे शुरू करना बेहतर रहता है। सप्ताह में दो-तीन बार, 20 से 30 मिनट का अभ्यास भी काफी फायदेमंद साबित होता है। अभ्यास धीरे-धीरे बढ़ाया जा सकता है और शरीर की क्षमता के अनुसार चुनिंदा आसनों पर ध्यान दिया जा सकता है। कुर्सी योग करते समय सावधानियांकुर्सी योग करते समय कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है: बिना पहियों वाली मजबूत कुर्सी चुनें।कुर्सी की सीट ज्यादा गद्देदार न हो और पीठ सीधी हो।कुर्सी की ऊंचाई ऐसी हो कि पैर पूरी तरह जमीन पर टिके रहें।सुरक्षित स्थान और स्थिर सतह पर ही अभ्यास करें।ये सावधानियां चोट और असंतुलन से बचाव के लिए जरूरी हैं। कुर्सी योग बढ़ती उम्र में जोड़ों के दर्द, मांसपेशियों की कमजोरी और संतुलन की समस्याओं को दूर करने का सरल, सुरक्षित और असरदार तरीका है। नियमित अभ्यास से शारीरिक क्षमता बढ़ती है, मानसिक स्वास्थ्य बेहतर होता है और बुजुर्ग स्वस्थ, सक्रिय और प्रसन्न जीवन जी सकते हैं।

गर्मी में बाहर निकलते ही जलती है त्वचा? अपनाएं ये आसान उपाय

नई दिल्ली। इन आसान उपायों को अपनाकर गर्मियों में भी त्वचा को स्वस्थ, हाइड्रेटेड और ग्लोइंग रखा जा सकता है। नई दिल्ली।गर्मी में बाहर निकलते ही त्वचा में जलन, लालपन और सनबर्न होना आम समस्या है। इसे रोकने और त्वचा को स्वस्थ रखने के लिए कुछ आसान उपाय अपनाए जा सकते हैं: 1. सनस्क्रीन का इस्तेमाल ज़रूरी बाहर जाने से 20 मिनट पहले SPF 30 या उससे अधिक वाला सनस्क्रीन लगाएं। यह त्वचा को हानिकारक UV किरणों से बचाता है और सनबर्न व टैनिंग को रोकता है। 2. त्वचा को हाइड्रेटेड रखें गर्मियों में शरीर और त्वचा दोनों को पानी की आवश्यकता होती है। पर्याप्त पानी पीने से टॉक्सिन बाहर निकलते हैं और त्वचा फ्रेश और ग्लोइंग बनी रहती है। 3. फेस वॉश से दिन में दो-तीन बार सफाई धूल, गर्म हवा और पसीने से त्वचा प्रभावित होती है। सुबह, दिन और रात में माइल्ड फेसवॉश से चेहरा धोएं। इससे त्वचा साफ रहती है और पिंपल्स की समस्या कम होती है। 4. धूप से बचाव बाहर निकलते समय छाता, टोपी या स्कार्फ का इस्तेमाल करें। यह सीधे सूर्य के संपर्क से त्वचा को बचाता है। टैनिंग और जलन की समस्या घटती है। अतिरिक्त टिप्स: हल्के और ढीले कपड़े पहनें, जिससे त्वचा को सांस लेने का मौका मिले। त्वचा को शांत करने के लिए ठंडे पानी से फेस टोनर या कूलिंग जेल इस्तेमाल कर सकते हैं। अगर त्वचा में बहुत जलन या लालपन हो, तो एलोवेरा जेल या कच्चे दही का उपयोग करें।

भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के गुरुवार व्रत में जरूर करें ये काम, काम होंगे सफल!

नई दिल्ली।गुरुवार का दिन भगवान श्रीहरि विष्णु और बृहस्पति देव को समर्पित होता है। इस दिन लोग पीले रंग के कपड़े पहनते हैं, बेसन से बनी चीज़ों का भोग लगाते हैं और व्रत रखते हैं। धर्म-शास्त्रों में कहा गया है कि सात consecutive गुरुवार व्रत करने से बृहस्पति ग्रह से जुड़े अशुभ फल दूर होते हैं और गुरु शुभ फल देने लगते हैं। कथा एक नगर में एक समृद्ध व्यापारी रहता था। वह जहाजों में माल भेजकर बहुत धन कमाता था और दान-पुण्य भी करता था। लेकिन उसकी पत्नी अत्यंत कंजूस थी। एक बार व्यापारी जब व्यापार के लिए बाहर गया, तब बृहस्पति देव साधु वेश में उसकी पत्नी के पास आए और भिक्षा मांगी। पत्नी ने उन्हें अपमानित किया और कहा कि वह अपने धन को दान में नहीं देना चाहती। बृहस्पति देव ने उसे कई पुण्य उपाय सुझाए, लेकिन पत्नी ने उन्हें नहीं माना। बृहस्पति देव ने सलाह दी कि सात गुरुवार विशेष विधि से क्रियाएं करनी होंगी, जिससे उसका धन नष्ट हो जाएगा। पत्नी ने यही किया। केवल तीन गुरुवार बीतने पर सम्पूर्ण संपत्ति नष्ट हो गई और वह परलोक सिधार गई। व्यापारी जब वापस आया, तो उसने देखा कि सब कुछ नष्ट हो चुका है। उसने जंगल से लकड़ी काटकर बेचने का काम शुरू किया, ताकि अपनी पुत्री को जीवित रख सके। बृहस्पति देव का वरदानएक दिन व्यापारी बृहस्पतिवार को दुखी बैठा था, तभी बृहस्पति देव साधु रूप में प्रकट हुए। उन्होंने व्यापारी को गुरुवार के दिन दो पैसे के चने और गुड़ लेकर कथा पढ़ने और प्रसाद वितरित करने का निर्देश दिया। व्यापारी ने ऐसा किया और उसकी कठिनाइयाँ दूर होने लगीं। अगले गुरुवार को उसने कथा नहीं पढ़ी, और परिणामस्वरूप कुछ समस्याएँ फिर सामने आईं। राजा के यज्ञ के समय व्यापारी और उसकी पुत्री को गलत आरोप में कैद कर दिया गया। व्यापारी ने फिर गुरुवार की कथा पढ़कर प्रसाद वितरित किया, जिससे बृहस्पति देव प्रकट हुए और उनकी सभी परेशानियाँ दूर कर दीं। व्यापारी और उसकी पुत्री को मुक्त कर दिया गया और उन्हें आधा राज्य, विवाह हेतु उच्च कुल में दहेज़ और सम्मान मिला। बृहस्पतिवार व्रत का महत्वगुरुवार व्रत से बृहस्पति ग्रह के अशुभ प्रभाव दूर होते हैं।सात गुरुवार व्रत करने से धन, स्वास्थ्य और पारिवारिक सुख में वृद्धि होती है।व्रत के दौरान कथा पढ़ना और प्रसाद बांटना अत्यंत फलदायक है।पीले कपड़े पहनना और बेसन के व्यंजन चढ़ाना शुभ माना गया है। शिक्षा: इस कथा से हमें यह संदेश मिलता है कि गुरु और भगवान का सम्मान करना चाहिए। व्रत और कथा से जीवन की कठिनाइयाँ दूर होती हैं और सुख-समृद्धि आती है।

सुबह का दमदार नाश्ता, देसी प्रोटीन डाइट से पाएं एनर्जी और फिटनेस दोनों

नई दिल्ली। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में फिट और एनर्जेटिक बने रहना हर किसी की प्राथमिकता बन गई है और इसकी शुरुआत होती है सुबह के नाश्ते से। हेल्दी और संतुलित नाश्ता न केवल शरीर को जरूरी पोषण देता है बल्कि पूरे दिन की ऊर्जा का आधार भी बनता है। विशेषज्ञों के अनुसार यदि सुबह के भोजन में प्रोटीन की पर्याप्त मात्रा शामिल की जाए तो यह शरीर को लंबे समय तक एक्टिव बनाए रखने में बेहद मददगार साबित होता है। प्रोटीन हमारे शरीर की मूलभूत जरूरतों में से एक है। यह मांसपेशियों के निर्माण और उनकी मजबूती के लिए जरूरी होता है साथ ही यह भूख को नियंत्रित करने में भी अहम भूमिका निभाता है। सुबह प्रोटीन से भरपूर नाश्ता करने से दिनभर बार बार भूख लगने की समस्या कम हो जाती है और अनहेल्दी स्नैकिंग से बचाव होता है। इसके अलावा यह मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाकर वजन नियंत्रित रखने में भी सहायक होता है। अगर बात करें देसी और स्वादिष्ट विकल्पों की तो भारतीय रसोई में ऐसे कई नाश्ते मौजूद हैं जो प्रोटीन से भरपूर होने के साथ साथ स्वाद में भी लाजवाब होते हैं। इनमें सबसे लोकप्रिय विकल्प है पनीर पराठा जो न केवल स्वादिष्ट होता है बल्कि शरीर को भरपूर प्रोटीन भी देता है। इसी तरह पनीर भुर्जी भी एक बेहतरीन विकल्प है जिसे जल्दी तैयार किया जा सकता है। इसके अलावा मूंग दाल चीला और बेसन चीला जैसे व्यंजन भी प्रोटीन के अच्छे स्रोत हैं। ये हल्के होते हैं और पाचन में भी आसान होते हैं जिससे सुबह के समय शरीर को सही ऊर्जा मिलती है। डेयरी प्रोडक्ट्स भी नाश्ते में शामिल किए जा सकते हैं। दही के साथ ताजे फल और मूंगफली का सेवन शरीर को जरूरी पोषक तत्व प्रदान करता है। वहीं ओट्स या दलिया को दूध के साथ लेना एक संतुलित और सुपाच्य विकल्प माना जाता है खासकर उन लोगों के लिए जिन्हें पाचन संबंधी समस्याएं होती हैं। स्प्राउट्स और छाछ का संयोजन भी काफी फायदेमंद होता है। यह न केवल पाचन को दुरुस्त रखता है बल्कि शरीर को हल्का और ऊर्जावान बनाए रखता है। खासतौर पर जो लोग जिम जाते हैं या शारीरिक रूप से सक्रिय रहते हैं उनके लिए यह नाश्ता काफी लाभकारी होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि सुबह का नाश्ता छोड़ना स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है। कई लोग समय की कमी के कारण नाश्ता नहीं करते लेकिन यह आदत शरीर की कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकती है। ऐसे में यदि विस्तृत नाश्ता संभव न हो तो भी एक गिलास दूध या दही के साथ थोड़ी मूंगफली या ड्राई फ्रूट्स का सेवन जरूर करना चाहिए। कुल मिलाकर यदि दिन की शुरुआत सही खानपान से की जाए तो न केवल शरीर स्वस्थ रहता है बल्कि मानसिक रूप से भी आप अधिक सक्रिय और सकारात्मक महसूस करते हैं। प्रोटीन से भरपूर देसी नाश्ता एक आसान और प्रभावी तरीका है खुद को दिनभर फिट और ऊर्जावान बनाए रखने का।

युद्ध के माहौल में विश्व शांति का शंखनाद है विश्व णमोकार दिवस

-ललित गर्ग विश्व इतिहास के इस संक्रमणकाल में, जब मानवता युद्ध, हिंसा, आतंक, तनाव और असहिष्णुता के बोझ तले कराह रही है, ऐसे समय में 9 अप्रैल 2026 को मनाया जाने वाला विश्व णमोकार मंत्र दिवस एक अद्वितीय आध्यात्मिक ऊर्जा-विस्फोट के रूप में सामने आ रहा है। यह दिवस केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि दिव्य चेतना के जागरण का ऐसा अवसर है, जिसमें सामूहिक मंत्रोच्चारण से उत्पन्न होने वाली चमत्कारी और सिद्ध शक्तियां पूरे विश्व को आलोकित करने वाली हैं। “एक विश्व, एक दिन, एक मंत्र”-इस संकल्प के साथ प्रातः जब संपूर्ण पृथ्वी पर एक साथ णमोकार महामंत्र का उच्चारण होगा, तब यह केवल ध्वनि नहीं होगी, बल्कि एक दिव्य ऊर्जा तरंग का निर्माण होगा। आध्यात्मिक विज्ञान के अनुसार, जब लाखों-करोड़ों लोग एक ही समय पर एक ही पवित्र मंत्र का उच्चारण करते हैं, तो उससे उत्पन्न स्पंदन वातावरण को शुद्ध करते हैं, नकारात्मक ऊर्जा का क्षय करते हैं, सकारात्मक चेतना का तीव्र प्रसार करते हैं और शांति एवं अहिंसा का शंखनाद करते हैं। यह सामूहिक ऊर्जा ‘संकल्प शक्ति’ के रूप में कार्य करती है, जो असंभव को संभव बनाने की क्षमता रखती है। यह विलक्षण दिवस हजारों मंदिरों एवं अन्य स्थलों में जातीय बंधनों को तोड़कर सभी समुदाय, जाति, वर्ग के लोगों को सम्मिलित होने का अवसर देकर एक प्रेरणादीप बनेगा, जहां मैत्री के फूल खिलेंगे, शांति एवं सद्भावना की ज्योति रश्मियां जगमगायेगी। मानव ने ज्ञान-विज्ञान में आश्चर्यजनक प्रगति की है। परन्तु अपने और औरों के जीवन के प्रति सम्मान में कमी आई है। विचार-क्रान्तियां बहुत हुईं, किन्तु आचार-स्तर पर क्रान्तिकारी परिवर्तन कम हुए। शान्ति, अहिंसा और मानवाधिकारों की बातें संसार में बहुत हो रही हैं, किन्तु सम्यक्-आचरण, सम्यक्-चरित्र, सम्यक्-दृष्टि का अभाव अखरता है। सिद्ध एवं चमत्कारी णमोकार महामंत्र सम्यक्-आचरण को उद्घाटित करने वाला किसी धर्म विशेष का नहीं है़, यह एक सार्वभौमिक, सार्वकालिक, सार्वदैशिक मंत्र है, जिसका उच्चारण कर व्यक्ति शुद्ध आचरण एवं स्वस्थ जीवनशैली को आकार देते हुए शांति, अहिंसा, अयुद्ध, सह-जीवन का साकार कर सकता है। ‘णमोकार महामंत्र’ के सामूहिक उच्चारण के माध्यम से दुनिया भर के लोगों को एक सूत्र में पिरोने का प्रयास है। यह आयोजन विश्व शांति, आत्मशांति, सद्भावना और आध्यात्मिक कल्याण को बढ़ावा देने के लिए जैन इंटरनेशनल ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन-जीतो संस्था के द्वारा कराया जा रहा है़। इस विराट आयोजन में 180 से अधिक देशों के लाखों श्रद्धालु भाग लेंगे। विश्वभर में 100 से अधिक मेगा इवेंट्स और 6000 से अधिक मंदिरों एवं स्थलों पर यह सामूहिक जाप होगा। दिल्ली के मुख्य समारोह में भारत के 14वें राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद एवं गृहमंत्री श्री अमित शाह की उपस्थिति इस आयोजन को वैश्विक पहचान प्रदान करेगी। इस आयोजन से उत्पन्न होने वाली चमत्कारी और सिद्ध शक्तियों का वर्णन केवल आस्था का विषय नहीं, बल्कि अनुभव का विषय भी है। यह मंत्र आत्मा के गहनतम स्तर को स्पर्श करता है, जहां से चेतना की शुद्ध धारा प्रवाहित होती है। ऐसा माना जाता है कि इस सामूहिक जाप के दौरान- मानसिक शांति और स्थिरता का अद्भुत अनुभव होता है, जिससे तनाव, भय और अवसाद स्वतः क्षीण होते हैं। आभामंडल की शुद्धि होती है, जिससे व्यक्ति की ऊर्जा सकारात्मक और प्रभावशाली बनती है। रोगों में राहत और स्वास्थ्य में सुधार के अनेक अनुभव सामने आते हैं, क्योंकि सकारात्मक कंपन शरीर की कोशिकाओं को संतुलित करते हैं। संकल्प सिद्धि की शक्ति बढ़ती है अर्थात् जो शुभ संकल्प किए जाते हैं, वे पूर्ण होने की दिशा में तीव्र गति से अग्रसर होते हैं। कर्म निर्जरा (कर्मों का क्षय) की प्रक्रिया तेज होती है, जिससे आत्मा की शुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति संभव होती है। दुनिया में अनेक मंत्र हैं, किंतु दो मंत्र विशेष रूप से प्रभावशाली माने जाते हैं गायत्री मंत्र और णमोकार महामंत्र। णमोकार मंत्र न केवल जैन धर्म का मूल मंत्र है, बल्कि यह आत्मा की शुद्धि और चेतना के उत्कर्ष का सार्वभौमिक सूत्र है। इसकी शक्ति अनंत और अक्षय मानी जाती है। इसमें किसी व्यक्ति का नहीं, किंतु संपूर्ण रूप से विकसित और विकासमान विशुद्ध आत्मस्वरूप का ही दर्शन, स्मरण, चिंतन, ध्यान एवं अनुभव किया जाता है। लौकिक मंत्र आदि सिर्फ लौकिक लाभ पहुँचाते हैं, किंतु लोकोत्तर मंत्र लौकिक और लोकोत्तर दोनों कार्य सिद्ध करते हैं। इसलिए णमोकार मंत्र सर्वकार्य सिद्धिकारक लोकोत्तर मंत्र माना जाता है, सब पापों का नाश करने वाला है, यह अद्भुत शांति का कारक है। यह संसार में सबसे उत्तम मंगल को घटित करने वाला सिद्ध मंत्र है। णमोकार-स्मरण से अनेक लोगों के रोग, दरिद्रता, भय, तनाव, अशांति, विपत्तियाँ दूर होने की अनुभव सिद्ध घटनाएँ सुनी जाती हैं। मन चाहे काम आसानी से बन जाने के अनुभव भी सुने हैं। णमोकार महामंत्र के जाप एवं साधना से उत्पन्न ऊर्जा एक पाथेय है जीवनशैली को बदलने का, पर्यावरण एवं प्रकृति के प्रति जागरूक होने का, शांति एवं अहिंसक जीवनशैली का, शरीर, मन, आत्मा एवं प्रकृति के प्रति सचेत रहने का। मूल्यों का सम्बन्ध तो ‘जियो और जीने दो’ जैसे सरल श्रेष्ठ उद्घोष से है, जो णमोकार महामंत्र की सार्थक निष्पत्ति है। इस मंत्र के प्रथम पाँच पदों में 35 अक्षर और शेष दो पदों में 33 अक्षर हैं। इस तरह कुल 68 अक्षरों का यह महामंत्र समस्त कार्यों को सिद्ध करने वाला व कल्याणकारी अनादि सिद्ध मंत्र है। इसकी आराधना करने वाला स्वर्ग यानी मोक्ष- संसारबंधनों मुक्ति को प्राप्त कर लेता है। यह मन्त्र एक भावना है, एक इच्छा है, एक कामना है जो बार बार दोहराई जाती है ताकि वैसा हो जाए, इस दृष्टि में उन्नत विश्व संरचना, हिंसा एवं युद्ध मुक्ति के लिये यह कारगर है। सह-अस्तित्व के लिए अहिंसा अनिवार्य है और अहिंसा को फलित करने के लिये णमोकार महामंत्र अचूक उपक्रम है, अनुष्ठान है। दूसरों का अस्तित्व मिटाकर अपना अस्तित्व बचाए रखने की कोशिशें व्यर्थ और अन्ततः घातक होती हैं। भगवान् महावीर का संदेश कि “सुख सबको प्रिय है, दुःख अप्रिय”-इस मंत्र की मूल भावना है। जब यह मंत्र करोड़ों कंठों से एक साथ गूंजता है, तो यह केवल शब्द नहीं रहता, बल्कि करुणा, अहिंसा और सह-अस्तित्व की वैश्विक घोषणा बन जाता है। आचार्य उमास्वाति की उक्ति “परस्परोपग्रहो जीवानाम्” इस सामूहिक साधना के माध्यम से जीवंत हो उठती है। गतवर्ष प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी अपने उद्बोधन में इस मंत्र को “आंतरिक क्रांति का माध्यम” बताया था।

वरुथिनी एकादशी 2026: जानें पूजा विधि, व्रत नियम और महत्व

नई दिल्ली। सनातन धर्म में एकादशी का व्रत अत्यंत पवित्र और फलदायी माना गया है वरुथिनी एकादशी इस साल 13 अप्रैल को पड़ रही है और 14 अप्रैल की मध्यरात्रि तक इसकी तिथि रहेगी इस दिन भगवान विष्णु के वामन अवतार की पूजा विशेष रूप से की जाती है मान्यता है कि इस दिन व्रत करने से न केवल पाप नष्ट होते हैं बल्कि जीवन में आने वाली परेशानियां और श्राप भी समाप्त हो जाते हैं वरुथिनी एकादशी अप्रैल माह का पहला एकादशी व्रत है और यह कृष्ण पक्ष की तिथि में आता है इस दिन व्रत रखने वाले श्रद्धालु पूरे दिन भगवान का ध्यान और भजन कर मन और शरीर को शुद्ध करते हैं वरुथिनी एकादशी के दिन अनाज जैसे चावल गेहूं और दालें बिल्कुल नहीं खानी चाहिए क्योंकि इन्हें पचाना कठिन होता है और ये व्रत में ध्यान भंग कर सकते हैं साथ ही बीन्स मटर और भारी भोजन भी वर्जित हैं चाय कॉफी और एनर्जी ड्रिंक्स जैसी कैफीनयुक्त चीजें नहीं लेनी चाहिए इस दिन केवल सात्विक भोजन या फलाहार ही उचित माना गया है मांस मछली प्याज लहसुन जैसी तामसिक वस्तुएं भी वर्जित हैं वरुथिनी एकादशी पर तुलसी की पूजा विशेष महत्व रखती है इसलिए इस दिन तुलसी के पत्ते न तोड़े जाएं और घर में तुलसी का स्थान पवित्र रखा जाए व्रत के दिन बाल धोने से भी परहेज किया जाता है क्योंकि यह दिन आध्यात्मिक शुद्धि और ध्यान का दिन होता है इस दिन भगवान विष्णु के वामन रूप की पूजा करने से विशेष लाभ होता है और जीवन में शांति तथा आत्मिक संतोष प्राप्त होता है यह व्रत श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को सुनाई थी और शुकदेव जी ने राजा परीक्षित को भी इसका महत्व बताया था राजा परीक्षित ने अपने अंतिम समय में इस व्रत और भगवान की भक्ति के माध्यम से मोक्ष का मार्ग पाया था यही कारण है कि वरुथिनी एकादशी का व्रत अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है इस साल वरुथिनी एकादशी का शुभ मुहूर्त 13 अप्रैल को रात 01 बजकर 16 मिनट से शुरू होकर 14 अप्रैल को रात 01 बजकर 08 मिनट पर समाप्त होगा श्रद्धालु इस समय के अनुसार व्रत का पालन और पूजा कर सकते हैं व्रत पूर्ण करने के बाद पारण किया जाता है जिसमें हल्का सात्विक भोजन लिया जा सकता है वरुथिनी एकादशी व्रत रखने से न केवल आध्यात्मिक लाभ होते हैं बल्कि शरीर और मन की शुद्धि भी होती है इससे व्यक्ति का मनोबल बढ़ता है और वह जीवन में सकारात्मक ऊर्जा के साथ आगे बढ़ता है इस दिन का ध्यान और भक्ति जीवन में सुख समृद्धि और शांति का मार्ग खोलती है