बिहार मॉडल पर काम; बंगाल में 15 दिनों तक क्या-क्या करेंगे अमित शाह?

कोलकाता पश्चिम बंगाल की सत्ता पर काबिज होने के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। केंद्रीय गृह मंत्री और भाजपा के रणनीतिकार अमित शाह ने पिछले सप्ताह भवानीपुर में एक बड़ी चुनावी रैली के दौरान घोषणा की कि वे आगामी विधानसभा चुनावों के दौरान लगातार 15 दिनों तक बंगाल में ही प्रवास करेंगे। वहीं, शुभेंदु अधिकारी की नामांकन रैली के दौरान शाह ने हुंकार भरते हुए कहा कि भाजपा इस बार 294 सीटों वाली विधानसभा में 175 से अधिक सीटें जीतकर एक ऐतिहासिक बदलाव लाएगी। अमित शाह का यह ऐलान भवानीपुर की धरती से आया, जो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का अपना निर्वाचन क्षेत्र है। भाजपा ने यहां ममता बनर्जी के कट्टर प्रतिद्वंद्वी शुभेंदु अधिकारी को मैदान में उतारा है। शाह ने इस मुकाबले को बेहद महत्वपूर्ण बताते हुए कहा, “अगर भवानीपुर की जनता भाजपा को यहां जीत दिलाती है, तो बंगाल में सत्ता परिवर्तन अपने आप हो जाएगा। यह ममता दीदी की विदाई का सबसे छोटा रास्ता (शॉर्टकट) होगा।” गौरतलब है कि शुभेंदु अधिकारी ने पिछले चुनाव में नंदीग्राम से ममता बनर्जी को पराजित किया था। इस बार भाजपा ने उन्हें नंदीग्राम और भवानीपुर, दोनों ही हाई-प्रोफाइल सीटों से मैदान में उतारकर मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है। कैसा होगा अमित शाह का 15 दिनों का कैंप प्लान? सूत्रों के अनुसार, अमित शाह का यह 15 दिवसीय प्रवास केवल रैलियों तक सीमित नहीं रहेगा। वे माइक्रो-मैनेजमेंट के तहत राज्य के अलग-अलग हिस्सों में रातें बिताएंगे और वॉर रूम से चुनावी कमान संभालेंगे। अमित शाह सिलीगुड़ी और बालुरघाट जैसे क्षेत्रों में रुकेंगे, जहां 2019 के बाद से भाजपा का प्रदर्शन मजबूत रहा है। वे हुगली, खड़गपुर और दुर्गापुर जैसे इलाकों में भी डेरा डालेंगे। यहां मुख्य ध्यान उन 40 सीटों पर होगा जहां 2021 के चुनाव में भाजपा 5% से भी कम अंतर से हार गई थी। देर रात तक बैठकें शाह की रणनीति का मुख्य हिस्सा रात 2 बजे तक चलने वाली संगठनात्मक बैठकें होंगी। इनमें वे बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं से फीडबैक लेंगे, नाराज नेताओं को मनाएंगे और टिकट वितरण से उपजे असंतोष को दूर करेंगे। MP, महाराष्ट्र और बिहार का फॉर्मूला अमित शाह की यह कार्यशैली नई नहीं है। इससे पहले उन्होंने मध्य प्रदेश (2023), महाराष्ट्र (2024) और बिहार (2025) के विधानसभा चुनावों में भी इसी तरह का गहन प्रवास किया था। बिहार में भाजपा के ऐतिहासिक प्रदर्शन और पहली बार अपना मुख्यमंत्री बनाने की सफलता के पीछे शाह की क्लस्टर रणनीति को ही श्रेय दिया जाता है। बंगाल में भी वे राज्य को विभिन्न सांगठनिक क्लस्टरों में बांटकर खुद निगरानी करेंगे। 2021 के चुनावों में भाजपा ने 3 से सीधे 77 सीटों पर छलांग लगाई थी और उसका वोट शेयर करीब 38% तक पहुंच गया था। हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनावों में तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने वापसी की और भाजपा की सीटों की संख्या 18 से घटकर 12 रह गई। अब अमित शाह का पूरा जोर उन सीटों पर है जिन्हें भाजपा जीतते-जीतते हार गई थी। जलपाईगुड़ी, राजगंज और मेखलीगंज जैसे क्षेत्रों में शाह खुद रणनीति बनाएंगे ताकि पिछली गलतियों को न दोहराया जाए।
आईपीएल 2026 में राजस्थान रॉयल्स का दबदबा, हर तरफ गुलाबी जर्सी का जलवा

नई दिल्ली।आईपीएल 2026 में राजस्थान रॉयल्स (आरआर) का शानदार प्रदर्शन लगातार जारी है। गुवाहाटी में खेले गए 13वें मुकाबले में मुंबई इंडियंस को 27 रन से हराकर टीम ने न सिर्फ अपनी जीत की हैट्रिक लगाई, बल्कि अंकतालिका में भी पहला स्थान मजबूती से कायम रखा। इस सीजन में आरआर का संतुलित खेल उन्हें बाकी टीमों से अलग बना रहा है। अंकतालिका में टॉप पर कायम राजस्थानतीन मैचों में तीन जीत के साथ राजस्थान रॉयल्स 6 अंकों के साथ शीर्ष पर है। पंजाब किंग्स 5 अंकों के साथ दूसरे स्थान पर बनी हुई है, जबकि रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु और दिल्ली कैपिटल्स 4-4 अंकों के साथ क्रमशः तीसरे और चौथे स्थान पर हैं।सनराइजर्स हैदराबाद, लखनऊ सुपर जायंट्स और मुंबई इंडियंस जैसी टीमें अभी लय हासिल करने की कोशिश में हैं, जबकि चेन्नई सुपर किंग्स का प्रदर्शन सबसे निराशाजनक रहा है। ऑरेंज कैप पर यशस्वी का कब्जाराजस्थान के युवा ओपनर यशस्वी जायसवाल इस समय शानदार फॉर्म में हैं। मुंबई के खिलाफ 32 गेंदों में नाबाद 77 रन की विस्फोटक पारी ने उन्हें ऑरेंज कैप दिला दी है।जायसवाल के नाम अब 3 मैचों में 170 रन हो चुके हैं। दूसरे स्थान पर दिल्ली कैपिटल्स के समीर रिजवी हैं, जिन्होंने 2 मैचों में 160 रन बनाए हैं।दिल्ली और गुजरात के बीच होने वाला अगला मुकाबला इस रेस को और रोमांचक बना सकता है। पर्पल कैप भी राजस्थान के नामगेंदबाजी में भी राजस्थान रॉयल्स पीछे नहीं है। टीम के स्पिनर रवि बिश्नोई 3 मैचों में 7 विकेट लेकर पर्पल कैप अपने नाम किए हुए हैं।मुंबई के खिलाफ भी उन्होंने अहम मौकों पर विकेट निकालकर टीम की जीत में बड़ा योगदान दिया। उनकी कसी हुई गेंदबाजी विरोधी बल्लेबाजों के लिए लगातार चुनौती बन रही है। क्यों मजबूत दिख रही है राजस्थान?राजस्थान रॉयल्स की सफलता का सबसे बड़ा कारण उनका ऑलराउंड प्रदर्शन है। बल्लेबाजी में जायसवाल और युवा खिलाड़ियों का आक्रामक अंदाज, जबकि गेंदबाजी में बिश्नोई जैसे खिलाड़ियों की धार टीम को संतुलन देती है।साथ ही टीम की रणनीति और कप्तानी भी बेहद प्रभावी रही है, जिससे हर मैच में दबाव बनाकर जीत हासिल की जा रही है। आगे की राहअब तक के प्रदर्शन को देखते हुए राजस्थान रॉयल्स प्लेऑफ की मजबूत दावेदार बन चुकी है। हालांकि टूर्नामेंट अभी लंबा है और अन्य टीमें भी वापसी कर सकती हैं। ऐसे में आरआर को अपनी लय बरकरार रखनी होगी।
BCB अध्यक्ष तमीम इकबाल का बड़ा ऐलान: गलतियों से सीखकर वापस लाएंगे प्रतिष्ठा

नई दिल्ली। तमीम इकबाल ने Bangladesh Cricket Board (BCB) के नए अध्यक्ष के तौर पर अपनी पहली बैठक में बड़ा संदेश दिया है। मीरपुर स्थित शेर-ए-बांग्ला नेशनल स्टेडियम में आयोजित इस बैठक के बाद उन्होंने साफ कहा कि पिछले डेढ़ साल में बांग्लादेश क्रिकेट की छवि को जो नुकसान हुआ है, उसे मिलकर ठीक करना ही उनकी प्राथमिकता है। ‘प्रतिष्ठा वापस लाना हमारी जिम्मेदारी’तमीम ने कहा कि क्रिकेट सिर्फ खेल नहीं, बल्कि देश के गर्व का प्रतीक है। ऐसे में बोर्ड से जुड़े हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है कि वह इसकी खोई हुई प्रतिष्ठा को वापस लाए। उन्होंने स्वीकार किया कि हाल के समय में क्रिकेट की साख पर असर पड़ा है, लेकिन अब इसे सुधारने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे। खिलाड़ियों और स्टेकहोल्डर्स को मिलेगा सम्माननए अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि उनका पहला फोकस खिलाड़ियों और सभी हितधारकों (स्टेकहोल्डर्स) का सम्मान सुनिश्चित करना होगा। उन्होंने कहा कि सिर्फ बातें नहीं, बल्कि सिस्टम में वास्तविक बदलाव लाए जाएंगे ताकि हर स्तर पर पारदर्शिता और भरोसा कायम हो सके। ‘गलतियां होंगी, लेकिन उनसे सीखेंगे तमीम इकबाल ने साफ शब्दों में कहा कि बदलाव के दौरान गलतियां होना स्वाभाविक है, लेकिन उनसे सीखना ही आगे बढ़ने का रास्ता है। उन्होंने भरोसा जताया कि बोर्ड और टीम दोनों मिलकर बेहतर प्रदर्शन की दिशा में काम करेंगे। 90 दिनों में चुनाव कराने की जिम्मेदारी नेशनल स्पोर्ट्स काउंसिल ने एड-हॉक कमेटी को 90 दिनों के भीतर चुनाव कराने का जिम्मा सौंपा है। तमीम ने कहा कि यह चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से जल्द से जल्द कराए जाएंगे। हालांकि उन्होंने खुद चुनाव लड़ने पर कोई स्पष्ट बयान नहीं दिया। ICC बैठकों में करेंगे प्रतिनिधित्वएड-हॉक कमेटी के सदस्य तंजिल चौधरी के अनुसार, तमीम आने वाली International Cricket Council (ICC) की बैठकों में बांग्लादेश का प्रतिनिधित्व करेंगे। इसके साथ ही कमेटी रोजमर्रा के क्रिकेट संचालन और आगामी टूर्नामेंट्स की तैयारियों पर भी नजर रखेगी। सभी को साथ लेकर चलने पर जोरतमीम ने कहा कि चुनावी प्रक्रिया में सभी—मौजूदा बोर्ड सदस्य, खिलाड़ी और आयोजक—शामिल हों, यही उनकी कोशिश रहेगी। उनका लक्ष्य एक ऐसा माहौल बनाना है, जहां हर किसी को बराबर का अवसर मिले और क्रिकेट प्रशासन मजबूत हो।
उज्जैन हवाई पट्टी का बड़ा विस्तार कैबिनेट ने 437 एकड़ जमीन अधिग्रहण को दी मंजूरी

उज्जैन । मध्य प्रदेश सरकार ने उज्जैन में हवाई पट्टी के विस्तार के लिए बड़ा फैसला लिया है। राज्य कैबिनेट ने इस परियोजना के तहत 437.5 एकड़ जमीन के अधिग्रहण को मंजूरी दी है। अनुमानित लागत 590 करोड़ रुपये है। यह कदम उज्जैन को एक प्रमुख धार्मिक और पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने और बड़ी विमानों जैसे बोइंग और एयरबस 320 के संचालन को सक्षम बनाने के लिए उठाया गया है। अधिकारी ने बताया कि केंद्र सरकार की उड़ान योजना के तहत राज्य सरकार और भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण के बीच समझौता हो चुका है। सरकारी हवाई पट्टी के विकास और विस्तार के लिए सभी समझौते और समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए जा चुके हैं। उज्जैन महाकालेश्वर मंदिर और सांदीपनी आश्रम जैसे धार्मिक स्थलों के लिए भी जाना जाता है। यहां हर साल दूर-दूर से श्रद्धालु और पर्यटक आते हैं। उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ महाकुंभ को देखते हुए, कैबिनेट ने तय किया है कि संबंधित सभी विकास कार्य दिवाली 2027 तक पूरे हो जाएं। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने निर्देश दिए हैं कि उज्जैन में हो रहे सभी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित की जाए और उन्हें थर्ड पार्टी ऑडिट कराया जाए। 100 किलोमीटर के दायरे में होमस्टे, पार्किंग और जन-सुविधाओं को बढ़ाया जाएगा। इसके अलावा, क्षिप्रा नदी पर पैदल मार्ग के लिए अलग पुल बनाने का आदेश भी दिया गया है। सिंहस्थ महाकुंभ 2028 के लिए बनाई गई कैबिनेट कमेटी ने कुल 2,923 करोड़ रुपये की लागत से 22 विकास कार्यों को मंजूरी दी है। इसमें सड़कों का निर्माण, भवनों का निर्माण और तीर्थ स्थलों तक बेहतर पहुंच सुनिश्चित करना शामिल है। इसके अलावा, कैबिनेट ने किसानों के हित में गेहूं की खरीद 10 अप्रैल की बजाय 9 अप्रैल से शुरू करने की मंजूरी भी दी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उज्जैन हवाई पट्टी का यह विकास न केवल धार्मिक और पर्यटन दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि भविष्य में प्रदेश के लिए आर्थिक और लॉजिस्टिक दृष्टि से भी फायदेमंद होगा।
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दलों का दलित वोट पर विशेष फोकस।

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दलों ने दलित वोट बैंक को साधने के लिए पूरी तैयारी शुरू कर दी है। सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी, समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और कांग्रेस सभी अपने-अपने स्तर पर दलित वर्ग में अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति बना रहे हैं। अंबेडकर जयंती के मौके पर यह प्रतिस्पर्धा और भी स्पष्ट रूप से देखने को मिल रही है। भाजपा ने पिछले लोकसभा चुनाव में अपेक्षित सफलता न मिलने के बाद से ही दलित वोटों को सहेजने की कवायद शुरू कर दी थी। संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह ने इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभाई। उन्होंने दलित पेशेवरों के बीच जाकर उनकी समस्याओं और अपेक्षाओं को समझने का प्रयास किया, कई संगोष्ठियों का आयोजन किया और 45 जिलों में सरकारी योजनाओं की जानकारी साझा की। इसी प्रक्रिया के तहत सरकार ने अंबेडकर मूर्ति विकास योजना की शुरुआत की है, जिसके अंतर्गत बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर के साथ-साथ संत रविदास, कबीर, ज्योतिबा फुले और महर्षि वाल्मीकि जैसी महान विभूतियों की मूर्तियों का सौंदर्यीकरण और संरक्षण किया जाएगा। आगामी 14 अप्रैल को हर विधानसभा क्षेत्र में इस योजना को लेकर विशेष कार्यक्रम आयोजित होंगे, जिसमें स्थानीय जनप्रतिनिधि जनता को जानकारी देंगे। भाजपा का कहना है कि उसकी सरकार ने दलित उत्थान के लिए लगातार काम किया है, जबकि सपा सरकारों में दलितों का उत्पीड़न हुआ। समाजवादी पार्टी ने लोकसभा चुनाव में मिले उत्साह को आधार बनाकर दलित वर्ग पर विशेष ध्यान देना शुरू किया है। पार्टी ने बसपा से आए नेताओं की मदद से दलित समाज में पैठ बनाने का काम तेज कर दिया है। कांशीराम जयंती और अंबेडकर जयंती मनाने की परंपरा को सपा ने फिर से शुरू किया है। पार्टी का कहना है कि भाजपा की दलित नीति केवल चुनावी प्रतीकात्मक राजनीति है और वास्तविक लाभ नहीं पहुंचाती। कांग्रेस भी उत्तर प्रदेश में दलित वोटों को साधने के लिए प्रयासरत है। पार्टी ने पूर्व लोकसभा स्पीकर मीरा कुमार को बुलाया और कई कार्यक्रम आयोजित किए। कांग्रेस का दावा है कि उसने सरकारों के दौरान दलितों के लिए प्रभावी योजनाएं और कानून बनाए हैं, जबकि भाजपा केवल चुनावी हथकंडे अपनाती है। बहुजन समाज पार्टी अपने पारंपरिक जाटव वोट बैंक को मजबूत बनाए रखने पर ध्यान केंद्रित कर रही है। पार्टी लगातार प्रमोशन, आरक्षण और गेस्ट हाउस कांड जैसे मुद्दों को उठाकर सपा को आगाह कर रही है। मायावती दलित राजनीति में प्रमुख चेहरा मानी जाती हैं और ब्राह्मण-दलित समीकरण को साधने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन बदलते राजनीतिक परिदृश्य चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश, अवध और पूर्वांचल क्षेत्रों में दलित वोट कई सीटों पर जीत और हार तय करने वाला है। इसी कारण सभी दल इस वर्ग पर विशेष ध्यान दे रहे हैं। 2027 का विधानसभा चुनाव उत्तर प्रदेश में दलित वोट बैंक के इर्द-गिर्द घूमता दिखाई दे रहा है, और यह चुनावी रणनीतियों के केंद्र में है।
एफसी बायर्न म्यूनिख ने रियल मैड्रिड को 2-1 से हराकर मचाया धमाल!

नई दिल्ली। FC बायर्न म्यूनिख ने शानदार प्रदर्शन करते हुए रियल मैड्रिड को चैंपियंस लीग क्वार्टरफाइनल के पहले लेग में 2-1 से हराकर सेमीफाइनल की राह आसान कर ली है। घरेलू मैदान पर खेले गए इस फाइट में बायर्न ने शुरुआत से ही दबदबा बनाए रखा और मैच पर कंट्रोल रखा। डियाज और केन ने बढ़त बनाईबायर्न के लिए लुइस डियाज ने 40वें मिनट में शानदार गोल कर टीम को बढ़त दिलाई। इसके बाद दूसरे हाफ की शुरुआत में हैरी केन ने बेहतरीन शॉट लगाकर स्कोर 2-0 कर दिया। केन की फिटनेस को लेकर मैच से पहले सवाल थे, लेकिन उन्होंने मैदान पर उतरते ही अपना असर दिखाया। न्यूएयर की दीवार, मैड्रिड के मौके पर फ्रिज मैड्रिड की ओर से किलियन एम्बाप्पे और विनीसियस जूनियर ने कई आक्रामक मूव बनाए, लेकिन बायर्न के गोलकीपर मैनुअल न्यूएयर ने शानदार बचाव करते हुए टीम को बढ़त बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई। एम्बाप्पे ने उम्मीद जगाई, लेकिन बायर्न की जीत हुईमैड्रिड ने दूसरे हाफ में वापसी की कोशिश की। जूड बेलिंगहैम को 72वें मिनट में मैदान पर उतारा गया, जिसके बाद टीम की आक्रमण क्षमता बढ़ी। 74वें मिनट में एम्बाप्पे ने गोल कर स्कोर 2-1 किया और मुकाबले में रोमांच भर दिया, लेकिन इसके बाद मैड्रिड बराबर नहीं कर सका। बायर्न के पास बड़ा अंतर बनाने का मौकाबायर्न ने पूरे मैच में कई और मौके बनाए, लेकिन जमाल मुसियाला समेत अन्य खिलाड़ी उन्हें गोल में मुकाबला नहीं कर सके। अगर ये मौके फायदे के लिए जाते, तो जीत का अंतर और बड़ा हो सकता था। अब दूसरे लेग पर नजरइस जीत के साथ बायर्न म्यूनिख ने क्वार्टरफाइनल के पहले लेग में महत्वपूर्ण बढ़त बना ली है। अब दूसरे लेग में टीम इस बढ़त को कायम रखते हुए सेमीफाइनल में जगह पक्की करने के इरादे से उतरेगी, जबकि रियल मैड्रिड को वापसी के लिए जोरदार प्रदर्शन करना होगा।
क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने महिला खिलाड़ियों के सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट का किया ऐलान

नई दिल्ली। क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने 2026-27 सीज़न के लिए अपनी महिला टीम की सेंट्रल चैंपियनशिप की घोषणा कर दी है। इस बार 18 खिलाड़ियों की सूची में युवा और उभरते रायपुर के स्थान पर चयनकर्ता ने की भविष्य की टीम तैयार करने के संकेत दिए हैं। नए ज्वालामुखी का उद्भव, आइंसवर्थ को बिना आरंभ अवसरइस सांस्कृतिक सूची में दो नए नाम विशेष चर्चा में हैं—लूसी हैमिल्टन और क्लो आइंसवर्थ।हैमिल्टन ने हाल ही में शानदार प्रदर्शन करते हुए हॉस्टल में शुरूआत कर चयन से प्रभावित किया। लगभग तीन टी अलग-अलग में उन्होंने कहा, परीक्षण और 20 में अपना आकलन दर्ज किया गया। वहीं 20 साल की तेजतर्रार टीम आइंसवर्थ को अभी तक इंटरनेशनल रिज्यूमे का मौका नहीं मिला है, लेकिन घरेलू क्रिकेट और विमेंस बिग बैश लीग में शानदार प्रदर्शन के दम पर उन्हें सेंट्रल सेंट्रल चैंपियनशिप दी गई है। यह उनके कैथोलिक बोर्ड के कथन को अलग करता है। निकोला कैरी की वापसी, अनुभव का मिलान महत्वपूर्णनिकोला कैरी की भी क्लासिक लिस्ट में वापसी हुई है। उन्होंने 2023 में खुद को थिएटर से बाहर घरेलू क्रिकेट और विदेशी लीग में अपने स्टेडियमों को उजागर किया था। हाल ही में भारत की सीरीज के खिलाफ उनके प्रदर्शन ने सेलेक्शन पोर्टफोलियो को प्रभावित किया, जिसके बाद उन्हें फिर से टीम में जगह मिल गई। हीली आउट, कुछ बड़े नाम भी लिस्ट से गायबपूर्व कैप्टन एलिसा हीली को इस बार क्लैन्सल से बाहर कर दिया गया है, क्योंकि उन्होंने क्रिकेट टेस्ट से संन्यास ले लिया है। इसके अलावा इस सूची में टेस फ्लिंटॉफ और टायला व्लामिन्क के अलावा कोई भी शामिल नहीं है। व्लामिन्क चोट अभी भी लगातार जारी हैं, जबकि फ्लिंटॉफ को राष्ट्रीय टीम में ज्यादा अंक नहीं मिले। चयन रणनीतिक का फोकस भविष्य परचयनकर्ता शॉन फ्लेगलर ने स्पष्ट किया कि अभी भी उत्कृष्ट खिलाड़ी का चयन दौड़ में है। इस बार टीम चयन में युवा खिलाड़ियों को भविष्य की मजबूत टीम तैयार करने पर जोर दिया गया है। 18 खिलाड़ियों की संगीतमय सूचीइस सूची में ऐलिस पेरी, बेथ मूनी, एशले गार्डनर, मेगन शट्ट, ताहलिया मैकग्राथ, एनाबेल सदरलैंड जैसे अनुभवी नाम भी शामिल हैं, जो टीम की जगहें बनाते हैं।
मुरैना हत्याकांड पर उमंग सिंघार का वार बोले प्रदेश में कानून का डर खत्म

भोपाल । मध्य प्रदेश के भोपाल में सियासी हलचल उस वक्त तेज हो गई जब उमंग सिंघार ने मुरैना में हुई दर्दनाक घटना को लेकर राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सिंघार ने रेत माफिया द्वारा वन विभाग के आरक्षक की हत्या को कानून व्यवस्था की बड़ी विफलता बताया दरअसल हाल ही में मुरैना में अवैध रेत खनन को रोकने गई टीम पर हमला हुआ था जिसमें वन विभाग के आरक्षक हरकेश गुर्जर की ट्रैक्टर से कुचलकर हत्या कर दी गई इस घटना ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए उमंग सिंघार ने कहा कि प्रदेश में कानून व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी है और अपराधियों के हौसले लगातार बढ़ते जा रहे हैं उन्होंने कहा कि जिस तरह दिनदहाड़े रेत माफिया ने कानून के रक्षक पर हमला कर उसकी जान ले ली वह बेहद भयावह और चिंताजनक है सिंघार ने अपने बयान में साफ तौर पर कहा कि यह घटना इस बात का संकेत है कि अपराधियों में अब कानून का कोई डर नहीं बचा है उन्होंने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि प्रदेश में अवैध खनन माफिया खुलेआम सक्रिय हैं और प्रशासन उन्हें रोकने में नाकाम साबित हो रहा है नेता प्रतिपक्ष ने यह भी कहा कि इस तरह की घटनाएं केवल एक व्यक्ति की मौत नहीं बल्कि पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े करती हैं उन्होंने मांग की कि दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए और प्रदेश में कानून व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं मुरैना की यह घटना अब सिर्फ एक आपराधिक मामला नहीं रह गई है बल्कि इसने प्रदेश की सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर व्यापक बहस छेड़ दी है आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी और भी तेज होने की संभावना है
आईपीएल 2026: यशस्वी जायसवाल का ‘स्पेशल शतक’, RR के दिग्गजों के क्लब में एंट्री

नई दिल्ली। आईपीएल 2026 में यशस्वी जायसवाल ने एक बार फिर अपनी क्लास दिखाते हुए ऐसा कारनामा कर दिया, जिसने उन्हें राजस्थान रॉयल्स के खास बल्लेबाजों की लिस्ट में शामिल कर दिया। मुंबई इंडियंस के खिलाफ खेले गए मुकाबले में उनकी विस्फोटक पारी ने न सिर्फ टीम को मजबूत शुरुआत दिलाई, बल्कि उन्हें एक बड़े रिकॉर्ड क्लब में भी जगह दिला दी। 32 गेंदों में 77 रन, और पूरा किया ‘छक्कों का शतक’मुंबई इंडियंस के खिलाफ जायसवाल ने सिर्फ 32 गेंदों में 77 रनों की तूफानी पारी खेली, जिसमें 10 चौके और 4 छक्के शामिल रहे। जैसे ही उन्होंने चौथा छक्का लगाया, वैसे ही आईपीएल में राजस्थान रॉयल्स के लिए उनके 100 छक्के पूरे हो गए। यह उपलब्धि उन्हें टीम के चुनिंदा दिग्गज बल्लेबाजों के क्लब में ले आई। सैमसन-बटलर-वॉटसन के क्लब में शामिलजायसवाल से पहले यह उपलब्धि सिर्फ तीन बल्लेबाजों ने हासिल की थी—संजू सैमसन (192 छक्के), जोस बटलर (135 छक्के) और शेन वॉटसन (109 छक्के)। अब जायसवाल भी इस खास सूची का हिस्सा बन गए हैं, जो उनके लगातार शानदार प्रदर्शन का प्रमाण है। आंकड़े बताते हैं क्यों हैं खासआईपीएल 2020 से राजस्थान के लिए खेल रहे जायसवाल ने अब तक 70 मैचों में 2,336 रन बनाए हैं। उनके नाम 2 शतक और 17 अर्धशतक दर्ज हैं। इस दौरान उन्होंने 277 चौके और 100 छक्के जड़े हैं। उनका औसत 36.50 और स्ट्राइक रेट 153.58 रहा है, जो उनकी आक्रामक बल्लेबाजी का साफ संकेत देता है। हर मौके पर साबित कर रहे खुद कोजायसवाल को भारतीय टीम में टेस्ट फॉर्मेट का नियमित खिलाड़ी माना जाता है, लेकिन सीमित ओवरों में उनकी जगह अभी पूरी तरह स्थिर नहीं है। इसके बावजूद वह हर मौके पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रहे हैं और लगातार चयनकर्ताओं को मजबूत संदेश दे रहे हैं। बदलती टीमें, लेकिन कायम विरासतदिलचस्प बात यह है कि संजू सैमसन अब चेन्नई सुपर किंग्स का हिस्सा हैं, जबकि जोस बटलर गुजरात टाइटंस के लिए खेल रहे हैं। वहीं शेन वॉटसन संन्यास लेकर अब कोचिंग भूमिका में हैं। ऐसे में जायसवाल नई पीढ़ी के उस खिलाड़ी के रूप में उभर रहे हैं, जो इस विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं।
पांच बार की चैंपियन मुंबई इंडियंस के विजय रथ पर बाहरी मैदानों पर लगा ब्रेक और जीत के गिरते आंकड़ों ने बढ़ाई टीम प्रबंधन की चिंता

नई दिल्ली। इंडियन प्रीमियर लीग के पिछले कुछ वर्षों के प्रदर्शन पर नजर डालें तो मुंबई इंडियंस का घर से बाहर खेलने का रिकॉर्ड सभी दस टीमों के मुकाबले सबसे कमजोर पाया गया है। साल 2023 के सीजन से लेकर अब तक मुंबई की टीम अपने विदेशी यानी अवे मैचों में केवल 36 प्रतिशत मुकाबले ही जीतने में सफल रही है। यह आंकड़ा लीग की अन्य सभी टीमों के बीच सबसे न्यूनतम जीत प्रतिशत है। जहां अन्य टीमें विपक्षी टीम के मैदान पर जाकर अंक बटोरने में सफल रही हैं वहीं मुंबई इंडियंस के दिग्गज खिलाड़ी विदेशी पिचों की परिस्थितियों और वातावरण के साथ तालमेल बिठाने में लगातार संघर्ष करते नजर आए हैं। यह गिरावट उस टीम के लिए बहुत बड़ा झटका है जिसने कभी पूरे भारत के हर मैदान पर अपनी धाक जमाई थी। घर से बाहर खेलते समय टीम की मुख्य समस्या निरंतरता की कमी और दबाव के क्षणों में बिखर जाना रही है। आंकड़ों के मुताबिक वानखेड़े की पिच पर मुंबई के बल्लेबाज जिस निडरता के साथ खेलते हैं वैसी बल्लेबाजी चेपॉक या ईडन गार्डन्स जैसे बड़े मैदानों पर दिखाई नहीं देती। इसके अलावा गेंदबाजी विभाग भी अवे मैचों में रनों की गति पर अंकुश लगाने और नियमित अंतराल पर विकेट निकालने में पिछड़ता रहा है। 36 प्रतिशत का यह जीत का आंकड़ा दर्शाता है कि टीम अपनी घरेलू परिस्थितियों पर अत्यधिक निर्भर हो चुकी है और बाहर के मैदानों की चुनौती स्वीकार करने में उसकी रणनीतिक तैयारी अपर्याप्त साबित हो रही है। किसी भी टीम के लिए प्लेऑफ की राह तभी आसान होती है जब वह अपने घर के साथ-साथ विपक्षी के मैदान पर भी अंक हासिल करे। इस निराशाजनक प्रदर्शन के पीछे कई कारण माने जा रहे हैं जिनमें टीम के संतुलन में बदलाव और प्रमुख खिलाड़ियों की चोटें शामिल हैं। हालांकि मुंबई इंडियंस के पास विश्व स्तरीय प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है लेकिन मैदान पर उनका सामूहिक प्रदर्शन वह परिणाम नहीं दे पा रहा है जिसकी उम्मीद उनके करोड़ों प्रशंसक करते हैं। विपक्षी टीमें अब मुंबई की इस कमजोरी को भांप चुकी हैं और अपने घरेलू मैदान पर उन्हें घेरने की विशेष योजनाएं बना रही हैं। यदि मुंबई इंडियंस को अपनी पुरानी साख वापस पानी है और आगामी सीजन में खिताब की दौड़ में मजबूती से शामिल होना है तो उन्हें घर से बाहर खेलने की अपनी रणनीति में आमूलचूल परिवर्तन करना होगा और खिलाड़ियों के आत्मविश्वास को फिर से जगाना होगा।