रेत माफिया का आतंक मुरैना में गश्ती दल पर हमला वन आरक्षक की मौके पर मौत

मुरैना । मध्य प्रदेश के मुरैना जिले से एक बेहद दर्दनाक और चौंकाने वाली घटना सामने आई है जहां अवैध रेत खनन के खिलाफ कार्रवाई करने निकली टीम पर माफिया ने जानलेवा हमला कर दिया इस हमले में एक वन आरक्षक की मौके पर ही मौत हो गई जिससे पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है जानकारी के मुताबिक यह घटना दिमनी थाना क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्ग 552 के पास की है जहां चंबल नदी के ऐसाह घाट से अवैध रेत खनन और परिवहन की शिकायतें लगातार मिल रही थीं इसी सूचना के आधार पर अंबाह रेंज की वन विभाग की टीम तड़के सुबह गश्त पर निकली थी गश्ती के दौरान रथोल का पुरा और रानपुर के बीच वन आरक्षक हरिकेश गुर्जर ने रेत से भरे एक ट्रैक्टर ट्रॉली को रोकने की कोशिश की लेकिन चालक ने रुकने के बजाय बेरहमी से वाहन उन पर चढ़ा दिया जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई घटना को अंजाम देने के बाद आरोपी वाहन लेकर फरार हो गया घटना के बाद वन विभाग की टीम ने तुरंत घायल वनकर्मी को अस्पताल पहुंचाया लेकिन तब तक उनकी जान जा चुकी थी सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया परिजन भी जिला अस्पताल पहुंचे जिससे माहौल गमगीन हो गया बताया जा रहा है कि हरिकेश गुर्जर हाल ही में दूसरे जिले से स्थानांतरित होकर अंबाह रेंज में पदस्थ हुए थे उनकी इस तरह की मौत ने एक बार फिर अवैध खनन के बढ़ते खतरे और उसमें शामिल माफियाओं के हौसलों को उजागर कर दिया है मामले पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने आरोपी के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है और उसकी पहचान भी कर ली गई है सुरेन्द्र पाल सिंह डाबर ने बताया कि आरोपी की तलाश तेज कर दी गई है और जल्द ही उसे गिरफ्तार कर लिया जाएगा इस घटना को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं उमंग सिंघार ने राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े किए उन्होंने कहा कि प्रदेश में अपराधियों के हौसले बुलंद हैं और कानून का डर खत्म होता जा रहा है यह घटना न केवल कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है बल्कि यह भी दिखाती है कि अवैध खनन का नेटवर्क कितना खतरनाक हो चुका है जब कानून की रक्षा करने वाले ही सुरक्षित नहीं हैं तो आम लोगों की सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल खड़े होते हैं ऐसे में जरूरी है कि प्रशासन इस मामले में सख्त कार्रवाई करे और दोषियों को जल्द से जल्द सजा दिलाई जाए
रणवीर सिंह की फिल्म धुरंधर 2 की अपार सफलता के बीच दीपिका की चुप्पी ने छेड़ी नई बहस और ट्रोलर्स को मिला करारा जवाब
नई दिल्ली। ग्लैमर की दुनिया में अक्सर यह माना जाता है कि यदि कोई बात सोशल मीडिया पर साझा नहीं की गई तो वह घटित ही नहीं हुई है लेकिन दीपिका पादुकोण ने इस धारणा को चुनौती देते हुए अपनी बात रखी है। उन्होंने संकेत दिया कि एक कलाकार और एक जीवनसाथी के तौर पर वे अपने रिश्तों को कैमरा और सोशल मीडिया की चकाचौंध से दूर रखना पसंद करती हैं। रणवीर सिंह की फिल्म धुरंधर 2 ने बॉक्स ऑफिस पर सफलता के नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं और प्रशंसकों का एक वर्ग यह उम्मीद कर रहा था कि दीपिका कोई खास पोस्ट साझा करेंगी। हालांकि जब ऐसा नहीं हुआ तो ट्रोलर्स ने उनके व्यवहार पर सवाल उठाए जिसके जवाब में दीपिका ने अपनी निजता और व्यक्तिगत स्पेस को सर्वोपरि रखने की बात कही है। दीपिका का मानना है कि सफलता और खुशी साझा करने के लिए प्रत्यक्ष संवाद और व्यक्तिगत उपस्थिति कहीं अधिक प्रभावी होती है बजाय इसके कि इसे केवल डिजिटल लाइक्स और कमेंट्स तक सीमित रखा जाए। रणवीर और दीपिका की जोड़ी ने हमेशा एक-दूसरे के करियर का समर्थन किया है और कई मौकों पर वे सार्वजनिक रूप से एक-दूसरे की सराहना करते नजर आए हैं। इस बार दीपिका ने अपनी चुप्पी के माध्यम से यह संदेश देने की कोशिश की है कि उनके बीच का समीकरण किसी भी बाहरी शोर या सोशल मीडिया के मानदंडों से बहुत ऊपर है। उन्होंने उन लोगों को भी आईना दिखाया है जो केवल ऑनलाइन सक्रियता के आधार पर किसी के रिश्ते की गहराई को मापने की कोशिश करते हैं। फिल्म जगत के जानकारों का कहना है कि कलाकारों की निजी जिंदगी पर लगातार निगरानी और छोटी-छोटी बातों पर ट्रोलिंग का बढ़ता चलन चिंताजनक है। दीपिका पादुकोण ने इस स्थिति को बहुत ही परिपक्वता के साथ संभाला और यह प्रदर्शित किया कि वे अपने जीवन के निर्णय स्वयं लेने में सक्षम हैं। रणवीर सिंह की सफलता पर उनकी खुशी उनके व्यक्तिगत दायरे का हिस्सा है जिसे वे दुनिया के सामने प्रदर्शित करने के लिए बाध्य नहीं महसूस करतीं। इस पूरे प्रकरण ने एक बार फिर से सेलिब्रिटीज की निजता और प्रशंसकों की अपेक्षाओं के बीच के बारीक अंतर पर बहस छेड़ दी है जिसमें दीपिका का पक्ष काफी मजबूत और तर्कसंगत नजर आता है।
आस्था और तकनीक के बीच संतुलन बनाने की सबसे बड़ी चुनौती और नमित मल्होत्रा का फिल्म की गुणवत्ता को लेकर किया गया सबसे बड़ा वादा

नई दिल्ली। सिनेमा जगत में जब भी किसी बड़े बजट की और धार्मिक आस्था से जुड़ी फिल्म का निर्माण होता है तो तकनीक और प्रस्तुतिकरण को लेकर दर्शकों की अपेक्षाएं बहुत अधिक होती हैं। नमित मल्होत्रा ने हालिया चर्चाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि फिल्म निर्माण की प्रक्रिया में वीएफएक्स और विजुअल इफेक्ट्स केवल एक साधन हैं जिसका उपयोग कहानी को जीवंत बनाने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि उनकी टीम दुनिया भर के बेहतरीन तकनीशियनों के साथ मिलकर काम कर रही है ताकि मर्यादा पुरुषोत्तम राम की इस पावन कथा को पूरी श्रद्धा और आधुनिक तकनीक के अद्भुत तालमेल के साथ पर्दे पर उतारा जा सके। उनके अनुसार आलोचनाएं केवल इस बात का प्रमाण हैं कि लोग इस प्रोजेक्ट से कितनी गहराई से जुड़े हुए हैं। फिल्म के विजुअल्स को लेकर उठ रहे सवालों पर बात करते हुए निर्माता ने यह भी साझा किया कि एक विशाल सिनेमाई अनुभव तैयार करने में समय और धैर्य की आवश्यकता होती है। रामायण केवल एक फिल्म नहीं बल्कि एक भावना है जो करोड़ों लोगों के हृदय में बसी है और इसे पर्दे पर उतारते समय हर छोटी से छोटी बारीकी का ध्यान रखा जा रहा है। नमित मल्होत्रा का मानना है कि जब अंतिम परिणाम दर्शकों के सामने आएगा तो वह तकनीकी और भावनात्मक दोनों ही मोर्चों पर सभी की कसौटी पर खरा उतरेगा। उन्होंने प्रशंसकों से अपील की है कि वे इस रचनात्मक यात्रा पर भरोसा रखें क्योंकि पूरी टीम इस महाकाव्य के साथ न्याय करने के लिए प्रतिबद्ध है। इस प्रोजेक्ट के माध्यम से भारतीय फिल्म उद्योग में तकनीक के उपयोग को एक नई दिशा देने का प्रयास किया जा रहा है। निर्माता ने जोर देकर कहा कि रामायण की कहानी को उसकी मौलिकता और पवित्रता के साथ पेश करना उनकी प्राथमिकता है और आधुनिक तकनीक का उपयोग केवल उस अनुभव को और अधिक भव्य बनाने के लिए किया जा रहा है। आलोचकों द्वारा उठाए गए बिंदुओं पर उन्होंने विनम्रतापूर्वक कहा कि वे हर फीडबैक का सम्मान करते हैं और रचनात्मक आलोचना उन्हें और बेहतर करने की प्रेरणा देती है। उनका लक्ष्य एक ऐसी कृति तैयार करना है जिस पर हर भारतीय गर्व कर सके और जो आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मील का पत्थर साबित हो।
डेथ ओवर्स के दो महारथी, दबाव में प्रदर्शन से दोनों गेंदबाज बना रहे हैं नई मिसाल..

नई दिल्ली। क्रिकेट के सबसे बड़े मंच आईपीएल में रिकॉर्ड्स का बनना और टूटना एक सामान्य प्रक्रिया है लेकिन कुछ खिलाड़ियों ने अपनी निरंतरता से एक ऐसा मानदंड स्थापित कर दिया है जिसे छू पाना किसी भी नवागंतुक के लिए एक बड़ी चुनौती है। भुवनेश्वर कुमार ने अपने करियर की शुरुआत से ही पावरप्ले के दौरान नई गेंद को दोनों तरफ स्विंग कराने की अद्भुत कला का प्रदर्शन किया है। उनके पास न केवल विकेट चटकाने की क्षमता है बल्कि वे रनों की गति पर अंकुश लगाने में भी माहिर माने जाते हैं। आईपीएल के शुरुआती सीजन से लेकर अब तक भुवनेश्वर ने खुद को एक भरोसेमंद गेंदबाज के रूप में पेश किया है और कई मौकों पर अपनी टीम को महत्वपूर्ण सफलताएं दिलाई हैं। दूसरी तरफ जसप्रीत बुमराह का उत्थान आधुनिक क्रिकेट की सबसे बड़ी कहानियों में से एक है। एक अनोखे गेंदबाजी एक्शन के साथ उभरे बुमराह ने बहुत कम समय में खुद को दुनिया के सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजों की श्रेणी में खड़ा कर लिया है। बुमराह की सबसे बड़ी ताकत उनकी मानसिक मजबूती और दबाव के क्षणों में शांत रहकर सटीक यॉर्कर फेंकने की क्षमता है। जब मैच अंतिम ओवरों में फंसा होता है तब कप्तान की पहली पसंद हमेशा बुमराह ही होते हैं। आंकड़ों के लिहाज से भी बुमराह ने कई बड़े कीर्तिमान स्थापित किए हैं और उनकी विकेट लेने की दर उन्हें लीग के सबसे खतरनाक गेंदबाजों में से एक बनाती है। इन दोनों गेंदबाजों के बीच विकेटों की संख्या का अंतर बहुत कम रहता है जो इस बात का प्रमाण है कि दोनों के बीच प्रतिस्पर्धा कितनी कड़ी है। भुवनेश्वर कुमार ने जहां लंबे समय तक खेलते हुए अनुभव और कौशल का बेहतरीन संगम दिखाया है वहीं बुमराह ने अपनी स्ट्राइक रेट और कम इकोनॉमी रेट से सभी को प्रभावित किया है। इन दोनों गेंदबाजों की गेंदबाजी शैली अलग होने के बावजूद उनका लक्ष्य हमेशा अपनी टीम को जीत दिलाना रहा है। भुवनेश्वर की ताकत शुरुआती झटके देना है तो बुमराह मध्यक्रम और निचले क्रम को ध्वस्त करने में महारत रखते हैं। आईपीएल के बदलते स्वरूप और बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच इन दोनों भारतीय तेज गेंदबाजों ने अपनी फिटनेस और फॉर्म को बरकरार रखते हुए युवा गेंदबाजों के लिए एक मिसाल पेश की है। यह देखना दिलचस्प रहता है कि कैसे एक ही दौर के दो महान गेंदबाज अलग-अलग हथियारों के साथ एक ही लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए जी जान लगा देते हैं। रिकॉर्ड की इस दौड़ में कभी भुवनेश्वर आगे निकलते हैं तो कभी बुमराह अपनी तेजी से उन्हें पीछे छोड़ देते हैं। अंततः यह स्वस्थ प्रतिस्पर्धा भारतीय क्रिकेट और आईपीएल के प्रशंसकों के लिए एक सुखद अनुभव लेकर आती है क्योंकि उन्हें विश्व स्तरीय गेंदबाजी देखने का अवसर मिलता है। IPL Statistics, Fast Bowling, Cricket Records, Indian Bowlers, Tournament History
गुफानुमा खदानों का अंत शहडोल में अवैध कोयला माफिया पर बड़ी कार्रवाई

शहडोल । मध्य प्रदेश के शहडोल जिले में अवैध कोयला खनन के खिलाफ प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए बड़ा एक्शन लिया है लंबे समय से जानलेवा खतरा बनी गुफानुमा सुरंगों पर आखिरकार बुलडोजर चला दिया गया यह कार्रवाई न सिर्फ अवैध खनन पर रोक लगाने के लिए की गई बल्कि स्थानीय लोगों और मवेशियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए भी बेहद जरूरी मानी जा रही थी जिले के अमलाई थाना क्षेत्र के बटुरा और टिकुरीटोला इलाकों में जमीन के नीचे बनाई गई ये खदानें किसी हादसे का इंतजार करती नजर आ रही थीं संकरी और गहरी सुरंगों के जरिए अवैध रूप से कोयला निकाला जा रहा था जो कभी भी धंस सकती थीं और बड़ी जनहानि का कारण बन सकती थीं लगातार मिल रही शिकायतों और बढ़ते खतरे को देखते हुए अमलाई पुलिस और साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड की टीम ने संयुक्त अभियान चलाया मौके पर पहुंची टीम ने जेसीबी मशीनों की मदद से करीब पांच गुफानुमा सुरंगों को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया और उन्हें मिट्टी से पाटकर बंद कर दिया गया कार्रवाई के दौरान पूरे क्षेत्र को पुलिस की निगरानी में सुरक्षित किया गया और खुले गड्ढों को भी भर दिया गया ताकि भविष्य में किसी भी तरह की दुर्घटना की आशंका को खत्म किया जा सके प्रशासन का कहना है कि यह कदम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है बताया जा रहा है कि इन अवैध खदानों को पहले भी कई बार बंद कराया जा चुका है लेकिन खनन माफिया हर बार नए तरीके से सुरंगें खोदकर फिर से कोयला निकालना शुरू कर देते हैं यही वजह है कि इस बार प्रशासन ने सख्ती दिखाते हुए व्यापक कार्रवाई की है यह घटना एक बार फिर इस बात की ओर इशारा करती है कि अवैध खनन सिर्फ कानून का उल्लंघन ही नहीं बल्कि लोगों की जान के लिए भी गंभीर खतरा है ऐसे में जरूरी है कि इस तरह की गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखी जाए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके
RR vs MI: सूर्यवंशी-यशस्वी का तूफान, मुंबई इंडियंस की करारी हार

नई दिल्ली। गुवाहाटी में खेले गए बारिश से प्रभावित मुकाबले में राजस्थान रॉयल्स ने मुंबई इंडियंस को 27 रन से हराकर लगातार शानदार प्रदर्शन जारी रखा। मैच 11-11 ओवर का खेला गया, लेकिन छोटे फॉर्मेट में भी राजस्थान के बल्लेबाजों ने ऐसी आंधी मचाई कि मुंबई की टीम शुरुआत से ही दबाव में आ गई। जायसवाल–सूर्यवंशी की जोड़ी ने बदल दिया मैचराजस्थान की जीत की नींव ओपनिंग जोड़ी ने रखी। यशस्वी जायसवाल ने सिर्फ 32 गेंदों में नाबाद 77 रन ठोकते हुए मैच पर पूरी तरह कब्जा जमा लिया। वहीं युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी ने महज 14 गेंदों में 39 रन बनाकर आक्रामक शुरुआत दी। दोनों ने पहले विकेट के लिए सिर्फ 5 ओवर में 80 रन जोड़कर मुंबई के गेंदबाजों की लय बिगाड़ दी। पंड्या बोले- गेंदबाजों ने बिगाड़ा खेलहार के बाद हार्दिक पंड्या ने साफ तौर पर अपनी टीम के गेंदबाजों को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि पावरप्ले में टीम अपनी रणनीति के मुताबिक गेंदबाजी नहीं कर सकी, जिससे मैच हाथ से निकल गया। पंड्या ने यह भी माना कि राजस्थान के ओपनर्स ने बेहतरीन बल्लेबाजी की, लेकिन गेंदबाज उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाए। युवा वैभव की पंड्या ने भी की तारीफहालांकि हार के बावजूद पंड्या ने युवा प्रतिभा की सराहना की। उन्होंने वैभव सूर्यवंशी की निडर बल्लेबाजी को शानदार बताया और कहा कि इतनी कम उम्र में इस तरह का आत्मविश्वास काबिल-ए-तारीफ है। उन्होंने उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना भी की। रियान पराग का बड़ा बयानवहीं रियान पराग ने अपनी ओपनिंग जोड़ी को टूर्नामेंट की सर्वश्रेष्ठ जोड़ी बताया। उन्होंने कहा कि जायसवाल और वैभव के पास स्किल के साथ मैच्योरिटी भी है, जो उन्हें खास बनाती है। पराग ने टीम के गेंदबाजों की भी तारीफ करते हुए कहा कि उनके तेज गेंदबाज रफ्तार के साथ कंट्रोल भी बनाए रखते हैं। बदले नियमों में भी दिखा दमबारिश के चलते मैच के नियमों में बदलाव किया गया था। मुकाबला 11 ओवर का हुआ, जिसमें पावरप्ले 3.2 ओवर का रखा गया। चार गेंदबाजों को अधिकतम 2-2 ओवर और एक गेंदबाज को 3 ओवर डालने की अनुमति दी गई। ऐसे चुनौतीपूर्ण हालात में भी राजस्थान ने बेहतरीन खेल दिखाया। आगे क्या?मुंबई इंडियंस के लिए यह हार जरूर चिंता का विषय है, लेकिन कप्तान पंड्या ने भरोसा जताया कि टीम अपनी गलतियों से सीखकर अगले मैच में बेहतर वापसी करेगी। वहीं राजस्थान की टीम जीत की हैट्रिक के साथ पूरे आत्मविश्वास में नजर आ रही है।
गोलमाल 5 में बड़ा बदलाव, बिना हीरोइन के अजय देवगन निभाएंगे दमदार मुख्य भूमिका और कहानी में दिखेगा नया प्रयोग

नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा की लोकप्रिय कॉमेडी फ्रेंचाइजी गोलमाल एक बार फिर दर्शकों के बीच उत्सुकता का केंद्र बनी हुई है। आगामी फिल्म गोलमाल 5 को लेकर लगातार नई जानकारियां सामने आ रही हैं, जिनसे यह संकेत मिल रहा है कि इस बार फिल्म अपने पारंपरिक अंदाज से हटकर कुछ नया और अलग प्रस्तुत करने वाली है। इस बार कहानी और किरदारों में ऐसे बदलाव किए जा रहे हैं जो दर्शकों के लिए ताजगी भरा अनुभव लेकर आएंगे। फिल्म में अजय देवगन एक बार फिर अपने खास कॉमिक अंदाज में नजर आएंगे, लेकिन इस बार उनके किरदार के साथ किसी भी प्रकार की हीरोइन नहीं होगी। यह निर्णय फिल्म की कहानी को अधिक सशक्त और केंद्रित बनाने के उद्देश्य से लिया गया है। अब तक की फिल्मों में जहां हल्का रोमांटिक तत्व भी देखने को मिलता था, वहीं इस बार पूरी तरह कॉमेडी और परिस्थितिजन्य हास्य पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। इस फिल्म का सबसे दिलचस्प पहलू अक्षय कुमार की एंट्री को माना जा रहा है। वे इस बार एक ऐसे विलेन के रूप में नजर आ सकते हैं, जो डराने के बजाय हंसाने का काम करेगा। उनका किरदार पारंपरिक खलनायकों से बिल्कुल अलग होगा, जिसमें हास्य, अजीबोगरीब हरकतें और अनोखी शैली का मेल देखने को मिलेगा। अक्षय कुमार का यह रूप उनके प्रशंसकों के लिए नया और रोमांचक अनुभव साबित हो सकता है। निर्देशन की जिम्मेदारी संभाल रहे रोहित शेट्टी इस बार फिल्म को नए स्तर पर ले जाने की तैयारी में हैं। वे कॉमेडी के साथ-साथ एक्शन और विजुअल अपील को भी मजबूत बनाने पर काम कर रहे हैं। फिल्म की स्क्रिप्ट को इस तरह तैयार किया जा रहा है कि हर किरदार का हास्य अलग और प्रभावशाली नजर आए। इसके साथ ही फिल्म में तेज रफ्तार घटनाक्रम और मनोरंजक मोड़ भी शामिल किए जा सकते हैं, जिससे दर्शकों की रुचि अंत तक बनी रहे। फिल्म की कहानी को अभी पूरी तरह सामने नहीं लाया गया है, लेकिन यह स्पष्ट है कि इसमें पुराने और नए किरदारों का संतुलन देखने को मिलेगा। दर्शकों को इस बार कुछ अलग और अप्रत्याशित देखने का अवसर मिल सकता है। फिल्म की तैयारी बड़े स्तर पर की जा रही है, जिससे यह मनोरंजन के मामले में नई मिसाल कायम कर सके।
अब सिर्फ CJI ही सुनेंगे अर्जेंट केस सुप्रीम कोर्ट का बड़ा नियम बदलाव

नई दिल्ली । देश की न्यायिक व्यवस्था में एक अहम बदलाव करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अत्यावश्यक मामलों की सुनवाई को लेकर नया नियम लागू किया है इस नए निर्देश के मुताबिक अब ऐसे मामले जिनमें तुरंत सुनवाई जरूरी हो और जिन्हें नियमित सूचीबद्ध प्रक्रिया का इंतजार नहीं कराया जा सकता उनका उल्लेख केवल भारत के मुख्य न्यायाधीश यानी CJI के समक्ष ही किया जाएगा इस फैसले के बाद अब किसी भी अन्य जज या पीठ के सामने ऐसे मामलों को पेश करने की अनुमति नहीं होगी भले ही मुख्य न्यायाधीश किसी संविधान पीठ की अध्यक्षता कर रहे हों यह बदलाव 6 अप्रैल को जारी एक आधिकारिक परिपत्र के माध्यम से लागू किया गया है पहले की व्यवस्था में यह प्रावधान था कि यदि मुख्य न्यायाधीश उपलब्ध नहीं हैं या किसी अन्य महत्वपूर्ण पीठ में व्यस्त हैं तो अत्यावश्यक मामलों को उच्चतम न्यायालय के सबसे वरिष्ठ जज के सामने उल्लेख किया जा सकता था इससे मामलों की त्वरित सुनवाई सुनिश्चित करने की कोशिश की जाती थी लेकिन अब इस प्रक्रिया को पूरी तरह बदल दिया गया है नए नियम के तहत अदालत संख्या 1 यानी मुख्य न्यायाधीश की कोर्ट में ही ऐसे मामलों का उल्लेख किया जाएगा और किसी अन्य पीठ के समक्ष इसे प्रस्तुत करने की अनुमति नहीं होगी इस कदम को न्यायिक प्रक्रिया में एकरूपता और स्पष्टता लाने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है इस बीच भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने हाल ही में न्यायिक ढांचे को मजबूत करने पर भी जोर दिया उन्होंने विभिन्न राज्यों में न्यायिक परिसरों के शिलान्यास के दौरान कहा कि देशभर में न्यायिक बुनियादी ढांचे को मजबूत करना अब विकल्प नहीं बल्कि आवश्यकता बन चुका है उन्होंने यह भी कहा कि संविधान निर्माताओं ने न्याय तक आसान पहुंच को बेहद महत्वपूर्ण माना था और इसी सोच के तहत हर राज्य में उच्च न्यायालय की स्थापना को संवैधानिक जिम्मेदारी बनाया गया उनका मानना है कि न्याय व्यवस्था को मजबूत करना केवल कानूनी जरूरत नहीं बल्कि लोकतंत्र के प्रति एक गंभीर प्रतिबद्धता भी है सुप्रीम कोर्ट का यह नया नियम न्यायिक कार्यप्रणाली में बड़ा बदलाव माना जा रहा है अब देखना यह होगा कि इससे अत्यावश्यक मामलों के निपटारे की प्रक्रिया कितनी प्रभावी और तेज हो पाती है
सौरभ शुक्ला का खुलासा: जॉली एलएलबी से पहले खुद को बताते थे राइटर, नहीं एक्टर!

नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा के दमदार कलाकार सौरभ शुक्ला आज भले ही इंडस्ट्री में अपनी अलग पहचान रखते हों, लेकिन उनका सफर आसान नहीं रहा। हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने अपने करियर के उस मुश्किल दौर को याद किया, जब सफलता मिलने के बावजूद उन्हें मनचाहा काम नहीं मिल रहा था। यह वही समय था जब उन्होंने खुद को एक्टर नहीं, बल्कि राइटर बताना शुरू कर दिया था। ‘सत्या’ से मिली पहचान, लेकिन नहीं मिला संतोषसाल 1998 में आई सत्या में सौरभ शुक्ला ने ‘कल्लू मामा’ का किरदार निभाया था, जिसने उन्हें रातों-रात पहचान दिलाई। राम गोपाल वर्मा की इस फिल्म के बाद लोग उनके अभिनय के कायल हो गए थे, लेकिन सौरभ के मुताबिक, करियर में वैसा बदलाव नहीं आया जैसा उन्होंने सोचा था। उन्होंने बताया कि उन्हें ज्यादातर छोटे और एक-दो सीन वाले रोल ही ऑफर हो रहे थे, जो उनके टैलेंट के हिसाब से काफी कम थे। यही वजह थी कि वह इन रोल्स से संतुष्ट नहीं थे और बेहतर मौके का इंतजार कर रहे थे। डिप्रेशन का दौर और पहचान छिपाने की मजबूरीलगातार निराशा और अच्छे रोल्स की कमी के चलते सौरभ शुक्ला डिप्रेशन में चले गए थे। उन्होंने खुलासा किया कि उस समय वह फिल्ममेकर्स से कहने लगे थे—“मैं एक्टर नहीं हूं, मैं राइटर हूं।” यह उनके करियर का सबसे कठिन दौर था, जहां उन्हें अपनी पहचान तक छिपानी पड़ी। ‘जॉली एलएलबी’ ने बदली किस्मतसौरभ शुक्ला के करियर में असली बदलाव साल 2012-13 में आया। बर्फी! और खासतौर पर जॉली एलएलबी ने उनकी किस्मत पलट दी। ‘जॉली एलएलबी’ में जज त्रिपाठी के किरदार ने उन्हें न सिर्फ दर्शकों का प्यार दिलाया, बल्कि उन्हें नेशनल फिल्म अवॉर्ड भी मिला। इस फिल्म के बाद इंडस्ट्री का नजरिया पूरी तरह बदल गया और लोग उन्हें एक बेहतरीन एक्टर के तौर पर पहचानने लगे। उनकी डिमांड और फीस दोनों में इजाफा हुआ। बदली पहचान, बढ़ा फैनबेस‘जॉली एलएलबी’ के बाद सौरभ शुक्ला का करियर नई ऊंचाइयों पर पहुंच गया। लोग उन्हें अपने पसंदीदा कलाकारों में गिनने लगे और उन्हें लगातार बेहतर और दमदार रोल मिलने लगे।
युवा टीम का बड़ा कमाल आईपीएल 2026 में राजस्थान रॉयल्स की परफेक्ट हैट्रिक

नई दिल्ली । आईपीएल 2026 में राजस्थान रॉयल्स ने ऐसी शुरुआत की है जिसने सभी क्रिकेट फैंस का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है युवा कप्तान रियान पराग की अगुवाई में टीम ने अपने पहले तीन मुकाबलों में लगातार तीन जीत दर्ज कर ली हैं और इस शानदार प्रदर्शन ने उन्हें टूर्नामेंट की सबसे मजबूत टीमों में शामिल कर दिया है राजस्थान रॉयल्स ने अपने अभियान की शुरुआत चेन्नई सुपर किंग्स को हराकर की इसके बाद उन्होंने गुजरात टाइटन्स के खिलाफ जीत दर्ज की और तीसरे मुकाबले में पांच बार की चैंपियन मुंबई इंडियंस को मात देकर अपनी जीत की हैट्रिक पूरी की इन तीनों टीमों की ताकत को देखते हुए राजस्थान की यह उपलब्धि और भी खास बन जाती है मुंबई के खिलाफ जीत के बाद कप्तान रियान पराग ने टीम की जमकर तारीफ की उन्होंने कहा कि जिस तरह से पूरी टीम हर मैच में प्रदर्शन कर रही है उससे वह बेहद खुश हैं पराग ने साफ तौर पर कहा कि उन्हें शुरुआत से ही अपनी टीम की क्षमता पर भरोसा था भले ही बाहरी दुनिया इस टीम को लेकर ज्यादा आश्वस्त नहीं थी पराग ने खास तौर पर टीम के युवा खिलाड़ियों की सराहना की जिनमें वैभव सूर्यवंशी और यशस्वी जायसवाल की ओपनिंग जोड़ी का प्रदर्शन शानदार रहा है उन्होंने कहा कि दोनों खिलाड़ियों में टैलेंट के साथ साथ मैच्योरिटी भी है जो उन्हें खास बनाती है जायसवाल पिछले कुछ सीजन से लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं जबकि वैभव ने भी हालात के अनुसार खुद को ढालकर प्रभावित किया है गेंदबाजी में भी टीम ने दमदार प्रदर्शन किया है जोफ्रा आर्चर और नंद्रे बर्गर की तेज गेंदबाजी जोड़ी विपक्षी टीमों पर भारी पड़ रही है पराग ने कहा कि 145 से 150 की रफ्तार से गेंदबाजी करते हुए इतना नियंत्रण रखना इन गेंदबाजों को बेहद खतरनाक बनाता है कप्तान पराग ने यह भी माना कि नीलामी के समय से ही उन्हें अपनी टीम की मजबूती का अंदाजा था क्योंकि टीम के पास एक मजबूत और युवा कोर ग्रुप है अब लगातार तीन जीत के बाद राजस्थान रॉयल्स ने यह साबित कर दिया है कि वह इस सीजन में खिताब की प्रबल दावेदार हो सकती है आईपीएल 2026 की शुरुआत में ही ऐसा प्रदर्शन यह दिखाता है कि युवा ऊर्जा और सही रणनीति के दम पर कोई भी टीम बड़ा उलटफेर कर सकती है अब देखने वाली बात होगी कि क्या राजस्थान रॉयल्स इस शानदार फॉर्म को पूरे सीजन में बरकरार रख पाती है या नहीं