जब हर तरफ आग ही आग थी सीधी में कार्यकर्ता की हिम्मत से सुरक्षित निकले मासूम बड़ा खतरा टला

सीधी । मध्य प्रदेश के सीधी जिले में मंगलवार का दिन उस समय दहशत में बदल गया जब रामपुर नैकिन क्षेत्र के शिकारगंज स्थित एक आंगनवाड़ी केंद्र के पास अचानक भीषण आग भड़क उठी और देखते ही देखते हालात बेकाबू हो गए। आग इतनी तेजी से फैली कि कुछ ही मिनटों में पूरा परिसर लपटों से घिर गया और हर तरफ धुआं और अफरा तफरी का माहौल बन गया लेकिन इसी बीच एक महिला की सूझबूझ और साहस ने सात मासूम बच्चों की जिंदगी बचा ली। घटना सुबह करीब 11 बजे की है जब आंगनवाड़ी केंद्र में सात छोटे बच्चे मौजूद थे और उनकी देखरेख कर रही थीं कार्यकर्ता उर्मिला द्विवेदी। अचानक पास के क्षेत्र से आग उठती नजर आई जो तेजी से फैलते हुए केंद्र के आसपास पहुंचने लगी। हालात की गंभीरता को समझते हुए उर्मिला द्विवेदी ने बिना किसी घबराहट के तुरंत निर्णय लिया और एक एक कर सभी बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालना शुरू किया। उन्होंने न केवल बच्चों को आग से दूर पहुंचाया बल्कि उन्हें उनके घरों तक सुरक्षित पहुंचाकर राहत की सांस ली। कुछ ही देर में आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और आंगनवाड़ी भवन के तीनों ओर ऊंची लपटें उठने लगीं। आग की भयावहता इतनी ज्यादा थी कि आसपास के लोग भी सहम गए लेकिन जैसे ही घटना की जानकारी फैली ग्रामीण मौके पर पहुंचने लगे और अपने स्तर पर आग बुझाने की कोशिश करने लगे। हालांकि आग लगातार फैलती जा रही थी और उस पर काबू पाना आसान नहीं था। स्थिति उस समय और गंभीर हो गई जब आग पास के जंगल की ओर बढ़ने लगी जिससे बड़े क्षेत्र में नुकसान की आशंका पैदा हो गई। तत्काल फायर ब्रिगेड को सूचना दी गई लेकिन टीम को मौके तक पहुंचने में कुछ समय लगा। करीब आधे घंटे बाद दमकल दल घटनास्थल पर पहुंचा और आग बुझाने का अभियान शुरू किया। इसके साथ ही डायल 112 और 108 की टीमें भी मौके पर पहुंच गईं और राहत व बचाव कार्य में जुट गईं। ग्रामीणों और प्रशासन की टीम ने मिलकर लगातार प्रयास किए लेकिन आग की तीव्रता इतनी अधिक थी कि डेढ़ घंटे से ज्यादा समय तक लपटें शांत नहीं हुईं। कड़ी मशक्कत के बाद आखिरकार आग पर काबू पाया जा सका और स्थिति नियंत्रण में आई। रामपुर नैकिन थाना प्रभारी सुधांशु तिवारी ने बताया कि सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड और अन्य आवश्यक सेवाओं को तुरंत मौके पर भेजा गया था और प्राथमिकता के आधार पर बचाव कार्य शुरू किया गया। उन्होंने यह भी पुष्टि की कि इस घटना में किसी भी प्रकार की जनहानि नहीं हुई है जो कि सबसे बड़ी राहत की बात है। यह पूरी घटना एक बड़ी चेतावनी भी है कि संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था कितनी जरूरी है लेकिन साथ ही यह भी साबित करती है कि मुश्किल हालात में सही समय पर लिया गया निर्णय कितनी बड़ी त्रासदी को टाल सकता है। उर्मिला द्विवेदी की सतर्कता और साहस ने आज सात परिवारों को एक बड़ी विपत्ति से बचा लिया।
मध्य पूर्व तनाव और ट्रंप की चेतावनी के चलते कच्चे तेल की कीमतों में 3 प्रतिशत से ज्यादा की उछाल

नई दिल्ली। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और डोनाल्ड ट्रंप की सख्त चेतावनी के बीच वैश्विक तेल बाजार में उथल-पुथल तेज हो गई है। मंगलवार को कच्चे तेल की कीमतों में 3 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी दर्ज की गई, जिससे बाजार में अस्थिरता और बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में भू-राजनीतिक घटनाक्रम तेल की कीमतों की दिशा तय करेंगे। ब्रेंट और WTI क्रूड में जोरदार उछालवैश्विक बाजार में ब्रेंट क्रूड वायदा 1.69% यानी 1.86 डॉलर की बढ़त के साथ 111.63 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। वहीं WTI क्रूड में 3% से ज्यादा यानी 4.15 डॉलर की तेजी आई और यह 116.56 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया।यह तेजी दिन के शुरुआती कारोबार में ही देखने को मिली, जिससे साफ है कि निवेशकों में तनाव को लेकर चिंता बढ़ी हुई है। कुछ ही दिनों में 60% से ज्यादा चढ़ा तेलमध्य पूर्व में संघर्ष शुरू होने के बाद से तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल आया है। ब्रेंट क्रूड 27 फरवरी को 72.48 डॉलर से बढ़कर 9 मार्च को 119.50 डॉलर तक पहुंच गया, यानी करीब 60% की तेजी। साल 2026 में अब तक तेल की कीमतों में लगभग 90% तक उछाल देखा जा चुका है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ता जा रहा है। ट्रंप की चेतावनी से बढ़ी चिंतातेल की कीमतों में यह तेजी उस समय आई, जब डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर कड़ा रुख अपनाया।ट्रंप ने होर्मुज स्ट्रेट को खोलने के लिए समयसीमा तय करते हुए चेतावनी दी कि अगर ऐसा नहीं हुआ, तो “तेहरान पर बड़ा हमला” किया जा सकता है। उन्होंने यहां तक कहा कि ईरान को “एक रात में खत्म किया जा सकता है।” होर्मुज स्ट्रेट: तेल सप्लाई की लाइफलाइनहोर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण तेल सप्लाई रूट्स में से एक है। यहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का करीब 20% गुजरता है। 28 फरवरी से चल रहे संघर्ष के कारण इस रूट पर असर पड़ा है, जिससे सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है और कीमतों में उछाल देखने को मिल रहा है। ईरान का सख्त रुख, सीजफायर से इनकाररिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान ने सीजफायर के प्रस्ताव को ठुकरा दिया है और संघर्ष जारी रखने का फैसला किया है। इससे स्थिति और गंभीर होती जा रही है और बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है। शेयर बाजार पर भी असरतेल की कीमतों में तेजी और वैश्विक संकेतों के बीच भारतीय शेयर बाजार भी दबाव में नजर आया। सेंसेक्स और निफ्टी में करीब 1% की गिरावट दर्ज की गई। हालांकि, अमेरिका का वॉल स्ट्रीट हल्की बढ़त के साथ बंद हुआ, जबकि एशियाई बाजारों में मिला-जुला रुख देखने को मिला। आगे क्या? बाजार की नजर भू-राजनीति परविशेषज्ञों का मानना है कि अगर मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ता है, तो तेल की कीमतें और ऊपर जा सकती हैं। वहीं, किसी समझौते की स्थिति में कीमतों में राहत मिल सकती है। मध्य पूर्व तनाव और ट्रंप की चेतावनी के चलते कच्चे तेल की कीमतों में 3% से ज्यादा उछाल आया है। होर्मुज स्ट्रेट पर असर और ईरान के सख्त रुख से वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ गई है।
भारत: अस्थिर दुनिया में आत्म निर्भरता जरूरी

– प्रो. महेश चंद गुप्तादुनिया अब अलग-अलग बिखरे देशों का नक्शा मात्र नहीं रही है। यह एक ऐसा तंत्र बन गई है जिसमें कहीं भी हलचल होती है तो उसकी तरंगें दुनिया के हर कोने तक पहुंचती हैं। हाल में ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच टकराव की स्थिति के बाद पैदा हुए तनाव ने इस सच्चाई को फिर से उजागर कर दिया है। इससे पहले रूस-यूक्रेन युद्ध से भी यह सबक मिल चुका है कि जंग किसी एक भूभाग तक सीमित नहीं रहती। उसके असर सीमाओं से परे जाते हैं। इस बात को हम लागू होते देख रहे हैं। भारत इस अमेरिका-इजरायल-ईरान संघर्ष का हिस्सा नहीं है लेकिन उसका असर हमारे यहां साफ दिखाई दे रहा है। पेट्रोल और एलपीजी की आपूर्ति में अस्थिरता, छोटे उद्योगों का ठप पड़ना, निर्यात पर असर—ये सब संकेत दे रहे हैं कि वैश्विक अस्थिरता का बोझ हम भी ढो रहे हैं। दुनिया इतनी छोटी हो चुकी है कि कई लोग इसकी तुलना एक गांव से भी करते हैं। मानना ही होगा कि यह एक ऐसा साझा घर बन चुकी है, जिसकी एक दीवार पर आग लगे तो दूसरी दीवार पर बैठे लोग भी उसकी आंच महसूस करते हैं। यही वजह है कि ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच बढ़ता तनाव सिर्फ युद्ध क्षेत्र तक सीमित नहीं रहा। उसकी छाया हमारे रसोईघर, बाजार और छोटे-छोटे काम-धंधों तक आ पहुंची है। भारत की नीति स्पष्ट रूप से शांति की है लेकिन वैश्विक व्यवस्था में उसकी भागीदारी इतनी गहरी है कि किसी भी तनाव के असर से बचना संभव नहीं है। शहरों में ठेले पर चाय बेचने वाला हो या मिठाई की दुकान चलाने वाला हलवाई, हर किसी के काम पर इसका असर साफ दिखाई दे रहा है। गैस सिलेंडर की बुकिंग में देरी अब सिर्फ एक असुविधा नहीं, बल्कि रोजमर्रा की कमाई पर चोट बनती जा रही है। इसका बड़ा कारण मूलभूत जरूरतों के लिए हमारा अन्य देशों पर निर्भर होना है। बड़ा सवाल यह है कि क्या हम अपनी बुनियादी जरूरतों के लिए इतने अधिक बाहरी स्रोतों पर निर्भर हो चुके हैं कि कहीं भी हलचल हो और हमारी जमीन हिलने लगे? यह सच है कि हमारी जरूरतों का बड़ा हिस्सा आज भी आयात किए गए तेल और गैस से पूरा होता है। खाड़ी क्षेत्र में तनातनी बढ़ते ही सप्लाई चेन पर दबाव पड़ता है और उसका सीधा असर हमारे घरों तक पहुंचता है। यह निर्भरता केवल आर्थिक नहीं है, बल्कि रणनीतिक कमजोरी भी है। लेकिन बात केवल ऊर्जा तक सीमित नहीं है। भारत का औद्योगिक और कृषि ढांचा भी कई मायनों में वैश्विक आपूर्ति पर टिका हुआ है। खाद्य तेल से लेकर उर्वरकों तक, इलेक्ट्रॉनिक्स से लेकर रक्षा उपकरणों तक कई ऐसे क्षेत्र हैं जिनमें हम पूरी तरह आत्मनिर्भर नहीं हैं। यह स्थिति तब और चिंताजनक हो जाती है जब वैश्विक संकट लंबा खिंचने लगता है। तीन दशक पहले सद्दाम हुसैन को काबू करने के लिए मित्र देशों द्वारा इराक पर हमलों से डीजल-पेट्रोल के लिए हमारे देश में लगी लंबी कतारें हमें याद हैं। अब हम कमोबेश वैसी ही स्थिति की आशंका देख रहे हैं। बात केवल आयात की नहीं है, निर्यात भी इस संकट से प्रभावित हो रहा है। बीकानेर का भुजिया, महाराष्ट्र के केले, कपड़ा उद्योग और समुद्री उत्पाद आदि सबका अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचना अब पहले जैसा सहज नहीं रहा। जलगांव से रोजाना दो से तीन हजार टन केला खाड़ी देशों व यूरोप को निर्यात होता है लेकिन इस युद्ध ने निर्यात को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। केले से भरे सैकड़ों कंटेनर बंदरगाहों पर फंसे हुए हैं। इसी प्रकार बीकानेर से भुजिया का निर्यात भी प्रभावित हुआ है। समुद्री रास्तों में असुरक्षा और लागत बढ़ने से कई व्यापारियों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। यह केवल माल की आवाजाही का संकट नहीं है, बल्कि इन उद्योगों से जुड़े लाखों लोगों की रोजी-रोटी का भी सवाल है। भारत की आत्मनिर्भरता की बहस में सूचना एवं प्रौद्योगिकी का क्षेत्र अक्सर नजरअंदाज हो जाता है जबकि यह आज की अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा दोनों के लिए बेहद अहम है। भारत डिजिटल रूप से तेजी से आगे बढ़ा है, लेकिन इस डिजिटल ढांचे की बुनियाद अब भी काफी हद तक विदेशी तकनीक पर टिकी है। मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम, क्लाउड सेवाएं, सर्वर इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र बाहरी कंपनियों के नियंत्रण में हैं। ऐसे में वैश्विक तनाव या प्रतिबंधों की स्थिति में यह निर्भरता गंभीर जोखिम बन सकती है। इंटरनेट के क्षेत्र में भी हालात अलग नहीं हैं। सोशल मीडिया, सर्च इंजन और डेटा स्टोरेज जैसे प्लेटफॉर्म विदेशी स्वामित्व में हैं जिससे डेटा सुरक्षा और डिजिटल संप्रभुता पर सवाल उठते हैं। यह केवल आर्थिक नहीं बल्कि रणनीतिक चुनौती भी है। इसके साथ ही, भारत में मौलिक आविष्कारों की कमी भी चिंता का विषय है। आईटी सेवाओं में मजबूती के बावजूद, शोध और पेटेंट के मामले में भारत अभी पीछे है। रिसर्च और डवलपमेंट पर कम निवेश इसकी वजह हैं। ऐसे में आत्मनिर्भरता के लिए तकनीकी नवाचार को प्राथमिकता देना अनिवार्य हो गया है। यह परिदृश्य हमें बाध्य कर रहा है कि हम आत्मनिर्भरता के उस विचार की ओर लौटें जिसे हम अक्सर नारे के रूप में इस्तेमाल करते आए हैं लेकिन उसे व्यवहार में पूरी तरह उतार नहीं पाए हैं। आत्मनिर्भरता का अर्थ दुनिया से कट जाना नहीं है, बल्कि इतना सक्षम बनना है कि वैश्विक उथल-पुथल का असर सीमित किया जा सके। मौजूदा समय में सवाल यह नहीं है कि भारत को वैश्विक व्यापार से दूरी बनानी चाहिए या नहीं, बल्कि यह है कि क्या हमारी अपनी नींव इतनी मजबूत है कि बाहरी झटकों को सह सके? समय की मांग है कि हमें ऊर्जा के क्षेत्र में वैकल्पिक रास्तों की ओर तेजी से बढ़ना चाहिए। सौर और पवन ऊर्जा अब केवल पर्यावरण का मुद्दा नहीं रहे हैं, बल्कि आर्थिक स्थिरता का आधार भी बन चुके हैं। इसी प्रकार मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को मजबूत करना, छोटे उद्योगों को तकनीक और वित्तीय सहायता देना और कृषि उत्पादों की प्रोसेसिंग को बढ़ावा देना जरूरी है क्योंकि ऐसे कदम ही भारत को भीतर से सशक्त बना सकते हैं। इस बीच, कुछ ऐसे सवाल भी हैं जिनका उत्तर हमें खोजना चाहिए। बड़ा सवाल है कि क्या हमने
कमोडिटी मार्केट में हलचल: तनाव के बीच सोने-चांदी के दाम फिसले

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और डोनाल्ड ट्रंप के सख्त बयानों के बीच मंगलवार को सोने और चांदी की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। आमतौर पर ऐसे हालात में निवेशक सोने को सुरक्षित विकल्प मानते हैं, लेकिन इस बार बाजार में वैसी मजबूती नजर नहीं आई। MCX पर गिरावट के साथ खुला सोना-चांदीमल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर 5 जून कॉन्ट्रैक्ट वाला सोना पिछले बंद भाव 1,49,981 रुपये के मुकाबले 222 रुपये गिरकर 1,49,759 रुपये प्रति 10 ग्राम पर खुला। वहीं, 5 मई कॉन्ट्रैक्ट वाली चांदी 1,379 रुपये गिरकर 2,32,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर खुली। शुरुआती कारोबार में दोनों धातुओं में कमजोरी देखने को मिली, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ गई। दिनभर उतार-चढ़ाव, स्थिरता नहींदोपहर करीब 12:13 बजे तक सोना 175 रुपये यानी 0.12% गिरकर 1,49,806 रुपये प्रति 10 ग्राम पर ट्रेड कर रहा था। दिन के दौरान यह 1,50,474 रुपये के उच्चतम स्तर तक गया, जबकि 1,49,201 रुपये तक नीचे भी आया। इसी तरह चांदी भी 813 रुपये यानी 0.35% गिरकर 2,32,566 रुपये प्रति किलोग्राम पर कारोबार कर रही थी। इंट्रा-डे में चांदी ने 2,35,547 रुपये का उच्चतम और 2,31,503 रुपये का न्यूनतम स्तर छुआ। ‘सेफ हेवन’ डिमांड कमजोर क्यों?विश्लेषकों का कहना है कि आमतौर पर तनाव के समय सोने-चांदी में निवेश बढ़ता है, लेकिन इस बार “सेफ-हेवन” डिमांड उतनी मजबूत नहीं दिख रही। बाजार फिलहाल अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है, जहां निवेशक स्पष्ट संकेतों का इंतजार कर रहे हैं। यही वजह है कि कीमतें एक सीमित दायरे में ऊपर-नीचे हो रही हैं। चांदी के लिए अहम स्तरएमसीएक्स पर चांदी फिलहाल 2,31,000 से 2,33,000 रुपये के दायरे में कारोबार कर रही है। विशेषज्ञों के मुताबिक 2,33,000–2,34,000 रुपये का स्तर मजबूत रेजिस्टेंस बना हुआ है। अगर यह स्तर टूटता है तो कीमतों में तेजी आ सकती है, लेकिन 2,30,000 रुपये के नीचे जाने पर तेज गिरावट देखने को मिल सकती है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में मिला-जुला रुखवैश्विक बाजार में कीमती धातुएं लगभग स्थिर रहीं। COMEX पर गोल्ड 3.36 डॉलर की मामूली गिरावट के साथ 4,681.34 डॉलर पर रहा, जबकि सिल्वर 0.09 डॉलर की बढ़त के साथ 72.94 डॉलर पर ट्रेड कर रहा था। स्पॉट मार्केट में सोना हल्की बढ़त के साथ 4,653 डॉलर पर पहुंचा, जबकि चांदी मामूली गिरावट के साथ 72.78 डॉलर पर रही। ईरान-हॉर्मुज तनाव और कच्चे तेल में उछालकीमतों में यह उतार-चढ़ाव उस समय देखने को मिला, जब ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ रहा है। खासतौर पर होर्मुज स्ट्रेट को लेकर स्थिति संवेदनशील बनी हुई है। इसी बीच कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया। ब्रेंट क्रूड 1.69% बढ़कर 111.63 डॉलर पर पहुंच गया, जबकि WTI क्रूड 3% से ज्यादा चढ़कर 116.56 डॉलर तक पहुंच गया। बाजार की नजर आगे क्या?विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में भू-राजनीतिक घटनाक्रम और अमेरिकी नीतियां ही तय करेंगी कि सोने-चांदी की दिशा क्या होगी। निवेशक फिलहाल सतर्क रुख अपनाए हुए हैं और हर बड़े अपडेट पर नजर बनाए हुए हैं।
कार से फेंकी गई घायल महिला अस्पताल से गायब भोपाल पुलिस CCTV खंगालने में जुटी

भोपाल । मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एक बेहद चौंकाने वाली और रहस्यमयी घटना सामने आई है जिसने कानून व्यवस्था और सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बाग सेवनिया थाना क्षेत्र के लहारपुर ब्रिज के पास अज्ञात कार सवारों ने एक करीब 60 वर्षीय बुजुर्ग महिला को चलती कार से बाहर फेंक दिया। महिला गंभीर रूप से घायल हालत में मिली जिसके सीने में स्टेप्लर पिन चुभी हुई थीं और वह खून से लथपथ थी। घटना रविवार और सोमवार की दरमियानी रात करीब ढाई बजे की बताई जा रही है जब एक तेज रफ्तार कार लहारपुर ब्रिज के पास पहुंची। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कार की रफ्तार धीमी होते ही आरोपियों ने महिला को सड़क किनारे नाले के पास फेंक दिया और तुरंत फरार हो गए। यह दृश्य बेहद भयावह था जिसे आसपास मौजूद एक महिला ने देखा और तुरंत स्थानीय लोगों को इसकी सूचना दी। घटना की जानकारी मिलते ही इलाके के लोगों ने तत्परता दिखाते हुए स्वयंसेवी संस्था चित्रांश ह्यूमन वेलफेयर से संपर्क किया। संस्था के सदस्य मोहन सोनी और पारस मौके पर पहुंचे और पुलिस की मदद से घायल महिला को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया। महिला को हमीदिया अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां डॉक्टरों की निगरानी में उसका इलाज शुरू किया गया। हैरानी की बात यह रही कि महिला करीब 22 घंटे तक बेहोश रही और होश में आने के बाद भी वह अपनी पहचान बताने की स्थिति में नहीं थी। वह केवल सलकनपुर शब्द ही बोल पा रही थी जिससे यह अनुमान लगाया जा रहा है कि उसका संबंध सलकनपुर मंदिर क्षेत्र से हो सकता है। उसके हाथ पर एक नाम गुदा हुआ मिला है लेकिन अभी तक उसकी पूरी पहचान स्पष्ट नहीं हो सकी है। इस पूरे मामले में एक और चौंकाने वाला मोड़ तब आया जब इलाज के दौरान महिला अचानक अस्पताल से लापता हो गई। इस घटना ने पुलिस और प्रशासन की चिंता और बढ़ा दी है। बाग सेवनिया थाना पुलिस ने महिला के गायब होने की सूचना मिलने के बाद उसकी तलाश शुरू कर दी है और अस्पताल प्रबंधन से भी पूछताछ की जा रही है। पुलिस का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए आसपास के इलाकों में लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले जा रहे हैं ताकि उस कार और आरोपियों का सुराग लगाया जा सके जिन्होंने इस वारदात को अंजाम दिया। थाना प्रभारी अमित सोनी के अनुसार फिलहाल महिला की तलाश प्राथमिकता है और उसकी पहचान होने के बाद ही मामले की असल वजह सामने आ सकेगी। यह घटना कई सवाल छोड़ जाती है कि आखिर महिला को इस तरह क्यों फेंका गया और अस्पताल जैसी सुरक्षित जगह से वह अचानक कैसे गायब हो गई। फिलहाल पुलिस हर पहलू पर जांच कर रही है लेकिन जब तक महिला मिल नहीं जाती तब तक यह मामला रहस्य बना रहेगा।
बैंकिंग सेक्टर पर मंडराया संकट, युद्धों को बताया सबसे बड़ा जोखिम: JPMorgan CEO

नई दिल्ली। दुनिया की सबसे बड़ी बैंकिंग संस्थाओं में से एक जेपी मॉर्गन चेस के सीईओ जेमी डिमोन ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को लेकर गंभीर चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में चल रहे युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव बैंकिंग सेक्टर और वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुके हैं। डिमोन के मुताबिक, यूक्रेन और मध्य पूर्व में जारी संघर्षों ने अनिश्चितता को काफी बढ़ा दिया है, जिससे दुनिया भर के बाजारों और उद्योगों पर दबाव साफ देखा जा रहा है। युद्ध और तनाव से बढ़ रही आर्थिक अनिश्चितताअपने सालाना शेयरधारक पत्र में जेमी डिमोन ने कहा कि दुनिया इस समय कई गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है। इनमें रूस-यूक्रेन युद्ध, ईरान से जुड़े तनाव, मध्य पूर्व में बढ़ती दुश्मनी और आतंकवादी गतिविधियां शामिल हैं। उन्होंने कहा कि ये सभी घटनाएं “अनिश्चितता का क्षेत्र” तैयार कर रही हैं, जहां भविष्य के परिणामों का अंदाजा लगाना बेहद मुश्किल है। इसका सीधा असर कमोडिटी मार्केट, निवेश और वैश्विक व्यापार पर पड़ रहा है। चीन और ट्रेड वॉर भी चिंता का कारणडिमोन ने चीन के साथ बढ़ते तनाव को भी वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा जोखिम बताया। उन्होंने यह भी कहा कि पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा शुरू की गई टैरिफ आधारित ट्रेड वॉर अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। उनके अनुसार, ये व्यापारिक तनाव भविष्य में वैश्विक आर्थिक संतुलन को प्रभावित कर सकते हैं और नए आर्थिक समीकरण पैदा कर सकते हैं। AI: सबसे बड़ी तकनीकी क्रांति, लेकिन जोखिम भीजेमी डिमोन ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को अब तक की सबसे बड़ी तकनीकी क्रांति बताया। उन्होंने कहा कि AI का असर हर सेक्टर पर पड़ेगा और यह पूरी दुनिया के काम करने के तरीके को बदल सकता है। हालांकि, उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि AI के अंतिम परिणाम को लेकर अभी पूरी तरह स्पष्टता नहीं है, इसलिए सतर्क रहना जरूरी है। अमेरिकी मूल्यों पर भरोसा जरूरीडिमोन ने कहा कि इन चुनौतियों के बीच अमेरिका को अपने मूल्यों स्वतंत्रता, अवसर और लोकतंत्र पर फिर से भरोसा जताने की जरूरत है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका की 250वीं वर्षगांठ ऐसे मूल्यों को मजबूत करने का सही मौका है, जो देश की पहचान रहे हैं। भविष्य की अर्थव्यवस्था पर बड़ा सवालडिमोन के अनुसार, मौजूदा भू-राजनीतिक घटनाएं यह तय करेंगी कि आने वाले समय में वैश्विक आर्थिक व्यवस्था कैसी होगी। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि अनिश्चितता इतनी ज्यादा है कि कोई भी सटीक भविष्यवाणी करना मुश्किल है। :जेपी मॉर्गन के सीईओ जेमी डिमोन ने चेतावनी दी है कि यूक्रेन और मध्य पूर्व में चल रहे युद्ध, चीन के साथ तनाव और ट्रेड वॉर वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए सबसे बड़ा खतरा हैं। साथ ही, AI के तेजी से बढ़ते प्रभाव को लेकर भी उन्होंने सतर्क रहने की सलाह दी।
खराब बिजनेस अपडेट का असर! जुबिलेंट फूडवर्क्स स्टॉक में बड़ी गिरावट, निवेशकों में चिंता

नई दिल्ली। क्विक सर्विस रेस्टोरेंट (QSR) सेक्टर की दिग्गज कंपनी जुबिलेंट फूडवर्क्स लिमिटेड के शेयरों में मंगलवार को जोरदार गिरावट देखने को मिली। कंपनी के कमजोर चौथी तिमाही (Q4) बिजनेस अपडेट के बाद निवेशकों ने बिकवाली शुरू कर दी, जिसके चलते शेयर 10 प्रतिशत से ज्यादा टूट गया और 52-हफ्ते के निचले स्तर पर पहुंच गया। कारोबार के दौरान 52-हफ्ते के लो पर पहुंचा स्टॉकएनएसई पर दोपहर करीब 1:35 बजे जुबिलेंट फूडवर्क्स लिमिटेड का शेयर 10.14% गिरकर 414.25 रुपये पर कारोबार कर रहा था। दिन की शुरुआत 440 रुपये पर हुई थी, लेकिन बिकवाली के दबाव में यह गिरकर 408.80 रुपये तक पहुंच गया, जो इसका 52-हफ्ते का निचला स्तर है।गौरतलब है कि इस स्टॉक का 52-हफ्ते का उच्चतम स्तर 727.95 रुपये रहा है, जिससे साफ है कि पिछले एक साल में इसमें भारी गिरावट आई है। रेवेन्यू बढ़ा, लेकिन मांग कमजोरकंपनी ने जनवरी-मार्च तिमाही में 19% की कंसोलिडेटेड रेवेन्यू ग्रोथ दर्ज की और कुल आय 2,506 करोड़ रुपये रही। हालांकि, इसके बावजूद निवेशकों का भरोसा कमजोर पड़ गया। इसकी सबसे बड़ी वजह Domino’s Pizza इंडिया का कमजोर प्रदर्शन रहा। कंपनी की लाइक-फॉर-लाइक (LFL) ग्रोथ सिर्फ 0.2% रही, जो घरेलू बाजार में सुस्त मांग को दर्शाती है। मार्जिन पर दबाव और सीमित ग्रोथ की चिंताविश्लेषकों का मानना है कि कमजोर LFL ग्रोथ के कारण कंपनी के मार्जिन पर दबाव बढ़ सकता है। बड़े इवेंट जैसे टी20 क्रिकेट वर्ल्ड कप के बावजूद कंपनी उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाई। इसके अलावा, डिलीवरी बिजनेस से ग्रोथ की संभावनाएं भी सीमित होती दिख रही हैं। ऐसे में आने वाले समय में कंपनी की ग्रोथ रफ्तार और धीमी पड़ सकती है। हालांकि, कंपनी का तुर्की बिजनेस अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन करता नजर आया है, जो कुछ राहत जरूर देता है। नए स्टोर्स का विस्तार जारीकमजोर मांग के बावजूद कंपनी अपने विस्तार पर ध्यान दे रही है। इस तिमाही में जुबिलेंट फूडवर्क्स लिमिटेड ने कुल 69 नए स्टोर्स जोड़े, जिससे कुल आउटलेट्स की संख्या बढ़कर 3,663 हो गई है।इनमें Domino’s Pizza इंडिया के 59 नए स्टोर शामिल हैं, जबकि तुर्की में 4 नए आउटलेट खोले गए। डंकिन के साथ 15 साल पुरानी साझेदारी खत्मकंपनी ने एक बड़ा फैसला लेते हुए Dunkin’ के साथ अपनी फ्रेंचाइजी एग्रीमेंट को रिन्यू न करने का ऐलान किया है। यह 15 साल पुरानी साझेदारी इस साल 31 दिसंबर को खत्म हो जाएगी। कंपनी ने बताया कि लगातार घाटे और कमजोर ग्रोथ के चलते यह कदम उठाया गया है। अब कंपनी इस बिजनेस के लिए बिक्री या फ्रेंचाइजी ट्रांसफर जैसे विकल्पों पर विचार करेगी। निवेशकों के लिए चिंता बढ़ीइस साल अब तक कंपनी के शेयर 20% से ज्यादा गिर चुके हैं, जबकि पिछले एक साल में इसमें करीब 40% की गिरावट दर्ज की गई है। कमजोर मांग, मार्जिन प्रेशर और धीमी ग्रोथ के चलते निवेशकों की चिंता बढ़ गई है और आने वाले समय में कंपनी के प्रदर्शन पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी। कमजोर Q4 अपडेट के बाद जुबिलेंट फूडवर्क्स के शेयर 10% से ज्यादा गिरकर 52-हफ्ते के निचले स्तर पर पहुंच गए। डोमिनोज इंडिया की धीमी ग्रोथ और मार्जिन दबाव के कारण निवेशकों का भरोसा कमजोर पड़ा है।
IPL 2026 अपडेट: पथिराना-हसरंगा की फिटनेस पर सवाल, SLC को रिपोर्ट नहीं सौंपी

नई दिल्ली। आईपीएल 2026 के बीच श्रीलंकाई खिलाड़ियों की फिटनेस को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। श्रीलंका क्रिकेट (SLC) ने पुष्टि की है कि तेज गेंदबाज मथीशा पथिराना और स्टार ऑलराउंडर वानिंदु हसरंगा उन खिलाड़ियों में शामिल हैं, जिन्होंने अब तक अनिवार्य फिटनेस टेस्ट नहीं दिया है। कुल 45 सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट खिलाड़ियों में से अब तक केवल 24 ही इस टेस्ट को पास कर पाए हैं, जबकि कई खिलाड़ी या तो टेस्ट नहीं दे पाए हैं या फेल हो चुके हैं। आईपीएल टीमों के लिए बढ़ी चिंतावानिंदु हसरंगा और मथीशा पथिराना दोनों आईपीएल 2026 में अहम भूमिका निभाने वाले खिलाड़ी हैं। हसरंगा लखनऊ सुपर जायंट्स का हिस्सा हैं, जबकि पथिराना कोलकाता नाइट राइडर्स के लिए खेलते हैं। ऐसे में उनकी फिटनेस और टेस्ट क्लियर करना बेहद जरूरी है, क्योंकि इसका सीधा असर उनके आईपीएल और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट करियर पर पड़ सकता है। हसरंगा की स्थिति ज्यादा चिंताजनकरिपोर्ट्स के मुताबिक, हसरंगा की स्थिति सबसे ज्यादा चिंता का विषय बनी हुई है। उन्हें फरवरी में आयरलैंड के खिलाफ टी20 वर्ल्ड कप मैच के दौरान बाएं हैमस्ट्रिंग में चोट लगी थी। सूत्रों के अनुसार, उन्होंने अब तक अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) के लिए भी आवेदन नहीं किया है। इससे उनके आईपीएल में खेलने को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। पथिराना की वापसी की उम्मीददूसरी ओर, मथीशा पथिराना भी चोटिल रहे थे। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मैच के दौरान उनकी पिंडली की मांसपेशी में खिंचाव आ गया था। हालांकि, राहत की बात यह है कि उन्होंने नेट्स में गेंदबाजी शुरू कर दी है और उम्मीद की जा रही है कि वह अप्रैल के मध्य तक भारत पहुंचकर आईपीएल में हिस्सा ले सकते हैं। फिटनेस नियम हुए और सख्तश्रीलंका क्रिकेट ने अपने फिटनेस मानकों को और कड़ा कर दिया है। अब सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट खिलाड़ियों को 20 मीटर स्प्रिंट, 5-0-5 एजिलिटी टेस्ट, काउंटर मूवमेंट जंप, 2 किलोमीटर दौड़ और स्किनफोल्ड टेस्ट पास करना अनिवार्य है। इन सभी टेस्ट में कुल 29 अंक होते हैं, जिनमें से कम से कम 17 अंक हासिल करना जरूरी है। घरेलू क्रिकेट में भी लागू नियमएसएलसी ने यह नया फिटनेस सिस्टम घरेलू टूर्नामेंट ‘नेशनल सुपर लीग’ में भी लागू कर दिया है। हालांकि, यहां नियम थोड़े आसान हैं, जिसमें खिलाड़ियों को 2 किलोमीटर दौड़ और स्किनफोल्ड टेस्ट पास करना होता है। इस टूर्नामेंट में 87 खिलाड़ियों में से 23 खिलाड़ी न्यूनतम फिटनेस मानकों को पूरा नहीं कर पाए हैं। इन खिलाड़ियों को 19 अप्रैल तक का समय दिया गया है। फेल होने पर क्या होगा असर?अगर खिलाड़ी तय समय तक फिटनेस टेस्ट पास नहीं कर पाते, तो उन्हें मैच फीस नहीं दी जाएगी। इसके अलावा, उनके भविष्य के चयन और टूर्नामेंट में भागीदारी पर भी असर पड़ सकता है। आईपीएल 2026 के बीच पथिराना और हसरंगा का फिटनेस टेस्ट न देना बड़ा मुद्दा बन गया है। उनकी फिटनेस और टेस्ट क्लियर करना न सिर्फ उनके आईपीएल करियर बल्कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के लिए भी बेहद अहम साबित होगा।
झुकते मकान को देख लोगों ने रोका रास्ता उज्जैन में महाकाल जाने वाले मार्ग पर बड़ा हादसा टला

उज्जैन । मध्य प्रदेश के धार्मिक शहर उज्जैन में सोमवार शाम एक बड़ा हादसा होते होते टल गया जब महाकाल मंदिर जाने वाले व्यस्त मार्ग पर स्थित एक तीन मंजिला मकान अचानक भरभराकर गिर गया। इस घटना का लाइव वीडियो भी सामने आया है जिसने पूरे इलाके में दहशत फैला दी लेकिन राहत की बात यह रही कि स्थानीय लोगों की सतर्कता और सूझबूझ के चलते किसी भी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। यह घटना गेबी हनुमान क्षेत्र की है जो महाकाल मंदिर जाने वाले प्रमुख रास्तों में से एक माना जाता है। इस मार्ग से रोजाना बड़ी संख्या में श्रद्धालु गोपाल मंदिर, शिप्रा नदी और महाकाल मंदिर की ओर जाते हैं। ऐसे में यहां किसी भी तरह का हादसा बेहद गंभीर हो सकता था। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार शाम करीब 6 बजे से ही मकान में दरारें और झुकाव साफ नजर आने लगा था। स्थानीय लोगों ने स्थिति की गंभीरता को समझते हुए तुरंत सड़क पर आवाजाही रोक दी और लोगों को उस क्षेत्र से दूर कर दिया। करीब 7 बजे मकान पूरी तरह ढह गया। अगर उस समय ट्रैफिक चालू रहता तो यह हादसा कई जिंदगियां लील सकता था। मकान मालिक मनोज भावसार और अली अजगर सहित अन्य रहवासियों ने आरोप लगाया है कि पास में पोकलेन मशीन से चल रही तोड़फोड़ के कारण मकान कमजोर हो गया था। उनका कहना है कि पिछले एक महीने से मकान की नींव में पानी भरने की समस्या भी बनी हुई थी जिसकी शिकायत कई बार की गई लेकिन समय रहते कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। वहीं नगर निगम का पक्ष इससे अलग है। निगम अधिकारियों का कहना है कि ढाबा रोड क्षेत्र में मार्ग चौड़ीकरण के तहत जर्जर भवन को पूरी सुरक्षा व्यवस्था के साथ हटाया जा रहा था। उन्होंने दावा किया कि पूरी कार्रवाई बैरिकेडिंग और अधिकारियों की निगरानी में की जा रही थी ताकि किसी भी तरह की दुर्घटना से बचा जा सके। घटना के बाद पुलिस और नगर निगम की टीम तुरंत मौके पर पहुंच गई और इलाके को पूरी तरह घेर लिया गया। मलबा हटाने का काम शुरू कर दिया गया है ताकि रास्ता जल्द से जल्द बहाल किया जा सके। सीएसपी के अनुसार इस हादसे में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है जो कि सबसे बड़ी राहत की बात है। यह घटना एक बार फिर शहरी क्षेत्रों में जर्जर इमारतों और निर्माण कार्यों की निगरानी पर सवाल खड़े करती है। हालांकि इस मामले में स्थानीय लोगों की जागरूकता ने बड़ी त्रासदी को टाल दिया लेकिन प्रशासन के लिए यह एक चेतावनी भी है कि ऐसे मामलों में समय रहते ठोस कदम उठाना कितना जरूरी होता है।
गैस संकट पर फूटा छात्रों का गुस्सा नर्मदापुरम में कलेक्ट्रेट के बाहर चूल्हा जलाकर किया विरोध

नर्मदापुरम । मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम में रसोई गैस की किल्लत और कथित कालाबाजारी को लेकर छात्रों का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे बड़ी संख्या में छात्र सोमवार रात करीब 10 बजे अचानक कलेक्ट्रेट गेट पर पहुंच गए और वहां अनोखे तरीके से विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। छात्र अपने साथ सब्जी पोहा और चूल्हा लेकर आए थे और उन्होंने मौके पर ही खाना बनाना शुरू कर दिया जिससे प्रशासन भी हैरान रह गया। छात्रों का आरोप है कि शहर में एलपीजी सिलेंडर की भारी कमी है और इसका फायदा उठाकर कुछ लोग खुलेआम कालाबाजारी कर रहे हैं। उनका कहना है कि जो सिलेंडर सामान्य रूप से करीब 900 रुपये में मिलता है उसे 3500 से 4000 रुपये तक में बेचा जा रहा है। इस वजह से किराए के कमरों में रहने वाले और सीमित संसाधनों में पढ़ाई कर रहे छात्रों के लिए रोजमर्रा का जीवन बेहद कठिन हो गया है। प्रदर्शन की सूचना मिलते ही प्रशासन हरकत में आया और तहसीलदार सरिता मालवीय तथा शक्ति तोमर मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने छात्रों को समझाने की कोशिश की और तत्काल राहत के तौर पर दीनदयाल रसोई योजना के तहत भोजन उपलब्ध कराने का प्रस्ताव भी रखा लेकिन छात्रों ने इसे साफ तौर पर ठुकरा दिया। उनका कहना था कि उन्हें मुफ्त भोजन नहीं बल्कि उचित कीमत पर गैस सिलेंडर चाहिए ताकि वे खुद अपना खाना बना सकें और सम्मानजनक तरीके से रह सकें। प्रदर्शन के दौरान यह बात भी सामने आई कि अधिकांश छात्र बाहरी जिलों से आकर यहां रह रहे हैं और उनके पास स्थानीय गैस एजेंसियों के कनेक्शन नहीं हैं। यही वजह है कि वे नियमित आपूर्ति से वंचित हैं और मजबूरी में महंगे दामों पर सिलेंडर खरीदने को मजबूर हो रहे हैं। करीब एक घंटे तक चले इस विरोध के दौरान प्रशासन और छात्रों के बीच बातचीत हुई। तहसीलदार ने आश्वासन दिया कि जिन छात्रों के पास जिले के गैस कनेक्शन हैं वे अगले दिन अपनी बुक और डीएससी नंबर के साथ आएं उन्हें प्राथमिकता के आधार पर सिलेंडर उपलब्ध कराया जाएगा।इसी बीच स्थानीय कांग्रेस नेता Faizan ने आगे आकर छात्रों के भोजन की निजी व्यवस्था करने की बात कही जिसके बाद माहौल थोड़ा शांत हुआ और छात्रों ने प्रदर्शन समाप्त करने का फैसला लिया। हालांकि छात्रों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही गैस की किल्लत दूर नहीं की गई और कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो वे और बड़ा आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। यह घटना न केवल प्रशासन के लिए चुनौती बन गई है बल्कि शहर में आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता और निगरानी व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रही है।