क्या बीजेपी में जाएंगे राघव चड्ढा? राज्यसभा सीट पर भी उठे सवाल, जानें क्या कहते हैं नियम

नई दिल्ली। राघव चड्ढा और आम आदमी पार्टी के बीच बढ़ती खींचतान के बीच उनकी राजनीतिक भविष्य को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। पार्टी ने उन्हें राज्यसभा में उपनेता पद से हटा दिया है और आरोप लगाया है कि वह संसद में नरेंद्र मोदी सरकार के खिलाफ मुखर नहीं हो रहे। साथ ही पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय से यह भी कहा है कि उन्हें पार्टी कोटे से बोलने का समय न दिया जाए। इसी बीच उनके भारतीय जनता पार्टी में जाने की चर्चाएं तेज हो गई हैं। मोदी विरोधी पोस्ट हटाने का दावा दिल्ली AAP प्रमुख सौरभ भारद्वाज ने दावा किया कि राघव चड्ढा ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट से प्रधानमंत्री मोदी और बीजेपी की आलोचना वाले पुराने पोस्ट हटा दिए हैं। इसके बाद उनके राजनीतिक रुख को लेकर सवाल और गहरे हो गए। क्या बीजेपी में शामिल होंगे? इस पूरे विवाद के बाद दो बड़े सवाल उठ रहे हैं—क्या राघव चड्ढा बीजेपी में जाएंगे और यदि ऐसा होता है तो उनकी राज्यसभा सदस्यता पर क्या असर पड़ेगा? फिलहाल दोनों सवालों पर कोई स्पष्ट जवाब सामने नहीं आया है। दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अपना राजनीतिक भविष्य तय करना राघव चड्ढा के हाथ में है। इसे बीजेपी की ओर से “दरवाजे खुले” रखने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है, हालांकि पार्टी ने औपचारिक तौर पर कोई प्रस्ताव नहीं दिया है। क्या सुरक्षित है राज्यसभा सीट? राघव चड्ढा का राज्यसभा कार्यकाल 2028 तक है। ऐसे में पार्टी उन्हें सीधे तौर पर सांसद पद से नहीं हटा सकती। पार्टी केवल संगठनात्मक पदों से हटाने का अधिकार रखती है, जो किया जा चुका है। कब जा सकती है सदस्यता? संविधान की दसवीं अनुसूची (दल-बदल विरोधी कानून) के तहत किसी सांसद की सदस्यता दो स्थितियों में जा सकती है— यदि वह स्वेच्छा से पार्टी छोड़ दे। यदि वह सदन में पार्टी के व्हिप का उल्लंघन करे। अदालतों ने यह भी माना है कि केवल औपचारिक इस्तीफा जरूरी नहीं होता, बल्कि किसी दूसरी पार्टी के समर्थन में सार्वजनिक गतिविधियां भी “स्वेच्छा से पार्टी छोड़ने” का संकेत मानी जा सकती हैं। पहले भी हो चुका है ऐसा मामला 2017 में शरद यादव और अली अनवर को राज्यसभा से अयोग्य घोषित किया गया था। जनता दल (यूनाइटेड) ने उनके विपक्षी कार्यक्रमों में शामिल होने को दल-बदल का आधार बनाया था। अंतिम फैसला किसके पास? किसी सांसद की सदस्यता खत्म करने का अधिकार राज्यसभा के सभापति के पास होता है, जो देश के उपराष्ट्रपति होते हैं। वर्तमान में यह पद सी.पी. राधाकृष्णन के पास है। सुप्रीम कोर्ट की समयसीमा सुप्रीम कोर्ट ने 2023 में कहा था कि दल-बदल से जुड़े मामलों का निपटारा आदर्श रूप से तीन महीने में होना चाहिए, हालांकि इसके लिए कोई कानूनी समयसीमा तय नहीं है। कुल मिलाकर, राघव चड्ढा की राज्यसभा सदस्यता फिलहाल सुरक्षित मानी जा रही है। लेकिन यदि वह पार्टी छोड़ते हैं या विरोधी दल के साथ सक्रिय भूमिका निभाते हैं, तो दल-बदल कानून के तहत उनकी सीट पर खतरा बन सकता है।
होर्मुज से भारत को राहत, ईरान ने दी सुरक्षित आवाजाही की गारंटी; भारत की भूमिका की भी सराहना

तेहरान। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। मोहम्मद फतहली ने कहा है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से भारत समेत मित्र देशों के जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए ईरान ने विशेष इंतजाम किए हैं। हाल के दिनों में कई भारतीय पोत सुरक्षित रूप से इस मार्ग से गुजर चुके हैं। राजदूत ने स्पष्ट किया कि यह जलडमरूमध्य केवल उन देशों के लिए बंद है, जो ईरान के साथ युद्ध में शामिल हैं। उन्होंने कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, ईरान और ओमान के क्षेत्रीय जल क्षेत्र में आता है और इसके प्रबंधन से जुड़े फैसले तेहरान और मस्कट के अधिकार क्षेत्र में हैं। ईरान ने हमेशा अंतरराष्ट्रीय शिपिंग की सुरक्षा को प्राथमिकता दी है। भारत निभा सकता है अहम भूमिका राजदूत फतहली ने कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष को समाप्त करने में भारत प्रभावी भूमिका निभा सकता है। उन्होंने बातचीत और संयम बरतने की भारत की अपील को जिम्मेदाराना बताते हुए उसकी सराहना की। उनके मुताबिक, मौजूदा हालात में भारत जैसे देशों का संतुलित रुख बेहद अहम है। उन्होंने यह भी उम्मीद जताई कि स्वतंत्र देश अमेरिका और इजरायल की सैन्य कार्रवाइयों की निंदा करेंगे। ईरान ने दोहराया कि वह युद्ध नहीं चाहता और संघर्ष शुरू करने का उसका कोई इरादा नहीं है। चाबहार परियोजना पर जोर राजदूत ने कहा कि चाबहार पोर्ट जैसे क्षेत्रीय प्रोजेक्ट एकतरफा प्रतिबंधों से प्रभावित नहीं होने चाहिए। यह परियोजना क्षेत्रीय कनेक्टिविटी बढ़ाने के साथ-साथ मध्य एशिया तक भारत की पहुंच मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इस संबंध में ईरान लगातार भारतीय पक्ष के संपर्क में है। युद्ध से ईरान में बढ़ी एकजुटता फतहली के अनुसार, मौजूदा संघर्ष के दौरान ईरानी जनता पहले से अधिक एकजुट हुई है और बाहरी दबाव के खिलाफ सरकार का समर्थन कर रही है। उन्होंने कहा कि अमेरिका की नीति में बदलाव उसके गलत आकलन को दर्शाता है। अमेरिका पर साधा निशाना राजदूत ने दावा किया कि अमेरिका तीन स्तरों—ईरान की नेतृत्व क्षमता, जनता और सैन्य शक्ति—के आकलन में असफल रहा है। उन्होंने उभरते मंच ब्रिक्स के महत्व पर भी जोर दिया और सदस्य देशों से जिम्मेदार रवैया अपनाने का आग्रह किया। ट्रंप और नेतन्याहू की बयानबाजी पर प्रतिक्रिया राजदूत ने डोनाल्ड ट्रंप और बेंजामिन नेतन्याहू के बयानों की आलोचना करते हुए कहा कि ईरान की सभ्यता हजारों साल पुरानी है और वह किसी भी स्थिति में “पत्थर युग” में नहीं जाएगा। उन्होंने नागरिक ठिकानों पर हमलों को अमानवीय बताते हुए इसे हताशा का संकेत बताया। कुल मिलाकर, ईरान ने साफ किया है कि होर्मुज से भारतीय जहाजों की आवाजाही सुरक्षित रहेगी और क्षेत्रीय तनाव कम करने में भारत की भूमिका अहम मानी जा रही है।
NCERT के विवादित चैप्टर पर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे विशेषज्ञ, CJI सूर्यकांत के सामने रखा पक्ष

नई दिल्ली। एनसीईआरटी की पाठ्यपुस्तक में न्यायपालिका से जुड़े विवादित अध्याय पर घिरे तीन शिक्षाविदों ने अब सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। मामले की सुनवाई सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ के समक्ष हुई, जहां विशेषज्ञों ने कहा कि अध्याय का मसौदा किसी एक व्यक्ति ने नहीं, बल्कि सामूहिक प्रक्रिया से तैयार किया गया था। विशेषज्ञों ने क्या कहा याचिका में मिशेल डैनिनो, सुपर्णा दिवाकर और आलोक प्रसन्न कुमार की ओर से दलील दी गई कि उन्हें “अविश्वसनीय” बताना उचित नहीं है और उनकी पेशेवर विश्वसनीयता प्रभावित हुई है। उन्होंने अदालत से पूरी प्रक्रिया सामने रखने का मौका मांगा। आलोक प्रसन्न कुमार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि पिछली टिप्पणियों से शिक्षाविदों को नुकसान हुआ है और वे संदर्भ स्पष्ट करना चाहते हैं। वहीं सुपर्णा दिवाकर की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता जे साई दीपक ने कहा कि पाठ्य सामग्री तैयार करना सामूहिक निर्णय की प्रक्रिया थी। कोर्ट ने क्या कहा पीठ ने आवेदन रिकॉर्ड में लेने का निर्देश दिया और दो सप्ताह बाद सुनवाई तय की। अदालत ने यह भी दर्ज किया कि संशोधित अध्याय की समीक्षा के लिए एक समिति बनाई गई है, जिसमें इंदु मल्होत्रा, के.के. वेणुगोपाल और प्रकाश सिंह शामिल हैं। समिति राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी के सहयोग से काम करेगी, जिसकी अध्यक्षता अनिरुद्ध बोस कर रहे हैं। पहले दिया था संबंध तोड़ने का निर्देश इससे पहले 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्यों को तीनों विशेषज्ञों से संबंध खत्म करने का निर्देश दिया था। अदालत ने कहा था कि विवादित सामग्री से न्यायपालिका की नकारात्मक छवि प्रस्तुत होती है। माफी भी दायर मामले में दिनेश प्रसाद सकलानी ने बिना शर्त माफी का हलफनामा दाखिल किया। इससे पहले अदालत ने विवादित अध्याय वाले प्रकाशन, पुनर्मुद्रण और डिजिटल प्रसार पर भी रोक लगा दी थी। अब इस मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद होगी, जिसमें विशेषज्ञों की दलीलों पर विस्तार से विचार किया जाएगा।
बॉलीवुड में मिसाल बने अक्षय कुमार, फिल्म का चेक लौटाकर जीत लिया सबका दिल
नई दिल्ली।बॉलीवुड सुपरस्टार अक्षय कुमार एक बार फिर निर्देशक प्रियदर्शन के साथ फिल्म भूत बंगला के जरिए बड़े पर्दे पर धमाल मचाने के लिए तैयार हैं। फिल्म का ट्रेलर 6 अप्रैल को रिलीज होते ही सोशल मीडिया पर छा गया है। इसी ट्रेलर लॉन्च इवेंट के दौरान प्रोड्यूसर एकता कपूर ने एक ऐसा किस्सा सुनाया, जिसने सभी को चौंका दिया। एकता कपूर ने बताया कि अक्षय कुमार ने एक बार उनकी फिल्म के फ्लॉप होने पर खुद उन्हें चेक लौटाया था। यह घटना न सिर्फ हैरान करने वाली है, बल्कि इंडस्ट्री में अक्षय की ईमानदारी की मिसाल भी पेश करती है। फ्लॉप फिल्म के बाद लौटाए पैसे, हैरान रह गईं एकताट्रेलर लॉन्च के दौरान एकता कपूर ने कहा, “मैं कई सालों से अक्षय सर के साथ काम करने का इंतजार कर रही थी। हमारी पहली फिल्म अच्छा नहीं कर पाई थी। तभी अक्षय ने मुझे फोन किया और एक चेक दिया। उन्होंने कहा-‘ये आपके पैसे वापस हैं, आपके पैसे डूब गए हैं। एकता के मुताबिक, यह उनके लिए बेहद चौंकाने वाला पल था। उन्होंने कहा कि इंडस्ट्री में ऐसा बहुत कम देखने को मिलता है, जब कोई स्टार खुद आगे बढ़कर प्रोड्यूसर का नुकसान भरने की बात करे। ‘31 साल में ऐसा नहीं देखा’-एकता कपूरएकता कपूर ने अपनी हैरानी जाहिर करते हुए कहा, “मैं सदमे में थी। मेरे 31 साल के करियर में किसी ने ऐसा नहीं किया। इतनी सहजता से पैसे लौटाना बहुत बड़ी बात है। हालांकि, उन्होंने वह चेक लेने से इनकार कर दिया और अक्षय से कहा कि वह पैसे नहीं चाहतीं, बल्कि उनके साथ एक और फिल्म करना चाहती हैं। यही भरोसा आगे चलकर भूत बंगला के रूप में सामने आया। बताया जाता है कि दोनों इससे पहले 2013 की फिल्म Once Upon a Time in Mumbai Dobaara! में साथ काम कर चुके हैं। ‘भूत बंगला’ का ट्रेलर: डर और कॉमेडी का तड़काभूत बंगला का ट्रेलर दर्शकों को एक रहस्यमयी और रोमांचक दुनिया में ले जाता है। कहानी एक ऐसे बंगले के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसके पीछे ‘पिशाच वन’ नाम का खतरनाक जंगल है। फिल्म में परेश रावल बार-बार अक्षय को इस बंगले के खतरों से सावधान करते नजर आते हैं, लेकिन अक्षय उनकी बातों को नजरअंदाज कर उसी जगह शादी करने का फैसला लेते हैं। वहीं असरानी बताते हैं कि मंगलपुर में कोई शादी नहीं करता, क्योंकि वहां ‘वधुसुर’ नाम की एक खतरनाक शक्ति का साया है। ट्रेलर के अंत में अक्षय अनजाने में इस शक्ति को जगा देते हैं, जिससे कहानी और भी दिलचस्प हो जाती है। रिलीज डेट में बदलाव, अब इस दिन आएगी फिल्मपहले यह फिल्म 10 अप्रैल को रिलीज होने वाली थी, लेकिन अब मेकर्स ने इसकी डेट बदल दी है। अब भूत बंगला 17 अप्रैल को सिनेमाघरों में रिलीज होगी, जबकि पेड प्रीव्यू 16 अप्रैल की रात 9 बजे से शुरू होंगे। अक्षय कुमार ने फ्लॉप फिल्म के बाद एकता कपूर को चेक लौटाकर अपनी ईमानदारी की मिसाल पेश की। अब ‘भूत बंगला’ के जरिए दोनों की जोड़ी फिर साथ आ रही है, जिसका ट्रेलर रिलीज होते ही चर्चा में है।
बारामती में चुनावी संग्राम! सुनेत्रा पवार का जोरदार हमला, पार्थ के बयान पर बवाल
पुणे। महाराष्ट्र के पुणे जिले की बारामती विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा गया है। नामांकन दाखिल करते हुए राज्य की उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने स्पष्ट किया कि वह अपने दिवंगत पति अजित पवार के विकास कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। नामांकन के दौरान एनसीपी के कई वरिष्ठ नेता जैसे सुनील तटकरे, प्रफुल्ल पटेल, छगन भुजबल, धनंजय मुंडे और हसन मुश्रीफ मौजूद रहे। वहीं, महायुति गठबंधन के सहयोगी दलों से एकनाथ शिंदे और भाजपा नेता चंद्रशेखर बावनकुले भी उनके साथ नजर आए। बारामती की जनता को संबोधित करते हुए सुनेत्रा पवार ने भावुक अपील की। उन्होंने कहा कि जिस तरह लोगों ने वर्षों तक अजित पवार को समर्थन दिया, उसी तरह अब उन्हें भी सहयोग दें। उन्होंने भरोसा दिलाया कि बारामती का विकास रुकेगा नहीं, किसानों को पानी मिलता रहेगा और महिलाओं की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाएगी। साथ ही उन्होंने कहा कि अजित पवार का निधन उनके परिवार के साथ-साथ पूरे राज्य के लिए बड़ी क्षति है। इस दौरान उन्होंने अपने ससुर शरद पवार का जिक्र करते हुए कहा कि वह एक मजबूत राजनीतिक विरासत से आती हैं और अब जिम्मेदारी संभालने के लिए तैयार हैं। दूसरी ओर, कांग्रेस ने इस सीट से आकाश मोरे को मैदान में उतारा है। हालांकि, सत्ताधारी गठबंधन इस चुनाव को निर्विरोध कराना चाहता था, लेकिन कांग्रेस ने मुकाबले का फैसला लिया है। चुनाव को लेकर बयानबाजी भी तेज हो गई है। एनसीपी नेता पार्थ पवार ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि पार्टी को इसके परिणाम भुगतने होंगे। इस पर शरद पवार ने नाराजगी जताते हुए कहा कि राजनीति में ऐसे बयानों के लिए परिपक्वता जरूरी होती है और कांग्रेस को चुनाव लड़ने का पूरा अधिकार है। जवाब में कांग्रेस ने पार्थ पवार को ‘अकृतज्ञ बेटा’ बताते हुए तीखा पलटवार किया और कहा कि सत्ता के सामने झुकने वालों को दूसरों पर टिप्पणी करने का अधिकार नहीं है। यह उपचुनाव 28 जनवरी को हुए एक विमान हादसे में अजित पवार के निधन के बाद हो रहा है। इसके बाद 31 जनवरी को सुनेत्रा पवार को महाराष्ट्र की पहली महिला उपमुख्यमंत्री बनाया गया। अब वह बारामती से चुनाव लड़कर इस राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही हैं।
J&K में झीलों पर संकट: 45% गायब, 29% सिकुड़ीं, CAG रिपोर्ट ने खोली संरक्षण तंत्र की पोल

श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर में झीलों के तेजी से घटते अस्तित्व को लेकर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की ताजा ऑडिट रिपोर्ट ने चिंताजनक स्थिति उजागर की है। रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 1967 में मौजूद 697 झीलों में से 45 प्रतिशत यानी 315 झीलें पूरी तरह समाप्त हो चुकी हैं, जबकि 29 प्रतिशत यानी 203 झीलों का जल क्षेत्र काफी सिकुड़ गया है। 2017-18 से 2021-22 के बीच किए गए ऑडिट में सामने आया कि कुल 518 झीलों के क्षेत्रफल में 2,851.26 हेक्टेयर की कमी आई है। यह गिरावट पारिस्थितिकी तंत्र, जैव विविधता और जल संसाधनों के लिए गंभीर खतरे का संकेत देती है। आंकड़ों के मुताबिक 1,537.07 हेक्टेयर क्षेत्र में फैली 315 झीलें पूरी तरह खत्म हो चुकी हैं, जबकि 203 झीलों का क्षेत्रफल 1,314.19 हेक्टेयर घटा है। हालांकि 150 झीलों के क्षेत्र में 538.22 हेक्टेयर की वृद्धि और 29 झीलों में कोई बदलाव नहीं पाया गया, फिर भी कुल मिलाकर झीलों के घटते दायरे ने पर्यावरणीय संतुलन को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। खास बात यह है कि जिन 203 झीलों का जल क्षेत्र कम हुआ है, उनमें से 63 झीलों का क्षेत्रफल 50 प्रतिशत या उससे अधिक घट चुका है, जिससे उनके पूरी तरह खत्म होने का खतरा बढ़ गया है।हालांकि 150 झीलों के क्षेत्र में 538.22 हेक्टेयर की वृद्धि और 29 झीलों में कोई बदलाव नहीं पाया गया, फिर भी कुल मिलाकर झीलों के घटते दायरे ने पर्यावरणीय संतुलन को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। खास बात यह है कि जिन 203 झीलों का जल क्षेत्र कम हुआ है, उनमें से 63 झीलों का क्षेत्रफल 50 प्रतिशत या उससे अधिक घट चुका है, जिससे उनके पूरी तरह खत्म होने का खतरा बढ़ गया है। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि जम्मू-कश्मीर सरकार का संरक्षण प्रयास सीमित दायरे में ही सिमटा रहा। केवल छह प्रमुख झीलों डल झील, वुलर झील, होकरसर, मानसबाल झील, सुरिनसर झील और मानसर झील के लिए ही संरक्षण और प्रबंधन योजनाएं बनाई गईं। बाकी 691 झीलों के लिए न तो कोई ठोस योजना तैयार की गई और न ही पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की योजनाओं का लाभ उठाने की पहल की गई। 2017 से 2022 के बीच कुल कैपेक्स बजट का लगभग एक प्रतिशत, यानी 560.65 करोड़ रुपये, केवल इन छह झीलों पर ही खर्च किया गया। रिपोर्ट ने साफ संकेत दिया है कि व्यापक और समग्र संरक्षण नीति के अभाव में प्रदेश की झीलें तेजी से संकट की ओर बढ़ रही हैं।
ISI की बड़ी साजिश का खुलासा, भारत में दहशत फैलाने की थी योजना, जानिए जांच में क्या हुए खुलासे

नई दिल्ली। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई की एक बड़ी साजिश का खुलासा हुआ है, जिसमें भारत में बड़े पैमाने पर दहशत फैलाने की योजना बनाई गई थी। पुलिस सूत्रों के अनुसार, आतंकी मॉड्यूल को दिल्ली सहित देश के किसी एक स्थान पर 100 से अधिक राउंड गोलियां चलाने का निर्देश दिया गया था, ताकि भय का माहौल पैदा किया जा सके। जांच में हुए ये खुलासेजांच में सामने आया है कि अवैध हथियारों की सप्लाई करने वाला मुख्य आरोपी शाहबाज अंसारी बांग्लादेश में बैठकर पूरे नेटवर्क को संचालित कर रहा था। उसका पारिवारिक बैकग्राउंड भी हथियार तस्करी से जुड़ा रहा है। इस मॉड्यूल के जरिए आईएसआई का उद्देश्य भारत में अशांति और डर फैलाना था। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, इस नेटवर्क को धार्मिक आयोजनों, त्योहारों और बड़े सार्वजनिक कार्यक्रमों को निशाना बनाने का टारगेट दिया गया था। अपराध शाखा के एक अधिकारी ने बताया कि शाहबाज का भाई दुबई में आईएसआई अधिकारियों के संपर्क में आया, जिसके बाद इस नेटवर्क की कड़ियां मजबूत हुईं। पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स के निर्देश पर भारत में हथियार भेजे जा रहे थे। डीसीपी संजीव कुमार यादव के अनुसार, आरोपी इमरान और कामरान इस अवैध हथियार सप्लाई मॉड्यूल के सक्रिय सदस्य थे और शाहबाज अंसारी के निर्देश पर काम कर रहे थे। दोनों नेपाल जाकर हथियारों की खेप लाते थे, जिन्हें सीमा पार गुप्त रास्तों से भारत में पहुंचाया जाता था। पुलिस से बचने के लिए हथियारों को अलग-अलग हिस्सों में तोड़कर लाया जाता था और फिर सुरक्षित ट्रांजिट पॉइंट्स के जरिए सप्लाई किया जाता था। दूध डेयरी की आड़ में अवैध हथियारों का कारोबारजांच में यह भी सामने आया कि इमरान, जो उत्तर प्रदेश के सिकंदराबाद का रहने वाला है, अपने भाई के साथ दूध डेयरी की आड़ में अवैध हथियारों के कारोबार को अंजाम दे रहा था। वहीं कामरान, जो बुलंदशहर में चूड़ी की दुकान पर काम करता था, इस नेटवर्क में सक्रिय भूमिका निभा रहा था। दोनों ही आरोपी शाहबाज अंसारी के करीबी रिश्तेदार हैं और उसके निर्देशों का पालन करते थे। नेटवर्क की अहम कड़ी था शाहबाज अंसारी पुलिस के अनुसार, फरार शाहबाज अंसारी इस पूरे नेटवर्क की अहम कड़ी था, जो विदेश में बैठे आकाओं और भारत-नेपाल-पाकिस्तान में काम कर रहे गुर्गों के बीच समन्वय स्थापित करता था। हथियारों की तस्करी का रूट भी बेहद सुनियोजित था—पहले पाकिस्तान से खरीद, फिर थाईलैंड के रास्ते नेपाल भेजना और अंत में भारत में अवैध रूप से पहुंचाना।
होर्मुज पर ट्रंप का बड़ा बयान, बोले- अब टोल वसूलने का अधिकार हमारा, ईरान पर जीत का किया दावा

नई दिल्ली। होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से तेल की आवाजाही को लेकर जारी तनाव के बीच डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर अमेरिका की जीत का दावा करते हुए कहा कि अब टोल वसूलने का अधिकार भी उनके पास है। उन्होंने वाइट हाउस में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि जब अमेरिका विजेता है, तो होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों से शुल्क वसूलने का अधिकार भी उनके पास है। ट्रंप ने कहा कि उन्हें ईरान से कई संदेश मिले हैं, जिनसे पता चला कि वहां की जनता अपनी सरकार के खिलाफ और अधिक हमलों की मांग कर रही है। जब उनसे पूछा गया कि इन हमलों का आम ईरानी नागरिकों पर क्या असर पड़ेगा, तो उन्होंने दावा किया कि ईरानी लोग अपनी आजादी पाने के लिए तकलीफ उठाने को तैयार हैं। ट्रंप की चेतावनीउन्होंने ईरान के बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने की योजना का बचाव करते हुए कहा कि हर फैसला सोच-समझकर लिया गया है। ट्रंप ने साफ किया कि यदि समझौता नहीं हुआ, तो ईरान के कोई पुल या पावर प्लांट सुरक्षित नहीं रहेंगे और देश पूरी तरह तबाह हो जाएगा। उन्होंने अपने सख्त समय-सीमा की बात भी दोहराई, जिसमें कहा कि मंगलवार रात 8 बजे (भारतीय समयानुसार बुधवार सुबह 1 बजे) तक कोई रियायत नहीं दी जाएगी। ट्रंप ने रखी शर्त ट्रंप ने शर्त रखी कि वे केवल ऐसे समझौते को मंजूर करेंगे जिसमें तेल की बिना रोक-टोक आवाजाही सुनिश्चित हो। होर्मुज जलडमरूमध्य के विवाद पर उन्होंने नया बयान देते हुए कहा कि ईरान जहाजों से टोल नहीं वसूल सकता। ट्रंप ने स्पष्ट किया, “जीत हमारी है, वे सैन्य रूप से हार चुके हैं।” उन्होंने दोहराया कि अमेरिका ने इस संघर्ष को जीत लिया है और अब शर्तें उनके अनुसार तय होंगी। पूर्व ईरानी विदेश मंत्री की प्रतिक्रिया पूर्व ईरानी विदेश मंत्री ने इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए ट्रंप को मूर्ख राष्ट्रपति बताया और चेताया कि अरब देशों के शासकों को अमेरिकी हस्तक्षेप से बचाव करना चाहिए, ताकि पूरे क्षेत्र को अंधेरे में डूबने से रोका जा सके। गौरतलब है कि होर्मुज का मार्ग दुनिया के 20 प्रतिशत कच्चे तेल के आयात-निर्यात के लिए महत्वपूर्ण है, और इस तनाव ने वैश्विक ऊर्जा संकट की संभावना बढ़ा दी है।
कालाष्टमी 2026: क्यों Kaal Bhairav ने Brahma का सिर काटा? कैसे बने ‘काशी के कोतवाल’

नई दिल्ली। हिन्दू धार्मिक परंपरा के अनुसार हर महीने की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि भगवान शिव के रुद्रावतार काल भैरव को समर्पित होती है। इस दिन उनकी विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। मान्यता है कि काल भैरव की आराधना से कुंडली के ग्रह दोष दूर होते हैं, शत्रुओं और बाधाओं से सुरक्षा मिलती है, कार्यों में सफलता मिलती है और भय दूर होता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इसी दिन काल भैरव ने ब्रह्मा जी का पांचवां सिर काटा था। चलिए जानते हैं इस घटना के पीछे की कथा। ब्रह्मा और विष्णु के बीच विवादकथा कहती है कि एक बार ब्रह्मा जी और भगवान विष्णु के बीच यह विवाद उत्पन्न हुआ कि सृष्टि में सर्वोच्च कौन है। ब्रह्मा जी का दावा था कि वे सृजनकर्ता हैं, इसलिए सर्वोपरि हैं, जबकि विष्णु जी का मानना था कि पालनकर्ता होने के नाते उनका स्थान सर्वोच्च है। ज्योतिर्लिंग की खोज में निकले ब्रह्मा और विष्णुमहादेव ने इस विवाद का समाधान करने के लिए स्वयं को अनंत ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रकट किया। इसका न कोई आरंभ था और न कोई अंत। दोनों देवताओं को शर्त दी गई कि जो भी इस ज्योतिर्लिंग का सिरा पहले खोज लेगा, वही श्रेष्ठ माना जाएगा। विष्णु जी वराह रूप धारण कर पाताल की ओर गए और ब्रह्मा जी हंस बनकर आकाश की ओर उड़ चले। ब्रह्मा का अहंकार और काल भैरव का प्राकट्यलंबी खोज के बाद भी विष्णु जी को सिर नहीं मिला और उन्होंने हार मान ली। लेकिन ब्रह्मा जी ने झूठ बोलकर दावा किया कि उन्हें ज्योतिर्लिंग का ऊपरी सिरा मिल गया। इसके साथ ही उनके पांचवें मुख से महादेव के प्रति अपमानजनक शब्द निकले। इससे महादेव क्रोधित हो उठे और उनके क्रोध से काल भैरव प्रकट हुए। काल भैरव ने अपने नाखून से पल भर में ब्रह्मा जी का पांचवां सिर काट दिया। काशी में मोक्ष और ‘कोतवाल’ का सम्मानचूंकि काल भैरव ने सृष्टि के रचयिता का मस्तक काटा था, इसलिए उन पर ब्रह्महत्या का पाप लगा। कटा हुआ सिर उनके हाथ में चिपक गया। मुक्ति पाने के लिए वे तीनों लोकों में भटकते रहे। अंततः जब वे काशी पहुंचे, तो सिर अपने आप हाथ से गिर गया। तभी से काल भैरव को ‘काशी के कोतवाल’ के रूप में सम्मान मिला। कालाष्टमी कब हैहिंदू पंचांग के अनुसार, इस वर्ष कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 10 अप्रैल 2026 को है। दृक पंचांग के मुताबिक वैशाख कृष्ण अष्टमी की शुरुआत 9 अप्रैल को रात 9:19 बजे होगी और समाप्ति 10 अप्रैल को रात 11:15 बजे होगी। (Disclaimer: यह जानकारी पारंपरिक मान्यताओं और धर्मशास्त्रों पर आधारित है।)
अक्षय कुमार की 'भूत बंगला' का ट्रेलर देख फैंस निराश, पुराने डायलॉग्स और VFX को लेकर हुई आलोचना

नई दिल्ली। बॉलीवुड अभिनेता अक्षय कुमार की अपकमिंग हॉरर-कॉमेडी फिल्म ‘भूत बंगला’ का ट्रेलर 6 अप्रैल को रिलीज़ हो गया। फिल्म को लेकर दर्शकों में काफी उत्सुकता थी, लेकिन ट्रेलर देखने के बाद कुछ फैंस निराश नजर आए। फैंस का रिएक्शन: पुराने डायलॉग्स और कॉमेडीट्रेलर में जहां कई लोग अक्षय के कमेडी अंदाज का आनंद ले रहे थे, वहीं कुछ ने पुराने जोक्स और डायलॉग्स के दोहराव की आलोचना की। सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने लिखा कि ट्रेलर भूल भुलैया जैसी फिल्मों का रीमिक्स लगता है और मेकर्स को कुछ नया और ओरिजिनल बनाने की जरूरत है। एक यूजर ने लिखा, “कुछ तो ओरिजिनल बनाओ, वही भूल भुलैया वाले डायलॉग्स – ‘बहन डर गई बहन डर गई’, ‘हम कोई मंदिर का घंटा हैं’।“ दूसरे ने ट्रेलर पर टिप्पणी की, “क्या यह फिल्म है या मीम टेम्पलेट?” VFX पर भी मिली शिकायतट्रेलर के VFX को लेकर भी दर्शकों ने नाराजगी जताई। एक यूजर ने लिखा, “VFX में सुधार की जरूरत है। कॉमेडी ठीक थी, लेकिन विजुअल इफेक्ट्स निराशाजनक हैं।” एक अन्य ने कहा, “फिल्म का ट्रेलर निराशाजनक लगा… खराब VFX, बेदम जोक्स और दोहराए गए डायलॉग्स।” ट्रेलर की कहानीट्रेलर में दिखाया गया है कि अक्षय एक ऐसे बंगले के वारिस बनते हैं, जिसके पीछे ‘पिशाच वन’ नामक जंगल है। यहां कई खतरनाक भूत रहते हैं। परेश रावल अक्षय को बंगले में खतरों के बारे में चेतावनी देते हैं, लेकिन अक्षय शादी के लिए बंगले में जाने का फैसला कर लेते हैं। ट्रेलर के अंत में अक्षय अनजाने में बुरी शक्ति ‘वधुसुर’ को उसकी नींद से जगा देते हैं।रिलीज डेट और पेड प्रीव्यूपहले 10 अप्रैल को रिलीज़ होने वाली ‘भूत बंगला’ अब 17 अप्रैल को सिनेमाघरों में दस्तक देगी। पेड प्रीव्यू 16 अप्रैल को रात 9 बजे से शुरू होंगे। मेकर्स ने रिलीज़ को पोस्टपोन करने का कारण ‘धुरंधर 2’ की रिलीज़ को बताया है।