भोपाल में NSG का दमदार प्रदर्शन: ड्रोन अटैक से VIP रेस्क्यू तक का दिया लाइव डेमो, CM ने किया बड़ा ऐलान

भोपाल । राजधानी के लाल परेड ग्राउंड में सोमवार को राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड कमांडो ने अपने कौशल और ताकत का शानदार प्रदर्शन किया। इस दौरान कमांडो ने हेलीकॉप्टर से उतरकर इमारत में प्रवेश आतंकियों से मुठभेड़ बम खोजने और निष्क्रिय करने डॉग स्क्वॉड के जरिए आईईडी पहचानने और नागरिकों को सुरक्षित निकालने जैसे ऑपरेशन का लाइव डेमो दिया। कार्यक्रम में मोहन यादव पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा और NSG के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। MP में बनेगा काउंटर टेररिज्म सेंटर कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि राज्य में काउंटर टेररिज्म ग्रुप के गठन के लिए 200 करोड़ रुपये की DPR तैयार कर ली गई है। भोपाल के ग्राम तूमड़ा में इस सेंटर की स्थापना की जाएगी ताकि भविष्य में हर तरह के सुरक्षा खतरों से प्रभावी तरीके से निपटा जा सके। सुरक्षा बलों की ताकत पर जताया गर्व सीएम ने कहा कि देश की सुरक्षा में NSG और अन्य बलों की भूमिका बेहद अहम है। उन्होंने नरेंद्र मोदी के नेतृत्व का जिक्र करते हुए कहा कि भारत की वैश्विक पहचान मजबूत हुई है। साथ ही पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या का उदाहरण देते हुए सुरक्षा व्यवस्था के महत्व को रेखांकित किया।कड़ा संदेश: छेड़ोगे तो जवाब मिलेगा मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि भारत शांति में विश्वास रखता है लेकिन यदि कोई देश या ताकत उकसाएगी तो उसे कड़ा जवाब दिया जाएगा। उन्होंने इसे सिर्फ प्रदर्शन नहीं बल्कि सुरक्षा के प्रति संकल्प बताया और कहा कि हर तरह के खतरे से निपटने के लिए तैयार रहना जरूरी है। कमांडो का रोमांचक लाइव एक्शन प्रदर्शन के दौरान कमांडो ने Mi-17 हेलीकॉप्टर से स्लिथरिंग कर मल्टी-स्टोरी बिल्डिंग में एंट्री की और आतंकियों को निष्क्रिय करने की कार्रवाई दिखाई। K-9 डॉग स्क्वॉड ने आईईडी की पहचान की वहीं बम डिस्पोजल और एंटी-ड्रोन सिस्टम का भी प्रदर्शन किया गया। इसके अलावा VIP सुरक्षा हैंड-टू-हैंड कॉम्बैट क्राव मागा तकनीक अंडरवॉटर ऑपरेशन और लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने की ड्रिल भी पेश की गई। पूरे प्रदर्शन ने दर्शकों को रोमांचित कर दिया और सुरक्षा बलों की क्षमता का प्रभावशाली संदेश दिया।
बीजेपी स्थापना दिवस पर खास: जब फिल्मी सितारों ने राजनीति में बढ़ाया पार्टी का कद

नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी आज अपना स्थापना दिवस मना रही है। 6 अप्रैल 1980 को स्थापित हुई इस पार्टी ने पिछले चार दशकों में देश की राजनीति में मजबूत पकड़ बनाई है। इस सफर में फिल्म, टीवी, संगीत और खेल जगत की कई जानी-मानी हस्तियों ने भी पार्टी से जुड़कर इसकी लोकप्रियता और जनाधार को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है। इन सेलेब्रिटीज की पहुंच और प्रभाव का इस्तेमाल पार्टी ने खासकर युवाओं और अलग-अलग वर्गों तक अपनी विचारधारा पहुंचाने में किया है। हेमा मालिनी और सनी देओल जैसे बड़े नामबॉलीवुड की ‘ड्रीम गर्ल’ Hema Malini ने साल 2004 में बीजेपी जॉइन की थी और वह उत्तर प्रदेश की मथुरा सीट से लगातार सांसद रही हैं। वहीं, ‘गदर’ और ‘बॉर्डर’ जैसी फिल्मों के स्टार Sunny Deol ने 2019 में राजनीति में कदम रखा और पंजाब के गुरदासपुर से सांसद बने। हालांकि, उन्होंने 2024 चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया था। नई पीढ़ी की एंट्री: कंगना रनौत और रवि किशननेशनल अवॉर्ड विजेता अभिनेत्री Kangana Ranaut ने 2024 में बीजेपी जॉइन कर हिमाचल प्रदेश की मंडी सीट से चुनाव जीता और सांसद बनीं। वहीं अभिनेता Ravi Kishan 2017 से पार्टी के सक्रिय सदस्य हैं और गोरखपुर से सांसद के रूप में अपनी भूमिका निभा रहे हैं। भोजपुरी और टीवी जगत से भी मजबूत समर्थनभोजपुरी गायक और अभिनेता Manoj Tiwari ने 2013 में बीजेपी जॉइन की और दिल्ली की नॉर्थ-ईस्ट सीट से तीन बार सांसद चुने गए। वहीं ‘रामायण’ फेम Arun Govil 2021 में पार्टी से जुड़े और 2024 में मेरठ से जीतकर संसद पहुंचे। टीवी इंडस्ट्री से Smriti Irani भी बीजेपी का बड़ा चेहरा रही हैं। ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ से लोकप्रियता हासिल करने के बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा और अमेठी से सांसद व केंद्र सरकार में मंत्री भी रहीं। धर्मेंद्र, मिथुन और अन्य सितारों का साथदिवंगत अभिनेता Dharmendra भी बीजेपी से जुड़े रहे और बीकानेर से सांसद बने। अभिनेत्री Jaya Prada ने भी 2019 में पार्टी का दामन थामा। वहीं Mithun Chakraborty 2021 में बीजेपी में शामिल हुए और पश्चिम बंगाल में पार्टी के प्रमुख प्रचारकों में गिने जाते हैं। इसके अलावा Anupam Kher, Akshay Kumar, Suniel Shetty और Paresh Rawal जैसे सितारे भले औपचारिक रूप से पार्टी में शामिल न हों, लेकिन समय-समय पर समर्थन करते नजर आते हैं। राजनीति और ग्लैमर का मजबूत मेलभाजपा ने इन चर्चित चेहरों के जरिए न केवल अपनी पहुंच बढ़ाई है, बल्कि जनसंपर्क को भी मजबूत किया है। इन सितारों की लोकप्रियता ने पार्टी को आम जनता, खासकर युवाओं के बीच और अधिक प्रभावशाली बनाने में मदद की है।
ग्लोबल तनाव का असर! CAIT ने सरकार से मांगी राहत, इनपुट लागत कंट्रोल करने की अपील

नई दिल्ली।मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच देश के व्यापारिक संगठनों ने चिंता जतानी शुरू कर दी है। इसी कड़ी में कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) ने केंद्र सरकार से अपील की है कि वह लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) और छोटे व्यापारियों के लिए त्वरित राहत उपाय लागू करे। संगठन का कहना है कि पश्चिम एशिया में जारी संकट का सीधा असर भारत के व्यापार, आपूर्ति श्रृंखला और लागत संरचना पर पड़ रहा है। क्रेडिट और लिक्विडिटी बढ़ाने की मांगCAIT ने सरकार से विशेष क्रेडिट गारंटी लाइन स्कीम शुरू करने की मांग की है, जिससे छोटे व्यवसायों को लिक्विडिटी सपोर्ट मिल सके। इसके साथ ही MSME सेक्टर को राहत देने के लिए लोन चुकाने की समयसीमा बढ़ाने की भी अपील की गई है। संगठन का मानना है कि मौजूदा हालात में नकदी की उपलब्धता बनाए रखना बेहद जरूरी है, ताकि कारोबार प्रभावित न हो। इनपुट लागत और ईंधन कीमतों पर नजर जरूरीसंगठन ने ईंधन, कच्चे माल और माल ढुलाई की बढ़ती लागत पर भी चिंता जताई है। CAIT ने सरकार से इन लागतों की बारीकी से निगरानी और स्थिरीकरण के लिए ठोस कदम उठाने का आग्रह किया है। इसके अलावा प्रभावित क्षेत्रों के लिए ब्याज सब्सिडी, बीमा सहायता और निर्यातकों के लिए तेजी से रिफंड की सुविधा देने की भी मांग की गई है। सरकार को लिखा गया पत्र, त्वरित कार्रवाई की अपीलCAIT के महासचिव और सांसद Praveen Khandelwal ने वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman को पत्र लिखकर इन मुद्दों को उठाया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो छोटे व्यापारियों और MSME सेक्टर पर गंभीर आर्थिक दबाव पड़ सकता है। ‘वेस्ट एशिया टास्क फोर्स’ बनाने का सुझावखंडेलवाल ने एक विशेष ‘पश्चिम एशिया प्रभाव आकलन एवं प्रतिक्रिया कार्य बल’ बनाने का सुझाव भी दिया है। इसमें प्रमुख मंत्रालयों, Reserve Bank of India, व्यापार संगठनों और क्षेत्रीय विशेषज्ञों को शामिल करने की बात कही गई है। इसका उद्देश्य बदलती वैश्विक परिस्थितियों का लगातार आकलन कर समय-समय पर नीतिगत सुझाव देना होगा। आपूर्ति श्रृंखला और लागत दबाव पर बढ़ती चिंतापत्र में कहा गया है कि मौजूदा तनाव के कारण इनपुट लागत बढ़ रही है, सप्लाई चेन बाधित हो रही है और कार्यशील पूंजी पर दबाव बढ़ रहा है। इसका सीधा असर कंपनियों के मुनाफे और संचालन पर पड़ सकता है, खासकर छोटे और मध्यम व्यवसायों के लिए स्थिति चुनौतीपूर्ण बन सकती है। सरकार के प्रयासों की सराहना भीहालांकि CAIT ने Narendra Modi के नेतृत्व में सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की सराहना भी की। संगठन ने कहा कि सप्लाई सोर्स का विविधीकरण, लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना और जरूरी वस्तुओं की निगरानी जैसे कदमों से बाजार में स्थिरता बनी हुई है और व्यापार जगत का भरोसा कायम है। समय रहते कदम जरूरीकुल मिलाकर, CAIT का मानना है कि वैश्विक तनाव के इस दौर में सरकार को सक्रिय और सतर्क रहकर छोटे व्यवसायों के लिए राहत उपाय लागू करने चाहिए, ताकि अर्थव्यवस्था की गति बनी रहे।
धार में महिला से मारपीट और दुष्कर्म प्रयास का मामला, पांच आरोपियों पर FIR दर्ज

धार । धार जिले के धामनोद थाना क्षेत्र में एक गंभीर घटना सामने आई है जहां एक महिला को बंधक बनाकर बेरहमी से मारपीट की गई और सामूहिक दुष्कर्म का प्रयास किया गया पुलिस सूत्रों के अनुसार इस मामले में तीन महिलाएं और दो पुरुष आरोपी शामिल हैं और उनके खिलाफ FIR दर्ज की गई है पीड़ित महिला ने शिकायत में बताया कि ग्राम कुन्दा में उसके खेत के पास रहने वाले परिवार द्वारा जेसीबी से जमीन समतल की जा रही थी इस प्रक्रिया में उसकी बाउंड्री को नुकसान पहुंचा और जब महिला ने इसका विरोध किया तो आरोपियों ने उस पर हमला कर दिया और मारपीट शुरू कर दी पुलिस ने बताया कि घटना के समय पीड़िता को बंधक बनाया गया और आरोपियों ने मारपीट की कोशिश की इसके अलावा सामूहिक दुष्कर्म का प्रयास भी किया गया पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है और मामले की जांच शुरू कर दी गई है स्थानीय प्रशासन ने महिला सुरक्षा और कानून व्यवस्था पर विशेष ध्यान देने का आश्वासन दिया है साथ ही जांच में सहयोग के लिए ग्रामीणों से भी अपील की गई है पुलिस आरोपी गिरफ्तार करने के प्रयास में लगी हुई है और इस मामले को प्राथमिकता से देख रही है यह मामला क्षेत्र में महिला सुरक्षा के मुद्दे पर चिंता बढ़ा रहा है और प्रशासन ने ग्रामीणों को सतर्क रहने तथा किसी भी आपराधिक गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस को देने की सलाह दी हैसुरक्षा और कानून के प्रवर्तन के तहत पुलिस पीड़िता की सुरक्षा सुनिश्चित कर रही है और आरोपी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई पूरी कठोरता से की जाएगी ताकि ऐसे मामलों पर स्पष्ट संदेश जा सके
भारतीय शेयर बाजार गिरावट के साथ खुला, फार्मा स्टॉक्स में भारी बिकवाली

नई दिल्ली। हफ्ते के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार कमजोरी के साथ खुला। सुबह करीब 9:17 बजे BSE Sensex 241 अंक यानी 0.33% की गिरावट के साथ 73,078.49 पर और Nifty 50 84.70 अंक यानी 0.37% की कमजोरी के साथ 22,628.40 पर कारोबार करता नजर आया। शुरुआती कारोबार में निवेशकों का रुख सतर्क दिखा, जिससे बाजार पर दबाव बना रहा। फार्मा सेक्टर में सबसे ज्यादा दबावइस गिरावट की अगुवाई फार्मा शेयरों ने की। निफ्टी फार्मा इंडेक्स करीब 1% तक लुढ़क गया, जिससे यह टॉप लूजर सेक्टर बना। इसके अलावा ऑयल एंड गैस, हेल्थकेयर, मीडिया, प्राइवेट बैंक, रियल्टी, डिफेंस और इंफ्रा सेक्टरों में भी बिकवाली देखने को मिली। यह दर्शाता है कि बाजार में व्यापक स्तर पर दबाव बना हुआ है। आईटी और मेटल स्टॉक्स ने दी थोड़ी राहतहालांकि, पूरी तस्वीर नकारात्मक नहीं रही। आईटी, मेटल और पीएसयू बैंक सेक्टर में खरीदारी देखने को मिली, जिससे बाजार को कुछ सहारा मिला। सेंसेक्स के टॉप गेनर्स में ट्रेंट, टाइटन, पावर ग्रिड, टेक महिंद्रा, एचसीएल टेक, इन्फोसिस और टीसीएस जैसे दिग्गज शेयर शामिल रहे। वहीं कोटक महिंद्रा बैंक, सन फार्मा, आईसीआईसीआई बैंक और मारुति सुजुकी जैसे शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयर भी दबाव मेंलार्जकैप के साथ-साथ मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स भी कमजोरी के साथ कारोबार कर रहे थे। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स करीब 0.59% गिरकर 53,384 पर और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 0.64% गिरकर 15,549 पर पहुंच गया। इससे साफ है कि बाजार में व्यापक स्तर पर बिकवाली का माहौल बना हुआ है। वैश्विक तनाव का असर, निवेशकों में सतर्कता बाजार की इस गिरावट के पीछे प्रमुख वजह वैश्विक तनाव को माना जा रहा है। Iran, United States और Israel के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर दुनियाभर के बाजारों पर दिख रहा है। निवेशक जोखिम से बचने के मूड में नजर आ रहे हैं, जिससे बिकवाली बढ़ रही है। एशियाई और अमेरिकी बाजारों का मिला-जुला संकेतएशियाई बाजारों में Tokyo और Seoul के बाजार हरे निशान में रहे, जबकि जकार्ता में गिरावट देखने को मिली। वहीं अमेरिकी बाजार पिछले सत्र में कमजोरी के साथ बंद हुए थे, जिसका असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा। कमोडिटी मार्केट में उतार-चढ़ावकमोडिटी बाजार की बात करें तो कच्चे तेल में मिलाजुला रुख देखने को मिला। ब्रेंट क्रूड हल्की तेजी के साथ 109.70 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जबकि WTI क्रूड में गिरावट रही। वहीं सोने और चांदी की कीमतों में भी कमजोरी दर्ज की गई, जो निवेशकों के सतर्क रुख को दर्शाती है। दबाव में बाजार, आगे भी रह सकती है उतार-चढ़ाव की स्थितिकुल मिलाकर, भारतीय शेयर बाजार ने सप्ताह की शुरुआत कमजोर नोट पर की है। वैश्विक तनाव, महंगाई और निवेशकों की सतर्कता के चलते बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।
वैश्विक भारत : उद्योगों की रफ्तार, अर्थव्यवस्था का विस्तार

– डॉ. मयंक चतुर्वेदी भारत आज वैश्विक अर्थव्यवस्था में एक ऐसी शक्ति के रूप में उभर रहा है, जिसकी गति, स्थिरता और विविधता ये तीनों ही उसे विशेष बनाती हैं। इस संबंध में सामने आए आर्थिक आंकड़े इस बात की पुष्टि कर रहे हैं कि देश विकास के नए आयाम स्थापित कर रहा है। विशेष रूप से औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) में दर्ज प्रगति इस व्यापक आर्थिक मजबूती का स्पष्ट संकेत है। फरवरी 2026 में भारत की औद्योगिक वृद्धि दर बढ़कर 5.2 प्रतिशत हो गई, जोकि जनवरी के 4.8 प्रतिशत से अधिक है। कहना होगा कि यह वृद्धि आर्थिक गतिविधियों में निरंतरता और विस्तार का प्रमाण है। इस वृद्धि के पीछे सबसे बड़ा योगदान मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का रहा, जिसने छह प्रतिशत की प्रभावशाली वृद्धि दर्ज की। चूंकि औद्योगिक उत्पादन सूचकांक में इस क्षेत्र की हिस्सेदारी लगभग 75 प्रतिशत है, इसलिए इसका मजबूत प्रदर्शन पूरी औद्योगिक अर्थव्यवस्था को गति देता है। वस्तुत: मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र की यह प्रगति आज कई मायनों में महत्वपूर्ण है। यह उत्पादन क्षमता में वृद्धि को तो दर्शाती ही है, साथ में रोजगार सृजन की दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। भारत जैसे युवा देश में, जहां हर वर्ष लाखों छात्र इंजीनियरिंग और तकनीकी शिक्षा प्राप्त कर कार्यक्षेत्र में प्रवेश करते हैं, वहां यह क्षेत्र गुणवत्तापूर्ण रोजगार उपलब्ध कराने का प्रमुख माध्यम बनता जा रहा है। फरवरी 2026 में मैन्युफैक्चरिंग के 23 उद्योग समूहों में से 14 में सकारात्मक वृद्धि दर्ज होना इस क्षेत्र की व्यापक मजबूती को दर्शाता है। विशेष रूप से बुनियादी धातु, मोटर वाहन और मशीनरी एवं उपकरण जैसे क्षेत्रों में दोहरे अंकों की वृद्धि यह संकेत देती है कि भारत का औद्योगिक ढांचा अब अधिक परिपक्व और प्रतिस्पर्धी हो रहा है। बुनियादी धातु क्षेत्र में वृद्धि से निर्माण और अवसंरचना को बल मिलता है, जबकि ऑटोमोबाइल और मशीनरी क्षेत्र कृषि, परिवहन और उद्योगों की उत्पादकता को बढ़ाते हैं। खनन और बिजली क्षेत्र भी इस विकास यात्रा में पीछे नहीं हैं। फरवरी में खनन क्षेत्र में 3.1 प्रतिशत और बिजली उत्पादन में 2.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। ये दोनों क्षेत्र औद्योगिक गतिविधियों की रीढ़ माने जाते हैं और इनमें वृद्धि का अर्थ है कि उत्पादन के लिए आवश्यक कच्चा माल और ऊर्जा की उपलब्धता सुनिश्चित हो रही है। इसके अलावा उपयोग-आधारित वर्गीकरण के आंकड़े भारत की अर्थव्यवस्था के भीतर हो रहे संरचनात्मक परिवर्तन को उजागर करते हैं। पूंजीगत वस्तुओं के उत्पादन में 12.5 प्रतिशत की वृद्धि यह दर्शाती है कि उद्योगों में निवेश बढ़ रहा है। मशीनों और उपकरणों का अधिक उत्पादन इस बात का संकेत है कि उद्योग विस्तार की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं, जिससे भविष्य में उत्पादन, आय और रोजगार में और वृद्धि होगी। इसी प्रकार उपभोक्ता वस्तुओं, विशेषकर इलेक्ट्रॉनिक सामान, रेफ्रिजरेटर और टीवी के उत्पादन में 7.3 प्रतिशत की वृद्धि यह स्पष्ट करती है कि देश में मांग का स्तर बढ़ रहा है। यह बढ़ती आय, मध्यम वर्ग के विस्तार और उपभोग आधारित अर्थव्यवस्था की मजबूती का संकेत है। जब उपभोक्ता खर्च बढ़ता है, तब यह पूरे आर्थिक चक्र को गति देता है, उत्पादन बढ़ता है, रोजगार सृजित होते हैं और निवेश को प्रोत्साहन मिलता है। यहां उल्लेखित है कि भारत की आर्थिक मजबूती का एक अन्य प्रमुख आधार सरकार द्वारा अवसंरचना क्षेत्र में किया जा रहा भारी निवेश है। राजमार्गों, बंदरगाहों और रेलवे परियोजनाओं में लगातार बढ़ते निवेश के कारण अवसंरचना और निर्माण सामग्री क्षेत्र में फरवरी में 11.5 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। निश्चित ही यह उस दीर्घकालिक दृष्टि का परिणाम है, जिसके तहत सरकार देश को एक मजबूत लॉजिस्टिक्स और कनेक्टिविटी नेटवर्क प्रदान कर रही है। इन परियोजनाओं का प्रभाव बहुआयामी है। एक ओर ये बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित करती हैं, वहीं दूसरी ओर उद्योगों के लिए लागत कम करती हैं और प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाती हैं। बेहतर सड़क और रेल नेटवर्क से माल परिवहन तेज और सस्ता होता है, जिससे निर्यात को भी बढ़ावा मिलता है। यदि व्यापक आर्थिक परिप्रेक्ष्य में देखें, तो भारत की अर्थव्यवस्था कई अन्य सकारात्मक संकेत भी दे रही है। देश की जीडीपी वृद्धि दर विश्व की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे अधिक बनी हुई है। अंतरराष्ट्रीय संस्थान जैसे अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) और विश्व बैंक भी भारत को आने वाले वर्षों में सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में देख रहे हैं। भारत में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (एफडीआई) का प्रवाह लगातार बना हुआ है, जो वैश्विक निवेशकों के भरोसे को दर्शाता है। ‘मेक इन इंडिया’, ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘पीएलआई (उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन)’ जैसी योजनाओं ने मैन्युफैक्चरिंग और निर्यात को नई दिशा दी है। इलेक्ट्रॉनिक्स, मोबाइल निर्माण, रक्षा उत्पादन और फार्मास्यूटिकल्स जैसे क्षेत्रों में भारत तेजी से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है। साथ में देखने में आ रहा है कि डिजिटल अर्थव्यवस्था भी भारत की ताकत का एक प्रमुख स्तंभ बनकर उभरी है। यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) जैसे प्लेटफॉर्म ने लेन-देन को सरल और पारदर्शी बनाया है। इससे न सिर्फ वित्तीय समावेशन बढ़ा है, बल्कि छोटे और मध्यम उद्यमों को भी नई ऊर्जा मिली है। महंगाई पर नियंत्रण और वित्तीय अनुशासन भी भारत की आर्थिक स्थिरता को मजबूत बनाते हैं। सरकार द्वारा संतुलित राजकोषीय नीति और भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीतियों ने अर्थव्यवस्था को स्थिर बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। हालांकि वैश्विक स्तर पर कई चुनौतियां मौजूद हैं, जैसे भू-राजनीतिक तनाव, आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान और ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव फिर भी यहां अच्छी बात यह है कि भारत ने अपनी नीतिगत दृढ़ता और आंतरिक मांग के बल पर इनका प्रभाव सीमित रखा है। अंततः, फरवरी 2026 के भारत का औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) आंकड़े सिर्फ एक महीने की उपलब्धि न होकर यह उस निरंतर प्रयास और नीति-निर्माण का परिणाम हैं, जोकि भारत को एक मजबूत, आत्मनिर्भर और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में आगे बढ़ा रहे हैं। मैन्युफैक्चरिंग की गति, पूंजीगत निवेश में वृद्धि, उपभोक्ता मांग का विस्तार और अवसंरचना पर फोकस, कहना होगा कि ये सभी मिलकर आज एक ऐसे आर्थिक परिदृश्य का निर्माण कर रहे हैं, जोकि आने वाले वर्षों में भारत को विश्व की अग्रणी आर्थिक शक्तियों में स्थापित कर सकता है। इस प्रकार स्पष्ट है कि भारत वर्तमान में अच्छा प्रदर्शन कर रहा है और
सर्विस सेक्टर में उछाल! ग्लोबल डिमांड से मार्च में बढ़ी गतिविधियां

नई दिल्ली। भारत की सेवा अर्थव्यवस्था ने मार्च महीने में मजबूती के संकेत दिए हैं। वैश्विक मांग में सुधार के चलते सर्विस सेक्टर की गतिविधियों में इजाफा हुआ है, हालांकि घरेलू नए ऑर्डर्स की रफ्तार कुछ धीमी जरूर पड़ी है। S&P Global द्वारा जारी HSBC इंडिया सर्विसेज PMI रिपोर्ट के अनुसार, मार्च में सर्विसेज PMI 57.5 दर्ज किया गया, जो इसके दीर्घकालिक औसत 54.4 से काफी ऊपर है। यह संकेत देता है कि सेक्टर में विस्तार जारी है और आर्थिक गतिविधियां मजबूत बनी हुई हैं। विदेशी ऑर्डर्स ने बढ़ाया कारोबार, घरेलू मांग थोड़ी सुस्तरिपोर्ट के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय ऑर्डर्स में तेज वृद्धि ने सर्विस सेक्टर को मजबूत सपोर्ट दिया। हालांकि, घरेलू स्तर पर नए बिजनेस की ग्रोथ में नरमी देखी गई। इसके पीछे वैश्विक अनिश्चितताओं और बाजार की बदलती परिस्थितियों का असर माना जा रहा है। खासतौर पर मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष का असर मांग, पर्यटन और बिजनेस माहौल पर पड़ा है, जिससे उत्पादन की रफ्तार सीमित हुई। रोजगार में तेजी, कंपनियों का भरोसा मजबूतएक सकारात्मक पहलू यह रहा कि कंपनियों ने मार्च में रोजगार बढ़ाने की रफ्तार तेज की। रिपोर्ट के अनुसार, 2025 के मध्य के बाद से यह सबसे तेज भर्ती देखी गई है। इतना ही नहीं, करीब 12 वर्षों में उत्पादन को लेकर सबसे मजबूत आउटलुक भी सामने आया है। इससे साफ है कि कंपनियां भविष्य को लेकर आशावादी हैं और विस्तार की योजनाएं बना रही हैं। चार में से तीन प्रमुख सेक्टरों में धीमी बिक्रीसेवा क्षेत्र के चार प्रमुख हिस्सों—वित्त एवं बीमा, रियल एस्टेट एवं प्रोफेशनल सर्विसेज और ट्रांसपोर्ट, सूचना एवं संचार—में बिक्री की वृद्धि अपेक्षाकृत धीमी रही। इससे संकेत मिलता है कि सेक्टर में ग्रोथ तो है, लेकिन यह व्यापक रूप से समान नहीं है और कुछ हिस्सों में दबाव बना हुआ है। महंगाई का दबाव बढ़ा, कीमतों में उछालरिपोर्ट में यह भी सामने आया कि जून 2022 के बाद से इनपुट लागत में सबसे तेज वृद्धि दर्ज की गई है। इसके चलते सर्विसेज की कीमतों में भी बढ़ोतरी हुई और मार्च में चार्ज किए जाने वाले शुल्क सात महीनों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गए। यानी, कंपनियां बढ़ती लागत का बोझ ग्राहकों पर डाल रही हैं, जिससे महंगाई का दबाव बढ़ सकता है। चुनौतियों के बीच मजबूती दिखा रहा सर्विस सेक्टरकुल मिलाकर, भारतीय सर्विस सेक्टर ने मार्च में वैश्विक मांग के दम पर अच्छी वृद्धि दर्ज की है, लेकिन घरेलू मांग और महंगाई जैसे कारक आगे की रफ्तार को प्रभावित कर सकते हैं। फिर भी कंपनियों का बढ़ता भरोसा और रोजगार में सुधार इस सेक्टर के लिए सकारात्मक संकेत हैं।
सीएम मोहन यादव ने बताया असली धुरंधर का दौर, भाजपा विचारधारा को अमर कर संगठन विस्तार

भोपाल । आज भाजपा का 47वां स्थापना दिवस प्रदेशभर में उत्साह और जोश के साथ मनाया गया भोपाल के प्रदेश कार्यालय में प्राथमिक और सक्रिय सदस्यों का सम्मेलन आयोजित किया गया और इसी स्थान से 17 जिलों में नए जिला कार्यालयों के भूमिपूजन कार्यक्रम में मुख्यमंत्री मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल वर्चुअली जुड़े मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि भारत अब तीसरा ऐसा देश बन गया है जो अपने दुश्मनों को उनके देश में जाकर न केवल रोकता बल्कि ठिकाने भी लगाता है उन्होंने मोदी जी के नेतृत्व में धुरंधर-2 का दौर चल रहा बताया और याद दिलाया कि पहले भी असली धुरंधर का जमाना था जब नकली नोटों के जरिए पाकिस्तान परेशान करता था उस समय भी भारत ने अपने सुरक्षा और सामर्थ्य से उनका मुकाबला किया । सीएम ने भाजपा की विचारधारा की अमरता की ओर इशारा करते हुए कहा कि फीनिक्स पक्षी तो राख बनकर फिर जीवित होता है लेकिन उन्होंने भाजपा को देखा जिसकी विचारधारा अटल और अमर हो गई है उन्होंने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में गठबंधन के दौर को पार करते हुए सरकार ने अपने वादों को पूरा किया और 24 दलों के साथ सफलतापूर्वक शासन चलाया । प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि पार्टी की सबसे बड़ी पूंजी उसका कार्यकर्ता है और संगठन को मजबूत करने के लिए 17 जिलों में कार्यालयों का निर्माण कार्य शुरू किया गया है उनका लक्ष्य अगले स्थापना दिवस तक प्रदेश के सभी 62 जिलों में पार्टी कार्यालय बनाना है प्रत्येक कार्यालय में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग रूम और पुस्तकालय की सुविधा होगी ताकि संगठन और विचारधारा से जुड़ी सामग्री आसानी से उपलब्ध हो सके कार्यक्रम में दिवंगत नेताओं और कार्यकर्ताओं के परिजनों का सम्मान भी किया गया मुख्यमंत्री स्वयं मंच से नीचे उतरकर पूर्व विधायक स्वर्गीय रमेश शर्मा के परिजनों को सम्मानित किया इस मौके पर क्षेत्रीय संगठन मंत्री अजय जामवाल सांसद विधायक और अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे । सीएम ने प्रदेश में सरकार की उपलब्धियों का भी उल्लेख किया उन्होंने कहा कि गेहूं खरीदी में किसानों को प्राथमिकता दी जा रही है और दर 2625 रुपये प्रति क्विंटल तय की गई है सिंचाई का क्षेत्र अब 55 लाख हेक्टेयर तक बढ़ा दिया गया है बिजली आपूर्ति में सुधार किया गया है और किसानों को पर्याप्त सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है उन्होंने कहा कि सरकार अंत्योदय के सिद्धांत के तहत गरीब से गरीब व्यक्ति के जीवन में खुशहाली लाने के लिए कार्यरत है । सीएम ने कहा कि सबका साथ सबका विकास सबका विश्वास सबका प्रयास के मंत्र के साथ सरकार आगे बढ़ रही है और 17 नए कार्यालयों के भूमिपूजन के साथ संगठन विस्तार का कार्य तेज हो गया है उन्होंने सभी कार्यकर्ताओं को बधाई दी और संगठन की सक्रियता बढ़ाने पर जोर दिया बीजेपी के क्षेत्रीय संगठन मंत्री अजय जामवाल ने कहा कि 1980 से 2026 तक 47 वर्षों में पार्टी की विकास यात्रा देश और दुनिया के लिए प्रेरणा बनी है अब पंच परिवर्तन के रूप में पर्यावरण समरसता स्वदेशी कुटुंब प्रबोधन और नागरिकता भाव जैसी चुनौतियों का सामना करना है प्रदेश अध्यक्ष ने जोर दिया कि बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करना जरूरी है और पार्टी का हर कार्यकर्ता इसकी सबसे बड़ी ताकत है इस मौके पर भाजपा कार्यालय में ध्वज फहराया गया और 17 जिलों में भूमि पूजन औपचारिक रूप से किया गया मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष वर्चुअली जुड़कर इस कार्यक्रम का हिस्सा बने इस तरह भाजपा का स्थापना दिवस पार्टी विचारधारा और संगठन विस्तार दोनों के संदेश के साथ मनाया गया जिसमें राजनीतिक प्रशासनिक और सामाजिक दिशा को बल मिला
स्टील सेक्टर में बड़ा निवेश! मेसाबी मेटालिक्स ने जुटाए 150 मिलियन डॉलर

नई दिल्ली।एस्सार समूह द्वारा समर्थित मेसाबी मेटालिक्स ने अमेरिकी औद्योगिक क्षेत्र में एक बड़ी वित्तीय उपलब्धि हासिल की है। कंपनी ने घोषणा की है कि उसे मैक्वेरी ग्रुप से 150 मिलियन डॉलर की फंडिंग मिली है। यह निवेश मिनेसोटा के नैशवॉक में बन रही उसकी डायरेक्ट रिडक्शन (डीआर) ग्रेड लौह अयस्क खदान और पेलेट संयंत्र परियोजना को गति देगा, जिसके 2026 की तीसरी तिमाही में शुरू होने की उम्मीद है। यह फंडिंग ऐसे समय आई है जब अमेरिका अपनी औद्योगिक आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करने और आयात पर निर्भरता घटाने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है। पहले से मिल रही पूंजी को मिला और बलयह नई फंडिंग मेसाबी मेटालिक्स के लिए पहले से जारी निवेश प्रवाह को और मजबूत करती है। इससे पहले कंपनी ने Breakwall Capital के साथ 520 मिलियन डॉलर की सीनियर सिक्योर्ड क्रेडिट फैसिलिटी की घोषणा की थी। इसके अलावा, कंपनी को Export-Import Bank of the United States से भी समर्थन मिल चुका है, जो इस परियोजना के बढ़ते रणनीतिक महत्व को दर्शाता है। इन निवेशों से साफ है कि वैश्विक निवेशक इस प्रोजेक्ट की संभावनाओं पर भरोसा जता रहे हैं। अमेरिकी इस्पात सेक्टर के लिए गेमचेंजर प्रोजेक्टमेसाबी मेटालिक्स की यह परियोजना अमेरिका के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। देश में उच्च गुणवत्ता वाले डीआर-ग्रेड लौह अयस्क का घरेलू स्रोत तैयार करने की दिशा में यह एक बड़ा कदम है। इससे न केवल इस्पात उद्योग को मजबूती मिलेगी, बल्कि ऑटोमोबाइल, इंफ्रास्ट्रक्चर, शिपबिल्डिंग और रक्षा जैसे क्षेत्रों को भी फायदा होगा। खासकर ऐसे समय में, जब अमेरिका वैश्विक सप्लाई चेन पर निर्भरता कम करने की रणनीति पर काम कर रहा है। 2.5 बिलियन डॉलर का मेगा प्रोजेक्ट, हजारों को रोजगारउत्तरी मिनेसोटा में 16,000 एकड़ से ज्यादा क्षेत्र में फैली यह परियोजना करीब 2.5 बिलियन डॉलर की लागत से तैयार की जा रही है। वर्तमान में 800 से अधिक श्रमिक इस साइट पर काम कर रहे हैं, जिससे यह मिनेसोटा के इतिहास में निजी क्षेत्र के सबसे बड़े औद्योगिक निवेशों में शामिल हो गई है। एस्सार समूह पहले ही इस प्रोजेक्ट में 2 बिलियन डॉलर से ज्यादा का इक्विटी निवेश कर चुका है, जो इसकी दीर्घकालिक रणनीतिक अहमियत को दर्शाता है। कंपनी और निवेशकों ने जताया भरोसामेसाबी मेटालिक्स के सीईओ जो ब्रोकिंग ने इस फंडिंग को कंपनी के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया। उन्होंने कहा कि लगातार मिल रही वित्तीय साझेदारियां इस प्रोजेक्ट की गुणवत्ता और संभावनाओं पर बढ़ते विश्वास को दिखाती हैं। वहीं मैक्वेरी ग्रुप के वरिष्ठ प्रबंध निदेशक माइक बर्न्स ने कहा कि उनकी कंपनी का एस्सार समूह के साथ पुराना संबंध रहा है और वे अमेरिका में इस परियोजना के साथ जुड़कर इसे आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
नई उम्मीद वाली ‘आप पार्टी’ अपनों के हाशिये पर क्यों ?

– सौरभ वार्ष्णेयआम आदमी पार्टी ने भारतीय राजनीति में एक नई उम्मीद जगाई थी। भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन से उपजी पार्टी पारदर्शिता, ईमानदारी और जनभागीदारी के वादों के साथ आजादी वाले तेवर के साथ नायक अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में आप ने दिल्ली में शिक्षा, स्वास्थ्य और बिजली-पानी जैसे मुख्य मुद्दों पर उल्लेखनीय काम कर लोगों का विश्वास जीता। लेकिन समय के साथ कई ऐसे कारण सामने आए हैं, जिनसे जनता के एक वर्ग में आप पार्टी मोहभंग की स्थिति बनी है। शुरुआत में ‘आप’ ने ‘नई राजनीति’ का दावा किया था, लेकिन समय के साथ वही परंपरागत राजनीतिक रणनीतियां अपनाने के आरोप लगे। दल-बदल, राजनीतिक समझौते और सत्ता बनाए रखने की प्राथमिकता ने इसके मूल आदर्शों पर सवाल खड़े किए। जिस पार्टी ने भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई से शुरुआत की, उसी पर अब विभिन्न घोटालों के आरोप लगे हैं। खासकर दिल्ली की शराब नीति को लेकर उठे विवाद ने पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचाया। इससे जनता के बीच भरोसे में कमी आई है। समय-समय पर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का बाहर होना या निष्कासन, जैसे कि योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण का अलग होना, संगठन के भीतर असहमति और केंद्रीकरण की ओर इशारा करता है। धीरे -धीरे यह नई उम्मीद वाली पार्टी अपनों के हाशिये पर क्यों हैं यह चिंतन का विषय है। दिल्ली की राजनीति में आम आदमी पार्टी और उसके युवा चेहरे राज्यसभा राघव चड्ढा के बीच उभरे विवाद ने फिर एक बार पुरानी बोतल में नई शराब वाली स्थिति व इसको लेकर आम आदमी पार्टी पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। यह मामला केवल एक व्यक्ति और पार्टी के बीच मतभेद का नहीं, बल्कि राजनीतिक दलों में अनुशासन, पारदर्शिता और नेतृत्व शैली की भी परीक्षा है। इसका जीता जागता उदाहरण पहले भी सामने आए हैं जिनमें प्रसिद्व कवि कुमार विश्वास सहित अन्य चेहरे अलग हो गए। कुमार आप पार्टी के वह नेता थे जो अरविंद केजरीवाल के साथ उस दौर से थे जब उन्होंने अपनी नौकरी सहित सब कुछ दांव पर लगाकर साथ दिया था। उनके बाद आम आदमी पार्टी में कई दौर ऐसे आ चुके हैं जिनमें अन्य कद्दावर नेतागण योगेंद्र यादव, प्रशांत भूषण, शाजिया इल्मी, आशुतोष, कपिल मिश्रा, अलका लांबा, कैलाश गहलोत, मयंक गांधी, अंजलि दमानिया, सुभाष वारे, आनंद कुमार सहित अन्य नाम भी साथ छोड़ चुके हैं व स्वाति मालीवाल आम आमदी पार्टी को छोड़ चुके हैं। अब एक नाम और शामिल हो रहा है वह हैं राघव चड्ढा, जो कि प्रमुख युवा नेताओं में गिने जाते हैं, कम समय में राष्ट्रीय राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई है। लेकिन हाल के घटनाक्रमों ने उनके और पार्टी नेतृत्व के बीच खिंचाव की स्थिति को उजागर मनभेद को उजागर किया है। आरोप-प्रत्यारोप, निर्णय प्रक्रिया में मतभेद और व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा—ये सभी तत्व इस विवाद को जटिल बनाते हैं। राजनीतिक दल किसी एक व्यक्ति से बड़े होते हैं। आप ने हमेशा सामूहिक नेतृत्व और पारदर्शिता की बात की है। ऐसे में यदि पार्टी का कोई वरिष्ठ नेता सार्वजनिक रूप से अलग रुख अपनाता है, तो यह संगठनात्मक अनुशासन पर प्रश्नचिह्न लगाता है। दूसरी ओर, लोकतंत्र में व्यक्तिगत विचारों की अभिव्यक्ति भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।आप ने खुद को एक वैकल्पिक और स्वच्छ राजनीति के प्रतीक के रूप में स्थापित किया था। इस तरह के विवाद पार्टी की उस छवि को धक्का पहुंचा सकते हैं। विपक्ष के लिए यह एक अवसर बन जाता है कि वह पार्टी की आंतरिक एकता और विश्वसनीयता पर सवाल उठाए। यह विवाद आप नेतृत्व के सामने एक बड़ी चुनौती भी है—कैसे वे असहमति को संभालते हैं। क्या पार्टी संवाद के जरिए समाधान निकालती है या अनुशासनात्मक कार्रवाई का रास्ता अपनाती है, इससे भविष्य की राजनीति तय होगी। आम आदमी पार्टी और राघव चड्ढा के बीच का यह टकराव भारतीय राजनीति के उस व्यापक सच को सामने लाता है, जहां व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा और संगठनात्मक अनुशासन के बीच संतुलन बनाना आसान नहीं होता। यदि इसे समझदारी और संवाद से सुलझाया गया, तो यह पार्टी को और मजबूत बना सकता है; लेकिन अगर विवाद बढ़ता है, तो इसका असर न केवल पार्टी बल्कि उसकी विश्वसनीयता पर भी पड़ेगा। आप पर यह आरोप भी लगता रहा है कि पार्टी में निर्णय लेने की शक्ति कुछ लोगों तक सीमित होती जा रही है। इससे ‘सामूहिक नेतृत्व’ की अवधारणा कमजोर पड़ी है। हालांकि दिल्ली में कुछ क्षेत्रों में प्रगति हुई है, लेकिन अन्य राज्यों में विस्तार के दौरान आप को अपेक्षित सफलता नहीं मिली। पंजाब में सत्ता मिलने के बावजूद चुनौतियां बरकरार हैं, जिससे पार्टी की राष्ट्रीय महत्वाकांक्षाओं पर असर पड़ा है। आम आदमी पार्टी का उदय भारतीय लोकतंत्र में एक सकारात्मक प्रयोग था, जिसने राजनीति में नई सोच और उम्मीद पैदा की। लेकिन यदि पार्टी को जनता का विश्वास बनाए रखना है, तो उसे अपने मूल सिद्धांतों पर लौटना होगा, पारदर्शिता बढ़ानी होगी और आंतरिक लोकतंत्र को मजबूत करना होगा। अन्यथा, ‘आम आदमीÓ की उम्मीदों पर खरा उतरने का दावा धीरे-धीरे कमजोर पड़ता जाएगा। अगर हम आम आदमी पार्टी राज्यसभा सांसदों पर नजर डाले तो अप्रैल 2026 तक, आम आदमी पार्टी के पास राज्यसभा में 10 सांसद हैं, जो मुख्य रूप से पंजाब और दिल्ली से हैं। हाल ही में हुए बदलावों में, अशोक मित्तल को राघव चड्ढा की जगह राज्यसभा में पार्टी का नया उपनेता नियुक्त किया गया है। अब ऐसे में अगर अरविंद केजरीवाल के पुराने साथियों की बात करें तो अब कुछ ही साथी शेष बचे हैं। ऐसे में क्या पार्टी इस अंतकलह को बचायेगी ? क्या राघव चढ्डा से सुलह हो जायेगा ? आदि ऐसे विषय हैं जिनका हल सिर्फ सिर्फ अरविंद केजरीवाल के पास है।