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खंडवा में विवादित पोस्टिंग घोटाला असिस्टेंट कमिश्नर की योजना नाकाम

खंडवा । खंडवा जनजातीय कार्य विभाग के असिस्टेंट कमिश्नर संतोष शुक्ला अब विवादों के घेरे में हैं क्योंकि रिटायरमेंट के आखिरी सप्ताह में उन्होंने अपने चहेते टीचर को असिस्टेंट कमिश्नर का चार्ज दिलाने के लिए नोटशीट चलायी जो प्रशासनिक सुरक्षा तंत्र से टकरा गयी शुक्ला ने जिस तरह से थोकबंद ट्रांसफर पोस्टिंग आर्डर निकालकर अपनी पसंद की सिफारिश कलेक्टर स्तर तक पहुंचाने का प्रयास किया वह मामला अब बड़े स्तर पर उभर गया है जब यह खबर दैनिक भास्कर के खुलासे के बाद सार्वजनिक हुई तो प्रभारी मंत्री ने शुक्ला के जारी किये गये आदेशों को निरस्त करवा दिया सूत्र बताते हैं कि रिटायर होने से पहले शुक्ला ने सिर्फ अपने विभागीय आदेश जारी नहीं किये बल्कि उन्होंने यह भी तय कर लिया कि रिटायरमेंट के बाद कौन अधिकारी उनके स्थान पर कार्यभार संभालेगा इस कड़ी में एक नोटशीट तैयार की गयी जिसमें उन्होंने अपने चहेते टीचर का नाम असिस्टेंट कमिश्नर के पद के लिए आगे बढ़ाया यह फाइल जिला पंचायत से होते हुए कलेक्टर कार्यालय तक आयी कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने नोटशीट में दर्ज नाम के स्थान पर विभाग में सेकंड पोजीशन पर पदस्थ नीरज पाराशर का नाम दर्ज कराया और उन्हीं को असिस्टेंट कमिश्नर का चार्ज देने की अनुशंसा की इस कदम ने शुक्ला की योजना पर त्वरित विराम लगा दिया क्योंकि पाराशर और शुक्ला के बीच पहले से आपसी खींचतान चल रही थी कलेक्टर के हस्तक्षेप के बाद जब मामला मंत्री स्तर तक पहुंचा तो प्रभारी मंत्री ने शुक्ला के जारी किये गये ट्रांसफर पोस्टिंग आर्डर को निरस्त करने का आदेश दिया और साथ ही शुक्ला के कार्यकाल में हुई पोस्टिंग ट्रांसफर गतिविधियों की जांच के लिए एक आईएएस अधिकारी के नेतृत्व में कमेटी भी बना दी गयी जिला प्रशासन के सूत्रों के अनुसार शुक्ला ने अपने रिटायरमेंट के अंतिम दिनों में बड़े पैमाने पर ट्रांसफर पोस्टिंग आदेश जारी किये जिनमें उनके चहेते कर्मचारी को लाभ देने की कोशिश स्पष्ट रूप से दर्ज है यह बात प्रशासनिक दायरे में तथा कर्मचारियों की प्रतिक्रियाओं में भी चर्चा का विषय बनी हुई है कलेक्टर ने जो निर्णय लिया वह विभागीय नियमों के अनुरूप बताया जा रहा है अधिकारियों का कहना है कि जब किसी अधिकारी का रिटायरमेंट निश्चित हो तो उनके अधिकार सीमित हो जाते हैं और ऐसे मामलों में उच्च प्रशासनिक स्तर के दिशा निर्देशों का पालन करना अनिवार्य होता है शुक्ला द्वारा नोटशीट में नाम आगे बढ़ाये जाने की प्रक्रिया पर सवाल उठाये जा रहे हैं मंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिये कि विभागीय आदेशों को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाये और मामले की गहन जांच करायी जाये ताकि इस प्रकार के अनुचित हस्तक्षेप और पॉलिटिकल दबाव की सच्चाई सामने आये जांच कमेटी जल्द ही अपना कार्य प्रारम्भ करेगी और इस पूरे घटनाक्रम से जुड़े अधिकारियों कर्मचारियों से पूछताछ करेगी प्रशासनिक सूत्रों की मानें तो यह मामला सिर्फ एक अधिकारी की पोस्टिंग सिफारिश का मामला नहीं रह गया है बल्कि यह जांच का विषय बन गया है कि क्या रिटायर हो रहे अधिकारी ने पद के दुरुपयोग के अलावा अन्य किस तरह से अपनी पसंद की नियुक्ति कराने का प्रयास किया इस विवाद ने स्थानीय प्रशासनिक माहौल को भी प्रभावित किया है कर्मचारियों के बीच इस प्रकार की सिफारिश और हस्तक्षेप को गलत माना जा रहा है और यह भी चर्चा में है कि यदि ऐसी कोशिशें छूट गयीं तो भविष्य में ऐसी घटनाओं की बानगी और अधिक बढ़ सकती है अब देखना यह है कि जांच कमेटी क्या निष्कर्ष निकालती है और किन अधिकारियों कर्मचारियों की भूमिका प्रकाश में आती है इस पूरे प्रकरण से यह स्पष्ट हो गया है कि प्रशासनिक प्रक्रिया में पारदर्शिता और नियमों का पालन किस हद तक महत्वपूर्ण है और किस प्रकार गलत प्रयासों को रोकने वाले संस्थागत उपाय प्रभावी भूमिका निभा सकते हैं इस प्रकार संतोष शुक्ला की अंतिम सिफारिश ने प्रशासनिक नियमों की परीक्षा ली और कलेक्टर द्वारा उचित कदम उठाये जाने से यह मामला नियंत्रण में आ गया है जबकि जांच के परिणाम से भविष्य में ऐसे मामलों की रोकथाम और भी सशक्त होगी 

ओलंपिक पदक विजेता ब्लैंका व्लासिक को मिली बड़ी जिम्मेदारी, वर्ल्ड 10K बेंगलुरु की ब्रांड एंबेसडर नियुक्त

नई दिल्ली भारत के प्रतिष्ठित रनिंग इवेंट ‘वर्ल्ड 10के बेंगलुरु 2026’ को इस साल एक बड़ा इंटरनेशनल फेस मिला है। दो बार के ओलंपिक पदक विजेता और विश्व चैंपियन ब्लैंका व्लासिक को इस मेगा इवेंट का अंतर्राष्ट्रीय राजदूत नियुक्त किया गया है। वर्ल्ड 10K बेंगलुरु का आयोजन 26 अप्रैल को होगा, जो विश्व एथलेटिक्स का गोल्ड लेबल इवेंट है और हर साल हजारों प्रतिभागियों को आकर्षित करता है। हाई जंप की दिग्गज, रिकार्ड से भरा इतिहासक्रोएशिया के स्टार एथलीट ब्लैंका व्लासिक को दुनिया की महानतम हाई जंपर्स में जाना जाता है। उन्होंने बीजिंग 2008 ओलंपिक में रजत और रियो 2016 ओलंपिक में कांस्य पदक, अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। इसके अलावा, उनके नाम कई विश्व चैंपियनशिप और विश्व इंदौर खिताब भी हैं। वर्ष 2009 में उनका 2.08 मीटर का निजी सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन आज भी क्रोएशियाई राष्ट्रीय रिकॉर्ड है और महिला हाई जंप के इतिहास में तीसरा सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन माना जाता है। दौड़ को फिटनेस और एकता का प्रतीक बताया गयाएम्बेसडर बनने पर व्लासिक ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि यह इवेंट सिर्फ एक दौड़ नहीं है, बल्कि लोगों को जोड़ने का एक जरिया है। उन्होंने कहा, “दौड़ना हमें शारीरिक रूप से सक्रिय और मानसिक रूप से मजबूत बनाती है। यह एथलेटिक्स संतुलन को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाती है।” उन्होंने ऑफिस को संदेश दिया कि वे पूरी तैयारी के साथ भाग लें, अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करें और इस अनुभव का आनंद लें। खेल से लेकर बेडरूम के बाहरी हिस्से तकमैदान के बाहर भी व्लासिक खेल सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं। वह चैंपियंस फॉर पीस पहल का हिस्सा हैं और क्रोएशियाई ओलंपिक समिति के उपाध्यक्ष के रूप में काम कर रहे हैं। इस भूमिका में वह समुदाय को मजबूत करने और युवा खिलाड़ियों को प्रेरित करने में अहम योगदान दे रही हैं। आयोजकों ने भव्यता की झलक, भव्यता की चमक-दमकरेस के प्रमोटर प्रोकैम इंटरनेशनल के संयुक्त प्रबंध निदेशक विवेक सिंह ने व्लासिक का स्वागत करते हुए कहा कि उनकी उपलब्धियां और खेल जगत में उनका योगदान एक प्रेरणादायक व्यक्तित्व है। उनकी भागीदारी से इस इवेंट की वैश्विक पहचान और मजबूत होगी और साथियों के अनुभव में भी खास निखार आएगा।

भीषण गर्मी में राहत का दूसरा नाम सूती कपड़े, हल्के रंगों का चुनाव भी जरूरी

नई दिल्ली। देशभर में तापमान तेजी से बढ़ रहा है और कई जगहों पर पारा 45 डिग्री के पार पहुंच रहा है। ऐसे में चिलचिलाती धूप, उमस और लू से बचाव के लिए सही कपड़ों का चुनाव बेहद जरूरी हो जाता है। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि इस मौसम में अगर आप राहत चाहते हैं, तो सूती कपड़े यानी Cotton Fabric सबसे बेहतर विकल्प हैं। ये न केवल शरीर को ठंडा रखते हैं, बल्कि पूरे दिन आपको आरामदायक महसूस कराते हैं। क्यों खास है सूती कपड़ा? जानिए इसके फायदेसूती कपड़ा पूरी तरह प्राकृतिक होता है और इसमें किसी तरह के सिंथेटिक फाइबर नहीं होते। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह ‘सांस लेने योग्य’ यानी ब्रीदेबल फैब्रिक होता है। इससे हवा आसानी से आर-पार हो सकती है, जिससे त्वचा ठंडी बनी रहती है। साथ ही, यह पसीने को जल्दी सोख लेता है और उसे हवा के संपर्क में लाकर जल्दी सुखा देता है। इससे शरीर में चिपचिपाहट नहीं होती और आप तरोताजा महसूस करते हैं। इसके विपरीत, Polyester और नायलॉन जैसे सिंथेटिक कपड़े पसीना सोख नहीं पाते। इससे पसीना त्वचा पर जमा रहता है, जिससे घमौरियां, खुजली और बदबू जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए गर्मियों में प्राकृतिक फैब्रिक का चुनाव ही समझदारी है। आराम के साथ स्टाइल भी, हर मौके के लिए परफेक्टसूती कपड़े न सिर्फ आरामदायक होते हैं, बल्कि स्टाइलिश भी होते हैं। आजकल कॉटन में कई तरह के डिजाइन जैसे स्ट्राइप्स, चेक्स और सॉलिड पैटर्न मिलते हैं, जिन्हें आप कैजुअल और फॉर्मल दोनों लुक में आसानी से कैरी कर सकते हैं। यह फैब्रिक हल्का, मुलायम और त्वचा के अनुकूल होता है, जिससे दिनभर पहनने पर भी कोई परेशानी नहीं होती। रंगों का चुनाव भी है उतना ही जरूरीगर्मी में सिर्फ कपड़ा ही नहीं, बल्कि उसके रंग का चुनाव भी अहम भूमिका निभाता है। हल्के रंग जैसे सफेद, क्रीम, हल्का गुलाबी, आसमानी और पीला सूरज की किरणों को परावर्तित (रिफ्लेक्ट) करते हैं, जिससे शरीर कम गर्म होता है। वहीं, काला, नेवी ब्लू या गहरा लाल जैसे रंग गर्मी को ज्यादा सोखते हैं, जिससे शरीर का तापमान बढ़ जाता है। इसलिए इस मौसम में हल्के रंगों के सूती कपड़े पहनना सबसे अच्छा विकल्प माना जाता है। मन और शरीर दोनों को दे सुकूनसही कपड़े न सिर्फ शरीर को ठंडा रखते हैं, बल्कि मानसिक रूप से भी सुकून देते हैं। जब शरीर ठंडा और सूखा रहता है, तो चिड़चिड़ापन कम होता है और मन शांत रहता है। यही कारण है कि पुराने समय से दादी-नानी गर्मियों में सूती कपड़े पहनने की सलाह देती आई हैं। गर्मी से बचाव का आसान फॉर्मूलाअगर आप भीषण गर्मी में खुद को कूल और कंफर्टेबल रखना चाहते हैं, तो सूती कपड़े और हल्के रंगों का चुनाव जरूर करें। यह न केवल आपको गर्मी से राहत देंगे, बल्कि आपकी सेहत और स्टाइल दोनों को बेहतर बनाएंगे।

‘ॐ’ के उच्चारण का असर: आध्यात्म के साथ जानें इसके पीछे छिपा साइंस

नई दिल्ली। सनातन परंपरा में ‘ओम’ को केवल एक ध्वनि नहीं, बल्कि सृष्टि की मूल ऊर्जा माना गया है। हर मंत्र और ध्यान की शुरुआत इसी से होती है, लेकिन अब यह केवल आध्यात्मिक आस्था तक सीमित नहीं रहा। आधुनिक विज्ञान भी मानने लगा है कि ‘ओम’ का उच्चारण शरीर और मन दोनों पर गहरा सकारात्मक प्रभाव डालता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह ध्वनि कंपन (वाइब्रेशन) शरीर के सातों चक्रों को सक्रिय करने के साथ-साथ मस्तिष्क के न्यूरॉन्स को भी जागृत करता है, जिससे मानसिक शांति और संतुलन बढ़ता है। ‘ओम’ की ध्वनि में छिपा है कंपन का विज्ञान‘ओम’ दरअसल ‘अ+उ+म’ का संयोग है, जिसे Om (mantra) या प्रणव भी कहा जाता है। जब इसका लंबा और गहरा उच्चारण किया जाता है, तो शरीर में सूक्ष्म कंपन उत्पन्न होते हैं। ये कंपन सीधे Nervous System पर असर डालते हैं। इससे दिमाग शांत होता है, तनाव कम होता है और एकाग्रता बढ़ती है। यही कारण है कि ध्यान और योग में ‘ओम’ को विशेष महत्व दिया गया है। सात चक्रों पर पड़ता है गहरा प्रभावमानव शरीर में सात प्रमुख ऊर्जा केंद्र यानी चक्र माने जाते हैं—मूलाधार, स्वाधिष्ठान, मणिपुर, अनाहत, विशुद्ध, आज्ञा और सहस्रार। ‘ओम’ के उच्चारण से उत्पन्न कंपन इन चक्रों को सक्रिय करने में मदद करते हैं। इससे शरीर में ऊर्जा का प्रवाह संतुलित होता है और व्यक्ति मानसिक व शारीरिक रूप से स्थिर महसूस करता है। नियमित अभ्यास से यह संतुलन लंबे समय तक बना रहता है। वैज्ञानिक शोध भी करते हैं पुष्टिNational Library of Medicine में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, ‘ओम’ का जाप ऑटोनॉमिक नर्वस सिस्टम पर सकारात्मक प्रभाव डालता है। इस शोध में पाया गया कि सिर्फ 5 मिनट के जाप से ही हार्ट रेट वेरिएबिलिटी में सुधार हुआ और तनाव के स्तर में कमी आई। यह तंत्र शरीर की अनैच्छिक क्रियाओं जैसे दिल की धड़कन और सांस को नियंत्रित करता है, इसलिए इसका संतुलन बेहद जरूरी है। वेगस नर्व को करता है मजबूतविशेषज्ञों के अनुसार, ‘ओम’ का उच्चारण Vagus Nerve को सक्रिय करता है। यह नर्व दिल, फेफड़ों और पाचन तंत्र को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाती है। जब ‘ओम’ का जाप गहरी सांस के साथ किया जाता है, तो यह नर्व उत्तेजित होती है, जिससे तनाव कम होता है, सांस लेने की क्षमता बेहतर होती है और शरीर में शांति का अनुभव होता है। मानसिक स्वास्थ्य और याददाश्त में सुधार‘ओम’ की ध्वनि न केवल चक्रों को सक्रिय करती है, बल्कि मस्तिष्क के न्यूरॉन्स को भी उत्तेजित करती है। इससे एकाग्रता, याददाश्त और मानसिक स्पष्टता बढ़ती है। नियमित अभ्यास से चिंता, तनाव और नींद से जुड़ी समस्याएं भी कम हो सकती हैं। यही वजह है कि आजकल मानसिक स्वास्थ्य सुधारने के लिए भी इसे एक आसान और प्रभावी तकनीक माना जा रहा है। कैसे करें सही तरीके से ‘ओम’ का जाप?‘ओम’ का सही लाभ पाने के लिए इसे सुबह खाली पेट या ध्यान के समय करना सबसे अच्छा माना जाता है। इसके लिए आराम से बैठकर गहरी सांस लें और धीरे-धीरे लंबा ‘ओम’ उच्चारित करें। फिर सांस को धीरे-धीरे छोड़ें। ध्यान रखें कि उच्चारण जितना लंबा और गहरा होगा, उतना ही अधिक कंपन पैदा होगा और लाभ भी बढ़ेगा। आध्यात्म और विज्ञान का अनोखा संगम‘ओम’ केवल धार्मिक प्रतीक नहीं, बल्कि वैज्ञानिक दृष्टि से भी शरीर और मन को संतुलित करने का प्रभावी माध्यम है। नियमित अभ्यास से न केवल चक्र सक्रिय होते हैं, बल्कि न्यूरॉन्स भी जागृत होते हैं, जिससे जीवन में शांति, स्थिरता और सकारात्मकता आती है।

एक नो बॉल ने पलट दी पूरी बाजी टिम डेविड की तूफानी पारी से सीएसके की हार तय

नई दिल्ली । आईपीएल 2026 के एक हाई स्कोरिंग मुकाबले में चेन्नई सुपर किंग्स को रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा लेकिन इस मैच की असली कहानी एक छोटी सी गलती से जुड़ी रही जिसने पूरे मुकाबले की दिशा ही बदल दी। यह गलती थी एक नो बॉल जिसने टिम डेविड को नया जीवन दिया और फिर उन्होंने उसी मौके को मैच विनिंग पारी में बदल दिया। मैच के शुरुआती चरण में चेन्नई सुपर किंग्स मुकाबले में बनी हुई थी। 13 से 14 ओवर तक स्थिति ऐसी थी कि टीम वापसी कर सकती थी और आरसीबी को एक काबू में रहने वाले स्कोर तक रोक सकती थी। हालांकि फील्डिंग में ढिलाई और पावरप्ले में विकेट न मिलना पहले ही टीम पर दबाव बना चुका था लेकिन असली झटका बाद में लगा। जब टिम डेविड क्रीज पर आए तो शुरुआत में वह संघर्ष करते नजर आए। उनकी पहली कुछ गेंदों पर रन नहीं बन रहे थे और ऐसा लग रहा था कि सीएसके उन्हें जल्दी पवेलियन भेज देगी। इसी दौरान 18वें ओवर में तेज गेंदबाज अंशुल कंबोज ने एक शानदार गेंद डाली जिस पर टिम डेविड बोल्ड हो गए। उस पल ऐसा लगा कि चेन्नई ने मैच में बड़ी सफलता हासिल कर ली है। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। थर्ड अंपायर ने जांच के बाद पाया कि यह गेंद नो बॉल थी क्योंकि गेंदबाज का पैर क्रीज से बाहर था। यह फैसला मैच का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। टिम डेविड को न सिर्फ जीवनदान मिला बल्कि उन्हें फ्री हिट का फायदा भी मिला जिसे उन्होंने छक्के में बदल दिया। इसके बाद मैच पूरी तरह बदल गया। आत्मविश्वास से भर चुके टिम डेविड ने अगले ओवर में आक्रामक रुख अपनाया और गेंदबाजों पर हमला बोल दिया। खासकर 19वें ओवर में उन्होंने जिमी ओवरटन के खिलाफ जबरदस्त बल्लेबाजी करते हुए 30 रन बटोर लिए। यह ओवर ही सीएसके की उम्मीदों पर भारी पड़ गया और आरसीबी का स्कोर तेजी से 250 के पार पहुंच गया। अगर उस समय नो बॉल नहीं होती तो संभव था कि आरसीबी 220 से 230 रन के आसपास सिमट जाती। ऐसे में चेन्नई के बल्लेबाजों पर दबाव कम होता और मैच का नतीजा कुछ अलग हो सकता था। लेकिन क्रिकेट में छोटे-छोटे पल ही बड़े नतीजों को तय करते हैं और इस मैच में भी ऐसा ही देखने को मिला। मैच के बाद कप्तान ऋतुराज गायकवाड़ ने भी इस बात को स्वीकार किया कि वह नो बॉल टीम के लिए भारी पड़ी। उन्होंने माना कि टिम डेविड का विकेट लगभग मिल चुका था लेकिन उस एक गलती के बाद उन्होंने पूरे मैदान पर दबदबा बना लिया। आखिरकार यह मुकाबला इस बात का उदाहरण बन गया कि क्रिकेट में एक छोटी सी चूक किस तरह पूरे मैच की कहानी बदल सकती है। टिम डेविड ने मिले मौके को भुनाया और सीएसके को ऐसी हार दी जो लंबे समय तक याद रखी जाएगी।

ओटीटी पर इस हफ्ते एंटरटेनमेंट का महाब्लास्ट क्राइम रोमांस और कॉमेडी का तगड़ा डोज तैयार

नई दिल्ली । ओटीटी प्लेटफॉर्म पर हर हफ्ते नए कंटेंट की भरमार रहती है लेकिन इस बार का हफ्ता खास तौर पर हिंदी दर्शकों के लिए बेहद दिलचस्प साबित होने वाला है। क्राइम रोमांस थ्रिलर और कॉमेडी से भरपूर कई बड़ी फिल्में और वेब सीरीज इस हफ्ते रिलीज हो रही हैं जो दर्शकों को घर बैठे शानदार एंटरटेनमेंट देने के लिए तैयार हैं। अगर आप भी कुछ नया और मजेदार देखने की तलाश में हैं तो यह लिस्ट आपके लिए परफेक्ट गाइड बन सकती है। इस हफ्ते की सबसे चर्चित रिलीज ओ रोमियो है जिसमें शाहिद कपूर और तृप्ति डिमरी की फ्रेश जोड़ी देखने को मिलेगी। यह फिल्म रोमांस और अंडरवर्ल्ड के खतरनाक खेल को एक साथ जोड़ती है। कहानी प्यार और अपराध के बीच फंसी एक ऐसी दुनिया को दिखाती है जहां हर फैसला जिंदगी बदल सकता है। शाहिद कपूर का इंटेंस अंदाज और तृप्ति डिमरी की मौजूदगी फिल्म को खास बनाती है। यह फिल्म 10 अप्रैल से ओटीटी पर स्ट्रीम होगी और उन दर्शकों के लिए खास है जो इमोशनल ड्रामा के साथ थ्रिल पसंद करते हैं। इसके अलावा तू या मैं भी इस हफ्ते की एक अनोखी फिल्म है जो सर्वाइवल थ्रिलर और रोमांस का अलग मिश्रण पेश करती है। कहानी एक अमीर सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और एक छोटे शहर के रैपर के इर्द गिर्द घूमती है जो एक वीडियो प्रोजेक्ट के दौरान करीब आते हैं। उनकी जिंदगी में अचानक मोड़ तब आता है जब वे गोवा में एक खतरनाक स्थिति में फंस जाते हैं जहां उन्हें अपनी जान बचाने के लिए संघर्ष करना पड़ता है। यह फिल्म रिश्तों और हालातों की परीक्षा को बेहद अलग अंदाज में दिखाती है। वेब सीरीज के शौकीनों के लिए द बॉयज का नया सीजन भी इस हफ्ते आ रहा है जो अपने डार्क और सटायर भरे अंदाज के लिए दुनियाभर में मशहूर है। इस बार कहानी और भी ज्यादा तीखी और टकराव से भरी होने वाली है जहां अच्छाई और बुराई की रेखा और धुंधली नजर आएगी। इसके अलावा साइंस फिक्शन पसंद करने वालों के लिए स्टार वार्स मॉल शैडो लॉर्ड एक शानदार विकल्प है जो एक लोकप्रिय किरदार की नई कहानी को सामने लाता है। कॉमेडी और फैमिली ड्रामा पसंद करने वालों के लिए द बिग मिस्टेक एक हल्की फुल्की लेकिन दिलचस्प कहानी लेकर आई है जिसमें गलतियों से पैदा हुए हालात दर्शकों को हंसाने के साथ सोचने पर भी मजबूर करते हैं। वहीं क्राइम ड्रामा पसंद करने वालों के लिए कप्तान एक दमदार वेब सीरीज है जो एक सख्त पुलिस अधिकारी की कहानी को दिखाती है जो अपराध के खिलाफ अपनी जंग में किसी भी हद तक जाने को तैयार है। इसके साथ ही मामला लीगल है का नया सीजन भी दर्शकों को कोर्टरूम ड्रामा के एक नए अंदाज से रूबरू कराएगा जहां एक वकील के जज बनने के बाद की चुनौतियां और दिलचस्प स्थितियां कहानी को और ज्यादा मजेदार बनाती हैं। कुल मिलाकर यह हफ्ता ओटीटी दर्शकों के लिए हर तरह का कंटेंट लेकर आया है चाहे आप रोमांस के मूड में हों या थ्रिलर के या फिर हल्की फुल्की कॉमेडी देखना चाहते हों आपको हर जॉनर में कुछ न कुछ नया और दिलचस्प जरूर मिलेगा।

वात प्रकृति में चावल खाना सही या गलत? एक्सपर्ट्स की मानें तो जान लें ये जरूरी बातें

नई दिल्ली। आयुर्वेद के अनुसार हर व्यक्ति का शरीर उसकी प्रकृति यानी वात, पित्त और कफ पर आधारित होता है। अगर आहार और जीवनशैली इसी प्रकृति के अनुसार अपनाई जाए, तो कई बीमारियों से बचा जा सकता है। आज के समय में अनियमित खान-पान और लाइफस्टाइल के कारण खासकर Vata Dosha असंतुलन की समस्या तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या वात प्रकृति वाले लोगों को चावल खाना चाहिए या इससे परहेज करना चाहिए? वात प्रकृति और चावल का संबंध समझेंआयुर्वेद बताता है कि वात दोष का स्वभाव ठंडा, हल्का और रूखा होता है। वहीं चावल का स्वाद मीठा, प्रकृति ठंडी और पचने में हल्का होता है। ऐसे में सही तरीके से चावल का सेवन किया जाए तो यह वात को बढ़ाने की बजाय संतुलित करने में मदद कर सकता है। यानी चावल पूरी तरह नुकसानदायक नहीं है, बल्कि सही नियमों के साथ यह वात प्रकृति वालों के लिए फायदेमंद भी बन सकता है। कैसे करें चावल का सही सेवन?वात प्रकृति वाले लोगों को चावल खाते समय कुछ खास बातों का ध्यान रखना चाहिए। सबसे पहले, हमेशा पुराना यानी कम से कम एक साल पुराना चावल ही खाएं। आयुर्वेद के अनुसार पुराना चावल ज्यादा सुपाच्य और गुणकारी होता है। इसके अलावा चावल हमेशा ताजा और गर्म ही खाना चाहिए। फ्रिज में रखा ठंडा या बासी चावल वात को बढ़ा सकता है और गैस, अपच जैसी समस्याएं पैदा कर सकता है। घी के साथ चावल बढ़ेगा फायदाचावल के साथ घी का सेवन करना बेहद जरूरी माना गया है। घी में चिकनाई होती है, जो शरीर के रूखेपन को कम करती है और वात दोष को शांत करने में मदद करती है। खासतौर पर Ghee के साथ चावल खाने से पाचन बेहतर होता है और शरीर को आवश्यक पोषण मिलता है। दोपहर में ही करें सेवन, रात में करें परहेजआयुर्वेद के मुताबिक चावल खाने का सबसे सही समय दोपहर का होता है, जब पाचन अग्नि सबसे मजबूत होती है। इस समय चावल आसानी से पच जाता है और शरीर को ऊर्जा देता है। वहीं रात के समय चावल खाने से कफ और वात दोनों असंतुलित हो सकते हैं, जिससे गैस, भारीपन और पाचन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। इन चीजों के साथ खाने से मिलेगा ज्यादा लाभवात प्रकृति वाले लोगों को चावल के साथ दही खाने से बचना चाहिए, क्योंकि यह वात को बढ़ा सकता है। इसके बजाय चावल को मूंग दाल और घी के साथ खाना बेहतर विकल्प है। यह संयोजन पाचन को आसान बनाता है और शरीर में संतुलन बनाए रखता है। सही तरीके से खाएं, तभी मिलेगा लाभकुल मिलाकर, चावल वात प्रकृति वालों के लिए न तो पूरी तरह नुकसानदायक है और न ही हमेशा फायदेमंद। यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप इसे कैसे, कब और किसके साथ खाते हैं। सही नियमों का पालन कर चावल को अपनी डाइट में शामिल किया जाए तो यह सेहत के लिए वरदान साबित हो सकता है।

रामायण से आगे निकली महाभारत जब 99.6 प्रतिशत टीआरपी ने दुनिया को चौंका दिया

नई दिल्ली । दूरदर्शन के स्वर्णिम दौर की बात जब भी होती है तो दो धारावाहिक सबसे पहले याद आते हैं रामायण और महाभारत। इन दोनों शोज ने भारतीय टेलीविजन के इतिहास को नई दिशा दी और दर्शकों के दिलों में गहरी जगह बनाई। हालांकि लोकप्रियता के मामले में दोनों ही धारावाहिक बेहद सफल रहे लेकिन टीआरपी के आंकड़ों में महाभारत ने एक ऐसा रिकॉर्ड बनाया जिसने उसे इतिहास के पन्नों में अमर कर दिया। महाभारत का प्रसारण 1988 से 1990 के बीच हुआ और इस दौरान यह शो घर घर में देखा जाने लगा। रविवार की सुबह सड़कों पर सन्नाटा छा जाता था और लोग अपने टीवी सेट के सामने बैठ जाते थे। इस धारावाहिक की भव्यता इसकी सबसे बड़ी ताकत थी। सेट डिजाइन संवाद अदायगी और किरदारों की गहराई ने इसे सिर्फ एक धार्मिक शो नहीं बल्कि एक भावनात्मक अनुभव बना दिया। युधिष्ठिर का किरदार निभाने वाले गजेंद्र चौहान ने एक इंटरव्यू में बताया था कि महाभारत की लोकप्रियता का अंदाजा उसकी टीआरपी से लगाया जा सकता है। उनके अनुसार जहां रामायण के पहले एपिसोड को लगभग 34 प्रतिशत और अंतिम एपिसोड को 78 प्रतिशत दर्शकों ने देखा वहीं महाभारत ने शुरुआत से ही रिकॉर्ड बनाना शुरू कर दिया था। महाभारत के पहले एपिसोड की टीआरपी लगभग 79 प्रतिशत रही और इसके अंतिम एपिसोड ने तो इतिहास ही रच दिया जब यह आंकड़ा 99.6 प्रतिशत तक पहुंच गया। यही वह उपलब्धि थी जिसने महाभारत को गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में जगह दिलाई। उस समय दुनिया भर में इतने बड़े स्तर पर कोई भी टीवी शो इतनी बड़ी दर्शक संख्या हासिल नहीं कर पाया था। इससे पहले कुछ विदेशी शोज की टीआरपी 80 प्रतिशत के आसपास रही थी लेकिन महाभारत ने उन्हें भी पीछे छोड़ दिया। इस सफलता के पीछे केवल आंकड़े ही नहीं बल्कि पूरी टीम की मेहनत थी। कलाकारों ने अपने किरदारों को इतने जीवंत तरीके से निभाया कि दर्शक उनसे खुद को जोड़ने लगे। चाहे भीष्म की गंभीरता हो कृष्ण की नीति हो या द्रौपदी का साहस हर किरदार ने दर्शकों के दिल पर गहरा असर छोड़ा। यही वजह रही कि यह शो सिर्फ मनोरंजन का माध्यम नहीं बल्कि एक सांस्कृतिक अनुभव बन गया। महाभारत की लोकप्रियता का असर आज भी देखा जा सकता है। इसकी कहानी इसके संवाद और इसके पात्र आज भी लोगों की यादों में ताजा हैं। आधुनिक दौर में भले ही तकनीक और प्रस्तुति बदल गई हो लेकिन उस दौर की सादगी और प्रभाव आज भी बेमिसाल मानी जाती है। इस तरह महाभारत ने न केवल भारतीय टेलीविजन में अपनी अलग पहचान बनाई बल्कि पूरी दुनिया में यह साबित कर दिया कि मजबूत कहानी और सच्ची मेहनत के दम पर कोई भी शो इतिहास रच सकता है।

मंगलवार, 7 अप्रैल : अभिजित व विजय मुहूर्त सहित पंचांग विवरण

नई दिल्ली । सनातन धर्म में पंचांग के पांच अंग – तिथि नक्षत्र योग करण और वार – का विशेष महत्व है। इन्हीं के आधार पर दिन की शुरुआत और शुभ-अशुभ समय तय किया जाता है। 7 अप्रैल मंगलवार को वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि है जो दोपहर 4 बजकर 34 मिनट तक रहेगी। इसके बाद षष्ठी तिथि प्रारंभ होगी। सूर्य और चंद्रमा की गणना के अनुसार पूरे दिन पंचमी तिथि का ही प्रभाव रहेगा। दृक पंचांग के अनुसार मंगलवार को ज्येष्ठा नक्षत्र सुबह 5 बजकर 54 मिनट तक रहेगा इसके बाद मूल नक्षत्र शुरू होगा। योग व्यतीपात दोपहर 4 बजकर 17 मिनट तक रहेगा। सूर्योदय सुबह 6 बजकर 5 मिनट पर होगा और सूर्यास्त शाम 6 बजकर 42 मिनट पर। चंद्रमा रात 11 बजकर 50 मिनट पर उदित होगा और अगले दिन सुबह 8 बजकर 56 मिनट पर अस्त होगा। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार पंचांग में दिए गए शुभ-अशुभ समय को ध्यान में रखते हुए महत्वपूर्ण कार्य जैसे पूजा नया काम शुरू करना या यात्रा योजना बनाना चाहिए। शुभ मुहूर्त में किए गए कार्य फलदायी माने जाते हैं जबकि अशुभ समय में किए गए कार्य निष्फल हो सकते हैं। 7 अप्रैल के प्रमुख शुभ मुहूर्त इस प्रकार हैं – ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 34 मिनट से 5 बजकर 19 मिनट तक अभिजित मुहूर्त दोपहर 11 बजकर 58 मिनट से 12 बजकर 49 मिनट तक और विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 30 मिनट से 3 बजकर 20 मिनट तक रहेगा। इसके अलावा गोधूलि मुहूर्त शाम 6 बजकर 41 मिनट से 7 बजकर 4 मिनट तक और अमृत काल शाम 8 बजकर 1 मिनट से 9 बजकर 49 मिनट तक प्रभावी रहेगा। अशुभ समय की बात करें तो राहुकाल दोपहर 3 बजकर 33 मिनट से 5 बजकर 8 मिनट तक यमगण्ड सुबह 9 बजकर 14 मिनट से 10 बजकर 49 मिनट तक गुलिक काल दोपहर 12 बजकर 23 मिनट से 1 बजकर 58 मिनट तक रहेगा। इसके अतिरिक्त दुर्मुहूर्त सुबह 8 बजकर 36 मिनट से 9 बजकर 27 मिनट तक और वर्ज्य समय सुबह 9 बजकर 14 मिनट से 11 बजकर 2 मिनट तक रहेगा। पूरे दिन गण्ड मूल का प्रभाव रहेगा और बाण रज सुबह 6 बजकर 32 मिनट तक सक्रिय रहेगा। इस प्रकार 7 अप्रैल का दिन पंचांग के अनुसार कई महत्वपूर्ण मुहूर्त प्रदान करता है जिनका उपयोग पूजा यात्रा और नए कार्यों में किया जा सकता है। साथ ही अशुभ समय से बचकर कार्य करने से समस्याओं और असफलताओं से बचा जा सकता है। यह दिन विशेष रूप से अभिजित और विजय मुहूर्त के लिए अनुकूल माना जा रहा है।

अनार के छिलके के चमत्कारी फायदे! दस्त से लेकर कब्ज तक देगा राहत

नई दिल्ली। अनार एक ऐसा फल है जिसे सेहत का खजाना कहा जाता है, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इसका छिलका भी औषधीय गुणों से भरपूर होता है। आयुर्वेद में अनार को ‘दाडिम’ कहा गया है और इसे वात, पित्त और कफ को संतुलित करने वाला माना जाता है। आधुनिक समय में भले ही अनार सालभर उपलब्ध हो, लेकिन इसके पारंपरिक उपयोग आज भी उतने ही प्रभावी हैं। यह न केवल शरीर में रक्त बढ़ाता है, बल्कि पाचन तंत्र को मजबूत कर शरीर को अंदर से ऊर्जा भी प्रदान करता है। खास बात यह है कि अनार का छिलका, जिसे अक्सर फेंक दिया जाता है, कई बीमारियों में घरेलू उपचार के रूप में बेहद कारगर साबित हो सकता है। त्वचा समस्याओं में असरदार, मुहांसों से दिलाए राहतअगर आप मुहांसे, दाग-धब्बों या एक्ने से परेशान हैं, तो अनार के छिलके का उपयोग एक नेचुरल फेसपैक के रूप में किया जा सकता है। इसके लिए सूखे छिलकों का चूर्ण बनाकर उसमें गुलाबजल मिलाएं और पेस्ट तैयार करें। इस पेस्ट को हफ्ते में दो बार चेहरे पर लगाने से त्वचा पर मौजूद बैक्टीरिया कम होते हैं और स्किन साफ व निखरी नजर आती है। यह उपाय केमिकल प्रोडक्ट्स के मुकाबले सुरक्षित और किफायती भी है। अतिसार और पाचन समस्याओं में रामबाणगर्मियों में अक्सर खानपान की गड़बड़ी से अतिसार (डायरिया) की समस्या हो जाती है। ऐसे में अनार के छिलके का पाउडर बेहद लाभकारी माना गया है। इसे छाछ में मिलाकर थोड़ा जीरा डालकर सेवन करने से आंतों में मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया कम होते हैं और सूजन से राहत मिलती है। यही नहीं, यह मिश्रण पाचन शक्ति को भी बेहतर बनाता है, जिससे बार-बार होने वाली पेट की समस्याओं से बचाव होता है। कब्ज और बवासीर में भी फायदेमंदअनार का छिलका सिर्फ अतिसार ही नहीं, बल्कि कब्ज और बवासीर जैसी समस्याओं में भी राहत देता है। आयुर्वेद के अनुसार, इसके पाउडर को छाछ के साथ लेने से पाचन तंत्र संतुलित रहता है और मल त्याग सुचारु होता है। इससे बवासीर में होने वाली तकलीफ भी कम हो सकती है। नियमित और सही मात्रा में इसका सेवन करने से पेट से जुड़ी कई समस्याएं धीरे-धीरे नियंत्रित हो सकती हैं। बच्चों के पेट के कीड़े और कमजोरी में उपयोगीबच्चों में पेट के कीड़े होना एक आम समस्या है, खासकर जब वे बिना हाथ धोए खाना खाते हैं। ऐसे में रोजाना खाली पेट अनार के दाने खिलाना फायदेमंद होता है। इससे आंतों में मौजूद कीड़ों का नाश होता है और पेट दर्द में राहत मिलती है। इसके अलावा, अगर शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी हो, तो रोज एक अनार खाना फायदेमंद माना जाता है। ध्यान रखें कि जूस की बजाय सीधे दाने खाना बेहतर होता है, क्योंकि इसमें फाइबर भरपूर मात्रा में मौजूद रहता है।