वैवाहिक विज्ञापनों के जरिए बिछाता था जाल, महिलाओं का भरोसा जीतकर करोड़ों ऐंठने वाला आरोपी नोएडा से गिरफ्तार

नई दिल्ली । वैवाहिक वेबसाइटों और अखबारों में प्रकाशित विवाह संबंधी विज्ञापनों का दुरुपयोग कर महिलाओं को ठगी का शिकार बनाने वाले एक कथित महाठग को महाराष्ट्र पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोपी पर आरोप है कि उसने वर्षों तक अलग-अलग फर्जी पहचान अपनाकर 25 से अधिक महिलाओं को अपने जाल में फंसाया और उनसे करोड़ों रुपये की ठगी की। पुलिस के अनुसार आरोपी विशेष रूप से ऐसी महिलाओं को निशाना बनाता था जो भावनात्मक, सामाजिक या पारिवारिक रूप से संवेदनशील परिस्थितियों में थीं। जांच एजेंसियों के मुताबिक आरोपी उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में फर्जी पहचान के साथ रह रहा था। महाराष्ट्र की अपराध शाखा ने लंबे समय तक तकनीकी और स्थानीय स्तर पर जांच करने के बाद उसे गिरफ्तार किया। पुलिस का मानना है कि आरोपी ने सुनियोजित तरीके से अपनी पहचान छिपाकर कई राज्यों में महिलाओं से संपर्क स्थापित किया और विवाह का भरोसा देकर आर्थिक लाभ उठाया। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी विभिन्न नामों और पहचान पत्रों का इस्तेमाल करता था। वह खुद को कभी व्यवसायी, कभी सरकारी कर्मचारी तो कभी संपन्न परिवार का सदस्य बताकर महिलाओं और उनके परिजनों का विश्वास जीतता था। इसके बाद विवाह या विवाह की तैयारी के नाम पर बड़ी रकम, आभूषण और अन्य कीमती सामान हासिल कर लेता था। पुलिस अधिकारियों के अनुसार आरोपी की कार्यप्रणाली बेहद योजनाबद्ध थी। वह पहले वैवाहिक विज्ञापनों और अन्य माध्यमों से महिलाओं से संपर्क करता, फिर विश्वास का रिश्ता बनाता और कुछ मामलों में विवाह तक कर लेता था। इसके बाद वह संपत्ति, नकदी या निवेश के नाम पर धन प्राप्त करता और अवसर मिलते ही फरार हो जाता था। मामले की जांच के दौरान एक महिला परिवार की शिकायत विशेष रूप से सामने आई, जिसमें आरोप लगाया गया कि आरोपी ने विवाह के बाद परिवार को संपत्ति बेचने के लिए प्रेरित किया और नया घर बनवाने का आश्वासन देकर बड़ी धनराशि हासिल कर ली। इसके अलावा कीमती सोने के आभूषण लेकर भी वह गायब हो गया। इस घटना के बाद मामला पुलिस तक पहुंचा और विस्तृत जांच शुरू हुई। अधिकारियों का कहना है कि आरोपी ने जिन महिलाओं को निशाना बनाया उनमें तलाकशुदा, दिव्यांग, अकेली रहने वाली और अन्य सामाजिक रूप से कमजोर परिस्थितियों का सामना कर रही महिलाएं भी शामिल थीं। जांच एजेंसियों का मानना है कि आरोपी ऐसे लोगों को चुनता था जिनके साथ भावनात्मक विश्वास बनाना अपेक्षाकृत आसान हो। पुलिस अब आरोपी के बैंक खातों, वित्तीय लेन-देन और संपत्तियों की जांच कर रही है। यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि ठगी से प्राप्त धनराशि का उपयोग कहां और किस प्रकार किया गया। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि क्या इस पूरे नेटवर्क में अन्य लोग भी शामिल थे या आरोपी अकेले ही इस गतिविधि को संचालित कर रहा था। जांच एजेंसियों को आशंका है कि पीड़ितों की संख्या अभी और बढ़ सकती है। इसलिए उन महिलाओं से भी संपर्क करने की कोशिश की जा रही है जो आरोपी के संपर्क में रही हों लेकिन अब तक सामने नहीं आई हैं। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि विवाह संबंधी प्रस्तावों को स्वीकार करने से पहले संबंधित व्यक्ति की पहचान, पारिवारिक पृष्ठभूमि और आर्थिक जानकारी का सावधानीपूर्वक सत्यापन अवश्य करें। यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि डिजिटल और पारंपरिक वैवाहिक माध्यमों का दुरुपयोग कर अपराधी किस तरह लोगों की भावनाओं और विश्वास का फायदा उठा सकते हैं। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और आरोपी से पूछताछ के आधार पर आगे और खुलासे होने की संभावना है।
रॉयल ब्लू साड़ी में छाईं Madhuri Dixit, 'मां बहन' की सफलता के बीच फिर दिखा धक-धक गर्ल का शाही अंदाज

नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा की सबसे लोकप्रिय और सदाबहार अभिनेत्रियों में शुमार Madhuri Dixit आज भी अपनी खूबसूरती, अभिनय और स्टाइल से करोड़ों प्रशंसकों के दिलों पर राज करती हैं। तीन दशक से अधिक लंबे करियर के बाद भी उनका आकर्षण जरा भी कम नहीं हुआ है। यही वजह है कि जब भी उनका कोई नया लुक सामने आता है, वह सोशल मीडिया और मनोरंजन जगत में चर्चा का विषय बन जाता है। हाल ही में सामने आई तस्वीरों में माधुरी दीक्षित रॉयल ब्लू रंग की खूबसूरत कढ़ाईदार साड़ी में नजर आ रही हैं। उनका यह एथनिक लुक भारतीय पारंपरिक फैशन की खूबसूरती को बेहद शानदार तरीके से प्रस्तुत करता है। साड़ी पर की गई बारीक कारीगरी, आकर्षक बॉर्डर और संतुलित रंग संयोजन पूरे लुक को शाही स्पर्श दे रहा है। इसके साथ पहने गए पारंपरिक झुमके, कंगन और सलीकेदार हेयरस्टाइल उनकी खूबसूरती में चार चांद लगा रहे हैं। माधुरी की यह तस्वीरें इस बात का प्रमाण हैं कि क्लासिक फैशन कभी पुराना नहीं होता। हल्के मेकअप और उनकी सदाबहार मुस्कान ने पूरे लुक को और भी प्रभावशाली बना दिया है। फैशन विशेषज्ञों का मानना है कि उनका यह अंदाज शादी, पारिवारिक समारोहों और त्योहारों के लिए बेहतरीन प्रेरणा साबित हो सकता है। अभिनय की बात करें तो माधुरी दीक्षित ने अपने करियर में कई यादगार फिल्मों के जरिए दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई है। Tezaab, Dil, Beta, Hum Aapke Hain Koun..!, Dil To Pagal Hai और Devdas जैसी फिल्मों ने उन्हें बॉलीवुड की सबसे सफल अभिनेत्रियों की सूची में शामिल किया। समय के साथ उन्होंने खुद को लगातार नए दौर के अनुसार ढाला है। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी उन्होंने अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। The Fame Game और Maja Ma जैसे प्रोजेक्ट्स में उनके अभिनय को काफी सराहना मिली। हाल के वर्षों में वह नई पीढ़ी के दर्शकों के बीच भी उतनी ही लोकप्रिय बनी हुई हैं जितनी अपने करियर के शुरुआती दौर में थीं। इन दिनों उनकी चर्चित फिल्म ‘मां बहन’ को लेकर भी खूब चर्चा हो रही है। दर्शकों और समीक्षकों ने उनके अभिनय की सराहना की है। फिल्म में उनके दमदार किरदार और प्रभावशाली स्क्रीन प्रेजेंस ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वह आज भी इंडस्ट्री की सबसे प्रतिभाशाली अभिनेत्रियों में शामिल हैं। फैशन हो, अभिनय हो या फिर डिजिटल मनोरंजन की दुनिया, माधुरी दीक्षित हर क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाए हुए हैं। उनका यह नया साड़ी लुक एक बार फिर यह साबित करता है कि वह केवल बॉलीवुड की धक-धक गर्ल ही नहीं, बल्कि भारतीय फैशन और ग्लैमर जगत की सबसे प्रभावशाली स्टाइल आइकन्स में से एक हैं।
पार्टी विवाद के बीच कल्याण बनर्जी का यू-टर्न, बोले- ‘बेटे से गलती हो जाए तो उसे माफ करना पिता का कर्तव्य’

नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ All India Trinamool Congress में हाल के दिनों में उभरे आंतरिक मतभेदों के बीच वरिष्ठ सांसद Kalyan Banerjee के बदले हुए तेवर राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गए हैं। कुछ समय पहले तक पार्टी महासचिव Abhishek Banerjee पर तीखे आरोप लगाने वाले कल्याण बनर्जी अब उनके प्रति नरम रुख अपनाते दिखाई दिए हैं। उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा कि अभिषेक उनके बेटे जैसे हैं और यदि बेटे से कोई गलती हो जाए तो उसे माफ करना पिता का दायित्व होता है। कल्याण बनर्जी का यह बयान ऐसे समय आया है जब पार्टी के भीतर नेतृत्व और संगठनात्मक मुद्दों को लेकर चर्चाएं तेज हैं। हाल के दिनों में उन्होंने अभिषेक बनर्जी की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया था कि वरिष्ठ नेताओं को अपेक्षित सम्मान नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने यह भी संकेत दिया था कि पार्टी के भीतर अनुभव और नई पीढ़ी के नेतृत्व के बीच संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता है। हालांकि अब उनके बयान का स्वर पहले की तुलना में काफी अलग नजर आया। मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि राजनीतिक विचारों में मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन इसका अर्थ व्यक्तिगत रिश्तों में कटुता नहीं होता। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके और अभिषेक के बीच कोई व्यक्तिगत विवाद नहीं है तथा पार्टी हित सर्वोपरि है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान पार्टी के भीतर बढ़ती अटकलों को शांत करने की कोशिश के रूप में भी देखा जा सकता है। हालिया विवादों के बाद टीएमसी के भीतर विभिन्न नेताओं के बीच मतभेदों को लेकर लगातार चर्चाएं हो रही थीं। ऐसे में कल्याण बनर्जी का सार्वजनिक रूप से नरम रुख अपनाना संगठनात्मक एकजुटता का संदेश माना जा रहा है। इस दौरान उन्होंने पार्टी सांसद Shatabdi Roy को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में कुछ राजनीतिक टिप्पणियां कीं, जो राज्य की राजनीति में चर्चा का विषय बनी हुई हैं। इसके अलावा लोकसभा में बैठने की व्यवस्था को लेकर अलग मांग उठाने वाले कुछ सांसदों पर भी उन्होंने सवाल खड़े किए और उनके राजनीतिक उद्देश्यों पर संदेह व्यक्त किया। कल्याण बनर्जी ने यह भी कहा कि पार्टी के कुछ नेताओं द्वारा उठाए जा रहे मुद्दों को जरूरत से ज्यादा महत्व नहीं दिया जाना चाहिए। उनका मानना है कि संगठन के भीतर मतभेदों को पार्टी मंच पर सुलझाया जा सकता है और सार्वजनिक विवादों से बचना चाहिए। उन्होंने संकेत दिया कि पार्टी नेतृत्व इन विषयों पर उचित समय पर निर्णय लेने में सक्षम है। इस बीच राज्य की राजनीति में टीएमसी के भविष्य और संगठनात्मक स्थिति को लेकर भी चर्चा जारी है। हाल के राजनीतिक घटनाक्रमों और कुछ नेताओं के इस्तीफों के बाद पार्टी के भीतर असंतोष की खबरें सामने आई थीं। हालांकि पार्टी नेतृत्व लगातार यह संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि संगठन एकजुट है और आगामी राजनीतिक चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार है। कल्याण बनर्जी ने पार्टी के किसी अन्य दल में विलय की अटकलों को भी पूरी तरह खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि संगठन स्वतंत्र रूप से अपनी राजनीतिक दिशा तय करने में सक्षम है और इस तरह की चर्चाओं का वास्तविकता से कोई संबंध नहीं है। उनके इस बयान को पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए आश्वस्त करने वाले संदेश के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों के अनुसार आने वाले समय में टीएमसी के भीतर नेतृत्व और संगठनात्मक मुद्दों पर स्थिति और स्पष्ट हो सकती है। फिलहाल कल्याण बनर्जी के बदले हुए रुख ने पार्टी के अंदर चल रही चर्चाओं को नया मोड़ दे दिया है।
भारतीय निशानेबाजी को बड़ा झटका: दिग्गज शूटर और कोच Jaspal Rana के निधन पर खेल जगत शोकाकुल

नई दिल्ली । भारतीय खेल जगत ने एक ऐसे सितारे को खो दिया है, जिसने देश में निशानेबाजी को नई पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाई। दिग्गज शूटर और कोच Jaspal Rana के असामयिक निधन से पूरे खेल जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। 49 वर्ष की उम्र में उनका निधन भारतीय निशानेबाजी के लिए एक ऐसी क्षति माना जा रहा है, जिसकी भरपाई निकट भविष्य में संभव नहीं दिखती। शुक्रवार को दिल्ली में उनके निधन के बाद उनका पार्थिव शरीर देहरादून स्थित आवास ले जाया गया, जहां उन्हें राजकीय सम्मान के साथ श्रद्धांजलि दी गई। शनिवार को उनका अंतिम संस्कार Manikarnika Ghat में किया जाना है। परिवारजन उनके पार्थिव शरीर को निजी विमान से वाराणसी लेकर पहुंचे, जहां एयरपोर्ट पर बड़ी संख्या में खेल प्रेमियों, खिलाड़ियों और शुभचिंतकों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद उनकी अंतिम यात्रा मणिकर्णिका घाट के लिए रवाना हुई। वाराणसी एयरपोर्ट पर मौजूद उनके साथियों और पूर्व खिलाड़ियों ने भावुक होकर उन्हें याद किया। पूर्व खिलाड़ी वीरेंद्र उपाध्याय ने कहा कि जसपाल राणा का जाना भारतीय खेल जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने कहा कि इतनी कम उम्र में उनका निधन बेहद दुखद है और खेल जगत ने एक महान प्रतिभा को खो दिया है। अंतरराष्ट्रीय कोच रोहित जैन ने उन्हें भारतीय पिस्टल शूटिंग का अग्रदूत बताते हुए कहा कि उन्होंने देश में निशानेबाजी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। उनके अनुसार, जब उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड एक राज्य हुआ करते थे, तब जसपाल राणा ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतकर पूरे देश का ध्यान इस खेल की ओर आकर्षित किया था। उन्होंने कहा कि मौजूदा दौर में उनके जैसा समर्पित और सफल कोच मिलना बेहद कठिन है। पूर्व राष्ट्रीय शूटर रामेंद्र शर्मा ने भी गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने 1987 से जसपाल राणा को खेलते देखा था। उनके मुताबिक, राणा देश के पहले ऐसे खिलाड़ी थे जिन्होंने जूनियर विश्व स्तर पर बड़ी सफलता हासिल कर भारतीय निशानेबाजी को नई दिशा दी। उन्होंने कहा कि जसपाल राणा की उपलब्धियों ने देश के हजारों युवा खिलाड़ियों को प्रेरित किया और शूटिंग खेल को लोकप्रिय बनाने में उनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही। पूर्व राइफल शूटर पंकज श्रीवास्तव ने कहा कि जसपाल राणा ने अपने प्रदर्शन से यह साबित किया कि भारतीय खिलाड़ी विदेशों में भी विश्वस्तरीय सफलता हासिल कर सकते हैं। उन्होंने कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया और विश्व रिकॉर्ड भी अपने नाम किया। श्रीवास्तव ने बताया कि कम उम्र में ही उन्हें Arjuna Award से सम्मानित किया गया था। बाद में उन्हें Padma Shri सहित कई प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा गया। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि खिलाड़ी, मार्गदर्शक और कोच के रूप में जसपाल राणा का योगदान भारतीय निशानेबाजी के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज रहेगा। उनकी उपलब्धियां आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेंगी और भारतीय खेल जगत हमेशा उनके योगदान को याद रखेगा।
तेजस शिरसे ने रचा इतिहास, 110 मीटर हर्डल्स में बनाया नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड; कॉमनवेल्थ गेम्स का टिकट लगभग पक्का

नई दिल्ली । भारतीय एथलेटिक्स को शनिवार को एक बड़ी उपलब्धि हासिल हुई, जब युवा हर्डलर Tejas Shirse ने पुरुषों की 110 मीटर हर्डल्स स्पर्धा में नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड कायम कर इतिहास रच दिया। लुधियाना में आयोजित Indian Athletics Series 9 के दौरान तेजस ने 13.27 सेकंड का समय निकालते हुए न केवल स्वर्ण पदक अपने नाम किया, बल्कि अपने ही पुराने राष्ट्रीय रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ दिया। 24 वर्षीय तेजस शिरसे ने इससे पहले 2024 में 13.41 सेकंड का राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया था। अब उन्होंने अपने प्रदर्शन में उल्लेखनीय सुधार करते हुए 13.27 सेकंड का समय दर्ज किया है। यह उपलब्धि भारतीय ट्रैक एवं फील्ड इतिहास के सर्वश्रेष्ठ स्प्रिंट-हर्डल प्रदर्शनों में गिनी जा रही है। खास बात यह है कि उनका यह प्रदर्शन Athletics Federation of India द्वारा निर्धारित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 क्वालिफिकेशन मार्क 13.39 सेकंड से भी बेहतर रहा। प्रतियोगिता के दौरान तेजस ने शुरुआत से ही अपना दबदबा बनाए रखा। ‘बी’ फाइनल में उन्होंने ब्लॉक्स से शानदार शुरुआत की और शुरुआती चरण में बढ़त हासिल कर ली। अंतिम हर्डल से हल्का संपर्क होने के बावजूद उन्होंने अपनी गति कम नहीं होने दी और शानदार अंदाज में फिनिश लाइन पार की। उनका समय देखते ही स्टेडियम में मौजूद दर्शकों और अधिकारियों ने उनकी उपलब्धि का स्वागत किया। इस रेस में Krishik M 13.55 सेकंड के समय के साथ दूसरे स्थान पर रहे। तेजस का यह प्रदर्शन हाल के महीनों में उनकी लगातार प्रगति को भी दर्शाता है। पिछले महीने रांची में आयोजित Federation Cup Athletics Championships में उन्होंने 13.50 सेकंड का समय निकालकर स्वर्ण पदक जीता था। अब 13.27 सेकंड का समय उन्हें वर्ष 2026 की महाद्वीपीय रैंकिंग में शीर्ष खिलाड़ियों के बीच ला खड़ा करता है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार उनका प्रदर्शन इस समय कॉन्टिनेंटल सूची में छठे स्थान पर है। भारतीय एथलेटिक्स के लिहाज से यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि यदि तेजस का चयन कॉमनवेल्थ गेम्स टीम में होता है तो वह 2014 के बाद इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में भाग लेने वाले पहले भारतीय पुरुष हर्डलर बन सकते हैं। इससे पहले Siddhanth Thingalaya ने भारत का प्रतिनिधित्व किया था। दूसरी ओर, प्रतियोगिता में कुछ खिलाड़ियों के लिए निराशाजनक नतीजे भी सामने आए। पुरुषों की 800 मीटर दौड़ में Mohammed Afsal अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर सके। उन्होंने 1 मिनट 47 सेकंड का समय निकाला, जो कॉमनवेल्थ गेम्स क्वालिफिकेशन मानक 1 मिनट 45 सेकंड से पीछे रहा। ऐसे में उनके चयन की संभावनाओं को बड़ा झटका लग सकता है। जैवलिन थ्रो स्पर्धा में भी खिलाड़ियों के बीच कॉमनवेल्थ गेम्स टीम में जगह बनाने की होड़ देखने को मिली। Sachin Yadav चोट के कारण प्रतियोगिता से बाहर रहे, जबकि दो बार के ओलंपिक पदक विजेता Neeraj Chopra अभी पूरी तरह फिटनेस हासिल करने की प्रक्रिया में हैं। ऐसे में Rohit Yadav, Shivam Lohakare और Kishore Kumar Jena जैसे खिलाड़ियों के लिए राष्ट्रीय टीम में जगह बनाने का अवसर खुला हुआ है। तेजस शिरसे की इस उपलब्धि ने भारतीय एथलेटिक्स को नई ऊर्जा दी है और आगामी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए उम्मीदें भी बढ़ा दी हैं।
25 साल बाद भी ताजा हैं ‘दिल चाहता है’ की यादें, सैफ अली खान ने साझा किए शूटिंग के दिलचस्प किस्से

नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा की सबसे प्रभावशाली और यादगार फिल्मों में शामिल Dil Chahta Hai अपनी रिलीज के 25वें वर्ष में पहुंच चुकी है। दोस्ती, रिश्तों और युवा सोच को नए अंदाज में पेश करने वाली इस फिल्म ने भारतीय सिनेमा में एक अलग पहचान बनाई थी। फिल्म के इस विशेष पड़ाव पर अभिनेता Saif Ali Khan ने शूटिंग के दिनों को याद करते हुए कई दिलचस्प अनुभव साझा किए हैं। साथ ही उन्होंने फिल्म के निर्देशक Farhan Akhtar की भी खुलकर सराहना की है। सैफ अली खान ने कहा कि ‘दिल चाहता है’ की शूटिंग उनके करियर के सबसे सुखद और यादगार अनुभवों में से एक रही। उनके अनुसार फिल्म की शूटिंग के दौरान पूरा माहौल बेहद सकारात्मक और उत्साहपूर्ण था। युवा कलाकारों की टीम, खूबसूरत लोकेशन और एक नई तरह की कहानी ने इस प्रोजेक्ट को सभी के लिए खास बना दिया था। अभिनेता ने विशेष रूप से गोवा में हुई शूटिंग को याद करते हुए बताया कि उस दौर में वे सभी कलाकार काफी युवा थे और काम के साथ-साथ जीवन का भरपूर आनंद भी लेते थे। समुद्र किनारे शूटिंग, दोस्तों के साथ समय बिताना और विभिन्न स्थानों पर घूमना उनके लिए अविस्मरणीय अनुभव बन गया। उन्होंने कहा कि फिल्म की पूरी टीम के बीच गहरी दोस्ती और सहजता थी, जिसका असर पर्दे पर भी साफ दिखाई दिया। सैफ के अनुसार फिल्म की सफलता के पीछे निर्देशक फरहान अख्तर की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उन्होंने कहा कि सेट पर फरहान का आत्मविश्वास और काम करने का तरीका बेहद प्रभावशाली था। पहली बार निर्देशन कर रहे होने के बावजूद उनके काम में कहीं भी असमंजस या दबाव दिखाई नहीं देता था। सैफ ने कहा कि उन्हें उस समय ही महसूस हो गया था कि फरहान निर्देशन की कला को बहुत अच्छी तरह समझते हैं। उन्होंने बताया कि शूटिंग के दौरान कलाकारों को अपने किरदारों और संवादों पर ध्यान देने की पूरी स्वतंत्रता दी गई थी। निर्देशक ने पूरे प्रोजेक्ट को इतनी सहजता से संभाला कि कलाकारों को किसी अतिरिक्त दबाव का सामना नहीं करना पड़ा। यही वजह थी कि फिल्म की शूटिंग एक काम की बजाय यादगार अनुभव जैसी महसूस होती थी। वर्ष 2001 में रिलीज हुई ‘दिल चाहता है’ ने उस दौर के युवाओं की सोच, दोस्ती और रिश्तों को आधुनिक दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया था। फिल्म में Aamir Khan, Saif Ali Khan और Akshaye Khanna की तिकड़ी को दर्शकों ने खूब पसंद किया था। इसके अलावा Preity Zinta, Dimple Kapadia और Sonali Kulkarni ने भी अपनी भूमिकाओं से फिल्म को मजबूती दी थी। फिल्म को केवल व्यावसायिक सफलता ही नहीं मिली, बल्कि इसने हिंदी सिनेमा में दोस्ती और युवा जीवन पर आधारित फिल्मों की प्रस्तुति का तरीका भी बदल दिया। इसके संवाद, संगीत, पात्र और कहानी आज भी दर्शकों के बीच लोकप्रिय हैं। यही कारण है कि रिलीज के ढाई दशक बाद भी ‘दिल चाहता है’ को आधुनिक हिंदी सिनेमा की सबसे महत्वपूर्ण फिल्मों में गिना जाता है। आज जब फिल्म अपने 25 वर्ष पूरे करने की ओर बढ़ रही है, तब कलाकारों की यादें और दर्शकों का प्रेम यह साबित करता है कि कुछ फिल्में समय के साथ पुरानी नहीं होतीं, बल्कि पीढ़ियों तक लोगों के दिलों में अपनी जगह बनाए रखती हैं।
बॉक्स ऑफिस की चिंता आज भी बरकरार, ‘धमाल 4’ के ट्रेलर लॉन्च पर अजय देवगन ने बताया क्यों होती है घबराहट

नई दिल्ली । बॉलीवुड अभिनेता Ajay Devgn इन दिनों अपनी बहुप्रतीक्षित फिल्म Dhamaal 4 को लेकर चर्चा में हैं। लोकप्रिय कॉमेडी फ्रेंचाइजी की चौथी किस्त के ट्रेलर लॉन्च कार्यक्रम में अभिनेता ने अपनी फिल्मों को लेकर खुलकर बात की और यह स्वीकार किया कि लंबे अनुभव के बावजूद हर नई फिल्म की रिलीज से पहले उन्हें घबराहट महसूस होती है। उन्होंने कहा कि किसी भी परियोजना में महीनों की मेहनत और समर्पण लगा होता है, इसलिए रिलीज के समय थोड़ा दबाव और उत्सुकता स्वाभाविक होती है। ट्रेलर लॉन्च के दौरान मीडिया से बातचीत में अजय देवगन ने बताया कि किसी फिल्म की सफलता केवल कलाकारों के लिए नहीं, बल्कि उससे जुड़े पूरे दल के लिए महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने कहा कि जब किसी प्रोजेक्ट पर लंबे समय तक मेहनत की जाती है तो यह उम्मीद भी रहती है कि दर्शक उसे पसंद करें। यही कारण है कि रिलीज के करीब आने पर उत्साह के साथ-साथ चिंता भी बनी रहती है। अभिनेता ने यह भी स्पष्ट किया कि वर्षों के अनुभव के बाद भी यह भावना समाप्त नहीं होती। उनके अनुसार हर फिल्म एक नई चुनौती होती है और हर बार दर्शकों की अपेक्षाओं पर खरा उतरने की जिम्मेदारी बनी रहती है। उन्होंने कहा कि फिल्म निर्माण की प्रक्रिया में शामिल सभी लोग चाहते हैं कि उनका काम दर्शकों तक पहुंचे और उन्हें पसंद आए। इसी वजह से रिलीज के समय स्वाभाविक रूप से मानसिक दबाव महसूस होता है। बातचीत के दौरान अजय देवगन से बॉलीवुड में सीक्वल फिल्मों की लगातार बढ़ती लोकप्रियता को लेकर भी सवाल किया गया। इस पर उन्होंने कहा कि किसी भी सीक्वल की सफलता का सबसे बड़ा आधार उसके किरदार होते हैं। जब दर्शक किसी फिल्म के पात्रों को पसंद करने लगते हैं और उनसे भावनात्मक रूप से जुड़ जाते हैं, तब कहानी को आगे बढ़ाने का अवसर मिलता है। उन्होंने कहा कि सफल फ्रेंचाइजी की सबसे बड़ी ताकत उसके यादगार किरदार होते हैं। अजय देवगन ने उदाहरण देते हुए बताया कि दर्शक कई लोकप्रिय फिल्मों के पात्रों को उनके नाम से पहचानते हैं। यही जुड़ाव समय के साथ सीक्वल फिल्मों की मांग को बढ़ाता है। उनका मानना है कि यदि दर्शकों को पात्रों और उनकी दुनिया में रुचि बनी रहती है, तो अगली कड़ी के प्रति उत्सुकता स्वतः पैदा हो जाती है। ‘धमाल’ फ्रेंचाइजी का सफर वर्ष 2007 में शुरू हुआ था और पहली फिल्म को दर्शकों ने भरपूर प्यार दिया था। इसके बाद आई दूसरी और तीसरी फिल्मों ने भी बॉक्स ऑफिस पर अच्छी सफलता हासिल की। तीसरे भाग में अजय देवगन की एंट्री हुई थी, जिसने फ्रेंचाइजी को एक नया आयाम दिया। अब चौथे भाग को लेकर भी दर्शकों के बीच काफी उत्साह देखा जा रहा है। फिल्म उद्योग के जानकारों का मानना है कि कॉमेडी और मनोरंजन से भरपूर यह फ्रेंचाइजी भारतीय दर्शकों के बीच मजबूत पहचान बना चुकी है। यही कारण है कि ‘धमाल 4’ को लेकर भी सकारात्मक माहौल बना हुआ है। ट्रेलर को मिली प्रतिक्रिया ने फिल्म के प्रति उत्सुकता को और बढ़ा दिया है। अब दर्शकों की निगाहें फिल्म की रिलीज पर टिकी हैं। 10 जुलाई को सिनेमाघरों में दस्तक देने जा रही ‘धमाल 4’ से निर्माताओं और कलाकारों को बड़ी उम्मीदें हैं। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि लोकप्रिय फ्रेंचाइजी का यह नया अध्याय बॉक्स ऑफिस पर कैसा प्रदर्शन करता है।
महिला टी20 विश्व कप में भारत-पाकिस्तान महामुकाबला आज, हेड टू हेड रिकॉर्ड में टीम इंडिया का दबदबा

मध्य प्रदेश । आईसीसी महिला टी20 विश्व कप 2026 में क्रिकेट प्रशंसकों की निगाहें रविवार को होने वाले भारत और पाकिस्तान के बहुप्रतीक्षित मुकाबले पर टिकी हैं। पारंपरिक प्रतिद्वंद्वियों के बीच यह मुकाबला बर्मिंघम के प्रतिष्ठित Edgbaston में खेला जाएगा। दोनों देशों के बीच होने वाला कोई भी क्रिकेट मैच विशेष महत्व रखता है, लेकिन विश्व कप के मंच पर इसकी रोमांचकता और भी बढ़ जाती है। इतिहास पर नजर डालें तो टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भारतीय महिला टीम का पाकिस्तान के खिलाफ शानदार रिकॉर्ड रहा है। दोनों टीमों के बीच अब तक 16 टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेले गए हैं, जिनमें से 13 मैचों में जीत India Women’s Cricket Team के खाते में गई है। वहीं, पाकिस्तान की टीम केवल तीन मुकाबलों में ही जीत दर्ज कर सकी है। यही कारण है कि आगामी मुकाबले में भी भारतीय टीम को मजबूत दावेदार माना जा रहा है। दोनों टीमों की पिछली भिड़ंत 2024 महिला टी20 विश्व कप में हुई थी, जहां भारतीय टीम ने पाकिस्तान को छह विकेट से हराया था। ऐसे में भारतीय खिलाड़ी मनोवैज्ञानिक बढ़त के साथ मैदान पर उतरेंगी। हालांकि विश्व कप जैसे बड़े टूर्नामेंट में किसी भी टीम को हल्के में नहीं लिया जा सकता और पाकिस्तान भी भारत को कड़ी चुनौती देने की तैयारी में है। भारतीय टीम की बल्लेबाजी की शुरुआत एक बार फिर Smriti Mandhana और Shafali Verma के कंधों पर होगी। दोनों बल्लेबाज इंग्लैंड की परिस्थितियों में पहले भी प्रभावशाली प्रदर्शन कर चुकी हैं। पाकिस्तान के खिलाफ स्मृति मंधाना का रिकॉर्ड भी शानदार रहा है। उन्होंने 10 पारियों में 239 रन बनाए हैं। दूसरी ओर, शेफाली वर्मा ने सीमित अवसरों में अपनी आक्रामक बल्लेबाजी से प्रभावित किया है और पाकिस्तान के खिलाफ चार मैचों में 121 रन बनाए हैं। मध्यक्रम में भारतीय कप्तान Harmanpreet Kaur की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रहने वाली है। टीम प्रबंधन को उम्मीद होगी कि कप्तान बड़े मुकाबले में अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए टीम को मजबूती प्रदान करेंगी। वहीं, Jemimah Rodrigues के ऊपर मध्यक्रम को संभालने और पारी को गति देने की जिम्मेदारी होगी। विकेटकीपर बल्लेबाज Richa Ghosh से भी फिनिशर की भूमिका में एक और तेजतर्रार पारी की उम्मीद की जा रही है। गेंदबाजी विभाग में भारत की नई गेंद की जिम्मेदारी Renuka Singh और Kranti Goud संभाल सकती हैं। इसके अलावा युवा तेज गेंदबाज Nandini Sharma को मौका मिलता है या नहीं, इस पर भी नजर रहेगी। स्पिन विभाग में Radha Yadav, Shreyanka Patil और Sree Charani भारतीय टीम की बड़ी ताकत साबित हो सकती हैं। दूसरी ओर पाकिस्तान की कप्तान Fatima Sana शानदार फॉर्म में हैं। हाल ही में उन्होंने जिम्बाब्वे के खिलाफ तेज अर्धशतक लगाकर अपनी बल्लेबाजी क्षमता का प्रदर्शन किया था। गेंदबाजी में अनुभवी Diana Baig भारतीय बल्लेबाजों के लिए चुनौती पेश कर सकती हैं। कुल मिलाकर, आंकड़े और हालिया प्रदर्शन भारत के पक्ष में दिखाई देते हैं, लेकिन भारत-पाकिस्तान मुकाबलों में अक्सर दबाव और परिस्थितियां परिणाम को प्रभावित करती हैं। ऐसे में क्रिकेट प्रशंसकों को एक रोमांचक और यादगार मुकाबले की उम्मीद रहेगी।
मां थीं बॉक्सिंग के खिलाफ, समाज की बंदिशों को तोड़कर निकहत जरीन बनीं दो बार की विश्व चैंपियन

नई दिल्ली । भारतीय महिला मुक्केबाजी की चमकती सितारा Nikhat Zareen आज किसी परिचय की मोहताज नहीं हैं। दो बार की विश्व चैंपियन बन चुकी निकहत ने न केवल रिंग में अपने मुक्कों का दम दिखाया, बल्कि उन सामाजिक बाधाओं को भी तोड़ा, जो अक्सर लड़कियों के सपनों के रास्ते में दीवार बनकर खड़ी हो जाती हैं। उनकी सफलता की कहानी उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों और सामाजिक दबावों के बावजूद अपने सपनों को पूरा करना चाहते हैं। 14 जून 1996 को तेलंगाना के Nizamabad में जन्मीं निकहत जरीन का बचपन सामान्य परिवार में बीता। उनके परिवार में खेलों का माहौल जरूर था, लेकिन बॉक्सिंग को लेकर सभी की सोच एक जैसी नहीं थी। निकहत के चाचा बॉक्सिंग कोच थे और वे उनके भाइयों को प्रशिक्षण देते थे। यहीं से निकहत की रुचि भी इस खेल की ओर बढ़ी। हालांकि, जब उन्होंने खुद बॉक्सर बनने की इच्छा जताई तो परिवार के कई सदस्य इसके पक्ष में नहीं थे। उनकी मां भी नहीं चाहती थीं कि बेटी मुक्केबाजी जैसे कठिन और जोखिम भरे खेल में करियर बनाए। केवल उनके पिता ने उनका साथ दिया और उनके सपनों को पंख देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। महज 13 वर्ष की उम्र में निकहत ने तय कर लिया था कि उन्हें बॉक्सिंग में ही अपना भविष्य बनाना है। पढ़ाई और खेल के बीच संतुलन बनाना आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने कठिन परिश्रम और अनुशासन को अपना हथियार बनाया। शुरुआती दौर में उन्होंने अपने चाचा से प्रशिक्षण लिया और धीरे-धीरे स्थानीय स्तर की प्रतियोगिताओं में अपनी पहचान बनानी शुरू कर दी। उनकी मेहनत का पहला बड़ा परिणाम 2011 में देखने को मिला, जब उन्होंने महिला जूनियर और यूथ वर्ल्ड चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन किया। इसके बाद 2014 में यूथ वर्ल्ड चैंपियनशिप में रजत पदक हासिल कर उन्होंने अपने प्रतिभाशाली खिलाड़ी होने का प्रमाण दिया। हालांकि सफलता की राह आसान नहीं थी। करियर के महत्वपूर्ण दौर में कंधे की गंभीर चोट ने उन्हें बड़ा झटका दिया। दाहिने कंधे की हड्डी टूटने के कारण उन्हें सर्जरी करानी पड़ी और लगभग एक वर्ष तक रिंग से दूर रहना पड़ा। कई खिलाड़ियों का करियर ऐसी परिस्थितियों में प्रभावित हो जाता है, लेकिन निकहत ने हार नहीं मानी। कठिन पुनर्वास प्रक्रिया के बाद उन्होंने शानदार वापसी की और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में फिर से पदक जीतना शुरू कर दिया। साल 2021 में बैंकॉक में आयोजित एशियाई बॉक्सिंग चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतकर उन्होंने अपनी वापसी का दमदार संकेत दिया। इसके बाद 2022 उनके करियर का स्वर्णिम वर्ष साबित हुआ। तुर्किये के इस्तांबुल में आयोजित विश्व महिला मुक्केबाजी चैंपियनशिप में उन्होंने स्वर्ण पदक जीतकर पहली बार विश्व चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया। इसी वर्ष उन्होंने Commonwealth Games 2022 में भी स्वर्ण पदक जीतकर देश को गौरवान्वित किया। निकहत का विजय अभियान यहीं नहीं रुका। 2023 में उन्होंने लगातार दूसरी बार विश्व चैंपियन बनकर इतिहास रच दिया। वह भारतीय दिग्गज मुक्केबाज Mary Kom के बाद विश्व चैंपियनशिप में दो स्वर्ण पदक जीतने वाली दूसरी भारतीय महिला बॉक्सर बनीं। उनकी उपलब्धियों को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें 2022 में प्रतिष्ठित Arjuna Award से सम्मानित किया। आज निकहत जरीन केवल एक सफल खिलाड़ी नहीं, बल्कि साहस, संघर्ष और आत्मविश्वास की मिसाल बन चुकी हैं। उनकी कहानी यह साबित करती है कि अगर इरादे मजबूत हों तो कोई भी बाधा सफलता के रास्ते में स्थायी नहीं बन सकती।
अक्षय कुमार से अरशद वारसी तक, ‘वेलकम टू द जंगल’ की स्टारकास्ट की नेटवर्थ ने खींचा ध्यान; करोड़ों की संपत्ति के मालिक हैं कलाकार

नई दिल्ली । बॉलीवुड की बहुप्रतीक्षित कॉमेडी फिल्म ‘वेलकम टू द जंगल’ इन दिनों अपनी भव्य स्टारकास्ट और बड़े पैमाने पर तैयार किए गए मनोरंजन पैकेज को लेकर चर्चा में है। फिल्म में 30 से अधिक कलाकारों को शामिल किया गया है, जिनमें हिंदी सिनेमा के कई दिग्गज और लोकप्रिय चेहरे मौजूद हैं। ट्रेलर रिलीज होने के बाद दर्शकों के बीच फिल्म को लेकर उत्सुकता और बढ़ गई है। हालांकि फिल्म की कहानी और कलाकारों के किरदारों के साथ-साथ उनकी आर्थिक हैसियत भी चर्चा का विषय बनी हुई है। फिल्म का नेतृत्व अभिनेता Akshay Kumar कर रहे हैं, जो लंबे समय से हिंदी सिनेमा के सबसे सफल और व्यस्त सितारों में गिने जाते हैं। तीन दशक से अधिक समय के करियर में उन्होंने अनेक सुपरहिट फिल्मों के जरिए न केवल लोकप्रियता हासिल की है बल्कि बड़ी संपत्ति भी अर्जित की है। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार उनकी कुल संपत्ति हजारों करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच चुकी है, जिससे वे फिल्म की स्टारकास्ट में सबसे प्रभावशाली आर्थिक स्थिति रखने वाले कलाकारों में शामिल हैं। फिल्म में Suniel Shetty भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। अभिनय के साथ-साथ होटल, फिटनेस और अन्य व्यवसायों में निवेश के कारण उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई है। वर्षों से मनोरंजन उद्योग में सक्रिय रहने के कारण उनकी आर्थिक स्थिति भी मजबूत मानी जाती है। इसी तरह Raveena Tandon भी लंबे समय से फिल्म उद्योग का हिस्सा रही हैं और सफल अभिनय करियर के दम पर उल्लेखनीय संपत्ति अर्जित कर चुकी हैं। दिग्गज अभिनेता Jackie Shroff भी इस मल्टीस्टारर परियोजना का हिस्सा हैं। कई दशकों से सक्रिय जैकी श्रॉफ ने हिंदी सिनेमा में अपनी अलग पहचान बनाई है। फिल्मों, विज्ञापनों और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों के जरिए उन्होंने भी मजबूत आर्थिक आधार तैयार किया है। उनकी लोकप्रियता आज भी बरकरार है और नई पीढ़ी के दर्शकों के बीच भी उनकी अच्छी पहचान है। फिल्म में हास्य का प्रमुख आकर्षण बनने जा रहे Johnny Lever को हिंदी सिनेमा के सबसे सफल कॉमेडियनों में गिना जाता है। दशकों तक दर्शकों को हंसाने वाले जॉनी लीवर ने अपनी प्रतिभा और निरंतर सक्रियता के बल पर उल्लेखनीय संपत्ति अर्जित की है। कॉमेडी जगत में उनकी स्थिति आज भी बेहद मजबूत मानी जाती है और वे देश के सबसे समृद्ध हास्य कलाकारों में शामिल हैं। इसके अलावा Disha Patani और Jacqueline Fernandez जैसी अभिनेत्रियां भी फिल्म का हिस्सा हैं। फिल्मों, ब्रांड एंडोर्समेंट और सोशल मीडिया लोकप्रियता के कारण दोनों कलाकारों ने मनोरंजन उद्योग में मजबूत आर्थिक स्थिति बनाई है। युवा दर्शकों के बीच उनकी लोकप्रियता फिल्म को अतिरिक्त आकर्षण प्रदान करती है। फिल्म की स्टारकास्ट में Tusshar Kapoor और Arshad Warsi भी शामिल हैं। विशेष रूप से अरशद वारसी ने कॉमेडी और चरित्र भूमिकाओं के जरिए वर्षों में मजबूत पहचान बनाई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार उनकी संपत्ति भी सैकड़ों करोड़ रुपये के स्तर तक पहुंच चुकी है, जिससे वे फिल्म के सबसे संपन्न कलाकारों में गिने जाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ‘वेलकम टू द जंगल’ केवल अपनी कहानी या हास्य तत्वों के कारण ही नहीं, बल्कि एक साथ इतने बड़े और प्रभावशाली सितारों की मौजूदगी के कारण भी चर्चा में है। फिल्म में शामिल कलाकारों की सामूहिक लोकप्रियता और आर्थिक हैसियत इसे वर्ष की सबसे चर्चित मल्टीस्टारर फिल्मों में शामिल कर रही है। दर्शकों को उम्मीद है कि यह फिल्म मनोरंजन, कॉमेडी और स्टारपावर का शानदार मिश्रण साबित होगी।